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प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच कर भी नहीं हो पा रहा उत्तराखंड की इस समस्या का निदान !

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उत्तराखंड में बंदरों के आतंक की समस्या पीएमओ पहुंची, प्रधानमंत्री मोदी से बंदरों से निजात दिलाने के लिये ‘नमो एप’ पर लगायी गुहार

रवीन्द्र देवलियाल, नैनीताल, 29 सितम्बर। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बंदरों व वन्य जीवों का आतंक एक बड़ी चुनौती बन गयी है। पहाड़ सी जिदंगी के आगे उत्तराखंड के लोग पहले ही पस्त थे लेकिन वन्य जीवों व बंदरों की इस समस्या ने जनता को झकझोर कर रख दिया है। वन्य जीवों के आतंक के चलते पहाड़ की कृषि तबाह हो गयी व हरे भरे रहने वाले खेत बंजर पड़ गये हैं। लोग बेकार व बेरोजगार हो गये हैं। इससे प्रदेश में तेजी से पलायन बढ़ रहा है। पहाड़ खाली हो रहे हैं।
इस पहाड़ सी समस्या का न तो प्रदेश सरकार व न ही वन विभाग के पास कोई समाधान दिखायी दे रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में चुनावों में अब विकास मुद्दा नहीं रहा बल्कि वन्य जीवों के आतंक से निजात दिलाने का मुद्दा पहले नम्बर पर रहा है लेकिन हासिल सिफर है। अब हार झक मार कर लोग इस समस्या से निजात दिलाने के लिये केन्द्र सरकार से गुहार लगा रहे हैं।
बंदरों की इसी समस्या से निजात दिलाने के लिये प्रदेश की गैर सरकारी संस्था देवभूमि जनसेवा समिति ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का दरवाजा खटखटाया है। संस्था के संचालक अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट ब्लॉक के देवलधार तोक निवासी किसान व सामाजिक कार्यकर्ता राजेन्द्र सिंह नेगी ने नमो एप पर प्रधानमंत्री को संबोधित एक शिकायत भेजी है। नमो एप पर नेगी की इस शिकायत को पंजीकृत भी कर लिया गया है। इस शिकायत का पंजीकरण संख्या पीएमओ/ई/2018/0453790 है।

नेगी ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में बंदरों के आतंक की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। पहाड़ की जनता बेरोजगार हो गयी है। बंदर खेती को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। कृषि व वानिकी पूरी तरह से तबाह हो गयी है। खेत बंजर हो गये हैं। बंदर फसल को होने से पहले ही तबाह कर दे रहे हैं। ऐसे में पहाड़ की पूरी आर्थिकी बिगड़ गयी है। लोगों की बाजार पर निर्भरता बढ़ गयी है।
प्रधानमंत्री को भेजी शिकायत में कहा गया है कि पहले पहाड़ों में किसान खेतीबाड़ी पर निर्भर रहता था।काश्तकार फल, साग-सब्जी के साथ साथ परंपरागत खेती करता रहता था लेकिन अब वन्य जीवों के चलते कुछ नहीं कर पा रहा है। शिकायत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस समस्या से निजात दिलाने की मांग की गयी है। साथ ही उल्लेख किया गया है कि काश्तकारों को इस समस्या के बदले किसी प्रकार का मुआवजा भी नहीं मिलता है।

वन विभाग के सर्वे के अनुसार राज्य में बंदरों की आबादी 1.46 लाख व लंगूरों की संख्या 54800 है। बंदरों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है।

राजेंद्र नेगी ने बताया कि पीएमओ के शिकायत दर्ज करने के बाद प्रधानमंत्री के ट्विटर पर भी ट्वीट कर इस बड़ी समस्या को सामने रखा गया। 2015 से चल रही बंदरों के बधियाकरण की योजना प्रदेश में वर्ष 2015 में बंदर बधियाकरण योजना शुरू तो की गई, लेकिन इसकी रफ्तार इतनी धीमी हैं कि बंदरों की आबादी नियंत्रित नहीं हो पा रही। हरिद्वार के चिड़ियापुर में दो करोड़ की लागत से राज्य के पहले बधियाकरण सेंटर का निर्माण किया गया। जबकि हल्द्वानी के गौलापार में वन विभाग की भूमि पर तकरीबन चालीस हजार बंदरों को रखने की क्षमता वाला बंदरबाड़ा अभी तैयार होना है। इसके अलावा कुमाऊं में अल्मोड़ा, रानीबाग और नैनीताल जू में बंदरों का बधियाकरण किया जा रहा है, लेकिन स्टाफ की कमी और संसाधनों के अभाव में यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही।

वन प्रभागों में बंदरों संख्या :

प्रभाग=संख्या

तराई पूर्वी=9963

तराई पूर्वी=9963

अल्मोड़ा=9477

रामनगर=8400

नैनीताल=7500

तराई पश्चिम=7100

टिहरी=7020

कालसी=6900

रामनगर=6000

हल्द्वानी=5300

देहरादून=4900

राजाजी पार्क=4600

बंदरबाड़ा बनने के बाद काम में तेजी आएगी

वनाधिकारियों के अनुसार बंदरों के बधियाकरण के लिए नैनीताल जू में कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाता है। तराई-पूर्वी वन प्रभाग में भी कार्य किया जा रहा है। बंदरबाड़ा बनने के बाद इस काम में तेजी आएगी।

यह भी पढ़ें : वन विभाग ने आखिर ढूंढ लिया बंदरों की समस्या का इलाज, प्रमुख वन संरक्षक ने किया खुलासा

-अल्मोड़ा व रानीबाग में होगी बंदरों की नसबंदी, कुमाऊँ व गढ़वाल में बनाये जाएंगे 3-4 हजार की संख्या में रखने के दो बाड़े 
-वन रक्षकों के 1200 पदों पर शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया 
नैनीताल। प्रदेश में बंदरों की समस्या के समाधान के लिए चिड़ियापुर की तरह अल्मोड़ा व रानीबाग में बंध्याकरण केंद्र को जल्द शुरू किया जाएंगे।

इस प्रकार वन विभाग अब तक केवल चिड़ियाघर में ही बंदरों पर चल पा रही कार्रवाई को विभाग तीन गुना बढ़ाएगा। इसके अलावा बंदरों को एक बार में 3-4 हजार की संख्या में रखने के दो बाड़े कुमाऊँ व गढ़वाल में बनाये जा रहे हैं। प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसके अलावा आगामी वर्षाकाल में वनों में जल संरक्षण के भी कार्य किये जाएंगे।
कुमाऊं के दौरे पर आये प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने शनिवार को नैनीताल चिड़ियाघर में एक भेंट में कहा कि वे 12-13 दिन के दौरे पर यहां आये हैं। प्रदेश में वनाग्नि की बड़ी समस्या इन दिनों मुंहबांये खड़ी है। विभाग आग बुझाने में पूरी ताकत लगाए हुए है। अल्मोड़ा में स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए जनता दरबार भी लगाया जा रहा है। वन रक्षकों की 1400 पद खाली हैं, इनमें से 1200 से अधिक पदों का विज्ञापन निकल चुका है, इससे अधिकांश पद भर जाएंगे। इस दौरान नैनीताल जू का निरीक्षण भी किया।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में एक माह में 256 लोगों को आवारा कुत्तों ने काटा, नगर में आवारा कुत्तों के झुंड वाले 16 स्थान चिन्हित

नैनीताल, 28 मई 2018। ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन के बीच जिला व मंडल मुख्यालय नैनीताल में आवारा कुत्तों का आतंक जारी है। सोमवार को जिला अस्पताल में सात लोग जबकि 28 अप्रैल से 27 मई के बीच एक माह में शहर के 256 लोगों को आवारा कुत्तों के द्वारा काटे जापे के बाद जिला अस्पताल में रैबीज के इंजेक्शन लगाये गये। इधर नगर पालिका क्षेत्र में कुत्तों के झुण्ड रहने के 16 स्थानों को चिन्हित किया गया है। अब यहां डीएम के आदेशों के बाद प्राथमिकता से कटखने कुत्तों का टीकाकरण व बधियाकरण किया जाएगा। इधर 2017 में ह्यूमन सोसायटी के माध्यम से नगर में 836 कुत्तों का बधियाकरण कराने का दावा किया गया है, वहीं नगर पालिका क्षेत्र में मात्र 30 पालतू कुत्तों का ही रजिस्ट्रेशन कुत्ता पालकों द्वारा कराया गया है, जबकि शहर के 30 फीसद लोगों के द्वारा कुत्ते पाले जाते हैं।

हाईकोर्ट के जजों के आवास भी आवारा कुत्तों से सुरक्षित नहीं, 9 वर्षीय बच्चे को नोंचा

-जिला अस्पताल में रैबीज के इंजेक्शन उपलब्ध नहीं, बाहर से मंगाये गये

बुधवार को जिला अस्पताल में बालक के घाव की सिलाई करते स्वास्थ्य कर्मी।

नैनीताल। आवारा कुत्तों के आतंक से नगर का कोई भी क्षेत्र सुरक्षित नहीं। मंगलवार सुबह तो आवारा कुत्तों ने एक तरह से चुनौती देते हुए नगर के वीवीआईपी क्षेत्र माने जाने वाले ओकपार्क क्षेत्र में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के आवासों के पास सुबह सवा आठ बजे के करीब एक नौ वर्षीय बच्चे आयुष बिष्ट पर करीब 8-9 कुत्तों का झुंड झपट पड़ा। सुबह की सैर पर निकली एक महिला ने उसे बमुश्किल कुत्तों के चंगुल से बचाया। उसके बांये पैर में कुत्तों ने करीब तीन इंच तक गहरा व पांच इंच तक चौड़ा घाव कर दिया। उसे जिला अस्पताल लाया गया, जहां उसके पैर में एक दर्जन से अधिक टांके लगाने पड़े। वहीं अस्पताल में रैबीज का इंजेक्शन न दिये जाने पर लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर नाराजगी भी जताई।
उल्लेखनीय है कि गत दिवस आवारा कुत्तों ने नगर की सूखाताल झील में घास चर रही एक बकरी को जान से मार दिया था। इसके साथ ही जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार यहां हर रोज करीब आधा दर्जन लोग कुत्तों के काटे जाने के बाद उपचार कराने पहुंच रहे हैं। बुधवार को भी अयारपाटा के एक अन्य बालक तथा स्नो व्यू क्षेत्र के एक पिता व बेटी सहित आधा दर्जन लोग आवारा कुत्तों के काटे जाने के बाद अस्पताल पहुंचे। चिकित्सकों के अनुसार अस्पताल में रैबीज के करीब 200 इंजेक्शन इसी माह आये हैं। लेकिन यह पीड़ितों को क्यों नहीं दिये जा रहे यह बड़ा सवाल है। बताया जा रहा है कि रैबीज के इंजेक्शन बाजार में भी आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। वहीं उपचार कराने में योगदान देने वाले नगर के समाजसेवी मनोज साह जगाती ने कहा कि यदि जिला अस्पताल मरीजों को रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं कराने का अपना रवैया नहीं बदलता है, तो मामले को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा।

यह भी पढ़ें :सीजन से एक दिन पहले एक छोटी घटना ने दिए बड़े-खतरनाक संकेत

-आज से शुरू हो रहे ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में सैलानियों की सुरक्षा पर सवाल, आवारा कुत्ते हुए खूंखार, बकरी को मार डाला, पिछले वर्ष राजस्थान की एक सैलानी बच्ची की कुत्तों के हमले से हुई थी मौत

सूखाताल झील में मरी बकरी (लाल घेरे में) को देखती बकरी पालक महिलाएं।

नैनीताल। सरोवरनगरी में जहां ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन के ऑपचारिक तौर पर एक दिन बाद ही यानी 15 मई से शुरू होने जा रहा है। वहीं सीजन शुरू होने के ठीक एक दिन पूर्व नगर के सूखाताल क्षेत्र में आवारा कुत्तों ने एक बकरी को नोंच-नोंच कर मार डाला। ऐसे में नगर में आवारा कुत्तों के बने हुए आतंक से सैलानियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गये हैं। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष गुजरात की एक सैलानी बालिका की नगर के तल्लीताल में कुत्तों के पीछे पड़ने के कारण मृत्यु हो गयी थी।
सोमवार सुबह करीब 11 बजे सूखाताल झील क्षेत्र में पास ही में रहने वाले एक व्यक्ति की बकरी हमेशा की तरह घास चर रही थी, तभी आवारा कुत्तों ने उस पर हमला बोल दिया, जिस कारण उसने दम तोड़ दिया। बात बकरी से संबंधित होने के कारण छोटी लग सकती है, परंतु यह इस लिहाज से भयावह है कि एक दिन बाद ही नगर में सीजन शुरू हो रहा है। इस तरह खूंखार हुए आवारा कुत्ते नगर वासियों को भी नहीं बख्श रहे। हर रोज जिला चिकित्सालय में करीब आधा से एक दर्जन लोग आवारा कुत्तों के काटे जाने का इलाज कराने पहुंच रहे हैं। सुबह के समय ‘राष्ट्रीय सहारा’ सहित कई समाचार पत्रों के हॉकरों को पिछले एक-दो दिन में आवारा कुत्ते काट चुके हैं। यह स्थिति तब है जबकि नगर पालिका लाखों रुपए से निर्मित एबीसी यानी एनीमल बर्थ कंट्रोल सेंटर में 80 फीसद कुत्तों का बंध्याकरण करने का दावा कर रही है, बावजूद कुत्तों के नये बच्चे होने का सिलसिला नहीं थमने के आरोप भी आम हैं।

बकरियों ने चर दिये नये पौधे
नैनीताल। उल्लेखनीय है कि सूखाताल झील नैनी झील की सर्वाधिक जल प्रदाता है। यहां जल संरक्षण के उद्देश्य से पिछले एक-दो वर्षों में वन सहित कई विभागों व स्वयं सेवी संस्थाओं के साथ ही निजी तौर पर कई लोगों ने सैकड़ों की संख्या में पेड़-पौधों का रोपण किया है। लेकिन इधर हाल में क्षेत्र में कई लोग झील को खाली घास का मैदान मान कर यहां बकरी पालन कर रहे हैं। इन बकरियों ने यहां लगाए गये लगभग सभी पौधे चर दिये हैं। सोमवार को जो बकरी मिली, वह भी इन्हीं बकरी पालकों की थी। लगाये गये पौधों के संरक्षण पर संबंधित संस्थाओं-विभागों को ध्यान देने की आवश्यकता है।
चित्र परिचयः 14एनटीएल-4ः नैनीताल। सूखाताल झील में मरी बकरी (लाल घेरे में) को देखती बकरी पालक महिलाएं।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में बन्दर, लंगूर, कुत्तों के हमले से तीसरी मौत

  • बीते जुलाई माह में इसी तरह की घटना में कुत्तों के भय से गिरकर राजस्थान निवासी पर्यटक बच्ची की और दो वर्ष पूर्व तल्लीताल में एक अन्य बच्चे की भी हो गयी थी मौत
  • विधायक संजीव आर्य व डीएफओ धर्म सिंह मीणा ने परिजनों को ढांढस बधाने के साथ दिया मदद का भरोसा
साक्षी की फाइल फोटो

नवीन जोशी, नैनीताल। जिला व कुमाऊँ मंडल के मुख्यालय, पर्यटन नगरी नैनीताल में लंगूर के हमले से एक बच्ची के सीढ़ियों से गिरने से मौत हो गयी। उल्लेखनीय है कि इसी तरह की एक अन्य घटना में बीते जुलाई माह में राजस्थान निवासी एक पर्यटक बच्ची की कुत्तों के भय से गिरकर और दो वर्ष पूर्व तल्लीताल में एक अन्य बच्चे की बन्दर के भय से छत से गिरकर मौत हो गई थी। घटना के बाद लोगों में स्थानीय प्रशासन के विरुद्ध बंदर-लंगूरों व आवारा कुत्तों का भय बरकरार रहने से गहरी नाराजगी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जल संस्थान कर्मी दीवान सिंह राणा की कक्षा पांच में पढ़ने वाली 12 वर्षीया पुत्री साक्षी दोपहर में स्कूल से घर आने के बाद घर की छत पर खेलने के लिए गई थी। बताया गया है कि इस दौरान एक लंगूर ने उसे धक्का दे दिया। उससे बचने की कोशिश में वह घबराकर छत की सीढ़ियों से नीचे गिर कर गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे तत्काल अपराह्न दो बजे के करीब बीडी पांडे जिला चिकित्सालय ले जाया गया। यहां प्राथमिक उपचार करने के बाद चिकित्सकों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे उच्च केंद्र के लिए रेफर कर दिया। इस दोरान हल्द्वानी ले जाते वक्त उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

घटना के बाद स्थानीय विधायक संजीव आर्य व प्रभागीय वनाधिकारी नैनीताल धर्म सिंह मीणा लंगूर के हमले के कारण जान गंवाने वाली बालिका साक्षी के घर पहुंचे, और उसके माता-पिता व परिजनों को ढांढस बधाने के साथ मदद का भरोसा दिया। विधायक ने कहा कि बच्ची की मौत की किसी भी तरह भरपाई नहीं की जा सकती है, परंतु फिर भी वे मुख्यमंत्री से मिलकर राहत कोष से अधिकाधिक मदद दिलाने का प्रयास करेंगे। वहीं डीएफओ मीणा ने भी वन्य जीवों की वजह से होने वाली मौत से संबंधित कोष से अधिकाधिक मदद दिलाने का भरोसा दिया।

कुमाऊं विवि कर्मचारियों को प्रोन्नति, 24 प्राध्यापकों को नियमितीकरण का तोहफा

-30 महाविद्यालयों को विवि से संबद्ध करने का भी हुआ अनुमोदन
-40 शोध छात्रों को शोध उपाधियां स्वीकृत
-कुमाऊं विवि की कार्य परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय
नैनीताल। कुमाऊं विवि की कार्य परिषद ने पिछले दिनों हड़ताल पर गए कर्मचारियों की सबसे प्रमुख प्रोन्नति संबंधी मांग को स्वीकार करने का रास्ता लिया है, साथ ही उत्तराखंड उच्च न्यायालय से मिले आदेशों के अनुपालन में चार संविदा कर्मचारियों को भी नियमित करने का निर्णय लिया गया है।इसके अलावा विवि के परिसरों में वर्षाें से संविदा व कॉन्टेक्ट आदि पर छह से दस वर्ष की सेवा दे चुके 24 प्राध्यापकों के विनियमितीकरण के मार्ग में आ रही उलझनों को भी दूर कर लिया है। राज्य कैबिनेट भी इस पर मुहर लगा चुकी है। अब इन प्राध्यापकों का संबंधित शासनादेशों एवं उपलब्ध रिक्तियों के अनुरूप नियमितीकरण किया जाएगा। इसके अलावा विवि में करीब 30 नए महाविद्यालयों को संबद्ध करने को भी कार्य परिषद ने अनुमोदित कर दिया है। अब ये सभी अनुमोदन विवि के कुलाधिपति यानी प्रदेश के राज्यपाल के समक्ष अंतिम स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किए जाएंगे।

शनिवार को कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल की अध्यक्षता में पूरे दिन चली विवि की 135वीं कार्य परिषद की बैठक के उपरांत देर शाम जानकारी देते हुए विवि के कुलसचिव सुधीर बुड़ाकोटी ने बताया कि इसके अलावा 21 में से 17 कार्य परिषद सदस्यों की उपस्थिति में हुई बैठक में गहन विचार-विमर्श के उपरांत विभिन्न विषयों में दी गई पीएचडी का अनुमोदन किया गया। इसमें समाज शास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र, हिंदी में तीन-तीन, प्रबंधन, भूगर्भ विज्ञान, रसायन विज्ञान में चार-चार, भूगोल में पांच, इतिहास में छह, बायोटेक में सात, वनस्पति विज्ञान में 11, संस्कृत, अंग्रेजी, जन्तु विज्ञान में दो-दो, गृह विज्ञान, ड्राइंग एंड पेंटिंग, मनोविज्ञान, फार्मेसी, फोरेस्ट्री, गणित व शिक्षाशास्त्र में एक-एक पीएचडी शामिल है।  बैठक में कार्य परिषद के सदस्य अरविंद पडियार, सुरेश डालाकोटी, जगदीश बुधानी, बहादुर पाल, कुल सचिव सुधीर बुड़ाकोटी, वित्त अधिकारी अनीता आर्या, प्रो. भगवान सिंह बिष्ट, डीके भट्ट, उसा मित्तल, एमसी पांडे, आरपी पंत आदि मौजूद रहे।

साइलेंस जोन घोषित हुआ उच्च न्यायालय क्षेत्र

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आसपास के सूखाताल से चीना बाबा तिराहा तक के क्षेत्र को साइलेंस जोन घोषित कर दिया है। शनिवार को इस आदेश के बाद मल्लीताल कोतवाली पुलिस ने क्षेत्र में वाहन चालकों को इस क्षेत्र में हॉर्न न बजाने को लेकर जागरूक किया। अनुरोध व अपील की गयी है कि कोई भी वाहन चालक इस क्षेत्र में हॉर्न का प्रयोग न करें।

केवल आधा दर्जन साहित्यकारों ने ही वास्तव में लौटाए पुरस्कार

Brajendra
डा. बृजेंद्र त्रिपाठी

-इनसे से भी आधों ने ही लौटाई पुरस्कार की राशि
नैनीताल। पिछले दिनों साहित्य अकादमी के पुरस्कार लौटाने की खूब चर्चाएं रहीं, और अनेक साहित्यकारों के पुरस्कार लौटाने की खबरें मीडिया में आर्इं। लेकिन सच्चाई यह है कि मुश्किल से आधा दर्जन साहित्यकारों ने ही साहित्य अकादमी को औपचारिक तौर पर अपने पुरस्कार लौटाने के पत्र भेजे, वहीं इनमें से भी करीब आधों ने ही साहित्य अकादमी पुरस्कार के साथ मिली एक लाख रुपए की धनराशि लौटाने की हिम्मत दिखाई।

यह दावा बीते माह ही सेवानिवृत्त हुए साहित्य अकादमी में हिंदी विभाग देखने वाले पूर्व उपसचिव डा. बृजेंद्र त्रिपाठी ने सोमवार को मुख्यालय में कही। वह यहां महादेवी सृजन पीठ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्होंने यह टिप्पणी भी कि पुरस्कार लौटाने वाले साहित्यकारों ने वास्तव में अकादमी अथवा सरकार नहीं वरन साहित्यकारों की गरिमा को ही ठेस पहुंचाई है, और उल्टे सरकार को साहित्य अकादमी पर हस्तक्षेप करने का मौका दे दिया है। क्योंकि साहित्य अकादमी सरकारी संस्था नहीं है। वास्तव में यह साहित्यकारों की संस्था है। इस संस्था की पुरस्कार देने वाली ज्यूरी और पैनल में सरकार के लोग नहीं वरन साहित्यकार ही होते हैं, इस प्रकार यह पुरस्कार सरकार नहीं देती है। सरकार से संस्था का संबंध केवल अनुदान देने का होता है। बिहार के विस चुनावों के बाद इस मुद्दे पर पुरस्कार लौटाने वाले साहित्यकारों की चुप्पी को इंगित करते हुए उन्होंने इस मुद्दे के राजनीति से प्रेरित होने की ओर भी इशारा किया।

अब हेलीकॉप्टर से करिए नैनीताल व जिले की अन्य झीलों के दर्शन

नैनीताल। झीलों के जनपद नैनीताल की सरोवरनगरी सहित सातताल, नौकुचियाताल व भीमताल आदि झीलों के दर्शन अब सैलानी बिना किसी जाम की समस्या के हेलीकॉप्टर से कर सकेंगे। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने इसके लिए ‘‘झील दर्शन’ योजना की शुरुआत की है। केएमवीएन के महाप्रबंधक त्रिलोक सिंह मतरेलिया ने बताया कि योजना के तहत 19 दिसम्बर से 15 फरवरी के बीच सप्ताहांत यानी शनिवार व रविवार को हेलीकॉप्टर की हर दिन चार उड़ानों के जरिए अधिकतम 20 सैलानियों को जनपद की झीलों के दर्शन कराए जाएंगे। करीब 20 मिनट की इस यात्रा पर प्रति व्यक्ति किराया करों सहित 4125 रुपये होगा। बताया गया है कि 19 से ही गढ़वाल मंडल में हिमालय दर्शन की योजना भी शुरू हो रही है।

नैनीताल में 39 गेंदों में लगा नाबाद शतक-(101* रन)

नैनीताल के फ्लैट्स मैदान में बुधवार 25 नवम्बर 2015 को बना 1843 में स्थपित नैनीताल जिमखाना के 172 वर्ष के इतिहास में सर्वाधिक तेज शतक का रिकार्ड.. किशनगंज जिमखाना दिल्ली के आलराउंडर खिलाडी यशपाल डागर ने पैराडाइज क्लब मेरठ के खिलाफ 39 गेंदों में 9 चौकों और 9 छक्कों की पारी के साथ बनाया नाबाद शतक-(101* रन)

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अधिकारों में नहीं कर्तव्यों में निहित है संविधान की आत्मा IMG_20151127_140337

पी चिदंबरम ने भाजपा को बताया उदारवादी पार्टी, पता है क्यों ?

अब पता चला कि क्यों वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने गत 26 नवंबर को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में अपनी ही पार्टी की राज्य सरकार की शराब नीति के खिलाफ उतरने के साथ ही नैनीताल में क्यों केंद्र सरकार के खिलाफ जहर नहीं उगला, वरन पूर्व पीएम अटल बिहारी बाजपेई के साथ भाजपा को भी लिबरल यानी उदारवादी पार्टी करार दिया। और अगले दिन दिल्ली में सलमान रश्दी की किताब को बैन करने को राजीव गांधी की गलती बताने वाला बयान दिया।
लेकिन लगता है वास्तव में केंद्र की मौजूदा भाजपानीत सरकार उदारवादी नहीं है। यदि होती तो इतने से पिघल ही गई होती और आज पी चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम की कई फर्मों पर ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी न हुई होती।
और हमें अपनी अक्ल पर तरस आ रहा है कि हम चिदंबरम के बदले रुख व बयान पर शंका जताने के बावजूद उनकी घाघ राजनीति का सही अंदाजा क्यों नहीं लगा पाए….. देखें नवभारत टाइम्स की खबर 

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड