नवीन समाचार, देहरादून, 28 मार्च 2026 (11 Strict Rules for Madarsas in UK)। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने प्रदेश के शिक्षा तंत्र को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। अल्पसंख्यक प्राधिकरण (Minority Authority) ने प्रदेश के मदरसों के लिए 11 नए और कड़े मानक जारी किए हैं। अब बिना इन मानकों को पूरा किए किसी भी मदरसे को मजहबी शिक्षा देने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, राज्य के सभी 482 मान्यता प्राप्त मदरसों को अब शिक्षा विभाग से नए सिरे से मान्यता लेनी अनिवार्य कर दी गई है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की आज हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में स्पष्ट किया गया कि नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि धामी सरकार पहले ही 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय ले चुकी है, जिससे अब ये संस्थान सीधे शिक्षा विभाग के नियंत्रण में आ जाएंगे।
ये हैं सरकार के 11 नए ‘कड़े’ नियम:
सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार, अब मदरसों को इन शर्तों की कसौटी पर खरा उतरना होगा:
अल्पसंख्यक संचालन: मदरसा अनिवार्य रूप से अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित और संचालित होना चाहिए।
पंजीकरण अनिवार्य: सोसायटी रजिस्ट्रार के पास संस्थान का विधिवत पंजीकरण होना जरूरी है।
जमीन का मालिकाना हक: जिस जमीन पर मदरसा बना है, वह संबंधित सोसायटी के नाम पर दर्ज होनी चाहिए।
शिक्षा परिषद से संबद्धता: संस्थान का किसी मान्यता प्राप्त शिक्षा परिषद से जुड़ा होना अनिवार्य है।
वित्तीय पारदर्शिता: सभी तरह के वित्तीय लेनदेन केवल आधिकारिक बैंक खाते के माध्यम से ही होंगे।
अल्पसंख्यक सदस्य: सोसायटी के सभी सदस्यों का अल्पसंख्यक समुदाय से होना अनिवार्य किया गया है।
धार्मिक स्वतंत्रता: किसी भी छात्र या शिक्षक को किसी विशेष धार्मिक गतिविधि में शामिल होने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
योग्य शिक्षक: मदरसों में केवल डिग्रीधारी और योग्य शिक्षकों की ही नियुक्ति की जा सकेगी।
सरकारी निर्देश: शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में प्राधिकरण के निर्देश सर्वोपरि होंगे।
सौहार्द का संरक्षण: संस्थान में ऐसा कोई कार्य नहीं होगा जिससे सामाजिक या सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़े।
पुनः मान्यता: सभी पुराने संस्थानों को नए मानकों के आधार पर शिक्षा विभाग से मान्यता लेनी होगी।
मदरसा संचालकों में हड़कंप और विरोध के सुर
सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश के मदरसा संचालकों और मुस्लिम प्रतिनिधियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। शनिवार को अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी जे.एस. रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रतिनिधियों ने सरकार पर ‘सौतेला व्यवहार’ करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि बिना पर्याप्त समय दिए और बिना स्पष्टता के ऐसे कठिन नियम थोपना शिक्षा व्यवस्था को ठप करने की साजिश है।
50 हजार छात्रों के भविष्य पर नजर, जिलों से मांगी रिपोर्ट
वर्तमान में उत्तराखंड के नैनीताल, उधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून सहित विभिन्न जिलों में 482 मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं, जिनमें 50 हजार से अधिक छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। मदरसा बोर्ड के निदेशक गिरधारी सिंह रावत ने सभी जिलाधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, ताकि यह जांचा जा सके कि कितने मदरसे इन 11 नए मानकों को पूरा करते हैं। जो संस्थान मानक पूरे नहीं करेंगे, उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।














