Ayodhya-Putting Faith in Dock not Good : “भगवान राम किसी सत्ता, संस्था या राजनीति के नहीं—वे भारत की आत्मा हैं.. अयोध्या में यदि किसी कर्मचारी ने अपराध किया है तो उसे दंड मिले, लेकिन उस बहाने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, सनातन संस्कृति और भगवान श्रीराम की मर्यादा को कठघरे में खड़ा करना न न्याय है, न राष्ट्रहित।”
भगवान श्रीराम किसी सत्ता, संस्था या राजनीति के नहीं—वे भारत की आत्मा हैं।
अयोध्या में यदि किसी कर्मचारी ने अपराध किया है तो उसे कानून के अनुसार कठोर दंड मिलना चाहिए। किंतु उस अपराध को आधार बनाकर भगवान श्रीराम, अयोध्या की गौरवशाली परंपरा, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और सनातन संस्कृति को कटघरे में खड़ा करना न न्याय है, न राष्ट्रहित।
अपराध व्यक्ति का होता है, आस्था का नहीं। दोष कर्मचारियों का हो सकता है, करोड़ों लोगों की भावनाओं का नहीं।
भारत आज 145 करोड़ से अधिक नागरिकों के आत्मविश्वास, उपलब्धियों और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का साक्षी है। विश्व मंच पर भारतीय प्रतिभाएँ अपनी पहचान स्थापित कर रही हैं। जिन समाजों और वर्गों को दशकों तक उपेक्षा का सामना करना पड़ा, वे आज सम्मान और अवसर प्राप्त कर रहे हैं। यह केवल विकास का नहीं, बल्कि आत्मगौरव के पुनर्जागरण का भी समय है।
ऐसे समय में अयोध्या में कुछ कर्मचारियों द्वारा किए गए कथित अपराध को इस प्रकार प्रस्तुत करना कि मानो पूरी अयोध्या, श्रीराम मंदिर और सनातन परंपरा ही संदेह के घेरे में आ गई हो, न तो न्यायोचित है और न ही विवेकपूर्ण।
यदि किसी कर्मचारी ने चोरी, भ्रष्टाचार अथवा अन्य कोई अपराध किया है, तो उसकी निष्पक्ष जाँच हो और दोष सिद्ध होने पर उसे कठोर दंड मिले। किसी कर्मचारी का अपराध उसका व्यक्तिगत और कानूनी उत्तरदायित्व है। लेकिन कुछ व्यक्तियों के अपराध को करोड़ों लोगों की आस्था पर आक्रमण का माध्यम बना देना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
अयोध्या केवल एक नगर नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है। भगवान श्रीराम किसी सरकार, किसी राजनीतिक दल, किसी ट्रस्ट या किसी संस्था की सीमाओं में बंधे नहीं हैं। वे सत्य, मर्यादा, न्याय, करुणा, कर्तव्य और राष्ट्रधर्म के शाश्वत आदर्श हैं। इसलिए किसी प्रशासनिक या आपराधिक घटना को भगवान श्रीराम की प्रतिष्ठा से जोड़ना हमारी सांस्कृतिक समझ की दुर्बलता को दर्शाता है।
भारत के लोकतंत्र में आलोचना का अधिकार सभी को है, किंतु आलोचना तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, न कि ऐसी राजनीति पर जो समाज को बाँटे और आस्था को विवाद का विषय बनाए। जिस प्रकार इस घटना को राजनीतिक रंग देकर पूरे अयोध्या को कलंकित करने का प्रयास किया जा रहा है, वह अनेक लोगों को 6 दिसंबर 1992 से पूर्व के वैचारिक और राजनीतिक संघर्षों की याद दिलाता है। दुर्भाग्य से कुछ लोग हर घटना को सनातन परंपरा और अयोध्या की प्रतिष्ठा पर प्रहार का अवसर मान लेते हैं।
यह भी स्मरण रखना चाहिए कि उत्तर प्रदेश ने लंबे समय तक अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना किया। कानून-व्यवस्था, जघन्य अपराध, बिजली, पानी तथा आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में व्यापक समस्याएँ थीं। इन चुनौतियों को दूर करने के लिए पिछले वर्षों में अनेक प्रयास हुए हैं। इसी कारण आज उत्तर प्रदेश की छवि अनेक क्षेत्रों में एक बेहतर प्रदेश के रूप में उभरी है तथा विकास और निवेश के क्षेत्र में उसकी नई पहचान बनी है।
मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ के कार्यों पर मतभेद हो सकते हैं, किंतु यह भी तथ्य है कि वे मुख्यमंत्री बनने से पहले भी गोरखनाथ मठ के माध्यम से सामाजिक सेवा से जुड़े रहे हैं। लाखों लोगों का मानना है कि उन्होंने समाज में आत्मविश्वास तथा धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने का निरंतर प्रयास किया है।
जो लोग कभी भगवान राम और अयोध्या से दूरी बनाते दिखाई देते थे, वे आज स्वयं को राम और अयोध्या का सबसे बड़ा हितैषी बताने का प्रयास कर रहे हैं। किसी भी व्यक्ति या समूह की निष्ठा का आकलन उसके शब्दों से अधिक उसके आचरण से होता है। भगवान श्रीराम की जन्मस्थली और गर्भगृह से जुड़े पूर्व के अनुभव भी लोगों के मन-मस्तिष्क पर आज भी अंकित हैं।
आज अयोध्या में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु भगवान श्रीराम के दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं। यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय आत्मविश्वास के पुनर्जागरण का जीवंत प्रमाण है। किसी एक घटना से यह विश्वास न कभी डगमगाया है और न आगे डगमगाएगा।
सनातन संस्कृति ने हजारों वर्षों में असंख्य संकट, आक्रमण और षड्यंत्र देखे हैं, फिर भी उसका प्रकाश कभी मंद नहीं पड़ा। कुछ व्यक्तियों के अपराध न भगवान श्रीराम की महिमा को कम कर सकते हैं, न अयोध्या की गरिमा को और न ही सनातन संस्कृति की विशालता को।
इसलिए आवश्यक है कि अपराधी को दंड मिले, व्यवस्था और अधिक पारदर्शी बने, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी व्यक्ति की गलती को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के विरुद्ध राजनीतिक हथियार न बनाया जाए।
अयोध्या विश्वास है, विरासत है, संस्कृति है और भारत की आत्मा का स्पंदन है। कुछ व्यक्तियों के अपराध उसकी पहचान नहीं बन सकते। भगवान श्रीराम मर्यादा के शाश्वत प्रतीक हैं और उनकी महिमा किसी क्षणिक विवाद से कहीं अधिक विराट है।
लेखक: पूरन सिंह मेहरा
राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे हैं तथा उससे संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं के प्रत्यक्ष साक्षी एवं सहभागी रहे हैं।
पता:
पूरन सिंह मेहरा
13, कैंट बाज़ार, तल्लीताल
नैनीताल
मोबाइल: 9928510083
पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
नैनीताल में क्लिक करके नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य सभी महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट पढ़ी जा सकती हैं। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचार, अल्मोड़ा के समाचार, बागेश्वर के समाचार, चंपावत के समाचार, ऊधमसिंह नगर के समाचार, देहरादून के समाचार, उत्तरकाशी के समाचार, पौड़ी के समाचार, टिहरी जनपद के समाचार, चमोली के समाचार, रुद्रप्रयाग के समाचार, हरिद्वार के समाचार और उत्तराखंड से संबंधित अन्य समाचार भी पढ़ सकते हैं।
आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे उत्तराखंड के नवीनतम अपडेट्स-‘नवीन समाचार’ पर पढ़ें। हमारे व्हाट्सएप चैनल से, फेसबुक ग्रुप से, गूगल न्यूज से, एक्स से, थ्रेड्स चैनल से और डेलीहंट से जुड़ें। अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें यहाँ क्लिक करके सहयोग करें..।
Tags (Ayodhya-Putting Faith in Dock not Good) :
Ayodhya-Putting Faith in Dock not Good, Uttarakhand News, Nainital News, Ayodhya News, Shri Ram Temple News, Religious News, Cultural News, Opinion News, Hindi News, Sanatan Culture News, India News, Social News, Public Discourse News, Faith And Society News, Spiritual News, Latest News, Ayodhya Temple Donation Controversy Opinion, Shri Ram Temple Faith And Accountability Debate, Sanatan Culture And Public Trust Discussion, Ayodhya Religious Heritage News India, Faith Versus Individual Crime Analysis, Cultural Identity And Religious Institutions India, Ram Janmabhoomi Movement Perspective Article, Public Accountability In Religious Trusts India, Ayodhya Temple Governance And Transparency, Religious Faith And Legal Responsibility Discussion, #Ayodhya #ShriRam #RamMandir #SanatanCulture #FaithAndSociety #ReligiousNews #IndiaNews #OpinionNews #CulturalHeritage #AyodhyaDham #HindiNews #PublicDiscourse #SpiritualNews #NainitalNews #UttarakhandNews

डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। 














You must be logged in to post a comment.