नवीन समाचार, देहरादून, 1 सितंबर 2025 (Cyber fraud of 1-47 Crores by Digitally Arrest)। नैनीताल में वृद्ध पूर्व कुलपति से साइबर ठगों द्वारा डिजिटल गिरफ्तारी का सहारा लेकर 1.47 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का देहरादून में अनावरण हो गया है। पुलिस ने इस मामले में हिमाचल प्रदेश के सोलन निवासी राजेंद्र कुमार को दबोच लिया है। पीड़ित महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त कुलपति हैं। उन्हें व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से महाराष्ट्र पुलिस के साइबर अपराध प्रकोष्ठ का अधिकारी बनकर धमकाया गया था और 12 दिन तक घर में ही डिजिटल गिरफ्तारी में रखा गया।
व्हाट्सएप कॉल से की गई डिजिटल गिरफ्तारी
पुलिस व संबंधितों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ठगों ने पीड़िता के नाम पर बैंक खाते में 60 करोड़ रुपए के धन शोधन के लेनदेन का आरोप लगाते हुए उन पर अभियोग दर्ज होने का भय दिखाया। इसके बाद पीड़िता को लगातार दूरभाष संदेश कॉल पर संपर्क में रहने और किसी अन्य व्यक्ति से वार्ता न करने का दबाव डाला। इस दौरान आरोपितों ने पीड़िता से विभिन्न बैंक खातों में कुल 1.47 करोड़ रुपए जमा करवा लिए।
नैनीताल निवासी सेवानिवृत्त कुलपति से साइबर ठगी
नैनीताल निवासी पीड़िता सेवानिवृत्त कुलपति बीना साह ने साइबर पुलिस थाने में शिकायत प्रस्तुत की। जांच के बाद पुलिस ने सोलन निवासी राजेंद्र कुमार का नाम सामने आने पर दबिश दी और उसे पकड़ लिया। एसटीएफ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत भुल्लर ने बताया कि आरोपित ने पीड़ित को महाराष्ट्र साइबर अपराध प्रकोष्ठ का अधिकारी बताकर झूठे अभियोग में फंसाने का भय दिखाया था।
बैंक खातों के सत्यापन के नाम पर धोखाधड़ी
जांच में खुलासा हुआ कि ठगों ने पीड़ित को बैंक खातों के सत्यापन के नाम पर धमकाया। राजेंद्र कुमार के पास से इंटरनेट बैंकिंग के लिए पंजीकृत दूरभाष नंबर, ठगी में प्रयुक्त यंत्र, वाई-फाई राउटर, चेक बुक और अन्य संबंधित अभिलेख बरामद हुए हैं।
जानकारी के अनुसार आरोपित ने फर्म कॉसमॉस इंटरप्राइजेज के नाम पर एक बैंक खाता खुलवाया था, जिसमें पीड़िता से 50 लाख रुपये की धनराशि स्थानांतरित कराई गई। यह बैंक खाता अन्य व्यक्तियों के नाम पर खुलवाकर नेटबैंकिंग के माध्यम से संचालित किया जा रहा था।
पुलिस ने आरोपित के पास से बैंक खाते का पंजीकृत मोबाइल नंबर, घटना में प्रयुक्त मोबाइल यंत्र, वाई-फाई राउटर, बैंक खाते से संबंधित हस्ताक्षरित खाली चेक और फर्म से जुड़े अन्य अभिलेख बरामद किये हैं। प्रारंभिक पूछताछ में अभियुक्त ने खुलासा किया कि साइबर अपराध के लिए उपयोग किए गए बैंक खातों में जून से अगस्त 2025 तक लाखों रुपये का लेन-देन हुआ है।
गिरफ्तार आरोपित राजेन्द्र कुमार पुत्र सोमनाथ, वर्तमान में फ्लैट संख्या 2, ब्लॉक 15, लीली अपार्टमेंट, अमरावती, बद्दी, जिला सोलन, हिमाचल प्रदेश में रह रहा था, जबकि उसका स्थायी पता ग्राम लक्खीबंस, थाना रादौर, जिला यमुनानगर, हरियाणा है। इस कार्रवाई में निरीक्षक अरुण कुमार, अपर उपनिरीक्षक सत्येन्द्र गंगोला, हेड कांस्टेबल सोनू पांडे और मनोज कुमार शामिल थे।
खातों में करोड़ों के लेनदेन के प्रमाण
पुलिस के अनुसार, ठगी में उपयोग किए गए बैंक खातों में जून से अगस्त तक करोड़ों रुपए के लेनदेन हुए हैं। आरोपित ने विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर ठगी से प्राप्त धन को तुरंत अन्य खातों में स्थानांतरित किया।
साइबर ठगों का नया छल-कपट
विदित हो कि डिजिटल गिरफ्तारी साइबर ठगों का नया तरीका है। इसमें ठग दूरभाष या वीडियो कॉल के माध्यम से स्वयं को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को भयभीत करते हैं। वे झूठा अभियोग दर्ज होने की बात कहकर पीड़ित को डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी देते हैं। भयवश कई लोग अपनी गाढ़ी कमाई ठगों को सौंप देते हैं।
डिजिटल गिरफ्तारी का कोई प्रावधान नहीं (Cyber fraud of 1-47 Crores by Digitally Arrest)
पुलिस ने स्पष्ट किया कि डिजिटल गिरफ्तारी जैसा कोई प्रावधान नहीं है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को अधिकारी बताकर ऐसी धमकी देता है, तो cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें या सहायता के लिए 1930 पर संपर्क करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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