डीएम ने चार नन्हीं बालिकाओं की विधवा मां के लिए बैंक को करा दिया सील, इंश्योरेंस कंपनी पर भी की कार्रवाई

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-बैंक व बीमा कम्पनी की नाफरमानी पर जिला प्रशासन का डंडा चला: विधवा प्रिया को न्याय, बैंक शाखा सील, नीलामी की तैयारी, चार नन्हीं बालिकाओं की विधवा मां को बीमा होते हुए भी नहीं मिला ऋणमाफी लाभ, डीएम की सख्ती से सीएसएल बैंक पर प्रशासन ने जड़ा ताला

नवीन समाचार, देहरादून, 21 जुलाई 2025 (Administrations Action against Bank-Insurance)। उत्तराखंड के देहरादून जनपद की राजपुर रोड स्थित सीएसएल फाइनेंस लिमिटेड की शाखा पर उस समय प्रशासन ने ताला जड़ दिया, जब यह पाया गया कि बैंक व बीमा कम्पनी ने एक विधवा महिला को बीमा क्लेम व ऋणमाफी लाभ से जानबूझकर वंचित किया है। यह मामला मृतक विकास कुमार की पत्नी प्रिया से जुड़ा है, जिनके पति की आकस्मिक मृत्यु के उपरांत भी बीमित गृह ऋण की न तो माफी की गई, न ही बीमा धनराशि दी गई, बल्कि बैंक एजेंटों ने उल्टा उनके मकान के कागज भी जब्त कर लिये।

डीएम के निर्देश पर शाखा सील, प्रिया को मिल रहा न्याय

Administrations Action against Bank-Insurance डीएम सविन बंसल ने एक और बैंक को सील करने के दिए आदेश, जानिए क्या है मामला –  Uttarakhand Kesariविकास कुमार ने सीएसएल फाइनेंस लिमिटेड से ₹6.50 लाख का गृह ऋण लिया था। ऋण लेते समय बैंक के अनुरोध पर उनका बीमा भी टाटा एआईए इंश्योरेंस कम्पनी से कराया गया। बीमा की सभी शर्तें, जांच व प्रीमियम भुगतान बैंक द्वारा कराया गया था। 12 जुलाई 2024 को विकास कुमार की आकस्मिक मृत्यु हो गई। इसके बाद विधवा प्रिया एक वर्ष तक चार नन्हीं बालिकाओं के साथ न्याय के लिए भटकती रही।

बैंक न तो ऋण बीमा की धनराशि दे रहा था, न नो ड्यूज सर्टिफिकेट। ऊपर से एजेंटों द्वारा मकान के कागज भी जब्त कर लिये गये। आर्थिक तंगी और उत्पीड़न से आहत प्रिया ने 11 जुलाई 2025 को जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल से मदद की गुहार लगाई। डीएम ने मामले को गंभीर मानते हुए बैंक प्रबंधक की ₹6.50 लाख की आरसी काटी और बैंक को नोटिस दिया।

सप्ताह भर की मोहलत के बाद भी नहीं माने, शाखा सील

प्रशासन द्वारा दी गई चेतावनी व समयावधि के बाद भी जब बैंक और बीमा कम्पनी ने न कोई सहयोग किया, न नो ड्यूज दिया, तब जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए राजपुर रोड स्थित सीएसएल फाइनेंस की शाखा को सील कर ताला जड़ दिया। यह कार्रवाई जिला प्रशासन की ऋण धोखाधड़ी व शोषण के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है।

प्रशासन के सख्त कदमों से पीड़िता को राहत, अन्य पीड़ितों को उम्मीद

यह मामला केवल एक परिवार की न्याय यात्रा नहीं, बल्कि उन तमाम पीड़ित आश्रितों की आवाज बन गया है, जिनके साथ बैंक या बीमा कम्पनी ने धोखाधड़ी की है। जिला प्रशासन द्वारा शाखा को सील किए जाने और आगे नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी से ऐसे संस्थानों में खौफ उत्पन्न हुआ है।

न्याय के लिए प्रशासन बना ढाल (Administrations Action against Bank-Insurance)

जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में प्रशासन लगातार ऐसे मामलों पर कड़ी नजर बनाए हुए है। जनहित, पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा, तथा निर्बल जनों को राहत दिलाने की दिशा में यह एक और ऐतिहासिक कार्रवाई मानी जा रही है। विधवा प्रिया के आँसुओं ने शासन-प्रशासन को झकझोर कर रख दिया, और अब उसे उसका न्याय मिल रहा है।

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