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मोदी-2.0 का पहला, देश की पहले महिला वित्त मंत्री द्वारा पेश किए जा रहे ‘बही खाते’ (बज़ट नहीं) से रेलवे🚈 में बढ़ेगी निजी भागीदारी, राज्यों को मिलेगी सस्ती बिजली..

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नवीन समाचार, नैनीताल, 5 जुलाई 2019। मोदी सरकार-2 का पहला बजटआज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश कर रही हैंवित्तमंत्री पहली बार ब्रीफकेस की बजाए लाल रंग के कपड़े में बजट दस्तावेज लेकर पहुंची जिसे बजट नहीं बल्कि बही खाता बताया गया हैअपने बजट में आने वाले दशक का लक्ष्य देश के सामने रखते हुए सीतारमण ने कहा कि वर्तमान में भारत की अर्थ व्यवस्था विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था है

अपने बजट भाषण के दौरान एक शेर भी पढ़ा। निर्मला ने कहा, ‘यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है’। ये शेर मशहूर शायर मंजूर हाशमी का है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षों में हमारी अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी। भारतीय अर्थ व्यवस्था को एक टि्रलियन लर तक बढ़ने में 55 साल लगे, पिछले पांच साल में हमने अर्थव्यवस्था में एक टि्रलियन डालर जोड़ा हैपांच साल में यह 2।7 टि्रलियन डालर पर पहुंच गईइस साल के अंत तक अर्थ व्यवस्था तीन खरब डालर होगी।

सीतारमण ने कहा कि भारत आज रोजगार देने वाला देश बना है। हमारा जोर अब इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर है। भारतमाला के जरिए हम देश में सड़क हर गांव तक पहुंचा रहे हैं और नेशनल हाइवे का निर्माण कर रहे हैं। इस दौरान वित्त मंत्री ने अपनी कई योजनाओं का जिक्र किया, जिसमें मुद्रा योजना, सागरमाला, मेक इन इंडिया आदि शामिल रहे।

सरकार का केंद्र बिंदु गांव, किसान👷 और गरीब- सीतारमण🤷‍♂️

मोदी सरकार-2 का पहला बजट पेश कर रहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमारी सरकार का केंद्र बिंदु गांव, किसान और गरीब है. हमारा लक्ष्य है कि 2022 तक हर गांव में बिजली पहुंचेगी। उज्ज्वला योजना और सौभाग्य योजना के जरिए देश में काफी बदलाव आया है.

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार न्यू इंडिया पर फोकस कर रही है. पानी और गैस के लिए भी एक राष्ट्रीय ग्रिड बनेगा. सरकार की तरफ से नेशनल ट्रांसपोर्ट कार्ड का ऐलान किया गया है. जिसका इस्तेमाल रेलवे और बसों में किया जाएगा.

वित्त मंत्री ने कहा कि नेशनल ट्रांसपोर्ट कार्ड को रूपे कार्ड की मदद से चलाया जा सकेगा, जिसमें बस का टिकट, पार्किंग का खर्चा, रेल का टिकट सभी एक साथ किया जा सकेगा. इसके साथ ही सरकार ने एमआरओ का फॉर्मूला अपनाने की बात कही है. जिसमें मैन्यूफैक्चरिंग, रिपेयर और ऑपरेट का फॉर्मूला लागू किया जाएगा.

ये है प्रमुख बिन्दु-

🔹 2022 तक 1.95 करोड़ घर बनाएं जाएंगे। 114 दिनों में घर बनाकर दे रहे हैं। पहले 314 दिनों में बनते थे।

🔹 उज्जवला के जरिए सात करोड़ गैस कनेक्शन दिए गए।

🔹 20 प्रोद्योगिकी बिजनेस इंक्यूबेटर स्थापित किए जाएंगे, जिसके जरिए 20 हजार लोगों को स्किल दिया जाएगा।

🔹 देशभर में 10 हजार उत्पादक संघ बनाए जाएंगे।

🔹 जल शक्ति मंत्रालय जल संसाधनों का प्रबंधन करेगा। गांव में हर घर तक पानी पहुंचाया जाएगा।

🔹 रोजना 135 किमी सड़क बनाने का लक्ष्य है। अभी तक 30 हजार किमी सड़क बनाई गई हैं।

🔹 विमानन क्षेत्र, मीडिया, एनीमेशन AVGC और बीमा क्षेत्रों में एफडीआई खोलने के लिए सुझाव आमंत्रित करेगी।

🔹 इसरो की मदद और अभियानों को आगे बढ़ाने के लिए न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड का गठन किया जाएगा।

🔹 हर पंचायत को इंटरनेट से जोड़ेंगे। दो करोड़ से ज्यादा लोगों को डिजिटल साक्षर बनाया।

🔹 अक्टूबर 2019 तक देश खुले में शौच से मुक्त हो जाएगा।

🔹 पीएम आवासा योजना के तहत शहरों में 81 लाख घर बनाए जाएंगे।

4 साल में गंगा नदी पर कार्गो की आवाजाही शुरू होगी।

इलेक्ट्रॉनिक वाहनों को प्रोत्साहन देना है।

रेलवे ढांचे के विकास के लिए 50 हजार करोड़ की आवश्यकता है।

रेलवे के विकास के लिए पीपीपी मॉडल से निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा।

बजट 2018-19 के लिए 300 किमी. मैट्रो रेलवे को मंजूरी।

बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए बजट में वन नेशन, वन ग्रिड प्लान का एलान किया गया है। बिजली टैरिफ में बड़े सुधार की योजना।

आदर्श किराया कानून बनाया जाएगा।

एमएसएमई के लिए 350 करोड़ का आवंटन तथा ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा। छोटे उद्यमियों की कर्जमाफी के लिए 350 करोड़ का प्रावधान।

खूदरा कारोबारियों के लिए पेंशन पर भी विचार । 3 करोड़ दुकानदारों के लिए पेंशन देने का विचार।

शेयर बाजार को निवेशक फ्रेंडली बनाया जाएगा।

देश के पहले महिला वित्त मंत्री द्वारा पेश किए जा रहे ‘बही खाते’ (बज़ट नहीं) से उत्तराखंड को यह हैं उम्मीदें…

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 जुलाई 2019। मोदी-2.0 में देश की पहली महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट नहीं ‘देेेश के बही खाते से मातृसत्तात्मक बहुल समाज वाले उत्तराखंड को कुछ खास मिलने की आस है। वे शुक्रवार को बजट पेश करेंगी। हर साल की तरह से इस बार भी प्रदेश सरकार केंद्र के समक्ष अपनी प्राथमिकता रख चुकी है।

त्रिवेंद्र सरकार चाहती है कि मोदी सरकार के बजट में हरिद्वार महाकुंभ, राष्ट्रीय खेल और रेल परियोजनाओं के लिए उदार इमदाद का प्रावधान हो। वैसे, महिला वित्त मंत्री पर प्रदेश की इस वजह से भी नजर रहेगी कि उत्तराखंड महिला प्रधान प्रदेश है। खासतौर पर पहाड़ में महिलाओं को आर्थिकी की मुख्य धुरी माना जाता है, लेकिन उद्यमिता और रोजगार के अवसर यहां बहुत सीमित हैं। क्या बजट में ऐसी घोषणाएं होंगी जो उनके कार्य बोझ को कम करेगा और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने में मददगार साबित होगा। जहां तक उत्तराखंड सरकार का सवाल है तो उसने हिमालयी राज्य होने के नाते केंद्र से उदार वित्तीय सहायता का अनुरोध किया है। केंद्रीय बजट में प्रदेश सरकार कुछ ऐसा चाह रही है। साथ में प्रदेश में रेल के विकास, खासकर टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन को धन आवंटन होने की भी उम्मीद की जा रही है।

यह भी पढ़ें : चिंताजनक : कर्मचारियों के वेतन व कर्जों की अदायगी पर खर्च हो जाएगा उत्तराखंड का 57% बजट, विकास कार्यों को महज 20%

नवीन समाचार, देहरादून, 20 फरवरी 2019। वित्त मंत्री प्रकाश पंत द्वारा सोमवार को विधानसभा में रखे बजट से राज्य की कमजोर आर्थिक स्थिति की झलक सामने आई है। राज्य में कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशनर्स के लिए इस साल बजट में सरकार ने 20 हजार 455 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। 48 हजार 663 करोड़ के कुल बजट में वेतन-भत्तों और पेंशन आदि के लिए रखी गयी यह राशि कुल बजट के चालीस प्रतिशत के करीब है।  बजट में कर्मचारियों की वेतन-पेंशन पर गतवर्ष के मुकाबले 1338 करोड़ रुपये अधिक खर्च होने का अनुमान है। गत वर्ष वेतन-पेंशन मद में कुल 19 हजार 117 करोड़ रखे थे। इस साल सातवें वेतन के भत्तों की वजह से सरकार पर भार बढ़ गया है। राज्य कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर इस वर्ष 13340 करोड़, सहायता प्राप्त शिक्षण व अन्य संस्थानों के शिक्षकों-कर्मियों के वेतन-भत्तों पर 1173 रुपये और पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्तिक लाभों के लिए 5942 करोड़ रखे गए हैं।

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p style=”text-align: justify;”>लोन चुकाने पर खर्च होगी 17 प्रतिशत राशि 
बजट में लोन और ब्याज की अदायगी पर भी 8208 करोड़ रुपये की भारी राशि खर्च हो रही है। यह राशि कुल बजट का तकरीबन 17 प्रतिशत है। पिछले साल के बजट में ब्याज और लोन की राशि चुकाने के लिए 8088 करोड़ रखे गए थे। ऋणों की वापसी पर इस साल 2876 करोड़ जबकि ब्याज की अदायगी पर 5332 करोड़ खर्च होंगे।

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p style=”text-align: justify;”>विकास कार्यों को महज 9731 करोड़ 
राज्य के बजट का आकार भले ही 48 हजार करोड़ से अधिक हो। लेकिन इस बजट में से नई योजनाओं के लिए महज 9731 करोड़ की ही राशि है। 48633 करोड़ के बजट में से 38932 करोड़ राजस्व मद यानी सरकार की जिम्मेदारियों पर खर्च होंगी। जबकि पूंजी मद में सिर्फ 9731 करोड़ की ही यानी कारीब 20 % राशि का ही प्राविधान किया गया है।

यह भी पढ़ें : त्रिवेंद्र सरकार ने पेश किया पहला सरप्लस व कर मुक्त बजट, पिछले साल के मुकाबले 7% बड़ा बजट, 12 विभागों का बजट घटा

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, देहरादून, 18 फरवरी 2019। प्रदेश के वित्तमंत्री प्रकाश पंत ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए त्रिवेंद्र सरकार का पहला 22.79 करोड़ का राजस्व व कर मुक्त सरप्लस, पिछले साल के मुकाबले 7 फ़ीसदी बड़ा बजट 48663.90 करोड़ का बजट पेश किया। इस कर मुक्त बजट में 9798.15 करोड़ के राजकोषीय घाटे का अनुमान है। 12 विभागों का बजट घटा है। बजट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंडे, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और सुशासन तथा में खेती-किसानी के साथ स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर पर जोर दिया गया है। बजट में अन्न दाता के कल्याण का भरोसा दिलाया गया है। बजट पेश करने के दौरान तब अजीब स्थिति भी उत्पन्न हो गयी जब वित्त मंत्री प्रकाश पंत तबीयत खराब होने से भाषण पढ़ते हुए बेहोश हो गए। इस पर उन्हें सदन से बाहर ले जाना पडा।
इस साल पिछले साल के मुकाबले 7 फ़ीसदी बड़ा बजट, 12 विभागों का बजट घटाइससे पूर्व सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते हुए सदन में सबसे पहले पुलवामा हमले शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। विधायक करन महरा ने मेजर चित्रेश बिष्ट और मेजर विभूति ढौंडियाल को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन स्थगित करने की मांग की। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल व उप नेता सहित अनेकों विधायकों की आंखें नम नजर आईं। आगे 12 बजे के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर विपक्ष की बिना कारण गैर मौजूदगी में तीन संशोधन विधेयक पेश हुए और राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव भी पारित हुआ।

बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि सरकार का जोर किसान और प्राइमरी सेक्टर पर है, ताकि किसान के साथ युवाओं को रोजगार के मौके मिल सके। बजट में राजस्व घाटा नहीं है, बजट सर प्लस है, और राजकोषीय घाटा भी सीमा के अंदर है। सैनिक-अर्धसैनिक मृतक आश्रितों के लिए सेवा योजन का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प ‘सबका साथ सबका विकास’ है। सबसे ज़्यादा शिक्षा विभाग का बजट है. इसके साथ ही स्वास्थ, कृषि विभाग पर फ़ोकस किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि इस वित्त वर्ष के लिए बजट करीब 23 करोड़ सरप्लस है। कुल आय  जहां 48,679 करोड़ अनुमानित है तो व्यय 48,663 करोड़ अनुमानित है. वित्त वर्ष में राज्य कर्मचारियों के वेतन भत्तों के लिए 14,513 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है. पेंशन और अन्य खर्चों के लिए 5,942 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ब्याज के लिए 5,332 करोड़ और लोन पेमेंट के लिए 2,876 करोड़ का खर्च अनुमानित है। 12 विभागों के बजट में पिछले साल के मुकाबले कटौती की गई है. सबसे ज्यादा लोनिवि का बजट 159 करोड़ रुपये कम हुआ है।वहीं खाद्य विभाग का बजट 23 करोड़ रुपये और उद्योग विभाग का बजट पिछले साल से 20 करोड़ रुपये कम हुआ है। स्वच्छ भारत मिशन के लिए बजट में 202 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया हैै। लेकिन अनुसूचित जातियों के कल्याण का बजट 55 करोड़ रुपये कम हुआ है. ग्राम्य विकास का बजट भी पिछले साल से 7 करोड़ रुपये कम हुआ है। कैबिनेट का बजट भी पिछले साल से 32 करोड़ रुपये कम हुआ है। जबकि राजस्व और सामान्य प्रशासन का बजट 150 करोड़ रुपये और सूचना विभाग का बजट पिछले साल से 15 करोड़ रुपये कम हुआ है।

यह भी पढ़ें: जानें क्या है केंद्रीय बजट पर पर्यटन प्रदेश के पर्यटन व्यवसायियों की प्रतिक्रिया

कमलेश सिंह, प्रवीण शर्मा एवं दिग्विजय बिष्ट।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 1 फरवरी 2019। शुक्रवार को आये केंद्र सरकार के बजट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। बजट में कर छूट की सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर सीधे दोगुनी करते हुए पांच लाख की गयी है। वहीं जीएसटी में पंजीकृत उद्योगों के लिए 59 मिनट में एक करोड रुपये के ऋण मात्र दो फीसद ब्याज पर देने की घोषणा हुई है। उधर उत्तराखंड की समान प्रकृति के पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए वर्ष 2018-19 के मुकाबले वर्ष 2019-20 के लिए आवंटन को 21 फीसद बढ़ाकर 58,166 करोड़ किया गया है, किंतु पूरी बजट की रिपोर्ट मंे पांच सांसद देने वाले उत्तराखंड राज्य का कहीं जिक्र भी नहीं किया गया है।
लिहाजा इन स्थितियों पर मुख्यालय के खासक पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आनी लाजिमी हैं। नगर के शेरवानी होटल के प्रबंधक कमलेश सिंह का कहना है, निम्न मध्य वर्ग के लिए अच्छा है। इससे लोगों की बचत होगी, और बचत होगी तो पर्यटन में भी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। लिहाजा बजट कर्मचारियों के लिए बहुत अच्छी खबर लेकर आया है। वहीं उत्तर भारत के होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन के पदाधिकारी प्रवीण शर्मा का कहना है कि पर्यटन उद्योग केंद्रीय बजट से खासा निराश है। बजट में आवभगत से जुड़े पर्यटन उद्योग को छुवा भी नहीं गया है। प्रति रात्रि 7000 से अधिक किराये के कमरों पर 28 फीसद जीएसटी का प्राविधान है। इसके हटने की उम्मीद थी। लेकिन इसे कम नहीं किया गया है। बजट में निवेश बढ़ाने के लिए भी कुछ नहीं है। इन्हीं कारणों से पर्यटन गिरता जा रहा है। उन्होंने कहा कि बजट से उत्तराखंड जैसे राज्यों को काफी नुकसान होने जा रहा है। इसी तरह की प्रतिक्रिया नैनीताल होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन के प्रतिनिधि दिग्विजय बिष्ट की भी आई है। उनका कहना है कि बजट में पर्यटन, पहाड़ एवं उत्तराखंड के लिए कुछ भी नहीं है, जबकि इन क्षेत्रों में कर छूट मिलनी चाहिए थी। हालांकि हाल ही में जीएसटी में पंजीकरण के लिए 10 लाख रुपये तक के कारोबार की सीमा बढ़ाकर पूर्व में ही देश के अन्य राज्यों के बराबर 20 लाख की जा चुकी है। साथ ही उन्होंने कहा कि 5 लाख से अधिक आय वालों के लिए कर छूट पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा उन्होंने जोर देकर कहा कि हिमालयी राज्यों व पर्यटन के लिए अलग से नीति बननी चाहिए थी व खास तौर इस क्षेत्र में नये कर छूट के प्राविधान होने चाहिए थे। आगे रेलवे बजट से नयी रेलों, हवाई सेवाओं व हाई-वे तथा सड़कों आदि के लिए बजट प्राविधानों की उम्मीद है।

यह भी पढ़ें : गांव किसान करदाता सबके लिए छप्पर फाड़ बजट, 5 साल की कसर पूरी

नवीन समाचार नई दिल्ली 1 फरवरी 2019। मोदी सरकार ने आज अपने कार्यकाल का आखिरी बजट पेश किया। इसे चुनावी बजट भी कहा जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस बजट में गांव, गरीब, किसानों, मजदूरों के लिए कई बड़े ऐलान किए। इसमें लंबे समय से प्रतिक्षित आयकर में छूट का ऐलान किया। इस बजट में लगभग हर तबके को कुछ न कुछ देने का ऐलान किया है।

पूरा बजट देखें इस लिंक पर →hbs

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p style=”text-align: justify;”>5 लाख तक इनकम टैक्स में छूट
पीयूष गोयल ने कहा, ‘पांच लाख रुपये तक की व्यक्तिगत आय पूरी तरह से कर मुक्त होगी और विभिन्न निवेश उपायों के साथ 6.50 लाख रुपये तक की व्यक्तिगत आय पर कोई कर नहीं देना होगा। व्यक्तिगत कर छूट का दायरा बढ़ने से तीन करोड़ करदाताओं को 18,500 करोड़ रुपये तक का कर लाभ मिलेगा। वेतनभोगी तबके के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40,000 से बढ़ाकर 50,000 रुपये किया गया।’ इस घोषणा के बाद संसद में काफी देर तक मोदी-मोदी के नारे गूंजते रहे। गोयल ने कहा, ‘हम कर दाताओं का शुक्रिया अदा करते हैं। आपके टैक्स से ही देश का विकास होता है।’

बजट से जुड़ी प्रमुख बातें:

  1. सरकार ने इनकम टैक्‍स स्‍लैब में बड़े बदलाव का ऐलान करते हुए 5 लाख तक की इनकम पर टैक्‍स छूट का प्रस्‍ताव रखा, जिसकी सीमा अब तक 2.5 लाख रुपये थी। इससे 3 करोड़ मध्‍यम वर्ग के परिवारों को फायदा मिलेगा।
  2. सरकार ने स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन को भी 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये करने की बात कही। वहीं, सरकार ने बैंकों में एफडी के ब्‍याज पर 40 हजार तक कोई टैक्‍स नहीं लगने की घोषणा की, जिसकी सीमा अब तक 10 हजार रुपये थी।
  3. वित्‍त मंत्री ने छोटे-सीमांत किसानों के लिए बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि 2 हेक्‍टेयर वाले किसानों के खाते में सालाना सीधे 6 हजार रुपये जाएंगे। यह योजना 1 दिसंबर, 2018 से लागू होगी। सरकार की इस योजना से करीब 12 करोड़ किसानों को फायदा होगा।
  4. गायों के लिए सरकार कामधेनु योजना शुरू करेगी। मछली पालन के लिए भी आयोग बनेगा। पशुपालन और मत्‍स्‍यपालन के लिए लिए जाने वाले कर्ज में 2 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
  5. सरकार ने कामकाजी लोगों के लिए अहम घोषणा करते हुए कहा कि वेतन आयोग की सिफारिशें जल्‍द लागू की जाएंगी। सरकारी कर्मचारियों के लिए नई पेंशन योजना आसान बनाई जाएगी।
  6. सरकार ने 21 हजार मासिक से कम वेतन पर काम करने वाले कामगारों को 7 हजार रुपये का बोनस देने की बात कही है। साथ ही ग्रेच्‍युटी की सीमा बढ़ाकर 20 लाख किए जाने का ऐलान किया गया।
  7. प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन योजना को मंजूरी प्रदान कर दी गई है, जिसका लाभ 15 हजार कमाने वाले कर्मचारियों को मिलेगा। कामगार की आकस्मिक मृत्‍यु की स्थिति में 6 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की गई है। सरकार ने
  8. अहम घोषणा करते हुए कहा कि जिनका ईपीएफ कटता है, उन्‍हें 6 लाख रुपये का बीमा प्रदान किया जाएगा।
  9. महिलाओं को ध्‍यान में रखते हुए सरकार ने अहम घोषणा करते हुए कहा कि सरकार 6 करोड़ महिलाओं को उज्‍जवला योजना के तहत एलपीजी कनेक्‍शन दे चुकी है। इस योजना के तहत महिलाओं को 8 करोड़ और एलपीजी कनेक्‍शन दिए जाएंगे।
  10. बजट पेश करते हुए वित्‍त मंत्री ने कहा कि देशभर में लोगों को उम्‍दा स्‍वास्‍थ्‍य सेवा मुहैया कराने के लिए दिल्‍ली के एम्‍स की तर्ज पर एम्‍स बनाए जा रहे हैं। इसी के तहत हरियाणा में देश का 22वां एम्स शुरू होने जा रहा 2 वर्षों के भीतर, कर निर्धारण इलेक्ट्रॉनिक रूप से किया जाएगा
  11. 2. आईटी सिर्फ 24 घंटे में प्रोसेसिंग कर देता है
  12. 3. केंद्रीय सरकार द्वारा राज्यों को जीएसटी का न्यूनतम 14% राजस्व।
    4. 36 कैपिटल गुड्स से कस्टम ड्यूटी खत्म कर दी गई है
    5. घर खरीदारों के लिए जीएसटी दरों को कम करने के लिए जीएसटी परिषद की सिफारिशें
    6. “सभी कटौती के बाद 5 लाख वार्षिक आय तक पूर्ण कर छूट।”
    7. स्टैंडर्ड डिडक्शन 40000 से बढ़कर 50000 हो गया है
    8. दूसरे स्व-कब्जे वाले घर पर कर की छूट
    9. टीडीएस यू / एस 194 ए की सीलिंग सीमा 10000 से 40000 हो गई है
    10. TDS u / s 194I की सीलिंग सीमा 180000 से बढ़कर 240000 हो गई है
    11. कैपिटल टैक्स बेनेफिट यू / एस 54 एक आवासीय घर में निवेश से बढ़कर दो आवासीय घरों तक पहुंच गया है।
    12. बेनिफिट यू / एस 80IB एक और वर्ष यानी 2020 तक बढ़ गया है
    13. अनसोल्ड इन्वेंट्री को दिया गया लाभ एक साल से दो साल तक बढ़ गया है।
    *अन्य क्षेत्र*
    14. राज्य का हिस्सा बढ़कर 42% हो गया है
    15. पीसीए प्रतिबंध 3 प्रमुख बैंकों से समाप्त कर दिया गया है
    16. 10% आरक्षण के लिए 2 लाख सीटें बढ़ेंगी
    17. मनरेगा के लिए 60000 करोड़
    18. सभी के लिए भोजन सुनिश्चित करने के लिए 1.7 लाख करोड़
    19. हरियाणा में 22 वां एम्स खोला जाना है
    20. पीएम किसान योजना को मंजूरी दी जानी है
    21. रुपये। 2 हेक्टेयर भूमि तक प्रत्येक किसान को 6000 प्रतिवर्ष दिया जाना है। सितंबर 2018 से लागू। राशि 3 किश्तों में स्थानांतरित की जाएगी
    22. गायों के लिए राष्ट्रीय कामधेनु अयोग। रुपये। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के लिए 750 करोड़
    23. पशुपालन करने वाले किसानों के लिए 2% ब्याज उपशमन और मत्स्य पालन के लिए अलग विभाग भी बनाना।
    २४. प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए २% ब्याज और समय पर भुगतान के लिए अतिरिक्त ३% ब्याज सबवेंशन।
    25. कर मुक्त ग्रेच्युटी सीमा 10 लाख से 20 लाख तक बढ़ जाती है
    26. 21000 मासिक कमाने वाले श्रमिकों के लिए बोनस लागू होगा
    27. प्रधान मंत्री श्रम योगी मन्धन नामक योजना, रु। की अनुमानित मासिक पेंशन प्रदान करेगी। 3,000 रुपये के योगदान के साथ। 60 वर्ष की आयु के बाद असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए 100 प्रति माह।
    28. हमारी सरकार ने उज्जवला योजना के तहत 6 करोड़ मुफ्त एलपीजी कनेक्शन वितरित किए
    29. MSME GST पंजीकृत व्यक्ति के लिए 2% ब्याज राहत
    30. महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश
    31. रक्षा के लिए 3 लाख से अधिक करोड़
    32. अगले 5 वर्षों में एक लाख डिजिटल गांव
    33. भारत फिल्म निर्माताओं की मंजूरी के लिए एकल खिड़की

यह भी पढ़ें : अकेले 21000 करोड़ का कर्ज थोप उत्तराखंड को 44000 करोड़ के कर्ज में डुबो गए हरीश रावत

पत्रकार वार्ता करते काबीना मंत्री प्रकाश पंत।

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p style=”text-align: justify;”>–पूर्व सीएम रावत के सरकार को वित्तीय स्थिति सामने रखने की चुनौती पर राज्य के वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने दिया जवाब
-कहा सरकार राज्य की राजधानी पर किसी भी प्रस्ताव पर सदन में विचार करने को है तैयार
नैनीताल। उत्तराखंड सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने राज्य की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर राज्य का वित्तीय संतुलन बिगाड़ने और राज्य पर पांच वर्षों में 21000 करोड़ रुपए का कर्ज थोपने का आरोप भी लगाया।

यह भी देखें : 

नैनीताल क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में राज्य के सबसे मजबूत काबीना मंत्री कहे जाने वाले पंत ने पूर्व सीएम हरीश रावत के सरकार को वित्तीय स्थिति सामने रखने की चुनौती पर पूछे गए सवाल के जवाब में सिलसिलेवार तरीके से राज्य की वित्तीय स्थिति को सामने रखा। बताया कि 2002-03 में राज्य पर कर्ज 6002 करोड़ का व राज्य की वृद्धि दर 33.78 फीसद थी। किंतु भाजपा को जब 2006-07 में पहली बार सरकार बनाने का मौका मिला तब कर्ज दोगुने से अधिक 13,033 करोड़ और विकास दर 11.26 फीसद रह गई थी। भाजपा ने 2011-12 में 23,609 करोड़ के कर्ज व वृद्धि दर 15.2 फीसद के साथ सत्ता छोड़ी। इसके बाद कांग्रेस शासन में 2015-16 में कर्ज 39000 करोड़ व वृद्धि दर 9.31 फीसद थी, जिसे हरीश रावत ने जाते-जाते 2016-17 में 44000 करोड़ और वृद्धि दर वापस 9.2 फीसद करके छोड़ा है। बताया कि सरकार अपने दृष्टिकोण पत्र के अनुसार कार्य कर रही है। इस वर्ष 1557 करोड़ की आय का लक्ष्य रखा गया है, और इसमें से अब तक 9400 करोड़ रुपए प्राप्त कर लिए गए हैं। बताया कि राज्य का पूरा बजट 31550 करोड़ का है, जिसमें से 16087 करोड़ रुपए विभिन्न योजनाओं में स्वीकृत भी कर दिए हैं। कहा कि वित्तीय वर्ष में आखिरी समय में खर्च करने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए दिसंबर माह से व्यय की सीमा को नियंत्रित किया जाएगा। कर्मचारियों के आंदोलन पर बोले कि बिना कहे ही उत्तराखंड सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार कर्मचारियों को करीब 3000 करोड़ की वेतन स्वीकृतियां, करीब 6000 करोड़ रुपए का एरियर करीब 130 करोड़ का बोनस दे दिया। फिर भी कोई विसंगतियां हैं तो इन्हें वेतन विसंगति समिति के समक्ष रखा जा सकता है। एसीपी जैसी मांगें अंतहीन हैं। कर्मचारी हड़ताल न करें व राज्य की हड़ताली प्रदेश की छवि को तोड़ें। इस मौके पर नगर अध्यक्ष मनोज जोशी, शांति मेहरा, गोपाल रावत, बालम मेहरा, दयाकिशन पोखरिया आदि भी मौजूद रहे।

13 जिलों का उत्तराखंड, 3 राजधानियां, अभी भी नहीं यह गुत्थी सुलझने की उम्मीद

नैनीताल। 17 वर्ष के किशोर हो चुके 13 जिलों के छोटे से राज्य उत्तराखंड राज्य की राजधानी के कार्य अस्थाई राजधानी बताये जाने वाले देहरादून से चलते हैं, जबकि 1994 के राज्य निर्माण आंदोलन से भी पूर्व से गैरसैण को राजधानी बनाये जाने की मांग रही है। इधर पिछली कांग्रेस सरकार गैरसैण की जगह गैरसैण से 22 किमी दूर भराड़ीसैण में राजधानी के साथ देहरादून के पास रायपुर में भी विधानसभा का निर्माण करा रही है। इन 3 राजधानियों की गुत्थी के सुलझने की उम्मीद लम्बे समय से की जा रही है। हालांकि अब भी उत्तराखंड सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत का कहना है कि इस सम्बन्ध में कोई प्रस्ताव नहीं है। अलबत्ता उनका कहना है कि गैरसेंण (भराड़ीसेंण) में आगामी सात से 13 दिसंबर तक आयोजित होने जा रहे शीतकालीन सत्र में यदि राज्य की राजधानी के विषय में कोई प्रस्ताव आता है तो सरकार इस पर विचार करने के लिए तैयार है। कहा कि राज्य की राजधानी कहां हो, यह तय करने का कार्य विधानसभा सदन का है, और यह कार्य वहीं तय होगा।

हरदा के साथ ‘हरदा ब्रांड’ की शराब का जनाधार भी 100 गुना घटा 

नैनीताल। बतौर आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने बताया कि ‘हरदा ब्रांड’ के रूप में प्रचारित डेनिस स्पेशल ह्विस्की राज्य की जनता पर पिछली सरकार द्वारा जबरन थोपी जा रही है। इसका प्रमाण यह है कि यह ब्रांड 2015-16 में 2,73,393 पेटी बेची गयी, जबकि 2016-17 में राष्ट्रपति शासन व चुनाव आचार संहिता के बीच करीब आठ सक्रिय महीनों में केवल 40,520 पेटी और इधर इस वर्ष करीब 100 गुना कम केवल 2,800 पेटी ही बिकी है। वहीं इसके साथ सरकार द्वारा जनता को उपलब्ध कराई जा रही 43 ब्रांडों की शराब 7.8 लाख पेटी बेची गयी है।

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