नवीन समाचार, नैनीताल, 16 अप्रैल 2026 (Banbhulpura-Abdul Malik Granted Bail)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के हल्द्वानी (Haldwani) स्थित बनभूलपुरा (Banbhoolpura) में हुई हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता और मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक (Abdul Malik) को नैनीताल हाईकोर्ट (Nainital High Court) से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को मामले की सुनवाई के उपरांत न्यायालय ने मलिक के विरुद्ध दर्ज शेष तीन मुकदमों में भी जमानत (Bail) स्वीकार करते हुए उन्हें रिहा करने के आदेश पारित कर दिए हैं। 8 फरवरी 2024 को भड़की इस हिंसा के बाद से ही मलिक जेल में निरुद्ध थे।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा (Justice Alok Kumar Verma) और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा (Justice Alok Mehra) की खंडपीठ ने इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई की। न्यायालय ने राज्य सरकार और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं द्वारा प्रस्तुत तर्कों और मलिक के आपराधिक इतिहास (Criminal History) की वर्तमान स्थिति का बारीकी से विश्लेषण करने के पश्चात यह निर्णय लिया। ज्ञात हो कि 24 फरवरी 2024 को दिल्ली से गिरफ्तारी के बाद से मलिक न्यायिक अभिरक्षा (Judicial Custody) में थे।
मुकदमों की स्थिति और विधिक तर्क
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को अवगत कराया गया कि जांच में अब्दुल मलिक के विरुद्ध दंगे से संबंधित 4 मुकदमों के अतिरिक्त 7 अन्य मुकदमों की पुष्टि हुई थी। हालांकि, इनमें से कई मामलों में वे पूर्व में ही बरी (Acquitted) हो चुके हैं और अन्य के संबंध में कोई ठोस पुष्टि नहीं हो सकी है। दंगे से संबंधित 4 मुकदमों में से एक में उन्हें पूर्व में ही जमानत प्राप्त हो चुकी थी, जबकि शेष 3 मुकदमों में आज न्यायालय ने जमानत मंजूर कर ली।
अभियोजन (Prosecution) के अनुसार, अब्दुल मलिक पर राजकीय भूमि (Government Land) को खुर्द-बुर्द करने, कूटरचित एवं झूठे शपथ पत्रों (Forged Affidavits) के आधार पर सरकारी भूमि हड़पने, अवैध प्लॉटिंग और सरकारी कार्य में व्यवधान डालने के गंभीर आरोप हैं। राज्य सरकार ने जमानत का पुरजोर विरोध करते हुए तर्क दिया कि बनभूलपुरा कांड की नींव इसी अवैध अतिक्रमण को हटाने की प्रक्रिया के दौरान पड़ी थी, जिसमें भारी पथराव हुआ और 5 लोगों की दुःखद मृत्यु हुई थी।
बचाव पक्ष का दावा और न्यायालय का निर्णय
अब्दुल मलिक के अधिवक्ताओं ने न्यायालय में तर्क दिया कि उन्हें इस प्रकरण में राजनीतिक द्वेषवश झूठा फंसाया गया है। उनके अनुसार, मूल प्राथमिकी (FIR) में उनका नाम सम्मिलित नहीं था और पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक इस मामले में संलिप्त किया है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि इसी हिंसा प्रकरण में 100 से अधिक अन्य आरोपियों को पूर्व में ही जमानत मिल चुकी है, अतः समानता (Parity) के आधार पर उन्हें भी रिहा किया जाना चाहिए।
न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने और साक्ष्यों के अभाव व मुकदमों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए जमानत याचिका स्वीकार कर ली। इस आदेश के साथ ही मलिक की जेल से रिहाई का मार्ग प्रशस्त हो गया है। क्या मुख्य साजिशकर्ता की रिहाई से इस संवेदनशील मामले की न्यायिक जांच और शांति व्यवस्था पर कोई प्रभाव पड़ेगा? प्रशासन अब इस आदेश के विरुद्ध उच्च विधिक विकल्पों पर विचार कर रहा है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
