नवीन समाचार, देहरादून, 10 मार्च 2026 (Commercial LPG Supply Suspended-ESMA)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में संभावित गैस संकट की आशंका के बीच सरकार ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। राज्य में फिलहाल वाणिज्यिक यानी कमर्शियल एलपीजी के सिलेंडरों (Commercial LPG-Liquid Petroliyam Gas Cylinders) की बुकिंग और आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी गई है। साथ ही केंद्र सरकार ने आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (Essential Services Maintenance Act – ESMA) लागू करते हुए घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव और संभावित आपूर्ति बाधाओं को देखते हुए उठाया गया है।
पूर्ति विभाग (Food And Civil Supplies Department) के अतिरिक्त आयुक्त पीएस पांगती (P.S. Pangti) ने बताया कि राज्य में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सीमित होने के कारण यह निर्णय लिया गया है। वर्तमान स्थिति में केवल अत्यावश्यक सेवाओं को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों (Hospitals) और शिक्षण संस्थानों (Educational Institutions) को ही कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि जरूरी सेवाएं बाधित न हों। आप यह पूर्व संबंधित समाचार भी पढ़ना चाहेंगे : पेट्रोल-डीजल कीमतों पर सरकार का संकेत: बताया कब बढ़ सकते हैं दाम, घरेलू गैस की बुकिंग के नियम भी बदले
होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर पड़ सकता है असर
कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद होने से होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। विभाग का कहना है कि जैसे ही आपूर्ति सामान्य होगी, सभी उपभोक्ताओं के लिए नियमित वितरण फिर से शुरू कर दिया जाएगा। आप यह पूर्व संबंधित समाचार भी पढ़ना चाहेंगे : गैस सिलेंडर के दाम बढ़े, घरेलू और व्यावसायिक दोनों श्रेणियों में वृद्धि, जानें कितनी हुई वृद्धि और कितनी हो गई नई दरें…
रेस्टोरेंट एसोसिएशन देहरादून (Restaurant Association Dehradun) के सदस्य रमन चड्ढा (Raman Chadha) के अनुसार वर्तमान में होटल और रेस्टोरेंट अपने उपलब्ध स्टॉक से काम चला रहे हैं। हालांकि यदि गैस की आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो व्यवसाय प्रभावित हो सकता है और कुछ प्रतिष्ठानों को वैकल्पिक साधनों जैसे इंडक्शन (Induction Cooking) का सहारा लेना पड़ सकता है।
जमाखोरी रोकने के लिए ईएसएमए लागू
केंद्र सरकार ने एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA) लागू किया है। इसके तहत गैस की आपूर्ति को नियंत्रित करते हुए घरेलू उपभोक्ताओं और जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार का कहना है कि हाल के महीनों में कुछ स्थानों पर गैस सिलेंडरों की जमाखोरी की घटनाएं सामने आई थीं, जिससे आम उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही थी।
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बुकिंग नियमों में बदलाव
घरेलू गैस उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी बुकिंग नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब उपभोक्ता एक सिलेंडर की डिलीवरी मिलने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन के बाद ही बुक कर सकेंगे।
इसके साथ ही गैस वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ओटीपी (OTP – One Time Password) और बायोमेट्रिक सत्यापन (Biometric Verification) की प्रक्रिया को सख्ती से लागू किया जा रहा है, ताकि सिलेंडरों की अवैध खरीद-फरोख्त और जमाखोरी पर रोक लगाई जा सके।
घरेलू गैस सिलेंडरों की बुकिंग में अचानक वृद्धि, स्टॉक पर बढ़ा दबाव
देहरादून, 9 मार्च। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की मांग में अचानक वृद्धि देखी जा रही है। उत्तराखंड गैस एजेंसी एसोसिएशन के अध्यक्ष चमन लाल के अनुसार देहरादून जिले में सामान्य दिनों में प्रतिदिन लगभग 18 से 20 हजार घरेलू गैस सिलेंडरों की बुकिंग होती थी, जो वर्तमान में बढ़कर 30 हजार से अधिक पहुंच गई है।
उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण लोगों में आशंका की स्थिति बन गयी है, जिसके चलते अनेक उपभोक्ता सिलेंडर खाली होने से पहले ही बुकिंग करा रहे हैं। इसके कारण गैस एजेंसियों पर आपूर्ति का दबाव बढ़ गया है और कई स्थानों पर स्टॉक की कमी की स्थिति बन रही है।
चमन लाल के अनुसार उनकी गैस एजेंसी पर पहले प्रतिदिन लगभग 300 बुकिंग आती थीं, जबकि अब यह संख्या 550 से अधिक हो गई है। बढ़ती मांग के कारण एजेंसियों के पास सिलेंडरों का पर्याप्त भंडार नहीं बच पा रहा है और लंबित बुकिंग की संख्या भी बढ़ती जा रही है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में एजेंसियों को जितनी आपूर्ति प्राप्त हो रही है, उतनी ही तुरंत उपभोक्ताओं को वितरित की जा रही है। कई एजेंसियों के पास उपलब्ध सिलेंडर दोपहर तक ही समाप्त हो जा रहे हैं, जबकि पहले प्रतिदिन 300 से 400 सिलेंडरों का भंडार उपलब्ध रहता था।
गैस एजेंसी एसोसिएशन ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे उपलब्ध आपूर्ति के अनुसार ही वितरण सुनिश्चित किया जा सके और अनावश्यक बुकिंग की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश
घरेलू रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने तेल रिफाइनरियों (Oil Refineries) को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग मुख्य रूप से घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतें पूरी करने के लिए किया जाएगा।
आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024–25 में भारत की कुल एलपीजी खपत लगभग 3.13 करोड़ टन रही, जबकि घरेलू उत्पादन लगभग 1.28 करोड़ टन था। शेष आवश्यकता पूरी करने के लिए भारत को बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।
पश्चिम एशिया के तनाव का असर
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 85–90 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा सऊदी अरब (Saudi Arabia) और अन्य पश्चिम एशियाई देशों से आता है। यह आपूर्ति मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait Of Hormuz) के समुद्री मार्ग से होती है।
हाल के समय में ईरान (Iran) और अमेरिका (United States) तथा इस्राइल (Israel) के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव
यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर राज्य के पर्यटन और आतिथ्य उद्योग (Hospitality Industry) पर भी पड़ सकता है। होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट में भोजन तैयार करने के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आवश्यकता होती है।
व्यापारियों का कहना है कि फिलहाल उपलब्ध स्टॉक के कारण स्थिति संभली हुई है, लेकिन लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने पर कारोबार प्रभावित हो सकता है और इसका असर पर्यटकों की सुविधाओं पर भी दिखाई दे सकता है।
सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की कमी न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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