बड़ा ब्रेकिंग समाचार : ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा यूपीआई भुगतानों पर शुल्क लगाने की तारीख टली

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नवीन समाचार, नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026 (New Rule for Charges on UPI Payments)। उत्तराखंड (UTTARAKHAND) सहित देशभर में डिजिटल भुगतान (Digital Payment) करने वाले करोड़ों ग्राहकों और छोटे व्यापारियों के लिए द्र सरकार ने ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा यूपीआई व्यापारी भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर-MDR) लागू करने की प्रस्तावित तारीख 15 अक्टूबर 2026 से आगे बढ़ा दी गई है। नई व्यवस्था एक जनवरी 2027 से लागू होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

New Rule for Charges on UPI Payments 2000 रुपए तक के UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा या नहीं | जानिए सच्चाईप्रस्तावित व्यवस्था के तहत पात्र व्यापारी भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने की योजना है। ₹75,000 या इससे अधिक के लेन-देन पर शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 प्रस्तावित है। यह शुल्क व्यापारियों और भुगतान व्यवस्था से जुड़े संस्थानों के बीच वितरित होगा। व्यक्तियों के बीच होने वाले यूपीआई लेन-देन और ₹2,000 तक के पात्र व्यापारी भुगतान पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे। छोटे व्यापारियों की कुछ श्रेणियों को भी छूट दिए जाने का प्रावधान है

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केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के अनुसार ₹2,000 तक के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (Unified Payments Interface-UPI) लेनदेन और रुपे डेबिट कार्ड (RuPay Debit Card) से किए गए भुगतान पर बैंक या भुगतान प्रणाली प्रदाता (Payment System Provider) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगा सकेंगे।

इससे रोजमर्रा के छोटे भुगतानों के लिए UPI और RuPay का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों तथा छोटे दुकानदारों को राहत मिलेगी। लेकिन समस्या की बात यह की इससे ऊपर के व्यावसायिक लेनदेन में शुल्क लगेगा। यह नया नियम अगले माह 15 अक्टूबर से लागू हो जाएगा। 

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सरकार ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) की धारा 10A के तहत यह अधिसूचना जारी की है। हालांकि ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर शुल्क को लेकर इस अधिसूचना में कोई स्पष्ट रोक नहीं लगाई गई है, इसलिए बड़े डिजिटल भुगतानों पर भविष्य में व्यापारी छूट दर (Merchant Discount Rate-MDR) को लेकर चर्चा बनी हुई है।

क्या है ₹2,000 तक के भुगतान पर शुल्क का नियम

सरकारी व्यवस्था के तहत रुपे डेबिट कार्ड और ₹2,000 तक के UPI लेनदेन को निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम (Electronic Payment Mode) के रूप में मान्यता दी गई है। इन माध्यमों से भुगतान करने या रकम प्राप्त करने वाले किसी भी व्यक्ति पर बैंक या प्रणाली प्रदाता (System Provider) प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से शुल्क नहीं लगा सकेगा।

इसका मतलब है कि यदि कोई ग्राहक किसी दुकान पर UPI के माध्यम से ₹1,000 का भुगतान करता है तो वर्तमान व्यवस्था में दुकानदार को पूरी ₹1,000 की रकम प्राप्त होती है। UPI और रुपे डेबिट कार्ड पर फिलहाल व्यापारी छूट दर शून्य है।

MDR क्या है और इसका UPI से क्या संबंध है

व्यापारी छूट दर (Merchant Discount Rate-MDR) वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान को संसाधित करने के बदले व्यापारी की ओर से बैंक या भुगतान प्रणाली को दिया जाता है। फिलहाल UPI और रुपे डेबिट कार्ड के लिए MDR शून्य है। ऐसे डिजिटल लेनदेन से जुड़ी लागत बैंक, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (National Payments Corporation of India-NPCI) और भुगतान सेवा प्रदाता (Payment Service Provider) वहन करते हैं।

सरकार भी ₹2,000 तक के कुछ डिजिटल भुगतानों की लागत को प्रोत्साहन (Incentive) के माध्यम से समर्थन देती है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए करीब ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

UPI के बढ़ते इस्तेमाल से बढ़ी लागत की चुनौती

UPI के लगातार बढ़ते इस्तेमाल के साथ इसके बुनियादी ढांचे (Infrastructure), साइबर सुरक्षा (Cyber Security), धोखाधड़ी रोकथाम (Fraud Prevention) और प्रणाली की क्षमता बढ़ाने पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में UPI के माध्यम से 241.6 अरब लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य करीब ₹314.2 लाख करोड़ रहा।

अगस्त 2026 तक UPI के 55 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता थे। अकेले अगस्त 2026 में 24.5 अरब लेनदेन हुए, जिनका मूल्य करीब ₹29.8 लाख करोड़ रहा। बढ़ते उपयोग के साथ लंबे समय के लिए UPI के स्थायी वित्तपोषण मॉडल (Sustainable Funding Model) की आवश्यकता पर चर्चा बढ़ी है।

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UPI भुगतान पर MDR शुल्क

लेनदेन की राशिMDR शुल्कउदाहरण
₹2,000 तकशून्य₹2,000 के भुगतान पर कोई शुल्क नहीं
₹2,000 से अधिक और ₹75,000 तक0.4%उदाहरण के लिए ₹3,000 के भुगतान पर ₹12 शुल्क
₹75,000 से अधिक₹300 निश्चित₹75,000 से अधिक के भुगतान पर ₹300

सरल शब्दों में:

₹2,000 तक — कोई शुल्क नहीं

₹2,000–₹75,000 — 0.4% MDR

₹75,000 से अधिक — ₹300 निश्चित शुल्क

UPI के लिए स्थायी वित्तपोषण व्यवस्था की जरूरत

मार्च 2026 में संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति (Standing Committee on Finance) ने भी UPI के लिए स्थायी वित्तपोषण व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई थी। समिति के अनुसार लेनदेन बढ़ने के साथ तकनीक, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने और प्रणाली की क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार निवेश की आवश्यकता होगी।

ऐसे में सरकार के सामने चुनौती यह है कि UPI को ग्राहकों और छोटे व्यापारियों के लिए सस्ता व आसान बनाए रखते हुए तेजी से बढ़ रही बुनियादी ढांचे और सुरक्षा संबंधी लागत के लिए टिकाऊ वित्तीय व्यवस्था तैयार की जाए।

₹2,000 तक के UPI भुगतान पर शुल्क लगाने की अफवाह का खंडन

पिछले कुछ दिनों से ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चा और अफवाहें चल रही थीं। वित्त मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ₹2,000 तक के UPI लेनदेन और रुपे डेबिट कार्ड भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

इसलिए फिलहाल ₹2,000 तक के ऐसे भुगतान करने वाले ग्राहकों और उन्हें स्वीकार करने वाले छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क की चिंता नहीं करनी होगी। वहीं ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतानों के संबंध में भविष्य में क्या व्यवस्था होगी, यह सरकार के अगले निर्णय और डिजिटल भुगतान व्यवस्था में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा।

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