दिल्ली-पंजाब के साथ उत्तराखंड में भी अप्रैल 2026 से होगा ‘एसआईआर’, चुनाव आयोग ने दिए संकेत और तैयारी तेज करने के निर्देश

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नवीन समाचार, नई दिल्ली, 19 फरवरी 2026 (SIR in Uttarakhand)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के लिए गुरुवार को चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचना सामने आयी है। केन्द्रीय चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने उत्तराखंड सहित 23 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण-‘एसआईआर’ (Special Intensive Revision-SIR) की प्रक्रिया अप्रैल 2026 से शुरू करने की तैयारी तेज करने के निर्देश दिए हैं। इसका सीधा असर मतदाता सूची की शुद्धता, आगामी चुनावों की पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों पर पड़ेगा।

उत्तराखंड में मतदाता सूची अद्यतन करने की तैयारी

(SIR In Uttarakhand Election Commission to publish the draft electoral roll in Bihar today  under the Special Intensive Revision initiative. Chief Election Commissioner  Gyanesh Kumar says that the physical and digital format of electoral rollचुनाव आयोग ने उत्तराखंड के गुरुवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer-CEO) सहित आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh), अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh), हरियाणा (Haryana), हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh), पंजाब (Punjab), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (NCT Delhi) समेत कुल 23 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र भेजकर एसआईआर से संबंधित तैयारियां शीघ्र पूरी करने को कहा है।

आयोग ने संकेत दिया है कि इन राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण अप्रैल 2026 से प्रारंभ होने की संभावना है। इसके लिए पूर्व-संशोधन गतिविधियां समयबद्ध रूप से पूरी करने के निर्देश दिए गये हैं, ताकि सटीक और व्यापक मतदाता सूची तैयार की जा सके।

पहले चरण में 12 राज्यों में चल रही प्रक्रिया

आयोग के अनुसार बिहार (Bihar) के बाद पश्चिम बंगाल (West Bengal), असम (Assam) सहित 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर प्रक्रिया पहले ही जारी है या पूरी हो चुकी है। अब शेष 23 राज्यों—जिनमें उत्तराखंड भी शामिल है—में अगले चरण में यह अभियान शुरू किया जाएगा।

आयोग ने अपने 24 जून 2025 के पूर्व आदेश संख्या 23/ERS/2025 के माध्यम से सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करने का निर्देश दिया था। इसके बाद 5 जुलाई 2025 के पत्र में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पूर्व-संशोधन गतिविधियां शुरू करने को कहा गया था।

राजनीतिक बहस और न्यायिक स्थिति

एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पहले बिहार सहित कुछ राज्यों में राजनीतिक विवाद भी सामने आये थे। कुछ विपक्षी दलों ने इस पर प्रश्न उठाये थे, हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है। संबंधित प्रकरण सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में विचाराधीन बताया जा रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है उत्तराखंड के लिए

विशेषज्ञों के अनुसार उत्तराखंड में एसआईआर से

  • मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने

  • नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने

  • और मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने में मदद मिलेगी।

यह प्रक्रिया विशेष रूप से शहरी विस्तार वाले क्षेत्रों जैसे देहरादून और हल्द्वानी सहित तराई के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां मतदाता सूची का नियमित अद्यतन चुनावी निष्पक्षता के लिए आवश्यक है। आने वाले महीनों में राज्य स्तर पर बूथ स्तर अधिकारियों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है।

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