उनकी सतर्कता से वह स्वयं सुरक्षित रहीं और वन विभाग को गुलदार को सुरक्षित पकड़ने का अवसर मिला। बाद में वन विभाग की टीम ने गुलदार को बेहोश कर उसका रेस्क्यू किया।
रात के सन्नाटे में घर के भीतर पहुंचा गुलदार
स्थानीय समाचार रिपोर्टों के अनुसार, घटना रविवार देर रात लगभग दो से तीन बजे के बीच हुई। गुलदार एक पालतू कुत्ते का पीछा करते हुए घर के भीतर पहुंचा और बगल के कमरे में चला गया। उस समय घर में जयंती देवी अकेली थीं।
कुछ हलचल महसूस होने पर उन्होंने आसपास देखा तो उनकी नजर कमरे में लेटे गुलदार पर पड़ी। घर के भीतर जंगली जानवर को देखकर किसी के भी घबरा जाने की स्थिति थी, लेकिन जयंती देवी ने तत्काल सावधानी बरती। उन्होंने कमरे का दरवाजा बंद किया और शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया। ग्रामीणों की मदद से वन विभाग को सूचना दी गई।
वन विभाग की टीम ने बेहोश कर किया रेस्क्यू
सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय समाचार रिपोर्टों के अनुसार, वन क्षेत्राधिकारी मनोज भगत (Manoj Bhagat) के नेतृत्व में वनकर्मियों ने रेस्क्यू अभियान चलाया। आवश्यक कार्रवाई के बाद गुलदार को बेहोश कर सुरक्षित पकड़ा गया और रेस्क्यू केंद्र पहुंचाया गया।
गुलदार के घर में घुसने की घटना से गांव में चिंता का माहौल रहा। उसके सुरक्षित रेस्क्यू के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
बेतालघाट क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही से बढ़ी चिंता
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब नैनीताल जनपद के बेतालघाट क्षेत्र के विभिन्न गांवों में गुलदार की आवाजाही को लेकर ग्रामीण चिंता जता रहे हैं। सितंबर 2026 में प्रकाशित एक समाचार के अनुसार, बेतालघाट विकासखंड के बसगांव, सौनगांव और सिमलखा क्षेत्रों में गुलदार की गतिविधियों से ग्रामीण परेशान थे। स्थानीय लोगों ने पालतू पशुओं पर हमलों और आबादी के आसपास वन्यजीवों के पहुंचने की शिकायत करते हुए वन विभाग से निगरानी बढ़ाने की मांग की थी।
तल्ली सेठी की घटना ने भी ग्रामीणों की इस चिंता को फिर सामने ला दिया है। ग्रामीणों ने क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाने और लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
वन्यजीव दिखे तो खुद पकड़ने या घेरने का प्रयास न करें
वन्यजीव विशेषज्ञों की सामान्य सुरक्षा सलाह के अनुसार, घर या आबादी के पास गुलदार दिखाई देने पर उसके करीब जाने, उसे घेरने, छेड़ने या स्वयं पकड़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए। सुरक्षित स्थान पर रहकर वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को सूचना देनी चाहिए। बच्चों और पालतू पशुओं को भी वन्यजीव से दूर रखना चाहिए।
जयंती देवी की सूझबूझ से इस घटना में उनके सुरक्षित रहने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, ऐसी स्थिति में सबसे सुरक्षित तरीका वन्यजीव से दूरी बनाए रखना और प्रशिक्षित बचाव दल को कार्रवाई करने देना है।
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p style=”text-align: justify;”>संपादकीय टिप्पणी: कुछ स्थानीय रिपोर्टों में महिला का नाम “जीवंती देवी” भी लिखा गया है

डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
