नवीन समाचार, हल्द्वानी, 15 सितंबर 2019। बाइकिंग के शौकीन शहर के दो युवा बाइकर अवनीश राजपाल व योगेश जोशी विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान जागरूकता, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे कई संदेश लेकर 4400 किमी सड़क नापकर बाइक से रामेश्वरम (तमिलनाडु) पहुंच गए हैं। दोनों इसी माह सात सितंबर को ‘एक भारत, मेरा भारत’ का संकल्प लेकर हल्द्वानी से निकले थे, और उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्टड्ढ्र, कर्नाटक, केरल होते हुए तमिलनाडु पहुंच गए हैं। आगे उनका इसी सप्ताह वापस हल्द्वानी लौटने का भी कार्यक्रम है। बताया गया है कि वे पूर्व में हल्द्वानी से कन्याकुमारी की यात्रा कर चुके हैं। इस यात्रा में उन्होंने भारत के छह ज्योतिर्लिंगों-महाकाल उज्जैन व ओमकारेश्वर (मध्य प्रदेश), घृष्णेश्वर, त्रयंबकेश्वर, भीमाशंकर (महाराष्ट्र) एवं रामेश्वरम (तमिलनाडु) के अलावा र्साइं समाधि स्थल शिरडी, शनि शिंगणापुर आदि के भी दर्शन लाभ प्राप्त किये हैं।
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दुनियां में (एक देश में) सर्वाधिक बाइकिंग के लिये गिनीज बुक में दर्ज हुआ नैनीताल के गौरव का नाम
दुनिया में किसी एक देश में एक यात्रा में सर्वाधिक दूरी तक मोटर साइकिल चलाने का बनाया विश्व रिकार्ड
अमेरिकी रिकार्ड को डेढ़ गुने के अंतर से तोड़ा
राष्ट्रीय सहारा, 1 मार्च 2018
नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, दुनियां में (एक देश में) एक साथ सर्वाधिक दूरी तक मोटर साइकिल चलाने के लिये नैनीताल के ‘बावरे-घुमक्कड़’ गौरव सिद्धार्थ बिष्ट का नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज कर लिया गया है। गौरव ने 17 सितंबर 2015 से 23 अप्रैल 2017 के भारत में अपनी नारंगी रंग की ‘बावरी’ नाम की हीरो इम्पल्स मोटरसाइकिल 115,093.941 किमी (71,708 मील) चलाकर यह सफलता अर्जित की है। इसके बाद कड़ी जांच के उपरांत उन्हें ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ ने प्रमाण पत्र जारी कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि एक देश में एक यात्रा में सर्वाधिक दूरी तक मोटरसाइकिल चलाने का गिनीज बुक में दर्ज यह रिकार्ड अब तक अमेरिकी महिला बाइकर डेनेल लिन के नाम पर अमेरिका में 48,600 मील यानी 78,214.118 किमी चलने का था, जो उन्होंने 19 सितंबर 2014 से 29 अगस्त 2015 के बीच अमेरिका के सभी 48 राज्यों से गुजरकर बनाया था। इस तरह गौरव ने करीब डेढ़ गुने के अंतर से यह रिकॉर्ड तोड़ा है। गौरव ने इस रिकॉर्ड को भारत के 70वें स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त 2017 के दिन तोड़ा था। इसका प्रमाण पत्र उन्हें अब प्राप्त हो गया है।
‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले पत्रकार’ एवं मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 140 मिलियन यानी 1.40 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जुलाई 2019। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने रोहित शेखर मर्डर केस में चार्जशीट फाइल कर दी है। मामले में जांच टीम को रोहित का एक ऐसा विडियो मिला है, जिसे खुद राहत विडियो में अपना मृत्यु पूर्व बयान बता रहे हैं। विडियो में रोहित शेखर कह रहे हैं, ‘इसे मेरा … Read more
नवीन समाचार, बाजपुर, 23 फरवरी 2019। कुमाऊं के प्रसिद्ध चंद राजवंश के सबसे सुप्रसिद्ध राजा बाजबहादुर चन्द (शासनकाल 1638 से 1678 ईसवी) के द्वारा मुगल बादशाह शाहजहां के दौर में अपने नाम से बसाये गये बाजपुर कस्बे में प्राचीन मूर्तियां मिली हैं। यह प्राचीन मंदिर के संबंधित बतायी जा रही हैं। बताया गया है कि … Read more
नैनीताल, 12 नवंबर, 2018। उतराखण्ड राज्य आन्दोलन की शुरुआत मसूरी एवं नैनीताल से उतराखण्ड क्रांति दल के आह्वान पर अगस्त सन् 1994 में हुई। श्री प्रकाश पाण्डे, एडवोकेट, एवं श्री काशी सिंह ऐरी, तत्कालीन अध्यक्ष, उतराखण्ड क्रांति दल रामलीला स्टेज मल्लीताल नैनीताल में आमरण अनशन पर बैठे। उनका स्वास्थ्य दिन पर दिन खराब होने पर … Read more
-कनाडा में दूसरी पुस्तक ‘वेद‘स लिटिल बुक ऑन डिवोसन’ हुई लॉंच -बिक्री के मामले में अमेजन पर बच्चों की हिंदू धर्म की पुस्तकों में सर्वाधिक बिकने वाली सूची में दो दिन में ही दूसरे स्थान पर आ गयी है यह पुस्तक नैनीताल, 5 सितंबर 2018। दिवाली के त्यौहार पर नैनीताल की एक बेटी दीक्षा पाल नारायणन … Read more
नवीन समाचार, नैनीताल, 23 अप्रैल 2019। यूपी एवं उत्तराखंड के चार बार मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री रहे दिग्गज नेता पंडित नारायण दत्त तिवारी की मौत के समय बताया जा रहा था कि तिवारी 500 करोड़ की अकूत संपत्ति के मालिक हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तिवारी के लखनऊ, नैनीताल और दिल्ली में मकानों के साथ … Read more
नवीन समाचार. कपकोट (बागेश्वर), 22 अप्रैल 2019। कपकोट के ऐठाण गांव के शिक्षक हरिमोहन सिंह ऐठानी ने गणित में दो और रिकार्ड बनाए हैं। हस्तलिखित मैजिक पजल्स में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने 1260 घंटे में अलग-अलग श्रेणी के 48000 मैजिक पजल्स लिख डाले। 450 चार्ट पेपर्स में 13 किलो की किताब भी बना डाली है। केरल बुक ऑफ रिकॉर्ड ने उन्हें 2019 का वर्ल्ड रिकॉर्ड का तथा पुडुचेरी बुक ऑफ रिकॉर्ड संस्था ने नेशनल रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र दिया है। यह प्रमाण पत्र एक जटिल अंतरारष्ट्रीय गणितीय सिद्धांत को 15 दिन में हल करने के लिए दिया गया है, जो कि संख्या सिद्धांत से संबंधित है। संस्था ने उन्हें 18 अप्रैल को यह रिकार्ड प्रदान किया है। हाल ही में इस गणितीय सिद्धांत का एक अंतरराष्ट्रीय जर्नल भी प्रकाशित हो चुका है। शिक्षक हरिमोहन ऐठानी ने अपनी उपलब्धि पर बताया कि अनुसलझे और जटिल गणितीय सिद्धांतों का हल खोजना, गणित के सूत्र, शार्ट ट्रिक और रिजनिंग अध्ययन मेरा शौक है।
हरिमोहन की अब तक कि उपलब्धियां :
लिम्का नेशनल रिकॉर्ड 2014
लिम्का वल्र्ड रिकॉर्ड 2015
इंटरनेशनल वंडर बुक ऑफ रिकॉर्ड 2015
वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ यूनिवर्सल रिकॉर्ड फोरम 2015
वर्ल्ड रिकॉर्ड इंडिया वर्ल्ड रिकॉर्ड 2015
तेलगु बुक ऑफ रिकार्ड द्वारा राष्ट्रीय स्पेशल जूरी अवार्ड 2015
इंटरनेशनल ऑनलाइन वर्ल्ड रिकॉर्ड 2015
मैथ जीनियस वर्ल्ड रिकॉर्ड 2016
एवेरेस्ट वर्ल्ड रिकॉर्ड 2016
इंटरनेशनल मेगास्टार वर्ल्ड रिकॉर्ड 2017
असम बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड 2018
कलाम बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड 2018
केरला बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड 2019
पांडिचेरी बुक ऑफ रिकॉर्ड 2019
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उत्तराखंड के बागेश्वर जिले की कपकोट तहसील के ग्राम ऐठाण निवासी एक शिक्षक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 381 वर्षों से अनसुलझे एक गणितीय प्रश्न को हल कर लिया है। एक करोड़ डालर के इस सवाल का शिक्षक की ओर से खोजा गया जवाब ‘अंतर्राष्ट्रीय जर्नल एमआईईआर जर्नल ऑफ एजुकेशनल स्टडीज’ के जून-जुलाई अंक में भी प्रकाशित हुआ है। इस अंक का पहला शोध हरिमोहन का ही है। उनकी इस उपलब्धि पर पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे कलाम को समर्पित ‘कलाम बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ की ओर से प्रमाण पत्र भेजा गया है। इसमें अनसुलझे प्रश्न को 15 दिन के भीतर बूझने की सराहना की है।
नवीन जोशी। श्रीदेव सुमन उत्तराखंड की धरती के एक ऐसे महान अमर बलिदानी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सपूत का नाम है, जो एक लेखक, पत्रकार और जननायक ही नहीं टिहरी की ऐतिहासिक क्रांति के महानायक व महामानव भी थे। ‘जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए’, यह उक्ति सुमन जी ने मात्र 29 वर्ष की अल्पायु में … Read more
पहाड़ी सफर की तरह उतार-चढ़ाव भरी जिंदगी जी कर उत्तराखंड की प्रथम लोकगायिका व कुमाऊँ की तीजनबाई भी कही जाने वाली कबूतरी देवी जी का 7 जुलाई 2018 को पिथौरागढ़ में निधन हो गया। नेपाल-भारत की सीमा के पास लगभग 1945 में पैदा हुई कबूतरी दी को संगीत की शिक्षा पुश्तैनी रूप … Read more
आर्य समाज की 1875 में स्थापना से पूर्व 1874 में महर्षि दयानंद से प्रभावित नगर के लोगों ने नगर में बनाई थी ‘सत्य धर्म प्रकाशिनी सभा’, और की थी आर्य समाज मंदिर की स्थापना
देश का सबसे पुराना नैनीताल के तल्लीताल स्थित प्राचीन आर्य समाज मंदिर।
नवीन जोशी, नैनीताल। अंग्रेजों द्वारा ‘छोटी बिलायत’ के रूप में 1841 में बसायी गयी सरोवरनगरी नैनीताल के 1845 में ही देश की प्रारंभिक नगर पालिका के रूप में स्थापित होने, यहीं से उत्तराखंड में देशी (हिंदी-उर्दू) पत्रकारिता की 1868 में शुरुआत ‘समय विनोद’ नाम के पाक्षिक समाचार पत्र से होने सहित अनेकानेक खूबियां तो जगजाहिर हैं, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि नैनीताल में ही देश का पहला आर्य समाज मंदिर 1874 में आर्य समाज की स्थापना से भी पूर्व से नगर के तल्लीताल में स्थापित हुआ था। इसे आजादी के बाद 1941 से नगर के पहले भारतीय नगर पालिका अध्यक्ष रहे रायबहादुर जसौत सिंह बिष्ट तथा कुमाऊं के आयुक्त आरबी शिवदासानी के प्रयासों से इसे मल्लीताल के वर्तमान स्थल पर स्थानांतरित किया गया।
‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले पत्रकार’ एवं मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 140 मिलियन यानी 1.40 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं।
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-85 वर्ष की उम्र में शनिवार सुबह तड़के ली थी आखिरी सांस -नगर पालिका, डीएसए, श्रीराम सेवक सभा, हिल साइड सेफ्टी कमेटी, जिला महिला हॉकी संघ सहित अनेक संस्थाओं-संगठनों से रहा जुड़ाव
नैनीताल। सरोवरनगरी के कला, संस्कृति, खेल प्रेमी एवं जीवंत ‘इनसाइक्लोपीडिया’ कहे जाने वाले रंगकर्मी एवं राज्य आंदोलनकारी गंगा प्रसाद साह रविवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। रविवार सुबह पाइंस स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार कर दिया। उनके एकमात्र पुत्र अतुल साह व पौत्र शिवम साह ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। इस मौके पर एसडीएम अभिषेक रुहेला, पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल, पूर्व पालिकाध्यक्ष संजय कुमार संजू व मुकेश जोशी, इतिहासकार डा. शेखर पाठक, भूगोलविद् डा. जीएल साह, कुमाऊं विवि के उपकुलसचिव बहादुर सिंह बिष्ट, पूर्व सभासद जगदीश बवाड़ी, आनंद बिष्ट व मनोज अधिकारी तथा तिब्बती शरणार्थी फाउंडेशन के अध्यक्ष पेमा गेकिल शिथर सहित तहसीलदार एवं नगर के विभिन्न संगठनों एवं संस्थाओं व विभागों से जुड़े लोग मौजूद रहे। इससे पूर्व उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बीके बिष्ट भी उनके घर पर अंतिम दर्शनों को पहुंचे।
‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले पत्रकार’ एवं मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 140 मिलियन यानी 1.40 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं।
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चिपको से रहा है उत्तराखण्ड की महिलाओं के आन्दोलन का इतिहास
गौरा देवी
महिलाएं उत्तराखंड की दैनिक काम-काज से लेकर हर क्षेत्र में धूरी हैं। कदाचित वह पुरुषों के नौकरी हेतु पलायन के बाद पूरे पहाड़ का बोझ अपने ऊपर ढोती हैं। विश्व विख्यात चिपको आंदोलन और शराब विरोधी आंदोलनों से उनका आन्दोलनों का इतिहास रहा है। वनों को बचाने हेतु रैणी गांव की एक साधारण परंतु असाधारण साहस वाली महिला ‘गौरा देवी ने 21 मार्च 1974 को अपने गांव के पुरुषों की अनपुस्थिति में जिस सूझबूझ व साहस का परिचय दिया, वह चिपको आंदोलन के रूप में इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित होने के साथ ही अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया। जब उन्होंने व विभाग के कर्मचारियों ने पेड़ों को काटने का विरोध किया और न मानने पर वो तकरीबन 30 अन्य महिलाओं के साथ पेड़ों पर चिपक गई जिससे पेड़ काटने वालों को उल्टे पैर वापस जाना पड़ा। इस घटना के बाद 1975 में गोपेश्वर व 1978 में बद्रीनाथ समेत अनेक क्षेत्रों में महिलाओं ने विरोध कर जंगलों को काटने से बचाया।
बकौल गिर्दा, यह रहा चिपको-वनान्दोलन का प्रभाव
‘हम भोले-भाले पहाड़ियों को हमेशा ही सबने छला है। पहले दूसरे छलते थे, और अब अपने छल रहे हैं। हमने देश-दुनिया के अनूठे ‘चिपको आन्दोलन’ वाला वनान्दोलन लड़ा, इसमें हमें कहने को जीत मिली, लेकिन सच्चाई कुछ और थी।’ गिर्दा को वनान्दोलन के परिणामस्वरूप पूरे देश के लिए बने वन अधिनियम से जनता के हक-हकूकों पर और अधिक पाबंदियां आयद कर दिए जाने की गहरी टीस थी। 1972 से शुरू हुऐ पहाड़ के एक छोटे से भूभाग का वन आंदोलन, चिपको जैसे विश्व प्रसिद्ध आंदोलन के साथ ही पूरे देश के लिए वन अधिनियम 1980 का प्रणेता भी रहा। लेकिन यह सफलता भी आंदोलनकारियों की विफलता बन गई। दरअसल शासन सत्ता ने आंदोलनकारियों के कंधे का इस्तेमाल कर अपने हक-हुकूक के लिए आंदोलन में साथ दे रहे पहाड़वासियों से उल्टे उनके हक-हुकूक और बुरी तरह छीन लिऐ थे, और आंदोलनकारियों को अपने ही लोगों के बीच गुनाहगार की तरह खड़ा कर दिया था। आंदोलन में अगली पंक्ति में रहे गिर्दा को आखिरी दिनों में यह टीस बहुत कष्ट पहुंचाती थी। उनके अनुसार ‘1972 में वनांदोलन शुरू होने के पीछे लोगों की मंशा अपने हक-हुकूकों को बेहतरी से प्राप्त करने की थी। यह वनों से जीवन-यापन के लिए अधिकार लेने की लड़ाई थी। सरकार स्टार पेपर मिल सहारनपुर को कौड़ियों के भाव यहां की वन संपदा लुटा रही थी। इसके खिलाफ आंदोलन हुआ, लेकिन जो वन अधिनियम मिला, उसने स्थितियों को और अधिक बदतर कर दिया। इससे जनभावनाऐं साकार नहीं हुईं। वरन, जनता की स्थिति बद से बदतर हो गई। तत्कालीन पतरौलशाही के खिलाफ जो आक्रोष था, वह आज भी है। औपनिवेषिक व्यवस्था ने ‘जन’ के जंगल के साथ ‘जल’ भी हड़प लिया। वन अधिनियम से वनों का कटना नहीं रुका, उल्टे वन विभाग का उपक्रम-वन निगम और बिल्डर वनों को वेदर्दी से काटने लगे। साथ ही ग्रामीण भी परिस्थितियों के वशीभूत ऐसा करने को मजबूर हो गऐ। अधिनियम का पालन करते हुए वह अपनी भूमि के निजी पेड़ों तक को नहीं काट सकते है। उन्हें हक-हुकूक के नाम पर गिनी चुनी लकड़ी लेने के लिए भी मीलों दूर जाना पड़ता है। इससे उनका अपने वनों से आत्मीयता का रिस्ता खत्म हो गया है। वन जैसे उनके दुश्मन हो गऐ, जिनसे उन्हें पूर्व की तरह अपनी व्यक्तिगत जरूरतों की चीजें तो मिलती नहीं, उल्टे वन्यजीव उनकी फसलों और उन्हें नुकसान पहुंचा जाते हैं। इसलिऐ अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए ग्रामीण महिलाऐं वनाधिकारियों की नजरों से बचने के फेर में बड़े पेड़ों की टहनियों को काटने की बजाय छोटे पेड़ों को जल्द काट गट्ठर बना उनके निसान तक छुपा देती हैं। इससे वनों की नई पौध पैदा ही नहीं हो रही। पेड़-पौधों का चक्र समाप्त हो गया है। अब लोग गांव में अपना नया घर बनाना तो दूर उनकी मरम्मत तक नहीं कर सकते। लोगों का न अपने निकट के पत्थरों, न लकड़ी की ‘दुंदार’, न ‘बांस’ और न छत के लिऐ चौड़े ‘पाथरों’ पर ही हक रह गया है। पास के श्रोत का पानी भी ग्रामीण गांव में अपनी मर्जी से नहीं ला सकते। अधिनियम ने गांवों के सामूहिक गौचरों, पनघटों आदि से भी ग्रामीणों का हक समाप्त करने का शडयंत्र कर दिया। उनके चीड़ के बगेटों से जलने वाले आफर, हल, जुऐ, नहड़, दनेले बनाने की ग्रामीण काष्ठशालायें, पहाड़ के तांबे के जैसे परंपरागत कारोबार बंद हो गऐ। लोग वनों से झाड़ू, रस्सी को ‘बाबीला’ घास तक अनुमति बिना नहीं ला सकते। यहां तक कि पहाड़ की चिकित्सा व्यवस्था का मजबूत आधार रहे वैद्यों के औषधालय भी जड़ी बूटियों के दोहन पर लगी रोक के कारण बंद हो गऐ। दूसरी ओर वन, पानी, खनिज के रूप में धरती का सोना बाहर के लोग ले जा रहे हैं, और गांव के असली मालिक देखते ही रह जा रहे हैं। गिर्दा वन अधिनियम के नाम पर पहाड़ के विकास को बाधित करने से भी अत्यधिक चिंतित थे। उनका मानना था कि विकास की राह में अधिनियम के नाम पर जो अवरोध खड़े किऐ जाते हैं उनमें वास्तविक अड़चन की बजाय छल व प्रपंच अधिक होता है। जिस सड़क के निर्माण से राजनीतिक हित न सध रहे हों, वहां अधिनियम का अड़ंगा लगा दिया जाता है।
पर्यावरण-रक्षा के लिए “चिपको आंदोलन”
(26 मार्च 2018) 45 वर्ष पूर्व 1973 में (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) वर्तमान में उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय अंचल के गढ़वाल मंडल में चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई थी.चिपको आन्दोलन एक पर्यावरण-रक्षा का आन्दोलन रहा..दरअसल तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जंगल की जमीन को खेल का सामान बनाने वाली एक कंपनी को देने का फैसला कर लिया था.. ग्रामीणों ने वृक्षों की कटाई का विरोध करने के लिए इस आंदोलन की रूपरेखा तय की..वे राज्य के वन विभाग के ठेकेदारों द्वारा वनों की कटाई का विरोध कर रहे थे और उन पर अपना परम्परागत अधिकार भी जता रहे थे..पेड़ों के कटान के इस फैसले का विरोध करने के लिए ग्रामीण विशेष रूप से महिलाएं पेड़ों के चारों तरफ घेरा बनाकर उससे चिपक जाती थीं.. इससे पेड़ों को काटना मुश्किल हो गया..
स्थानीय महिलाओं की अगुआई में शुरू हुए इस आंदोलन का प्रसार चंडी प्रसाद भट्ट और उनके एनजीओ “दशौली ग्राम स्वराज्य संघ” ने भी किया..व इस महान कार्य में विद्वान गांधीवादी विचारक सुंदरलाल बहुगुणा ने इस आंदोलन को दिशा दी और उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पेड़ों की कटाई रोकने का आदेश देने की अपील की.. उसका नतीजा यह हुआ कि केंद्र की कांग्रेसनीत इंदिरा गांधी सरकार ने 15 वर्षों के लिए पेड़ों की कटाई को बैन कर दिया.. धूम सिंह नेगी, बचनी देवी, गौरा देवी और सुदेशा देवी इस आंदोलन से जुड़ी प्रमुख हस्तियां थीं..केवल उपरोक्त वर्णित नाम ही नही वरन गाँव के गाँव इस आंदोलन में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने लगे..इस शांत विरोध आंदोलन की सफलता के बाद यह आंदोलन देश के अन्य हिस्सों में भी फैलने लगा..
‘चिपको आन्दोलन’ का उदघोष रहा…
“क्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी, पानी और बयार।
मिट्टी, पानी और बयार, जिन्दा रहने के आधार।”
सन १९८७ में इस आन्दोलन को सम्यक जीविका पुरस्कार (Right Livelihood Award) से भी सम्मानित किया गया..
कुलमिलाकर पर्यावरण की रक्षा के लिए जब रैणि गाँव उत्तराखंड की पाँचवी कक्षा तक पढ़ी गौरा देवी की भूमिका इतिहास में दर्ज हो सकती है तो पढ़ा लिखा समाज कब जागेगा..क्योंकि आज की स्थितियाँ 1973 में शुरू हुए चिपको आंदोलन से भी कठिन हो गई हैं..लोग जननायक तो चाहते हैं पर करना कुछ नही चाहते..इसलिए वनों के विलुप्त होने में पढ़े-लिखे समाज को ही ज्यादा जिम्मेदार कहा जायेगा..पेड़ों की उपलब्धता में विश्व में 180 देशों में हुए सर्वे में भारत 177 वें स्थान पर आसीन है..सरकारों को भी वनों ,वनाश्रितों के हितों को सुरक्षित करने के लिए कड़े कानून बनाने चाहिए..अन्यथा महंगाई,भ्रष्टाचार के मुद्दे भी गौण हो जाएंगे क्योंकि जनजीवन के लिए अतिआवश्यक तत्व ऑक्सीजन की भारी कमी हो जाएगी…
-संजय नागपाल नैनीताल
यह भी पढ़ें : गूगल ने पंडित नैन सिंह पर डूडल बना बढ़ाया देश के साथ उत्तराखंड का मान
His faith was unshakable, like the mountains he mapped a way through. Remembering Nain Singh Rawat, on his 187th birthday. #GoogleDoodlepic.twitter.com/SwZy2ma0kG
‘विक्टोरिया पदक’ व ‘कम्पेनियन इंडियन एम्पायर अवार्ड-सीआईएम’ जैसे अनेक पुरस्कारोंसे सम्मानित प्रथम भारतीय थे नैन सिंह
गूगल ने उन्हें बताया है, ‘उनके द्वारा नापे गए पर्वतों (हिमालय) की तरह अडिग विश्वास वाला व्यक्ति’
अनपढ़ होते हुए भी स्कूल खोलने व शिक्षक के रूप में कार्य करने पर मिली थी ‘पंडित’ की पदवी
अपने बराबर कदमों से चलकर और कंठी माला पर कदमों को गिनकर नापे थे हिमालय पर स्थित ‘एशिया की पीठ’ और बनाए थे मानचित्र
नवीन जोशी, नैनीताल। दुनिया का सबसे बड़ा खोज इंजन यूं हर खास मौके पर एक नया डूडल बनाने के लिए भी विख्यात है। किंतु आज 21 अक्टूबर को उसने जो डूडल बनाया है उसे देश के साथ खासकर उत्तराखंड वासियों का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है, और वे दीपावली-भैया दूज पपर गूगल से मिले इस खास तोहफे को शायद कभी न भुला पाएं। यह तोहफा है गूगल द्वारा आज के दिन के लिये बनाया गया डूडल, जिसमें हाथ में कंठी माला पकड़े एक व्यक्ति को हिमालय के खूबसूरत पहाड़ों व नदी को सलाम करते हुए दिखाया गया है। गूगल पर अपना मनपसंद विषय खोजने वाली पूरी दुनिया आज इस शख्श के बारे में जानने को उत्सुक है। गूगल ने उन्हें ‘उनके द्वारा नापे गए पर्वतों (हिमालय) की तरह अडिग विश्वास वाला व्यक्ति’ बताया है। उत्तराखंड के लिये गर्व करने वाली बात यह है कि यह शख्श महान अन्वेषक, सर्वेक्षक और मानचित्रकार, हिमालय पुत्र पंडित नैन सिंह रावत हैं, और देश के गिने-चुने व्यक्तियों में शुमार और उत्तराखंड के ऐसे पहले व्यक्ति हो गए हैं, जिनके 187वें जन्मदिन पर गूगल ने आज उन पर खास डूडल बनाया है।
‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले पत्रकार’ एवं मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 140 मिलियन यानी 1.40 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
नैनीताल, 9 जुलाई 2018। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 2019 में प्रस्तावित लोक सभा चुनावों के मद्देनजर समाज के प्रतिष्ठित गैर राजनीतिक लोगों को पार्टी की रीति-नीति से जोड़ने के लिए ‘संपर्क फॉर समर्थन’ अभियान चलाया हुआ है। इस अभियान के तहत पार्टी के नेता भी अपने क्षेत्रों के प्रतिष्ठित लोगों से मिल रहे हैं।
पूर्व ओलंपियन राजेंद्र रावत से मिलते सांसद कोश्यारी एवं अन्य भाजपाई।डा. जीएल साह से मिलते सांसद कोश्यारी एवं अन्य भाजपाई।
इसी कड़ी में सोमवार को स्थानीय सांसद भगत सिंह कोश्यारी पूर्व ओलंपिक हॉकी खिलाड़ी राजेंद्र रावत, कुमाऊं विवि के पूर्व भूगोल प्रोफेसर व टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का ड्राफ्ट तैयार करने वाले डा. जीएल साह एवं नगर के प्रतिष्ठित अल्का होटल के स्वामी वेद साह व उनके पिता भानु प्रकाश साह से उनके आवासों पर मिले। श्री कोश्यारी ने इन महानुभावों को मोदी सरकार के कामकाज एवं भावी योजनाओं के साथ सरकार के विजन की जानकारी दी, एवं 2019 के लोक सभा चुनावों के लिए समर्थन मांगा। इस कोशिश में उन्हें कमोबेश सभी से सकारात्मक प्रतिक्रिया भी मिली। कोश्यारी ने उनसे सरकार के कार्यों के बारे में उनकी राय भी जानी। इस पर लोगों ने खुलकर विचार रखे। कुछ योजनाओं पर अपनी ओर से बेहतर किये जाने के सुझाव दिये तथा अन्य को खुलकर सराहा भी। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट, नगर अध्यक्ष मनोज जोशी, शंकर कोरंगा, दया किशन पोखरिया, अरविंद पडियार, मोहित साह, हरीश राणा, मोहित रौतेला व गोविंद बिष्ट आदि भाजपा नेता भी मौजूद रहे।
‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले पत्रकार’ एवं मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 140 मिलियन यानी 1.40 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं।
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महिला दिवस पर एयर इंडिया द्वारा चलाई गयी ‘ऑल वूमन फ्लाईट’ का नेतृत्व करते हुए 17 घंटों में दिल्ली से सैनफ्रांसिस्को तक 14,500 किमी की लगातार उड़ान कर नया रिकार्ड बनाने वाली प्रदेश की पहली व इकलौती तथा देश की तीसरी कामर्शियल महिला पायलट कैप्टन क्षमता बाजपेई ने कहा-पहाड़ की होने के कारण ऊंचाइयों से डर नहीं लगता, क्योंकि पहाड़ से आगे तो ‘स्काई इज द लिमिट’ (यानी असीमित आसमान की सीमाएं ही हैं)
नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, सही बात ही तो है, पहाड़ों से अधिक ऊंचा तो आसमान ही है। कोई पहाड़ से भी अधिक ऊंचे जाना चाहे तो कहां जाए, आसमान पर ही नां। पर कितने लोग सोचते हैं इस तरह से ?। लेकिन पहाड़ की एक बेटी क्षमता जोशी ने 1986 के दौरान ही जब वह केवल 18 वर्ष की थीं, अपने पहाड़ों की ऊंचाई से भी अधिक ऊंचा उड़ने का जो ख्वाब संजोया और उसे पूरा करने में जिस तरह परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद अपनी पूरी ‘क्षमता’ लगा दी, नतीजे में वह प्रदेश की पहली और इकलौती कामर्शियल महिला पायलट ही नहीं, एयर इंडिया में प्रोन्नति पाकर सात वर्ष से कमांडर हैं, और न केवल स्वयं बल्कि हजारों लोगों को रोज पहाड़ों से कहीं अधिक ऊंचाइयों से पूरी दुनिया की सैर कराती हैं। इधर उन्होंने बीते महिला दिवस पर एयर इंडिया द्वारा चलाई गयी ‘ऑल वूमन फ्लाईट’ का नेतृत्व करते हुए 17 घंटों में दिल्ली से सैनफ्रांसिस्को तक 14,500 किमी की लगातार उड़ान कर नया रिकार्ड बनाकर देश-प्रदेश वासियों का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।
‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले पत्रकार’ एवं मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 140 मिलियन यानी 1.40 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं।
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नैनीताल के राजभवन गोल्फ कोर्स में गोल्फ स्टिक के लम्बे शॉट्स का अभ्यास करते क्रिकेटर उन्मुक्त चंद
नवीन जोशी, नैनीताल। अपने कॅरियर की शुरुआत में दिल्ली के लिए ओपनर के रूप में 425 रनों की पारी और अंडर-19 विश्व कप में आस्ट्रेलिया के खिलाफ 111 रनों की नाबाद व कप्तानी पारी खेलकर आस्ट्रेलियाई दिग्गज पूर्व कप्तान इयान चैपल से प्रशंसा प्राप्त कर चुके उत्तराखण्ड मूल के युवा क्रिकेटर उन्मुक्त चंद भारतीय क्रिकेट टीम में ओपनर के रूप में अपनी भूमिका तलाश रहे हैं। बीती 5 फ़रवरी 2016 की शाम नैनीताल पहुंचे थे, और 6 की सुबह नैनीताल राजभवन स्थित गोल्फ कोर्स में उन्होंने गोल्फ खेलकर अपना दैनिक अभ्यास करते हुए पसीना बहाया। इस दौरान उन्होंने यहाँ नैनीताल राजभवन गोल्फ कोर्स में गोल्फ स्टिक (क्लब) पर पहली बार हाथ आजमाते हुए कई ‘उन्मुक्त छक्कों’ सरीखे लम्बे शॉट भी खेले। साथ ही अपने दोस्तों के साथ नगर की प्राकृतिक सुंदरता में खोकर कई सेल्फी लीं। इस दौरान उन्होंने अपने कॅरियर, भारतीय क्रिकेट टीम में चुने जाने की संभावनाओं, इसके लिए की जा रही मेहनत आदि पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि तीन-चार दिन के अवकाश पर अपने घर-कुमाऊं आये हैं।
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