आपातकाल लोकतंत्र को नष्ट करने के लिए भूकंप जैसा था, सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका भी धूमिल हुई: उपराष्ट्रपति
-कहा, तत्कालीन प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत हितों को सर्वोपरि रखते हुए कैबिनेट को दरकिनार कर राष्ट्रव्यापी आपातकाल लागू किया और राष्ट्रपति ने संवैधानिक मर्यादाओं की उपेक्षा कर किये इस पर हस्ताक्षर (Emergency was like an earthquake that destroyed) -नौ उच्च न्यायालयों के फैसलों को पलट दिया गया, आज का युवा उस अंधकारमय कालखंड से अनभिज्ञ नहीं … Read more