-सभी मामले खारिज कर किया दोषमुक्त
नवीन समाचार, नैनीताल, 17 मार्च 2026 (High Court on Husband-Wife Separation)। उत्तराखंड (Uttarakhand) से जुड़े एक वैवाहिक विवाद में दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए रानीखेत (Ranikhet) निवासी पति को पत्नी द्वारा लगाए गए आपराधिक आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। न्यायालय ने घरेलू हिंसा अधिनियम (Domestic Violence Act) और भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code-IPC) की धारा 498ए के तहत चल रही कार्यवाही को निरस्त करते हुए कहा कि आरोपों में ठोस और स्पष्ट तथ्यों का अभाव है। यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैवाहिक विवादों में कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग और साक्ष्यों की आवश्यकता पर स्पष्ट संदेश देता है।
विवाह से विवाद तक: अलग जीवनशैली बनी मुख्य कारण

संबंधों में तनाव और अलगाव की कहानी
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार 25 जनवरी 2005 को हल्द्वानी (Haldwani) में रानीखेत निवासी संदीप पाठक (Sandeep Pathak) और दिल्ली (Delhi) निवासी महिला का विवाह आपसी सहमति से हिंदू रीति-रिवाजों और प्रथाओं के अनुसार हुआ था। किंतु विवाह के उपरांत महिला दिल्ली में पली-बढ़ी लड़की होने के कारण अपने पति के उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद के रानीखेत जिला अल्मोड़ा उत्तराखंड स्थित ससुराल में 25 से 30 जनवरी तक मुश्किल से 6 दिनों तक अपनी ससुराल में रही और पति व परिजनों के द्वारा उसे सहज महसूस कराने के लिए किए गए प्रयासों के बावजूद पति को उसे उसके माता-पिता के घर, दिल्ली छोड़कर आना पड़ा।
जून 2005 के दूसरे सप्ताह में एक सप्ताह के लिए वह बीच में रानीखेत आई, लेकिन फिर से कहा कि वह ग्रामीणों के साथ गाँव में नहीं रहना चाहती और दिल्ली लौटने पर जोर दिया और पति से भी दिल्ली रहने को कहा। पति ने वहाँ जाकर बसने में अपनी असमर्थता व्यक्त की और उससे ही रानीखेत में रुकने का अनुरोध किया। 20 जून को पति संदीप पाठक पत्नी के साथ दिल्ली गये और उसके माता-पिता से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उसका व्यवहार हमेशा से ऐसा ही रहा है।
उस रात पत्नी ने पति को धमकी दी कि यदि उसने उसके माता-पिता से उसके आचरण के बारे में शिकायत की तो वह कथित तौर पर आत्महत्या कर लेगी और पति को झूठे मामले में फंसा देगी। इस आचरण से व्यथित होकर पति इस उम्मीद में कि समय के साथ स्थिति सुधर जाएगी, अकेला ही रानीखेत लौट आये। आगे फरवरी 2006 में पत्नी फिर से रानीखेत आई, लेकिन इस बार भी दोनों के बीच रिश्ते तनावपूर्ण बने रहे। दिसंबर 2006 में पति फिर सुलह की कोशिश करते हुए दिल्ली के रोहिणी स्थित पत्नी के घर गये, लेकिन आरोप है कि पत्नी ने उनके साथ गाली-गलौज और दुर्व्यवहार किया।
जून 2007 में पत्नी फिर रानीखेत आई और मांग की कि पति तुरंत उसके साथ दिल्ली चले। लेकिन पति के मना करने पर आरोपों के अनुसार पति ने पति और उनके परिवार के सदस्यों को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी, ताकि वे जेल में सड़ते रहें। आखिरी बार पत्नी अक्टूबर 2007 में रानीखेत आई और इसके बाद उसने पति को छोड़ दिया और उन्हें दिल्ली आने से मना कर दिया। इसके बाद दोनों के बीच सुलह के कई प्रयास किए, लेकिन सब व्यर्थ रहे।
तलाक और उसके बाद दर्ज हुए आपराधिक मामले
लगभग चार वर्ष तक अलग रहने के बाद पति ने जुलाई 2011 में वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश (Senior Civil Judge) अल्मोड़ा (Almora) के समक्ष तलाक याचिका दायर की। वर्ष 2012 में एकतरफा तलाक की डिक्री पारित हुई, जिसे चुनौती नहीं दी गई।
लेकिन इसके पश्चात पत्नी ने दिल्ली में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत और दहेज उत्पीड़न से संबंधित आपराधिक अभियोग दर्ज कराया।
न्यायालय की टिप्पणी: आरोप सामान्य और अस्पष्ट
मामले की विस्तृत सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि शिकायत में लगाए गए आरोप सामान्य और अस्पष्ट थे तथा उनमें घटनाओं का स्पष्ट विवरण नहीं था। न्यायालय के अनुसार धारा 498ए के अंतर्गत ‘क्रूरता’ सिद्ध करने के लिए ठोस और विशिष्ट घटनाओं का होना आवश्यक है, जो इस मामले में प्रस्तुत नहीं किया गया।
दहेज से जुड़े आरोपों में भी पर्याप्त साक्ष्यों का अभाव पाया गया। न्यायालय ने यह भी महत्वपूर्ण माना कि तलाक की डिक्री पहले ही पारित हो चुकी थी, जिससे वैवाहिक संबंध समाप्त हो गया था।
घरेलू संबंध समाप्त होने के बाद शिकायत को माना अनुचित
दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा (Neena Bansal Krishna) की पीठ ने यह निर्णय सुनते हुए कहा कि तलाक के बाद ‘घरेलू संबंध’ (Domestic Relationship) का आधार समाप्त हो जाता है। ऐसे में बाद में दर्ज की गई घरेलू हिंसा की शिकायत विधिक दृष्टि से टिकाऊ नहीं है।
अदालत ने इस प्रकार की कार्यवाही को कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए वर्ष 2013 से लंबित आपराधिक अभियोग और घरेलू हिंसा अधिनियम के अंतर्गत चल रही कार्यवाही को निरस्त कर दिया।
सामाजिक और मानवीय पहलू भी आए सामने
यह प्रकरण केवल कानूनी विवाद नहीं बल्कि सामाजिक और मानवीय परिस्थितियों को भी उजागर करता है। पहाड़ी और महानगरीय जीवनशैली के अंतर, वैवाहिक अपेक्षाओं में असंतुलन जैसे कारण इस विवाद के मूल में दिखाई देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैवाहिक विवादों को आपराधिक स्वरूप देने से पहले तथ्यों की गंभीरता और साक्ष्यों की मजबूती पर विचार करना भी आवश्यक है। अन्यथा यह न्यायिक प्रक्रिया पर अनावश्यक दबाव डाल सकता है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
