पूर्व और वर्तमान विधायक पर कानूनी शिकंजा, आपत्तिजनक ऑडियो मामलों में अभियोग दर्ज, राजनीति में बढ़ी जवाबदेही की चर्चा

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नवीन समाचार, उधम सिंह नगर/हरिद्वार, 27 जनवरी 2026 (FIR on MLA-Former MLA)। उत्तराखंड के उधम सिंह नगर (Udham Singh Nagar) के रुद्रपुर (Rudrapur) और हरिद्वार (Haridwar) जनपद से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में आपत्तिजनक ऑडियो क्लिप के आधार पर राजनीतिक हस्तियों पर कानूनी कार्रवाई सामने आई है। एक ओर रुद्रपुर के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल (Rajkumar Thukral) के विरुद्ध एक वर्ष पुराने प्रकरण में अभियोग दर्ज हुआ है, वहीं दूसरी ओर ज्वालापुर (Jwalapur) के कांग्रेस विधायक रवि बहादुर (Ravi Bahadur) पर एक पार्टी कार्यकर्ता को फोन पर धमकाने के आरोप लगे हैं। इन घटनाओं ने उत्तराखंड की राजनीति में सार्वजनिक आचरण, सोशल मीडिया की भूमिका और कानून के समान अनुप्रयोग को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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आपत्तिजनक ऑडियो और राजनीतिक मर्यादा का प्रश्न

(FIR On MLA-Former MLA) पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने तराई बीज विकास निगम की टेंडर प्रक्रिया में  करोड़ों रूपये के घोटाले का लगाया आरोप | India Nazarरुद्रपुर (Rudrapur) कोतवाली में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष और कांग्रेस नेत्री मीना शर्मा (Meena Sharma) की शिकायत पर पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की धारा 352 और 79 के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया है। यह मामला वर्ष 2025 के निकाय चुनाव (Municipal Elections 2025) से ठीक पहले सामने आए एक आपत्तिजनक ऑडियो क्लिप से जुड़ा है, जिसमें कथित रूप से कांग्रेस नेत्री और उनके पति के प्रति आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया था।

मीना शर्मा ने बताया कि उन्होंने समय रहते रुद्रपुर कोतवाली (Rudrapur Kotwali) में शिकायत दी थी, लेकिन एक वर्ष तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें समर्थकों के साथ सांकेतिक धरना देना पड़ा। धरने की सूचना पर उपजिलाधिकारी मनीष बिष्ट (Manish Bisht) मौके पर पहुंचे और निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद पुलिस ने अभियोग दर्ज किया। यह प्रकरण इस सवाल को जन्म देता है कि क्या चुनावी माहौल में महिलाओं की गरिमा और राजनीतिक शुचिता की पर्याप्त सुरक्षा हो पा रही है।

मानवीय दृष्टि से देखें तो लंबे समय तक न्याय की प्रतीक्षा और सार्वजनिक छवि पर आघात किसी भी व्यक्ति के लिए मानसिक दबाव उत्पन्न करता है। ऐसे मामलों में समयबद्ध कार्रवाई न केवल पीड़ित के विश्वास को मजबूत करती है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता भी बढ़ाती है।

कांग्रेस विधायक पर अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ता को फोन पर धमकाने के आरोप

आज कनखल में मकर संक्रांति के शुभ अवसर दरिद्र भंजन मंदिर में भंडारा व खिचड़ी  भोग का भव्य आयोजन किया गया | @incindia @incuttarakhand @incuttarakhand  @rahulgandhi @pritamsinghinc @harishrawatcmuk ...इसी क्रम में हरिद्वार (Haridwar) जनपद के ज्वालापुर क्षेत्र से एक अन्य मामला सामने आया है। सुभाषनगर निवासी कांग्रेस कार्यकर्ता जितेंद्र चौधरी (Jitendra Chaudhary) ने ज्वालापुर कोतवाली (Jwalapur Kotwali) में शिकायत दी है कि 25 जनवरी 2026 की शाम उन्हें फोन पर धमकाया गया। आरोप है कि कॉल कांग्रेस विधायक रवि बहादुर की ओर से आई थी और बातचीत की ऑडियो क्लिप सामाजिक माध्यमों (Social Media) पर प्रसारित हो रही है।

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शिकायतकर्ता के अनुसार यह धमकी राजनीतिक रंजिश का परिणाम है, जबकि विधायक रवि बहादुर ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता का पूर्ववृत्त पुलिस अभिलेखों में दर्ज है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्रारंभिक जांच बाजार चौकी प्रभारी को सौंप दी है।

इन दोनों मामलों से यह प्रश्न उभरता है कि सार्वजनिक जीवन में पद पर बैठे या रह चुके व्यक्तियों की भाषा और व्यवहार की सीमा क्या होनी चाहिए। कानून, चुनावी आचार संहिता और डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका आने वाले समय में ऐसे प्रकरणों में निर्णायक साबित हो सकती है।

आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया किस गति और निष्पक्षता से आगे बढ़ती है, क्योंकि ऐसे मामलों का असर केवल संबंधित व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि राजनीति में भरोसे और शासन की विश्वसनीयता पर भी पड़ता है।

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