उत्तराखंड के कुमाऊं-गढ़वाल को जोड़ने के लिए इस बड़ी कोशिश में है सरकार

-इस हेतु प्रयासरत वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने कहा कंडी मार्ग बन कर रहेगी, बरसात पूर्व व बाद वन्य जीवों के आवागमन पर राष्ट्रीय वन्य जीव संस्थान के सहयोग से किया जा रहा है सर्वे, सितंबर तक आ जाएगी सर्वे रिपोर्ट
Roadनैनीताल, 2 जुलाई 2018। उत्तराखंड के कुमाऊं व गढ़वाल मंडलों को जोड़ने के लिए राज्य सरकार एक बड़ी कोशिश में है। राज्य बनने के 18 वर्ष होने तक भी राज्य के कुमाऊं मंडल वासियों को राज्य की राजधानी जाने के लिए यूपी के रास्ते जाना पड़ता है। जबकि लालढांग-चिलरखाल-कालागढ़-रामनगर के रास्ते पहले से मौजूद पथरीली कंडी रोड को पक्का करने का विकल्प मौजूद है। लेकिन राज्य में कई सरकारें व मुख्यमंत्री आने-जाने के बावजूद इस दिशा में कार्य नहीं हो पाया है। अब राज्य वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हरक सिंह रावत इस हेतु प्रतिबद्ध नजर आ रहे हैं। सोमवार को उन्होंने नैनीताल में कहा कि कंडी रोड हर हालत में ‘ग्रीन रोड’ के रूप में बन कर रहेगी, चाहे इसके लिए एनजीटी अथवा सुप्रीम कोर्ट में भी क्यों ना जाना पड़े। बताया कि मार्ग पर वन्य जीवों के आवागमन को देखने के लिए बरसात से पूर्व एक सर्वे करा लिया गया है, आगे बरसात के बाद भी एक और सर्वे कराया जाएगा। उम्मीद है कि इन सर्वे की रिपोर्ट सितंबर माह तक आ जाएगी। इससे तय होगा कि कहां सड़क जमीन पर, जमीन के नीचे या ऊंचाई में बनानी है। बताया कि पहली बार सर्वे में सड़क विभाग के साथ ही राष्ट्रीय वन्य जीव संस्थान को भी साथ में रखा गया है, ताकि बाद में किसी तरह की समस्या न आये। कहा कि सड़क इस तरह बनेगी कि वन्य जीवों का प्राकृतिक आवागमन भी प्रभावित नहीं होगा, और उनकी सुरक्षा भी बनी रहेगी।

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मोदी के इस ‘दिवास्वप्न’ को साकार करने में जुटा यह ‘नरेंद्र’

मोदी के आह्वान पर खोजा ‘सहखेती’ का ‘नरेंद्र पैटर्न’

Narendra Pattern
नरेंद्र मेहरा के खेत में किसानों व विभागीय अधिकारियों के साथ कुमाऊं मंडल के संयुक्त निदेशक कृषि आत्मा परियोजना के अधिकारियों को प्रचार-प्रसार हेतु निर्देशित करते हुए।
  • खाद्य फसलों की मेढ़ों पर सब्जियों की जगह सब्जियों की मेढ़ों पर गेहूं उगाने का किया है सफल प्रयोग
  • पूर्व में ‘नरेंद्र-09’ प्रजाति की गेहूं की प्रजाति खोजकर उत्तराखंड के प्रगतिशील किसान के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित हो चुके हैं गौलापार के नरेंद्र मेहरा

नवीन जोशी, नैनीताल। जब कृषि प्रधान देश भारत में किसानों का जिक्र केवल किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं के लिए आ रहा हो, किसान खेती छोड़ शहरों में मेहनत-मज़दूरी करने जा रहे हों,  खेतों में सीमेंट-कंक्रीट की अट्टालिकाएं खरपतवारों की तरह उग रही हों, और प्रधानमंत्री मोदी इसके उलट देश के किसानों की आय दोगुनी करने की ‘उलटबांशी’ बजा रहे हों, ऐसे में उनका एक हमनाम किसान उनके इस ‘दिवास्वप्न’ को साकार करने में जुटा है।

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किसानों की आय दोगुनी करने को देश के हर जिले में बनेंगी कृषि परिषदें 

Mamta Jain
आईसीएसए की निदेशक ममता जैन।
  • यूपी के लखीमपुर से हुई है शुरुआत, शीघ्र नैनीताल जनपद के हल्द्वानी में खुल सकती है उत्तराखंड की पहली जिला कृषि परिषद
  • पहले चरण में हर राज्य में एक एवं आगे 3-4 वर्षों में देश के 500 जनपदों में जिला कृषि परिषदें स्थापित करने की है केंद्र सरकार की योजना

नवीन जोशी, नैनीताल। केंद्र सरकार वर्ष 2022 तक देश के किसानों की आय दोगुनी करने के लिए अनेक योजनाएं बना रही है। लेकिन इन योजनाओं का लाभ किसानों को दिलाने के लिए महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देश के हर जिले में महत्वाकांक्षी योजना के तहत डिस्ट्रिक्ट एग्रीकल्चर काउंसिल यानी जिला कृषि परिषद स्थापित करने का खाका बनाया गया है। यह कृषि परिषदें जिलों की निचली इकाइयों में स्थापित होकर किसानों और कृषि से संबंधित कृषि, लघु कृषि, उद्यान, सिंचाई, लघु सिचाई, बैंकों,  मंडी परिषदों आदि विभिन्न विभागों-इकाइयों के साथ मिलकर जिला स्तर पर योजनाओं का लाभ किसानों को पहुंचाने के लिए समन्वित प्रयास करेंगी। यह परिषदें सीधे केंद्रीय कृषि मंत्रालय से जुड़ी होंगी, लिहाजा इनके जरिए किसान सरकारों की विभिन्न प्रकार की योजनाओं की जानकारी और लाभ प्राप्त करने के साथ ही अपनी समस्याएं, अधिकारियों-विभागों से सहयोग न मिलने जैसी शिकायतें भी मंत्रालय तक पहुंचा सकेंगे।

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‘पेपरलेस’ होने की ओर बढ़ा देश, सभी राज्य विधानसभाएं होंगी ‘पेपरलेस’

कुमाऊं विश्वविद्यालय ‘ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया’ के जरिये हर वर्ष बचायेगा 1785 से अधिक पेड़, परीक्षार्थियों के बचेंगे 2.6 करोड़ रुपये

New Doc 2017-07-17_1_Kumaon University Paperless-विवि ने पहली बार मांगे थे ऑनलाइन आवेदन, 24 राज्यों से 48 हजार ने किये ऑनलाइन आवेदन, गत वर्ष के मुकाबले आठ हजार अधिक आये आवेदन
-आवेदनों की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले करीब आठ हजार और पिछली बार हो पाये प्रवेशों से करीब 18 हजार अधिक, लिहाजा प्रवेश के लिये होगी अधिक मारामारी
नवीन जोशी, नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया आयोजित करने के बाद देश भर में अपनी पहचान बनाने में सफलता पाई है। अब तक उत्तराखंड सहित कुछ ही प्रदेशों के छात्रों को अपने यहां प्रवेश के लिये आकर्षित कर पाने वाले राज्य सरकार के इस इकलौते विवि में इस बार देश के 24 राज्यों से 48 हजार 41 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश के लिये आवेदन किये हैं। खास बात यह भी है कि इस बार आये आवेदन पिछले वर्ष के आवेदनों से करीब आठ हजार और पिछली बार हो पाये प्रवेशों से करीब 18 हजार अधिक हैं। इसलिये सभी प्रवेशार्थियों को प्रवेश मिल पायेगा, इस बात की संभावना कम है, साथ ही आगे प्रवेश के लिये होने वाली काउंसिलिंग की प्रक्रिया में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।

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पर्यटन, हर्बल के बाद अब जैविक प्रदेश बनेगा उत्तराखंड

विभिन्न प्रकार के बीज
विभिन्न प्रकार के बीज

-प्रदेश के जैविक उत्पादों का बनेगा अपना राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय ब्रांड
-उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड के प्रस्ताव को मुख्य मंत्री ने दी हरी झंडी
-राज्य में ही पहली बार लगने जा रही कलर सॉर्टिंग मशीनों से स्थानीय ख्याति प्राप्त उत्पाद राजमा, चौलाई, गहत, भट्ट आदि के जियोग्रेफिकल इंडेक्स बनेंगे
-इस हेतु रुद्रपुर में मंडी परिषद के द्वारा एक वर्ष के भीतर बनाया जाएगा 1500 टन क्षमता का कोल्ड स्टोर और तीन हजार टन क्षमता का गोदाम

नवीन जोशी, नैनीताल। देश में दालों की बढ़ती कीमतों के बीच यह खबर काफी सुकून देने वाली हो सकती है। अभी भी अपेक्षाकृत सस्ती मिल रहीं उत्तराखण्ड की जैविक दालें (मौंठ 50, भट्ट 70 तथा गहत और राजमा 120 रुपये प्रति किग्रा.) देश की महँगी दालों का विकल्प हो सकती हैं। पर्यटन और जड़ी-बूटी प्रदेश के रूप में प्रचारित उत्तराखंड एक नए स्वरूप में स्वयं को ढालने की राह पर चलने जा रहा है। यह राह है हर्बल प्रदेश बनने की, जिस पर अब तक पर्यटन और जड़ी-बूटी प्रदेश के रूप में प्रचारित किये जा रहे उत्तराखण्ड ने कदम बढ़ा दिए हैं। प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड, मंडी परिषद, उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद एवं कृषि एवं उद्यान आदि विभागों के संयुक्त तत्वावधान में प्रदेश को जैविक प्रदेश यानी जैविक उत्पादों का प्रदेश बनाने की कवायद शुरू कर दी है। इस कड़ी में राज्य के सभी पर्वतीय जिलों के 10 ब्लॉकों को जैविक ब्लॉक घोषित कर दिया गया है। रुद्रप्रयाग जिला जैविक जिले के रूप में विकसित किया जा रहा है, और आगे चमोली व पिथौरागढ़ को भी जैविक जनपद बनाने की तथा अगले चरण में सभी पर्वतीय जिलों को जैविक जिलों के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। साथ ही प्रदेश के जैविक उत्पादों के लिए प्रदेश में ही बड़ी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किए जाने को मुख्यमंत्री के स्तर से हरी झंडी मिल गई है। प्रस्तावित जैविक प्रदेश में जैविक खाद्यान्नों के साथ जैविक दालों के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

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