नवीन समाचार, नैनीताल, 5 अप्रैल 2026 (Liquor Shops Cancel in Mangoli-Bajoon)। सरोवर नगरी नैनीताल (Nainital) के समीपवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों—मंगोली, बजून और रातीघाट—में प्रस्तावित मदिरा की दुकानों (Liquor Shops) के विरुद्ध चल रहा जनांदोलन अंततः सफल रहा है। भारी जनविरोध और मातृशक्ति के कड़े तेवरों को देखते हुए शासन-प्रशासन ने इन दुकानों को उक्त क्षेत्रों में न खोलने और अन्यत्र स्थानांतरित (Shift) करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के पश्चात जहाँ क्षेत्रीय जनता में हर्ष की लहर है, वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर इस सफलता का ‘श्रेय’ लेने को लेकर दो गुटों में राजनैतिक प्रतिस्पर्धा भी उभरकर सामने आई है।
‘नवीन समाचार’ को प्राप्त जानकारी के अनुसार, नैनीताल जनपद के इन संवेदनशील क्षेत्रों में शराब की दुकानों के आवंटन के विरुद्ध स्थानीय महिलाओं और ग्रामीणों ने पिछले कई दिनों से मोर्चा खोल रखा था। आंदोलनकारियों का तर्क था कि शांत और शैक्षणिक वातावरण वाले इन क्षेत्रों में मदिरालय खुलने से सामाजिक ताना-बाना छिन्न-भिन्न हो जाएगा। जनभावनाओं के विधिक दबाव के चलते अब जिलाधिकारी (DM) कार्यालय द्वारा इन दुकानों को अन्य स्थानों पर स्थापित करने के औपचारिक आदेश निर्गत कर दिए गए हैं।
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सांसद बनाम विधायक: राजनैतिक श्रेय की रस्साकशी
इस विजय के पश्चात भाजपा के भीतर दो स्पष्ट वर्ग सक्रिय हो गए हैं। सांसद समर्थकों का दावा है कि नैनीताल-ऊधमसिंह नगर के सांसद अजय भट्ट (Ajay Bhatt) इस विषय को निरंतर उच्च स्तर पर उठा रहे थे। उनके द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) से किए गए व्यक्तिगत अनुरोध और प्राप्त सकारात्मक आश्वासन के फलस्वरूप ही यह जनहितकारी निर्णय संभव हो पाया है।
दूसरी ओर, क्षेत्रीय विधायक सरिता आर्या (Sarita Arya) के समर्थकों का तर्क है कि जब ग्रामीण महिलाएं सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रही थीं, तब विधायक ने स्वयं मौके पर पहुँचकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया था। विधायक सरिता आर्या का कहना है कि उन्होंने जनभावनाओं और महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन पर विधिक दबाव बनाया, जिसके पश्चात ही जिलाधिकारी द्वारा स्थानांतरण के आदेश जारी किए गए। विधायक ने स्पष्ट किया कि जनभावनाओं के विरुद्ध किसी भी कीमत पर इन क्षेत्रों में शराब की दुकानें नहीं खुलने दी जाएंगी।
आंदोलनकारियों में खुशी: सामाजिक व जनभावनाओं की जीत
शासन के इस निर्णय से मंगोली, बजून और रातीघाट के निवासियों, विशेषकर महिलाओं ने राहत की सांस ली है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह उनकी एकता और संकल्प की विधिक जीत है। विशेषज्ञों के अनुसार, आबकारी नीति (Excise Policy) के अंतर्गत जनविरोध और स्थानीय निकायों की आपत्तियों को संज्ञान में लेना अनिवार्य होता है, जिसका अनुपालन करते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में भी आबकारी दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया में स्थानीय भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों का ध्यान रखा जाएगा। शासन-प्रशासन के इस संवेदनशील दृष्टिकोण से न केवल सरकार की छवि सुधरेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शांति व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की दुकानों के विरोध और इस पर हो रही राजनैतिक श्रेय की होड़ को लेकर आपके क्या विचार हैं। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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