नवीन समाचार, अल्मोड़ा, 3 अप्रैल 2026 (Israeli Anguish for Ladies Toilet)। उत्तराखंड (Uttarakhand) अपनी नैसर्गिक सुंदरता और समृद्ध संस्कृति के लिए विश्वभर में विख्यात है, किंतु बुनियादी सुविधाओं (Basic Amenities) का अभाव आज भी विदेशी पर्यटकों के अनुभवों पर पानी फेर रहा है। सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा (Almora) के मुख्य बाजार में इजरायल (Israel) से आई एक महिला पर्यटक को सार्वजनिक शौचालय (Public Toilet) न मिलने के कारण भारी फजीहत का सामना करना पड़ा। इस असुविधा से क्षुब्ध महिला का एक वीडियो सोशल मीडिया (Social Media) पर तेजी से प्रसारित (Viral) हो रहा है, जिसमें वह हाथ जोड़कर प्रशासन से गुहार लगाती दिखाई दे रही है। आप यह संबंधित वीडिओ भी जरूर देखना चाहेंगे :
नवीन समाचार को सोशल मीडिया और स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इजरायली महिला पर्यटक दूसरी बार भारत भ्रमण पर आई हैं। अल्मोड़ा के पारंपरिक बाजारों और प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठाते समय उन्हें अचानक शौचालय (Washroom) की आवश्यकता पड़ी। महिला ने बाजार के कई हिस्सों में काफी देर तक खोजबीन की, किंतु उन्हें कहीं भी महिला शौचालय (Ladies Toilet) उपलब्ध नहीं हुआ। इस स्थिति ने न केवल उनकी यात्रा के आनंद को कम किया, बल्कि देवभूमि की अतिथि सत्कार (Hospitality) वाली छवि पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। क्या विश्वस्तरीय पर्यटन का दावा करने वाले नगरों में एक अदद शौचालय का न होना चिंताजनक नहीं है?
दूसरी बार भी वही कड़वा अनुभव: वीडियो में सुनाया अपना दुखड़ा
प्रसारित वीडियो में महिला पर्यटक स्पष्ट रूप से अपनी व्यथा व्यक्त करती नजर आ रही हैं। उन्होंने बताया कि यह उनकी पहली बार की समस्या नहीं है; जब वह पिछली बार अल्मोड़ा आई थीं, तब भी उन्हें इसी प्रकार की विषम परिस्थिति का सामना करना पड़ा था। महिला ने अत्यंत भावुक होकर हाथ जोड़े और विनती करते हुए कहा— “कृपया यहां सार्वजनिक शौचालय (Public Toilet) बनवा दें, ताकि और अधिक पर्यटक यहाँ आ सकें।” उन्होंने अल्मोड़ा के स्थानीय व्यंजनों (Local Cuisine), शांत वातावरण और सुंदरता की जमकर प्रशंसा की, किंतु स्वच्छता और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की कमी पर गहरा रोष प्रकट किया।
मौके पर उपस्थित किसी व्यक्ति द्वारा रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो ने स्थानीय प्रशासन (Local Administration) और नगर पालिका (Municipal Council) की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। वीडियो में विदेशी पर्यटक की परेशानी को देखकर स्थानीय निवासियों में भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोगों का कहना है कि यदि विदेशी सैलानियों को इस प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ेगा, तो पर्यटन स्वरोजगार (Tourism Self-employment) और ‘होम-स्टे’ (Home-stay) जैसी योजनाओं का व्यापक उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
प्रशासनिक जवाबदेही और स्वच्छता अभियान पर सवाल
अल्मोड़ा जैसे ऐतिहासिक और पर्यटन प्रधान नगर में महिलाओं के लिए सुलभ शौचालय (Sulabh Shauchalay) का अभाव ‘स्वच्छ भारत अभियान’ (Swachh Bharat Abhiyan) के दावों की भी पोल खोलता है। पर्यटन विभाग (Tourism Department) और स्थानीय निकाय को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि आगामी चारधाम यात्रा और ग्रीष्मकालीन सत्र में पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि होने वाली है। अधिकारियों के अनुसार, इस वायरल वीडियो का संज्ञान लिया जा रहा है और बाजार क्षेत्र में मोबाइल टॉयलेट्स (Mobile Toilets) या नए शौचालयों के निर्माण की योजना (Plan) पर विचार किया जा सकता है।
महिलाओं को सार्वजनिक शौचालयों में लघुशंका के लिये भी देने होते हैं रुपये
नैनीताल। देश एवं विशेषकर उत्तराखंड में जहां एक ओर सार्वजनिक शौचालयों का अभाव है, वहीं जो शौचालय हैं भी वहां एक ओर सफाई के समुचित प्रबंध नहीं होते हैं। दूसरी ओर आज भी बड़ी संख्या में पुरुष खुले में लघुशंका कर लेते हैं और महिलाओं को ऐसा करते हुए नहीं देखा जाता है। ऐसी स्थितियों में भी महिलाओं को पुरुषों के इतर पक्षपातपूर्ण तरीके से लघुशंका के लिये भी 10 रुपये तक देने पड़ते हैं। शौचालयों की कमी से महिलाओं को लंबे समय तक पेशाब रोकनी भी पड़ती है, इससे उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।
न्यायिक और प्रशासनिक तंत्र को यह समझना होगा कि पर्यटन केवल वादियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आगंतुकों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करना भी राज्य का प्राथमिक उत्तरदायित्व है। विदेशी पर्यटकों के ऐसे नकारात्मक अनुभव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड के पर्यटन ब्रांड (Tourism Brand) को क्षति पहुँचा सकते हैं। अब देखना यह है कि इस इजरायली महिला की हाथ जोड़कर की गई विनती का असर शासन-प्रशासन पर कितना पड़ता है।
उम्मीद की जा रही है कि पर्यटन सीजन से पूर्व प्रशासन की सक्रियता ऐसी मूलभूत समस्याओं के समाधान में सफल होगी। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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