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नवीन समाचार, भराडीसैंण, 11 मार्च 2026 (UCC Amendment-Devbhumi Parivar Bills)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण (Bhararisain) में चल रहे विधानसभा बजट सत्र के दौरान राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड-2024 (Uniform Civil Code Uttarakhand 2024) में संशोधन के लिए समान नागरिक संहिता (संशोधन) विधेयक-2026 (UCC Amendment Bill 2026) को सदन में प्रस्तुत किया। सरकार के अनुसार प्रस्तावित संशोधन नवीन आपराधिक कानूनों के अनुरूप प्रावधानों को समायोजित करने, प्रक्रियाओं को अधिक व्यवहारिक बनाने और दंडात्मक व्यवस्था को स्पष्ट एवं सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लाए गए हैं।
इसी के साथ सरकार ने “देवभूमि परिवार विधेयक-2026” (Devbhoomi Parivar Bill 2026) भी सदन के पटल पर रखा है, जिसका उद्देश्य राज्य में एकीकृत परिवार-आधारित डिजिटल डेटाबेस बनाकर कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान और सहायता वितरण को अधिक पारदर्शी बनाना है।

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Toggleयूसीसी संशोधन विधेयक में प्रमुख प्रावधान
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार विधेयक में जहां-जहां दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (Code Of Criminal Procedure – CrPC 1973) का उल्लेख है, वहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita – BNSS 2023) को प्रतिस्थापित किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त कई धाराओं में प्रक्रियात्मक बदलाव किए गए हैं—
धारा 7, 10, 11 और अन्य उपधाराओं में निर्धारित छह माह की समय सीमा को बढ़ाकर एक वर्ष करने का प्रस्ताव।
धारा 12 में “सचिव” के स्थान पर “अपर सचिव” (Additional Secretary) शब्द का प्रयोग।
धारा 13(3) में संशोधन कर यह प्रावधान कि उप-निबंधक द्वारा समय सीमा में कार्यवाही न करने पर मामला स्वतः निबंधक और फिर महानिबंधक (Registrar General) को भेजा जाएगा।
पहचान छिपाकर विवाह या सहवासी संबंध पर कड़ी सजा
संशोधन में दंड प्रावधानों को भी अधिक स्पष्ट किया गया है।
धोखाधड़ी, बल या दबाव के माध्यम से विवाह या सहवासी संबंध (Live-In Relationship) स्थापित करने पर सात वर्ष तक का कारावास और जुर्माना।
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मिथ्या पहचान (False Identity) प्रस्तुत कर विवाह करने, अवैध विवाह विघटन या पुनर्विवाह में बाधा उत्पन्न करने पर भी कठोर दंड।
बाल विवाह से संबंधित मामलों में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 (Prohibition Of Child Marriage Act 2006) के तहत कार्रवाई का प्रावधान।
सहवासी संबंधों से जुड़ी धाराओं 384, 385 और 387 में संशोधन कर पंजीकरण, समाप्ति प्रमाण पत्र और धोखाधड़ीपूर्ण सहमति के मामलों में दंड प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट किया गया है।
इसके अलावा नई धाराएं 390क और 390ख जोड़ने का प्रस्ताव है, जिनके तहत विवाह, विवाह-विच्छेद, सहवासी संबंध या उत्तराधिकार से जुड़े पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति महानिबंधक को दी जाएगी, हालांकि इससे पहले संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य होगा।
‘देवभूमि परिवार’ विधेयक: घर की सबसे वरिष्ठ महिला बनेगी परिवार की मुखिया
सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए “देवभूमि परिवार विधेयक-2026” भी प्रस्तुत किया है। इसके तहत राज्य में एक एकीकृत परिवार आधारित डेटा प्रणाली (Unified Family Database) स्थापित की जाएगी।
इस प्रणाली के माध्यम से विभिन्न विभागों में अलग-अलग मौजूद लाभार्थी डेटा को एक मंच पर लाया जाएगा, जिससे योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता और समन्वय बढ़ सकेगा।
इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार को एक देवभूमि परिवार पहचान संख्या (Devbhoomi Family ID) दी जाएगी। इसमें परिवार के मुखिया के रूप में 18 वर्ष से अधिक आयु की वरिष्ठतम महिला सदस्य का नाम दर्ज किया जाएगा।
क्यों जरूरी समझा गया यह कदम
वर्तमान में राज्य के अलग-अलग विभाग अपनी योजनाओं के लिए अलग-अलग लाभार्थी डेटाबेस का उपयोग करते हैं। इससे कई बार—
आंकड़ों का दोहराव
सत्यापन की जटिल प्रक्रिया
विभागों के बीच समन्वय की कमी
जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) के अनुसार “देवभूमि परिवार विधेयक-2026” सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और जरूरतमंद नागरिकों तक सरकारी सहायता अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगी।
डेटा सुरक्षा कानून के अनुरूप होगा संचालन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रणाली डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 (Digital Personal Data Protection Act – DPDP Act 2023) के प्रावधानों के अनुरूप संचालित होगी।
इसके तहत विभागों के बीच डेटा का आदान-प्रदान सुरक्षित और विनियमित तरीके से किया जाएगा, ताकि नागरिकों की गोपनीयता, सहमति और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।














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