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नैनीताल : प्रधानाचार्य अमनदीप संधू को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ी राहत

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-अब सात जनवरी को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सभी पक्षों को सुनते हुए याचिका पर फिर से सुनवाई होने की उम्मीद बनी

प्रधानाचार्य अमनदीप संधू।

नवीन समाचार, नैनीताल, 05 जनवरी 2020। सर्वोच्च न्यायालय ने नगर के प्रतिष्ठित विद्यालय के विवाद में प्रधानाचार्य अमनदीप संधू को बड़ी राहत दे दी है। श्री संधू ने सर्वोच्च न्यायालय में विशेष याचिका दायर कर उत्तराखंड उच्च न्यायालय के 9 दिसंबर 2020 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय ने नियुक्त प्रधानाचार्य द्वारा पुलिस सुरक्षा की मांग करने वाली याचिका पर श्री संधू का नाम पक्षकारों में से हटा दिया था। इस मामले में श्री संधू की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, जिस पर आगामी 7 जनवरी को सुनवाई होनी है।
दूसरी ओर श्री संधू ने याचिका से अपना नाम पक्षकारों में हटाये जाने को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती थी। इस पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी व एमआर शाम ही खंडपीठ ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश से श्री संधू के नाम को हटाने को ‘पुर्नजीवित’ यानी नाम को फिर से बहाल कर दिया है और मामले के गुणों पर कोई राय व्यक्त किए बिना उच्च न्यायालय से उस रिट याचिका को नये सिरे से सभी पक्षों की सुनवाई करते हुए सुनने को कहा है और श्री संधू की याचिका को निस्तारित कर दिया है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 28 दिसम्बर 2020। शिक्षा नगरी के प्रतिष्ठित विद्यालय के विवाद में सोमवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। इस दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमथ एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए मामले की सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई के लिए 11 जनवरी की तिथि तय कर दी।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में प्रतिष्ठित विद्यालय के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू ने उच्च न्यायालय में प्रार्थना पत्र दायर कर कहा है कि इस मामले में पहली याचिका में उन्हें पक्षकार बनाया गया और बाद में उन्हें हटा दिया गया, जबकि वह पूरे मामले में स्वयं पीड़ित पक्षकार हैं। उन्होंने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी कहा कि आगरा डायसिस वर्तमान में कहीं पंजीकृत नहीं है। संबंधित मामला निचले दीवानी न्यायालय में चल रहा है, साथ ही इसी प्रकरण से जुड़ी विशेष याचिका सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है।

यह है पूरा विवाद एवं विभिन्न पक्षों का कथन
नैनीताल। गत 13 दिसंबर को आगरा डायसिस की ओर से अंतरिम प्रधानाचार्य घोषित पीटर इमेन्युअल की अगुवाई में नगर के प्रतिष्ठित कॉलेज में घुसने का प्रयास किया गया। इस मामले में आगरा डायसिस की ओर से बताया गया कि उन्होंने इस कॉलेज के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू को वर्ष 2017 से गवर्निग बॉडी के आदेशों की अवहेलना तथा मामले को न्यायालय में उलझाने सहित अन्य आरोपों पर 21 अक्टूबर 2019 को अमनदीप संधू को प्रधानाचार्य के पद से निलंबित कर दिया था और डा. पीटर धीरज इमेन्युअल को अंतरित प्रधानाचार्य नियुक्त कर दिया है। डा. इमेन्युअल को पहले 22 अक्टूबर को कॉलेज में प्रवेश नहीं करने दिया गया। इस पर इमेन्युअल के द्वारा उच्च न्यायालय से कॉलेज के प्रधानाचार्य का भौतिक रूप से कार्यभार ग्रहण करने के दौरान सुरक्षा प्रदान करने एवं निलबित प्रधानाचार्य अमनदीप संधू को पीटर इमेन्युअल व समिति के सदस्यों को कॉलेज में प्रवेश से रोकने पर रोकने की मांग की थी। इस पर डिप्टी अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि जब भी याचिकाकर्ता आएंगे उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। आगरा डायेसिस का यह भी कहना है कि 1976 से पश्चिमी उत्तराखंड व यूपी की चर्च ऑफ इंडिया की कॉलेजों सहित संपत्तियां उनके अधिकार में हैं। उन्होंने ही निलंबित प्रधानाचार्य संधू की भी नियुक्ति की थी। लेकिन 2004 में लखनऊ डायेसिस के बिशप ने इन विद्यालयों पर अपना अधिकार बताते हुए इन विद्यालयों के स्वामित्व को विवादित बना दिया। 2017 से प्रधानाचार्य संधू ने आगरा डायसिस के आदेशों को मानने से इंकार कर दिया।
वहीं लखनऊ डायेसिस का कहना है कि नगर के विवादों में आए तथा दूसरा बालिका विद्यालय तथा उनकी अन्य संपत्तियां शुरुआत से ही लखनऊ डायेसिस की मिल्कियत रही हैं। 1976 में सीएनआई यानी चर्च ऑफ नार्थ इंडिया ने अवैधानिक रूप से डायेसिस व संपत्तियों का बंटवारा किया। जिसके बाद से ही न्यायालयों में डायेसिसों के विवाद न्यायालय में चल रहे हैं। यह भी दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका संख्या 8800 व 8801 में 2010 में लखनऊ डायेसिस के पक्ष में अंतिम रूप से निर्णय दे दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अपना दावा कर रहे आगरा डायेसिस का नगर के प्रतिष्ठित विद्यालय का प्रबंधन करने वाली सोसायटी में पंजीकरण भी नहीं है, बल्कि यह लखनऊ डायेसिस के नाम पर है। इसलिए आगरा डायेसिस को अंतरिम प्रधानाचार्य नियुक्त करने का अधिकार नहीं है। यह भी कहा कि स्कूल के काबिज एवं अंतरिम दोनों प्रधानाचार्य उनके प्रतिनिधि नहीं हैं एवं अवैध हैं। यह भी बताया कि विवाद आगरा व लखनऊ डायेसिस सहित चार पक्षों के बीच चल रहा है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने आपसी विवाद निचली अदालत में निपटाने को कहा है।

यह भी पढ़ें : फिर चर्चा में नैनीताल के प्रतिष्ठित कॉलेज का विवाद, हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के लिए नियत की तिथि

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 दिसम्बर 2020। सरोवरनगरी-शिक्षा नगरी के प्रतिष्ठित कॉलेज में प्रधानाचार्य की नियुक्ति को लेकर पिछले दिनों हुए विवाद के मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सभी पक्षकारों को सुनने के लिए अगली सुनवाई के लिए 28 दिसंबर की तिथि नियत कर दी है। उम्मीद है कि इस दिन न्यायालय मामले से जुड़े सभी पक्षकारों को सुनेगा।
इस मामले में प्रतिष्ठित विद्यालय के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू ने उच्च न्यायालय में प्रार्थना पत्र दायर कर कहा है कि इस मामले में पहली याचिका में उन्हें पक्षकार बनाया गया और बाद में उन्हें हटा दिया गया, जबकि वह पूरे मामले में स्वयं पीड़ित पक्षकार हैं। उन्होंने अपने प्रार्थनापत्र में यह भी कहा कि आगरा डायसिस वर्तमान में कहीं पंजीकृत नहीं है। संबंधित मामला निचले दीवानी न्यायालय में चल रहा है, साथ ही इसी प्रकरण से जुड़ी विशेष याचिका सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है। इस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सभी पक्षकारों को सुनने के लिए 28 दिसंबर की तिथि नियत कर दी।

नवीन समाचार
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