क्या नैनीताल और पहाड़ों का नल का पानी पीने के लिए सुरक्षित है ? यहाँ आरओ लगाना कितना जरूरी और बोतलबंद पानी कितना सुरक्षित ?

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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 6 मार्च 2026 (Is Nainital Tap Water Safe To Drink)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) सहित पर्वतीय क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के मन में अक्सर यह प्रश्न उठता है कि क्या यहां नलों से आने वाला पानी सीधे पीने योग्य है या घरों में जल शुद्धिकरण यंत्र (Water Filter) या आरओ प्रणाली (Reverse Osmosis-RO System) लगाना आवश्यक है। विशेषज्ञों और जल संस्थान (Uttarakhand Jal Sansthan) के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में नैनीताल का पेयजल सुरक्षित और पीने योग्य माना जाता है, क्योंकि इसे आपूर्ति से पहले वैज्ञानिक शुद्धिकरण प्रक्रिया से गुजारा जाता है। हालांकि कुछ परिस्थितियों में अतिरिक्त सावधानी बरतना उपयोगी हो सकता है।

नैनीताल में पानी कैसे प्राप्त और शुद्ध किया जाता है

(Is Nainital Tap Water Safe To Drink) (Weather on Christmas-New Year)सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि नैनीताल की जल आपूर्ति सीधे नैनी झील (Naini Lake) के पानी से नहीं होती। शहर की पेयजल आपूर्ति झील किनारे लगाए गए बोरवेल (Bore Wells)और “रीवर बेड पेनीट्रेशन” (River Bed Penetration) जैसी तकनीक से प्राप्त पानी से की जाती है। यह तकनीक नदी व तालाबों के किनारे बसे अन्य स्थानों के लिए भी सर्वश्रेष्ठ होती है। 

इस प्रक्रिया में झील का पानी प्राकृतिक रूप से मिट्टी और पत्थरों से छनकर झील के पास बने कुवों में आता है, जिससे उसमें मौजूद कई अशुद्धियां स्वतः कम हो जाती हैं। इसके बाद जल संस्थान के ट्रीटमेंट प्लांट (Water Treatment Plant) में पानी का फिल्ट्रेशन (Filtration) , क्लोरीनेशन (Chlorination) और नियमित लैब परीक्षण किया जाता है। गुणवत्ता जांच के बाद ही इसे शहर में आपूर्ति की जाती है।

जल संस्थान के रसायन विशेषज्ञ योगेंद्र पाल (Yogendra Pal) के अनुसार नियमित रूप से जल के नमूनों की जांच की जाती है ताकि भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards-BIS) के पेयजल मानकों के अनुसार गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

नैनीताल के पानी के टीडीएस, पीएच और कठोरता के आँकड़े

विशेषज्ञों के अनुसार नैनीताल के पानी की गुणवत्ता सामान्यतः सुरक्षित श्रेणी में आती है।

  • कुल घुलित ठोस (Total Dissolved Solids-TDS) सामान्यतः 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम रहता है।

  • भारतीय मानक आईएस 10500:2012 (IS 10500:2012) के अनुसार 500 से 2000 मिलीग्राम प्रति लीटर तक टीडीएस स्वीकार्य माना जाता है।

  • पानी का पीएच स्तर सामान्यतः 7.2 से 7.8 के बीच पाया गया है, जबकि सुरक्षित सीमा 6.5 से 8.5 मानी जाती है।

  • पानी की कठोरता लगभग 300 से 430 मिलीग्राम प्रति लीटर रहती है, जो 200 से 600 की अनुमेय सीमा में है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह कठोरता क्षेत्र की चूना युक्त मिट्टी और चट्टानों में मौजूद कैल्शियम कार्बोनेट (Calcium Carbonate) और मैग्नीशियम कार्बोनेट (Magnesium Carbonate) के कारण होती है। पानी को उबालने पर यह तत्व अलग होकर ऊपर तैर सकते हैं या नीचे बैठ सकते हैं, जिन्हें छानकर हटाया जा सकता है।

क्या पथरी केवल पानी से होती है?

लोगों में यह धारणा भी बनी हुई है कि पहाड़ी क्षेत्रों के पानी से पथरी की समस्या अधिक होती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पथरी केवल पानी के कारण नहीं होती, बल्कि खानपान, जीवनशैली, पानी कम पीना और अन्य स्वास्थ्य कारण भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।

क्या हर घर में आरओ लगाना जरूरी है ?

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल आशंका के आधार पर आरओ लगाना आवश्यक नहीं है। सबसे पहले अपने घर के पानी की जांच जल संस्थान की प्रयोगशाला में करानी चाहिए। यदि परीक्षण में कोलीफॉर्म जीवाणु (Coliform Bacteria), लोहा (Iron), कैल्शियम (Calcium) या मैग्नीशियम (Magnesium) अत्यधिक मात्रा में पाए जाएं और साधारण उबालने या छानने से समस्या दूर न हो सके तभी आरओ लगाने पर विचार करना चाहिए।

अनावश्यक रूप से आरओ लगाने से पानी में मौजूद जरूरी खनिज भी निकल जाते हैं। ऐसे में शरीर को आवश्यक खनिज नहीं मिल पाते और लंबे समय में स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यदि आरओ लगाया भी जाए तो पानी का टीडीएस 200 से 300 के बीच रखना बेहतर माना जाता है। इससे कम होने पर पानी बैटरी में प्रयोग होने वाले बारिश के डिस्टिल्ड वाटर जैसा हो जाता है, जिसमें जरूरी खनिज नहीं रहते।

आरओ बेचने के लिए फैलाए जाते हैं भ्रम

विशेषज्ञों के अनुसार कई कंपनियां पानी की जांच दिखाने के लिए घर के पानी में तांबा या लोहे के इलेक्ट्रोड डालकर बिजली प्रवाहित करती हैं, जिससे पानी काला या भूरा दिखाई देने लगता है। इससे लोगों को भ्रम होता है कि उनका पानी गंदा है। वास्तव में यह रंग इलेक्ट्रोड के घिसने या खनिजों के जलने के कारण भी हो सकता है। इसलिए ऐसे प्रदर्शनों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय अधिकृत लैब में जांच कराना ही उचित है।

साधारण घरेलू उपाय भी प्रभावी

विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश परिस्थितियों में निम्न उपाय पर्याप्त होते हैं—

  • पानी को उबालकर ठंडा करके पीना।

  • सूती कपड़े या साधारण फिल्टर से छानना।

  • तांबे (Copper Vessel) या मिट्टी (Earthen Pot) के बर्तनों या फ़िल्टरों में संग्रह करना।

यह उपाय सामान्य जीवाणुओं और अशुद्धियों को कम करने में सहायक होते हैं।

पाइपलाइन और मौसम के कारण कभी-कभी सावधानी जरूरी

पर्वतीय क्षेत्रों में कई स्थानों पर पुरानी पाइप लाइनें हैं। बरसात या भूस्खलन के समय पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने या बाहरी गंदगी मिल जाने की आशंका रहती है। ऐसे समय पानी की गुणवत्ता अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। इसलिए वर्षा ऋतु में पानी को उबालकर पीना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

बोतलबंद पानी कब उपयोग करें

विशेषज्ञों का कहना है कि बोतलबंद पानी (Bottled Water) को नियमित पेयजल के रूप में प्रयोग करने के बजाय केवल यात्रा या आपातकालीन स्थिति में उपयोग करना बेहतर है, जब स्थानीय जल स्रोत की गुणवत्ता संदिग्ध हो। क्योंकि बोतलबंद पानी में अधिकांश खनिजों को छानकर हटा दिया जाता है। लंबे समय तक केवल ऐसा पानी पीने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता और आवश्यक खनिजों की कमी भी हो सकती है।

सुरक्षित पेयजल के मानक क्या कहते हैं

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के आईएस 10500:2012 के अनुसार सुरक्षित पेयजल के लिए प्रमुख मानक इस प्रकार हैं—

  • पीएच स्तर 6.5 से 8.5 के बीच

  • टीडीएस 500 मिलीग्राम प्रति लीटर तक आदर्श

  • कठोरता 200 मिलीग्राम प्रति लीटर स्वीकार्य और 600 तक अनुमेय

  • आर्सेनिक 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं

  • फ्लोराइड 1.0 से 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर

  • 100 मिलीलीटर नमूने में कोलीफॉर्म जीवाणु नहीं होने चाहिए

जल स्रोत और टैंक की सफाई भी जरूरी

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पेयजल स्रोतों और टैंकों की नियमित सफाई बहुत जरूरी है। यदि नदी या झरनों के पानी को टैंक में जमा कर फिल्टर और क्लोरीनेशन के बाद उपयोग किया जाए तो पानी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।

पहाड़ के स्रोतों या नदी का पानी में अपेक्षाकृत शुद्ध है। उसे टैंक में डालकर फिल्टर करके ढककर रखें और क्लोरीनेशन करने के बाद पियें। एक भ्रम पानी का बासी या ताजा होने के बारे में रहता है। पानी चाहे घर के टैंक में हो या आपूर्ति वाले टैंक में या जमीन के भीतर, इससे फर्क नहीं पड़ता है। 

इस प्रकार विशेषज्ञों के अनुसार नैनीताल और अधिकांश पहाड़ी क्षेत्रों का पानी सामान्य परिस्थितियों में पीने योग्य है। फिर भी पूर्ण सुरक्षा के लिए उबालकर, छानकर और स्वच्छ बर्तनों में पानी रखना बेहतर तरीका है। बिना जरूरत आरओ लगाने या लंबे समय तक बोतलबंद पानी पर निर्भर रहने के बजाय जागरूकता, नियमित जांच और साधारण घरेलू उपायों से सुरक्षित पेयजल प्राप्त किया जा सकता है।

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