नवीन समाचार, देहरादून, 23 मार्च 2026 (Family Wanders Deceased Woman Body)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) के विकासनगर (Vikasnagar) क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां एक 25 वर्षीय महिला की मृत्यु के बाद भी परिजनों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। परिवार उसे जीवित समझकर लगभग 20 किलोमीटर तक चार अलग-अलग चिकित्सालयों (Hospitals) में लेकर भटकता रहा। यह घटना न केवल चिकित्सा व्यवस्था की जवाबदेही पर प्रश्न उठाती है, बल्कि आम लोगों के भरोसे और अधिकारों से भी सीधे जुड़ी है।
घटनाक्रम और लापरवाही का पूरा संदर्भ
पुलिस एवं संबंधितों से प्राप्त जानकारी के अनुसार देहरादून के सहसपुर (Sahaspur) कोतवाली क्षेत्र के बैरागीवाला (Bairagiwala) गांव की 25 वर्षीय महिला की रविवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे तुरंत हरबर्टपुर (Herbertpur) स्थित एक निजी चिकित्सालय (Private Hospital) ले गए। आरोप है कि उपचार के दौरान ही महिला की मृत्यु हो गई, लेकिन चिकित्सालय प्रबंधन ने यह तथ्य परिजनों को नहीं बताया।
परिजनों के अनुसार, उन्हें बिना स्पष्ट जानकारी दिए महिला को अन्यत्र ले जाने के लिए कह दिया गया। इसके बाद परिवार उम्मीद में उसे लगातार तीन अन्य चिकित्सालयों में लेकर गया, लेकिन वहां भी किसी ने स्पष्ट रूप से मृत्यु की पुष्टि नहीं की।
20 किलोमीटर तक चला भ्रम और पीड़ा
आखिरकार परिजन झाझरा (Jhajhra) स्थित एक चिकित्सालय पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद स्पष्ट किया कि महिला की काफी पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। यह सुनते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
जब वे शव लेकर गांव लौटे, तो वहां पहले से ही पुलिस (Police) मौजूद थी। बाद में पता चला कि पहले चिकित्सालय ने महिला की मृत्यु की सूचना पुलिस को दे दी थी, लेकिन परिजनों को अंधेरे में रखा। यह तथ्य इस पूरे मामले को और गंभीर बना देता है।
ग्रामीणों का आक्रोश और प्रशासनिक हस्तक्षेप
शाम करीब 7 बजे जब पुलिस पोस्टमार्टम (Postmortem) के लिए गांव पहुंची, तो परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने पोस्टमार्टम कराने से इनकार करते हुए चिकित्सालय प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
करीब ढाई घंटे तक चले तनावपूर्ण माहौल के बाद पूर्व ब्लॉक प्रमुख जसविंदर सिंह बिट्टू (Jaswinder Singh Bittu) और प्रशासनिक अधिकारियों के समझाने पर नायब तहसीलदार (Naib Tehsildar) ग्यारु दत्त जोशी (Gyaru Datt Joshi) की मौजूदगी में पंचनामा (Panchanama) भरा गया। अंततः उपजिलाधिकारी (SDM) की अनुमति से बिना पोस्टमार्टम के शव परिजनों को सौंप दिया गया।
प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई
नायब तहसीलदार के अनुसार प्रथम दृष्टया चिकित्सालय प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि मृत्यु की सूचना पुलिस को दी गई थी, तो परिजनों को जानकारी क्यों नहीं दी गई। इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट उपजिलाधिकारी को सौंप दी गई है और जांच के बाद सख्त कार्रवाई की संभावना जताई गई है।
यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता, मरीज अधिकार (Patient Rights) और चिकित्सा नैतिकता (Medical Ethics) के पालन की आवश्यकता को रेखांकित करती है। क्या यह केवल संवाद की कमी थी या जिम्मेदारी से बचने का प्रयास? क्या इस मामले के बाद स्वास्थ्य संस्थानों में जवाबदेही सुनिश्चित हो पाएगी?
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















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