उत्तराखंड के एकमात्र ‘भारत रत्न’ पंडित गोविंद बल्लभ पंत : हिमालय सा विराट व्यक्तित्व और दिल में बसता था पहाड़

Vishesh Aalekh Special Article Navin Samachar

लखनऊ, दिल्ली की रसोई में भी महकता था कुमाउनी भोजन, पर्वतीय लोगों से अपनी बोली- भाषा में करते थे बात (Bharat Ratna Pandit Govind Ballabh Pant) डॉ.नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल। देश की आजादी के संग्राम और आजादी के बाद देश को संवारने में अपना अप्रतिम योगदान देने वाले उत्तराखंड के लाल, उत्तराखंड के एकमात्र … Read more

🥘🌿 कुमाउनी भोजन को वैश्विक पहचान दिलाने में जुटे रेडिशन होटल समूह के साउथ एशिया के मुख्य कॉर्पोरेट कार्यकारी-सेलेब्रिटी शेफ राकेश सेठी

Namah Nainital Advt

कुमाऊनी भोजन सिर्फ खाना नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य का खजाना है : राकेश सेठी नवीन समाचार, नैनीताल, 17 अगस्त 2025 (Kumauni Food-Redisson-Namah Nainital RakeshSethi)। देश के प्रख्यात पाक विशेषज्ञ राकेश सेठी ने कहा कि कुमाऊनी भोजन सिर्फ खाना नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य का खजाना है, जो न केवल तमाम बीमारियों से बचाता है और स्वाद में … Read more

177 साल के नैनीताल में कुमाउनी रेस्टोरेंट की कमी हुई पूरी

-पूरी तरह कुमाउनी थीम पर स्थापित किया गया है 1938 में स्थापित अनुपम रेस्टोरेंट

-अब यहां लीजिये कुमाउनी थाली के साथ ही पहाड़ी शिकार सहित अनेक पहाड़ी जड़ी-बूटी युक्त व्यंजनों का भी स्वाद

नवीन जोशी, नैनीताल। 1841 में अपनी बसासत से ही अंग्रेजी रंग में रंगी ‘छोटी बिलायत’ भी कहलाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल में अंग्रेजी व्यंजनों के साथ ही चायनीज, तिब्बती, स्पेनिश, इलैलियन सहित अनेक विदेशी व्यंजनों के रेस्टारेंट मौजूद हैं और कई रेस्टारेंट दक्षिण भारतीय, बंगाली तथा गुजराती थालियां भी परोसते हैं, किंतु यदि सैलानी कुमाऊं मंडल के इस मुख्यालय में कुमाउनी व्यंजन खाना चाहें तो उन्हें कुमाऊं मंडल विकास निगम लिमिटेड के पर्यटक आवास गृह में रहना व वहां के रेस्टारेंट में खाना होता है, अथवा टी-स्टॉल तरह के छोटे रेस्टोरेंटों में आलू के गुटके, छोले व रायते जैसे कुछ कुमाउनी व्यंजनों से ही गुजारा करना पड़ता है। लेकिन अब सही मायनों में 177 साल की सरोवरनगरी को एक पूरी तरह कुमाउनी रंग में रंगा व कुमाउनी लजीज व्यंजन परोसने वाला रेस्टोरेंट मिल गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी संगठन से जुड़े नगर के युवा सामाजिक कार्यकर्ता व व्यवसायी रुचिर साह ने 1938 में अपने दादा द्वारा स्थापित अनुपम रेस्टोरेंट को कुमाउनी रंग में रंग डाला है। 

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