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🌱🌾लाग हरिया्व, लाग दसैं, लाग बग्वाल, जी रया, जागि रया….🌱🌾

       इस लोक पर्व की ठेठ कुमाउनी आशीषों में त्रेता युग में देवर्षि विश्वामित्र द्वारा भगवान श्रीराम को दी गईं ‘आकाश की तरह ऊँचे होने और धरती की तरह चौड़े होने’ की आशीषों का भाव भी होता है  नवीन जोशी, नैनीताल। `लाग हरिया्व, लाग दसैं, लाग बग्वाल, जी रये, जागि रये, यो दिन यो मास भेटनैं रये, तिष्टिये, पनपिये, हिमाल […]

दो देशों की साझा प्रतिनिधि थीं कुमाऊँ की ‘तीजनबाई’ कबूतरी दी

             पहाड़ी सफर की तरह उतार-चढ़ाव भरी जिंदगी जी कर उत्तराखंड की प्रथम लोकगायिका व कुमाऊँ की तीजनबाई भी कही जाने वाली कबूतरी देवी जी का 7 जुलाई 2018 को पिथौरागढ़ में निधन हो गया। नेपाल-भारत की सीमा के पास लगभग 1945 में पैदा हुई कबूतरी दी को संगीत की शिक्षा पुश्तैनी […]