नवीन समाचार, देहरादून, 13 मई 2025 (Uttarakhand Cooperative Bank Accused of Duping)। उत्तराखंड के राज्य सहकारी बैंक में बड़ा वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। राज्य सहकारी बैंक के तत्कालीन प्रबंधन पर आरोप है कि उन्होने वर्ष 2019 में 15 करोड़ रुपये का निवेश एक ऐसी कंपनी में कर दिया, जिसकी वित्तीय स्थिति बाजार … Read more
नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अक्टूबर 2024 (Medical College demanding 1 Lakh for Internship)। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात कही जाती है, लेकिन राज्य का एक मेडिकल कॉलेज-विश्वविद्यालय राज्य की राजधानी में ही सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों पर चुनौती खड़ी कर रहा है। यहां मेडिकल इंटर्न छात्र-छात्राओं से कथित … Read more
नवीन समाचार, नैनीताल, 23 अप्रैल 2024 (Steel-girder bridge broke during construction)। नैनीताल जनपद के दूरस्थ ओखलकांडा विकासखंड में 1.55 करोड़ की लागत से बन रहा स्टील गार्डर पुल निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही टूट गया है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में निर्माण कार्यों में हो रहे भ्रष्टाचार की पोल खुल गयी है। 45 मीटर … Read more
नवीन समाचार, रुद्रपुर, 30 जनवरी 2024 (Corruption)। विजीलेंस यानी सतर्कता अधिष्ठान ने मंगलवार को एक और बड़ी कार्रवाई करते हुये एक पुलिस दारोगा यानी उप निरीक्षक को 4000 रुपये की रिश्वत लेते हुये रंगे हाथांे गिरफ्तार किया है। आरोपित के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत अभियोग दर्ज कर आगे जांच की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बाजपुर के गांव गणेशपुर निवासी एक शिकायतकर्ता ने सतर्कता अधिष्ठान के टॉल फ्री हेल्पलाईन नम्बर 1064 पर शिकायत अंकित करायी थी कि उसका अपने गांव गणेशपुर में मकान बन रहा है। जिसके लिये उसने अपने पड़ोसियों से बिजली ली हुयी थी। इस कारण बिजली विभाग के अवर अभियंता ने बिजली चोरी करने का आरोप लगाते हुये उसके विरुद्ध थाना कैलाखेड़ा में शिकायत दर्ज करायी थी।
इस पर कैलाखेड़ा थाने में तैनात उप निरीक्षक मोहन सिंह बोहरा उससे मुकदमा न लिखने के एवज में 4000 रुपये की माँग कर रहा है। शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहता था, और भ्रष्ट दारोगा के खिलाफ कानूनी कार्यवाही चाहता था।
इस शिकायत पर सतर्कता अधिष्ठान सेक्टर नैनीताल हल्द्वानी ने जाँच से प्रथमदृष्टया आरोप सही पाये जाने पर तत्काल ट्रैप टीम का गठन किया और टीम ने नियमानुसार कार्यवाही करते हुए 30 जनवरी को थाना कैलाखेड़ा जनपद ऊधमसिंहनगर में नियुक्त उपनिरीक्षक मोहन सिंह बोहरा को शिकायतकर्ता से 4000 रुपये की रिश्वत लेते हुये थाना कैलाखेड़ा के पास से रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। विजीलेंस की ओर से कहा गया है कि आरोपित के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर आगे अनुसंधान किया जायेगा।
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नवीन समाचार, हल्द्वानी, 17 जनवरी 2024(Corruption)। सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार, घूसखोरी खत्म होने का नाम नहीं ले रही। हल्द्वानी रेलवे स्टेशन पर तैनात एक दरोगा द्वारा 2000 रुपये की रिश्वत मांगता हुआ रंगे हाथों पकड़ा गया है। सीबीआई ने दरोगा को गिरफ्तार कर लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भ्रष्टाचार को लेकर चलाए जा रहे है अभियान की शिकायत के आधार पर बुधवार को सीबीआई ने हल्द्वानी रेलवे स्टेशन पर छापेमारी की। छापेमारी में हल्द्वानी रेलवे स्टेशन पर तैनात आरपीएफ के जवान को 2000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है।
बताया जा रहा कि हल्द्वानी रेलवे स्टेशन पर तैनात आरपीएफ का दरोगा दिनेश कुमार मीणा पार्किंग में टैक्सी पार्क करने की एवज में रिश्वत मांग रहा था। सीबीआई में इसकी ऑनलाइन शिकायत की गई थी। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई की टीम दो दिन पहले हल्द्वानी रेलवे स्टेशन पहुंची और मामले की गोपनीयता से जांच की।
मामला सही पाए जाने के बाद आज रिश्वत लेते हुए आरपीएफ के सब इंस्पेक्टर को गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल सीबीआई की टीम पूरे मामले की जांच पड़ताल कर रही है। आरोपित को सीबीआई की टीम देहरादून लेकर जाएगी।
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यह भी पढ़ें : (Corruption) सड़क पर घूस लेता पकड़ा गया आरटीओ का प्रशासनिक अधिकारी
नवीन समाचार, हल्द्वानी, 9 जनवरी 2024 (Corruption)। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार पर सरकार चाहे जितना लगाम लगाने की बातें करे, लेकिन राज्य में भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी का दीमक कम होने का नाम नहीं ले रहा। आज मंगलवार को विजिलेंस की टीम ने जनपद ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर स्थित आरटीओ कार्यालय में तैनात प्रशासनिक अधिकारी को सड़क पर 4000 रुपये रिश्वत लेते हुये रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ने सतर्कता अधिष्ठान में शिकायत की थी कि उसने थाना हल्द्वानी से नीलामी में मोटर साइकिल ली थी। गाड़ी की आरसी यानी पंजीकरण के कागजातों को अपने नाम पर चढ़ाने के लिये आरटीओ कार्यालय रुद्रपुर के प्रशासनिक अधिकारी भाष्करानन्द जोशी ने उनसे आरसी बनाने के एवज में 4000 रुपये की मांग की।
शिकायत पर सतर्कता अधिष्ठान सेक्टर हल्द्वानी ने गोपनीय जांच की और प्रथमदृष्टया शिकायत सही पाये जाने पर तत्काल ट्रैप टीम का गठन कर मंगलवार को प्रशासनिक अधिकारी भाष्करानन्द जोशी पुत्र भैरव दत्त जोशी निवासी फेस-3 डहरिया मुखानी, हल्द्वानी जनपद नैनीताल को शिकायतकर्ता से 4000 रुपये की रिश्वत लेते हुये देवलचौड़ चौराहा हल्द्वानी से रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। सतर्कता डॉ. वी मुरुगेशन ने ट्रैप टीम को नगद पुरस्कार देने की घोषणा की है।
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नवीन समाचार, रामनगर, 22 दिसंबर 2023 (Corruption)। उत्तराखंड के सरकारी विभागीं में रिश्वतखोर भ्रष्टाचारियों के खिलाफ विजिलेंस की कार्रवाई लगातार जारी है। विजिलेंस ने शुक्रवार को रामनगर के आरटीओ ऑफिस में बड़ी कार्रवाई करते हुये यहां कार्यरत प्रधान सहायक को 2200 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है।
आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत ललित मोहन आर्या एक ई रिक्शा के पंजीकरण के बदले रिश्वत की मांग कर रहा था। इसकी शिकायत ई-रिक्शा मालिक की ओर से विजिलेंस में की गई। इसके बाद विजिलेंस यानी सतर्कता अधिष्ठान सैक्टर हल्द्वानी ने पूरे मामले की गुप्त रूप से जांच की।
गुप्त जांच में शिकायत ठीक पाये जाने पर विजिलेंस ने ट्रैप टीम का गठन किया और शनिवार को एआरटीओ कार्यालय में छापेमारी की और आरोपित ललित मोहन आर्या को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। मामले में आरोपित पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अन्तर्गत अभियोग दर्ज किया जा रहा है। जबकि सतर्कता निदेशक नेा ट्रैप टीम को नकद पुरुस्कार देने की घोषणा की है।
साथ ही आम जन से कहा है कि अगर आप से भी कोई सरकारी अधिकारी या चुना हुआ जनप्रतिनिधि किसी काम के बदले रिश्वत मांगे तो इसकी शिकायत विजिलेंस के टॉल-फ्री हैल्पलाईन नंबर 1064 एवं ह्वाट्सएप नंबर 9456592300 पर चौबीस घंटे की जा सकती है।
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यह भी पढ़ें (Corruption): चर्चित स्ट्रिंग मामला : भ्रष्टाचारी अधिकारी आखिरकार सेवानिवृत्ति के बाद गिरफ्तार.. डिमोशन भी हुआ था…
नवीन समाचार, पौड़ी, 3 नवंबर 2023 (Corruption)। पौड़ी जनपद के शिक्षा विभाग के चर्चित स्टिंग प्रकरण में आखिरकार पुलिस ने तत्कालीन सीईओ यानी मुख्य शिक्षा अधिकारी को देहरादून के बिंदाल क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया है। इसके बाद आरोपित को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत में पेश किया। न्यायालय ने आरोपित को 14 दिन की रिमांड पर सुद्धोवाला जेल भेज दिया है। प्रकरण से पूर्व सीईओ पदोन्नत होकर एससीईआरटी के निदेशक बन गए थे, जबकि प्रकरण के बाद वह पदावनत होकर उप निदेशक बन गए थे।
ये था मामला : शासन से परमिशन मिलने के बाद पौड़ी कोतवाली में 7 दिसंबर 2022 को वीडियो स्टिंग मामले में पौड़ी के तत्कालीन सीईओ मदन सिंह रावत, तत्कालीन डीईओ माध्यमिक हरे राम यादव और पटल सहायक दिनेश गैरोला के विरुद्ध भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इस प्रकरण को लेकर पौड़ी निवासी आशुतोष नेगी ने पुलिस को शिकायती पत्र देने समेत स्टिंग का वीडियो दिया था। जिसमें शिक्षा विभाग के अफसर को पैसे का लेन देन करते दिखाया गया था।
(Corruption) पौड़ी पुलिस को शिकायत मिलने के बाद इस पूरे प्रकरण की जांच शुरू की गई। इसके बाद पुलिस ने शिक्षा विभाग के इस वीडियो की सत्यता की जांच के लिए चंडीगढ़ प्रयोगशाला भेजा। इसके बाद आरोपियों पर कार्रवाई को लेकर शासन से परमिशन मांगी गई। बताया गया कि इस बीच आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए उच्च न्यायालय की भी शरण ली।
(Corruption) लेकिन कोर्ट ने अंतरिम जमानत के प्रार्थना पत्र को भी खारिज कर दिया। साथ ही कोर्ट ने छह सप्ताह की मोहलत देते हुए कहा कि कोर्ट में सरेंडर करते हुए रेगुलर बेल मांगें। जिस पर बीते 26 सितंबर को छह सप्ताह की भी समय सीमा पूरी हो गई। पौड़ी पुलिस ने इस चर्चित स्टिंग मामले में पटल सहायक दिनेश गैरोला के रूप में पहली गिरफ्तारी बीते 15 अक्तूबर को की थी।
(Corruption) पुलिस ने यहां बताया कि आरोपी मुख्य शिक्षा अधिकारी की गिरफ्तारी देहरादून के बिंदाल क्षेत्र से की गई। सीओ नौटियाल ने तत्कालीन सीईओ मदन सिंह रावत की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। बताया कि मामले में जिला शिक्षा अधिकारी हरेराम यादव की तलाश जारी है। वह रिटायरमेंट के बाद से लापता चल रहे हैं।
यह भी पढ़ें : (Corruption) लगातार दूसरे दिन एक राजस्व उप निरीक्षक रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार…
नवीन समाचार, हरिद्वार, 27 अक्टूबर 2023 (Corruption)। उत्तराखंड में लगातार दूसरे दिन एक राजस्व उप निरीक्षक-लेखपाल को जनपद हरिद्वार में विजीलेंस यानी सतर्कता अधिष्ठान ने एक शिकायत पर रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
(Corruption) विजिलेंस के अधीक्षक धीरेंद्र गुंज्याल ने शुक्रवार शाम बताया कि एक शिकायतकर्ता ने शिकायत की थी कि उसके पास गांव में 18 बीघा जमीन के अलावा, अन्य गांव डौसनी में भी सुरेश कुमार यादव, निवासी सी-127 सुभाष नगर, रूडकी (हरिद्वार) तथा उनकी पत्नी सरोज बाला की लगभग 24 बीघा जमीन है।
(Corruption) जिनकी जमीन की बटाई के बदले में प्रतिवर्ष फसल पर वह किराये की रकम देता है। इस साल बाढ़ आपदा के कारण फसल बर्बाद होने के कारण मुआवजे के लिये दिये गये प्रार्थना पत्र के आधार पर एसडीएम, लक्सर तथा नायब तहसीलदार, लक्सर से 13 सितंबर को इस सम्बन्ध में आदेश किये गए।
(Corruption) इसके बाद उस पर रिपोर्ट लगवाने को एवज में बछेड़ी खादर क्षेत्र के चकबंदी लेखपाल वीरपाल ने उससे 7,500 रुपये रिश्वत की माँग की जा रही है। शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने विजीलेंस में शिकायत की।
(Corruption) विजिलेंस की गोपनीय जाँच में प्रथम दृष्टया आरोप सही लगने पर विजीलेंस की ट्रैप टीम ने आज आरोपित वीरपाल पुत्र आशा राम निवासी, 54, पटेलनगर, गणेशपुर, रूड़की, निकट मालवीय चौक, थाना गंगनहर, जनपद हरिद्वार को शिकायतकर्ता से 7500 रुपये रिश्वत ग्रहण करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। विजिलेंस निदेशक ने ट्रैप टीम को नकद पुरूस्कार की घोषणा की गयी है।
(Corruption) उल्लेखनीय है कि इसके एक दिन पहले हल्द्वानी की विजीलेंस की टीम ने गुरुवार को सितारगंज क्षेत्र के एक राजस्व उप निरीक्षक-पटवारी को 3 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुये रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
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यह भी पढ़ें : हल्द्वानी (Corruption) : एक और घूसखोर रंगे हाथों चढ़ा विजीलेंस के हत्थे, टीम को मिला 5000 का पुरस्कार
नवीन समाचार, हल्द्वानी, 26 अक्टूबर 2023 (Corruption)। उत्तराखंड विजीलेंस यानी राज्य सतर्कता अधिष्ठान ने गुरुवार को भ्रष्टाचार पर एक और कार्रवाई करते हुये एक राज्स्व उप निरीक्षक यानी पटवारी को 8 हजार रुपये की घूस लेते हुये रंगे हाथों पकड़ा है। आरोप है कि आरोपित ने रुपये लेकर अपनी रिपोर्ट बदली दी थी। उसे पकड़ने वाली टीम को 5 हजार का ईनाम देने की घोषणा की गयी है।
(Corruption) इस सम्बन्ध में उत्तराखंड विजीलेंस से सेक्टर हल्द्वानी में प्राप्त शिकायत पर सतकर्तता निदेशक के आदेशों पर गुरुवार को अधिष्ठान के पुलिस उपाधीक्षक अनिल मनराल के पर्यवेक्षण में तथा निरीक्षक विनोद कुमार यादव के नेतृत्व में विजिलेंस टीम ने शिकायत पर पटवारी त्रिलोचन सुयाल, पटवारी क्षेत्र साधुनगर-सरौजा, उप तहसील नानकमत्ता जनपद ऊधमसिंह नगर को उनके ग्राम सुनखरी कला नानकमत्ता स्थित कार्यालय से शिकायतकर्ता से 8,000 रुपये की रिश्वत लेते हुये रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
(Corruption) बताया गया है कि शिकायतकर्ता ने शिकायत की थी कि उसने अपने खेत में धान की रोपाई की थी। लेकिन जब धान पकने पर काटने गया तो गुरदीप कौर व उसके परिवार के लोग उसे धान नहीं काटने दे रहे थे। इस पर शिकायतकर्ता ने उप जिलाधिकारी तहसील सितारगंज को प्रार्थना-पत्र दिया। इस पर पटवारी त्रिलोचन सुयाल ने पहले भूमि पर विवाद होने की रिपोर्ट लगायी।
(Corruption) लेकिन पुनः उप जिलाधिकारी को प्रार्थना-पत्र देने पर पटवारी ने अपनी दोबारा लगायी गयी आख्या में शिकायतकर्ता के पक्ष में रिपोर्ट लगायी तथा इसके एवज में 8000 रुपये उत्कोच यानी घूस की मांग की। इस पर शिकायतकर्ता ने विजिलेन्स कार्यालय में प्रार्थना-पत्र दिया। शिकायतकर्ता की शिकायत की जांच कराने पर शिकायत सही पायी गयी। इस पर आज की कार्रवाई की गयी।
(Corruption) ट्रैप टीम में निरीक्षक मनोहर सिंह दसौनी, उपनिरीक्षक रमेश बिष्ट, वरिष्ठ आरक्षी दीप जोशी एवं आरक्षी संजीव नेगी भी शामिल रहे। इस सफलता पर सतर्कता निदेशक ने ट्रैप टीम को 5000 रुपये का नगद पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की है।
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यह भी पढ़ें : Corruption : बच्चों द्वारा खुद जमा किये रुपये खा रहा शिक्षा विभाग, हाईकोर्ट ने लगाया 25 हजार रुपये का जुर्माना
नवीन समाचार, नैनीताल, 6 अक्टूबर 2023 (Corruption)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने प्रदेश के विद्यालयों में छात्रों की ओर से जमा की जाने वाली संचायिका के लाखों रूपये में गड़बड़ी और रुपये छात्रों को वापस न लौटाए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुये शिक्षा विभाग पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।
(Corruption) मामले के अनुसार आरटीआई क्लब ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में 2016 तक छात्र-छात्राओं से बचत को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ धनराशि फीस के साथ संचायिका के रूप में जमा कराई जाती थी, जो विद्यालय छोड़ने पर उन्हें वापस कर दी जाती थी।
(Corruption) राज्य सरकार ने वर्ष 2016 में इसे बंद कर दिया गया। लेकिन अनेक विद्यालयों ने संचायिका में जमा धनराशि छात्रों को वापस न लौटाकर इसमें गड़बड़ी कर इसका दुरुपयोग किया है।
(Corruption) जनहित याचिका में संचायिका का पैसा छात्रों को वापस करने और घोटाला करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है। अगर विद्यालय इस पैसे को वापस नहीं करते है तो इसका उपयोग विद्यालयों की सुविधाओं में किया जाए।
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यह भी पढ़ें : Corruption : 2 लाख रुपए के लिए आबकारी अधिकारी ने कर दिया खेल, अब सेवानिवृत्ति से 5 वर्ष पहले ही नौकरी जाने की नौबत
नवीन समाचार, रुद्रपुर, 8 सितंबर 2023 (Corruption) । बाबू से सहायक आबकारी आयुक्त बने एक अधिकारी द्वारा दो लाख रुपए के लिए जिला आबकारी कार्यालय में खड़े नए ट्रैक्टर की पुराने से अदला-बदली कर दी।
(Corruption) मामला प्रकाश में आने के बाद मामले की जांच के आदेश दे दिये गये हैं, और जांच होने तक सहायक आबकारी आयुक्त को निलंबित कर दिया गया है और उस पर नौकरी से बर्खास्तगी या पदावनत होने की तलवार लटक गयी है। उसके पूरे कार्यकाल के क्रियाकलापों की कुंडली भी खंगाली जा रही है।
(Corruption) प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपित पन्ना लाल शर्मा आबकारी विभाग में बाबू के पद पर भर्ती हुए थे, लेकिन बाद में उन्होंने निरीक्षक की भर्ती उतीर्ण की और सहायक आबकारी आयुक्त प्रवर्तन के पद तक पहुंच गए। इधर उनका कार्यकाल अभी पांच वर्ष का बचा हुआ है, लेकिन आरोप है कि बीती तीन सितंबर की रात को मात्र दो लाख के लिए उन्होंने लालच में आकर जिला आबकारी कार्यालय में खड़े नए ट्रैक्टर की पुराने से अदला-बदली कर दी थी। इस मामले वह फंस गए हैं।
(Corruption) एक ओर पुलिस उनके प्रवर्तनीय कार्यकाल से लेकर उनकी पूर्व तैनाती के क्रियाकलापों को खंगालने जा रही है, जिसकी रिपोर्ट बनाकर वह विभाग को भेजेगी, वहीं आबकारी विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर कुमाऊं मंडल केके कांडपाल ने खुद इस मामले की जांच करने का निर्णय लिया है।
(Corruption) वहीं, जांच से पहले आरोपित आबकारी अधिकारी को निलंबित किया जा सकता है और उसके बाद उन्हें पदावनत यानी डिमोशन करने और अदालत के आदेशों पर आरोपित की बर्खास्तगी की कार्रवाई भी हो सकती है। इसके लिए जिला आबकारी अधिकारी अशोक मिश्रा ने विभाग को अपनी रिपोर्ट दे दी है।
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यह भी पढ़ें : Corruption : वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी को हल्द्वानी विजीलेंस ने 1 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए किया गिरफ्तार, घर से 20 लाख रुपए भी बरामद
नवीन समाचार, हल्द्वानी, 24 अगस्त 2023 (Corruption)। विजीलेंस ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पीसीएस अधिकारी को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। बताया गया है कि पकड़े गए अधिकारी 2005 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं। उनके घर से 20 लाख रुपए की नगदी भी बरामद की गयी है।
(Corruption) प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भ्रष्टाचार के विरूद्ध मुहिम के अन्तर्गत जारी किये गये टोल फ्री नंबर 1064 में प्राप्त शिकायत पर सतर्कता निदेशक उत्तराखंड के आदेशों पर गरुवार को सतर्कता अधिष्ठान सेक्टर हल्द्वानी के पुलिस अधीक्षक प्रहलाद नारायण मीणा के निर्देशन और पुलिस उपाधीक्षक सतर्कता अधिष्ठान सेक्टर हल्द्वानी, अनिल मनराल के पर्यवेक्षण में विजिलेंस की टीम ने निरीक्षक ललिता पांडे के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई।
(Corruption) इस कार्रवाई में जिला पंचायत राज अधिकारी रुद्रपुर जनपद ऊधमसिंह नगर रमेश चंद्र त्रिपाठी पुत्र गंगा प्रसाद त्रिपाठी वर्तमान निवासी क्वार्टर 5 आफिसर्स कालोनी, विकास भवन के पीछे रुद्रपुर को स्मार्ट बाजार रुद्रपुर की पार्किग के लिए एक सप्लायर शिकायतकर्ता से एक लाख रूपये की रिश्वत लेते हुये रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।
(Corruption) बताया गया है कि आरोपित अधिकारी के घर से 20 लाख रुपए की नगदी भी बरामद की गई है। टीम में मनोहर सिंह दसौनी, विजोर कुमार यादव, हेम चंद्र पांडे, वरिष्ठ आरक्षी जगदीश बोहरा, नवीन कुमार और गिरीश जोशी भी शामिल रहे।
यह भी पढ़ें Corruption : 9 किमी पैदल चलकर गांव पहुंचे डीएम तो खुली योजना की पोल, ईई का वेतन रोकने एवं ठेकेदार का भुगतान रोकने के निर्देश, एसडीएम करेंगे सभी कार्यों का सत्यापन
-ग्राम अल्चौना पहुंचे डीएम ने पकड़ी जल जीवन मिशन के कार्यों में कमियां नवीन समाचार, नैनीताल, 6 फरवरी 2023 (Corruption) । नैनीताल जनपद के जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल ने सोमवार को भीमताल विकासखंड के ग्राम अलचौना में जल जीवन मिशन के तहत चल रहे कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने बिछाई गई पाईप लाइनों को मानकों के अनुसार नही पाये जाने पर मानकों के अनुरूप कार्य नही होने पर पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता जीएस तोमर को कडी फटकार लगाई। यह भी पढ़ें : भाजयुमो से कांग्रेस में आए चर्चित नेता की गोलियों से भूनकर हत्या, हड़कंप मचा
(Corruption) तथा मुख्य विकास अधिकारी डॉ. संदीप तिवारी को अधिशासी अभियंता से स्पष्टीकरण लेने तथा सम्बन्धित ठेकेदार का भुगतान रोकने के निर्देश दिये। इसके अलावा जनपद में मिशन के तहत चल रहे समस्त कार्यों का उपजिलाधिकारियों से समिति गठित कर सत्यापन करने को भी कहा। साथ ही कमियों वाले कार्यों को एक सप्ताह के भीतर दोबारा करने के भी निर्देश दिये। यह भी पढ़ें : सौतेले पिता नाबालिग बेटी का अश्लील वीडियो बनाकर कर रहा परेशान, महिला को पति के नंबर पर आ रहे अश्लील संदेश…
(Corruption) सोमवार को जिलाधिकारी गर्ब्याल 9 किमी पैदल चलकर अलचौना पहुंचे और वहां जल जीवन मिशन योजना के अन्तर्गत चल रहे कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उपस्थित ग्रामीणों ने पानी का सा्रेत योजना हेतु सही बताया। बताया कि यह योजना 9 किमी लम्बी है, इसकी लागत लगभग 95 लाख है।
(Corruption) इससे अलचोना के 4 तोकों के 130 से 140 परिवार लाभांवित होंगे। निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी डा. संदीप तिवारी, पीडीडीआरडीए अजय सिंह के साथ ही ग्राम प्रधान तथा क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
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नवीन समाचार, उत्तरकाशी, 19 जनवरी 2023। (Corruption) जनपद के पशुपालन विभाग के नौगांव पशु चिकित्सालय में तैनात एक रिश्वखोर महिला चिकित्सक को विजिलेंस ने नौगाँव से रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि महिला चिकित्सक ने अनुसूचित जाति-जनजाति की बीपीएल महिलाओं के लिये बकरी के लोन की योजना में सरकारी अंशदान का चेक देने के एवज में 8 हजार रुपए रिश्वत ली है। विजिलेंस आरोपित को देहरादून ले गई है। यह भी पढ़ें : भाजपा के मंडल अध्यक्षों की हुई घोषणा, देखें कौन बना आपके मंडल का अध्यक्ष
(Corruption) बकरी पालन के लिए आठ हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए में तैनात चिकित्सक मोनिका गोयल को विजिलेंस की टीम ने रंगे हाथों पकड़ा। मध्य प्रदेश मुरैना निवासी डा. मोनिका गोयल पशुपालन विभाग उत्तरकाशी में 2011 से तैनात है। इस घटना से उत्तरकाशी पशुपालन विभाग सहित अन्य विभागों में हड़कंप मच गया है। यह भी पढ़ें : कांग्रेस नेता पालिकाध्यक्ष के भाजपा नेताओं के साथ लगे पोस्टरों से चर्चा का बाजार गर्म…
(Corruption) बताया गया है कि 12 जनवरी 2023 को हेल्पलाईन नंबर 1064 पर इस मामले में शिकायत मिली थी। इसके बाद पीड़ित ने 13 जनवरी को पुलिस अधीक्षक, सतर्कता अधिष्ठान, सेक्टर, देहरादून के कार्यालय में आकर एक शिकायती पत्र देकर कहा था कि अनुसूचित जाति-जनजाति की बीपीएल महिलाओं के लिये बकरी पालन योजना में मिलने वाले सरकारी अंशदान का चेक देने के ऐवज में पशुपालन विभाग नौगांव में नियुक्त पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ मोनिका गोयल आठ हजार रुपए रिश्वत की मांग की जा रही है।
(Corruption) इस शिकायत पर पुलिस अधीक्षक, सतर्कता अधिष्ठान, सेक्टर, देहरादून रेनू लोहनी ने मामले की गोपनीय जाँच करायी और जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाये जाने पर त्वरित एक ट्रैप टीम का गठन कर आरोपित चिकित्सक डॉ. मोनिका गोयल को 8 हजार रुपए की रिश्वत ग्रहण करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : काबीना मंत्री के निजी सचिव व विभागाध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज…
नवीन समाचार, देहरादून, 2022 (Corruption) । उत्तराखंड के लोक निर्माण विभाग के कबीना मंत्री सतपाल महाराज के निजी सचिव आईपी सिंह और लोक निर्माण विभाग के विभागाध्यक्ष अयाज अहमद के खिलाफ डालनवाला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
(Corruption) यह कार्रवाई मंत्री के फर्जी हस्ताक्षर किए जाने के मामले में की गई है। दोनों पर इस मामले में जांच बैठाई गई थी। जाँच कमेटी की रिपोर्ट के बाद यह कार्रवाई की गई है। कबीना मंत्री सतपाल महाराज के पीआरओ की ओर से मामले में तहरीर दी गई है।
(Corruption) आरोप है कि कबीना मंत्री के विदेश दौरे के दौरान उनके निजी सचिव आईपी सिंह ने उनके फर्जी डिजिटल सिग्नेचर कर दिए थे। साथ ही लोनिवि के विभागाध्यक्ष पद के लिए आईपी सिंह ने ही अयाज अहमद के नाम का अनुमोदन कर दिया था। जिसके बाद मामले की जांच की जा रही थी। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : पुराने काम को ही नया दिखाकर ले लिया भुगतान, मंडलायुक्त से की गई शिकायत
नवीन समाचार, नैनीताल, 23 नवंबर 2022 (Corruption) । जिला पंचायत बागेश्वर के विकास खंड कपकोट के ग्राम पंचायत बघर के तोक तल्ला डना में विधायक निधि से वर्ष 2016-17 में भोगशाला का निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत को शिकायती पत्र सोंपा गया है।
(Corruption) ग्राम दोबाढ़ पोस्ट कर्मी तहसील कपकोट जिला बागेश्वर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता हुकुम सिंह बसेड़ा ने मंडलायुक्त को सोंपे पत्र में कहा है कि वर्ष 2016-17 में यह निर्माण किया जाना प्रस्तावित था। परन्तु जिला पंचायत बागेश्वर के दो कनिष्ठ अभियंताओं ने कुछ लोगों से आपसी सांठ-गांठ कर पहले से ही निर्मित कार्य का निर्माण करना दिखा कर फजी तरीके से भुगतान प्राप्त कर लिया गया। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड ब्रेकिंग: कल की छुट्टी पर आया बड़ा अपडेट
(Corruption) पत्र में कहा गया है कि इस प्रकरण के भुगतान हेतु जो प्रमाण पत्र सम्बन्धित ग्राम प्रधान द्वारा जारी किया गया, वह पूर्ण रूप से फर्जी था। उस प्रमाण पत्र को जारी करने की दिनांक तक अंकित नहीं की गई थी। प्रधान पति ने भी प्रमाण पत्र को फर्जी बताया। साथ ही आरोपित कनिष्ठ अभियंताओं ने भी कहा कि उनसे गलती हो गयी है, वह निर्माण करने को तैयार हैं। यह भी पढ़ें : पति को बांधकर विवाहिता के साथ चार युवकों ने किया सामूहिक दुष्कर्म, नाबालिग भतीजी के साथ भी की छेड़छाड़
(Corruption) लेकिन बागेश्वर की जिलाधिकारी से लेकर प्रधानमंत्री तक से शिकायत करने और प्रधानमंत्री से की गयी शिकायत पर वहां से आरोपित कनिष्ठ अभियंता गौरव चौबे से दो बार स्पष्टीकरण मांगे जाने जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए मजबूर होकर मंडलायुक्त से शिकायत कर मामले की निष्पक्ष जांच की याचना की है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : अपनी साफगोई के लिए मशहूर पूर्व सीएम ने उत्तराखंड में कमीशनखोरी पर कही दो टूक, देखें क्या कहा….
(Corruption) उनका इस वीडियो में कहना है कि आज बहुत जगह बताते हैं कि राज्य में बिना कमीशनखोरी के काम नहीं हो रहे हैं। वह मुख्यमंत्री भी रहे, अभी सरकार में भी हैं, उन्हें कहना नहीं चाहिए, लेकिन उन्हें कहने में कोई हिचक नहीं कि जब हम उत्तर प्रदेश में थे और अलग हुए तो हमें कमीशनखोरी छोड़कर शून्य प्रतिशत पर आना चाहिए था।
(Corruption) उत्तराखंड बनने पर इसे शून्य प्रतिशत पर आना चाहिए था, लेकिन हम उत्तराखंड में दुर्भाग्य से 20 प्रतिशत से शुरू हुए। इसके लिए कोई एक व्यक्ति नहीं, इसके लिए अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों को अपनी मानसिकता सुधारने की जरूरत है कि यह मेरा प्रदेश है, मेरा परिवार है, यह भाव जब तक नहीं आएगा, तब तक यह स्थिति ठीक नहीं हो सकती।
(Corruption) जन प्रतिनिधि भ्रष्टाचार के आरोपों से बच नहीं सकता। हम अधिकारी को तो दंडित कर दे रहे हैं लेकिन पीछे कौन था। इसके लिए जनप्रतिनिधि और अधिकारी बराबर के दोषी हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : मात्र 2800 रुपए पर भी टपकी रजिस्ट्रार कानूनगो की लार, रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार…
नवीन समाचार, देहरादून, 29 अक्तूबर 2022 (Corruption) । भ्रष्टाचार का खून यदि किसी की जुबान पर लग जाए तो वह कितनी भी छोटी धनराशि पर लार टपका देता है। हरिद्वार तहसील में तैनात रजिस्ट्रार कानूनगो को देहरादून की विजीलेस टीम ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। बताया गया है कि वह दाखिल खारिज के नाम पर 2800 रुपये की रिश्वत वसूल रहा था। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड-बड़ा समाचार : कूड़ा बीनने वाली निकली विदेशी आतंकी की पत्नी
(Corruption) प्राप्त जानकारी के अनुसार विजिलेंस की टीम ने शनिवार को हरिद्वार तहसील में एक प्लॉट के दाखिल-खारिज के नाम पर 2800 की रिश्वत लेते हुए रजिस्ट्रार कानूनगो राजेश कुमार मारवाह को गिरफ्तार किया है। टीम ने कई घंटे की पूछताछ के बाद आरोपित के ज्वालापुर स्थित आवास पर छापेमारी कर दस्तावेज खंगाले तथा टीम आरोपित को देहरादून ले गई। यह भी पढ़ें : दो बच्चों की मां को तीन बच्चों के पिता मकान मालिक से हुआ प्यार, फिर जो हुआ….
(Corruption) शिकायत के बाद विजिलेंस के अधिकारियों ने जांच की तो मामला सही निकला। शनिवार को एसपी विजिलेंस रेणू लोहनी के निर्देश पर सीओ सुरेंद्र सिंह सामंत की अगुवाई में टीम का गठन कर तहसील में रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय में छापा मारा।
(Corruption) जहां रजिस्ट्रार कानूनगो राजेश कुमार मारवाह को 2800 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। विजिलेंस ने आरोपी के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कर कार्रवाई शुरू कर दी है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : दो अधिकारियों के खिलाफ विजीलेंस जांच के आदेश
(Corruption) इसके बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिक जांच कर विजिलेंस ने विस्तृत जांच के लिए शासन से अनुमति मांगी थी। इसी क्रम में बुधवार को मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु की अध्यक्षता वाली सतर्कता समिति की बैठक में दोनों अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश जारी हो गए हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें(Corruption) : बिग ब्रेकिंग : कानूनगो 10 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार….
नवीन समाचार, अल्मोड़ा, 28 सितंबर 2022 (Corruption) । राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के बावजूद राज्य में भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं दिख रहा है। अल्मोड़ा जनपद में विजिलेंस ने बड़ी कार्रवाई को करते हुए जिले की सल्ट तहसील में कार्यरत एक रजिस्ट्रार कानूनगो को 10 हजार रुपए की धनराशि लेते हुए गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि यह धनराशि रिश्वत के रूप में ली जा रही थी। विजिलेंस की इस कार्रवाई के बाद तहसील के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
(Corruption) विजिलेंस के पुलिस अधीक्षक प्रह्लाद नारायण मीणा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि एक शिकायत के बाद बुधवार को एक टीम सल्ट भेजी गई थी। विजिलेंस की टीम ने तहसील में जाल बिछाकर तहसील में कार्यरत एक रजिस्ट्रार कानूनगो हबीब अहमद को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में रंगेहाथ पकड़ लिया है। मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। (डॉ.नवीन जोशी)आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : कांग्रेस सरकार के धनकुबेर मंत्री के 40 ठिकानों से 110 करोड़ की अघोषित संपत्ति आई सामने, हिस्सेदारों की 18 करोड़ की संपत्ति भी उजागर
नवीन समाचार, रुद्रपुर, 15 सितंबर 2022 (Corruption) । राजस्थान सरकार के धनकुबेर गृह राज्य मंत्री राजेंद्र यादव के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों व घर पर आयकर विभाग की छापेमारी में आय से अधिक करीब 110 करोड़ रुपए की संपत्ति मिलने का मामला सामने आया है।
(Corruption) यह भी बताया जा रहा है कि मंत्री के हिस्सेदारों ने अभी तक 18 करोड़ की बेनामी अघोषित आय घोषित कर दी है। जांच जारी है। ऐसे में और भी अघोषित आय मिल सकती है। बताया गया है कि मंत्री मूलतः किच्छा के ही निवासी हैं। यहां उनके कई कारोबार चलते हैं।
(Corruption) उल्लेखनीय है कि टीम ने मंत्री राजेंद्र यादव के किच्छा स्थित पैतृक आवास व फ्लोर मिल सहित व्यवसायिक प्रतिष्ठानों-यादव फूड़स व आरएस यादव एंड संस पर गत सात से नौ सितंबर तक 47 घंटे तक छापेमारी की थी।
(Corruption) आयकर विभाग के सूत्रों से प्राप्त जानकारी मंत्री के कोटपुतली स्थित फैक्ट्री, बहरोड़, भीलवाड़ा, पाली, जयपुर के बनी पार्क और सहकार मार्ग स्थित आवास स्थित करीब 40 ठिकानों से अब तक करीब 110 करोड़ रुपये की अघोषित आय पकड़ी जा चुकी है।
(Corruption) यह भी बताया जा रहा है कि मंत्री के एक हिस्सेदार के मालवीय नगर स्थित ठिकाने से 2.90 करोड़ रुपये की नकदी व 1.25 करोड़ रुपये मूल्य के जेवहरात भी बरामद हुए हैं। (डॉ.नवीन जोशी)आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : उत्तराखंड के एक और भ्रष्टाचारी (पीसीएस) अधिकारी पर गिरी गाज, विजीलेंस ने रंगे हाथ दबोचा…
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 6 सितंबर 2022। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार रहित ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा देने वाली सरकार में एक और अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तारी हुई है।
(Corruption) विजिलेंस की टीम ने बुधवार को एक पीसीएस अधिकारी, वर्तमान में देहरादून परिवहन मुख्यालय में एआरटीओ के पद पर कार्यरत आनंद जायसवाल को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। 2009 बैच के पीसीएस अधिकारी जायसवाल एआरटीओ हैं।
(Corruption) उन पर चालान के जुर्माने को अधिक वसूलने और राजस्व कोष में कम पैसा दर्शाने के और इस तरह करीब 29 लाख रुपए का गबन करने का गंभीर आरोप है। इस आरोप पर उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 409 आईपीसी एवं पीसी एक्ट की धारा 13 (1) 13 (2) के तहत कार्रवाई की गई है।
(Corruption) बताया जा रहा है कि आनंद जायसवाल जब ऋषिकेश में एआरटीओ के पद पर तैनात थे, तब उन पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप लगे थे। आरोप है कि ऋषिकेश में अपने कार्यकाल के दौरान आनंद जायसवाल गाड़ियों का मोटर यान अधिनियम के तहत कार्रवाई कर सीज करते थे और फिर उनकी जुर्माने की राशि में घपलेबाजी करते थे।
यह भी पढ़ें (Corruption) : विस अध्यक्ष खंडूड़ी बोलीं, ‘न खाऊंगी-न खाने दूंगी’, सचिवालय भर्ती घोटाले पर किए दो बड़े ऐलान…
नवीन समाचार, देहरादून, 3 सितंबर 2022। (Corruption) उत्तराखंड विधानसभा सचिवालय भर्ती प्रकरण में विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने शनिवार को अपना पक्ष रखते हुए दो बड़े एलान किए। इस संबंध में पत्रकार वार्ता में उन्होंने भर्ती मामले में विशेषज्ञों की उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने और अगले आदेशों तक के लिए विधानसभा सचिव मुकेश सिंघल को अवकाश पर भेजने की घोषणा की।
(Corruption) साथ ही प्रधानमंत्री मोदी की तर्ज पर कहा, ‘न खाऊंगी-न खाने दूंगी।’ इस मामले में जांच समिति की रिपोर्ट में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। फिर वह चाहे कोई भी हो। देखें वीडियो विधानसभा अध्यक्ष ने क्या कहा:
(Corruption) अलबत्ता यह भी कहा कि इस मामले में दो समय कालों के हिसाब से अलग-अलग जांच होगी, पहली वर्ष 2000 में राज्य बनने के बाद से उत्तर प्रदेश की नियमावली के 2011 तक लागू रहने तक एवं 2011 के बाद प्रदेश की अपनी नियमावली लागू होने के बाद से 2022 तक।
(Corruption) विधानसभा की भर्तियों के प्रकरण की जांच के लिए उन्होंने जो तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की है,, उसमें पूर्व आइएएस डीके कोटिया को अध्यक्ष और सुरेंद्र सिंह रावत व अवनेंद्र नयाल को सदस्य बनाया गया है। समिति एक माह में अपनी रिपोर्ट देगी। जांच होने तक सचिव विधानसभा मुकेश सिंघल को छुट्टी पर भेजा गया है।
(Corruption) उल्लेखनीय है कि राज्य में यूकेएसएसएससी पेपर लीक घोटाले के बाद पिछले कुछ दिनों से पिछली विधानसभाओं में विधानसभा सचिवालय में हुई 72 नियुक्तियों में कथित अनियमितता का मामला तूल पकड़ा हुआ है। इसे लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था। (डॉ.नवीन जोशी)आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : नया बखेड़ा : युवती ने पूर्व जज पर लगाया नौकरी के बदले रुपये व शारीरिक सम्बंध बनाने की मांग का आरोप, एक और परीक्षा आरोपों के घेरे में..
नवीन समाचार, देहरादून, 20 अगस्त 2022 (Corruption) । उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के बाद अब राज्य लोक सेवा आयोग से वर्ष 2018 में हुई लेक्चरर भर्ती में भी गड़बड़ी की शिकायत की गई है। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे एक युवती के ऑडियो को शिकायत का आधार बनाया गया है।
(Corruption) भाकपा (माले) के गढ़वाल सचिव इंद्रेश मैखुरी ने इस प्रकरण को उठाते हुए मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक और राज्य महिला आयोग से मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। मैखुरी ने कहा कि सोशल मीडिया में वायरल हो रहे ऑडियो में युवती ने पूर्व में जज रहे उत्तराखंड लोकसेवा आयोग के एक पूर्व सदस्य पर पैसे मांगने और शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
(Corruption) युवती का कहना है कि वर्ष 2018 में उत्तराखंड अधीनस्थ शिक्षा (प्रवक्ता संवर्ग- समूह ग) की लिखित परीक्षा पास करने के बाद उन्हें महिला व सामान्य वर्ग में साक्षात्कार के लिए चयनित किया गया। उसके दोनों ही साक्षात्कार, संबंधित सदस्य के पैनल में थे।
(Corruption) आरोप है कि साक्षात्कार के बाद आयोग के सदस्य ने उन्हें दस्तावेज दुरुस्त करने के नाम पर एक स्थान पर बुलाया। वहां उससे पैसे की मांग के साथ ही शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डाला गया। यह भी कहा कि किसी से कुछ कहा तो उसका रिजल्ट उनके हाथ में है।
(Corruption) वायरल ऑडियो के अनुसार आयोग के आरोपित सदस्य ने युवती को अगली परीक्षाओं में चयन कराने का भरोसा भी दिलाया। युवती को सहायक से संपर्क में बने रहने को भी कहा गया। युवती के अनुसार उसने जिन बच्चों को उसने पढ़ाया उनका चयन प्रतियोगी परीक्षाओं में हो चुका है, लेकिन उसका नहीं हुआ।
(Corruption) युवती का आरोप है कि इस संबंध में वह बीते कई वर्षों से शिकायत कर रही है, लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हुई।उसने 12 मार्च 2020 को पुलिस महानिरीक्षक को लिखित शिकायत में कहा कि नौकरी के नाम पर आयोग के सदस्य ने उससे छेड़छाड़ व अश्लीलता की। अब मैखुरी के अनुसार पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने प्रकरण में कार्रवाई का आश्वासन दिया है। (डॉ.नवीन जोशी)आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : जिला कलक्ट्रेट परिसर में खुलेआम 50-60 हजार की रिश्वत मांगे जाने का वीडियो आया सामने !
नवीन समाचार, हरिद्वार, 11 अगस्त 2022 (Corruption) । उत्तराखंड में भ्रष्टाचार थमा नहीं है, बस सतह के नीचे राख के नीचे अंगारों की तरह छुपा है। कथित तौर पर हरिद्वार डीएम कार्यालय के बाहर से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर डीएम के पेशकार के नाम पर बंदूक का लाइसेंस बनवाने के लिए 50-60 हजार रुपए की मांग की जा रही है। देखें वीडियो:
वीडियो में दिखाया जा रहा है, कि एक शख्स बंदूक का लाइसेंस बनवाने के लिए 50-60 हजार की मांग कर रहा है। बताया गया है कि संबंधित व्यक्ति ने दलाल के रुपयों की मांग करते समय का वीडियो बना लिया और इसेडीएम के पेशकार को भेज दिया।
(Corruption) वीडियो भेजने के बाद डीएम के पेशकार सुदेश कुमार ने सिडकुल थाने में दलाल केके शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है। इस घटना के बाद जिला कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। (डॉ.नवीन जोशी)आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें : ब्रेकिंग-बड़ा समाचार : विजीलेंस ने आज फिर एक रिश्वतखोर को रंगे हाथों धरा….
नवीन समाचार, रुद्रपुर, 10 अगस्त 2022। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार पर शिकायतें मिलने पर विजिलेंस लगातार कार्रवाई कर रही है। बुधवार को विजीलेंस की टीम ने रुद्रपुर के जिला कलक्ट्रेट परिसर स्थित चकबंदी अधिकारी सुभाष गुप्ता के दफ्तर में जाल बिछाकार चकबंदी अधिकारी के पेशकार आनंद को गिरफ्तार किया है। इससे विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों में खलबली मची है। आरोपित से विजिलेंस टीम पूछताछ कर रही है।
बताया गया है कि टीम आरोपित पेशकार विरासत पर नाम चढ़ाने के एवज में तीन हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। विस्तृत विवरण की प्रतीक्षा है। विस्तृत समाचार इसी लिंक पर अपडेट किया जाएगा। अपडेटेड समाचार प्राप्त करने के लिए इसी लिंक को रिफ्रेश करते रहें। (डॉ.नवीन जोशी)आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें : नैनीताल की एक तहसील का रजिस्टार कानूनगो 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार
नवीन समाचार, हल्द्वानी, 4 अगस्त 2022। शुक्रवार सुबह जनपद की प्रतिष्ठित हल्द्वानी तहसील में अचानक विजीलेंस की टीम की छापेमारी से हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि विजिलेंस की टीम ने यहां तैनात रजिस्टार कानूनगो बनवारी लाल को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। टीम रिश्वतखोर को अपने साथ ले गई है।
बताया गया है कि हल्द्वानी निवासी जफर खान नाम के व्यक्ति ने आरके बनवारी लाल पर खाता खतौनी के बदले घूस मांगने का आरोप लगाया था। इस पर एसआई एमएस दसौनी के नेतृत्व में विजिलेंस की टीम ने शुक्रवार सुबह को तहसील कार्यालय स्थित आरके दफ्तर में अपना जाल बिछा कर बनवारी लाल को कैमिकल लगे नोटों के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। एसपी विजलेंस प्रह्लाद मीणा ने बताया की टीम द्वारा रजिस्ट्रार कानूनगो से पूछताछ की जा रही है, जिसके बाद न्यायालय में पेश किया जाएगा। (नवीन जोशी)आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें : हल्द्वानी निवासी कानूनगो रिश्वत लेते कानून के हाथों ‘रंगे हाथों’ गिरफ्तार…
नवीन समाचार, सितारगंज, 23 जुलाई 2022। ऊधमसिंहनगर जिले के सितारगंज में रिश्वतखोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। विजिलेंस हल्द्वानी की टीम ने सितारगंज तहसील से कानूनगो को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। इसके बाद आरोपित रिश्वतखोर कानूनगो को एकांत स्थान पर ले जाकर पूछताछ की जा रही है।
(Corruption) सूत्रों के अनुसार विजिलेंस टीम ने जाल बिछाकर पीड़ित को रसायन लगे नोट पकड़ाकर भेजा था। जैसे ही काननूगो ने रिश्वत लेने के लिए पीड़ित को निर्धारित स्थान पर बुलाया उसे दबोच लिया गया। उसके नोट पकड़े हाथों को पानी में डाला गया तो हाथ रंग गए। इसे ही रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा जाना कहते हैं।
विजिलेंस एसपी पह्रलाद मीणा ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद आरोपित से गोपनीय स्थान पर ले जाकर पूछताछ की जा रही है। कार्रवाई पूरी होते ही मामले से संबंधित सारी जानकारी साझा की जाएगी। बताया गया है कि एक किसान की शिकायत पर विजिलेंस की टीम ने कानूनगो बंदोबस्त अशरफ अली को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
विजिलेंस एसपी प्रहलाद मीणा ने बताया कि क्षेत्र के ग्राम बिजटी पटिया निवासी किसान सुखदेव पुत्र करनैल सिंह ने शिकायत की थी कि कानूनगो उससे दाखिल खारिज के बदले 15 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा है। उसने रिश्वत के रूप में छह हजार रुपये दे दिए थे। शिकायत की जांच के लिए इंस्पेक्टर चंचल शर्मा को नियुक्त किया गया। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। इस पर विजिलेंस टीम ने अपना जाल बिछाया।
शनिवार को योजना के अनुसार विजिलेंस टीम सितारगंज पहुंची। किसान ने रिश्वत में मांगी गई रकम आरोपी कानूनगो को दे दी। इस पर टीम ने कानूनगो अशरफ अली निवासी ग्राम ककरौआ थाना शहजाद नगर, वर्तमान पता उत्तर उजाला, बरेली रोड हल्द्वानी को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
उन्होंने बताया कि विजिलेंस की टीम कानूनगो को गिरफ्तार करके हल्द्वानी ले जा रही है। लिखा-पढ़ी के बाद कानूनगो को कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस मामले की जांच इंस्पेक्टर हेमा गुणवंत को सौंपी गई है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में 21-22 लाख की वित्तीय अनियमितता, कैग-डीजी तक शिकायत
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जुलाई 2022 (Corruption) । जिला मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के खातों में करीब 21-22 लाख रुपए की अनियमितता सामने आई है। बताया गया है कि अनियमितता इतनी धनराशि की इंट्रियां न होने को लेकर है। हालांकि स्थानीय सीए की जांच में बैंक खाते एवं कैश बुक में पूरी धनराशि का मिलान हो गया है, यानी कोई धनराशि गायब नहीं है। अनियमितता को लिपिकीय त्रुटियों के स्तर का भी बताया जा रहा है।
(Corruption) अलबत्ता इस मामले में जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्ष डॉ. वीके पुनेरा ने प्रदेश के स्वास्थ्य महानिदेशक व महालेखाकार यानी कैग सहित डीएम, कमिश्नर आदि विभिन्न स्तरों पर कर मामले की जांच करने की मांग की है, ताकि खातों में स्थितियां स्पष्ट हो सकें।
(Corruption) डॉ. पुनेरा ने जानकारी देते हुए बताया कि एक जुलाई को जब उन्होंने कार्यभार ग्रहण किया था तब बैंक खाते एवं कैश बुक के खातों में 21-22 लाख रुपए का मिलान नहीं हो पा रहा था। कैश बुक में इतनी धनराशि की इंट्रियां नहीं हुई थीं। इसकी उन्होंने स्थानीय सीए यानी चार्टर्ड अकाउंटेंट से जांच कराई तो खातों का मिलान हो गया।
(Corruption) अलबत्ता उन्होंने कहा कि कैश बुक व खातों में इंट्रियां न होना भी वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। इसलिए उन्होंने इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि चिकित्सालय में लंबे समय से खातों में मिलान संबंधी दिक्कतें रही हैं। 2018-19 में भी खातों में मिलान न होने की बात प्रकाश में आई थी, तब तत्कालीन जिलाधिकारी ने खातों को सही करवाया था। यह भी बताया कि इससे पहले भी सीए ने खातों को सही करवाया था।
(Corruption) चिकित्सालय में बांडेड चिकित्सकों को चार माह से वेतन न मिलने सहित कई समस्याएं नैनीताल (Corruption) । बीडी पांडे जिला चिकित्सालय इसके अलावा भी कई समस्याएं झेल रहा है। बताया गया है कि चिकित्सालय में कार्यरत बांड वाले चिकित्सकों सहित कुछ अन्य चिकित्सा कर्मियों को पिछले 4 माह से वेतन नहीं मिला है। एक-दो दिन चलने के बाद सीटी स्कैन मशीन नहीं चल पाई है। चिकित्सालय में लिफ्ट लगाने और प्राइवेट वार्डों का कार्य काफी पूरा होने के बाद भी शुरू नहीं हो पाई हैं।
(Corruption) चिकित्सालय में पानी गर्म करने का सौर ऊर्जा संयंत्र भी खराब पड़ा है। चिकित्सालय में चिकित्सकों के अपनी सीट पर न मिलने की समस्याएं भी आम हैं। चिकित्सालय में स्तनों की जांच के लिए लगी मैमोग्राफी की मशीन भी लंबे समय से बंद पड़ी है। स्थानीय लोगों-मरीजों को चिकित्सालय का ऊपरी गेट बंद होने से काफी परेशानी हो रही है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें : कानूनगो 10 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों कानून के हत्थे चढ़ा…
नवीन समाचार, ऋषिकेश, 8 जून 2022। विजिलेंस की टीम ने डोईवाला तहसील में कार्यरत कानूनगो को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
(Corruption) देहरादून सेक्टर की एसपी विजिलेंस रेनू लोहनी ने बताया कि गत 2 जून को विभाग के टोल फ्री नंबर पर एक व्यक्ति ने देवाला में तैनात कानूनगो मोतीलाल पुत्र स्वर्गीय तिलक चंद निवासी न्यू शिव मार्केट शास्त्री नगर ज्वालापुर हरिद्वार पर कृषि भूमि का भू-उपयोग बदलने संबंधी दो फाइलों के लिए 10 हजार रुपये की मांग करने की शिकायत की थी।
(Corruption) इस पर विजिलेंस की टीम ने जाल बिछाकर बुधवार को तहसील में आरोपित कानूनगो को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। टीम में इंस्पेक्टर तुषार बोरा मनोज रावत, विभा वर्मा, आरक्षी मनोज शर्मा, गोपाल सिंह, नितिन और इखलाक आदि शामिल रहे। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : बड़ा समाचार : 2016 में बिना लिखित परीक्षा के नेताओं के संबंधियों को दे दी थी नौकरी, हाईकोर्ट ने दिए 3 माह में जांच कराने के आदेश
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 16 फरवरी 2022 (Corruption) । उत्तराखंड उच्च न्यायालय की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने सिडकुल पंतनगर में वर्ष 2016 में 40 पदों पर नियम विरुद्ध तरीके से की गई नियुक्तियों के खिलाफ दायर जनहित याचिका में सरकार को तीन माह के भीतर एसआईटी के माध्यम से जांच पूरी कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही संबंधित जनहित याचिका को अंतिम रूप से निस्तारित कर दिया है।
(Corruption) प्राप्त जानकारी के अनुसार हल्द्वानी निवासी प्रकाश पांडे ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2016 में सिडकुल पंतनगर में विभिन्न 40 से 45 पदों के सापेक्ष नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति जारी हुई थी। इन पदों के लिए कई अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन किया गया था, लेकिन इन पदों के लिए राजनेताओं के संबंधियों को कोई लिखित परीक्षा लिए बिना नियुक्तियां कर दी गईं। लिहाजा याची ने इस पूरे मामले की जांच उच्चस्तरीय कमेटी से कराने की गुहार लगाई थी।
(Corruption) जबकि सरकार की ओर से सुनवाई के दौरान बताया गया कि इस मामले में एसआईटी की जांच पहले से चल रही है। बुधवार को सुनवाई में कोर्ट ने सरकार को तीन माह के भीतर एसआईटी के माध्यम से इसकी जांच पूरी कराने के निर्देश देते हुए जनहित याचिका को अंतिम रूप से निस्तारित कर दिया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद से हटाए थे विधायक प्रत्याशी, हाईकोर्ट ने किया बहाल
-एसआईटी जांच रहेगी जारी, पर गिरफ्तार नहीं किए जाएंगे डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 27 जनवरी 2022 (Corruption) । उत्तराखंड उच्च न्यायालय की कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश सजंय कुमार मिश्रा की एकलपीठ ने उत्तरकाशी के जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण को अध्यक्ष पद से हटाए जाने के सरकार के आदेश पर रोक लगाते हुए उन्हें बहाल कर दिया है।
(Corruption) शुक्रवार को मामले की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई करते हुए न्यायालय ने इसके साथ ही बिजल्वाण के विरुद्ध एसआईटी की जाँच जारी रखने तथा उन्हें गिरफ्तार नही करने के आदेश भी दिए हैं। उल्लेखनीय है कि बिजल्वाण गत दिवस भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं, और उन्हें कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा का टिकट भी दे दिया है।
(Corruption) उल्लेखनीय है कि जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण ने उन्हें सरकार द्वारा पद से हटाए जाने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उन्होंने न्यायालय में कहा कि कुछ सदस्यों द्वारा उनके खिलाफ मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजकर शिकायत की गई थी कि उनके द्वारा सरकारी धन का दुरप्रयोग व करोड़ो रूपये की अनिमियतताएं की गई हैं।
(Corruption) मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण की जांच हेतु सचिव पंचायती राज को आदेश दिए। सचिव पंचायतीराज राज ने इसकी जांच जिला अधिकारी उत्तरकाशी से कराई। जिला अधिकारी ने अपनी जाँच रिपोर्ट में अनियमितताएं बरतने की आंशिक पुष्टि की।
(Corruption) उसके बाद सरकार ने इस मामले की जाँच 21 जून 2021 को गढ़वाल के मंडलायुक्त से कराई। सरकार ने पंचायती राज अधिनियम की धारा 138(1)(घ)(पअ) के तहत उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया। उन्होंने 1 अक्टूबर 2021 को इसका जवाब देते हुए कोई वित्तीय अनियमितता नही करने और उनके विरुद्ध शिकायत राजनैतिक दुर्भावना से की गई बताई।
(Corruption) फिर भी सरकार ने निर्माण कार्य मे घटिया सामग्री का उपयोग करने, करोड़ो रुपये के फर्जी निर्माण कार्य दिखाने और मजदूरों के फर्जी मस्टरोल भरे जाने के आरोप में उन्हें गत 7 जनवरी 2022 को जिला पंचायत अध्यक्ष के पद से हटा दिया था। बिजल्वाण ने कहा था कि वह जनप्रतिनिधि है उन्हें सेवा के लिए जनता ने चुना है। इसलिए उन्हें बहाल किया जाए। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : नैनीताल : पेशकार पर लगाए वारंटियों को जेल भेजने का डर दिखाकर रिश्वत लेने का आरोप…
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जनवरी 2022 (Corruption) । जिला न्यायालय में कार्यरत एक अधिवक्ता ने जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व सचिव तथा उत्तराखंड उच्च न्यायालय के ज्यूडिशियल रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर एक पेशकार पर दुर्व्यवहार व मुल्जिमों से जबरन धन वसूली करने के आरोप लगाये हैं। शिकायती पत्र में अधिवक्ता सुंदर मेहरा ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में कार्यरत एक पेशकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनका 138-एनआई एक्ट का एक मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
(Corruption) इस मामले में आरोपित अपने खिलाफ जारी वारंट को अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होकर निरस्त करवाने आया था, लेकिन पेशकार द्वारा आरोपित से दुर्व्यवहार किया गया, साथ ही उसकी पत्रावली को सीजेएम यानी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में भेजने की धमकी देकर 500 रुपए अवैध रूप से वसूल लिए।
(Corruption) अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पेशकार वारंटियों को जेल भेजने का डर दिखा कर व डरा धमकाकर जबरन धन वसूली कर रही है, जिससे सभी जूनियर अधिवक्ता परेशान हैं। यह भी कहा कि पेशकार के विरुद्ध पहले भी धन वसूली के आरोप लग चुके है तब पेशकार का स्थानांतरण नैनीताल से रामनगर कर दिया गया था लेकिन अब फिर से वह रिश्वतखोरी पर आमादा है।
यह भी पढ़ें (Corruption) : बड़ा फर्जीवाड़ा: नैनीताल जनपद में 1110 आयकरदाता ले रहे पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 27 अक्टूबर 2021 (Corruption) । देश के किसानों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों की सहायता के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री किसान निधि योजना का नैनीताल जनपद में कुछ लोगों के द्वारा दुरुपयोग किए जाने और संबंधित विभाग द्वारा इस ओर उदासीनता का मामला प्रकाश में आया है।
(Corruption) सूचना के अधिकार के तहत हुए खुलासे के अनुसार नैनीताल जनपद में 1110 लोग आयकर दाता होने के बावजूद प्रधानमंत्री किसान निधि योजना का लाभ ले रहे हैं। उल्लेखनीय है कि योजना में आयकर रिटर्न फाइल करने वाले लोग पात्र नहीं हैं, और उनसे उनके द्वारा ली गई प्रधानमंत्री किसान निधि की राशि की वसूली किए जाने का प्राविधान है।
(Corruption) नैनीताल जनपद के सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया ने गत 11 सितंबर को लोक सूचना अधिकारी-मुख्य विकास अधिकारी से प्रधानमंत्री किसान निधि योजना से संबंधित 6 बिदुओं पर सूचना मांगी थी। इस पर जनपद के मुख्य कृषि अधिकारी के कार्यालय से जानकारी उपलब्ध कराई गई है। जिसमें बताया गया है कि जनपद में 55 हजार 363 किसानों को प्रधानमंत्री किसान निधि योजना का लाभ प्राप्त हो रहा है।
(Corruption) अब तक सात किस्तें किसानों को मिल चुकी हैं। 6000 रुपए की सातवीं किस्त 42 हजार 905 लोगों को दी गई है। योजना से लाभान्वित होने वाले किसानों में 1110 किसान आयकर दाता भी हैं। सूचना में यह तो बताया जा गया है कि इन आयकर दाता कृषकों से उन्हें दी गई प्रधानमंत्री किसान निधि की वसूली की जा रही है, पर यह नहीं बताया गया है क्या दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।
(Corruption) सिर्फ बताया गया है कि दंडात्मक कार्रवाई का विवरण शून्य है। यह सूचना प्राप्त करने वाले श्री धौनिया ने कहा कि यह योजना का दुरुपयोग है। ऐसा करने वाले लोगों के खिलाफ विभाग को दंडात्मक कार्रवाई भी करनी चाहिए। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : बलियानाला में करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप, प्रधानमंत्री से की अब तक खर्च की जांच की मांग
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 21 अक्टूबर 2021 (Corruption) । नगर के एक सभासद एवं अन्य युवाओं ने नैनीताल के आधार बलियानाला में बीते वर्षों में जमकर भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन भिजवाया है।
(Corruption) बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री को भेजने के लिए एसडीएम प्रतीक जैन को सोंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि 1973 से बलियानाला में भूस्खलन हो रहा है। इस बीच करोड़ों रुपए बलियानाला के उपचार पर खर्च हो गए हैं, लेकिन काम कुछ भी नहीं हुआ है। प्रशासन की भूमिका केवल लोगों के बसे-बसाए घर खाली करने तक सीमित रह गई है।
(Corruption) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भी बलियानाला के संरक्षण के लिए वाडिया इंस्टीट्यूट के निदेशक की अगुवाई में उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर उसके निर्देशन में कार्य करने के आदेश दिए थे, लेकिन जिला प्रशासन ने इस पर भी कोई कार्य नहीं किया गया।
(Corruption) लिहाजा उन्होंने बलियानाला में अब तक खर्च हुई करोड़ों की धनराशि की जांच करने की मांग प्रधानमंत्री से की है। ज्ञापन सोंपने वालों में प्रदीप उप्रेती, अभिषेक मुल्तानिया, सौरभ रावत, नवीन जोशी, ओम वीर, भाष्कर आर्या, आशीष राणा, गौरव चौहान, अजय कुमार, गौरव आर्या व राम कुमार सिलेनान शामिल रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें : पुस्तकालय घोटाले में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को डीएम की रिपोर्ट में क्लीन चिट
-रिपोर्ट उच्च न्यायालय में पेश डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जुलाई 2021। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक को जिलाधिकारी कीे ओर से उच्च न्यायालय में पेश की गई रिपोर्ट में 41.70 लाख रुपये के चर्चित पुस्तकालय घोटाले में क्लीन चिट दी गई है, और आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया गया है।
(Corruption) हरिद्वार के जिलाधिकारी सी रविशंकर की ओर से मंगलवार को उच्च न्यायालय में पेश की गई रिपोर्ट में साफ-साफ कहा गया है कि 41.70 लाख रुपये की विधायक निधि से बने 10 पुस्तकालय भवनों को हरिद्वार नगर निगम ने अपने हाथ में ले लिया है और जनहित में इनका संचालन भी कर दिया गया है।
(Corruption) सरकार की ओर से पुस्तकालयों के रख रखाव व संचालन के लिए पृथक से 25,88,120 रुपये का बजट भी जारी किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित है और लोकप्रियता पाने के लिए उच्च न्यायालय में वाद दायर किया गया है।
जिलाधिकारी की ओर से पेश शपथपत्र में यह भी कहा गया है कि उच्च न्यायालय में दायर याचिका में 12 पुस्तकालयों के निर्माण की बात कही गई, जबकि इनकी वास्तविक संख्या 10 है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2014 में दिनेश चंद्र जोशी की ओर से इसी विषय पर दायर की गई जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय पहले ही निर्णय जारी कर चुका है।
(Corruption) उच्च न्यायालय के आदेश पर ग्रामीण विकास विभाग के परियोजना निदेशक अरविंद मोहन गर्ग के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 2017 में मामला दर्ज किया गया था। मगर जांच में भ्रष्टाचार से संबंधित तथ्य नहीं पाए गए।
(Corruption) उल्लेखनीय है कि हरिद्वार निवासी सच्चिदानंद डबराल की ओर से इस मामले को हाल ही में जनहित याचिका के माध्यम से उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए हरिद्वार के विधायक एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, प्रदेश के मुख्य सचिव, जिलाधिकारी हरिद्वार और डीआरडीए को इस मामले में पक्षकार बनाया गया था। न्यायाधीश आरएस चौहान की अगुवाई वाली पीठ ने गत 24 जून को इस मामले की सुनवाई के बाद सरकार और जिलाधिकारी हरिद्वार को रिपोर्ट पेश करने को कहा था।
(Corruption) याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में 2006 से 2011 के बीच विधायक निधि से बनने वाले 12 पुस्तकालय भवनों के निर्माण में धांधली का अंदेशा जताया गया था। आरोप लगाया गया था कि ग्रामीण विकास विभाग की ओर से अनियमिततायें बरतते हुए पुस्तकालय भवनों की भूमि का हस्तांतरण नहीं किया गया और न ही भवनों को नगर निगम की ओर से अपने हाथ में लिया गया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : गढ़वाल विवि के पूर्व कुलपति के ठिकानों पर सीबीआई का छापा
नवीन समाचार, देहरादून, 10 जुलाई 2021। दिल्ली और उत्तराखंड सीबीआई की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति जेएल कॉल और उनके तत्कालीन ओएसडी के 14 आवास व कार्यालय आदि ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें 12 ठिकाने उत्तराखंड और एक-एक दिल्ली व नोएडा के हैं।
(Corruption) छापेमारी के दौरान सीबीआई के हाथ गड़बड़ी से जुड़े कुछ अहम सुराग लगे हैं। खासकर सीबीआई को विभिन्न बैंकों में उनके तीन लाकरों का भी पता चला है। सीबीआई के प्रवक्ता आरसी जोशी के अनुसार इस मामले में जिन लोगों के यहां छापेमारी की गई उनमें पूर्व कुलपति जेएल कौल, उनके विशेष कार्याधिकारी डीएस नेगी के अलावा अनिल सैनी, अरविंद गुप्ता, जीडीएस वारने, संजय चौधरी, जोगिंदर सिंह व समय प्राइवेट संस्थान शामिल हैं।
(Corruption) सीबीआई के अनुसार पूर्व में शिकायत मिली थी कि कौल के द्वारा गढ़वाल विवि में 2014 से 2016 के दौरान कुलपति रहते विश्वविद्यालय से जुड़े कई संस्थानों को तमाम नियम-कानून ताक पर रखकर उनकी मान्यताएं आगे बढ़ाई गईं और अन्य लाभ पहुंचाए गए। इस शिकायत के आधार पर आरंभिक जांच की गई।
(Corruption) आरंभिक जांच में महत्वपूर्ण तथ्य मिलने पर सीबीआई ने कुलपति सहित अन्य अधिकारियों और अलग-अलग निजी संस्थानों के खिलाफ विभिन्न अपराधिक धाराओं के तहत कुल 6 मामले दर्ज किए थे। इन्हीं मुकदमों के तहत अब यह छापेमारी की गई है।
(Corruption) सीबीआई के मुताबिक इस छापेमारी के दौरान अनेक बैंकों में रखे गए लॉकरों की चाबियां भी बरामद हुई हैं जिन्हें अभी खोला जाना बाकी है। सीबीआई जल्द ही इस मामले के आरोपियों को पूछताछ के लिए बुलाएगी। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : बार लाइसेंस के लिए एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए दो अभियंता रंगेहाथों गिरफ्तार
नवीन समाचार, हल्द्वानी, 08 जुलाई 2021 (Corruption) । सतर्कता सेक्टर यानी विजिलेंस हल्द्वानी की टीम ने लोनिवि के राष्ट्रीय राजमार्ग खंड रानीखेत में छापा मार अधिशासी अभियंता व सहायक अभियंता को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया है। आरोप है कि बार के लाइसेंस की अनापत्ति के लिए शिकायकर्ता से रुपयों की मांग की जा रही थी। सतर्कता सेक्टर हल्द्वानी में गोपनीय शिकायत पर यह कार्रवाई की गई। विजिलेंस के छापे व दो अभियंताओं की गिरफ्तारी से हड़कंप मचा रहा।
(Corruption) प्राप्त जानकारी के अनुसार बीती छह जुलाई को अधीक्षक सतर्कता सेक्टर हल्द्वानी (विजिलेंस) राजेश कुमार भट्ट को शिकायती पत्र मिला था। शिकाय के अनुसार रेस्टोरेंट में बार लाइसेंस के लिए डीएम तथा जिला आबकारी अधिकारी कार्यालय में उसने वर्ष 2019 में आवेदन किया था। डीएम के आदेश पर नौ विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया जाना था।
(Corruption) इसी के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग रानीखेत डिवीजन से भी अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया जाना था। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने अनापत्ति की एवज में तीन लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता के अनुसार एक लाख रुपये में अनापत्ति दिए जाने पर बात बनी।
(Corruption) इस पर विजिलेंस टीम ने गोपनीय जांच की। मामला सही पाया गया। एसपी विजिलेंस राजेश ने टीम गठित की। इसमें निरीक्षक हेम चंद्र पांडे, भानु प्रकाश आर्या, चंचल शर्मा, मनोज मठपाल, नागेंद्र भट्ट, नरेंद्र सिंह टगढिया को शामिल किया गया। दो राजकीय स्वतंत्र साक्षी भी साथ लिए गए। बृहस्पतिवार को एसपी विजिलेंस मय टीम एनएच के रानीखेत डिवीजन पहुंचे।
(Corruption) इसी दौरान कार्यालय में छापा मार सहायक अभियंता हितेश कांडपाल व ईई एमपी कालाकोटी को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। एसपी (विजिलेंस) के अनुसार जांच शुरू कर दी गई है। अचानक मारे गए छापे से एनएच के साथ ही अन्य डिवीजन कार्यालयों में हड़कंप रहा। सायं कार्यालय को सील कर अभिलेखों की जांच तेज कर दी गई। (डॉ. नवीन जोशी)आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह भी पढ़ें (Corruption) : पैथकाइंड लैब ने बिगाड़े आज के नैनीताल व राज्य के कोरोना आंकड़े, आरटीपीसीआर टेस्ट का 700 की जगह 1200 लेते भी रंगे हाथों पकड़े गए…
-28 अप्रैल से 6 मई के करीब 500 पॉजिटिव मामले एक साथ आज अपलोड करने से जिले में 1100 कोरोना रोगियों की दिखी बड़ी संख्या नवीन समाचार, नैनीताल, 11 मई 2021 (Corruption) । बंदर के हाथ में यदि अदरक दे दें, यानी गैर जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था को कोई शक्ति या दायित्व दे दें तो वह अपनी शक्तियों का दुरुपयोग ही करेगा। नैनीताल जनपद में शासन-प्रशासन ने आरटीपीसीआर जांच का दायित्व पैथकाइंड लैब को क्या सोंपा कि वह मनमानी पर उतर आए। आज इस लैब की दो बड़ी कारगुजारियां सामने आईं।
(Corruption) एसएसपी प्रीति प्रियदर्शिनी ने मुखानी चौक के पास मालती काम्प्लेक्स स्थित पैथ काइंड लैब के बाबत आ रही शिकायतों की एसओजी से जांच कराई और अपने कर्मचारी को ग्राहक बनाकर हस्ताक्षर युक्त नोट के साथ यहां आरटीपीसीआर जांच कराने भेजा तो लैब के द्वारा निर्धारित 700 की जगह उससे 1200 रुपए ले लिए गए, जैसी कि शिकायतें भी मिल रही थीं। इस पर पुलिस पैथ काइंड लैब के संचालक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 व 51-डी आपदा प्रबंधन अधिनियम व 3 कालाबाजारी अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत कर दिया है।
(Corruption) वहीं दूसरी ओर सामने आया कि पैथकाइंड लैब ने गत 28 अप्रैल से 6 मई के करीब 500 कोरोना पॉजिटिव लोगों के आंकड़े हर दिन की जगह एकमुश्त आज संबंधित पोर्टल पर अपलोड कर दिए। इससे आज नैनीताल जनपद में एक दिन में 1152 और राज्य में पिछले तीन दिनों के बाद वृद्धि के साथ 7120 लोगों में कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आने का आंकड़ा सामने आया। इस पर डीएम धीराज गर्ब्याल ने पुलिस वाली घटना की रिपोर्ट प्राप्त होने से पूर्व बताया कि पैथकाइंड लैब को अंतिम चेतावनी जारी कर दी गई है।
यह भी पढ़ें (Corruption) : त्रिवेंद्र सरकार के ‘भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’ को तीरथ सरकार ने कर दिखाया, भ्रष्टाचार के वायरल वीडियो पर दो इंजीनियर सस्पेंड
नवीन समाचार, देहरादून, 17 मार्च 2021 (Corruption) । मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत पूरी तरह एक्शन मोड में हैं। बीती 15 मार्च को रिखणीखाल निवासी देवेश आदमी नाम के व्यक्ति ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए किमी-155 पर मलयखांद बैंड पर बिछाए गए डामर का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल कर दिया था।
(Corruption) वीडियो में दिखाया गया था कि कुछ दिन पूर्व हुए डामरीकरण को देवेश हाथ से उखाड़ रहे थे। इस वीडियो पर कार्रवाई करते हुए सीएम तीरथ सिंह रावत ने बुधवार को लक्ष्मणझूला-कांडी-दुगड्डा-रथुवाढाब-धुमाकोट मार्ग के नवीनीकरण के काम की खराब गुणवत्ता के लिए संबंधित सहायक अभियंता अजीत सिंह और अपर सहायक अभियंता अनिल कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने सही अर्थों में पिछली सरकार के भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की नीति को मूर्तरूप करके दिखाया है।
(Corruption) बताया गया है कि स्वर्गीय जगमोहन सिंह नेगी राज्य राजमार्ग संख्या-नौ (लक्ष्मणझूला-कांडी-दुगड्डा-रथुवाढ़ाब-धुमाकोट) के दो किमी के हिस्से पर अलग-अलग टुकड़ों में नवीनीकरण का कार्य लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-दुगड्डा की ओर से कराया गया था। वीडियो वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-दुगड्डा के अधिशासी अभियंता ने मौके पर जाकर मुआयना किया। शासन को भेजी गई उनकी जांच रिपोर्ट में घटिया निर्माण की पुष्टि हुई।
(Corruption) जांच में पाया गया कि मार्ग के निर्माण कार्य में ठेकेदार ने सड़क की सतह की ठीक तरह से सफाई नहीं की। साथ में गीली सतह पर टैक कोट डाला गया। इस वजह से टैक कोट की पुरानी सतह से बांडिंग नहीं हो पाई और सतह उखड़ गई। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि सहायक अभियंता अजीत सिंह व अपर सहायक अभियंता अनिल कुमार ने दायित्व को ठीक तरीके से नहीं निभाया।
(Corruption) आरोपों की प्रकृति इस तरह की है कि विस्तृत जांच में पुष्टि होने पर उन्हें कड़ा दंड दिया जा सकता है। इस रिपोर्ट के आधार पर शासन ने उक्त दोनों अभियंताओं को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उक्त दोनों लोक निर्माण विभाग मुख्य अभियंता कार्यालय पौड़ी से संबद्ध रहेंगे।
यह भी पढ़ें (Corruption) : भ्रष्टाचार पर विभाग ने शुरू की वसूली की कार्रवाई
नवीन समाचार, नैनीताल, 10 मार्च 2021 (Corruption) । जनपद के बेतालघाट विकासखंड के ग्राम धनियाकोट-मल्लाकोट में जलागम विभाग में भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई है। क्षेत्रीय ग्रामीण पुष्कर सिंह पनौरा के प्रयासों से यह मामला जलागम विभाग के अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के बाद आखिर विभाग ने भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार सरकारी कार्मिकों एवं ग्रामीणों से वसूली की कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।
(Corruption) उप निदेशक जलागम राजेश रंजन ने बताया कि यह पूरा मामला करीब 62 हजार रुपए के भ्रष्टाचार का है। मामले में एक कार्मिक से 12 हजार रुपए की वसूली कर ली गई है। शेष दो कार्मिकों से इसी माह वसूली हो जाने की उम्मीद है। वहीं दो ग्रामीणों की भी मामले में संलिप्तता है। उन्हें दो नोटिस भेजे जा चुके हैं। यदि वे सरकारी धनराशि वापस नहीं करते हैं तो राजस्व विभाग को वसूली करने के लिए मामला भेजा जाएगा।
(Corruption) उल्लेखनीय है क्षेत्रीय ग्रामीण पुष्कर सिंह पनौरा इस मामले को पिछले दो वर्षों से उठा रहे हैं। इधर उन्होंने सीएम पोर्टल पर भी इस मामले की शिकायत की थी। उनका कहना है कि गांव में वर्षा जल संग्रहण के लिए बनने वाले टैंकों को भरने के लिए नियमानुसार नालियां नहीं बनाई गई हैं। जांच में पुष्टि होने के बावजूद कार्रवाई करने में हीलाहवाली की जा रही है।
यह भी पढ़ें : भाजपा विधायक के बाद सांसद ने लगाया उत्तराखंड की नैनीताल व ऊधमसिंह नगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल! सवालों के घेरे में मित्र पुलिस की ईमानदारी
नवीन समाचार, लालकुआं, 1 नवम्बर 2020। उत्तराखंड की मित्र पुलिस पर पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के बिल्सी से भाजपा विधायक पंडित राधा कृष्ण शर्मा के बाद अब आंवला के भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने लालकुआं व ऊधमसिंह नगर पुलिस पर अवैध वसूली के आरोप लगाए हैं। दोनों राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार होने के बावजूद सत्तारूढ़ दल के विधायक-सांसद द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद अब लालकुआं व ऊधमसिंह नगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में यूपी के वाहन स्वामियों की शिकायत पर बीते माह अक्टूबर में बिल्सी के विधायक पंडित राधा कृष्ण शर्मा ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, पीएमओ समेत प्रदेश के तमाम अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजा था। जिसमें लालकुआं समेत नैनीताल व उधम सिंह नगर के कई कोतवाली व थाना क्षेत्र में पुलिस द्वारा वाहनों से अवैध वसूली की शिकायत की गई थी। विधायक ने पुलिस पर चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली का आरोप लगाते हुए कार्यवाही की मांग की थी। जिसके बाद पुलिस विभाग द्वारा मामले की जांच की जा रही है।
इधर शनिवार को आंवला के लोकसभा सदस्य धर्मेंद्र कश्यप ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर लालकुआं ऊधमसिंह नगर पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पत्र में कहा गया है कि पुलिस द्वारा महीना लेकर ओवरलोड उपखनिज का परिवहन कराया जा रहा है। जिससे जहां करोड़ों की सड़कों की दुर्दशा हो रही है वहीं ईमानदारी से चलने वाले वाहन स्वामी बेरोजगार हो रहे हैं। पुलिस की कार्यप्रणाली से क्षेत्र में भी आक्रोश फैलने लगा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस गांव के लिंक मार्गों पर चलने वाले दोपहिया वाहन चालकों पर भारी भरकम जुर्माना लगा रहे हैं। जबकि हाइवे पर ओवरलोड वाहन दौड़ रहे हैं। बिल्सी विधायक की शिकायत के बाद पुलिस अपने को बचाने की जुगत में लग गई है। जिसके लिए पुलिस क्षेत्र लोकल के वाहन स्वामियों व चालकों को अपने प्रभाव में बयान लिए जा रहे है।
(Corruption) कई वाहन चालकों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि हमें तो रोज पर सड़क पर गाडिया चलानी है। जो पुलिस कहेगी वही बयान देने पड़ेंगे। विदित रहे कि लालकुआं से यूपी के तमाम शहरों में उपखनिज का परिवहन किया जाता है। रोजाना सैकड़ों ओवरलोड उपखनिज लेकर यूपी जाते है।
आरोप है कि पुलिस ओवरलोड वाहनों से महीना लेती है जबकि जो वाहन इमानदारी से चलता है उसको तमाम कमियां गिनाकर उनका उत्पीडन किया जा रहा है। पुलिस के उत्पीडन से त्रस्त होकर अक्टूबर माह में यूपी के वाहन स्वामियों द्वारा बिल्सी के भाजपा विधायक पंडित राधा कृष्ण शर्मा से लालकुआं समेत नैनीताल व उधम सिंह नगर के कई कोतवाली व थाना क्षेत्र में पुलिस द्वारा वाहनों से अवैध वसूली की शिकायत की।
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नवीन समाचार, नैनीताल, 17 सितंबर 2020। पीएमजीएसवाई के अंतर्गत निर्माणाधीन 20 किमी लंबे देवीधुरा-बोहरागांव-फतेहपुर मोटरमार्ग में इन दिनों 13 करोड़ की लागत से चल रहे डामरीकरण के ‘इंटर टॉप सोलिंग’ के कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस कार्य में मानकों के विपरीत निर्माण सामग्री प्रयोग की जा रही है। देवीधुरा के ग्राम प्रधान धर्मेंद्र सिंह ने इस पर विभाग के इंजीनियरों, अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए आंदोलन की धमकी दे दी है।
उनका कहना है कि इस मोटर मार्ग में विभिन्न चरणों में पिछले सात-आठ वर्षों में करोड़ों रुपया खर्च हो चुका है। अब 13 करोड़ से चल रहे डामरीकरण के कार्य में स्थानीय निर्माण सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है जबकि निविदा के मानकों के अनुसार गौला नदी की सामग्री का प्रयोग किया जाना चाहिए।
(Corruption) उन्होंने मार्ग किनारे पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं करने का आरोप लगाते हुए राजकीय इंटर कालेज परिसर, देवीधुरा और पापड़ी गांवों में आपदा आने का अंदेशा भी जताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायतों पर विभाग मूक दर्शक बना रहता है तो जनता को साथ लेकर सड़क पर उतर कर आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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नवीन समाचार, मेरठ (उत्तर प्रदेश), 7 मार्च 2020। उत्तराखंड के देहरादून में तैनात राज्य कर अधिकारी अनिल कुमार के मोदीपुरम की शिवनगर कालोनी में स्थित घर पर देहरादून की विजिलेंस टीम ने छापेमारी की है। वर्तमान में अनिल कुमार देहरादून जेल में बंद हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने हरियाणा के हिसार निवासी कारोबारी से 29 हजार 500 रुपये की अवैध वसूली की है।
देहरादून की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट से सर्च वारंट लेकर विजिलेंस की टीम यहां पहुंची। विजिलेंस टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर प्रदीप पंत कर रहे थे, जिनके साथ एक महिला दारोगा समेत चार अन्य कर्मचारी थे। टीम ने सबसे पहले पल्लवपुरम थाने में आमद दर्ज कराई। उसके बाद थाना पुलिस को साथ लेकर शिवनगर में अनिल कुमार के घर छापा मारा।
(Corruption) घर पर अधिकारी की पत्नी, बच्चों समेत रिश्तेदार थे। यहां पड़ोसियों की भीड़ जमा हो गई। करीब चार घंटे में टीम ने मकान के कागज से लेकर कार, बाइक, स्कूटी, एलआइसी, बैंक पासबुक और अन्य कागजों की पड़ताल कर लिस्ट तैयार की और स्वजनों के हस्ताक्षर कराए।
आरोप है कि 16 फरवरी की रात अनिल कुमार ने हरियाणा के हिसार से माल लेकर देहरादून आ रहे ट्रक ड्राइवर की जेब से जबरन 9500 रुपये निकाले थे। अनिल कुमार ने हिसार के व्यापारी से 20 हजार रुपये अपने साथी व केस में सह-आरोपित अजय मलिक के खाते में डलवाए और वाहन को छोड़ दिया।
(Corruption) गाड़ी में लोड माल देहरादून के कारोबारी अनिल माटा के कारखाने में जा रहा था। पीड़ित व्यापारी ने प्रकरण की शिकायत सीएम पोर्टल पर दर्ज कराई थी। अनिल कुमार को निलंबित कर जांच की गई तो आरोप सही पाए गए। केस दर्ज कर आरोपित अनिल कुमार को मेरठ से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
सेना के जवान से शिक्षक और अधिकारी तक का सफर
अनिल कुमार की सेना से सेवानिवृत्त होने के कुछ महीनों बाद ही प्राइमरी स्कूल में शिक्षक के पद पर नौकरी लग गई। करीब दो वर्ष की नौकरी के दौरान ही उन्होंने उत्तराखंड पीसीएस की परीक्षा पास कर ली। वर्तमान में अनिल कुमार देहरादून में राज्य कर अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उनकी तैनाती मोबाइल दस्ते में थी।
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नवीन समाचार, देहरादून, 23 फरवरी 2020। उत्तराखंड पुलिस ने प्रदेश के बहुचर्चित वन आरक्षी भर्ती परीक्षा की धांधली में शामिल अभ्यर्थी को पांच लाख रुपये में नकल कराने के आरोप में एक कृषि विभाग के अधिकारी को गिरफ्तार किया है।
(Corruption) कोटद्वार में तैनात आरोपित सहायक कृषि अधिकारी सुधीर कुमार पर आरोप है कि उसने अपने ही रिश्तेदार युवक को परीक्षा में पास कराने का झांसा दिया था। साथ ही रुड़की स्थित ओजस्वी करियर सेंटर के संचालक मुकेश सैनी गिरोह से बहु उसके तार जुड़े बताए जा रहे हैं, जिसे पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
उल्लेखनीय है कि गत 16 फरवरी को प्रदेश में विभिन्न केंद्रों पर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से वन आरक्षी भर्ती परीक्षा हुई थी। यह परीक्षा कराई गई थी। परीक्षा संपन्न होते ही ओएमआर शीट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी थी। कुछ घंटों के अंतराल में परीक्षा में अन्य गड़बडिय़ों की शिकायतें भी सामने आईं।
(Corruption) पुलिस को शुरुआती जांच में पता चला कि कुछ केंद्रों पर अभ्यर्थियों को नकल कराने के लिए एक गिरोह ने पांच लाख रुपये तक में सौदा किया हुआ था। इन्हें ब्लूटूथ के जरिये प्रश्नों के उत्तर बताए जाने थे, इसके लिए बाकायदा कोड वर्ड बनाए गए थे।
परीक्षा के अगले ही दिन इस मामले में पौड़ी और हरिद्वार में 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। जांच में पता चला कि हरिद्वार जिले के मंगलौर स्थित ओजस्वी करियर सेंटर का संचालक मुकेश सैनी गिरोह को संचालित कर रहा था। उसने कुछ युवकों को पौड़ी और हरिद्वार के सेंटरों में नकल कराने के लिए भेजा था। इसके बाद इधर रविवार देर शाम पौड़ी जिले की पुलिस ने इस मामले में कोटद्वार में तैनात सहायक कृषि अधिकारी सुधीर कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
मंगलौर निवासी गोपाल सिंह ने सुधीर समेत चार लोगों के खिलाफ पौड़ी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। गोपाल सिंह ने शिकायत में बताया था कि हरिद्वार निवासी पंकज, संजय और सौरभ ने उनके बेटे को पांच लाख रुपये में भर्ती परीक्षा में नकल करवा कर उत्तीर्ण करवाने की बात कही थी। उसके बेटे से उक्त तीनों युवकों की बात कोटद्वार में रह रहे उनके रिश्तेदार सुधीर ने कराई थी।
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नवीन समाचार, देहरादून, 21 फरवरी 2020। विगत कई समय से उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग व प्रावधिक शिक्षा परिषद में पेपर लीक कराने व ब्लू टूथ के माध्यम से प्रतियोगिता परीक्षा मे नकल कराने वाले गिरोह की सूचना प्राप्त हो रही थी। इस सन्दर्भ में एसटीएफ उत्तराखण्ड व जनपद हरिद्वार पुलिस लगातार सक्रिय होकर काम कर रही थी।
इसी परिपेक्ष मे उत्तराखण्ड वन आरक्षी की परीक्षाओ मे नकल कराये जाने की सूचना के बाद गत 17 फरवरी को ब्लूटूथ के माध्यम से नकल करने के लिऐ ठगी के सम्बन्ध मे मुकेश सैनी ओजस्वी कैरियर कोचिंग सैन्टर गुरुकुल नारसन के विरुद्ध थाना मंगलौर पर धारा 420 भादवि के तहत मुकदमा पजीकृत कराया तथा। बताया कि इस परीक्षा मे पहले पेपर लीक कराने और बाद में ब्लूटूथ मे माध्यम से नकल कराने की एवज मे 4 लाख रुपये की सौदेबाजी मुकेश सैनी द्वारा की गयी थी। एक लाख एडवांस लिए गये थे।
इस घटना का सोशल मीडिया व अखबारों के माध्मय से लोगो को जानकारी होने पर इस परीक्षा मे शांमिल परीक्षार्थी व शिक्षित बैरोजगारों में काफी असन्तोष व्याप्त था तथा लगातार गिरोह के पर्दाफाश की मांग की जा रही थी। इस तरह के गिरोह के अनावरण हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार द्वारा पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के निर्देशन मे क्षेत्राधिकारी मंगलौर तथा लक्सर के नेतृत्व में पुलिस टीमों का गठन किया गया और गिरोह की घरपकड हेतु पुलिस द्वारा अभियुक्त के ठिकाने पर छापेमारी की व मुखविर तथा सर्विलास की मदद ली गयी।
आखिर 21 फरवरी को मुखविर की सूचना पर गैग के मुख्य सरगना मुकेश सैनी पुत्र स्व. जलसिह निवासी ग्राम हरचन्दपुर कोतवाली मंगलौर जिला हरिद्वार को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से ब्लूटूथ डिवाइस मोबाईल आदि बारामद हुआ।
(Corruption) आरोपित ने पूछताछ पर बताया कि वह तथा उसके टीम के सदस्य कोचिगं सेन्टर मे पहले ग्राहको को नौकरी दिलाने के नाम पर फॅसाते है तथा कुछ अग्रिम धन लेकर उत्तराखण्ड में व एसएससी में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओ मे पेपर लीग करके या ब्लूटूथ डिवाईस के माध्यम से नकल कराकर लोगों को नौकरी दिलाते थे। इससे पूर्व इनके द्वारा कई प्रतियोगिता परीक्षाओं में इस तरह के कार्य किये गये हैं। विवेचना में साक्ष्य के आधार पर धारा 66 (डी) की बढोतरी की गयी।
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नवीन समाचार, नैनीताल, 5 फरवरी 2020। अल्मोड़ा जिले के शिक्षा विभाग के मुखिया यानी मुख्य शिक्षा अधिकारी जगमोहन सैनी बुधवार को प्रदेश की ‘जीरो टॉलरेंस’ की सरकार की मंशा को पलीता लगाते हुए 15 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किए गए हैं।
(Corruption) उस वक्त देखने को मिला जब कुमाऊ विजिलेंस ने अल्मोड़ा के मुख्य शिक्षा अधिकारी जगमोहन सैनी को 15000 रुपये घूस ग्रहण करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। विजिलेंस की टीम ने सीईओ सैनी के आवास से 1 लाख 93 हजार 200 रुपए बरामद किये हैं।
शिकायतकर्ता राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सोनी ताड़ी खेत, जिला अल्मोड़ा के शिक्षक नंदन सिंह परिहार पुत्र माधव सिंह ने गत 28 जनवरी को एक शिकायती पत्र पुलिस अधीक्षक सतर्कता अधिष्ठान हल्द्वानी नैनीताल को इस आशय का दिया कि उसकी पिछली तैनाती हाई स्कूल डोनी ताकुला में थी। उक्त नियुक्ति अवधि में मध्यान्ह भोजन योजना के बिल वाउचर के संबंध में जगमोहन सोनी, मुख्य शिक्षा अधिकारी अल्मोड़ा ने एक स्पष्टीकरण मांगा।
उनके द्वारा सभी कार्य नियमपूर्वक किये गए थे और ये बात स्पष्ट रूप से मुख्य शिक्षा अधिकारी को बता दी थी, फिर भी उनके द्वारा स्पस्टीकरण पत्र देकर मामले को निपटाने के एवज मे 15000 की घूस की मांग की जा रही है।
(Corruption) उक्त प्रकरण की जांच में आरोप सही पाए जाने पर आरोपी के राजपत्रित अधिकारी होने के कारण शासन की अनुमति प्राप्त कर पांच फरवरी को आरोपी जगमोहन सोनी मुख्य शिक्षा अधिकारी अल्मोड़ा को शिकायतकर्ता से से 15000 घूस ग्रहण करते हुए रंगे हाथों समय शाम 4.40 बजे सतर्कता अधिष्ठान हल्द्वानी ट्रैप टीम द्वारा आरोपी के कार्यालय मुख्य शिक्षा अधिकारी अल्मोड़ा कार्यालय से गिरफ्तार किया गया।
सतर्कता विभाग द्वारा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने हेतु 18001806666 टोल फ्री हेल्पलाइन की व्यवस्था की गयी है। वृहद प्रचार-प्रसार हेतु बोर्ड लगाये गये है, तथा Facebook व Whatsapp No. – 9456592300 / 05946246372पर भी सतर्कता विभाग सक्रिय है। जनता से अनुरोध है कि इस मुहिम में हमें सहयोग दें।
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नवीन समाचार, देहरादून, 28 जनवरी 2020। विजिलेंस ने देहरादून में एक सर्वे कानूनगो किशन सिंह नेगी पुत्र स्व. विजय राम नेगी निवासी ग्राम थुराऊ पोस्ट कालसी गेट तहसील व थाना कालसी को रिश्वत लेते हुए कार्यालय बंदोबस्त पटेलनगर देहरादून में तैनात रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। सर्वे कानूनगो के खिलाफ विजिलेंस को शिकायत मिली थी कि वह सेवानिवृत्त सैनिक से खतौनी में पिता का नाम सुधारने के बदले 5 हज़ार रुपये मांग रहा था।
शिकायतकर्ता के इस बाबत भेजे गए शिकायती पत्र पर पुलिस अधीक्षक सतर्कता देहरादून की टीम ने पुष्टि होने पर मंगलवार को कार्यवाही की, और दोपहर 3:30 बजे उसे उसके कार्यालय से रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। सतर्कता निदेशक ने टीम के उत्साहवर्धन हेतु नगद पुरस्कार की घोषणा की है।
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नवीन समाचार, सितारगंज, 26 जनवरी 2020। गणतंत्र दिवस के दिन जब देश-प्रदेश से लेकर जनपदों तक पुलिस एवं अन्य विभागों के उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरकारी अधिकारी व कर्मचारी पुरस्कृत किये जा रहे थे, उसी समय उत्तराखंड पुलिस के एक सिपाही को हल्द्वानी विजिलेंस टीम ने एसपी विजिलेंस अमित श्रीवास्तव के नेतृत्व में आई टीम के द्वारा रविवार अपराह्न करीब सवा तीन बजे 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।
ऊधमसिंह नगर जिले के खटीमा थाने के अंर्तगत आने वाली झनकैया पुलिस चौकी में शिकायतकर्ता दयाशंकर प्रजापति की गत 24 जनवरी को हल्द्वानी स्थित विजिलेंस कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर विजीलेंस ने जाल बिछाकर झनकैया थाने में तैनात निकटवर्ती चकरपुर निवासी आरक्षी कुशल कन्याल पुत्र दीवान सिंह कन्याल को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
उस पर आरोप लगाया गया था कि मकान बिक्री के हिस्से-बंटवारे में उनकी भाभी द्वारा की गई शिकायत का समाधान कर उसे लाभ पहुंचाने के ऐवज में कन्याल 20,000 रूपये की रिश्वत मांग रहा था। आरोपी सिपाही के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
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नवीन समाचार, अल्मोड़ा, 18 जनवरी 2020। अल्मोड़ा पालिका में वर्ष 2000 से 2004 के बीच फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर पांच लोगों द्वारा नौकरी पाने एवं पदोन्नति लेने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। सूचना के अधिकार में मांगी गई जानकारी के बाद हुए खुलासे के बाद शहरी विकास निदेशालय ने पालिका को कार्यवाही करने का निर्देश देते हुए रिपोर्ट तलब की है। पालिका प्रशासन ने पांचों कर्मचारियों पर कार्यवाही करते हुए रिपोर्ट शहरी विकास निदेशक को भेज भी दी है।
गौरतलब है कि जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष हरजिंदर सिंह ने वर्ष 2005 में अल्मोड़ा पालिका में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति एवं सहायक लिपिक के पदों पर पदोन्नति की जानकारी मांगी थी। इसके बाद शहरी विकास निदेशालय ने अपने स्तर से पड़ताल की तो पालिका में कार्यरत पांच कर्मचारियों के कागजात एवं शैक्षिक दस्तावेज फर्जी होने का अंदेशा हुआ।
(Corruption) जांच कराने के बाद उनके प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। इसके बाद शहरी विकास निदेशक विनोद कुमार सुमन ने दोषी कर्मचारियों पर अक्टूबर माह में पालिका अल्मोड़ा को नियमानुसार कार्रवाई करने के आदेश दिए थे।
इसके बाद पालिका ईओ श्याम सुंदर प्रसाद ने मामले की जांच अपने स्तर से करने के बाद सभी कर्मचारियों को नोटिस देकर रिकवरी के आदेश दे दिए हैं। सूचना के अधिकार में खुलासा होने के बाद 26 सितंबर 2019 को शहरी विकास के निदेशक की ओर से प्रदेश के सभी नगर आयुक्तों व पालिका व नगर पंचायतों के अध्यक्षों व अधिशासी अधिकारियों को पत्र भेजकर सभी नियुक्तियों एवं शैक्षिक अर्हताओं की जांच के आदेश जारी किए गये थे।
पत्र में स्पष्ट किया है कि हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद द्वारा संचालित प्रथमा, मध्यमा अथवा कोई उच्चतर परीक्षा परिषद को हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के समकक्ष माध्यमिक शिक्षा परिषद से न तो पूर्व में मान्य थी और न ही वर्तमान में मान्य है। मामले में पालिका ईओ श्याम सुंदर प्रसाद ने बताया कि फर्जी दस्तावेज एवं अमान्य शैक्षिक योग्यता के मामले में पालिका के पांच कर्मचारी पकड़ में आये हैं। उनमें से 2004 में एक अनुसेवक सेवानिवृत्त एवं एक का तबादला अन्यत्र हो गया है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में हरीश चंद्र आर्य माली के पद पर तैनात है। इसके अलावा प्रकाश चंद्र पंत एवं दीप चंद्र जोशी जो कि दोनों चतुर्थ श्रेणी से प्रोन्नत होकर सहायक लिपिक पद पर कार्यरत हैं। सभी कर्मचारियों से रिकवरी के आदेश दे दिए हैं। साथ ही सभी पर नियमानुसार आगे की कार्यवाही अमल में लाई जा रही है। कार्यवाही की रिपोर्ट शहरी विकास निदेशालय को भी भेज दी गई है।
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नवीन समाचार, देहरादून, 17 जनवरी 2020। विजीलेंस की टीम ने देहरादून में बिजली का घरेलू कनेक्शन लगाने के ऐवज में 75 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहे विद्युत वितरण खंड के घूसखोर अवर अभियंता को 75 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोच लिया है।
(Corruption) विजीलेंस को शिकायत मिली थी कि अवर अभियंता घरेलू कनेक्शन लगाने की फाइल को लंबे समय से अटकाए हुए था और 75 हजार रुपए मांग रहा था। इस पर उसे सेलाकुई क्षेत्र से जाल बिछाकर रिश्वत में दिये गए रुपयों के साथ पकड़ लिया गया। सहायक श्रम आयुक्त कमल जोशी भी विजीलेंस की टीम के साथ मौजूद रहे।
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नवीन समचार, जसपुर (ऊधमसिंह नगर), 26 दिसंबर 2019। राजस्व कर्मी ने राजकीय कोष में धनराशि जमा न करके तीन माह तक अपने पास रख ली। जांच में यह साबित होने पर तहसील प्रशासन ने डीएम के आदेश पर उन्हें पहले ही निलंबित नायब नाजिर के खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज करा दिया है।
घटनाक्रम के अनुसार गत 18 सितंबर को एसडीएम सुंदर सिंह को तहसील कार्यालय का औचक निरीक्षण करने के दौरान नायब नाजिर नीरज कुमार द्वारा दिखाए गए अभिलेखों में गड़बड़ी का शक हुआ। एसडीएम ने तहसीलदार विपिन पंत, नायब तहसीलदार सुदेश कुमार एवं उपकोषाधिकारी निरूपमा पांडे की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर प्रकरण की जांच के निर्देश दिए थे।
(Corruption) जांच में पाया गया था कि नायब नाजिर ने खनन के जुर्माने, डोलबंद, मिट्टी उठान एवं सीमांकन में आई एक लाख तैंतालिस हजार 889 रुपये की धनराशि राजकोष में जमा न कराकर अपने पास रख ली और तीन माह एवं छह माह के अंतराल में यह धनराशि सरकारी खजाने में जमा कराई।
जांच समिति ने नायब नाजिर के इस कृत्य को वित्तीय अनियमितता एवं सरकारी धन का दुरुपयोग बताकर एसडीएम को रिपोर्ट सौंपी। इस पर एसडीएम ने नायब नाजिर पर कानूनी कार्रवाई के लिए डीएम को रिपोर्ट भेज दी। इस रिपोर्ट पर बुधवार को डीएम ने नायब नाजिर को निलंबित कर जिला मुख्यालय में अटैच कर दिया है। साथ ही गुरुवार को नायब तहसीलदार सुदेश कुमार ने उन पर गबन का केस दर्ज करा दिया।
कोतवाल उमेद सिंह दानू के अनुसार आरोपित पर गबन का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। वहीं आरोपित नीरज कुमार का कहना है कि जांच समिति ने न ही उसके बयान दर्ज किए और न ही उससे स्पष्टीकरण मांगा। उसके द्वारा पैसा जमा करा दिया गया था।
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नवीन समाचार, नैनीताल, 14 दिसंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने पेयजल निगम के एमडी पर भ्रष्टाचार करने के आरोप में दायर जनहित याचिका को स्वीकारते हुए एमडी सहित सभी पक्षकारों से तीन सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। मामले के अनुसार मूलतः गुड़गांव दिल्ली व हाल देहरादून निवासी मुकेश कुमार सिन्हा ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि पेयजल निगम के एमडी भजन सिंह ने कई सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार किया हुआ है।
इसलिए उनकी नियुक्ति को निरस्त किया जाये और भ्रष्टाचार के मामले की सीबीआई से जांच कराई जाये। याची ने अपनी याचिका में एमडी पर यह आरोप भी लगाए हैं कि उनके द्वारा नियमविरुद्ध तरीके से अपने चहेतों को निविदा आवंटित कर दी हैं जिसके कारण सरकार को सौ करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व की हानि हुई है। एमडी द्वारा 9 लाख रुपये की नमामि गंगे प्रोजेक्ट के पैसो से अपने घर के लिए पेड़-पौधे खरीदे गए।
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मामले के अनुसार मुकेश कुमार सिन्हा गुड़गांव दिल्ली हाल निवासी देहरादून ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि एमडी पेयजल निगम भजन सिंह ने कई सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार किया हुआ है इसलिए उनकी नियुक्ति को निरस्त किया जाय और भ्रष्टाचार के मामले की सीबीआई से जांच कराई जाय।
(Corruption) याचिकर्ता ने अपनी याचिका में एमडी पेयजल पर यह आरोप लगाए है कि उनके द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से अपने चेहतों को टेंडर आवंटित कर दिए है, जिसके कारण सरकार को सौ करोड़ रुपये आए अधिक राजस्व की हानि हुई है। एमडी द्वारा 9 लाख रुपये की नमामि गंगे प्रोजेक्ट के पैसो से अपने घर के लिए पेड़-पौधे खरीदे गए ।
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नवीन समाचार, देहरादून, 22 नवंबर 2019। देहरादून के आरटीओ कार्यालय में विजिलेंस के छापे में ट्रैक्टर का कामर्शियल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करने के नाम पर प्रमुख सहायक की कुर्सी पर छह हजार की रिश्वत वसूलते हुए दलाल पकड़ा गया। विजिलेंस ने नेटवर्क में शामिल दो दलालों और दफ्तर के मुख्य सहायक-यशबीर बिष्ट, जो कि कर्मचारी नेता भी है, को गिरफ्तार कर आज जेल भेेेज दिया।
विजिलेंस के पुलिस उप महानिरीक्षक कृष्ण कुमार वीके ने बताया कि एक किसान ने 19 नवंबर को विजिलेंस की एसपी रेणु लोहनी से मिलकर शिकायत की थी कि ट्रैक्टर के व्यावसायिक प्रयोग के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के लिए उसने संभागीय परिवहन कार्यालय में आवेदन किया था। वह संबंधित कागजात और फीस जमा कराने के बाद आरटीओ आफिस के काउंटर नंबर चार पर पहुंचा। यह सीट मुख्य सहायक यशबीर बिष्ट की है। उस पर मोनू मलिक उर्फ संदीप बैठे हुआ था।
आरोप लगाया कि उसने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के लिए अलग से छह हजार रुपये की रिश्वत मांगी और इसके बिना कार्य होने से साफ इंकार कर दिया। उसने कहा कि यदि काम कराना है तो 21 अक्तूबर को रकम लेकर आ जाना। डीआईजी ने बताया कि गोपनीय जांच में आरोप की पुष्टि के बाद एसपी ने ट्रैप टीम गठित कर दी। शिकायतकर्ता बृहस्पतिवार दोपहर रकम लेकर काउंटर पर पहुंचा तो वहां पर मुख्य सहायक यशबीर बिष्ट के स्थान पर मोनू बैठा था।
रिश्वत लेने के बाद मोनू ने फाइल पास में खडे़ अन्य एजेंट प्रदीप कुमार को दे दी। विजिलेंस टीम ने प्रदीप कुमार निवासी विकास लोक सहस्त्रधारा रोड और मोनू मलिक उर्फ संदीप कुमार निवासी मोहब्बेवाला को दबोच लिया। तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों को शुक्रवार को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। आईजी ने ट्रैप टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।
यह भी बताया गया कि आरटीओ कार्यालय में विजिलेंस का छापा पड़ने की सूचना ऑफिस के कर्मचारियों ने अपने जिलाध्यक्ष यशवीर बिष्ट को दी तो वह भी ऑफिस पहुंच गए। वहां मोनू नाम का दलाल यशवीर बिष्ट की गैरमौजूदगी में उनकी सीट के पास खड़ा होकर रिश्वत ले रहा था। जैसे ही सूचना पर यशवीर बिष्ट वहां पहुंचे विजिलेंस टीम ने उनको भी गिरफ्तार कर दिया।
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नवीन समाचार, हल्द्वानी, 24 अक्तूबर 2019। विजिलेंस यानी सतर्कता प्रतिष्ठान ने हल्द्वानी में नैनीताल जनपद के लोक निर्माण विभाग के प्रधान सहायक को भुगतान कराने के एवज में ठेकेदार से पांच हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। उसे पकड़ने वाली विजिलेंस की टीम को पुरस्कार की घोषणा भी की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार लोनिवि द्वारा वर्ष 2015 में जनपद के लालकुआं में तहसील बनाने का ठेका एक ठेकेदार को दिया गया था। विभाग में बजट न होने के कारण यह कार्य बीच में रुका रहा, और इधर इसी वर्ष पूरा हुआ। इस पर ठेकेदार द्वारा विभाग से समय बढ़ाने की मांग की गई तो लोनिवि के अधीक्षण अभियंता द्वितीय वृत्त नैनीताल के प्रधान सहायक प्रदीप पांडे ने ठेकेदार से 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगी।
इस पर ठेकेदार ने उसे चार हजार रुपए की रिश्वत दी और इधर दो दिन पूर्व 22 अक्तूबर को पांडे ने ठेकेदार को अपेक्षित कार्य हो जाने की जानकारी देते हुए रिश्वत के शेष छह हजार रुपए की मांग की, और मिन्नतें करने पर पांच हजार रुपए लेकर कार्य करने को तैयार हुआ। ठेकेदार ने इसकी सूचना सतर्कता प्रतिष्ठान हल्द्वानी के एसपी अमित श्रीवास्तव से की, जिन्होंने जाल बिछाकर बृहस्पतिवार को पांडे को सरस मार्केट हल्द्वानी में ठेकेदार से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
आगे उस पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत करने की तैयारी की जा रही है। वहीं उसे पकड़ने वाली टीम को सतर्कता निदेशक की ओर से पुरस्कार देने की घोषणा भी की गई है।
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देहरादून में पीरू के सैलून में था डकैताें का ‘कंट्रोल रूम’, यहां तैयार होती थी धन्नासेठों की कुंडली
पीरू ने ही लिखी थी ईश्वरन और आरटीओ कर्मी जैसे अमीरों के घर डकैती की पटकथा
नवीन समाचार, देहरादून, 5 अक्तूबर 2019। इन दिनों आरटीओ ऑफिस देहरादून खास चर्चा में है। हो भी क्यों नहीं। राजधानी में हुवे एक बड़े लूट कांड के आरोपियों को जब पकड़ा गया तो उन्होंने बताया कि इसके पहले देहरादून में ही आर टी ओ के एक कर्मचारी के यहां से उन्होंने 1 करोड़ 34 लाख रुपए लूट लिए थे। डकैती विजय पार्क एक्सटेंशन में हुई थी। उधर जिसके यहां डकैती हुई उसने इतनी बड़ी लूट की कोई भी शिकायत आज तक पुलिस से नहीं की।
जब पुलिस ने आर टी ओ के उस कर्मचारी से बुला कर पूछताछ की तो उसने लूट की घटना को स्वीकार किया लेकिन कोई भी एफ आई आर लिखवाने से साफ इंकार कर रहा है। फिलहाल उनके आलोक से पूरा आर टी ओ ऑफिस जगमगा रहा है। यह है उत्तराखंड में सिर्फ एक विभाग में भ्रष्टाचार का जीता जागता नमूना। पूरे उत्तराखंड में लूट और भ्रष्ट्राचार का आलम क्या होगा इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
अब दूसरा पक्ष :
कई बार इतिहास अपने आपको दोहराता नजर आता है। फिल्म शोले में हरीराम नाई के किरदार को कौन भूल सकता है। वह जेल में होने वाली हर गतिविधि की मुखबिरी जेलर को करता था। दून में एक करोड़ 34 लाख की डकैती पड़ने के बाद उसकी रिपोर्ट दर्ज न कराने पर आरटीओ कर्मी अब आयकर विभाग के निशाने पर आ गया है, लेकिन शहर के लोगों की जुबान पर यह सवाल तैर रहा है कि आखिर डकैतों को कैसे पता चला कि एक आरटीओ कर्मी के घर इतनी बड़ी रकम मौजूद है और वह डकैती के बारे में किसी से जिक्र तक भी नहीं करेगा।
पुलिस भी इसी बात को लेकर हैरान थी कि डकैत किस ‘ज्योतिषी’ की सलाह पर इतना बड़ा हाथ मार ले गये और किसी को कानोंकान खबर तक न चल पाई। अब जाकर पुलिस ने डकैतों के जासूस ‘हरीराम’ नाई को खोज निकाला है। लोगों की हजामत बनाने वाला सैलून संचालक पीरू शहर के धन्नासेठों की लंबे समय से ‘हजामत’ बना रहा है और उसका हिस्सा अपने आप उसके पास पहुंच जाता था। वह उनकी ‘कुंडली’ डकैतों को सौंप देता था। जिसके आधार पर डकैत अपना शिकार चुनते थे।
एक तरह से पीरू का सैलून डकैतों का कंट्रोल रूम था, जहां पर शहर के अमीरों की कुंडली तैयार करने का काम होता था। छोटी-छोटी जानकारी पता करने के साथ उनकी कमजोरी पर खास फोकस किया जाता था, ताकि वारदात के समय शिकार विरोध करने की हिम्मत तक न जुटा सके।
(Corruption) अभिमन्यु एकडेमी के मालिक आरपी ईश्वरन, आरटीओ कर्मचारी के घर डकैती, बिल्डर राकेश बत्ता और प्रमुख चिकित्सक के आवास पर डकैती के प्रयास की घटना का सूत्रधार यही सैलून संचालक मुजिब्बुर रहमान उर्फ पीरू उर्फ हरीराम नाई निकला। वह डकैतों के मुखबिर तंत्र के रूप में बड़ा किरदार निभाता था।
बरसों से राजेन्द्र नगर में सैलून की बदौलत धनाढ्य परिवारों में पीरू का खासा दखल था। ईश्वरन लूटपाट प्रकरण से पहले पीरू के इस खौफनाक चेहरे से कोई वाकिफ नहीं था। डकैती का शिकार हुए आरटीओ कर्मचारी की पत्नी करीब डेढ़ दशक से सैलून की सेवाएं ले रही थी। परिवार के शाही रहन सहन से लेकर काली कमाई तक पीरू ने पूरी जानकारी जुटाई थी। वहीं इनकम टैक्स की धरपकड़ में नाम आने के बाद आरपी ईश्वरन के परिवार का पूरा चिट्ठा पीरू ने परिचितों के माध्यम से तैयार किया था।
हालांकि ईश्वरन ने पीरू से मुलाकात से इनकार किया था। बिल्डर राकेश बत्ता पर भी उसके करीबियों की मदद से पूरा होमवर्क किया गया था। पीरू ने ही बत्ता पर विश्वास जमाने के लिए रायपुर के विधायक उमेश शर्मा काऊ के नाम का प्रयोग करने की सलाह दी थी। डकैतों ने दोनों घटनाओं में बाहर रहने वाले उनके बच्चों की जान का डर दिखाकर पीड़ित परिवाराें को घुटने टेकने को मजबूर किया था।
पीरू अपने नेटवर्क की बदौलत डकैती की रकम में बराबर का हिस्सेदार होता था। पुलिस हिरासत में हैदर ने खुलासा किया कि आरटीओ कर्मचारी के घर से मिले कैश में पीरू और उसके साथी फुरकान के हिस्से में भी 23-23 लाख रुपये आए थे। ईश्वरन लूटपाट प्रकरण में पांच-पांच लाख रुपये की हिस्सेदारी मिलने की खबर है। इसके चलते पीरू को सैलून से ज्यादा ‘हरीराम’ नाई का यह काम रास आ रहा था।
ऐसे में पीरू के मुखबिर तंत्र में कुछ और लोगों के शामिल होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। एसएसपी अरुण मोहन जोशी का कहना है कि पुलिस तमाम पहलुओं पर काम कर रही है। पहले वांछित लोगाें की गिरफ्तारी और माल की रिकवरी पर फोकस है। अगले चरण में पर्दे के पीछे छिपे और चेहरों को भी बेनकाब किया जा सकता है। (साभार ई न्यूज़ 24X7)
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-पिथौरागढ़ की खाद्य सुरक्षा अधिकारी को 5 वर्ष की जेल की सजा नवीन समाचार, नैनीताल, 26 सितंबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश-विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने पिथौरागढ़ की तत्कालीन खाद्य सुरक्षा अभिहीत अधिकारी अर्चना सागर को अलग-अलग धाराओं में पांच व चार वर्ष की जेल की सजा तथा 15 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भुगतने की दशा में उन्हें दो व तीन माह की अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी। प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामले में किसी महिला अधिकारी को सजा मिलने का यह अपनी तरह का पहला मामला बताया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पिथौरागढ़ की तत्कालीन खाद्य सुरक्षा अभिहीत अधिकारी अर्चना सागर पर 11 मार्च 2013 को कैंट रोड कुमौड़ पिथौरागढ़ स्थित वर्षा स्वीट्स के स्वामी जगदीश प्रजापति पुत्र प्रेमचंद्र ने उनकी दुकान के फूड लाइसेंस का नवीनीकरण करने की एवज में रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए विजीलेंस से शिकायत की थी। इस पर विजीलेंस की टीम ने 16 मई को उन्हें जाल बिछाकर 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से संयुक्त निदेशक डीएस जंगपांगी ने पैरवी करते हुए आठ गवाह पेश किये। फलस्वरूप शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने अर्चना सागर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13 (1) डी सपठित 13 (2) के तहत 5 वर्ष की जेल व 10 हजार रुपए के जुर्माने तथा जुर्माना न भुगतने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा तथा धारा 7 के तहत 4 वर्ष की जेल व पांच हजार रुपए जुर्माना एवं जुर्माना न भुगतने की स्थिति में दो माह की अतिरिक्त जेल की सजा सुनाई है। दोनों सजा साथ-साथ चलेंगी।
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नवीन समाचार, नैनीताल, 10 सितंबर 2019। प्रदेश में भ्रष्टाचार मुक्त ‘जीरो टॉलरेंस’ के नारे का राजस्व विभाग में अजब ही तरीके से मखौल उड़ता दिख रहा है। एक मामला ऐसा प्रकाश में आया है जहां विभागीय अधिकारी चालान के जुर्मानों व विभागीय हर्जानों की धनराशि राजकीय कोष में जमा कराने की जगह ‘श्री 1008 सोमवारी बाबा ट्रस्ट पदमपुरी’ में जमा करा रहे हैं, वहीं एक मंडलीय आधिकारी की धर्मपत्नी के ब्यूटी पार्लर के 25 हजार रुपए के बिल मातहतों पर थोपने की बात इन दिनों खासी चर्चा में है। इन अधिकारी पर पूर्व में उनके मातहत उत्पीड़न का आरोप लगा चुके हैं।
ताजा मामला गत सोमवार का है। ग्रामीण गांव के स्कूल में शिक्षकों की मांग पर ओखलकांडा के खनस्यूं गये हुए थे। लौटते हुए ग्रामीण वाहनों की कमी से एक वाहन में ही लदकर, कुछ वाहन के पीछे लटककर भी आ रहे थे, तभी तहसीलदार ने वाहन को रोककर गाड़ी व चालक के कागजात ले लिये। इन्हें छुड़ाने के लिए जब वे तहसील पहुंचे तो उन्हें आरटीओ का चालान करवाकर आरटीओ हल्द्वानी से कागजात वापस प्राप्त करने और दूसरे तहसील में ही 5 हजार रुपए का जुर्माना भुगतने के दो विकल्प दिये गये।
ग्रामीणों ने किसी तरह मान-मनुहार कर तहसील में ही तीन हजार रुपए का जुर्माना भुगतने का विकल्प स्वीकार लिया। लेकिन जुर्माना किसी राजकीय कोष में जमा कराने की जगह ‘श्री 1008 सोमवारी बाबा ट्रस्ट पदमपुरी’ की तीन हजार रुपए की रसीद थमा दी गयी। इस मामले में संबंधित अधिकारी अपनी गलती मान रही हैं।
(Corruption) मामले में इससे भी बड़ा मामला यह है कि ‘श्री 1008 सोमवारी बाबा ट्रस्ट पदमपुरी’ की रसीद बुक तहसील मुख्यालय में पड़ी हुई है, और यहां तक बताया जा रहा है कि तहसील में बर्षों से बंदूकों के लाइसेंसों के रिन्यूअल का ‘सुविधा शुल्क’ व विभिन्न हर्जाने भी राजकीय कोष में जमा होने के बजाय ‘श्री 1008 सोमवारी बाबा ट्रस्ट पदमपुरी’ को दिये जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि धारी के एसडीएम ‘श्री 1008 सोमवारी बाबा ट्रस्ट पदमपुरी’ के सचिव एवं डीएम अध्यक्ष हैं। आगे यह बड़ी जांच का विषय है कि यह धनराशि ‘श्री 1008 सोमवारी बाबा ट्रस्ट पदमपुरी’ के खाते में भी जमा हो रही है अथवा कोई बाहर-बाहर ही तो इसे नहीं खा जा रहा है।
यहां हम स्पष्ट कर दें कि हमारा उद्देश्य किसी अधिकारी को टार्गेट करना नहीं है, इसी लिए हम संबंधित अधिकारी का नाम जाहिर नहीं कर रहे हैं। हमें यह भी पता चला है कि केवल ये अधिकारी ही नहीं, बल्कि इनसे पूर्व के अब तक के अधिकांश अधिकारी भी यही करते रहे हैं। इसलिए हमारा मानना है कि जो भी व्यवस्थागत तौर पर गलत चल रहा है, वह तुरंत रुके। अन्यथा हमें अधिकारियों का नाम सार्वजनिक करने से भी कोई गुरेज नहीं होगा।
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नवीन समाचार, नैनीताल, 29 अगस्त 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की एकलपीठ ने प्रदेश के बहुचर्चित, भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे आईएफएस अधिकारी, नंदा देवी नेशनल पार्क के डिप्टी फॉरेस्ट कंजरवेटर किशन चंद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। अलबत्ता उन्हें विवेचना में सहयोग करने के आदेश दिए है।
मामले के अनुसार आईएफएस किशन चन्द ने हाई कोर्ट में अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की है। उनका कहना है कि विजिलेंस के द्वारा बिना किसी कारण व नोटिस के उनके खिलाफ आय से अधिक सम्पति रखने व भ्रष्टाचार के मामले में एंटी करप्शन एक्ट 1988 की धारा 13(1)(ई) के तहत दर्ज किये गये मुकदमे को निरस्त किया जाय।
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नवीन समाचार, उत्तरकाशी, 21 अगस्त 2019। जनपद के चिन्यालीसौड़ तहसील के तहसीलदार चंदन सिंह राणा को बुधवार को विजिलेंस की टीम ने उनके कार्यालय में छापा मारकर 10000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। बताया गया है कि विजिलेंस को राणा के खिलाफ एक ग्रामीण द्वारा जमीन के दाखिल खारिज के लिए रिश्वत मांगे जाने की शिकायत मिली थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार चिन्यालीसौड़ ब्लाक के कैंथोगी गांव निवासी नारायण सिंह पंवार ने कुछ माह पूर्व चिन्यालीसौड़ नगर पालिका क्षेत्र में जमीन खरीदी थी। जमीन का दाखिल खारिज कराने के लिए वह लंबे समय से तहसील के चक्कर काट रहे थे।
(Corruption) तहसीलदार ने दाखिल खारिज के एवज में 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। काफी मिन्नत करने के बाद भी तहसीलदार 10 हजार रुपये रिश्वत मिलने तक काम करने को राजी नहीं हुआ। इस पर विजिलेंस की टीम ने विजिलेंस ने पूरा जाल बिछाकर उन्हें पीड़ित व्यक्ति से 10000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।
प्रत्यक्षदशियों के अनुसार छापामारी की भनक लगते ही तहसीलदार ने सारे रुपए मुंह में डालकर निगलने का प्रयास किया, लेकिन विजिलेंस की टीम में शामिल अधिकारियों ने उसे दबोच कर मुंह में से रुपये बाहर निकाल दिए। विजिलेंस की टीम तहसीलदार को गिरफ्तार कर देहरादून ले गई। इस सूचना से प्रदेश के राजस्व विभाग के साथ ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। विजिलेंस के द्वारा अब उन्हें न्यायालय में पेश करने के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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नवीन समाचार, नैनीताल, 19 अगस्त 2019। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने जसपुर नगर पालिका के पूर्व अधिशासी अधिकारी को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में दोषी पाते हुए चार वर्ष की जेल व 10 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भुगतने पर दो माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
मामले के अनुसार जसपुर नगर पालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी अजहर अली के खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान हल्द्वानी में हाजी मोहम्मद सरफराज पुत्र हाजी मो. रफीक ने 5 दिसंबर 2012 को शिकायत दर्ज कराई कि अजहर अली उसके करीब 2 लाख रुपए के जेसीबी मशीन के कूड़ा उठान के बिल के भुगतान के ऐवज में 20 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा है। इस पर 7 दिसंबर को अजहर अली को रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपए लेते रंगे हाथों दबोचा।
इधर न्यायालय ने आरोपित पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत 4 वर्ष के कठोर कारावास एवं 5 हजार रुपए जुर्माना तथा धारा 13-1 व 2 के तहत 4 वर्ष के कठोर कारावास व 5 हजार के जुर्माने एवं जुर्माना न चुकाने पर दो-दो माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई।
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-सतर्कता विभाग का घोषित करनी होगी भ्रष्ट व दागी अधिकारियों की सूची: हाईकोर्ट नवीन समाचार, नैनीताल, 15 जून 2019। स्वराज व भ्रष्टाचार उन्मूलन विभाग अब गोपनीय सूचना के नाम पर भ्रष्ट अधिकारियों के नाम नही छुपा सकेंगे, बल्कि उन्हें इन्हें सार्वजनिक करना होगा। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने स्वराज व भ्रष्टाचार उन्मूलन विभाग की सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 24 (4) के तहत ऐसी सूचनाएं सार्वजनिक न करने से संबंधित याचिका खारिज कर दी है।
उल्लेखनीय है कि सूचना अधिकार अधिनियम के तहत हल्द्वानी निवासी चन्द्रशेखर करगेती ने वर्ष 2017 में स्वराज व भ्रष्टाचार उन्मूलन विभाग से राज्य के भ्रष्ट अधिकारियों की सूचना मांगी थी। जिसमें उन्होंने बिंदुवार पूछा था कि राज्य के कितने अधिकारियों के खिलाफ जनता ने शिकायत की है। उन शिकायतों की जांच में कितनी शिकायते सही पाई गईं और कितने अफसरों के खिलाफ कार्यवाही की गई। लेकिन विभाग ने सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 24 (4) की आड़ में ये सूचनाएं नहीं दीं, जिसमें गोपनीय सूचनाओं को सार्वजनिक न करने का उल्लेख है।
स्वराज व भ्रष्टाचार उन्मूलन विभाग के प्रथम अपीलीय अधिकारी के इस फैसले को करगेती ने द्वितीय अपीलीय अधिकारी के समक्ष चुनौती दी। लेकिन अपीलीय अधिकारी ने भी यह सूचना नहीं दी। इसके खिलाफ करगेती ने सूचना आयोग में शिकायत की। सूचना आयोग ने मामले की सुनवाई में पाया कि सतर्कता विभाग धारा 24 (4) से संरक्षित है जिसके तहत जनहित व राष्ट्रहित की गोपनीय सूचनाएं सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं। किंतु भ्रष्ट व शिकायती अधिकारियों की सूचना देने के लिए इस धारा का उपयोग नहीं किया जा सकता।
इसलिए विभाग सूचना के अधिकार के के तहत मांगी गई सूचनाएं निर्धारित समय में उपलब्ध कराए। आयोग के इस फैसले के खिलाफ सतर्कता विभाग के लोक सूचना अधिकारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसे न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ ने खारिज कर दिया तथा सतर्कता विभाग को निर्देश दिए कि वह सूचना आयोग के फैसले का क्रियान्वयन छः हफ्ते के भीतर करना सुनिश्चित करे। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब सतर्कता विभाग को भ्रष्ट व दागी अधिकारियों की सूची सार्वजनिक करनी ही होगी।
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-बागेश्वर जिले के सीमांत क्षेत्र में जलागम प्रोजेक्ट के तहत न लगी सोलर लालटेन, न बने पशुनाद, यहां तक कि मजदूरों को मेहनताना भी नहीं मिला, बावजूद जांच में सब कुछ ‘ओके’ नवीन समाचार, नैनीताल, 31 मई 2019। एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है, जिसमें शिकायतकर्ता की मानें तो कुमाऊं मंडल के तेजतर्रार आयुक्त राजीव रौतेला द्वारा एक घोटाले की जांच के लिए जिला स्तर पर गठित जांच समिति ने भी घोटाला कर डाला है।
(Corruption) मामला जलागम विभाग के प्रोजेक्ट से संबंधित है, जिसके तहत बागेश्वर जिले के कपकोट विकासखंड के सीमांत ग्राम पंचायत दोबाड़ में वित्तीय वर्ष 2016-17 में ग्रामीणों को 81 सोलर लालटेन व एक पावर विडर यानी छोटा ट्रेक्टर मिलना था, तथा तीन पशुनाद यानी पशुओं के चारा खाने के हौंदे और पांच पशु आवास तथा एक टैंट हाउस बनना था।
आरोप है कि इन सभी कार्यों के लिए धनराशि खर्च हो चुकी है, और कार्य पूरे दिखाये जा चुके हैं, लेकिन दो वर्ष के बाद भी न ही 21वीं सदी में भी बिजली की रोशनी से वंचित ग्रामीणों को सोलर लालटेन ही मिली हैं, न पावर विडर मिला है और न ही पशु नाद, पशु आवास और टैंट आवास ही बने हैं। बड़ा आरोप यह भी है कि मामले में मंडलायुक्त राजीव रौतेला को की गयी शिकायत पर उनके द्वारा डीएम बागेश्वर के स्तर से कराई गई जांच में सब कुछ ठीक दिखा दिया गया है।
इस मामले में शिकायतकर्ता दोबाड़ गांव के ही निवासी हुकुम सिंह बसेड़ा ने बताया कि योजना के तहत गांव के महेश चंद्र सिंह, बसंती देवी, तारा देवी के घर पशुनाद बनने थे, किंतु बने नहीं। इसकी शिकायत उन्होंने 18 जुलार्इ्र 2017 को जलागम के दून स्थित प्रोजेक्ट मैनेजर एवं बागेश्वर के डीएम से की। इस पर विभाग ने जांच कराई, जिसमें कार्य करने वाले गांव में कोई कार्य पूर्ण हुआ दिखा नहीं पाये। उन्होंने बताया कि संबंधित फर्म को पैंसा दे दिया गया है। लेकिन इसकी जांच रिपोर्ट शिकायतकर्ता को नहीं दी गयी।
वहीं डीएम बागेश्वर द्वारा 24 जनवरी 2019 को सीडीओ को जांच करने के आदेश दिये गये, किंतु जांच नहीं हुई। इस पर शिकायतकर्ता ने 13 फरवरी 2019 को कुमाऊं आयुक्त श्री रौतेला से इसकी शिकायत की। आयुक्त ने एक अप्रैल को डीएम बागेश्वर को जांच के आदेश दिये। इस पर योजना के पात्रों के बजाय अन्य लोगों के पहले से बने पशुनाद, पशु आवास तथा डिब्बों में बंद पावर वीडर व सोलर लाइट आदि दिखा दिये गये। इसके अलावा बसेड़ा ने बताया कि चुकरामून नाम के स्थान पर एक धारा निर्माण का कार्य भी इस योजना के तहत होना था।
यह 14वें वित्त आयोग से भी निर्मित बताया गया है और इस योजना के तहत भी। यहां तक कि इस निर्माण कार्य में मजदूरों को उनकी मजदूरी तक नहीं दी गयी, और उनके फर्जी हस्ताक्षर करा लिये गये थे, किंतु जांच टीम ने मजदूरों के बयान भी नहीं लिये। इस पर बसेड़ा ने एक बार पुनः मंडलायुक्त को बीती 29 मई को शिकायती पत्र सोंपकर पूरी योजना की निश्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
जांच प्रक्रिया पर हमेशा उठते हैं सवाल
किसी घोटाले की शिकायत चाहे प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति के स्तर पर ही क्यों न कर दी जाए, आखिर जांच क्षेत्र के निचले स्तर के अधिकारियों के द्वारा ही की जाती है, और वे कहीं न कहीं घोटाले के लिए जिम्मेदार लोगों के संपर्क में होते हैं। ऐसे में रिपोर्टें अक्सर ठीक बना दी जाती हैं।
(Corruption) उदाहरण के लिए यदि कोई किसी विद्यालय में मध्याह्न भोजन में बच्चों को नियमानुसार भोजन न मिलने की शिकायत चाहे जिस भी स्तर पर करता है, आखिर जांच उस विद्यालय से संबंधित शिक्षा विभाग के सबसे निचले श्रेणी के जिम्मेदारों की जानकारी में ही होती है, और वे स्वयं कहीं न कहीं इस घोटाले में शामिल होते हैं, और जांच को आसानी से प्रभावित कर लेते हैं।
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-हालांकि तीन वर्ष या कम की सजा होने के मद्देनजर दोनों आरोपितो को अंतरिम जमानत भी मिली नवीन समाचार, नैनीताल, 15 अप्रैल 2019। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण-जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत ने सोमवार को छह वर्ष पुराने भ्रष्टाचार के एक मामले में शिक्षा विभाग के दो कर्मियों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1-1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। हालांकि सजा की अवधि तीन वर्ष के अधीन होने के दृष्टिगत आरोपितों के प्रार्थना पत्र पर नियमानुसार दोनों को अंतरिम जमानत भी मिल गयी, यानी दोनों जेल जाने से बच गये।
विदित हो कि 20 सितंबर 2013 को हल्द्वानी की विजीलेंस की टीम ने ब्लॉक संसाधन केंद्र धौलाखेड़ा के तत्कालीन समन्वयक भगवान सिंह बोरा और खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के तत्कालीन कनिष्ठ सहायक नीरज कुमार आर्य को 25-25 हजार यानी कुल 50 हजार रुपये के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। दोनों को सोमवार को अदालत ने तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1-1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
इसके पश्चात आरोपितों ने सजा की मात्रा तीन वर्ष या कम होने के प्राविधानों के तहत उच्च न्यायालय से जमानत प्राप्त करने तक समय देने का अनुरोध करते हुए जमानत का प्रार्थना पत्र दिया, जिसे नियमानुसार स्वीकार कर लिया गया। फलस्वरूप आरोपित जेल जाने से बच गये। उल्लेखनीय है कि आरोपित सजा की घोषणा से पूर्व भी जमानत पर जेल से बाहर ही थे।
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नवीन जोशी @ नवीन समाचार नैनीताल, 6 अप्रैल 2019। लोक सभा चुनाव में जनता के मन में देश के मुद्दों के साथ जो मुद्दा सबसे अधिक मतदाताओं के मन में दिखाई दे रहा है, वह है भ्रष्टाचार व घोटाले का मुद्दा। देवभूमि के नाम से विख्यात होने और केवल 18 वर्ष की छोटी सी उम्र के बावजूद राज्य ने जितने बड़े भ्रष्टाचार के विषय सुने व देखे हैं, उनकी मिसाल पुराने व बड़े प्रदेशों में भी नहीं सुनाई देते।
राज्य में करीब 200 करोड़ रुपये का गलत तरीके से मुआवजा बांटकर राज्य के कोष को नुकसान पहुंचाने वाले एनएच-74 का घोटाला और करीब 500 करोड़ रुपये का समाज कल्याण विभाग रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला खासकर चर्चा में हैं। इसके अलावा भी कई घोटाले लगातार प्रकाश में आते जा रहे हैं।
इनके अलावा भी उत्तराखंड उच्च न्यायालय में एक 10 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का मामला जनहित याचिका के रूप में चल रहा है, जिसमें राज्य में उद्योगों की स्थापना के लिए ट्रेड टैक्स अफसरों पर उद्योगपतियों से एक हजार करोड़ रुपये लेने पर राजकीय कोष में जमा नहीं करने के आरोप लगाये गये हैं। इस मामले में कुल 10 हजार करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के आरोप लगाये गये हैं। राज्य के 37 अधिकारियों पर इस मामले में तलवार लटकी हुई है।
वहीं यहां नैनीताल में स्वयं विधायक ने पिछली सरकार के कार्यकाल में एडीबी के माध्यम से नगर की पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बनी योजना में 88 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगाये गये हैं। जबकि उनके पिता व परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने परिवहन निगम में पूर्ववर्ती हरीश रावत की सरकार के समय पुरानी अप्रचलित बीएस-3 मॉडल की रोडवेज की 429 बसें खरीदने में 100 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगाये हैं।
इसके अलावा नैनीताल में दिसंबर 2014 में संयुक्त मजिस्ट्रेट के स्तर पर दिसंबर 2014 में हुई जांच में एनआरएचएम यानी राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन एवं राष्ट्रीय शिशु स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम में 4.67 करोड़ के दुर्विनियोग एवं एक करोड़ रुपये की शासकीय क्षति पहुंचाने के आरोप भी लगे थे।
(Corruption) इसी तरह आईडब्ल्यूएमपी यानी समेकित जलागम प्रबंधन कार्यक्रम में सरकारी कर्मचारियों, मानसिक दिव्यांगों, संविदा कर्मचारियों और छात्रों के नाम पर करीब 70 लाख रुपये की बंदरबांट करने का मामला भी न्यायालय में चल रहा है। 2014-15 के इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री के ओएसडी सहित चार अधिकारियों पर मामला चलाने के अदालत आदेश दे चुकी है।
(Corruption) इसी तरह जनपद के भीमताल स्थित औद्योगिक आस्थान में बीते 17 वर्षों में तीन दर्जन से अधिक कंपनियों के अनुदान खाकर भागने और एक भी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई न होने एवं यहीं एक कंपनी एक्वामाल का कई बार नाम बदलकर लाभ लेने एवं इधर पिछली सरकार के दौर में ही 5 मई 2017 को एक्वामाल की दो कंपनियों को शराब बॉटलिंग प्लांट की कंपनी शीतला उद्योग इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की सरकारी जमीन को नियमविरुद्ध बेचने सहित अरबों रुपये का घोटाला करने का मामला भी न्यायालय में विचाराधीन है, एवं समाचार पत्रों की सुर्खियां बन चुका है।
इस बारे में स्थानीय लोगों, खासकर भाजपा नेताओं का कहना है कि भाजपा सरकार के दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी पिछली सरकार के नित नये घोटाले प्रकाश में आ रहे हैं, जबकि कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि मामले हवा-हवाई हैं। किसी मामले में जांच मुकाम तक और अदालत से दोषियों को सजा मिलने तक नहीं पहुंची है। अलबत्ता जनता इन मुद्दों को जेहन में रखकर भी वोट करने की बात कह रही है।
नवीन समाचार, नैनीताल, 2 अप्रैल 2019। एसपी विजिलेंस अमित श्रीवास्तव की टीम ने एक दारोगा शैलेन्द्र चौहान को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथों गिरफ्तार किया है। उसके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपित दारोगा को बुधवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। सतर्कता निदेशक ने टीम के उत्साहवर्धन हेतु नगद पुरस्कार की घोषणा की है।
सतर्कता निरीक्षक राम सिंह मेहता के नेतृत्व में गठित ट्रैप टीम ने बुधवार को गुलजारपुर वन चौकी, तराई पश्चिमी वन प्रभाग, रामनगर मंे तैनात वन दरोगा शैलेन्द्र चौहान पुत्र भारत सिंह, निवासी पट्टी चौहान, जसपुर, जनपद ऊधमसिह नगर, को रंगे हाथों एक लाख रुपये की रिश्वत के साथ रामनगर भवानी गंज चौराहे से गिरफ्तार किया।
(Corruption) उसके विरुद्ध रामनगर के रहने वाले फईम अहमद ने पुलिस अधीक्षक सतर्कता सेक्टर नैनीताल के हल्द्वानी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके व उसके साथी नियाज अली के डम्पर बीती सात मार्च को अंदर जाने का टोकन होने के बावजूद बंजारी गेट रामनगर के अंदर वन विभाग की टीम ने गलत तरीके से सीज किये थे।
बावजूद जब वह और नियाज वाहन छुड़वाने के लिए रेंजर से मिले तो उन्होंने वन दारोगा शैलेन्द्र चौहान से मिलने को कहा। दारोगा शैलेन्द्र चौहान ने उच्चाधिकारियों का हवाला देकर डंपर छोड़ने के लिए दो लाख रुपये की मांग की थी। इस शिकायत के जांच करने पर तथ्य सही पाए जाने पर विजीलेंस ने मंगलवार को कार्रवाई की।
खनन कंपनी के एमडी ने की थी एसपी को रिश्वत देने की जुर्रत, अदालत का यह रहा रुख
नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अप्रैल 2019। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत ने बागेश्वर जनपद के पुलिस अधीक्षक को 20 हजार रुपये की रिश्वत देने के आरोपित एक खनन कंपनी के एमडी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
(Corruption) सोमवार को आरोपित एमडी भगवान सिंह पुत्र आदित्य नारायण, मूल निवासी ग्राम बरवाड़ा जिला कटनी मध्य प्रदेश की जमानत अर्जी का जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने विरोध करते हुए अदालत को बताया कि 9 जनवरी 2019 को आरोपित ने एसपी बागेश्वर के कार्यालय में जाकर खनन कंपनी कटियार माइन्स के खड़िया से ओवरलोडेड भरे ट्रकों को छोड़ने में सहयोग चाहते हुए 20 हजार रुपये की रिश्वत मना करने के बाद भी दी थी।
इस पर एसपी ने बागेश्वर पुलिस कोतवाली से पुलिस बल बुलाकर आरोपित व उसके साथी, कंपनी के लीगल एडवाइजर इंद्र सिंह को मौके से ही तत्काल गिरफ्तार करवा दिया था। दोनों के पास से कंपनी की डायरी, रुपये एवं मोबाइल फोन आदि भी बरामद किये गये थे। इस प्रकार आरोपितों पर लगे सभी आरोप स्पष्ट हैं और उन्हें जमानत देने की कोई तुक नहीं है। इस पर न्यायालय ने दोनों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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नवीन समाचार, नैनीताल, 15 फरवरी 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति लोकपालसिंह की एकलपीठ ने पिथौरागढ़ के जिला समाज कल्याण अधिकारी कांति राम जोशी की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। इसके बाद जोशी पर कभी भी गिरफ्तारी की तलवार लटक गयी है।
उल्लेखनीय है कि जोशी पर लोक सेवक रहते सरकारी धन को खुर्दबुर्द करने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 409 के तहत मुकदमा दर्ज है। आरोप है कि वर्ष 2001 मं जोशी ने अपर जिला समाज कल्याण अधिकारी रहते अपने स्तर से 28 दुकानों को बिना तय प्रक्रिया को अपनाये आवंटित किया
(Corruption) और 15 दुकानों के आवंटन को मनमर्जी से निरस्त करके इनमें से 14 दुकानों को अपात्रों को आवंटित कर दिया था। इसकी जांच तत्कालीन डीएम ओमप्रकाश व मौजूदा डीएम एसए मुरुगेशन के साथ ही विभागीय जांच में भी समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह ने भी जोशी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की संस्तुति की थी।
इधर उनके विरुद्ध सतर्कता विभाग भी जांच कर रहा है। पूर्व में 25 जून 2018 में आईटी सेल के नोडल अधिकारी अनुराग शंखधर ने भी समाज कल्याण विभाग में फर्नीचर घोटाले को लेकर जोशी के खिलाफ थाना रायपुर में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए तहरीर दी थी।
यह भी पढ़ें (Corruption) : उत्तराखंड की इस आईएएस के पिता निकले 400 करोड़ के ‘गलत’ राम !
नवीन समाचार, नैनीताल, 29 जनवरी 2019(Corruption) । जी हां, उत्तराखंड की आईएएस अधिकारी व टिहरी की डीएम सोनिका के पिता का नाम तो सहीराम मीणा है, किंतु वे ‘आंख के अंधे-नाम नैन सुख’ की तर्ज पर ‘गलत राम’ निकले हैं, और वह भी 400 करोड़ रुपये के। राजस्थान के आईआरएस अधिकारी सहीराम के ठिकानों से अब तक की जांच में 400 करोड़ रुपये की संपत्ति का पता चला है।
(Corruption) खास बात यह भी है कि आईआरएस अधिकारी सही राम को इसी साल जुलाई में सेवानिवृत्त होना था। लेकिन उनका इरादा राजस्थान के राजेश पायलट की सीट रही दौसा से लोकसभा चुनाव लड़ने का भी था। उन्होंने हाल ही में हुए राजस्थान विधानसभा के चुनाव में गंगानगर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर ली थी लेकिन वीआरएस का आवेदन मंजूर नहीं हो पाने के कारण उनका इरादा पूरा नहीं हो सका।
(Corruption) गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस समारोह में 1989 बैच के इस आईआरएस अधिकारी नारकोटिक्स विभाग में एडिशनल कमिश्नर के पद पर तैनात सहीराम मीणा जनता को सदाचार का पाठ पढ़ा रहे थे, किंतु इसके कुछ देर बाद ही उन्हें एसीबी यानी राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के द्वारा उनके कोटा स्थित आवास से चित्तौडगढ़ निवासी एक व्यक्ति को अफीम का पट्टा जारी करने के एवज में एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए उनके लिए दलाली करने वाला कमलेश नाम के व्यक्ति के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया है।
(Corruption) साथ ही उनकी करीब 400 करोड़ रुपये की सम्पति भी अब तक की जांच में सामने आ चुकी है। एसीबी के अधिकारियों के अनुसार सहीराम मीणा ने इन संपत्तियों में अपने व अपने परिवार के सदस्यों के नाम से निवेश कर रखा था। राजस्थान के इतिहास में इसे एसीबी की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। एसीबी के अधिकारियों ने सोमवार को सहीराम के 15 बैंक खातों और लॉकरों को खोला तो चौंक गए। लॉकरों में नकदी और ज्वलैरी के साथ ही हीरे भी मिले। मीणा के कोटा और जयपुर स्थित आवास से करीब सात करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई।
(Corruption) अब तक की जांच में पता चला है कि सहीराम मीणा तथा उसकी पत्नी और बेटा 106 आवासीय प्लॉट,एक मैरिज गार्डन, 25 दुकानों, दो औद्योगिक प्लॉट, एक पेट्रोल पंप, मुम्बई और दिल्ली में एक-एक फ्लैट, सात बीघा कृषि भूमि, एक फार्म हाउस, चार ट्रक, एक टायर फर्म और एक शिक्षण संस्थान के मालिक हैं। उन्होंने सवाई माधोपुर जिले में स्थित अपने गांव जीबली के कुछ गरीब लोगों के नाम से भी रणथम्भौर सेंचूरी के आसपास बेनामी भूखंड खरीद रखे हैं।
(Corruption) पूछताछ में यह भी पता चला कि सहीराम मीणा के दो रिश्तेदार भाजपा के बड़े नेता हैं जबकि एक रिश्तेदार कांग्रेस का प्रभावशाली नेता है। उन्होंने विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के कई उम्मीदवारों को फंडिंग भी की थी।
(Corruption) पूछताछ के दौरान सहीराम ने सीने में दर्द और बेचौनी की शिकायत की। इस पर उसे कोटा के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के बाद उसे और उसके दलाल कमलेश को एसीबी की विशेष अदालत के मजिस्ट्रेट के घर पेश किया गया जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया।
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नवीन समाचार, देहरादून, 27 जनवरी 2019 (Corruption) । राजकाज में ऐसा भी होता है। उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री अवॉर्ड हासिल करने के चंद घंटों के भीतर एक अधिकारी को भ्रष्टाचार के आरोप में हटा दिया गया है। अल्मोड़ा के मुख्य शिक्षा अधिकारी जगमोहन सोनी को गणतंत्र दिवस के मौके पर राज्य की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने पुरस्कृत किया था।
(Corruption) लेकिन अल्मोड़ा में भव्य गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान सोनी जब केंद्रीय मंत्री अजय टमटा और उत्तराखंड सरकार के मंत्री हरक सिंह रावत से अवॉर्ड हासिल कर रहे थे, उसी दौरान देहरादून में उनको हटाने का आदेश टाइप हो रहा था। छुट्टी के बावजूद राज्य के शिक्षा सचिव भूपिंदर कौर औलख को रिपब्लिक डे के दिन दफ्तर पहुंचकर सोनी को हटाने के आदेश पर दस्तखत करने के लिए कहा गया।
(Corruption) मुख्य शिक्षा अधिकारी सोनी पर शिक्षकों की नियुक्ति के दौरान लाखों की रिश्वत लेने का आरोप है। आरोपी अधिकारी को अब देहरादून में शिक्षा निदेशालय से अटैच कर दिया गया है। हालांकि सरकार की तरफ से जारी आदेश में सोनी को हटाने की वजह नहीं बताई गई है लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उन पर सरकार द्वारा सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति में घूस लेने का आरोप है। सोनी ने अपने खिलाफ कार्रवाई और हटाए जाने का आदेश मिलने की पुष्टि की है। इसके साथ ही उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को झूठा बताया है।
(Corruption) सोनी ने कहा, ‘मुझे खुद पर लगाए गए आरोपों के बारे में जानकारी है लेकिन वे आधारहीन हैं। मुझे राज्य में शिक्षा के लिए योगदान देने पर अवॉर्ड दिया गया और उसी दिन मुझे पद से हटा दिया गया। यह अन्याय है।’ अधिकारियों के मुताबिक सोनी को हटाने का फैसला शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के आदेश के बाद लिया गया, जो शुक्रवार को अल्मोड़ा में थे। एक अधिकारी ने बताया, ‘स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि सोनी समेत कुछ अधिकारी शिक्षकों को नियुक्त करने के लिए लाखों रुपये तक की रिश्वत मांग रहे थे। मामले की पूरी जांच की जाएगी।’
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नवीन समाचार, देहरादून, 10 जनवरी 2019 (Corruption) । पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के भ्रष्टाचार के मामलों के उजागर होने का सिलसिला थम नहीं रहा। अब चार साल पुराने मामले में मुख्यमंत्री के ओएसडी जेसी खुल्वे समेत चार तत्कालीन अफसरों पर मुकदमा चलेगा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) एमएम पांडेय की अदालत ने यह आदेश दिया है। चारों अफसरों पर केंद्र की समेकित जलागम प्रबंधन कार्यक्रम (आईडब्ल्यूएमपी) और राष्ट्रीय जलागम विकास योजना में 2014-15 में 70 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा करने का आरोप है।
(Corruption) तत्कालीन सहायक कृषि अधिकारी (वर्ग-दो) रमेश चंद चौहान की शिकायत पर पूर्व में दो प्रशासनिक जांचें हुईं। सूत्रोंं के अनुसार इस जांच में 70 लाख रुपये का भ्रष्टाचार कर बंदरबांट करने, सरकारी कर्मचारी, मानसिक दिव्यांग, संविदा कर्मचारियों और छात्रों के नाम योजना में हुए कार्यों में दिखाकर उनके जरिये फंड का भुगतान कर वित्तीय गड़बड़ी की बात सामने आई।
(Corruption) तत्कालीन एसएसपी और पटेलनगर इंस्पेक्टर से शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने आरटीआई से जांच रिपोर्ट की सत्यापित प्रतियां लेकर सीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया गया।
(Corruption) इस पर सीजेएम एमएम पांडेय की अदालत ने आदेश दिया कि यह वाद अदालत में चलेगा। सक्षम अधिकारी से भी इसकी जांच कराई जाएगी। इस समय मुख्यमंत्री के ओएसडी खुल्बे उस वक्त कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी चकराता के पद पर तैनात थे।
(Corruption) मामले में जेसी खुल्बे, तत्कालीन कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी चकराता (वर्तमान ओएसडी मुख्यमंत्री), ओमवीर सिंह, तत्कालीन सहायक कृषि अधिकारी (वर्ग तीन), गौरी शंकर, तत्कालीन कृषि निदेशक उत्तराखंड कृषि निदेशालय (नंदा की चौकी व विजय देवराड़ी, तत्कालीन मुख्य कृषि अधिकारी देहरादून आरोपित हैं।
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नवीन समाचार, देहरादून, 8 जनवरी 2019 (Corruption) । नगर निकायों में गली-मुहल्लों और वार्डों में भले ही गंदगी से आम आदमी का जीना मुहाल हो, या लोग टूटी सड़कों-नालियों से परेशानहाल हों, लेकिन शहरी निकाय बुनियादी जरूरतों से मुंह चुराकर जनता की गाढ़ी कमाई का जमकर दुरुपयोग कर रहे हैं। प्रोक्योरमेंट नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य कराए जाने से लाखों की धनराशि अनियमित तरीके से खर्च की ही गई है, साथ में तकनीकी मंजूरी के बगैर कराए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भी सवालों के दायरे में आ गई है।
(Corruption) अल्मोड़ा में तो ठेकेदार को बगैर कार्य के ही 41.45 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। रुड़की नगर निगम में तो वर्ष 2016-17 में सभी निर्माण कार्य बगैर तकनीकी स्वीकृति के कराए गए हैं। रुड़की नगर निगम समेत अल्मोड़ा, पौड़ी, नई टिहरी व मसूरी नगरपालिका परिषद समेत कुल पांच निकायों के ऑडिट में निर्माण कार्यों, करों की वसूली, जुर्माना वसूली में करोड़ों रुपये की अनियमिताएं सामने आई हैं।
(Corruption) मसूरी नगरपालिका को छोड़कर उक्त सभी निकायों के वर्ष 2016-17 के कार्यों का ऑडिट किया गया है। मसूरी नगरपालिका में वर्ष 2016-17 में बड़े पैमाने में अनियमितता सामने आने के बाद एक वर्ष पहले यानी 2015-16 का ऑडिट भी कराया गया है।
नगर निगम रुड़की
(Corruption) निगम में तमाम निर्माण कार्यों में उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावी, 2008 को ताक पर रखकर बगैर तकनीकी स्वीकृति के 332.10 लाख की राशि का अनियमित भुगतान किया गया है। यही नहीं निर्माण कार्यों में देरी होने की स्थिति में ठेकेदारों से जुर्माना वसूली की हिम्मत नहीं दिखाई गई। नतीजतन 2.08 लाख की राशि की कटौती नहीं हो पाई।
नगरपालिका परिषद पौड़ी
(Corruption) बगैर अनुमति के 14.24 लाख रुपये वाहन खरीदने में खर्च कर डाले। पालिका कैशबुक व पत्रावली में बोर्ड फंड का ग्रीष्मोत्सव पौड़ी मेला संचालन में खर्च होना दर्शाया गया है। ऐसी 20 लाख रुपये की राशि का अब तक समायोजन नहीं हो सका है।
नगरपालिका परिषद मसूरी
(Corruption) पर्यटकों की पसंदीदा पहाड़ों की रानी मसूरी में टेंडर कराए बगैर कंपनी बाग कार पार्किंग व मसूरी झील ठेके को अनियमित रूप से दिया गया। विभिन्न संसाधनों से 149.30 लाख रुपये कम आय होने से पालिका को राजस्व का चूना लगा।
(Corruption) वहीं अस्थायी व स्थायी वसूली, भवन व व्यावसायिक प्रतिष्ठान के सालाना कर मूल्यांकन में कटौती, कार पार्किंग का बकाया, रायल्टी कटौती न होने, ठेका अनुबंध स्टांप पेपर पर नहीं कराने समेत विभिन्न तरीके से करीब 194.41 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। इसमें 20.61 लाख रुपये कार पार्किंग की बकाया राशि की वसूली न होना भी शामिल है।
नगरपालिका परिषद नई टिहरी
(Corruption) अवर अभियंता ने नई टिहरी व बौराड़ी क्षेत्र में मस्टरोल के जरिये अकुशल श्रमिकों से नाली की सफाई का कार्य कराया। इन श्रमिकों को 832 दिनों के लिए प्रतिदिन 350 रुपये की दर से 2.91 लाख का भुगतान दर्शाया गया है, जबकि कार्यालय प्रमुख अभियंता व विभागाध्यक्ष लोक निर्माण विभाग के पत्र के मुताबिक अकुशल श्रमिक के लिए प्रतिदिन 275 रुपये की दर निर्धारित की गई।
(Corruption) इससे अवर अभियंता को 62 हजार रुपये का अधिक भुगतान किया गया। बिजली उपकरणों व अन्य सामान खरीद में खामियां बरती गईं। इसमें मैसर्स विनायक ट्रेडर्स मेरठ व मैसर्स जीरो वेस्ट इनकॉरपोरेाश्न, ऋषिकेश को लाखों की राशि का त्रुटिपूर्ण भुगतान किया गया है।
नगरपालिका परिषद अल्मोड़ा
(Corruption) अवस्थापना विकास से संबंधित 493.08 लाख की निष्फल योजनाओं के लिए अनुदान से ठेकेदार को बगैर कार्य के लिए 41.45 लाख का अनियमित भुगतान किया गया। अनुदान की राशि का इस्तेमाल अन्य परियोजनाओं व कार्यों में किए जाने से 215.17 लाख की राशि के गबन का अंदेशा जताया गया है।
(Corruption) एकीकृत आवास एवं मलिन बस्ती सुधार की 833.32 लाख की योजना में कार्यदायी संस्था से अवशेष धनराशि 186.96 लाख की वसूली नहीं की गई। ठेकेदारों के देयकों, लेबर सेस में कटौती नहीं कर पालिका के राजस्व को हानि हुई। (रविंद्र बड़थ्वाल साभार)
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-प्रतिभागियों को प्रशिक्षण अवधि, रविंद्र बड़थ्वाल में नहीं दी गयी टूल किट, शिकायत करने पर की गयी खानापूरी
नैनीताल, 1 अक्टूबर 2018 (Corruption) । नैनीताल नगर पालिका के सूडा यानी राज्य नगरीय विकास अधिकरण के द्वारा दीनदयाल अंत्योदय राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत कराये गये उत्थान यानी ‘इम्प्लॉयमेंट थ्रू स्किल ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट’ के तहत ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण में प्रतिभागियों के द्वारा प्रशिक्षण संस्था के द्वारा सांठगांठ से घोटाला किये जाने की संभावना जताई गयी है। बताया गया है कि प्रशिक्षण अवधि में ही प्रतिभागियों को टूल किट दी जानी थी। किंतु नहीं दी गयी।
(Corruption) प्रतिभागियों को खुद ही सामग्री जुटानी पड़ी। इसकी शिकायत गत 26 सितंबर को नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी से किये जाने के बाद सोमवार को प्रशिक्षण दे रही संस्था इंपीरियल इंस्टीट्यूट के द्वारा टूलकिट देने की खानापूरी की गयी है। प्रतिभागियों के अनुसार प्रत्येक प्रतिभागी को 1500 रुपए की टूलकिट दी जानी थी, किंतु ऐसा लगता है कि सबको मिलाकर 1500 रुपए की किट दे दी गयी है। किट में केवल एक-एक बैग, कंघा, जूड़े की पिन, छोटी पिन एवं दो अन्य सामग्री ही दी गयी है।
(Corruption) साथ ही प्रशिक्षण के प्रमाण पत्र में डिप्लोमा एवं अधिकांश प्रतिभागियों का नाम भी गलत अंकित किया गया है। इस संबंध में पूूछे जाने पर नगर की प्रभारी ईओ लता आर्य ने मामला संज्ञान में न होने और अब संज्ञान में लेने की बात कही है।
‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले पत्रकार’ एवं मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 140 मिलियन यानी 1.40 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
Rishwat, In a recent incident in Dehradun, Uttarakhand, a person, identified as a Congress leader, was arrested for attempting to bribe an Upper Tehsildar. The accused, Gul Mohammad, allegedly approached the Additional Tehsildar with a bribe of Rs 17,000 to sign a file. However, when the Additional Tehsildar opened the file, the money fell out, and the accused openly admitted that it was intended as a bribe. The Upper Tehsildar promptly called the police and had Gul Mohammad arrested. A case has been registered against the accused based on the complaint filed by the Additional Tehsildar.
नवीन समाचार, नैनीताल, 10 मई 2023। नैैनीताल नगर पालिका के अध्यक्ष सचिन नेगी क्रिकेट के मैदान पर अच्छे बल्लेबाज हैं, लेकिन बुधवार को उन्होंने मैदान के बाहर भी बचाव का रुख अपनाने की जगह ‘’फ्रंट फुट पर आगे निकलकर ‘बड़ा शॉट’ खेल दिया है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा पालिका में भ्रष्टाचार व्याप्त होने एवं पालिका … Read more
नवीन समाचार, देहरादून, 19 अगस्त 2022। सोशल मीडिया पर एक ‘ब्रेकिंग न्यूज’ स्टाइल के वीडियो में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के भाजपा के 20 विधायकों को तोड़कर कांग्रेस के साथ मिलकर प्रदेश में सरकार बनाने की बात कही गई है। इससे उत्तराखंड की राजनीति में एक हलचल सी उत्पन्न हो गई है। हालांकि इसे भाजपा … Read more
नवीन समाचार, नैनीताल, 31 मार्च 2022। दिल्ली से आई सीबीआई की टीम ने राजधानी देहरादून में तीन स्थानों पर छापेमारी की। इसमें एनएचएआई के एक बड़े अधिकारी के यहां से सीबीआई ने बैंक से जुड़े दस्तावेजों के साथ अन्य दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार दोपहर सीबीआई की टीम सबसे … Read more
अंक -15 : आज आखिरी कड़ी में तल्लीताल बाजार वार्ड नंबर-15 से सभासद श्रीमती प्रेमा अधिकारी के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : श्रीमती प्रेमा अधिकारी पत्नी : श्री मोहन सिंह अधिकारी शिक्षा : एम.ए. (समाज शास्त्र) डीएसबी परिसर, नैनीताल।
काफी समय से समाज व महिलाओं के लिये कार्य कर रही प्रेमा अधिकारी, रक्तदान में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. हल्द्वानी वाली रोड में हेमंत रूवाली जी की दुकान के पास का नाला जो सदैव गंदगी से भरा रहता था, नगर पालिका द्वारा ठीक करवाकर उसमें जाली लगवाने का काम करवाया गया। 2. तल्लीताल थाने के पास नाली का निर्माण और पानी की निकासी तथा गैराज का नवीनीकरण नगर पालिका द्वारा करवाया गया। 3. तल्लीताल डीएम कार्यालय को जाने वाले रास्ते पर सार्वजनिक शौचालय जो कई वर्षों से बंद पड़ा था, उसका जीर्णोद्धार नगर पालिका द्वारा करवाया गया। 4. सरोज भवन के पास से पीछे का रास्ता तथा गली मोहमद कमर के घर से होते हुये नीलोफर की दुकान तक नवीनीकरण नगर पालिका द्वारा करवाया गया। 5. श्री विनोद तिवारी जी के घर के पास स्टीफन स्कूल होते हुये जिला पूर्ति कार्यालय जाने वाले रास्ते का नवीनीकरण का कार्य नगर पालिका द्वारा करवाया गया। 6. हिमालय होटल के पास इटन हाउस को जाने वाली सीढ़ियों तथा रास्ते का नवीनीकरण नगर पालिका द्वारा करवाया गया। 7. जिला पूर्ति कार्यालय जाने वाले रास्ते से पुलिस लाइन को जाने वाले रास्ते की सीढ़ियों का नवीनीकरण नगर पालिका द्वारा करवाया। 8. साह पुस्तक भंडार के पीछे रास्ते की जीर्ण -शीर्ण दीवार जो गिरने वाली थी, नगर पालिका द्वारा ठीक करवायी। 9. पुलिस लाइन से कमिश्नरी तक जाने वाले रास्ते में रेलिंग विधायक जी के माध्यम से लगवायी। 10. बर्ड्स आई व्यू कॉटेज की गली में नई प्रकाश व्यवस्था नगर पालिका द्वारा करवायी गयी। 11. डीएम कोर्ट में आनंद की कैंटीन से फैमिली कोर्ट तक प्रकाश व्यवस्था नगर पालिका द्वारा करवायी।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. एसएसपी आवास के पास फैमिली क्वार्टर जाने वाले रास्ते का कार्य प्रस्तावित है। 2. नैनीताल बैंक से तल्लीताल थाना तक नालियों पर जाली लगवाकर नालियों का जीर्णोद्धार करवाना है। 3. इसके अलावा और भी कार्य प्रस्तावित हैं, जिन्हें समय-समय पर पूरा करवाकर जनता की सेवा करती रहूंगी।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है, विशेष तौर से महिलाओं के उत्थान के लिये कार्य करना है।
अंक -14 : आज मल्लीताल बाजार वार्ड नंबर-14 से सभासद मोहन सिंह नेगी के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : मोहन सिंह नेगी पुत्र : स्व. राम सिंह नेगी शिक्षा : स्नातक (बी.ए.) एम.ए. (समाज शास्त्र), स्नातक (पत्रकारिता) डीएसबी परिसर, नैनीताल। विधि स्नातक, एसएसजे परिसर, अल्मोड़ा। विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. नाथ साह जी की दुकान के सामने कूड़े का डिब्बा जिससे पूरे बाजार को समस्या थी उसे हटवाकर वहां लोगों के बैठने के लिये बेंच लगवायी। 2. बेकरी कम्पाउंड में जगदीश बेकरी से इदरीस मलिक जी की बेकरी तक इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करीब 2.10 लाख की लागत से करवाया। 3. वाल्मीकि मंदिर से दयाल दा के घर तक नई प्रकाश व्यवस्था करवायी। 4. बर्तन वाली गली में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करीब 1.10 लाख की लागत से करवाया। 5. मार्केट की साफ-सफाई व्यवस्था पर पर्यावरण मित्रों का हौसला बढ़ाने प्रत्येक सुबह जरूर आता हूँ। वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. इंतखाब क्लॉथ स्टोर से लेकर टूरिस्ट होटल तक नगर पालिका के माध्यम से पूरी रोड बननी है, रोड के नीचे जो नाला है, वो सही करवाना है, जिसकी लागत करीब 10 लाख रूपये है, प्रस्तावित है। 2. बीच वाली बाजार में टाइल्स बहुत जगह से उखड़ गयी हैं, जिसका करीब दो लाख रुपये से पुनर्निर्माण कार्य होना है। 3. अंडा मार्केट में जहां कूड़ेदान है से लेकर ए वन बेकरी शॉप तक इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से होना प्रस्तावित है। 4. बाजार में नालियों का चौड़ीकरण व उनपर जालियां लगवाना प्रस्तावित है। 5. पुराना झूला परिसर में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण प्रस्तावित है। 6. कमेटी लाइन में शिव जी के मंदिर से लेकर वाल्मीकि मंदिर तक इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण प्रस्तावित है। 7. गाड़ी पड़ाव में व गोल घर के पास कुमाऊँनी संस्कृति वाले गेट लगने हैं, जो विधायक जी के माध्यम से प्रस्तावित हैं। 8. अल्पसंख्यक मद से विधायक जी के माध्यम से शाकिर हसन मीट वालों की दुकान से नब्बू अंडे वालों की दुकान तक सड़क निर्माण प्रस्तावित है, जो लगभग 12 लाख की लागत का कार्य है। 9. मेरे वार्ड में दो शौचालय हैं, उनका जीर्णोद्धार पर्यटन विभाग के माध्यम से होना है। 10. सदर कम्पाउंड से प्रेम रेस्टोरेंट तक निकलने वाली गली में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण व पथ प्रकाश व्यवस्था नगर पालिका के माध्यम से होना है। 11. सय्यद ताज रेस्टोरेंट वाली गली में नालियों का निर्माण करीब 1.10 लाख की लागत से नगर पालिका के माध्यम से होना है। 12. कृष्णा ज्वेलर्स के सामने अर्शी भाई की दुकान तक टाइल्स का निर्माण होना है। 13. खडी बाजार में गड्ढों को सही करवाया जाएगा। 14. मीडिल स्कूल के पास सीढ़ियों की मरम्मत करवानी है। 15. झूला मार्केट में (राजेश वर्मा जी के सामने ) क्यारी को पुनर्जीवित करवाना है। भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है।
अंक -13 : आज आवागढ़ वार्ड नंबर-13 से सभासद राजू टांक के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : राजू टांक पुत्र : स्व. यशपाल टांक शिक्षा : इंटरमीडिएट, सी.आर.एस.टी. इंटर कॉलेज, नैनीताल। समाजसेवा ही सर्वोपरि है।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. खुर्शीद हुसैन ‘आजाद’ के घर से स्टेट बैंक तक लोनिवि के माध्यम से सड़क में सीसी करवाकर मार्ग जीर्णोद्धार करवाया। 2. चार्टन लॉज की कूड़ेदान डिग्गी का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 3. चार्टन लॉज में ही कूड़ेदान के पास में एक पेशाबघर नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 4. ब्लू स्टार होटल से अमित साह जी फोटोग्राफर के घर तक नये तार डलवाकर, पथ प्रकाश व्यवस्था नगर पालिका के माध्यम से करवायी। 5. मीरा बुआ की दुकान से टंकी तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 6. टंकी से हिमांशु डालाकोटी के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स व सीढ़ियों का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 7. बॉबी के घर से मुकेश दास के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 8. मीरा बुआ की दुकान से लेकर ईशान के घर तक पथ प्रकाश व्यवस्था नगर पालिका के माध्यम से करवायी। 9. सिंचाई विभाग के माध्यम से क्षेत्र से निकलने वाले नालों की सफाई करवायी जा रही है। 10. पुराने बैंक ऑफ बड़ौदा के पास बड़ी नाली का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 11. काफी दिनों से बंद हो चुके नल कूड़ेदान के पास और पोस्ट ऑफिस के पास वाले दोनों नल पुनः सुचारु करवाये। 12. स्टेट बैंक के पास जीर्ण-शीर्ण हो चुके बिजली के पोल को विद्युत विभाग के माध्यम से नया लगवाया। 13. अर्शी के घर के आगे दीवार व लोहे की पुलिया का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 14. आजादी के बाद पहली बार कुंगा दा भोटिया के घर के सामने से डॉ. दुग्ताल जी के आवास तक करीब 800 मीटर के मार्ग में इंटर लॉकिंग व दीवार निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 15. बैंक ऑफ बड़ौदा पुराना से बेलवेडियर होटल तक सीसी मार्ग व बेलवेडियर होटल से लेकर अमित साह जी फोटोग्राफर के घर तक ईंटों का खड़ंजा नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 16. निशा के घर से गुप्ता जी के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 17. अनित जी की दुकान के पास से सोहेल सिद्दीकी जी के घर तक नाले पर रेलिंग सिंचाई विभाग के माध्यम से करवाया। 18. पूरे वार्ड में प्रकाश व्यवस्था सही करवायी। 19. गुप्ता जी के घर से मीरा बुआ की दुकान तक साफ सफाई के लिये नगर पालिका से एक महिला पर्यावरण मित्र नियुक्त करवायी गयी है। 20. भजन दा के घर से टीटू साह जी की दुकान तक नालियों पर नगर पालिका के माध्यम से जाल लगवाये गये।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. नदीम के घर से ताहिर के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स लगनी प्रस्तावित है। 2. फल वाले मुल्ला जी के घर से बिलाल भाई के घर तक इंटर लॉकिंग टाइल्स का कार्य प्रस्तावित है। 3. इब्राहिम के घर से दानिश के घर तक इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण प्रस्तावित है। 4. हिमांशु के घर से नन्हे भाई के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग का कार्य प्रस्तावित है। 5. नंदा आमा के घर से करण के घर के सामने तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स निर्माण प्रस्तावित है। 6. डेविड के घर से थापा जी के घर तक रास्ता एवं गलियों का निर्माण प्रस्तावित है। 7. आजादी के बाद पहली बार मेरे वार्ड में 3045 का बारात घर शाकिर भाई के घर के सामने बनने वाला है। 8. संजू भाई के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स लगनी प्रस्तावित है। 9. आवागढ़ में आशु दा के घर के पास से खुल्बे जी के घर के सामने तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स निर्माण व दोनों तरफ गेट लगने प्रस्तावित है। 10. सोहेल सिद्दीकी जी के घर से खुर्शीद हुसैन ‘आजाद’ के घर तक नाले पर रेलिंग का कार्य प्रस्तावित है। 11. चार्टन लॉज की पुलिया से पुरानी कोठी तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण प्रस्तावित है। 12. पांच लाइट पोल लगने हैं, जिसमें एक आवागढ़ में, एक चार्टन लॉज में, तीन 800 मीटर वाली रोड में लगने हैं। 13. प्रेम सरोवर होटल के पीछे बैंक ऑफ बड़ौदा तक नालियों व जालियों का निर्माण प्रस्तावित है। 14. गौरव मेहरा के घर के पीछे से अब्दुल्लाह बिल्डिंग तक नाली निर्माण व नाले पर रेलिंग निर्माण प्रस्तावित है। 15. दानिश की दुकान के पास पुलिया व दीवार निर्माण प्रस्तावित है। 16. कुंगा दा भोटिया के घर के सामने पुलिया निर्माण करवाना है।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है
अंक -12 : आज सैनिक स्कूल वार्ड नंबर-12 से सभासद श्रीमती दया सुयाल के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : श्रीमती दया सुयाल पत्नी : श्री कैलाश चंद्र सुयाल शिक्षा : परास्नातक (एम.ए. समाजशास्त्र), रानीखेत डिग्री कॉलेज, अल्मोड़ा। 15-20 वर्षों से निरंतर महिलाओं के उत्थान हेतु संघर्षरत दया सुयाल महिलाओं व समाज के लिये बहुत कुछ करना चाहती हैं।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. नाला नंबर -26 सैनिक स्कूल के पास से निकलने वाली ऊपर मेन रोड तक जाने वाली सीढ़ियों का जीर्णोद्धार नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 2. जुबली हॉल के पास राजू खान जी के घर के नजदीक वाली क्षतिग्रस्त दीवार, रेलिंग व इंटरलॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया जा रहा है । 3. देविका रानी स्कूल के पास क्षतिग्रस्त दीवार का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 4. जुबली हॉल में पंगोट को जाने वाले मार्ग पर विनोद कुमार जी के घर के ऊपर पैराफिट का निर्माण करवाया। 5. पथ प्रकाश व्यवस्था के अंतर्गत कई लाइट ठीक करवायी। 6. धूप कोठी के पास से पंगोट को जाने वाली सड़क पर रेलिंग कार्य लोनिवि के माध्यम से करवाया। 7. सफाई में विशेष ध्यान रखते हुए डोर टू डोर का निरिक्षण करती हूं। 8. लॉक डाउन में वार्डवासियों की हर सम्भव सहायता की गयी। 9. विधवा पेंशन व अन्य आर्थिक सहायता दिलवाते रहते हैं। 10. नैना पीक की सुरक्षा के लिये शासन- प्रशासन में आवाज उठाते रहते हैं क्योंकि वार्ड वासियों की सुरक्षा हमारा परम कर्तव्य है।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. वार्ड में प्रकाश की व्यवस्था और बेहतर करनी है, जिसमें धूप कोठी से लेकर पूरा सैनिक स्कूल आउट हाउस जोशी जी के मकान तक और जुबली हॉल से ऊपर भट्ट जी का हॉस्टल है, जहां से बस्ती में जाने का रास्ता है वहां नये पोल लगवाकर प्रकाश व्यवस्था करनी है। 2. विधायक जी के माध्यम से कुछ सोलर लाइट भी वार्ड में लगनी है। 3. मेलरोज कम्पाउंड हंस निवास से ऊपर जो मंदिर है उसमें सौंदर्यीकरण कार्य करवाना है। 4. शेरवानी से ऊपर पान सिंह की दुकान के पास लाल सिंह जी के घर से जो रोड जाती है उसके जीर्णोद्धार का कार्य प्रस्तावित है। 5. वार्ड में बेहतर स्वास्थ्य, बेहतर सड़कें व बेहतर प्रकाश व्यवस्था दिलाना आगे का लक्ष्य है। भविष्य की योजना:आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है
अंक -11 : आज श्रीकृष्णापुर वार्ड नंबर-11 से सभासद कैलाश सिंह रौतेला के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : कैलाश सिंह रौतेला पुत्र : श्री मदन सिंह रौतेला शिक्षा : बीए (स्नातक) व एम.ए. (समाज शास्त्र), डीएसबी परिसर, नैनीताल। कोरोना काल में भी जनहित के कार्य करने वाले कैलाश निष्छल मन से सेवा करते आये हैं।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं:
1. इंद्र कॉटेज में विधायक निधि से रेलिंग निर्माण करवाया। 2. हल्द्वानी रोड कांठ बास में नाली व नाली पर रेलिंग तथा दीवार की मरम्मत नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 3. सिपाही धारे में शनि मंदिर में गेट, दीवार व मन्दिर से नीचे को जाने के मार्ग में सीसी नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 4. बिष्ट भवन में रेलिंग का कार्य नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 5. ब्रेवरी मार्ग से नॉर्मल स्कूल तक सीसी नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 6. सलमान जाफरी के घर के पास मार्ग की टूटी दीवार का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 7. तल्ला कृष्णापुर में बिशन दा के घर के आगे आम रास्ते की टूटी दीवार का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 8. गोल घर को जाने वाले मार्ग की टूटी दीवार का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 9. ब्रेवरी मार्ग में मोटा पानी के पास टूटी दीवार का निर्माण करवाया। 10. आजादी के बाद से आज पहली बार वर्तमान में बिष्ट भवन से शाही जी के घर तक के कच्चे मार्ग को जाने वाला 2 किमी मार्ग का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से हो रहा है। 11. तल्ला कृष्णापुर में हीरा सिंह जी से घर से नीचे पिंकी के घर को जाने वाले कच्चे मार्ग का आजादी के बाद सीसी निर्माण नगर पालिका के माध्यम से कराया गया। 12. गुफा महादेव के पास दीवार निर्माण व सिसी का कार्य नगर पालिका के माध्यम से चल रहा है। 13. तुड टडिया धारे में आम मार्ग पर विधायक निधि से सीसी कार्य। 14. रमेश चंद्र के घर के पास से ब्रेवरी तक का विधायक निधि के माध्यम से सीसी मार्ग निर्माण। 15. विधायक निधि से विजय के घर के पास दीवार निर्माण कार्य करवाया। 16. तल्ला कृष्णापुर में मुनिया जी के घर से ब्रेवरी मार्ग तक नगर पालिका के माध्यम से सीसी करवाया। 17. इमाम बाड़े से हाजी चुंगी तक के 3 किमी. लंबे मार्ग में सीसी कार्य अल्पसंख्यक निधि से विधायक जी के माध्यम से करवाया। 18. जल संस्थान द्वारा लाल कोठी के पास सीवर टैंक का निर्माण कार्य करवाया। 19. लाल कोठी के पास से शशि जी के घर तक आम रास्ते की टूटी दीवार का निर्माण व रेलिंग कार्य नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 20. सूरदास बाबा के घर के नीचे आम रास्ते की टूटी दीवार की मरम्मत नगर पालिका के माध्यम से करवायी। 21. रईस होटल से कृष्णापुर का मुख्य मार्ग टूटने से आम जनता के लिए जीआईसी आम रास्ते का निर्माण सिंचाई विभाग के माध्यम से करवाया। 22. दो सोलर लाईट जिलाधिकारी महोदय के माध्यम से लगवायी गयी। 23. शनि मंदिर में नगर पालिका के सहयोग से लाइट लगवायी। 24. सिंचाई विभाग से वार्ड के सभी नालों की मरम्मत व सफाई कार्य करवाया, जो आज भी चल रहा है। 25. कांठबास में वाल्मीकि धर्मशाला का निर्माण कार्य चल रहा है।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. गंगा कॉटेज में सार्वजनिक मार्ग का निर्माण प्रस्तावित है। 2. मल्ला कृष्णापुर से बिष्ट भवन तक सार्वजनिक मार्ग में सीसी व दीवार मरमत कार्य प्रस्तावित है। 3. बिष्ट भवन से गुफा महादेव मंदिर को जाने वाले मार्ग की टूटी दीवार का मरम्मत कार्य प्रस्तावित है। 4. सावित्री देवी जी के घर के नीचे आम रास्ते की दीवार की मरम्मत प्रस्तावित है। 5. लाल कोठी के पास शशि के घर से रमेश के घर तक के आम रास्ते का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 6. तल्ला कृष्णापुर में राकेश दा के घर से पंकज के घर तक आम रास्ते का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 7. तल्ला कृष्णापुर में रावत जी के घर के पीछे नाली निर्माण प्रस्तावित है। 8. दुर्गापुर में बने आवासों में निवेशित परिवारों के लिए बारात घर, मार्ग में सीसी व रेलिंग कार्य प्रस्तावित है। 9. बिष्ट भवन से सरस्वती विहार तक के ब्रेवरी मार्ग का मरम्मत कार्य प्रस्तावित है। 10. ब्रेवरी मार्ग में विश्राम स्थल का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 11. जीआइसी स्कूल के पास टूटी दीवार जिसको आपदा के तहत लोनिवि द्वारा बनाया जाना है जो आपदा की अगली बैठक में हो जाएगा, इस विषय में एडीएम महोदय से वार्ता हो चुकी है, प्रस्तावित है। 12. कांठबास में सीसी निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 13. वार्ड में लाईट पोल लगाने प्रस्तावित हैं। 14. मल्ला कृष्णपुर में लाल कोठी के पास व गोल घर के पास सीवर लाइन स्थापित करवानी है। 15. इमाम बाड़े में शिया मस्जिद में टीन शेड का निर्माण कार्य प्रस्तावित है।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है
अंक -10 : आज नैनीताल क्लब वार्ड नंबर-10 से सभासद श्रीमती सपना बिष्ट के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय : नाम : श्रीमती सपना बिष्ट पत्नी : श्री कुंदन बिष्ट शिक्षा : इंटरमीडिएट उत्तीर्ण, हिमाचल बोर्ड, हिमाचल प्रदेश।
लॉकडाउन में भी जनहित के विभिन्न कार्यों में भागीदारी करने वाली सपना बिष्ट का मानना है कि वे काम कराने में विश्वास रखती हैं, काम जनता गिनायेगी।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. स्प्रिंग फील्ड में सरला जोशी के घर से कत्यूरा जी के घर तक सीसी, दीवार व रेलिंग निर्माण करवाया। 2. निशांत स्कूल के पास नंदी मिश्रा जी व केवलानन्द के घर से सात नंबर को जाने वाला मार्ग सही करवाया। 3. विशाल टम्टा के घर से जाहिद के घर तक सीढ़ी, सीसी व रेलिंग निर्माण करवाया। 4. पदम् सिंह रावत जी के घर से सात नंबर को मिलने वाली रोड में सीसी व दीवार का विधायक जी के सहयोग से व लोनिवि के माध्यम से निर्माण चल रहा है। 5. वार्ड में नाले और नालियों का जीर्णोद्धार का कार्य कई जगह हो चुका है और कई जगह चल रहा है। 6. विलायत कॉटेज से नवीन साह जी के घर तक नाले पर सिंचाई विभाग के माध्यम से जाल लगवाए हैं। 7. रोजगार कार्यालय का जाल नवीन पंत जी के घर के पास नगर पालिका, नैनीताल के माध्यम से 02 लाख की लागत से जाल का निर्माण करवाया। 8. विधवा पेंशन व विभिन्न प्रकार से आर्थिक सहयोग, मुख्यमंत्री राहत कोष से असहायों को प्रदान करवायी गयी हैं।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. विधायक जी के माध्यम से 16 सोलर लाइट लगनी हैं। 2. 16 पोल लगने हैं जिसमें 5 पोल अलग से नगर पालिका द्वारा आवंटित हुए हैं। 3. स्वास्तिक भवन (नैनी विहार) से लेकर उमा जोशी जी के घर तक इंटर लॉकिंग टाइल्स, रेलिंग व जाल निर्माण प्रस्तावित है। 4. स्प्रिंग फील्ड में निर्मला अधिकारी के घर से यकीन के घर तक इंटर लॉकिंग टाइल्स, रेलिंग व जाल निर्माण प्रस्तावित है। 5. उस्मान ठेकेदार के घर से जहीर के घर तक फील्ड का निर्माण, रेलिंग व इंटर लॉकिंग टाइल्स का लगभग 5.50 लाख का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 6. यशपाल आर्या कैबिनेट मंत्री जी के माध्यम से अल्पसंख्यक आयोग से एतात के घर से लेकर जाहिद के घर तक सड़क में इंटर लॉकिंग का लगभग 3.50 लाख का कार्य प्रस्तावित है। 7. अल्पसंख्यक मंत्री जी के माध्यम से पोस्ट ऑफिस में ताज के घर से राज गेस्ट हाउस तक रास्ते में इंटर लॉकिंग टाइल्स लगनी है। 8. विधायक जी के माध्यम से होने वाले 5 प्रस्तावित कार्य: 9. आशा के घर से मधु बिष्ट के घर तक सड़क में इंटरलॉकिंग का कार्य विधायक जी के माध्यम से 2 लाख रूपये से होना है। 10. राधे के घर से विलायत कॉटेज तक सड़क चौड़ीकरण विधायक जी के माध्यम से 2 लाख की लागत से होना है। 11. ग्लेंमोर में पूर्व चेयरमैन के घर से डंगवाल जी के घर तक सड़क निर्माण कार्य विधायक जी के माध्यम से 2 लाख की लागत से होना है। 12. संदीप आर्या जी के घर से धूप कोठी तक सड़क चौड़ीकरण, इंटर लॉकिंग का कार्य विधायक जी के माध्यम से 2 लाख की लागत से होना है। 13. वार्ड को साफ -सुथरा व स्वच्छ बनाने को कई योजनाएं हैं।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है।
अंक -9 : आज अपर मॉल रोड वार्ड नंबर-9 से सभासद दीपक बर्गली के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : दीपक बर्गली पुत्र : स्व. डी. एस. बर्गली शिक्षा : मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा, राजकीय पॉलिटेक्निक नैनीताल। जनहित के विभिन्न कार्यों में भागीदारी करते हैं। विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. तल्लीताल कपूर लॉज में कैंडिल फैक्ट्री से चिड़ियाघर पैदल मार्ग तक 2,49,145 रुपये की लागत से नाली निर्माण करवाया। 2. चिड़ियाघर मार्ग मेघदूत होटल के पास कूड़ाघर का 76,047 रूपये की लागत से और तल्लीताल रिक्शा स्टैंड से पायल होटल बिरला मार्ग तक टाइल्स निर्माण का कार्य 90,0440 रुपये की लागत से करवाया। 3. मॉल रोड स्थित प्राइमरी स्कूल की क्षतिग्रस्त दीवार का निर्माण 2, 55, 845 रुपये की लागत से करवाया। 4. माउंट रोज कम्पाउंड में केडी दीवार एवं उत्पल पांडे के घर के पास क्षतिग्रस्त मार्ग का कार्य 2,07,964 रुपये की लागत से करवाया। 5. तल्लीताल कपूर लॉज में शेखर पाठक जी के आवास के पास नाली का पुनर्निर्माण 2,63,114 रूपये की लागत से करवाया। 6. मॉल रोड नर्सरी स्कूल के समीप दीवार निर्माण रुपए 58,973 की लागत से करवाया। 7. तल्लीताल जिला पंचायत से लक्ष्मी कुटीर जाने वाले मार्ग में खुल्बे जी के आवास के समीप सड़क मरम्मत व पुनर्निर्माण कार्य 5,63,964 रूपये की लागत से करवाया। 8. बेलवाल होटल से मंगल दास साह जी के घर तक मार्ग का पुनर्निर्माण कार्य करवाया। 9. पूरे वार्ड में पथ प्रकाश व्यवस्था ठीक करवायी। वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. भाभर हॉल में रास्ते का पुनर्निर्माण 2. पायल होटल से अजय लाल जी के घर तक खड़ंजा निर्माण। 3. मेविला कम्पाउंड में शिव सिंह रावत के घर तक रास्ते का निर्माण। 4. धर्मा पालीवाल जी के घर से जवाहर सिंह जी के घर तक रास्ते का निर्माण। भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है। -प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (दीपक बर्गली, सभासद, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित)
अंक -8 : आज अयारपाटा वार्ड नंबर-8 से सभासद मनोज साह जगाती के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं…
सभासद परिचय : नाम : मनोज साह जगाती पुत्र : स्व.एम. बी.एल. साह जगाती शिक्षा : स्नातक (बी. कॉम) डीएसबी कॉलेज, नैनीताल, सामाजिक कार्य में डिप्लोमा, योगा में डिप्लोमा, आपदा प्रबंधन में डिप्लोमा, ग्रामीण एवं शहरी प्रबंधन में डिप्लोमा, नेटवर्किंग में डिप्लोमा, ऑफिस मैनेजमेंट में डिप्लोमा, वर्तमान में मानव अधिकार में डिप्लोमा में अध्ययनरत। संस्थापक : ‘जय जननी-जय भारत संस्था के अंतर्गत मनोज साह जगाती हजारों पौधे लगा चुके हैं व हजारों कट्टे कूड़ा व शराब की बोतलें निकाल चुके हैं। साथ ही 25वीं बार रक्तदान कर चुके हैं, अनगिनत लोगों को हल्द्वानी-नैनीताल में रक्त दिलवा चुके हैं। कपड़ा बैंक, ऑनलाइन ब्लड बैंक, बुक बैंक चलाते हैं। लॉकडाउन के दिनों में ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों को उन्होंने लगातार 125 दिनों तक आयुर्वेदिक चाय पिलाकर सेवा की, जन समस्या निवारण हेतु अयारपाटा शिकायत ग्रुप व अयारपाटा सेवा दल बनाया, जिसके माध्यम से लॉक डाउन में शेरवुड और अयारपाटा में सस्ती सब्जी के लिये आढ़त तथा मेडिकल कैंप भी लगवाए। युवाओं को नशा मुक्त रखने के लिये अयारपाटा फुटबॉल क्लब व फास्ट अयारपाटा क्रिकेट क्लब के बैनर तले टीमें भी उतारते हैं। निर्धन व असहाय परिवारों को विधायक जी के माध्यम से आर्थिक सहयोग दिलवाते हैं। शहर में किसी को भी आवश्यकता होती है तो मदद पहुंचाते हैं। सम्मानित हुए : 1. वन मंत्री उत्तरखण्ड सरकार डॉ. हरक सिंह रावात द्वारा सम्मान मिल चुका है। 2. उत्तरखण्ड सम्मान भी मिल चुका है। 3. पूर्व सांसद एवं वर्तमान महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा भी सम्मान मिल चुका है। 4. वन विभाग द्वारा भी समानित किया गया है। 5. लेक सिटी द्वारा भी समानित किया जा चुका है।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं : 1. अरोमा होटल के पास दीवार का निर्माण करवाया। 2. पुरानी शराब भट्टी से लेकर अरोमा तक रेलिंग निर्माण कार्य करवाया। 3. पर्दा धारा का जीर्णोद्धार कार्य करवाया जा रहा है। 4. नैनी रिट्रीट होटल से शिव मंदिर तल रेलिंग निर्माण, सड़क व दीवार मरम्मत का कार्य, नालियों के ऊपर तक जाल का निर्माण कार्य सब विधायक जी के माध्यम से करवाया गया। 5. डलहौजी मार्ग में रेलिंग का कार्य विधायक जी के माध्यम से करवाया। 6. श्री पूरन ढैला जी के घर के पास नाले के ऊपर जाल का काम करवाया। 7. श्री पूरन ढैला जी के घर के नीचे बड़ा नाला (विमल कुंज में निकलता है ) जो पूर्ण रुप से टूट चुका था सिंचाई विभाग के सहयोग से फिर से बनवाया गया। 8. श्री मनोज कुमार (मित्तल जी) के घर के पास रेलिंग का कार्य करवाया। 9. श्री मनोज कुंवर के दुकान के पास रेलिंग का कार्य करवाया। 10. पूर्व सभासद जितेंद्र बिष्ट जी के घर के पास रेलिंग का कार्य करवाया गया। 11. लंघम गर्ल्स हॉस्टल से वाल्मीकि बस्ती तक रेलिंग का कार्य करवाया। 12. श्री गुसाईं जी के घर के पास दीवार का कार्य करवाया। 13. ओकवुड स्कूल के आगे सड़क का जीर्णोद्धार विधायक जी के माध्यम से करवाया। 14. शेरवुड से जंगल कैंप तक रोड की मरम्मत विधायक जी के माध्यम से करवाया। 15. पप्पी दा की चाय की दुकान के पास बड़े नाले के ऊपर रेलिंग का कार्य ये भी विधायक जी के माध्यम से करवाया। 16. डीआईजी निवास के पास रेलिंग का कार्य व रोड की मरम्मत का कार्य विधायक जी के माध्यम से करवाया। 17. किर्लानी कम्पाउंड में किये गये विभिन्न कार्य : किर्लानी कम्पाउंड में सड़क की दीवार का कार्य, श्री पांडे जी के घर के पास रेलिंग का कार्य, श्री दुलारी राम के घर के पास सीढ़ियों का जीर्णोद्धार करवाया, माउंटेन विस्ट होटल के बगल में श्री चंद्रा जी के घर के पास टाइल्स का काम करवाया, किर्लानी कम्पाउंड में ही माउंटेन विस्ट की बगल में नई सीढ़ियों का निर्माण करवाया, श्री विजय (मास्टर साहब) के घर से शिव मंदिर तक सड़क का जीर्णोद्धार करवाया तथा रेलिंग का निर्माण दोनों अलग अलग बजट में करवाया, किर्लानी कम्पाउंड में ही श्री दानी जी के घर के पास टूटी हुई दीवार का निर्माण करवाया, श्री दानी जी के घर से श्री विजय (मास्टर साहब ) के घर तक रेलिंग का कार्य करवाया, श्री विजय (मास्टर साहब) के घर से व बक्स हॉस्टल के बीच में सीढ़ी निर्माण कार्य करवाया, श्री शिव शंकर जी के घर के बगल में सीढ़ियों का जीर्णोद्धार करवाया। 18. आजादी के बाद पहली बार सबसे पुराना मार्ग आठ मोड़ में दीवार का कार्य, रेलिंग और पूरी सड़क का जीर्णोद्धार करवाया ईंटों का बढ़िया खड़ंजा बनवाया। 19. आजादी के बाद पहली बार विमल कुंज से बारह पत्थर पैदल मार्ग की झाड़ियों का समय -समय पर कटान व मार्ग सफाई करवाना। 20. कैपिटोल सिनेमा के पीछे स्टाफ क्वार्टर में टाइल्स का कार्य व सीढ़ियों का कार्य तथा नालियों का निर्माण दोनों अलग अलग बजट से करवाये। 21. नगर पालिका के पीछे टाइल्स व चेन लगवाने का कार्य किया। 22. भोटिया मार्केट के आगे नाले का जीर्णोद्धार व जाल का निर्माण करवाया। 23. चाट मार्केट में नाले का जीर्णोद्धार व जाल निर्माण करवाया। 24. नगर पालिका के पास व फव्वारे के मध्य खाद बनाने हेतु ट्रंच बनवाये गये। 25. डीएसए के पीछे बोरा जी की दुकान तक का बंद रास्ता खुलवाया। 26. कोतवाली के आगे से बोरा जी की दुकान तक एडीबी के माध्यम से रेलिंग का कार्य करवाया। 27. रिक्शा स्टैंड से मंदिर तक चोरी की गयी बेंचेस को एडीबी के माध्यम से पुनः बेंचेस लगवायी गयी। 28. डीएसए पार्किंग में लगने वाले टॉवर का विरोध किया, क्योंकि उससे खेल प्रेमियों को नुकसान होता। 29. रिक्शा स्टैंड से लेकर मंदिर तक जो टाइल्स टूटी थी उनका एडीबी के माध्यम से पुनर्निर्माण करवाया। 30. पूरे फील्ड के चारों तरफ जो पुरानी लाइट थी उनको एडीबी के माध्यम से सही करवाया और जो नई लाइट थी उनको नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 31. जनहित याचिका के बाद पूरे शहर में स्ट्रीट लाइट को सुचारु किया गया। 32. क्षेत्र में डोर टू डोर कूड़ा निस्तारण व स्वयं मेरे द्वारा निरिक्षण। 33. अनावश्यक कूड़ेदानों को हटाया गया, जिससे बंदर व आवारा पशुओं का आतंक कम हुआ। 34. गर्नी हाउस के पास क्रिया घर का जीर्णोद्धार करवाया। 35. डोर टू डोर गैस की व्यवस्था की गयी। 36. होली एंजेल से लेकर अरविन्द आश्रम तक टूटी रेलिंग का जीर्णोद्धार, दीवारों का जीर्णोद्धार दोनों ही विधायक जी के माध्यम से करवाये गये। 37. अयार जंगल कैंप से लेकर टिफिन टॉप तक रास्ते में राहगीरों हेतु बेंचेस लगवायी तथा कूड़ेदान लगवाये। 38. पुरानी शराब भट्टी से लेकर अरोमा होटल तक नशा मुक्त सड़क बनायीं गयी। 39. चोरी की वारदातों को रोकने के लिये बिना सत्यापन अनजान व्यक्ति के प्रवेश पर प्रतिबंध। 40. आजादी के बाद पहली बार बक्स हॉस्टल में स्ट्रीट लाइट तथा तारा जौरज आउट हाउस के पास स्ट्रीट लाइट लगवायी। 41. मस्जिद से राजभवन तक कई जगह लोनिवि के माध्यम से दीवारों का कार्य ध् सड़क की मरमत का कार्य करवाया। 42. कुंदन बिष्ट जी के घर के पास सीढ़ी और रेलिंग निर्माण कार्य करवाया।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं : 1. अयारपाटा में ओपन जिम का निर्माण कराना। 2. स्टाफ क्वार्टर तक दो जगह सड़क का निर्माण व रेलिंग का निर्माण करवाना। 3. अयारपाटा में जगह जगह बेंच लगवाना। 4. अयारपाटा में विभिन्न मार्गो पर बारिश व धूप से बचने हेतु शेड का निर्माण। 5. अयारपाटा में सभी मार्गो पर रेलिंग व मार्गो का जीर्णोद्धार। 6. मोदी भवन के पास श्री नवल जी के घर तक रेलिंग व सड़क का निर्माण करवाना। 7. लंघम हॉस्टल के पास बस्ती में श्री आनंद जी के घर से गुसाईं राम जी के घर तक सड़क निर्माण। 8. अयार जंगल कैंप से 16 नंबर कोठी तक स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था। 9. नगर पालिका के पीछे नई सीवर लाइन बिछ्वानी है। 10. क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट के नये पोल लगवाने है। 11. डीआईजी रोड से सनवाल जी के घर तक सड़क का निर्माण व पुलिया में रेलिंग का निर्माण। 12. अयारपाटा की समस्त अल्पसंख्यक बस्ती में स्ट्रीट लाइट लगवाना। 13. अयार जंगल कैंप से श्री मनोज कुंवर जी के घर तक रेलिंग का कार्य। 14. श्री मनोज कुंवर जी के घर से श्री हीरा सिंह बिष्ट जी के घर तक रेलिंग का कार्य। 15. अयारपाटा में तीन चिन्हित स्थानों पर प्याऊ लगने हैं जिनका टेंडर हो चुका है। 16. काशीपुर हाउस से दीपू बोरा जी के घर तक रेलिंग का कार्य। 17. देवी एकेडमी स्कूल की बगल में टाइल्स निर्माण कार्य। 18. श्री कुंदन सिंह बिष्ट जी के घर के आगे रेलिंग का निर्माण।
भविष्य की योजना : 1. आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है जिसके अंतर्गत : 2. नैनीताल में सेना की भर्ती हेतु युवाओं के लिए निःशुल्क आर्मी ट्रैनिंग अकेडमी खोलना। 3. नैनीताल में अहसाय बुजुर्गों के लिए वृद्धा आश्रम बनवाना। 4. गरीब लड़कियों की शादी हेतु ट्रस्ट बनाना। 5. नैनीताल और उत्तराखंड के जंगलों को स्वच्छ व हरा-भरा करना। 6. नैनीताल के जीबी पंत (रैमजे) चिकित्सालय को एम्स जैसा बनवाना।
-प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (मनोज साह जगाती, सभासद, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित)
अंक -7 : आज सूखाताल वार्ड नंबर-7 से श्रीमती गजाला कमाल के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : श्रीमती गजाला कमाल पति : श्री कमाल खान शिक्षा : स्नातक (बीए, बीएड, बी लिब, बीए-उर्दू)
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. सूखाताल ऐशडेल स्कूल को पूरी तरह रेनोवेट करवाया गया। यहां कक्षाएं बहुत खस्ता हालत में थीं। यहां लाइट का काम, ब्लैक बोर्ड, दरवाजों की टूट-फूट, छत की चादर, स्कूल में रंग-पुताई का काम भी करवाया। 2. सूखाताल में होनी वाली रामलीला के प्रांगण का कार्य करवाया, जिसमें लॉकिंग टाइल्स बिछाये गये। 3. सूखाताल के शौचालय में जल की व्यवस्था करवायी गयी। 4. सूखाताल में वाल्मीकि कॉलोनी में 3 जगह लाइट की व्यवस्था की गयी है। 5. रॉयल होटल कम्पाउंड के गेट से पूरी कॉलोनी में लॉकिंग टाइल्स का कार्य करवाया गया। 6. रॉयल होटल कंपाउंड के छोटे नालों में लोहे की जालियां लगायी गयी। 7. रॉयल होटल कम्पाउंड के नाले के किनारों पर ग्रिल लगावायी गयी। 8. रॉयल होटल के अंदर जाने वाली सड़क पर भी ग्रिल लगवाने का कार्य किया गया। 9. रॉयल होटल कम्पाउंड में दो पत्थर की दीवारें बनवायी गयी। 10. पौनी सराय की सीढ़ियों से लेकर मैट्रोपोल के अंदर की सड़कों का इस्टीमेट भी तैयार है, जल्द ही लगवा दिया जायेगा। 11. टीआरसी से धामपुर बैंड तक पथ प्रकाश की व्यवस्था करवायी गयी। 12. कूड़ा निस्तारण के लिये अवेयरनेस प्रोग्राम चलाने के लिऐ हिलदारी अभियान वार्ड नंबर 7 सूखाताल में सबसे पहले लायी गयी। 13. हमारे वार्ड में डोर टू डोर का कार्य क्रिर्यान्वित किया गया जो आज 99ः घरों में चल रहा है। 14. वार्ड में बैंच की व्यवस्था भी की गयी है, जो कि टूरिस्ट और लोकल लोगों के बैठने के काम आये, इसलिए रॉयल होटल कंपाउंड गेट के सामने लगवायी गयी है। 15. रॉयल होटल कंपाउंड में एक मोहित भाई के घर से फैसल भाई के घर तक सीवर और रोड का कार्य करवाया। 16. कोरोना काल में वार्ड के लोगों के साथ हर समय खड़े रह कर काम किया, राशन से लेकर दवाइयां पहुंचाने का कार्य पूरी जिम्मेदारी से किया।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. सूखाताल चौराहे से बस्ती तक का निर्माण कार्य जिस का टेंडर हो चुका है, शीघ्र ही काम शुरू हो जाएगा। 2. सूखाताल नाले के किनारों के लिए ग्रिल बन चुकी हैं, जो जल्द ही लग जायेगी, क्योंकि इस नाले में अक्सर गाये गिर जाया करती है, बेजुबान जानवरो की सुरक्षा को लेकर इस कार्य को किया गया है। 3. सूखाताल में ही वाल्मीकि कॉलोनी में एक जगह पोल लगने हैं, पोल आ गये है जो जल्द ही लगा दिया जाऐगा। 4. बंगाली कॉलोनी में भी पोल लगने है वो भी शीघ्र लगा दिये जाएंगे। 5. बंजारा बस्ती में सड़क निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 6. रॉयल होटल कम्पाउंड की कुछ छोटे कार्य प्रस्तावित हैं। 7. रॉयल होटल कंपाउंड में जिस-जिस स्थान पर पथ प्रकाश की आवश्यकता है उन स्थानों पर बहुत जल्दी ही पोल लगा दिये जाएंगे।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है, मेरा मुख्य उद्देश्य स्वच्छता है। मैं चाहती हूं, मेरा वार्ड ‘डिजिटल वार्ड’ के रुप में विकसित हो। -प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (श्रीमती गजाला कमाल, सभासद, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित)
अंक -6 : आज नारायण नगर वार्ड नंबर 6 से सभासद भगवत सिंह रावत के कार्यों व भावी योजनाओं से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : भगवत सिंह रावत पिता : स्व. श्री उदय सिंह रावत शिक्षा : ग्यारहवीं कक्षा उत्तीर्ण
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. देव पाटा (पॉलिटेक्निक) से लेकर नारायण नगर तक सीवर लाइन निर्माण करवाया। 2. पॉलिटेक्निक से लेकर वाल्मीकि बस्ती तक ग्रिल, सीसी, व पैराफिट निर्माण करवाया। 3. वाल्मीकि बस्ती में गेट व बारात घर का निर्माण करवाया। 4. पिटरिया में मुल्ला जी के घर से लेकर सादिक भाई के घर तक सीसी निर्माण करवाया। 5. पिटरिया से नारायण नगर तक दीवार-पैराफिट व सीसी मार्ग का निर्माण करवाया। 6. नारायण नगर में दो बाथरूम, दर्शन घर में सीसी निर्माण करवाया। 7. नारायण नगर में ही सुदीप के घर तक सीसी दीवार निर्माण करवाया। 8. नारायण नगर में ही मोहन दा के घर के पास से रामलीला मैदान तक दीवार व रास्ता निर्माण करवाया। 9. नारायण नगर में एक बारात घर का निर्माण भी करवाया। 10. देश आजाद होने के बाद पहली बार पुतली बाई कब्रिस्तान (नारायण नगर) में सीसी, सोलर लाइट व ग्रिल निर्माण करवाकर सड़क पहुंचाई गयी। 11. नारायण नगर में क्रिया घर निर्माण करवाया। 12. नारायण नगर में ही घिंगारी के गधेरे से श्रोत का पानी लाने को पाइप लाइन की फिटिंग करवायी। 13. नारायण नगर में ही बारात घर से लेकर पानी की टांकी तक दीवार व सीसी निर्माण करवाया। 14. नारायण नगर में मोबाइल टॉवर लगवाया। 15. नारायण नगर की ठप वि।ुत आपूर्ति को सुचारु किया गया। 16. नारायण नगर में पार्किंग व्यवस्था करवायी गयी। 17. नारायण नगर मंदिर का सौंदर्यीकरण कार्य करवाया। 18. एटीआई से लेकर पंत जी की दुकान तक सीसी निर्माण तथा ग्रिल निर्माण करवाया। 19. शेरवानी मार्ग के नाले में ग्रिल का निर्माण कार्य करवाया। 20. वाल्मीकि बस्ती से बारह पत्थर मंदिर तक सड़क में टाइल्स, ग्रिल व दीवार निर्माण करवाया। 21. बारह पत्थर मुस्लिम कब्रिस्तान में उर्स के लिये एक हॉल का निर्माण करवाया। 22. मुस्लिम कब्रिस्तान में ही सीसी मार्ग निर्माण करवाया। 23. क्रिश्चियन चर्च तक सीसी मार्ग निर्माण करवाया। 24. घोड़ा स्टैंड बारह पत्थर में पानी लाइन लगवायी… 25. घोड़ा स्टैंड पर लोगों के बैठने के लिये 08-10 बेंच लगवाई तथा सीसी निर्माण करवाया। 26. नरेंद्र सिंह जी के घर से रूबी जी के घर तक सीसी निर्माण करवाया। 27. क्षेत्र में सोलर लाइट लगवायीं। 28. बुजुर्गो को पेंशन व जरूरतमंदों को आर्थिक सहायता प्रदान की गयी।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. नारायण नगर सामुदायिक भवन से पानी के श्रोत तक सीसी सड़क निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 2. रामलीला मैदान में छत प्रस्तावित है। 3. सामुदायिक भवन से देवी माँ मंदिर तक दीवार, सीसी, रेलिंग निर्माण प्रस्तावित। 4. आबिद के घर के पास सीसी निर्माण। 5. गैरीखेत रोड से नारायण नगर तक नाली निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 6. श्री रमेश पांडे जी के घर से पॉलिटेक्निक तक रेलिंग निर्माण प्रस्तावित है। 7. नारायण नगर में नाली मरम्मत व ग्रिल निर्माण कार्य प्रस्तावित है।
भविष्य की योजना: यदि जनता इसी तरह प्यार दे तो आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है।
-प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (भगवत सिंह रावत, सभासद, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित)
अंक -5 : आज हरिनगर वार्ड नंबर-5 से सभासद पुष्कर बोरा के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:-
सभासद परिचय : नाम : पुष्कर बोरा पुत्र : श्री आनंद सिंह बोरा शिक्षा : आम्रपाली कॉलेज, हल्द्वानी से होटल मैनेजमेंट में त्रिवर्षीय डिप्लोमा।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. टीचर्स कॉटेज में रास्ता व सीढ़ी निर्माण करवाया। 2. ब्रेसाइड कंपाउंड में मुन्नी देवी जी के घर से लेकर वीरेंद्र जोशी जी के घर तक एक रास्ता और दीवार निर्माण करवाया। 3. सुरेश जोशी जी के घर के आगे बच्चों के खेलने के लिये पार्क बनवाया। 4. भानू प्रताप आर्या के घर से लेकर देवकी मनराल जी के घर तक रास्ता बनवाया। 5. ओक लॉज में गोपाल आर्या जी के घर से लेकर रंजीत के घर तक क्षतिग्रस्त रास्ते की मरम्मत करके दीवार समेत रास्ता बनवा रहे हैं। 6. बहुत कोशिश कर करके सैनिक स्कूल से लेकर बिरला चुंगी तक लोनिवि द्वारा रेलिंग, दीवार निर्माण व सड़कों के गड्ढे भरवा रहा हूं। 7. देवली फील्ड में नई लाइट लगवायी। 8. पुराना राजभवन में पानी की बड़ी समस्या थी, जिसके लिये जल संस्थान से कई बार अनुरोध करके बिरला चुंगी वाली लाइन से हटाकर टांकी बैंड से जलापूर्ति करवायी जिससे लोगों को राहत मिली। 9. टांकी में दूरदर्शन से लेकर त्रिलोचन टांक जी के घर तक का रास्ता बनवाया।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं : 1. देवली फील्ड में रास्ता व दीवार निर्माण स्वीकृत करवाया, शीघ्र ही काम शुरू हो जाएगा। 2. हरीश बिष्ट जी के घर से लेकर राजेंद्र बिष्ट जी के घर तक की सीढ़ियों का टेंडर हो चुका है। शीघ्र काम शुरू होने वाला है। 3. त्रिलोक भट्ट के घर से लेकर सुमन बिष्ट के घर तक का रास्ता भी जल्दी होना है, जिसकी सारी प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। 4. कंचन साह जी के घर के पास सस्ते गल्ले की दुकान से लेकर रंजीत थापा जी के घर तक के रास्ते को सही करवाना है.. 5. विद्युत के पांच पोल स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से ब्रेसाइड में एक, देवली फील्ड में एक, आल्मा कॉटेज में चंदन बिष्ट जी के घर के पास एक, महेश भट्ट जी के घर के पास एक और एक पुराना राजभवन में एक पोल लगना है। 6. ऑक लॉज में दो-तीन दिन में ही नई लाइट लगवानी है। 7. हनुमान मंदिर के पास राजू बिष्ट के घर से लेकर दीवान बिष्ट जी के घर तक का सीढ़ी वाला रास्ता प्रस्तावित है। 8. महेश भट्ट जी के घर के पास रेलिंग का प्रस्ताव दे रखा है.. 9. निहारिका आर्या के घर से लेकर मोंटी के घर तक का रास्ता बनना है। 10. टांकी बैंड से आगे डामर की सड़क धंस रही है, जिसके लिये लोनिवि को बता रखा है, जल्द ही उस पर कार्य होगा।
भविष्य की योजना : आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है।
श्री पुष्कर बोरा, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित)
अंक -4 : आज हरिनगर वार्ड नंबर-4 से सभासद रेखा आर्या के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय : नाम : श्रीमती रेखा आर्या पति : श्री सुनील कुमार शिक्षा : स्नातक (बी.ए. राजनीति शास्त्र), डीएसबी परिसर, नैनीताल। महिला मंडल समूह से भी जुड़ी हुई हैं।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं:
1. नेशनल होटल के नीचे नाले का निर्माण करवाया। 2. भगत जी (धोबीघाट) के घर पास की दीवार का निर्माण करवाया। 3. धोबीघाट में श्याम जी के घर के पास व अन्य लोगों के घर के पास सीसी निर्माण करवाया। 4. धोबीघाट में ही शौचालय का निर्माण करवाया। 5. बूचड़खाने में गुड्डू के घर के पास सीढ़ी व सीसी निर्माण करवाया। 6. बूचड़खाने में मस्जिद के पीछे नौशाद के घर से नंद लाल के घर की ओर नाली निर्माण करवाया। 7. बूचड़खाने में ही इकराम के घर के पास दीवार का निर्माण करवाया। 8. वैष्णों देवी मंदिर नया बाजार के पास टाइल्स निर्माण कार्य करवाया। 9. कन्नू लाल जी के घर के पास सीढ़ी व सीसी निर्माण करवाया। 10. हरिनगर में सीसी मार्ग निर्माण करवाया। 11. हरिनगर में श्रमजीवी संस्था के द्वितीय तल का निर्माण करवाया। 12. नाला नंबर 54 की मरम्मत सिंचाई विभाग के द्वारा करवायी। 13. नया बस अड्डा (रोडवेज) तल्लीताल के नीचे नाले का मरम्मत कार्य भी और सफाई कार्य भी चल रहा है। 14. बूचड़खाने में तीन, हरिनगर में चार, धोबीघाट में दो व लकड़ी टाल में एक नई लाइटें लगवाई।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. फौजी भैया के घर के पास नाली पर जाल लगवाना है। 2. हरिनगर में दिनेश कटियार के घर के पास वाले नाले पर रेलिंग लगवानी है। 3. मिल हाउस में क्षतिग्रस्त शौचालय का मरम्मत कार्य। 4. हरिनगर में कपूर भवन में नाले के पास जाल लगवाना है। 5. धोबीघाट में क्षतिग्रस्त डिग्गियों का मरम्मत कार्य कराना है। 6. तल्लीताल रामलीला मैदान हरिनगर मोटर गैराज के पास लोगों के घर के आगे नालियों का निर्माण कराना है। 7. श्रमजीवी संस्था के आगे सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करवाना है। 8. प्रकाश व्यवस्था के लिये छः नये पोल लगने हैं, जिसमें बूचड़खाने में दो, 9. लकड़ी टाल में दो, नया बाजार में एक व ममता जोशी के घर के पास रोड में एक पोल लगना है। 10. शहीद मेजर राजेश अधिकारी इंटर कॉलेज की दीवार पिछले वर्ष गिर गयी थी, जिसका दैवीय आपदा के अंतर्गत निर्माण करवाना है।
भविष्य की योजना: बलियानाला का सही प्रकार से निर्माण हो जाये, यही मेरा उद्देश्य है, यही मेरा सपना है।
-प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (श्रीमती रेखा आर्या, सभासद नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित।)
अंक -3 : आज पेश हैं राजभवन वार्ड नंबर-3 की सभासद महोदया निर्मला चंद्रा के कार्य एवं भावी योजनाएं:
सभासद परिचय : नाम : श्रीमती निर्मला चंद्रा पत्नी : श्री राजेश चंद्रा शिक्षा : परास्नातक (एम.ए.) समाजशास्त्र, डीएसबी परिसर, नैनीताल। पिछले 15 वर्षों से आशा कार्यकत्री हैं।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं:
1. तल्लीताल रॉक हाउस के पास के नाले पर जाल लगवाकर एक सीढ़ीनुमा रास्ता बनवाया, जिससे करीब 08-10 परिवार लाभान्वित हुए। 2. सेंट जोसेफ के पास जहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के घर हैं, वहां नाली बनवायी, नाला ठीक करवाया और जाल लगवाया। 3. पुराने जिला पंचायत के पास रास्ता ठीक करवाया। 4. अभी कुछ दिन पहले सेंट मेरीज कॉलेज के गेट के सामने व पूरन पार्क में प्रकाश व्यवस्था के लिये नये कनेक्शन करवाये।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं:
1. वार्ड में और प्रकाश व्यवस्था करवानी है, क्योंकि जंगल का क्षेत्र है। जानवरों का खतरा बना रहता है, इसलिये अभी और विद्युत पोल की मांग की है। 2. अभी वार्ड में जहां-जहां सोलर लाइट लग सकती हैं, वहां सोलर लाइट लगवानी प्रस्तावित हैं। 3. टिफिन टॉप वाले रास्ते में पानी का नल, वॉश रूम, जगह-जगह लाइटें और बेंच की व्यवस्था करवानी है, जिससे स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों को भी राहत मिल सके। 4. इसके अलावा अभी बहुत काम प्रस्तावित हैं, जो समय-समय पर करते रहेंगे।
भविष्य की योजना: भविष्य में महिलाओं के उत्थान एवं महिला सशक्तिकरण के लिये के लिये और अधिक प्रयास व कार्य करने हैं।
-प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (श्रीमती निर्मला चंद्रा, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित।)
अंक -2 : आज पेश हैं शेर का डांडा वार्ड नंबर-2 के सभासद सुरेश चंद्र के कार्य एवं भावी योजनाएं:
सभासद परिचय : नाम – सुरेश चंद्र पुत्र – स्व. डीआर आर्या शिक्षा – स्नातक (बीए), डीएसबी परिसर, नैनीताल।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं :
1. स्टोनले कम्पाउंड में लगभग 100 मीटर लम्बी सड़क टाइल्स वाली बनवाई गयी। 2. स्टोनले में ही अमर उजाला के डा. तिवारी जी के घर से लेकर ऊपर टॉप तक सीढियाँ बनवायीं। 3. स्टोनले में ही एक कूड़ा घर दूसरी जगह स्थानांतरित करके उसकी जगह वहां विश्राम गृह बनवाया गया। 4. स्टोनले में ही अभी दो कार्य चल रहे हैं। सड़क पर कोई कूड़ा न फेंके, इस हेतु जालियां लग रही हैं। साथ ही प्रतिमा राठौर के घर से रेलिंग वाली सीढियाँ बन रही हैं। 5. मंगावली में भगवत रावत जी के घर के पास लगभग 100-150 मीटर लम्बी रेलिंग लगवाई। 6. गोपाल सिंह नेगी जी के आवास के आगे दीवार का निर्माण कार्य करवाया। 7. नगरपालिका कर्मचारी सुरेश कुमार जी के घर के आगे क्षतिग्रस्त दीवार का निर्माण कार्य चल रहा है। 8. मंगवाली में ही हमने टाइल्स वाली सड़क बनवायी। 9. मंगावली में मंदिर में टाईल्स व रेलिंग लगवाईं। 10. मंगवाली में मंदिर जाने वाले रास्ते का निर्माण कार्य करवाया। 11. काली मंदिर में भी काम करवाया। 12. रतन कॉटेज में ही एक लगभग 150-200 मीटर लम्बा खड़ंजा बन रहा है। 13. रतन कॉटेज में ही टंकी के ऊपर से किशन राम जी के आवास के पास तक रेलिंग व टाइल्स रोड निर्माण कार्य व गोविन्द जी के आवास के पीछे क्षतिग्रस्त दीवार का निर्माण कार्य करवाया। 14. राजमहल क्षेत्र में कार्य करवाया, टाइल्स वाली रोड बनवा दी गयी है। वहां लगभग 70 प्रतिशत रास्ते सही करवा दिये गये हैं। 15. मेरे वार्ड में प्रकाश व्यवस्था और सफाई व्यवस्था बिल्कुल सही है। यदि कहीं से कोई शिकायत आती है तो हम उसे तुरंत निस्तारण करने की कोशिश करते हैं।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं:
1. राजपुरा क्षेत्र में 9 लाख रुपये का रेलिंग का कार्य प्रस्तावित है। 2. दो-तीन टूट गयी दीवारें बननी हैं। 3. धारे के पास जीर्णोद्धार हो रहा है, उसमें रेलिंग और रास्ता बनेगा। 4. बिड़ला चुंगी में छूटे कार्य भी प्रस्तावित हैं। 5. इसके अलावा अभी बहुत काम प्रस्तावित हैं, जो समय-समय पर करते रहेंगे।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है
-प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (सुरेश चंद्र, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित। )
अंक : 1 : वार्ड-1 के सभासद पर ‘आज़ाद के तीर’
पहली कड़ी में हम नगर के स्टाफ हाउस वार्ड नंबर-1 के सभासद सागर के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं…
सभासद परिचय:- नाम :- सागर आर्या पिता :- श्री नंद लाल शिक्षा :- स्नातक (बी.ए. राजनीति शास्त्र), डीएसबी कॉलेज, पूर्व सचिव, छात्र संघ नैनीताल।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं:-
पॉपुलर कम्पाउंड की लगभग 15-20 फीट लम्बी दीवार बनवाई गयी।
पॉपुलर कम्पाउंड में ही एक पानी के नल के पास पुल बनवाया गया।
पॉपुलर कम्पाउंड में ही एक बड़ा लोहे का पुल व रेलिंग निर्माण करवाया गया।
चार्टन लॉज कम्पाउंड में रेलिंग निर्माण व दो जगह रास्ते सही करवाए हैं।
मेरे वार्ड में प्रकाश व्यवस्था बिल्कुल ठीक है, हनुमान मंदिर के पास बल्ब नहीं था, वहां मैंने एक बल्ब लगवाया था। अब प्रकाश व्यवस्था पूरी तरह सही है।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं:-
चार्टन लॉज में स्विफ्ट की कोठी से लेकर ऊपर तक का रास्ता ठीक करवाना है।
हनुमान मंदिर से लेकर तरुण कुमार मोंटी के घर तक का रास्ता ठीक करवाना है।
ट्रॉली के दूसरे पोल से रास्ता खराब है वो सही करवाना है।
आशु उपाध्याय के घर के पास का रास्ता सही करवाना है।
पार्वती देवी जी के घर के पास रास्ते का काम है।
रवि भाई के घर के पास दीवार बनानी है।
रोहित भाई की दुकान के पास रास्ता सही करवाना है।
हनुमान मंदिर के पास सीढियाँ हैं, वो दोबारा शांति देवी जी के घर से नाहिद जी के घर तक सही करवानी हैं, व रेलिंग निर्माण करवाना है।
भविष्य की योजना:- आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है। -प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल।
अंक 159 : अभिभावक वहां लुट रहे यहाँ इन स्कूलों को नहीं कर रहे मामूली सहयोग भी..
अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों को नहीं मिल रहा सहयोग,
मामूली फीस होने के बावजूद भी अभिभावक नहीं दे रहे सहयोग
बिजली -पानी के बिलो ने प्रबंधन की तोड़ी कमर, स्कूल स्टाफ़ की नहीं रोकी सेलरी
साहिबान,
आज हम जिस मुद्दे की बात करने वाले हैं उसका नाम है विद्यालय,
ना, ना ये वो वाले विद्यालय नहीं, जिनमें शिक्षा से ज़्यादा स्टेशनरी का सामान मिलता है जो आजकल भी अभिभावकों को जमकर लूट रहे हैं और अभिभावक भी चुपचाप एक जेब खाली होने पर दूसरी जेब आगे कर दे रहे हैं,
यहां तक कि कुछ अभिभावक लोन लेकर बच्चों की भारी भरकम ट्यूशन फीस चुका रहे हैं,
हम आज ऐसे अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों की बात कर रहे हैं, जिनमें फीस नाम मात्र की होती है, ये वो विद्यालय होते हैं जब सारे स्कूल हम जैसे मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के लिये मोटी फीस के अभाव में अपने दरवाज़े बंद कर लेते हैं तब ये स्कूल हमारे लिये ऑक्सफ़ोर्ड से कम नहीं होते, वहाँ की सादगी, वहाँ का अपनापन, हर चीज़ में अलग जादू होता है,
आज़ादी के बाद से अब तक न जाने कितनी अज़ीम हस्तियां इन विद्यालयों से पढ़कर निकलीं और देश -विदेश में नाम कमाया, इन विद्यालयों ने आज तक हर बच्चे को शिक्षा देकर समाज में इज़्ज़त से जीना सिखाया है, लेकिन बड़े अफ़सोस की बात ये है कि
आज संकट के इस दौर में हम इन विद्यालयों की तरफ़ देख भी नहीं रहे हैं, जिन विद्यालयों ने हमें हँसना सिखाया, आज हम उसके बुरे दौर में उसका साथ नहीं दे रहे हैं, हम लूट – खसोट करने वालों को इज़्ज़त की नज़र से देखते हैं लेकिन कभी हमने इन विद्यालयों के उन अध्यापकों, कर्मचारियों के बारे में नहीं सोचा जिन्होंने हमें सिर्फ़ शिक्षा दी, हमसे बिज़नेस नहीं किया,
लॉकडाउन की इस विपत्ति वाली घड़ी में क्या हमारा फ़र्ज़ नहीं बनता कि मात्र 100 रूपये मासिक आर्थिक सहयोग राशि हम बिन मांगे विद्यालय में दे आये,
सबसे बुरे दौर से गुज़र रहे अशासकीय सहायता प्राप्त इन विद्यालयों का पानी व बिजली का बिल भी इतना आया है, जिसे चुकाने में आधा स्कूल ही गिरवी रखना पड़ जाये, वक़्त की दोहरी मार झेल रहे इन विद्यालयों को इस वक़्त हमारी ज़रूरत है, वक़्त रहते इन विद्यालयों की सुध लेने की दरकार है,
वरना वक़्त निकल गया तो फिर हमारे बच्चों को कौन शिक्षा के सही मायने सिखाएगा?
आख़िर में,
सभी अभिभावकों से हमारा अनुरोध है कि जिसके बच्चे इन अशासकीय सहायता प्राप्त (चेतराम साह ठुलघरिया इंटर कॉलेज, भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय, राष्ट्रीय शहीद सैनिक विद्यालय विद्यापीठ, सरस्वती शिशु मंदिर, बालिका विद्या मंदिर, नगर पालिका इंटर कॉलेज (एशडेल ) जैसे अनेकों विद्यालय में पढ़ रहे हों, उनमें बिन बुलाये जाये और अपने जागरूक होने का फ़र्ज़ अदा करें, जिससे हमारे आत्मसम्मान को बनाये रखने वाले विद्यालय का आत्मसम्मान भी बना रहे…
न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर
अंक 158 : नैनीताल का सिर्फ़ इमारत वाला अस्पताल, यहाँ तो बाड़ ही खा रही उजाड़…
–यही हाल रहा तो हो जाएगा नाम ‘खंडहर वाला अस्पताल’
-कौन है और कौन होगा ज़िम्मेदार ? महापुरुषों के नाम का भी नहीं हो रहा सम्मान !
साहिबान,
आज हम जिस ऐतिहासिक इमारत का ज़िक्र करने वाले हैं, उसके बारे में बात करने से पहले उस अज़ीम हस्ती के बारे में जानना बेहद ज़रुरी है जिसकी शान में ये आलीशान इमारत नज़र की गयी…
वो थे कुमाऊं किंग कहे जाने वाले 1816 में जन्मे सर हेनरी रैमजे,
कुमाऊँ में बतौर कमिश्नर सर्वप्रथम एडवर्ड गार्डनर तत्पश्चात जी. डब्लू. ट्रेल, सी. टी. लूसिंग्टन, जे. एच. बैटन, हेनरी रैमजे व अंत में पर्सी विंडहम क्रमशः रहे. परन्तु उस दौर के सभी प्रशासकों में सर रैमजे सर्वाधिक प्रतिभाशाली और लोकप्रिय शासक रहे. उन्होंने कुमाऊँ में लगभग सैंतालीस (47) साल तक विभिन्न पदों पर रहते हुए अपने सम्पूर्ण जीवन के सतहत्तर (77) सालों में से पचपन साल (55) कुमाऊं में ही व्यतीत किये. उन्होंने यहाँ विभिन्न पदों यथा कनिष्ठ सहायक कमिश्नर (1840-1850,) वरिष्ठ सहायक कमिश्नर (1851-1855,) डिप्टी कमिश्नर (1855-1856) व कमिश्नर (1856-1884) के पद पर रहते हुए कार्य किया,
कुमाऊँ कमिश्नर के रूप में उन्होंने अठाईस बेमिसाल वर्ष व्यतीत किये.
सरकारी सेवानिवृत्ति के पश्चात भी लगभग आठ साल तक सर रैमजे कुमाऊँ में ही रहे. सर हैनरी रैमजे के कुमाऊँ कमिश्नर रहते हुए उन्होंने इस क्षेत्र में अनेक सुधार व विकास के कार्य किये गये..
सर रैमजे के कार्यों व उनके योगदान व नाम को अमर रखने के लिए यहां के लोगों ने सम्मान पूर्वक अनेक विद्यालयों, अस्पतालों व सड़कों आदि के नामकरण उन्हीं के नाम से किये जिनमें प्रमुख रूप से अल्मोड़ा में सन 1844 में इंग्लैंड की मिशनरी की सहायता से रैमजे हाई स्कूल को बनाया गया तथा नैनीताल में रैमजे अस्पताल कुछ स्थानीय सक्षम साह लोगों व कुछ यूरोपियनों द्वारा आर्थिक मदद से सन 1892 में बनाया गया. ये दोनों स्मारक कुमाऊँ के किंग सर रैमजे को समर्पित हैं…
आज हम उसी कुमाऊं किंग के सम्मान में समर्पित अस्पताल की बात करेंगे जिसकी हालत बद से बदतर होती चली जा रही है,
हालांकि मौजूदा दौर में उसे भारत रत्न पंडित गोविन्द बल्लभ पंत के नाम से भी जाना जाता है, और मौजूदा हालातो की चर्चा करें तो हमें अस्पताल में एक्स रे मशीन, इ -सी जी मशीन दिखती हैं लेकिन उन्हें ऑपरेट करने वाला कोई नहीं,
बुरी नज़र न लगे तो आज भी इमारत बुलंद है और अपनी दिलकशी की वजह से दूर से ही मदहोश करती है, बस मायूसी तब बढ़ जाती है, जब कोई मरीज़ अपना इलाज कराने की ख्वाहिश मन में पाल लेता है और अस्पताल के अंदर दाख़िल होते ही उसकी ख्वाहिशें फ़ाख्ता हो जाती है,
आखिर क्या देख लेता हैं मरीज़ जो दबे पाँव वहां से भाग खड़ा होता है,
वो भागे क्यों न, भई दरअसल एक मरीज़ को क्या चाहिए, अस्पताल के किनारे पर लम्बी लाइन, पर्चा बनाते हुये एक कर्मचारी, डॉक्टर के चैम्बर में लगी हुई भीड़ और एक एक करके आला लगाकर चेक अप करते डॉक्टर और सबसे लास्ट में फ्री में मिली हुई सरकारी सफ़ेद मोटी मोटी गोलियों का पैकेट…
बस इतना सा ही तो ख़्वाब होता है, एक रेगुलर मरीज़ का…
जिसे रैमजे अस्पताल / जी बी पंत चिकित्सालय पूरा नहीं कर पा रहा है,
सन 1892 में बने इस अस्पताल को आज उसी तरह एक कुमाऊँ किंग की ज़रूरत है, जिसके नाम को समर्पित इस अस्पताल को किया गया था,
या अगर विदेशी वाला कुछ उस टाइप की फीलिंग्स आने की वजह से अस्पताल का उद्धार नहीं कर पा रहे हैं तो कम से कम हमारे भारत रत्न पंडित गोविन्द बल्लभ पंत जी के मान सम्मान की कुछ तो क़द्र होनी चाहिए,
नैनीताल जैसी वीआईपी सिटी में अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं न होने पर एक आम नागरिक
बड़े-बड़े संस्थानों व ज़िम्मेदारों की तरफ़ बड़ी हसरत भरी निगाह से देखता है,
लेकिन सिर्फ़ देखता है,
कहने की सोचता हैं लेकिन कोई आरोप लगने की वजह से खामोश हो जाता है…
और 10 सितंबर का इंतज़ार करता है कि महापुरुष के सम्मान में शायद उस दिन अस्पताल की हालत सुधारने को कोई घोषणा हो जाये…
लेकिन नहीं…
उस इतंज़ार के बदले में मिलता है सिर्फ़ खाली पड़ा बदहाल अस्पताल….
जिसे वक़्त रहते विकसित नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक इमारत को खंडहर के रुप में न देखें…
लेकिन सबसे बड़ी बात, समस्या का हल करे तो कौन ? क्योंकि यहाँ तो ‘बाड़ ही खा रही उजाड़’…!! जिले के जिस सबसे बड़े मुख्य चिकित्सा अधिकारी से उम्मीद की जाती है कि वह इस चिकित्सालय की हालत सुधारेगा, वही इसे निगलता जा रहा है… क्योंकि उसे स्थान की और अधिक आवश्यकता है, और चिकित्सालय की उसके लिए शायद कोई उपयोगिता नहीं… उसका बस चलता, तो उसके मुखिया अब तक उसके ‘रेन शेल्टर्स’ को तोड़कर अपने घर के लिए सड़क बना चुके होते…
ऐसे में ‘राम जी’ ही ‘रैमजे’ की इस विरासत को बचा सकते हैं…
न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर..
अंक 158 : हलुआ (मलबा) फिर रायते की तरह फैलने को है तैयार.. हज़ार साल बाद चोक नाली खुली पर, हज़ार साल फिर बंद होने की है तैयारी
साहिबान,
कूर्मांचल नगर मल्लीताल शाखा के निकट काफ़ी लम्बे समय से बंद पड़ी नाली को नगर पालिका परिषद नैनीताल के द्वारा तोड़कर पुनः बनाया गया जिससे क्षेत्रवासियों को बहुत राहत मिली, वहीं उपरोक्त नाली मरम्मत में जो भी मलबा निकला उसे वहीं सड़क किनारे छोड़ दिया गया, हो सकता है किसी भयंकर मजबूरी अथवा किसी अन्य योजना के तहत ऐसा किया गया हो, किन्तु जैसा कि सभी जानते हैं बरसात का सीज़न स्टार्ट हो चुका है, कुछ दिन बाद यही मलबे के कट्टे पानी से गल जाएंगे और जो मलबा उनमें कैद हुआ है उसे आज़ादी मिल जाएगी और वो ख़ुशी- ख़ुशी नाली के अगले हिस्से में पहुँच कर अपना घर बना लेगा, और अपने घर में बाहरी तत्वों को कौन प्रवेश की अनुमति देता है, वैसे ही वो तथाकथित मलबा भी बरसात के पानी या आसपास के पानी को नाली यानि उसके घर में प्रवेश नहीं करने देगा और पानी को मजबूरन रायते की तरह सड़क पर फैलना होगा, फिर जब नाली में मलबा हो और पानी रास्ते में फैले तो फिर विभाग को ज़हमत उठानी पड़ेगी जैसे आज हज़ारों सालों से चोक नाली को तोड़कर दोबारा से पूरा बनाया गया, वैसे ही कुछ दिन, महीने या साल बाद इतिहास ख़ुद को दोहराएगा, फिर कोई नागरिक ऐसी ही अपने शहर की व्यथा कह रहा होगा और फिर संबंधित विभाग के ज़िम्मेदार अधिकारी ऐसी ही अपने फेस पर मास्क लगाए और कानो में हेडफोन लगाए बैठे होंगे, कैसे कट्टे कैसा मलबा ?
अंत में, हमारा सचिन नेगी नगर पालिकाध्यक्ष महोदय से, अशोक वर्मा अधिशासी अधिकारी महोदय से तथा राजू टांक आवागढ़ वार्ड सभासद महोदय से अनुरोध है कि उपरोक्त सड़क किनारे रखे मलबे के कट्टों को समय रहते हटवाने का कष्ट करें जिससे बरसात के पानी के साथ ये भी झील में न समां जाये…
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 158 : वो लकड़ी की कश्ती, वो नैनी झील का पानी ! और हाय, वो उसमें डूब गई…
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न, दरअसल ये तस्वीर नहीं है, ये आज की हकीकत है, एक जमाना था जब मैं भी इठला के इतरा के झील के पानी में शरारत करती हुई एक छोर से दूसरे छोर तक जाती थी, एक शान हुआ करती थी मेरी, दूर -दूर से लोग नैनीताल को निहारते आते थे, फिर चाहे कटी पतंग के राजेश खन्ना हों या वक्त के शशि कपूर, मैंने सबका दौर देखा है। और देखा है उन खेवनहारों को जो सुबह से शाम तक मुझे और मेरी जैसी हर नाव को अपने हाथों से बिना रुके, बिना थके खींचते क्योंकि साहब लोगों को खुश करना होता था और जब साहब लोग खुश होकर जाते तो वे नाव के किराये के साथ उसे बख्शीश भी देकर जाते, वो बेचारा सुबह से शाम तक पसीना पसीना होकर एक -एक पैसा कमाता और शाम को अपने बीवी बच्चों के लिये खाना, दवाई और ऐसी जरूरत का सामान ले जाता। उतार – चढ़ाव आये लेकिन उसने या उसके नाती – पोतों ने भी मेरा साथ नहीं छोड़ा, लेकिन इस बार कुछ अच्छा महसूस नहीं हो रहा है, जो सुबह से शाम तक मेरे साथ रहता था, वो खेवनहार पिछले दो -तीन महीनों से मुझसे मिलने नहीं आया, जो मुझपे पानी की एक बूँद बर्दाश्त नहीं करता था, आज मैं डूबी खडी हूँ, जो अपने हाथों से मेरे चेहरे की रंगीनियाँ बरकरार रखता था, आज उसे मेरे डूबते वजूद की भी फिक्र नहीं, जिसने न जाने कितने परिवारों को डूबने नहीं दिया, आज मैं नाव डूब रही हूँ। कोई मेरे उस खेवनहार तक मेरा पैगाम पहुंचा देना, इससे पहले मैं पूरी तरह से झील में समां जाऊं, मेरी आखरी झलक आकर वो देख जाये, कि मैं डूब रही हूँ…।
अब उस डूबती नैय्या को कौन समझाये कि लॉकडाउन चल रहा है, नावों के लिये, होटल खुल गये। बसें खुल गयी, बड़ी -बड़ी दुकानें खुल गयी, महल और चौबारे खुल गये बस लॉकडाउन चल रहा है नावों के लिये… चिड़ियाघर खुल गया, बोटेनिकल गार्डन खुल गया लेकिन लॉकडाउन चल रहा है सिर्फ नावों के लिये !!!गरीब को इज्जत से रोटी कमाने का भी अधिकार नहीं? क्या गरीब चंद नेताओं के सामने हाथ फैलाने के लिये पैदा हुआ है? जवाब दें जिम्मेदार अधिकारी?
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 157 : साक्षात्कार : कुमाऊं विश्वविद्यालय को अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय बनाना चाहते हैं नये कुलपति प्रो. जोशी कुलपति
संक्षिप्त परिचय: कुशल प्रशासक, निष्पक्ष व निर्भीक छवि वाले प्रो. (डॉ.) एनके जोशी ने 11 मई को नैनीताल में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति के तौर पर कार्यभार ग्रहण किया। प्रो. जोशी मूलतः कौसानी के रहने वाले हैं। उन्होंने नैनीताल के डीएसबी परिसर से 1983 में फिजिक्स से एमएससी की थी। 36 सालों से शिक्षण एवं प्रशासन के क्षेत्र में सक्रिय प्रो. जोशी बोस्टन, एमआईटी के भी अल्युमनस हैं। कुमाऊँ विवि के कुलपति बनने से पूर्व प्रो. जोशी उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के रूप में कार्यरत थे। इसके अलावा प्रो. जोशी इससे पूर्व एमडीआई गुड़गांव, आईएमटी गाजियाबाद, बनस्थली यूनिवर्सिटी, तीर्थांकर महावीर यूनिवर्सिटी व प्रशासनिक अकादमी नैनीताल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। प्रो. जोशी मिसोरी यूनिवर्सिटी साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूएसए से संबद्घ कॉलेज मस्कट में भी कार्य कर चुके हैं। प्रो. जोशी का नैनीताल से गहरा रिश्ता रहा है। यहाँ मल्लीताल बीडी पांडे अस्पताल के निकट सनवाल कुटीर निवासी लोनिवि उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रमुख अभियंता इंजीनियर इन चीफ रहे स्व. चंद्रशेखर सनवाल की पुत्री वंदना आपकी धर्मपत्नी हैं। आज आप कुमाऊँ विश्विद्यालय के कुलपति के रुप में हम सबके समक्ष कुलपति के कर्तव्य का कुशलता से निर्वाह कर रहे हैं…
विभिन्न पदों की जिम्मेदारी निभा चुके प्रो. एनके जोशी से बात की हमारे संवाददाता मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश:-
आजाद सवाल (01): – आपने लॉकडाउन के दौरान कार्यभार ग्रहण किया। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में पठन-पाठन को आपने कैसे मैनेज किया? कुलपति कुविवि:- ऐसी परिस्थिति हम सबके सामने पहली बार ही आई, और इसमें हमने टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल करके समय का सदुपयोग किया। फैकल्टी के साथ विचार विमर्श करके विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था की गयी। इससे विद्यार्थियों का पठन-पाठन समयानुरूप चल सका। शहरी क्षेत्र के विद्यार्थियों को इसका भरपूर फायदा मिला। दूरस्थ व ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थी तकनीकी कारणों से सम्पूर्ण लाभ नहीं ले सके। ऐसे विद्यार्थियों के लिये यदि स्थिति सामान्य हो जाती है तो आने वाले माह की 13 जुलाई से 31 जुलाई तक रेमेडियल क्लासेज चलाएंगे तथा कुछ प्रैक्टिकल भी कराये जाएंगे। लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन शिक्षण के अतिरिक्त हमारे कुछ विभागों ने बहुत से महत्वपूर्ण व सामयिक विषयों पर वेबिनार भी आयोजित किये जिनका लाभ विद्यार्थियों के अतिरिक्त शिक्षकों ने भी उठाया।
आजाद सवाल (02):- कुछ ऑटो प्रमोशन की भी योजना है विद्यार्थियों के लिये ? कुलपति कुविवि :- एमएचआरडी की गाइडलाइन्स के अनुसार इंटरमीडिएट सेमस्टर छात्रों को ऑटो प्रोमोट किया जाएगा, फिर भी जो विद्यार्थी उक्त परीक्षाफल से संतुष्ट नहीं होता है तो वो अगले वर्ष परीक्षा भी दे सकता है।
आजाद सवाल (03) :- जैसा कि आपका अनुभव उच्च कोटि संस्थानों का रहा है तो क्या कुविवि को भी आपके अनुभव का लाभ मिलेगा? कुलपति कुविवि :- मैं कुमाऊँ विवि को अंतर्राष्ट्रीय विवि बनाना चाहता हूं। इसके लिये हम तैयारी कर रहे हैं। टीचिंग-लर्निंग की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाएगा। विद्यार्थियों को इंडस्ट्रियल ओरिएंटेड शिक्षा प्रदान करेंगे। सिलेबस रिवीजन, कक्षाओं के समुचित संचालन का ध्यान रखा जाएगा। सिस्टम को ऑनलाइन करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। कुमाऊँ यूनिवर्सिटी एक रिसर्च ड्रिवन यूनिवर्सिटी रहेगी, जहाँ शोध की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाएगा। रिसर्च प्रोजेक्ट्स, अच्छे शोध पत्र, पेटेंट्स, कॉन्फ्रेंस, सेमिनार आयोजित किये जाएंगे। विद्यार्थियों के हितों का समुचित ध्यान रखते हुये हम कुमाऊं विवि को एक अलग स्तर पर ले जाने का प्रयास करेंगे, ये एक student centric और research driven university बनेगी…
आजाद सवाल (04) :- पढ़ाई तक तो ठीक है लेकिन पढ़ाई पूरी करने के बाद स्टूडेंट के सामने रोजगार की बड़ी चुनौती रहती है। कॉलेज से निकलने वाले स्टूडेंट्स के लिये क्या योजना है? कुलपति कुविवि :- आप कॉलेज से जाने वाले स्टूडेंट की बात कर रहे हैं। हम तो अपने अंडर ग्रेजुएट स्टूडेंट को भी रिसर्च लिखना सिखाएंगे। लाइव प्रोजेक्ट्स का अवसर प्रदान किया जाएगा। इंटरप्रिन्योरशिप पर हमारा ज्यादा जोर रहेगा और विद्यार्थियों को सेल्फ एम्पलॉयड बनाने की दिशा में उन्हें अपने स्टार्ट अप के लिये प्रेरित व प्रोत्साहित किया जाएगा। हमने विद्यार्थियों के लिये प्लेसमेंट सेल भी बना दिया है जिसके लिये डीएसबी, भीमताल और अल्मोड़ा कैंपस में कोऑर्डिनेटर नियुक्त किये गये हैं। साथ ही हमने कुमाऊँ विवि का कॉम्पिटेटिव एग्जामिनेशन सेंटर बनाया है, जिसमें विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी के साथ-साथ आईएएस, पीसीएस, पीसीएस-जे, नेट, गेट, बैंकिंग और सीडीएस जैसी परीक्षाओं की फ्री ऑफ कॉस्ट कोचिंग प्रारम्भ हो चुकी है।
आजाद सवाल (05) :- ये तो रही उन छात्रों की बात जो भविष्य में शिक्षा लेकर निकलें लेकिन क्या उनके लिये भी कुछ समाधान है जो कुविवि से बरसों पहले निकल गये लेकिन आज तक आत्मनिर्भर नहीं बन सके ? कुलपति कुविवि :- जी बिल्कुल है, ऐसे छात्रों के लिये कॉम्पिटेटिव एग्जामिनेशन सेल के अतिरिक्त स्किल डेवलपमेंट कोर्सेज का हमने प्रारम्भ शुरू कर दिया है, इच्छुक विद्यार्थी web development, communication skills, organic farming, Entrepreneurship, computer skills, mutual funds, accounts, media skills, sales, finance, plumbing, electrician आदि जैसे रोजगारपरक स्किल डेवलपमेंट सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं।
अंक 156 : रिक्शे-नाव से भेजें जाये ‘इकोनॉमी वॉरियर’
-जो ज़्यादा महंगी के शौकीन हों, उनके लिए नाव खोली जाये, इसी बहाने से गरीबों के घर में भी जले चूल्हा
साहिबान,
लॉक डाउन क्या हुआ, काफ़ी चीज़ों की परिभाषा ही बदल गयी,
पहले जो कमाऊ था, वो नकारा हो गया, जो मोटा था वो छुआरा हो गया, बाहर घूमने वाला नालायक और घर में सोने वाला ज़िम्मेदार हो गया, ऐसे ही चाय बेचने वाला दोषी और शराब बेचने वाला विधाता हो गया,
जो रोज़ कमाते खाते थे उनके घर में क्या हालात हैं कोई देखने वाला नहीं,
हाँ, कभी – कभी समाजसेवी या प्रशासन राशन वितरण कर देता है, लेकिन सिर्फ़ राशन वितरण से उसके घर की ज़रूरत का सामान पहुंच जाता होगा, क्या उसके घर में दवाइयां, गैस, दूध, जैसी चीज़ें पहुंच जाती होंगी,
नहीं, बिल्कुल नहीं,
आज लगभग सबको अपना -अपना व्यवसाय खोलने की अनुमति है,
लेकिन क्या किसी ने एक रिक्शे वाले का दर्द समझा, जिसके पास कोई जमा पूंजी नहीं होती,
क्या किसी ने नाव चलाने वाले की पीड़ा समझी की दो चार दिन का राशन मिलना उसके लिए स्थाई समाधान नहीं है,
रिक्शे में एक ही व्यक्ति बैठे लेकिन रिक्शा खुलना चाहिए,
नाव में भले ही एक सीट मे एक व्यक्ति बैठे लेकिन नाव खुलनी चाहिये,
वरना इस लॉक डाउन में उन बेचारों की आमदनी तो होगी नहीं ऊपर से नाव ख़डी -ख़डी बेकार हो जाएगी, रिक्शे खडे खडे बेकार हो जाएंगे…
और इन सब दलीलों के बावजूद भी अगर सरकार इन गरीबों को इजाज़त नहीं देती तो सिर्फ़ इतना ही सोचकर अनुमति मिल जाये कि जब एक इकोनॉमी वॉरीयर पैदल चलकर अपने युद्ध स्थल तक पहुँचता है, बड़ी तकलीफ होती होगी उसे,
क्यों न इकोनॉमी वॉरीयर रिक्शे में या नाव में शान से बैठकर देश की अर्थव्यवस्था को सहारा देने आये,
इसी बहाने कुछ गरीबों को भी 07-04 में रोज़गार मिल जाये…
अतः
मा. मुख्यमंत्री महोदय उत्तराखंड,
मा. कुमाऊं आयुक्त महोदय,
मा. ज़िलाधिकारी महोदय,
मा. उप ज़िलाधिकारी महोदय,
मा. नगर पालिकाध्यक्ष महोदय
से हमारा अनुरोध है कि रिक्शा चालकों को तथा नाव चालकों को नियमानुसार रिक्शा व नाव चलाने की अनुमति प्रदान करने की कृपा करें,
जिससे उनके घरों में भी उनकी कमाई से चूल्हा जल सके…
न काहू से दोस्ती
ना काहू से बैर
अंक 155 : नैनीताल में प्रशासन की पहल पर तल्लीताल डाँठ पर लगा ‘सेल्फिश पॉइंट’
नैनीताल की ख़ूबसूरती को दिया नया आयाम!
अब देखेगी दुनिया नैनीझील का सौंदर्य !
साहिबान,
एक ज़माने में एक बेहद ही ख़ूबसूरत अदाकारा हुआ करती थी जिनका नाम आज भी बड़े अदब और लिहाज़ से लिया जाता है और लिया जाता रहेगा, उनकी बेमिसाल ख़ूबसूरती और सादगी के आगे आज तक कोई दूसरी अदाकारा टिक नहीं पायी, वो कोई और नहीं हुस्न और सादगी की मिसाल मधुबाला थी, आख़िर क्या था उनकी ख़ूबसूरती में ऐसा जो उन्हें आज तक याद किया जाता है, ख़ूबसूरती, जी नहीं खूबसूरत तो हर दूसरी लड़की होती है असल में उनके पास थी सादगी, जिस सादगी से उन्होंने सबका दिल जीता वो आज की कोई भी अदाकारा किसी भी बनावट या दिखावट से वो मुकाम हासिल नहीं कर पाई, ख़ैर आप भी सोच रहे होंगे की नैनीताल और मधुबाला में क्या नाता है, तो जनाब एक बहुत अहम और संजीदा नाता है वो है सादगी भरी खूबसूरती का नाता, जी हाँ, नैनीताल और नैनीझील हमारी मधुबाला है, नैनीताल की सादगी में जो ख़ूबसूरती है वो किसी बनावट की मोहताज नहीं है, कोई चाहे कितने ही हज़ार वाट्स के एलईडी जला दे लेकिन रूह को जो सुकून चाँद की चांदनी देगी वो एलईडी की रोशनी नहीं दे पाएगी, जो लोग बचपन से नैनीताल की गोद में खेले -कूदे, पले बढ़े है, एक सवाल उन सबसे है और दिल पर हाथ रखकर जवाब दें, क्या उनके लिये नैनीताल की माल रोड के पेड़ों पर झालर लटकाकर नैनीताल की ख़ूबसूरती बढ़ाई जा सकती है ? क्या उनके लिये हर रोज़ माल रोड पर तेज़ संगीत बजाया जाये तो उन्हें सुकून मिलेगा? उसी तरह झील के पास इस तरह की बनावट वाली सजावट को सेल्फ़ी पॉइंट का नाम देना क्या नैनीताल की ख़ूबसूरती और सादगी की तौहीन नहीं है? जो लोग नैनीताल को जाने नहीं हैँ उन्हें ही उस जगह सेल्फ़ी पॉइंट दिखता है, अरे साहब, कोई नैनीताल के दीवानो से तो पूछो जिनके लिये नैनीताल का हर कोना सेल्फ़ी पॉइंट है और हर मंज़र क्रियेटिव पॉइंट है, हमारा नैनीताल किसी बनावट का मोहताज नहीं जनाब…
आख़िर में, मा. मुख्य न्यायाधीश महोदय, उच्च न्यायालय (उत्तराखंड) कुमाऊँ आयुक्त महोदय, कुमाऊँ मंडल नैनीताल, ज़िलाधिकारी नैनीताल महोदय, सचिव महोदय, झील विकास प्राधिकरण नैनीताल, तथा अपर ज़िलाधिकारी महोदय, नैनीताल महोदय आप सबसे ये इल्तेजा है कि नैनीताल के तल्लीताल डाँठ पर जो कृत्रिम सजावट करके l love nainital लिखा गया है, मेहरबानी करके उसे उस जगह से हटवाकर ऐसी जगह लगवाया जाये जहाँ से नैनीताल या नैनी झील के प्राकृतिक सौंदर्य पर कोई असर न पड़े, मा. महोदय, को इस नाचीज़ का सुझाव है कि इस तरह की बनावट वाली सजावट का इरादा छोड़ देना ही नैनीताल की बेहतरी में होगा क्योंकि नैनीताल किसी भी आर्टिफीसियल ख़ूबसूरती का मोहताज नहीं है…
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है …. -आज़ाद
अंक 154 : टूट गया ठंडी सड़क का दरवाज़ा, मिली गयी एक नयी अवैध पार्किंग !
-पैदल ठंडी सड़क पर मोटर साइकिल-साइकिल से भी कर सकते हैँ यात्रा, कोई देखने / सुनने वाला नहीं.. इंतजार, विभाग की नींद खुलने तक
साहिबान,
ये जो तस्वीर आप देख रहे हैँ न दरअसल ये कोई तस्वीर नहीं है,
ये तो हिमाक़त है उन मनचलों की, जिनके बाहुबल से लोहे का बड़ा सा दरवाज़ा सड़क के किनारे पड़ी किसी लावारिस लाश की तरह अपनी आखिरी सांसे गिन रहा है, उसके सामने वाला दरवाज़ा सॉरी दरवाज़ा कहूंगा तो उसके साथ इंसाफ में कमी होगी बल्कि उसका सच्चा हमसफ़र जो कभी एक साथ परिणय सूत्र में बंधे थे, तब से रोज़ एक साथ खुलते -बंद होते थे, किस क़दर प्यारी लगती थी उन दोनों की जोड़ी जैसे एक दूजे के लिये ही बने हो लेकिन न जाने किस कमज़र्फ़ को इस मासूम जोड़ी का साथ रास नहीं आया और उसने एक ही झटके में उसकी मांग उजाड़ दी, उसका एक साथी हाथों और पैरों में बेड़ियाँ बंधी होने की वजह से राहगीरों से चीख़ चीख़कर यही फ़रियाद कर रहा है कोई तो उसके साथी की जान बचा ले, कोई तो उनका चमन उजड़ने से रोक ले, लेकिन राहगीरों को भी इतनी फ़ुरसत कहाँ जो कोई उसकी पुकार सुने, जिन्हें फ़ुरसत है वो अपनी गाड़ियां उनके आँगन में लगाकर फ़ुरसत के लम्हे बिता रहे हैँ और जिन्हें इसी दिन का इंतज़ार था, वे लोग अपनी मोटर साइकिल / साइकिल से उनके सीने को छलनी कर रहे हैँ, कोई उनकी इस बेचारगी का मज़ाक बना रहा है कोई उनके इस हाल को धुँए में उड़ा रहा है, उन बेचारों की ऑंखें बस यही आस लगाये बैठी हैँ काश कोई मसीहा आये और उनकी जोड़ी फिर से बना दे, उनका घर फिर से दिलशाद कर दे
हर एक चौराहे पे, एक ख़्वाब उदास बैठा है
ये कौन सा शहर है आज़ाद !
यहां हर शख़्स ख़ामोश बैठा है
आख़िर में
मा.उच्च न्यायालय (उत्तराखंड)
मुख्य न्यायाधीश महोदय,
आयुक्त महोदय, कुमाऊँ मंडल नैनीताल,
ज़िलाधिकारी महोदय नैनीताल,
उप ज़िलाधिकारी महोदय नैनीताल,
अपर ज़िलाधिकारी (प्रशासन ) महोदय, नैनीताल
नगर पालिका अध्यक्ष महोदय, नैनीताल,
अधिशासी अभियंता, महोदय (लोनिवि) नैनीताल,
अधिशासी अभियंता, महोदय, (सिंचाई खंड) नैनीताल,
आप सबसे दिली इल्तेजा है कि कई दिनों से माँ पाषाण देवी मंदिर के पास वाले लोहे का गेट किसी ने तोड़ दिया है, जिससे ठंडी सड़क में लोग अपनी गाड़ियां लगा रहे हैँ और बाइक – साइकिल चलाकर पैदल चल रहे राहगीरों / श्रद्धालुओ को परेशानी में डाल रहे हैँ, जितना जल्दी हो सके उक्त गेट को ठीक करवाने के लिये माकूल महकमें को हुक्म करने की ज़ेहमत करें, आपकी बहुत बड़ी मेहरबानी होंगी..
न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है …
अंक 153 : गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल, न आया तो कचरा कहां डाल ??
साहिबान, डोर- टू – डोर कूड़ा निस्तारण योजना के तहत गाड़ी वाला जहाँ -जहाँ आता है बस उन्हीं घरों से कचरा बाहर निकलेगा बाक़ी जिन क्षेत्रों में गाड़ी नहीं पहुंच पाती, उनका क्या होगा ये कोई नहीं बता पाया।
हमें ख़ुशी है हमारे शहर में डोर टू डोर कूड़ा निस्तारण का अभियान चलाया जा रहा है, यह सराहनीय प्रयास है, किन्तु वार्ड नंबर एक के जैसे कई वार्ड ऐसे हैं जिनकी स्थिति यह है कि संस्था के कर्मचारियों द्वारा कई -कई दिन तक कूड़ा उठाने की ज़ेहमत गवारा नहीं की जा रही। जनता इस उम्मीद पर खामोश है की व्यवस्था सुधरेगी, मगर, संस्था के इंचार्ज रोहित का कहना है कि संस्था के पास मैन पावर की कमी है, इस पर प्रश्न यह उठता है कि इसमें जनता का क्या दोष है ?आपने जब नगर पालिका के साथ टेंडर किया है और आप प्रत्येक घर से शुल्क भी वसूल रहे हैं या वसूलेंगे तो फिर व्यवस्था सुधारना भी आपकी ज़िम्मेदारी है। नतीजा यह है कि वार्ड नंबर एक जैसे अन्य क्षेत्रों की जनता जहाँ डोर-टू-डोर के कर्मचारी नियमित तौर से आ नहीं पाते, असहयोग की मुद्रा में आ रही है क्योंकि तीन माह का कार्यकाल कम नहीं होता, यदि ऐसा ही (महज़ चुनिंदा स्थानों पर गाड़ी में गाना बजाकर ढोल पीटना) होता रहा तो इस संस्था का बहिष्कार निश्चित है, जिसके लिए संबंधित विभाग खुद ज़िम्मेदार होगा। इसलिये नगर पालिका अध्यक्ष महोदय से हमारा अनुरोध है कि उक्त संस्था को यथोचित संसाधन उपलब्ध कराने की कृपा करें जिससे उनका मिशन सफ़ल हो सके, अथवा आपकी पुरानी नीति ही कारगर है, जिसमें कम से कम नगरवासी घर में कूड़ा इकट्ठा किये इस आशा में तो नहीं बैठे रहते कि कोई आएगा, और कूड़ा उठाकर ले जाएगा, अपनी सुविधानुसार सब अपना – अपना कूड़ा डस्टबिन में डाल देते थे।
अंक 152 : क्यों नैनीताल में बंध्याकरण के बाद भी बरकरार है कुत्तों की फौज..?
साहिबान, नैनीताल शहर की सड़कों पर अँधेरी रातों सूनसान राहों तक बस कोई दिखे न दिखे ऊपर वाले का बनाया हुआ एक करिश्मा दिख जाएगा, वो भी अपने संयुक्त परिवार के साथ, हाँ ये अलग बात है उन संयुक्त परिवारों के कुछ सदस्य कुछ देर बाद किसी और परिवार के सदस्य नज़र आते हैं, ख़ैर छोड़िये, इस बात को, वो उनका निजी मामला है और किसी की निजता में झांकना बुरी बात होती है, तो जनाब यहाँ, हम ये ज़िक्र कर रहे थे कि भरे पूरे परिवार के साथ ये वफ़ादार जानवर आपको शहर के हर कोने में मिल जाएंगे, एक ज़माना था जब इनको घर के मालिक के लिये वफ़ादारी का प्रतीक माना जाता था, अब दो दिन अगर मालिक रोटी / हड्डी न डाले तो भौंकते हुये घर से चल देते हैं, वो तो ग़नीमत ये है कि अभी कोई ट्रांसलेटर नहीं बना जो ये बताये कि आख़िर ये वफ़ादार जानवर कह क्या रहा है, वरना बाई गॉड न जाने कितने मालिकों के कानों से तो ख़ून ही निकल जाता, यही सोचकर शायद टेक्नोलॉजी ज्ञाताओं ने भी इसमें हाथ नहीं डाला क्योंकि एक -दो तो उनके घर में भी पक्का होंगे, ख़ैर, यहां हम किसी की वफ़ादारी में चरस नहीं बोना चाहते, हम तो बस ध्यान का चरखा थोड़ा उधर घुमाने की कोशिश कर रहे हैं जिधर इस करिश्मे ने करिश्मा कर रखा है और उस करिश्मे से शहर के बाशिंदों के अलावा परदेसी भी करिश्माई हो चुके हैं, अभी कल – परसों के अख़बार में ये आया था की ये वफ़ादार जानवर, इतनी शिद्द्त वाली वफ़ादारी से लोगों को काट रहे हैं जितनी वफ़ादारी से रेबीज की मीटिंग में कोई मुख्य अधिकारी की बातें भी नहीं सुन रहा होगा क्योंकि सरकारी कर्मचारी महाशय का मानना होता है कि ऐसी बातों से तो अच्छा अपना फ़ोन चलाना है, ख़ैर, कोई बात नहीं, ये शहर ही ऐसा हो गया है,सबको कुछ न कुछ चलाने की आदत हो गयी है, कोई ज़ुबान चला रहा है, कोई फ़ोन चला रहा है, एक वफ़ादार जानवर ही है जो मस्त है अपनी ज़िंदगी बेख़ौफ़ होकर जी रहा है और उनमें कोई चुनाव भी नहीं होते, जो दो से ज़्यादा बच्चों का डर होता, अब आप कहेंगे अरे जनाब बंध्याकरण तो होता है??? और फिर हम बोलेंगे रहने दीजिये न साहब, जिस शहर के सारे काम कागज़ों में होने लगें तो काग़ज़ की कश्तियाँ ही दिखेंगी, बारिश के पानी के लिये तो वो दौलत, वो शौहरत सब दांव पर लगानी होगी जनाब, और हाँ, अगर आप ये सब करने को तैयार नहीं, तो यहां न आइयेगा, क्योंकि यहां एक चीज़ है जिसमें वफ़ा कूट कूटकर भरी है, हो सकता है वफ़ादारी का अगला इंजेक्शन ???
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 151 : नैनीताल में चिराग़ के घर अँधेरा !
साहिबान,
आज हम आपको ऐसे लोगों की दास्तान सुनाने वाले हैं जो पूरे शहर में सफ़ाई के सिपाही के नाम से जाने जाते हैं, वे लोग सुबह – शाम शहर की गंदगी से लड़ते हैं और फिर हार थककर अपने घर पहुंचते हैं, घर पहुँचकर फिर अगली सुबह शहर की सफ़ाई करनी है ऐसी फ़िक्र लिये सो जाते हैं, इस सबके चलते ये लोग अपने आसपास की गंदगी के बारे में ध्यान नहीं दे पाते, जी हाँ, इसमें इनका कोई कुसूर नहीं क्योंकि वो तो इनकी ड्यूटी है जो ये लोग करते हैं और अपना घर चलाते हैं, लेकिन क्या सरकार के किसी महकमे की कोई ज़िम्मेदारी नहीं कोई ड्यूटी नहीं इनके घर के आस- पास सफ़ाई व्यवस्था कराने की, एक बार सीवर लाइन डाल दी तो बहुत बड़ा काम हो गया ? उसके बाद सीवर टूटे या फूटे उससे कोई मतलब नहीं, कोई ड्यूटी नहीं, बहते सीवर को ठीक कराने की ? यही हाल है तल्लीताल मस्जिद के पास रोड में पिछले चार-पांच दिनों से सीवर खुले में बह रही है जो वैष्णो देवी मंदिर से मस्जिद होते हुए हरि नगर का मुख्य मार्ग है, राहगीरों को गंदगी से ही गुजरना पड़ रहा है, मलिन बस्तियों में प्रशासन और संबंधित विभाग हमेशा अनदेखी करता है अगर यही सीवर कहीं बाज़ार में या वीआईपी क्षेत्रों में बह रही होती तो अब तक कब का समाधान हो चुका होता, क्या मेरे शहर के कुछ लोगों को समानता का अधिकार पाने का कोई अधिकार नहीं ? ज़िम्मेदार विभाग ज़िम्मेदारी से ज़िम्मेदारी लेने की ज़िम्मेदारी दिखायें…
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 150 : पधारो म्हारे गड्ढ़ों के देस…
यूँ तो ज़िंदगी बिन गड्ढों के भी जी जा सकती है लेकिन लाइफ में अगर दो – तीन गड्ढे न हों तो लाइफ का मज़ा ही खत्म हो जाता है और हमारी लाइफ में मज़ा बरक़रार रखे हुये है नैनीताल का एक डिपार्टमेंट, जिसकी बदौलत हमें महंगी से महंगी और आरामदायक से आरामदायक गाड़ी में भी झटकों का एहसास हो जाता है, अगर आपके पास मोटर साइकिल या स्कूटी है तो यही मज़ा दोगुना हो जाता है, आप उस गड्ढे से बचकर निकल गये तो समझिये ज़िंदगी से आपकी रोमांच खत्म हो गया और अगर आपने स्टंट दिखाते हुये गड्ढा पार किया तो उससे तीन फ़ायदे होंगे, पहला तो वो जो आप बैठे- बैठे फैटी होते जा रहे हैं वो नहीं रहोगे, झटके खा-खाकर आपका वज़न कम हो जाता है, दूसरा फायदा ये कि आपके अंदर का स्टंटमैन सामने आ जाता है और आप स्टंट की दुनिया के बेताज बादशाह बन जाते हैं, तीसरा फ़ायदा ये कि अगर सावधानी हटी और दुर्घटना घटी तो आपकी वजह से अस्पताल और दवाई की दुकान से जुड़े कई लोगों को रोज़गार मिल जाता है, इससे आप चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांति ले आते हैं और आपको अंदाज़ा भी नहीं हो पाता आपने कितना महान कार्य कर दिया है,
और आप अस्पताल के बेड पर गंदे से लाल कंबल में लेटे- लेटे उस गड्ढे को कोसते रह जाते हैं जिसने आपको महान बनाया,
जाने- अंजाने ऐसी गलतियां हो ही जाती हैं किसकी (डिपार्टमेंट की ) गलती किसके (आम नागरिक के ) लिये महानता का कारण बन जाये, कुछ नहीं कहा जा सकता,
इसलिये तस्वीर में जो गड्ढा दिखाया गया है वो मनु महारानी के सामने चौराहे का है जिस किसीको भी अपने अंदर का स्टंटमैन बाहर निकालना हो या चिकित्सा क्षेत्र में महानता का अध्याय लिखना हो तो पधारो म्हारे देस |
अंक 149 : ठेके पर आसमान, ठेंगे पर सम्मान (5 जुलाई 2019)
साहिबान, आज आपको एक राजा की कहानी सुनाते हैं, उसका राज्य बहुत बड़ा था, जिसके उसने टुकड़े किये और उन टुकड़ों की ज़िम्मेदारी के लिये जनता की पसंद से ज़िम्मेदार लोग चुने, राजा की इस समझदारी से वहां की प्रजा बहुत खुश हुई कि रोज़-रोज़, नई -नई फ़रियाद लेकर राजा के पास जाना बच गया, सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था, प्रजा खुश थी, क्योंकि राजा तक उनकी फ़रियादें ज़िम्मेदार लोगों के ज़रिये आसानी से पहुंचने लगी और पूरे राज्य की प्रजा हंसी ख़ुशी गुज़ारा कर रही थी, फिर अचानक एक साहूकार राज्य में आया और उसने राजा को अपना राज्य ठेके पर देने का प्रस्ताव रखा, साहूकार ने कहा यदि आप मुझे अपना राज्य ठेके पर देते हो तो फिर आपको अपनी प्रजा पर अपना धन खर्चने की आवश्यकता नहीं होगी बल्कि मैं राज्य के ठेके के नाम पर आपको समय-समय पर राशि चुकाता रहूँगा, राजा को ये बात बहुत पसंद आयी और उसने अपना राज्य ठेके पर दे दिया, एक के बाद एक आवश्यकता के लिये ठेके होते रहे और धीरे – धीरे राज्य की पूरी व्यवस्था ठेकेदारों के हाथों में चली गयी, फिर हुआ यूँ कि जो ज़िम्मेदार लोग राजा ने जनता की पसंद से चुने थे उनके अधिकार कम होते चले गये अब राजा सिर्फ़ साहूकार के ठेकेदारों की बात तवज्जो से सुनता और अपने ज़िम्मेदारों को नज़रअंदाज़ करता, ऐसा करते -करते फिर तो ऐसी नौबत आ गयी कि राज्य के ज़िम्मेदार यदि हल्के बोलते तो उनकी आवाज़ राजा के कानों तक नहीं पहुँचती, ज़ोर से बोलते तो राजा बोलता इतना चिल्लाते क्यों हों, ख़ामोश रहते तो कमज़ोर समझा जाता, सभा से उठ जाएँ तो मुँहज़ोर समझा जाता और दरबार के बाहर बैठ जाते तो न फ़रमान समझा जाता, आख़िरकार उन ज़िम्मेदार लोगों के लिये ये स्थिति आ गयी कि राज्य में जाएँ तो प्रजा प्रश्न पूछ पूछकर जीने न दे, और राजा के दरबार में जाओ तो कोई सुनवाई नहीं होती, ऐसे में ज़िम्मेदारों के लिये विकट स्थिति पैदा हो गयी, आत्मसम्मान रक्षा करने की, सबने मन बनाया और राजा के ख़िलाफ़ ही जंग का एलान कर दिया, अपने ख़िलाफ़ ऐसी खबरें सुनकर राजा आग बबूला हो गया, राजा ने अपने स्तर से हर प्रयास किये उन लोगों के हौसले पस्त करने के लिये एक- एक करके सब हथकण्डे अपनाये लेकिन हुआ कुछ नहीं, ज़िम्मेदारों की हिम्मत के आगे सब हार मान गये और राज्य के ज़िम्मेदारों को आख़िरकार खोया हुआ सम्मान वापस मिला और राज्य फिर से खुशहाल हो गया…
नोट:- कहानी के सभी पात्र, चित्र व घटनाएं काल्पनिक हैं इनका किसी जीवित या मृत से कोई संबंध नहीं है, अगर ऐसा कहीं पाया जाता है तो वो महज़ एक संयोग होगा |
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
🙏
अंक 148 : नैनीताल के नवनियुक्त ज़िलाधिकारी सविन बंसल से पहला साक्षात्कार, भाग-2… (1 जुलाई 2019)
डीएम सविन बंसल
नवनियुक्त ज़िलाधिकारी, नैनीताल सविन बंसल से विभिन्न मुद्दों व उनकी योजनाओं से सम्बंधित बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-
संक्षिप्त परिचय :- हरियाणा में जन्मे सविन बंसल की प्रारंभिक व उच्च शिक्षा हरियाणा में ही सम्पन्न हुई। किताबें पढ़ने के शौकीन सविन ने NIT ( कुरुक्षेत्र ) से मैकेनिकल इंजीनिरिंग में गोल्ड मेडल प्राप्त किया लेकिन उससे भी आप संतुष्ट नहीं हुये और आपने प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश सेवा करने का मन बना लिया और आख़िरकार कड़ी मेहनत व लगन के जरिये आपका आईएएस 2009 के बैच में सिलेक्शन हो गया। आप प्रशिक्षु आईएएस के तौर पर सर्वप्रथम नैनीताल की सरज़मीं पर आये और यहीं से आपकी आधिकारिक यात्रा की शुरुआत हुई। 2011 में आप परगनाधिकारी (रुड़की), सीडीओ (टिहरी), 2013 में अपर सचिव वित्त, लोक निर्माण, आपदा प्रबंधन, निदेशक ऑडिट, निदेशक बाह्य सहायतित परियोजना में ज़िम्मेदारी निभाने के पश्चात् 2015 से 2017 तक अल्मोड़ा के ज़िलाधिकारी रह कर आपने शानदार व यादगार कार्य किये। 29/06/2019 दिन शनिवार से आपने नैनीताल के ज़िलाधिकारी का पद भार ग्रहण कर लिया।
नव नियुक्त ज़िलाधिकारी सविन बंसल, नैनीताल के लिये क्या ख़्वाब और क्या हक़ीक़त लेकर आये हैं आइये जानते हैं :-
सवाल (05) से आगे जारी :-
आज़ाद सवाल (06):- नगर के नाले जो झील की धमनियां कहलाते हैं, वो अपने साथ सीवर भी झील में समाहित कर रहे हैं। इस संबंध में आपके द्वारा क्या प्रयास किये जाएंगे?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- नैनीताल के नालों का एक माह के भीतर मैं स्वयं निरीक्षण करने वाला हूँ उसके पश्चात् ही कोई निश्चित योजना बनाकर उस पर कार्य किया जाएगा।
आज़ाद सवाल (07) :- यही हाल यहां के उद्यानों का है, जिसमें कैनेडी पार्क और कैपिटोल सिनेमा के सामने वाला पार्क है जो बदतर हालत में हैं, आपके द्वारा उद्यान जीर्णोद्धार के लिये क्या प्रयास रहेंगे ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- जो भी संबंधित विभाग हैं उनसे वार्ता करके जल्द ही कोई ठोस योजना बनाई जाएगी।
आज़ाद सवाल (08) :- पंत पार्क में अघोषित पार्किंग बना दी गयी है और जो घोषित पार्किंग हैं उनमें काफी अनियमितताओं की खबरें मिल रही हैं। इस संबंध में क्या कार्य योजना रहेगी ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- पुलिस प्रशासन व नगर पालिका प्रशासन के साथ बैठक कर सभी पार्किंग पर बात की जाएगी।
आज़ाद सवाल (09):- टैक्सी बाइक स्वरोज़गार का अच्छा साधन साबित हुआ है लेकिन अभी तक इनका किराया निर्धारित नहीं हुआ है, जिससे चालक स्वयं कंफ्यूज हो जाते हैं किससे कितना किराया लेना है, क्या हो सकता है इनकी समस्या का निस्तारण?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- इस संबंध में आरटीओ से बात की जाएगी और जल्द ही किराया निर्धारित किया जाएगा ।
आज़ाद सवाल (10) :- अंत में, कुछ व्यक्तिगत जानकारी जो जनता जानने को उत्सुक रहती है अपने प्रिय ज़िलाधिकारी के विषय में जैसे वर्तमान प्राधिकरण सचिव व पूर्व ज़िलाधिकारी दीपक रावत गाने के शौकीन हैं आपकी क्या रुचि हैं।
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- मैं इन लोगों के जैसा तो नहीं गा पाता हूँ लेकिन थोड़ा बहुत शौक है, बाक़ी जॉगिंग, बेडमिंटन, किताबें पढ़ना ये भी मेरी रूचि में शामिल है |
आपकी नैनीताल ज़िले के लिये क्या प्राथमिकताएं हैं और क्या चुनौतियां हैं ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य बेहतर पर्यटन व्यवस्था, ये सब प्राथमिकताएं हैं और यातायात व्यवस्था, झील संरक्षण, बलियानाला व वहां रह रहे लोगों को सुरक्षा प्रदान करना प्राथमिकता व चुनौती दोनों हैं।
आज़ाद सवाल (02) :- नगर व ज़िले की यातायात व्यवस्था सुधारने हेतु आपके द्वारा क्या प्रयास किये जाएंगे ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- अभी-अभी होटल एसो. वालों से इस मुद्दे पर भी बात चल रही थी। शीघ्र ही पुलिस प्रशासन के साथ वार्ता कर कोई ठोस योजना बनाई जाएगी।
आज़ाद सवाल (03) :- नगर व ज़िले की चिकित्सा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये आपके द्वारा क्या खाका तैयार किया जाएगा ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- समस्त अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया जाएगा, कोई कमी पाई गयी तो उस पर तत्काल एक्शन लिया जाएगा।
आज़ाद सवाल (04):- प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र बने हैं लेकिन उनमें दवाइयां नहीं हैं, आयुष्मान कार्ड बनवा दिये हैं लेकिन किसी को कोई इलाज नहीं मिल रहा है, आये दिन इलाज के अभाव में मौतें हो रही हैं, कौन लेगा इसकी ज़िम्मेदारी, क्या कहना चाहेंगे इस स्थिति पर ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- (संबंधित अधिकारियों को फ़ोन पर आदेश देने के पश्चात् ) चिकित्सा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोई कमी न आये इसके लिये समस्त स्वास्थ्य अधिकारियों को मीटिंग के लिये बुला लिया गया है, मीटिंग में मामलों का संज्ञान लिया जाएगा।
आज़ाद सवाल (05) :- नगर हो या ज़िला सरकारी स्कूल बद से बदतर और निजी स्कूल तान से तानाशाह होते जा रहे हैं, कैसे नियंत्रण में आएगी इनकी स्थिति ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- (संबंधित अधिकारियों को फ़ोन पर आदेश देने के पश्चात् ) सरकारी व निजी स्कूलों का निरीक्षण करके अनियमितताओं का पता लगाया जाएगा। सरकारी स्कूलों की दशा में सुधार लाने के प्रयास किये जाएंगे व निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाई जाएगी।
साक्षात्कार जारी ..🙏
अंक 147 : नैनीताल नगर पालिका के EO के खिलाफ झंडा बुलंद करने वाले सभासद पर आज़ाद के तीखे तीर…. (28 जून 2019)
साक्षात्कार : मनोज साह जगाती, सभासद (वार्ड नंबर 08) नगर पालिका परिषद, नैनीताल से विभिन्न मुद्दों पर बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-
*आज़ाद* सवाल (01):- आपने किन- किन मुद्दों को लेकर पालिका प्रशासन के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला हुआ है ?
*मनोज साह जगाती* :- ऐसे कई मुद्दे हैं जिनको लेकर पालिका प्रशासन से हमारा रोष है जैसे :- स्ट्रीट लाइट का ठेका जब दिया ब पुरानी लाइट निकाली गयी होंगी लेकिन वो सारी लाइट कहाँ गयी कुछ पता नहीं ? दूसरा, नये ठेकेदार को सरकारी गाड़ी इस्तेमाल करने क्यों दी जा रही है, तीसरा ठेकेदार के केवल 5 आदमी हैं जो 15 वार्ड की प्रकाश व्यस्वस्था को देखते हैं जो उनका देखना न देखने की ही बराबर हो जाता है, पार्किंग में ₹20 की जगह ₹50 बाइक वालों से और ₹200/- कार वालों से वसूले जा रहे हैं जो अधिशासी अधिकारी के निर्देशों पर हो रहा है, और हाँ नगर पालिका में जो सामान मंगाया जाता है उसमें इतनी ऊँची दरों पर सामान खरीदा गया है जो किसी ष्टिकोण से उचित नहीं लगता, जैसे हाथ कूड़ा गाड़ी जो कि ₹5000/- तक की आ जाती है वो ₹9500/- की खरीदी जा रही है ये तो मात्र एक उदाहरण हैं, बहुत धांधलियां की गयी हैं ईओ के द्वारा |
*आज़ाद* सवाल (02) :- इन सब मुद्दों को लेकर आप खुद अकेले चल रहे हैं या बाकी सदस्य भी आपका साथ दे रहे हैं ?
*मनोज साह जगाती* :- नहीं, ऐसा नहीं है मैं अकेला नहीं हूँ, इन आरोपों को लेकर हम 15 में से 13 सभासद एक जुट हो गए हैं जो बहुमत से भी बहुत बड़ा मत है और हम सब मिलकर इन आरोपों की जांच कराना चाहते हैं |
*आज़ाद* सवाल (03) :- पालिका प्रशासन की नीतियों में सभासदों का कितना योगदान होता है ?
*मनोज साह जगाती* :- योगदान तो तब होगा जब सभासदो को किसी नीति पर चर्चा करने के लिये बुलाया जाएगा, यहां का प्रशासन अपनी मर्ज़ी से सब नीतियां बनाता व रातों रात लागू करवाता है |
*आज़ाद* सवाल (04):- और क्या – क्या मुद्दें हैं जिनसे सभी सभासद आक्रोश में हैं ?
*मनोज साह जगाती* :- मुद्दे तो इतने हैं कि बताते -बताते दिन निकल जाएगा लेकिन कुछ खास मुद्दे बता देता हूँ जैसे :- बलियानाला के नाम पर हरिनगर से मकान ख़ाली कराये जा रहे हैं पालिका द्वारा पक्का स्लॉटर हाउस बनवाया जा रहा है ऐसा क्यों ? दूसरा, खेल मैदान में पान मसाला व गुटके के ही विज्ञापन क्यों लगाए जाते हैं ? तीसरा, चाहे मेट्रोपोल पार्किंग हो या सूखाताल पार्किंग कहीं भी शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं है सिर्फ पैसा कमाया जा रहा है चौथा, पिछली कूड़ा निस्तारण वाली संस्था की गाड़ियों का इस्तेमाल किस अधिकार से किया जा रहा है ? पांचवा, न्यायालय में मामला जाने पर भी वार्डों में अँधेरा क्यों है ? ऐसे अनगिनत मुद्दे हैं |
*आज़ाद* सवाल (05) :- इन सब मुद्दों के ख़िलाफ़ आप सभी 13 सभासदों की आगे की क्या रणनीति है ?
*मनोज साह जगाती*:- इन सब मुद्दों को लेकर हमने मा. आयुक्त महोदय से निष्पक्ष जाँच की मांग की है, ज्ञापन में हमने ये भी अनुरोध किया है कि यदि अधिशासी अधिकारी के कार्यों की जाँच नहीं होती तो हम सब आगामी सोमवार 01 जुलाई से आयुक्त कार्यालय में ही धरने पर बैठ जाएँगे |
*साक्षात्कार समाप्त*…
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अंक 146 : नैनीताल नगर पालिका के EO पर आज़ाद के तीखे तीर : पेड़ों पर लाइटिंग, पंत पॉर्क की अवैध पार्किंग, आवारा कुत्तों आदि पर…. (25 जून 2019)
साक्षात्कार : भाग (02)
रोहिताश शर्मा अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद, नैनीताल
नगर की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं पर कई वर्षों से नगर पालिका परिषद नैनीताल में अधिशासी अधिकारी के पद पर तैनात रोहिताश शर्मा से बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :- भाग – 2 (सवाल 5 से आगे)
आज़ाद सवाल (06):- आप पर एक आरोप ये भी है कि आपने माल रोड पर सजावट के नाम पर लाइट लगवाकर वृक्षों में कीलें ठुकवाकर क्षति पहुंचाई , आख़िर क्यों किया गया ऐसा ?
रोहिताश शर्मा :- सजावट के नाम पर हमने किसी भी वृक्ष को कोई क्षति नहीं पहुंचाई है, रही बात वृक्ष में कीलें ठुकवाने की तो यदि कोई भी एक कील वृक्ष में दिखा दे नगर पालिका उसे इनाम देगी।
आज़ाद सवाल (07) :- वृक्षों पर फेंसी लाइट लगाने से पहले क्या आपके द्वारा वन विभाग से कोई अनुमति मांगी गयी ?
रोहिताश शर्मा :- वृक्षों पर स्वामित्व हमारा है तो हम वन विभाग से किस बात की अनुमति प्राप्त करें। दूसरी बात हमने वृक्षों के साथ कोई छेड़ – छाड़ नहीं की फिर कोई औचित्य नहीं बनता वन विभाग के पास जाने का।
आज़ाद सवाल (08) :- पंत पार्क में अघोषित पार्किंग बना दी गयी है, ये सब किसकी शह पर हो रहा है, पालिका की गाड़ियां भी दिखती हैं वहां, ऐसा क्यों ?
रोहिताश शर्मा :- पंत पार्क में हुई पार्किंग पूरी तरह से अवैध है, हम पुलिस प्रशासन से मांग करते हैं कि वो पालिका की सरकारी गाड़ियों के अलावा हर गाड़ी का चालान काटे।
आज़ाद सवाल (09):- आवारा कुत्तों से जनता बहुत परेशान है आपके द्वारा क्या प्रयास किये जा रहे हैं कुत्तों के आतंक के ख़िलाफ़ ?
रोहिताश शर्मा :- मा. उच्चतम न्या. में मामला विचाराधीन है कि आवारा कुत्तों को यहां से नहीं भगा सकते, उनका केवल बध्याकरण किया जाता है। ह्यूमन सोसाइटी मुंबई के साथ मिलकर अब तक लगभग 120 आवारा कुत्तों का बध्याकरण किया जा चुका है और आगे भी प्रयासरत हैं।
आज़ाद सवाल (10) :- अंत में एक अहम् सवाल, डोर टू डोरकेकिििशश तो बहुत सुन लिए अब वो फ़साना हक़ीक़त कब बनेगा ?
रोहिताश शर्मा :- फ़साना हक़ीक़त बनने वाला है, 21 जून को नये सिरे से टेंडर हो गये हैं एक अनुभवी संस्था को चिह्नित कर लिया गया है, अगले माह जुलाई के प्रथम सप्ताह से वो संस्था डोर टू डोर कूड़ा निस्तारण का कार्य प्रारम्भ कर देगी, जिससे नगर के नालों, व सड़कों पर गंदगी होने से काफ़ी राहत मिलेगी।
साक्षात्कार समाप्त….🙏
भाग : 1
आज़ाद (01):-
सबसे पहले बात करते हैं सड़क से उच्च न्यायालय पहुंची स्ट्रीट लाइट की, आख़िर क्या था मामला, जो ये मुद्दा जनहित का मुद्दा बन गया ?
रोहिताश शर्मा :- अमृत योजना के अंतर्गत स्वीकार योजना जिसे सोडियम लाइट से हटाकर एलईडी में कन्वर्ट किया गया और जिसे पीपीपी मोड में चलाने की शुरूआत हुई, इसमें विद्युत् बिल में कटौती तो हुई ही साथ ही साथ पालिका को आय भी प्राप्त हुई, रही बात स्ट्रीट लाइट का सड़क से उच्च न्यायालय तक पहुंचने का मामला तो उसमें हम कोई टिप्पणी नहीं कर सकते क्योंकि मामला मा. न्यायालय में लंबित है |
आज़ाद सवाल (02) :- सुनने में ये भी आया है कि ईको ड्राइव कम्पनी ने स्ट्रीट लाइट का ठेका तो ले लिया लेकिन अपना एक भी कर्मचारी प्रकाश व्यवस्था हेतु नियुक्त नहीं किया ?
रोहिताश शर्मा :- ऐसा नहीं है, ईको ड्राइव कम्पनी के छः कर्मचारी नियुक्त हैं जिनमें दो लाइनमेन, दो हेल्पर, एक इलेक्ट्रीशियन व एक ड्राइवर शामिल है, प्रकाश व्यवस्था के लिये एक गाड़ी पालिका की ओर से दी गयी है जिसका ईंधन खर्चा कम्पनी वहन करती है |
आज़ाद सवाल (03) :- क्या ये सत्य है कि आप अपने सभासदों की शिकायतों को नहीं सुन रहे हैं और शिकायती पत्र लेने से मना कर दे रहे हैं, आख़िर अपने ही सभासदों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया जा रहा है ?
रोहिताश शर्मा :- जिस मामले की आप बात कर रहे हैं असल में कोई बात ही नहीं थी, सबकी शिकायतों के लिये हमने कार्यालय में शिकायती पंजिका रखी है, उसमें कोई भी शिकायत लिखवा सकता है, जिस पर एक्शन लिया जाता है, रही बात शिकायती पत्र न लेने की तो उस पत्र में किसी भी तरह की समस्या का कोई भी स्पष्टीकरण नहीं दिया गया था, जो विचार करने योग्य नहीं था, जिस पत्र में समस्या कहाँ पर है, क्यों हैं आदि बातों का समावेश होगा उसे हम सहर्ष स्वीकार करेंगे |
आज़ाद सवाल (04):- अब बात करते हैं डीएसए पार्किंग की इतनी बड़ी पार्किंग होने के बावजूद भी पर्यटकों को गाड़ियों के लिये जगह मुहैया नहीं कराई गयी, आख़िर क्या वजह रही इस बात की?
रोहिताश शर्मा :- सबसे पहले तो वो डीएसए की पार्किंग नहीं है वो नगर पालिका की पार्किंग है, क्योंकि डीएसए का अपना कुछ भी नहीं है, डीएसए की लीज़ भी 2004 में ख़त्म हो गयी थी, अब तक बिना लीज़ के इतने बड़े मैदान को प्रयोग में लाया जा रहा है।
आज़ाद सवाल (05) :- तो फिर डीएसए द्वारा इतने समय में लीज़ बढ़ाने के प्रयास तो किये गये होंगे ?
रोहिताश शर्मा :- नहीं, डीएसए नैनीताल द्वारा सन् 2004 से अब तक कोई प्रयास नहीं किये गये, जिससे लीज़ बढ़ाई जा सके |
साक्षात्कार जारी …
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अंक 145 : आज़ाद के तीर : सूखाताल नहीं सूख पा रही थी ? जो यह सब भी कर दिया.. (4 जून 2019)
झील का विकास करती, लोहे की मशीनें!!!
साहिबान, हमारे शहर में एक बड़ी झील है एक छोटी झील है, बड़ी झील को तो सब जानते हैं क्योंकि वो फिल्मों के मुख्य किरदार की तरह नैनीताल की फिल्म में हैं लेकिन क्या किसी ने उस सहयोगी, नैनी झील को सर्वाधिक 70 फीसद जल प्रदाता सूूूखाताल झील को जानने की कोशिश की जिसके सहयोग से मुख्य किरदार का क़द बड़ा हो जाता है, हमारा जवाब है हाँ जानने की कोशिश की इसलिये उस झील के विकास के लिये लोहे की चार पहिये वाली मशीनें बुलवा दी गयी हैं और उनके ज़रिये झील के गर्भ में छिपे हुये पानी को भी सुखाने की कोशिशें शुरू कर दी गयी हैं, हम ये नहीं जानते शासन – प्रशासन को इससे कितना मुनाफ़ा होगा लेकिन इतना ज़रूर है इन लोहे की मशीनों की चहलकदमी से प्राकृतिक श्रोत ज़रूर सूख जाएंगे, और जैसा कि ग्रीष्म ऋतु में नैनी झील सूखने लगती है ऐसा करने से दोगुनी रफ़्तार से जल स्तर में गिरावट आएगी और जल संकट से वे लोग भी बच नहीं पाएंगे जिनकी सहमति से अथवा संरक्षण में झील को पार्किंग में तब्दील कर दिया गया है … आख़िर में, मा.प्रधानमंत्री महोदय, मा. मुख्यमंत्री महोदय उत्तराखंड, मा. मुख्य न्यायाधीश महोदय उच्च न्यायालय उत्तराखंड, कुमाऊँ आयुक्त महोदय व मुख्य सचिव मुख्यमंत्री महोदय, ज़िलाधिकारी महोदय नैनीताल, सचिव महोदय, झील विकास प्राधिकरण, नैनीताल, सांसद महोदय, नैनीताल, विधायक महोदय नैनीताल नगर पालिकाध्यक्ष महोदय, नैनीताल, अधिशासी अधिकारी महोदय, नगर पालिका परिषद् नैनीताल व सम्बंधित क्षेत्रीय सभासद महोदया व सम्बंधित अधिकारीगणों से इल्तेजा है कि जिस तरह एक तरफ़ झीलों के विकास के लिये करोड़ों का बजट जारी किया जा रहा है वहीँ नैनी झील की सहयोगी सूखाताल झील में पार्किंग बना दी गयी है, जो झील का जीते जी क़त्ल कर देने जैसा है, इसलिये हाथ जोड़कर हमारी इल्तेजा है कि झील में जो पार्किंग बनाई गयी है उसे तत्काल प्रभावी आदेश देकर हटवा दिया जाये और झील को पुनर्जीवित करने की योजना बनाकर उसको अमल में लाया जाये, जिससे प्राकृतिक श्रोत बने रहेंगे साथ ही साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और नाव आदि द्वारा स्थानीय लोगों को रोज़गार भी मिलेगा.. हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यकीन है कि सूखाताल झील से लोहे की मशीने तुरंत हटवा दी जाएंगी और झील विकास के लिये योजना अमल में लाई जाएगी…
साहिबान, ये मंज़र जो आप देख रहे हैं वो किसी सर्कस का नहीं है बल्कि चार्टन लॉज एरिया मल्लीताल नैनीताल का है, जहाँ एक कूड़ा गाड़ी कूड़ादान उठा कर ले जा रही है, कूड़ादान उठाना कोई ग़लत बात नहीं है ग़लत बात तो है लोगों की जान से खेलना! जी हाँ, ये कूड़ा गाड़ी आने का समय और छोटे – छोटे बच्चों के स्कूल जाने का समय लगभग एक ही होता है, इसलिये मजबूरन अभिभावकों को बच्चों का हाथ पकड़कर गाड़ी से बच रही छोटी सी जगह से जान का जोखिम उठाते हुये निकलना पड़ता है, भगवान न करे किसी दिन गाड़ी के चालक से कोई भूल हो जाये, फिर तब कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जनाब, आप भी सोच रहे होंगे कि इतनी बात लिखने की क्या ज़रूरत थी सीधा उन लोगों को बोल देते तो शायद वे लोग अपनी गाड़ी का समय बदल लें, किया साहब, वो भी किया लेकिन उन महान लोगों के पास बस एक ही शब्द होता है, नहीं हो पाएगा, हम ये जानना चाहते हैं आख़िर क्यों नहीं हो सकता? क्या समय में बदलाव तब आएगा जब कोई हादसा हो जाएगा ? घटना से पहले कोई सचेत करे तो उसके शब्दों की कोई कीमत नहीं ? हुज़ूर, एक और सुझाव है अगर ग़ौर फरमायें तो वो यूँ है कि अगर जिस रास्ते में ये कूड़ादान लगाये गए हैं उन्हें थोड़ा आस- पास ही अन्यत्र शिफ्ट कर दें तो फिर कूड़ा गाड़ी जब भी आए उससे कोई खतरा नहीं होगा ! बाक़ी साहब लोगों की इच्छा पर डिपेंड करता है कि क्या करना हैं ? जनता यूँ ही डर के साये में जियेगी या उसे भी खुलकर जीने का हक़ है ?
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 143 : यह तस्वीर देख कर आप भी कहेंगे, ‘मैं भी ख़ास होता काश !’ (25 मई 2019)
साहिबान, आज आपको जो तस्वीर दिखाई दे रही है, वो किसी आम की तस्वीर नहीं, बल्कि किसी ख़ास की तस्वीर है। और ये मंज़र है नैनीताल की लोअर मॉल रोड का, जहाँ सीज़न में ट्रैफ़िक जाम कब हो जाये, कुछ नहीं कहा जा सकता। इसलिये मित्र पुलिस बहुत सावधानियां बरतती है, कि कहीं कोई गाड़ी न रुके, जिससे ट्रैफ़िक बाधित हो। लेकिन ये नियम और कायदे-क़ानून सिर्फ़ और सिर्फ़ आम आदमी के लिये हैं, किसी ख़ास के लिये नहीं हैं, वे जब चाहे, जहाँ चाहे, सरकारी गाड़ी रुकवा सकते हैं, भले ही वो काम या दौरा सरकारी न हो, और नितांत व्यक्तिगत ही क्यों न हो ? सारा सरकारी ताम-झाम साथ लेकर शॉपिंग होती है या नौका विहार का आनंद उठाया जाता है, वो भी सब सरकारी ख़र्चे पर ! ख़ैर, अभी हम बात कर रहे हैं यातायात नियमों के दोहरे मापदंड की जो आम आदमी को लाठी और ख़ास लोगों को सलाम ठोकता है! ‘हुज़ूर’ जब नैनीताल से दो किमी दूर होते हैं तो चौराहों पर नाकेबंदी कर दी जाती है। ऊपर का वाहन ऊपर और नीचे का वाहन नीचे ही रोक दिया जाता है। फिर चाहे उस कतार में कोई मरीज़ या बूढ़े बाबा ही क्यों न हों। उनको तब तक नहीं जाने दिया जाता जब तक माननीय अपने गंतव्य तक न पहुंच जाएँ। जनाब आख़िर में, हमारा ये सवाल है कि क्या हम आज भी उसी ग़ुलाम देश में जी रहे हैं, जिस देश में अंग्रेज़ों ने भारतीयों के लिये अलग क़ानून बनाये थे, जो अंग्रेज़ों पर लागू नहीं होते थे ? आज की तस्वीर भी क्या यही बयां करती नही करती है कि अगर आपको मॉल रोड में अपना वाहन खड़ा करके शॉपिंग करने जाना है तो कम से कम आपको ऐसा भाग्य लेकर जन्म लेना होगा जो आपको ख़ास या ‘माननीय’ बना दे, फिर हर क़ानून आपको सलाम करेगा !
साहिबान, आज हम मल्लीताल बाज़ार क्षेत्र की बात करेंगे, नहीं नहीं, जैसा आप समझ रहे हैं, वैसा कुछ भी नहीं करेंगे, आज न ही हम, वहां सड़क पर निकली आधी से ज़्यादा दुकानों की बात करेंगे और न ही उस अतिक्रमण को रोकने के लिये शासन -प्रशासन द्वारा क्या प्रयास किये जा रहे हैं, न ही उसकी बात करेंगे, आज हम बात करेंगे उक्त तथाकथित बाज़ार मार्ग की जिसे दो – पहिया वाहनों के साथ – साथ चार पहिया वाहनों ने अपनी रफ़्तार और शोर मचाते हॉर्न की आवाज़ों ने बेसुध कर दिया है, मल्लीताल कोतवाली से ऊपर गाड़ी पड़ाव से होकर अंडा मार्केट व जय लाल साह बाज़ार को निकलने वाले इस मार्ग पर बाइक चलाने वाले इतने बेतरतीब ढंग से बाइक चलाते है कि उनकी बाइक से टकराकर कोई भी व्यक्ति कभी भी निजी अस्पतालों की चांदी कटवा सकता है। यही सूरत कार चलाने वालों की है जहाँ इतनी जनता खरीदारी करने आती है, जिसमें महिला, बच्चे, बुज़ुर्ग सभी शामिल हैं, उन सबको बोनट पर टांगने के इरादे से कार किसी भी टाइम आ और जा रही हैं, कुछ लोगों ने तो महानता की वाट लगाने की कसम खा रखी है बाई गॉड, वे आते -जाते हैं इस सड़क से ऊपर से ये दबंगई जगह हो न हो सड़क के बीचों – बीच अपनी बाइक या कार खड़ी करके कानों के लिए रुई और आँखों के लिए पट्टी लेने चल देते हैं, फिर उनकी बला से उस रोड पर जाम लगे या ब्रेड पर जेम लगे, वहीँ दूसरी तरफ़ बड़ा बाज़ार की बात करें तो वहां की हालत ग़नीमत है, हाँ भई, अब इतना खुश होने वाली बात भी नहीं है, वहां का ट्रैफ़िक प्लान जो सक्सेस हुआ है, उसका सारा क्रेडिट जाता है, बाज़ार के मुख्य द्वार पर लगे ताले को, जो सुबह और शाम को ही खुलता है, जिस वजह से बड़ा बाज़ार चैन की साँस ले रहा है, ख़ैर, अभी हम बात कर रहे हैं गाड़ी पड़ाव से कनेक्ट होने वाले बाज़ार की, जिसने अपने साथ खरीदारों को कम बाइक और कार को ज़्यादा कनेक्ट किया है, अब इस कनेक्शन के पीछे पुलिस की लापरवाही कहें या व्यापार मंडल की मेहरबानी या नगर पालिका का मौन व्रत, सब एक ही बात है, अभी तो धीरे -धीरे इन गाड़ियों को सड़क पर खड़ा करवाया जा रहा है, हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है, एक दिन सड़क पर पार्किंग करने के लिये नगर पालिका द्वारा टेंडर निकाले जाएंगे और नैनीताल की छोटी – बड़ी हर सड़क पर सिर्फ़ और सिर्फ़ वाहन ही खड़े होंगे, बाक़ी ख़रीदारी करने लोग हल्द्वानी के मॉल में जाया करेंगे, काश उक्त बाज़ार के लिये भी एक गेट लगता जिसका एक निश्चित समय होता खुलने और बंद होने का तब शायद बच्चे और बुज़ुर्ग निश्चिंत होकर घर से निकलते, लेकिन हम आदि हो गये हैं, ऊँचे फरमानों के बाद पहल करने के लिये, उससे पहले हम बदल जाएँ हमारे स्टैण्डर्ड की तौहीन होगी न, हैं ना ? न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 141 : …तो वो दिन दूर नहीं जब हमारे घरों के भीतर से भी गुजरेंगी गाड़ियां ! (6 मई 2019)
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न, वो दरअसल तस्वीर नहीं है, नैनीताल के बाशिंदों पर थोपा गया फ़रमान है, कैसे और क्यों हम इस इंतज़ाम को थोपा गया फ़रमान बता रहे हैं, आइये जानते हैं :- नैनीताल पर्वतों का राजा है और पूरे जहान में, ये ही इकलौता राजा है, जिसके राज में वज़ीर की कोई सुनता नहीं और जिसके सेनापति अपनी- अपनी ज़िम्मेदारियों से बचते फिरते हैं, जब किसी के पास कुछ नया निज़ाम लागू करवाने का वक़्त आता है तब सब उछलते रहते हैं और जब उस फ़रमान के लिये जवाबदारी का वक़्त आता है तो बॉल एक दूसरे के पास उछालते रहते हैं, ये तो उनकी फ़ितरत है, ख़ैर, कुछ साल पहले मस्जिद चौराहे से नैनीताल क्लब तक आने-जाने के लिये, मेट्रोपोल वाली सड़क का ही इस्तेमाल होता था, लेकिन ट्रैफ़िक जाम से निजात दिलाने के लिये नैनीताल क्लब से बीडी पाण्डे अस्पताल तक की सड़क को गाड़ियों के लिए खोल दिया गया, उसमें हुआ यूँ कि नैनीताल आने वाली गाड़ियां मस्जिद वाली सड़क से शहर में आएंगी और यहां से जाने वाली गाड़ियां नैनीताल क्लब से होते हुए शहर से बाहर निकल जाएंगी, सोच सही भी हो सकती थी अगर उसके साइड इफेक्ट्स पर उन सिपहसालारों ने ज़रा भी सोचा होता, काश उन्होंने ये निज़ाम लागू करवाने से पहले ये सोचा होता कि जब गाड़ियां तेज़ रफ़्तार से आएंगी तो वहां बाज़ार से सामान ख़रीदने आये और काम पर आते -जाते महिला / पुरुष कैसे चल पाएंगे ? दूसरा छोटे – छोटे मासूम बच्चे स्कूल से आते – जाते एक ख़ौफ़ का साया साथ लेकर चलते हैं कि कहीं कोई रॉंग साइड बाइक वाला या ऊपर से आती कोई तेज़ रफ़्तार गाड़ी टक्कर न मार दे, (ऐसी ही एक घटना कुछ दिन पहले हुई थी जिसमें एक पिकअप वाहन की चपेट में एक युवक घायल हो गया था) वहीँ अगर बुज़ुर्गों की बात करें तो उनके लिये ये सड़क मुसीबत का सबब बन गयी है, दरअसल ये सड़क मल्लीताल के लगभग सभी मोहल्लों को जोड़ती है और न चाहकर भी उन बुज़ुर्गों को अस्पताल / दवाई वगैरह के लिये इस ख़ौफ़नाक सड़क पर चलना ही पड़ता है यक़ीन जानिये जब तक वे लोग इस सड़क को नहीं छोड़ देते तब तक उनके माथे पर फ़िक्र का पसीना बहता रहता है, जानवरों की बात करें तो उन सबने तो इसको ख़ूनी सड़क क़रार दे दिया है और भला ऐसा हो भी क्यों न उनके परिवारों के शेरू, टाइगर, ब्लैकी न जाने कितने सदस्य तेज़ रफ़्तार गाड़ियों की चपेट में अब तक आये हैं, शहर की बिल्लियोंं ने तो खुन्नस में कई खम्बे नोच दिए हैं, एक हम ही हैं जो इंसान कहलाते हैं और हमने ही कभी अपनी खुन्नस निकालने की कोशिश नहीं की, कभी इस वाहियात इंतज़ाम के लिये धरना / प्रदर्शन नहीं किया, घुट- घुट कर जीने को मजबूर हैं, दब- दब कर सिकुड़कर चलने के आदि हो गए हैं, और इसी तरह हम इन बदइंतज़ामों को गले लगाते रहे तो वो दिन दूर नहीं जब ये सिपहसालार ट्रैफ़िक मैनेज करने के नाम पर आपके / हमारे घरों के बीच से सड़क निकाल देंगे और आप चाय का कप हाथ में लेकर गाड़ी को निकलने का रास्ता देंगे और फिर अख़बार बिछाकर उसी सड़क पर बैठकर आराम से पकौड़े खाएंगे… तो तैयार रहिये ऐसे ही किसी लाजवाब ट्रैफ़िक कण्ट्रोल प्लांनिग के लिये जो बैडरूम से सीधा हाई- वे के नज़ारे दिखाएगा और हम ख़ुशी- ख़ुशी हर दबाव के लिये आदि हो जाएंगे !
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 140 : ‘6 से 8’ के चक्कर में कहीं ‘ऊपर’ ही न पहुंचा दे और खुद भी शहीद न हो जाये ऊपर वाली सड़क ! (3 मई 2019)
साहिबान, दिल को बहलाने को एक ख़बर मिली है कि शाम के वक़्त अपने वाहन से मल्ली से तल्ली जा सकेंगे लोग, वाह बेहद खूब, चलो ख़ुशी है इस बात कि हमारे शासन व प्रशासन में बैठे महानुभावों को यहां के लोगों का कुछ तो ख़याल आया, ख़याल आया लेकिन महज़ लोगों का अगर नैनीताल का ख़याल आया होता तो शायद ऐसा ख़याल नहीं आता, हमें यक़ीन है ,कि जिस सड़क को चार पहिया वाहनों के लिये खोलने की बात हो रही है क्या उस सड़क का भौगोलिक सर्वे किया ? नहीं ! क्या हमारे महानुभावों ने कभी उस सड़क पर खुद जाकर देखा कि उसमें कितने गड्ढे, कितने टल्ले या कितने अटपटे मोड़ हैं ? या ये जानने की कोशिश की कि वहां कितने स्थानीय बुज़ुर्ग लोग शाम की हवा खाने टहलने आते हैं ? छोटे- छोटे बच्चे अपनी मांओं का हाथ पकड़कर बाज़ार से डोरेमोन का पेंसिल बॉक्स खरीदने जाते हैं, जी हाँ इन सभी बातों पर हमें पूरा यक़ीन है कि किसी भी हस्ती के पास इतना सोचने का वक़्त नहीं है बस फैसले लेने का हक़ है, सब अपनी अपनी ज़िम्मेदारियों से हाथ झाड़ना जानते हैं कोई उन हाथों को नैनीताल के आंसू पोंछने के लिए इस्तेमाल करना नहीं जानता, ख़ैर, हमारे कहने या न कहने से क्या फ़र्क़ पड़ता है, साहब लोगों ने जो फैसला कर दिया वो पत्थर की लक़ीर समझा जाएगा, फिर चाहे नैनीताल की रूह दर्द से तड़प जाए, किसी को कोई परवाह नहीं, आप तो बस अपनी आरामदायक गाड़ियों के महंगे शॉकर से सड़कों के गड्ढे महसूस नहीं कर पाओगे लेकिन उस गड्ढे वाली सड़क के नीचे जो कमज़ोर परत है वो धीरे – धीरे खिसकती जाएगी और उसके आगे का तस्सवुर करना भी हमारे लिये मुमकिन नहीं ! न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 139 : ADB मतलब, ए डेंजरस ब्लंडर इन पाइपलाइन, घोटाला तो नई पाइप लाइन में है ! (1 मई 2019)
बुधवार को पानी आने के बाद पॉपुलर कंपाउंड में ADB की लाइन से हो रहे लीकेज के बाद छाता पकड़कर जाना पड़ा
साहिबान, बरसों पहले की बात है त्रिऋषि सरोवर नगरी में जल की कोई समस्या नहीं थी, क्योंकि आबादी बहुत कम थी लोगों का काम जल श्रोतों के ज़रिये ही चल जाया करता फिर धीरे- धीरे नगर की आबादी बढ़ने लगी लोग जगह – जगह अपने मकान बनाने लगे, अब हर जगह पानी के श्रोत हों ये ज़रूरी तो नहीं इसलिए उन लोगों को पानी की दिक्कत पेश आने लगी, इसी तरह की परेशानी से काफी लोग दो – चार होने लगे तब घऱ- घर पानी पहुंचाने का कार्य शुरू हुआ और धीरे – धीरे इस काम ने सरकार द्वारा गठित जल विभाग का रूप धारण किया पानी की नलों के ज़रिये सप्लाई अंग्रेज़ों ने ही शुरू की और बेहद बेहतरीके से पाइप का ताना- बाना बुना गया, अंग्रेज़ों के जाने के बाद हम भारतीयों ने इस विभाग को अपने क़ब्ज़े में ले लिया फिर जल की सप्लाई सुचारु हो गयी, सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था कि एक दिन अचानक नगरवासियों को मिनरल वाटर का झांसा देकर नार्मल वाटर की भी आबरू तार तार कर दी, न मिनरल वाटर आया न कुछ और ऊपर से जो नार्मल वाटर भी आता था उससे भी हाथ धो बैठे हालाँकि चुल्लू भर पानी के लिए भी उल्लू बनना पड़ रहा है फिर भी कोई बात नहीं, सबसे दिलचस्प बात ये है कि नगरी में शनिवार सनी घरों तक नहीं पहुंच रहा है, सब इसका ज़िम्मेदार सीधे तौर पर जल संस्थान को मान रहे हैं लेकिन उस छिपे हुए चोर का ज़िक्र कोई नहीं कर रहा है जिसकी वजह से आज झीलों की नगरी के वासी बूँद बूँद को तरस रहे हैं इसके पीछे मुख्य कारण है ए डी बी द्वारा बिछाई गयी लाइन जिसमें कितने करोड़ों का घोटाला हुआ है कुछ नहीं कहा जा सकता ? उक्त तथाकथित लाइन को नेपाल के कुशल इंजीनियर काम पर लगाये शटर में वेल्डिंग करने वालों से लाइन को जुड़वाया और मज़े की बात पूरी टीम का नेतृत्व किया था किसी शिक्षक ने, किसी क्लर्क ने और न जाने कितने ऐसे ही अलग अलग संस्थानों के लोगों ने मिलकर एक मुजैसिमा तैयार किया जिसे ए डी बी की लाइन के नाम से जाना जाता है,
ये लाइन इतनी शानदार मेटल में तैयार करवाई है कि उसमें वेल्डिंग नहीं किया जा सकता जो पुरानी लाइन थी वो लोहे की बनी होती थी जिस पर वेल्डिंग करना आसान होता था, इसलिये कहीं लाइन टूटने पर जल्दी जुड़ जाती थी आज की तरह अनिश्चितकालीन मामला नहीं होता, कितने करोड़ों की योजना का पलीता लगाया गया है और क्यों हम उसका जवाब चाहते हैं आखिर क्यों नहीं ए डी बी के ख़िलाफ़ जाँच बैठाई जा रही ? हम इस योजना की जाँच की मांग करते हैं |
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अंक 138: ‘शिक्षा कर कार्यालय’ के तानाशाह का फ़रमान: अगर अफोर्ड नहीं कर सकते तो सरकारी स्कूल में डाल दो बच्चे..” (26 अप्रैल 2019)
जी हाँ, साहिबान, ये फ़रमान है हमारे शहर नैनीताल के एक मशहूर स्कूल (नाम तो आपने सुना ही होगा) की मुखिया का कि “अगर आप अफोर्ड नहीं कर सकते हो तो सरकारी स्कूल में डाल दो” इसके बाद वो जो कहना चाहती थी उसको पूरा करने में आइये हम उनकी मदद करते हैं :- अगर आप अफोर्ड नहीं कर सकते तो सरकारी स्कूल में डाल दो, क्योंकि हम नहीं सुधरेंगे, सरकारी स्कूल में डाल दो, क्योंकि कोई अभिभावक हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता, सरकारी स्कूल में डाल दो, क्योंकि हम तो यूँ ही लूटेंगे, सरकारी स्कूल में डाल दो, क्योंकि हमारा लालच कभी ख़त्म नहीं होगा, सरकारी स्कूल में डाल दो क्योंकि हम तो मुंह ज़ोर ही रहेंगे, सरकारी स्कूल में डाल दो, क्योंकि शिक्षा विभाग हम पर कोई कार्रवाई नहीं सकता… ऐसे ही न जाने कितने परमाणु बम मारक क्षमता रखने वाले ऊल- जलूल ख़यालों के साथ उन हिटलर का मन शांत होता है, आप समझ ही सकते हैं स्कूल वालों का मन जब शांत होता है तब एक अभिभावक के मन में सैलाब उमड़ रहा होता है, उसी सैलाब की ख़ामोशी को महसूस करते हुये हमने 02/04/2019 को अपर शिक्षा निदेशक महोदय को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें हमने स्कूल खुलते ही निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिये कार्रवाई की मांग की थी लेकिन बड़े शिकारी जब बड़ी मछलियों के रेहबर बन जाएँ तो छोटी मछलियों को अपने परिवार दांव पर लगाने पड़ते हैं, यही हाल हमारे शिक्षा तंत्र में हो रहा है कौन सा स्कूल कितनी फीस बढ़ाएगा, किस मद के लिए कितना शुल्क तय किया जाये किसी को कोई परवाह नहीं हर स्कूल अपने -अपने समंदर के हिसाब से तय कर लेता है कि किस मछली का शिकार कब और कितना करना है, ख़ैर, हमने अभिभावकों को बार -बार जागरूक करने की कोशिश की है कि कोई भी अभिभावक किसी भी स्कूल प्रशासन के दबाव में न आएं, हाँ हम ये भी जानते हैं कि एक अभिभावक की मजबूरी हो जाती है स्कूल की हर मांग मान लेना क्योंकि वे सब नहीं चाहते कि उनके बच्चे के साथ स्कूल प्रशासन नफ़रत से पेश आये, या उनकी ऊँची आवाज़ उनके बच्चे का भविष्य ख़ामोश कर दे, इसी बात का फ़ायदा स्कूल प्रशासन उठाता है और चला देता है, चाबुक अभिभावकों की इसी दुःखती रग पर…
आख़िर में, प्रधानमंत्री महोदय, मुख्यमंत्री महोदय, शिक्षा मंत्री महोदय, कुमाऊँ आयुक्त महोदय, ज़िलाधिकारी महोदय, अपर शिक्षा निदेशक महोदय, मुख्य शिक्षा अधिकारी महोदय, से तहे दिल से इल्तेजा है कि सूबे में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिये शुल्क नियामक अधिनियम को लागू कर सभी शिक्षण संस्थानों पर नकेल कसी जाये जिससे शिक्षा, शिक्षा ही रहे व्यापार न बने और नैनीताल के प्रकरण में जाँच कर उचित कार्रवाई करने की कृपा करें कि आख़िर क्यों इतनी शुल्क वृद्धि करके अभिभावकों को दबाव में लिया जा रहा है |
न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर
अंक 137: आज़ाद के तीर : पॉपुलर कंपाउंड में नल सूखे, सीवर झील में…(14 अप्रैल 2019)
कहीं पड़ा सूखा, कहीं जल की बर्बादी, कहीं सीवर जा रही झील में किसी ने कूड़ा फेंका नालों में हुज़ूर, ये कैसी आज़ादी ?
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं वो दरअसल तस्वीर नहीं है बल्कि सबूत हैं उस गुनाह के जो जाने- अनजाने पॉपुलर कम्पाउंड मल्लीताल नैनीताल के इलाक़े में हो रहा है लेकिन हममें से किसी की निगाह उस पर नहीं पड़ रही, जिन महकमों की ज़िम्मेदारी बनती है, वो अपना -अपना मतदान करके हर फ़िक्र से आज़ाद हो गये हैं या यूँ कहें सो गए हैं, उन्हें न ही मोबाइल की घंटी सुनाई देती है और न ही शहर की हालत दिखाई देती है, इसकी साड़ी मेरी साड़ी से सफ़ेद कैसे? ये लाइन तो आपने अक्सर सुनी होगी लेकिन ये कम्पटीशन की भावना सिर्फ़ महिलाओं में ही नहीं होती जनाब बल्कि सरकारी महकमों में भी होती है, इसकी बानगी आपने देखनी हो तो कभी पधारो म्हारे देस, जी हाँ, आप ज़्यादा दूर नहीं जाइये बस नैनीताल आइये, यहां किसी भी गली मोहल्ले के किसी भी कोने से शुरुआत कर दें, तो आप पाएंगे कि जगह -जगह सीवर लाइन लीक हो रही होगी, नालियों का गंदा पानी नालों में पहुंचने के लिये बेताब हो रहा होगा, जगह-जगह गंदगी के ढेर दिखाई देंगे, बेतरतीब रखे कूड़ेदान चीख -चीखकर ये ऐलान कर रहे होंगे कि हम तो ऐसे ही चौड़े होकर सड़क पर खड़े रहेंगे हमारा कोई कुछ नहीं सुधार सकता, नालों की क़िस्मत लोगों के घरों से निकले कूड़े से चमक रही होगी, कुल मिलाकर देखा जाये तो आप पाएंगे कि नाले साफ़ रहने चाहिये लेकिन वो कूड़ादान बने हैं, कूड़ादान जो साफ़ रहने चाहिये वो लबालब भर कर सड़क तक शैतान बने हुये हैं, सरकार ने ग़रीबों के लिये जो कभी सरकारी नल लगाये थे, वो सूखे खड़े हैं, और जिन नालियों में बारिश का पानी बहना चाहिये, वो सीवर की गंदगी लिये झील की तरफ़ सरपट दौड़ रही है, कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती अब किसी भी दफ्तर में कोई भी फरियाद लेकर जाओ, दफ़्तर के मुअज़्ज़िज़ लोग अपनी -अपनी सफ़ाई का पिटारा खोलकर बहानों के साँपों को हमारे गले में डाल देते हैं या कुछ सज्जन उन बहाना रूपी साँपों को दरवाज़े के नीचे से दूसरे दफ़्तर में छोड़ देते हैं और जब उस दफ़्तर में जाकर हालात देखो तो वही सांप किसी तीसरे दफ़्तर के दरवाज़े में सरका दिया जाता है, बस यही सांप – मदारी का खेल देखते – देखते जनता मायूसी के आख़िरी सिरे तक जाती है और जब कुछ हासिल होता नहीं दिखता तो वो वापस आ जाती है, घर में बैठकर यही ख्याल आता है, कितने साल, दिन – रात बदल गये लेकिन ये सरकारी महकमों में बैठे हुये लोग कब बदलेंगे, यही सवाल कायनात में गूंजता रह जाता है और एक आम आदमी सरकारी दफ्तरों में घूमता रह जाता है… आख़िर में, मा.प्रधानमंत्री महोदय, कुमाऊँ आयुक्त महोदय, ज़िलाधिकारी महोदय, अधिशासी अधिकारी महोदय जल संस्थान, नैनीताल अधिशासी अभियंता महोदय सिंचाई खंड, नैनीताल, अधिशासी अधिकारी / पालिकाध्यक्ष महोदय नगर पालिका नैनीताल, समस्त सभासद महोदय / महोदया आप सबसे तहे दिल से इल्तेजा है कि कभी पॉपुलर कम्पाउंड में जाकर देखें कि वहां की ग़रीब जनता किस हाल में रह रही है, यहां एक पुराना जनता नल हुआ करता था जिसमें पहले कभी पानी आता रहता था और आस पास के लोग उसमें से पानी भरकर गुज़ारा कर लेते थे लेकिन कई महीनों से वो नल सूखा पड़ा है, वो तो भला हो किसी खुराफाती इंसान का जिसने नल के नज़दीक नाले से गुजरने वाली पाइप लाइन को तोड़ दिया। अब सुबह-शाम जब भी पानी आता है वहां की ग़रीब जनता नाले में उतरकर अपनी जान को खतरे में डालकर उस पाइप लाइन से पानी भरती हैं और गुज़ारा करती है, वहीँ थोड़ी आगे सीवर लाइन फटने के कारण सीधे नाले में जा रही है। स्थानीय लोगों ने करीब 50 बार इसकी शिकायत भी कर दी है लेकिन किसी के कानों में जूं नहीं रेंग रही।
मेहरबानी करके सूखे नल में पानी सप्लाई करने, टूटी पाइप लाइन को जोड़कर पानी की बर्बादी रोकने और सीवर जो नाले में जा रही है उसे हटवाकर नैनी झील और नैनीताल के पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में मददगार बनकर एक मिसाल क़ायम करें …
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अंक 136: चुनावी मेंढक और हम !(12 अप्रैल 2019)
मैं भी चौकीदार
साहिबान, चुनावी बरसात में कितने बरसाती मेंढक निकलते हैं, सबके सब हर आंगन में जाकर टर्र -टर्र करते हैं और ये टर्र – टर्र मतदान से दो दिन पहले शाम 5 बजे बंद हो जाती है, इस बरसात में टरटराने वाले सारे मेंढकों की आवाज़ एक जैसी लगती है, पहचानने के लिये हमने एक दिन इनमें से “सुरीला टरटराने” वाले मेंढकों को एक थाली में रखकर उनकी पहचान करनी चाही लेकिन ये क्या थाली में एक भी मेंढक नहीं टिका, सब एक के बाद एक फुदक कर थाली से बाहर निकल गये और हम उन्हें देखते रह गये, कि इतनी शिद्दत से हमारे दर पर टरटराने वाले मेंढक इज़्ज़त के साथ थाली में रखते ही उछल गये और किसी झाड़ी में जाकर छिप गये, अब तो टरटराने की आवाज़ भी नहीं आ रही, और हम समझ गये लगता है ये मेंढक अगली चुनावी बरसात में ही निकलकर आएंगे।
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अंक 135 : एक अपील : किताबों को रद्दी न बनायें, यह करें… (8 अप्रैल 2019)
साहिबान, आप सबसे हमारी हाथ जोड़कर विनती है कि जिस तरह अमेरिका जैसे देश में शिक्षा सत्र के प्रारम्भ में बच्चों को किताबें दे दी जाती है जिससे वो अपनी पढ़ाई पूरी करते और दूसरी कक्षा में चले जाते हैं और फिर उन्हीं किताबों से उसके बाद वाले बच्चे पढ़ते हैं लेकिन हमारे देश में हर सत्र में नई किताबें बच्चों को खरीदने के लिये मजबूर किया जाता है, जैसे हर साल पाठ्यक्रम बदल जाता हो आख़िर क्यों हमारा शिक्षा विभाग इस तरफ़ ध्यान नहीं देता, वैसे तो हम पर्यावरण के बड़े चिंतक बने घूमते हैं और जब नई किताबों की बात आती है तो हम मौन धारण कर लेते हैं, आख़िर कहाँ जाता है हमारा पर्यावरण प्रेम, दूसरी तरफ़ हम गरीबी का रोना रोते हैं लेकिन हर साल पुरानी किताबों को रद्दी में बेचने में और नई -नई महंगी किताबें खरीदते हुये हम धन्नासेठ बन जाते हैं, आखिर क्यों हम इस कुप्रथा का अंत नहीं होने देते, आख़िर क्यों हम विरोध नहीं करते, क्यों हम न चाहते हुये भी लाखों पेड़ों के गुनहगार और लाखों दलालों के वफ़ादार न चाहते हुए हैं, आख़िर में, प्रधानमंत्री महोदय, मुख्यमंत्री महोदय, शिक्षा मंत्री महोदय, कुमाऊँ आयुक्त महोदय, जिलाधिकारी महोदय हमारी इल्तेजा है कि जितने भी निजी और सरकारी स्कूल हैं उनमें किताबों के वितरण की प्रणाली को एक दूसरे के काम आने वाली बनाकर लागू करवाया जाये जिससे सबसे पहले अनावश्यक पेड़ों का कटान कम होगा, अभिभावकों के सर से बोझ कम होगा और दलालों की दुकान बंद हो जाएगी, करके देखिये जनाब अच्छा लगेगा | न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 134 : जानें कहां फिर हुआ असर ‘नवीन समाचार’ व ‘आज़ाद मंच’ नैनीताल का (4 अप्रैल 2019)
शुक्रिया : प्रशासन नैनीताल का
साहिबान, हमने नवीन समाचार के स्तम्भ आज़ाद के तीर के 02/04/2019 के अंक में “सीज़न की धारदार तैयारियां शुरू” उन्वान के साथ नैनीताल शहर का हाल बयां किया था कि किस तरह यहां बड़ा बाज़ार को जाने वाले मेन गेट पर धारदार टीन निकला हुआ है जिससे कभी भी कोई हादसा हो सकता था, शासन -प्रशासन ने हमारी बात का संज्ञान लेते हुये उस पर तत्काल कार्रवाई की और उक्त तथाकथित टीन को वहां से हटाया गया जिसके लिये आज़ाद मंच परिवार शासन – प्रशासन का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता है और साथ ही ये भी उम्मीद करता है कि उक्त टीन के अलावा हमने जितने भी मौज़ू पर आपका ध्यान खींचने की कोशिश की गयी थी जैसे पार्किंग, उद्यान, साफ़ – सफ़ाई के इंतज़ामात, हमें उम्मीद के साथ पूरा यक़ीन है कि महज़ दो बेरी केडिंग व्यवस्था से ऊपर उठते हुए कोई बेहतर कार्य प्रणाली के साथ इस बार सीज़न व्यवस्था संभाली जाएगी, जिससे नगर हित के साथ – साथ पर्यटन हित भी बना रहे |
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अंक 133 : नैनीताल में सीजन की ‘धारदार’ तैयारियां शुरू… जानें कैसे.. (2 अप्रैल 2019)
जी हां, सीज़न की ‘धारदार’ तैयारियां शुरू हो गई हैं ! इसके लिए नुकीले टीन मेन गेट पर लटका दिये गए हैं ! जगह- जगह से कूड़ेदान हटा दिये गये हैं ! पार्किंग व्यवस्था राम भरोसे छोड़ दी गयी है ! साहिबान, सरोवर नगरी में सीज़न ने दस्तक दे दी है, तो हमारे यहां के शासन – प्रशासन ने भी लापरवाही में मिसाल बीसतक दे दी है, हुज़ूर आप कहेंगे ये क्या बात हुई और हम बोलेंगे यही तो बात हुई जो बार बार मिन्नतें करने के बाद भी हर साल इतने सबक़ के बाद भी हमारा शासन -प्रशासन कोई सीख नहीं लेता, बस लेता है तो दो बेरी केडिंग लेता है एक हल्द्वानी रोड पर और एक कालाढूंगी रोड पर लगा देता है, और किसी भी वाहन को ऊपर नगर में आने नहीं देता, वाह भई वाह, ये तरकीब जिसने निकाली उसे लाखों तोपों की सलामी देने का मन करता है, बाई गॉड, साला सांप भी नहीं मरा और लाठी भी तोड़ दी, इसे कहते है टैलेंट, जब टूरिस्ट ही ऊपर को नहीं आएगा तो न ही ट्रैफिक होगा, न प्रदूषण होगा, न गंदगी होगी, सब कुछ शांत रहेगा, तो बस कुछ नहीं करना है, दो पुलिस वाले इस रोड से टूरिस्ट को उधर लताडेंगे, दो उधर से इधर, तो फिर वो जाएगा किसी और हिल स्टेशन, फ़िलहाल तो वो ये सोचकर रानीखेत- अल्मोड़ा का रुख ले लेगा के अब इतनी दूर आ ही गए तो क्या वापस जाएँ, ख़ैर, इससे नैनीताल के आस- पास के इलाकों की मांग बढ़ जाएगी बहुत ख़ुशी की बात है लेकिन आपने वो गाना तो सुना ही होगा जिसमें इन्हें पंछी कहा गया है कि “रात को ठहरे तो उड़ जाएँ दिन को, आज यहां कल वहां है ठिकाना” जी बस एक -दो बार तो नैनीताल के नाम पर टूरिस्ट कहीं और चला जाएगा लेकिन अगली बार हमारे प्रशासनिक बेहतरीन इंतज़ामात की वजह से अगली बार नैनीताल आने से पहले दस बार सोचेगा के अगर इस बार भी वहां हाउस फुल का बोर्ड लगा दिया फिर क्या होगा ? ख़ैर, उसके लिये घूमने की जगह कम नहीं है उत्तराखंड में ही ऋषिकेश, मसूरी, पिथौरागढ़, कौसानी, बागेश्वर, रानीखेत, अल्मोड़ा जैसे बेहद खूबसूरत पहाड़ी क्षेत्र हैं, जहाँ वो घूमने जा सकता है, फिर धीरे -धीरे सरोवर नगरी में वही टूरिस्ट आएंगे जो रोड़वेज़ की बस में ₹65 रूपये का किराया लगाकर आएगा, ₹10 में शेयरिंग रिक्शे में बैठेगा और एक चक्कर चाट मार्केट जाएगा, ₹50 की सोनम की चाऊमीन खाकर, ठंडी सड़क पर सेल्फी खींचता हुआ, वापस रोडवेज़ की बस में बैठकर ₹65 का टिकट खरीदकर घर वापस लौट जाएगा, न टैक्सी वालों को कोई पूछेगा, न किसी गाइड से कोई होटल पूछेगा, सब मस्त आराम से चैन की बंशी बजाएंगे, शहर की हालत पर क्या बोला जाये, पार्क, सड़कें, साफ़ – सफ़ाई और कूड़ेदान की व्यवस्था चीख – चीखकर अपने पैरों को देखकर आज भी रोती है … न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 132 : आ गया देश का पहला लोकपाल, ऐसी बदलेंगी व्यवस्थायें..(25 मार्च 2019)
देश के पहले लोकपाल न्यायमूर्ति पिनाकी घोष
भ्रष्टाचार का सीसीटीवी लोकपाल ! लोकपाल से जगी उम्मीदें ! देश को मिला पहला लोकपाल
साहिबान, ये बेहद ख़ुशी की बात है कि हमारे देश को जस्टिस पिनाकी घोष के रूप में पहला लोकपाल मिल गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की मौजूदगी में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने उन्हें शपथ दिलाई।
जस्टिस घोष के साथ न्यायिक सदस्यों के तौर पर जस् कुमार त्रिपाठी, जस्टिस अभिलाषा कुमारी, जस्टिस दिलीप बी.भोंसले और जस्टिस प्रदीप कुमार मोहंती को शामिल किया गया है। न्यायिक सदस्यों के साथ ही कमेटी में 4 और सदस्यों के तौर पर दिनेश कुमार जैन, अर्चना रामसुंदरम, महेंद्र सिंह और इंद्रजीत प्रसाद गौतम भी रहेंगे। जस्टिस पी. सी. घोष राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य रह चुके हैं। जस्टिस घोष को मानवाधिकार कानूनों के जानकार के तौर पर भी जाना जाता है। लोकपाल केंद्रीय सतर्कता आयोग के साथ मिलकर काम करेगा। लोकपाल सीबीआई समेत किसी भी जांच एजेंसी को आरोपों की जांच करने का आदेश दे सकेगा। इसके अलावा इसकी जांच के दायरे में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री सांसद और सभी तरह के कर्मचारी आएंगे ये और भी ख़ुशी की बात है, अब कोई नहीं बच सकता भ्रष्टाचार पर नकेल लगाने के लिये सीसीटीवी होना बेहद लाज़मी था, अब आम जनता को इससे काफ़ी उम्मीदें जागी हैं, और हम इस क़दम के लिये भारत सरकार का शुक्रिया अदा करते हैं, और उम्मीद करते हैं कि लोकपाल रूपी सीसीटीवी जिस मक़सद के साथ लागू किया है हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है वो 24 घंटे हर पल देश की नब्ज़ के हाल से रूबरू रहेंगे और किसी भी भ्रष्टाचार की शिकायत पर तत्काल एक्शन लेंगे, फिर चाहे उनके सामने कोई तुर्रम खां ही क्यों न हो, और साथ ही ये भी दुआ है कि हमारे लोकपाल रूपी सीसीटीवी में कभी शार्ट सर्किट न हो और न ही किसी जहां पनाह की तौलिया सुखाने के लिये सीसीटीवी पर डाली जाये, फिर असली मक़सद पूरा होने में कोई माई का लाल हो या काला, या गोरा कोई नहीं रोक सकता, अब भ्रष्टाचारियों की दाल नहीं गलने वाली नहीं |
अंक 131 : एक ‘करेला’ जो आज ‘नीम’ पर चढ़ गया…, बूझो कौन ? (24 मार्च 2019)
एक तो था ही कड़वा ऊपर से नीम पर चढ़ गया! अब कुछ पता नहीं, कब तक पेड़ पर से उतरेगा?
साहिबान, हमारे शहर में एक करेला था, आप ये मत कहियेगा जनाब कि करेला वो भी शहर में, ये क्या माजरा है, अरे हुज़ूर, माजरा कुछ नहीं है बस करेले की कहानी पर फोकस करिये तो फ़ायदा महसूस होगा, तो साहब वो करेला अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आता था इसलिए मशहूर भी था, जिसके मुंह भी लगता उसका मुंह कड़वा हो जाता, फिर चाहे शहर वाला हो या गांव वाला कोई भी उससे मुंहज़ोरी नहीं करना चाहता था, उसमें बस एक गुण था, वो मिलता हर जगह था, चाहे गिनती में एक हो या दो लेकिन मिल ज़रूर जाता था, इसलिए इसी ख़ूबी की वजह से गाँव- देहात के लोग तो उसे भगवान से कम नहीं मानते और ये बात किसी ने एक दिन करेले को बता दी, फिर क्या था ? भाव बढ़ गये तब से उसके, और इन्हीं भावों की वजह से करेले का सर सातवें आसमान पर रहता और पैर सातवीं ज़मीन पर, अगर उसका बस चलता तो आठवीं, नौवीं या दसवीं ज़मीन भी कम पड़ जाती उसके लिये, अब जिसके सर, पैर, दिमाग़ अपनी-अपनी जगह पर न हो वो भला कब तक ख़ैर मनाता, हो गयी एक दिन, टांय-टांय फिस्स, जिस गांव-देहात के लोग करेले को भगवान मानते उन लोगों को भी आईडिया आ गया कि करेले के नाम बड़े और दर्शन छोटे हैं, और उन्होंने अपने घरों से करेले की पुरानी से पुरानी बेलों को भी उतारना शुरू कर दिया, देखते ही देखते करेले की गुणवत्ता पर से लोगों का भरोसा उठने लगा, सब एक ही ज़ुबान में बस एक ही बात बोलने लगे, जब इस करेले की बेल *भगवान से न लगे* तो हम तो फिर भी इंसान ठैरे, और धीरे -धीरे करेले के चाहने वालों की गिनती कम होती चली गयी, फिर एक दिन तो ऐसा आया बाई गॉड, वो कहते हैं न ऊपर वाले की लाठी में आवाज़ नहीं होती, बस एक दिन पड़ गयी भगवान की बेआवाज़ लाठी और लग गयी करेले की फसल में आग, ऐसे में उन लोगों को उस आग में हाथ सेंकने का मौक़ा मिल गया जिन लोगों के मुंह का स्वाद करेले ने कड़वा किया था, देखते ही देखते सब कुछ जलकर खाक हो गया, हाँ करेला फिर भी बच गया क्योंकि करेला था बहुत शातिर, जैसे ही आग लगी वो अपने कुछ साथियों के साथ नीम के पेड़ पर चढ़ गया, फिर क्या था उसके चाहने वाले और न चाहने वाले सब यही कहने लगे कि देखते हैं, आग बुझने के बाद पहले जैसा कड़वा स्वाद अब कब तक आएगा ? वरना करेले की बला से, उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है, वो तो था ही कड़वा अब नीम पर चढ़ा है ही, सीधा सा फंडा है जिनको ज़्यादा ही कड़वा लगे वो बाज़ार जाओ और अपने आइडिया से कुछ मीठा खरीदकर खाओ और जिओ जी भरके |
अंक 130 : आज मजदूरों के दर्द पर (13 मार्च 2019)
ज़िम्मेदारी बनी मजबूरी !
मजबूरी बनी मज़दूरी !
न कोई न्यूनतम वेतन !
न कोई निश्चित काम के घंटे !
न कोई अवकाश !
न कोई त्यौहार !
न कोई पेंशन !
न कोई बीमा !
साहिबान, आज फिर हम बात करेंगे उसी मज़दूर तबक़े की जिसे इंसान तो कहा जाता है लेकिन उसके साथ इंसानों जैसा बर्ताव नहीं किया जाता, अक्सर आपने देखा होगा किसी दुकान में, किसी रेस्टौरेंट में, किसी छोटी सी फैक्टरी में या किसी घर में काम करते हुये नौकरों को, हालाँकि, बड़ी -बड़ी फैक्ट्री, कारखानों में तो फिर भी नियमों- उपनियमों का पालन हो जाता है, लेकिन जिस जगह की हम बात कर रहे हैं, वहां न कोई नियम होता है, न कोई पालन, वहां होती है फ़क़त काम करने वाले की मजबूरी और काम पर रखने वाले की तानाशाही, शहरों की इन दुकानों में, होटलों में कोई श्रम विभाग का अधिकारी झांकने तक नहीं जाता, कहीं – कहीं तो इन जगह पर काम करते हुए आपको छोटे -छोटे मासूम बच्चे जिनकी उम्र खेलने कूदने और पढाई करने की होती है वे बच्चे अपने मालिकों की सेवा करते दिख जाएंगे, इस सेवा के बदले उनके मालिकों की उनपर ये मेहरबानी होती है कि न तो उनकी कोई न्यूनतम मज़दूरी तय होती है, न उनको कोई उचित वेतन मिलता है, और न ही उनको कोई अवकाश दिया जाता है, 24 घंटे में से लगभग 16 घंटे काम ही काम, यहां तक कि उनके हिस्से से त्यौहारों की रौनक़ भी छीन ली जाती है, न ही काम के घंटे तय होते हैं, न दुर्घटना होने पर कोई बीमा या मदद मिलती है, मिलती है तो बस ज़िल्लत और रुस्वाई, छोटी सी ग़लती पर मालिक की गालियां और मार खा खाकर यहां काम करने वाले बच्चे कब जवान हो जाते हैं और एक ही जगह काम करते हुये ये कब बूढ़े हो जाते हैं, कुछ पता नहीं लगता, जब तक इनके हाथ पैर सही सलामत होते हैं इनको थोड़े बहुत पैसे मिलते रहते हैं लेकिन जैसे ही ये बीमार या किसी दुर्घटना में घायल हो जाते हैं वही धन्ना सेठ मालिक उन्हें पहचानने तक से इंकार कर देते हैं, उस वक़्त उस बेचारे ग़रीब पर क्या बीतती होगी जिसने बचपन से लेकर जवानी और बुढ़ापा तक उस ज़ालिम सेठ की सेवा में लगाया हो, ऐसी हालत में आखिरकार वो बेचारा या तो अपने घर लौट जाता है या यूँ ही दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर हो जाता है, ख़ैर, मज़दूरों के क्या अधिकार हैं, उनके बारे में जानते हैं :- मजदूरी के अधिकार
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम,1948 में विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए न्यूनतम मजदूरी की दरें तय की गयी हैं।
1- मजदूरी के बारे में अपने नजदीकी श्रम कार्यालय में से कोई भी व्यक्ति किसी भी वर्ग की न्यूनतम मजदूरी का पता कर सकता है ।
2- अगर नियोक्ता न्यूनतम मजदूरी से कम मजदूरी दे रहा है तो श्रम निरीक्षक के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं ।
3- अगर कर्मचारी न्यूनतम मजदूरी से कम रकम पर काम करने को तैयार हो जाए, तो भी नियोक्ता का यह कर्तव्य है कि वह उसे न्यूनतम मजदूरी दे।
मजदूरी का भुगतान
1-मजदूरी का भुगतान हमेशा नकद और पूरा होना चाहिए।
2-मजदूरी का भुगतान हर हालत में अगले महीने की दस तारीख तक कर दिया जाना चाहिए।
3-मजदूरी में कोई कटौती कानून के मुताबिक ही होनी चाहिए।
समान कार्य के लिए समान मजदूरी
समान वेतन अधिनियम, 1976 में एक ही तरीके के काम के लिए समान वेतन का प्रावधान है।
1-अगर कोई महिला अपने साथ काम करने वाले पुरुष जैसा ही काम करती है तो उसे पुरुष से कम वेतन नहीं दिया जा सकता है।
2-महिला (कानूनी पाबंदी वाली नौकरियों को छोड़कर) और पुरुष में नौकरी में भर्ती और सेवा शर्तों में कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा।
काम करने के निश्चित घंटे
1-किसी कर्मचारी से रोज नौ घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जाना चाहिए।
2- नौ घंटे से ज्यादा काम के लिए, अतिरिक्त मजदूरी दी जानी चाहिए।
3-कर्मचारी को सप्ताह में एक दिन वेतन-सहित अवकाश जरुर मिलनी चाहिए।
कर्मचारियों को मुआवजा
कामगार मुआवजा अधिनियम, 1923 के अंदर्गत कर्मचारियों को अनेक परिस्थितियों में मुआवजा पाने का अधिकार है।
1-कर्मचारी को ड्यूटी के दौरान किसी दुर्घटना में चोटिल होने पर मुआवजा पाने का अधिकार ।
2-काम पर आते या काम से घर जाते समय दुर्घटना होने पर भी कर्मचारी को मुआवजा पाने का अधिकार।
3-नियोक्ता का काम करने के दौरान दुर्घटना होने पर भी मुआवजा पाने का अधिकार ।
4-काम की प्रकृति की वजह से अगर कर्मचारी को कोई बीमारी लगती है तो कर्मचारी को मुआवजा पाने का अधिकार है।
5-लेकिन अगर बीमारी काम छोड़ने के दो साल बाद लगती है तो कर्मचारी को मुआवजे का अधिकार नहीं है।
6-अगर दुर्घटना या बीमारी से कर्मचारी की मौत हो जाती है तो उसके आश्रित संबंधी को मुआवजा दिया जायेगा।
मुआवजे का हकदार
1-फैक्ट्रियां, खानें, रेलवे , डाक, तार, निर्माण, इमारतों का रख-रखाव,
2-किसी इमारत में इस्तेमाल , परिवहन तथा बिक्री के लिए सामान रखना, जहां 20 से ज्यादा कर्मचारी हों।
3-टैक्टर अथवा अन्य मशीनों से खेती-बाड़ी, इसमें मुर्गी फार्म, डेयरी फार्म आदि शामिल हैं।
4-बिजली की फिटिंग के रख-रखाव का काम।
किस चोट पर मुआवजा
1-ऐसी चोट जिससे मौत हो जाए, शऱीर का कोई अंग कट जाए या आंख की रोशनी चली जाय आदि।
2-चोट की वजह से लकवा या अंग-भंग जैसी हालत हो जाए, जिसकी वजह से व्यक्ति रोजी-रोटी कमाने लायक नहीं रहे।
3-ऐसी चोट जिसकी वजह से कर्मचारी कम से कम तीन दिन तक काम करने के लायक ना रहे।
किस चोट पर मुआवजा नहीं
1-शराब पीने या नशीली चीजों के सेवन से दुर्घटना हुई हो।
2-कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए बने किसी नियम या निर्देश का जान-बूझकर उल्लंघन करने से हुई दुर्घटना।
3-कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध उपकरणों का जानबूझकर इस्तेमाल नहीं करने से हुई दुर्घटना।
मुआवजे लिए प्रमाण
1-कर्मचारी को सबसे पहले अपनी मेडिकल जांच करा लेनी चाहिए। जांच की रिपोर्ट की कॉपी अपने पास रखें।
2-कर्मचारी दुर्घटना की रिपोर्ट नजदीकी थाने में लिखवा देना चाहिए । रिपोर्ट में चोट का पूरा ब्योरा होना चाहिए।
3-दुर्घटना के चश्मदीद गवाह होने चाहिए।
महिला कर्मचारियों को विशेष अधिकार
1-फैक्ट्रियों में महिलाओं के लिए अलग प्रसाधन कक्ष होना चाहिए।
2-अगर किसी फैक्ट्री में 30 से ज्यादा महिला कर्मचारी हों तो वहां बच्चों के लिए शिशुगृह की व्यवस्था होनी चाहिए।
3-फैक्ट्री में काम सवेरे 6 बजे से शाम 7 बजे के बीच होना चाहिए।
4-मशीन में तेल डालने या साफ कराने का काम नहीं कराया जाना चाहिए।
5-एक सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जाना चाहिए।
6-लगातार 5 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जाना चाहिए।
7-खानों में जमीन के नीचे काम करने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए |
मुआवजे का दावा
1-दुर्घटना होने पर सबसे पहले नियोक्ता को नोटिस दें, नोटिस में कर्मचारी का नाम, चोट के कारण , तारीख और स्थान लिखें।
2-अगर नियोक्ता मुआवजा नहीं देता या पर्याप्त मुआवजा नहीं देता है तो कर्मचारी लेबर कमिश्नर को आवेदन दे।
3-आवेदन में कर्मचारी का पेशा, चोट की प्रकृति, चोट की तारीख, स्थान , नियोक्ता का नाम, पता नियोक्ता को नोटिस देने की तिथि, अगर नियोक्ता को नोटिस नहीं भेजा हो तो नोटिस नहीं भेजने का कारण का उल्लेख करें ।
3-यह आवेदन दुर्घटना होने के 2 साल के अंदर दे दिया जाना चाहिए। विशेष हालात में 2 साल के बाद भी आवेदन किया जा सकता है।
4-कुछ मामलों में मुआवजा श्रम आयुक्त के जरिये ही दिया जा सकता है। जैसे, कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में, उसके संबंधियों को श्रम आयुक्त के माध्यम से ही मुआवजा दिया जा सकता है।
महिलाओं का मातृत्व लाभ
मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 में महिला कर्मचारियों के लिए कुछ विशेष लाभ दिए गए हैं।
1-प्रसव के पहले और बाद में छह-छह सप्ताह का पूरे वेतन का अवकाश( 12 सप्ताह का अवकाश प्रसव के बाद भी लिया जा सकता है, इस अवधि का वेतन दे दिया जाना चाहिए)
2-गर्भस्राव हो जाने पर छह सप्ताह का अवकाश।
3-गर्भावस्था, प्रसव या गर्भस्राव की वजह से अस्वस्थ हो जाने पर वेतन सहित एक महीने का अतिरिक्त अवकाश।
4-अगर नियोक्ता के संस्थान में प्रसव से पहले तथा प्रसव के बाद की चिकित्सा सुविधाएं नहीं हैं तो चिकित्सा बोनस दिया जाना चाहिए।
5-शिशु के 15 महीने का होने तक रोजाना काम के बीच सामान्य अवकाश के अलावा, शिशु को स्तनपान कराने के लिए दो बार ब्रेक दिया जाना चाहिए।
6-गर्भावस्था के अंतिम महीने में महिला कर्मचारी से भारी काम नहीं कराया जाना चाहिए।
7-अगर महिला की प्रसव के बाद मौत हो जाती है तो नियोक्ता को उसके परिवार को 6 सप्ताह का वेतन देना होगा।
8-जबकि नवजात शिशु की मौत हो जाने पर , शिशु की मृत्यु हो जाने तक की अवधि तक का ही वेतन देना होगा।
9-जिस महिला ने प्रसव से पहले, पिछले 12 महीनों में कम से कम 80 दिन नियोक्ता के संस्थान में काम किया है, वहीं महिला इन लाभों को पाने की अधिकारी है।
गर्भावस्था का नोटिस
1-महिला कर्मचारी को प्रसव की संभावित तिथि, छुट्टी लेने की संभावित तिथि और प्रसव के दौरान किसी दूसरी जगह नहीं करने के विवरणों के साथ गर्भावस्था का नोटिस देना चाहिए।
2-यह नोटिस प्रसव के बाद भी दिया जा सकता है।
3-अगर किसी महिला ने गर्भावस्था का नोटिस नहीं या है तो इस आधार पर नियोक्ता उसे मातृत्व से जुड़े लाभ और सुविधाएं देने से मना नहीं कर सकता है।
शिकायतों का निपटारा
1-अगर नियोक्ता कर्मचारी को उसके लाभ नहीं देता है तो वह श्रम कार्यालय अथवा श्रम आयुक्त के पास शिकायत कर सकता है।
2-500 से ज्यादा कर्मचारियों वाली फैक्ट्री तथा खान में और 300 से ज्यादा कर्मचारियों वाले बागान में कल्याण अधिकारी की नियुक्ति अनिवार्य है।
3-केंद्र सरकार के अनेक कार्यालय, अस्पताल तथा अन्य कल्याण अधिकारी नियुक्त करते हैं। जहां कर्मचारी शिकायत कर सकते हैं।
आख़िर में, हमारा सरकार व प्रशासन से यही सवाल है कि इतने नियम अधिनियम बनाने के बावजूद भी अगर हमारे देश में मज़दूरों, कामगारों, कर्मचारियों आदि की हालत में सुधार नहीं आता तो क्या महज़ फाइल भरने के लिये ही बनाये गये हैं उपरोक्त नियम / अधिनयम ? जब तक हमारे समाज से धन्ना सेठों की तानाशाही खत्म नहीं हो जाती तब तक हमारे समाज के मासूम बच्चों और ऐसे ही न जाने कितने निजी कर्मचारी शोषण का शिकार होते रहेंगे और ये तानाशाही तब ही खत्म होगी जब सरकार और प्रशासन में बैठे हुये लोग जागेंगे और जागकर उक्त नियमों व उप नियमों का पालन करवाएंगे, फिर बनेगा हमारा उदयमान भारत, खुशहाल भारत |
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 129 : आज पलायन के दर्द पर (12 मार्च 2019)
एक सफ़र : मजबूरी से मज़दूरी तक ! आज़ादी से ग़ुलामी तक ! बेरोज़गारी से बीमारी तक !
साहिबान, एक अर्सा पहले की बात है, सर्दी अपनी उम्र की ढलान पर मौसम से अपना रौब खो रही थी, गर्मी नवजात शिशु की तरह हर दिल को भा रही थी, बस ऐसे ही किसी सुनहरी सुबह को मेरा दोस्त अपने पहाड़ी पुस्तैनी गांव में अपनी माँ से उस कच्चे गोबर वाले घर में माँ को छोड़कर शहर जाने की बात करने लगा, उसने गांव के ही किसी लड़के से शहर के ठाट -बाट की बात सुनी थी, बस तभी से उसका मन शहर की चकाचौंध को अपना हमदर्द समझ रहा था, बच्चे चाहे कितनी ही चिकनी चुपड़ी बातों से माँ को बेहलाने की कोशिश करें माँ समझ तो जाती है लेकिन अपने मासूम बच्चे की आँखों में जो उम्मीदों की चमक वो देखती है बस वही देखकर ख़ामोश रह जाती है और जब नए परिन्दें उड़ने के लिये अपने पंख फड़फड़ाते हैं तो अपने बच्चों को दर्द में देखकर परिंदों की माँ को भी दर्द होता है लेकिन ख़ुशी इस बात की ज़्यादा होती है कि आज से मेरा बच्चा आसमान में अपनी परवाज़ खुद भरेगा, हर तूफ़ान का सामना खुद करेगा, उस वक़्त माँ बच्चे को हौसला देती है और वही हौसला, मेरे दोस्त को शहर ले आया, जो पहाड़ी पर ही बसा हुआ था, जहां बारह महीने सैलानी घूमने आते, इस लिहाज़ से वहां होटल, रेस्टौरेंट, दुकाने बहुत ज़्यादा थी, जिस दोस्त ने मेरे दोस्त की आँखों में सपने भरे थे, उसी ने अपने बदले एक दुकान में उसे बतौर नौकर रखवा दिया और ख़ुद को मक्खन में से छुरी की तरह अलग करता हुआ, न जाने कहाँ ग़ायब हो गया, ख़ैर, जो चला गया उसका भगवान भला करे उसके लिये दुआ की और खुद लग गया मालिक की सेवा में, उसने दुकान को सुबह ठीक नौ बजे खोलना शुरू कर दिया, दोपहर में अपने मालिक का खाना उसके घर से लाकर देना और पिछली रात का बचा हुआ खाना खुद खाकर दुकान पर वापस काम पर लग जाना, रात को 11 बजे तक दुकान बंद करके मालिक के घर दिन का बचा खाना खाना और गोदाम में जाकर चुपचाप सो जाना, बस यही दिनचर्या में कब दिन, महीने, साल बीत गये पता नहीं चला, क्यूंकि उसमें सहने की ताक़त हर ज़ुल्म से ज़्यादा बड़ी थी, त्यौहार भी नौकरी की भेंट चढ़ते चले गये, हाँ उसे तसल्ली इस बात की रहती कि गांव जाने वाली केमू की बस में अपनी माँ को वो हर महीने पैसे टाइम से भिजवा देता, जैसे तैसे सबकुछ ठीक चल रहा था कि एक दिन एक तेज़ रफ़्तार गाड़ी ने उसे टक्कर मार दी और वो बेहोश हो गया, जब उसे होश आया तो सरकारी अस्पताल में था और उसके पैर पर प्लास्टर, सर पर पट्टी और हाथ से ख़ून की बोतल चढ़ रही थी, वो घबरा गया और आसपास देखा, वहां मरीज़ों के अलावा कोई नहीं, फिर एक नर्स आयी उसने बताया आपका एक्सीडेंट हो गया था, गाड़ी वाला भाग गया और आपको कुछ लोग यहां लेकर आये, घर का नंबर दे दो, हम आपके घर वालों को बता देते हैं, माँ को परेशान नहीं करना चाहता सोचकर उसने कोई जवाब नहीं दिया और जब पैर का प्लास्टर खुला तो वो अपने मालिक के पास पहुंचा जहाँ उसके जैसा कोई गांव का दूसरा लड़का काम पर लग गया था, उसने मालिक को सलाम किया लेकिन मालिक ने उसे ग़ैरों सी नज़रों से देखा और कोई तवज्जो नहीं दी, कुछ देर वो उसका चेहरा देखता रहा लेकिन मालिक अपने नोटों की गड्डियां गिनने में इतना मसरूफ़ था कि वो मासूम लड़का कब उसकी आँखों से ओछिल हो गया कुछ पता नहीं चला, शायद मालिक चाहता भी यही था, गांव की गाड़ी में बैठकर वो वापस गांव की पगडंडियों पर लड़खड़ाता हुआ अपने गोबर से बने कच्चे घर के सामने खड़ा होकर सोचता है कि जब वो अपने घर से निकला था तब उसके पास उम्मीदें, उमंगें, जोश और जुनून था लेकिन आज न सेहत है, न पैसा, न कोई ख़्वाब, साथ है तो बस ईमानदारी, लगन और मेहनत जिसके दम पर वो अपनी माँ की दुआओं से फिर सेहतमंद हुआ और अपने पुश्तैनी खेत में खेती करने लगा, आज ऊपर वाले ने अपनी मेहर उस पर बरसा रखी है, गोबर का घर पक्का दो मंज़िला बन गया, शादी हो गयी, उसकी माँ अपने पोते को बड़े नाज़ से खिलाती है भरा पूरा परिवार हंसी ख़ुशी अपनी ज़िंदगी अपने गांव में बिता रहा है।
“पलायन का अंत करें अपना गांव रोशन करें”
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर..
अंक 129 : महिलाओ सहना छोड़ो-कहना सीखो… (8 मार्च 2019)
ज़िंदगी तो है अमल सब्र के क़ाबू में नहीं, नब्ज़ का गर्म लहू, ठन्डे से आंसू में नहीं, उड़ने खुलने में है ख़ुश्बू, ख़में गेसू में नहीं, जन्नत एक और है, जो मर्द के पहलू में नहीं, उसकी आज़ाद रविश पर ही मचलना है तुझे, जिस मैं जलता हूँ, उसी आग में जलना है तुझे, क़द्र अब तक तेरी तारीख़ ने जानी ही नहीं, रोशनी भी तेरी आँखों में पानी ही नहीं, हार तूने कभी तक़दीर से मानी ही नहीं, हर अदा तेरी क़यामत है जवानी ही नहीं, अपनी तारीख़ का उन्वान बदलना है तुझे, उठ मेरी जान, मेरे साथ ही चलना है तुझे।।।
साहिबान, कैफ़ी आज़मी साहब की नज़्म के साथ आज अपनी बात आपके सामने पेश करने की हिम्मत कर रहा हूँ, 08 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है, बेशक़ मनाना भी चाहिये। लेकिन क्या सिर्फ़ एक दिन हम महिला सम्मान, महिला सम्मान की झूठी दलीलें पेश करके नहीं रह जाते, फिर उसके अगले दिन से ही जैसे अक्सर होता आया है, सब नॉर्मल हो जाता है, लोग उसी ढर्रे पर चलने लगते हैं, बाज़ार, गली, मोहल्लों में हर चौराहे पर भूखे भेड़ियों की तरह औरत ज़ात को लार टपकाते देखने लगते हैं, यहां हम हर मर्द ज़ात को गुनाहगार साबित नहीं कर रहे बल्कि हमीं में से छिपे हुये कुछ हैवान होते हैं, जो मासूम बच्चियों तक को अपनी हवस का शिकार बना लेते हैं, उनकी नज़र में औरत ज़ात के मायने महज़ भोग विलास की वस्तु है, हमारा समाज जब तक इन गिद्धों से निजात नहीं पा लेगा तब तक हमें महिला सम्मान, महिला सम्मान चीख – चीखकर दिखावा करने की ज़रूरत नहीं है, औरत ज़ात किसी सम्मान की मोहताज नहीं है, अरे जनाब, हमें तो अपने देश में हुये निर्भया कांड से भी सीख नहीं मिली, उसके बाद भी न जाने कितनी निर्भया हैवानों की हैवानियत का शिकार हुईं, जब तक हम अपनी सोच को बड़ा नहीं कर लेते हमें कोई हक़ नहीं, महिला दिवस पर सफ़ेद कुर्ता पहनकर बड़ी बड़ी बातें करने की, ऑफिस का माहौल या कॉलेज का सब जगह छोटी सोच वाले ठरकी क़िस्म के लोग मिल ही जाएंगे, ख़ैर, हमें ख़ुशी इस बात की है कि आज इतनी सुलगती फ़िज़ा में भी कुछ दिल को ठंडक देने वाली हिम्मती लड़कियां आगे आ रही हैं जो और लड़कियों को अपना हक़ मांगना नहीं छीनना सीखा रही हैं, जो बुलेट पर घूमती हैं, लड़कों के जैसे कपड़े भी पहनती हैं और कभी -कभी तो सिगरेट के कश भी मार लेती हैं, कुल मिलाकर इन परवाज़ भरने वाली लड़कियों को एक तब्क़ा भले ही उनके पीठ पीछे कुछ भी कहता फिरे, लेकिन जिन हैवानों ने धरती पर ही नरक बना दिया है, उन हरामखोरों का मुंह तोडना भी ये दिलेर लड़कियां जानती हैं, इसलिये बाक़ी सीधी -सादी लड़कियों चलना नहीं उड़ना सीखो, बाइक पर चलने वाली इन लड़कियों से थोड़ा टशन किराये पर ले लो और फिर देखना कोई भी बुरी नीयत वाला पास आना तो बहुत दूर तुम्हारी तरफ़ आँख उठाकर नहीं देखेगा, इसलिये सहना छोड़ो, कहना शुरू करो तभी हम असल मायनों में एक नया भारत देखेंगे, जब लड़की को कमज़ोर नहीं समझा जाएगा, उसे भी हर जगह उसी अनुपात में इज़्ज़त मिलेगी जितनी किसी मर्द को मिलती है, पैर से मोच निकालो और दिमाग़ से छोटी सोच निकालो, फिर अगले साल देखना असली वाला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस जब एक भी बलात्कार की घटना हमारे देश या विश्व में नहीं होगी, और हमारे समाज की लड़कियां निडर होकर तितली बनकर उड़ रही होंगी वो होगा हर महिला के लिये असली सम्मान, सच्चा सम्मान | आइये एक नये युग की शुरुआत करें, आग़ाज़ करें।
अंक 128 :’शत्रु की संपत्ति’ के आखिर कौन हैं ‘शत्रु’ ? (7 मार्च 2019)
आकाश से गिरी बिजली ! दुश्मन न करे दोस्त ने वो काम किया है !
साहिबान, हमारे शहर में एक बेहद पुरानी इमारत मौजूद है, जिसे दुश्मन की मिल्कियत कहा जाता है, उसका कुछ हिस्सा फिर से जलकर खाक हो गया, सुना है उस बारे में ज़िले के मुखिया ने जाँच के हुक़्म दिये हैं, ख़ैर, हमारे मन मंदिर में तो आज तक किसी जाँच ने कोई घंटी नहीं बजाई हों, फिर ज़्यादा दूर ही क्या जाना 20 रुपये का रिक्शा करो और पहुंच जाओ वहीं जहाँ हमारे ज़िले के मुअज़्ज़िज़ लोग बैठते हैं, कुछ साल पहले भी आग लगी थी, तब भी तत्कालीन साहब ने इसी टाइप वाली जाँच के आदेश दिये थे। वो जाँच कहाँ तक पहुंची कोई कंडक्टर बताएगा या उस ड्राइवर से पूछें जिस गाड़ी में जाँच आ रही है। हो सकता है वो हमारी तरह पैदल ही हो शायद इसलिये कहीं टाइम से नहीं पहुंच पा रही। वाह भई, हम तो आज तक उसी चौखट पर पलकें बिछाये बैठे हैं कि क्या पता कहीं से कोई जाँच पायल छनकाती हुई जीवन में आ जाये। सुबह से शाम दिन रात सब गुज़र गये लेकिन कोई उम्मीद लेकर नहीं आया। अब तो ये जांचें भी बेवफ़ा साबित होती जा रही हैं…। ख़ैर, जाँच में स्टेमिना तगड़ा होता है लम्बी चलती हैं। हमें तो ख़ुफ़िया बात ये भी पता लगी है कि दुश्मन मुल्क़ के पहले मुखिया इस दुश्मन जायदाद में जब ये शानदार होटल हुआ करता था आये भी थे। कुछ लोगों की मनहूसियत ऐसी शदीद तरीन होती है कि हज़ार उल्लुओं की मनहूसियत भी कम पड़ जाये। शानदार इमारत का उजड़ना लाज़िमी था, ख़ुदा का शुक्र है हमारे मुल्क़ को ऐसी मनहूसियत से तो निजात मिली…। ख़ैर आख़िर में, हमारा शासन – प्रशासन से एक छोटा सा सवाल है कि क्या शत्रु सम्पत्ति का मतलब ये है कि उसमें शराबियों, नशेड़ियों, जुआरियों का अड्डा बनाने की आज़ादी दे दी जाये ? क्या शत्रु सम्पत्ति का मतलब ये है कि उसमें पार्किंग बनाकर पैसा कमाया जाये ? क्या शत्रु सम्पत्ति का मतलब ये है कि कोई भी आगज़नी करके चले जाये और हम उसका ठीकरा या तो आकाश पर फोड़ें या जाँच का शिगूफा छोड़कर ज़िम्मेदारी से हाथ झाड़ लें ? जनता ख़ामोश हैं, लेकिन सब देख रही है…।
आख़िर क्या है नया शत्रु संपत्ति क़ानून ? आइये जानते हैं :- 1962 (चीन के साथ) , 1965 और 1971 (पाकिस्तान के साथ) के युद्ध के बाद भारत से जाने वाले वारिस अब भारतीय संसद के बाद 1968 के कानून में दुश्मन संपत्तियों पर स्वामित्व का दावा करने में समर्थ नहीं होंगे, देश में दुश्मन संपत्तियों को शासित कर रहे हैं । 14 मार्च को लोकसभा के बाद शहीजा संपत्ति (संशोधन और मान्यन) विधेयक, को संसद ने मंजूरी दे दी थी, जिसमें आवाज़ वोट के ज़रिए विधेयक पारित किया गया था। संशोधन विधेयक को राज्यसभा से पहले ही मंज़ूरी मिल गई है। कानून का उद्भव विश्व युद्ध -2 की शुरुआत में, भारतीय कानून रक्षा अधिनियम, 1939 को भारत सरकार के नियम, 1939 को लागू करने के लिए अधिनियमित किया गया था। नियमों के तहत, भारत, मुंबई, अधिकारियों द्वारा बनाई गई एक कार्यालय के लिए दुश्मन संपत्ति का संरक्षक, शांति बहाल होने तक दुश्मन संपत्तियों को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। हालांकि, भारत के लिए दुश्मन संपत्ति के संरक्षक का कार्यालय 1945 में युद्ध समाप्त होने के बावजूद इन गुणों का प्रशासन रखता था। 1962 में भारत के साथ चीन के युद्ध के बाद, और 1965 और 1971 में पाकिस्तान के साथ दो युद्धों के बाद, कार्यालय ने दुश्मन संपत्तियों का अधिग्रहण किया भारत के रक्षा के नियम 1968 में, भारत सरकार ने एनी प्रॉपर्टी अधिनियम बनाया, जिसमें यह निर्धारित किया गया कि सभी दुश्मन संपत्ति को संरक्षक के नियंत्रण में जारी रहेगी। हाल ही में पारित विधेयक इस 50 वर्षीय विधेयक के कुछ प्रावधानों में संशोधन करता है अब क्या बदलाव है? पुराने कानून में संशोधन करने के लिए यह राशि होगी: जैसा कि विधेयक पूर्वव्यापी प्रभाव में आता है (7 जनवरी 2016, जब अध्यादेश को पहले प्रख्यापित किया गया था) , उस समय से पहले हुई कोई भी दुश्मन संपत्ति हस्तांतरण और प्रावधानों का विरोध नए कानून का शून्य और शून्य हो जाएगा दूसरी ओर, कानून के कई प्रावधान 1968 से पूर्वव्यापी रूप से लागू होंगे, जब शत्रु संपत्ति अधिनियम अधिनियमित किया गया था। पुराने कानून के मुताबिक, दुश्मन की परिभाषाएं देश के रूप में शामिल हैं, जिनमें उनके नागरिक शामिल हैं, जो कि भारत के विरुद्ध बाहरी आक्रमण नई परिभाषा में दुश्मनों के कानूनी उत्तराधिकारियों को भी शामिल किया गया है भले ही वे भारत के नागरिक हैं या किसी अन्य देश और एक दुश्मन देश के नागरिक हैं, जिन्होंने अपनी राष्ट्रीयता बदल दी सिविल न्यायालयों को दुश्मन संपत्तियों के खिलाफ मामलों को सुनने के लिए अधिकृत नहीं किया जाएगा। संरक्षक के मामलों में हस्तक्षेप करने का उनका कोई भी कानूनी अधिकार नहीं होगा। केंद्र सरकार ने मालिक या किसी अन्य व्यक्ति को दुश्मन संपत्ति के हस्तांतरण के लिए संरक्षक का आदेश दे सकता था। अब, एक दुश्मन संपत्ति को स्वामी को वापस लौटाया जा सकता है, जब केंद्र सरकार ने यह घोषणा करने के बाद मंजूरी दे दी कि यह संपत्ति दुश्मन संपत्ति नहीं है। 1968 के कानून ने दुश्मन द्वारा दुश्मन की संपत्ति के हस्तांतरण पर रोक लगा दी, अगर यह सार्वजनिक हित के खिलाफ था या अगर वह संपत्ति के हस्तांतरण से संरक्षक को हस्तांतरण से बचने के लिए किया गया था। नया कानून एक दुश्मन द्वारा सभी स्थानान्तरण को प्रतिबंधित करता है संशोधित कानून का कहना है कि दुश्मन संपत्तियों को संरक्षक के साथ निहित रहना होगा, यहां तक कि दुश्मनों की मृत्यु के बाद भी; यहां तक कि अगर कानूनी उत्तराधिकारी एक भारतीय है; और यहां तक कि अगर दुश्मन अपनी राष्ट्रीयता बदलता है उत्तराधिकार के अधिकारों को नियंत्रित करने वाले कोई भारतीय कानून दुश्मन संपत्तियों पर लागू नहीं होंगे। संशोधित कानून के तहत, ऐसे अधिकारों में सभी अधिकार, शीर्षक और हितों संरक्षक के साथ झूठ होंगी। पुराने कानून के तहत, संरक्षक केवल “संपत्ति के संरक्षण के हित में” या “भारत में दुश्मन या उसके परिवार के रखरखाव को सुरक्षित रखने के लिए” दुश्मन संपत्ति बेच सकता है। अब, कस्टोडियन केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद दुश्मन संपत्ति का निपटान कर सकता है इससे पहले, संरक्षक को दुश्मन और उसके परिवार को बनाए रखना चाहिए था अगर वे संपत्ति से प्राप्त आय से भारत में हैं। कस्टोडियन अब दुश्मन और उसके परिवार के लिए उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार नहीं होगा। कई घोषणाएं 7 जनवरी, 2016 से शुरू होने वाले पांच बार के लिए अध्यादेश का विमोचन किया गया और पुन: प्रख्यापित किया गया। अध्यादेश 28 मई को तीसरी बार 31 मई को दूसरी बार 2 अप्रैल को दोबारा शुरू किया गया था। चौथी बार और पांचवें समय के लिए 22 दिसंबर को। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 123 के अनुसार, संसद के पुनर्मिलन के छह सप्ताह बाद एक अध्यादेश समाप्त हो जाता है यदि इसे किसी अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है या दोनों सदनों द्वारा अस्वीकृत किया जाता है 2010 में, यूपीए सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए एक अध्यादेश भी जारी किया है कि दुश्मन संपत्तियों को संरक्षक के नियंत्रण में रखा गया। हालांकि, उस वर्ष सितंबर में उस अध्यादेश समाप्त हो गया था। उस संबंध में एक विधेयक पारित करने के लिए तत्कालीन सरकार के प्रयासों में भी फल नहीं था। 1971 में ताशकंद घोषणापत्र के प्रावधानों के बारे में पता करने की आवश्यकता है, पाकिस्तान को 1971 में सभी दुश्मन संपत्तियों का निपटान किया गया था। भारत और पाकिस्तान ने 1965 युद्ध के बाद घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे और प्रत्येक पक्ष के नियंत्रण में दुश्मन संपत्तियों की वापसी की संभावनाओं पर चर्चा करने का निर्णय लिया था। कथित तौर पर, भारत भर में 16,000 से अधिक दुश्मन संपत्तियां हैं, लाखों करोड़ की कीमतें। पहचान प्रक्रिया अभी भी चल रही है। इसका मतलब यह है कि भविष्य में दुश्मन संपत्तियों की संख्या बढ़ सकती है |
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 127 : साक्षात्कार निजी व सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था पर (भाग-2)(5 मार्च 2019)
कमलेश कुमार गुप्ता अपर शिक्षा निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) व मुख्य शिक्षा अधिकारी, नैनीताल
संक्षिप्त परिचय :- बुंदेलखंड हमीरपुर के किसान / वार्त्तिक परिवार में जन्मे कमलेश कुमार की प्रारम्भिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से हुई। उसके बाद आपने स्नातक व स्नातकोत्तर बुंदेलखंड विवि से किया। आपकी प्रथम नियुक्ति मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग में व्याख्याता के पद पर हुई। नौकरी के दौरान ही आपने कड़ी मेहनत से उ.प्र.लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा सन् 1997 में उत्तीर्ण कर तत्कालीन उत्तर प्रदेश में रुद्रप्रयाग जिले के गणेशनगर के स्कूल में प्रधानाचार्य के पद को सुशोभित किया। SCERT गठित होने के बाद आप उप निदेशक के पद पर और उसके बाद टिहरी फिर हरिद्वार में रहे। दोबारा रुद्रप्रयाग में ज़िला शिक्षा अधिकारी बनकर गये। राज्य परियोजना जन कार्यक्रम व सर्व शिक्षा जैसे अभियानों में आपने विशेषज्ञ की भूमिका भी बखूबी निभाई। वर्तमान में आप अपर शिक्षा निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) तथा मुख्य शिक्षा अधिकारी के कर्तव्य को अत्यंत कुशलता से निर्वाह कर रहे हैं….।
विभिन्न पदों की ज़िम्मेदारी निभा चुके कमलेश कुमार से बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-
आज़ाद सवाल (06):- क्या निजी विद्यालय रि-एडमिशन के नाम पर पैसा वसूल कर सकता है ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- रि- एडमिशन के नाम पर या डोनेशन के नाम पर पैसा लेना प्रतिबंधित है, यदि किसी विद्यालय में ऐसा पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी, ऐसी शिकायत आप उप -शिक्षा अधिकारी, खंडिक्षा अधिकारी, ज़िला / राज्य शिकायत प्रकोष्ठ में भी कर सकते हैं |
आज़ाद सवाल (07) :- विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से ग्रीष्म / शीत कालीन अवकाशों की फीस लेना क्या वैध है या नहीं ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से ग्रीष्म / शीत कालीन अवकाशों की फीस लेना वैध है |
आज़ाद सवाल (08) :- इन्हीं अवकाशों के लिये स्कूल प्रबंधन द्वारा शिक्षकों का वेतन नहीं दिया जाता, क्या ये उचित है ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- गेस्ट टीचर, अनियमित अथवा सशर्त शिक्षकों का अवकाशों के दौरान का वेतन रोका जा सकता है लेकिन किसी भी हाल में नियमित शिक्षक का वेतन नहीं रुकना चाहिये |
आज़ाद सवाल (09):- क्या कोई विद्यालय स्टेशनरी/ यूनिफार्म आदि हेतु किसी दुकान विशेष के लिये अभिभावकों पर मौखिक / लिखित दबाव बना सकता है ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- इसके लिये सभी स्कूलों को आदेश हैं कि ऐसा करने के लिये कोई भी बाध्य नहीं करेगा, यदि ऐसी शिकायतें प्राप्त होती हैं तो जाँच कर स्कूल का रेजिस्ट्रेशन रद्द किया जाएगा।
आज़ाद सवाल (10) :- क्या कोई विद्यालय विभिन्न कार्यक्रमों के नाम पर जैसे स्पोर्ट्स डे, टीचर्स डे, एनुअल फंक्शन आदि के लिये अभिभावकों से पैसा वसूल सकता है ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- हर स्कूल में एक PTA गठित है, इस तरह के कार्यक्रमों के लिये अभिभावक – शिक्षक समिति अपनी बैठक में ये निर्धारित करते हैं कि किस कार्यक्रम की फीस कितनी होनी चाहिये अथवा नहीं होनी चाहिये |
साक्षात्कार समाप्त 🙏
अंक 126 : साक्षात्कार (भाग – 01) (4 मार्च 2019)
आज़ाद सवाल (01) :- वर्तमान शिक्षा प्रणाली किस व्यवस्था के अंतर्गत चल रही है?
कमलेश कुमार गुप्ता :- भारत सरकार का सर्व शिक्षा अभियान प्रारंभिक शिक्षा को सार्वभौमिक करने के उद्देश्य से चलया गया। उस उद्देश्य को हमने प्राप्त भी किया। शिक्षक शिक्षा हेतु समग्र शिक्षा अभियान चल रहा है जिसके अंतर्गत बच्चों का सर्वांगीण विकास हो रहा है और गुणवत्ता के साथ पूर्ण शिक्षा भी प्राप्त हो रही है। बच्चों की आर्थिक मदद हेतु धनराशि भी दी जा रही है और शिक्षकों को नये पाठ्यक्रम व पाठ्यचर्या के अनुसार भी अपडेट किया जा रहा है…।
आज़ाद सवाल (02) :- सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या दिन ब दिन कम होती जा रही है, इसका कारण क्या मानते हैं आप ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- शिफ़्टिंग इसका मुख्य कारण है। अभिभावकों की धारणा बनी है कि पब्लिक स्कूलों में सुविधाएँ अधिक हैं और शिक्षा का स्तर उच्च है जबकि हमारे सरकारी विद्यालयों में चकाचौंध नहीं है लेकिन अध्यापक मानकों के अनुसार योग्यताधारी और प्रशिक्षित हैं…।
आज़ाद सवाल (03) :- धीरे-धीरे सरकारी स्कूल बंद होने की कगार पर आ गये हैं। इसे रोकने के लिये क्या सुधारात्मक क़दम उठाये जा रहे हैं?
कमलेश कुमार गुप्ता :- सरकार ने सभी सरकारी विद्यालयों में निजी स्कूलों की भांति NCERT पाठ्यक्रम लागू करवाया है, ताकि बच्चे अंग्रेज़ी के साथ साथ किसी भी विषय में पीछे न रहें। इसकी कोशिश लगातार जारी है…।
आज़ाद सवाल (04):- इसके बावजूद भी क्यों सरकारी स्कूलों को मर्ज किया जा रहा है ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- उसके पीछे मुख्य कारण ये है कि विगत वर्षों में विभिन्न कारणों से अनावश्यक रूप से हर गली – मोहल्ले में नवीन विद्यालय खोले गये एवं विद्यालयों का उच्चीकरण किया गया। उस दशा में बच्चे सरकारी विद्यालयों तक पहुंच नहीं पा रहे हैं, इसलिये छात्र संख्या कम हो या अधिक सरकार द्वारा न्यूनतम अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराया जाना आवश्यक हो जाता है, जिसका व्यय भार अधिक होता है।अतः शासन द्वारा ये निर्णय लिया गया है कि जिन विद्यालयों की छात्र संख्या कम है, उन्हें नज़दीकी विद्यालय में मर्ज कर दिया जाये…।
आज़ाद सवाल (05) :- अब बात करते हैं, निजी विद्यालयों की। निजी विद्यालय किन मानकों के अनुसार प्रत्येक वर्ष फीस वृद्धि करते हैं ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- निजी स्कूल खोलने की NOC राज्य सरकार प्रदान करती है व स्कूल संचालन की CBSE, फिर शिक्षा का अधिकार अधिनियम -2009 के अनुसार स्कूल संचालित होता है। राज्य सरकार को निजी विद्यालयों के नियंत्रण हेतु नियम बनाने का अधिकार प्राप्त है। भारत में कुछ राज्यों ने फीस कण्ट्रोल एक्ट लागू कर दिया है लेकिन हमारे राज्य में अभी एक्ट बनाने की प्रक्रिया चल रही है, जिसे जल्द ही पूर्ण कर लागू किया जाएगा…।
साक्षात्कार जारी…🙏
अंक 125 : साक्षात्कार (भाग – 03) (2 मार्च 2019)
राजीव रौतेला (आइएएस) कुमाऊं आयुक्त व सचिव मुख्यमंत्री आदि
संक्षिप्त परिचय :- 2001 बैच के आइएएस अधिकारी राजीव रौतेला सर्वप्रथम उत्तर प्रदेश में ज़िलों में कलेक्टर रहे, तत्पश्चात आप देवी पाटन मंडल के प्रथम बार मंडलायुक्त नियुक्त हुये। उसके बाद नोएडा अथॉरिटी में भी आपने सेवायें दीं। तब से आपने विभिन्न पदों को अपनी कुशलता व कर्मठता से सुशोभित किया। वर्तमान में आप कुमाऊँ मंडलायुक्त के साथ-साथ सचिव मुख्यमंत्री, प्रशासक, बाज़पुर शुगर मिल और बागेश्वर स्थित अल्मोड़ा मैेग्नेसाइट लि. फैक्ट्री के चैयरमेन पद का कार्यभार बख़ूबी निभा रहे हैं।
विभिन्न पदों पर आसीन राजीव रौतेला से बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :- सवाल (10) से आगे…
आज़ाद सवाल (11):- कुछ समय पहले बुज़ुर्गों के लिये एक योजना चलती थी ‘मेरे बुज़ुर्ग मेरे तीर्थ’ क्या वो योजना अब भी क़ायम है ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- जी हाँ, अब उस योजना में कुछ विस्तार करते हुये उसका नाम ‘पं दीन दयाल उपाध्याय मातृ-पितृ तीर्थाटन’ योजना कर दिया गया है। तथा इसके अलावा बुज़ुर्गों के लिये वृद्धावस्था पेंशन योजना आदि चलाई जा रही है…।
आज़ाद सवाल (12):- उत्तराखंड के बेरोज़गार युवाओं का पलायन लगातार जारी है, उनके लिये कोई योजना ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- बेरोज़गारों को रोज़गार देने के उद्देश्य से ही उधम सिंह नगर में ‘वाटर स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन’ डेवेलप किया गया है। उसके अलावा वीर चंद्र गढ़वाली स्वरोज़ग़ार योजना ऐसी और भी कई योजनाओं से युवाओं को लाभान्वित किया जा रहा है …।
आज़ाद सवाल (13):- कुमाऊँ समेत पूरे राज्य में नशे का कारोबार फल फूल रहा है, उस पर नियंत्रण के लिये क्या प्रयास किये जा रहे हैं?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- इसके लिये हमारी उत्तराखंड पुलिस लगातार कोशिशें कर रही है। मेडिकल स्टोर्स में ड्रग इंस्पेक्टर लगातार छापामारी कर रहे हैं। हमारा पूरा प्रयास है कि नशा और उसका कारोबार जड़ से उखाड़ फ़ेंके…
आज़ाद सवाल (14):- निजी स्कूलों की मनमानी पर कब लगाम लगाई जाएगी।स्कूल खुलते ही स्कूलों के मीटर चालू हो गये हैं। अभिभावकों पर किसी निश्चित दुकान से स्टेशनरी और यूनिफार्म खरीदने का दबाव बनाने का खेल शुरू हो गया है। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- इस सम्बन्ध में निदेशक (अतिरिक्त ) शिक्षा विभाग को शिकायत की जा सकती है, यदि ऐसा पाया जाता है तो सम्बंधित स्कूल के विरुद्ध उचित कार्रवाई होगी, इसकी जाँच के आदेश आपके सामने अभी किये गये हैं…
आज़ाद सवाल (15) :- अंत में आख़िरी सवाल, छह ज़िलों में आपका पसंदीदा ज़िला कौन सा है ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- पूरा मंडल और उसके लोग मुझे बहुत पसंद हैं…
साक्षात्कार समाप्त.. 🙏
अंक 124 : साक्षात्कार (भाग – 02) (1 मार्च 2019) : सवाल (05) से आगे :-
आज़ाद सवाल (06):- साफ़ सफ़ाई की बात हम करते हैं लेकिन हमारे पास न कोई ट्रेन्चिंग ग्राउंड है और न ही कोई डंपिंग ज़ोन, ऐसे में नगर पालिका को भी परेशानी होती है और नालों की सफ़ाई के बाद सिंचाई खंड को भी, क्या प्रयास हो रहे हैं इस संबंध में ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- इस संबंध में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से बात हो गयी है, शीघ्र ही यहां ‘मग डिस्पोज़ल सिस्टम’ लागू होगा…
आज़ाद सवाल (07):- जनता ने अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचानी हो तो कैसे पहुंचाई जा सकती है ? मुख्यमंत्री कार्यालय कहाँ से संचालित होता है ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- मुख्यमंत्री कार्यालय नैनीताल और हल्द्वानी दोनों जगह से संचालित होतार और बुधवार को यहां नैनीताल स्थित कार्यालय में अवश्य बैठता हूँ, जनता अपनी बात मुझसे कह सकती है, मेरी अनुपस्थिति में मेरा स्टाफ़ जनता की शिकायत दर्ज कर लेगा…
आज़ाद सवाल (08):- सचिव मुख्यमंत्री होने के नाते ये जानकारी दीजियेगा कि वर्तमान में कितनी योजनाओं का लाभ उत्तराखंड की जनता को मिल रहा है ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- किसान पेंशन योजना, विधवा पेंशन योजना, विकलांग पेंशन योजना, इन जैसी तमाम पेंशन योजनाओं की पेंशन मार्च माह की पहली तारीख़ को उनके खातों में पंहुचा दी जाएगी…
आज़ाद सवाल (09):- हड़ताल आपकी नज़र में ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- सबका अपना रोष प्रकट करने का अपना तरीक़ा है, डीएम के माध्यम से बात होती है, हम उस दशा में शासकीय स्तर से कार्य करते हैं। निजी चिकित्सालयों की हड़ताल के दौरान सरकारी चिकित्सालयों ने बेहतर कार्य किया।
आज़ाद सवाल (10) :-
सरकारी अस्पताल आपकी नज़र में ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- बीडी पांडे नैनीताल में तो चिकित्सक ही नहीं है। जीबी पंत चिकित्सालय की हालत भी किसी से छिपी नहीं है, लेकिन मैं सुशीला तिवारी अस्पताल की सेवाओं से संतुष्ट हूँ। सघन निरीक्षण के दौरान हमने अपनी टीम के साथ सुबह 10 बजे सुशीला तिवारी अस्पताल में प्रवेश किया फिर शाम को 7 बजे बाहर निकले थे, अब भी समय-समय पर वहां का दौरा होता रहता है, और स्वास्थ्य लाभ में आयुष्मान योजना से भविष्य में जनता को बहुत लाभ मिलने वाला है…।
साक्षात्कार जारी…🙏
अंक 123, भाग-1 : सवाल 5 से पहले (28 फरवरी 2019)
आज़ाद सवाल (01):- 06 ज़िलों के मुखिया होने के नाते प्रत्येक ज़िले में आपके स्तर से अभी तक क्या अभूतपूर्व प्रयास किये गये?
राजीव रौतेला (आइएएस):- मंडल में कोसी नदी, गगास, राम गंगा, गरुड गंगा, उत्तरवाहिनी शिप्रा नदी को पुनर्जीवित (कायाकल्प) करने को प्रयास किये जा रहे हैं, जिसमें कोसी नदी में वास्तविक कार्य अभी चल रहा है, और नदियों के संरक्षण हेतु दिल्ली में प्रथम पुरस्कार हमारे मंडल को प्राप्त हुआ है। इसी संदर्भ के लिये 01 मार्च को नैनीताल-अल्मोड़ा वृहद् कॉन्फ्रेंस रखी गयी है। दूसरा सभी जनपदों के उच्चाधिकारियों को सख़्त निर्देश दिये गए हैं कि वो जन सामान्य के प्रति संवेदनशील रहें।बरसात व बर्फ़ के पानी को रिस्टोर करने के लिये प्रयास हो रहे हैं, भारत सरकार की योजना ‘एक जनपद एक डेस्टिनेशन’ के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है और पर्यटन को बढ़ाने के उद्देश्य से ही अल्मोड़ा और नैनीताल जनपद में विंटर कार्निवाल आरम्भ किया गया है…।
आज़ाद सवाल (02):- नैनीताल की सूखाताल झील को कृत्रिम झील के रूप में कायाकल्प करने की ख़बरें छायी रहती हैं, उसके लिये आपकी कार्य योजना क्या है ?
राजीव रौतेला (आइएएस):- सूखाताल झील को कृत्रिम झील के रूप में विकसित नहीं किया जाएगा बल्कि 3 मीटर खुदाई करके बॉउंड्री वॉल की जाएगी, जिससे बरसात का पानी इकट्ठा किया जायेगा और उस पानी को नैनी झील संरक्षण हेतु काम में लाया जायेगा…।
आज़ाद सवाल (03):- आपने कुमाऊं कमिश्नर पद ग्रहण करते ही नैनीताल की पार्किंग व्यवस्था को दुरुस्त करने की बात कही थी, आपके वो क़दम कहाँ तक पहुंचे हैं ?
राजीव रौतेला (आइएएस):- पार्किंग व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिये हमने विभिन्न क़दम उठाये हैं। सबसे पहले हम अशोक सिनेमा पार्किंग को मल्टी लेवल पार्किंग बनाने वाले हैं। दूसरा कैलाखान पार्किंग पर भी अनुमति प्राप्त हो गयी है। तीसरा नारायण नगर में भी पार्किंग की अनुमति मिल गयी है। चौथा रूसी बाईपास पर भी पार्किंग बनायी जाएगी। और सबसे बड़ी बात ये है कि नैनीताल के स्थानीय लोगों के लिये सुनहरा अवसर है यदि उनके पास गाडी खड़ी करने की जगह है तो वो प्राधिकरण की अनुमति प्राप्ति के पश्चात् स्वयं भी पार्किंग चला सकते हैं…।
आज़ाद सवाल (04):- आप पंत विवि के कुलपति भी रहे हैं, अपने कार्यकाल के दौरान आपने विवि को क्या विशेष योगदान दिया ?
राजीव रौतेला (आइएएस):- वैसे तो वहां का कार्यकाल मात्र एक से डेढ़ माह का रहा फिर भी वहां हमने छात्रों व शिक्षकों के हित के लिये प्रयास किये। इंटीग्रेटेड फार्मिंग को बढ़ावा दिया। किसान मेला व्यापक व सुनियोजित तरीके से आयोजित किया और भी बहुत सारे प्रयास विवि के उत्थान के लिये किये गये…।
आज़ाद सवाल (05) :- बलियानाला भू-स्खलन को रोकने के लिये क्या प्रयास किये जा रहे हैं ? और अब तक कितनी धनराशि शासन से मरम्मत कार्यों के लिये आवंटित हुई है ? तथा प्रभावित परिवारों को स्कूल से कब विस्थापित किया जाएगा?
राजीव रौतेला (आइएएस):- भू-स्खलन को रोकने के लिये आइआइटी रुड़की द्वारा डीपीआर तैयार की जा रही है, जिसके लिये शासन से 10.50 लाख रुपये मंज़ूर हुये हैं। उसके अलावा भू-स्खलन के नाम पर और कोई धनराशि आवंटित नहीं हुई, और हिल सेफ़्टी कमेटी की मीटिंग में भू- स्खलन प्रभावित परिवारों को स्कूलों से विस्थापित करने की बात रखी जाएगी…
साक्षात्कार जारी… 🙏
अंक 122 : (27 फरवरी 2019) : आयुष्मान कार्ड बनाने में क्यों आ रही है समस्या, डीएसओ से साक्षात्कार में हुआ खुलासा… साक्षात्कार (भाग – 02)
तेजबल सिंह ज़िला पूर्ति अधिकारी, नैनीताल
संक्षिप्त परिचय:- उत्तर प्रदेश वाराणसी / बनारस के एक साधन-संपन्न परिवार में जन्मे तेजबल सिंह के पिताजी स्वास्थ्य विभाग में अतिरिक्त निदेशक थे, आपकी प्रारंभिक शिक्षा बनारस में ही हुई तथा स्नातक स्तर की शिक्षा आपने केएनएस विवि सुल्तानपुर से और स्नातकोत्तर लखनऊ विवि से सत्र 95-96 में किया। उसके बाद आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गये। आख़िरकार 2005 में आपकी मेहनत रंग लायी और आपने यूकेपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की। आपकी पहली ज्वाइनिंग क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी के रूप में देहरादून में हुई। फिर आप ट्रेनी ऑफ़िसर पिथौरागढ़ रहे और वहीं प्रथम बार ज़िला पूर्ति अधिकारी (पिथौरागढ़) के रूप में पद भार संभाला। उसके बाद अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, पुनः नैनीताल फिर पुनः अल्मोड़ा और फिर तीसरी बार नैनीताल के ज़िला पूर्ति अधिकारी के रूप में पद ग्रहण किया। आप फरवरी 2018 से वर्तमान तक एक कुशल अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं …
उनसे बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :- अंक -2
सवाल (05) से आगे :-
आज़ाद सवाल (06) :- राज्य में राशन कार्ड किस-किस श्रेणी के हैं तथा उनसे किस प्रकार के लाभ लोगों को मिल रहे हैं, थोड़ा विस्तारपूर्वक जानकारी दीजियेगा ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- आज की तिथि में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना और राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत राशन कार्ड बनाये जा रहे हैं:- रा.खा.सु.यो. के अनुसार तीन श्रेणियों में कार्ड बनते हैं :- (अ) अंत्योदय राशन कार्ड जिनका रंग गुलाबी होता है, ये कार्ड समाज के दबे कुचले सबसे निचले ग़रीब परिवारों के लिये बनते हैं, जिसमें प्रत्येक कार्ड पर 35 किलो राशन (13.300 ग्रा. गेंहू + 21.700ग्रा. चावल ) एक किलो चीनी प्रति माह वितरित की जाती है। (ब) बी.पी.एल. कार्ड:- ये सफ़ेद रंग के राशन कार्ड ग़रीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिये बनाये जाते हैं जिनके परिवार की समस्त श्रोतों से आय ₹1,80,000 हज़ार सालाना हो या उससे कम होनी चाहिये, इसमें प्रति माह 5 किलो राशन (02 किलो गेंहू + 03 किलो चावल) मिलता है। (स) पात्र प्राथमिक परिवार :- ये सफ़ेद कार्ड थोड़े ठीक स्थिति वाले ग़रीब परिवारों के लिये है, इसमें भी 5 किलो राशन मिलता है… दूसरी योजना राज्य खाद्य सुरक्षा अंतर्गत पीले वाले राशन कार्ड बनाये जाते हैं। जो ग़रीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन कर रहे लोगों के लिये होता है, जिनकी आय ₹1.80लाख से ऊपर और 5 लाख से कम होती है, इस कार्ड धारक को 5 किलो गेंहू व 2.5 किलो चावल मिलता है। इसमें 2.5किलो चावल के एवज़ में सरकार ₹75/ माह डी.बी.टी.के माध्यम से बैंक खाते में जमा करती है…।
आज़ाद सवाल (0-7) जैसा कि आपने बताया कि प्रति माह राशन दिया जाता है, यदि इस स्थिति में पता चले कि कोई सस्ते गल्ले का दुकानदार कार्ड धारकों को राशन न देकर ब्लैक मार्केटिंग कर रहा हो तो उसके विरूद्ध क्या कार्रवाई होगी ?
ज़िलापूर्ति अधिकारी :- यदि ऐसी स्थिति पायी जाती है तो सम्बंधित डीएसओ, एसडीएम अथवा एस.आइ. से शिकायत की जा सकती है।आरोप सत्य पाये जाने पर उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा…।
आज़ाद सवाल (08):- आयुष्मान अटल स्वास्थ्य योजना में राशन कार्ड सिंक नहीं हो पा रहे हैं, जिससे आम जनता को समस्या हो रही है। कौन है इसका ज़िम्मेदार?
ज़िला पूर्ति अधिकारी:- इसके लिये हम नहीं स्वास्थ्य विभाग ज़िम्मेदार है। जब आधार कार्ड से हर काम हो जा रहे थे, तो राशन कार्ड से लिंक वाला सिस्टम नहीं होना चाहिए था। आधार ही आधार होना चाहिये था…।
आज़ाद सवाल (09):- कुछ सी.एस.सी. संचालकों का आरोप है कि आपके विभाग से उन्हें डेटा प्रोवाइड करने में सहयोग नहीं मिल रहा है। ऐसा क्यों ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- नहीं, यह आरोप बे-बुनियाद है। हमारी ओर से हमेशा सहयोग किया गया है। बल्कि यहां तो हल्द्वानी और रामनगर से भी लोग आ रहे हैं। डेटा हम उपलब्ध करा रहे हैं…।
आज़ाद सवाल (10):- अंत में… एक छोटा सा सवाल कि क्या अब आप चौथी बार भी नैनीताल में ही रहना चाहेंगे ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- नहीं, अब गढ़वाल जाने की इच्छा है। यहां नैनीताल में बहुत प्यार मिला है अब तक, यहां के लोग बहुत सीधे व ईमानदार हैं….।
साक्षात्कार समाप्त
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अंक 122 : साक्षात्कार (भाग – 02)
आज़ाद सवाल (01) :- नैनीताल में तीसरी बार ज़िला पूर्ति अधिकारी बनने के बाद यहां के परिवेश और नागरिकों के बारे में क्या अनुभव किया है ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- यहां तीसरी बार आकर जनपद व जनपद के लोगों की अच्छी समझ हो गयी है, नैनीताल शहर की बात करें तो यहां के लोगों को हमारे विभाग से कम शिकायतें रही हैं, ओखलकांडा -बेतालघाट चूँकि पिछड़ा क्षेत्र है इसलिये वे लोग हमारे विभाग पर अधिक निर्भर हैं, तो शिकायतें भी अधिक होती हैं…
आज़ाद सवाल (02):- इतनी शिकायतें होने पर आप ग्रामीणों की शिकायतों का निबटारा कैसे करते हैं ?
ज़िलापूर्ति अधिकारी :- ग्रामीणों की समस्या समाधान हेतु जन मिलन कार्यक्रम और हर तीन माह में एक बार बीडीसी बैठक की जाती है, जिसमें हमारी कोशिश रहती है कि हर ग्रामीण की समस्या का निराकरण हो जाये…
आज़ाद सवाल (03):- जबसे राशन कार्ड ऑनलाइन किये गये हैं, विभाग के लिये काम कितना आसान हुआ है अथवा कितना मुश्किल ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- पिछले चार सालों में डिजिटाइज़ेशन के होने से कार्य शैली में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है, पहले पुराने रिकॉर्ड चेक कर पाना बहुत मुश्किल होता था लेकिन अब सब कुछ आसानी से हो जाता है…
आज़ाद सवाल (04):- ऑनलाइन सिस्टम होने और आधार लिंक होने से विभाग / राज्य को क्या फ़ायदा मिला है ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- ऑनलाइन सिस्टम और आधार लिंक होने से फ़र्ज़ीवाड़े पर लगाम लगी है, पहले हर घर में दो -दो, तीन-तीन राशन कार्ड पाये जाते थे, जिनको पकड़ पाना बेहद मुश्किल हो रहा था, अब तो एक क्लिक पर सबके रिकॉर्ड सामने आ जाते हैं…
आज़ाद सवाल (05):- तो अब तक कितनी संख्या में फ़र्ज़ी राशन कार्ड पकड़ में आये हैं ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- ऑनलाइन और आधार लिंक होने से सबसे पहले तो वो ट्रेस हुये जो एक नाम से दो -दो राशन कार्ड चला रहे थे, दूसरा वो पकड़ में आये जिनकी आय 5 लाख सालाना से अधिक थी फिर भी उनके राशन कार्ड चल रहे थे, आपको यक़ीन नहीं आएगा कुल मिलाकर 40 हज़ार फर्ज़ी राशन कार्ड हमने डिजिटाईज़ेशन होने के बाद निरस्त किये हैं…
साक्षात्कार जारी
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अंक 120 : साक्षात्कार (भाग – 03) नैनीताल के जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन से जिले की यातायात, पार्किंग व शौचालय आदि व्यवस्थाओं पर…
डीएम विनोद कुमार सुमन।
विनोद कुमार सुमन ज़िलाधिकारी, नैनीताल
संक्षिप्त परिचय :-
कालीन उद्योग के लिये मशहूर संत रविदास नगर ज़िला या यूँ कहें उत्तर प्रदेश के चार ज़िलों (प्रयागराज, जौनपुर, वाराणसी और मिर्ज़ापुर) की सरहदों को छूने वाले भदोही ज़िले में 1970 को एक ग़रीब किसान के घर में जन्मे श्री विनोद कुमार सुमन पांच भाई और दो बहनों में सबसे बड़े हैं, आपकी प्रारंभिक शिक्षा भदोही में ही हुई, उसके बाद आप घर छोड़कर श्रीनगर गढ़वाल आ गये, जहां आपने कई महीनों तक एक मंदिर परिसर में दिन गुज़ारे और बी.ए. की पढ़ाई पूरीे के लिये आपने वहां बन रहे एक सुलभ शौचालय निर्माण में मज़दूर के रूप में मज़दूरी भी की और इस तरह से बीए की डिग्री आपने गढ़वाल विवि से हासिल की, इसके बाद पिताजी ने घर वापस बुला लिया, फिर आपने एम.ए. कीिक्षा प्रयागराज विवि (तत्कालीन इलाहबाद विवि) से प्राप्त की, माता -पिता की प्रेरणा से आपका बचपन से ही मन शिक्षा की ओर अग्रसर रहा इसलिए आपने पढाई नहीं छोड़ी तथा सन् 1998 में आपने पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर ली, पीसीएस अधिकारी के रूप में अपनी कुशल सेवाएं देने के कारण आपको सन् 2007 में आइएएस केडर में पदोन्नत किया गया, तब से आज तक आप एक कुशल आइएएस के रूप में देश को अपनी सेवाएं दे रहे हैं और आज नैनीताल के ज़िलाधिकारी द को सुशोभित कर रहे है, उनसे बात की हमारे संवाददाता मो.ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-
सवाल (10) से आगे :-
आज़ाद सवाल (11):- आयुष्मान अटल योजना कार्ड बनाने में नागरिकों को दिक्कतें आ रही है राशन कार्ड सिंक नहीं हो पा रहे हैं, खाद्य आपूर्ति विभाग पर भी दबाव है, कैसे आसान होगी प्रक्रिया ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- खाद्य आपूर्ति विभाग के अलावा अब नागरिक अपने -अपने सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान में जाकर कार्ड अपडेट करा सकते हैं जिससे उन्हें जल्द होजना का लाभ मिल सकेगा…
आज़ाद सवाल (12):- प्रधानमंत्री जगह – जगह शौचालय निर्माण की बात करते हैं लेकिन नैनीताल को जोड़ने वाले हमारे कालाढूंगी – नैनीताल मोटर मार्ग पर शौचालय की समस्या है पर्यटक व नागरिक दोनों के लिये समस्या है, कुछ हो पाएगा इस समस्या का ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- नहीं ऐसा नहीं है, कालाढूंगी – नैनीताल मोटर मार्ग पर 2-3 जगह शौचालय हैं, अब हर 10 मीटर की दूरी पर तो शौचालय नहीं बनवा सकते…
आज़ाद सवाल (13):- नैनीताल में पार्किंग की समस्या है जिस कारण पर्यटक हर वर्ष परेशान रहता है, इस समस्या से निजात के लिये क्या क़दम उठाये जा रहे हैं…
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- रुसी बाईपास पर पार्किंग बनाई जा रही है, जिसका टेंडर निकल चुका है, वहां 2000 से 3000 गाड़ियां सुरक्षित रह सकेंगी और ड्राइवर वगैरह के लिये वहां शौचालय इत्यादि बनाये जाएंगे, जिससे पर्यटकों को बहुत सुविधा मिलेगी…
आज़ाद सवाल (14):- सरकारी योजनाओं का लाभ जनता को मिल सके उसके लिये क्या कवायद की जा रही है ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- हम समय- समय पर योजनाओं का प्रचार करवाते रहते हैं अभी ज़िले में किसान पेंशन योजना से 35000 लोग लाभान्वित हुये हैं। अटल आयुष्मान योजना तो चल ही रही है…
आज़ाद सवाल (15):- अंत में एक काल्पनिक सवाल, 2020 में नैनीताल को किस स्तर पर देखते हैं, कितना परिवर्तन होगा तब तक ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल:- 2020 तक हल्का फुल्का अंतर आएगा, ज़्यादा बदलाव नहीं आएगा नैनीताल में…
साक्षात्कार समाप्त
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अंक 119 : फिर हुआ असर, नवीन समाचार व आज़ाद मंच का, जानें कहाँ ?
धन्यवाद : अधिशासी अभियंता जल संस्थान का
साहिबान, नवीन समाचार के स्तम्भ आज़ाद के तीर में हमने पानी की जगह सीवर नैनी झील में ले जा रहे हैं नाले क्यों सोया है विभाग उन्वान के साथ ये बताया और दिखाया था कि किस तरह से भारी मात्रा में सीवर का गंदा पानी सीधा झील में जा रहा था, हमारी ख़बर का संज्ञान लेते हुये संतोष कुमार उपाध्याय, अधिशासी अभियंता जल संस्थान नैनीताल ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को तत्काल हुक्म दिया और कनिष्ठ अभियंता भास्कर सुयाल अपनी टीम को लेकर मस्जिद चौराहे और मस्जिद के सामने बने पिट खुलवाकर उनकी सफ़ाई करवाने लगे, इस बारे में जब कनिष्ठ अभियंता भास्कर सुयाल से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि काफ़ी मेहनत से सभी कर्मचारी लगे हुए हैं और हमारी कोशिश है कि शनिवार तक झील में जाने वाला सीवर बिल्कुल बंद हो जाये, इतनी तत्परता दिखाने के लिये आज़ाद मंच परिवार जल संस्थान नैनीताल का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता है और आने वाले वक़्त में भी इसी तत्परता की उम्मीद करता है और हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है कि जनसेवा में आपका साथ यूँही हमेशा मिलता रहेगा…
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 118 : पानी की जगह सीवर नैनी झील में ले जा रहे हैं नाले, क्यों विभाग सोया ?
नैनी झील में जा रहा है सीवर का पानी
जल संस्थान गहरी नींद में सोया
गंदा पानी कर रहा है झील को दूषित
कौन है ज़िम्मेदार ?
साहिबान, ये जो तस्वीर / वीडियो आप देख रहे हैं न, वो किसी सीवर लाइन की नहीं है बल्कि नैनीताल में मौजूद एक ऐसे नाले की है जिससे बारिश का पानी ऊपर पहाड़ी से होता हुआ नगर के रॉयल होटल कम्पाउण्ड से निकलकर नयना देवी मंदिर के बराबर से निकलकर झील में समा जाता है लेकिन एक विभाग की नई योजना के चलते नाले में पानी की जगह सीवर की गंदगी आ रही है और सीधा नैनी झील में जाकर झील को दूषित कर रही है, ऐसा नहीं है कि इस बारे में अमुक विभाग अंजान हो, ऐसा कतई नहीं है इस मामले की वजह से ही कुछ दिन पहले नगर पालिका के सभासदों ने 2 दिवसीय धरना भी दिया था लेकिन उक्त विभाग की तानाशाही रवैये के चलते कोई मांग पूरी न हो सकी और आज शहर में सीवर जगह-जगह लीक होती रहती है, जिसे कोई देखने वाला नहीं, क़ाबिलेगौर बात ये है कि इसी झील के निर्मल जल को नैनीतालवासी पीने को मजबूर हैं… आज़ाद मंच द्वारा अधिशासी अभियंता महोदय से इस बावत बात करने के लिये काफ़ी बार कोशिश की लेकिन महोदय कभी फ़ोन उठा नहीं पाते, इसलिये जनता को पता भी नहीं लग पाता आख़िर इस सबकी वजह क्या है ? ख़ैर,
आख़िर में, मुख्यमंत्री महोदय उत्तराखंड मुख्य सचिव मुख्य मंत्री कार्यालय / कुमाऊं आयुक्त महोदय ज़िलाधिकारी महोदय, अपरज़िलाधिकारी महोदय, अधिशासी अभियंता महोदय, जल संस्थान, नैनीताल से हमारी इल्तेजा है कि सीवर के गंदे पानी को नैनी झील में जाने से रोकने के लिये तत्काल कोई कार्रवाई की जाए, जिससे हमारी नैनी झील दूषित न हो और शहर के बाशिंदों व बाहर से आने वाले सैलानियों को साफ़ पीने का पानी मयस्सर हो सके …
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 117 : साक्षात्कार नैनीताल के जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन से जिले की चिकित्सा, शिक्षा, खनन आदि व्यवस्थाओं पर…(भाग – 02)
संक्षिप्त परिचय :- विनोद कुमार सुमन, ज़िलाधिकारी, नैनीताल
डीएम विनोद कुमार सुमन।
कालीन उद्योग के लिये मशहूर संत रविदास नगर ज़िला या यूँ कहें उत्तर प्रदेश के चार ज़िलों (प्रयागराज, जौनपुर, वाराणसी और मिर्ज़ापुर) की सरहदों को छूने वाले भदोही ज़िले में 1970 को एक ग़रीब किसान के घर में जन्मे श्री विनोद कुमार सुमन पांच भाई और दो बहनों में सबसे बड़े हैं। आपकी प्रारंभिक शिक्षा भदोही में ही हुई। उसके बाद आप घर छोड़कर श्रीनगर गढ़वाल आ गये, जहां आपने कई महीनों तक एक मंदिर परिसर में दिन गुज़ारे और बी.ए. की पढ़ाई पूरी करने के लिये आपने वहां बन रहे एक सुलभ शौचालय के निर्माण में मज़दूर के रूप में भी योगदान दिया और इन कठिन परिस्थितियों में आपने बीए की डिग्री गढ़वाल विवि से हासिल की। इसके बाद पिताजी ने घर वापस बुला लिया। फिर आपने एम.ए. की शिक्षा प्रयागराज विवि (तत्कालीन इलाहबाद विवि) से प्राप्त की। माता-पिता की प्रेरणा से आपका बचपन से ही मन शिक्षा की ओर अग्रसर रहा इसलिए आपने पढाई नहीं छोड़ी तथा सन् 1998 में आपने पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण की। पीसीएस अधिकारी के रूप में अपनी कुशल सेवाएं देने के कारण आपको सन् 2007 में आइएएस कैडर में पदोन्नत किया गया। तब से आज तक आप एक कुशल आइएएस के रूप में देश को अपनी सेवाएं दे रहे हैं और आज नैनीताल के ज़िलाधिकारी के पद को सुशोभित कर रहे है। उनसे बात की हमारे संवाददाता मो.ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :- सवाल (05) से आगे :-
आज़ाद सवाल (06):- प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खुल तो गये हैं लेकिन उनमें उचित मात्रा में दवाइयां कब उपलब्ध होंगी ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल:- फ़िलहाल जो कमी आयी उसका कारण भण्डार गृह में ही कमी थी, क्योंकि उत्पादन ही कम हो रहा था, अब पूर्ति बहाल हो जाएगी…
आज़ाद सवाल (07):- निजी स्कूल खुलने लगे हैं और अभिभावकों पर अमुक दुकान से यूनिफार्म, किताबें लेने का दबाव बनने लगा है। प्रशासनिक स्तर से इन स्कूली दबाव पर कब लगाम लगेगी ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- अभिभावकों को परेशान न होना पड़े इसलिये स्कूल यूनिफार्म व क़िताबों की सुविधायें देता है …
आज़ाद सवाल (08):- निजी अस्पताल, अस्पताल न होकर फाइव स्टार होटल बन गई हैं। इन अस्पतालों पर कब नकेल कसी जाएगी ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल*:- क्लीनिकल ईस्टब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) लागू होने के बाद ये सब बंद हो जाएगा…
आज़ाद सवाल (09):- अवैध खनन लगातार हो रहा है। उस पर रोकथाम के लिये क्या क़दम उठाये जा रहे हैं ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- हम लगातार कोशिश कर रहे हैं ऐसा न हो।बयदि जब कभी ऐसी खबरें मिलती भी हैं तो उस पर कार्रवाई करते रहते हैं…
आज़ाद सवाल (10):- हालांकि पॉलिथीन प्रतिबंधित है फिर भी पॉलिथीन का बाज़ार में धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। उसे रोकने हेतु कब कार्रवाई की जाती है ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- पॉलिथीन का प्रयोग न हो उसके लिये हम समय-समय पर दुकानों व बाज़ारों में छापामारी करते रहते हैं …
साक्षात्कार जारी
अंक 116 : साक्षात्कार (भाग – 01) :
आज़ाद सवाल (01):- सबसे पहले हम बात करते हैं पुलवामा में हुये हमले की।उसमें शहीद हुये जवानों की शहादत पर क्या कहना चाहेंगे आप घटना पर ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- बेहद दुःखद घटना है। हम इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं तथा शहीद हुये जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं …
आज़ाद सवाल (02):- बलियानाला भू -स्खलन प्रभावित क्षेत्र से कितने परिवारों को विस्थापित किया जा चुका है ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- बलियानाला भू-स्खलन प्रभावित क्षेत्र से लगभग 20-22 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित किया जा चुका है। बाक़ी के 2-3 परिवार शेष हैं। उन्हें भी जल्द ही विस्थापित किया जाएगा…
आज़ाद सवाल (03):- नैनीताल से लेकर हल्द्वानी, रामनगर कहीं भी चले जाओ सब सरकारी अस्पतालों की हालत बदतर क्यों है ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- नही, ऐसा नहीं है। अगर नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल की ही बात करें तो उक्त अस्पताल को कायाकल्प पुरस्कार से नवाज़ा गया है, जो काफ़ी कड़े मानदंडों के आधार पर दिया जाता है। रही बात अन्य अस्पतालों की तो निजी अस्पतालों के हड़ताल पर जाने से सरकारी अस्पताल ही मसीहा बने हुये हैं…
आज़ाद सवाल (04):- महोदय, आपका कहना अपने स्तर पर ठीक होगा।न्यायाधीश, प्रशासनिक अधिकारी या कोई भी हाई प्रोफाइल पर्सनालिटी को बेहतर इलाज मिल रहा होगा लेकिन एक आम नागरिक को अवार्ड नहीं इलाज चाहिये।जनता का कहना है कि मरीज़ कक्ष में बैठकर चिकित्सक की प्रतीक्षा करते हैं और चिकित्सक बाहर धूप सेंकते हैं, क्या ये आरोप सही हैं ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- नहीं, ऐसा नहीं हो रहा है। बीडी पांडे अस्पताल में सब सही चल रहा है। अगर चिकित्सक धूप सेंक भी रहे हैं तो कोई गुनाह नहीं कर रहे हैं…।
आज़ाद सवाल (05):- इसका मतलब जिलाधिकारी महोदय सरकारी अस्पतालों की कार्यशैली से संतुष्ट हैं ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- जी हाँ, जहाँ तक हमने अनुभव किया है वहां तक तो हम संतुष्ट ही हैं। वैसे बिल्कुल अंदर तक तो जाकर हमने भी नहीं देखा है…
साक्षात्कार जारी…
अंक 115 : बदल रही है नैनीताल की तस्वीर, आज़ादी के बाद पहली बार हो रही यहाँ सफाई…
-साफ़ हो रहे हैं नैनीताल के नाले, सिंचाई खंड का विशेष आभार, पालिका प्रशासन का भी मिल रहा सहयोग, नागरिकों का सहयोग अपेक्षित
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न, वो हमारे शहर नैनीताल के अलग – अलग नालों की है, जिसमें सिंचाई खंड नैनीताल के कर्मचारी कार्य करते नज़र आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक़ हमारे शहर में कुल 59 नाले हैं, इनकी वर्ष में तीन बार सफ़ाई का प्रावधान है। एक बरसात से पहले, दूसरा बरसात के बीच व तीसरा बरसात के बाद। आजकल जो सफ़ाई चल रही है, वो बरसात के बाद वाली चल रही है, इस बारे में सिचाई विभाग के अधिशासी अभियंता हरीश चन्द्र सिंह बताते हैं कि वैसे तो नालों का स्वामित्व नगर पालिका नैनीताल का है, हम केवल नालों की मेंटिनेंस के लिये उत्तरदायी हैं। अब तक हमारे द्वारा लगभग 30 नालों की सफ़ाई हो चुकी शेष नाले मार्च के प्रथम सप्ताह तक लगभग पूरे साफ़ हो जाएँगे। नाले से निकले मलबे और कूड़ा निस्तारण से सम्बंधित बात करने पर सचिन नेगी, नगर पालिकाध्यक्ष नैनीताल ने बताया कि जो भी कूड़ा नालों से निकलता है उसे पालिका द्वारा उठाया जाएगा और जो मलबा होगा उसके निस्तारण की ज़िम्मेदारी सिंचाई खंड की होगी, तस्वीरें बता रही हैं कि सिंचाई खंड अपना कार्य बखूबी अंजाम दे रहा है, उसके लिये हरीश सिंह, अधिशासी अभियंता, मदन मोहन जोशी, सहायक अभियंता, नीरज तिवारी कनिष्ठ अभियंता व पर्यवेक्षक रमेश सिंह के साथ तमाम टीम जो आड़े-तिरछे, फिसलन वाले नालों को भी जान जोखिम में डालकर साफ़ कर रहे हैं, उन सबका तथा सचिन नेगी, नगर पालिकाध्यक्ष, रोहिताश शर्मा, अधिशासी अधिकारी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, डॉ. जीएस धर्मसत्तू , नगर सफ़ाई निरीक्षक, कुलदीप सिंह के साथ एक से लेकर पंद्रह तक सभी सभासदगण नगर पालिका परिषद व उनकी पूरी टीम का आज़ाद मंच परिवार तहे दिल से शुक्रिया अदा करता है। साथ ही नागरिकों से ये अपील करता है कि मेहरबानी करके नालों में कूड़ा न डालें, कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में ही डालें और हर एक वार्ड के सभासद से ये गुज़ारिश है कि अपने -अपने वार्ड के लोगों को स्वच्छता के लिये प्रेरित व जागरूक करें तभी बनेगा हमारा ‘क्लीन नैनीताल-ग्रीन नैनीताल’। न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर…
अंक 114: साक्षात्कार-डीएफओ बिजू लाल टीआर, भाग-3 : नैनीताल चिड़ियाघर पर उपयोगी जानकारी
टीआर बिजुलाल, मंडलीय वन अधिकारी (डिवीज़नल फॉरेस्ट ऑफिसर) डीएफ़ओ, नैनीताल
संक्षिप्त परिचय :- केरल प्रान्त के तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम) में जन्मे टी.आर. बीजुलाल की शिक्षा-दीक्षा तिरुवनंतपुरम में ही हुई। एमएससी (ज़ूलॉजी) उत्तीर्ण करने के पश्चात् आपने आईएफ़एस परीक्षा (2004) में आपने 18वीं रैंक हासिल की। 3 वर्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम के पश्चात् आपने हल्द्वानी स्थित एफटीआई में उप-निदेशक के पद को ग्रहण किया। एक वर्ष उप-निदेशक पद पर रहने के पश्चात 2008 में नैनीताल के डीएफ़ओ के तौर पर सरोवर नगरी में आगमन हुआ, कुछ समय की सेवायें देने के बाद आप डीएफ़ओ सिविल अल्मोड़ा, उप-निदेशक गोविन्द पशु विहार (पुरोला), वर्किंग मेन ऑफिसर (चकराता) में अपनी सेवायें देते हुये मई-2018 में पुनः नैनीताल की वादियों में डीएफ़ओ के तौर पर शानदार वापसी की तथा मई से फरवरी तक आपने वन संरक्षण के क्षेत्र में क्या-क्या उल्लेखनीय कार्य किये, इस सम्बन्ध में बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने… प्रस्तुत है टीआर बीजुलाल डीएफ़ओ, नैनीताल से बातचीत के प्रमुख अंश :-
सवाल 10 से आगे …
आज़ाद सवाल (11):–
25 लाख रुपये प्रतिमाह क्या प्राणी उद्यान की आय होती है ?
डीएफ़ओ नैनीताल:-
नहीं, ऐसा तो नहीं हो पाता,
आय कम व्यय अधिक होने के कारण ज़ू घाटे में चलाया जा रहा है …
आज़ाद सवाल (12):-
क्या ज़ू के जानवरों को गोद लिया जा सकता है ?
डीएफ़ओ नैनीताल:-
जी हाँ, ज़ू में जितने भी पशु-पक्षी हैं सभी को गोद लिया जा सकता है उसका विकल्प मौजूद है, इच्छुक व्यक्ति यहां कार्यालय में सम्पर्क कर सकते हैं…
आज़ाद सवाल (13):-
नैनीताल ज़ू में और क्या विशेषतायें लाई जाएंगी ?
डीएफ़ओ नैनीताल:-
नैनीताल ज़ू को और विकसित करते हुये यहां एक इंटरप्रिटेशन थिएटर खोलने की योजना है, जिसमें यहां आने वाले लोगों को वाइल्ड लाइफ संबंधी डॉक्यूमेंट्री फिल्में दिखाकर वन्य जीव संरक्षण के लिये प्रेरित किया जा सकेगा ..
आज़ाद सवाल (14):-
ज़ू के अलावा पर्यटन व आय को बढ़ावा देने के लिये आपके द्वारा क्या प्रयास किये जा रहे हैं ?
डीएफ़ओ नैनीताल:-
पर्यटन व राज्य की आय बढ़ाने के लिये हम हनुमान गढ़ी स्थित ईको पार्क, कालाढूंगी मार्ग पर सरिता ताल (सड़िया ताल) वाटर फॉल, हिमालयन बॉटैनिकल गार्डन तथा रानीबाग़ स्थित रेस्क्यू सेंटर को पर्यटकों के लिये विकसित कर रहे हैं…
आज़ाद सवाल (15):-
तो इन सब स्थलों को विकसित करने में देरी क्यों हो रही है ?
डीएफ़ओ नैनीताल:-
बस फण्ड की कमी है, नैनीताल को स्वर्ग बनाने का संकल्प है, और हमें विश्वाश है वो ज़रूर पूरा होगा…
(साक्षात्कार समाप्त)
अंक 113: साक्षात्कार-डीएफओ बिजू लाल टीआर, भाग-2 :
सवाल 5 से आगे …
आज़ाद सवाल (06):- नगर क्षेत्र में आवास बनाते समय किसी वृक्ष की कितनी दूरी होनी चाहिये?
डीएफ़ओ नैनीताल :- नगर क्षेत्र में आवास बनाते समय किसी वृक्ष की दूरी लगभग 3 मीटर होनी चाहिये…
आज़ाद सवाल (07):- नैनीताल में तो अधिकतर आवास वृक्षों से सटाकर बनाये गये हैं, उनका क्या होगा ?
डीएफ़ओ नैनीताल:- पुराने समय से ऐसे आवास बन चुके हैं, हमने अपने कार्यकाल में ऐसी कोई अनुमति नहीं दी है…
आज़ाद सवाल (08):- नैनीताल क्षेत्र में कौन सा वन अधिनियम लागू होता है ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- जहां तक नगर पालिका परिषद का क्षेत्र आता है वहां तक नगर पालिका अधिनियम और उसके पश्चात् वन संरक्षण अधिनियम 1927 लागू होता है और उन्हीं के अंतर्गत कार्रवाई होती है…
आज़ाद सवाल (09):- अब बात करते हैं वन्य प्राणी उद्यान की। नैनीताल वन्य प्राणी उद्यान (ज़ू) में कितने संख्या में कितने जानवर व अन्य पक्षी हैं ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- नैनीताल वन्य प्राणी उद्यान वन्य जीव संरक्षण 1972 के अंतर्गत चलाया जा रहा है। यहां पर कुल 33 प्रजाति निवास करते हैं। जिनमें 232 जानवर हैं और जानवरों में 2 टाइगर (01नर +01 मादा ), 7 लैपर्ड (4 नर +3 मादा ), 4 भालू (1 नर +3 मादा ), 2 तिब्बती भेड़िये (1 नर + 1 मादा), 5 रेड पांडा (2 नर + 3 मादा) हैं फ़िलहाल। बाक़ी आगे संख्या बढ़ सकती है…
आज़ाद सवाल (10):- वन्य प्राणी उद्यान में जीवों के रख रखाव में प्रति माह कितना ख़र्चा आता है ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- सभी जीवों के रख रखाव पर प्रति माह ₹25 लाख का खर्चा आ जाता है…
साक्षात्कार जारी…
आज़ाद सवाल (01):- आपके वनाधिकार में कौन-कौन से क्षेत्र आते हैं ?
अंक 110 : साक्षात्कार-डीएफओ बिजू लाल टीआर, भाग-1 :
डीएफ़ओ नैनीताल :- हमारे वनाधिकार में नैनीताल, खैरना, बेतालघाट, रानीबाग़ तथा कालाढूंगी का क्षेत्र आता है…
आज़ाद सवाल (02) :- नैनीताल में जगह-जगह भवन निर्माण हो रहे हैं। मानचित्र पास कराने को आपकी एनओसी भी अनिवार्य है। क्या आप बता पाएंगे कि किन आधारों पर आपने एनओसी दी हैं ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- जितने भी निर्माण हो रहे हैं उनमें हमारी ओर से कोई एनओसी नहीं दी गयी है…
आज़ाद सवाल (03) :- भवन निर्माण में धड़ल्ले से वृक्षों की बलि दी जा रही है। कौन है इसके लिये ज़िम्मेदार ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- यदि ऐसा हो रहा है तो उसके लिये पूरी तरह से भू -स्वामी ही ज़िम्मेदार है…
आज़ाद सवाल (04) :- इसका मतलब आप उस पर कोई कार्रवाई नहीं करते ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- जो अवैध रुप से वृक्ष को काटता या क्षति पहुंचाता है उस पर नगर पालिका के नियमानुसार ₹5000 तक न्यूनतम तथा ₹25000 अधिकतम जुर्माना वसूला जाता है …
आज़ाद सवाल (05):- मतलब ये हुआ कि अधिकतम ₹25000 दीजिये और वृक्षों का सफ़ाया कीजिये। यही अर्थ जाता है इसका तो ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- नहीं, ऐसा नहीं है, हम अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करते हैं कि वृक्ष कटान न हो। यदि दुर्भाग्यवश ऐसा हो जाता है तो उस पर क़ानूनी रूप से कार्रवाई की जाती है …
साक्षात्कार जारी…. 🙏
अंक 112 (15 फरवरी 2019) : सुनो सुनो सुनो ! यहां एक महीने से खड़ी है एक एम्बुलेंस, जिस किसी की हो ले जाये, वरना…
क्या खुलने वाला है नैनीताल में नया अस्पताल!
क्या स्टाफ़ हाउस क्षेत्र में बनेगा अस्पताल!
क्या एम्बुलेंस 108 सबसे पहले पहुंचाई
एक महीने से क्यों खड़ी है एम्बुलेंस
क्यों कोई कोई सुध लेने वाला नहीं
साहिबान, एक ज़रूरी एलान सुन लीजिये! एक एम्बुलेंस जिसका नाम 108 है, सफ़ेद, नीली, लाल धारीदार कपड़े पहने हुए है, पिछले एक महीने से मल्लीताल सात नंबर क्षेत्र के भोटिया बैंड पर लावारिस हालत में खड़ी है, जिस किसी की भी हो, कृपया यहाँ आकर ले जाएँ, उसके हाथ- पैर अभी सलामत हैं, कहीं ऐसा न हो कुछ दिन बाद वो ईंटों पर खड़ी मिले। फिर मत कहना बताया नहीं। और तो और एम्बुलेंस का रौब लेकर घूमने वाली गाड़ी ‘कूड़ा गाड़ी’ का तमग़ा न हासिल कर ले, अभी रो- रो कर ,एम्बुलेंस के डीज़ल रूपी आंसू सड़क पर बिखरे पड़े हैं, मेहरबानी करके इस मैसेज को तब तक फैलाइये जब तक इसके ख़ैर ख़्वाह इस 108 एम्बुलेंस को अपने घर न ले जाएँ… ख़ैर, हमारे शहर में जो दो अस्पताल (अस्पताल कहने में बाई गॉड गला भर आया है फिर भी ) हैैं, उनकी हालत तो किसी से छिपी नहीं है, इसलिए नया अस्पताल बनने की कल्पना करने में भी डर लगता है हुज़ूर!
आख़िर में, स्वास्थ्य मंत्री महोदय, उत्तराखंड, मुख्य चिकित्साधिकारी महोदया, नैनीताल तथा सम्बंधित अधिकारीगणों से इल्तेजा है कि 108 एम्बुलेंस का उपयोग रोगियों की सेवा में हो तो अच्छा लगता है लेकिन किसी सूनसान जगह पर ले जाकर लावारिस हालत में एम्बुलेंस को खड़ा कर देना ये अच्छा महसूस नहीं होता। अगर आपके संज्ञान में ये मामला नहीं था, तब भी ये चिंता का विषय है लेकिन अब मामला संज्ञान में आने के बाद कितनी जल्दी उस पर कार्रवाई होती है। ये देखने वाली बात होगी…
न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर
अंक 111 (14 फरवरी 2019) : 15 दिन में ही 1/6 रह गई नगर पालिका की टॉल फ्री नंबर सेवा
नगर पालिका टॉल फ्री नंबर सेवा हुई बाधित
एक से लेकर पांच नंबर तक कोई रिस्पॉन्स नहीं
केवल छठे नंबर पर हो रही है शिकायत दर्ज
पालिकाध्यक्ष स्वयं जवाब दे रहे हैं लोगों की शिकायतों पर
साहिबान, अभी 26 जनवरी को नगर पालिका ने लोगों की समस्या निवारण हेतु ऐतिहासिक शुरुआत की थी जिसमें सोचा ये गया था कि नगर पालिका से सम्बंधित हर समस्या से निजात दिलाने के लिये उक्त टोल फ्री नंबर काम आएगा जहाँ पर आम नागरिक अपनी शिकायत दर्ज करा सके, 15 दिन से पहले ही फ्री के नाम पर जारी एक से लेकर 6 नंबर में से केवल 6 नंबर ही काम कर रहा है, जिस पर स्वयं पालिकाध्यक्ष शिकायत सुन रहे हैं व निवारण हेतु उचित जवाब भी दे रहे हैं, अन्य नंबर क्यों नहीं उठाये जा रहे जब इस बावत पालिकाध्यक्ष से बात की गयी तो उन्होंने अन्य कर्मचारियों के अवकाश पर जाने का कारण बताया और साथ ही ये भी कहा कि जल्द ही इस समस्या को दूर किया जाएगा कि कर्मचारी के अवकाश पर जाने पर भी फोन अटेंड हो सकें, वहीँ दूसरी ओर अधिशासी अधिकारी से इस संबंध में बात की गयी तो उनका जवाब भी एक समान था। दोनों ही ज़िम्मेदार अधिकारियों ने अपनी ज़िम्मेदारी को बखूबी समझते हुये जनहित में जवाब दिये। हम आपके जज़्बे की क़द्र करते हैं और आम नागरिकों से अपील करते हैं कि टोल फ्री नंबर डायल करने के बाद एक से लेकर पांच तक जब कोई जवाब न आये तब छठे नंबर को दबाएं व सीधे पालिकाध्यक्ष से अपनी पीड़ा बताएं वो हर सम्भव उक्त समस्या निवारण हेतु आपको एक ज़िम्मेदार जवाब अवश्य देंगे…
आख़िर में, नगर पालिका अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी महोदय से हमारा एक ही सवाल है जब इतना बड़ा महत्वकांक्षी क़दम उठाना ही था तो जल्दी किस बात की थी, कुछ दिन और रुक जाते तो क्या बुराई थी, ख़ैर, हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है कि जल्द से जल्द टोल फ्री नंबर के एक से लेकर पांच तक नंबर पर भी शिकायत दर्ज व उसका समाधान हो पाएगा …
न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर…
अंक 109 (9 फरवरी 2019) : साक्षात्कार (भाग-03)
तत्कालीन ज़िला नैनीताल (वर्तमान ज़िला उधम सिंह नगर तहसील किच्छा में मौजूद गाँव रामेश्वरपुर में बैसाखी और अम्बेडकर जयंती (14 अप्रैल ) के दिन सन् 1962 में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे श्री हरबीर सिंह की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से हुई उसके बाद आपने इंटर तक की शिक्षा आदित्य नाथ झा इण्टर कॉलेज रुद्रपुर से 1980 में ग्रहण की और कुमाऊँ विश्वविद्यालय से सन् 1984 में एमए करने के उपरांत ही आपकी नैनीताल बैंक में नौकरी लग गयी। नौकरी लगने से पहले तक आपने अपने पिताजी के साथ खेती- किसानी भी की, जिसमें गन्ने की फ़सल धान लगाना व खेतों की रोपाई आदि शामिल थी। बचपन से ही अभिनय व गायन के शौक़ के चलते आपने हल्द्वानी रामलीला में दशरथ व जनक का क़िरदार बख़ूबी निभाया और अक्सर किसी भी कार्यक्रम में अपने गायन से श्रोताओं का मन मोह लेने वाले ऐसे हरफ़नमौला किसान, कलाकार, गायक और बेहतरीन व्यक्तित्व के स्वामी जो हमारे नैनीताल के अपर ज़िलाधिकारी व झील विकास प्राधिकरण के सचिव की भूमिका को भी बखूबी निभा रह हैं, विभिन्न मुद्दों को लेकर उनसे बातचीत की हमारे संवाददाता मो.ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-
सवाल 10 से आगे :-
आज़ाद (11) :- भवाली से निकलने वाली उत्तरवाहिनी शिप्रा नदी में सीवर लाइन की खुली गंदगी समाहित हो रही है साथ ही साथ नदी को गंदा नाला बना दिया गया है, उक्त नदी को दूषित होने से बचाने के लि्या क़दम उठाये जाएंगे ?
हरबीर सिंह :- अभी तक हमारे संज्ञान में मामला नहीं था, प्राधिकरण की आगामी बोर्ड बैठक में इस नदी को स्वच्छ करने सम्बन्धी निर्णय लिये जाएंगे…
आज़ाद सवाल (12) :- नैनीताल प्रारम्भ से ही रंगकर्मियों की रंगभूमि रही है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि अभी तक यहां एक रंगशाला नहीं है। प्रशासनिक अधिकारी व कलाकार होने के नाते आपके स्तर से क्या सहयोग मिल सकता है ?
हरबीर सिंह :- अभी तक तो कोई हमारे पास रंगशाला का ये मुद्दा लेकर नहीं आया, यदि ज्ञापन दिया जाता है तो हम यक़ीनन उस पर अपनी तरफ़ से पूरा सहयोग करेंगे…
आज़ाद सवाल (13) :-
सर पिछली बार के विंटर कार्निवाल से यहां के स्थानीय कलाकारों में रोष है कि उन्हें अवसर नहीं दिया गया, ऐसी चूक कैसे हो गयी ?
हरबीर सिंह :- चूक नहीं हुई, हमने प्रारम्भ से ही प्रार्थना पत्र स्वीकार करने शुरू कर दिये थे लेकिन यहां के स्थानीय कलाकार बहुत देर में प्रार्थना पत्र लेकर आये जिससे शायद कुछ लोग नाराज़ हो गए। हम अगले विंटर कार्निवाल में पूरी कोशिश करेंगे कि कोई रोष न हो …
आज़ाद सवाल (14):- आप में एक बेहद अच्छा कलाकार भी है। कलाकार से पीसीएस अधिकारी बनने तक का सफर कैसे तय किया ?
हरबीर सिंह :- शौक़िया तौर पर पुराने गीतों को गा लेता हूँ। बाक़ी हल्द्वानी की रामलीला में दशरथ और जनक के किरदारों को निभाया है। नैनीताल बैंक में नौकरी के साथ – साथ सिविल सर्विसेज़ की तैयारी भी करता रहता था। बस एक बार वाहे गुरु जी की मेहरबानी से परीक्षा उत्तीर्ण की और वहीं से प्रशासनिक अधिकारी की यात्रा प्रारम्भ हो गयी…
आज़ाद सवाल (15) :- आप अपनी सफ़लता का श्रेय किसे देना चाहेंगे ?
हरबीर सिंह :- सिविल सर्विसेज़ को अत्यधिक गंभीरता से दिलाने का पूरा श्रेय मैं अपनी पत्नी अमरजीत कौर (रानी ) को देना चाहूंगा। एक प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिये मेरी पत्नी ने सदा मुझे प्रोत्साहित किया। मैं उनका आजीवन आभारी रहूंगा और मेरी दिली ख्वाहिश है कि हर जन्म में मुझे पत्नी के रूप में रानी ही मिले…
आज़ाद सवाल (06):- झील विकास प्राधिकरण झील के विकास के लिये क्या प्रयास कर रहा है ?
हरबीर सिंह झील को साफ़ व स्वच्छ रखने के लिये हमने ग्लोबल एक्वा प्रा. लि. को वॉटर एरियेशन की ज़िम्मेदारी सौंप रखी है जिसकी रख रखाव लागत रुपये अठारह लाख ( ₹18 लाख ) प्रतिवर्ष तथा विद्युत व्यय रुपये एक लाख साठ हज़ार (₹ 1,60,000) झील विकास प्राधिकरण के द्वारा भुगतान किया जाता है…।
आज़ाद सवाल (07) :- अपर ज़िलाधिकारी की हैसियत से आपके द्वारा बलियानाला के भू-स्खलन प्रभावित क्षेत्र में रह रहे लोगों को अभी तक किसी सुरक्षित जगह विस्थापित क्यों नहीं किया गया ?
हरबीर सिंह हमारी ओर से भ-ूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। और रही बात वहां के निवासियों को अन्यत्र विस्थापित करने की तो रूसी बाईपास के पास जगह चिन्हित की गयी है, जहां उनके लिये विचार किया जा रहा है…।
आज़ाद सवाल (08) हमारे शहर में दोनों अस्पताल रेफ़रल सेंटर बन कर रह गए हैं। क्या कभी आपके द्वारा वहां की स्थितियों का जायज़ा लिया गया ?
हरबीर सिंह पिछली बार नंदा देवी महोत्सव के दौरान एक बच्ची की अचानक तबियत ख़राब हो गयी थी उसको बीडी पाण्डे के इमरजेंसी में अच्छा उपचार दिया गया था लेकिन हाँ कभी अंदर वार्ड तक नहीं जा पाया लेकिन जल्द ही औचक निरीक्षण किया जाएगा…।
आज़ाद सवाल (09) :- निजी विद्यालय शीत अवकाश के उपरांत खुलते ही अभिभावकों को लूटना प्रारम्भ कर देंगे। उक्त लूट को अपर ज़िलाधिकारी स्तर पर रोकने को क्या प्रयास किये जाएंगे ?
हरबीर सिंह सरकार द्वारा समस्त स्कूलों को आदेशित किया गया है कि किसी भी स्कूल द्वारा अभिभावकों पर यूनिफार्म, स्टेशनरी आदि के लिये दबाव नहीं बनाया जाएगा। यदि ऐसी शिकायतें प्राप्त होंगी तो सम्बंधित स्कूल प्रबंधन पर सख़्त कार्रवाई की जाएगी…।
आज़ाद सवाल (10):- सरकारी कार्यालयों में अनियमिततायें जारी हैं। उक्त अनियमितताओं को रोकने हेतु कभी आपके द्वारा औचक निरीक्षण किया जाएगा ?
हरबीर सिंह किसी भी हालत में अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।ज़िलाधिकारी स्तर से निरीक्षण किया जाता रहा है और हमने भी अपने स्तर से अपर निदेशालय, नगर पालिका, जल संस्थान आदि विभागों में औचक निरीक्षण कर कार्रवाई की है…।
साक्षात्कार जारी….
अंक 107 (6 फरवरी 2019) : साक्षात्कार (भाग-01)
अंक -15 : आज आखिरी कड़ी में तल्लीताल बाजार वार्ड नंबर-15 से सभासद श्रीमती प्रेमा अधिकारी के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : श्रीमती प्रेमा अधिकारी पत्नी : श्री मोहन सिंह अधिकारी शिक्षा : एम.ए. (समाज शास्त्र) डीएसबी परिसर, नैनीताल।
काफी समय से समाज व महिलाओं के लिये कार्य कर रही प्रेमा अधिकारी, रक्तदान में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. हल्द्वानी वाली रोड में हेमंत रूवाली जी की दुकान के पास का नाला जो सदैव गंदगी से भरा रहता था, नगर पालिका द्वारा ठीक करवाकर उसमें जाली लगवाने का काम करवाया गया। 2. तल्लीताल थाने के पास नाली का निर्माण और पानी की निकासी तथा गैराज का नवीनीकरण नगर पालिका द्वारा करवाया गया। 3. तल्लीताल डीएम कार्यालय को जाने वाले रास्ते पर सार्वजनिक शौचालय जो कई वर्षों से बंद पड़ा था, उसका जीर्णोद्धार नगर पालिका द्वारा करवाया गया। 4. सरोज भवन के पास से पीछे का रास्ता तथा गली मोहमद कमर के घर से होते हुये नीलोफर की दुकान तक नवीनीकरण नगर पालिका द्वारा करवाया गया। 5. श्री विनोद तिवारी जी के घर के पास स्टीफन स्कूल होते हुये जिला पूर्ति कार्यालय जाने वाले रास्ते का नवीनीकरण का कार्य नगर पालिका द्वारा करवाया गया। 6. हिमालय होटल के पास इटन हाउस को जाने वाली सीढ़ियों तथा रास्ते का नवीनीकरण नगर पालिका द्वारा करवाया गया। 7. जिला पूर्ति कार्यालय जाने वाले रास्ते से पुलिस लाइन को जाने वाले रास्ते की सीढ़ियों का नवीनीकरण नगर पालिका द्वारा करवाया। 8. साह पुस्तक भंडार के पीछे रास्ते की जीर्ण -शीर्ण दीवार जो गिरने वाली थी, नगर पालिका द्वारा ठीक करवायी। 9. पुलिस लाइन से कमिश्नरी तक जाने वाले रास्ते में रेलिंग विधायक जी के माध्यम से लगवायी। 10. बर्ड्स आई व्यू कॉटेज की गली में नई प्रकाश व्यवस्था नगर पालिका द्वारा करवायी गयी। 11. डीएम कोर्ट में आनंद की कैंटीन से फैमिली कोर्ट तक प्रकाश व्यवस्था नगर पालिका द्वारा करवायी।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. एसएसपी आवास के पास फैमिली क्वार्टर जाने वाले रास्ते का कार्य प्रस्तावित है। 2. नैनीताल बैंक से तल्लीताल थाना तक नालियों पर जाली लगवाकर नालियों का जीर्णोद्धार करवाना है। 3. इसके अलावा और भी कार्य प्रस्तावित हैं, जिन्हें समय-समय पर पूरा करवाकर जनता की सेवा करती रहूंगी।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है, विशेष तौर से महिलाओं के उत्थान के लिये कार्य करना है।
अंक -14 : आज मल्लीताल बाजार वार्ड नंबर-14 से सभासद मोहन सिंह नेगी के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : मोहन सिंह नेगी पुत्र : स्व. राम सिंह नेगी शिक्षा : स्नातक (बी.ए.) एम.ए. (समाज शास्त्र), स्नातक (पत्रकारिता) डीएसबी परिसर, नैनीताल। विधि स्नातक, एसएसजे परिसर, अल्मोड़ा। विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. नाथ साह जी की दुकान के सामने कूड़े का डिब्बा जिससे पूरे बाजार को समस्या थी उसे हटवाकर वहां लोगों के बैठने के लिये बेंच लगवायी। 2. बेकरी कम्पाउंड में जगदीश बेकरी से इदरीस मलिक जी की बेकरी तक इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करीब 2.10 लाख की लागत से करवाया। 3. वाल्मीकि मंदिर से दयाल दा के घर तक नई प्रकाश व्यवस्था करवायी। 4. बर्तन वाली गली में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करीब 1.10 लाख की लागत से करवाया। 5. मार्केट की साफ-सफाई व्यवस्था पर पर्यावरण मित्रों का हौसला बढ़ाने प्रत्येक सुबह जरूर आता हूँ। वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. इंतखाब क्लॉथ स्टोर से लेकर टूरिस्ट होटल तक नगर पालिका के माध्यम से पूरी रोड बननी है, रोड के नीचे जो नाला है, वो सही करवाना है, जिसकी लागत करीब 10 लाख रूपये है, प्रस्तावित है। 2. बीच वाली बाजार में टाइल्स बहुत जगह से उखड़ गयी हैं, जिसका करीब दो लाख रुपये से पुनर्निर्माण कार्य होना है। 3. अंडा मार्केट में जहां कूड़ेदान है से लेकर ए वन बेकरी शॉप तक इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से होना प्रस्तावित है। 4. बाजार में नालियों का चौड़ीकरण व उनपर जालियां लगवाना प्रस्तावित है। 5. पुराना झूला परिसर में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण प्रस्तावित है। 6. कमेटी लाइन में शिव जी के मंदिर से लेकर वाल्मीकि मंदिर तक इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण प्रस्तावित है। 7. गाड़ी पड़ाव में व गोल घर के पास कुमाऊँनी संस्कृति वाले गेट लगने हैं, जो विधायक जी के माध्यम से प्रस्तावित हैं। 8. अल्पसंख्यक मद से विधायक जी के माध्यम से शाकिर हसन मीट वालों की दुकान से नब्बू अंडे वालों की दुकान तक सड़क निर्माण प्रस्तावित है, जो लगभग 12 लाख की लागत का कार्य है। 9. मेरे वार्ड में दो शौचालय हैं, उनका जीर्णोद्धार पर्यटन विभाग के माध्यम से होना है। 10. सदर कम्पाउंड से प्रेम रेस्टोरेंट तक निकलने वाली गली में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण व पथ प्रकाश व्यवस्था नगर पालिका के माध्यम से होना है। 11. सय्यद ताज रेस्टोरेंट वाली गली में नालियों का निर्माण करीब 1.10 लाख की लागत से नगर पालिका के माध्यम से होना है। 12. कृष्णा ज्वेलर्स के सामने अर्शी भाई की दुकान तक टाइल्स का निर्माण होना है। 13. खडी बाजार में गड्ढों को सही करवाया जाएगा। 14. मीडिल स्कूल के पास सीढ़ियों की मरम्मत करवानी है। 15. झूला मार्केट में (राजेश वर्मा जी के सामने ) क्यारी को पुनर्जीवित करवाना है। भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है।
अंक -13 : आज आवागढ़ वार्ड नंबर-13 से सभासद राजू टांक के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : राजू टांक पुत्र : स्व. यशपाल टांक शिक्षा : इंटरमीडिएट, सी.आर.एस.टी. इंटर कॉलेज, नैनीताल। समाजसेवा ही सर्वोपरि है।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. खुर्शीद हुसैन ‘आजाद’ के घर से स्टेट बैंक तक लोनिवि के माध्यम से सड़क में सीसी करवाकर मार्ग जीर्णोद्धार करवाया। 2. चार्टन लॉज की कूड़ेदान डिग्गी का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 3. चार्टन लॉज में ही कूड़ेदान के पास में एक पेशाबघर नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 4. ब्लू स्टार होटल से अमित साह जी फोटोग्राफर के घर तक नये तार डलवाकर, पथ प्रकाश व्यवस्था नगर पालिका के माध्यम से करवायी। 5. मीरा बुआ की दुकान से टंकी तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 6. टंकी से हिमांशु डालाकोटी के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स व सीढ़ियों का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 7. बॉबी के घर से मुकेश दास के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 8. मीरा बुआ की दुकान से लेकर ईशान के घर तक पथ प्रकाश व्यवस्था नगर पालिका के माध्यम से करवायी। 9. सिंचाई विभाग के माध्यम से क्षेत्र से निकलने वाले नालों की सफाई करवायी जा रही है। 10. पुराने बैंक ऑफ बड़ौदा के पास बड़ी नाली का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 11. काफी दिनों से बंद हो चुके नल कूड़ेदान के पास और पोस्ट ऑफिस के पास वाले दोनों नल पुनः सुचारु करवाये। 12. स्टेट बैंक के पास जीर्ण-शीर्ण हो चुके बिजली के पोल को विद्युत विभाग के माध्यम से नया लगवाया। 13. अर्शी के घर के आगे दीवार व लोहे की पुलिया का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 14. आजादी के बाद पहली बार कुंगा दा भोटिया के घर के सामने से डॉ. दुग्ताल जी के आवास तक करीब 800 मीटर के मार्ग में इंटर लॉकिंग व दीवार निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 15. बैंक ऑफ बड़ौदा पुराना से बेलवेडियर होटल तक सीसी मार्ग व बेलवेडियर होटल से लेकर अमित साह जी फोटोग्राफर के घर तक ईंटों का खड़ंजा नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 16. निशा के घर से गुप्ता जी के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 17. अनित जी की दुकान के पास से सोहेल सिद्दीकी जी के घर तक नाले पर रेलिंग सिंचाई विभाग के माध्यम से करवाया। 18. पूरे वार्ड में प्रकाश व्यवस्था सही करवायी। 19. गुप्ता जी के घर से मीरा बुआ की दुकान तक साफ सफाई के लिये नगर पालिका से एक महिला पर्यावरण मित्र नियुक्त करवायी गयी है। 20. भजन दा के घर से टीटू साह जी की दुकान तक नालियों पर नगर पालिका के माध्यम से जाल लगवाये गये।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. नदीम के घर से ताहिर के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स लगनी प्रस्तावित है। 2. फल वाले मुल्ला जी के घर से बिलाल भाई के घर तक इंटर लॉकिंग टाइल्स का कार्य प्रस्तावित है। 3. इब्राहिम के घर से दानिश के घर तक इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण प्रस्तावित है। 4. हिमांशु के घर से नन्हे भाई के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग का कार्य प्रस्तावित है। 5. नंदा आमा के घर से करण के घर के सामने तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स निर्माण प्रस्तावित है। 6. डेविड के घर से थापा जी के घर तक रास्ता एवं गलियों का निर्माण प्रस्तावित है। 7. आजादी के बाद पहली बार मेरे वार्ड में 3045 का बारात घर शाकिर भाई के घर के सामने बनने वाला है। 8. संजू भाई के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स लगनी प्रस्तावित है। 9. आवागढ़ में आशु दा के घर के पास से खुल्बे जी के घर के सामने तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स निर्माण व दोनों तरफ गेट लगने प्रस्तावित है। 10. सोहेल सिद्दीकी जी के घर से खुर्शीद हुसैन ‘आजाद’ के घर तक नाले पर रेलिंग का कार्य प्रस्तावित है। 11. चार्टन लॉज की पुलिया से पुरानी कोठी तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण प्रस्तावित है। 12. पांच लाइट पोल लगने हैं, जिसमें एक आवागढ़ में, एक चार्टन लॉज में, तीन 800 मीटर वाली रोड में लगने हैं। 13. प्रेम सरोवर होटल के पीछे बैंक ऑफ बड़ौदा तक नालियों व जालियों का निर्माण प्रस्तावित है। 14. गौरव मेहरा के घर के पीछे से अब्दुल्लाह बिल्डिंग तक नाली निर्माण व नाले पर रेलिंग निर्माण प्रस्तावित है। 15. दानिश की दुकान के पास पुलिया व दीवार निर्माण प्रस्तावित है। 16. कुंगा दा भोटिया के घर के सामने पुलिया निर्माण करवाना है।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है
अंक -12 : आज सैनिक स्कूल वार्ड नंबर-12 से सभासद श्रीमती दया सुयाल के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : श्रीमती दया सुयाल पत्नी : श्री कैलाश चंद्र सुयाल शिक्षा : परास्नातक (एम.ए. समाजशास्त्र), रानीखेत डिग्री कॉलेज, अल्मोड़ा। 15-20 वर्षों से निरंतर महिलाओं के उत्थान हेतु संघर्षरत दया सुयाल महिलाओं व समाज के लिये बहुत कुछ करना चाहती हैं।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. नाला नंबर -26 सैनिक स्कूल के पास से निकलने वाली ऊपर मेन रोड तक जाने वाली सीढ़ियों का जीर्णोद्धार नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 2. जुबली हॉल के पास राजू खान जी के घर के नजदीक वाली क्षतिग्रस्त दीवार, रेलिंग व इंटरलॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया जा रहा है । 3. देविका रानी स्कूल के पास क्षतिग्रस्त दीवार का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 4. जुबली हॉल में पंगोट को जाने वाले मार्ग पर विनोद कुमार जी के घर के ऊपर पैराफिट का निर्माण करवाया। 5. पथ प्रकाश व्यवस्था के अंतर्गत कई लाइट ठीक करवायी। 6. धूप कोठी के पास से पंगोट को जाने वाली सड़क पर रेलिंग कार्य लोनिवि के माध्यम से करवाया। 7. सफाई में विशेष ध्यान रखते हुए डोर टू डोर का निरिक्षण करती हूं। 8. लॉक डाउन में वार्डवासियों की हर सम्भव सहायता की गयी। 9. विधवा पेंशन व अन्य आर्थिक सहायता दिलवाते रहते हैं। 10. नैना पीक की सुरक्षा के लिये शासन- प्रशासन में आवाज उठाते रहते हैं क्योंकि वार्ड वासियों की सुरक्षा हमारा परम कर्तव्य है।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. वार्ड में प्रकाश की व्यवस्था और बेहतर करनी है, जिसमें धूप कोठी से लेकर पूरा सैनिक स्कूल आउट हाउस जोशी जी के मकान तक और जुबली हॉल से ऊपर भट्ट जी का हॉस्टल है, जहां से बस्ती में जाने का रास्ता है वहां नये पोल लगवाकर प्रकाश व्यवस्था करनी है। 2. विधायक जी के माध्यम से कुछ सोलर लाइट भी वार्ड में लगनी है। 3. मेलरोज कम्पाउंड हंस निवास से ऊपर जो मंदिर है उसमें सौंदर्यीकरण कार्य करवाना है। 4. शेरवानी से ऊपर पान सिंह की दुकान के पास लाल सिंह जी के घर से जो रोड जाती है उसके जीर्णोद्धार का कार्य प्रस्तावित है। 5. वार्ड में बेहतर स्वास्थ्य, बेहतर सड़कें व बेहतर प्रकाश व्यवस्था दिलाना आगे का लक्ष्य है। भविष्य की योजना:आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है
अंक -11 : आज श्रीकृष्णापुर वार्ड नंबर-11 से सभासद कैलाश सिंह रौतेला के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : कैलाश सिंह रौतेला पुत्र : श्री मदन सिंह रौतेला शिक्षा : बीए (स्नातक) व एम.ए. (समाज शास्त्र), डीएसबी परिसर, नैनीताल। कोरोना काल में भी जनहित के कार्य करने वाले कैलाश निष्छल मन से सेवा करते आये हैं।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं:
1. इंद्र कॉटेज में विधायक निधि से रेलिंग निर्माण करवाया। 2. हल्द्वानी रोड कांठ बास में नाली व नाली पर रेलिंग तथा दीवार की मरम्मत नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 3. सिपाही धारे में शनि मंदिर में गेट, दीवार व मन्दिर से नीचे को जाने के मार्ग में सीसी नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 4. बिष्ट भवन में रेलिंग का कार्य नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 5. ब्रेवरी मार्ग से नॉर्मल स्कूल तक सीसी नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 6. सलमान जाफरी के घर के पास मार्ग की टूटी दीवार का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 7. तल्ला कृष्णापुर में बिशन दा के घर के आगे आम रास्ते की टूटी दीवार का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 8. गोल घर को जाने वाले मार्ग की टूटी दीवार का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 9. ब्रेवरी मार्ग में मोटा पानी के पास टूटी दीवार का निर्माण करवाया। 10. आजादी के बाद से आज पहली बार वर्तमान में बिष्ट भवन से शाही जी के घर तक के कच्चे मार्ग को जाने वाला 2 किमी मार्ग का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से हो रहा है। 11. तल्ला कृष्णापुर में हीरा सिंह जी से घर से नीचे पिंकी के घर को जाने वाले कच्चे मार्ग का आजादी के बाद सीसी निर्माण नगर पालिका के माध्यम से कराया गया। 12. गुफा महादेव के पास दीवार निर्माण व सिसी का कार्य नगर पालिका के माध्यम से चल रहा है। 13. तुड टडिया धारे में आम मार्ग पर विधायक निधि से सीसी कार्य। 14. रमेश चंद्र के घर के पास से ब्रेवरी तक का विधायक निधि के माध्यम से सीसी मार्ग निर्माण। 15. विधायक निधि से विजय के घर के पास दीवार निर्माण कार्य करवाया। 16. तल्ला कृष्णापुर में मुनिया जी के घर से ब्रेवरी मार्ग तक नगर पालिका के माध्यम से सीसी करवाया। 17. इमाम बाड़े से हाजी चुंगी तक के 3 किमी. लंबे मार्ग में सीसी कार्य अल्पसंख्यक निधि से विधायक जी के माध्यम से करवाया। 18. जल संस्थान द्वारा लाल कोठी के पास सीवर टैंक का निर्माण कार्य करवाया। 19. लाल कोठी के पास से शशि जी के घर तक आम रास्ते की टूटी दीवार का निर्माण व रेलिंग कार्य नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 20. सूरदास बाबा के घर के नीचे आम रास्ते की टूटी दीवार की मरम्मत नगर पालिका के माध्यम से करवायी। 21. रईस होटल से कृष्णापुर का मुख्य मार्ग टूटने से आम जनता के लिए जीआईसी आम रास्ते का निर्माण सिंचाई विभाग के माध्यम से करवाया। 22. दो सोलर लाईट जिलाधिकारी महोदय के माध्यम से लगवायी गयी। 23. शनि मंदिर में नगर पालिका के सहयोग से लाइट लगवायी। 24. सिंचाई विभाग से वार्ड के सभी नालों की मरम्मत व सफाई कार्य करवाया, जो आज भी चल रहा है। 25. कांठबास में वाल्मीकि धर्मशाला का निर्माण कार्य चल रहा है।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. गंगा कॉटेज में सार्वजनिक मार्ग का निर्माण प्रस्तावित है। 2. मल्ला कृष्णापुर से बिष्ट भवन तक सार्वजनिक मार्ग में सीसी व दीवार मरमत कार्य प्रस्तावित है। 3. बिष्ट भवन से गुफा महादेव मंदिर को जाने वाले मार्ग की टूटी दीवार का मरम्मत कार्य प्रस्तावित है। 4. सावित्री देवी जी के घर के नीचे आम रास्ते की दीवार की मरम्मत प्रस्तावित है। 5. लाल कोठी के पास शशि के घर से रमेश के घर तक के आम रास्ते का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 6. तल्ला कृष्णापुर में राकेश दा के घर से पंकज के घर तक आम रास्ते का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 7. तल्ला कृष्णापुर में रावत जी के घर के पीछे नाली निर्माण प्रस्तावित है। 8. दुर्गापुर में बने आवासों में निवेशित परिवारों के लिए बारात घर, मार्ग में सीसी व रेलिंग कार्य प्रस्तावित है। 9. बिष्ट भवन से सरस्वती विहार तक के ब्रेवरी मार्ग का मरम्मत कार्य प्रस्तावित है। 10. ब्रेवरी मार्ग में विश्राम स्थल का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 11. जीआइसी स्कूल के पास टूटी दीवार जिसको आपदा के तहत लोनिवि द्वारा बनाया जाना है जो आपदा की अगली बैठक में हो जाएगा, इस विषय में एडीएम महोदय से वार्ता हो चुकी है, प्रस्तावित है। 12. कांठबास में सीसी निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 13. वार्ड में लाईट पोल लगाने प्रस्तावित हैं। 14. मल्ला कृष्णपुर में लाल कोठी के पास व गोल घर के पास सीवर लाइन स्थापित करवानी है। 15. इमाम बाड़े में शिया मस्जिद में टीन शेड का निर्माण कार्य प्रस्तावित है।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है
अंक -10 : आज नैनीताल क्लब वार्ड नंबर-10 से सभासद श्रीमती सपना बिष्ट के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय : नाम : श्रीमती सपना बिष्ट पत्नी : श्री कुंदन बिष्ट शिक्षा : इंटरमीडिएट उत्तीर्ण, हिमाचल बोर्ड, हिमाचल प्रदेश।
लॉकडाउन में भी जनहित के विभिन्न कार्यों में भागीदारी करने वाली सपना बिष्ट का मानना है कि वे काम कराने में विश्वास रखती हैं, काम जनता गिनायेगी।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. स्प्रिंग फील्ड में सरला जोशी के घर से कत्यूरा जी के घर तक सीसी, दीवार व रेलिंग निर्माण करवाया। 2. निशांत स्कूल के पास नंदी मिश्रा जी व केवलानन्द के घर से सात नंबर को जाने वाला मार्ग सही करवाया। 3. विशाल टम्टा के घर से जाहिद के घर तक सीढ़ी, सीसी व रेलिंग निर्माण करवाया। 4. पदम् सिंह रावत जी के घर से सात नंबर को मिलने वाली रोड में सीसी व दीवार का विधायक जी के सहयोग से व लोनिवि के माध्यम से निर्माण चल रहा है। 5. वार्ड में नाले और नालियों का जीर्णोद्धार का कार्य कई जगह हो चुका है और कई जगह चल रहा है। 6. विलायत कॉटेज से नवीन साह जी के घर तक नाले पर सिंचाई विभाग के माध्यम से जाल लगवाए हैं। 7. रोजगार कार्यालय का जाल नवीन पंत जी के घर के पास नगर पालिका, नैनीताल के माध्यम से 02 लाख की लागत से जाल का निर्माण करवाया। 8. विधवा पेंशन व विभिन्न प्रकार से आर्थिक सहयोग, मुख्यमंत्री राहत कोष से असहायों को प्रदान करवायी गयी हैं।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. विधायक जी के माध्यम से 16 सोलर लाइट लगनी हैं। 2. 16 पोल लगने हैं जिसमें 5 पोल अलग से नगर पालिका द्वारा आवंटित हुए हैं। 3. स्वास्तिक भवन (नैनी विहार) से लेकर उमा जोशी जी के घर तक इंटर लॉकिंग टाइल्स, रेलिंग व जाल निर्माण प्रस्तावित है। 4. स्प्रिंग फील्ड में निर्मला अधिकारी के घर से यकीन के घर तक इंटर लॉकिंग टाइल्स, रेलिंग व जाल निर्माण प्रस्तावित है। 5. उस्मान ठेकेदार के घर से जहीर के घर तक फील्ड का निर्माण, रेलिंग व इंटर लॉकिंग टाइल्स का लगभग 5.50 लाख का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 6. यशपाल आर्या कैबिनेट मंत्री जी के माध्यम से अल्पसंख्यक आयोग से एतात के घर से लेकर जाहिद के घर तक सड़क में इंटर लॉकिंग का लगभग 3.50 लाख का कार्य प्रस्तावित है। 7. अल्पसंख्यक मंत्री जी के माध्यम से पोस्ट ऑफिस में ताज के घर से राज गेस्ट हाउस तक रास्ते में इंटर लॉकिंग टाइल्स लगनी है। 8. विधायक जी के माध्यम से होने वाले 5 प्रस्तावित कार्य: 9. आशा के घर से मधु बिष्ट के घर तक सड़क में इंटरलॉकिंग का कार्य विधायक जी के माध्यम से 2 लाख रूपये से होना है। 10. राधे के घर से विलायत कॉटेज तक सड़क चौड़ीकरण विधायक जी के माध्यम से 2 लाख की लागत से होना है। 11. ग्लेंमोर में पूर्व चेयरमैन के घर से डंगवाल जी के घर तक सड़क निर्माण कार्य विधायक जी के माध्यम से 2 लाख की लागत से होना है। 12. संदीप आर्या जी के घर से धूप कोठी तक सड़क चौड़ीकरण, इंटर लॉकिंग का कार्य विधायक जी के माध्यम से 2 लाख की लागत से होना है। 13. वार्ड को साफ -सुथरा व स्वच्छ बनाने को कई योजनाएं हैं।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है।
अंक -9 : आज अपर मॉल रोड वार्ड नंबर-9 से सभासद दीपक बर्गली के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : दीपक बर्गली पुत्र : स्व. डी. एस. बर्गली शिक्षा : मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा, राजकीय पॉलिटेक्निक नैनीताल। जनहित के विभिन्न कार्यों में भागीदारी करते हैं। विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. तल्लीताल कपूर लॉज में कैंडिल फैक्ट्री से चिड़ियाघर पैदल मार्ग तक 2,49,145 रुपये की लागत से नाली निर्माण करवाया। 2. चिड़ियाघर मार्ग मेघदूत होटल के पास कूड़ाघर का 76,047 रूपये की लागत से और तल्लीताल रिक्शा स्टैंड से पायल होटल बिरला मार्ग तक टाइल्स निर्माण का कार्य 90,0440 रुपये की लागत से करवाया। 3. मॉल रोड स्थित प्राइमरी स्कूल की क्षतिग्रस्त दीवार का निर्माण 2, 55, 845 रुपये की लागत से करवाया। 4. माउंट रोज कम्पाउंड में केडी दीवार एवं उत्पल पांडे के घर के पास क्षतिग्रस्त मार्ग का कार्य 2,07,964 रुपये की लागत से करवाया। 5. तल्लीताल कपूर लॉज में शेखर पाठक जी के आवास के पास नाली का पुनर्निर्माण 2,63,114 रूपये की लागत से करवाया। 6. मॉल रोड नर्सरी स्कूल के समीप दीवार निर्माण रुपए 58,973 की लागत से करवाया। 7. तल्लीताल जिला पंचायत से लक्ष्मी कुटीर जाने वाले मार्ग में खुल्बे जी के आवास के समीप सड़क मरम्मत व पुनर्निर्माण कार्य 5,63,964 रूपये की लागत से करवाया। 8. बेलवाल होटल से मंगल दास साह जी के घर तक मार्ग का पुनर्निर्माण कार्य करवाया। 9. पूरे वार्ड में पथ प्रकाश व्यवस्था ठीक करवायी। वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. भाभर हॉल में रास्ते का पुनर्निर्माण 2. पायल होटल से अजय लाल जी के घर तक खड़ंजा निर्माण। 3. मेविला कम्पाउंड में शिव सिंह रावत के घर तक रास्ते का निर्माण। 4. धर्मा पालीवाल जी के घर से जवाहर सिंह जी के घर तक रास्ते का निर्माण। भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है। -प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (दीपक बर्गली, सभासद, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित)
अंक -8 : आज अयारपाटा वार्ड नंबर-8 से सभासद मनोज साह जगाती के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं…
सभासद परिचय : नाम : मनोज साह जगाती पुत्र : स्व.एम. बी.एल. साह जगाती शिक्षा : स्नातक (बी. कॉम) डीएसबी कॉलेज, नैनीताल, सामाजिक कार्य में डिप्लोमा, योगा में डिप्लोमा, आपदा प्रबंधन में डिप्लोमा, ग्रामीण एवं शहरी प्रबंधन में डिप्लोमा, नेटवर्किंग में डिप्लोमा, ऑफिस मैनेजमेंट में डिप्लोमा, वर्तमान में मानव अधिकार में डिप्लोमा में अध्ययनरत। संस्थापक : ‘जय जननी-जय भारत संस्था के अंतर्गत मनोज साह जगाती हजारों पौधे लगा चुके हैं व हजारों कट्टे कूड़ा व शराब की बोतलें निकाल चुके हैं। साथ ही 25वीं बार रक्तदान कर चुके हैं, अनगिनत लोगों को हल्द्वानी-नैनीताल में रक्त दिलवा चुके हैं। कपड़ा बैंक, ऑनलाइन ब्लड बैंक, बुक बैंक चलाते हैं। लॉकडाउन के दिनों में ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों को उन्होंने लगातार 125 दिनों तक आयुर्वेदिक चाय पिलाकर सेवा की, जन समस्या निवारण हेतु अयारपाटा शिकायत ग्रुप व अयारपाटा सेवा दल बनाया, जिसके माध्यम से लॉक डाउन में शेरवुड और अयारपाटा में सस्ती सब्जी के लिये आढ़त तथा मेडिकल कैंप भी लगवाए। युवाओं को नशा मुक्त रखने के लिये अयारपाटा फुटबॉल क्लब व फास्ट अयारपाटा क्रिकेट क्लब के बैनर तले टीमें भी उतारते हैं। निर्धन व असहाय परिवारों को विधायक जी के माध्यम से आर्थिक सहयोग दिलवाते हैं। शहर में किसी को भी आवश्यकता होती है तो मदद पहुंचाते हैं। सम्मानित हुए : 1. वन मंत्री उत्तरखण्ड सरकार डॉ. हरक सिंह रावात द्वारा सम्मान मिल चुका है। 2. उत्तरखण्ड सम्मान भी मिल चुका है। 3. पूर्व सांसद एवं वर्तमान महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा भी सम्मान मिल चुका है। 4. वन विभाग द्वारा भी समानित किया गया है। 5. लेक सिटी द्वारा भी समानित किया जा चुका है।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं : 1. अरोमा होटल के पास दीवार का निर्माण करवाया। 2. पुरानी शराब भट्टी से लेकर अरोमा तक रेलिंग निर्माण कार्य करवाया। 3. पर्दा धारा का जीर्णोद्धार कार्य करवाया जा रहा है। 4. नैनी रिट्रीट होटल से शिव मंदिर तल रेलिंग निर्माण, सड़क व दीवार मरम्मत का कार्य, नालियों के ऊपर तक जाल का निर्माण कार्य सब विधायक जी के माध्यम से करवाया गया। 5. डलहौजी मार्ग में रेलिंग का कार्य विधायक जी के माध्यम से करवाया। 6. श्री पूरन ढैला जी के घर के पास नाले के ऊपर जाल का काम करवाया। 7. श्री पूरन ढैला जी के घर के नीचे बड़ा नाला (विमल कुंज में निकलता है ) जो पूर्ण रुप से टूट चुका था सिंचाई विभाग के सहयोग से फिर से बनवाया गया। 8. श्री मनोज कुमार (मित्तल जी) के घर के पास रेलिंग का कार्य करवाया। 9. श्री मनोज कुंवर के दुकान के पास रेलिंग का कार्य करवाया। 10. पूर्व सभासद जितेंद्र बिष्ट जी के घर के पास रेलिंग का कार्य करवाया गया। 11. लंघम गर्ल्स हॉस्टल से वाल्मीकि बस्ती तक रेलिंग का कार्य करवाया। 12. श्री गुसाईं जी के घर के पास दीवार का कार्य करवाया। 13. ओकवुड स्कूल के आगे सड़क का जीर्णोद्धार विधायक जी के माध्यम से करवाया। 14. शेरवुड से जंगल कैंप तक रोड की मरम्मत विधायक जी के माध्यम से करवाया। 15. पप्पी दा की चाय की दुकान के पास बड़े नाले के ऊपर रेलिंग का कार्य ये भी विधायक जी के माध्यम से करवाया। 16. डीआईजी निवास के पास रेलिंग का कार्य व रोड की मरम्मत का कार्य विधायक जी के माध्यम से करवाया। 17. किर्लानी कम्पाउंड में किये गये विभिन्न कार्य : किर्लानी कम्पाउंड में सड़क की दीवार का कार्य, श्री पांडे जी के घर के पास रेलिंग का कार्य, श्री दुलारी राम के घर के पास सीढ़ियों का जीर्णोद्धार करवाया, माउंटेन विस्ट होटल के बगल में श्री चंद्रा जी के घर के पास टाइल्स का काम करवाया, किर्लानी कम्पाउंड में ही माउंटेन विस्ट की बगल में नई सीढ़ियों का निर्माण करवाया, श्री विजय (मास्टर साहब) के घर से शिव मंदिर तक सड़क का जीर्णोद्धार करवाया तथा रेलिंग का निर्माण दोनों अलग अलग बजट में करवाया, किर्लानी कम्पाउंड में ही श्री दानी जी के घर के पास टूटी हुई दीवार का निर्माण करवाया, श्री दानी जी के घर से श्री विजय (मास्टर साहब ) के घर तक रेलिंग का कार्य करवाया, श्री विजय (मास्टर साहब) के घर से व बक्स हॉस्टल के बीच में सीढ़ी निर्माण कार्य करवाया, श्री शिव शंकर जी के घर के बगल में सीढ़ियों का जीर्णोद्धार करवाया। 18. आजादी के बाद पहली बार सबसे पुराना मार्ग आठ मोड़ में दीवार का कार्य, रेलिंग और पूरी सड़क का जीर्णोद्धार करवाया ईंटों का बढ़िया खड़ंजा बनवाया। 19. आजादी के बाद पहली बार विमल कुंज से बारह पत्थर पैदल मार्ग की झाड़ियों का समय -समय पर कटान व मार्ग सफाई करवाना। 20. कैपिटोल सिनेमा के पीछे स्टाफ क्वार्टर में टाइल्स का कार्य व सीढ़ियों का कार्य तथा नालियों का निर्माण दोनों अलग अलग बजट से करवाये। 21. नगर पालिका के पीछे टाइल्स व चेन लगवाने का कार्य किया। 22. भोटिया मार्केट के आगे नाले का जीर्णोद्धार व जाल का निर्माण करवाया। 23. चाट मार्केट में नाले का जीर्णोद्धार व जाल निर्माण करवाया। 24. नगर पालिका के पास व फव्वारे के मध्य खाद बनाने हेतु ट्रंच बनवाये गये। 25. डीएसए के पीछे बोरा जी की दुकान तक का बंद रास्ता खुलवाया। 26. कोतवाली के आगे से बोरा जी की दुकान तक एडीबी के माध्यम से रेलिंग का कार्य करवाया। 27. रिक्शा स्टैंड से मंदिर तक चोरी की गयी बेंचेस को एडीबी के माध्यम से पुनः बेंचेस लगवायी गयी। 28. डीएसए पार्किंग में लगने वाले टॉवर का विरोध किया, क्योंकि उससे खेल प्रेमियों को नुकसान होता। 29. रिक्शा स्टैंड से लेकर मंदिर तक जो टाइल्स टूटी थी उनका एडीबी के माध्यम से पुनर्निर्माण करवाया। 30. पूरे फील्ड के चारों तरफ जो पुरानी लाइट थी उनको एडीबी के माध्यम से सही करवाया और जो नई लाइट थी उनको नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 31. जनहित याचिका के बाद पूरे शहर में स्ट्रीट लाइट को सुचारु किया गया। 32. क्षेत्र में डोर टू डोर कूड़ा निस्तारण व स्वयं मेरे द्वारा निरिक्षण। 33. अनावश्यक कूड़ेदानों को हटाया गया, जिससे बंदर व आवारा पशुओं का आतंक कम हुआ। 34. गर्नी हाउस के पास क्रिया घर का जीर्णोद्धार करवाया। 35. डोर टू डोर गैस की व्यवस्था की गयी। 36. होली एंजेल से लेकर अरविन्द आश्रम तक टूटी रेलिंग का जीर्णोद्धार, दीवारों का जीर्णोद्धार दोनों ही विधायक जी के माध्यम से करवाये गये। 37. अयार जंगल कैंप से लेकर टिफिन टॉप तक रास्ते में राहगीरों हेतु बेंचेस लगवायी तथा कूड़ेदान लगवाये। 38. पुरानी शराब भट्टी से लेकर अरोमा होटल तक नशा मुक्त सड़क बनायीं गयी। 39. चोरी की वारदातों को रोकने के लिये बिना सत्यापन अनजान व्यक्ति के प्रवेश पर प्रतिबंध। 40. आजादी के बाद पहली बार बक्स हॉस्टल में स्ट्रीट लाइट तथा तारा जौरज आउट हाउस के पास स्ट्रीट लाइट लगवायी। 41. मस्जिद से राजभवन तक कई जगह लोनिवि के माध्यम से दीवारों का कार्य ध् सड़क की मरमत का कार्य करवाया। 42. कुंदन बिष्ट जी के घर के पास सीढ़ी और रेलिंग निर्माण कार्य करवाया।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं : 1. अयारपाटा में ओपन जिम का निर्माण कराना। 2. स्टाफ क्वार्टर तक दो जगह सड़क का निर्माण व रेलिंग का निर्माण करवाना। 3. अयारपाटा में जगह जगह बेंच लगवाना। 4. अयारपाटा में विभिन्न मार्गो पर बारिश व धूप से बचने हेतु शेड का निर्माण। 5. अयारपाटा में सभी मार्गो पर रेलिंग व मार्गो का जीर्णोद्धार। 6. मोदी भवन के पास श्री नवल जी के घर तक रेलिंग व सड़क का निर्माण करवाना। 7. लंघम हॉस्टल के पास बस्ती में श्री आनंद जी के घर से गुसाईं राम जी के घर तक सड़क निर्माण। 8. अयार जंगल कैंप से 16 नंबर कोठी तक स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था। 9. नगर पालिका के पीछे नई सीवर लाइन बिछ्वानी है। 10. क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट के नये पोल लगवाने है। 11. डीआईजी रोड से सनवाल जी के घर तक सड़क का निर्माण व पुलिया में रेलिंग का निर्माण। 12. अयारपाटा की समस्त अल्पसंख्यक बस्ती में स्ट्रीट लाइट लगवाना। 13. अयार जंगल कैंप से श्री मनोज कुंवर जी के घर तक रेलिंग का कार्य। 14. श्री मनोज कुंवर जी के घर से श्री हीरा सिंह बिष्ट जी के घर तक रेलिंग का कार्य। 15. अयारपाटा में तीन चिन्हित स्थानों पर प्याऊ लगने हैं जिनका टेंडर हो चुका है। 16. काशीपुर हाउस से दीपू बोरा जी के घर तक रेलिंग का कार्य। 17. देवी एकेडमी स्कूल की बगल में टाइल्स निर्माण कार्य। 18. श्री कुंदन सिंह बिष्ट जी के घर के आगे रेलिंग का निर्माण।
भविष्य की योजना : 1. आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है जिसके अंतर्गत : 2. नैनीताल में सेना की भर्ती हेतु युवाओं के लिए निःशुल्क आर्मी ट्रैनिंग अकेडमी खोलना। 3. नैनीताल में अहसाय बुजुर्गों के लिए वृद्धा आश्रम बनवाना। 4. गरीब लड़कियों की शादी हेतु ट्रस्ट बनाना। 5. नैनीताल और उत्तराखंड के जंगलों को स्वच्छ व हरा-भरा करना। 6. नैनीताल के जीबी पंत (रैमजे) चिकित्सालय को एम्स जैसा बनवाना।
-प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (मनोज साह जगाती, सभासद, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित)
अंक -7 : आज सूखाताल वार्ड नंबर-7 से श्रीमती गजाला कमाल के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : श्रीमती गजाला कमाल पति : श्री कमाल खान शिक्षा : स्नातक (बीए, बीएड, बी लिब, बीए-उर्दू)
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. सूखाताल ऐशडेल स्कूल को पूरी तरह रेनोवेट करवाया गया। यहां कक्षाएं बहुत खस्ता हालत में थीं। यहां लाइट का काम, ब्लैक बोर्ड, दरवाजों की टूट-फूट, छत की चादर, स्कूल में रंग-पुताई का काम भी करवाया। 2. सूखाताल में होनी वाली रामलीला के प्रांगण का कार्य करवाया, जिसमें लॉकिंग टाइल्स बिछाये गये। 3. सूखाताल के शौचालय में जल की व्यवस्था करवायी गयी। 4. सूखाताल में वाल्मीकि कॉलोनी में 3 जगह लाइट की व्यवस्था की गयी है। 5. रॉयल होटल कम्पाउंड के गेट से पूरी कॉलोनी में लॉकिंग टाइल्स का कार्य करवाया गया। 6. रॉयल होटल कंपाउंड के छोटे नालों में लोहे की जालियां लगायी गयी। 7. रॉयल होटल कम्पाउंड के नाले के किनारों पर ग्रिल लगावायी गयी। 8. रॉयल होटल के अंदर जाने वाली सड़क पर भी ग्रिल लगवाने का कार्य किया गया। 9. रॉयल होटल कम्पाउंड में दो पत्थर की दीवारें बनवायी गयी। 10. पौनी सराय की सीढ़ियों से लेकर मैट्रोपोल के अंदर की सड़कों का इस्टीमेट भी तैयार है, जल्द ही लगवा दिया जायेगा। 11. टीआरसी से धामपुर बैंड तक पथ प्रकाश की व्यवस्था करवायी गयी। 12. कूड़ा निस्तारण के लिये अवेयरनेस प्रोग्राम चलाने के लिऐ हिलदारी अभियान वार्ड नंबर 7 सूखाताल में सबसे पहले लायी गयी। 13. हमारे वार्ड में डोर टू डोर का कार्य क्रिर्यान्वित किया गया जो आज 99ः घरों में चल रहा है। 14. वार्ड में बैंच की व्यवस्था भी की गयी है, जो कि टूरिस्ट और लोकल लोगों के बैठने के काम आये, इसलिए रॉयल होटल कंपाउंड गेट के सामने लगवायी गयी है। 15. रॉयल होटल कंपाउंड में एक मोहित भाई के घर से फैसल भाई के घर तक सीवर और रोड का कार्य करवाया। 16. कोरोना काल में वार्ड के लोगों के साथ हर समय खड़े रह कर काम किया, राशन से लेकर दवाइयां पहुंचाने का कार्य पूरी जिम्मेदारी से किया।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. सूखाताल चौराहे से बस्ती तक का निर्माण कार्य जिस का टेंडर हो चुका है, शीघ्र ही काम शुरू हो जाएगा। 2. सूखाताल नाले के किनारों के लिए ग्रिल बन चुकी हैं, जो जल्द ही लग जायेगी, क्योंकि इस नाले में अक्सर गाये गिर जाया करती है, बेजुबान जानवरो की सुरक्षा को लेकर इस कार्य को किया गया है। 3. सूखाताल में ही वाल्मीकि कॉलोनी में एक जगह पोल लगने हैं, पोल आ गये है जो जल्द ही लगा दिया जाऐगा। 4. बंगाली कॉलोनी में भी पोल लगने है वो भी शीघ्र लगा दिये जाएंगे। 5. बंजारा बस्ती में सड़क निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 6. रॉयल होटल कम्पाउंड की कुछ छोटे कार्य प्रस्तावित हैं। 7. रॉयल होटल कंपाउंड में जिस-जिस स्थान पर पथ प्रकाश की आवश्यकता है उन स्थानों पर बहुत जल्दी ही पोल लगा दिये जाएंगे।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है, मेरा मुख्य उद्देश्य स्वच्छता है। मैं चाहती हूं, मेरा वार्ड ‘डिजिटल वार्ड’ के रुप में विकसित हो। -प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (श्रीमती गजाला कमाल, सभासद, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित)
अंक -6 : आज नारायण नगर वार्ड नंबर 6 से सभासद भगवत सिंह रावत के कार्यों व भावी योजनाओं से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : भगवत सिंह रावत पिता : स्व. श्री उदय सिंह रावत शिक्षा : ग्यारहवीं कक्षा उत्तीर्ण
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. देव पाटा (पॉलिटेक्निक) से लेकर नारायण नगर तक सीवर लाइन निर्माण करवाया। 2. पॉलिटेक्निक से लेकर वाल्मीकि बस्ती तक ग्रिल, सीसी, व पैराफिट निर्माण करवाया। 3. वाल्मीकि बस्ती में गेट व बारात घर का निर्माण करवाया। 4. पिटरिया में मुल्ला जी के घर से लेकर सादिक भाई के घर तक सीसी निर्माण करवाया। 5. पिटरिया से नारायण नगर तक दीवार-पैराफिट व सीसी मार्ग का निर्माण करवाया। 6. नारायण नगर में दो बाथरूम, दर्शन घर में सीसी निर्माण करवाया। 7. नारायण नगर में ही सुदीप के घर तक सीसी दीवार निर्माण करवाया। 8. नारायण नगर में ही मोहन दा के घर के पास से रामलीला मैदान तक दीवार व रास्ता निर्माण करवाया। 9. नारायण नगर में एक बारात घर का निर्माण भी करवाया। 10. देश आजाद होने के बाद पहली बार पुतली बाई कब्रिस्तान (नारायण नगर) में सीसी, सोलर लाइट व ग्रिल निर्माण करवाकर सड़क पहुंचाई गयी। 11. नारायण नगर में क्रिया घर निर्माण करवाया। 12. नारायण नगर में ही घिंगारी के गधेरे से श्रोत का पानी लाने को पाइप लाइन की फिटिंग करवायी। 13. नारायण नगर में ही बारात घर से लेकर पानी की टांकी तक दीवार व सीसी निर्माण करवाया। 14. नारायण नगर में मोबाइल टॉवर लगवाया। 15. नारायण नगर की ठप वि।ुत आपूर्ति को सुचारु किया गया। 16. नारायण नगर में पार्किंग व्यवस्था करवायी गयी। 17. नारायण नगर मंदिर का सौंदर्यीकरण कार्य करवाया। 18. एटीआई से लेकर पंत जी की दुकान तक सीसी निर्माण तथा ग्रिल निर्माण करवाया। 19. शेरवानी मार्ग के नाले में ग्रिल का निर्माण कार्य करवाया। 20. वाल्मीकि बस्ती से बारह पत्थर मंदिर तक सड़क में टाइल्स, ग्रिल व दीवार निर्माण करवाया। 21. बारह पत्थर मुस्लिम कब्रिस्तान में उर्स के लिये एक हॉल का निर्माण करवाया। 22. मुस्लिम कब्रिस्तान में ही सीसी मार्ग निर्माण करवाया। 23. क्रिश्चियन चर्च तक सीसी मार्ग निर्माण करवाया। 24. घोड़ा स्टैंड बारह पत्थर में पानी लाइन लगवायी… 25. घोड़ा स्टैंड पर लोगों के बैठने के लिये 08-10 बेंच लगवाई तथा सीसी निर्माण करवाया। 26. नरेंद्र सिंह जी के घर से रूबी जी के घर तक सीसी निर्माण करवाया। 27. क्षेत्र में सोलर लाइट लगवायीं। 28. बुजुर्गो को पेंशन व जरूरतमंदों को आर्थिक सहायता प्रदान की गयी।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. नारायण नगर सामुदायिक भवन से पानी के श्रोत तक सीसी सड़क निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 2. रामलीला मैदान में छत प्रस्तावित है। 3. सामुदायिक भवन से देवी माँ मंदिर तक दीवार, सीसी, रेलिंग निर्माण प्रस्तावित। 4. आबिद के घर के पास सीसी निर्माण। 5. गैरीखेत रोड से नारायण नगर तक नाली निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 6. श्री रमेश पांडे जी के घर से पॉलिटेक्निक तक रेलिंग निर्माण प्रस्तावित है। 7. नारायण नगर में नाली मरम्मत व ग्रिल निर्माण कार्य प्रस्तावित है।
भविष्य की योजना: यदि जनता इसी तरह प्यार दे तो आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है।
-प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (भगवत सिंह रावत, सभासद, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित)
अंक -5 : आज हरिनगर वार्ड नंबर-5 से सभासद पुष्कर बोरा के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:-
सभासद परिचय : नाम : पुष्कर बोरा पुत्र : श्री आनंद सिंह बोरा शिक्षा : आम्रपाली कॉलेज, हल्द्वानी से होटल मैनेजमेंट में त्रिवर्षीय डिप्लोमा।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. टीचर्स कॉटेज में रास्ता व सीढ़ी निर्माण करवाया। 2. ब्रेसाइड कंपाउंड में मुन्नी देवी जी के घर से लेकर वीरेंद्र जोशी जी के घर तक एक रास्ता और दीवार निर्माण करवाया। 3. सुरेश जोशी जी के घर के आगे बच्चों के खेलने के लिये पार्क बनवाया। 4. भानू प्रताप आर्या के घर से लेकर देवकी मनराल जी के घर तक रास्ता बनवाया। 5. ओक लॉज में गोपाल आर्या जी के घर से लेकर रंजीत के घर तक क्षतिग्रस्त रास्ते की मरम्मत करके दीवार समेत रास्ता बनवा रहे हैं। 6. बहुत कोशिश कर करके सैनिक स्कूल से लेकर बिरला चुंगी तक लोनिवि द्वारा रेलिंग, दीवार निर्माण व सड़कों के गड्ढे भरवा रहा हूं। 7. देवली फील्ड में नई लाइट लगवायी। 8. पुराना राजभवन में पानी की बड़ी समस्या थी, जिसके लिये जल संस्थान से कई बार अनुरोध करके बिरला चुंगी वाली लाइन से हटाकर टांकी बैंड से जलापूर्ति करवायी जिससे लोगों को राहत मिली। 9. टांकी में दूरदर्शन से लेकर त्रिलोचन टांक जी के घर तक का रास्ता बनवाया।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं : 1. देवली फील्ड में रास्ता व दीवार निर्माण स्वीकृत करवाया, शीघ्र ही काम शुरू हो जाएगा। 2. हरीश बिष्ट जी के घर से लेकर राजेंद्र बिष्ट जी के घर तक की सीढ़ियों का टेंडर हो चुका है। शीघ्र काम शुरू होने वाला है। 3. त्रिलोक भट्ट के घर से लेकर सुमन बिष्ट के घर तक का रास्ता भी जल्दी होना है, जिसकी सारी प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। 4. कंचन साह जी के घर के पास सस्ते गल्ले की दुकान से लेकर रंजीत थापा जी के घर तक के रास्ते को सही करवाना है.. 5. विद्युत के पांच पोल स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से ब्रेसाइड में एक, देवली फील्ड में एक, आल्मा कॉटेज में चंदन बिष्ट जी के घर के पास एक, महेश भट्ट जी के घर के पास एक और एक पुराना राजभवन में एक पोल लगना है। 6. ऑक लॉज में दो-तीन दिन में ही नई लाइट लगवानी है। 7. हनुमान मंदिर के पास राजू बिष्ट के घर से लेकर दीवान बिष्ट जी के घर तक का सीढ़ी वाला रास्ता प्रस्तावित है। 8. महेश भट्ट जी के घर के पास रेलिंग का प्रस्ताव दे रखा है.. 9. निहारिका आर्या के घर से लेकर मोंटी के घर तक का रास्ता बनना है। 10. टांकी बैंड से आगे डामर की सड़क धंस रही है, जिसके लिये लोनिवि को बता रखा है, जल्द ही उस पर कार्य होगा।
भविष्य की योजना : आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है।
श्री पुष्कर बोरा, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित)
अंक -4 : आज हरिनगर वार्ड नंबर-4 से सभासद रेखा आर्या के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय : नाम : श्रीमती रेखा आर्या पति : श्री सुनील कुमार शिक्षा : स्नातक (बी.ए. राजनीति शास्त्र), डीएसबी परिसर, नैनीताल। महिला मंडल समूह से भी जुड़ी हुई हैं।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं:
1. नेशनल होटल के नीचे नाले का निर्माण करवाया। 2. भगत जी (धोबीघाट) के घर पास की दीवार का निर्माण करवाया। 3. धोबीघाट में श्याम जी के घर के पास व अन्य लोगों के घर के पास सीसी निर्माण करवाया। 4. धोबीघाट में ही शौचालय का निर्माण करवाया। 5. बूचड़खाने में गुड्डू के घर के पास सीढ़ी व सीसी निर्माण करवाया। 6. बूचड़खाने में मस्जिद के पीछे नौशाद के घर से नंद लाल के घर की ओर नाली निर्माण करवाया। 7. बूचड़खाने में ही इकराम के घर के पास दीवार का निर्माण करवाया। 8. वैष्णों देवी मंदिर नया बाजार के पास टाइल्स निर्माण कार्य करवाया। 9. कन्नू लाल जी के घर के पास सीढ़ी व सीसी निर्माण करवाया। 10. हरिनगर में सीसी मार्ग निर्माण करवाया। 11. हरिनगर में श्रमजीवी संस्था के द्वितीय तल का निर्माण करवाया। 12. नाला नंबर 54 की मरम्मत सिंचाई विभाग के द्वारा करवायी। 13. नया बस अड्डा (रोडवेज) तल्लीताल के नीचे नाले का मरम्मत कार्य भी और सफाई कार्य भी चल रहा है। 14. बूचड़खाने में तीन, हरिनगर में चार, धोबीघाट में दो व लकड़ी टाल में एक नई लाइटें लगवाई।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. फौजी भैया के घर के पास नाली पर जाल लगवाना है। 2. हरिनगर में दिनेश कटियार के घर के पास वाले नाले पर रेलिंग लगवानी है। 3. मिल हाउस में क्षतिग्रस्त शौचालय का मरम्मत कार्य। 4. हरिनगर में कपूर भवन में नाले के पास जाल लगवाना है। 5. धोबीघाट में क्षतिग्रस्त डिग्गियों का मरम्मत कार्य कराना है। 6. तल्लीताल रामलीला मैदान हरिनगर मोटर गैराज के पास लोगों के घर के आगे नालियों का निर्माण कराना है। 7. श्रमजीवी संस्था के आगे सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करवाना है। 8. प्रकाश व्यवस्था के लिये छः नये पोल लगने हैं, जिसमें बूचड़खाने में दो, 9. लकड़ी टाल में दो, नया बाजार में एक व ममता जोशी के घर के पास रोड में एक पोल लगना है। 10. शहीद मेजर राजेश अधिकारी इंटर कॉलेज की दीवार पिछले वर्ष गिर गयी थी, जिसका दैवीय आपदा के अंतर्गत निर्माण करवाना है।
भविष्य की योजना: बलियानाला का सही प्रकार से निर्माण हो जाये, यही मेरा उद्देश्य है, यही मेरा सपना है।
-प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (श्रीमती रेखा आर्या, सभासद नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित।)
अंक -3 : आज पेश हैं राजभवन वार्ड नंबर-3 की सभासद महोदया निर्मला चंद्रा के कार्य एवं भावी योजनाएं:
सभासद परिचय : नाम : श्रीमती निर्मला चंद्रा पत्नी : श्री राजेश चंद्रा शिक्षा : परास्नातक (एम.ए.) समाजशास्त्र, डीएसबी परिसर, नैनीताल। पिछले 15 वर्षों से आशा कार्यकत्री हैं।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं:
1. तल्लीताल रॉक हाउस के पास के नाले पर जाल लगवाकर एक सीढ़ीनुमा रास्ता बनवाया, जिससे करीब 08-10 परिवार लाभान्वित हुए। 2. सेंट जोसेफ के पास जहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के घर हैं, वहां नाली बनवायी, नाला ठीक करवाया और जाल लगवाया। 3. पुराने जिला पंचायत के पास रास्ता ठीक करवाया। 4. अभी कुछ दिन पहले सेंट मेरीज कॉलेज के गेट के सामने व पूरन पार्क में प्रकाश व्यवस्था के लिये नये कनेक्शन करवाये।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं:
1. वार्ड में और प्रकाश व्यवस्था करवानी है, क्योंकि जंगल का क्षेत्र है। जानवरों का खतरा बना रहता है, इसलिये अभी और विद्युत पोल की मांग की है। 2. अभी वार्ड में जहां-जहां सोलर लाइट लग सकती हैं, वहां सोलर लाइट लगवानी प्रस्तावित हैं। 3. टिफिन टॉप वाले रास्ते में पानी का नल, वॉश रूम, जगह-जगह लाइटें और बेंच की व्यवस्था करवानी है, जिससे स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों को भी राहत मिल सके। 4. इसके अलावा अभी बहुत काम प्रस्तावित हैं, जो समय-समय पर करते रहेंगे।
भविष्य की योजना: भविष्य में महिलाओं के उत्थान एवं महिला सशक्तिकरण के लिये के लिये और अधिक प्रयास व कार्य करने हैं।
-प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (श्रीमती निर्मला चंद्रा, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित।)
अंक -2 : आज पेश हैं शेर का डांडा वार्ड नंबर-2 के सभासद सुरेश चंद्र के कार्य एवं भावी योजनाएं:
सभासद परिचय : नाम – सुरेश चंद्र पुत्र – स्व. डीआर आर्या शिक्षा – स्नातक (बीए), डीएसबी परिसर, नैनीताल।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं :
1. स्टोनले कम्पाउंड में लगभग 100 मीटर लम्बी सड़क टाइल्स वाली बनवाई गयी। 2. स्टोनले में ही अमर उजाला के डा. तिवारी जी के घर से लेकर ऊपर टॉप तक सीढियाँ बनवायीं। 3. स्टोनले में ही एक कूड़ा घर दूसरी जगह स्थानांतरित करके उसकी जगह वहां विश्राम गृह बनवाया गया। 4. स्टोनले में ही अभी दो कार्य चल रहे हैं। सड़क पर कोई कूड़ा न फेंके, इस हेतु जालियां लग रही हैं। साथ ही प्रतिमा राठौर के घर से रेलिंग वाली सीढियाँ बन रही हैं। 5. मंगावली में भगवत रावत जी के घर के पास लगभग 100-150 मीटर लम्बी रेलिंग लगवाई। 6. गोपाल सिंह नेगी जी के आवास के आगे दीवार का निर्माण कार्य करवाया। 7. नगरपालिका कर्मचारी सुरेश कुमार जी के घर के आगे क्षतिग्रस्त दीवार का निर्माण कार्य चल रहा है। 8. मंगवाली में ही हमने टाइल्स वाली सड़क बनवायी। 9. मंगावली में मंदिर में टाईल्स व रेलिंग लगवाईं। 10. मंगवाली में मंदिर जाने वाले रास्ते का निर्माण कार्य करवाया। 11. काली मंदिर में भी काम करवाया। 12. रतन कॉटेज में ही एक लगभग 150-200 मीटर लम्बा खड़ंजा बन रहा है। 13. रतन कॉटेज में ही टंकी के ऊपर से किशन राम जी के आवास के पास तक रेलिंग व टाइल्स रोड निर्माण कार्य व गोविन्द जी के आवास के पीछे क्षतिग्रस्त दीवार का निर्माण कार्य करवाया। 14. राजमहल क्षेत्र में कार्य करवाया, टाइल्स वाली रोड बनवा दी गयी है। वहां लगभग 70 प्रतिशत रास्ते सही करवा दिये गये हैं। 15. मेरे वार्ड में प्रकाश व्यवस्था और सफाई व्यवस्था बिल्कुल सही है। यदि कहीं से कोई शिकायत आती है तो हम उसे तुरंत निस्तारण करने की कोशिश करते हैं।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं:
1. राजपुरा क्षेत्र में 9 लाख रुपये का रेलिंग का कार्य प्रस्तावित है। 2. दो-तीन टूट गयी दीवारें बननी हैं। 3. धारे के पास जीर्णोद्धार हो रहा है, उसमें रेलिंग और रास्ता बनेगा। 4. बिड़ला चुंगी में छूटे कार्य भी प्रस्तावित हैं। 5. इसके अलावा अभी बहुत काम प्रस्तावित हैं, जो समय-समय पर करते रहेंगे।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है
-प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (सुरेश चंद्र, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित। )
अंक : 1 : वार्ड-1 के सभासद पर ‘आज़ाद के तीर’
पहली कड़ी में हम नगर के स्टाफ हाउस वार्ड नंबर-1 के सभासद सागर के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं…
सभासद परिचय:- नाम :- सागर आर्या पिता :- श्री नंद लाल शिक्षा :- स्नातक (बी.ए. राजनीति शास्त्र), डीएसबी कॉलेज, पूर्व सचिव, छात्र संघ नैनीताल।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं:-
पॉपुलर कम्पाउंड की लगभग 15-20 फीट लम्बी दीवार बनवाई गयी।
पॉपुलर कम्पाउंड में ही एक पानी के नल के पास पुल बनवाया गया।
पॉपुलर कम्पाउंड में ही एक बड़ा लोहे का पुल व रेलिंग निर्माण करवाया गया।
चार्टन लॉज कम्पाउंड में रेलिंग निर्माण व दो जगह रास्ते सही करवाए हैं।
मेरे वार्ड में प्रकाश व्यवस्था बिल्कुल ठीक है, हनुमान मंदिर के पास बल्ब नहीं था, वहां मैंने एक बल्ब लगवाया था। अब प्रकाश व्यवस्था पूरी तरह सही है।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं:-
चार्टन लॉज में स्विफ्ट की कोठी से लेकर ऊपर तक का रास्ता ठीक करवाना है।
हनुमान मंदिर से लेकर तरुण कुमार मोंटी के घर तक का रास्ता ठीक करवाना है।
ट्रॉली के दूसरे पोल से रास्ता खराब है वो सही करवाना है।
आशु उपाध्याय के घर के पास का रास्ता सही करवाना है।
पार्वती देवी जी के घर के पास रास्ते का काम है।
रवि भाई के घर के पास दीवार बनानी है।
रोहित भाई की दुकान के पास रास्ता सही करवाना है।
हनुमान मंदिर के पास सीढियाँ हैं, वो दोबारा शांति देवी जी के घर से नाहिद जी के घर तक सही करवानी हैं, व रेलिंग निर्माण करवाना है।
भविष्य की योजना:- आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है। -प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल।
अंक 159 : अभिभावक वहां लुट रहे यहाँ इन स्कूलों को नहीं कर रहे मामूली सहयोग भी..
अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों को नहीं मिल रहा सहयोग,
मामूली फीस होने के बावजूद भी अभिभावक नहीं दे रहे सहयोग
बिजली -पानी के बिलो ने प्रबंधन की तोड़ी कमर, स्कूल स्टाफ़ की नहीं रोकी सेलरी
साहिबान,
आज हम जिस मुद्दे की बात करने वाले हैं उसका नाम है विद्यालय,
ना, ना ये वो वाले विद्यालय नहीं, जिनमें शिक्षा से ज़्यादा स्टेशनरी का सामान मिलता है जो आजकल भी अभिभावकों को जमकर लूट रहे हैं और अभिभावक भी चुपचाप एक जेब खाली होने पर दूसरी जेब आगे कर दे रहे हैं,
यहां तक कि कुछ अभिभावक लोन लेकर बच्चों की भारी भरकम ट्यूशन फीस चुका रहे हैं,
हम आज ऐसे अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों की बात कर रहे हैं, जिनमें फीस नाम मात्र की होती है, ये वो विद्यालय होते हैं जब सारे स्कूल हम जैसे मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के लिये मोटी फीस के अभाव में अपने दरवाज़े बंद कर लेते हैं तब ये स्कूल हमारे लिये ऑक्सफ़ोर्ड से कम नहीं होते, वहाँ की सादगी, वहाँ का अपनापन, हर चीज़ में अलग जादू होता है,
आज़ादी के बाद से अब तक न जाने कितनी अज़ीम हस्तियां इन विद्यालयों से पढ़कर निकलीं और देश -विदेश में नाम कमाया, इन विद्यालयों ने आज तक हर बच्चे को शिक्षा देकर समाज में इज़्ज़त से जीना सिखाया है, लेकिन बड़े अफ़सोस की बात ये है कि
आज संकट के इस दौर में हम इन विद्यालयों की तरफ़ देख भी नहीं रहे हैं, जिन विद्यालयों ने हमें हँसना सिखाया, आज हम उसके बुरे दौर में उसका साथ नहीं दे रहे हैं, हम लूट – खसोट करने वालों को इज़्ज़त की नज़र से देखते हैं लेकिन कभी हमने इन विद्यालयों के उन अध्यापकों, कर्मचारियों के बारे में नहीं सोचा जिन्होंने हमें सिर्फ़ शिक्षा दी, हमसे बिज़नेस नहीं किया,
लॉकडाउन की इस विपत्ति वाली घड़ी में क्या हमारा फ़र्ज़ नहीं बनता कि मात्र 100 रूपये मासिक आर्थिक सहयोग राशि हम बिन मांगे विद्यालय में दे आये,
सबसे बुरे दौर से गुज़र रहे अशासकीय सहायता प्राप्त इन विद्यालयों का पानी व बिजली का बिल भी इतना आया है, जिसे चुकाने में आधा स्कूल ही गिरवी रखना पड़ जाये, वक़्त की दोहरी मार झेल रहे इन विद्यालयों को इस वक़्त हमारी ज़रूरत है, वक़्त रहते इन विद्यालयों की सुध लेने की दरकार है,
वरना वक़्त निकल गया तो फिर हमारे बच्चों को कौन शिक्षा के सही मायने सिखाएगा?
आख़िर में,
सभी अभिभावकों से हमारा अनुरोध है कि जिसके बच्चे इन अशासकीय सहायता प्राप्त (चेतराम साह ठुलघरिया इंटर कॉलेज, भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय, राष्ट्रीय शहीद सैनिक विद्यालय विद्यापीठ, सरस्वती शिशु मंदिर, बालिका विद्या मंदिर, नगर पालिका इंटर कॉलेज (एशडेल ) जैसे अनेकों विद्यालय में पढ़ रहे हों, उनमें बिन बुलाये जाये और अपने जागरूक होने का फ़र्ज़ अदा करें, जिससे हमारे आत्मसम्मान को बनाये रखने वाले विद्यालय का आत्मसम्मान भी बना रहे…
न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर
अंक 158 : नैनीताल का सिर्फ़ इमारत वाला अस्पताल, यहाँ तो बाड़ ही खा रही उजाड़…
–यही हाल रहा तो हो जाएगा नाम ‘खंडहर वाला अस्पताल’
-कौन है और कौन होगा ज़िम्मेदार ? महापुरुषों के नाम का भी नहीं हो रहा सम्मान !
साहिबान,
आज हम जिस ऐतिहासिक इमारत का ज़िक्र करने वाले हैं, उसके बारे में बात करने से पहले उस अज़ीम हस्ती के बारे में जानना बेहद ज़रुरी है जिसकी शान में ये आलीशान इमारत नज़र की गयी…
वो थे कुमाऊं किंग कहे जाने वाले 1816 में जन्मे सर हेनरी रैमजे,
कुमाऊँ में बतौर कमिश्नर सर्वप्रथम एडवर्ड गार्डनर तत्पश्चात जी. डब्लू. ट्रेल, सी. टी. लूसिंग्टन, जे. एच. बैटन, हेनरी रैमजे व अंत में पर्सी विंडहम क्रमशः रहे. परन्तु उस दौर के सभी प्रशासकों में सर रैमजे सर्वाधिक प्रतिभाशाली और लोकप्रिय शासक रहे. उन्होंने कुमाऊँ में लगभग सैंतालीस (47) साल तक विभिन्न पदों पर रहते हुए अपने सम्पूर्ण जीवन के सतहत्तर (77) सालों में से पचपन साल (55) कुमाऊं में ही व्यतीत किये. उन्होंने यहाँ विभिन्न पदों यथा कनिष्ठ सहायक कमिश्नर (1840-1850,) वरिष्ठ सहायक कमिश्नर (1851-1855,) डिप्टी कमिश्नर (1855-1856) व कमिश्नर (1856-1884) के पद पर रहते हुए कार्य किया,
कुमाऊँ कमिश्नर के रूप में उन्होंने अठाईस बेमिसाल वर्ष व्यतीत किये.
सरकारी सेवानिवृत्ति के पश्चात भी लगभग आठ साल तक सर रैमजे कुमाऊँ में ही रहे. सर हैनरी रैमजे के कुमाऊँ कमिश्नर रहते हुए उन्होंने इस क्षेत्र में अनेक सुधार व विकास के कार्य किये गये..
सर रैमजे के कार्यों व उनके योगदान व नाम को अमर रखने के लिए यहां के लोगों ने सम्मान पूर्वक अनेक विद्यालयों, अस्पतालों व सड़कों आदि के नामकरण उन्हीं के नाम से किये जिनमें प्रमुख रूप से अल्मोड़ा में सन 1844 में इंग्लैंड की मिशनरी की सहायता से रैमजे हाई स्कूल को बनाया गया तथा नैनीताल में रैमजे अस्पताल कुछ स्थानीय सक्षम साह लोगों व कुछ यूरोपियनों द्वारा आर्थिक मदद से सन 1892 में बनाया गया. ये दोनों स्मारक कुमाऊँ के किंग सर रैमजे को समर्पित हैं…
आज हम उसी कुमाऊं किंग के सम्मान में समर्पित अस्पताल की बात करेंगे जिसकी हालत बद से बदतर होती चली जा रही है,
हालांकि मौजूदा दौर में उसे भारत रत्न पंडित गोविन्द बल्लभ पंत के नाम से भी जाना जाता है, और मौजूदा हालातो की चर्चा करें तो हमें अस्पताल में एक्स रे मशीन, इ -सी जी मशीन दिखती हैं लेकिन उन्हें ऑपरेट करने वाला कोई नहीं,
बुरी नज़र न लगे तो आज भी इमारत बुलंद है और अपनी दिलकशी की वजह से दूर से ही मदहोश करती है, बस मायूसी तब बढ़ जाती है, जब कोई मरीज़ अपना इलाज कराने की ख्वाहिश मन में पाल लेता है और अस्पताल के अंदर दाख़िल होते ही उसकी ख्वाहिशें फ़ाख्ता हो जाती है,
आखिर क्या देख लेता हैं मरीज़ जो दबे पाँव वहां से भाग खड़ा होता है,
वो भागे क्यों न, भई दरअसल एक मरीज़ को क्या चाहिए, अस्पताल के किनारे पर लम्बी लाइन, पर्चा बनाते हुये एक कर्मचारी, डॉक्टर के चैम्बर में लगी हुई भीड़ और एक एक करके आला लगाकर चेक अप करते डॉक्टर और सबसे लास्ट में फ्री में मिली हुई सरकारी सफ़ेद मोटी मोटी गोलियों का पैकेट…
बस इतना सा ही तो ख़्वाब होता है, एक रेगुलर मरीज़ का…
जिसे रैमजे अस्पताल / जी बी पंत चिकित्सालय पूरा नहीं कर पा रहा है,
सन 1892 में बने इस अस्पताल को आज उसी तरह एक कुमाऊँ किंग की ज़रूरत है, जिसके नाम को समर्पित इस अस्पताल को किया गया था,
या अगर विदेशी वाला कुछ उस टाइप की फीलिंग्स आने की वजह से अस्पताल का उद्धार नहीं कर पा रहे हैं तो कम से कम हमारे भारत रत्न पंडित गोविन्द बल्लभ पंत जी के मान सम्मान की कुछ तो क़द्र होनी चाहिए,
नैनीताल जैसी वीआईपी सिटी में अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं न होने पर एक आम नागरिक
बड़े-बड़े संस्थानों व ज़िम्मेदारों की तरफ़ बड़ी हसरत भरी निगाह से देखता है,
लेकिन सिर्फ़ देखता है,
कहने की सोचता हैं लेकिन कोई आरोप लगने की वजह से खामोश हो जाता है…
और 10 सितंबर का इंतज़ार करता है कि महापुरुष के सम्मान में शायद उस दिन अस्पताल की हालत सुधारने को कोई घोषणा हो जाये…
लेकिन नहीं…
उस इतंज़ार के बदले में मिलता है सिर्फ़ खाली पड़ा बदहाल अस्पताल….
जिसे वक़्त रहते विकसित नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक इमारत को खंडहर के रुप में न देखें…
लेकिन सबसे बड़ी बात, समस्या का हल करे तो कौन ? क्योंकि यहाँ तो ‘बाड़ ही खा रही उजाड़’…!! जिले के जिस सबसे बड़े मुख्य चिकित्सा अधिकारी से उम्मीद की जाती है कि वह इस चिकित्सालय की हालत सुधारेगा, वही इसे निगलता जा रहा है… क्योंकि उसे स्थान की और अधिक आवश्यकता है, और चिकित्सालय की उसके लिए शायद कोई उपयोगिता नहीं… उसका बस चलता, तो उसके मुखिया अब तक उसके ‘रेन शेल्टर्स’ को तोड़कर अपने घर के लिए सड़क बना चुके होते…
ऐसे में ‘राम जी’ ही ‘रैमजे’ की इस विरासत को बचा सकते हैं…
न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर..
अंक 158 : हलुआ (मलबा) फिर रायते की तरह फैलने को है तैयार.. हज़ार साल बाद चोक नाली खुली पर, हज़ार साल फिर बंद होने की है तैयारी
साहिबान,
कूर्मांचल नगर मल्लीताल शाखा के निकट काफ़ी लम्बे समय से बंद पड़ी नाली को नगर पालिका परिषद नैनीताल के द्वारा तोड़कर पुनः बनाया गया जिससे क्षेत्रवासियों को बहुत राहत मिली, वहीं उपरोक्त नाली मरम्मत में जो भी मलबा निकला उसे वहीं सड़क किनारे छोड़ दिया गया, हो सकता है किसी भयंकर मजबूरी अथवा किसी अन्य योजना के तहत ऐसा किया गया हो, किन्तु जैसा कि सभी जानते हैं बरसात का सीज़न स्टार्ट हो चुका है, कुछ दिन बाद यही मलबे के कट्टे पानी से गल जाएंगे और जो मलबा उनमें कैद हुआ है उसे आज़ादी मिल जाएगी और वो ख़ुशी- ख़ुशी नाली के अगले हिस्से में पहुँच कर अपना घर बना लेगा, और अपने घर में बाहरी तत्वों को कौन प्रवेश की अनुमति देता है, वैसे ही वो तथाकथित मलबा भी बरसात के पानी या आसपास के पानी को नाली यानि उसके घर में प्रवेश नहीं करने देगा और पानी को मजबूरन रायते की तरह सड़क पर फैलना होगा, फिर जब नाली में मलबा हो और पानी रास्ते में फैले तो फिर विभाग को ज़हमत उठानी पड़ेगी जैसे आज हज़ारों सालों से चोक नाली को तोड़कर दोबारा से पूरा बनाया गया, वैसे ही कुछ दिन, महीने या साल बाद इतिहास ख़ुद को दोहराएगा, फिर कोई नागरिक ऐसी ही अपने शहर की व्यथा कह रहा होगा और फिर संबंधित विभाग के ज़िम्मेदार अधिकारी ऐसी ही अपने फेस पर मास्क लगाए और कानो में हेडफोन लगाए बैठे होंगे, कैसे कट्टे कैसा मलबा ?
अंत में, हमारा सचिन नेगी नगर पालिकाध्यक्ष महोदय से, अशोक वर्मा अधिशासी अधिकारी महोदय से तथा राजू टांक आवागढ़ वार्ड सभासद महोदय से अनुरोध है कि उपरोक्त सड़क किनारे रखे मलबे के कट्टों को समय रहते हटवाने का कष्ट करें जिससे बरसात के पानी के साथ ये भी झील में न समां जाये…
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 158 : वो लकड़ी की कश्ती, वो नैनी झील का पानी ! और हाय, वो उसमें डूब गई…
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न, दरअसल ये तस्वीर नहीं है, ये आज की हकीकत है, एक जमाना था जब मैं भी इठला के इतरा के झील के पानी में शरारत करती हुई एक छोर से दूसरे छोर तक जाती थी, एक शान हुआ करती थी मेरी, दूर -दूर से लोग नैनीताल को निहारते आते थे, फिर चाहे कटी पतंग के राजेश खन्ना हों या वक्त के शशि कपूर, मैंने सबका दौर देखा है। और देखा है उन खेवनहारों को जो सुबह से शाम तक मुझे और मेरी जैसी हर नाव को अपने हाथों से बिना रुके, बिना थके खींचते क्योंकि साहब लोगों को खुश करना होता था और जब साहब लोग खुश होकर जाते तो वे नाव के किराये के साथ उसे बख्शीश भी देकर जाते, वो बेचारा सुबह से शाम तक पसीना पसीना होकर एक -एक पैसा कमाता और शाम को अपने बीवी बच्चों के लिये खाना, दवाई और ऐसी जरूरत का सामान ले जाता। उतार – चढ़ाव आये लेकिन उसने या उसके नाती – पोतों ने भी मेरा साथ नहीं छोड़ा, लेकिन इस बार कुछ अच्छा महसूस नहीं हो रहा है, जो सुबह से शाम तक मेरे साथ रहता था, वो खेवनहार पिछले दो -तीन महीनों से मुझसे मिलने नहीं आया, जो मुझपे पानी की एक बूँद बर्दाश्त नहीं करता था, आज मैं डूबी खडी हूँ, जो अपने हाथों से मेरे चेहरे की रंगीनियाँ बरकरार रखता था, आज उसे मेरे डूबते वजूद की भी फिक्र नहीं, जिसने न जाने कितने परिवारों को डूबने नहीं दिया, आज मैं नाव डूब रही हूँ। कोई मेरे उस खेवनहार तक मेरा पैगाम पहुंचा देना, इससे पहले मैं पूरी तरह से झील में समां जाऊं, मेरी आखरी झलक आकर वो देख जाये, कि मैं डूब रही हूँ…।
अब उस डूबती नैय्या को कौन समझाये कि लॉकडाउन चल रहा है, नावों के लिये, होटल खुल गये। बसें खुल गयी, बड़ी -बड़ी दुकानें खुल गयी, महल और चौबारे खुल गये बस लॉकडाउन चल रहा है नावों के लिये… चिड़ियाघर खुल गया, बोटेनिकल गार्डन खुल गया लेकिन लॉकडाउन चल रहा है सिर्फ नावों के लिये !!!गरीब को इज्जत से रोटी कमाने का भी अधिकार नहीं? क्या गरीब चंद नेताओं के सामने हाथ फैलाने के लिये पैदा हुआ है? जवाब दें जिम्मेदार अधिकारी?
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 157 : साक्षात्कार : कुमाऊं विश्वविद्यालय को अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय बनाना चाहते हैं नये कुलपति प्रो. जोशी कुलपति
संक्षिप्त परिचय: कुशल प्रशासक, निष्पक्ष व निर्भीक छवि वाले प्रो. (डॉ.) एनके जोशी ने 11 मई को नैनीताल में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति के तौर पर कार्यभार ग्रहण किया। प्रो. जोशी मूलतः कौसानी के रहने वाले हैं। उन्होंने नैनीताल के डीएसबी परिसर से 1983 में फिजिक्स से एमएससी की थी। 36 सालों से शिक्षण एवं प्रशासन के क्षेत्र में सक्रिय प्रो. जोशी बोस्टन, एमआईटी के भी अल्युमनस हैं। कुमाऊँ विवि के कुलपति बनने से पूर्व प्रो. जोशी उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के रूप में कार्यरत थे। इसके अलावा प्रो. जोशी इससे पूर्व एमडीआई गुड़गांव, आईएमटी गाजियाबाद, बनस्थली यूनिवर्सिटी, तीर्थांकर महावीर यूनिवर्सिटी व प्रशासनिक अकादमी नैनीताल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। प्रो. जोशी मिसोरी यूनिवर्सिटी साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूएसए से संबद्घ कॉलेज मस्कट में भी कार्य कर चुके हैं। प्रो. जोशी का नैनीताल से गहरा रिश्ता रहा है। यहाँ मल्लीताल बीडी पांडे अस्पताल के निकट सनवाल कुटीर निवासी लोनिवि उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रमुख अभियंता इंजीनियर इन चीफ रहे स्व. चंद्रशेखर सनवाल की पुत्री वंदना आपकी धर्मपत्नी हैं। आज आप कुमाऊँ विश्विद्यालय के कुलपति के रुप में हम सबके समक्ष कुलपति के कर्तव्य का कुशलता से निर्वाह कर रहे हैं…
विभिन्न पदों की जिम्मेदारी निभा चुके प्रो. एनके जोशी से बात की हमारे संवाददाता मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश:-
आजाद सवाल (01): – आपने लॉकडाउन के दौरान कार्यभार ग्रहण किया। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में पठन-पाठन को आपने कैसे मैनेज किया? कुलपति कुविवि:- ऐसी परिस्थिति हम सबके सामने पहली बार ही आई, और इसमें हमने टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल करके समय का सदुपयोग किया। फैकल्टी के साथ विचार विमर्श करके विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था की गयी। इससे विद्यार्थियों का पठन-पाठन समयानुरूप चल सका। शहरी क्षेत्र के विद्यार्थियों को इसका भरपूर फायदा मिला। दूरस्थ व ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थी तकनीकी कारणों से सम्पूर्ण लाभ नहीं ले सके। ऐसे विद्यार्थियों के लिये यदि स्थिति सामान्य हो जाती है तो आने वाले माह की 13 जुलाई से 31 जुलाई तक रेमेडियल क्लासेज चलाएंगे तथा कुछ प्रैक्टिकल भी कराये जाएंगे। लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन शिक्षण के अतिरिक्त हमारे कुछ विभागों ने बहुत से महत्वपूर्ण व सामयिक विषयों पर वेबिनार भी आयोजित किये जिनका लाभ विद्यार्थियों के अतिरिक्त शिक्षकों ने भी उठाया।
आजाद सवाल (02):- कुछ ऑटो प्रमोशन की भी योजना है विद्यार्थियों के लिये ? कुलपति कुविवि :- एमएचआरडी की गाइडलाइन्स के अनुसार इंटरमीडिएट सेमस्टर छात्रों को ऑटो प्रोमोट किया जाएगा, फिर भी जो विद्यार्थी उक्त परीक्षाफल से संतुष्ट नहीं होता है तो वो अगले वर्ष परीक्षा भी दे सकता है।
आजाद सवाल (03) :- जैसा कि आपका अनुभव उच्च कोटि संस्थानों का रहा है तो क्या कुविवि को भी आपके अनुभव का लाभ मिलेगा? कुलपति कुविवि :- मैं कुमाऊँ विवि को अंतर्राष्ट्रीय विवि बनाना चाहता हूं। इसके लिये हम तैयारी कर रहे हैं। टीचिंग-लर्निंग की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाएगा। विद्यार्थियों को इंडस्ट्रियल ओरिएंटेड शिक्षा प्रदान करेंगे। सिलेबस रिवीजन, कक्षाओं के समुचित संचालन का ध्यान रखा जाएगा। सिस्टम को ऑनलाइन करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। कुमाऊँ यूनिवर्सिटी एक रिसर्च ड्रिवन यूनिवर्सिटी रहेगी, जहाँ शोध की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाएगा। रिसर्च प्रोजेक्ट्स, अच्छे शोध पत्र, पेटेंट्स, कॉन्फ्रेंस, सेमिनार आयोजित किये जाएंगे। विद्यार्थियों के हितों का समुचित ध्यान रखते हुये हम कुमाऊं विवि को एक अलग स्तर पर ले जाने का प्रयास करेंगे, ये एक student centric और research driven university बनेगी…
आजाद सवाल (04) :- पढ़ाई तक तो ठीक है लेकिन पढ़ाई पूरी करने के बाद स्टूडेंट के सामने रोजगार की बड़ी चुनौती रहती है। कॉलेज से निकलने वाले स्टूडेंट्स के लिये क्या योजना है? कुलपति कुविवि :- आप कॉलेज से जाने वाले स्टूडेंट की बात कर रहे हैं। हम तो अपने अंडर ग्रेजुएट स्टूडेंट को भी रिसर्च लिखना सिखाएंगे। लाइव प्रोजेक्ट्स का अवसर प्रदान किया जाएगा। इंटरप्रिन्योरशिप पर हमारा ज्यादा जोर रहेगा और विद्यार्थियों को सेल्फ एम्पलॉयड बनाने की दिशा में उन्हें अपने स्टार्ट अप के लिये प्रेरित व प्रोत्साहित किया जाएगा। हमने विद्यार्थियों के लिये प्लेसमेंट सेल भी बना दिया है जिसके लिये डीएसबी, भीमताल और अल्मोड़ा कैंपस में कोऑर्डिनेटर नियुक्त किये गये हैं। साथ ही हमने कुमाऊँ विवि का कॉम्पिटेटिव एग्जामिनेशन सेंटर बनाया है, जिसमें विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी के साथ-साथ आईएएस, पीसीएस, पीसीएस-जे, नेट, गेट, बैंकिंग और सीडीएस जैसी परीक्षाओं की फ्री ऑफ कॉस्ट कोचिंग प्रारम्भ हो चुकी है।
आजाद सवाल (05) :- ये तो रही उन छात्रों की बात जो भविष्य में शिक्षा लेकर निकलें लेकिन क्या उनके लिये भी कुछ समाधान है जो कुविवि से बरसों पहले निकल गये लेकिन आज तक आत्मनिर्भर नहीं बन सके ? कुलपति कुविवि :- जी बिल्कुल है, ऐसे छात्रों के लिये कॉम्पिटेटिव एग्जामिनेशन सेल के अतिरिक्त स्किल डेवलपमेंट कोर्सेज का हमने प्रारम्भ शुरू कर दिया है, इच्छुक विद्यार्थी web development, communication skills, organic farming, Entrepreneurship, computer skills, mutual funds, accounts, media skills, sales, finance, plumbing, electrician आदि जैसे रोजगारपरक स्किल डेवलपमेंट सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं।
अंक 156 : रिक्शे-नाव से भेजें जाये ‘इकोनॉमी वॉरियर’
-जो ज़्यादा महंगी के शौकीन हों, उनके लिए नाव खोली जाये, इसी बहाने से गरीबों के घर में भी जले चूल्हा
साहिबान,
लॉक डाउन क्या हुआ, काफ़ी चीज़ों की परिभाषा ही बदल गयी,
पहले जो कमाऊ था, वो नकारा हो गया, जो मोटा था वो छुआरा हो गया, बाहर घूमने वाला नालायक और घर में सोने वाला ज़िम्मेदार हो गया, ऐसे ही चाय बेचने वाला दोषी और शराब बेचने वाला विधाता हो गया,
जो रोज़ कमाते खाते थे उनके घर में क्या हालात हैं कोई देखने वाला नहीं,
हाँ, कभी – कभी समाजसेवी या प्रशासन राशन वितरण कर देता है, लेकिन सिर्फ़ राशन वितरण से उसके घर की ज़रूरत का सामान पहुंच जाता होगा, क्या उसके घर में दवाइयां, गैस, दूध, जैसी चीज़ें पहुंच जाती होंगी,
नहीं, बिल्कुल नहीं,
आज लगभग सबको अपना -अपना व्यवसाय खोलने की अनुमति है,
लेकिन क्या किसी ने एक रिक्शे वाले का दर्द समझा, जिसके पास कोई जमा पूंजी नहीं होती,
क्या किसी ने नाव चलाने वाले की पीड़ा समझी की दो चार दिन का राशन मिलना उसके लिए स्थाई समाधान नहीं है,
रिक्शे में एक ही व्यक्ति बैठे लेकिन रिक्शा खुलना चाहिए,
नाव में भले ही एक सीट मे एक व्यक्ति बैठे लेकिन नाव खुलनी चाहिये,
वरना इस लॉक डाउन में उन बेचारों की आमदनी तो होगी नहीं ऊपर से नाव ख़डी -ख़डी बेकार हो जाएगी, रिक्शे खडे खडे बेकार हो जाएंगे…
और इन सब दलीलों के बावजूद भी अगर सरकार इन गरीबों को इजाज़त नहीं देती तो सिर्फ़ इतना ही सोचकर अनुमति मिल जाये कि जब एक इकोनॉमी वॉरीयर पैदल चलकर अपने युद्ध स्थल तक पहुँचता है, बड़ी तकलीफ होती होगी उसे,
क्यों न इकोनॉमी वॉरीयर रिक्शे में या नाव में शान से बैठकर देश की अर्थव्यवस्था को सहारा देने आये,
इसी बहाने कुछ गरीबों को भी 07-04 में रोज़गार मिल जाये…
अतः
मा. मुख्यमंत्री महोदय उत्तराखंड,
मा. कुमाऊं आयुक्त महोदय,
मा. ज़िलाधिकारी महोदय,
मा. उप ज़िलाधिकारी महोदय,
मा. नगर पालिकाध्यक्ष महोदय
से हमारा अनुरोध है कि रिक्शा चालकों को तथा नाव चालकों को नियमानुसार रिक्शा व नाव चलाने की अनुमति प्रदान करने की कृपा करें,
जिससे उनके घरों में भी उनकी कमाई से चूल्हा जल सके…
न काहू से दोस्ती
ना काहू से बैर
अंक 155 : नैनीताल में प्रशासन की पहल पर तल्लीताल डाँठ पर लगा ‘सेल्फिश पॉइंट’
नैनीताल की ख़ूबसूरती को दिया नया आयाम!
अब देखेगी दुनिया नैनीझील का सौंदर्य !
साहिबान,
एक ज़माने में एक बेहद ही ख़ूबसूरत अदाकारा हुआ करती थी जिनका नाम आज भी बड़े अदब और लिहाज़ से लिया जाता है और लिया जाता रहेगा, उनकी बेमिसाल ख़ूबसूरती और सादगी के आगे आज तक कोई दूसरी अदाकारा टिक नहीं पायी, वो कोई और नहीं हुस्न और सादगी की मिसाल मधुबाला थी, आख़िर क्या था उनकी ख़ूबसूरती में ऐसा जो उन्हें आज तक याद किया जाता है, ख़ूबसूरती, जी नहीं खूबसूरत तो हर दूसरी लड़की होती है असल में उनके पास थी सादगी, जिस सादगी से उन्होंने सबका दिल जीता वो आज की कोई भी अदाकारा किसी भी बनावट या दिखावट से वो मुकाम हासिल नहीं कर पाई, ख़ैर आप भी सोच रहे होंगे की नैनीताल और मधुबाला में क्या नाता है, तो जनाब एक बहुत अहम और संजीदा नाता है वो है सादगी भरी खूबसूरती का नाता, जी हाँ, नैनीताल और नैनीझील हमारी मधुबाला है, नैनीताल की सादगी में जो ख़ूबसूरती है वो किसी बनावट की मोहताज नहीं है, कोई चाहे कितने ही हज़ार वाट्स के एलईडी जला दे लेकिन रूह को जो सुकून चाँद की चांदनी देगी वो एलईडी की रोशनी नहीं दे पाएगी, जो लोग बचपन से नैनीताल की गोद में खेले -कूदे, पले बढ़े है, एक सवाल उन सबसे है और दिल पर हाथ रखकर जवाब दें, क्या उनके लिये नैनीताल की माल रोड के पेड़ों पर झालर लटकाकर नैनीताल की ख़ूबसूरती बढ़ाई जा सकती है ? क्या उनके लिये हर रोज़ माल रोड पर तेज़ संगीत बजाया जाये तो उन्हें सुकून मिलेगा? उसी तरह झील के पास इस तरह की बनावट वाली सजावट को सेल्फ़ी पॉइंट का नाम देना क्या नैनीताल की ख़ूबसूरती और सादगी की तौहीन नहीं है? जो लोग नैनीताल को जाने नहीं हैँ उन्हें ही उस जगह सेल्फ़ी पॉइंट दिखता है, अरे साहब, कोई नैनीताल के दीवानो से तो पूछो जिनके लिये नैनीताल का हर कोना सेल्फ़ी पॉइंट है और हर मंज़र क्रियेटिव पॉइंट है, हमारा नैनीताल किसी बनावट का मोहताज नहीं जनाब…
आख़िर में, मा. मुख्य न्यायाधीश महोदय, उच्च न्यायालय (उत्तराखंड) कुमाऊँ आयुक्त महोदय, कुमाऊँ मंडल नैनीताल, ज़िलाधिकारी नैनीताल महोदय, सचिव महोदय, झील विकास प्राधिकरण नैनीताल, तथा अपर ज़िलाधिकारी महोदय, नैनीताल महोदय आप सबसे ये इल्तेजा है कि नैनीताल के तल्लीताल डाँठ पर जो कृत्रिम सजावट करके l love nainital लिखा गया है, मेहरबानी करके उसे उस जगह से हटवाकर ऐसी जगह लगवाया जाये जहाँ से नैनीताल या नैनी झील के प्राकृतिक सौंदर्य पर कोई असर न पड़े, मा. महोदय, को इस नाचीज़ का सुझाव है कि इस तरह की बनावट वाली सजावट का इरादा छोड़ देना ही नैनीताल की बेहतरी में होगा क्योंकि नैनीताल किसी भी आर्टिफीसियल ख़ूबसूरती का मोहताज नहीं है…
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है …. -आज़ाद
अंक 154 : टूट गया ठंडी सड़क का दरवाज़ा, मिली गयी एक नयी अवैध पार्किंग !
-पैदल ठंडी सड़क पर मोटर साइकिल-साइकिल से भी कर सकते हैँ यात्रा, कोई देखने / सुनने वाला नहीं.. इंतजार, विभाग की नींद खुलने तक
साहिबान,
ये जो तस्वीर आप देख रहे हैँ न दरअसल ये कोई तस्वीर नहीं है,
ये तो हिमाक़त है उन मनचलों की, जिनके बाहुबल से लोहे का बड़ा सा दरवाज़ा सड़क के किनारे पड़ी किसी लावारिस लाश की तरह अपनी आखिरी सांसे गिन रहा है, उसके सामने वाला दरवाज़ा सॉरी दरवाज़ा कहूंगा तो उसके साथ इंसाफ में कमी होगी बल्कि उसका सच्चा हमसफ़र जो कभी एक साथ परिणय सूत्र में बंधे थे, तब से रोज़ एक साथ खुलते -बंद होते थे, किस क़दर प्यारी लगती थी उन दोनों की जोड़ी जैसे एक दूजे के लिये ही बने हो लेकिन न जाने किस कमज़र्फ़ को इस मासूम जोड़ी का साथ रास नहीं आया और उसने एक ही झटके में उसकी मांग उजाड़ दी, उसका एक साथी हाथों और पैरों में बेड़ियाँ बंधी होने की वजह से राहगीरों से चीख़ चीख़कर यही फ़रियाद कर रहा है कोई तो उसके साथी की जान बचा ले, कोई तो उनका चमन उजड़ने से रोक ले, लेकिन राहगीरों को भी इतनी फ़ुरसत कहाँ जो कोई उसकी पुकार सुने, जिन्हें फ़ुरसत है वो अपनी गाड़ियां उनके आँगन में लगाकर फ़ुरसत के लम्हे बिता रहे हैँ और जिन्हें इसी दिन का इंतज़ार था, वे लोग अपनी मोटर साइकिल / साइकिल से उनके सीने को छलनी कर रहे हैँ, कोई उनकी इस बेचारगी का मज़ाक बना रहा है कोई उनके इस हाल को धुँए में उड़ा रहा है, उन बेचारों की ऑंखें बस यही आस लगाये बैठी हैँ काश कोई मसीहा आये और उनकी जोड़ी फिर से बना दे, उनका घर फिर से दिलशाद कर दे
हर एक चौराहे पे, एक ख़्वाब उदास बैठा है
ये कौन सा शहर है आज़ाद !
यहां हर शख़्स ख़ामोश बैठा है
आख़िर में
मा.उच्च न्यायालय (उत्तराखंड)
मुख्य न्यायाधीश महोदय,
आयुक्त महोदय, कुमाऊँ मंडल नैनीताल,
ज़िलाधिकारी महोदय नैनीताल,
उप ज़िलाधिकारी महोदय नैनीताल,
अपर ज़िलाधिकारी (प्रशासन ) महोदय, नैनीताल
नगर पालिका अध्यक्ष महोदय, नैनीताल,
अधिशासी अभियंता, महोदय (लोनिवि) नैनीताल,
अधिशासी अभियंता, महोदय, (सिंचाई खंड) नैनीताल,
आप सबसे दिली इल्तेजा है कि कई दिनों से माँ पाषाण देवी मंदिर के पास वाले लोहे का गेट किसी ने तोड़ दिया है, जिससे ठंडी सड़क में लोग अपनी गाड़ियां लगा रहे हैँ और बाइक – साइकिल चलाकर पैदल चल रहे राहगीरों / श्रद्धालुओ को परेशानी में डाल रहे हैँ, जितना जल्दी हो सके उक्त गेट को ठीक करवाने के लिये माकूल महकमें को हुक्म करने की ज़ेहमत करें, आपकी बहुत बड़ी मेहरबानी होंगी..
न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है …
अंक 153 : गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल, न आया तो कचरा कहां डाल ??
साहिबान, डोर- टू – डोर कूड़ा निस्तारण योजना के तहत गाड़ी वाला जहाँ -जहाँ आता है बस उन्हीं घरों से कचरा बाहर निकलेगा बाक़ी जिन क्षेत्रों में गाड़ी नहीं पहुंच पाती, उनका क्या होगा ये कोई नहीं बता पाया।
हमें ख़ुशी है हमारे शहर में डोर टू डोर कूड़ा निस्तारण का अभियान चलाया जा रहा है, यह सराहनीय प्रयास है, किन्तु वार्ड नंबर एक के जैसे कई वार्ड ऐसे हैं जिनकी स्थिति यह है कि संस्था के कर्मचारियों द्वारा कई -कई दिन तक कूड़ा उठाने की ज़ेहमत गवारा नहीं की जा रही। जनता इस उम्मीद पर खामोश है की व्यवस्था सुधरेगी, मगर, संस्था के इंचार्ज रोहित का कहना है कि संस्था के पास मैन पावर की कमी है, इस पर प्रश्न यह उठता है कि इसमें जनता का क्या दोष है ?आपने जब नगर पालिका के साथ टेंडर किया है और आप प्रत्येक घर से शुल्क भी वसूल रहे हैं या वसूलेंगे तो फिर व्यवस्था सुधारना भी आपकी ज़िम्मेदारी है। नतीजा यह है कि वार्ड नंबर एक जैसे अन्य क्षेत्रों की जनता जहाँ डोर-टू-डोर के कर्मचारी नियमित तौर से आ नहीं पाते, असहयोग की मुद्रा में आ रही है क्योंकि तीन माह का कार्यकाल कम नहीं होता, यदि ऐसा ही (महज़ चुनिंदा स्थानों पर गाड़ी में गाना बजाकर ढोल पीटना) होता रहा तो इस संस्था का बहिष्कार निश्चित है, जिसके लिए संबंधित विभाग खुद ज़िम्मेदार होगा। इसलिये नगर पालिका अध्यक्ष महोदय से हमारा अनुरोध है कि उक्त संस्था को यथोचित संसाधन उपलब्ध कराने की कृपा करें जिससे उनका मिशन सफ़ल हो सके, अथवा आपकी पुरानी नीति ही कारगर है, जिसमें कम से कम नगरवासी घर में कूड़ा इकट्ठा किये इस आशा में तो नहीं बैठे रहते कि कोई आएगा, और कूड़ा उठाकर ले जाएगा, अपनी सुविधानुसार सब अपना – अपना कूड़ा डस्टबिन में डाल देते थे।
अंक 152 : क्यों नैनीताल में बंध्याकरण के बाद भी बरकरार है कुत्तों की फौज..?
साहिबान, नैनीताल शहर की सड़कों पर अँधेरी रातों सूनसान राहों तक बस कोई दिखे न दिखे ऊपर वाले का बनाया हुआ एक करिश्मा दिख जाएगा, वो भी अपने संयुक्त परिवार के साथ, हाँ ये अलग बात है उन संयुक्त परिवारों के कुछ सदस्य कुछ देर बाद किसी और परिवार के सदस्य नज़र आते हैं, ख़ैर छोड़िये, इस बात को, वो उनका निजी मामला है और किसी की निजता में झांकना बुरी बात होती है, तो जनाब यहाँ, हम ये ज़िक्र कर रहे थे कि भरे पूरे परिवार के साथ ये वफ़ादार जानवर आपको शहर के हर कोने में मिल जाएंगे, एक ज़माना था जब इनको घर के मालिक के लिये वफ़ादारी का प्रतीक माना जाता था, अब दो दिन अगर मालिक रोटी / हड्डी न डाले तो भौंकते हुये घर से चल देते हैं, वो तो ग़नीमत ये है कि अभी कोई ट्रांसलेटर नहीं बना जो ये बताये कि आख़िर ये वफ़ादार जानवर कह क्या रहा है, वरना बाई गॉड न जाने कितने मालिकों के कानों से तो ख़ून ही निकल जाता, यही सोचकर शायद टेक्नोलॉजी ज्ञाताओं ने भी इसमें हाथ नहीं डाला क्योंकि एक -दो तो उनके घर में भी पक्का होंगे, ख़ैर, यहां हम किसी की वफ़ादारी में चरस नहीं बोना चाहते, हम तो बस ध्यान का चरखा थोड़ा उधर घुमाने की कोशिश कर रहे हैं जिधर इस करिश्मे ने करिश्मा कर रखा है और उस करिश्मे से शहर के बाशिंदों के अलावा परदेसी भी करिश्माई हो चुके हैं, अभी कल – परसों के अख़बार में ये आया था की ये वफ़ादार जानवर, इतनी शिद्द्त वाली वफ़ादारी से लोगों को काट रहे हैं जितनी वफ़ादारी से रेबीज की मीटिंग में कोई मुख्य अधिकारी की बातें भी नहीं सुन रहा होगा क्योंकि सरकारी कर्मचारी महाशय का मानना होता है कि ऐसी बातों से तो अच्छा अपना फ़ोन चलाना है, ख़ैर, कोई बात नहीं, ये शहर ही ऐसा हो गया है,सबको कुछ न कुछ चलाने की आदत हो गयी है, कोई ज़ुबान चला रहा है, कोई फ़ोन चला रहा है, एक वफ़ादार जानवर ही है जो मस्त है अपनी ज़िंदगी बेख़ौफ़ होकर जी रहा है और उनमें कोई चुनाव भी नहीं होते, जो दो से ज़्यादा बच्चों का डर होता, अब आप कहेंगे अरे जनाब बंध्याकरण तो होता है??? और फिर हम बोलेंगे रहने दीजिये न साहब, जिस शहर के सारे काम कागज़ों में होने लगें तो काग़ज़ की कश्तियाँ ही दिखेंगी, बारिश के पानी के लिये तो वो दौलत, वो शौहरत सब दांव पर लगानी होगी जनाब, और हाँ, अगर आप ये सब करने को तैयार नहीं, तो यहां न आइयेगा, क्योंकि यहां एक चीज़ है जिसमें वफ़ा कूट कूटकर भरी है, हो सकता है वफ़ादारी का अगला इंजेक्शन ???
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 151 : नैनीताल में चिराग़ के घर अँधेरा !
साहिबान,
आज हम आपको ऐसे लोगों की दास्तान सुनाने वाले हैं जो पूरे शहर में सफ़ाई के सिपाही के नाम से जाने जाते हैं, वे लोग सुबह – शाम शहर की गंदगी से लड़ते हैं और फिर हार थककर अपने घर पहुंचते हैं, घर पहुँचकर फिर अगली सुबह शहर की सफ़ाई करनी है ऐसी फ़िक्र लिये सो जाते हैं, इस सबके चलते ये लोग अपने आसपास की गंदगी के बारे में ध्यान नहीं दे पाते, जी हाँ, इसमें इनका कोई कुसूर नहीं क्योंकि वो तो इनकी ड्यूटी है जो ये लोग करते हैं और अपना घर चलाते हैं, लेकिन क्या सरकार के किसी महकमे की कोई ज़िम्मेदारी नहीं कोई ड्यूटी नहीं इनके घर के आस- पास सफ़ाई व्यवस्था कराने की, एक बार सीवर लाइन डाल दी तो बहुत बड़ा काम हो गया ? उसके बाद सीवर टूटे या फूटे उससे कोई मतलब नहीं, कोई ड्यूटी नहीं, बहते सीवर को ठीक कराने की ? यही हाल है तल्लीताल मस्जिद के पास रोड में पिछले चार-पांच दिनों से सीवर खुले में बह रही है जो वैष्णो देवी मंदिर से मस्जिद होते हुए हरि नगर का मुख्य मार्ग है, राहगीरों को गंदगी से ही गुजरना पड़ रहा है, मलिन बस्तियों में प्रशासन और संबंधित विभाग हमेशा अनदेखी करता है अगर यही सीवर कहीं बाज़ार में या वीआईपी क्षेत्रों में बह रही होती तो अब तक कब का समाधान हो चुका होता, क्या मेरे शहर के कुछ लोगों को समानता का अधिकार पाने का कोई अधिकार नहीं ? ज़िम्मेदार विभाग ज़िम्मेदारी से ज़िम्मेदारी लेने की ज़िम्मेदारी दिखायें…
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 150 : पधारो म्हारे गड्ढ़ों के देस…
यूँ तो ज़िंदगी बिन गड्ढों के भी जी जा सकती है लेकिन लाइफ में अगर दो – तीन गड्ढे न हों तो लाइफ का मज़ा ही खत्म हो जाता है और हमारी लाइफ में मज़ा बरक़रार रखे हुये है नैनीताल का एक डिपार्टमेंट, जिसकी बदौलत हमें महंगी से महंगी और आरामदायक से आरामदायक गाड़ी में भी झटकों का एहसास हो जाता है, अगर आपके पास मोटर साइकिल या स्कूटी है तो यही मज़ा दोगुना हो जाता है, आप उस गड्ढे से बचकर निकल गये तो समझिये ज़िंदगी से आपकी रोमांच खत्म हो गया और अगर आपने स्टंट दिखाते हुये गड्ढा पार किया तो उससे तीन फ़ायदे होंगे, पहला तो वो जो आप बैठे- बैठे फैटी होते जा रहे हैं वो नहीं रहोगे, झटके खा-खाकर आपका वज़न कम हो जाता है, दूसरा फायदा ये कि आपके अंदर का स्टंटमैन सामने आ जाता है और आप स्टंट की दुनिया के बेताज बादशाह बन जाते हैं, तीसरा फ़ायदा ये कि अगर सावधानी हटी और दुर्घटना घटी तो आपकी वजह से अस्पताल और दवाई की दुकान से जुड़े कई लोगों को रोज़गार मिल जाता है, इससे आप चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांति ले आते हैं और आपको अंदाज़ा भी नहीं हो पाता आपने कितना महान कार्य कर दिया है,
और आप अस्पताल के बेड पर गंदे से लाल कंबल में लेटे- लेटे उस गड्ढे को कोसते रह जाते हैं जिसने आपको महान बनाया,
जाने- अंजाने ऐसी गलतियां हो ही जाती हैं किसकी (डिपार्टमेंट की ) गलती किसके (आम नागरिक के ) लिये महानता का कारण बन जाये, कुछ नहीं कहा जा सकता,
इसलिये तस्वीर में जो गड्ढा दिखाया गया है वो मनु महारानी के सामने चौराहे का है जिस किसीको भी अपने अंदर का स्टंटमैन बाहर निकालना हो या चिकित्सा क्षेत्र में महानता का अध्याय लिखना हो तो पधारो म्हारे देस |
अंक 149 : ठेके पर आसमान, ठेंगे पर सम्मान (5 जुलाई 2019)
साहिबान, आज आपको एक राजा की कहानी सुनाते हैं, उसका राज्य बहुत बड़ा था, जिसके उसने टुकड़े किये और उन टुकड़ों की ज़िम्मेदारी के लिये जनता की पसंद से ज़िम्मेदार लोग चुने, राजा की इस समझदारी से वहां की प्रजा बहुत खुश हुई कि रोज़-रोज़, नई -नई फ़रियाद लेकर राजा के पास जाना बच गया, सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था, प्रजा खुश थी, क्योंकि राजा तक उनकी फ़रियादें ज़िम्मेदार लोगों के ज़रिये आसानी से पहुंचने लगी और पूरे राज्य की प्रजा हंसी ख़ुशी गुज़ारा कर रही थी, फिर अचानक एक साहूकार राज्य में आया और उसने राजा को अपना राज्य ठेके पर देने का प्रस्ताव रखा, साहूकार ने कहा यदि आप मुझे अपना राज्य ठेके पर देते हो तो फिर आपको अपनी प्रजा पर अपना धन खर्चने की आवश्यकता नहीं होगी बल्कि मैं राज्य के ठेके के नाम पर आपको समय-समय पर राशि चुकाता रहूँगा, राजा को ये बात बहुत पसंद आयी और उसने अपना राज्य ठेके पर दे दिया, एक के बाद एक आवश्यकता के लिये ठेके होते रहे और धीरे – धीरे राज्य की पूरी व्यवस्था ठेकेदारों के हाथों में चली गयी, फिर हुआ यूँ कि जो ज़िम्मेदार लोग राजा ने जनता की पसंद से चुने थे उनके अधिकार कम होते चले गये अब राजा सिर्फ़ साहूकार के ठेकेदारों की बात तवज्जो से सुनता और अपने ज़िम्मेदारों को नज़रअंदाज़ करता, ऐसा करते -करते फिर तो ऐसी नौबत आ गयी कि राज्य के ज़िम्मेदार यदि हल्के बोलते तो उनकी आवाज़ राजा के कानों तक नहीं पहुँचती, ज़ोर से बोलते तो राजा बोलता इतना चिल्लाते क्यों हों, ख़ामोश रहते तो कमज़ोर समझा जाता, सभा से उठ जाएँ तो मुँहज़ोर समझा जाता और दरबार के बाहर बैठ जाते तो न फ़रमान समझा जाता, आख़िरकार उन ज़िम्मेदार लोगों के लिये ये स्थिति आ गयी कि राज्य में जाएँ तो प्रजा प्रश्न पूछ पूछकर जीने न दे, और राजा के दरबार में जाओ तो कोई सुनवाई नहीं होती, ऐसे में ज़िम्मेदारों के लिये विकट स्थिति पैदा हो गयी, आत्मसम्मान रक्षा करने की, सबने मन बनाया और राजा के ख़िलाफ़ ही जंग का एलान कर दिया, अपने ख़िलाफ़ ऐसी खबरें सुनकर राजा आग बबूला हो गया, राजा ने अपने स्तर से हर प्रयास किये उन लोगों के हौसले पस्त करने के लिये एक- एक करके सब हथकण्डे अपनाये लेकिन हुआ कुछ नहीं, ज़िम्मेदारों की हिम्मत के आगे सब हार मान गये और राज्य के ज़िम्मेदारों को आख़िरकार खोया हुआ सम्मान वापस मिला और राज्य फिर से खुशहाल हो गया…
नोट:- कहानी के सभी पात्र, चित्र व घटनाएं काल्पनिक हैं इनका किसी जीवित या मृत से कोई संबंध नहीं है, अगर ऐसा कहीं पाया जाता है तो वो महज़ एक संयोग होगा |
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
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अंक 148 : नैनीताल के नवनियुक्त ज़िलाधिकारी सविन बंसल से पहला साक्षात्कार, भाग-2… (1 जुलाई 2019)
डीएम सविन बंसल
नवनियुक्त ज़िलाधिकारी, नैनीताल सविन बंसल से विभिन्न मुद्दों व उनकी योजनाओं से सम्बंधित बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-
संक्षिप्त परिचय :- हरियाणा में जन्मे सविन बंसल की प्रारंभिक व उच्च शिक्षा हरियाणा में ही सम्पन्न हुई। किताबें पढ़ने के शौकीन सविन ने NIT ( कुरुक्षेत्र ) से मैकेनिकल इंजीनिरिंग में गोल्ड मेडल प्राप्त किया लेकिन उससे भी आप संतुष्ट नहीं हुये और आपने प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश सेवा करने का मन बना लिया और आख़िरकार कड़ी मेहनत व लगन के जरिये आपका आईएएस 2009 के बैच में सिलेक्शन हो गया। आप प्रशिक्षु आईएएस के तौर पर सर्वप्रथम नैनीताल की सरज़मीं पर आये और यहीं से आपकी आधिकारिक यात्रा की शुरुआत हुई। 2011 में आप परगनाधिकारी (रुड़की), सीडीओ (टिहरी), 2013 में अपर सचिव वित्त, लोक निर्माण, आपदा प्रबंधन, निदेशक ऑडिट, निदेशक बाह्य सहायतित परियोजना में ज़िम्मेदारी निभाने के पश्चात् 2015 से 2017 तक अल्मोड़ा के ज़िलाधिकारी रह कर आपने शानदार व यादगार कार्य किये। 29/06/2019 दिन शनिवार से आपने नैनीताल के ज़िलाधिकारी का पद भार ग्रहण कर लिया।
नव नियुक्त ज़िलाधिकारी सविन बंसल, नैनीताल के लिये क्या ख़्वाब और क्या हक़ीक़त लेकर आये हैं आइये जानते हैं :-
सवाल (05) से आगे जारी :-
आज़ाद सवाल (06):- नगर के नाले जो झील की धमनियां कहलाते हैं, वो अपने साथ सीवर भी झील में समाहित कर रहे हैं। इस संबंध में आपके द्वारा क्या प्रयास किये जाएंगे?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- नैनीताल के नालों का एक माह के भीतर मैं स्वयं निरीक्षण करने वाला हूँ उसके पश्चात् ही कोई निश्चित योजना बनाकर उस पर कार्य किया जाएगा।
आज़ाद सवाल (07) :- यही हाल यहां के उद्यानों का है, जिसमें कैनेडी पार्क और कैपिटोल सिनेमा के सामने वाला पार्क है जो बदतर हालत में हैं, आपके द्वारा उद्यान जीर्णोद्धार के लिये क्या प्रयास रहेंगे ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- जो भी संबंधित विभाग हैं उनसे वार्ता करके जल्द ही कोई ठोस योजना बनाई जाएगी।
आज़ाद सवाल (08) :- पंत पार्क में अघोषित पार्किंग बना दी गयी है और जो घोषित पार्किंग हैं उनमें काफी अनियमितताओं की खबरें मिल रही हैं। इस संबंध में क्या कार्य योजना रहेगी ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- पुलिस प्रशासन व नगर पालिका प्रशासन के साथ बैठक कर सभी पार्किंग पर बात की जाएगी।
आज़ाद सवाल (09):- टैक्सी बाइक स्वरोज़गार का अच्छा साधन साबित हुआ है लेकिन अभी तक इनका किराया निर्धारित नहीं हुआ है, जिससे चालक स्वयं कंफ्यूज हो जाते हैं किससे कितना किराया लेना है, क्या हो सकता है इनकी समस्या का निस्तारण?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- इस संबंध में आरटीओ से बात की जाएगी और जल्द ही किराया निर्धारित किया जाएगा ।
आज़ाद सवाल (10) :- अंत में, कुछ व्यक्तिगत जानकारी जो जनता जानने को उत्सुक रहती है अपने प्रिय ज़िलाधिकारी के विषय में जैसे वर्तमान प्राधिकरण सचिव व पूर्व ज़िलाधिकारी दीपक रावत गाने के शौकीन हैं आपकी क्या रुचि हैं।
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- मैं इन लोगों के जैसा तो नहीं गा पाता हूँ लेकिन थोड़ा बहुत शौक है, बाक़ी जॉगिंग, बेडमिंटन, किताबें पढ़ना ये भी मेरी रूचि में शामिल है |
आपकी नैनीताल ज़िले के लिये क्या प्राथमिकताएं हैं और क्या चुनौतियां हैं ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य बेहतर पर्यटन व्यवस्था, ये सब प्राथमिकताएं हैं और यातायात व्यवस्था, झील संरक्षण, बलियानाला व वहां रह रहे लोगों को सुरक्षा प्रदान करना प्राथमिकता व चुनौती दोनों हैं।
आज़ाद सवाल (02) :- नगर व ज़िले की यातायात व्यवस्था सुधारने हेतु आपके द्वारा क्या प्रयास किये जाएंगे ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- अभी-अभी होटल एसो. वालों से इस मुद्दे पर भी बात चल रही थी। शीघ्र ही पुलिस प्रशासन के साथ वार्ता कर कोई ठोस योजना बनाई जाएगी।
आज़ाद सवाल (03) :- नगर व ज़िले की चिकित्सा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये आपके द्वारा क्या खाका तैयार किया जाएगा ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- समस्त अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया जाएगा, कोई कमी पाई गयी तो उस पर तत्काल एक्शन लिया जाएगा।
आज़ाद सवाल (04):- प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र बने हैं लेकिन उनमें दवाइयां नहीं हैं, आयुष्मान कार्ड बनवा दिये हैं लेकिन किसी को कोई इलाज नहीं मिल रहा है, आये दिन इलाज के अभाव में मौतें हो रही हैं, कौन लेगा इसकी ज़िम्मेदारी, क्या कहना चाहेंगे इस स्थिति पर ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- (संबंधित अधिकारियों को फ़ोन पर आदेश देने के पश्चात् ) चिकित्सा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोई कमी न आये इसके लिये समस्त स्वास्थ्य अधिकारियों को मीटिंग के लिये बुला लिया गया है, मीटिंग में मामलों का संज्ञान लिया जाएगा।
आज़ाद सवाल (05) :- नगर हो या ज़िला सरकारी स्कूल बद से बदतर और निजी स्कूल तान से तानाशाह होते जा रहे हैं, कैसे नियंत्रण में आएगी इनकी स्थिति ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- (संबंधित अधिकारियों को फ़ोन पर आदेश देने के पश्चात् ) सरकारी व निजी स्कूलों का निरीक्षण करके अनियमितताओं का पता लगाया जाएगा। सरकारी स्कूलों की दशा में सुधार लाने के प्रयास किये जाएंगे व निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाई जाएगी।
साक्षात्कार जारी ..🙏
अंक 147 : नैनीताल नगर पालिका के EO के खिलाफ झंडा बुलंद करने वाले सभासद पर आज़ाद के तीखे तीर…. (28 जून 2019)
साक्षात्कार : मनोज साह जगाती, सभासद (वार्ड नंबर 08) नगर पालिका परिषद, नैनीताल से विभिन्न मुद्दों पर बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-
*आज़ाद* सवाल (01):- आपने किन- किन मुद्दों को लेकर पालिका प्रशासन के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला हुआ है ?
*मनोज साह जगाती* :- ऐसे कई मुद्दे हैं जिनको लेकर पालिका प्रशासन से हमारा रोष है जैसे :- स्ट्रीट लाइट का ठेका जब दिया ब पुरानी लाइट निकाली गयी होंगी लेकिन वो सारी लाइट कहाँ गयी कुछ पता नहीं ? दूसरा, नये ठेकेदार को सरकारी गाड़ी इस्तेमाल करने क्यों दी जा रही है, तीसरा ठेकेदार के केवल 5 आदमी हैं जो 15 वार्ड की प्रकाश व्यस्वस्था को देखते हैं जो उनका देखना न देखने की ही बराबर हो जाता है, पार्किंग में ₹20 की जगह ₹50 बाइक वालों से और ₹200/- कार वालों से वसूले जा रहे हैं जो अधिशासी अधिकारी के निर्देशों पर हो रहा है, और हाँ नगर पालिका में जो सामान मंगाया जाता है उसमें इतनी ऊँची दरों पर सामान खरीदा गया है जो किसी ष्टिकोण से उचित नहीं लगता, जैसे हाथ कूड़ा गाड़ी जो कि ₹5000/- तक की आ जाती है वो ₹9500/- की खरीदी जा रही है ये तो मात्र एक उदाहरण हैं, बहुत धांधलियां की गयी हैं ईओ के द्वारा |
*आज़ाद* सवाल (02) :- इन सब मुद्दों को लेकर आप खुद अकेले चल रहे हैं या बाकी सदस्य भी आपका साथ दे रहे हैं ?
*मनोज साह जगाती* :- नहीं, ऐसा नहीं है मैं अकेला नहीं हूँ, इन आरोपों को लेकर हम 15 में से 13 सभासद एक जुट हो गए हैं जो बहुमत से भी बहुत बड़ा मत है और हम सब मिलकर इन आरोपों की जांच कराना चाहते हैं |
*आज़ाद* सवाल (03) :- पालिका प्रशासन की नीतियों में सभासदों का कितना योगदान होता है ?
*मनोज साह जगाती* :- योगदान तो तब होगा जब सभासदो को किसी नीति पर चर्चा करने के लिये बुलाया जाएगा, यहां का प्रशासन अपनी मर्ज़ी से सब नीतियां बनाता व रातों रात लागू करवाता है |
*आज़ाद* सवाल (04):- और क्या – क्या मुद्दें हैं जिनसे सभी सभासद आक्रोश में हैं ?
*मनोज साह जगाती* :- मुद्दे तो इतने हैं कि बताते -बताते दिन निकल जाएगा लेकिन कुछ खास मुद्दे बता देता हूँ जैसे :- बलियानाला के नाम पर हरिनगर से मकान ख़ाली कराये जा रहे हैं पालिका द्वारा पक्का स्लॉटर हाउस बनवाया जा रहा है ऐसा क्यों ? दूसरा, खेल मैदान में पान मसाला व गुटके के ही विज्ञापन क्यों लगाए जाते हैं ? तीसरा, चाहे मेट्रोपोल पार्किंग हो या सूखाताल पार्किंग कहीं भी शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं है सिर्फ पैसा कमाया जा रहा है चौथा, पिछली कूड़ा निस्तारण वाली संस्था की गाड़ियों का इस्तेमाल किस अधिकार से किया जा रहा है ? पांचवा, न्यायालय में मामला जाने पर भी वार्डों में अँधेरा क्यों है ? ऐसे अनगिनत मुद्दे हैं |
*आज़ाद* सवाल (05) :- इन सब मुद्दों के ख़िलाफ़ आप सभी 13 सभासदों की आगे की क्या रणनीति है ?
*मनोज साह जगाती*:- इन सब मुद्दों को लेकर हमने मा. आयुक्त महोदय से निष्पक्ष जाँच की मांग की है, ज्ञापन में हमने ये भी अनुरोध किया है कि यदि अधिशासी अधिकारी के कार्यों की जाँच नहीं होती तो हम सब आगामी सोमवार 01 जुलाई से आयुक्त कार्यालय में ही धरने पर बैठ जाएँगे |
*साक्षात्कार समाप्त*…
🙏
अंक 146 : नैनीताल नगर पालिका के EO पर आज़ाद के तीखे तीर : पेड़ों पर लाइटिंग, पंत पॉर्क की अवैध पार्किंग, आवारा कुत्तों आदि पर…. (25 जून 2019)
साक्षात्कार : भाग (02)
रोहिताश शर्मा अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद, नैनीताल
नगर की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं पर कई वर्षों से नगर पालिका परिषद नैनीताल में अधिशासी अधिकारी के पद पर तैनात रोहिताश शर्मा से बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :- भाग – 2 (सवाल 5 से आगे)
आज़ाद सवाल (06):- आप पर एक आरोप ये भी है कि आपने माल रोड पर सजावट के नाम पर लाइट लगवाकर वृक्षों में कीलें ठुकवाकर क्षति पहुंचाई , आख़िर क्यों किया गया ऐसा ?
रोहिताश शर्मा :- सजावट के नाम पर हमने किसी भी वृक्ष को कोई क्षति नहीं पहुंचाई है, रही बात वृक्ष में कीलें ठुकवाने की तो यदि कोई भी एक कील वृक्ष में दिखा दे नगर पालिका उसे इनाम देगी।
आज़ाद सवाल (07) :- वृक्षों पर फेंसी लाइट लगाने से पहले क्या आपके द्वारा वन विभाग से कोई अनुमति मांगी गयी ?
रोहिताश शर्मा :- वृक्षों पर स्वामित्व हमारा है तो हम वन विभाग से किस बात की अनुमति प्राप्त करें। दूसरी बात हमने वृक्षों के साथ कोई छेड़ – छाड़ नहीं की फिर कोई औचित्य नहीं बनता वन विभाग के पास जाने का।
आज़ाद सवाल (08) :- पंत पार्क में अघोषित पार्किंग बना दी गयी है, ये सब किसकी शह पर हो रहा है, पालिका की गाड़ियां भी दिखती हैं वहां, ऐसा क्यों ?
रोहिताश शर्मा :- पंत पार्क में हुई पार्किंग पूरी तरह से अवैध है, हम पुलिस प्रशासन से मांग करते हैं कि वो पालिका की सरकारी गाड़ियों के अलावा हर गाड़ी का चालान काटे।
आज़ाद सवाल (09):- आवारा कुत्तों से जनता बहुत परेशान है आपके द्वारा क्या प्रयास किये जा रहे हैं कुत्तों के आतंक के ख़िलाफ़ ?
रोहिताश शर्मा :- मा. उच्चतम न्या. में मामला विचाराधीन है कि आवारा कुत्तों को यहां से नहीं भगा सकते, उनका केवल बध्याकरण किया जाता है। ह्यूमन सोसाइटी मुंबई के साथ मिलकर अब तक लगभग 120 आवारा कुत्तों का बध्याकरण किया जा चुका है और आगे भी प्रयासरत हैं।
आज़ाद सवाल (10) :- अंत में एक अहम् सवाल, डोर टू डोरकेकिििशश तो बहुत सुन लिए अब वो फ़साना हक़ीक़त कब बनेगा ?
रोहिताश शर्मा :- फ़साना हक़ीक़त बनने वाला है, 21 जून को नये सिरे से टेंडर हो गये हैं एक अनुभवी संस्था को चिह्नित कर लिया गया है, अगले माह जुलाई के प्रथम सप्ताह से वो संस्था डोर टू डोर कूड़ा निस्तारण का कार्य प्रारम्भ कर देगी, जिससे नगर के नालों, व सड़कों पर गंदगी होने से काफ़ी राहत मिलेगी।
साक्षात्कार समाप्त….🙏
भाग : 1
आज़ाद (01):-
सबसे पहले बात करते हैं सड़क से उच्च न्यायालय पहुंची स्ट्रीट लाइट की, आख़िर क्या था मामला, जो ये मुद्दा जनहित का मुद्दा बन गया ?
रोहिताश शर्मा :- अमृत योजना के अंतर्गत स्वीकार योजना जिसे सोडियम लाइट से हटाकर एलईडी में कन्वर्ट किया गया और जिसे पीपीपी मोड में चलाने की शुरूआत हुई, इसमें विद्युत् बिल में कटौती तो हुई ही साथ ही साथ पालिका को आय भी प्राप्त हुई, रही बात स्ट्रीट लाइट का सड़क से उच्च न्यायालय तक पहुंचने का मामला तो उसमें हम कोई टिप्पणी नहीं कर सकते क्योंकि मामला मा. न्यायालय में लंबित है |
आज़ाद सवाल (02) :- सुनने में ये भी आया है कि ईको ड्राइव कम्पनी ने स्ट्रीट लाइट का ठेका तो ले लिया लेकिन अपना एक भी कर्मचारी प्रकाश व्यवस्था हेतु नियुक्त नहीं किया ?
रोहिताश शर्मा :- ऐसा नहीं है, ईको ड्राइव कम्पनी के छः कर्मचारी नियुक्त हैं जिनमें दो लाइनमेन, दो हेल्पर, एक इलेक्ट्रीशियन व एक ड्राइवर शामिल है, प्रकाश व्यवस्था के लिये एक गाड़ी पालिका की ओर से दी गयी है जिसका ईंधन खर्चा कम्पनी वहन करती है |
आज़ाद सवाल (03) :- क्या ये सत्य है कि आप अपने सभासदों की शिकायतों को नहीं सुन रहे हैं और शिकायती पत्र लेने से मना कर दे रहे हैं, आख़िर अपने ही सभासदों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया जा रहा है ?
रोहिताश शर्मा :- जिस मामले की आप बात कर रहे हैं असल में कोई बात ही नहीं थी, सबकी शिकायतों के लिये हमने कार्यालय में शिकायती पंजिका रखी है, उसमें कोई भी शिकायत लिखवा सकता है, जिस पर एक्शन लिया जाता है, रही बात शिकायती पत्र न लेने की तो उस पत्र में किसी भी तरह की समस्या का कोई भी स्पष्टीकरण नहीं दिया गया था, जो विचार करने योग्य नहीं था, जिस पत्र में समस्या कहाँ पर है, क्यों हैं आदि बातों का समावेश होगा उसे हम सहर्ष स्वीकार करेंगे |
आज़ाद सवाल (04):- अब बात करते हैं डीएसए पार्किंग की इतनी बड़ी पार्किंग होने के बावजूद भी पर्यटकों को गाड़ियों के लिये जगह मुहैया नहीं कराई गयी, आख़िर क्या वजह रही इस बात की?
रोहिताश शर्मा :- सबसे पहले तो वो डीएसए की पार्किंग नहीं है वो नगर पालिका की पार्किंग है, क्योंकि डीएसए का अपना कुछ भी नहीं है, डीएसए की लीज़ भी 2004 में ख़त्म हो गयी थी, अब तक बिना लीज़ के इतने बड़े मैदान को प्रयोग में लाया जा रहा है।
आज़ाद सवाल (05) :- तो फिर डीएसए द्वारा इतने समय में लीज़ बढ़ाने के प्रयास तो किये गये होंगे ?
रोहिताश शर्मा :- नहीं, डीएसए नैनीताल द्वारा सन् 2004 से अब तक कोई प्रयास नहीं किये गये, जिससे लीज़ बढ़ाई जा सके |
साक्षात्कार जारी …
🙏
अंक 145 : आज़ाद के तीर : सूखाताल नहीं सूख पा रही थी ? जो यह सब भी कर दिया.. (4 जून 2019)
झील का विकास करती, लोहे की मशीनें!!!
साहिबान, हमारे शहर में एक बड़ी झील है एक छोटी झील है, बड़ी झील को तो सब जानते हैं क्योंकि वो फिल्मों के मुख्य किरदार की तरह नैनीताल की फिल्म में हैं लेकिन क्या किसी ने उस सहयोगी, नैनी झील को सर्वाधिक 70 फीसद जल प्रदाता सूूूखाताल झील को जानने की कोशिश की जिसके सहयोग से मुख्य किरदार का क़द बड़ा हो जाता है, हमारा जवाब है हाँ जानने की कोशिश की इसलिये उस झील के विकास के लिये लोहे की चार पहिये वाली मशीनें बुलवा दी गयी हैं और उनके ज़रिये झील के गर्भ में छिपे हुये पानी को भी सुखाने की कोशिशें शुरू कर दी गयी हैं, हम ये नहीं जानते शासन – प्रशासन को इससे कितना मुनाफ़ा होगा लेकिन इतना ज़रूर है इन लोहे की मशीनों की चहलकदमी से प्राकृतिक श्रोत ज़रूर सूख जाएंगे, और जैसा कि ग्रीष्म ऋतु में नैनी झील सूखने लगती है ऐसा करने से दोगुनी रफ़्तार से जल स्तर में गिरावट आएगी और जल संकट से वे लोग भी बच नहीं पाएंगे जिनकी सहमति से अथवा संरक्षण में झील को पार्किंग में तब्दील कर दिया गया है … आख़िर में, मा.प्रधानमंत्री महोदय, मा. मुख्यमंत्री महोदय उत्तराखंड, मा. मुख्य न्यायाधीश महोदय उच्च न्यायालय उत्तराखंड, कुमाऊँ आयुक्त महोदय व मुख्य सचिव मुख्यमंत्री महोदय, ज़िलाधिकारी महोदय नैनीताल, सचिव महोदय, झील विकास प्राधिकरण, नैनीताल, सांसद महोदय, नैनीताल, विधायक महोदय नैनीताल नगर पालिकाध्यक्ष महोदय, नैनीताल, अधिशासी अधिकारी महोदय, नगर पालिका परिषद् नैनीताल व सम्बंधित क्षेत्रीय सभासद महोदया व सम्बंधित अधिकारीगणों से इल्तेजा है कि जिस तरह एक तरफ़ झीलों के विकास के लिये करोड़ों का बजट जारी किया जा रहा है वहीँ नैनी झील की सहयोगी सूखाताल झील में पार्किंग बना दी गयी है, जो झील का जीते जी क़त्ल कर देने जैसा है, इसलिये हाथ जोड़कर हमारी इल्तेजा है कि झील में जो पार्किंग बनाई गयी है उसे तत्काल प्रभावी आदेश देकर हटवा दिया जाये और झील को पुनर्जीवित करने की योजना बनाकर उसको अमल में लाया जाये, जिससे प्राकृतिक श्रोत बने रहेंगे साथ ही साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और नाव आदि द्वारा स्थानीय लोगों को रोज़गार भी मिलेगा.. हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यकीन है कि सूखाताल झील से लोहे की मशीने तुरंत हटवा दी जाएंगी और झील विकास के लिये योजना अमल में लाई जाएगी…
साहिबान, ये मंज़र जो आप देख रहे हैं वो किसी सर्कस का नहीं है बल्कि चार्टन लॉज एरिया मल्लीताल नैनीताल का है, जहाँ एक कूड़ा गाड़ी कूड़ादान उठा कर ले जा रही है, कूड़ादान उठाना कोई ग़लत बात नहीं है ग़लत बात तो है लोगों की जान से खेलना! जी हाँ, ये कूड़ा गाड़ी आने का समय और छोटे – छोटे बच्चों के स्कूल जाने का समय लगभग एक ही होता है, इसलिये मजबूरन अभिभावकों को बच्चों का हाथ पकड़कर गाड़ी से बच रही छोटी सी जगह से जान का जोखिम उठाते हुये निकलना पड़ता है, भगवान न करे किसी दिन गाड़ी के चालक से कोई भूल हो जाये, फिर तब कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जनाब, आप भी सोच रहे होंगे कि इतनी बात लिखने की क्या ज़रूरत थी सीधा उन लोगों को बोल देते तो शायद वे लोग अपनी गाड़ी का समय बदल लें, किया साहब, वो भी किया लेकिन उन महान लोगों के पास बस एक ही शब्द होता है, नहीं हो पाएगा, हम ये जानना चाहते हैं आख़िर क्यों नहीं हो सकता? क्या समय में बदलाव तब आएगा जब कोई हादसा हो जाएगा ? घटना से पहले कोई सचेत करे तो उसके शब्दों की कोई कीमत नहीं ? हुज़ूर, एक और सुझाव है अगर ग़ौर फरमायें तो वो यूँ है कि अगर जिस रास्ते में ये कूड़ादान लगाये गए हैं उन्हें थोड़ा आस- पास ही अन्यत्र शिफ्ट कर दें तो फिर कूड़ा गाड़ी जब भी आए उससे कोई खतरा नहीं होगा ! बाक़ी साहब लोगों की इच्छा पर डिपेंड करता है कि क्या करना हैं ? जनता यूँ ही डर के साये में जियेगी या उसे भी खुलकर जीने का हक़ है ?
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 143 : यह तस्वीर देख कर आप भी कहेंगे, ‘मैं भी ख़ास होता काश !’ (25 मई 2019)
साहिबान, आज आपको जो तस्वीर दिखाई दे रही है, वो किसी आम की तस्वीर नहीं, बल्कि किसी ख़ास की तस्वीर है। और ये मंज़र है नैनीताल की लोअर मॉल रोड का, जहाँ सीज़न में ट्रैफ़िक जाम कब हो जाये, कुछ नहीं कहा जा सकता। इसलिये मित्र पुलिस बहुत सावधानियां बरतती है, कि कहीं कोई गाड़ी न रुके, जिससे ट्रैफ़िक बाधित हो। लेकिन ये नियम और कायदे-क़ानून सिर्फ़ और सिर्फ़ आम आदमी के लिये हैं, किसी ख़ास के लिये नहीं हैं, वे जब चाहे, जहाँ चाहे, सरकारी गाड़ी रुकवा सकते हैं, भले ही वो काम या दौरा सरकारी न हो, और नितांत व्यक्तिगत ही क्यों न हो ? सारा सरकारी ताम-झाम साथ लेकर शॉपिंग होती है या नौका विहार का आनंद उठाया जाता है, वो भी सब सरकारी ख़र्चे पर ! ख़ैर, अभी हम बात कर रहे हैं यातायात नियमों के दोहरे मापदंड की जो आम आदमी को लाठी और ख़ास लोगों को सलाम ठोकता है! ‘हुज़ूर’ जब नैनीताल से दो किमी दूर होते हैं तो चौराहों पर नाकेबंदी कर दी जाती है। ऊपर का वाहन ऊपर और नीचे का वाहन नीचे ही रोक दिया जाता है। फिर चाहे उस कतार में कोई मरीज़ या बूढ़े बाबा ही क्यों न हों। उनको तब तक नहीं जाने दिया जाता जब तक माननीय अपने गंतव्य तक न पहुंच जाएँ। जनाब आख़िर में, हमारा ये सवाल है कि क्या हम आज भी उसी ग़ुलाम देश में जी रहे हैं, जिस देश में अंग्रेज़ों ने भारतीयों के लिये अलग क़ानून बनाये थे, जो अंग्रेज़ों पर लागू नहीं होते थे ? आज की तस्वीर भी क्या यही बयां करती नही करती है कि अगर आपको मॉल रोड में अपना वाहन खड़ा करके शॉपिंग करने जाना है तो कम से कम आपको ऐसा भाग्य लेकर जन्म लेना होगा जो आपको ख़ास या ‘माननीय’ बना दे, फिर हर क़ानून आपको सलाम करेगा !
साहिबान, आज हम मल्लीताल बाज़ार क्षेत्र की बात करेंगे, नहीं नहीं, जैसा आप समझ रहे हैं, वैसा कुछ भी नहीं करेंगे, आज न ही हम, वहां सड़क पर निकली आधी से ज़्यादा दुकानों की बात करेंगे और न ही उस अतिक्रमण को रोकने के लिये शासन -प्रशासन द्वारा क्या प्रयास किये जा रहे हैं, न ही उसकी बात करेंगे, आज हम बात करेंगे उक्त तथाकथित बाज़ार मार्ग की जिसे दो – पहिया वाहनों के साथ – साथ चार पहिया वाहनों ने अपनी रफ़्तार और शोर मचाते हॉर्न की आवाज़ों ने बेसुध कर दिया है, मल्लीताल कोतवाली से ऊपर गाड़ी पड़ाव से होकर अंडा मार्केट व जय लाल साह बाज़ार को निकलने वाले इस मार्ग पर बाइक चलाने वाले इतने बेतरतीब ढंग से बाइक चलाते है कि उनकी बाइक से टकराकर कोई भी व्यक्ति कभी भी निजी अस्पतालों की चांदी कटवा सकता है। यही सूरत कार चलाने वालों की है जहाँ इतनी जनता खरीदारी करने आती है, जिसमें महिला, बच्चे, बुज़ुर्ग सभी शामिल हैं, उन सबको बोनट पर टांगने के इरादे से कार किसी भी टाइम आ और जा रही हैं, कुछ लोगों ने तो महानता की वाट लगाने की कसम खा रखी है बाई गॉड, वे आते -जाते हैं इस सड़क से ऊपर से ये दबंगई जगह हो न हो सड़क के बीचों – बीच अपनी बाइक या कार खड़ी करके कानों के लिए रुई और आँखों के लिए पट्टी लेने चल देते हैं, फिर उनकी बला से उस रोड पर जाम लगे या ब्रेड पर जेम लगे, वहीँ दूसरी तरफ़ बड़ा बाज़ार की बात करें तो वहां की हालत ग़नीमत है, हाँ भई, अब इतना खुश होने वाली बात भी नहीं है, वहां का ट्रैफ़िक प्लान जो सक्सेस हुआ है, उसका सारा क्रेडिट जाता है, बाज़ार के मुख्य द्वार पर लगे ताले को, जो सुबह और शाम को ही खुलता है, जिस वजह से बड़ा बाज़ार चैन की साँस ले रहा है, ख़ैर, अभी हम बात कर रहे हैं गाड़ी पड़ाव से कनेक्ट होने वाले बाज़ार की, जिसने अपने साथ खरीदारों को कम बाइक और कार को ज़्यादा कनेक्ट किया है, अब इस कनेक्शन के पीछे पुलिस की लापरवाही कहें या व्यापार मंडल की मेहरबानी या नगर पालिका का मौन व्रत, सब एक ही बात है, अभी तो धीरे -धीरे इन गाड़ियों को सड़क पर खड़ा करवाया जा रहा है, हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है, एक दिन सड़क पर पार्किंग करने के लिये नगर पालिका द्वारा टेंडर निकाले जाएंगे और नैनीताल की छोटी – बड़ी हर सड़क पर सिर्फ़ और सिर्फ़ वाहन ही खड़े होंगे, बाक़ी ख़रीदारी करने लोग हल्द्वानी के मॉल में जाया करेंगे, काश उक्त बाज़ार के लिये भी एक गेट लगता जिसका एक निश्चित समय होता खुलने और बंद होने का तब शायद बच्चे और बुज़ुर्ग निश्चिंत होकर घर से निकलते, लेकिन हम आदि हो गये हैं, ऊँचे फरमानों के बाद पहल करने के लिये, उससे पहले हम बदल जाएँ हमारे स्टैण्डर्ड की तौहीन होगी न, हैं ना ? न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 141 : …तो वो दिन दूर नहीं जब हमारे घरों के भीतर से भी गुजरेंगी गाड़ियां ! (6 मई 2019)
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न, वो दरअसल तस्वीर नहीं है, नैनीताल के बाशिंदों पर थोपा गया फ़रमान है, कैसे और क्यों हम इस इंतज़ाम को थोपा गया फ़रमान बता रहे हैं, आइये जानते हैं :- नैनीताल पर्वतों का राजा है और पूरे जहान में, ये ही इकलौता राजा है, जिसके राज में वज़ीर की कोई सुनता नहीं और जिसके सेनापति अपनी- अपनी ज़िम्मेदारियों से बचते फिरते हैं, जब किसी के पास कुछ नया निज़ाम लागू करवाने का वक़्त आता है तब सब उछलते रहते हैं और जब उस फ़रमान के लिये जवाबदारी का वक़्त आता है तो बॉल एक दूसरे के पास उछालते रहते हैं, ये तो उनकी फ़ितरत है, ख़ैर, कुछ साल पहले मस्जिद चौराहे से नैनीताल क्लब तक आने-जाने के लिये, मेट्रोपोल वाली सड़क का ही इस्तेमाल होता था, लेकिन ट्रैफ़िक जाम से निजात दिलाने के लिये नैनीताल क्लब से बीडी पाण्डे अस्पताल तक की सड़क को गाड़ियों के लिए खोल दिया गया, उसमें हुआ यूँ कि नैनीताल आने वाली गाड़ियां मस्जिद वाली सड़क से शहर में आएंगी और यहां से जाने वाली गाड़ियां नैनीताल क्लब से होते हुए शहर से बाहर निकल जाएंगी, सोच सही भी हो सकती थी अगर उसके साइड इफेक्ट्स पर उन सिपहसालारों ने ज़रा भी सोचा होता, काश उन्होंने ये निज़ाम लागू करवाने से पहले ये सोचा होता कि जब गाड़ियां तेज़ रफ़्तार से आएंगी तो वहां बाज़ार से सामान ख़रीदने आये और काम पर आते -जाते महिला / पुरुष कैसे चल पाएंगे ? दूसरा छोटे – छोटे मासूम बच्चे स्कूल से आते – जाते एक ख़ौफ़ का साया साथ लेकर चलते हैं कि कहीं कोई रॉंग साइड बाइक वाला या ऊपर से आती कोई तेज़ रफ़्तार गाड़ी टक्कर न मार दे, (ऐसी ही एक घटना कुछ दिन पहले हुई थी जिसमें एक पिकअप वाहन की चपेट में एक युवक घायल हो गया था) वहीँ अगर बुज़ुर्गों की बात करें तो उनके लिये ये सड़क मुसीबत का सबब बन गयी है, दरअसल ये सड़क मल्लीताल के लगभग सभी मोहल्लों को जोड़ती है और न चाहकर भी उन बुज़ुर्गों को अस्पताल / दवाई वगैरह के लिये इस ख़ौफ़नाक सड़क पर चलना ही पड़ता है यक़ीन जानिये जब तक वे लोग इस सड़क को नहीं छोड़ देते तब तक उनके माथे पर फ़िक्र का पसीना बहता रहता है, जानवरों की बात करें तो उन सबने तो इसको ख़ूनी सड़क क़रार दे दिया है और भला ऐसा हो भी क्यों न उनके परिवारों के शेरू, टाइगर, ब्लैकी न जाने कितने सदस्य तेज़ रफ़्तार गाड़ियों की चपेट में अब तक आये हैं, शहर की बिल्लियोंं ने तो खुन्नस में कई खम्बे नोच दिए हैं, एक हम ही हैं जो इंसान कहलाते हैं और हमने ही कभी अपनी खुन्नस निकालने की कोशिश नहीं की, कभी इस वाहियात इंतज़ाम के लिये धरना / प्रदर्शन नहीं किया, घुट- घुट कर जीने को मजबूर हैं, दब- दब कर सिकुड़कर चलने के आदि हो गए हैं, और इसी तरह हम इन बदइंतज़ामों को गले लगाते रहे तो वो दिन दूर नहीं जब ये सिपहसालार ट्रैफ़िक मैनेज करने के नाम पर आपके / हमारे घरों के बीच से सड़क निकाल देंगे और आप चाय का कप हाथ में लेकर गाड़ी को निकलने का रास्ता देंगे और फिर अख़बार बिछाकर उसी सड़क पर बैठकर आराम से पकौड़े खाएंगे… तो तैयार रहिये ऐसे ही किसी लाजवाब ट्रैफ़िक कण्ट्रोल प्लांनिग के लिये जो बैडरूम से सीधा हाई- वे के नज़ारे दिखाएगा और हम ख़ुशी- ख़ुशी हर दबाव के लिये आदि हो जाएंगे !
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 140 : ‘6 से 8’ के चक्कर में कहीं ‘ऊपर’ ही न पहुंचा दे और खुद भी शहीद न हो जाये ऊपर वाली सड़क ! (3 मई 2019)
साहिबान, दिल को बहलाने को एक ख़बर मिली है कि शाम के वक़्त अपने वाहन से मल्ली से तल्ली जा सकेंगे लोग, वाह बेहद खूब, चलो ख़ुशी है इस बात कि हमारे शासन व प्रशासन में बैठे महानुभावों को यहां के लोगों का कुछ तो ख़याल आया, ख़याल आया लेकिन महज़ लोगों का अगर नैनीताल का ख़याल आया होता तो शायद ऐसा ख़याल नहीं आता, हमें यक़ीन है ,कि जिस सड़क को चार पहिया वाहनों के लिये खोलने की बात हो रही है क्या उस सड़क का भौगोलिक सर्वे किया ? नहीं ! क्या हमारे महानुभावों ने कभी उस सड़क पर खुद जाकर देखा कि उसमें कितने गड्ढे, कितने टल्ले या कितने अटपटे मोड़ हैं ? या ये जानने की कोशिश की कि वहां कितने स्थानीय बुज़ुर्ग लोग शाम की हवा खाने टहलने आते हैं ? छोटे- छोटे बच्चे अपनी मांओं का हाथ पकड़कर बाज़ार से डोरेमोन का पेंसिल बॉक्स खरीदने जाते हैं, जी हाँ इन सभी बातों पर हमें पूरा यक़ीन है कि किसी भी हस्ती के पास इतना सोचने का वक़्त नहीं है बस फैसले लेने का हक़ है, सब अपनी अपनी ज़िम्मेदारियों से हाथ झाड़ना जानते हैं कोई उन हाथों को नैनीताल के आंसू पोंछने के लिए इस्तेमाल करना नहीं जानता, ख़ैर, हमारे कहने या न कहने से क्या फ़र्क़ पड़ता है, साहब लोगों ने जो फैसला कर दिया वो पत्थर की लक़ीर समझा जाएगा, फिर चाहे नैनीताल की रूह दर्द से तड़प जाए, किसी को कोई परवाह नहीं, आप तो बस अपनी आरामदायक गाड़ियों के महंगे शॉकर से सड़कों के गड्ढे महसूस नहीं कर पाओगे लेकिन उस गड्ढे वाली सड़क के नीचे जो कमज़ोर परत है वो धीरे – धीरे खिसकती जाएगी और उसके आगे का तस्सवुर करना भी हमारे लिये मुमकिन नहीं ! न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 139 : ADB मतलब, ए डेंजरस ब्लंडर इन पाइपलाइन, घोटाला तो नई पाइप लाइन में है ! (1 मई 2019)
बुधवार को पानी आने के बाद पॉपुलर कंपाउंड में ADB की लाइन से हो रहे लीकेज के बाद छाता पकड़कर जाना पड़ा
साहिबान, बरसों पहले की बात है त्रिऋषि सरोवर नगरी में जल की कोई समस्या नहीं थी, क्योंकि आबादी बहुत कम थी लोगों का काम जल श्रोतों के ज़रिये ही चल जाया करता फिर धीरे- धीरे नगर की आबादी बढ़ने लगी लोग जगह – जगह अपने मकान बनाने लगे, अब हर जगह पानी के श्रोत हों ये ज़रूरी तो नहीं इसलिए उन लोगों को पानी की दिक्कत पेश आने लगी, इसी तरह की परेशानी से काफी लोग दो – चार होने लगे तब घऱ- घर पानी पहुंचाने का कार्य शुरू हुआ और धीरे – धीरे इस काम ने सरकार द्वारा गठित जल विभाग का रूप धारण किया पानी की नलों के ज़रिये सप्लाई अंग्रेज़ों ने ही शुरू की और बेहद बेहतरीके से पाइप का ताना- बाना बुना गया, अंग्रेज़ों के जाने के बाद हम भारतीयों ने इस विभाग को अपने क़ब्ज़े में ले लिया फिर जल की सप्लाई सुचारु हो गयी, सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था कि एक दिन अचानक नगरवासियों को मिनरल वाटर का झांसा देकर नार्मल वाटर की भी आबरू तार तार कर दी, न मिनरल वाटर आया न कुछ और ऊपर से जो नार्मल वाटर भी आता था उससे भी हाथ धो बैठे हालाँकि चुल्लू भर पानी के लिए भी उल्लू बनना पड़ रहा है फिर भी कोई बात नहीं, सबसे दिलचस्प बात ये है कि नगरी में शनिवार सनी घरों तक नहीं पहुंच रहा है, सब इसका ज़िम्मेदार सीधे तौर पर जल संस्थान को मान रहे हैं लेकिन उस छिपे हुए चोर का ज़िक्र कोई नहीं कर रहा है जिसकी वजह से आज झीलों की नगरी के वासी बूँद बूँद को तरस रहे हैं इसके पीछे मुख्य कारण है ए डी बी द्वारा बिछाई गयी लाइन जिसमें कितने करोड़ों का घोटाला हुआ है कुछ नहीं कहा जा सकता ? उक्त तथाकथित लाइन को नेपाल के कुशल इंजीनियर काम पर लगाये शटर में वेल्डिंग करने वालों से लाइन को जुड़वाया और मज़े की बात पूरी टीम का नेतृत्व किया था किसी शिक्षक ने, किसी क्लर्क ने और न जाने कितने ऐसे ही अलग अलग संस्थानों के लोगों ने मिलकर एक मुजैसिमा तैयार किया जिसे ए डी बी की लाइन के नाम से जाना जाता है,
ये लाइन इतनी शानदार मेटल में तैयार करवाई है कि उसमें वेल्डिंग नहीं किया जा सकता जो पुरानी लाइन थी वो लोहे की बनी होती थी जिस पर वेल्डिंग करना आसान होता था, इसलिये कहीं लाइन टूटने पर जल्दी जुड़ जाती थी आज की तरह अनिश्चितकालीन मामला नहीं होता, कितने करोड़ों की योजना का पलीता लगाया गया है और क्यों हम उसका जवाब चाहते हैं आखिर क्यों नहीं ए डी बी के ख़िलाफ़ जाँच बैठाई जा रही ? हम इस योजना की जाँच की मांग करते हैं |
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 138: ‘शिक्षा कर कार्यालय’ के तानाशाह का फ़रमान: अगर अफोर्ड नहीं कर सकते तो सरकारी स्कूल में डाल दो बच्चे..” (26 अप्रैल 2019)
जी हाँ, साहिबान, ये फ़रमान है हमारे शहर नैनीताल के एक मशहूर स्कूल (नाम तो आपने सुना ही होगा) की मुखिया का कि “अगर आप अफोर्ड नहीं कर सकते हो तो सरकारी स्कूल में डाल दो” इसके बाद वो जो कहना चाहती थी उसको पूरा करने में आइये हम उनकी मदद करते हैं :- अगर आप अफोर्ड नहीं कर सकते तो सरकारी स्कूल में डाल दो, क्योंकि हम नहीं सुधरेंगे, सरकारी स्कूल में डाल दो, क्योंकि कोई अभिभावक हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता, सरकारी स्कूल में डाल दो, क्योंकि हम तो यूँ ही लूटेंगे, सरकारी स्कूल में डाल दो, क्योंकि हमारा लालच कभी ख़त्म नहीं होगा, सरकारी स्कूल में डाल दो क्योंकि हम तो मुंह ज़ोर ही रहेंगे, सरकारी स्कूल में डाल दो, क्योंकि शिक्षा विभाग हम पर कोई कार्रवाई नहीं सकता… ऐसे ही न जाने कितने परमाणु बम मारक क्षमता रखने वाले ऊल- जलूल ख़यालों के साथ उन हिटलर का मन शांत होता है, आप समझ ही सकते हैं स्कूल वालों का मन जब शांत होता है तब एक अभिभावक के मन में सैलाब उमड़ रहा होता है, उसी सैलाब की ख़ामोशी को महसूस करते हुये हमने 02/04/2019 को अपर शिक्षा निदेशक महोदय को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें हमने स्कूल खुलते ही निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिये कार्रवाई की मांग की थी लेकिन बड़े शिकारी जब बड़ी मछलियों के रेहबर बन जाएँ तो छोटी मछलियों को अपने परिवार दांव पर लगाने पड़ते हैं, यही हाल हमारे शिक्षा तंत्र में हो रहा है कौन सा स्कूल कितनी फीस बढ़ाएगा, किस मद के लिए कितना शुल्क तय किया जाये किसी को कोई परवाह नहीं हर स्कूल अपने -अपने समंदर के हिसाब से तय कर लेता है कि किस मछली का शिकार कब और कितना करना है, ख़ैर, हमने अभिभावकों को बार -बार जागरूक करने की कोशिश की है कि कोई भी अभिभावक किसी भी स्कूल प्रशासन के दबाव में न आएं, हाँ हम ये भी जानते हैं कि एक अभिभावक की मजबूरी हो जाती है स्कूल की हर मांग मान लेना क्योंकि वे सब नहीं चाहते कि उनके बच्चे के साथ स्कूल प्रशासन नफ़रत से पेश आये, या उनकी ऊँची आवाज़ उनके बच्चे का भविष्य ख़ामोश कर दे, इसी बात का फ़ायदा स्कूल प्रशासन उठाता है और चला देता है, चाबुक अभिभावकों की इसी दुःखती रग पर…
आख़िर में, प्रधानमंत्री महोदय, मुख्यमंत्री महोदय, शिक्षा मंत्री महोदय, कुमाऊँ आयुक्त महोदय, ज़िलाधिकारी महोदय, अपर शिक्षा निदेशक महोदय, मुख्य शिक्षा अधिकारी महोदय, से तहे दिल से इल्तेजा है कि सूबे में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिये शुल्क नियामक अधिनियम को लागू कर सभी शिक्षण संस्थानों पर नकेल कसी जाये जिससे शिक्षा, शिक्षा ही रहे व्यापार न बने और नैनीताल के प्रकरण में जाँच कर उचित कार्रवाई करने की कृपा करें कि आख़िर क्यों इतनी शुल्क वृद्धि करके अभिभावकों को दबाव में लिया जा रहा है |
न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर
अंक 137: आज़ाद के तीर : पॉपुलर कंपाउंड में नल सूखे, सीवर झील में…(14 अप्रैल 2019)
कहीं पड़ा सूखा, कहीं जल की बर्बादी, कहीं सीवर जा रही झील में किसी ने कूड़ा फेंका नालों में हुज़ूर, ये कैसी आज़ादी ?
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं वो दरअसल तस्वीर नहीं है बल्कि सबूत हैं उस गुनाह के जो जाने- अनजाने पॉपुलर कम्पाउंड मल्लीताल नैनीताल के इलाक़े में हो रहा है लेकिन हममें से किसी की निगाह उस पर नहीं पड़ रही, जिन महकमों की ज़िम्मेदारी बनती है, वो अपना -अपना मतदान करके हर फ़िक्र से आज़ाद हो गये हैं या यूँ कहें सो गए हैं, उन्हें न ही मोबाइल की घंटी सुनाई देती है और न ही शहर की हालत दिखाई देती है, इसकी साड़ी मेरी साड़ी से सफ़ेद कैसे? ये लाइन तो आपने अक्सर सुनी होगी लेकिन ये कम्पटीशन की भावना सिर्फ़ महिलाओं में ही नहीं होती जनाब बल्कि सरकारी महकमों में भी होती है, इसकी बानगी आपने देखनी हो तो कभी पधारो म्हारे देस, जी हाँ, आप ज़्यादा दूर नहीं जाइये बस नैनीताल आइये, यहां किसी भी गली मोहल्ले के किसी भी कोने से शुरुआत कर दें, तो आप पाएंगे कि जगह -जगह सीवर लाइन लीक हो रही होगी, नालियों का गंदा पानी नालों में पहुंचने के लिये बेताब हो रहा होगा, जगह-जगह गंदगी के ढेर दिखाई देंगे, बेतरतीब रखे कूड़ेदान चीख -चीखकर ये ऐलान कर रहे होंगे कि हम तो ऐसे ही चौड़े होकर सड़क पर खड़े रहेंगे हमारा कोई कुछ नहीं सुधार सकता, नालों की क़िस्मत लोगों के घरों से निकले कूड़े से चमक रही होगी, कुल मिलाकर देखा जाये तो आप पाएंगे कि नाले साफ़ रहने चाहिये लेकिन वो कूड़ादान बने हैं, कूड़ादान जो साफ़ रहने चाहिये वो लबालब भर कर सड़क तक शैतान बने हुये हैं, सरकार ने ग़रीबों के लिये जो कभी सरकारी नल लगाये थे, वो सूखे खड़े हैं, और जिन नालियों में बारिश का पानी बहना चाहिये, वो सीवर की गंदगी लिये झील की तरफ़ सरपट दौड़ रही है, कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती अब किसी भी दफ्तर में कोई भी फरियाद लेकर जाओ, दफ़्तर के मुअज़्ज़िज़ लोग अपनी -अपनी सफ़ाई का पिटारा खोलकर बहानों के साँपों को हमारे गले में डाल देते हैं या कुछ सज्जन उन बहाना रूपी साँपों को दरवाज़े के नीचे से दूसरे दफ़्तर में छोड़ देते हैं और जब उस दफ़्तर में जाकर हालात देखो तो वही सांप किसी तीसरे दफ़्तर के दरवाज़े में सरका दिया जाता है, बस यही सांप – मदारी का खेल देखते – देखते जनता मायूसी के आख़िरी सिरे तक जाती है और जब कुछ हासिल होता नहीं दिखता तो वो वापस आ जाती है, घर में बैठकर यही ख्याल आता है, कितने साल, दिन – रात बदल गये लेकिन ये सरकारी महकमों में बैठे हुये लोग कब बदलेंगे, यही सवाल कायनात में गूंजता रह जाता है और एक आम आदमी सरकारी दफ्तरों में घूमता रह जाता है… आख़िर में, मा.प्रधानमंत्री महोदय, कुमाऊँ आयुक्त महोदय, ज़िलाधिकारी महोदय, अधिशासी अधिकारी महोदय जल संस्थान, नैनीताल अधिशासी अभियंता महोदय सिंचाई खंड, नैनीताल, अधिशासी अधिकारी / पालिकाध्यक्ष महोदय नगर पालिका नैनीताल, समस्त सभासद महोदय / महोदया आप सबसे तहे दिल से इल्तेजा है कि कभी पॉपुलर कम्पाउंड में जाकर देखें कि वहां की ग़रीब जनता किस हाल में रह रही है, यहां एक पुराना जनता नल हुआ करता था जिसमें पहले कभी पानी आता रहता था और आस पास के लोग उसमें से पानी भरकर गुज़ारा कर लेते थे लेकिन कई महीनों से वो नल सूखा पड़ा है, वो तो भला हो किसी खुराफाती इंसान का जिसने नल के नज़दीक नाले से गुजरने वाली पाइप लाइन को तोड़ दिया। अब सुबह-शाम जब भी पानी आता है वहां की ग़रीब जनता नाले में उतरकर अपनी जान को खतरे में डालकर उस पाइप लाइन से पानी भरती हैं और गुज़ारा करती है, वहीँ थोड़ी आगे सीवर लाइन फटने के कारण सीधे नाले में जा रही है। स्थानीय लोगों ने करीब 50 बार इसकी शिकायत भी कर दी है लेकिन किसी के कानों में जूं नहीं रेंग रही।
मेहरबानी करके सूखे नल में पानी सप्लाई करने, टूटी पाइप लाइन को जोड़कर पानी की बर्बादी रोकने और सीवर जो नाले में जा रही है उसे हटवाकर नैनी झील और नैनीताल के पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में मददगार बनकर एक मिसाल क़ायम करें …
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 136: चुनावी मेंढक और हम !(12 अप्रैल 2019)
मैं भी चौकीदार
साहिबान, चुनावी बरसात में कितने बरसाती मेंढक निकलते हैं, सबके सब हर आंगन में जाकर टर्र -टर्र करते हैं और ये टर्र – टर्र मतदान से दो दिन पहले शाम 5 बजे बंद हो जाती है, इस बरसात में टरटराने वाले सारे मेंढकों की आवाज़ एक जैसी लगती है, पहचानने के लिये हमने एक दिन इनमें से “सुरीला टरटराने” वाले मेंढकों को एक थाली में रखकर उनकी पहचान करनी चाही लेकिन ये क्या थाली में एक भी मेंढक नहीं टिका, सब एक के बाद एक फुदक कर थाली से बाहर निकल गये और हम उन्हें देखते रह गये, कि इतनी शिद्दत से हमारे दर पर टरटराने वाले मेंढक इज़्ज़त के साथ थाली में रखते ही उछल गये और किसी झाड़ी में जाकर छिप गये, अब तो टरटराने की आवाज़ भी नहीं आ रही, और हम समझ गये लगता है ये मेंढक अगली चुनावी बरसात में ही निकलकर आएंगे।
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 135 : एक अपील : किताबों को रद्दी न बनायें, यह करें… (8 अप्रैल 2019)
साहिबान, आप सबसे हमारी हाथ जोड़कर विनती है कि जिस तरह अमेरिका जैसे देश में शिक्षा सत्र के प्रारम्भ में बच्चों को किताबें दे दी जाती है जिससे वो अपनी पढ़ाई पूरी करते और दूसरी कक्षा में चले जाते हैं और फिर उन्हीं किताबों से उसके बाद वाले बच्चे पढ़ते हैं लेकिन हमारे देश में हर सत्र में नई किताबें बच्चों को खरीदने के लिये मजबूर किया जाता है, जैसे हर साल पाठ्यक्रम बदल जाता हो आख़िर क्यों हमारा शिक्षा विभाग इस तरफ़ ध्यान नहीं देता, वैसे तो हम पर्यावरण के बड़े चिंतक बने घूमते हैं और जब नई किताबों की बात आती है तो हम मौन धारण कर लेते हैं, आख़िर कहाँ जाता है हमारा पर्यावरण प्रेम, दूसरी तरफ़ हम गरीबी का रोना रोते हैं लेकिन हर साल पुरानी किताबों को रद्दी में बेचने में और नई -नई महंगी किताबें खरीदते हुये हम धन्नासेठ बन जाते हैं, आखिर क्यों हम इस कुप्रथा का अंत नहीं होने देते, आख़िर क्यों हम विरोध नहीं करते, क्यों हम न चाहते हुये भी लाखों पेड़ों के गुनहगार और लाखों दलालों के वफ़ादार न चाहते हुए हैं, आख़िर में, प्रधानमंत्री महोदय, मुख्यमंत्री महोदय, शिक्षा मंत्री महोदय, कुमाऊँ आयुक्त महोदय, जिलाधिकारी महोदय हमारी इल्तेजा है कि जितने भी निजी और सरकारी स्कूल हैं उनमें किताबों के वितरण की प्रणाली को एक दूसरे के काम आने वाली बनाकर लागू करवाया जाये जिससे सबसे पहले अनावश्यक पेड़ों का कटान कम होगा, अभिभावकों के सर से बोझ कम होगा और दलालों की दुकान बंद हो जाएगी, करके देखिये जनाब अच्छा लगेगा | न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 134 : जानें कहां फिर हुआ असर ‘नवीन समाचार’ व ‘आज़ाद मंच’ नैनीताल का (4 अप्रैल 2019)
शुक्रिया : प्रशासन नैनीताल का
साहिबान, हमने नवीन समाचार के स्तम्भ आज़ाद के तीर के 02/04/2019 के अंक में “सीज़न की धारदार तैयारियां शुरू” उन्वान के साथ नैनीताल शहर का हाल बयां किया था कि किस तरह यहां बड़ा बाज़ार को जाने वाले मेन गेट पर धारदार टीन निकला हुआ है जिससे कभी भी कोई हादसा हो सकता था, शासन -प्रशासन ने हमारी बात का संज्ञान लेते हुये उस पर तत्काल कार्रवाई की और उक्त तथाकथित टीन को वहां से हटाया गया जिसके लिये आज़ाद मंच परिवार शासन – प्रशासन का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता है और साथ ही ये भी उम्मीद करता है कि उक्त टीन के अलावा हमने जितने भी मौज़ू पर आपका ध्यान खींचने की कोशिश की गयी थी जैसे पार्किंग, उद्यान, साफ़ – सफ़ाई के इंतज़ामात, हमें उम्मीद के साथ पूरा यक़ीन है कि महज़ दो बेरी केडिंग व्यवस्था से ऊपर उठते हुए कोई बेहतर कार्य प्रणाली के साथ इस बार सीज़न व्यवस्था संभाली जाएगी, जिससे नगर हित के साथ – साथ पर्यटन हित भी बना रहे |
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 133 : नैनीताल में सीजन की ‘धारदार’ तैयारियां शुरू… जानें कैसे.. (2 अप्रैल 2019)
जी हां, सीज़न की ‘धारदार’ तैयारियां शुरू हो गई हैं ! इसके लिए नुकीले टीन मेन गेट पर लटका दिये गए हैं ! जगह- जगह से कूड़ेदान हटा दिये गये हैं ! पार्किंग व्यवस्था राम भरोसे छोड़ दी गयी है ! साहिबान, सरोवर नगरी में सीज़न ने दस्तक दे दी है, तो हमारे यहां के शासन – प्रशासन ने भी लापरवाही में मिसाल बीसतक दे दी है, हुज़ूर आप कहेंगे ये क्या बात हुई और हम बोलेंगे यही तो बात हुई जो बार बार मिन्नतें करने के बाद भी हर साल इतने सबक़ के बाद भी हमारा शासन -प्रशासन कोई सीख नहीं लेता, बस लेता है तो दो बेरी केडिंग लेता है एक हल्द्वानी रोड पर और एक कालाढूंगी रोड पर लगा देता है, और किसी भी वाहन को ऊपर नगर में आने नहीं देता, वाह भई वाह, ये तरकीब जिसने निकाली उसे लाखों तोपों की सलामी देने का मन करता है, बाई गॉड, साला सांप भी नहीं मरा और लाठी भी तोड़ दी, इसे कहते है टैलेंट, जब टूरिस्ट ही ऊपर को नहीं आएगा तो न ही ट्रैफिक होगा, न प्रदूषण होगा, न गंदगी होगी, सब कुछ शांत रहेगा, तो बस कुछ नहीं करना है, दो पुलिस वाले इस रोड से टूरिस्ट को उधर लताडेंगे, दो उधर से इधर, तो फिर वो जाएगा किसी और हिल स्टेशन, फ़िलहाल तो वो ये सोचकर रानीखेत- अल्मोड़ा का रुख ले लेगा के अब इतनी दूर आ ही गए तो क्या वापस जाएँ, ख़ैर, इससे नैनीताल के आस- पास के इलाकों की मांग बढ़ जाएगी बहुत ख़ुशी की बात है लेकिन आपने वो गाना तो सुना ही होगा जिसमें इन्हें पंछी कहा गया है कि “रात को ठहरे तो उड़ जाएँ दिन को, आज यहां कल वहां है ठिकाना” जी बस एक -दो बार तो नैनीताल के नाम पर टूरिस्ट कहीं और चला जाएगा लेकिन अगली बार हमारे प्रशासनिक बेहतरीन इंतज़ामात की वजह से अगली बार नैनीताल आने से पहले दस बार सोचेगा के अगर इस बार भी वहां हाउस फुल का बोर्ड लगा दिया फिर क्या होगा ? ख़ैर, उसके लिये घूमने की जगह कम नहीं है उत्तराखंड में ही ऋषिकेश, मसूरी, पिथौरागढ़, कौसानी, बागेश्वर, रानीखेत, अल्मोड़ा जैसे बेहद खूबसूरत पहाड़ी क्षेत्र हैं, जहाँ वो घूमने जा सकता है, फिर धीरे -धीरे सरोवर नगरी में वही टूरिस्ट आएंगे जो रोड़वेज़ की बस में ₹65 रूपये का किराया लगाकर आएगा, ₹10 में शेयरिंग रिक्शे में बैठेगा और एक चक्कर चाट मार्केट जाएगा, ₹50 की सोनम की चाऊमीन खाकर, ठंडी सड़क पर सेल्फी खींचता हुआ, वापस रोडवेज़ की बस में बैठकर ₹65 का टिकट खरीदकर घर वापस लौट जाएगा, न टैक्सी वालों को कोई पूछेगा, न किसी गाइड से कोई होटल पूछेगा, सब मस्त आराम से चैन की बंशी बजाएंगे, शहर की हालत पर क्या बोला जाये, पार्क, सड़कें, साफ़ – सफ़ाई और कूड़ेदान की व्यवस्था चीख – चीखकर अपने पैरों को देखकर आज भी रोती है … न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 132 : आ गया देश का पहला लोकपाल, ऐसी बदलेंगी व्यवस्थायें..(25 मार्च 2019)
देश के पहले लोकपाल न्यायमूर्ति पिनाकी घोष
भ्रष्टाचार का सीसीटीवी लोकपाल ! लोकपाल से जगी उम्मीदें ! देश को मिला पहला लोकपाल
साहिबान, ये बेहद ख़ुशी की बात है कि हमारे देश को जस्टिस पिनाकी घोष के रूप में पहला लोकपाल मिल गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की मौजूदगी में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने उन्हें शपथ दिलाई।
जस्टिस घोष के साथ न्यायिक सदस्यों के तौर पर जस् कुमार त्रिपाठी, जस्टिस अभिलाषा कुमारी, जस्टिस दिलीप बी.भोंसले और जस्टिस प्रदीप कुमार मोहंती को शामिल किया गया है। न्यायिक सदस्यों के साथ ही कमेटी में 4 और सदस्यों के तौर पर दिनेश कुमार जैन, अर्चना रामसुंदरम, महेंद्र सिंह और इंद्रजीत प्रसाद गौतम भी रहेंगे। जस्टिस पी. सी. घोष राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य रह चुके हैं। जस्टिस घोष को मानवाधिकार कानूनों के जानकार के तौर पर भी जाना जाता है। लोकपाल केंद्रीय सतर्कता आयोग के साथ मिलकर काम करेगा। लोकपाल सीबीआई समेत किसी भी जांच एजेंसी को आरोपों की जांच करने का आदेश दे सकेगा। इसके अलावा इसकी जांच के दायरे में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री सांसद और सभी तरह के कर्मचारी आएंगे ये और भी ख़ुशी की बात है, अब कोई नहीं बच सकता भ्रष्टाचार पर नकेल लगाने के लिये सीसीटीवी होना बेहद लाज़मी था, अब आम जनता को इससे काफ़ी उम्मीदें जागी हैं, और हम इस क़दम के लिये भारत सरकार का शुक्रिया अदा करते हैं, और उम्मीद करते हैं कि लोकपाल रूपी सीसीटीवी जिस मक़सद के साथ लागू किया है हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है वो 24 घंटे हर पल देश की नब्ज़ के हाल से रूबरू रहेंगे और किसी भी भ्रष्टाचार की शिकायत पर तत्काल एक्शन लेंगे, फिर चाहे उनके सामने कोई तुर्रम खां ही क्यों न हो, और साथ ही ये भी दुआ है कि हमारे लोकपाल रूपी सीसीटीवी में कभी शार्ट सर्किट न हो और न ही किसी जहां पनाह की तौलिया सुखाने के लिये सीसीटीवी पर डाली जाये, फिर असली मक़सद पूरा होने में कोई माई का लाल हो या काला, या गोरा कोई नहीं रोक सकता, अब भ्रष्टाचारियों की दाल नहीं गलने वाली नहीं |
अंक 131 : एक ‘करेला’ जो आज ‘नीम’ पर चढ़ गया…, बूझो कौन ? (24 मार्च 2019)
एक तो था ही कड़वा ऊपर से नीम पर चढ़ गया! अब कुछ पता नहीं, कब तक पेड़ पर से उतरेगा?
साहिबान, हमारे शहर में एक करेला था, आप ये मत कहियेगा जनाब कि करेला वो भी शहर में, ये क्या माजरा है, अरे हुज़ूर, माजरा कुछ नहीं है बस करेले की कहानी पर फोकस करिये तो फ़ायदा महसूस होगा, तो साहब वो करेला अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आता था इसलिए मशहूर भी था, जिसके मुंह भी लगता उसका मुंह कड़वा हो जाता, फिर चाहे शहर वाला हो या गांव वाला कोई भी उससे मुंहज़ोरी नहीं करना चाहता था, उसमें बस एक गुण था, वो मिलता हर जगह था, चाहे गिनती में एक हो या दो लेकिन मिल ज़रूर जाता था, इसलिए इसी ख़ूबी की वजह से गाँव- देहात के लोग तो उसे भगवान से कम नहीं मानते और ये बात किसी ने एक दिन करेले को बता दी, फिर क्या था ? भाव बढ़ गये तब से उसके, और इन्हीं भावों की वजह से करेले का सर सातवें आसमान पर रहता और पैर सातवीं ज़मीन पर, अगर उसका बस चलता तो आठवीं, नौवीं या दसवीं ज़मीन भी कम पड़ जाती उसके लिये, अब जिसके सर, पैर, दिमाग़ अपनी-अपनी जगह पर न हो वो भला कब तक ख़ैर मनाता, हो गयी एक दिन, टांय-टांय फिस्स, जिस गांव-देहात के लोग करेले को भगवान मानते उन लोगों को भी आईडिया आ गया कि करेले के नाम बड़े और दर्शन छोटे हैं, और उन्होंने अपने घरों से करेले की पुरानी से पुरानी बेलों को भी उतारना शुरू कर दिया, देखते ही देखते करेले की गुणवत्ता पर से लोगों का भरोसा उठने लगा, सब एक ही ज़ुबान में बस एक ही बात बोलने लगे, जब इस करेले की बेल *भगवान से न लगे* तो हम तो फिर भी इंसान ठैरे, और धीरे -धीरे करेले के चाहने वालों की गिनती कम होती चली गयी, फिर एक दिन तो ऐसा आया बाई गॉड, वो कहते हैं न ऊपर वाले की लाठी में आवाज़ नहीं होती, बस एक दिन पड़ गयी भगवान की बेआवाज़ लाठी और लग गयी करेले की फसल में आग, ऐसे में उन लोगों को उस आग में हाथ सेंकने का मौक़ा मिल गया जिन लोगों के मुंह का स्वाद करेले ने कड़वा किया था, देखते ही देखते सब कुछ जलकर खाक हो गया, हाँ करेला फिर भी बच गया क्योंकि करेला था बहुत शातिर, जैसे ही आग लगी वो अपने कुछ साथियों के साथ नीम के पेड़ पर चढ़ गया, फिर क्या था उसके चाहने वाले और न चाहने वाले सब यही कहने लगे कि देखते हैं, आग बुझने के बाद पहले जैसा कड़वा स्वाद अब कब तक आएगा ? वरना करेले की बला से, उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है, वो तो था ही कड़वा अब नीम पर चढ़ा है ही, सीधा सा फंडा है जिनको ज़्यादा ही कड़वा लगे वो बाज़ार जाओ और अपने आइडिया से कुछ मीठा खरीदकर खाओ और जिओ जी भरके |
अंक 130 : आज मजदूरों के दर्द पर (13 मार्च 2019)
ज़िम्मेदारी बनी मजबूरी !
मजबूरी बनी मज़दूरी !
न कोई न्यूनतम वेतन !
न कोई निश्चित काम के घंटे !
न कोई अवकाश !
न कोई त्यौहार !
न कोई पेंशन !
न कोई बीमा !
साहिबान, आज फिर हम बात करेंगे उसी मज़दूर तबक़े की जिसे इंसान तो कहा जाता है लेकिन उसके साथ इंसानों जैसा बर्ताव नहीं किया जाता, अक्सर आपने देखा होगा किसी दुकान में, किसी रेस्टौरेंट में, किसी छोटी सी फैक्टरी में या किसी घर में काम करते हुये नौकरों को, हालाँकि, बड़ी -बड़ी फैक्ट्री, कारखानों में तो फिर भी नियमों- उपनियमों का पालन हो जाता है, लेकिन जिस जगह की हम बात कर रहे हैं, वहां न कोई नियम होता है, न कोई पालन, वहां होती है फ़क़त काम करने वाले की मजबूरी और काम पर रखने वाले की तानाशाही, शहरों की इन दुकानों में, होटलों में कोई श्रम विभाग का अधिकारी झांकने तक नहीं जाता, कहीं – कहीं तो इन जगह पर काम करते हुए आपको छोटे -छोटे मासूम बच्चे जिनकी उम्र खेलने कूदने और पढाई करने की होती है वे बच्चे अपने मालिकों की सेवा करते दिख जाएंगे, इस सेवा के बदले उनके मालिकों की उनपर ये मेहरबानी होती है कि न तो उनकी कोई न्यूनतम मज़दूरी तय होती है, न उनको कोई उचित वेतन मिलता है, और न ही उनको कोई अवकाश दिया जाता है, 24 घंटे में से लगभग 16 घंटे काम ही काम, यहां तक कि उनके हिस्से से त्यौहारों की रौनक़ भी छीन ली जाती है, न ही काम के घंटे तय होते हैं, न दुर्घटना होने पर कोई बीमा या मदद मिलती है, मिलती है तो बस ज़िल्लत और रुस्वाई, छोटी सी ग़लती पर मालिक की गालियां और मार खा खाकर यहां काम करने वाले बच्चे कब जवान हो जाते हैं और एक ही जगह काम करते हुये ये कब बूढ़े हो जाते हैं, कुछ पता नहीं लगता, जब तक इनके हाथ पैर सही सलामत होते हैं इनको थोड़े बहुत पैसे मिलते रहते हैं लेकिन जैसे ही ये बीमार या किसी दुर्घटना में घायल हो जाते हैं वही धन्ना सेठ मालिक उन्हें पहचानने तक से इंकार कर देते हैं, उस वक़्त उस बेचारे ग़रीब पर क्या बीतती होगी जिसने बचपन से लेकर जवानी और बुढ़ापा तक उस ज़ालिम सेठ की सेवा में लगाया हो, ऐसी हालत में आखिरकार वो बेचारा या तो अपने घर लौट जाता है या यूँ ही दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर हो जाता है, ख़ैर, मज़दूरों के क्या अधिकार हैं, उनके बारे में जानते हैं :- मजदूरी के अधिकार
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम,1948 में विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए न्यूनतम मजदूरी की दरें तय की गयी हैं।
1- मजदूरी के बारे में अपने नजदीकी श्रम कार्यालय में से कोई भी व्यक्ति किसी भी वर्ग की न्यूनतम मजदूरी का पता कर सकता है ।
2- अगर नियोक्ता न्यूनतम मजदूरी से कम मजदूरी दे रहा है तो श्रम निरीक्षक के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं ।
3- अगर कर्मचारी न्यूनतम मजदूरी से कम रकम पर काम करने को तैयार हो जाए, तो भी नियोक्ता का यह कर्तव्य है कि वह उसे न्यूनतम मजदूरी दे।
मजदूरी का भुगतान
1-मजदूरी का भुगतान हमेशा नकद और पूरा होना चाहिए।
2-मजदूरी का भुगतान हर हालत में अगले महीने की दस तारीख तक कर दिया जाना चाहिए।
3-मजदूरी में कोई कटौती कानून के मुताबिक ही होनी चाहिए।
समान कार्य के लिए समान मजदूरी
समान वेतन अधिनियम, 1976 में एक ही तरीके के काम के लिए समान वेतन का प्रावधान है।
1-अगर कोई महिला अपने साथ काम करने वाले पुरुष जैसा ही काम करती है तो उसे पुरुष से कम वेतन नहीं दिया जा सकता है।
2-महिला (कानूनी पाबंदी वाली नौकरियों को छोड़कर) और पुरुष में नौकरी में भर्ती और सेवा शर्तों में कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा।
काम करने के निश्चित घंटे
1-किसी कर्मचारी से रोज नौ घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जाना चाहिए।
2- नौ घंटे से ज्यादा काम के लिए, अतिरिक्त मजदूरी दी जानी चाहिए।
3-कर्मचारी को सप्ताह में एक दिन वेतन-सहित अवकाश जरुर मिलनी चाहिए।
कर्मचारियों को मुआवजा
कामगार मुआवजा अधिनियम, 1923 के अंदर्गत कर्मचारियों को अनेक परिस्थितियों में मुआवजा पाने का अधिकार है।
1-कर्मचारी को ड्यूटी के दौरान किसी दुर्घटना में चोटिल होने पर मुआवजा पाने का अधिकार ।
2-काम पर आते या काम से घर जाते समय दुर्घटना होने पर भी कर्मचारी को मुआवजा पाने का अधिकार।
3-नियोक्ता का काम करने के दौरान दुर्घटना होने पर भी मुआवजा पाने का अधिकार ।
4-काम की प्रकृति की वजह से अगर कर्मचारी को कोई बीमारी लगती है तो कर्मचारी को मुआवजा पाने का अधिकार है।
5-लेकिन अगर बीमारी काम छोड़ने के दो साल बाद लगती है तो कर्मचारी को मुआवजे का अधिकार नहीं है।
6-अगर दुर्घटना या बीमारी से कर्मचारी की मौत हो जाती है तो उसके आश्रित संबंधी को मुआवजा दिया जायेगा।
मुआवजे का हकदार
1-फैक्ट्रियां, खानें, रेलवे , डाक, तार, निर्माण, इमारतों का रख-रखाव,
2-किसी इमारत में इस्तेमाल , परिवहन तथा बिक्री के लिए सामान रखना, जहां 20 से ज्यादा कर्मचारी हों।
3-टैक्टर अथवा अन्य मशीनों से खेती-बाड़ी, इसमें मुर्गी फार्म, डेयरी फार्म आदि शामिल हैं।
4-बिजली की फिटिंग के रख-रखाव का काम।
किस चोट पर मुआवजा
1-ऐसी चोट जिससे मौत हो जाए, शऱीर का कोई अंग कट जाए या आंख की रोशनी चली जाय आदि।
2-चोट की वजह से लकवा या अंग-भंग जैसी हालत हो जाए, जिसकी वजह से व्यक्ति रोजी-रोटी कमाने लायक नहीं रहे।
3-ऐसी चोट जिसकी वजह से कर्मचारी कम से कम तीन दिन तक काम करने के लायक ना रहे।
किस चोट पर मुआवजा नहीं
1-शराब पीने या नशीली चीजों के सेवन से दुर्घटना हुई हो।
2-कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए बने किसी नियम या निर्देश का जान-बूझकर उल्लंघन करने से हुई दुर्घटना।
3-कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध उपकरणों का जानबूझकर इस्तेमाल नहीं करने से हुई दुर्घटना।
मुआवजे लिए प्रमाण
1-कर्मचारी को सबसे पहले अपनी मेडिकल जांच करा लेनी चाहिए। जांच की रिपोर्ट की कॉपी अपने पास रखें।
2-कर्मचारी दुर्घटना की रिपोर्ट नजदीकी थाने में लिखवा देना चाहिए । रिपोर्ट में चोट का पूरा ब्योरा होना चाहिए।
3-दुर्घटना के चश्मदीद गवाह होने चाहिए।
महिला कर्मचारियों को विशेष अधिकार
1-फैक्ट्रियों में महिलाओं के लिए अलग प्रसाधन कक्ष होना चाहिए।
2-अगर किसी फैक्ट्री में 30 से ज्यादा महिला कर्मचारी हों तो वहां बच्चों के लिए शिशुगृह की व्यवस्था होनी चाहिए।
3-फैक्ट्री में काम सवेरे 6 बजे से शाम 7 बजे के बीच होना चाहिए।
4-मशीन में तेल डालने या साफ कराने का काम नहीं कराया जाना चाहिए।
5-एक सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जाना चाहिए।
6-लगातार 5 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जाना चाहिए।
7-खानों में जमीन के नीचे काम करने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए |
मुआवजे का दावा
1-दुर्घटना होने पर सबसे पहले नियोक्ता को नोटिस दें, नोटिस में कर्मचारी का नाम, चोट के कारण , तारीख और स्थान लिखें।
2-अगर नियोक्ता मुआवजा नहीं देता या पर्याप्त मुआवजा नहीं देता है तो कर्मचारी लेबर कमिश्नर को आवेदन दे।
3-आवेदन में कर्मचारी का पेशा, चोट की प्रकृति, चोट की तारीख, स्थान , नियोक्ता का नाम, पता नियोक्ता को नोटिस देने की तिथि, अगर नियोक्ता को नोटिस नहीं भेजा हो तो नोटिस नहीं भेजने का कारण का उल्लेख करें ।
3-यह आवेदन दुर्घटना होने के 2 साल के अंदर दे दिया जाना चाहिए। विशेष हालात में 2 साल के बाद भी आवेदन किया जा सकता है।
4-कुछ मामलों में मुआवजा श्रम आयुक्त के जरिये ही दिया जा सकता है। जैसे, कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में, उसके संबंधियों को श्रम आयुक्त के माध्यम से ही मुआवजा दिया जा सकता है।
महिलाओं का मातृत्व लाभ
मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 में महिला कर्मचारियों के लिए कुछ विशेष लाभ दिए गए हैं।
1-प्रसव के पहले और बाद में छह-छह सप्ताह का पूरे वेतन का अवकाश( 12 सप्ताह का अवकाश प्रसव के बाद भी लिया जा सकता है, इस अवधि का वेतन दे दिया जाना चाहिए)
2-गर्भस्राव हो जाने पर छह सप्ताह का अवकाश।
3-गर्भावस्था, प्रसव या गर्भस्राव की वजह से अस्वस्थ हो जाने पर वेतन सहित एक महीने का अतिरिक्त अवकाश।
4-अगर नियोक्ता के संस्थान में प्रसव से पहले तथा प्रसव के बाद की चिकित्सा सुविधाएं नहीं हैं तो चिकित्सा बोनस दिया जाना चाहिए।
5-शिशु के 15 महीने का होने तक रोजाना काम के बीच सामान्य अवकाश के अलावा, शिशु को स्तनपान कराने के लिए दो बार ब्रेक दिया जाना चाहिए।
6-गर्भावस्था के अंतिम महीने में महिला कर्मचारी से भारी काम नहीं कराया जाना चाहिए।
7-अगर महिला की प्रसव के बाद मौत हो जाती है तो नियोक्ता को उसके परिवार को 6 सप्ताह का वेतन देना होगा।
8-जबकि नवजात शिशु की मौत हो जाने पर , शिशु की मृत्यु हो जाने तक की अवधि तक का ही वेतन देना होगा।
9-जिस महिला ने प्रसव से पहले, पिछले 12 महीनों में कम से कम 80 दिन नियोक्ता के संस्थान में काम किया है, वहीं महिला इन लाभों को पाने की अधिकारी है।
गर्भावस्था का नोटिस
1-महिला कर्मचारी को प्रसव की संभावित तिथि, छुट्टी लेने की संभावित तिथि और प्रसव के दौरान किसी दूसरी जगह नहीं करने के विवरणों के साथ गर्भावस्था का नोटिस देना चाहिए।
2-यह नोटिस प्रसव के बाद भी दिया जा सकता है।
3-अगर किसी महिला ने गर्भावस्था का नोटिस नहीं या है तो इस आधार पर नियोक्ता उसे मातृत्व से जुड़े लाभ और सुविधाएं देने से मना नहीं कर सकता है।
शिकायतों का निपटारा
1-अगर नियोक्ता कर्मचारी को उसके लाभ नहीं देता है तो वह श्रम कार्यालय अथवा श्रम आयुक्त के पास शिकायत कर सकता है।
2-500 से ज्यादा कर्मचारियों वाली फैक्ट्री तथा खान में और 300 से ज्यादा कर्मचारियों वाले बागान में कल्याण अधिकारी की नियुक्ति अनिवार्य है।
3-केंद्र सरकार के अनेक कार्यालय, अस्पताल तथा अन्य कल्याण अधिकारी नियुक्त करते हैं। जहां कर्मचारी शिकायत कर सकते हैं।
आख़िर में, हमारा सरकार व प्रशासन से यही सवाल है कि इतने नियम अधिनियम बनाने के बावजूद भी अगर हमारे देश में मज़दूरों, कामगारों, कर्मचारियों आदि की हालत में सुधार नहीं आता तो क्या महज़ फाइल भरने के लिये ही बनाये गये हैं उपरोक्त नियम / अधिनयम ? जब तक हमारे समाज से धन्ना सेठों की तानाशाही खत्म नहीं हो जाती तब तक हमारे समाज के मासूम बच्चों और ऐसे ही न जाने कितने निजी कर्मचारी शोषण का शिकार होते रहेंगे और ये तानाशाही तब ही खत्म होगी जब सरकार और प्रशासन में बैठे हुये लोग जागेंगे और जागकर उक्त नियमों व उप नियमों का पालन करवाएंगे, फिर बनेगा हमारा उदयमान भारत, खुशहाल भारत |
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 129 : आज पलायन के दर्द पर (12 मार्च 2019)
एक सफ़र : मजबूरी से मज़दूरी तक ! आज़ादी से ग़ुलामी तक ! बेरोज़गारी से बीमारी तक !
साहिबान, एक अर्सा पहले की बात है, सर्दी अपनी उम्र की ढलान पर मौसम से अपना रौब खो रही थी, गर्मी नवजात शिशु की तरह हर दिल को भा रही थी, बस ऐसे ही किसी सुनहरी सुबह को मेरा दोस्त अपने पहाड़ी पुस्तैनी गांव में अपनी माँ से उस कच्चे गोबर वाले घर में माँ को छोड़कर शहर जाने की बात करने लगा, उसने गांव के ही किसी लड़के से शहर के ठाट -बाट की बात सुनी थी, बस तभी से उसका मन शहर की चकाचौंध को अपना हमदर्द समझ रहा था, बच्चे चाहे कितनी ही चिकनी चुपड़ी बातों से माँ को बेहलाने की कोशिश करें माँ समझ तो जाती है लेकिन अपने मासूम बच्चे की आँखों में जो उम्मीदों की चमक वो देखती है बस वही देखकर ख़ामोश रह जाती है और जब नए परिन्दें उड़ने के लिये अपने पंख फड़फड़ाते हैं तो अपने बच्चों को दर्द में देखकर परिंदों की माँ को भी दर्द होता है लेकिन ख़ुशी इस बात की ज़्यादा होती है कि आज से मेरा बच्चा आसमान में अपनी परवाज़ खुद भरेगा, हर तूफ़ान का सामना खुद करेगा, उस वक़्त माँ बच्चे को हौसला देती है और वही हौसला, मेरे दोस्त को शहर ले आया, जो पहाड़ी पर ही बसा हुआ था, जहां बारह महीने सैलानी घूमने आते, इस लिहाज़ से वहां होटल, रेस्टौरेंट, दुकाने बहुत ज़्यादा थी, जिस दोस्त ने मेरे दोस्त की आँखों में सपने भरे थे, उसी ने अपने बदले एक दुकान में उसे बतौर नौकर रखवा दिया और ख़ुद को मक्खन में से छुरी की तरह अलग करता हुआ, न जाने कहाँ ग़ायब हो गया, ख़ैर, जो चला गया उसका भगवान भला करे उसके लिये दुआ की और खुद लग गया मालिक की सेवा में, उसने दुकान को सुबह ठीक नौ बजे खोलना शुरू कर दिया, दोपहर में अपने मालिक का खाना उसके घर से लाकर देना और पिछली रात का बचा हुआ खाना खुद खाकर दुकान पर वापस काम पर लग जाना, रात को 11 बजे तक दुकान बंद करके मालिक के घर दिन का बचा खाना खाना और गोदाम में जाकर चुपचाप सो जाना, बस यही दिनचर्या में कब दिन, महीने, साल बीत गये पता नहीं चला, क्यूंकि उसमें सहने की ताक़त हर ज़ुल्म से ज़्यादा बड़ी थी, त्यौहार भी नौकरी की भेंट चढ़ते चले गये, हाँ उसे तसल्ली इस बात की रहती कि गांव जाने वाली केमू की बस में अपनी माँ को वो हर महीने पैसे टाइम से भिजवा देता, जैसे तैसे सबकुछ ठीक चल रहा था कि एक दिन एक तेज़ रफ़्तार गाड़ी ने उसे टक्कर मार दी और वो बेहोश हो गया, जब उसे होश आया तो सरकारी अस्पताल में था और उसके पैर पर प्लास्टर, सर पर पट्टी और हाथ से ख़ून की बोतल चढ़ रही थी, वो घबरा गया और आसपास देखा, वहां मरीज़ों के अलावा कोई नहीं, फिर एक नर्स आयी उसने बताया आपका एक्सीडेंट हो गया था, गाड़ी वाला भाग गया और आपको कुछ लोग यहां लेकर आये, घर का नंबर दे दो, हम आपके घर वालों को बता देते हैं, माँ को परेशान नहीं करना चाहता सोचकर उसने कोई जवाब नहीं दिया और जब पैर का प्लास्टर खुला तो वो अपने मालिक के पास पहुंचा जहाँ उसके जैसा कोई गांव का दूसरा लड़का काम पर लग गया था, उसने मालिक को सलाम किया लेकिन मालिक ने उसे ग़ैरों सी नज़रों से देखा और कोई तवज्जो नहीं दी, कुछ देर वो उसका चेहरा देखता रहा लेकिन मालिक अपने नोटों की गड्डियां गिनने में इतना मसरूफ़ था कि वो मासूम लड़का कब उसकी आँखों से ओछिल हो गया कुछ पता नहीं चला, शायद मालिक चाहता भी यही था, गांव की गाड़ी में बैठकर वो वापस गांव की पगडंडियों पर लड़खड़ाता हुआ अपने गोबर से बने कच्चे घर के सामने खड़ा होकर सोचता है कि जब वो अपने घर से निकला था तब उसके पास उम्मीदें, उमंगें, जोश और जुनून था लेकिन आज न सेहत है, न पैसा, न कोई ख़्वाब, साथ है तो बस ईमानदारी, लगन और मेहनत जिसके दम पर वो अपनी माँ की दुआओं से फिर सेहतमंद हुआ और अपने पुश्तैनी खेत में खेती करने लगा, आज ऊपर वाले ने अपनी मेहर उस पर बरसा रखी है, गोबर का घर पक्का दो मंज़िला बन गया, शादी हो गयी, उसकी माँ अपने पोते को बड़े नाज़ से खिलाती है भरा पूरा परिवार हंसी ख़ुशी अपनी ज़िंदगी अपने गांव में बिता रहा है।
“पलायन का अंत करें अपना गांव रोशन करें”
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर..
अंक 129 : महिलाओ सहना छोड़ो-कहना सीखो… (8 मार्च 2019)
ज़िंदगी तो है अमल सब्र के क़ाबू में नहीं, नब्ज़ का गर्म लहू, ठन्डे से आंसू में नहीं, उड़ने खुलने में है ख़ुश्बू, ख़में गेसू में नहीं, जन्नत एक और है, जो मर्द के पहलू में नहीं, उसकी आज़ाद रविश पर ही मचलना है तुझे, जिस मैं जलता हूँ, उसी आग में जलना है तुझे, क़द्र अब तक तेरी तारीख़ ने जानी ही नहीं, रोशनी भी तेरी आँखों में पानी ही नहीं, हार तूने कभी तक़दीर से मानी ही नहीं, हर अदा तेरी क़यामत है जवानी ही नहीं, अपनी तारीख़ का उन्वान बदलना है तुझे, उठ मेरी जान, मेरे साथ ही चलना है तुझे।।।
साहिबान, कैफ़ी आज़मी साहब की नज़्म के साथ आज अपनी बात आपके सामने पेश करने की हिम्मत कर रहा हूँ, 08 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है, बेशक़ मनाना भी चाहिये। लेकिन क्या सिर्फ़ एक दिन हम महिला सम्मान, महिला सम्मान की झूठी दलीलें पेश करके नहीं रह जाते, फिर उसके अगले दिन से ही जैसे अक्सर होता आया है, सब नॉर्मल हो जाता है, लोग उसी ढर्रे पर चलने लगते हैं, बाज़ार, गली, मोहल्लों में हर चौराहे पर भूखे भेड़ियों की तरह औरत ज़ात को लार टपकाते देखने लगते हैं, यहां हम हर मर्द ज़ात को गुनाहगार साबित नहीं कर रहे बल्कि हमीं में से छिपे हुये कुछ हैवान होते हैं, जो मासूम बच्चियों तक को अपनी हवस का शिकार बना लेते हैं, उनकी नज़र में औरत ज़ात के मायने महज़ भोग विलास की वस्तु है, हमारा समाज जब तक इन गिद्धों से निजात नहीं पा लेगा तब तक हमें महिला सम्मान, महिला सम्मान चीख – चीखकर दिखावा करने की ज़रूरत नहीं है, औरत ज़ात किसी सम्मान की मोहताज नहीं है, अरे जनाब, हमें तो अपने देश में हुये निर्भया कांड से भी सीख नहीं मिली, उसके बाद भी न जाने कितनी निर्भया हैवानों की हैवानियत का शिकार हुईं, जब तक हम अपनी सोच को बड़ा नहीं कर लेते हमें कोई हक़ नहीं, महिला दिवस पर सफ़ेद कुर्ता पहनकर बड़ी बड़ी बातें करने की, ऑफिस का माहौल या कॉलेज का सब जगह छोटी सोच वाले ठरकी क़िस्म के लोग मिल ही जाएंगे, ख़ैर, हमें ख़ुशी इस बात की है कि आज इतनी सुलगती फ़िज़ा में भी कुछ दिल को ठंडक देने वाली हिम्मती लड़कियां आगे आ रही हैं जो और लड़कियों को अपना हक़ मांगना नहीं छीनना सीखा रही हैं, जो बुलेट पर घूमती हैं, लड़कों के जैसे कपड़े भी पहनती हैं और कभी -कभी तो सिगरेट के कश भी मार लेती हैं, कुल मिलाकर इन परवाज़ भरने वाली लड़कियों को एक तब्क़ा भले ही उनके पीठ पीछे कुछ भी कहता फिरे, लेकिन जिन हैवानों ने धरती पर ही नरक बना दिया है, उन हरामखोरों का मुंह तोडना भी ये दिलेर लड़कियां जानती हैं, इसलिये बाक़ी सीधी -सादी लड़कियों चलना नहीं उड़ना सीखो, बाइक पर चलने वाली इन लड़कियों से थोड़ा टशन किराये पर ले लो और फिर देखना कोई भी बुरी नीयत वाला पास आना तो बहुत दूर तुम्हारी तरफ़ आँख उठाकर नहीं देखेगा, इसलिये सहना छोड़ो, कहना शुरू करो तभी हम असल मायनों में एक नया भारत देखेंगे, जब लड़की को कमज़ोर नहीं समझा जाएगा, उसे भी हर जगह उसी अनुपात में इज़्ज़त मिलेगी जितनी किसी मर्द को मिलती है, पैर से मोच निकालो और दिमाग़ से छोटी सोच निकालो, फिर अगले साल देखना असली वाला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस जब एक भी बलात्कार की घटना हमारे देश या विश्व में नहीं होगी, और हमारे समाज की लड़कियां निडर होकर तितली बनकर उड़ रही होंगी वो होगा हर महिला के लिये असली सम्मान, सच्चा सम्मान | आइये एक नये युग की शुरुआत करें, आग़ाज़ करें।
अंक 128 :’शत्रु की संपत्ति’ के आखिर कौन हैं ‘शत्रु’ ? (7 मार्च 2019)
आकाश से गिरी बिजली ! दुश्मन न करे दोस्त ने वो काम किया है !
साहिबान, हमारे शहर में एक बेहद पुरानी इमारत मौजूद है, जिसे दुश्मन की मिल्कियत कहा जाता है, उसका कुछ हिस्सा फिर से जलकर खाक हो गया, सुना है उस बारे में ज़िले के मुखिया ने जाँच के हुक़्म दिये हैं, ख़ैर, हमारे मन मंदिर में तो आज तक किसी जाँच ने कोई घंटी नहीं बजाई हों, फिर ज़्यादा दूर ही क्या जाना 20 रुपये का रिक्शा करो और पहुंच जाओ वहीं जहाँ हमारे ज़िले के मुअज़्ज़िज़ लोग बैठते हैं, कुछ साल पहले भी आग लगी थी, तब भी तत्कालीन साहब ने इसी टाइप वाली जाँच के आदेश दिये थे। वो जाँच कहाँ तक पहुंची कोई कंडक्टर बताएगा या उस ड्राइवर से पूछें जिस गाड़ी में जाँच आ रही है। हो सकता है वो हमारी तरह पैदल ही हो शायद इसलिये कहीं टाइम से नहीं पहुंच पा रही। वाह भई, हम तो आज तक उसी चौखट पर पलकें बिछाये बैठे हैं कि क्या पता कहीं से कोई जाँच पायल छनकाती हुई जीवन में आ जाये। सुबह से शाम दिन रात सब गुज़र गये लेकिन कोई उम्मीद लेकर नहीं आया। अब तो ये जांचें भी बेवफ़ा साबित होती जा रही हैं…। ख़ैर, जाँच में स्टेमिना तगड़ा होता है लम्बी चलती हैं। हमें तो ख़ुफ़िया बात ये भी पता लगी है कि दुश्मन मुल्क़ के पहले मुखिया इस दुश्मन जायदाद में जब ये शानदार होटल हुआ करता था आये भी थे। कुछ लोगों की मनहूसियत ऐसी शदीद तरीन होती है कि हज़ार उल्लुओं की मनहूसियत भी कम पड़ जाये। शानदार इमारत का उजड़ना लाज़िमी था, ख़ुदा का शुक्र है हमारे मुल्क़ को ऐसी मनहूसियत से तो निजात मिली…। ख़ैर आख़िर में, हमारा शासन – प्रशासन से एक छोटा सा सवाल है कि क्या शत्रु सम्पत्ति का मतलब ये है कि उसमें शराबियों, नशेड़ियों, जुआरियों का अड्डा बनाने की आज़ादी दे दी जाये ? क्या शत्रु सम्पत्ति का मतलब ये है कि उसमें पार्किंग बनाकर पैसा कमाया जाये ? क्या शत्रु सम्पत्ति का मतलब ये है कि कोई भी आगज़नी करके चले जाये और हम उसका ठीकरा या तो आकाश पर फोड़ें या जाँच का शिगूफा छोड़कर ज़िम्मेदारी से हाथ झाड़ लें ? जनता ख़ामोश हैं, लेकिन सब देख रही है…।
आख़िर क्या है नया शत्रु संपत्ति क़ानून ? आइये जानते हैं :- 1962 (चीन के साथ) , 1965 और 1971 (पाकिस्तान के साथ) के युद्ध के बाद भारत से जाने वाले वारिस अब भारतीय संसद के बाद 1968 के कानून में दुश्मन संपत्तियों पर स्वामित्व का दावा करने में समर्थ नहीं होंगे, देश में दुश्मन संपत्तियों को शासित कर रहे हैं । 14 मार्च को लोकसभा के बाद शहीजा संपत्ति (संशोधन और मान्यन) विधेयक, को संसद ने मंजूरी दे दी थी, जिसमें आवाज़ वोट के ज़रिए विधेयक पारित किया गया था। संशोधन विधेयक को राज्यसभा से पहले ही मंज़ूरी मिल गई है। कानून का उद्भव विश्व युद्ध -2 की शुरुआत में, भारतीय कानून रक्षा अधिनियम, 1939 को भारत सरकार के नियम, 1939 को लागू करने के लिए अधिनियमित किया गया था। नियमों के तहत, भारत, मुंबई, अधिकारियों द्वारा बनाई गई एक कार्यालय के लिए दुश्मन संपत्ति का संरक्षक, शांति बहाल होने तक दुश्मन संपत्तियों को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। हालांकि, भारत के लिए दुश्मन संपत्ति के संरक्षक का कार्यालय 1945 में युद्ध समाप्त होने के बावजूद इन गुणों का प्रशासन रखता था। 1962 में भारत के साथ चीन के युद्ध के बाद, और 1965 और 1971 में पाकिस्तान के साथ दो युद्धों के बाद, कार्यालय ने दुश्मन संपत्तियों का अधिग्रहण किया भारत के रक्षा के नियम 1968 में, भारत सरकार ने एनी प्रॉपर्टी अधिनियम बनाया, जिसमें यह निर्धारित किया गया कि सभी दुश्मन संपत्ति को संरक्षक के नियंत्रण में जारी रहेगी। हाल ही में पारित विधेयक इस 50 वर्षीय विधेयक के कुछ प्रावधानों में संशोधन करता है अब क्या बदलाव है? पुराने कानून में संशोधन करने के लिए यह राशि होगी: जैसा कि विधेयक पूर्वव्यापी प्रभाव में आता है (7 जनवरी 2016, जब अध्यादेश को पहले प्रख्यापित किया गया था) , उस समय से पहले हुई कोई भी दुश्मन संपत्ति हस्तांतरण और प्रावधानों का विरोध नए कानून का शून्य और शून्य हो जाएगा दूसरी ओर, कानून के कई प्रावधान 1968 से पूर्वव्यापी रूप से लागू होंगे, जब शत्रु संपत्ति अधिनियम अधिनियमित किया गया था। पुराने कानून के मुताबिक, दुश्मन की परिभाषाएं देश के रूप में शामिल हैं, जिनमें उनके नागरिक शामिल हैं, जो कि भारत के विरुद्ध बाहरी आक्रमण नई परिभाषा में दुश्मनों के कानूनी उत्तराधिकारियों को भी शामिल किया गया है भले ही वे भारत के नागरिक हैं या किसी अन्य देश और एक दुश्मन देश के नागरिक हैं, जिन्होंने अपनी राष्ट्रीयता बदल दी सिविल न्यायालयों को दुश्मन संपत्तियों के खिलाफ मामलों को सुनने के लिए अधिकृत नहीं किया जाएगा। संरक्षक के मामलों में हस्तक्षेप करने का उनका कोई भी कानूनी अधिकार नहीं होगा। केंद्र सरकार ने मालिक या किसी अन्य व्यक्ति को दुश्मन संपत्ति के हस्तांतरण के लिए संरक्षक का आदेश दे सकता था। अब, एक दुश्मन संपत्ति को स्वामी को वापस लौटाया जा सकता है, जब केंद्र सरकार ने यह घोषणा करने के बाद मंजूरी दे दी कि यह संपत्ति दुश्मन संपत्ति नहीं है। 1968 के कानून ने दुश्मन द्वारा दुश्मन की संपत्ति के हस्तांतरण पर रोक लगा दी, अगर यह सार्वजनिक हित के खिलाफ था या अगर वह संपत्ति के हस्तांतरण से संरक्षक को हस्तांतरण से बचने के लिए किया गया था। नया कानून एक दुश्मन द्वारा सभी स्थानान्तरण को प्रतिबंधित करता है संशोधित कानून का कहना है कि दुश्मन संपत्तियों को संरक्षक के साथ निहित रहना होगा, यहां तक कि दुश्मनों की मृत्यु के बाद भी; यहां तक कि अगर कानूनी उत्तराधिकारी एक भारतीय है; और यहां तक कि अगर दुश्मन अपनी राष्ट्रीयता बदलता है उत्तराधिकार के अधिकारों को नियंत्रित करने वाले कोई भारतीय कानून दुश्मन संपत्तियों पर लागू नहीं होंगे। संशोधित कानून के तहत, ऐसे अधिकारों में सभी अधिकार, शीर्षक और हितों संरक्षक के साथ झूठ होंगी। पुराने कानून के तहत, संरक्षक केवल “संपत्ति के संरक्षण के हित में” या “भारत में दुश्मन या उसके परिवार के रखरखाव को सुरक्षित रखने के लिए” दुश्मन संपत्ति बेच सकता है। अब, कस्टोडियन केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद दुश्मन संपत्ति का निपटान कर सकता है इससे पहले, संरक्षक को दुश्मन और उसके परिवार को बनाए रखना चाहिए था अगर वे संपत्ति से प्राप्त आय से भारत में हैं। कस्टोडियन अब दुश्मन और उसके परिवार के लिए उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार नहीं होगा। कई घोषणाएं 7 जनवरी, 2016 से शुरू होने वाले पांच बार के लिए अध्यादेश का विमोचन किया गया और पुन: प्रख्यापित किया गया। अध्यादेश 28 मई को तीसरी बार 31 मई को दूसरी बार 2 अप्रैल को दोबारा शुरू किया गया था। चौथी बार और पांचवें समय के लिए 22 दिसंबर को। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 123 के अनुसार, संसद के पुनर्मिलन के छह सप्ताह बाद एक अध्यादेश समाप्त हो जाता है यदि इसे किसी अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है या दोनों सदनों द्वारा अस्वीकृत किया जाता है 2010 में, यूपीए सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए एक अध्यादेश भी जारी किया है कि दुश्मन संपत्तियों को संरक्षक के नियंत्रण में रखा गया। हालांकि, उस वर्ष सितंबर में उस अध्यादेश समाप्त हो गया था। उस संबंध में एक विधेयक पारित करने के लिए तत्कालीन सरकार के प्रयासों में भी फल नहीं था। 1971 में ताशकंद घोषणापत्र के प्रावधानों के बारे में पता करने की आवश्यकता है, पाकिस्तान को 1971 में सभी दुश्मन संपत्तियों का निपटान किया गया था। भारत और पाकिस्तान ने 1965 युद्ध के बाद घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे और प्रत्येक पक्ष के नियंत्रण में दुश्मन संपत्तियों की वापसी की संभावनाओं पर चर्चा करने का निर्णय लिया था। कथित तौर पर, भारत भर में 16,000 से अधिक दुश्मन संपत्तियां हैं, लाखों करोड़ की कीमतें। पहचान प्रक्रिया अभी भी चल रही है। इसका मतलब यह है कि भविष्य में दुश्मन संपत्तियों की संख्या बढ़ सकती है |
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 127 : साक्षात्कार निजी व सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था पर (भाग-2)(5 मार्च 2019)
कमलेश कुमार गुप्ता अपर शिक्षा निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) व मुख्य शिक्षा अधिकारी, नैनीताल
संक्षिप्त परिचय :- बुंदेलखंड हमीरपुर के किसान / वार्त्तिक परिवार में जन्मे कमलेश कुमार की प्रारम्भिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से हुई। उसके बाद आपने स्नातक व स्नातकोत्तर बुंदेलखंड विवि से किया। आपकी प्रथम नियुक्ति मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग में व्याख्याता के पद पर हुई। नौकरी के दौरान ही आपने कड़ी मेहनत से उ.प्र.लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा सन् 1997 में उत्तीर्ण कर तत्कालीन उत्तर प्रदेश में रुद्रप्रयाग जिले के गणेशनगर के स्कूल में प्रधानाचार्य के पद को सुशोभित किया। SCERT गठित होने के बाद आप उप निदेशक के पद पर और उसके बाद टिहरी फिर हरिद्वार में रहे। दोबारा रुद्रप्रयाग में ज़िला शिक्षा अधिकारी बनकर गये। राज्य परियोजना जन कार्यक्रम व सर्व शिक्षा जैसे अभियानों में आपने विशेषज्ञ की भूमिका भी बखूबी निभाई। वर्तमान में आप अपर शिक्षा निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) तथा मुख्य शिक्षा अधिकारी के कर्तव्य को अत्यंत कुशलता से निर्वाह कर रहे हैं….।
विभिन्न पदों की ज़िम्मेदारी निभा चुके कमलेश कुमार से बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-
आज़ाद सवाल (06):- क्या निजी विद्यालय रि-एडमिशन के नाम पर पैसा वसूल कर सकता है ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- रि- एडमिशन के नाम पर या डोनेशन के नाम पर पैसा लेना प्रतिबंधित है, यदि किसी विद्यालय में ऐसा पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी, ऐसी शिकायत आप उप -शिक्षा अधिकारी, खंडिक्षा अधिकारी, ज़िला / राज्य शिकायत प्रकोष्ठ में भी कर सकते हैं |
आज़ाद सवाल (07) :- विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से ग्रीष्म / शीत कालीन अवकाशों की फीस लेना क्या वैध है या नहीं ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से ग्रीष्म / शीत कालीन अवकाशों की फीस लेना वैध है |
आज़ाद सवाल (08) :- इन्हीं अवकाशों के लिये स्कूल प्रबंधन द्वारा शिक्षकों का वेतन नहीं दिया जाता, क्या ये उचित है ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- गेस्ट टीचर, अनियमित अथवा सशर्त शिक्षकों का अवकाशों के दौरान का वेतन रोका जा सकता है लेकिन किसी भी हाल में नियमित शिक्षक का वेतन नहीं रुकना चाहिये |
आज़ाद सवाल (09):- क्या कोई विद्यालय स्टेशनरी/ यूनिफार्म आदि हेतु किसी दुकान विशेष के लिये अभिभावकों पर मौखिक / लिखित दबाव बना सकता है ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- इसके लिये सभी स्कूलों को आदेश हैं कि ऐसा करने के लिये कोई भी बाध्य नहीं करेगा, यदि ऐसी शिकायतें प्राप्त होती हैं तो जाँच कर स्कूल का रेजिस्ट्रेशन रद्द किया जाएगा।
आज़ाद सवाल (10) :- क्या कोई विद्यालय विभिन्न कार्यक्रमों के नाम पर जैसे स्पोर्ट्स डे, टीचर्स डे, एनुअल फंक्शन आदि के लिये अभिभावकों से पैसा वसूल सकता है ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- हर स्कूल में एक PTA गठित है, इस तरह के कार्यक्रमों के लिये अभिभावक – शिक्षक समिति अपनी बैठक में ये निर्धारित करते हैं कि किस कार्यक्रम की फीस कितनी होनी चाहिये अथवा नहीं होनी चाहिये |
साक्षात्कार समाप्त 🙏
अंक 126 : साक्षात्कार (भाग – 01) (4 मार्च 2019)
आज़ाद सवाल (01) :- वर्तमान शिक्षा प्रणाली किस व्यवस्था के अंतर्गत चल रही है?
कमलेश कुमार गुप्ता :- भारत सरकार का सर्व शिक्षा अभियान प्रारंभिक शिक्षा को सार्वभौमिक करने के उद्देश्य से चलया गया। उस उद्देश्य को हमने प्राप्त भी किया। शिक्षक शिक्षा हेतु समग्र शिक्षा अभियान चल रहा है जिसके अंतर्गत बच्चों का सर्वांगीण विकास हो रहा है और गुणवत्ता के साथ पूर्ण शिक्षा भी प्राप्त हो रही है। बच्चों की आर्थिक मदद हेतु धनराशि भी दी जा रही है और शिक्षकों को नये पाठ्यक्रम व पाठ्यचर्या के अनुसार भी अपडेट किया जा रहा है…।
आज़ाद सवाल (02) :- सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या दिन ब दिन कम होती जा रही है, इसका कारण क्या मानते हैं आप ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- शिफ़्टिंग इसका मुख्य कारण है। अभिभावकों की धारणा बनी है कि पब्लिक स्कूलों में सुविधाएँ अधिक हैं और शिक्षा का स्तर उच्च है जबकि हमारे सरकारी विद्यालयों में चकाचौंध नहीं है लेकिन अध्यापक मानकों के अनुसार योग्यताधारी और प्रशिक्षित हैं…।
आज़ाद सवाल (03) :- धीरे-धीरे सरकारी स्कूल बंद होने की कगार पर आ गये हैं। इसे रोकने के लिये क्या सुधारात्मक क़दम उठाये जा रहे हैं?
कमलेश कुमार गुप्ता :- सरकार ने सभी सरकारी विद्यालयों में निजी स्कूलों की भांति NCERT पाठ्यक्रम लागू करवाया है, ताकि बच्चे अंग्रेज़ी के साथ साथ किसी भी विषय में पीछे न रहें। इसकी कोशिश लगातार जारी है…।
आज़ाद सवाल (04):- इसके बावजूद भी क्यों सरकारी स्कूलों को मर्ज किया जा रहा है ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- उसके पीछे मुख्य कारण ये है कि विगत वर्षों में विभिन्न कारणों से अनावश्यक रूप से हर गली – मोहल्ले में नवीन विद्यालय खोले गये एवं विद्यालयों का उच्चीकरण किया गया। उस दशा में बच्चे सरकारी विद्यालयों तक पहुंच नहीं पा रहे हैं, इसलिये छात्र संख्या कम हो या अधिक सरकार द्वारा न्यूनतम अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराया जाना आवश्यक हो जाता है, जिसका व्यय भार अधिक होता है।अतः शासन द्वारा ये निर्णय लिया गया है कि जिन विद्यालयों की छात्र संख्या कम है, उन्हें नज़दीकी विद्यालय में मर्ज कर दिया जाये…।
आज़ाद सवाल (05) :- अब बात करते हैं, निजी विद्यालयों की। निजी विद्यालय किन मानकों के अनुसार प्रत्येक वर्ष फीस वृद्धि करते हैं ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- निजी स्कूल खोलने की NOC राज्य सरकार प्रदान करती है व स्कूल संचालन की CBSE, फिर शिक्षा का अधिकार अधिनियम -2009 के अनुसार स्कूल संचालित होता है। राज्य सरकार को निजी विद्यालयों के नियंत्रण हेतु नियम बनाने का अधिकार प्राप्त है। भारत में कुछ राज्यों ने फीस कण्ट्रोल एक्ट लागू कर दिया है लेकिन हमारे राज्य में अभी एक्ट बनाने की प्रक्रिया चल रही है, जिसे जल्द ही पूर्ण कर लागू किया जाएगा…।
साक्षात्कार जारी…🙏
अंक 125 : साक्षात्कार (भाग – 03) (2 मार्च 2019)
राजीव रौतेला (आइएएस) कुमाऊं आयुक्त व सचिव मुख्यमंत्री आदि
संक्षिप्त परिचय :- 2001 बैच के आइएएस अधिकारी राजीव रौतेला सर्वप्रथम उत्तर प्रदेश में ज़िलों में कलेक्टर रहे, तत्पश्चात आप देवी पाटन मंडल के प्रथम बार मंडलायुक्त नियुक्त हुये। उसके बाद नोएडा अथॉरिटी में भी आपने सेवायें दीं। तब से आपने विभिन्न पदों को अपनी कुशलता व कर्मठता से सुशोभित किया। वर्तमान में आप कुमाऊँ मंडलायुक्त के साथ-साथ सचिव मुख्यमंत्री, प्रशासक, बाज़पुर शुगर मिल और बागेश्वर स्थित अल्मोड़ा मैेग्नेसाइट लि. फैक्ट्री के चैयरमेन पद का कार्यभार बख़ूबी निभा रहे हैं।
विभिन्न पदों पर आसीन राजीव रौतेला से बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :- सवाल (10) से आगे…
आज़ाद सवाल (11):- कुछ समय पहले बुज़ुर्गों के लिये एक योजना चलती थी ‘मेरे बुज़ुर्ग मेरे तीर्थ’ क्या वो योजना अब भी क़ायम है ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- जी हाँ, अब उस योजना में कुछ विस्तार करते हुये उसका नाम ‘पं दीन दयाल उपाध्याय मातृ-पितृ तीर्थाटन’ योजना कर दिया गया है। तथा इसके अलावा बुज़ुर्गों के लिये वृद्धावस्था पेंशन योजना आदि चलाई जा रही है…।
आज़ाद सवाल (12):- उत्तराखंड के बेरोज़गार युवाओं का पलायन लगातार जारी है, उनके लिये कोई योजना ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- बेरोज़गारों को रोज़गार देने के उद्देश्य से ही उधम सिंह नगर में ‘वाटर स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन’ डेवेलप किया गया है। उसके अलावा वीर चंद्र गढ़वाली स्वरोज़ग़ार योजना ऐसी और भी कई योजनाओं से युवाओं को लाभान्वित किया जा रहा है …।
आज़ाद सवाल (13):- कुमाऊँ समेत पूरे राज्य में नशे का कारोबार फल फूल रहा है, उस पर नियंत्रण के लिये क्या प्रयास किये जा रहे हैं?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- इसके लिये हमारी उत्तराखंड पुलिस लगातार कोशिशें कर रही है। मेडिकल स्टोर्स में ड्रग इंस्पेक्टर लगातार छापामारी कर रहे हैं। हमारा पूरा प्रयास है कि नशा और उसका कारोबार जड़ से उखाड़ फ़ेंके…
आज़ाद सवाल (14):- निजी स्कूलों की मनमानी पर कब लगाम लगाई जाएगी।स्कूल खुलते ही स्कूलों के मीटर चालू हो गये हैं। अभिभावकों पर किसी निश्चित दुकान से स्टेशनरी और यूनिफार्म खरीदने का दबाव बनाने का खेल शुरू हो गया है। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- इस सम्बन्ध में निदेशक (अतिरिक्त ) शिक्षा विभाग को शिकायत की जा सकती है, यदि ऐसा पाया जाता है तो सम्बंधित स्कूल के विरुद्ध उचित कार्रवाई होगी, इसकी जाँच के आदेश आपके सामने अभी किये गये हैं…
आज़ाद सवाल (15) :- अंत में आख़िरी सवाल, छह ज़िलों में आपका पसंदीदा ज़िला कौन सा है ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- पूरा मंडल और उसके लोग मुझे बहुत पसंद हैं…
साक्षात्कार समाप्त.. 🙏
अंक 124 : साक्षात्कार (भाग – 02) (1 मार्च 2019) : सवाल (05) से आगे :-
आज़ाद सवाल (06):- साफ़ सफ़ाई की बात हम करते हैं लेकिन हमारे पास न कोई ट्रेन्चिंग ग्राउंड है और न ही कोई डंपिंग ज़ोन, ऐसे में नगर पालिका को भी परेशानी होती है और नालों की सफ़ाई के बाद सिंचाई खंड को भी, क्या प्रयास हो रहे हैं इस संबंध में ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- इस संबंध में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से बात हो गयी है, शीघ्र ही यहां ‘मग डिस्पोज़ल सिस्टम’ लागू होगा…
आज़ाद सवाल (07):- जनता ने अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचानी हो तो कैसे पहुंचाई जा सकती है ? मुख्यमंत्री कार्यालय कहाँ से संचालित होता है ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- मुख्यमंत्री कार्यालय नैनीताल और हल्द्वानी दोनों जगह से संचालित होतार और बुधवार को यहां नैनीताल स्थित कार्यालय में अवश्य बैठता हूँ, जनता अपनी बात मुझसे कह सकती है, मेरी अनुपस्थिति में मेरा स्टाफ़ जनता की शिकायत दर्ज कर लेगा…
आज़ाद सवाल (08):- सचिव मुख्यमंत्री होने के नाते ये जानकारी दीजियेगा कि वर्तमान में कितनी योजनाओं का लाभ उत्तराखंड की जनता को मिल रहा है ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- किसान पेंशन योजना, विधवा पेंशन योजना, विकलांग पेंशन योजना, इन जैसी तमाम पेंशन योजनाओं की पेंशन मार्च माह की पहली तारीख़ को उनके खातों में पंहुचा दी जाएगी…
आज़ाद सवाल (09):- हड़ताल आपकी नज़र में ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- सबका अपना रोष प्रकट करने का अपना तरीक़ा है, डीएम के माध्यम से बात होती है, हम उस दशा में शासकीय स्तर से कार्य करते हैं। निजी चिकित्सालयों की हड़ताल के दौरान सरकारी चिकित्सालयों ने बेहतर कार्य किया।
आज़ाद सवाल (10) :-
सरकारी अस्पताल आपकी नज़र में ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- बीडी पांडे नैनीताल में तो चिकित्सक ही नहीं है। जीबी पंत चिकित्सालय की हालत भी किसी से छिपी नहीं है, लेकिन मैं सुशीला तिवारी अस्पताल की सेवाओं से संतुष्ट हूँ। सघन निरीक्षण के दौरान हमने अपनी टीम के साथ सुबह 10 बजे सुशीला तिवारी अस्पताल में प्रवेश किया फिर शाम को 7 बजे बाहर निकले थे, अब भी समय-समय पर वहां का दौरा होता रहता है, और स्वास्थ्य लाभ में आयुष्मान योजना से भविष्य में जनता को बहुत लाभ मिलने वाला है…।
साक्षात्कार जारी…🙏
अंक 123, भाग-1 : सवाल 5 से पहले (28 फरवरी 2019)
आज़ाद सवाल (01):- 06 ज़िलों के मुखिया होने के नाते प्रत्येक ज़िले में आपके स्तर से अभी तक क्या अभूतपूर्व प्रयास किये गये?
राजीव रौतेला (आइएएस):- मंडल में कोसी नदी, गगास, राम गंगा, गरुड गंगा, उत्तरवाहिनी शिप्रा नदी को पुनर्जीवित (कायाकल्प) करने को प्रयास किये जा रहे हैं, जिसमें कोसी नदी में वास्तविक कार्य अभी चल रहा है, और नदियों के संरक्षण हेतु दिल्ली में प्रथम पुरस्कार हमारे मंडल को प्राप्त हुआ है। इसी संदर्भ के लिये 01 मार्च को नैनीताल-अल्मोड़ा वृहद् कॉन्फ्रेंस रखी गयी है। दूसरा सभी जनपदों के उच्चाधिकारियों को सख़्त निर्देश दिये गए हैं कि वो जन सामान्य के प्रति संवेदनशील रहें।बरसात व बर्फ़ के पानी को रिस्टोर करने के लिये प्रयास हो रहे हैं, भारत सरकार की योजना ‘एक जनपद एक डेस्टिनेशन’ के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है और पर्यटन को बढ़ाने के उद्देश्य से ही अल्मोड़ा और नैनीताल जनपद में विंटर कार्निवाल आरम्भ किया गया है…।
आज़ाद सवाल (02):- नैनीताल की सूखाताल झील को कृत्रिम झील के रूप में कायाकल्प करने की ख़बरें छायी रहती हैं, उसके लिये आपकी कार्य योजना क्या है ?
राजीव रौतेला (आइएएस):- सूखाताल झील को कृत्रिम झील के रूप में विकसित नहीं किया जाएगा बल्कि 3 मीटर खुदाई करके बॉउंड्री वॉल की जाएगी, जिससे बरसात का पानी इकट्ठा किया जायेगा और उस पानी को नैनी झील संरक्षण हेतु काम में लाया जायेगा…।
आज़ाद सवाल (03):- आपने कुमाऊं कमिश्नर पद ग्रहण करते ही नैनीताल की पार्किंग व्यवस्था को दुरुस्त करने की बात कही थी, आपके वो क़दम कहाँ तक पहुंचे हैं ?
राजीव रौतेला (आइएएस):- पार्किंग व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिये हमने विभिन्न क़दम उठाये हैं। सबसे पहले हम अशोक सिनेमा पार्किंग को मल्टी लेवल पार्किंग बनाने वाले हैं। दूसरा कैलाखान पार्किंग पर भी अनुमति प्राप्त हो गयी है। तीसरा नारायण नगर में भी पार्किंग की अनुमति मिल गयी है। चौथा रूसी बाईपास पर भी पार्किंग बनायी जाएगी। और सबसे बड़ी बात ये है कि नैनीताल के स्थानीय लोगों के लिये सुनहरा अवसर है यदि उनके पास गाडी खड़ी करने की जगह है तो वो प्राधिकरण की अनुमति प्राप्ति के पश्चात् स्वयं भी पार्किंग चला सकते हैं…।
आज़ाद सवाल (04):- आप पंत विवि के कुलपति भी रहे हैं, अपने कार्यकाल के दौरान आपने विवि को क्या विशेष योगदान दिया ?
राजीव रौतेला (आइएएस):- वैसे तो वहां का कार्यकाल मात्र एक से डेढ़ माह का रहा फिर भी वहां हमने छात्रों व शिक्षकों के हित के लिये प्रयास किये। इंटीग्रेटेड फार्मिंग को बढ़ावा दिया। किसान मेला व्यापक व सुनियोजित तरीके से आयोजित किया और भी बहुत सारे प्रयास विवि के उत्थान के लिये किये गये…।
आज़ाद सवाल (05) :- बलियानाला भू-स्खलन को रोकने के लिये क्या प्रयास किये जा रहे हैं ? और अब तक कितनी धनराशि शासन से मरम्मत कार्यों के लिये आवंटित हुई है ? तथा प्रभावित परिवारों को स्कूल से कब विस्थापित किया जाएगा?
राजीव रौतेला (आइएएस):- भू-स्खलन को रोकने के लिये आइआइटी रुड़की द्वारा डीपीआर तैयार की जा रही है, जिसके लिये शासन से 10.50 लाख रुपये मंज़ूर हुये हैं। उसके अलावा भू-स्खलन के नाम पर और कोई धनराशि आवंटित नहीं हुई, और हिल सेफ़्टी कमेटी की मीटिंग में भू- स्खलन प्रभावित परिवारों को स्कूलों से विस्थापित करने की बात रखी जाएगी…
साक्षात्कार जारी… 🙏
अंक 122 : (27 फरवरी 2019) : आयुष्मान कार्ड बनाने में क्यों आ रही है समस्या, डीएसओ से साक्षात्कार में हुआ खुलासा… साक्षात्कार (भाग – 02)
तेजबल सिंह ज़िला पूर्ति अधिकारी, नैनीताल
संक्षिप्त परिचय:- उत्तर प्रदेश वाराणसी / बनारस के एक साधन-संपन्न परिवार में जन्मे तेजबल सिंह के पिताजी स्वास्थ्य विभाग में अतिरिक्त निदेशक थे, आपकी प्रारंभिक शिक्षा बनारस में ही हुई तथा स्नातक स्तर की शिक्षा आपने केएनएस विवि सुल्तानपुर से और स्नातकोत्तर लखनऊ विवि से सत्र 95-96 में किया। उसके बाद आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गये। आख़िरकार 2005 में आपकी मेहनत रंग लायी और आपने यूकेपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की। आपकी पहली ज्वाइनिंग क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी के रूप में देहरादून में हुई। फिर आप ट्रेनी ऑफ़िसर पिथौरागढ़ रहे और वहीं प्रथम बार ज़िला पूर्ति अधिकारी (पिथौरागढ़) के रूप में पद भार संभाला। उसके बाद अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, पुनः नैनीताल फिर पुनः अल्मोड़ा और फिर तीसरी बार नैनीताल के ज़िला पूर्ति अधिकारी के रूप में पद ग्रहण किया। आप फरवरी 2018 से वर्तमान तक एक कुशल अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं …
उनसे बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :- अंक -2
सवाल (05) से आगे :-
आज़ाद सवाल (06) :- राज्य में राशन कार्ड किस-किस श्रेणी के हैं तथा उनसे किस प्रकार के लाभ लोगों को मिल रहे हैं, थोड़ा विस्तारपूर्वक जानकारी दीजियेगा ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- आज की तिथि में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना और राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत राशन कार्ड बनाये जा रहे हैं:- रा.खा.सु.यो. के अनुसार तीन श्रेणियों में कार्ड बनते हैं :- (अ) अंत्योदय राशन कार्ड जिनका रंग गुलाबी होता है, ये कार्ड समाज के दबे कुचले सबसे निचले ग़रीब परिवारों के लिये बनते हैं, जिसमें प्रत्येक कार्ड पर 35 किलो राशन (13.300 ग्रा. गेंहू + 21.700ग्रा. चावल ) एक किलो चीनी प्रति माह वितरित की जाती है। (ब) बी.पी.एल. कार्ड:- ये सफ़ेद रंग के राशन कार्ड ग़रीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिये बनाये जाते हैं जिनके परिवार की समस्त श्रोतों से आय ₹1,80,000 हज़ार सालाना हो या उससे कम होनी चाहिये, इसमें प्रति माह 5 किलो राशन (02 किलो गेंहू + 03 किलो चावल) मिलता है। (स) पात्र प्राथमिक परिवार :- ये सफ़ेद कार्ड थोड़े ठीक स्थिति वाले ग़रीब परिवारों के लिये है, इसमें भी 5 किलो राशन मिलता है… दूसरी योजना राज्य खाद्य सुरक्षा अंतर्गत पीले वाले राशन कार्ड बनाये जाते हैं। जो ग़रीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन कर रहे लोगों के लिये होता है, जिनकी आय ₹1.80लाख से ऊपर और 5 लाख से कम होती है, इस कार्ड धारक को 5 किलो गेंहू व 2.5 किलो चावल मिलता है। इसमें 2.5किलो चावल के एवज़ में सरकार ₹75/ माह डी.बी.टी.के माध्यम से बैंक खाते में जमा करती है…।
आज़ाद सवाल (0-7) जैसा कि आपने बताया कि प्रति माह राशन दिया जाता है, यदि इस स्थिति में पता चले कि कोई सस्ते गल्ले का दुकानदार कार्ड धारकों को राशन न देकर ब्लैक मार्केटिंग कर रहा हो तो उसके विरूद्ध क्या कार्रवाई होगी ?
ज़िलापूर्ति अधिकारी :- यदि ऐसी स्थिति पायी जाती है तो सम्बंधित डीएसओ, एसडीएम अथवा एस.आइ. से शिकायत की जा सकती है।आरोप सत्य पाये जाने पर उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा…।
आज़ाद सवाल (08):- आयुष्मान अटल स्वास्थ्य योजना में राशन कार्ड सिंक नहीं हो पा रहे हैं, जिससे आम जनता को समस्या हो रही है। कौन है इसका ज़िम्मेदार?
ज़िला पूर्ति अधिकारी:- इसके लिये हम नहीं स्वास्थ्य विभाग ज़िम्मेदार है। जब आधार कार्ड से हर काम हो जा रहे थे, तो राशन कार्ड से लिंक वाला सिस्टम नहीं होना चाहिए था। आधार ही आधार होना चाहिये था…।
आज़ाद सवाल (09):- कुछ सी.एस.सी. संचालकों का आरोप है कि आपके विभाग से उन्हें डेटा प्रोवाइड करने में सहयोग नहीं मिल रहा है। ऐसा क्यों ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- नहीं, यह आरोप बे-बुनियाद है। हमारी ओर से हमेशा सहयोग किया गया है। बल्कि यहां तो हल्द्वानी और रामनगर से भी लोग आ रहे हैं। डेटा हम उपलब्ध करा रहे हैं…।
आज़ाद सवाल (10):- अंत में… एक छोटा सा सवाल कि क्या अब आप चौथी बार भी नैनीताल में ही रहना चाहेंगे ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- नहीं, अब गढ़वाल जाने की इच्छा है। यहां नैनीताल में बहुत प्यार मिला है अब तक, यहां के लोग बहुत सीधे व ईमानदार हैं….।
साक्षात्कार समाप्त
🙏
अंक 122 : साक्षात्कार (भाग – 02)
आज़ाद सवाल (01) :- नैनीताल में तीसरी बार ज़िला पूर्ति अधिकारी बनने के बाद यहां के परिवेश और नागरिकों के बारे में क्या अनुभव किया है ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- यहां तीसरी बार आकर जनपद व जनपद के लोगों की अच्छी समझ हो गयी है, नैनीताल शहर की बात करें तो यहां के लोगों को हमारे विभाग से कम शिकायतें रही हैं, ओखलकांडा -बेतालघाट चूँकि पिछड़ा क्षेत्र है इसलिये वे लोग हमारे विभाग पर अधिक निर्भर हैं, तो शिकायतें भी अधिक होती हैं…
आज़ाद सवाल (02):- इतनी शिकायतें होने पर आप ग्रामीणों की शिकायतों का निबटारा कैसे करते हैं ?
ज़िलापूर्ति अधिकारी :- ग्रामीणों की समस्या समाधान हेतु जन मिलन कार्यक्रम और हर तीन माह में एक बार बीडीसी बैठक की जाती है, जिसमें हमारी कोशिश रहती है कि हर ग्रामीण की समस्या का निराकरण हो जाये…
आज़ाद सवाल (03):- जबसे राशन कार्ड ऑनलाइन किये गये हैं, विभाग के लिये काम कितना आसान हुआ है अथवा कितना मुश्किल ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- पिछले चार सालों में डिजिटाइज़ेशन के होने से कार्य शैली में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है, पहले पुराने रिकॉर्ड चेक कर पाना बहुत मुश्किल होता था लेकिन अब सब कुछ आसानी से हो जाता है…
आज़ाद सवाल (04):- ऑनलाइन सिस्टम होने और आधार लिंक होने से विभाग / राज्य को क्या फ़ायदा मिला है ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- ऑनलाइन सिस्टम और आधार लिंक होने से फ़र्ज़ीवाड़े पर लगाम लगी है, पहले हर घर में दो -दो, तीन-तीन राशन कार्ड पाये जाते थे, जिनको पकड़ पाना बेहद मुश्किल हो रहा था, अब तो एक क्लिक पर सबके रिकॉर्ड सामने आ जाते हैं…
आज़ाद सवाल (05):- तो अब तक कितनी संख्या में फ़र्ज़ी राशन कार्ड पकड़ में आये हैं ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- ऑनलाइन और आधार लिंक होने से सबसे पहले तो वो ट्रेस हुये जो एक नाम से दो -दो राशन कार्ड चला रहे थे, दूसरा वो पकड़ में आये जिनकी आय 5 लाख सालाना से अधिक थी फिर भी उनके राशन कार्ड चल रहे थे, आपको यक़ीन नहीं आएगा कुल मिलाकर 40 हज़ार फर्ज़ी राशन कार्ड हमने डिजिटाईज़ेशन होने के बाद निरस्त किये हैं…
साक्षात्कार जारी
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अंक 120 : साक्षात्कार (भाग – 03) नैनीताल के जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन से जिले की यातायात, पार्किंग व शौचालय आदि व्यवस्थाओं पर…
डीएम विनोद कुमार सुमन।
विनोद कुमार सुमन ज़िलाधिकारी, नैनीताल
संक्षिप्त परिचय :-
कालीन उद्योग के लिये मशहूर संत रविदास नगर ज़िला या यूँ कहें उत्तर प्रदेश के चार ज़िलों (प्रयागराज, जौनपुर, वाराणसी और मिर्ज़ापुर) की सरहदों को छूने वाले भदोही ज़िले में 1970 को एक ग़रीब किसान के घर में जन्मे श्री विनोद कुमार सुमन पांच भाई और दो बहनों में सबसे बड़े हैं, आपकी प्रारंभिक शिक्षा भदोही में ही हुई, उसके बाद आप घर छोड़कर श्रीनगर गढ़वाल आ गये, जहां आपने कई महीनों तक एक मंदिर परिसर में दिन गुज़ारे और बी.ए. की पढ़ाई पूरीे के लिये आपने वहां बन रहे एक सुलभ शौचालय निर्माण में मज़दूर के रूप में मज़दूरी भी की और इस तरह से बीए की डिग्री आपने गढ़वाल विवि से हासिल की, इसके बाद पिताजी ने घर वापस बुला लिया, फिर आपने एम.ए. कीिक्षा प्रयागराज विवि (तत्कालीन इलाहबाद विवि) से प्राप्त की, माता -पिता की प्रेरणा से आपका बचपन से ही मन शिक्षा की ओर अग्रसर रहा इसलिए आपने पढाई नहीं छोड़ी तथा सन् 1998 में आपने पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर ली, पीसीएस अधिकारी के रूप में अपनी कुशल सेवाएं देने के कारण आपको सन् 2007 में आइएएस केडर में पदोन्नत किया गया, तब से आज तक आप एक कुशल आइएएस के रूप में देश को अपनी सेवाएं दे रहे हैं और आज नैनीताल के ज़िलाधिकारी द को सुशोभित कर रहे है, उनसे बात की हमारे संवाददाता मो.ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-
सवाल (10) से आगे :-
आज़ाद सवाल (11):- आयुष्मान अटल योजना कार्ड बनाने में नागरिकों को दिक्कतें आ रही है राशन कार्ड सिंक नहीं हो पा रहे हैं, खाद्य आपूर्ति विभाग पर भी दबाव है, कैसे आसान होगी प्रक्रिया ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- खाद्य आपूर्ति विभाग के अलावा अब नागरिक अपने -अपने सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान में जाकर कार्ड अपडेट करा सकते हैं जिससे उन्हें जल्द होजना का लाभ मिल सकेगा…
आज़ाद सवाल (12):- प्रधानमंत्री जगह – जगह शौचालय निर्माण की बात करते हैं लेकिन नैनीताल को जोड़ने वाले हमारे कालाढूंगी – नैनीताल मोटर मार्ग पर शौचालय की समस्या है पर्यटक व नागरिक दोनों के लिये समस्या है, कुछ हो पाएगा इस समस्या का ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- नहीं ऐसा नहीं है, कालाढूंगी – नैनीताल मोटर मार्ग पर 2-3 जगह शौचालय हैं, अब हर 10 मीटर की दूरी पर तो शौचालय नहीं बनवा सकते…
आज़ाद सवाल (13):- नैनीताल में पार्किंग की समस्या है जिस कारण पर्यटक हर वर्ष परेशान रहता है, इस समस्या से निजात के लिये क्या क़दम उठाये जा रहे हैं…
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- रुसी बाईपास पर पार्किंग बनाई जा रही है, जिसका टेंडर निकल चुका है, वहां 2000 से 3000 गाड़ियां सुरक्षित रह सकेंगी और ड्राइवर वगैरह के लिये वहां शौचालय इत्यादि बनाये जाएंगे, जिससे पर्यटकों को बहुत सुविधा मिलेगी…
आज़ाद सवाल (14):- सरकारी योजनाओं का लाभ जनता को मिल सके उसके लिये क्या कवायद की जा रही है ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- हम समय- समय पर योजनाओं का प्रचार करवाते रहते हैं अभी ज़िले में किसान पेंशन योजना से 35000 लोग लाभान्वित हुये हैं। अटल आयुष्मान योजना तो चल ही रही है…
आज़ाद सवाल (15):- अंत में एक काल्पनिक सवाल, 2020 में नैनीताल को किस स्तर पर देखते हैं, कितना परिवर्तन होगा तब तक ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल:- 2020 तक हल्का फुल्का अंतर आएगा, ज़्यादा बदलाव नहीं आएगा नैनीताल में…
साक्षात्कार समाप्त
🙏
अंक 119 : फिर हुआ असर, नवीन समाचार व आज़ाद मंच का, जानें कहाँ ?
धन्यवाद : अधिशासी अभियंता जल संस्थान का
साहिबान, नवीन समाचार के स्तम्भ आज़ाद के तीर में हमने पानी की जगह सीवर नैनी झील में ले जा रहे हैं नाले क्यों सोया है विभाग उन्वान के साथ ये बताया और दिखाया था कि किस तरह से भारी मात्रा में सीवर का गंदा पानी सीधा झील में जा रहा था, हमारी ख़बर का संज्ञान लेते हुये संतोष कुमार उपाध्याय, अधिशासी अभियंता जल संस्थान नैनीताल ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को तत्काल हुक्म दिया और कनिष्ठ अभियंता भास्कर सुयाल अपनी टीम को लेकर मस्जिद चौराहे और मस्जिद के सामने बने पिट खुलवाकर उनकी सफ़ाई करवाने लगे, इस बारे में जब कनिष्ठ अभियंता भास्कर सुयाल से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि काफ़ी मेहनत से सभी कर्मचारी लगे हुए हैं और हमारी कोशिश है कि शनिवार तक झील में जाने वाला सीवर बिल्कुल बंद हो जाये, इतनी तत्परता दिखाने के लिये आज़ाद मंच परिवार जल संस्थान नैनीताल का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता है और आने वाले वक़्त में भी इसी तत्परता की उम्मीद करता है और हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है कि जनसेवा में आपका साथ यूँही हमेशा मिलता रहेगा…
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 118 : पानी की जगह सीवर नैनी झील में ले जा रहे हैं नाले, क्यों विभाग सोया ?
नैनी झील में जा रहा है सीवर का पानी
जल संस्थान गहरी नींद में सोया
गंदा पानी कर रहा है झील को दूषित
कौन है ज़िम्मेदार ?
साहिबान, ये जो तस्वीर / वीडियो आप देख रहे हैं न, वो किसी सीवर लाइन की नहीं है बल्कि नैनीताल में मौजूद एक ऐसे नाले की है जिससे बारिश का पानी ऊपर पहाड़ी से होता हुआ नगर के रॉयल होटल कम्पाउण्ड से निकलकर नयना देवी मंदिर के बराबर से निकलकर झील में समा जाता है लेकिन एक विभाग की नई योजना के चलते नाले में पानी की जगह सीवर की गंदगी आ रही है और सीधा नैनी झील में जाकर झील को दूषित कर रही है, ऐसा नहीं है कि इस बारे में अमुक विभाग अंजान हो, ऐसा कतई नहीं है इस मामले की वजह से ही कुछ दिन पहले नगर पालिका के सभासदों ने 2 दिवसीय धरना भी दिया था लेकिन उक्त विभाग की तानाशाही रवैये के चलते कोई मांग पूरी न हो सकी और आज शहर में सीवर जगह-जगह लीक होती रहती है, जिसे कोई देखने वाला नहीं, क़ाबिलेगौर बात ये है कि इसी झील के निर्मल जल को नैनीतालवासी पीने को मजबूर हैं… आज़ाद मंच द्वारा अधिशासी अभियंता महोदय से इस बावत बात करने के लिये काफ़ी बार कोशिश की लेकिन महोदय कभी फ़ोन उठा नहीं पाते, इसलिये जनता को पता भी नहीं लग पाता आख़िर इस सबकी वजह क्या है ? ख़ैर,
आख़िर में, मुख्यमंत्री महोदय उत्तराखंड मुख्य सचिव मुख्य मंत्री कार्यालय / कुमाऊं आयुक्त महोदय ज़िलाधिकारी महोदय, अपरज़िलाधिकारी महोदय, अधिशासी अभियंता महोदय, जल संस्थान, नैनीताल से हमारी इल्तेजा है कि सीवर के गंदे पानी को नैनी झील में जाने से रोकने के लिये तत्काल कोई कार्रवाई की जाए, जिससे हमारी नैनी झील दूषित न हो और शहर के बाशिंदों व बाहर से आने वाले सैलानियों को साफ़ पीने का पानी मयस्सर हो सके …
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 117 : साक्षात्कार नैनीताल के जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन से जिले की चिकित्सा, शिक्षा, खनन आदि व्यवस्थाओं पर…(भाग – 02)
संक्षिप्त परिचय :- विनोद कुमार सुमन, ज़िलाधिकारी, नैनीताल
डीएम विनोद कुमार सुमन।
कालीन उद्योग के लिये मशहूर संत रविदास नगर ज़िला या यूँ कहें उत्तर प्रदेश के चार ज़िलों (प्रयागराज, जौनपुर, वाराणसी और मिर्ज़ापुर) की सरहदों को छूने वाले भदोही ज़िले में 1970 को एक ग़रीब किसान के घर में जन्मे श्री विनोद कुमार सुमन पांच भाई और दो बहनों में सबसे बड़े हैं। आपकी प्रारंभिक शिक्षा भदोही में ही हुई। उसके बाद आप घर छोड़कर श्रीनगर गढ़वाल आ गये, जहां आपने कई महीनों तक एक मंदिर परिसर में दिन गुज़ारे और बी.ए. की पढ़ाई पूरी करने के लिये आपने वहां बन रहे एक सुलभ शौचालय के निर्माण में मज़दूर के रूप में भी योगदान दिया और इन कठिन परिस्थितियों में आपने बीए की डिग्री गढ़वाल विवि से हासिल की। इसके बाद पिताजी ने घर वापस बुला लिया। फिर आपने एम.ए. की शिक्षा प्रयागराज विवि (तत्कालीन इलाहबाद विवि) से प्राप्त की। माता-पिता की प्रेरणा से आपका बचपन से ही मन शिक्षा की ओर अग्रसर रहा इसलिए आपने पढाई नहीं छोड़ी तथा सन् 1998 में आपने पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण की। पीसीएस अधिकारी के रूप में अपनी कुशल सेवाएं देने के कारण आपको सन् 2007 में आइएएस कैडर में पदोन्नत किया गया। तब से आज तक आप एक कुशल आइएएस के रूप में देश को अपनी सेवाएं दे रहे हैं और आज नैनीताल के ज़िलाधिकारी के पद को सुशोभित कर रहे है। उनसे बात की हमारे संवाददाता मो.ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :- सवाल (05) से आगे :-
आज़ाद सवाल (06):- प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खुल तो गये हैं लेकिन उनमें उचित मात्रा में दवाइयां कब उपलब्ध होंगी ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल:- फ़िलहाल जो कमी आयी उसका कारण भण्डार गृह में ही कमी थी, क्योंकि उत्पादन ही कम हो रहा था, अब पूर्ति बहाल हो जाएगी…
आज़ाद सवाल (07):- निजी स्कूल खुलने लगे हैं और अभिभावकों पर अमुक दुकान से यूनिफार्म, किताबें लेने का दबाव बनने लगा है। प्रशासनिक स्तर से इन स्कूली दबाव पर कब लगाम लगेगी ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- अभिभावकों को परेशान न होना पड़े इसलिये स्कूल यूनिफार्म व क़िताबों की सुविधायें देता है …
आज़ाद सवाल (08):- निजी अस्पताल, अस्पताल न होकर फाइव स्टार होटल बन गई हैं। इन अस्पतालों पर कब नकेल कसी जाएगी ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल*:- क्लीनिकल ईस्टब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) लागू होने के बाद ये सब बंद हो जाएगा…
आज़ाद सवाल (09):- अवैध खनन लगातार हो रहा है। उस पर रोकथाम के लिये क्या क़दम उठाये जा रहे हैं ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- हम लगातार कोशिश कर रहे हैं ऐसा न हो।बयदि जब कभी ऐसी खबरें मिलती भी हैं तो उस पर कार्रवाई करते रहते हैं…
आज़ाद सवाल (10):- हालांकि पॉलिथीन प्रतिबंधित है फिर भी पॉलिथीन का बाज़ार में धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। उसे रोकने हेतु कब कार्रवाई की जाती है ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- पॉलिथीन का प्रयोग न हो उसके लिये हम समय-समय पर दुकानों व बाज़ारों में छापामारी करते रहते हैं …
साक्षात्कार जारी
अंक 116 : साक्षात्कार (भाग – 01) :
आज़ाद सवाल (01):- सबसे पहले हम बात करते हैं पुलवामा में हुये हमले की।उसमें शहीद हुये जवानों की शहादत पर क्या कहना चाहेंगे आप घटना पर ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- बेहद दुःखद घटना है। हम इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं तथा शहीद हुये जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं …
आज़ाद सवाल (02):- बलियानाला भू -स्खलन प्रभावित क्षेत्र से कितने परिवारों को विस्थापित किया जा चुका है ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- बलियानाला भू-स्खलन प्रभावित क्षेत्र से लगभग 20-22 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित किया जा चुका है। बाक़ी के 2-3 परिवार शेष हैं। उन्हें भी जल्द ही विस्थापित किया जाएगा…
आज़ाद सवाल (03):- नैनीताल से लेकर हल्द्वानी, रामनगर कहीं भी चले जाओ सब सरकारी अस्पतालों की हालत बदतर क्यों है ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- नही, ऐसा नहीं है। अगर नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल की ही बात करें तो उक्त अस्पताल को कायाकल्प पुरस्कार से नवाज़ा गया है, जो काफ़ी कड़े मानदंडों के आधार पर दिया जाता है। रही बात अन्य अस्पतालों की तो निजी अस्पतालों के हड़ताल पर जाने से सरकारी अस्पताल ही मसीहा बने हुये हैं…
आज़ाद सवाल (04):- महोदय, आपका कहना अपने स्तर पर ठीक होगा।न्यायाधीश, प्रशासनिक अधिकारी या कोई भी हाई प्रोफाइल पर्सनालिटी को बेहतर इलाज मिल रहा होगा लेकिन एक आम नागरिक को अवार्ड नहीं इलाज चाहिये।जनता का कहना है कि मरीज़ कक्ष में बैठकर चिकित्सक की प्रतीक्षा करते हैं और चिकित्सक बाहर धूप सेंकते हैं, क्या ये आरोप सही हैं ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- नहीं, ऐसा नहीं हो रहा है। बीडी पांडे अस्पताल में सब सही चल रहा है। अगर चिकित्सक धूप सेंक भी रहे हैं तो कोई गुनाह नहीं कर रहे हैं…।
आज़ाद सवाल (05):- इसका मतलब जिलाधिकारी महोदय सरकारी अस्पतालों की कार्यशैली से संतुष्ट हैं ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- जी हाँ, जहाँ तक हमने अनुभव किया है वहां तक तो हम संतुष्ट ही हैं। वैसे बिल्कुल अंदर तक तो जाकर हमने भी नहीं देखा है…
साक्षात्कार जारी…
अंक 115 : बदल रही है नैनीताल की तस्वीर, आज़ादी के बाद पहली बार हो रही यहाँ सफाई…
-साफ़ हो रहे हैं नैनीताल के नाले, सिंचाई खंड का विशेष आभार, पालिका प्रशासन का भी मिल रहा सहयोग, नागरिकों का सहयोग अपेक्षित
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न, वो हमारे शहर नैनीताल के अलग – अलग नालों की है, जिसमें सिंचाई खंड नैनीताल के कर्मचारी कार्य करते नज़र आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक़ हमारे शहर में कुल 59 नाले हैं, इनकी वर्ष में तीन बार सफ़ाई का प्रावधान है। एक बरसात से पहले, दूसरा बरसात के बीच व तीसरा बरसात के बाद। आजकल जो सफ़ाई चल रही है, वो बरसात के बाद वाली चल रही है, इस बारे में सिचाई विभाग के अधिशासी अभियंता हरीश चन्द्र सिंह बताते हैं कि वैसे तो नालों का स्वामित्व नगर पालिका नैनीताल का है, हम केवल नालों की मेंटिनेंस के लिये उत्तरदायी हैं। अब तक हमारे द्वारा लगभग 30 नालों की सफ़ाई हो चुकी शेष नाले मार्च के प्रथम सप्ताह तक लगभग पूरे साफ़ हो जाएँगे। नाले से निकले मलबे और कूड़ा निस्तारण से सम्बंधित बात करने पर सचिन नेगी, नगर पालिकाध्यक्ष नैनीताल ने बताया कि जो भी कूड़ा नालों से निकलता है उसे पालिका द्वारा उठाया जाएगा और जो मलबा होगा उसके निस्तारण की ज़िम्मेदारी सिंचाई खंड की होगी, तस्वीरें बता रही हैं कि सिंचाई खंड अपना कार्य बखूबी अंजाम दे रहा है, उसके लिये हरीश सिंह, अधिशासी अभियंता, मदन मोहन जोशी, सहायक अभियंता, नीरज तिवारी कनिष्ठ अभियंता व पर्यवेक्षक रमेश सिंह के साथ तमाम टीम जो आड़े-तिरछे, फिसलन वाले नालों को भी जान जोखिम में डालकर साफ़ कर रहे हैं, उन सबका तथा सचिन नेगी, नगर पालिकाध्यक्ष, रोहिताश शर्मा, अधिशासी अधिकारी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, डॉ. जीएस धर्मसत्तू , नगर सफ़ाई निरीक्षक, कुलदीप सिंह के साथ एक से लेकर पंद्रह तक सभी सभासदगण नगर पालिका परिषद व उनकी पूरी टीम का आज़ाद मंच परिवार तहे दिल से शुक्रिया अदा करता है। साथ ही नागरिकों से ये अपील करता है कि मेहरबानी करके नालों में कूड़ा न डालें, कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में ही डालें और हर एक वार्ड के सभासद से ये गुज़ारिश है कि अपने -अपने वार्ड के लोगों को स्वच्छता के लिये प्रेरित व जागरूक करें तभी बनेगा हमारा ‘क्लीन नैनीताल-ग्रीन नैनीताल’। न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर…
अंक 114: साक्षात्कार-डीएफओ बिजू लाल टीआर, भाग-3 : नैनीताल चिड़ियाघर पर उपयोगी जानकारी
टीआर बिजुलाल, मंडलीय वन अधिकारी (डिवीज़नल फॉरेस्ट ऑफिसर) डीएफ़ओ, नैनीताल
संक्षिप्त परिचय :- केरल प्रान्त के तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम) में जन्मे टी.आर. बीजुलाल की शिक्षा-दीक्षा तिरुवनंतपुरम में ही हुई। एमएससी (ज़ूलॉजी) उत्तीर्ण करने के पश्चात् आपने आईएफ़एस परीक्षा (2004) में आपने 18वीं रैंक हासिल की। 3 वर्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम के पश्चात् आपने हल्द्वानी स्थित एफटीआई में उप-निदेशक के पद को ग्रहण किया। एक वर्ष उप-निदेशक पद पर रहने के पश्चात 2008 में नैनीताल के डीएफ़ओ के तौर पर सरोवर नगरी में आगमन हुआ, कुछ समय की सेवायें देने के बाद आप डीएफ़ओ सिविल अल्मोड़ा, उप-निदेशक गोविन्द पशु विहार (पुरोला), वर्किंग मेन ऑफिसर (चकराता) में अपनी सेवायें देते हुये मई-2018 में पुनः नैनीताल की वादियों में डीएफ़ओ के तौर पर शानदार वापसी की तथा मई से फरवरी तक आपने वन संरक्षण के क्षेत्र में क्या-क्या उल्लेखनीय कार्य किये, इस सम्बन्ध में बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने… प्रस्तुत है टीआर बीजुलाल डीएफ़ओ, नैनीताल से बातचीत के प्रमुख अंश :-
सवाल 10 से आगे …
आज़ाद सवाल (11):–
25 लाख रुपये प्रतिमाह क्या प्राणी उद्यान की आय होती है ?
डीएफ़ओ नैनीताल:-
नहीं, ऐसा तो नहीं हो पाता,
आय कम व्यय अधिक होने के कारण ज़ू घाटे में चलाया जा रहा है …
आज़ाद सवाल (12):-
क्या ज़ू के जानवरों को गोद लिया जा सकता है ?
डीएफ़ओ नैनीताल:-
जी हाँ, ज़ू में जितने भी पशु-पक्षी हैं सभी को गोद लिया जा सकता है उसका विकल्प मौजूद है, इच्छुक व्यक्ति यहां कार्यालय में सम्पर्क कर सकते हैं…
आज़ाद सवाल (13):-
नैनीताल ज़ू में और क्या विशेषतायें लाई जाएंगी ?
डीएफ़ओ नैनीताल:-
नैनीताल ज़ू को और विकसित करते हुये यहां एक इंटरप्रिटेशन थिएटर खोलने की योजना है, जिसमें यहां आने वाले लोगों को वाइल्ड लाइफ संबंधी डॉक्यूमेंट्री फिल्में दिखाकर वन्य जीव संरक्षण के लिये प्रेरित किया जा सकेगा ..
आज़ाद सवाल (14):-
ज़ू के अलावा पर्यटन व आय को बढ़ावा देने के लिये आपके द्वारा क्या प्रयास किये जा रहे हैं ?
डीएफ़ओ नैनीताल:-
पर्यटन व राज्य की आय बढ़ाने के लिये हम हनुमान गढ़ी स्थित ईको पार्क, कालाढूंगी मार्ग पर सरिता ताल (सड़िया ताल) वाटर फॉल, हिमालयन बॉटैनिकल गार्डन तथा रानीबाग़ स्थित रेस्क्यू सेंटर को पर्यटकों के लिये विकसित कर रहे हैं…
आज़ाद सवाल (15):-
तो इन सब स्थलों को विकसित करने में देरी क्यों हो रही है ?
डीएफ़ओ नैनीताल:-
बस फण्ड की कमी है, नैनीताल को स्वर्ग बनाने का संकल्प है, और हमें विश्वाश है वो ज़रूर पूरा होगा…
(साक्षात्कार समाप्त)
अंक 113: साक्षात्कार-डीएफओ बिजू लाल टीआर, भाग-2 :
सवाल 5 से आगे …
आज़ाद सवाल (06):- नगर क्षेत्र में आवास बनाते समय किसी वृक्ष की कितनी दूरी होनी चाहिये?
डीएफ़ओ नैनीताल :- नगर क्षेत्र में आवास बनाते समय किसी वृक्ष की दूरी लगभग 3 मीटर होनी चाहिये…
आज़ाद सवाल (07):- नैनीताल में तो अधिकतर आवास वृक्षों से सटाकर बनाये गये हैं, उनका क्या होगा ?
डीएफ़ओ नैनीताल:- पुराने समय से ऐसे आवास बन चुके हैं, हमने अपने कार्यकाल में ऐसी कोई अनुमति नहीं दी है…
आज़ाद सवाल (08):- नैनीताल क्षेत्र में कौन सा वन अधिनियम लागू होता है ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- जहां तक नगर पालिका परिषद का क्षेत्र आता है वहां तक नगर पालिका अधिनियम और उसके पश्चात् वन संरक्षण अधिनियम 1927 लागू होता है और उन्हीं के अंतर्गत कार्रवाई होती है…
आज़ाद सवाल (09):- अब बात करते हैं वन्य प्राणी उद्यान की। नैनीताल वन्य प्राणी उद्यान (ज़ू) में कितने संख्या में कितने जानवर व अन्य पक्षी हैं ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- नैनीताल वन्य प्राणी उद्यान वन्य जीव संरक्षण 1972 के अंतर्गत चलाया जा रहा है। यहां पर कुल 33 प्रजाति निवास करते हैं। जिनमें 232 जानवर हैं और जानवरों में 2 टाइगर (01नर +01 मादा ), 7 लैपर्ड (4 नर +3 मादा ), 4 भालू (1 नर +3 मादा ), 2 तिब्बती भेड़िये (1 नर + 1 मादा), 5 रेड पांडा (2 नर + 3 मादा) हैं फ़िलहाल। बाक़ी आगे संख्या बढ़ सकती है…
आज़ाद सवाल (10):- वन्य प्राणी उद्यान में जीवों के रख रखाव में प्रति माह कितना ख़र्चा आता है ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- सभी जीवों के रख रखाव पर प्रति माह ₹25 लाख का खर्चा आ जाता है…
साक्षात्कार जारी…
आज़ाद सवाल (01):- आपके वनाधिकार में कौन-कौन से क्षेत्र आते हैं ?
अंक 110 : साक्षात्कार-डीएफओ बिजू लाल टीआर, भाग-1 :
डीएफ़ओ नैनीताल :- हमारे वनाधिकार में नैनीताल, खैरना, बेतालघाट, रानीबाग़ तथा कालाढूंगी का क्षेत्र आता है…
आज़ाद सवाल (02) :- नैनीताल में जगह-जगह भवन निर्माण हो रहे हैं। मानचित्र पास कराने को आपकी एनओसी भी अनिवार्य है। क्या आप बता पाएंगे कि किन आधारों पर आपने एनओसी दी हैं ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- जितने भी निर्माण हो रहे हैं उनमें हमारी ओर से कोई एनओसी नहीं दी गयी है…
आज़ाद सवाल (03) :- भवन निर्माण में धड़ल्ले से वृक्षों की बलि दी जा रही है। कौन है इसके लिये ज़िम्मेदार ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- यदि ऐसा हो रहा है तो उसके लिये पूरी तरह से भू -स्वामी ही ज़िम्मेदार है…
आज़ाद सवाल (04) :- इसका मतलब आप उस पर कोई कार्रवाई नहीं करते ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- जो अवैध रुप से वृक्ष को काटता या क्षति पहुंचाता है उस पर नगर पालिका के नियमानुसार ₹5000 तक न्यूनतम तथा ₹25000 अधिकतम जुर्माना वसूला जाता है …
आज़ाद सवाल (05):- मतलब ये हुआ कि अधिकतम ₹25000 दीजिये और वृक्षों का सफ़ाया कीजिये। यही अर्थ जाता है इसका तो ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- नहीं, ऐसा नहीं है, हम अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करते हैं कि वृक्ष कटान न हो। यदि दुर्भाग्यवश ऐसा हो जाता है तो उस पर क़ानूनी रूप से कार्रवाई की जाती है …
साक्षात्कार जारी…. 🙏
अंक 112 (15 फरवरी 2019) : सुनो सुनो सुनो ! यहां एक महीने से खड़ी है एक एम्बुलेंस, जिस किसी की हो ले जाये, वरना…
क्या खुलने वाला है नैनीताल में नया अस्पताल!
क्या स्टाफ़ हाउस क्षेत्र में बनेगा अस्पताल!
क्या एम्बुलेंस 108 सबसे पहले पहुंचाई
एक महीने से क्यों खड़ी है एम्बुलेंस
क्यों कोई कोई सुध लेने वाला नहीं
साहिबान, एक ज़रूरी एलान सुन लीजिये! एक एम्बुलेंस जिसका नाम 108 है, सफ़ेद, नीली, लाल धारीदार कपड़े पहने हुए है, पिछले एक महीने से मल्लीताल सात नंबर क्षेत्र के भोटिया बैंड पर लावारिस हालत में खड़ी है, जिस किसी की भी हो, कृपया यहाँ आकर ले जाएँ, उसके हाथ- पैर अभी सलामत हैं, कहीं ऐसा न हो कुछ दिन बाद वो ईंटों पर खड़ी मिले। फिर मत कहना बताया नहीं। और तो और एम्बुलेंस का रौब लेकर घूमने वाली गाड़ी ‘कूड़ा गाड़ी’ का तमग़ा न हासिल कर ले, अभी रो- रो कर ,एम्बुलेंस के डीज़ल रूपी आंसू सड़क पर बिखरे पड़े हैं, मेहरबानी करके इस मैसेज को तब तक फैलाइये जब तक इसके ख़ैर ख़्वाह इस 108 एम्बुलेंस को अपने घर न ले जाएँ… ख़ैर, हमारे शहर में जो दो अस्पताल (अस्पताल कहने में बाई गॉड गला भर आया है फिर भी ) हैैं, उनकी हालत तो किसी से छिपी नहीं है, इसलिए नया अस्पताल बनने की कल्पना करने में भी डर लगता है हुज़ूर!
आख़िर में, स्वास्थ्य मंत्री महोदय, उत्तराखंड, मुख्य चिकित्साधिकारी महोदया, नैनीताल तथा सम्बंधित अधिकारीगणों से इल्तेजा है कि 108 एम्बुलेंस का उपयोग रोगियों की सेवा में हो तो अच्छा लगता है लेकिन किसी सूनसान जगह पर ले जाकर लावारिस हालत में एम्बुलेंस को खड़ा कर देना ये अच्छा महसूस नहीं होता। अगर आपके संज्ञान में ये मामला नहीं था, तब भी ये चिंता का विषय है लेकिन अब मामला संज्ञान में आने के बाद कितनी जल्दी उस पर कार्रवाई होती है। ये देखने वाली बात होगी…
न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर
अंक 111 (14 फरवरी 2019) : 15 दिन में ही 1/6 रह गई नगर पालिका की टॉल फ्री नंबर सेवा
नगर पालिका टॉल फ्री नंबर सेवा हुई बाधित
एक से लेकर पांच नंबर तक कोई रिस्पॉन्स नहीं
केवल छठे नंबर पर हो रही है शिकायत दर्ज
पालिकाध्यक्ष स्वयं जवाब दे रहे हैं लोगों की शिकायतों पर
साहिबान, अभी 26 जनवरी को नगर पालिका ने लोगों की समस्या निवारण हेतु ऐतिहासिक शुरुआत की थी जिसमें सोचा ये गया था कि नगर पालिका से सम्बंधित हर समस्या से निजात दिलाने के लिये उक्त टोल फ्री नंबर काम आएगा जहाँ पर आम नागरिक अपनी शिकायत दर्ज करा सके, 15 दिन से पहले ही फ्री के नाम पर जारी एक से लेकर 6 नंबर में से केवल 6 नंबर ही काम कर रहा है, जिस पर स्वयं पालिकाध्यक्ष शिकायत सुन रहे हैं व निवारण हेतु उचित जवाब भी दे रहे हैं, अन्य नंबर क्यों नहीं उठाये जा रहे जब इस बावत पालिकाध्यक्ष से बात की गयी तो उन्होंने अन्य कर्मचारियों के अवकाश पर जाने का कारण बताया और साथ ही ये भी कहा कि जल्द ही इस समस्या को दूर किया जाएगा कि कर्मचारी के अवकाश पर जाने पर भी फोन अटेंड हो सकें, वहीँ दूसरी ओर अधिशासी अधिकारी से इस संबंध में बात की गयी तो उनका जवाब भी एक समान था। दोनों ही ज़िम्मेदार अधिकारियों ने अपनी ज़िम्मेदारी को बखूबी समझते हुये जनहित में जवाब दिये। हम आपके जज़्बे की क़द्र करते हैं और आम नागरिकों से अपील करते हैं कि टोल फ्री नंबर डायल करने के बाद एक से लेकर पांच तक जब कोई जवाब न आये तब छठे नंबर को दबाएं व सीधे पालिकाध्यक्ष से अपनी पीड़ा बताएं वो हर सम्भव उक्त समस्या निवारण हेतु आपको एक ज़िम्मेदार जवाब अवश्य देंगे…
आख़िर में, नगर पालिका अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी महोदय से हमारा एक ही सवाल है जब इतना बड़ा महत्वकांक्षी क़दम उठाना ही था तो जल्दी किस बात की थी, कुछ दिन और रुक जाते तो क्या बुराई थी, ख़ैर, हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है कि जल्द से जल्द टोल फ्री नंबर के एक से लेकर पांच तक नंबर पर भी शिकायत दर्ज व उसका समाधान हो पाएगा …
न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर…
अंक 109 (9 फरवरी 2019) : साक्षात्कार (भाग-03)
तत्कालीन ज़िला नैनीताल (वर्तमान ज़िला उधम सिंह नगर तहसील किच्छा में मौजूद गाँव रामेश्वरपुर में बैसाखी और अम्बेडकर जयंती (14 अप्रैल ) के दिन सन् 1962 में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे श्री हरबीर सिंह की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से हुई उसके बाद आपने इंटर तक की शिक्षा आदित्य नाथ झा इण्टर कॉलेज रुद्रपुर से 1980 में ग्रहण की और कुमाऊँ विश्वविद्यालय से सन् 1984 में एमए करने के उपरांत ही आपकी नैनीताल बैंक में नौकरी लग गयी। नौकरी लगने से पहले तक आपने अपने पिताजी के साथ खेती- किसानी भी की, जिसमें गन्ने की फ़सल धान लगाना व खेतों की रोपाई आदि शामिल थी। बचपन से ही अभिनय व गायन के शौक़ के चलते आपने हल्द्वानी रामलीला में दशरथ व जनक का क़िरदार बख़ूबी निभाया और अक्सर किसी भी कार्यक्रम में अपने गायन से श्रोताओं का मन मोह लेने वाले ऐसे हरफ़नमौला किसान, कलाकार, गायक और बेहतरीन व्यक्तित्व के स्वामी जो हमारे नैनीताल के अपर ज़िलाधिकारी व झील विकास प्राधिकरण के सचिव की भूमिका को भी बखूबी निभा रह हैं, विभिन्न मुद्दों को लेकर उनसे बातचीत की हमारे संवाददाता मो.ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-
सवाल 10 से आगे :-
आज़ाद (11) :- भवाली से निकलने वाली उत्तरवाहिनी शिप्रा नदी में सीवर लाइन की खुली गंदगी समाहित हो रही है साथ ही साथ नदी को गंदा नाला बना दिया गया है, उक्त नदी को दूषित होने से बचाने के लि्या क़दम उठाये जाएंगे ?
हरबीर सिंह :- अभी तक हमारे संज्ञान में मामला नहीं था, प्राधिकरण की आगामी बोर्ड बैठक में इस नदी को स्वच्छ करने सम्बन्धी निर्णय लिये जाएंगे…
आज़ाद सवाल (12) :- नैनीताल प्रारम्भ से ही रंगकर्मियों की रंगभूमि रही है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि अभी तक यहां एक रंगशाला नहीं है। प्रशासनिक अधिकारी व कलाकार होने के नाते आपके स्तर से क्या सहयोग मिल सकता है ?
हरबीर सिंह :- अभी तक तो कोई हमारे पास रंगशाला का ये मुद्दा लेकर नहीं आया, यदि ज्ञापन दिया जाता है तो हम यक़ीनन उस पर अपनी तरफ़ से पूरा सहयोग करेंगे…
आज़ाद सवाल (13) :-
सर पिछली बार के विंटर कार्निवाल से यहां के स्थानीय कलाकारों में रोष है कि उन्हें अवसर नहीं दिया गया, ऐसी चूक कैसे हो गयी ?
हरबीर सिंह :- चूक नहीं हुई, हमने प्रारम्भ से ही प्रार्थना पत्र स्वीकार करने शुरू कर दिये थे लेकिन यहां के स्थानीय कलाकार बहुत देर में प्रार्थना पत्र लेकर आये जिससे शायद कुछ लोग नाराज़ हो गए। हम अगले विंटर कार्निवाल में पूरी कोशिश करेंगे कि कोई रोष न हो …
आज़ाद सवाल (14):- आप में एक बेहद अच्छा कलाकार भी है। कलाकार से पीसीएस अधिकारी बनने तक का सफर कैसे तय किया ?
हरबीर सिंह :- शौक़िया तौर पर पुराने गीतों को गा लेता हूँ। बाक़ी हल्द्वानी की रामलीला में दशरथ और जनक के किरदारों को निभाया है। नैनीताल बैंक में नौकरी के साथ – साथ सिविल सर्विसेज़ की तैयारी भी करता रहता था। बस एक बार वाहे गुरु जी की मेहरबानी से परीक्षा उत्तीर्ण की और वहीं से प्रशासनिक अधिकारी की यात्रा प्रारम्भ हो गयी…
आज़ाद सवाल (15) :- आप अपनी सफ़लता का श्रेय किसे देना चाहेंगे ?
हरबीर सिंह :- सिविल सर्विसेज़ को अत्यधिक गंभीरता से दिलाने का पूरा श्रेय मैं अपनी पत्नी अमरजीत कौर (रानी ) को देना चाहूंगा। एक प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिये मेरी पत्नी ने सदा मुझे प्रोत्साहित किया। मैं उनका आजीवन आभारी रहूंगा और मेरी दिली ख्वाहिश है कि हर जन्म में मुझे पत्नी के रूप में रानी ही मिले…
आज़ाद सवाल (06):- झील विकास प्राधिकरण झील के विकास के लिये क्या प्रयास कर रहा है ?
हरबीर सिंह झील को साफ़ व स्वच्छ रखने के लिये हमने ग्लोबल एक्वा प्रा. लि. को वॉटर एरियेशन की ज़िम्मेदारी सौंप रखी है जिसकी रख रखाव लागत रुपये अठारह लाख ( ₹18 लाख ) प्रतिवर्ष तथा विद्युत व्यय रुपये एक लाख साठ हज़ार (₹ 1,60,000) झील विकास प्राधिकरण के द्वारा भुगतान किया जाता है…।
आज़ाद सवाल (07) :- अपर ज़िलाधिकारी की हैसियत से आपके द्वारा बलियानाला के भू-स्खलन प्रभावित क्षेत्र में रह रहे लोगों को अभी तक किसी सुरक्षित जगह विस्थापित क्यों नहीं किया गया ?
हरबीर सिंह हमारी ओर से भ-ूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। और रही बात वहां के निवासियों को अन्यत्र विस्थापित करने की तो रूसी बाईपास के पास जगह चिन्हित की गयी है, जहां उनके लिये विचार किया जा रहा है…।
आज़ाद सवाल (08) हमारे शहर में दोनों अस्पताल रेफ़रल सेंटर बन कर रह गए हैं। क्या कभी आपके द्वारा वहां की स्थितियों का जायज़ा लिया गया ?
हरबीर सिंह पिछली बार नंदा देवी महोत्सव के दौरान एक बच्ची की अचानक तबियत ख़राब हो गयी थी उसको बीडी पाण्डे के इमरजेंसी में अच्छा उपचार दिया गया था लेकिन हाँ कभी अंदर वार्ड तक नहीं जा पाया लेकिन जल्द ही औचक निरीक्षण किया जाएगा…।
आज़ाद सवाल (09) :- निजी विद्यालय शीत अवकाश के उपरांत खुलते ही अभिभावकों को लूटना प्रारम्भ कर देंगे। उक्त लूट को अपर ज़िलाधिकारी स्तर पर रोकने को क्या प्रयास किये जाएंगे ?
हरबीर सिंह सरकार द्वारा समस्त स्कूलों को आदेशित किया गया है कि किसी भी स्कूल द्वारा अभिभावकों पर यूनिफार्म, स्टेशनरी आदि के लिये दबाव नहीं बनाया जाएगा। यदि ऐसी शिकायतें प्राप्त होंगी तो सम्बंधित स्कूल प्रबंधन पर सख़्त कार्रवाई की जाएगी…।
आज़ाद सवाल (10):- सरकारी कार्यालयों में अनियमिततायें जारी हैं। उक्त अनियमितताओं को रोकने हेतु कभी आपके द्वारा औचक निरीक्षण किया जाएगा ?
हरबीर सिंह किसी भी हालत में अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।ज़िलाधिकारी स्तर से निरीक्षण किया जाता रहा है और हमने भी अपने स्तर से अपर निदेशालय, नगर पालिका, जल संस्थान आदि विभागों में औचक निरीक्षण कर कार्रवाई की है…।
साक्षात्कार जारी….
अंक 107 (6 फरवरी 2019) : साक्षात्कार (भाग-01)
अंक -15 : आज आखिरी कड़ी में तल्लीताल बाजार वार्ड नंबर-15 से सभासद श्रीमती प्रेमा अधिकारी के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : श्रीमती प्रेमा अधिकारी पत्नी : श्री मोहन सिंह अधिकारी शिक्षा : एम.ए. (समाज शास्त्र) डीएसबी परिसर, नैनीताल।
काफी समय से समाज व महिलाओं के लिये कार्य कर रही प्रेमा अधिकारी, रक्तदान में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. हल्द्वानी वाली रोड में हेमंत रूवाली जी की दुकान के पास का नाला जो सदैव गंदगी से भरा रहता था, नगर पालिका द्वारा ठीक करवाकर उसमें जाली लगवाने का काम करवाया गया। 2. तल्लीताल थाने के पास नाली का निर्माण और पानी की निकासी तथा गैराज का नवीनीकरण नगर पालिका द्वारा करवाया गया। 3. तल्लीताल डीएम कार्यालय को जाने वाले रास्ते पर सार्वजनिक शौचालय जो कई वर्षों से बंद पड़ा था, उसका जीर्णोद्धार नगर पालिका द्वारा करवाया गया। 4. सरोज भवन के पास से पीछे का रास्ता तथा गली मोहमद कमर के घर से होते हुये नीलोफर की दुकान तक नवीनीकरण नगर पालिका द्वारा करवाया गया। 5. श्री विनोद तिवारी जी के घर के पास स्टीफन स्कूल होते हुये जिला पूर्ति कार्यालय जाने वाले रास्ते का नवीनीकरण का कार्य नगर पालिका द्वारा करवाया गया। 6. हिमालय होटल के पास इटन हाउस को जाने वाली सीढ़ियों तथा रास्ते का नवीनीकरण नगर पालिका द्वारा करवाया गया। 7. जिला पूर्ति कार्यालय जाने वाले रास्ते से पुलिस लाइन को जाने वाले रास्ते की सीढ़ियों का नवीनीकरण नगर पालिका द्वारा करवाया। 8. साह पुस्तक भंडार के पीछे रास्ते की जीर्ण -शीर्ण दीवार जो गिरने वाली थी, नगर पालिका द्वारा ठीक करवायी। 9. पुलिस लाइन से कमिश्नरी तक जाने वाले रास्ते में रेलिंग विधायक जी के माध्यम से लगवायी। 10. बर्ड्स आई व्यू कॉटेज की गली में नई प्रकाश व्यवस्था नगर पालिका द्वारा करवायी गयी। 11. डीएम कोर्ट में आनंद की कैंटीन से फैमिली कोर्ट तक प्रकाश व्यवस्था नगर पालिका द्वारा करवायी।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. एसएसपी आवास के पास फैमिली क्वार्टर जाने वाले रास्ते का कार्य प्रस्तावित है। 2. नैनीताल बैंक से तल्लीताल थाना तक नालियों पर जाली लगवाकर नालियों का जीर्णोद्धार करवाना है। 3. इसके अलावा और भी कार्य प्रस्तावित हैं, जिन्हें समय-समय पर पूरा करवाकर जनता की सेवा करती रहूंगी।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है, विशेष तौर से महिलाओं के उत्थान के लिये कार्य करना है।
अंक -14 : आज मल्लीताल बाजार वार्ड नंबर-14 से सभासद मोहन सिंह नेगी के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : मोहन सिंह नेगी पुत्र : स्व. राम सिंह नेगी शिक्षा : स्नातक (बी.ए.) एम.ए. (समाज शास्त्र), स्नातक (पत्रकारिता) डीएसबी परिसर, नैनीताल। विधि स्नातक, एसएसजे परिसर, अल्मोड़ा। विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. नाथ साह जी की दुकान के सामने कूड़े का डिब्बा जिससे पूरे बाजार को समस्या थी उसे हटवाकर वहां लोगों के बैठने के लिये बेंच लगवायी। 2. बेकरी कम्पाउंड में जगदीश बेकरी से इदरीस मलिक जी की बेकरी तक इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करीब 2.10 लाख की लागत से करवाया। 3. वाल्मीकि मंदिर से दयाल दा के घर तक नई प्रकाश व्यवस्था करवायी। 4. बर्तन वाली गली में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करीब 1.10 लाख की लागत से करवाया। 5. मार्केट की साफ-सफाई व्यवस्था पर पर्यावरण मित्रों का हौसला बढ़ाने प्रत्येक सुबह जरूर आता हूँ। वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. इंतखाब क्लॉथ स्टोर से लेकर टूरिस्ट होटल तक नगर पालिका के माध्यम से पूरी रोड बननी है, रोड के नीचे जो नाला है, वो सही करवाना है, जिसकी लागत करीब 10 लाख रूपये है, प्रस्तावित है। 2. बीच वाली बाजार में टाइल्स बहुत जगह से उखड़ गयी हैं, जिसका करीब दो लाख रुपये से पुनर्निर्माण कार्य होना है। 3. अंडा मार्केट में जहां कूड़ेदान है से लेकर ए वन बेकरी शॉप तक इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से होना प्रस्तावित है। 4. बाजार में नालियों का चौड़ीकरण व उनपर जालियां लगवाना प्रस्तावित है। 5. पुराना झूला परिसर में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण प्रस्तावित है। 6. कमेटी लाइन में शिव जी के मंदिर से लेकर वाल्मीकि मंदिर तक इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण प्रस्तावित है। 7. गाड़ी पड़ाव में व गोल घर के पास कुमाऊँनी संस्कृति वाले गेट लगने हैं, जो विधायक जी के माध्यम से प्रस्तावित हैं। 8. अल्पसंख्यक मद से विधायक जी के माध्यम से शाकिर हसन मीट वालों की दुकान से नब्बू अंडे वालों की दुकान तक सड़क निर्माण प्रस्तावित है, जो लगभग 12 लाख की लागत का कार्य है। 9. मेरे वार्ड में दो शौचालय हैं, उनका जीर्णोद्धार पर्यटन विभाग के माध्यम से होना है। 10. सदर कम्पाउंड से प्रेम रेस्टोरेंट तक निकलने वाली गली में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण व पथ प्रकाश व्यवस्था नगर पालिका के माध्यम से होना है। 11. सय्यद ताज रेस्टोरेंट वाली गली में नालियों का निर्माण करीब 1.10 लाख की लागत से नगर पालिका के माध्यम से होना है। 12. कृष्णा ज्वेलर्स के सामने अर्शी भाई की दुकान तक टाइल्स का निर्माण होना है। 13. खडी बाजार में गड्ढों को सही करवाया जाएगा। 14. मीडिल स्कूल के पास सीढ़ियों की मरम्मत करवानी है। 15. झूला मार्केट में (राजेश वर्मा जी के सामने ) क्यारी को पुनर्जीवित करवाना है। भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है।
अंक -13 : आज आवागढ़ वार्ड नंबर-13 से सभासद राजू टांक के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : राजू टांक पुत्र : स्व. यशपाल टांक शिक्षा : इंटरमीडिएट, सी.आर.एस.टी. इंटर कॉलेज, नैनीताल। समाजसेवा ही सर्वोपरि है।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. खुर्शीद हुसैन ‘आजाद’ के घर से स्टेट बैंक तक लोनिवि के माध्यम से सड़क में सीसी करवाकर मार्ग जीर्णोद्धार करवाया। 2. चार्टन लॉज की कूड़ेदान डिग्गी का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 3. चार्टन लॉज में ही कूड़ेदान के पास में एक पेशाबघर नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 4. ब्लू स्टार होटल से अमित साह जी फोटोग्राफर के घर तक नये तार डलवाकर, पथ प्रकाश व्यवस्था नगर पालिका के माध्यम से करवायी। 5. मीरा बुआ की दुकान से टंकी तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 6. टंकी से हिमांशु डालाकोटी के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स व सीढ़ियों का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 7. बॉबी के घर से मुकेश दास के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 8. मीरा बुआ की दुकान से लेकर ईशान के घर तक पथ प्रकाश व्यवस्था नगर पालिका के माध्यम से करवायी। 9. सिंचाई विभाग के माध्यम से क्षेत्र से निकलने वाले नालों की सफाई करवायी जा रही है। 10. पुराने बैंक ऑफ बड़ौदा के पास बड़ी नाली का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 11. काफी दिनों से बंद हो चुके नल कूड़ेदान के पास और पोस्ट ऑफिस के पास वाले दोनों नल पुनः सुचारु करवाये। 12. स्टेट बैंक के पास जीर्ण-शीर्ण हो चुके बिजली के पोल को विद्युत विभाग के माध्यम से नया लगवाया। 13. अर्शी के घर के आगे दीवार व लोहे की पुलिया का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 14. आजादी के बाद पहली बार कुंगा दा भोटिया के घर के सामने से डॉ. दुग्ताल जी के आवास तक करीब 800 मीटर के मार्ग में इंटर लॉकिंग व दीवार निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 15. बैंक ऑफ बड़ौदा पुराना से बेलवेडियर होटल तक सीसी मार्ग व बेलवेडियर होटल से लेकर अमित साह जी फोटोग्राफर के घर तक ईंटों का खड़ंजा नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 16. निशा के घर से गुप्ता जी के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 17. अनित जी की दुकान के पास से सोहेल सिद्दीकी जी के घर तक नाले पर रेलिंग सिंचाई विभाग के माध्यम से करवाया। 18. पूरे वार्ड में प्रकाश व्यवस्था सही करवायी। 19. गुप्ता जी के घर से मीरा बुआ की दुकान तक साफ सफाई के लिये नगर पालिका से एक महिला पर्यावरण मित्र नियुक्त करवायी गयी है। 20. भजन दा के घर से टीटू साह जी की दुकान तक नालियों पर नगर पालिका के माध्यम से जाल लगवाये गये।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. नदीम के घर से ताहिर के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स लगनी प्रस्तावित है। 2. फल वाले मुल्ला जी के घर से बिलाल भाई के घर तक इंटर लॉकिंग टाइल्स का कार्य प्रस्तावित है। 3. इब्राहिम के घर से दानिश के घर तक इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण प्रस्तावित है। 4. हिमांशु के घर से नन्हे भाई के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग का कार्य प्रस्तावित है। 5. नंदा आमा के घर से करण के घर के सामने तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स निर्माण प्रस्तावित है। 6. डेविड के घर से थापा जी के घर तक रास्ता एवं गलियों का निर्माण प्रस्तावित है। 7. आजादी के बाद पहली बार मेरे वार्ड में 3045 का बारात घर शाकिर भाई के घर के सामने बनने वाला है। 8. संजू भाई के घर तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स लगनी प्रस्तावित है। 9. आवागढ़ में आशु दा के घर के पास से खुल्बे जी के घर के सामने तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स निर्माण व दोनों तरफ गेट लगने प्रस्तावित है। 10. सोहेल सिद्दीकी जी के घर से खुर्शीद हुसैन ‘आजाद’ के घर तक नाले पर रेलिंग का कार्य प्रस्तावित है। 11. चार्टन लॉज की पुलिया से पुरानी कोठी तक मार्ग में इंटर लॉकिंग टाइल्स का निर्माण प्रस्तावित है। 12. पांच लाइट पोल लगने हैं, जिसमें एक आवागढ़ में, एक चार्टन लॉज में, तीन 800 मीटर वाली रोड में लगने हैं। 13. प्रेम सरोवर होटल के पीछे बैंक ऑफ बड़ौदा तक नालियों व जालियों का निर्माण प्रस्तावित है। 14. गौरव मेहरा के घर के पीछे से अब्दुल्लाह बिल्डिंग तक नाली निर्माण व नाले पर रेलिंग निर्माण प्रस्तावित है। 15. दानिश की दुकान के पास पुलिया व दीवार निर्माण प्रस्तावित है। 16. कुंगा दा भोटिया के घर के सामने पुलिया निर्माण करवाना है।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है
अंक -12 : आज सैनिक स्कूल वार्ड नंबर-12 से सभासद श्रीमती दया सुयाल के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : श्रीमती दया सुयाल पत्नी : श्री कैलाश चंद्र सुयाल शिक्षा : परास्नातक (एम.ए. समाजशास्त्र), रानीखेत डिग्री कॉलेज, अल्मोड़ा। 15-20 वर्षों से निरंतर महिलाओं के उत्थान हेतु संघर्षरत दया सुयाल महिलाओं व समाज के लिये बहुत कुछ करना चाहती हैं।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. नाला नंबर -26 सैनिक स्कूल के पास से निकलने वाली ऊपर मेन रोड तक जाने वाली सीढ़ियों का जीर्णोद्धार नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 2. जुबली हॉल के पास राजू खान जी के घर के नजदीक वाली क्षतिग्रस्त दीवार, रेलिंग व इंटरलॉकिंग टाइल्स का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया जा रहा है । 3. देविका रानी स्कूल के पास क्षतिग्रस्त दीवार का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 4. जुबली हॉल में पंगोट को जाने वाले मार्ग पर विनोद कुमार जी के घर के ऊपर पैराफिट का निर्माण करवाया। 5. पथ प्रकाश व्यवस्था के अंतर्गत कई लाइट ठीक करवायी। 6. धूप कोठी के पास से पंगोट को जाने वाली सड़क पर रेलिंग कार्य लोनिवि के माध्यम से करवाया। 7. सफाई में विशेष ध्यान रखते हुए डोर टू डोर का निरिक्षण करती हूं। 8. लॉक डाउन में वार्डवासियों की हर सम्भव सहायता की गयी। 9. विधवा पेंशन व अन्य आर्थिक सहायता दिलवाते रहते हैं। 10. नैना पीक की सुरक्षा के लिये शासन- प्रशासन में आवाज उठाते रहते हैं क्योंकि वार्ड वासियों की सुरक्षा हमारा परम कर्तव्य है।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. वार्ड में प्रकाश की व्यवस्था और बेहतर करनी है, जिसमें धूप कोठी से लेकर पूरा सैनिक स्कूल आउट हाउस जोशी जी के मकान तक और जुबली हॉल से ऊपर भट्ट जी का हॉस्टल है, जहां से बस्ती में जाने का रास्ता है वहां नये पोल लगवाकर प्रकाश व्यवस्था करनी है। 2. विधायक जी के माध्यम से कुछ सोलर लाइट भी वार्ड में लगनी है। 3. मेलरोज कम्पाउंड हंस निवास से ऊपर जो मंदिर है उसमें सौंदर्यीकरण कार्य करवाना है। 4. शेरवानी से ऊपर पान सिंह की दुकान के पास लाल सिंह जी के घर से जो रोड जाती है उसके जीर्णोद्धार का कार्य प्रस्तावित है। 5. वार्ड में बेहतर स्वास्थ्य, बेहतर सड़कें व बेहतर प्रकाश व्यवस्था दिलाना आगे का लक्ष्य है। भविष्य की योजना:आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है
अंक -11 : आज श्रीकृष्णापुर वार्ड नंबर-11 से सभासद कैलाश सिंह रौतेला के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : कैलाश सिंह रौतेला पुत्र : श्री मदन सिंह रौतेला शिक्षा : बीए (स्नातक) व एम.ए. (समाज शास्त्र), डीएसबी परिसर, नैनीताल। कोरोना काल में भी जनहित के कार्य करने वाले कैलाश निष्छल मन से सेवा करते आये हैं।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं:
1. इंद्र कॉटेज में विधायक निधि से रेलिंग निर्माण करवाया। 2. हल्द्वानी रोड कांठ बास में नाली व नाली पर रेलिंग तथा दीवार की मरम्मत नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 3. सिपाही धारे में शनि मंदिर में गेट, दीवार व मन्दिर से नीचे को जाने के मार्ग में सीसी नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 4. बिष्ट भवन में रेलिंग का कार्य नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 5. ब्रेवरी मार्ग से नॉर्मल स्कूल तक सीसी नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 6. सलमान जाफरी के घर के पास मार्ग की टूटी दीवार का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 7. तल्ला कृष्णापुर में बिशन दा के घर के आगे आम रास्ते की टूटी दीवार का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 8. गोल घर को जाने वाले मार्ग की टूटी दीवार का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 9. ब्रेवरी मार्ग में मोटा पानी के पास टूटी दीवार का निर्माण करवाया। 10. आजादी के बाद से आज पहली बार वर्तमान में बिष्ट भवन से शाही जी के घर तक के कच्चे मार्ग को जाने वाला 2 किमी मार्ग का निर्माण नगर पालिका के माध्यम से हो रहा है। 11. तल्ला कृष्णापुर में हीरा सिंह जी से घर से नीचे पिंकी के घर को जाने वाले कच्चे मार्ग का आजादी के बाद सीसी निर्माण नगर पालिका के माध्यम से कराया गया। 12. गुफा महादेव के पास दीवार निर्माण व सिसी का कार्य नगर पालिका के माध्यम से चल रहा है। 13. तुड टडिया धारे में आम मार्ग पर विधायक निधि से सीसी कार्य। 14. रमेश चंद्र के घर के पास से ब्रेवरी तक का विधायक निधि के माध्यम से सीसी मार्ग निर्माण। 15. विधायक निधि से विजय के घर के पास दीवार निर्माण कार्य करवाया। 16. तल्ला कृष्णापुर में मुनिया जी के घर से ब्रेवरी मार्ग तक नगर पालिका के माध्यम से सीसी करवाया। 17. इमाम बाड़े से हाजी चुंगी तक के 3 किमी. लंबे मार्ग में सीसी कार्य अल्पसंख्यक निधि से विधायक जी के माध्यम से करवाया। 18. जल संस्थान द्वारा लाल कोठी के पास सीवर टैंक का निर्माण कार्य करवाया। 19. लाल कोठी के पास से शशि जी के घर तक आम रास्ते की टूटी दीवार का निर्माण व रेलिंग कार्य नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 20. सूरदास बाबा के घर के नीचे आम रास्ते की टूटी दीवार की मरम्मत नगर पालिका के माध्यम से करवायी। 21. रईस होटल से कृष्णापुर का मुख्य मार्ग टूटने से आम जनता के लिए जीआईसी आम रास्ते का निर्माण सिंचाई विभाग के माध्यम से करवाया। 22. दो सोलर लाईट जिलाधिकारी महोदय के माध्यम से लगवायी गयी। 23. शनि मंदिर में नगर पालिका के सहयोग से लाइट लगवायी। 24. सिंचाई विभाग से वार्ड के सभी नालों की मरम्मत व सफाई कार्य करवाया, जो आज भी चल रहा है। 25. कांठबास में वाल्मीकि धर्मशाला का निर्माण कार्य चल रहा है।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. गंगा कॉटेज में सार्वजनिक मार्ग का निर्माण प्रस्तावित है। 2. मल्ला कृष्णापुर से बिष्ट भवन तक सार्वजनिक मार्ग में सीसी व दीवार मरमत कार्य प्रस्तावित है। 3. बिष्ट भवन से गुफा महादेव मंदिर को जाने वाले मार्ग की टूटी दीवार का मरम्मत कार्य प्रस्तावित है। 4. सावित्री देवी जी के घर के नीचे आम रास्ते की दीवार की मरम्मत प्रस्तावित है। 5. लाल कोठी के पास शशि के घर से रमेश के घर तक के आम रास्ते का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 6. तल्ला कृष्णापुर में राकेश दा के घर से पंकज के घर तक आम रास्ते का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 7. तल्ला कृष्णापुर में रावत जी के घर के पीछे नाली निर्माण प्रस्तावित है। 8. दुर्गापुर में बने आवासों में निवेशित परिवारों के लिए बारात घर, मार्ग में सीसी व रेलिंग कार्य प्रस्तावित है। 9. बिष्ट भवन से सरस्वती विहार तक के ब्रेवरी मार्ग का मरम्मत कार्य प्रस्तावित है। 10. ब्रेवरी मार्ग में विश्राम स्थल का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 11. जीआइसी स्कूल के पास टूटी दीवार जिसको आपदा के तहत लोनिवि द्वारा बनाया जाना है जो आपदा की अगली बैठक में हो जाएगा, इस विषय में एडीएम महोदय से वार्ता हो चुकी है, प्रस्तावित है। 12. कांठबास में सीसी निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 13. वार्ड में लाईट पोल लगाने प्रस्तावित हैं। 14. मल्ला कृष्णपुर में लाल कोठी के पास व गोल घर के पास सीवर लाइन स्थापित करवानी है। 15. इमाम बाड़े में शिया मस्जिद में टीन शेड का निर्माण कार्य प्रस्तावित है।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है
अंक -10 : आज नैनीताल क्लब वार्ड नंबर-10 से सभासद श्रीमती सपना बिष्ट के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय : नाम : श्रीमती सपना बिष्ट पत्नी : श्री कुंदन बिष्ट शिक्षा : इंटरमीडिएट उत्तीर्ण, हिमाचल बोर्ड, हिमाचल प्रदेश।
लॉकडाउन में भी जनहित के विभिन्न कार्यों में भागीदारी करने वाली सपना बिष्ट का मानना है कि वे काम कराने में विश्वास रखती हैं, काम जनता गिनायेगी।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. स्प्रिंग फील्ड में सरला जोशी के घर से कत्यूरा जी के घर तक सीसी, दीवार व रेलिंग निर्माण करवाया। 2. निशांत स्कूल के पास नंदी मिश्रा जी व केवलानन्द के घर से सात नंबर को जाने वाला मार्ग सही करवाया। 3. विशाल टम्टा के घर से जाहिद के घर तक सीढ़ी, सीसी व रेलिंग निर्माण करवाया। 4. पदम् सिंह रावत जी के घर से सात नंबर को मिलने वाली रोड में सीसी व दीवार का विधायक जी के सहयोग से व लोनिवि के माध्यम से निर्माण चल रहा है। 5. वार्ड में नाले और नालियों का जीर्णोद्धार का कार्य कई जगह हो चुका है और कई जगह चल रहा है। 6. विलायत कॉटेज से नवीन साह जी के घर तक नाले पर सिंचाई विभाग के माध्यम से जाल लगवाए हैं। 7. रोजगार कार्यालय का जाल नवीन पंत जी के घर के पास नगर पालिका, नैनीताल के माध्यम से 02 लाख की लागत से जाल का निर्माण करवाया। 8. विधवा पेंशन व विभिन्न प्रकार से आर्थिक सहयोग, मुख्यमंत्री राहत कोष से असहायों को प्रदान करवायी गयी हैं।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. विधायक जी के माध्यम से 16 सोलर लाइट लगनी हैं। 2. 16 पोल लगने हैं जिसमें 5 पोल अलग से नगर पालिका द्वारा आवंटित हुए हैं। 3. स्वास्तिक भवन (नैनी विहार) से लेकर उमा जोशी जी के घर तक इंटर लॉकिंग टाइल्स, रेलिंग व जाल निर्माण प्रस्तावित है। 4. स्प्रिंग फील्ड में निर्मला अधिकारी के घर से यकीन के घर तक इंटर लॉकिंग टाइल्स, रेलिंग व जाल निर्माण प्रस्तावित है। 5. उस्मान ठेकेदार के घर से जहीर के घर तक फील्ड का निर्माण, रेलिंग व इंटर लॉकिंग टाइल्स का लगभग 5.50 लाख का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 6. यशपाल आर्या कैबिनेट मंत्री जी के माध्यम से अल्पसंख्यक आयोग से एतात के घर से लेकर जाहिद के घर तक सड़क में इंटर लॉकिंग का लगभग 3.50 लाख का कार्य प्रस्तावित है। 7. अल्पसंख्यक मंत्री जी के माध्यम से पोस्ट ऑफिस में ताज के घर से राज गेस्ट हाउस तक रास्ते में इंटर लॉकिंग टाइल्स लगनी है। 8. विधायक जी के माध्यम से होने वाले 5 प्रस्तावित कार्य: 9. आशा के घर से मधु बिष्ट के घर तक सड़क में इंटरलॉकिंग का कार्य विधायक जी के माध्यम से 2 लाख रूपये से होना है। 10. राधे के घर से विलायत कॉटेज तक सड़क चौड़ीकरण विधायक जी के माध्यम से 2 लाख की लागत से होना है। 11. ग्लेंमोर में पूर्व चेयरमैन के घर से डंगवाल जी के घर तक सड़क निर्माण कार्य विधायक जी के माध्यम से 2 लाख की लागत से होना है। 12. संदीप आर्या जी के घर से धूप कोठी तक सड़क चौड़ीकरण, इंटर लॉकिंग का कार्य विधायक जी के माध्यम से 2 लाख की लागत से होना है। 13. वार्ड को साफ -सुथरा व स्वच्छ बनाने को कई योजनाएं हैं।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है।
अंक -9 : आज अपर मॉल रोड वार्ड नंबर-9 से सभासद दीपक बर्गली के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : दीपक बर्गली पुत्र : स्व. डी. एस. बर्गली शिक्षा : मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा, राजकीय पॉलिटेक्निक नैनीताल। जनहित के विभिन्न कार्यों में भागीदारी करते हैं। विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. तल्लीताल कपूर लॉज में कैंडिल फैक्ट्री से चिड़ियाघर पैदल मार्ग तक 2,49,145 रुपये की लागत से नाली निर्माण करवाया। 2. चिड़ियाघर मार्ग मेघदूत होटल के पास कूड़ाघर का 76,047 रूपये की लागत से और तल्लीताल रिक्शा स्टैंड से पायल होटल बिरला मार्ग तक टाइल्स निर्माण का कार्य 90,0440 रुपये की लागत से करवाया। 3. मॉल रोड स्थित प्राइमरी स्कूल की क्षतिग्रस्त दीवार का निर्माण 2, 55, 845 रुपये की लागत से करवाया। 4. माउंट रोज कम्पाउंड में केडी दीवार एवं उत्पल पांडे के घर के पास क्षतिग्रस्त मार्ग का कार्य 2,07,964 रुपये की लागत से करवाया। 5. तल्लीताल कपूर लॉज में शेखर पाठक जी के आवास के पास नाली का पुनर्निर्माण 2,63,114 रूपये की लागत से करवाया। 6. मॉल रोड नर्सरी स्कूल के समीप दीवार निर्माण रुपए 58,973 की लागत से करवाया। 7. तल्लीताल जिला पंचायत से लक्ष्मी कुटीर जाने वाले मार्ग में खुल्बे जी के आवास के समीप सड़क मरम्मत व पुनर्निर्माण कार्य 5,63,964 रूपये की लागत से करवाया। 8. बेलवाल होटल से मंगल दास साह जी के घर तक मार्ग का पुनर्निर्माण कार्य करवाया। 9. पूरे वार्ड में पथ प्रकाश व्यवस्था ठीक करवायी। वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. भाभर हॉल में रास्ते का पुनर्निर्माण 2. पायल होटल से अजय लाल जी के घर तक खड़ंजा निर्माण। 3. मेविला कम्पाउंड में शिव सिंह रावत के घर तक रास्ते का निर्माण। 4. धर्मा पालीवाल जी के घर से जवाहर सिंह जी के घर तक रास्ते का निर्माण। भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है। -प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (दीपक बर्गली, सभासद, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित)
अंक -8 : आज अयारपाटा वार्ड नंबर-8 से सभासद मनोज साह जगाती के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं…
सभासद परिचय : नाम : मनोज साह जगाती पुत्र : स्व.एम. बी.एल. साह जगाती शिक्षा : स्नातक (बी. कॉम) डीएसबी कॉलेज, नैनीताल, सामाजिक कार्य में डिप्लोमा, योगा में डिप्लोमा, आपदा प्रबंधन में डिप्लोमा, ग्रामीण एवं शहरी प्रबंधन में डिप्लोमा, नेटवर्किंग में डिप्लोमा, ऑफिस मैनेजमेंट में डिप्लोमा, वर्तमान में मानव अधिकार में डिप्लोमा में अध्ययनरत। संस्थापक : ‘जय जननी-जय भारत संस्था के अंतर्गत मनोज साह जगाती हजारों पौधे लगा चुके हैं व हजारों कट्टे कूड़ा व शराब की बोतलें निकाल चुके हैं। साथ ही 25वीं बार रक्तदान कर चुके हैं, अनगिनत लोगों को हल्द्वानी-नैनीताल में रक्त दिलवा चुके हैं। कपड़ा बैंक, ऑनलाइन ब्लड बैंक, बुक बैंक चलाते हैं। लॉकडाउन के दिनों में ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों को उन्होंने लगातार 125 दिनों तक आयुर्वेदिक चाय पिलाकर सेवा की, जन समस्या निवारण हेतु अयारपाटा शिकायत ग्रुप व अयारपाटा सेवा दल बनाया, जिसके माध्यम से लॉक डाउन में शेरवुड और अयारपाटा में सस्ती सब्जी के लिये आढ़त तथा मेडिकल कैंप भी लगवाए। युवाओं को नशा मुक्त रखने के लिये अयारपाटा फुटबॉल क्लब व फास्ट अयारपाटा क्रिकेट क्लब के बैनर तले टीमें भी उतारते हैं। निर्धन व असहाय परिवारों को विधायक जी के माध्यम से आर्थिक सहयोग दिलवाते हैं। शहर में किसी को भी आवश्यकता होती है तो मदद पहुंचाते हैं। सम्मानित हुए : 1. वन मंत्री उत्तरखण्ड सरकार डॉ. हरक सिंह रावात द्वारा सम्मान मिल चुका है। 2. उत्तरखण्ड सम्मान भी मिल चुका है। 3. पूर्व सांसद एवं वर्तमान महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा भी सम्मान मिल चुका है। 4. वन विभाग द्वारा भी समानित किया गया है। 5. लेक सिटी द्वारा भी समानित किया जा चुका है।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं : 1. अरोमा होटल के पास दीवार का निर्माण करवाया। 2. पुरानी शराब भट्टी से लेकर अरोमा तक रेलिंग निर्माण कार्य करवाया। 3. पर्दा धारा का जीर्णोद्धार कार्य करवाया जा रहा है। 4. नैनी रिट्रीट होटल से शिव मंदिर तल रेलिंग निर्माण, सड़क व दीवार मरम्मत का कार्य, नालियों के ऊपर तक जाल का निर्माण कार्य सब विधायक जी के माध्यम से करवाया गया। 5. डलहौजी मार्ग में रेलिंग का कार्य विधायक जी के माध्यम से करवाया। 6. श्री पूरन ढैला जी के घर के पास नाले के ऊपर जाल का काम करवाया। 7. श्री पूरन ढैला जी के घर के नीचे बड़ा नाला (विमल कुंज में निकलता है ) जो पूर्ण रुप से टूट चुका था सिंचाई विभाग के सहयोग से फिर से बनवाया गया। 8. श्री मनोज कुमार (मित्तल जी) के घर के पास रेलिंग का कार्य करवाया। 9. श्री मनोज कुंवर के दुकान के पास रेलिंग का कार्य करवाया। 10. पूर्व सभासद जितेंद्र बिष्ट जी के घर के पास रेलिंग का कार्य करवाया गया। 11. लंघम गर्ल्स हॉस्टल से वाल्मीकि बस्ती तक रेलिंग का कार्य करवाया। 12. श्री गुसाईं जी के घर के पास दीवार का कार्य करवाया। 13. ओकवुड स्कूल के आगे सड़क का जीर्णोद्धार विधायक जी के माध्यम से करवाया। 14. शेरवुड से जंगल कैंप तक रोड की मरम्मत विधायक जी के माध्यम से करवाया। 15. पप्पी दा की चाय की दुकान के पास बड़े नाले के ऊपर रेलिंग का कार्य ये भी विधायक जी के माध्यम से करवाया। 16. डीआईजी निवास के पास रेलिंग का कार्य व रोड की मरम्मत का कार्य विधायक जी के माध्यम से करवाया। 17. किर्लानी कम्पाउंड में किये गये विभिन्न कार्य : किर्लानी कम्पाउंड में सड़क की दीवार का कार्य, श्री पांडे जी के घर के पास रेलिंग का कार्य, श्री दुलारी राम के घर के पास सीढ़ियों का जीर्णोद्धार करवाया, माउंटेन विस्ट होटल के बगल में श्री चंद्रा जी के घर के पास टाइल्स का काम करवाया, किर्लानी कम्पाउंड में ही माउंटेन विस्ट की बगल में नई सीढ़ियों का निर्माण करवाया, श्री विजय (मास्टर साहब) के घर से शिव मंदिर तक सड़क का जीर्णोद्धार करवाया तथा रेलिंग का निर्माण दोनों अलग अलग बजट में करवाया, किर्लानी कम्पाउंड में ही श्री दानी जी के घर के पास टूटी हुई दीवार का निर्माण करवाया, श्री दानी जी के घर से श्री विजय (मास्टर साहब ) के घर तक रेलिंग का कार्य करवाया, श्री विजय (मास्टर साहब) के घर से व बक्स हॉस्टल के बीच में सीढ़ी निर्माण कार्य करवाया, श्री शिव शंकर जी के घर के बगल में सीढ़ियों का जीर्णोद्धार करवाया। 18. आजादी के बाद पहली बार सबसे पुराना मार्ग आठ मोड़ में दीवार का कार्य, रेलिंग और पूरी सड़क का जीर्णोद्धार करवाया ईंटों का बढ़िया खड़ंजा बनवाया। 19. आजादी के बाद पहली बार विमल कुंज से बारह पत्थर पैदल मार्ग की झाड़ियों का समय -समय पर कटान व मार्ग सफाई करवाना। 20. कैपिटोल सिनेमा के पीछे स्टाफ क्वार्टर में टाइल्स का कार्य व सीढ़ियों का कार्य तथा नालियों का निर्माण दोनों अलग अलग बजट से करवाये। 21. नगर पालिका के पीछे टाइल्स व चेन लगवाने का कार्य किया। 22. भोटिया मार्केट के आगे नाले का जीर्णोद्धार व जाल का निर्माण करवाया। 23. चाट मार्केट में नाले का जीर्णोद्धार व जाल निर्माण करवाया। 24. नगर पालिका के पास व फव्वारे के मध्य खाद बनाने हेतु ट्रंच बनवाये गये। 25. डीएसए के पीछे बोरा जी की दुकान तक का बंद रास्ता खुलवाया। 26. कोतवाली के आगे से बोरा जी की दुकान तक एडीबी के माध्यम से रेलिंग का कार्य करवाया। 27. रिक्शा स्टैंड से मंदिर तक चोरी की गयी बेंचेस को एडीबी के माध्यम से पुनः बेंचेस लगवायी गयी। 28. डीएसए पार्किंग में लगने वाले टॉवर का विरोध किया, क्योंकि उससे खेल प्रेमियों को नुकसान होता। 29. रिक्शा स्टैंड से लेकर मंदिर तक जो टाइल्स टूटी थी उनका एडीबी के माध्यम से पुनर्निर्माण करवाया। 30. पूरे फील्ड के चारों तरफ जो पुरानी लाइट थी उनको एडीबी के माध्यम से सही करवाया और जो नई लाइट थी उनको नगर पालिका के माध्यम से करवाया। 31. जनहित याचिका के बाद पूरे शहर में स्ट्रीट लाइट को सुचारु किया गया। 32. क्षेत्र में डोर टू डोर कूड़ा निस्तारण व स्वयं मेरे द्वारा निरिक्षण। 33. अनावश्यक कूड़ेदानों को हटाया गया, जिससे बंदर व आवारा पशुओं का आतंक कम हुआ। 34. गर्नी हाउस के पास क्रिया घर का जीर्णोद्धार करवाया। 35. डोर टू डोर गैस की व्यवस्था की गयी। 36. होली एंजेल से लेकर अरविन्द आश्रम तक टूटी रेलिंग का जीर्णोद्धार, दीवारों का जीर्णोद्धार दोनों ही विधायक जी के माध्यम से करवाये गये। 37. अयार जंगल कैंप से लेकर टिफिन टॉप तक रास्ते में राहगीरों हेतु बेंचेस लगवायी तथा कूड़ेदान लगवाये। 38. पुरानी शराब भट्टी से लेकर अरोमा होटल तक नशा मुक्त सड़क बनायीं गयी। 39. चोरी की वारदातों को रोकने के लिये बिना सत्यापन अनजान व्यक्ति के प्रवेश पर प्रतिबंध। 40. आजादी के बाद पहली बार बक्स हॉस्टल में स्ट्रीट लाइट तथा तारा जौरज आउट हाउस के पास स्ट्रीट लाइट लगवायी। 41. मस्जिद से राजभवन तक कई जगह लोनिवि के माध्यम से दीवारों का कार्य ध् सड़क की मरमत का कार्य करवाया। 42. कुंदन बिष्ट जी के घर के पास सीढ़ी और रेलिंग निर्माण कार्य करवाया।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं : 1. अयारपाटा में ओपन जिम का निर्माण कराना। 2. स्टाफ क्वार्टर तक दो जगह सड़क का निर्माण व रेलिंग का निर्माण करवाना। 3. अयारपाटा में जगह जगह बेंच लगवाना। 4. अयारपाटा में विभिन्न मार्गो पर बारिश व धूप से बचने हेतु शेड का निर्माण। 5. अयारपाटा में सभी मार्गो पर रेलिंग व मार्गो का जीर्णोद्धार। 6. मोदी भवन के पास श्री नवल जी के घर तक रेलिंग व सड़क का निर्माण करवाना। 7. लंघम हॉस्टल के पास बस्ती में श्री आनंद जी के घर से गुसाईं राम जी के घर तक सड़क निर्माण। 8. अयार जंगल कैंप से 16 नंबर कोठी तक स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था। 9. नगर पालिका के पीछे नई सीवर लाइन बिछ्वानी है। 10. क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट के नये पोल लगवाने है। 11. डीआईजी रोड से सनवाल जी के घर तक सड़क का निर्माण व पुलिया में रेलिंग का निर्माण। 12. अयारपाटा की समस्त अल्पसंख्यक बस्ती में स्ट्रीट लाइट लगवाना। 13. अयार जंगल कैंप से श्री मनोज कुंवर जी के घर तक रेलिंग का कार्य। 14. श्री मनोज कुंवर जी के घर से श्री हीरा सिंह बिष्ट जी के घर तक रेलिंग का कार्य। 15. अयारपाटा में तीन चिन्हित स्थानों पर प्याऊ लगने हैं जिनका टेंडर हो चुका है। 16. काशीपुर हाउस से दीपू बोरा जी के घर तक रेलिंग का कार्य। 17. देवी एकेडमी स्कूल की बगल में टाइल्स निर्माण कार्य। 18. श्री कुंदन सिंह बिष्ट जी के घर के आगे रेलिंग का निर्माण।
भविष्य की योजना : 1. आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है जिसके अंतर्गत : 2. नैनीताल में सेना की भर्ती हेतु युवाओं के लिए निःशुल्क आर्मी ट्रैनिंग अकेडमी खोलना। 3. नैनीताल में अहसाय बुजुर्गों के लिए वृद्धा आश्रम बनवाना। 4. गरीब लड़कियों की शादी हेतु ट्रस्ट बनाना। 5. नैनीताल और उत्तराखंड के जंगलों को स्वच्छ व हरा-भरा करना। 6. नैनीताल के जीबी पंत (रैमजे) चिकित्सालय को एम्स जैसा बनवाना।
-प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (मनोज साह जगाती, सभासद, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित)
अंक -7 : आज सूखाताल वार्ड नंबर-7 से श्रीमती गजाला कमाल के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : श्रीमती गजाला कमाल पति : श्री कमाल खान शिक्षा : स्नातक (बीए, बीएड, बी लिब, बीए-उर्दू)
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. सूखाताल ऐशडेल स्कूल को पूरी तरह रेनोवेट करवाया गया। यहां कक्षाएं बहुत खस्ता हालत में थीं। यहां लाइट का काम, ब्लैक बोर्ड, दरवाजों की टूट-फूट, छत की चादर, स्कूल में रंग-पुताई का काम भी करवाया। 2. सूखाताल में होनी वाली रामलीला के प्रांगण का कार्य करवाया, जिसमें लॉकिंग टाइल्स बिछाये गये। 3. सूखाताल के शौचालय में जल की व्यवस्था करवायी गयी। 4. सूखाताल में वाल्मीकि कॉलोनी में 3 जगह लाइट की व्यवस्था की गयी है। 5. रॉयल होटल कम्पाउंड के गेट से पूरी कॉलोनी में लॉकिंग टाइल्स का कार्य करवाया गया। 6. रॉयल होटल कंपाउंड के छोटे नालों में लोहे की जालियां लगायी गयी। 7. रॉयल होटल कम्पाउंड के नाले के किनारों पर ग्रिल लगावायी गयी। 8. रॉयल होटल के अंदर जाने वाली सड़क पर भी ग्रिल लगवाने का कार्य किया गया। 9. रॉयल होटल कम्पाउंड में दो पत्थर की दीवारें बनवायी गयी। 10. पौनी सराय की सीढ़ियों से लेकर मैट्रोपोल के अंदर की सड़कों का इस्टीमेट भी तैयार है, जल्द ही लगवा दिया जायेगा। 11. टीआरसी से धामपुर बैंड तक पथ प्रकाश की व्यवस्था करवायी गयी। 12. कूड़ा निस्तारण के लिये अवेयरनेस प्रोग्राम चलाने के लिऐ हिलदारी अभियान वार्ड नंबर 7 सूखाताल में सबसे पहले लायी गयी। 13. हमारे वार्ड में डोर टू डोर का कार्य क्रिर्यान्वित किया गया जो आज 99ः घरों में चल रहा है। 14. वार्ड में बैंच की व्यवस्था भी की गयी है, जो कि टूरिस्ट और लोकल लोगों के बैठने के काम आये, इसलिए रॉयल होटल कंपाउंड गेट के सामने लगवायी गयी है। 15. रॉयल होटल कंपाउंड में एक मोहित भाई के घर से फैसल भाई के घर तक सीवर और रोड का कार्य करवाया। 16. कोरोना काल में वार्ड के लोगों के साथ हर समय खड़े रह कर काम किया, राशन से लेकर दवाइयां पहुंचाने का कार्य पूरी जिम्मेदारी से किया।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. सूखाताल चौराहे से बस्ती तक का निर्माण कार्य जिस का टेंडर हो चुका है, शीघ्र ही काम शुरू हो जाएगा। 2. सूखाताल नाले के किनारों के लिए ग्रिल बन चुकी हैं, जो जल्द ही लग जायेगी, क्योंकि इस नाले में अक्सर गाये गिर जाया करती है, बेजुबान जानवरो की सुरक्षा को लेकर इस कार्य को किया गया है। 3. सूखाताल में ही वाल्मीकि कॉलोनी में एक जगह पोल लगने हैं, पोल आ गये है जो जल्द ही लगा दिया जाऐगा। 4. बंगाली कॉलोनी में भी पोल लगने है वो भी शीघ्र लगा दिये जाएंगे। 5. बंजारा बस्ती में सड़क निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 6. रॉयल होटल कम्पाउंड की कुछ छोटे कार्य प्रस्तावित हैं। 7. रॉयल होटल कंपाउंड में जिस-जिस स्थान पर पथ प्रकाश की आवश्यकता है उन स्थानों पर बहुत जल्दी ही पोल लगा दिये जाएंगे।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है, मेरा मुख्य उद्देश्य स्वच्छता है। मैं चाहती हूं, मेरा वार्ड ‘डिजिटल वार्ड’ के रुप में विकसित हो। -प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (श्रीमती गजाला कमाल, सभासद, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित)
अंक -6 : आज नारायण नगर वार्ड नंबर 6 से सभासद भगवत सिंह रावत के कार्यों व भावी योजनाओं से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय: नाम : भगवत सिंह रावत पिता : स्व. श्री उदय सिंह रावत शिक्षा : ग्यारहवीं कक्षा उत्तीर्ण
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. देव पाटा (पॉलिटेक्निक) से लेकर नारायण नगर तक सीवर लाइन निर्माण करवाया। 2. पॉलिटेक्निक से लेकर वाल्मीकि बस्ती तक ग्रिल, सीसी, व पैराफिट निर्माण करवाया। 3. वाल्मीकि बस्ती में गेट व बारात घर का निर्माण करवाया। 4. पिटरिया में मुल्ला जी के घर से लेकर सादिक भाई के घर तक सीसी निर्माण करवाया। 5. पिटरिया से नारायण नगर तक दीवार-पैराफिट व सीसी मार्ग का निर्माण करवाया। 6. नारायण नगर में दो बाथरूम, दर्शन घर में सीसी निर्माण करवाया। 7. नारायण नगर में ही सुदीप के घर तक सीसी दीवार निर्माण करवाया। 8. नारायण नगर में ही मोहन दा के घर के पास से रामलीला मैदान तक दीवार व रास्ता निर्माण करवाया। 9. नारायण नगर में एक बारात घर का निर्माण भी करवाया। 10. देश आजाद होने के बाद पहली बार पुतली बाई कब्रिस्तान (नारायण नगर) में सीसी, सोलर लाइट व ग्रिल निर्माण करवाकर सड़क पहुंचाई गयी। 11. नारायण नगर में क्रिया घर निर्माण करवाया। 12. नारायण नगर में ही घिंगारी के गधेरे से श्रोत का पानी लाने को पाइप लाइन की फिटिंग करवायी। 13. नारायण नगर में ही बारात घर से लेकर पानी की टांकी तक दीवार व सीसी निर्माण करवाया। 14. नारायण नगर में मोबाइल टॉवर लगवाया। 15. नारायण नगर की ठप वि।ुत आपूर्ति को सुचारु किया गया। 16. नारायण नगर में पार्किंग व्यवस्था करवायी गयी। 17. नारायण नगर मंदिर का सौंदर्यीकरण कार्य करवाया। 18. एटीआई से लेकर पंत जी की दुकान तक सीसी निर्माण तथा ग्रिल निर्माण करवाया। 19. शेरवानी मार्ग के नाले में ग्रिल का निर्माण कार्य करवाया। 20. वाल्मीकि बस्ती से बारह पत्थर मंदिर तक सड़क में टाइल्स, ग्रिल व दीवार निर्माण करवाया। 21. बारह पत्थर मुस्लिम कब्रिस्तान में उर्स के लिये एक हॉल का निर्माण करवाया। 22. मुस्लिम कब्रिस्तान में ही सीसी मार्ग निर्माण करवाया। 23. क्रिश्चियन चर्च तक सीसी मार्ग निर्माण करवाया। 24. घोड़ा स्टैंड बारह पत्थर में पानी लाइन लगवायी… 25. घोड़ा स्टैंड पर लोगों के बैठने के लिये 08-10 बेंच लगवाई तथा सीसी निर्माण करवाया। 26. नरेंद्र सिंह जी के घर से रूबी जी के घर तक सीसी निर्माण करवाया। 27. क्षेत्र में सोलर लाइट लगवायीं। 28. बुजुर्गो को पेंशन व जरूरतमंदों को आर्थिक सहायता प्रदान की गयी।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. नारायण नगर सामुदायिक भवन से पानी के श्रोत तक सीसी सड़क निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 2. रामलीला मैदान में छत प्रस्तावित है। 3. सामुदायिक भवन से देवी माँ मंदिर तक दीवार, सीसी, रेलिंग निर्माण प्रस्तावित। 4. आबिद के घर के पास सीसी निर्माण। 5. गैरीखेत रोड से नारायण नगर तक नाली निर्माण कार्य प्रस्तावित है। 6. श्री रमेश पांडे जी के घर से पॉलिटेक्निक तक रेलिंग निर्माण प्रस्तावित है। 7. नारायण नगर में नाली मरम्मत व ग्रिल निर्माण कार्य प्रस्तावित है।
भविष्य की योजना: यदि जनता इसी तरह प्यार दे तो आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है।
-प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (भगवत सिंह रावत, सभासद, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित)
अंक -5 : आज हरिनगर वार्ड नंबर-5 से सभासद पुष्कर बोरा के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:-
सभासद परिचय : नाम : पुष्कर बोरा पुत्र : श्री आनंद सिंह बोरा शिक्षा : आम्रपाली कॉलेज, हल्द्वानी से होटल मैनेजमेंट में त्रिवर्षीय डिप्लोमा।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं: 1. टीचर्स कॉटेज में रास्ता व सीढ़ी निर्माण करवाया। 2. ब्रेसाइड कंपाउंड में मुन्नी देवी जी के घर से लेकर वीरेंद्र जोशी जी के घर तक एक रास्ता और दीवार निर्माण करवाया। 3. सुरेश जोशी जी के घर के आगे बच्चों के खेलने के लिये पार्क बनवाया। 4. भानू प्रताप आर्या के घर से लेकर देवकी मनराल जी के घर तक रास्ता बनवाया। 5. ओक लॉज में गोपाल आर्या जी के घर से लेकर रंजीत के घर तक क्षतिग्रस्त रास्ते की मरम्मत करके दीवार समेत रास्ता बनवा रहे हैं। 6. बहुत कोशिश कर करके सैनिक स्कूल से लेकर बिरला चुंगी तक लोनिवि द्वारा रेलिंग, दीवार निर्माण व सड़कों के गड्ढे भरवा रहा हूं। 7. देवली फील्ड में नई लाइट लगवायी। 8. पुराना राजभवन में पानी की बड़ी समस्या थी, जिसके लिये जल संस्थान से कई बार अनुरोध करके बिरला चुंगी वाली लाइन से हटाकर टांकी बैंड से जलापूर्ति करवायी जिससे लोगों को राहत मिली। 9. टांकी में दूरदर्शन से लेकर त्रिलोचन टांक जी के घर तक का रास्ता बनवाया।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं : 1. देवली फील्ड में रास्ता व दीवार निर्माण स्वीकृत करवाया, शीघ्र ही काम शुरू हो जाएगा। 2. हरीश बिष्ट जी के घर से लेकर राजेंद्र बिष्ट जी के घर तक की सीढ़ियों का टेंडर हो चुका है। शीघ्र काम शुरू होने वाला है। 3. त्रिलोक भट्ट के घर से लेकर सुमन बिष्ट के घर तक का रास्ता भी जल्दी होना है, जिसकी सारी प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। 4. कंचन साह जी के घर के पास सस्ते गल्ले की दुकान से लेकर रंजीत थापा जी के घर तक के रास्ते को सही करवाना है.. 5. विद्युत के पांच पोल स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से ब्रेसाइड में एक, देवली फील्ड में एक, आल्मा कॉटेज में चंदन बिष्ट जी के घर के पास एक, महेश भट्ट जी के घर के पास एक और एक पुराना राजभवन में एक पोल लगना है। 6. ऑक लॉज में दो-तीन दिन में ही नई लाइट लगवानी है। 7. हनुमान मंदिर के पास राजू बिष्ट के घर से लेकर दीवान बिष्ट जी के घर तक का सीढ़ी वाला रास्ता प्रस्तावित है। 8. महेश भट्ट जी के घर के पास रेलिंग का प्रस्ताव दे रखा है.. 9. निहारिका आर्या के घर से लेकर मोंटी के घर तक का रास्ता बनना है। 10. टांकी बैंड से आगे डामर की सड़क धंस रही है, जिसके लिये लोनिवि को बता रखा है, जल्द ही उस पर कार्य होगा।
भविष्य की योजना : आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है।
श्री पुष्कर बोरा, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित)
अंक -4 : आज हरिनगर वार्ड नंबर-4 से सभासद रेखा आर्या के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं:
सभासद परिचय : नाम : श्रीमती रेखा आर्या पति : श्री सुनील कुमार शिक्षा : स्नातक (बी.ए. राजनीति शास्त्र), डीएसबी परिसर, नैनीताल। महिला मंडल समूह से भी जुड़ी हुई हैं।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं:
1. नेशनल होटल के नीचे नाले का निर्माण करवाया। 2. भगत जी (धोबीघाट) के घर पास की दीवार का निर्माण करवाया। 3. धोबीघाट में श्याम जी के घर के पास व अन्य लोगों के घर के पास सीसी निर्माण करवाया। 4. धोबीघाट में ही शौचालय का निर्माण करवाया। 5. बूचड़खाने में गुड्डू के घर के पास सीढ़ी व सीसी निर्माण करवाया। 6. बूचड़खाने में मस्जिद के पीछे नौशाद के घर से नंद लाल के घर की ओर नाली निर्माण करवाया। 7. बूचड़खाने में ही इकराम के घर के पास दीवार का निर्माण करवाया। 8. वैष्णों देवी मंदिर नया बाजार के पास टाइल्स निर्माण कार्य करवाया। 9. कन्नू लाल जी के घर के पास सीढ़ी व सीसी निर्माण करवाया। 10. हरिनगर में सीसी मार्ग निर्माण करवाया। 11. हरिनगर में श्रमजीवी संस्था के द्वितीय तल का निर्माण करवाया। 12. नाला नंबर 54 की मरम्मत सिंचाई विभाग के द्वारा करवायी। 13. नया बस अड्डा (रोडवेज) तल्लीताल के नीचे नाले का मरम्मत कार्य भी और सफाई कार्य भी चल रहा है। 14. बूचड़खाने में तीन, हरिनगर में चार, धोबीघाट में दो व लकड़ी टाल में एक नई लाइटें लगवाई।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं: 1. फौजी भैया के घर के पास नाली पर जाल लगवाना है। 2. हरिनगर में दिनेश कटियार के घर के पास वाले नाले पर रेलिंग लगवानी है। 3. मिल हाउस में क्षतिग्रस्त शौचालय का मरम्मत कार्य। 4. हरिनगर में कपूर भवन में नाले के पास जाल लगवाना है। 5. धोबीघाट में क्षतिग्रस्त डिग्गियों का मरम्मत कार्य कराना है। 6. तल्लीताल रामलीला मैदान हरिनगर मोटर गैराज के पास लोगों के घर के आगे नालियों का निर्माण कराना है। 7. श्रमजीवी संस्था के आगे सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करवाना है। 8. प्रकाश व्यवस्था के लिये छः नये पोल लगने हैं, जिसमें बूचड़खाने में दो, 9. लकड़ी टाल में दो, नया बाजार में एक व ममता जोशी के घर के पास रोड में एक पोल लगना है। 10. शहीद मेजर राजेश अधिकारी इंटर कॉलेज की दीवार पिछले वर्ष गिर गयी थी, जिसका दैवीय आपदा के अंतर्गत निर्माण करवाना है।
भविष्य की योजना: बलियानाला का सही प्रकार से निर्माण हो जाये, यही मेरा उद्देश्य है, यही मेरा सपना है।
-प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (श्रीमती रेखा आर्या, सभासद नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित।)
अंक -3 : आज पेश हैं राजभवन वार्ड नंबर-3 की सभासद महोदया निर्मला चंद्रा के कार्य एवं भावी योजनाएं:
सभासद परिचय : नाम : श्रीमती निर्मला चंद्रा पत्नी : श्री राजेश चंद्रा शिक्षा : परास्नातक (एम.ए.) समाजशास्त्र, डीएसबी परिसर, नैनीताल। पिछले 15 वर्षों से आशा कार्यकत्री हैं।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं:
1. तल्लीताल रॉक हाउस के पास के नाले पर जाल लगवाकर एक सीढ़ीनुमा रास्ता बनवाया, जिससे करीब 08-10 परिवार लाभान्वित हुए। 2. सेंट जोसेफ के पास जहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के घर हैं, वहां नाली बनवायी, नाला ठीक करवाया और जाल लगवाया। 3. पुराने जिला पंचायत के पास रास्ता ठीक करवाया। 4. अभी कुछ दिन पहले सेंट मेरीज कॉलेज के गेट के सामने व पूरन पार्क में प्रकाश व्यवस्था के लिये नये कनेक्शन करवाये।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं:
1. वार्ड में और प्रकाश व्यवस्था करवानी है, क्योंकि जंगल का क्षेत्र है। जानवरों का खतरा बना रहता है, इसलिये अभी और विद्युत पोल की मांग की है। 2. अभी वार्ड में जहां-जहां सोलर लाइट लग सकती हैं, वहां सोलर लाइट लगवानी प्रस्तावित हैं। 3. टिफिन टॉप वाले रास्ते में पानी का नल, वॉश रूम, जगह-जगह लाइटें और बेंच की व्यवस्था करवानी है, जिससे स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों को भी राहत मिल सके। 4. इसके अलावा अभी बहुत काम प्रस्तावित हैं, जो समय-समय पर करते रहेंगे।
भविष्य की योजना: भविष्य में महिलाओं के उत्थान एवं महिला सशक्तिकरण के लिये के लिये और अधिक प्रयास व कार्य करने हैं।
-प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (श्रीमती निर्मला चंद्रा, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित।)
अंक -2 : आज पेश हैं शेर का डांडा वार्ड नंबर-2 के सभासद सुरेश चंद्र के कार्य एवं भावी योजनाएं:
सभासद परिचय : नाम – सुरेश चंद्र पुत्र – स्व. डीआर आर्या शिक्षा – स्नातक (बीए), डीएसबी परिसर, नैनीताल।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं :
1. स्टोनले कम्पाउंड में लगभग 100 मीटर लम्बी सड़क टाइल्स वाली बनवाई गयी। 2. स्टोनले में ही अमर उजाला के डा. तिवारी जी के घर से लेकर ऊपर टॉप तक सीढियाँ बनवायीं। 3. स्टोनले में ही एक कूड़ा घर दूसरी जगह स्थानांतरित करके उसकी जगह वहां विश्राम गृह बनवाया गया। 4. स्टोनले में ही अभी दो कार्य चल रहे हैं। सड़क पर कोई कूड़ा न फेंके, इस हेतु जालियां लग रही हैं। साथ ही प्रतिमा राठौर के घर से रेलिंग वाली सीढियाँ बन रही हैं। 5. मंगावली में भगवत रावत जी के घर के पास लगभग 100-150 मीटर लम्बी रेलिंग लगवाई। 6. गोपाल सिंह नेगी जी के आवास के आगे दीवार का निर्माण कार्य करवाया। 7. नगरपालिका कर्मचारी सुरेश कुमार जी के घर के आगे क्षतिग्रस्त दीवार का निर्माण कार्य चल रहा है। 8. मंगवाली में ही हमने टाइल्स वाली सड़क बनवायी। 9. मंगावली में मंदिर में टाईल्स व रेलिंग लगवाईं। 10. मंगवाली में मंदिर जाने वाले रास्ते का निर्माण कार्य करवाया। 11. काली मंदिर में भी काम करवाया। 12. रतन कॉटेज में ही एक लगभग 150-200 मीटर लम्बा खड़ंजा बन रहा है। 13. रतन कॉटेज में ही टंकी के ऊपर से किशन राम जी के आवास के पास तक रेलिंग व टाइल्स रोड निर्माण कार्य व गोविन्द जी के आवास के पीछे क्षतिग्रस्त दीवार का निर्माण कार्य करवाया। 14. राजमहल क्षेत्र में कार्य करवाया, टाइल्स वाली रोड बनवा दी गयी है। वहां लगभग 70 प्रतिशत रास्ते सही करवा दिये गये हैं। 15. मेरे वार्ड में प्रकाश व्यवस्था और सफाई व्यवस्था बिल्कुल सही है। यदि कहीं से कोई शिकायत आती है तो हम उसे तुरंत निस्तारण करने की कोशिश करते हैं।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं:
1. राजपुरा क्षेत्र में 9 लाख रुपये का रेलिंग का कार्य प्रस्तावित है। 2. दो-तीन टूट गयी दीवारें बननी हैं। 3. धारे के पास जीर्णोद्धार हो रहा है, उसमें रेलिंग और रास्ता बनेगा। 4. बिड़ला चुंगी में छूटे कार्य भी प्रस्तावित हैं। 5. इसके अलावा अभी बहुत काम प्रस्तावित हैं, जो समय-समय पर करते रहेंगे।
भविष्य की योजना: आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है
-प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल। (सुरेश चंद्र, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से बातचीत पर आधारित। )
अंक : 1 : वार्ड-1 के सभासद पर ‘आज़ाद के तीर’
पहली कड़ी में हम नगर के स्टाफ हाउस वार्ड नंबर-1 के सभासद सागर के कार्यों से आपको अवगत करा रहे हैं…
सभासद परिचय:- नाम :- सागर आर्या पिता :- श्री नंद लाल शिक्षा :- स्नातक (बी.ए. राजनीति शास्त्र), डीएसबी कॉलेज, पूर्व सचिव, छात्र संघ नैनीताल।
विकास कार्य जो अब तक किये गये हैं:-
पॉपुलर कम्पाउंड की लगभग 15-20 फीट लम्बी दीवार बनवाई गयी।
पॉपुलर कम्पाउंड में ही एक पानी के नल के पास पुल बनवाया गया।
पॉपुलर कम्पाउंड में ही एक बड़ा लोहे का पुल व रेलिंग निर्माण करवाया गया।
चार्टन लॉज कम्पाउंड में रेलिंग निर्माण व दो जगह रास्ते सही करवाए हैं।
मेरे वार्ड में प्रकाश व्यवस्था बिल्कुल ठीक है, हनुमान मंदिर के पास बल्ब नहीं था, वहां मैंने एक बल्ब लगवाया था। अब प्रकाश व्यवस्था पूरी तरह सही है।
वे विकास कार्य जो अभी प्रस्तावित हैं:-
चार्टन लॉज में स्विफ्ट की कोठी से लेकर ऊपर तक का रास्ता ठीक करवाना है।
हनुमान मंदिर से लेकर तरुण कुमार मोंटी के घर तक का रास्ता ठीक करवाना है।
ट्रॉली के दूसरे पोल से रास्ता खराब है वो सही करवाना है।
आशु उपाध्याय के घर के पास का रास्ता सही करवाना है।
पार्वती देवी जी के घर के पास रास्ते का काम है।
रवि भाई के घर के पास दीवार बनानी है।
रोहित भाई की दुकान के पास रास्ता सही करवाना है।
हनुमान मंदिर के पास सीढियाँ हैं, वो दोबारा शांति देवी जी के घर से नाहिद जी के घर तक सही करवानी हैं, व रेलिंग निर्माण करवाना है।
भविष्य की योजना:- आगे भी जनसेवक के रूप में कार्य करना है। -प्रस्तुति : मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद), आजाद मंच, नैनीताल।
अंक 159 : अभिभावक वहां लुट रहे यहाँ इन स्कूलों को नहीं कर रहे मामूली सहयोग भी..
अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों को नहीं मिल रहा सहयोग,
मामूली फीस होने के बावजूद भी अभिभावक नहीं दे रहे सहयोग
बिजली -पानी के बिलो ने प्रबंधन की तोड़ी कमर, स्कूल स्टाफ़ की नहीं रोकी सेलरी
साहिबान,
आज हम जिस मुद्दे की बात करने वाले हैं उसका नाम है विद्यालय,
ना, ना ये वो वाले विद्यालय नहीं, जिनमें शिक्षा से ज़्यादा स्टेशनरी का सामान मिलता है जो आजकल भी अभिभावकों को जमकर लूट रहे हैं और अभिभावक भी चुपचाप एक जेब खाली होने पर दूसरी जेब आगे कर दे रहे हैं,
यहां तक कि कुछ अभिभावक लोन लेकर बच्चों की भारी भरकम ट्यूशन फीस चुका रहे हैं,
हम आज ऐसे अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों की बात कर रहे हैं, जिनमें फीस नाम मात्र की होती है, ये वो विद्यालय होते हैं जब सारे स्कूल हम जैसे मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के लिये मोटी फीस के अभाव में अपने दरवाज़े बंद कर लेते हैं तब ये स्कूल हमारे लिये ऑक्सफ़ोर्ड से कम नहीं होते, वहाँ की सादगी, वहाँ का अपनापन, हर चीज़ में अलग जादू होता है,
आज़ादी के बाद से अब तक न जाने कितनी अज़ीम हस्तियां इन विद्यालयों से पढ़कर निकलीं और देश -विदेश में नाम कमाया, इन विद्यालयों ने आज तक हर बच्चे को शिक्षा देकर समाज में इज़्ज़त से जीना सिखाया है, लेकिन बड़े अफ़सोस की बात ये है कि
आज संकट के इस दौर में हम इन विद्यालयों की तरफ़ देख भी नहीं रहे हैं, जिन विद्यालयों ने हमें हँसना सिखाया, आज हम उसके बुरे दौर में उसका साथ नहीं दे रहे हैं, हम लूट – खसोट करने वालों को इज़्ज़त की नज़र से देखते हैं लेकिन कभी हमने इन विद्यालयों के उन अध्यापकों, कर्मचारियों के बारे में नहीं सोचा जिन्होंने हमें सिर्फ़ शिक्षा दी, हमसे बिज़नेस नहीं किया,
लॉकडाउन की इस विपत्ति वाली घड़ी में क्या हमारा फ़र्ज़ नहीं बनता कि मात्र 100 रूपये मासिक आर्थिक सहयोग राशि हम बिन मांगे विद्यालय में दे आये,
सबसे बुरे दौर से गुज़र रहे अशासकीय सहायता प्राप्त इन विद्यालयों का पानी व बिजली का बिल भी इतना आया है, जिसे चुकाने में आधा स्कूल ही गिरवी रखना पड़ जाये, वक़्त की दोहरी मार झेल रहे इन विद्यालयों को इस वक़्त हमारी ज़रूरत है, वक़्त रहते इन विद्यालयों की सुध लेने की दरकार है,
वरना वक़्त निकल गया तो फिर हमारे बच्चों को कौन शिक्षा के सही मायने सिखाएगा?
आख़िर में,
सभी अभिभावकों से हमारा अनुरोध है कि जिसके बच्चे इन अशासकीय सहायता प्राप्त (चेतराम साह ठुलघरिया इंटर कॉलेज, भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय, राष्ट्रीय शहीद सैनिक विद्यालय विद्यापीठ, सरस्वती शिशु मंदिर, बालिका विद्या मंदिर, नगर पालिका इंटर कॉलेज (एशडेल ) जैसे अनेकों विद्यालय में पढ़ रहे हों, उनमें बिन बुलाये जाये और अपने जागरूक होने का फ़र्ज़ अदा करें, जिससे हमारे आत्मसम्मान को बनाये रखने वाले विद्यालय का आत्मसम्मान भी बना रहे…
न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर
अंक 158 : नैनीताल का सिर्फ़ इमारत वाला अस्पताल, यहाँ तो बाड़ ही खा रही उजाड़…
–यही हाल रहा तो हो जाएगा नाम ‘खंडहर वाला अस्पताल’
-कौन है और कौन होगा ज़िम्मेदार ? महापुरुषों के नाम का भी नहीं हो रहा सम्मान !
साहिबान,
आज हम जिस ऐतिहासिक इमारत का ज़िक्र करने वाले हैं, उसके बारे में बात करने से पहले उस अज़ीम हस्ती के बारे में जानना बेहद ज़रुरी है जिसकी शान में ये आलीशान इमारत नज़र की गयी…
वो थे कुमाऊं किंग कहे जाने वाले 1816 में जन्मे सर हेनरी रैमजे,
कुमाऊँ में बतौर कमिश्नर सर्वप्रथम एडवर्ड गार्डनर तत्पश्चात जी. डब्लू. ट्रेल, सी. टी. लूसिंग्टन, जे. एच. बैटन, हेनरी रैमजे व अंत में पर्सी विंडहम क्रमशः रहे. परन्तु उस दौर के सभी प्रशासकों में सर रैमजे सर्वाधिक प्रतिभाशाली और लोकप्रिय शासक रहे. उन्होंने कुमाऊँ में लगभग सैंतालीस (47) साल तक विभिन्न पदों पर रहते हुए अपने सम्पूर्ण जीवन के सतहत्तर (77) सालों में से पचपन साल (55) कुमाऊं में ही व्यतीत किये. उन्होंने यहाँ विभिन्न पदों यथा कनिष्ठ सहायक कमिश्नर (1840-1850,) वरिष्ठ सहायक कमिश्नर (1851-1855,) डिप्टी कमिश्नर (1855-1856) व कमिश्नर (1856-1884) के पद पर रहते हुए कार्य किया,
कुमाऊँ कमिश्नर के रूप में उन्होंने अठाईस बेमिसाल वर्ष व्यतीत किये.
सरकारी सेवानिवृत्ति के पश्चात भी लगभग आठ साल तक सर रैमजे कुमाऊँ में ही रहे. सर हैनरी रैमजे के कुमाऊँ कमिश्नर रहते हुए उन्होंने इस क्षेत्र में अनेक सुधार व विकास के कार्य किये गये..
सर रैमजे के कार्यों व उनके योगदान व नाम को अमर रखने के लिए यहां के लोगों ने सम्मान पूर्वक अनेक विद्यालयों, अस्पतालों व सड़कों आदि के नामकरण उन्हीं के नाम से किये जिनमें प्रमुख रूप से अल्मोड़ा में सन 1844 में इंग्लैंड की मिशनरी की सहायता से रैमजे हाई स्कूल को बनाया गया तथा नैनीताल में रैमजे अस्पताल कुछ स्थानीय सक्षम साह लोगों व कुछ यूरोपियनों द्वारा आर्थिक मदद से सन 1892 में बनाया गया. ये दोनों स्मारक कुमाऊँ के किंग सर रैमजे को समर्पित हैं…
आज हम उसी कुमाऊं किंग के सम्मान में समर्पित अस्पताल की बात करेंगे जिसकी हालत बद से बदतर होती चली जा रही है,
हालांकि मौजूदा दौर में उसे भारत रत्न पंडित गोविन्द बल्लभ पंत के नाम से भी जाना जाता है, और मौजूदा हालातो की चर्चा करें तो हमें अस्पताल में एक्स रे मशीन, इ -सी जी मशीन दिखती हैं लेकिन उन्हें ऑपरेट करने वाला कोई नहीं,
बुरी नज़र न लगे तो आज भी इमारत बुलंद है और अपनी दिलकशी की वजह से दूर से ही मदहोश करती है, बस मायूसी तब बढ़ जाती है, जब कोई मरीज़ अपना इलाज कराने की ख्वाहिश मन में पाल लेता है और अस्पताल के अंदर दाख़िल होते ही उसकी ख्वाहिशें फ़ाख्ता हो जाती है,
आखिर क्या देख लेता हैं मरीज़ जो दबे पाँव वहां से भाग खड़ा होता है,
वो भागे क्यों न, भई दरअसल एक मरीज़ को क्या चाहिए, अस्पताल के किनारे पर लम्बी लाइन, पर्चा बनाते हुये एक कर्मचारी, डॉक्टर के चैम्बर में लगी हुई भीड़ और एक एक करके आला लगाकर चेक अप करते डॉक्टर और सबसे लास्ट में फ्री में मिली हुई सरकारी सफ़ेद मोटी मोटी गोलियों का पैकेट…
बस इतना सा ही तो ख़्वाब होता है, एक रेगुलर मरीज़ का…
जिसे रैमजे अस्पताल / जी बी पंत चिकित्सालय पूरा नहीं कर पा रहा है,
सन 1892 में बने इस अस्पताल को आज उसी तरह एक कुमाऊँ किंग की ज़रूरत है, जिसके नाम को समर्पित इस अस्पताल को किया गया था,
या अगर विदेशी वाला कुछ उस टाइप की फीलिंग्स आने की वजह से अस्पताल का उद्धार नहीं कर पा रहे हैं तो कम से कम हमारे भारत रत्न पंडित गोविन्द बल्लभ पंत जी के मान सम्मान की कुछ तो क़द्र होनी चाहिए,
नैनीताल जैसी वीआईपी सिटी में अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं न होने पर एक आम नागरिक
बड़े-बड़े संस्थानों व ज़िम्मेदारों की तरफ़ बड़ी हसरत भरी निगाह से देखता है,
लेकिन सिर्फ़ देखता है,
कहने की सोचता हैं लेकिन कोई आरोप लगने की वजह से खामोश हो जाता है…
और 10 सितंबर का इंतज़ार करता है कि महापुरुष के सम्मान में शायद उस दिन अस्पताल की हालत सुधारने को कोई घोषणा हो जाये…
लेकिन नहीं…
उस इतंज़ार के बदले में मिलता है सिर्फ़ खाली पड़ा बदहाल अस्पताल….
जिसे वक़्त रहते विकसित नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक इमारत को खंडहर के रुप में न देखें…
लेकिन सबसे बड़ी बात, समस्या का हल करे तो कौन ? क्योंकि यहाँ तो ‘बाड़ ही खा रही उजाड़’…!! जिले के जिस सबसे बड़े मुख्य चिकित्सा अधिकारी से उम्मीद की जाती है कि वह इस चिकित्सालय की हालत सुधारेगा, वही इसे निगलता जा रहा है… क्योंकि उसे स्थान की और अधिक आवश्यकता है, और चिकित्सालय की उसके लिए शायद कोई उपयोगिता नहीं… उसका बस चलता, तो उसके मुखिया अब तक उसके ‘रेन शेल्टर्स’ को तोड़कर अपने घर के लिए सड़क बना चुके होते…
ऐसे में ‘राम जी’ ही ‘रैमजे’ की इस विरासत को बचा सकते हैं…
न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर..
अंक 158 : हलुआ (मलबा) फिर रायते की तरह फैलने को है तैयार.. हज़ार साल बाद चोक नाली खुली पर, हज़ार साल फिर बंद होने की है तैयारी
साहिबान,
कूर्मांचल नगर मल्लीताल शाखा के निकट काफ़ी लम्बे समय से बंद पड़ी नाली को नगर पालिका परिषद नैनीताल के द्वारा तोड़कर पुनः बनाया गया जिससे क्षेत्रवासियों को बहुत राहत मिली, वहीं उपरोक्त नाली मरम्मत में जो भी मलबा निकला उसे वहीं सड़क किनारे छोड़ दिया गया, हो सकता है किसी भयंकर मजबूरी अथवा किसी अन्य योजना के तहत ऐसा किया गया हो, किन्तु जैसा कि सभी जानते हैं बरसात का सीज़न स्टार्ट हो चुका है, कुछ दिन बाद यही मलबे के कट्टे पानी से गल जाएंगे और जो मलबा उनमें कैद हुआ है उसे आज़ादी मिल जाएगी और वो ख़ुशी- ख़ुशी नाली के अगले हिस्से में पहुँच कर अपना घर बना लेगा, और अपने घर में बाहरी तत्वों को कौन प्रवेश की अनुमति देता है, वैसे ही वो तथाकथित मलबा भी बरसात के पानी या आसपास के पानी को नाली यानि उसके घर में प्रवेश नहीं करने देगा और पानी को मजबूरन रायते की तरह सड़क पर फैलना होगा, फिर जब नाली में मलबा हो और पानी रास्ते में फैले तो फिर विभाग को ज़हमत उठानी पड़ेगी जैसे आज हज़ारों सालों से चोक नाली को तोड़कर दोबारा से पूरा बनाया गया, वैसे ही कुछ दिन, महीने या साल बाद इतिहास ख़ुद को दोहराएगा, फिर कोई नागरिक ऐसी ही अपने शहर की व्यथा कह रहा होगा और फिर संबंधित विभाग के ज़िम्मेदार अधिकारी ऐसी ही अपने फेस पर मास्क लगाए और कानो में हेडफोन लगाए बैठे होंगे, कैसे कट्टे कैसा मलबा ?
अंत में, हमारा सचिन नेगी नगर पालिकाध्यक्ष महोदय से, अशोक वर्मा अधिशासी अधिकारी महोदय से तथा राजू टांक आवागढ़ वार्ड सभासद महोदय से अनुरोध है कि उपरोक्त सड़क किनारे रखे मलबे के कट्टों को समय रहते हटवाने का कष्ट करें जिससे बरसात के पानी के साथ ये भी झील में न समां जाये…
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 158 : वो लकड़ी की कश्ती, वो नैनी झील का पानी ! और हाय, वो उसमें डूब गई…
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न, दरअसल ये तस्वीर नहीं है, ये आज की हकीकत है, एक जमाना था जब मैं भी इठला के इतरा के झील के पानी में शरारत करती हुई एक छोर से दूसरे छोर तक जाती थी, एक शान हुआ करती थी मेरी, दूर -दूर से लोग नैनीताल को निहारते आते थे, फिर चाहे कटी पतंग के राजेश खन्ना हों या वक्त के शशि कपूर, मैंने सबका दौर देखा है। और देखा है उन खेवनहारों को जो सुबह से शाम तक मुझे और मेरी जैसी हर नाव को अपने हाथों से बिना रुके, बिना थके खींचते क्योंकि साहब लोगों को खुश करना होता था और जब साहब लोग खुश होकर जाते तो वे नाव के किराये के साथ उसे बख्शीश भी देकर जाते, वो बेचारा सुबह से शाम तक पसीना पसीना होकर एक -एक पैसा कमाता और शाम को अपने बीवी बच्चों के लिये खाना, दवाई और ऐसी जरूरत का सामान ले जाता। उतार – चढ़ाव आये लेकिन उसने या उसके नाती – पोतों ने भी मेरा साथ नहीं छोड़ा, लेकिन इस बार कुछ अच्छा महसूस नहीं हो रहा है, जो सुबह से शाम तक मेरे साथ रहता था, वो खेवनहार पिछले दो -तीन महीनों से मुझसे मिलने नहीं आया, जो मुझपे पानी की एक बूँद बर्दाश्त नहीं करता था, आज मैं डूबी खडी हूँ, जो अपने हाथों से मेरे चेहरे की रंगीनियाँ बरकरार रखता था, आज उसे मेरे डूबते वजूद की भी फिक्र नहीं, जिसने न जाने कितने परिवारों को डूबने नहीं दिया, आज मैं नाव डूब रही हूँ। कोई मेरे उस खेवनहार तक मेरा पैगाम पहुंचा देना, इससे पहले मैं पूरी तरह से झील में समां जाऊं, मेरी आखरी झलक आकर वो देख जाये, कि मैं डूब रही हूँ…।
अब उस डूबती नैय्या को कौन समझाये कि लॉकडाउन चल रहा है, नावों के लिये, होटल खुल गये। बसें खुल गयी, बड़ी -बड़ी दुकानें खुल गयी, महल और चौबारे खुल गये बस लॉकडाउन चल रहा है नावों के लिये… चिड़ियाघर खुल गया, बोटेनिकल गार्डन खुल गया लेकिन लॉकडाउन चल रहा है सिर्फ नावों के लिये !!!गरीब को इज्जत से रोटी कमाने का भी अधिकार नहीं? क्या गरीब चंद नेताओं के सामने हाथ फैलाने के लिये पैदा हुआ है? जवाब दें जिम्मेदार अधिकारी?
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 157 : साक्षात्कार : कुमाऊं विश्वविद्यालय को अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय बनाना चाहते हैं नये कुलपति प्रो. जोशी कुलपति
संक्षिप्त परिचय: कुशल प्रशासक, निष्पक्ष व निर्भीक छवि वाले प्रो. (डॉ.) एनके जोशी ने 11 मई को नैनीताल में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति के तौर पर कार्यभार ग्रहण किया। प्रो. जोशी मूलतः कौसानी के रहने वाले हैं। उन्होंने नैनीताल के डीएसबी परिसर से 1983 में फिजिक्स से एमएससी की थी। 36 सालों से शिक्षण एवं प्रशासन के क्षेत्र में सक्रिय प्रो. जोशी बोस्टन, एमआईटी के भी अल्युमनस हैं। कुमाऊँ विवि के कुलपति बनने से पूर्व प्रो. जोशी उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के रूप में कार्यरत थे। इसके अलावा प्रो. जोशी इससे पूर्व एमडीआई गुड़गांव, आईएमटी गाजियाबाद, बनस्थली यूनिवर्सिटी, तीर्थांकर महावीर यूनिवर्सिटी व प्रशासनिक अकादमी नैनीताल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। प्रो. जोशी मिसोरी यूनिवर्सिटी साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूएसए से संबद्घ कॉलेज मस्कट में भी कार्य कर चुके हैं। प्रो. जोशी का नैनीताल से गहरा रिश्ता रहा है। यहाँ मल्लीताल बीडी पांडे अस्पताल के निकट सनवाल कुटीर निवासी लोनिवि उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रमुख अभियंता इंजीनियर इन चीफ रहे स्व. चंद्रशेखर सनवाल की पुत्री वंदना आपकी धर्मपत्नी हैं। आज आप कुमाऊँ विश्विद्यालय के कुलपति के रुप में हम सबके समक्ष कुलपति के कर्तव्य का कुशलता से निर्वाह कर रहे हैं…
विभिन्न पदों की जिम्मेदारी निभा चुके प्रो. एनके जोशी से बात की हमारे संवाददाता मो. खुर्शीद हुसैन (आजाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश:-
आजाद सवाल (01): – आपने लॉकडाउन के दौरान कार्यभार ग्रहण किया। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में पठन-पाठन को आपने कैसे मैनेज किया? कुलपति कुविवि:- ऐसी परिस्थिति हम सबके सामने पहली बार ही आई, और इसमें हमने टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल करके समय का सदुपयोग किया। फैकल्टी के साथ विचार विमर्श करके विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था की गयी। इससे विद्यार्थियों का पठन-पाठन समयानुरूप चल सका। शहरी क्षेत्र के विद्यार्थियों को इसका भरपूर फायदा मिला। दूरस्थ व ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थी तकनीकी कारणों से सम्पूर्ण लाभ नहीं ले सके। ऐसे विद्यार्थियों के लिये यदि स्थिति सामान्य हो जाती है तो आने वाले माह की 13 जुलाई से 31 जुलाई तक रेमेडियल क्लासेज चलाएंगे तथा कुछ प्रैक्टिकल भी कराये जाएंगे। लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन शिक्षण के अतिरिक्त हमारे कुछ विभागों ने बहुत से महत्वपूर्ण व सामयिक विषयों पर वेबिनार भी आयोजित किये जिनका लाभ विद्यार्थियों के अतिरिक्त शिक्षकों ने भी उठाया।
आजाद सवाल (02):- कुछ ऑटो प्रमोशन की भी योजना है विद्यार्थियों के लिये ? कुलपति कुविवि :- एमएचआरडी की गाइडलाइन्स के अनुसार इंटरमीडिएट सेमस्टर छात्रों को ऑटो प्रोमोट किया जाएगा, फिर भी जो विद्यार्थी उक्त परीक्षाफल से संतुष्ट नहीं होता है तो वो अगले वर्ष परीक्षा भी दे सकता है।
आजाद सवाल (03) :- जैसा कि आपका अनुभव उच्च कोटि संस्थानों का रहा है तो क्या कुविवि को भी आपके अनुभव का लाभ मिलेगा? कुलपति कुविवि :- मैं कुमाऊँ विवि को अंतर्राष्ट्रीय विवि बनाना चाहता हूं। इसके लिये हम तैयारी कर रहे हैं। टीचिंग-लर्निंग की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाएगा। विद्यार्थियों को इंडस्ट्रियल ओरिएंटेड शिक्षा प्रदान करेंगे। सिलेबस रिवीजन, कक्षाओं के समुचित संचालन का ध्यान रखा जाएगा। सिस्टम को ऑनलाइन करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। कुमाऊँ यूनिवर्सिटी एक रिसर्च ड्रिवन यूनिवर्सिटी रहेगी, जहाँ शोध की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाएगा। रिसर्च प्रोजेक्ट्स, अच्छे शोध पत्र, पेटेंट्स, कॉन्फ्रेंस, सेमिनार आयोजित किये जाएंगे। विद्यार्थियों के हितों का समुचित ध्यान रखते हुये हम कुमाऊं विवि को एक अलग स्तर पर ले जाने का प्रयास करेंगे, ये एक student centric और research driven university बनेगी…
आजाद सवाल (04) :- पढ़ाई तक तो ठीक है लेकिन पढ़ाई पूरी करने के बाद स्टूडेंट के सामने रोजगार की बड़ी चुनौती रहती है। कॉलेज से निकलने वाले स्टूडेंट्स के लिये क्या योजना है? कुलपति कुविवि :- आप कॉलेज से जाने वाले स्टूडेंट की बात कर रहे हैं। हम तो अपने अंडर ग्रेजुएट स्टूडेंट को भी रिसर्च लिखना सिखाएंगे। लाइव प्रोजेक्ट्स का अवसर प्रदान किया जाएगा। इंटरप्रिन्योरशिप पर हमारा ज्यादा जोर रहेगा और विद्यार्थियों को सेल्फ एम्पलॉयड बनाने की दिशा में उन्हें अपने स्टार्ट अप के लिये प्रेरित व प्रोत्साहित किया जाएगा। हमने विद्यार्थियों के लिये प्लेसमेंट सेल भी बना दिया है जिसके लिये डीएसबी, भीमताल और अल्मोड़ा कैंपस में कोऑर्डिनेटर नियुक्त किये गये हैं। साथ ही हमने कुमाऊँ विवि का कॉम्पिटेटिव एग्जामिनेशन सेंटर बनाया है, जिसमें विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी के साथ-साथ आईएएस, पीसीएस, पीसीएस-जे, नेट, गेट, बैंकिंग और सीडीएस जैसी परीक्षाओं की फ्री ऑफ कॉस्ट कोचिंग प्रारम्भ हो चुकी है।
आजाद सवाल (05) :- ये तो रही उन छात्रों की बात जो भविष्य में शिक्षा लेकर निकलें लेकिन क्या उनके लिये भी कुछ समाधान है जो कुविवि से बरसों पहले निकल गये लेकिन आज तक आत्मनिर्भर नहीं बन सके ? कुलपति कुविवि :- जी बिल्कुल है, ऐसे छात्रों के लिये कॉम्पिटेटिव एग्जामिनेशन सेल के अतिरिक्त स्किल डेवलपमेंट कोर्सेज का हमने प्रारम्भ शुरू कर दिया है, इच्छुक विद्यार्थी web development, communication skills, organic farming, Entrepreneurship, computer skills, mutual funds, accounts, media skills, sales, finance, plumbing, electrician आदि जैसे रोजगारपरक स्किल डेवलपमेंट सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं।
अंक 156 : रिक्शे-नाव से भेजें जाये ‘इकोनॉमी वॉरियर’
-जो ज़्यादा महंगी के शौकीन हों, उनके लिए नाव खोली जाये, इसी बहाने से गरीबों के घर में भी जले चूल्हा
साहिबान,
लॉक डाउन क्या हुआ, काफ़ी चीज़ों की परिभाषा ही बदल गयी,
पहले जो कमाऊ था, वो नकारा हो गया, जो मोटा था वो छुआरा हो गया, बाहर घूमने वाला नालायक और घर में सोने वाला ज़िम्मेदार हो गया, ऐसे ही चाय बेचने वाला दोषी और शराब बेचने वाला विधाता हो गया,
जो रोज़ कमाते खाते थे उनके घर में क्या हालात हैं कोई देखने वाला नहीं,
हाँ, कभी – कभी समाजसेवी या प्रशासन राशन वितरण कर देता है, लेकिन सिर्फ़ राशन वितरण से उसके घर की ज़रूरत का सामान पहुंच जाता होगा, क्या उसके घर में दवाइयां, गैस, दूध, जैसी चीज़ें पहुंच जाती होंगी,
नहीं, बिल्कुल नहीं,
आज लगभग सबको अपना -अपना व्यवसाय खोलने की अनुमति है,
लेकिन क्या किसी ने एक रिक्शे वाले का दर्द समझा, जिसके पास कोई जमा पूंजी नहीं होती,
क्या किसी ने नाव चलाने वाले की पीड़ा समझी की दो चार दिन का राशन मिलना उसके लिए स्थाई समाधान नहीं है,
रिक्शे में एक ही व्यक्ति बैठे लेकिन रिक्शा खुलना चाहिए,
नाव में भले ही एक सीट मे एक व्यक्ति बैठे लेकिन नाव खुलनी चाहिये,
वरना इस लॉक डाउन में उन बेचारों की आमदनी तो होगी नहीं ऊपर से नाव ख़डी -ख़डी बेकार हो जाएगी, रिक्शे खडे खडे बेकार हो जाएंगे…
और इन सब दलीलों के बावजूद भी अगर सरकार इन गरीबों को इजाज़त नहीं देती तो सिर्फ़ इतना ही सोचकर अनुमति मिल जाये कि जब एक इकोनॉमी वॉरीयर पैदल चलकर अपने युद्ध स्थल तक पहुँचता है, बड़ी तकलीफ होती होगी उसे,
क्यों न इकोनॉमी वॉरीयर रिक्शे में या नाव में शान से बैठकर देश की अर्थव्यवस्था को सहारा देने आये,
इसी बहाने कुछ गरीबों को भी 07-04 में रोज़गार मिल जाये…
अतः
मा. मुख्यमंत्री महोदय उत्तराखंड,
मा. कुमाऊं आयुक्त महोदय,
मा. ज़िलाधिकारी महोदय,
मा. उप ज़िलाधिकारी महोदय,
मा. नगर पालिकाध्यक्ष महोदय
से हमारा अनुरोध है कि रिक्शा चालकों को तथा नाव चालकों को नियमानुसार रिक्शा व नाव चलाने की अनुमति प्रदान करने की कृपा करें,
जिससे उनके घरों में भी उनकी कमाई से चूल्हा जल सके…
न काहू से दोस्ती
ना काहू से बैर
अंक 155 : नैनीताल में प्रशासन की पहल पर तल्लीताल डाँठ पर लगा ‘सेल्फिश पॉइंट’
नैनीताल की ख़ूबसूरती को दिया नया आयाम!
अब देखेगी दुनिया नैनीझील का सौंदर्य !
साहिबान,
एक ज़माने में एक बेहद ही ख़ूबसूरत अदाकारा हुआ करती थी जिनका नाम आज भी बड़े अदब और लिहाज़ से लिया जाता है और लिया जाता रहेगा, उनकी बेमिसाल ख़ूबसूरती और सादगी के आगे आज तक कोई दूसरी अदाकारा टिक नहीं पायी, वो कोई और नहीं हुस्न और सादगी की मिसाल मधुबाला थी, आख़िर क्या था उनकी ख़ूबसूरती में ऐसा जो उन्हें आज तक याद किया जाता है, ख़ूबसूरती, जी नहीं खूबसूरत तो हर दूसरी लड़की होती है असल में उनके पास थी सादगी, जिस सादगी से उन्होंने सबका दिल जीता वो आज की कोई भी अदाकारा किसी भी बनावट या दिखावट से वो मुकाम हासिल नहीं कर पाई, ख़ैर आप भी सोच रहे होंगे की नैनीताल और मधुबाला में क्या नाता है, तो जनाब एक बहुत अहम और संजीदा नाता है वो है सादगी भरी खूबसूरती का नाता, जी हाँ, नैनीताल और नैनीझील हमारी मधुबाला है, नैनीताल की सादगी में जो ख़ूबसूरती है वो किसी बनावट की मोहताज नहीं है, कोई चाहे कितने ही हज़ार वाट्स के एलईडी जला दे लेकिन रूह को जो सुकून चाँद की चांदनी देगी वो एलईडी की रोशनी नहीं दे पाएगी, जो लोग बचपन से नैनीताल की गोद में खेले -कूदे, पले बढ़े है, एक सवाल उन सबसे है और दिल पर हाथ रखकर जवाब दें, क्या उनके लिये नैनीताल की माल रोड के पेड़ों पर झालर लटकाकर नैनीताल की ख़ूबसूरती बढ़ाई जा सकती है ? क्या उनके लिये हर रोज़ माल रोड पर तेज़ संगीत बजाया जाये तो उन्हें सुकून मिलेगा? उसी तरह झील के पास इस तरह की बनावट वाली सजावट को सेल्फ़ी पॉइंट का नाम देना क्या नैनीताल की ख़ूबसूरती और सादगी की तौहीन नहीं है? जो लोग नैनीताल को जाने नहीं हैँ उन्हें ही उस जगह सेल्फ़ी पॉइंट दिखता है, अरे साहब, कोई नैनीताल के दीवानो से तो पूछो जिनके लिये नैनीताल का हर कोना सेल्फ़ी पॉइंट है और हर मंज़र क्रियेटिव पॉइंट है, हमारा नैनीताल किसी बनावट का मोहताज नहीं जनाब…
आख़िर में, मा. मुख्य न्यायाधीश महोदय, उच्च न्यायालय (उत्तराखंड) कुमाऊँ आयुक्त महोदय, कुमाऊँ मंडल नैनीताल, ज़िलाधिकारी नैनीताल महोदय, सचिव महोदय, झील विकास प्राधिकरण नैनीताल, तथा अपर ज़िलाधिकारी महोदय, नैनीताल महोदय आप सबसे ये इल्तेजा है कि नैनीताल के तल्लीताल डाँठ पर जो कृत्रिम सजावट करके l love nainital लिखा गया है, मेहरबानी करके उसे उस जगह से हटवाकर ऐसी जगह लगवाया जाये जहाँ से नैनीताल या नैनी झील के प्राकृतिक सौंदर्य पर कोई असर न पड़े, मा. महोदय, को इस नाचीज़ का सुझाव है कि इस तरह की बनावट वाली सजावट का इरादा छोड़ देना ही नैनीताल की बेहतरी में होगा क्योंकि नैनीताल किसी भी आर्टिफीसियल ख़ूबसूरती का मोहताज नहीं है…
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है …. -आज़ाद
अंक 154 : टूट गया ठंडी सड़क का दरवाज़ा, मिली गयी एक नयी अवैध पार्किंग !
-पैदल ठंडी सड़क पर मोटर साइकिल-साइकिल से भी कर सकते हैँ यात्रा, कोई देखने / सुनने वाला नहीं.. इंतजार, विभाग की नींद खुलने तक
साहिबान,
ये जो तस्वीर आप देख रहे हैँ न दरअसल ये कोई तस्वीर नहीं है,
ये तो हिमाक़त है उन मनचलों की, जिनके बाहुबल से लोहे का बड़ा सा दरवाज़ा सड़क के किनारे पड़ी किसी लावारिस लाश की तरह अपनी आखिरी सांसे गिन रहा है, उसके सामने वाला दरवाज़ा सॉरी दरवाज़ा कहूंगा तो उसके साथ इंसाफ में कमी होगी बल्कि उसका सच्चा हमसफ़र जो कभी एक साथ परिणय सूत्र में बंधे थे, तब से रोज़ एक साथ खुलते -बंद होते थे, किस क़दर प्यारी लगती थी उन दोनों की जोड़ी जैसे एक दूजे के लिये ही बने हो लेकिन न जाने किस कमज़र्फ़ को इस मासूम जोड़ी का साथ रास नहीं आया और उसने एक ही झटके में उसकी मांग उजाड़ दी, उसका एक साथी हाथों और पैरों में बेड़ियाँ बंधी होने की वजह से राहगीरों से चीख़ चीख़कर यही फ़रियाद कर रहा है कोई तो उसके साथी की जान बचा ले, कोई तो उनका चमन उजड़ने से रोक ले, लेकिन राहगीरों को भी इतनी फ़ुरसत कहाँ जो कोई उसकी पुकार सुने, जिन्हें फ़ुरसत है वो अपनी गाड़ियां उनके आँगन में लगाकर फ़ुरसत के लम्हे बिता रहे हैँ और जिन्हें इसी दिन का इंतज़ार था, वे लोग अपनी मोटर साइकिल / साइकिल से उनके सीने को छलनी कर रहे हैँ, कोई उनकी इस बेचारगी का मज़ाक बना रहा है कोई उनके इस हाल को धुँए में उड़ा रहा है, उन बेचारों की ऑंखें बस यही आस लगाये बैठी हैँ काश कोई मसीहा आये और उनकी जोड़ी फिर से बना दे, उनका घर फिर से दिलशाद कर दे
हर एक चौराहे पे, एक ख़्वाब उदास बैठा है
ये कौन सा शहर है आज़ाद !
यहां हर शख़्स ख़ामोश बैठा है
आख़िर में
मा.उच्च न्यायालय (उत्तराखंड)
मुख्य न्यायाधीश महोदय,
आयुक्त महोदय, कुमाऊँ मंडल नैनीताल,
ज़िलाधिकारी महोदय नैनीताल,
उप ज़िलाधिकारी महोदय नैनीताल,
अपर ज़िलाधिकारी (प्रशासन ) महोदय, नैनीताल
नगर पालिका अध्यक्ष महोदय, नैनीताल,
अधिशासी अभियंता, महोदय (लोनिवि) नैनीताल,
अधिशासी अभियंता, महोदय, (सिंचाई खंड) नैनीताल,
आप सबसे दिली इल्तेजा है कि कई दिनों से माँ पाषाण देवी मंदिर के पास वाले लोहे का गेट किसी ने तोड़ दिया है, जिससे ठंडी सड़क में लोग अपनी गाड़ियां लगा रहे हैँ और बाइक – साइकिल चलाकर पैदल चल रहे राहगीरों / श्रद्धालुओ को परेशानी में डाल रहे हैँ, जितना जल्दी हो सके उक्त गेट को ठीक करवाने के लिये माकूल महकमें को हुक्म करने की ज़ेहमत करें, आपकी बहुत बड़ी मेहरबानी होंगी..
न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है …
अंक 153 : गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल, न आया तो कचरा कहां डाल ??
साहिबान, डोर- टू – डोर कूड़ा निस्तारण योजना के तहत गाड़ी वाला जहाँ -जहाँ आता है बस उन्हीं घरों से कचरा बाहर निकलेगा बाक़ी जिन क्षेत्रों में गाड़ी नहीं पहुंच पाती, उनका क्या होगा ये कोई नहीं बता पाया।
हमें ख़ुशी है हमारे शहर में डोर टू डोर कूड़ा निस्तारण का अभियान चलाया जा रहा है, यह सराहनीय प्रयास है, किन्तु वार्ड नंबर एक के जैसे कई वार्ड ऐसे हैं जिनकी स्थिति यह है कि संस्था के कर्मचारियों द्वारा कई -कई दिन तक कूड़ा उठाने की ज़ेहमत गवारा नहीं की जा रही। जनता इस उम्मीद पर खामोश है की व्यवस्था सुधरेगी, मगर, संस्था के इंचार्ज रोहित का कहना है कि संस्था के पास मैन पावर की कमी है, इस पर प्रश्न यह उठता है कि इसमें जनता का क्या दोष है ?आपने जब नगर पालिका के साथ टेंडर किया है और आप प्रत्येक घर से शुल्क भी वसूल रहे हैं या वसूलेंगे तो फिर व्यवस्था सुधारना भी आपकी ज़िम्मेदारी है। नतीजा यह है कि वार्ड नंबर एक जैसे अन्य क्षेत्रों की जनता जहाँ डोर-टू-डोर के कर्मचारी नियमित तौर से आ नहीं पाते, असहयोग की मुद्रा में आ रही है क्योंकि तीन माह का कार्यकाल कम नहीं होता, यदि ऐसा ही (महज़ चुनिंदा स्थानों पर गाड़ी में गाना बजाकर ढोल पीटना) होता रहा तो इस संस्था का बहिष्कार निश्चित है, जिसके लिए संबंधित विभाग खुद ज़िम्मेदार होगा। इसलिये नगर पालिका अध्यक्ष महोदय से हमारा अनुरोध है कि उक्त संस्था को यथोचित संसाधन उपलब्ध कराने की कृपा करें जिससे उनका मिशन सफ़ल हो सके, अथवा आपकी पुरानी नीति ही कारगर है, जिसमें कम से कम नगरवासी घर में कूड़ा इकट्ठा किये इस आशा में तो नहीं बैठे रहते कि कोई आएगा, और कूड़ा उठाकर ले जाएगा, अपनी सुविधानुसार सब अपना – अपना कूड़ा डस्टबिन में डाल देते थे।
अंक 152 : क्यों नैनीताल में बंध्याकरण के बाद भी बरकरार है कुत्तों की फौज..?
साहिबान, नैनीताल शहर की सड़कों पर अँधेरी रातों सूनसान राहों तक बस कोई दिखे न दिखे ऊपर वाले का बनाया हुआ एक करिश्मा दिख जाएगा, वो भी अपने संयुक्त परिवार के साथ, हाँ ये अलग बात है उन संयुक्त परिवारों के कुछ सदस्य कुछ देर बाद किसी और परिवार के सदस्य नज़र आते हैं, ख़ैर छोड़िये, इस बात को, वो उनका निजी मामला है और किसी की निजता में झांकना बुरी बात होती है, तो जनाब यहाँ, हम ये ज़िक्र कर रहे थे कि भरे पूरे परिवार के साथ ये वफ़ादार जानवर आपको शहर के हर कोने में मिल जाएंगे, एक ज़माना था जब इनको घर के मालिक के लिये वफ़ादारी का प्रतीक माना जाता था, अब दो दिन अगर मालिक रोटी / हड्डी न डाले तो भौंकते हुये घर से चल देते हैं, वो तो ग़नीमत ये है कि अभी कोई ट्रांसलेटर नहीं बना जो ये बताये कि आख़िर ये वफ़ादार जानवर कह क्या रहा है, वरना बाई गॉड न जाने कितने मालिकों के कानों से तो ख़ून ही निकल जाता, यही सोचकर शायद टेक्नोलॉजी ज्ञाताओं ने भी इसमें हाथ नहीं डाला क्योंकि एक -दो तो उनके घर में भी पक्का होंगे, ख़ैर, यहां हम किसी की वफ़ादारी में चरस नहीं बोना चाहते, हम तो बस ध्यान का चरखा थोड़ा उधर घुमाने की कोशिश कर रहे हैं जिधर इस करिश्मे ने करिश्मा कर रखा है और उस करिश्मे से शहर के बाशिंदों के अलावा परदेसी भी करिश्माई हो चुके हैं, अभी कल – परसों के अख़बार में ये आया था की ये वफ़ादार जानवर, इतनी शिद्द्त वाली वफ़ादारी से लोगों को काट रहे हैं जितनी वफ़ादारी से रेबीज की मीटिंग में कोई मुख्य अधिकारी की बातें भी नहीं सुन रहा होगा क्योंकि सरकारी कर्मचारी महाशय का मानना होता है कि ऐसी बातों से तो अच्छा अपना फ़ोन चलाना है, ख़ैर, कोई बात नहीं, ये शहर ही ऐसा हो गया है,सबको कुछ न कुछ चलाने की आदत हो गयी है, कोई ज़ुबान चला रहा है, कोई फ़ोन चला रहा है, एक वफ़ादार जानवर ही है जो मस्त है अपनी ज़िंदगी बेख़ौफ़ होकर जी रहा है और उनमें कोई चुनाव भी नहीं होते, जो दो से ज़्यादा बच्चों का डर होता, अब आप कहेंगे अरे जनाब बंध्याकरण तो होता है??? और फिर हम बोलेंगे रहने दीजिये न साहब, जिस शहर के सारे काम कागज़ों में होने लगें तो काग़ज़ की कश्तियाँ ही दिखेंगी, बारिश के पानी के लिये तो वो दौलत, वो शौहरत सब दांव पर लगानी होगी जनाब, और हाँ, अगर आप ये सब करने को तैयार नहीं, तो यहां न आइयेगा, क्योंकि यहां एक चीज़ है जिसमें वफ़ा कूट कूटकर भरी है, हो सकता है वफ़ादारी का अगला इंजेक्शन ???
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 151 : नैनीताल में चिराग़ के घर अँधेरा !
साहिबान,
आज हम आपको ऐसे लोगों की दास्तान सुनाने वाले हैं जो पूरे शहर में सफ़ाई के सिपाही के नाम से जाने जाते हैं, वे लोग सुबह – शाम शहर की गंदगी से लड़ते हैं और फिर हार थककर अपने घर पहुंचते हैं, घर पहुँचकर फिर अगली सुबह शहर की सफ़ाई करनी है ऐसी फ़िक्र लिये सो जाते हैं, इस सबके चलते ये लोग अपने आसपास की गंदगी के बारे में ध्यान नहीं दे पाते, जी हाँ, इसमें इनका कोई कुसूर नहीं क्योंकि वो तो इनकी ड्यूटी है जो ये लोग करते हैं और अपना घर चलाते हैं, लेकिन क्या सरकार के किसी महकमे की कोई ज़िम्मेदारी नहीं कोई ड्यूटी नहीं इनके घर के आस- पास सफ़ाई व्यवस्था कराने की, एक बार सीवर लाइन डाल दी तो बहुत बड़ा काम हो गया ? उसके बाद सीवर टूटे या फूटे उससे कोई मतलब नहीं, कोई ड्यूटी नहीं, बहते सीवर को ठीक कराने की ? यही हाल है तल्लीताल मस्जिद के पास रोड में पिछले चार-पांच दिनों से सीवर खुले में बह रही है जो वैष्णो देवी मंदिर से मस्जिद होते हुए हरि नगर का मुख्य मार्ग है, राहगीरों को गंदगी से ही गुजरना पड़ रहा है, मलिन बस्तियों में प्रशासन और संबंधित विभाग हमेशा अनदेखी करता है अगर यही सीवर कहीं बाज़ार में या वीआईपी क्षेत्रों में बह रही होती तो अब तक कब का समाधान हो चुका होता, क्या मेरे शहर के कुछ लोगों को समानता का अधिकार पाने का कोई अधिकार नहीं ? ज़िम्मेदार विभाग ज़िम्मेदारी से ज़िम्मेदारी लेने की ज़िम्मेदारी दिखायें…
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 150 : पधारो म्हारे गड्ढ़ों के देस…
यूँ तो ज़िंदगी बिन गड्ढों के भी जी जा सकती है लेकिन लाइफ में अगर दो – तीन गड्ढे न हों तो लाइफ का मज़ा ही खत्म हो जाता है और हमारी लाइफ में मज़ा बरक़रार रखे हुये है नैनीताल का एक डिपार्टमेंट, जिसकी बदौलत हमें महंगी से महंगी और आरामदायक से आरामदायक गाड़ी में भी झटकों का एहसास हो जाता है, अगर आपके पास मोटर साइकिल या स्कूटी है तो यही मज़ा दोगुना हो जाता है, आप उस गड्ढे से बचकर निकल गये तो समझिये ज़िंदगी से आपकी रोमांच खत्म हो गया और अगर आपने स्टंट दिखाते हुये गड्ढा पार किया तो उससे तीन फ़ायदे होंगे, पहला तो वो जो आप बैठे- बैठे फैटी होते जा रहे हैं वो नहीं रहोगे, झटके खा-खाकर आपका वज़न कम हो जाता है, दूसरा फायदा ये कि आपके अंदर का स्टंटमैन सामने आ जाता है और आप स्टंट की दुनिया के बेताज बादशाह बन जाते हैं, तीसरा फ़ायदा ये कि अगर सावधानी हटी और दुर्घटना घटी तो आपकी वजह से अस्पताल और दवाई की दुकान से जुड़े कई लोगों को रोज़गार मिल जाता है, इससे आप चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांति ले आते हैं और आपको अंदाज़ा भी नहीं हो पाता आपने कितना महान कार्य कर दिया है,
और आप अस्पताल के बेड पर गंदे से लाल कंबल में लेटे- लेटे उस गड्ढे को कोसते रह जाते हैं जिसने आपको महान बनाया,
जाने- अंजाने ऐसी गलतियां हो ही जाती हैं किसकी (डिपार्टमेंट की ) गलती किसके (आम नागरिक के ) लिये महानता का कारण बन जाये, कुछ नहीं कहा जा सकता,
इसलिये तस्वीर में जो गड्ढा दिखाया गया है वो मनु महारानी के सामने चौराहे का है जिस किसीको भी अपने अंदर का स्टंटमैन बाहर निकालना हो या चिकित्सा क्षेत्र में महानता का अध्याय लिखना हो तो पधारो म्हारे देस |
अंक 149 : ठेके पर आसमान, ठेंगे पर सम्मान (5 जुलाई 2019)
साहिबान, आज आपको एक राजा की कहानी सुनाते हैं, उसका राज्य बहुत बड़ा था, जिसके उसने टुकड़े किये और उन टुकड़ों की ज़िम्मेदारी के लिये जनता की पसंद से ज़िम्मेदार लोग चुने, राजा की इस समझदारी से वहां की प्रजा बहुत खुश हुई कि रोज़-रोज़, नई -नई फ़रियाद लेकर राजा के पास जाना बच गया, सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था, प्रजा खुश थी, क्योंकि राजा तक उनकी फ़रियादें ज़िम्मेदार लोगों के ज़रिये आसानी से पहुंचने लगी और पूरे राज्य की प्रजा हंसी ख़ुशी गुज़ारा कर रही थी, फिर अचानक एक साहूकार राज्य में आया और उसने राजा को अपना राज्य ठेके पर देने का प्रस्ताव रखा, साहूकार ने कहा यदि आप मुझे अपना राज्य ठेके पर देते हो तो फिर आपको अपनी प्रजा पर अपना धन खर्चने की आवश्यकता नहीं होगी बल्कि मैं राज्य के ठेके के नाम पर आपको समय-समय पर राशि चुकाता रहूँगा, राजा को ये बात बहुत पसंद आयी और उसने अपना राज्य ठेके पर दे दिया, एक के बाद एक आवश्यकता के लिये ठेके होते रहे और धीरे – धीरे राज्य की पूरी व्यवस्था ठेकेदारों के हाथों में चली गयी, फिर हुआ यूँ कि जो ज़िम्मेदार लोग राजा ने जनता की पसंद से चुने थे उनके अधिकार कम होते चले गये अब राजा सिर्फ़ साहूकार के ठेकेदारों की बात तवज्जो से सुनता और अपने ज़िम्मेदारों को नज़रअंदाज़ करता, ऐसा करते -करते फिर तो ऐसी नौबत आ गयी कि राज्य के ज़िम्मेदार यदि हल्के बोलते तो उनकी आवाज़ राजा के कानों तक नहीं पहुँचती, ज़ोर से बोलते तो राजा बोलता इतना चिल्लाते क्यों हों, ख़ामोश रहते तो कमज़ोर समझा जाता, सभा से उठ जाएँ तो मुँहज़ोर समझा जाता और दरबार के बाहर बैठ जाते तो न फ़रमान समझा जाता, आख़िरकार उन ज़िम्मेदार लोगों के लिये ये स्थिति आ गयी कि राज्य में जाएँ तो प्रजा प्रश्न पूछ पूछकर जीने न दे, और राजा के दरबार में जाओ तो कोई सुनवाई नहीं होती, ऐसे में ज़िम्मेदारों के लिये विकट स्थिति पैदा हो गयी, आत्मसम्मान रक्षा करने की, सबने मन बनाया और राजा के ख़िलाफ़ ही जंग का एलान कर दिया, अपने ख़िलाफ़ ऐसी खबरें सुनकर राजा आग बबूला हो गया, राजा ने अपने स्तर से हर प्रयास किये उन लोगों के हौसले पस्त करने के लिये एक- एक करके सब हथकण्डे अपनाये लेकिन हुआ कुछ नहीं, ज़िम्मेदारों की हिम्मत के आगे सब हार मान गये और राज्य के ज़िम्मेदारों को आख़िरकार खोया हुआ सम्मान वापस मिला और राज्य फिर से खुशहाल हो गया…
नोट:- कहानी के सभी पात्र, चित्र व घटनाएं काल्पनिक हैं इनका किसी जीवित या मृत से कोई संबंध नहीं है, अगर ऐसा कहीं पाया जाता है तो वो महज़ एक संयोग होगा |
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
🙏
अंक 148 : नैनीताल के नवनियुक्त ज़िलाधिकारी सविन बंसल से पहला साक्षात्कार, भाग-2… (1 जुलाई 2019)
डीएम सविन बंसल
नवनियुक्त ज़िलाधिकारी, नैनीताल सविन बंसल से विभिन्न मुद्दों व उनकी योजनाओं से सम्बंधित बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-
संक्षिप्त परिचय :- हरियाणा में जन्मे सविन बंसल की प्रारंभिक व उच्च शिक्षा हरियाणा में ही सम्पन्न हुई। किताबें पढ़ने के शौकीन सविन ने NIT ( कुरुक्षेत्र ) से मैकेनिकल इंजीनिरिंग में गोल्ड मेडल प्राप्त किया लेकिन उससे भी आप संतुष्ट नहीं हुये और आपने प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश सेवा करने का मन बना लिया और आख़िरकार कड़ी मेहनत व लगन के जरिये आपका आईएएस 2009 के बैच में सिलेक्शन हो गया। आप प्रशिक्षु आईएएस के तौर पर सर्वप्रथम नैनीताल की सरज़मीं पर आये और यहीं से आपकी आधिकारिक यात्रा की शुरुआत हुई। 2011 में आप परगनाधिकारी (रुड़की), सीडीओ (टिहरी), 2013 में अपर सचिव वित्त, लोक निर्माण, आपदा प्रबंधन, निदेशक ऑडिट, निदेशक बाह्य सहायतित परियोजना में ज़िम्मेदारी निभाने के पश्चात् 2015 से 2017 तक अल्मोड़ा के ज़िलाधिकारी रह कर आपने शानदार व यादगार कार्य किये। 29/06/2019 दिन शनिवार से आपने नैनीताल के ज़िलाधिकारी का पद भार ग्रहण कर लिया।
नव नियुक्त ज़िलाधिकारी सविन बंसल, नैनीताल के लिये क्या ख़्वाब और क्या हक़ीक़त लेकर आये हैं आइये जानते हैं :-
सवाल (05) से आगे जारी :-
आज़ाद सवाल (06):- नगर के नाले जो झील की धमनियां कहलाते हैं, वो अपने साथ सीवर भी झील में समाहित कर रहे हैं। इस संबंध में आपके द्वारा क्या प्रयास किये जाएंगे?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- नैनीताल के नालों का एक माह के भीतर मैं स्वयं निरीक्षण करने वाला हूँ उसके पश्चात् ही कोई निश्चित योजना बनाकर उस पर कार्य किया जाएगा।
आज़ाद सवाल (07) :- यही हाल यहां के उद्यानों का है, जिसमें कैनेडी पार्क और कैपिटोल सिनेमा के सामने वाला पार्क है जो बदतर हालत में हैं, आपके द्वारा उद्यान जीर्णोद्धार के लिये क्या प्रयास रहेंगे ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- जो भी संबंधित विभाग हैं उनसे वार्ता करके जल्द ही कोई ठोस योजना बनाई जाएगी।
आज़ाद सवाल (08) :- पंत पार्क में अघोषित पार्किंग बना दी गयी है और जो घोषित पार्किंग हैं उनमें काफी अनियमितताओं की खबरें मिल रही हैं। इस संबंध में क्या कार्य योजना रहेगी ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- पुलिस प्रशासन व नगर पालिका प्रशासन के साथ बैठक कर सभी पार्किंग पर बात की जाएगी।
आज़ाद सवाल (09):- टैक्सी बाइक स्वरोज़गार का अच्छा साधन साबित हुआ है लेकिन अभी तक इनका किराया निर्धारित नहीं हुआ है, जिससे चालक स्वयं कंफ्यूज हो जाते हैं किससे कितना किराया लेना है, क्या हो सकता है इनकी समस्या का निस्तारण?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- इस संबंध में आरटीओ से बात की जाएगी और जल्द ही किराया निर्धारित किया जाएगा ।
आज़ाद सवाल (10) :- अंत में, कुछ व्यक्तिगत जानकारी जो जनता जानने को उत्सुक रहती है अपने प्रिय ज़िलाधिकारी के विषय में जैसे वर्तमान प्राधिकरण सचिव व पूर्व ज़िलाधिकारी दीपक रावत गाने के शौकीन हैं आपकी क्या रुचि हैं।
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- मैं इन लोगों के जैसा तो नहीं गा पाता हूँ लेकिन थोड़ा बहुत शौक है, बाक़ी जॉगिंग, बेडमिंटन, किताबें पढ़ना ये भी मेरी रूचि में शामिल है |
आपकी नैनीताल ज़िले के लिये क्या प्राथमिकताएं हैं और क्या चुनौतियां हैं ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य बेहतर पर्यटन व्यवस्था, ये सब प्राथमिकताएं हैं और यातायात व्यवस्था, झील संरक्षण, बलियानाला व वहां रह रहे लोगों को सुरक्षा प्रदान करना प्राथमिकता व चुनौती दोनों हैं।
आज़ाद सवाल (02) :- नगर व ज़िले की यातायात व्यवस्था सुधारने हेतु आपके द्वारा क्या प्रयास किये जाएंगे ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- अभी-अभी होटल एसो. वालों से इस मुद्दे पर भी बात चल रही थी। शीघ्र ही पुलिस प्रशासन के साथ वार्ता कर कोई ठोस योजना बनाई जाएगी।
आज़ाद सवाल (03) :- नगर व ज़िले की चिकित्सा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये आपके द्वारा क्या खाका तैयार किया जाएगा ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- समस्त अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया जाएगा, कोई कमी पाई गयी तो उस पर तत्काल एक्शन लिया जाएगा।
आज़ाद सवाल (04):- प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र बने हैं लेकिन उनमें दवाइयां नहीं हैं, आयुष्मान कार्ड बनवा दिये हैं लेकिन किसी को कोई इलाज नहीं मिल रहा है, आये दिन इलाज के अभाव में मौतें हो रही हैं, कौन लेगा इसकी ज़िम्मेदारी, क्या कहना चाहेंगे इस स्थिति पर ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- (संबंधित अधिकारियों को फ़ोन पर आदेश देने के पश्चात् ) चिकित्सा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोई कमी न आये इसके लिये समस्त स्वास्थ्य अधिकारियों को मीटिंग के लिये बुला लिया गया है, मीटिंग में मामलों का संज्ञान लिया जाएगा।
आज़ाद सवाल (05) :- नगर हो या ज़िला सरकारी स्कूल बद से बदतर और निजी स्कूल तान से तानाशाह होते जा रहे हैं, कैसे नियंत्रण में आएगी इनकी स्थिति ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- (संबंधित अधिकारियों को फ़ोन पर आदेश देने के पश्चात् ) सरकारी व निजी स्कूलों का निरीक्षण करके अनियमितताओं का पता लगाया जाएगा। सरकारी स्कूलों की दशा में सुधार लाने के प्रयास किये जाएंगे व निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाई जाएगी।
साक्षात्कार जारी ..🙏
अंक 147 : नैनीताल नगर पालिका के EO के खिलाफ झंडा बुलंद करने वाले सभासद पर आज़ाद के तीखे तीर…. (28 जून 2019)
साक्षात्कार : मनोज साह जगाती, सभासद (वार्ड नंबर 08) नगर पालिका परिषद, नैनीताल से विभिन्न मुद्दों पर बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-
*आज़ाद* सवाल (01):- आपने किन- किन मुद्दों को लेकर पालिका प्रशासन के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला हुआ है ?
*मनोज साह जगाती* :- ऐसे कई मुद्दे हैं जिनको लेकर पालिका प्रशासन से हमारा रोष है जैसे :- स्ट्रीट लाइट का ठेका जब दिया ब पुरानी लाइट निकाली गयी होंगी लेकिन वो सारी लाइट कहाँ गयी कुछ पता नहीं ? दूसरा, नये ठेकेदार को सरकारी गाड़ी इस्तेमाल करने क्यों दी जा रही है, तीसरा ठेकेदार के केवल 5 आदमी हैं जो 15 वार्ड की प्रकाश व्यस्वस्था को देखते हैं जो उनका देखना न देखने की ही बराबर हो जाता है, पार्किंग में ₹20 की जगह ₹50 बाइक वालों से और ₹200/- कार वालों से वसूले जा रहे हैं जो अधिशासी अधिकारी के निर्देशों पर हो रहा है, और हाँ नगर पालिका में जो सामान मंगाया जाता है उसमें इतनी ऊँची दरों पर सामान खरीदा गया है जो किसी ष्टिकोण से उचित नहीं लगता, जैसे हाथ कूड़ा गाड़ी जो कि ₹5000/- तक की आ जाती है वो ₹9500/- की खरीदी जा रही है ये तो मात्र एक उदाहरण हैं, बहुत धांधलियां की गयी हैं ईओ के द्वारा |
*आज़ाद* सवाल (02) :- इन सब मुद्दों को लेकर आप खुद अकेले चल रहे हैं या बाकी सदस्य भी आपका साथ दे रहे हैं ?
*मनोज साह जगाती* :- नहीं, ऐसा नहीं है मैं अकेला नहीं हूँ, इन आरोपों को लेकर हम 15 में से 13 सभासद एक जुट हो गए हैं जो बहुमत से भी बहुत बड़ा मत है और हम सब मिलकर इन आरोपों की जांच कराना चाहते हैं |
*आज़ाद* सवाल (03) :- पालिका प्रशासन की नीतियों में सभासदों का कितना योगदान होता है ?
*मनोज साह जगाती* :- योगदान तो तब होगा जब सभासदो को किसी नीति पर चर्चा करने के लिये बुलाया जाएगा, यहां का प्रशासन अपनी मर्ज़ी से सब नीतियां बनाता व रातों रात लागू करवाता है |
*आज़ाद* सवाल (04):- और क्या – क्या मुद्दें हैं जिनसे सभी सभासद आक्रोश में हैं ?
*मनोज साह जगाती* :- मुद्दे तो इतने हैं कि बताते -बताते दिन निकल जाएगा लेकिन कुछ खास मुद्दे बता देता हूँ जैसे :- बलियानाला के नाम पर हरिनगर से मकान ख़ाली कराये जा रहे हैं पालिका द्वारा पक्का स्लॉटर हाउस बनवाया जा रहा है ऐसा क्यों ? दूसरा, खेल मैदान में पान मसाला व गुटके के ही विज्ञापन क्यों लगाए जाते हैं ? तीसरा, चाहे मेट्रोपोल पार्किंग हो या सूखाताल पार्किंग कहीं भी शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं है सिर्फ पैसा कमाया जा रहा है चौथा, पिछली कूड़ा निस्तारण वाली संस्था की गाड़ियों का इस्तेमाल किस अधिकार से किया जा रहा है ? पांचवा, न्यायालय में मामला जाने पर भी वार्डों में अँधेरा क्यों है ? ऐसे अनगिनत मुद्दे हैं |
*आज़ाद* सवाल (05) :- इन सब मुद्दों के ख़िलाफ़ आप सभी 13 सभासदों की आगे की क्या रणनीति है ?
*मनोज साह जगाती*:- इन सब मुद्दों को लेकर हमने मा. आयुक्त महोदय से निष्पक्ष जाँच की मांग की है, ज्ञापन में हमने ये भी अनुरोध किया है कि यदि अधिशासी अधिकारी के कार्यों की जाँच नहीं होती तो हम सब आगामी सोमवार 01 जुलाई से आयुक्त कार्यालय में ही धरने पर बैठ जाएँगे |
*साक्षात्कार समाप्त*…
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अंक 146 : नैनीताल नगर पालिका के EO पर आज़ाद के तीखे तीर : पेड़ों पर लाइटिंग, पंत पॉर्क की अवैध पार्किंग, आवारा कुत्तों आदि पर…. (25 जून 2019)
साक्षात्कार : भाग (02)
रोहिताश शर्मा अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद, नैनीताल
नगर की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं पर कई वर्षों से नगर पालिका परिषद नैनीताल में अधिशासी अधिकारी के पद पर तैनात रोहिताश शर्मा से बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :- भाग – 2 (सवाल 5 से आगे)
आज़ाद सवाल (06):- आप पर एक आरोप ये भी है कि आपने माल रोड पर सजावट के नाम पर लाइट लगवाकर वृक्षों में कीलें ठुकवाकर क्षति पहुंचाई , आख़िर क्यों किया गया ऐसा ?
रोहिताश शर्मा :- सजावट के नाम पर हमने किसी भी वृक्ष को कोई क्षति नहीं पहुंचाई है, रही बात वृक्ष में कीलें ठुकवाने की तो यदि कोई भी एक कील वृक्ष में दिखा दे नगर पालिका उसे इनाम देगी।
आज़ाद सवाल (07) :- वृक्षों पर फेंसी लाइट लगाने से पहले क्या आपके द्वारा वन विभाग से कोई अनुमति मांगी गयी ?
रोहिताश शर्मा :- वृक्षों पर स्वामित्व हमारा है तो हम वन विभाग से किस बात की अनुमति प्राप्त करें। दूसरी बात हमने वृक्षों के साथ कोई छेड़ – छाड़ नहीं की फिर कोई औचित्य नहीं बनता वन विभाग के पास जाने का।
आज़ाद सवाल (08) :- पंत पार्क में अघोषित पार्किंग बना दी गयी है, ये सब किसकी शह पर हो रहा है, पालिका की गाड़ियां भी दिखती हैं वहां, ऐसा क्यों ?
रोहिताश शर्मा :- पंत पार्क में हुई पार्किंग पूरी तरह से अवैध है, हम पुलिस प्रशासन से मांग करते हैं कि वो पालिका की सरकारी गाड़ियों के अलावा हर गाड़ी का चालान काटे।
आज़ाद सवाल (09):- आवारा कुत्तों से जनता बहुत परेशान है आपके द्वारा क्या प्रयास किये जा रहे हैं कुत्तों के आतंक के ख़िलाफ़ ?
रोहिताश शर्मा :- मा. उच्चतम न्या. में मामला विचाराधीन है कि आवारा कुत्तों को यहां से नहीं भगा सकते, उनका केवल बध्याकरण किया जाता है। ह्यूमन सोसाइटी मुंबई के साथ मिलकर अब तक लगभग 120 आवारा कुत्तों का बध्याकरण किया जा चुका है और आगे भी प्रयासरत हैं।
आज़ाद सवाल (10) :- अंत में एक अहम् सवाल, डोर टू डोरकेकिििशश तो बहुत सुन लिए अब वो फ़साना हक़ीक़त कब बनेगा ?
रोहिताश शर्मा :- फ़साना हक़ीक़त बनने वाला है, 21 जून को नये सिरे से टेंडर हो गये हैं एक अनुभवी संस्था को चिह्नित कर लिया गया है, अगले माह जुलाई के प्रथम सप्ताह से वो संस्था डोर टू डोर कूड़ा निस्तारण का कार्य प्रारम्भ कर देगी, जिससे नगर के नालों, व सड़कों पर गंदगी होने से काफ़ी राहत मिलेगी।
साक्षात्कार समाप्त….🙏
भाग : 1
आज़ाद (01):-
सबसे पहले बात करते हैं सड़क से उच्च न्यायालय पहुंची स्ट्रीट लाइट की, आख़िर क्या था मामला, जो ये मुद्दा जनहित का मुद्दा बन गया ?
रोहिताश शर्मा :- अमृत योजना के अंतर्गत स्वीकार योजना जिसे सोडियम लाइट से हटाकर एलईडी में कन्वर्ट किया गया और जिसे पीपीपी मोड में चलाने की शुरूआत हुई, इसमें विद्युत् बिल में कटौती तो हुई ही साथ ही साथ पालिका को आय भी प्राप्त हुई, रही बात स्ट्रीट लाइट का सड़क से उच्च न्यायालय तक पहुंचने का मामला तो उसमें हम कोई टिप्पणी नहीं कर सकते क्योंकि मामला मा. न्यायालय में लंबित है |
आज़ाद सवाल (02) :- सुनने में ये भी आया है कि ईको ड्राइव कम्पनी ने स्ट्रीट लाइट का ठेका तो ले लिया लेकिन अपना एक भी कर्मचारी प्रकाश व्यवस्था हेतु नियुक्त नहीं किया ?
रोहिताश शर्मा :- ऐसा नहीं है, ईको ड्राइव कम्पनी के छः कर्मचारी नियुक्त हैं जिनमें दो लाइनमेन, दो हेल्पर, एक इलेक्ट्रीशियन व एक ड्राइवर शामिल है, प्रकाश व्यवस्था के लिये एक गाड़ी पालिका की ओर से दी गयी है जिसका ईंधन खर्चा कम्पनी वहन करती है |
आज़ाद सवाल (03) :- क्या ये सत्य है कि आप अपने सभासदों की शिकायतों को नहीं सुन रहे हैं और शिकायती पत्र लेने से मना कर दे रहे हैं, आख़िर अपने ही सभासदों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया जा रहा है ?
रोहिताश शर्मा :- जिस मामले की आप बात कर रहे हैं असल में कोई बात ही नहीं थी, सबकी शिकायतों के लिये हमने कार्यालय में शिकायती पंजिका रखी है, उसमें कोई भी शिकायत लिखवा सकता है, जिस पर एक्शन लिया जाता है, रही बात शिकायती पत्र न लेने की तो उस पत्र में किसी भी तरह की समस्या का कोई भी स्पष्टीकरण नहीं दिया गया था, जो विचार करने योग्य नहीं था, जिस पत्र में समस्या कहाँ पर है, क्यों हैं आदि बातों का समावेश होगा उसे हम सहर्ष स्वीकार करेंगे |
आज़ाद सवाल (04):- अब बात करते हैं डीएसए पार्किंग की इतनी बड़ी पार्किंग होने के बावजूद भी पर्यटकों को गाड़ियों के लिये जगह मुहैया नहीं कराई गयी, आख़िर क्या वजह रही इस बात की?
रोहिताश शर्मा :- सबसे पहले तो वो डीएसए की पार्किंग नहीं है वो नगर पालिका की पार्किंग है, क्योंकि डीएसए का अपना कुछ भी नहीं है, डीएसए की लीज़ भी 2004 में ख़त्म हो गयी थी, अब तक बिना लीज़ के इतने बड़े मैदान को प्रयोग में लाया जा रहा है।
आज़ाद सवाल (05) :- तो फिर डीएसए द्वारा इतने समय में लीज़ बढ़ाने के प्रयास तो किये गये होंगे ?
रोहिताश शर्मा :- नहीं, डीएसए नैनीताल द्वारा सन् 2004 से अब तक कोई प्रयास नहीं किये गये, जिससे लीज़ बढ़ाई जा सके |
साक्षात्कार जारी …
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अंक 145 : आज़ाद के तीर : सूखाताल नहीं सूख पा रही थी ? जो यह सब भी कर दिया.. (4 जून 2019)
झील का विकास करती, लोहे की मशीनें!!!
साहिबान, हमारे शहर में एक बड़ी झील है एक छोटी झील है, बड़ी झील को तो सब जानते हैं क्योंकि वो फिल्मों के मुख्य किरदार की तरह नैनीताल की फिल्म में हैं लेकिन क्या किसी ने उस सहयोगी, नैनी झील को सर्वाधिक 70 फीसद जल प्रदाता सूूूखाताल झील को जानने की कोशिश की जिसके सहयोग से मुख्य किरदार का क़द बड़ा हो जाता है, हमारा जवाब है हाँ जानने की कोशिश की इसलिये उस झील के विकास के लिये लोहे की चार पहिये वाली मशीनें बुलवा दी गयी हैं और उनके ज़रिये झील के गर्भ में छिपे हुये पानी को भी सुखाने की कोशिशें शुरू कर दी गयी हैं, हम ये नहीं जानते शासन – प्रशासन को इससे कितना मुनाफ़ा होगा लेकिन इतना ज़रूर है इन लोहे की मशीनों की चहलकदमी से प्राकृतिक श्रोत ज़रूर सूख जाएंगे, और जैसा कि ग्रीष्म ऋतु में नैनी झील सूखने लगती है ऐसा करने से दोगुनी रफ़्तार से जल स्तर में गिरावट आएगी और जल संकट से वे लोग भी बच नहीं पाएंगे जिनकी सहमति से अथवा संरक्षण में झील को पार्किंग में तब्दील कर दिया गया है … आख़िर में, मा.प्रधानमंत्री महोदय, मा. मुख्यमंत्री महोदय उत्तराखंड, मा. मुख्य न्यायाधीश महोदय उच्च न्यायालय उत्तराखंड, कुमाऊँ आयुक्त महोदय व मुख्य सचिव मुख्यमंत्री महोदय, ज़िलाधिकारी महोदय नैनीताल, सचिव महोदय, झील विकास प्राधिकरण, नैनीताल, सांसद महोदय, नैनीताल, विधायक महोदय नैनीताल नगर पालिकाध्यक्ष महोदय, नैनीताल, अधिशासी अधिकारी महोदय, नगर पालिका परिषद् नैनीताल व सम्बंधित क्षेत्रीय सभासद महोदया व सम्बंधित अधिकारीगणों से इल्तेजा है कि जिस तरह एक तरफ़ झीलों के विकास के लिये करोड़ों का बजट जारी किया जा रहा है वहीँ नैनी झील की सहयोगी सूखाताल झील में पार्किंग बना दी गयी है, जो झील का जीते जी क़त्ल कर देने जैसा है, इसलिये हाथ जोड़कर हमारी इल्तेजा है कि झील में जो पार्किंग बनाई गयी है उसे तत्काल प्रभावी आदेश देकर हटवा दिया जाये और झील को पुनर्जीवित करने की योजना बनाकर उसको अमल में लाया जाये, जिससे प्राकृतिक श्रोत बने रहेंगे साथ ही साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और नाव आदि द्वारा स्थानीय लोगों को रोज़गार भी मिलेगा.. हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यकीन है कि सूखाताल झील से लोहे की मशीने तुरंत हटवा दी जाएंगी और झील विकास के लिये योजना अमल में लाई जाएगी…
साहिबान, ये मंज़र जो आप देख रहे हैं वो किसी सर्कस का नहीं है बल्कि चार्टन लॉज एरिया मल्लीताल नैनीताल का है, जहाँ एक कूड़ा गाड़ी कूड़ादान उठा कर ले जा रही है, कूड़ादान उठाना कोई ग़लत बात नहीं है ग़लत बात तो है लोगों की जान से खेलना! जी हाँ, ये कूड़ा गाड़ी आने का समय और छोटे – छोटे बच्चों के स्कूल जाने का समय लगभग एक ही होता है, इसलिये मजबूरन अभिभावकों को बच्चों का हाथ पकड़कर गाड़ी से बच रही छोटी सी जगह से जान का जोखिम उठाते हुये निकलना पड़ता है, भगवान न करे किसी दिन गाड़ी के चालक से कोई भूल हो जाये, फिर तब कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जनाब, आप भी सोच रहे होंगे कि इतनी बात लिखने की क्या ज़रूरत थी सीधा उन लोगों को बोल देते तो शायद वे लोग अपनी गाड़ी का समय बदल लें, किया साहब, वो भी किया लेकिन उन महान लोगों के पास बस एक ही शब्द होता है, नहीं हो पाएगा, हम ये जानना चाहते हैं आख़िर क्यों नहीं हो सकता? क्या समय में बदलाव तब आएगा जब कोई हादसा हो जाएगा ? घटना से पहले कोई सचेत करे तो उसके शब्दों की कोई कीमत नहीं ? हुज़ूर, एक और सुझाव है अगर ग़ौर फरमायें तो वो यूँ है कि अगर जिस रास्ते में ये कूड़ादान लगाये गए हैं उन्हें थोड़ा आस- पास ही अन्यत्र शिफ्ट कर दें तो फिर कूड़ा गाड़ी जब भी आए उससे कोई खतरा नहीं होगा ! बाक़ी साहब लोगों की इच्छा पर डिपेंड करता है कि क्या करना हैं ? जनता यूँ ही डर के साये में जियेगी या उसे भी खुलकर जीने का हक़ है ?
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 143 : यह तस्वीर देख कर आप भी कहेंगे, ‘मैं भी ख़ास होता काश !’ (25 मई 2019)
साहिबान, आज आपको जो तस्वीर दिखाई दे रही है, वो किसी आम की तस्वीर नहीं, बल्कि किसी ख़ास की तस्वीर है। और ये मंज़र है नैनीताल की लोअर मॉल रोड का, जहाँ सीज़न में ट्रैफ़िक जाम कब हो जाये, कुछ नहीं कहा जा सकता। इसलिये मित्र पुलिस बहुत सावधानियां बरतती है, कि कहीं कोई गाड़ी न रुके, जिससे ट्रैफ़िक बाधित हो। लेकिन ये नियम और कायदे-क़ानून सिर्फ़ और सिर्फ़ आम आदमी के लिये हैं, किसी ख़ास के लिये नहीं हैं, वे जब चाहे, जहाँ चाहे, सरकारी गाड़ी रुकवा सकते हैं, भले ही वो काम या दौरा सरकारी न हो, और नितांत व्यक्तिगत ही क्यों न हो ? सारा सरकारी ताम-झाम साथ लेकर शॉपिंग होती है या नौका विहार का आनंद उठाया जाता है, वो भी सब सरकारी ख़र्चे पर ! ख़ैर, अभी हम बात कर रहे हैं यातायात नियमों के दोहरे मापदंड की जो आम आदमी को लाठी और ख़ास लोगों को सलाम ठोकता है! ‘हुज़ूर’ जब नैनीताल से दो किमी दूर होते हैं तो चौराहों पर नाकेबंदी कर दी जाती है। ऊपर का वाहन ऊपर और नीचे का वाहन नीचे ही रोक दिया जाता है। फिर चाहे उस कतार में कोई मरीज़ या बूढ़े बाबा ही क्यों न हों। उनको तब तक नहीं जाने दिया जाता जब तक माननीय अपने गंतव्य तक न पहुंच जाएँ। जनाब आख़िर में, हमारा ये सवाल है कि क्या हम आज भी उसी ग़ुलाम देश में जी रहे हैं, जिस देश में अंग्रेज़ों ने भारतीयों के लिये अलग क़ानून बनाये थे, जो अंग्रेज़ों पर लागू नहीं होते थे ? आज की तस्वीर भी क्या यही बयां करती नही करती है कि अगर आपको मॉल रोड में अपना वाहन खड़ा करके शॉपिंग करने जाना है तो कम से कम आपको ऐसा भाग्य लेकर जन्म लेना होगा जो आपको ख़ास या ‘माननीय’ बना दे, फिर हर क़ानून आपको सलाम करेगा !
साहिबान, आज हम मल्लीताल बाज़ार क्षेत्र की बात करेंगे, नहीं नहीं, जैसा आप समझ रहे हैं, वैसा कुछ भी नहीं करेंगे, आज न ही हम, वहां सड़क पर निकली आधी से ज़्यादा दुकानों की बात करेंगे और न ही उस अतिक्रमण को रोकने के लिये शासन -प्रशासन द्वारा क्या प्रयास किये जा रहे हैं, न ही उसकी बात करेंगे, आज हम बात करेंगे उक्त तथाकथित बाज़ार मार्ग की जिसे दो – पहिया वाहनों के साथ – साथ चार पहिया वाहनों ने अपनी रफ़्तार और शोर मचाते हॉर्न की आवाज़ों ने बेसुध कर दिया है, मल्लीताल कोतवाली से ऊपर गाड़ी पड़ाव से होकर अंडा मार्केट व जय लाल साह बाज़ार को निकलने वाले इस मार्ग पर बाइक चलाने वाले इतने बेतरतीब ढंग से बाइक चलाते है कि उनकी बाइक से टकराकर कोई भी व्यक्ति कभी भी निजी अस्पतालों की चांदी कटवा सकता है। यही सूरत कार चलाने वालों की है जहाँ इतनी जनता खरीदारी करने आती है, जिसमें महिला, बच्चे, बुज़ुर्ग सभी शामिल हैं, उन सबको बोनट पर टांगने के इरादे से कार किसी भी टाइम आ और जा रही हैं, कुछ लोगों ने तो महानता की वाट लगाने की कसम खा रखी है बाई गॉड, वे आते -जाते हैं इस सड़क से ऊपर से ये दबंगई जगह हो न हो सड़क के बीचों – बीच अपनी बाइक या कार खड़ी करके कानों के लिए रुई और आँखों के लिए पट्टी लेने चल देते हैं, फिर उनकी बला से उस रोड पर जाम लगे या ब्रेड पर जेम लगे, वहीँ दूसरी तरफ़ बड़ा बाज़ार की बात करें तो वहां की हालत ग़नीमत है, हाँ भई, अब इतना खुश होने वाली बात भी नहीं है, वहां का ट्रैफ़िक प्लान जो सक्सेस हुआ है, उसका सारा क्रेडिट जाता है, बाज़ार के मुख्य द्वार पर लगे ताले को, जो सुबह और शाम को ही खुलता है, जिस वजह से बड़ा बाज़ार चैन की साँस ले रहा है, ख़ैर, अभी हम बात कर रहे हैं गाड़ी पड़ाव से कनेक्ट होने वाले बाज़ार की, जिसने अपने साथ खरीदारों को कम बाइक और कार को ज़्यादा कनेक्ट किया है, अब इस कनेक्शन के पीछे पुलिस की लापरवाही कहें या व्यापार मंडल की मेहरबानी या नगर पालिका का मौन व्रत, सब एक ही बात है, अभी तो धीरे -धीरे इन गाड़ियों को सड़क पर खड़ा करवाया जा रहा है, हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है, एक दिन सड़क पर पार्किंग करने के लिये नगर पालिका द्वारा टेंडर निकाले जाएंगे और नैनीताल की छोटी – बड़ी हर सड़क पर सिर्फ़ और सिर्फ़ वाहन ही खड़े होंगे, बाक़ी ख़रीदारी करने लोग हल्द्वानी के मॉल में जाया करेंगे, काश उक्त बाज़ार के लिये भी एक गेट लगता जिसका एक निश्चित समय होता खुलने और बंद होने का तब शायद बच्चे और बुज़ुर्ग निश्चिंत होकर घर से निकलते, लेकिन हम आदि हो गये हैं, ऊँचे फरमानों के बाद पहल करने के लिये, उससे पहले हम बदल जाएँ हमारे स्टैण्डर्ड की तौहीन होगी न, हैं ना ? न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 141 : …तो वो दिन दूर नहीं जब हमारे घरों के भीतर से भी गुजरेंगी गाड़ियां ! (6 मई 2019)
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न, वो दरअसल तस्वीर नहीं है, नैनीताल के बाशिंदों पर थोपा गया फ़रमान है, कैसे और क्यों हम इस इंतज़ाम को थोपा गया फ़रमान बता रहे हैं, आइये जानते हैं :- नैनीताल पर्वतों का राजा है और पूरे जहान में, ये ही इकलौता राजा है, जिसके राज में वज़ीर की कोई सुनता नहीं और जिसके सेनापति अपनी- अपनी ज़िम्मेदारियों से बचते फिरते हैं, जब किसी के पास कुछ नया निज़ाम लागू करवाने का वक़्त आता है तब सब उछलते रहते हैं और जब उस फ़रमान के लिये जवाबदारी का वक़्त आता है तो बॉल एक दूसरे के पास उछालते रहते हैं, ये तो उनकी फ़ितरत है, ख़ैर, कुछ साल पहले मस्जिद चौराहे से नैनीताल क्लब तक आने-जाने के लिये, मेट्रोपोल वाली सड़क का ही इस्तेमाल होता था, लेकिन ट्रैफ़िक जाम से निजात दिलाने के लिये नैनीताल क्लब से बीडी पाण्डे अस्पताल तक की सड़क को गाड़ियों के लिए खोल दिया गया, उसमें हुआ यूँ कि नैनीताल आने वाली गाड़ियां मस्जिद वाली सड़क से शहर में आएंगी और यहां से जाने वाली गाड़ियां नैनीताल क्लब से होते हुए शहर से बाहर निकल जाएंगी, सोच सही भी हो सकती थी अगर उसके साइड इफेक्ट्स पर उन सिपहसालारों ने ज़रा भी सोचा होता, काश उन्होंने ये निज़ाम लागू करवाने से पहले ये सोचा होता कि जब गाड़ियां तेज़ रफ़्तार से आएंगी तो वहां बाज़ार से सामान ख़रीदने आये और काम पर आते -जाते महिला / पुरुष कैसे चल पाएंगे ? दूसरा छोटे – छोटे मासूम बच्चे स्कूल से आते – जाते एक ख़ौफ़ का साया साथ लेकर चलते हैं कि कहीं कोई रॉंग साइड बाइक वाला या ऊपर से आती कोई तेज़ रफ़्तार गाड़ी टक्कर न मार दे, (ऐसी ही एक घटना कुछ दिन पहले हुई थी जिसमें एक पिकअप वाहन की चपेट में एक युवक घायल हो गया था) वहीँ अगर बुज़ुर्गों की बात करें तो उनके लिये ये सड़क मुसीबत का सबब बन गयी है, दरअसल ये सड़क मल्लीताल के लगभग सभी मोहल्लों को जोड़ती है और न चाहकर भी उन बुज़ुर्गों को अस्पताल / दवाई वगैरह के लिये इस ख़ौफ़नाक सड़क पर चलना ही पड़ता है यक़ीन जानिये जब तक वे लोग इस सड़क को नहीं छोड़ देते तब तक उनके माथे पर फ़िक्र का पसीना बहता रहता है, जानवरों की बात करें तो उन सबने तो इसको ख़ूनी सड़क क़रार दे दिया है और भला ऐसा हो भी क्यों न उनके परिवारों के शेरू, टाइगर, ब्लैकी न जाने कितने सदस्य तेज़ रफ़्तार गाड़ियों की चपेट में अब तक आये हैं, शहर की बिल्लियोंं ने तो खुन्नस में कई खम्बे नोच दिए हैं, एक हम ही हैं जो इंसान कहलाते हैं और हमने ही कभी अपनी खुन्नस निकालने की कोशिश नहीं की, कभी इस वाहियात इंतज़ाम के लिये धरना / प्रदर्शन नहीं किया, घुट- घुट कर जीने को मजबूर हैं, दब- दब कर सिकुड़कर चलने के आदि हो गए हैं, और इसी तरह हम इन बदइंतज़ामों को गले लगाते रहे तो वो दिन दूर नहीं जब ये सिपहसालार ट्रैफ़िक मैनेज करने के नाम पर आपके / हमारे घरों के बीच से सड़क निकाल देंगे और आप चाय का कप हाथ में लेकर गाड़ी को निकलने का रास्ता देंगे और फिर अख़बार बिछाकर उसी सड़क पर बैठकर आराम से पकौड़े खाएंगे… तो तैयार रहिये ऐसे ही किसी लाजवाब ट्रैफ़िक कण्ट्रोल प्लांनिग के लिये जो बैडरूम से सीधा हाई- वे के नज़ारे दिखाएगा और हम ख़ुशी- ख़ुशी हर दबाव के लिये आदि हो जाएंगे !
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 140 : ‘6 से 8’ के चक्कर में कहीं ‘ऊपर’ ही न पहुंचा दे और खुद भी शहीद न हो जाये ऊपर वाली सड़क ! (3 मई 2019)
साहिबान, दिल को बहलाने को एक ख़बर मिली है कि शाम के वक़्त अपने वाहन से मल्ली से तल्ली जा सकेंगे लोग, वाह बेहद खूब, चलो ख़ुशी है इस बात कि हमारे शासन व प्रशासन में बैठे महानुभावों को यहां के लोगों का कुछ तो ख़याल आया, ख़याल आया लेकिन महज़ लोगों का अगर नैनीताल का ख़याल आया होता तो शायद ऐसा ख़याल नहीं आता, हमें यक़ीन है ,कि जिस सड़क को चार पहिया वाहनों के लिये खोलने की बात हो रही है क्या उस सड़क का भौगोलिक सर्वे किया ? नहीं ! क्या हमारे महानुभावों ने कभी उस सड़क पर खुद जाकर देखा कि उसमें कितने गड्ढे, कितने टल्ले या कितने अटपटे मोड़ हैं ? या ये जानने की कोशिश की कि वहां कितने स्थानीय बुज़ुर्ग लोग शाम की हवा खाने टहलने आते हैं ? छोटे- छोटे बच्चे अपनी मांओं का हाथ पकड़कर बाज़ार से डोरेमोन का पेंसिल बॉक्स खरीदने जाते हैं, जी हाँ इन सभी बातों पर हमें पूरा यक़ीन है कि किसी भी हस्ती के पास इतना सोचने का वक़्त नहीं है बस फैसले लेने का हक़ है, सब अपनी अपनी ज़िम्मेदारियों से हाथ झाड़ना जानते हैं कोई उन हाथों को नैनीताल के आंसू पोंछने के लिए इस्तेमाल करना नहीं जानता, ख़ैर, हमारे कहने या न कहने से क्या फ़र्क़ पड़ता है, साहब लोगों ने जो फैसला कर दिया वो पत्थर की लक़ीर समझा जाएगा, फिर चाहे नैनीताल की रूह दर्द से तड़प जाए, किसी को कोई परवाह नहीं, आप तो बस अपनी आरामदायक गाड़ियों के महंगे शॉकर से सड़कों के गड्ढे महसूस नहीं कर पाओगे लेकिन उस गड्ढे वाली सड़क के नीचे जो कमज़ोर परत है वो धीरे – धीरे खिसकती जाएगी और उसके आगे का तस्सवुर करना भी हमारे लिये मुमकिन नहीं ! न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 139 : ADB मतलब, ए डेंजरस ब्लंडर इन पाइपलाइन, घोटाला तो नई पाइप लाइन में है ! (1 मई 2019)
बुधवार को पानी आने के बाद पॉपुलर कंपाउंड में ADB की लाइन से हो रहे लीकेज के बाद छाता पकड़कर जाना पड़ा
साहिबान, बरसों पहले की बात है त्रिऋषि सरोवर नगरी में जल की कोई समस्या नहीं थी, क्योंकि आबादी बहुत कम थी लोगों का काम जल श्रोतों के ज़रिये ही चल जाया करता फिर धीरे- धीरे नगर की आबादी बढ़ने लगी लोग जगह – जगह अपने मकान बनाने लगे, अब हर जगह पानी के श्रोत हों ये ज़रूरी तो नहीं इसलिए उन लोगों को पानी की दिक्कत पेश आने लगी, इसी तरह की परेशानी से काफी लोग दो – चार होने लगे तब घऱ- घर पानी पहुंचाने का कार्य शुरू हुआ और धीरे – धीरे इस काम ने सरकार द्वारा गठित जल विभाग का रूप धारण किया पानी की नलों के ज़रिये सप्लाई अंग्रेज़ों ने ही शुरू की और बेहद बेहतरीके से पाइप का ताना- बाना बुना गया, अंग्रेज़ों के जाने के बाद हम भारतीयों ने इस विभाग को अपने क़ब्ज़े में ले लिया फिर जल की सप्लाई सुचारु हो गयी, सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था कि एक दिन अचानक नगरवासियों को मिनरल वाटर का झांसा देकर नार्मल वाटर की भी आबरू तार तार कर दी, न मिनरल वाटर आया न कुछ और ऊपर से जो नार्मल वाटर भी आता था उससे भी हाथ धो बैठे हालाँकि चुल्लू भर पानी के लिए भी उल्लू बनना पड़ रहा है फिर भी कोई बात नहीं, सबसे दिलचस्प बात ये है कि नगरी में शनिवार सनी घरों तक नहीं पहुंच रहा है, सब इसका ज़िम्मेदार सीधे तौर पर जल संस्थान को मान रहे हैं लेकिन उस छिपे हुए चोर का ज़िक्र कोई नहीं कर रहा है जिसकी वजह से आज झीलों की नगरी के वासी बूँद बूँद को तरस रहे हैं इसके पीछे मुख्य कारण है ए डी बी द्वारा बिछाई गयी लाइन जिसमें कितने करोड़ों का घोटाला हुआ है कुछ नहीं कहा जा सकता ? उक्त तथाकथित लाइन को नेपाल के कुशल इंजीनियर काम पर लगाये शटर में वेल्डिंग करने वालों से लाइन को जुड़वाया और मज़े की बात पूरी टीम का नेतृत्व किया था किसी शिक्षक ने, किसी क्लर्क ने और न जाने कितने ऐसे ही अलग अलग संस्थानों के लोगों ने मिलकर एक मुजैसिमा तैयार किया जिसे ए डी बी की लाइन के नाम से जाना जाता है,
ये लाइन इतनी शानदार मेटल में तैयार करवाई है कि उसमें वेल्डिंग नहीं किया जा सकता जो पुरानी लाइन थी वो लोहे की बनी होती थी जिस पर वेल्डिंग करना आसान होता था, इसलिये कहीं लाइन टूटने पर जल्दी जुड़ जाती थी आज की तरह अनिश्चितकालीन मामला नहीं होता, कितने करोड़ों की योजना का पलीता लगाया गया है और क्यों हम उसका जवाब चाहते हैं आखिर क्यों नहीं ए डी बी के ख़िलाफ़ जाँच बैठाई जा रही ? हम इस योजना की जाँच की मांग करते हैं |
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 138: ‘शिक्षा कर कार्यालय’ के तानाशाह का फ़रमान: अगर अफोर्ड नहीं कर सकते तो सरकारी स्कूल में डाल दो बच्चे..” (26 अप्रैल 2019)
जी हाँ, साहिबान, ये फ़रमान है हमारे शहर नैनीताल के एक मशहूर स्कूल (नाम तो आपने सुना ही होगा) की मुखिया का कि “अगर आप अफोर्ड नहीं कर सकते हो तो सरकारी स्कूल में डाल दो” इसके बाद वो जो कहना चाहती थी उसको पूरा करने में आइये हम उनकी मदद करते हैं :- अगर आप अफोर्ड नहीं कर सकते तो सरकारी स्कूल में डाल दो, क्योंकि हम नहीं सुधरेंगे, सरकारी स्कूल में डाल दो, क्योंकि कोई अभिभावक हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता, सरकारी स्कूल में डाल दो, क्योंकि हम तो यूँ ही लूटेंगे, सरकारी स्कूल में डाल दो, क्योंकि हमारा लालच कभी ख़त्म नहीं होगा, सरकारी स्कूल में डाल दो क्योंकि हम तो मुंह ज़ोर ही रहेंगे, सरकारी स्कूल में डाल दो, क्योंकि शिक्षा विभाग हम पर कोई कार्रवाई नहीं सकता… ऐसे ही न जाने कितने परमाणु बम मारक क्षमता रखने वाले ऊल- जलूल ख़यालों के साथ उन हिटलर का मन शांत होता है, आप समझ ही सकते हैं स्कूल वालों का मन जब शांत होता है तब एक अभिभावक के मन में सैलाब उमड़ रहा होता है, उसी सैलाब की ख़ामोशी को महसूस करते हुये हमने 02/04/2019 को अपर शिक्षा निदेशक महोदय को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें हमने स्कूल खुलते ही निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिये कार्रवाई की मांग की थी लेकिन बड़े शिकारी जब बड़ी मछलियों के रेहबर बन जाएँ तो छोटी मछलियों को अपने परिवार दांव पर लगाने पड़ते हैं, यही हाल हमारे शिक्षा तंत्र में हो रहा है कौन सा स्कूल कितनी फीस बढ़ाएगा, किस मद के लिए कितना शुल्क तय किया जाये किसी को कोई परवाह नहीं हर स्कूल अपने -अपने समंदर के हिसाब से तय कर लेता है कि किस मछली का शिकार कब और कितना करना है, ख़ैर, हमने अभिभावकों को बार -बार जागरूक करने की कोशिश की है कि कोई भी अभिभावक किसी भी स्कूल प्रशासन के दबाव में न आएं, हाँ हम ये भी जानते हैं कि एक अभिभावक की मजबूरी हो जाती है स्कूल की हर मांग मान लेना क्योंकि वे सब नहीं चाहते कि उनके बच्चे के साथ स्कूल प्रशासन नफ़रत से पेश आये, या उनकी ऊँची आवाज़ उनके बच्चे का भविष्य ख़ामोश कर दे, इसी बात का फ़ायदा स्कूल प्रशासन उठाता है और चला देता है, चाबुक अभिभावकों की इसी दुःखती रग पर…
आख़िर में, प्रधानमंत्री महोदय, मुख्यमंत्री महोदय, शिक्षा मंत्री महोदय, कुमाऊँ आयुक्त महोदय, ज़िलाधिकारी महोदय, अपर शिक्षा निदेशक महोदय, मुख्य शिक्षा अधिकारी महोदय, से तहे दिल से इल्तेजा है कि सूबे में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिये शुल्क नियामक अधिनियम को लागू कर सभी शिक्षण संस्थानों पर नकेल कसी जाये जिससे शिक्षा, शिक्षा ही रहे व्यापार न बने और नैनीताल के प्रकरण में जाँच कर उचित कार्रवाई करने की कृपा करें कि आख़िर क्यों इतनी शुल्क वृद्धि करके अभिभावकों को दबाव में लिया जा रहा है |
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अंक 137: आज़ाद के तीर : पॉपुलर कंपाउंड में नल सूखे, सीवर झील में…(14 अप्रैल 2019)
कहीं पड़ा सूखा, कहीं जल की बर्बादी, कहीं सीवर जा रही झील में किसी ने कूड़ा फेंका नालों में हुज़ूर, ये कैसी आज़ादी ?
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं वो दरअसल तस्वीर नहीं है बल्कि सबूत हैं उस गुनाह के जो जाने- अनजाने पॉपुलर कम्पाउंड मल्लीताल नैनीताल के इलाक़े में हो रहा है लेकिन हममें से किसी की निगाह उस पर नहीं पड़ रही, जिन महकमों की ज़िम्मेदारी बनती है, वो अपना -अपना मतदान करके हर फ़िक्र से आज़ाद हो गये हैं या यूँ कहें सो गए हैं, उन्हें न ही मोबाइल की घंटी सुनाई देती है और न ही शहर की हालत दिखाई देती है, इसकी साड़ी मेरी साड़ी से सफ़ेद कैसे? ये लाइन तो आपने अक्सर सुनी होगी लेकिन ये कम्पटीशन की भावना सिर्फ़ महिलाओं में ही नहीं होती जनाब बल्कि सरकारी महकमों में भी होती है, इसकी बानगी आपने देखनी हो तो कभी पधारो म्हारे देस, जी हाँ, आप ज़्यादा दूर नहीं जाइये बस नैनीताल आइये, यहां किसी भी गली मोहल्ले के किसी भी कोने से शुरुआत कर दें, तो आप पाएंगे कि जगह -जगह सीवर लाइन लीक हो रही होगी, नालियों का गंदा पानी नालों में पहुंचने के लिये बेताब हो रहा होगा, जगह-जगह गंदगी के ढेर दिखाई देंगे, बेतरतीब रखे कूड़ेदान चीख -चीखकर ये ऐलान कर रहे होंगे कि हम तो ऐसे ही चौड़े होकर सड़क पर खड़े रहेंगे हमारा कोई कुछ नहीं सुधार सकता, नालों की क़िस्मत लोगों के घरों से निकले कूड़े से चमक रही होगी, कुल मिलाकर देखा जाये तो आप पाएंगे कि नाले साफ़ रहने चाहिये लेकिन वो कूड़ादान बने हैं, कूड़ादान जो साफ़ रहने चाहिये वो लबालब भर कर सड़क तक शैतान बने हुये हैं, सरकार ने ग़रीबों के लिये जो कभी सरकारी नल लगाये थे, वो सूखे खड़े हैं, और जिन नालियों में बारिश का पानी बहना चाहिये, वो सीवर की गंदगी लिये झील की तरफ़ सरपट दौड़ रही है, कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती अब किसी भी दफ्तर में कोई भी फरियाद लेकर जाओ, दफ़्तर के मुअज़्ज़िज़ लोग अपनी -अपनी सफ़ाई का पिटारा खोलकर बहानों के साँपों को हमारे गले में डाल देते हैं या कुछ सज्जन उन बहाना रूपी साँपों को दरवाज़े के नीचे से दूसरे दफ़्तर में छोड़ देते हैं और जब उस दफ़्तर में जाकर हालात देखो तो वही सांप किसी तीसरे दफ़्तर के दरवाज़े में सरका दिया जाता है, बस यही सांप – मदारी का खेल देखते – देखते जनता मायूसी के आख़िरी सिरे तक जाती है और जब कुछ हासिल होता नहीं दिखता तो वो वापस आ जाती है, घर में बैठकर यही ख्याल आता है, कितने साल, दिन – रात बदल गये लेकिन ये सरकारी महकमों में बैठे हुये लोग कब बदलेंगे, यही सवाल कायनात में गूंजता रह जाता है और एक आम आदमी सरकारी दफ्तरों में घूमता रह जाता है… आख़िर में, मा.प्रधानमंत्री महोदय, कुमाऊँ आयुक्त महोदय, ज़िलाधिकारी महोदय, अधिशासी अधिकारी महोदय जल संस्थान, नैनीताल अधिशासी अभियंता महोदय सिंचाई खंड, नैनीताल, अधिशासी अधिकारी / पालिकाध्यक्ष महोदय नगर पालिका नैनीताल, समस्त सभासद महोदय / महोदया आप सबसे तहे दिल से इल्तेजा है कि कभी पॉपुलर कम्पाउंड में जाकर देखें कि वहां की ग़रीब जनता किस हाल में रह रही है, यहां एक पुराना जनता नल हुआ करता था जिसमें पहले कभी पानी आता रहता था और आस पास के लोग उसमें से पानी भरकर गुज़ारा कर लेते थे लेकिन कई महीनों से वो नल सूखा पड़ा है, वो तो भला हो किसी खुराफाती इंसान का जिसने नल के नज़दीक नाले से गुजरने वाली पाइप लाइन को तोड़ दिया। अब सुबह-शाम जब भी पानी आता है वहां की ग़रीब जनता नाले में उतरकर अपनी जान को खतरे में डालकर उस पाइप लाइन से पानी भरती हैं और गुज़ारा करती है, वहीँ थोड़ी आगे सीवर लाइन फटने के कारण सीधे नाले में जा रही है। स्थानीय लोगों ने करीब 50 बार इसकी शिकायत भी कर दी है लेकिन किसी के कानों में जूं नहीं रेंग रही।
मेहरबानी करके सूखे नल में पानी सप्लाई करने, टूटी पाइप लाइन को जोड़कर पानी की बर्बादी रोकने और सीवर जो नाले में जा रही है उसे हटवाकर नैनी झील और नैनीताल के पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में मददगार बनकर एक मिसाल क़ायम करें …
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अंक 136: चुनावी मेंढक और हम !(12 अप्रैल 2019)
मैं भी चौकीदार
साहिबान, चुनावी बरसात में कितने बरसाती मेंढक निकलते हैं, सबके सब हर आंगन में जाकर टर्र -टर्र करते हैं और ये टर्र – टर्र मतदान से दो दिन पहले शाम 5 बजे बंद हो जाती है, इस बरसात में टरटराने वाले सारे मेंढकों की आवाज़ एक जैसी लगती है, पहचानने के लिये हमने एक दिन इनमें से “सुरीला टरटराने” वाले मेंढकों को एक थाली में रखकर उनकी पहचान करनी चाही लेकिन ये क्या थाली में एक भी मेंढक नहीं टिका, सब एक के बाद एक फुदक कर थाली से बाहर निकल गये और हम उन्हें देखते रह गये, कि इतनी शिद्दत से हमारे दर पर टरटराने वाले मेंढक इज़्ज़त के साथ थाली में रखते ही उछल गये और किसी झाड़ी में जाकर छिप गये, अब तो टरटराने की आवाज़ भी नहीं आ रही, और हम समझ गये लगता है ये मेंढक अगली चुनावी बरसात में ही निकलकर आएंगे।
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अंक 135 : एक अपील : किताबों को रद्दी न बनायें, यह करें… (8 अप्रैल 2019)
साहिबान, आप सबसे हमारी हाथ जोड़कर विनती है कि जिस तरह अमेरिका जैसे देश में शिक्षा सत्र के प्रारम्भ में बच्चों को किताबें दे दी जाती है जिससे वो अपनी पढ़ाई पूरी करते और दूसरी कक्षा में चले जाते हैं और फिर उन्हीं किताबों से उसके बाद वाले बच्चे पढ़ते हैं लेकिन हमारे देश में हर सत्र में नई किताबें बच्चों को खरीदने के लिये मजबूर किया जाता है, जैसे हर साल पाठ्यक्रम बदल जाता हो आख़िर क्यों हमारा शिक्षा विभाग इस तरफ़ ध्यान नहीं देता, वैसे तो हम पर्यावरण के बड़े चिंतक बने घूमते हैं और जब नई किताबों की बात आती है तो हम मौन धारण कर लेते हैं, आख़िर कहाँ जाता है हमारा पर्यावरण प्रेम, दूसरी तरफ़ हम गरीबी का रोना रोते हैं लेकिन हर साल पुरानी किताबों को रद्दी में बेचने में और नई -नई महंगी किताबें खरीदते हुये हम धन्नासेठ बन जाते हैं, आखिर क्यों हम इस कुप्रथा का अंत नहीं होने देते, आख़िर क्यों हम विरोध नहीं करते, क्यों हम न चाहते हुये भी लाखों पेड़ों के गुनहगार और लाखों दलालों के वफ़ादार न चाहते हुए हैं, आख़िर में, प्रधानमंत्री महोदय, मुख्यमंत्री महोदय, शिक्षा मंत्री महोदय, कुमाऊँ आयुक्त महोदय, जिलाधिकारी महोदय हमारी इल्तेजा है कि जितने भी निजी और सरकारी स्कूल हैं उनमें किताबों के वितरण की प्रणाली को एक दूसरे के काम आने वाली बनाकर लागू करवाया जाये जिससे सबसे पहले अनावश्यक पेड़ों का कटान कम होगा, अभिभावकों के सर से बोझ कम होगा और दलालों की दुकान बंद हो जाएगी, करके देखिये जनाब अच्छा लगेगा | न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 134 : जानें कहां फिर हुआ असर ‘नवीन समाचार’ व ‘आज़ाद मंच’ नैनीताल का (4 अप्रैल 2019)
शुक्रिया : प्रशासन नैनीताल का
साहिबान, हमने नवीन समाचार के स्तम्भ आज़ाद के तीर के 02/04/2019 के अंक में “सीज़न की धारदार तैयारियां शुरू” उन्वान के साथ नैनीताल शहर का हाल बयां किया था कि किस तरह यहां बड़ा बाज़ार को जाने वाले मेन गेट पर धारदार टीन निकला हुआ है जिससे कभी भी कोई हादसा हो सकता था, शासन -प्रशासन ने हमारी बात का संज्ञान लेते हुये उस पर तत्काल कार्रवाई की और उक्त तथाकथित टीन को वहां से हटाया गया जिसके लिये आज़ाद मंच परिवार शासन – प्रशासन का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता है और साथ ही ये भी उम्मीद करता है कि उक्त टीन के अलावा हमने जितने भी मौज़ू पर आपका ध्यान खींचने की कोशिश की गयी थी जैसे पार्किंग, उद्यान, साफ़ – सफ़ाई के इंतज़ामात, हमें उम्मीद के साथ पूरा यक़ीन है कि महज़ दो बेरी केडिंग व्यवस्था से ऊपर उठते हुए कोई बेहतर कार्य प्रणाली के साथ इस बार सीज़न व्यवस्था संभाली जाएगी, जिससे नगर हित के साथ – साथ पर्यटन हित भी बना रहे |
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अंक 133 : नैनीताल में सीजन की ‘धारदार’ तैयारियां शुरू… जानें कैसे.. (2 अप्रैल 2019)
जी हां, सीज़न की ‘धारदार’ तैयारियां शुरू हो गई हैं ! इसके लिए नुकीले टीन मेन गेट पर लटका दिये गए हैं ! जगह- जगह से कूड़ेदान हटा दिये गये हैं ! पार्किंग व्यवस्था राम भरोसे छोड़ दी गयी है ! साहिबान, सरोवर नगरी में सीज़न ने दस्तक दे दी है, तो हमारे यहां के शासन – प्रशासन ने भी लापरवाही में मिसाल बीसतक दे दी है, हुज़ूर आप कहेंगे ये क्या बात हुई और हम बोलेंगे यही तो बात हुई जो बार बार मिन्नतें करने के बाद भी हर साल इतने सबक़ के बाद भी हमारा शासन -प्रशासन कोई सीख नहीं लेता, बस लेता है तो दो बेरी केडिंग लेता है एक हल्द्वानी रोड पर और एक कालाढूंगी रोड पर लगा देता है, और किसी भी वाहन को ऊपर नगर में आने नहीं देता, वाह भई वाह, ये तरकीब जिसने निकाली उसे लाखों तोपों की सलामी देने का मन करता है, बाई गॉड, साला सांप भी नहीं मरा और लाठी भी तोड़ दी, इसे कहते है टैलेंट, जब टूरिस्ट ही ऊपर को नहीं आएगा तो न ही ट्रैफिक होगा, न प्रदूषण होगा, न गंदगी होगी, सब कुछ शांत रहेगा, तो बस कुछ नहीं करना है, दो पुलिस वाले इस रोड से टूरिस्ट को उधर लताडेंगे, दो उधर से इधर, तो फिर वो जाएगा किसी और हिल स्टेशन, फ़िलहाल तो वो ये सोचकर रानीखेत- अल्मोड़ा का रुख ले लेगा के अब इतनी दूर आ ही गए तो क्या वापस जाएँ, ख़ैर, इससे नैनीताल के आस- पास के इलाकों की मांग बढ़ जाएगी बहुत ख़ुशी की बात है लेकिन आपने वो गाना तो सुना ही होगा जिसमें इन्हें पंछी कहा गया है कि “रात को ठहरे तो उड़ जाएँ दिन को, आज यहां कल वहां है ठिकाना” जी बस एक -दो बार तो नैनीताल के नाम पर टूरिस्ट कहीं और चला जाएगा लेकिन अगली बार हमारे प्रशासनिक बेहतरीन इंतज़ामात की वजह से अगली बार नैनीताल आने से पहले दस बार सोचेगा के अगर इस बार भी वहां हाउस फुल का बोर्ड लगा दिया फिर क्या होगा ? ख़ैर, उसके लिये घूमने की जगह कम नहीं है उत्तराखंड में ही ऋषिकेश, मसूरी, पिथौरागढ़, कौसानी, बागेश्वर, रानीखेत, अल्मोड़ा जैसे बेहद खूबसूरत पहाड़ी क्षेत्र हैं, जहाँ वो घूमने जा सकता है, फिर धीरे -धीरे सरोवर नगरी में वही टूरिस्ट आएंगे जो रोड़वेज़ की बस में ₹65 रूपये का किराया लगाकर आएगा, ₹10 में शेयरिंग रिक्शे में बैठेगा और एक चक्कर चाट मार्केट जाएगा, ₹50 की सोनम की चाऊमीन खाकर, ठंडी सड़क पर सेल्फी खींचता हुआ, वापस रोडवेज़ की बस में बैठकर ₹65 का टिकट खरीदकर घर वापस लौट जाएगा, न टैक्सी वालों को कोई पूछेगा, न किसी गाइड से कोई होटल पूछेगा, सब मस्त आराम से चैन की बंशी बजाएंगे, शहर की हालत पर क्या बोला जाये, पार्क, सड़कें, साफ़ – सफ़ाई और कूड़ेदान की व्यवस्था चीख – चीखकर अपने पैरों को देखकर आज भी रोती है … न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 132 : आ गया देश का पहला लोकपाल, ऐसी बदलेंगी व्यवस्थायें..(25 मार्च 2019)
देश के पहले लोकपाल न्यायमूर्ति पिनाकी घोष
भ्रष्टाचार का सीसीटीवी लोकपाल ! लोकपाल से जगी उम्मीदें ! देश को मिला पहला लोकपाल
साहिबान, ये बेहद ख़ुशी की बात है कि हमारे देश को जस्टिस पिनाकी घोष के रूप में पहला लोकपाल मिल गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की मौजूदगी में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने उन्हें शपथ दिलाई।
जस्टिस घोष के साथ न्यायिक सदस्यों के तौर पर जस् कुमार त्रिपाठी, जस्टिस अभिलाषा कुमारी, जस्टिस दिलीप बी.भोंसले और जस्टिस प्रदीप कुमार मोहंती को शामिल किया गया है। न्यायिक सदस्यों के साथ ही कमेटी में 4 और सदस्यों के तौर पर दिनेश कुमार जैन, अर्चना रामसुंदरम, महेंद्र सिंह और इंद्रजीत प्रसाद गौतम भी रहेंगे। जस्टिस पी. सी. घोष राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य रह चुके हैं। जस्टिस घोष को मानवाधिकार कानूनों के जानकार के तौर पर भी जाना जाता है। लोकपाल केंद्रीय सतर्कता आयोग के साथ मिलकर काम करेगा। लोकपाल सीबीआई समेत किसी भी जांच एजेंसी को आरोपों की जांच करने का आदेश दे सकेगा। इसके अलावा इसकी जांच के दायरे में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री सांसद और सभी तरह के कर्मचारी आएंगे ये और भी ख़ुशी की बात है, अब कोई नहीं बच सकता भ्रष्टाचार पर नकेल लगाने के लिये सीसीटीवी होना बेहद लाज़मी था, अब आम जनता को इससे काफ़ी उम्मीदें जागी हैं, और हम इस क़दम के लिये भारत सरकार का शुक्रिया अदा करते हैं, और उम्मीद करते हैं कि लोकपाल रूपी सीसीटीवी जिस मक़सद के साथ लागू किया है हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है वो 24 घंटे हर पल देश की नब्ज़ के हाल से रूबरू रहेंगे और किसी भी भ्रष्टाचार की शिकायत पर तत्काल एक्शन लेंगे, फिर चाहे उनके सामने कोई तुर्रम खां ही क्यों न हो, और साथ ही ये भी दुआ है कि हमारे लोकपाल रूपी सीसीटीवी में कभी शार्ट सर्किट न हो और न ही किसी जहां पनाह की तौलिया सुखाने के लिये सीसीटीवी पर डाली जाये, फिर असली मक़सद पूरा होने में कोई माई का लाल हो या काला, या गोरा कोई नहीं रोक सकता, अब भ्रष्टाचारियों की दाल नहीं गलने वाली नहीं |
अंक 131 : एक ‘करेला’ जो आज ‘नीम’ पर चढ़ गया…, बूझो कौन ? (24 मार्च 2019)
एक तो था ही कड़वा ऊपर से नीम पर चढ़ गया! अब कुछ पता नहीं, कब तक पेड़ पर से उतरेगा?
साहिबान, हमारे शहर में एक करेला था, आप ये मत कहियेगा जनाब कि करेला वो भी शहर में, ये क्या माजरा है, अरे हुज़ूर, माजरा कुछ नहीं है बस करेले की कहानी पर फोकस करिये तो फ़ायदा महसूस होगा, तो साहब वो करेला अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आता था इसलिए मशहूर भी था, जिसके मुंह भी लगता उसका मुंह कड़वा हो जाता, फिर चाहे शहर वाला हो या गांव वाला कोई भी उससे मुंहज़ोरी नहीं करना चाहता था, उसमें बस एक गुण था, वो मिलता हर जगह था, चाहे गिनती में एक हो या दो लेकिन मिल ज़रूर जाता था, इसलिए इसी ख़ूबी की वजह से गाँव- देहात के लोग तो उसे भगवान से कम नहीं मानते और ये बात किसी ने एक दिन करेले को बता दी, फिर क्या था ? भाव बढ़ गये तब से उसके, और इन्हीं भावों की वजह से करेले का सर सातवें आसमान पर रहता और पैर सातवीं ज़मीन पर, अगर उसका बस चलता तो आठवीं, नौवीं या दसवीं ज़मीन भी कम पड़ जाती उसके लिये, अब जिसके सर, पैर, दिमाग़ अपनी-अपनी जगह पर न हो वो भला कब तक ख़ैर मनाता, हो गयी एक दिन, टांय-टांय फिस्स, जिस गांव-देहात के लोग करेले को भगवान मानते उन लोगों को भी आईडिया आ गया कि करेले के नाम बड़े और दर्शन छोटे हैं, और उन्होंने अपने घरों से करेले की पुरानी से पुरानी बेलों को भी उतारना शुरू कर दिया, देखते ही देखते करेले की गुणवत्ता पर से लोगों का भरोसा उठने लगा, सब एक ही ज़ुबान में बस एक ही बात बोलने लगे, जब इस करेले की बेल *भगवान से न लगे* तो हम तो फिर भी इंसान ठैरे, और धीरे -धीरे करेले के चाहने वालों की गिनती कम होती चली गयी, फिर एक दिन तो ऐसा आया बाई गॉड, वो कहते हैं न ऊपर वाले की लाठी में आवाज़ नहीं होती, बस एक दिन पड़ गयी भगवान की बेआवाज़ लाठी और लग गयी करेले की फसल में आग, ऐसे में उन लोगों को उस आग में हाथ सेंकने का मौक़ा मिल गया जिन लोगों के मुंह का स्वाद करेले ने कड़वा किया था, देखते ही देखते सब कुछ जलकर खाक हो गया, हाँ करेला फिर भी बच गया क्योंकि करेला था बहुत शातिर, जैसे ही आग लगी वो अपने कुछ साथियों के साथ नीम के पेड़ पर चढ़ गया, फिर क्या था उसके चाहने वाले और न चाहने वाले सब यही कहने लगे कि देखते हैं, आग बुझने के बाद पहले जैसा कड़वा स्वाद अब कब तक आएगा ? वरना करेले की बला से, उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है, वो तो था ही कड़वा अब नीम पर चढ़ा है ही, सीधा सा फंडा है जिनको ज़्यादा ही कड़वा लगे वो बाज़ार जाओ और अपने आइडिया से कुछ मीठा खरीदकर खाओ और जिओ जी भरके |
अंक 130 : आज मजदूरों के दर्द पर (13 मार्च 2019)
ज़िम्मेदारी बनी मजबूरी !
मजबूरी बनी मज़दूरी !
न कोई न्यूनतम वेतन !
न कोई निश्चित काम के घंटे !
न कोई अवकाश !
न कोई त्यौहार !
न कोई पेंशन !
न कोई बीमा !
साहिबान, आज फिर हम बात करेंगे उसी मज़दूर तबक़े की जिसे इंसान तो कहा जाता है लेकिन उसके साथ इंसानों जैसा बर्ताव नहीं किया जाता, अक्सर आपने देखा होगा किसी दुकान में, किसी रेस्टौरेंट में, किसी छोटी सी फैक्टरी में या किसी घर में काम करते हुये नौकरों को, हालाँकि, बड़ी -बड़ी फैक्ट्री, कारखानों में तो फिर भी नियमों- उपनियमों का पालन हो जाता है, लेकिन जिस जगह की हम बात कर रहे हैं, वहां न कोई नियम होता है, न कोई पालन, वहां होती है फ़क़त काम करने वाले की मजबूरी और काम पर रखने वाले की तानाशाही, शहरों की इन दुकानों में, होटलों में कोई श्रम विभाग का अधिकारी झांकने तक नहीं जाता, कहीं – कहीं तो इन जगह पर काम करते हुए आपको छोटे -छोटे मासूम बच्चे जिनकी उम्र खेलने कूदने और पढाई करने की होती है वे बच्चे अपने मालिकों की सेवा करते दिख जाएंगे, इस सेवा के बदले उनके मालिकों की उनपर ये मेहरबानी होती है कि न तो उनकी कोई न्यूनतम मज़दूरी तय होती है, न उनको कोई उचित वेतन मिलता है, और न ही उनको कोई अवकाश दिया जाता है, 24 घंटे में से लगभग 16 घंटे काम ही काम, यहां तक कि उनके हिस्से से त्यौहारों की रौनक़ भी छीन ली जाती है, न ही काम के घंटे तय होते हैं, न दुर्घटना होने पर कोई बीमा या मदद मिलती है, मिलती है तो बस ज़िल्लत और रुस्वाई, छोटी सी ग़लती पर मालिक की गालियां और मार खा खाकर यहां काम करने वाले बच्चे कब जवान हो जाते हैं और एक ही जगह काम करते हुये ये कब बूढ़े हो जाते हैं, कुछ पता नहीं लगता, जब तक इनके हाथ पैर सही सलामत होते हैं इनको थोड़े बहुत पैसे मिलते रहते हैं लेकिन जैसे ही ये बीमार या किसी दुर्घटना में घायल हो जाते हैं वही धन्ना सेठ मालिक उन्हें पहचानने तक से इंकार कर देते हैं, उस वक़्त उस बेचारे ग़रीब पर क्या बीतती होगी जिसने बचपन से लेकर जवानी और बुढ़ापा तक उस ज़ालिम सेठ की सेवा में लगाया हो, ऐसी हालत में आखिरकार वो बेचारा या तो अपने घर लौट जाता है या यूँ ही दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर हो जाता है, ख़ैर, मज़दूरों के क्या अधिकार हैं, उनके बारे में जानते हैं :- मजदूरी के अधिकार
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम,1948 में विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए न्यूनतम मजदूरी की दरें तय की गयी हैं।
1- मजदूरी के बारे में अपने नजदीकी श्रम कार्यालय में से कोई भी व्यक्ति किसी भी वर्ग की न्यूनतम मजदूरी का पता कर सकता है ।
2- अगर नियोक्ता न्यूनतम मजदूरी से कम मजदूरी दे रहा है तो श्रम निरीक्षक के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं ।
3- अगर कर्मचारी न्यूनतम मजदूरी से कम रकम पर काम करने को तैयार हो जाए, तो भी नियोक्ता का यह कर्तव्य है कि वह उसे न्यूनतम मजदूरी दे।
मजदूरी का भुगतान
1-मजदूरी का भुगतान हमेशा नकद और पूरा होना चाहिए।
2-मजदूरी का भुगतान हर हालत में अगले महीने की दस तारीख तक कर दिया जाना चाहिए।
3-मजदूरी में कोई कटौती कानून के मुताबिक ही होनी चाहिए।
समान कार्य के लिए समान मजदूरी
समान वेतन अधिनियम, 1976 में एक ही तरीके के काम के लिए समान वेतन का प्रावधान है।
1-अगर कोई महिला अपने साथ काम करने वाले पुरुष जैसा ही काम करती है तो उसे पुरुष से कम वेतन नहीं दिया जा सकता है।
2-महिला (कानूनी पाबंदी वाली नौकरियों को छोड़कर) और पुरुष में नौकरी में भर्ती और सेवा शर्तों में कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा।
काम करने के निश्चित घंटे
1-किसी कर्मचारी से रोज नौ घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जाना चाहिए।
2- नौ घंटे से ज्यादा काम के लिए, अतिरिक्त मजदूरी दी जानी चाहिए।
3-कर्मचारी को सप्ताह में एक दिन वेतन-सहित अवकाश जरुर मिलनी चाहिए।
कर्मचारियों को मुआवजा
कामगार मुआवजा अधिनियम, 1923 के अंदर्गत कर्मचारियों को अनेक परिस्थितियों में मुआवजा पाने का अधिकार है।
1-कर्मचारी को ड्यूटी के दौरान किसी दुर्घटना में चोटिल होने पर मुआवजा पाने का अधिकार ।
2-काम पर आते या काम से घर जाते समय दुर्घटना होने पर भी कर्मचारी को मुआवजा पाने का अधिकार।
3-नियोक्ता का काम करने के दौरान दुर्घटना होने पर भी मुआवजा पाने का अधिकार ।
4-काम की प्रकृति की वजह से अगर कर्मचारी को कोई बीमारी लगती है तो कर्मचारी को मुआवजा पाने का अधिकार है।
5-लेकिन अगर बीमारी काम छोड़ने के दो साल बाद लगती है तो कर्मचारी को मुआवजे का अधिकार नहीं है।
6-अगर दुर्घटना या बीमारी से कर्मचारी की मौत हो जाती है तो उसके आश्रित संबंधी को मुआवजा दिया जायेगा।
मुआवजे का हकदार
1-फैक्ट्रियां, खानें, रेलवे , डाक, तार, निर्माण, इमारतों का रख-रखाव,
2-किसी इमारत में इस्तेमाल , परिवहन तथा बिक्री के लिए सामान रखना, जहां 20 से ज्यादा कर्मचारी हों।
3-टैक्टर अथवा अन्य मशीनों से खेती-बाड़ी, इसमें मुर्गी फार्म, डेयरी फार्म आदि शामिल हैं।
4-बिजली की फिटिंग के रख-रखाव का काम।
किस चोट पर मुआवजा
1-ऐसी चोट जिससे मौत हो जाए, शऱीर का कोई अंग कट जाए या आंख की रोशनी चली जाय आदि।
2-चोट की वजह से लकवा या अंग-भंग जैसी हालत हो जाए, जिसकी वजह से व्यक्ति रोजी-रोटी कमाने लायक नहीं रहे।
3-ऐसी चोट जिसकी वजह से कर्मचारी कम से कम तीन दिन तक काम करने के लायक ना रहे।
किस चोट पर मुआवजा नहीं
1-शराब पीने या नशीली चीजों के सेवन से दुर्घटना हुई हो।
2-कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए बने किसी नियम या निर्देश का जान-बूझकर उल्लंघन करने से हुई दुर्घटना।
3-कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध उपकरणों का जानबूझकर इस्तेमाल नहीं करने से हुई दुर्घटना।
मुआवजे लिए प्रमाण
1-कर्मचारी को सबसे पहले अपनी मेडिकल जांच करा लेनी चाहिए। जांच की रिपोर्ट की कॉपी अपने पास रखें।
2-कर्मचारी दुर्घटना की रिपोर्ट नजदीकी थाने में लिखवा देना चाहिए । रिपोर्ट में चोट का पूरा ब्योरा होना चाहिए।
3-दुर्घटना के चश्मदीद गवाह होने चाहिए।
महिला कर्मचारियों को विशेष अधिकार
1-फैक्ट्रियों में महिलाओं के लिए अलग प्रसाधन कक्ष होना चाहिए।
2-अगर किसी फैक्ट्री में 30 से ज्यादा महिला कर्मचारी हों तो वहां बच्चों के लिए शिशुगृह की व्यवस्था होनी चाहिए।
3-फैक्ट्री में काम सवेरे 6 बजे से शाम 7 बजे के बीच होना चाहिए।
4-मशीन में तेल डालने या साफ कराने का काम नहीं कराया जाना चाहिए।
5-एक सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जाना चाहिए।
6-लगातार 5 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जाना चाहिए।
7-खानों में जमीन के नीचे काम करने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए |
मुआवजे का दावा
1-दुर्घटना होने पर सबसे पहले नियोक्ता को नोटिस दें, नोटिस में कर्मचारी का नाम, चोट के कारण , तारीख और स्थान लिखें।
2-अगर नियोक्ता मुआवजा नहीं देता या पर्याप्त मुआवजा नहीं देता है तो कर्मचारी लेबर कमिश्नर को आवेदन दे।
3-आवेदन में कर्मचारी का पेशा, चोट की प्रकृति, चोट की तारीख, स्थान , नियोक्ता का नाम, पता नियोक्ता को नोटिस देने की तिथि, अगर नियोक्ता को नोटिस नहीं भेजा हो तो नोटिस नहीं भेजने का कारण का उल्लेख करें ।
3-यह आवेदन दुर्घटना होने के 2 साल के अंदर दे दिया जाना चाहिए। विशेष हालात में 2 साल के बाद भी आवेदन किया जा सकता है।
4-कुछ मामलों में मुआवजा श्रम आयुक्त के जरिये ही दिया जा सकता है। जैसे, कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में, उसके संबंधियों को श्रम आयुक्त के माध्यम से ही मुआवजा दिया जा सकता है।
महिलाओं का मातृत्व लाभ
मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 में महिला कर्मचारियों के लिए कुछ विशेष लाभ दिए गए हैं।
1-प्रसव के पहले और बाद में छह-छह सप्ताह का पूरे वेतन का अवकाश( 12 सप्ताह का अवकाश प्रसव के बाद भी लिया जा सकता है, इस अवधि का वेतन दे दिया जाना चाहिए)
2-गर्भस्राव हो जाने पर छह सप्ताह का अवकाश।
3-गर्भावस्था, प्रसव या गर्भस्राव की वजह से अस्वस्थ हो जाने पर वेतन सहित एक महीने का अतिरिक्त अवकाश।
4-अगर नियोक्ता के संस्थान में प्रसव से पहले तथा प्रसव के बाद की चिकित्सा सुविधाएं नहीं हैं तो चिकित्सा बोनस दिया जाना चाहिए।
5-शिशु के 15 महीने का होने तक रोजाना काम के बीच सामान्य अवकाश के अलावा, शिशु को स्तनपान कराने के लिए दो बार ब्रेक दिया जाना चाहिए।
6-गर्भावस्था के अंतिम महीने में महिला कर्मचारी से भारी काम नहीं कराया जाना चाहिए।
7-अगर महिला की प्रसव के बाद मौत हो जाती है तो नियोक्ता को उसके परिवार को 6 सप्ताह का वेतन देना होगा।
8-जबकि नवजात शिशु की मौत हो जाने पर , शिशु की मृत्यु हो जाने तक की अवधि तक का ही वेतन देना होगा।
9-जिस महिला ने प्रसव से पहले, पिछले 12 महीनों में कम से कम 80 दिन नियोक्ता के संस्थान में काम किया है, वहीं महिला इन लाभों को पाने की अधिकारी है।
गर्भावस्था का नोटिस
1-महिला कर्मचारी को प्रसव की संभावित तिथि, छुट्टी लेने की संभावित तिथि और प्रसव के दौरान किसी दूसरी जगह नहीं करने के विवरणों के साथ गर्भावस्था का नोटिस देना चाहिए।
2-यह नोटिस प्रसव के बाद भी दिया जा सकता है।
3-अगर किसी महिला ने गर्भावस्था का नोटिस नहीं या है तो इस आधार पर नियोक्ता उसे मातृत्व से जुड़े लाभ और सुविधाएं देने से मना नहीं कर सकता है।
शिकायतों का निपटारा
1-अगर नियोक्ता कर्मचारी को उसके लाभ नहीं देता है तो वह श्रम कार्यालय अथवा श्रम आयुक्त के पास शिकायत कर सकता है।
2-500 से ज्यादा कर्मचारियों वाली फैक्ट्री तथा खान में और 300 से ज्यादा कर्मचारियों वाले बागान में कल्याण अधिकारी की नियुक्ति अनिवार्य है।
3-केंद्र सरकार के अनेक कार्यालय, अस्पताल तथा अन्य कल्याण अधिकारी नियुक्त करते हैं। जहां कर्मचारी शिकायत कर सकते हैं।
आख़िर में, हमारा सरकार व प्रशासन से यही सवाल है कि इतने नियम अधिनियम बनाने के बावजूद भी अगर हमारे देश में मज़दूरों, कामगारों, कर्मचारियों आदि की हालत में सुधार नहीं आता तो क्या महज़ फाइल भरने के लिये ही बनाये गये हैं उपरोक्त नियम / अधिनयम ? जब तक हमारे समाज से धन्ना सेठों की तानाशाही खत्म नहीं हो जाती तब तक हमारे समाज के मासूम बच्चों और ऐसे ही न जाने कितने निजी कर्मचारी शोषण का शिकार होते रहेंगे और ये तानाशाही तब ही खत्म होगी जब सरकार और प्रशासन में बैठे हुये लोग जागेंगे और जागकर उक्त नियमों व उप नियमों का पालन करवाएंगे, फिर बनेगा हमारा उदयमान भारत, खुशहाल भारत |
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 129 : आज पलायन के दर्द पर (12 मार्च 2019)
एक सफ़र : मजबूरी से मज़दूरी तक ! आज़ादी से ग़ुलामी तक ! बेरोज़गारी से बीमारी तक !
साहिबान, एक अर्सा पहले की बात है, सर्दी अपनी उम्र की ढलान पर मौसम से अपना रौब खो रही थी, गर्मी नवजात शिशु की तरह हर दिल को भा रही थी, बस ऐसे ही किसी सुनहरी सुबह को मेरा दोस्त अपने पहाड़ी पुस्तैनी गांव में अपनी माँ से उस कच्चे गोबर वाले घर में माँ को छोड़कर शहर जाने की बात करने लगा, उसने गांव के ही किसी लड़के से शहर के ठाट -बाट की बात सुनी थी, बस तभी से उसका मन शहर की चकाचौंध को अपना हमदर्द समझ रहा था, बच्चे चाहे कितनी ही चिकनी चुपड़ी बातों से माँ को बेहलाने की कोशिश करें माँ समझ तो जाती है लेकिन अपने मासूम बच्चे की आँखों में जो उम्मीदों की चमक वो देखती है बस वही देखकर ख़ामोश रह जाती है और जब नए परिन्दें उड़ने के लिये अपने पंख फड़फड़ाते हैं तो अपने बच्चों को दर्द में देखकर परिंदों की माँ को भी दर्द होता है लेकिन ख़ुशी इस बात की ज़्यादा होती है कि आज से मेरा बच्चा आसमान में अपनी परवाज़ खुद भरेगा, हर तूफ़ान का सामना खुद करेगा, उस वक़्त माँ बच्चे को हौसला देती है और वही हौसला, मेरे दोस्त को शहर ले आया, जो पहाड़ी पर ही बसा हुआ था, जहां बारह महीने सैलानी घूमने आते, इस लिहाज़ से वहां होटल, रेस्टौरेंट, दुकाने बहुत ज़्यादा थी, जिस दोस्त ने मेरे दोस्त की आँखों में सपने भरे थे, उसी ने अपने बदले एक दुकान में उसे बतौर नौकर रखवा दिया और ख़ुद को मक्खन में से छुरी की तरह अलग करता हुआ, न जाने कहाँ ग़ायब हो गया, ख़ैर, जो चला गया उसका भगवान भला करे उसके लिये दुआ की और खुद लग गया मालिक की सेवा में, उसने दुकान को सुबह ठीक नौ बजे खोलना शुरू कर दिया, दोपहर में अपने मालिक का खाना उसके घर से लाकर देना और पिछली रात का बचा हुआ खाना खुद खाकर दुकान पर वापस काम पर लग जाना, रात को 11 बजे तक दुकान बंद करके मालिक के घर दिन का बचा खाना खाना और गोदाम में जाकर चुपचाप सो जाना, बस यही दिनचर्या में कब दिन, महीने, साल बीत गये पता नहीं चला, क्यूंकि उसमें सहने की ताक़त हर ज़ुल्म से ज़्यादा बड़ी थी, त्यौहार भी नौकरी की भेंट चढ़ते चले गये, हाँ उसे तसल्ली इस बात की रहती कि गांव जाने वाली केमू की बस में अपनी माँ को वो हर महीने पैसे टाइम से भिजवा देता, जैसे तैसे सबकुछ ठीक चल रहा था कि एक दिन एक तेज़ रफ़्तार गाड़ी ने उसे टक्कर मार दी और वो बेहोश हो गया, जब उसे होश आया तो सरकारी अस्पताल में था और उसके पैर पर प्लास्टर, सर पर पट्टी और हाथ से ख़ून की बोतल चढ़ रही थी, वो घबरा गया और आसपास देखा, वहां मरीज़ों के अलावा कोई नहीं, फिर एक नर्स आयी उसने बताया आपका एक्सीडेंट हो गया था, गाड़ी वाला भाग गया और आपको कुछ लोग यहां लेकर आये, घर का नंबर दे दो, हम आपके घर वालों को बता देते हैं, माँ को परेशान नहीं करना चाहता सोचकर उसने कोई जवाब नहीं दिया और जब पैर का प्लास्टर खुला तो वो अपने मालिक के पास पहुंचा जहाँ उसके जैसा कोई गांव का दूसरा लड़का काम पर लग गया था, उसने मालिक को सलाम किया लेकिन मालिक ने उसे ग़ैरों सी नज़रों से देखा और कोई तवज्जो नहीं दी, कुछ देर वो उसका चेहरा देखता रहा लेकिन मालिक अपने नोटों की गड्डियां गिनने में इतना मसरूफ़ था कि वो मासूम लड़का कब उसकी आँखों से ओछिल हो गया कुछ पता नहीं चला, शायद मालिक चाहता भी यही था, गांव की गाड़ी में बैठकर वो वापस गांव की पगडंडियों पर लड़खड़ाता हुआ अपने गोबर से बने कच्चे घर के सामने खड़ा होकर सोचता है कि जब वो अपने घर से निकला था तब उसके पास उम्मीदें, उमंगें, जोश और जुनून था लेकिन आज न सेहत है, न पैसा, न कोई ख़्वाब, साथ है तो बस ईमानदारी, लगन और मेहनत जिसके दम पर वो अपनी माँ की दुआओं से फिर सेहतमंद हुआ और अपने पुश्तैनी खेत में खेती करने लगा, आज ऊपर वाले ने अपनी मेहर उस पर बरसा रखी है, गोबर का घर पक्का दो मंज़िला बन गया, शादी हो गयी, उसकी माँ अपने पोते को बड़े नाज़ से खिलाती है भरा पूरा परिवार हंसी ख़ुशी अपनी ज़िंदगी अपने गांव में बिता रहा है।
“पलायन का अंत करें अपना गांव रोशन करें”
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर..
अंक 129 : महिलाओ सहना छोड़ो-कहना सीखो… (8 मार्च 2019)
ज़िंदगी तो है अमल सब्र के क़ाबू में नहीं, नब्ज़ का गर्म लहू, ठन्डे से आंसू में नहीं, उड़ने खुलने में है ख़ुश्बू, ख़में गेसू में नहीं, जन्नत एक और है, जो मर्द के पहलू में नहीं, उसकी आज़ाद रविश पर ही मचलना है तुझे, जिस मैं जलता हूँ, उसी आग में जलना है तुझे, क़द्र अब तक तेरी तारीख़ ने जानी ही नहीं, रोशनी भी तेरी आँखों में पानी ही नहीं, हार तूने कभी तक़दीर से मानी ही नहीं, हर अदा तेरी क़यामत है जवानी ही नहीं, अपनी तारीख़ का उन्वान बदलना है तुझे, उठ मेरी जान, मेरे साथ ही चलना है तुझे।।।
साहिबान, कैफ़ी आज़मी साहब की नज़्म के साथ आज अपनी बात आपके सामने पेश करने की हिम्मत कर रहा हूँ, 08 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है, बेशक़ मनाना भी चाहिये। लेकिन क्या सिर्फ़ एक दिन हम महिला सम्मान, महिला सम्मान की झूठी दलीलें पेश करके नहीं रह जाते, फिर उसके अगले दिन से ही जैसे अक्सर होता आया है, सब नॉर्मल हो जाता है, लोग उसी ढर्रे पर चलने लगते हैं, बाज़ार, गली, मोहल्लों में हर चौराहे पर भूखे भेड़ियों की तरह औरत ज़ात को लार टपकाते देखने लगते हैं, यहां हम हर मर्द ज़ात को गुनाहगार साबित नहीं कर रहे बल्कि हमीं में से छिपे हुये कुछ हैवान होते हैं, जो मासूम बच्चियों तक को अपनी हवस का शिकार बना लेते हैं, उनकी नज़र में औरत ज़ात के मायने महज़ भोग विलास की वस्तु है, हमारा समाज जब तक इन गिद्धों से निजात नहीं पा लेगा तब तक हमें महिला सम्मान, महिला सम्मान चीख – चीखकर दिखावा करने की ज़रूरत नहीं है, औरत ज़ात किसी सम्मान की मोहताज नहीं है, अरे जनाब, हमें तो अपने देश में हुये निर्भया कांड से भी सीख नहीं मिली, उसके बाद भी न जाने कितनी निर्भया हैवानों की हैवानियत का शिकार हुईं, जब तक हम अपनी सोच को बड़ा नहीं कर लेते हमें कोई हक़ नहीं, महिला दिवस पर सफ़ेद कुर्ता पहनकर बड़ी बड़ी बातें करने की, ऑफिस का माहौल या कॉलेज का सब जगह छोटी सोच वाले ठरकी क़िस्म के लोग मिल ही जाएंगे, ख़ैर, हमें ख़ुशी इस बात की है कि आज इतनी सुलगती फ़िज़ा में भी कुछ दिल को ठंडक देने वाली हिम्मती लड़कियां आगे आ रही हैं जो और लड़कियों को अपना हक़ मांगना नहीं छीनना सीखा रही हैं, जो बुलेट पर घूमती हैं, लड़कों के जैसे कपड़े भी पहनती हैं और कभी -कभी तो सिगरेट के कश भी मार लेती हैं, कुल मिलाकर इन परवाज़ भरने वाली लड़कियों को एक तब्क़ा भले ही उनके पीठ पीछे कुछ भी कहता फिरे, लेकिन जिन हैवानों ने धरती पर ही नरक बना दिया है, उन हरामखोरों का मुंह तोडना भी ये दिलेर लड़कियां जानती हैं, इसलिये बाक़ी सीधी -सादी लड़कियों चलना नहीं उड़ना सीखो, बाइक पर चलने वाली इन लड़कियों से थोड़ा टशन किराये पर ले लो और फिर देखना कोई भी बुरी नीयत वाला पास आना तो बहुत दूर तुम्हारी तरफ़ आँख उठाकर नहीं देखेगा, इसलिये सहना छोड़ो, कहना शुरू करो तभी हम असल मायनों में एक नया भारत देखेंगे, जब लड़की को कमज़ोर नहीं समझा जाएगा, उसे भी हर जगह उसी अनुपात में इज़्ज़त मिलेगी जितनी किसी मर्द को मिलती है, पैर से मोच निकालो और दिमाग़ से छोटी सोच निकालो, फिर अगले साल देखना असली वाला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस जब एक भी बलात्कार की घटना हमारे देश या विश्व में नहीं होगी, और हमारे समाज की लड़कियां निडर होकर तितली बनकर उड़ रही होंगी वो होगा हर महिला के लिये असली सम्मान, सच्चा सम्मान | आइये एक नये युग की शुरुआत करें, आग़ाज़ करें।
अंक 128 :’शत्रु की संपत्ति’ के आखिर कौन हैं ‘शत्रु’ ? (7 मार्च 2019)
आकाश से गिरी बिजली ! दुश्मन न करे दोस्त ने वो काम किया है !
साहिबान, हमारे शहर में एक बेहद पुरानी इमारत मौजूद है, जिसे दुश्मन की मिल्कियत कहा जाता है, उसका कुछ हिस्सा फिर से जलकर खाक हो गया, सुना है उस बारे में ज़िले के मुखिया ने जाँच के हुक़्म दिये हैं, ख़ैर, हमारे मन मंदिर में तो आज तक किसी जाँच ने कोई घंटी नहीं बजाई हों, फिर ज़्यादा दूर ही क्या जाना 20 रुपये का रिक्शा करो और पहुंच जाओ वहीं जहाँ हमारे ज़िले के मुअज़्ज़िज़ लोग बैठते हैं, कुछ साल पहले भी आग लगी थी, तब भी तत्कालीन साहब ने इसी टाइप वाली जाँच के आदेश दिये थे। वो जाँच कहाँ तक पहुंची कोई कंडक्टर बताएगा या उस ड्राइवर से पूछें जिस गाड़ी में जाँच आ रही है। हो सकता है वो हमारी तरह पैदल ही हो शायद इसलिये कहीं टाइम से नहीं पहुंच पा रही। वाह भई, हम तो आज तक उसी चौखट पर पलकें बिछाये बैठे हैं कि क्या पता कहीं से कोई जाँच पायल छनकाती हुई जीवन में आ जाये। सुबह से शाम दिन रात सब गुज़र गये लेकिन कोई उम्मीद लेकर नहीं आया। अब तो ये जांचें भी बेवफ़ा साबित होती जा रही हैं…। ख़ैर, जाँच में स्टेमिना तगड़ा होता है लम्बी चलती हैं। हमें तो ख़ुफ़िया बात ये भी पता लगी है कि दुश्मन मुल्क़ के पहले मुखिया इस दुश्मन जायदाद में जब ये शानदार होटल हुआ करता था आये भी थे। कुछ लोगों की मनहूसियत ऐसी शदीद तरीन होती है कि हज़ार उल्लुओं की मनहूसियत भी कम पड़ जाये। शानदार इमारत का उजड़ना लाज़िमी था, ख़ुदा का शुक्र है हमारे मुल्क़ को ऐसी मनहूसियत से तो निजात मिली…। ख़ैर आख़िर में, हमारा शासन – प्रशासन से एक छोटा सा सवाल है कि क्या शत्रु सम्पत्ति का मतलब ये है कि उसमें शराबियों, नशेड़ियों, जुआरियों का अड्डा बनाने की आज़ादी दे दी जाये ? क्या शत्रु सम्पत्ति का मतलब ये है कि उसमें पार्किंग बनाकर पैसा कमाया जाये ? क्या शत्रु सम्पत्ति का मतलब ये है कि कोई भी आगज़नी करके चले जाये और हम उसका ठीकरा या तो आकाश पर फोड़ें या जाँच का शिगूफा छोड़कर ज़िम्मेदारी से हाथ झाड़ लें ? जनता ख़ामोश हैं, लेकिन सब देख रही है…।
आख़िर क्या है नया शत्रु संपत्ति क़ानून ? आइये जानते हैं :- 1962 (चीन के साथ) , 1965 और 1971 (पाकिस्तान के साथ) के युद्ध के बाद भारत से जाने वाले वारिस अब भारतीय संसद के बाद 1968 के कानून में दुश्मन संपत्तियों पर स्वामित्व का दावा करने में समर्थ नहीं होंगे, देश में दुश्मन संपत्तियों को शासित कर रहे हैं । 14 मार्च को लोकसभा के बाद शहीजा संपत्ति (संशोधन और मान्यन) विधेयक, को संसद ने मंजूरी दे दी थी, जिसमें आवाज़ वोट के ज़रिए विधेयक पारित किया गया था। संशोधन विधेयक को राज्यसभा से पहले ही मंज़ूरी मिल गई है। कानून का उद्भव विश्व युद्ध -2 की शुरुआत में, भारतीय कानून रक्षा अधिनियम, 1939 को भारत सरकार के नियम, 1939 को लागू करने के लिए अधिनियमित किया गया था। नियमों के तहत, भारत, मुंबई, अधिकारियों द्वारा बनाई गई एक कार्यालय के लिए दुश्मन संपत्ति का संरक्षक, शांति बहाल होने तक दुश्मन संपत्तियों को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। हालांकि, भारत के लिए दुश्मन संपत्ति के संरक्षक का कार्यालय 1945 में युद्ध समाप्त होने के बावजूद इन गुणों का प्रशासन रखता था। 1962 में भारत के साथ चीन के युद्ध के बाद, और 1965 और 1971 में पाकिस्तान के साथ दो युद्धों के बाद, कार्यालय ने दुश्मन संपत्तियों का अधिग्रहण किया भारत के रक्षा के नियम 1968 में, भारत सरकार ने एनी प्रॉपर्टी अधिनियम बनाया, जिसमें यह निर्धारित किया गया कि सभी दुश्मन संपत्ति को संरक्षक के नियंत्रण में जारी रहेगी। हाल ही में पारित विधेयक इस 50 वर्षीय विधेयक के कुछ प्रावधानों में संशोधन करता है अब क्या बदलाव है? पुराने कानून में संशोधन करने के लिए यह राशि होगी: जैसा कि विधेयक पूर्वव्यापी प्रभाव में आता है (7 जनवरी 2016, जब अध्यादेश को पहले प्रख्यापित किया गया था) , उस समय से पहले हुई कोई भी दुश्मन संपत्ति हस्तांतरण और प्रावधानों का विरोध नए कानून का शून्य और शून्य हो जाएगा दूसरी ओर, कानून के कई प्रावधान 1968 से पूर्वव्यापी रूप से लागू होंगे, जब शत्रु संपत्ति अधिनियम अधिनियमित किया गया था। पुराने कानून के मुताबिक, दुश्मन की परिभाषाएं देश के रूप में शामिल हैं, जिनमें उनके नागरिक शामिल हैं, जो कि भारत के विरुद्ध बाहरी आक्रमण नई परिभाषा में दुश्मनों के कानूनी उत्तराधिकारियों को भी शामिल किया गया है भले ही वे भारत के नागरिक हैं या किसी अन्य देश और एक दुश्मन देश के नागरिक हैं, जिन्होंने अपनी राष्ट्रीयता बदल दी सिविल न्यायालयों को दुश्मन संपत्तियों के खिलाफ मामलों को सुनने के लिए अधिकृत नहीं किया जाएगा। संरक्षक के मामलों में हस्तक्षेप करने का उनका कोई भी कानूनी अधिकार नहीं होगा। केंद्र सरकार ने मालिक या किसी अन्य व्यक्ति को दुश्मन संपत्ति के हस्तांतरण के लिए संरक्षक का आदेश दे सकता था। अब, एक दुश्मन संपत्ति को स्वामी को वापस लौटाया जा सकता है, जब केंद्र सरकार ने यह घोषणा करने के बाद मंजूरी दे दी कि यह संपत्ति दुश्मन संपत्ति नहीं है। 1968 के कानून ने दुश्मन द्वारा दुश्मन की संपत्ति के हस्तांतरण पर रोक लगा दी, अगर यह सार्वजनिक हित के खिलाफ था या अगर वह संपत्ति के हस्तांतरण से संरक्षक को हस्तांतरण से बचने के लिए किया गया था। नया कानून एक दुश्मन द्वारा सभी स्थानान्तरण को प्रतिबंधित करता है संशोधित कानून का कहना है कि दुश्मन संपत्तियों को संरक्षक के साथ निहित रहना होगा, यहां तक कि दुश्मनों की मृत्यु के बाद भी; यहां तक कि अगर कानूनी उत्तराधिकारी एक भारतीय है; और यहां तक कि अगर दुश्मन अपनी राष्ट्रीयता बदलता है उत्तराधिकार के अधिकारों को नियंत्रित करने वाले कोई भारतीय कानून दुश्मन संपत्तियों पर लागू नहीं होंगे। संशोधित कानून के तहत, ऐसे अधिकारों में सभी अधिकार, शीर्षक और हितों संरक्षक के साथ झूठ होंगी। पुराने कानून के तहत, संरक्षक केवल “संपत्ति के संरक्षण के हित में” या “भारत में दुश्मन या उसके परिवार के रखरखाव को सुरक्षित रखने के लिए” दुश्मन संपत्ति बेच सकता है। अब, कस्टोडियन केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद दुश्मन संपत्ति का निपटान कर सकता है इससे पहले, संरक्षक को दुश्मन और उसके परिवार को बनाए रखना चाहिए था अगर वे संपत्ति से प्राप्त आय से भारत में हैं। कस्टोडियन अब दुश्मन और उसके परिवार के लिए उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार नहीं होगा। कई घोषणाएं 7 जनवरी, 2016 से शुरू होने वाले पांच बार के लिए अध्यादेश का विमोचन किया गया और पुन: प्रख्यापित किया गया। अध्यादेश 28 मई को तीसरी बार 31 मई को दूसरी बार 2 अप्रैल को दोबारा शुरू किया गया था। चौथी बार और पांचवें समय के लिए 22 दिसंबर को। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 123 के अनुसार, संसद के पुनर्मिलन के छह सप्ताह बाद एक अध्यादेश समाप्त हो जाता है यदि इसे किसी अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है या दोनों सदनों द्वारा अस्वीकृत किया जाता है 2010 में, यूपीए सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए एक अध्यादेश भी जारी किया है कि दुश्मन संपत्तियों को संरक्षक के नियंत्रण में रखा गया। हालांकि, उस वर्ष सितंबर में उस अध्यादेश समाप्त हो गया था। उस संबंध में एक विधेयक पारित करने के लिए तत्कालीन सरकार के प्रयासों में भी फल नहीं था। 1971 में ताशकंद घोषणापत्र के प्रावधानों के बारे में पता करने की आवश्यकता है, पाकिस्तान को 1971 में सभी दुश्मन संपत्तियों का निपटान किया गया था। भारत और पाकिस्तान ने 1965 युद्ध के बाद घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे और प्रत्येक पक्ष के नियंत्रण में दुश्मन संपत्तियों की वापसी की संभावनाओं पर चर्चा करने का निर्णय लिया था। कथित तौर पर, भारत भर में 16,000 से अधिक दुश्मन संपत्तियां हैं, लाखों करोड़ की कीमतें। पहचान प्रक्रिया अभी भी चल रही है। इसका मतलब यह है कि भविष्य में दुश्मन संपत्तियों की संख्या बढ़ सकती है |
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 127 : साक्षात्कार निजी व सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था पर (भाग-2)(5 मार्च 2019)
कमलेश कुमार गुप्ता अपर शिक्षा निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) व मुख्य शिक्षा अधिकारी, नैनीताल
संक्षिप्त परिचय :- बुंदेलखंड हमीरपुर के किसान / वार्त्तिक परिवार में जन्मे कमलेश कुमार की प्रारम्भिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से हुई। उसके बाद आपने स्नातक व स्नातकोत्तर बुंदेलखंड विवि से किया। आपकी प्रथम नियुक्ति मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग में व्याख्याता के पद पर हुई। नौकरी के दौरान ही आपने कड़ी मेहनत से उ.प्र.लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा सन् 1997 में उत्तीर्ण कर तत्कालीन उत्तर प्रदेश में रुद्रप्रयाग जिले के गणेशनगर के स्कूल में प्रधानाचार्य के पद को सुशोभित किया। SCERT गठित होने के बाद आप उप निदेशक के पद पर और उसके बाद टिहरी फिर हरिद्वार में रहे। दोबारा रुद्रप्रयाग में ज़िला शिक्षा अधिकारी बनकर गये। राज्य परियोजना जन कार्यक्रम व सर्व शिक्षा जैसे अभियानों में आपने विशेषज्ञ की भूमिका भी बखूबी निभाई। वर्तमान में आप अपर शिक्षा निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) तथा मुख्य शिक्षा अधिकारी के कर्तव्य को अत्यंत कुशलता से निर्वाह कर रहे हैं….।
विभिन्न पदों की ज़िम्मेदारी निभा चुके कमलेश कुमार से बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-
आज़ाद सवाल (06):- क्या निजी विद्यालय रि-एडमिशन के नाम पर पैसा वसूल कर सकता है ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- रि- एडमिशन के नाम पर या डोनेशन के नाम पर पैसा लेना प्रतिबंधित है, यदि किसी विद्यालय में ऐसा पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी, ऐसी शिकायत आप उप -शिक्षा अधिकारी, खंडिक्षा अधिकारी, ज़िला / राज्य शिकायत प्रकोष्ठ में भी कर सकते हैं |
आज़ाद सवाल (07) :- विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से ग्रीष्म / शीत कालीन अवकाशों की फीस लेना क्या वैध है या नहीं ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से ग्रीष्म / शीत कालीन अवकाशों की फीस लेना वैध है |
आज़ाद सवाल (08) :- इन्हीं अवकाशों के लिये स्कूल प्रबंधन द्वारा शिक्षकों का वेतन नहीं दिया जाता, क्या ये उचित है ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- गेस्ट टीचर, अनियमित अथवा सशर्त शिक्षकों का अवकाशों के दौरान का वेतन रोका जा सकता है लेकिन किसी भी हाल में नियमित शिक्षक का वेतन नहीं रुकना चाहिये |
आज़ाद सवाल (09):- क्या कोई विद्यालय स्टेशनरी/ यूनिफार्म आदि हेतु किसी दुकान विशेष के लिये अभिभावकों पर मौखिक / लिखित दबाव बना सकता है ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- इसके लिये सभी स्कूलों को आदेश हैं कि ऐसा करने के लिये कोई भी बाध्य नहीं करेगा, यदि ऐसी शिकायतें प्राप्त होती हैं तो जाँच कर स्कूल का रेजिस्ट्रेशन रद्द किया जाएगा।
आज़ाद सवाल (10) :- क्या कोई विद्यालय विभिन्न कार्यक्रमों के नाम पर जैसे स्पोर्ट्स डे, टीचर्स डे, एनुअल फंक्शन आदि के लिये अभिभावकों से पैसा वसूल सकता है ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- हर स्कूल में एक PTA गठित है, इस तरह के कार्यक्रमों के लिये अभिभावक – शिक्षक समिति अपनी बैठक में ये निर्धारित करते हैं कि किस कार्यक्रम की फीस कितनी होनी चाहिये अथवा नहीं होनी चाहिये |
साक्षात्कार समाप्त 🙏
अंक 126 : साक्षात्कार (भाग – 01) (4 मार्च 2019)
आज़ाद सवाल (01) :- वर्तमान शिक्षा प्रणाली किस व्यवस्था के अंतर्गत चल रही है?
कमलेश कुमार गुप्ता :- भारत सरकार का सर्व शिक्षा अभियान प्रारंभिक शिक्षा को सार्वभौमिक करने के उद्देश्य से चलया गया। उस उद्देश्य को हमने प्राप्त भी किया। शिक्षक शिक्षा हेतु समग्र शिक्षा अभियान चल रहा है जिसके अंतर्गत बच्चों का सर्वांगीण विकास हो रहा है और गुणवत्ता के साथ पूर्ण शिक्षा भी प्राप्त हो रही है। बच्चों की आर्थिक मदद हेतु धनराशि भी दी जा रही है और शिक्षकों को नये पाठ्यक्रम व पाठ्यचर्या के अनुसार भी अपडेट किया जा रहा है…।
आज़ाद सवाल (02) :- सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या दिन ब दिन कम होती जा रही है, इसका कारण क्या मानते हैं आप ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- शिफ़्टिंग इसका मुख्य कारण है। अभिभावकों की धारणा बनी है कि पब्लिक स्कूलों में सुविधाएँ अधिक हैं और शिक्षा का स्तर उच्च है जबकि हमारे सरकारी विद्यालयों में चकाचौंध नहीं है लेकिन अध्यापक मानकों के अनुसार योग्यताधारी और प्रशिक्षित हैं…।
आज़ाद सवाल (03) :- धीरे-धीरे सरकारी स्कूल बंद होने की कगार पर आ गये हैं। इसे रोकने के लिये क्या सुधारात्मक क़दम उठाये जा रहे हैं?
कमलेश कुमार गुप्ता :- सरकार ने सभी सरकारी विद्यालयों में निजी स्कूलों की भांति NCERT पाठ्यक्रम लागू करवाया है, ताकि बच्चे अंग्रेज़ी के साथ साथ किसी भी विषय में पीछे न रहें। इसकी कोशिश लगातार जारी है…।
आज़ाद सवाल (04):- इसके बावजूद भी क्यों सरकारी स्कूलों को मर्ज किया जा रहा है ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- उसके पीछे मुख्य कारण ये है कि विगत वर्षों में विभिन्न कारणों से अनावश्यक रूप से हर गली – मोहल्ले में नवीन विद्यालय खोले गये एवं विद्यालयों का उच्चीकरण किया गया। उस दशा में बच्चे सरकारी विद्यालयों तक पहुंच नहीं पा रहे हैं, इसलिये छात्र संख्या कम हो या अधिक सरकार द्वारा न्यूनतम अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराया जाना आवश्यक हो जाता है, जिसका व्यय भार अधिक होता है।अतः शासन द्वारा ये निर्णय लिया गया है कि जिन विद्यालयों की छात्र संख्या कम है, उन्हें नज़दीकी विद्यालय में मर्ज कर दिया जाये…।
आज़ाद सवाल (05) :- अब बात करते हैं, निजी विद्यालयों की। निजी विद्यालय किन मानकों के अनुसार प्रत्येक वर्ष फीस वृद्धि करते हैं ?
कमलेश कुमार गुप्ता :- निजी स्कूल खोलने की NOC राज्य सरकार प्रदान करती है व स्कूल संचालन की CBSE, फिर शिक्षा का अधिकार अधिनियम -2009 के अनुसार स्कूल संचालित होता है। राज्य सरकार को निजी विद्यालयों के नियंत्रण हेतु नियम बनाने का अधिकार प्राप्त है। भारत में कुछ राज्यों ने फीस कण्ट्रोल एक्ट लागू कर दिया है लेकिन हमारे राज्य में अभी एक्ट बनाने की प्रक्रिया चल रही है, जिसे जल्द ही पूर्ण कर लागू किया जाएगा…।
साक्षात्कार जारी…🙏
अंक 125 : साक्षात्कार (भाग – 03) (2 मार्च 2019)
राजीव रौतेला (आइएएस) कुमाऊं आयुक्त व सचिव मुख्यमंत्री आदि
संक्षिप्त परिचय :- 2001 बैच के आइएएस अधिकारी राजीव रौतेला सर्वप्रथम उत्तर प्रदेश में ज़िलों में कलेक्टर रहे, तत्पश्चात आप देवी पाटन मंडल के प्रथम बार मंडलायुक्त नियुक्त हुये। उसके बाद नोएडा अथॉरिटी में भी आपने सेवायें दीं। तब से आपने विभिन्न पदों को अपनी कुशलता व कर्मठता से सुशोभित किया। वर्तमान में आप कुमाऊँ मंडलायुक्त के साथ-साथ सचिव मुख्यमंत्री, प्रशासक, बाज़पुर शुगर मिल और बागेश्वर स्थित अल्मोड़ा मैेग्नेसाइट लि. फैक्ट्री के चैयरमेन पद का कार्यभार बख़ूबी निभा रहे हैं।
विभिन्न पदों पर आसीन राजीव रौतेला से बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :- सवाल (10) से आगे…
आज़ाद सवाल (11):- कुछ समय पहले बुज़ुर्गों के लिये एक योजना चलती थी ‘मेरे बुज़ुर्ग मेरे तीर्थ’ क्या वो योजना अब भी क़ायम है ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- जी हाँ, अब उस योजना में कुछ विस्तार करते हुये उसका नाम ‘पं दीन दयाल उपाध्याय मातृ-पितृ तीर्थाटन’ योजना कर दिया गया है। तथा इसके अलावा बुज़ुर्गों के लिये वृद्धावस्था पेंशन योजना आदि चलाई जा रही है…।
आज़ाद सवाल (12):- उत्तराखंड के बेरोज़गार युवाओं का पलायन लगातार जारी है, उनके लिये कोई योजना ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- बेरोज़गारों को रोज़गार देने के उद्देश्य से ही उधम सिंह नगर में ‘वाटर स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन’ डेवेलप किया गया है। उसके अलावा वीर चंद्र गढ़वाली स्वरोज़ग़ार योजना ऐसी और भी कई योजनाओं से युवाओं को लाभान्वित किया जा रहा है …।
आज़ाद सवाल (13):- कुमाऊँ समेत पूरे राज्य में नशे का कारोबार फल फूल रहा है, उस पर नियंत्रण के लिये क्या प्रयास किये जा रहे हैं?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- इसके लिये हमारी उत्तराखंड पुलिस लगातार कोशिशें कर रही है। मेडिकल स्टोर्स में ड्रग इंस्पेक्टर लगातार छापामारी कर रहे हैं। हमारा पूरा प्रयास है कि नशा और उसका कारोबार जड़ से उखाड़ फ़ेंके…
आज़ाद सवाल (14):- निजी स्कूलों की मनमानी पर कब लगाम लगाई जाएगी।स्कूल खुलते ही स्कूलों के मीटर चालू हो गये हैं। अभिभावकों पर किसी निश्चित दुकान से स्टेशनरी और यूनिफार्म खरीदने का दबाव बनाने का खेल शुरू हो गया है। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- इस सम्बन्ध में निदेशक (अतिरिक्त ) शिक्षा विभाग को शिकायत की जा सकती है, यदि ऐसा पाया जाता है तो सम्बंधित स्कूल के विरुद्ध उचित कार्रवाई होगी, इसकी जाँच के आदेश आपके सामने अभी किये गये हैं…
आज़ाद सवाल (15) :- अंत में आख़िरी सवाल, छह ज़िलों में आपका पसंदीदा ज़िला कौन सा है ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- पूरा मंडल और उसके लोग मुझे बहुत पसंद हैं…
साक्षात्कार समाप्त.. 🙏
अंक 124 : साक्षात्कार (भाग – 02) (1 मार्च 2019) : सवाल (05) से आगे :-
आज़ाद सवाल (06):- साफ़ सफ़ाई की बात हम करते हैं लेकिन हमारे पास न कोई ट्रेन्चिंग ग्राउंड है और न ही कोई डंपिंग ज़ोन, ऐसे में नगर पालिका को भी परेशानी होती है और नालों की सफ़ाई के बाद सिंचाई खंड को भी, क्या प्रयास हो रहे हैं इस संबंध में ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- इस संबंध में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से बात हो गयी है, शीघ्र ही यहां ‘मग डिस्पोज़ल सिस्टम’ लागू होगा…
आज़ाद सवाल (07):- जनता ने अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचानी हो तो कैसे पहुंचाई जा सकती है ? मुख्यमंत्री कार्यालय कहाँ से संचालित होता है ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- मुख्यमंत्री कार्यालय नैनीताल और हल्द्वानी दोनों जगह से संचालित होतार और बुधवार को यहां नैनीताल स्थित कार्यालय में अवश्य बैठता हूँ, जनता अपनी बात मुझसे कह सकती है, मेरी अनुपस्थिति में मेरा स्टाफ़ जनता की शिकायत दर्ज कर लेगा…
आज़ाद सवाल (08):- सचिव मुख्यमंत्री होने के नाते ये जानकारी दीजियेगा कि वर्तमान में कितनी योजनाओं का लाभ उत्तराखंड की जनता को मिल रहा है ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- किसान पेंशन योजना, विधवा पेंशन योजना, विकलांग पेंशन योजना, इन जैसी तमाम पेंशन योजनाओं की पेंशन मार्च माह की पहली तारीख़ को उनके खातों में पंहुचा दी जाएगी…
आज़ाद सवाल (09):- हड़ताल आपकी नज़र में ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- सबका अपना रोष प्रकट करने का अपना तरीक़ा है, डीएम के माध्यम से बात होती है, हम उस दशा में शासकीय स्तर से कार्य करते हैं। निजी चिकित्सालयों की हड़ताल के दौरान सरकारी चिकित्सालयों ने बेहतर कार्य किया।
आज़ाद सवाल (10) :-
सरकारी अस्पताल आपकी नज़र में ?
राजीव रौतेला ( आइएएस):- बीडी पांडे नैनीताल में तो चिकित्सक ही नहीं है। जीबी पंत चिकित्सालय की हालत भी किसी से छिपी नहीं है, लेकिन मैं सुशीला तिवारी अस्पताल की सेवाओं से संतुष्ट हूँ। सघन निरीक्षण के दौरान हमने अपनी टीम के साथ सुबह 10 बजे सुशीला तिवारी अस्पताल में प्रवेश किया फिर शाम को 7 बजे बाहर निकले थे, अब भी समय-समय पर वहां का दौरा होता रहता है, और स्वास्थ्य लाभ में आयुष्मान योजना से भविष्य में जनता को बहुत लाभ मिलने वाला है…।
साक्षात्कार जारी…🙏
अंक 123, भाग-1 : सवाल 5 से पहले (28 फरवरी 2019)
आज़ाद सवाल (01):- 06 ज़िलों के मुखिया होने के नाते प्रत्येक ज़िले में आपके स्तर से अभी तक क्या अभूतपूर्व प्रयास किये गये?
राजीव रौतेला (आइएएस):- मंडल में कोसी नदी, गगास, राम गंगा, गरुड गंगा, उत्तरवाहिनी शिप्रा नदी को पुनर्जीवित (कायाकल्प) करने को प्रयास किये जा रहे हैं, जिसमें कोसी नदी में वास्तविक कार्य अभी चल रहा है, और नदियों के संरक्षण हेतु दिल्ली में प्रथम पुरस्कार हमारे मंडल को प्राप्त हुआ है। इसी संदर्भ के लिये 01 मार्च को नैनीताल-अल्मोड़ा वृहद् कॉन्फ्रेंस रखी गयी है। दूसरा सभी जनपदों के उच्चाधिकारियों को सख़्त निर्देश दिये गए हैं कि वो जन सामान्य के प्रति संवेदनशील रहें।बरसात व बर्फ़ के पानी को रिस्टोर करने के लिये प्रयास हो रहे हैं, भारत सरकार की योजना ‘एक जनपद एक डेस्टिनेशन’ के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है और पर्यटन को बढ़ाने के उद्देश्य से ही अल्मोड़ा और नैनीताल जनपद में विंटर कार्निवाल आरम्भ किया गया है…।
आज़ाद सवाल (02):- नैनीताल की सूखाताल झील को कृत्रिम झील के रूप में कायाकल्प करने की ख़बरें छायी रहती हैं, उसके लिये आपकी कार्य योजना क्या है ?
राजीव रौतेला (आइएएस):- सूखाताल झील को कृत्रिम झील के रूप में विकसित नहीं किया जाएगा बल्कि 3 मीटर खुदाई करके बॉउंड्री वॉल की जाएगी, जिससे बरसात का पानी इकट्ठा किया जायेगा और उस पानी को नैनी झील संरक्षण हेतु काम में लाया जायेगा…।
आज़ाद सवाल (03):- आपने कुमाऊं कमिश्नर पद ग्रहण करते ही नैनीताल की पार्किंग व्यवस्था को दुरुस्त करने की बात कही थी, आपके वो क़दम कहाँ तक पहुंचे हैं ?
राजीव रौतेला (आइएएस):- पार्किंग व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिये हमने विभिन्न क़दम उठाये हैं। सबसे पहले हम अशोक सिनेमा पार्किंग को मल्टी लेवल पार्किंग बनाने वाले हैं। दूसरा कैलाखान पार्किंग पर भी अनुमति प्राप्त हो गयी है। तीसरा नारायण नगर में भी पार्किंग की अनुमति मिल गयी है। चौथा रूसी बाईपास पर भी पार्किंग बनायी जाएगी। और सबसे बड़ी बात ये है कि नैनीताल के स्थानीय लोगों के लिये सुनहरा अवसर है यदि उनके पास गाडी खड़ी करने की जगह है तो वो प्राधिकरण की अनुमति प्राप्ति के पश्चात् स्वयं भी पार्किंग चला सकते हैं…।
आज़ाद सवाल (04):- आप पंत विवि के कुलपति भी रहे हैं, अपने कार्यकाल के दौरान आपने विवि को क्या विशेष योगदान दिया ?
राजीव रौतेला (आइएएस):- वैसे तो वहां का कार्यकाल मात्र एक से डेढ़ माह का रहा फिर भी वहां हमने छात्रों व शिक्षकों के हित के लिये प्रयास किये। इंटीग्रेटेड फार्मिंग को बढ़ावा दिया। किसान मेला व्यापक व सुनियोजित तरीके से आयोजित किया और भी बहुत सारे प्रयास विवि के उत्थान के लिये किये गये…।
आज़ाद सवाल (05) :- बलियानाला भू-स्खलन को रोकने के लिये क्या प्रयास किये जा रहे हैं ? और अब तक कितनी धनराशि शासन से मरम्मत कार्यों के लिये आवंटित हुई है ? तथा प्रभावित परिवारों को स्कूल से कब विस्थापित किया जाएगा?
राजीव रौतेला (आइएएस):- भू-स्खलन को रोकने के लिये आइआइटी रुड़की द्वारा डीपीआर तैयार की जा रही है, जिसके लिये शासन से 10.50 लाख रुपये मंज़ूर हुये हैं। उसके अलावा भू-स्खलन के नाम पर और कोई धनराशि आवंटित नहीं हुई, और हिल सेफ़्टी कमेटी की मीटिंग में भू- स्खलन प्रभावित परिवारों को स्कूलों से विस्थापित करने की बात रखी जाएगी…
साक्षात्कार जारी… 🙏
अंक 122 : (27 फरवरी 2019) : आयुष्मान कार्ड बनाने में क्यों आ रही है समस्या, डीएसओ से साक्षात्कार में हुआ खुलासा… साक्षात्कार (भाग – 02)
तेजबल सिंह ज़िला पूर्ति अधिकारी, नैनीताल
संक्षिप्त परिचय:- उत्तर प्रदेश वाराणसी / बनारस के एक साधन-संपन्न परिवार में जन्मे तेजबल सिंह के पिताजी स्वास्थ्य विभाग में अतिरिक्त निदेशक थे, आपकी प्रारंभिक शिक्षा बनारस में ही हुई तथा स्नातक स्तर की शिक्षा आपने केएनएस विवि सुल्तानपुर से और स्नातकोत्तर लखनऊ विवि से सत्र 95-96 में किया। उसके बाद आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गये। आख़िरकार 2005 में आपकी मेहनत रंग लायी और आपने यूकेपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की। आपकी पहली ज्वाइनिंग क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी के रूप में देहरादून में हुई। फिर आप ट्रेनी ऑफ़िसर पिथौरागढ़ रहे और वहीं प्रथम बार ज़िला पूर्ति अधिकारी (पिथौरागढ़) के रूप में पद भार संभाला। उसके बाद अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, पुनः नैनीताल फिर पुनः अल्मोड़ा और फिर तीसरी बार नैनीताल के ज़िला पूर्ति अधिकारी के रूप में पद ग्रहण किया। आप फरवरी 2018 से वर्तमान तक एक कुशल अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं …
उनसे बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :- अंक -2
सवाल (05) से आगे :-
आज़ाद सवाल (06) :- राज्य में राशन कार्ड किस-किस श्रेणी के हैं तथा उनसे किस प्रकार के लाभ लोगों को मिल रहे हैं, थोड़ा विस्तारपूर्वक जानकारी दीजियेगा ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- आज की तिथि में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना और राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत राशन कार्ड बनाये जा रहे हैं:- रा.खा.सु.यो. के अनुसार तीन श्रेणियों में कार्ड बनते हैं :- (अ) अंत्योदय राशन कार्ड जिनका रंग गुलाबी होता है, ये कार्ड समाज के दबे कुचले सबसे निचले ग़रीब परिवारों के लिये बनते हैं, जिसमें प्रत्येक कार्ड पर 35 किलो राशन (13.300 ग्रा. गेंहू + 21.700ग्रा. चावल ) एक किलो चीनी प्रति माह वितरित की जाती है। (ब) बी.पी.एल. कार्ड:- ये सफ़ेद रंग के राशन कार्ड ग़रीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिये बनाये जाते हैं जिनके परिवार की समस्त श्रोतों से आय ₹1,80,000 हज़ार सालाना हो या उससे कम होनी चाहिये, इसमें प्रति माह 5 किलो राशन (02 किलो गेंहू + 03 किलो चावल) मिलता है। (स) पात्र प्राथमिक परिवार :- ये सफ़ेद कार्ड थोड़े ठीक स्थिति वाले ग़रीब परिवारों के लिये है, इसमें भी 5 किलो राशन मिलता है… दूसरी योजना राज्य खाद्य सुरक्षा अंतर्गत पीले वाले राशन कार्ड बनाये जाते हैं। जो ग़रीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन कर रहे लोगों के लिये होता है, जिनकी आय ₹1.80लाख से ऊपर और 5 लाख से कम होती है, इस कार्ड धारक को 5 किलो गेंहू व 2.5 किलो चावल मिलता है। इसमें 2.5किलो चावल के एवज़ में सरकार ₹75/ माह डी.बी.टी.के माध्यम से बैंक खाते में जमा करती है…।
आज़ाद सवाल (0-7) जैसा कि आपने बताया कि प्रति माह राशन दिया जाता है, यदि इस स्थिति में पता चले कि कोई सस्ते गल्ले का दुकानदार कार्ड धारकों को राशन न देकर ब्लैक मार्केटिंग कर रहा हो तो उसके विरूद्ध क्या कार्रवाई होगी ?
ज़िलापूर्ति अधिकारी :- यदि ऐसी स्थिति पायी जाती है तो सम्बंधित डीएसओ, एसडीएम अथवा एस.आइ. से शिकायत की जा सकती है।आरोप सत्य पाये जाने पर उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा…।
आज़ाद सवाल (08):- आयुष्मान अटल स्वास्थ्य योजना में राशन कार्ड सिंक नहीं हो पा रहे हैं, जिससे आम जनता को समस्या हो रही है। कौन है इसका ज़िम्मेदार?
ज़िला पूर्ति अधिकारी:- इसके लिये हम नहीं स्वास्थ्य विभाग ज़िम्मेदार है। जब आधार कार्ड से हर काम हो जा रहे थे, तो राशन कार्ड से लिंक वाला सिस्टम नहीं होना चाहिए था। आधार ही आधार होना चाहिये था…।
आज़ाद सवाल (09):- कुछ सी.एस.सी. संचालकों का आरोप है कि आपके विभाग से उन्हें डेटा प्रोवाइड करने में सहयोग नहीं मिल रहा है। ऐसा क्यों ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- नहीं, यह आरोप बे-बुनियाद है। हमारी ओर से हमेशा सहयोग किया गया है। बल्कि यहां तो हल्द्वानी और रामनगर से भी लोग आ रहे हैं। डेटा हम उपलब्ध करा रहे हैं…।
आज़ाद सवाल (10):- अंत में… एक छोटा सा सवाल कि क्या अब आप चौथी बार भी नैनीताल में ही रहना चाहेंगे ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- नहीं, अब गढ़वाल जाने की इच्छा है। यहां नैनीताल में बहुत प्यार मिला है अब तक, यहां के लोग बहुत सीधे व ईमानदार हैं….।
साक्षात्कार समाप्त
🙏
अंक 122 : साक्षात्कार (भाग – 02)
आज़ाद सवाल (01) :- नैनीताल में तीसरी बार ज़िला पूर्ति अधिकारी बनने के बाद यहां के परिवेश और नागरिकों के बारे में क्या अनुभव किया है ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- यहां तीसरी बार आकर जनपद व जनपद के लोगों की अच्छी समझ हो गयी है, नैनीताल शहर की बात करें तो यहां के लोगों को हमारे विभाग से कम शिकायतें रही हैं, ओखलकांडा -बेतालघाट चूँकि पिछड़ा क्षेत्र है इसलिये वे लोग हमारे विभाग पर अधिक निर्भर हैं, तो शिकायतें भी अधिक होती हैं…
आज़ाद सवाल (02):- इतनी शिकायतें होने पर आप ग्रामीणों की शिकायतों का निबटारा कैसे करते हैं ?
ज़िलापूर्ति अधिकारी :- ग्रामीणों की समस्या समाधान हेतु जन मिलन कार्यक्रम और हर तीन माह में एक बार बीडीसी बैठक की जाती है, जिसमें हमारी कोशिश रहती है कि हर ग्रामीण की समस्या का निराकरण हो जाये…
आज़ाद सवाल (03):- जबसे राशन कार्ड ऑनलाइन किये गये हैं, विभाग के लिये काम कितना आसान हुआ है अथवा कितना मुश्किल ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- पिछले चार सालों में डिजिटाइज़ेशन के होने से कार्य शैली में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है, पहले पुराने रिकॉर्ड चेक कर पाना बहुत मुश्किल होता था लेकिन अब सब कुछ आसानी से हो जाता है…
आज़ाद सवाल (04):- ऑनलाइन सिस्टम होने और आधार लिंक होने से विभाग / राज्य को क्या फ़ायदा मिला है ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- ऑनलाइन सिस्टम और आधार लिंक होने से फ़र्ज़ीवाड़े पर लगाम लगी है, पहले हर घर में दो -दो, तीन-तीन राशन कार्ड पाये जाते थे, जिनको पकड़ पाना बेहद मुश्किल हो रहा था, अब तो एक क्लिक पर सबके रिकॉर्ड सामने आ जाते हैं…
आज़ाद सवाल (05):- तो अब तक कितनी संख्या में फ़र्ज़ी राशन कार्ड पकड़ में आये हैं ?
ज़िला पूर्ति अधिकारी :- ऑनलाइन और आधार लिंक होने से सबसे पहले तो वो ट्रेस हुये जो एक नाम से दो -दो राशन कार्ड चला रहे थे, दूसरा वो पकड़ में आये जिनकी आय 5 लाख सालाना से अधिक थी फिर भी उनके राशन कार्ड चल रहे थे, आपको यक़ीन नहीं आएगा कुल मिलाकर 40 हज़ार फर्ज़ी राशन कार्ड हमने डिजिटाईज़ेशन होने के बाद निरस्त किये हैं…
साक्षात्कार जारी
🙏
अंक 120 : साक्षात्कार (भाग – 03) नैनीताल के जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन से जिले की यातायात, पार्किंग व शौचालय आदि व्यवस्थाओं पर…
डीएम विनोद कुमार सुमन।
विनोद कुमार सुमन ज़िलाधिकारी, नैनीताल
संक्षिप्त परिचय :-
कालीन उद्योग के लिये मशहूर संत रविदास नगर ज़िला या यूँ कहें उत्तर प्रदेश के चार ज़िलों (प्रयागराज, जौनपुर, वाराणसी और मिर्ज़ापुर) की सरहदों को छूने वाले भदोही ज़िले में 1970 को एक ग़रीब किसान के घर में जन्मे श्री विनोद कुमार सुमन पांच भाई और दो बहनों में सबसे बड़े हैं, आपकी प्रारंभिक शिक्षा भदोही में ही हुई, उसके बाद आप घर छोड़कर श्रीनगर गढ़वाल आ गये, जहां आपने कई महीनों तक एक मंदिर परिसर में दिन गुज़ारे और बी.ए. की पढ़ाई पूरीे के लिये आपने वहां बन रहे एक सुलभ शौचालय निर्माण में मज़दूर के रूप में मज़दूरी भी की और इस तरह से बीए की डिग्री आपने गढ़वाल विवि से हासिल की, इसके बाद पिताजी ने घर वापस बुला लिया, फिर आपने एम.ए. कीिक्षा प्रयागराज विवि (तत्कालीन इलाहबाद विवि) से प्राप्त की, माता -पिता की प्रेरणा से आपका बचपन से ही मन शिक्षा की ओर अग्रसर रहा इसलिए आपने पढाई नहीं छोड़ी तथा सन् 1998 में आपने पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर ली, पीसीएस अधिकारी के रूप में अपनी कुशल सेवाएं देने के कारण आपको सन् 2007 में आइएएस केडर में पदोन्नत किया गया, तब से आज तक आप एक कुशल आइएएस के रूप में देश को अपनी सेवाएं दे रहे हैं और आज नैनीताल के ज़िलाधिकारी द को सुशोभित कर रहे है, उनसे बात की हमारे संवाददाता मो.ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-
सवाल (10) से आगे :-
आज़ाद सवाल (11):- आयुष्मान अटल योजना कार्ड बनाने में नागरिकों को दिक्कतें आ रही है राशन कार्ड सिंक नहीं हो पा रहे हैं, खाद्य आपूर्ति विभाग पर भी दबाव है, कैसे आसान होगी प्रक्रिया ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- खाद्य आपूर्ति विभाग के अलावा अब नागरिक अपने -अपने सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान में जाकर कार्ड अपडेट करा सकते हैं जिससे उन्हें जल्द होजना का लाभ मिल सकेगा…
आज़ाद सवाल (12):- प्रधानमंत्री जगह – जगह शौचालय निर्माण की बात करते हैं लेकिन नैनीताल को जोड़ने वाले हमारे कालाढूंगी – नैनीताल मोटर मार्ग पर शौचालय की समस्या है पर्यटक व नागरिक दोनों के लिये समस्या है, कुछ हो पाएगा इस समस्या का ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- नहीं ऐसा नहीं है, कालाढूंगी – नैनीताल मोटर मार्ग पर 2-3 जगह शौचालय हैं, अब हर 10 मीटर की दूरी पर तो शौचालय नहीं बनवा सकते…
आज़ाद सवाल (13):- नैनीताल में पार्किंग की समस्या है जिस कारण पर्यटक हर वर्ष परेशान रहता है, इस समस्या से निजात के लिये क्या क़दम उठाये जा रहे हैं…
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- रुसी बाईपास पर पार्किंग बनाई जा रही है, जिसका टेंडर निकल चुका है, वहां 2000 से 3000 गाड़ियां सुरक्षित रह सकेंगी और ड्राइवर वगैरह के लिये वहां शौचालय इत्यादि बनाये जाएंगे, जिससे पर्यटकों को बहुत सुविधा मिलेगी…
आज़ाद सवाल (14):- सरकारी योजनाओं का लाभ जनता को मिल सके उसके लिये क्या कवायद की जा रही है ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- हम समय- समय पर योजनाओं का प्रचार करवाते रहते हैं अभी ज़िले में किसान पेंशन योजना से 35000 लोग लाभान्वित हुये हैं। अटल आयुष्मान योजना तो चल ही रही है…
आज़ाद सवाल (15):- अंत में एक काल्पनिक सवाल, 2020 में नैनीताल को किस स्तर पर देखते हैं, कितना परिवर्तन होगा तब तक ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल:- 2020 तक हल्का फुल्का अंतर आएगा, ज़्यादा बदलाव नहीं आएगा नैनीताल में…
साक्षात्कार समाप्त
🙏
अंक 119 : फिर हुआ असर, नवीन समाचार व आज़ाद मंच का, जानें कहाँ ?
धन्यवाद : अधिशासी अभियंता जल संस्थान का
साहिबान, नवीन समाचार के स्तम्भ आज़ाद के तीर में हमने पानी की जगह सीवर नैनी झील में ले जा रहे हैं नाले क्यों सोया है विभाग उन्वान के साथ ये बताया और दिखाया था कि किस तरह से भारी मात्रा में सीवर का गंदा पानी सीधा झील में जा रहा था, हमारी ख़बर का संज्ञान लेते हुये संतोष कुमार उपाध्याय, अधिशासी अभियंता जल संस्थान नैनीताल ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को तत्काल हुक्म दिया और कनिष्ठ अभियंता भास्कर सुयाल अपनी टीम को लेकर मस्जिद चौराहे और मस्जिद के सामने बने पिट खुलवाकर उनकी सफ़ाई करवाने लगे, इस बारे में जब कनिष्ठ अभियंता भास्कर सुयाल से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि काफ़ी मेहनत से सभी कर्मचारी लगे हुए हैं और हमारी कोशिश है कि शनिवार तक झील में जाने वाला सीवर बिल्कुल बंद हो जाये, इतनी तत्परता दिखाने के लिये आज़ाद मंच परिवार जल संस्थान नैनीताल का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता है और आने वाले वक़्त में भी इसी तत्परता की उम्मीद करता है और हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है कि जनसेवा में आपका साथ यूँही हमेशा मिलता रहेगा…
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 118 : पानी की जगह सीवर नैनी झील में ले जा रहे हैं नाले, क्यों विभाग सोया ?
नैनी झील में जा रहा है सीवर का पानी
जल संस्थान गहरी नींद में सोया
गंदा पानी कर रहा है झील को दूषित
कौन है ज़िम्मेदार ?
साहिबान, ये जो तस्वीर / वीडियो आप देख रहे हैं न, वो किसी सीवर लाइन की नहीं है बल्कि नैनीताल में मौजूद एक ऐसे नाले की है जिससे बारिश का पानी ऊपर पहाड़ी से होता हुआ नगर के रॉयल होटल कम्पाउण्ड से निकलकर नयना देवी मंदिर के बराबर से निकलकर झील में समा जाता है लेकिन एक विभाग की नई योजना के चलते नाले में पानी की जगह सीवर की गंदगी आ रही है और सीधा नैनी झील में जाकर झील को दूषित कर रही है, ऐसा नहीं है कि इस बारे में अमुक विभाग अंजान हो, ऐसा कतई नहीं है इस मामले की वजह से ही कुछ दिन पहले नगर पालिका के सभासदों ने 2 दिवसीय धरना भी दिया था लेकिन उक्त विभाग की तानाशाही रवैये के चलते कोई मांग पूरी न हो सकी और आज शहर में सीवर जगह-जगह लीक होती रहती है, जिसे कोई देखने वाला नहीं, क़ाबिलेगौर बात ये है कि इसी झील के निर्मल जल को नैनीतालवासी पीने को मजबूर हैं… आज़ाद मंच द्वारा अधिशासी अभियंता महोदय से इस बावत बात करने के लिये काफ़ी बार कोशिश की लेकिन महोदय कभी फ़ोन उठा नहीं पाते, इसलिये जनता को पता भी नहीं लग पाता आख़िर इस सबकी वजह क्या है ? ख़ैर,
आख़िर में, मुख्यमंत्री महोदय उत्तराखंड मुख्य सचिव मुख्य मंत्री कार्यालय / कुमाऊं आयुक्त महोदय ज़िलाधिकारी महोदय, अपरज़िलाधिकारी महोदय, अधिशासी अभियंता महोदय, जल संस्थान, नैनीताल से हमारी इल्तेजा है कि सीवर के गंदे पानी को नैनी झील में जाने से रोकने के लिये तत्काल कोई कार्रवाई की जाए, जिससे हमारी नैनी झील दूषित न हो और शहर के बाशिंदों व बाहर से आने वाले सैलानियों को साफ़ पीने का पानी मयस्सर हो सके …
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 117 : साक्षात्कार नैनीताल के जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन से जिले की चिकित्सा, शिक्षा, खनन आदि व्यवस्थाओं पर…(भाग – 02)
संक्षिप्त परिचय :- विनोद कुमार सुमन, ज़िलाधिकारी, नैनीताल
डीएम विनोद कुमार सुमन।
कालीन उद्योग के लिये मशहूर संत रविदास नगर ज़िला या यूँ कहें उत्तर प्रदेश के चार ज़िलों (प्रयागराज, जौनपुर, वाराणसी और मिर्ज़ापुर) की सरहदों को छूने वाले भदोही ज़िले में 1970 को एक ग़रीब किसान के घर में जन्मे श्री विनोद कुमार सुमन पांच भाई और दो बहनों में सबसे बड़े हैं। आपकी प्रारंभिक शिक्षा भदोही में ही हुई। उसके बाद आप घर छोड़कर श्रीनगर गढ़वाल आ गये, जहां आपने कई महीनों तक एक मंदिर परिसर में दिन गुज़ारे और बी.ए. की पढ़ाई पूरी करने के लिये आपने वहां बन रहे एक सुलभ शौचालय के निर्माण में मज़दूर के रूप में भी योगदान दिया और इन कठिन परिस्थितियों में आपने बीए की डिग्री गढ़वाल विवि से हासिल की। इसके बाद पिताजी ने घर वापस बुला लिया। फिर आपने एम.ए. की शिक्षा प्रयागराज विवि (तत्कालीन इलाहबाद विवि) से प्राप्त की। माता-पिता की प्रेरणा से आपका बचपन से ही मन शिक्षा की ओर अग्रसर रहा इसलिए आपने पढाई नहीं छोड़ी तथा सन् 1998 में आपने पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण की। पीसीएस अधिकारी के रूप में अपनी कुशल सेवाएं देने के कारण आपको सन् 2007 में आइएएस कैडर में पदोन्नत किया गया। तब से आज तक आप एक कुशल आइएएस के रूप में देश को अपनी सेवाएं दे रहे हैं और आज नैनीताल के ज़िलाधिकारी के पद को सुशोभित कर रहे है। उनसे बात की हमारे संवाददाता मो.ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :- सवाल (05) से आगे :-
आज़ाद सवाल (06):- प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खुल तो गये हैं लेकिन उनमें उचित मात्रा में दवाइयां कब उपलब्ध होंगी ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल:- फ़िलहाल जो कमी आयी उसका कारण भण्डार गृह में ही कमी थी, क्योंकि उत्पादन ही कम हो रहा था, अब पूर्ति बहाल हो जाएगी…
आज़ाद सवाल (07):- निजी स्कूल खुलने लगे हैं और अभिभावकों पर अमुक दुकान से यूनिफार्म, किताबें लेने का दबाव बनने लगा है। प्रशासनिक स्तर से इन स्कूली दबाव पर कब लगाम लगेगी ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- अभिभावकों को परेशान न होना पड़े इसलिये स्कूल यूनिफार्म व क़िताबों की सुविधायें देता है …
आज़ाद सवाल (08):- निजी अस्पताल, अस्पताल न होकर फाइव स्टार होटल बन गई हैं। इन अस्पतालों पर कब नकेल कसी जाएगी ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल*:- क्लीनिकल ईस्टब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) लागू होने के बाद ये सब बंद हो जाएगा…
आज़ाद सवाल (09):- अवैध खनन लगातार हो रहा है। उस पर रोकथाम के लिये क्या क़दम उठाये जा रहे हैं ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- हम लगातार कोशिश कर रहे हैं ऐसा न हो।बयदि जब कभी ऐसी खबरें मिलती भी हैं तो उस पर कार्रवाई करते रहते हैं…
आज़ाद सवाल (10):- हालांकि पॉलिथीन प्रतिबंधित है फिर भी पॉलिथीन का बाज़ार में धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। उसे रोकने हेतु कब कार्रवाई की जाती है ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- पॉलिथीन का प्रयोग न हो उसके लिये हम समय-समय पर दुकानों व बाज़ारों में छापामारी करते रहते हैं …
साक्षात्कार जारी
अंक 116 : साक्षात्कार (भाग – 01) :
आज़ाद सवाल (01):- सबसे पहले हम बात करते हैं पुलवामा में हुये हमले की।उसमें शहीद हुये जवानों की शहादत पर क्या कहना चाहेंगे आप घटना पर ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- बेहद दुःखद घटना है। हम इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं तथा शहीद हुये जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं …
आज़ाद सवाल (02):- बलियानाला भू -स्खलन प्रभावित क्षेत्र से कितने परिवारों को विस्थापित किया जा चुका है ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- बलियानाला भू-स्खलन प्रभावित क्षेत्र से लगभग 20-22 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित किया जा चुका है। बाक़ी के 2-3 परिवार शेष हैं। उन्हें भी जल्द ही विस्थापित किया जाएगा…
आज़ाद सवाल (03):- नैनीताल से लेकर हल्द्वानी, रामनगर कहीं भी चले जाओ सब सरकारी अस्पतालों की हालत बदतर क्यों है ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- नही, ऐसा नहीं है। अगर नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल की ही बात करें तो उक्त अस्पताल को कायाकल्प पुरस्कार से नवाज़ा गया है, जो काफ़ी कड़े मानदंडों के आधार पर दिया जाता है। रही बात अन्य अस्पतालों की तो निजी अस्पतालों के हड़ताल पर जाने से सरकारी अस्पताल ही मसीहा बने हुये हैं…
आज़ाद सवाल (04):- महोदय, आपका कहना अपने स्तर पर ठीक होगा।न्यायाधीश, प्रशासनिक अधिकारी या कोई भी हाई प्रोफाइल पर्सनालिटी को बेहतर इलाज मिल रहा होगा लेकिन एक आम नागरिक को अवार्ड नहीं इलाज चाहिये।जनता का कहना है कि मरीज़ कक्ष में बैठकर चिकित्सक की प्रतीक्षा करते हैं और चिकित्सक बाहर धूप सेंकते हैं, क्या ये आरोप सही हैं ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- नहीं, ऐसा नहीं हो रहा है। बीडी पांडे अस्पताल में सब सही चल रहा है। अगर चिकित्सक धूप सेंक भी रहे हैं तो कोई गुनाह नहीं कर रहे हैं…।
आज़ाद सवाल (05):- इसका मतलब जिलाधिकारी महोदय सरकारी अस्पतालों की कार्यशैली से संतुष्ट हैं ?
ज़िलाधिकारी नैनीताल :- जी हाँ, जहाँ तक हमने अनुभव किया है वहां तक तो हम संतुष्ट ही हैं। वैसे बिल्कुल अंदर तक तो जाकर हमने भी नहीं देखा है…
साक्षात्कार जारी…
अंक 115 : बदल रही है नैनीताल की तस्वीर, आज़ादी के बाद पहली बार हो रही यहाँ सफाई…
-साफ़ हो रहे हैं नैनीताल के नाले, सिंचाई खंड का विशेष आभार, पालिका प्रशासन का भी मिल रहा सहयोग, नागरिकों का सहयोग अपेक्षित
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न, वो हमारे शहर नैनीताल के अलग – अलग नालों की है, जिसमें सिंचाई खंड नैनीताल के कर्मचारी कार्य करते नज़र आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक़ हमारे शहर में कुल 59 नाले हैं, इनकी वर्ष में तीन बार सफ़ाई का प्रावधान है। एक बरसात से पहले, दूसरा बरसात के बीच व तीसरा बरसात के बाद। आजकल जो सफ़ाई चल रही है, वो बरसात के बाद वाली चल रही है, इस बारे में सिचाई विभाग के अधिशासी अभियंता हरीश चन्द्र सिंह बताते हैं कि वैसे तो नालों का स्वामित्व नगर पालिका नैनीताल का है, हम केवल नालों की मेंटिनेंस के लिये उत्तरदायी हैं। अब तक हमारे द्वारा लगभग 30 नालों की सफ़ाई हो चुकी शेष नाले मार्च के प्रथम सप्ताह तक लगभग पूरे साफ़ हो जाएँगे। नाले से निकले मलबे और कूड़ा निस्तारण से सम्बंधित बात करने पर सचिन नेगी, नगर पालिकाध्यक्ष नैनीताल ने बताया कि जो भी कूड़ा नालों से निकलता है उसे पालिका द्वारा उठाया जाएगा और जो मलबा होगा उसके निस्तारण की ज़िम्मेदारी सिंचाई खंड की होगी, तस्वीरें बता रही हैं कि सिंचाई खंड अपना कार्य बखूबी अंजाम दे रहा है, उसके लिये हरीश सिंह, अधिशासी अभियंता, मदन मोहन जोशी, सहायक अभियंता, नीरज तिवारी कनिष्ठ अभियंता व पर्यवेक्षक रमेश सिंह के साथ तमाम टीम जो आड़े-तिरछे, फिसलन वाले नालों को भी जान जोखिम में डालकर साफ़ कर रहे हैं, उन सबका तथा सचिन नेगी, नगर पालिकाध्यक्ष, रोहिताश शर्मा, अधिशासी अधिकारी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, डॉ. जीएस धर्मसत्तू , नगर सफ़ाई निरीक्षक, कुलदीप सिंह के साथ एक से लेकर पंद्रह तक सभी सभासदगण नगर पालिका परिषद व उनकी पूरी टीम का आज़ाद मंच परिवार तहे दिल से शुक्रिया अदा करता है। साथ ही नागरिकों से ये अपील करता है कि मेहरबानी करके नालों में कूड़ा न डालें, कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में ही डालें और हर एक वार्ड के सभासद से ये गुज़ारिश है कि अपने -अपने वार्ड के लोगों को स्वच्छता के लिये प्रेरित व जागरूक करें तभी बनेगा हमारा ‘क्लीन नैनीताल-ग्रीन नैनीताल’। न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर…
अंक 114: साक्षात्कार-डीएफओ बिजू लाल टीआर, भाग-3 : नैनीताल चिड़ियाघर पर उपयोगी जानकारी
टीआर बिजुलाल, मंडलीय वन अधिकारी (डिवीज़नल फॉरेस्ट ऑफिसर) डीएफ़ओ, नैनीताल
संक्षिप्त परिचय :- केरल प्रान्त के तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम) में जन्मे टी.आर. बीजुलाल की शिक्षा-दीक्षा तिरुवनंतपुरम में ही हुई। एमएससी (ज़ूलॉजी) उत्तीर्ण करने के पश्चात् आपने आईएफ़एस परीक्षा (2004) में आपने 18वीं रैंक हासिल की। 3 वर्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम के पश्चात् आपने हल्द्वानी स्थित एफटीआई में उप-निदेशक के पद को ग्रहण किया। एक वर्ष उप-निदेशक पद पर रहने के पश्चात 2008 में नैनीताल के डीएफ़ओ के तौर पर सरोवर नगरी में आगमन हुआ, कुछ समय की सेवायें देने के बाद आप डीएफ़ओ सिविल अल्मोड़ा, उप-निदेशक गोविन्द पशु विहार (पुरोला), वर्किंग मेन ऑफिसर (चकराता) में अपनी सेवायें देते हुये मई-2018 में पुनः नैनीताल की वादियों में डीएफ़ओ के तौर पर शानदार वापसी की तथा मई से फरवरी तक आपने वन संरक्षण के क्षेत्र में क्या-क्या उल्लेखनीय कार्य किये, इस सम्बन्ध में बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने… प्रस्तुत है टीआर बीजुलाल डीएफ़ओ, नैनीताल से बातचीत के प्रमुख अंश :-
सवाल 10 से आगे …
आज़ाद सवाल (11):–
25 लाख रुपये प्रतिमाह क्या प्राणी उद्यान की आय होती है ?
डीएफ़ओ नैनीताल:-
नहीं, ऐसा तो नहीं हो पाता,
आय कम व्यय अधिक होने के कारण ज़ू घाटे में चलाया जा रहा है …
आज़ाद सवाल (12):-
क्या ज़ू के जानवरों को गोद लिया जा सकता है ?
डीएफ़ओ नैनीताल:-
जी हाँ, ज़ू में जितने भी पशु-पक्षी हैं सभी को गोद लिया जा सकता है उसका विकल्प मौजूद है, इच्छुक व्यक्ति यहां कार्यालय में सम्पर्क कर सकते हैं…
आज़ाद सवाल (13):-
नैनीताल ज़ू में और क्या विशेषतायें लाई जाएंगी ?
डीएफ़ओ नैनीताल:-
नैनीताल ज़ू को और विकसित करते हुये यहां एक इंटरप्रिटेशन थिएटर खोलने की योजना है, जिसमें यहां आने वाले लोगों को वाइल्ड लाइफ संबंधी डॉक्यूमेंट्री फिल्में दिखाकर वन्य जीव संरक्षण के लिये प्रेरित किया जा सकेगा ..
आज़ाद सवाल (14):-
ज़ू के अलावा पर्यटन व आय को बढ़ावा देने के लिये आपके द्वारा क्या प्रयास किये जा रहे हैं ?
डीएफ़ओ नैनीताल:-
पर्यटन व राज्य की आय बढ़ाने के लिये हम हनुमान गढ़ी स्थित ईको पार्क, कालाढूंगी मार्ग पर सरिता ताल (सड़िया ताल) वाटर फॉल, हिमालयन बॉटैनिकल गार्डन तथा रानीबाग़ स्थित रेस्क्यू सेंटर को पर्यटकों के लिये विकसित कर रहे हैं…
आज़ाद सवाल (15):-
तो इन सब स्थलों को विकसित करने में देरी क्यों हो रही है ?
डीएफ़ओ नैनीताल:-
बस फण्ड की कमी है, नैनीताल को स्वर्ग बनाने का संकल्प है, और हमें विश्वाश है वो ज़रूर पूरा होगा…
(साक्षात्कार समाप्त)
अंक 113: साक्षात्कार-डीएफओ बिजू लाल टीआर, भाग-2 :
सवाल 5 से आगे …
आज़ाद सवाल (06):- नगर क्षेत्र में आवास बनाते समय किसी वृक्ष की कितनी दूरी होनी चाहिये?
डीएफ़ओ नैनीताल :- नगर क्षेत्र में आवास बनाते समय किसी वृक्ष की दूरी लगभग 3 मीटर होनी चाहिये…
आज़ाद सवाल (07):- नैनीताल में तो अधिकतर आवास वृक्षों से सटाकर बनाये गये हैं, उनका क्या होगा ?
डीएफ़ओ नैनीताल:- पुराने समय से ऐसे आवास बन चुके हैं, हमने अपने कार्यकाल में ऐसी कोई अनुमति नहीं दी है…
आज़ाद सवाल (08):- नैनीताल क्षेत्र में कौन सा वन अधिनियम लागू होता है ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- जहां तक नगर पालिका परिषद का क्षेत्र आता है वहां तक नगर पालिका अधिनियम और उसके पश्चात् वन संरक्षण अधिनियम 1927 लागू होता है और उन्हीं के अंतर्गत कार्रवाई होती है…
आज़ाद सवाल (09):- अब बात करते हैं वन्य प्राणी उद्यान की। नैनीताल वन्य प्राणी उद्यान (ज़ू) में कितने संख्या में कितने जानवर व अन्य पक्षी हैं ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- नैनीताल वन्य प्राणी उद्यान वन्य जीव संरक्षण 1972 के अंतर्गत चलाया जा रहा है। यहां पर कुल 33 प्रजाति निवास करते हैं। जिनमें 232 जानवर हैं और जानवरों में 2 टाइगर (01नर +01 मादा ), 7 लैपर्ड (4 नर +3 मादा ), 4 भालू (1 नर +3 मादा ), 2 तिब्बती भेड़िये (1 नर + 1 मादा), 5 रेड पांडा (2 नर + 3 मादा) हैं फ़िलहाल। बाक़ी आगे संख्या बढ़ सकती है…
आज़ाद सवाल (10):- वन्य प्राणी उद्यान में जीवों के रख रखाव में प्रति माह कितना ख़र्चा आता है ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- सभी जीवों के रख रखाव पर प्रति माह ₹25 लाख का खर्चा आ जाता है…
साक्षात्कार जारी…
आज़ाद सवाल (01):- आपके वनाधिकार में कौन-कौन से क्षेत्र आते हैं ?
अंक 110 : साक्षात्कार-डीएफओ बिजू लाल टीआर, भाग-1 :
डीएफ़ओ नैनीताल :- हमारे वनाधिकार में नैनीताल, खैरना, बेतालघाट, रानीबाग़ तथा कालाढूंगी का क्षेत्र आता है…
आज़ाद सवाल (02) :- नैनीताल में जगह-जगह भवन निर्माण हो रहे हैं। मानचित्र पास कराने को आपकी एनओसी भी अनिवार्य है। क्या आप बता पाएंगे कि किन आधारों पर आपने एनओसी दी हैं ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- जितने भी निर्माण हो रहे हैं उनमें हमारी ओर से कोई एनओसी नहीं दी गयी है…
आज़ाद सवाल (03) :- भवन निर्माण में धड़ल्ले से वृक्षों की बलि दी जा रही है। कौन है इसके लिये ज़िम्मेदार ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- यदि ऐसा हो रहा है तो उसके लिये पूरी तरह से भू -स्वामी ही ज़िम्मेदार है…
आज़ाद सवाल (04) :- इसका मतलब आप उस पर कोई कार्रवाई नहीं करते ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- जो अवैध रुप से वृक्ष को काटता या क्षति पहुंचाता है उस पर नगर पालिका के नियमानुसार ₹5000 तक न्यूनतम तथा ₹25000 अधिकतम जुर्माना वसूला जाता है …
आज़ाद सवाल (05):- मतलब ये हुआ कि अधिकतम ₹25000 दीजिये और वृक्षों का सफ़ाया कीजिये। यही अर्थ जाता है इसका तो ?
डीएफ़ओ नैनीताल :- नहीं, ऐसा नहीं है, हम अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करते हैं कि वृक्ष कटान न हो। यदि दुर्भाग्यवश ऐसा हो जाता है तो उस पर क़ानूनी रूप से कार्रवाई की जाती है …
साक्षात्कार जारी…. 🙏
अंक 112 (15 फरवरी 2019) : सुनो सुनो सुनो ! यहां एक महीने से खड़ी है एक एम्बुलेंस, जिस किसी की हो ले जाये, वरना…
क्या खुलने वाला है नैनीताल में नया अस्पताल!
क्या स्टाफ़ हाउस क्षेत्र में बनेगा अस्पताल!
क्या एम्बुलेंस 108 सबसे पहले पहुंचाई
एक महीने से क्यों खड़ी है एम्बुलेंस
क्यों कोई कोई सुध लेने वाला नहीं
साहिबान, एक ज़रूरी एलान सुन लीजिये! एक एम्बुलेंस जिसका नाम 108 है, सफ़ेद, नीली, लाल धारीदार कपड़े पहने हुए है, पिछले एक महीने से मल्लीताल सात नंबर क्षेत्र के भोटिया बैंड पर लावारिस हालत में खड़ी है, जिस किसी की भी हो, कृपया यहाँ आकर ले जाएँ, उसके हाथ- पैर अभी सलामत हैं, कहीं ऐसा न हो कुछ दिन बाद वो ईंटों पर खड़ी मिले। फिर मत कहना बताया नहीं। और तो और एम्बुलेंस का रौब लेकर घूमने वाली गाड़ी ‘कूड़ा गाड़ी’ का तमग़ा न हासिल कर ले, अभी रो- रो कर ,एम्बुलेंस के डीज़ल रूपी आंसू सड़क पर बिखरे पड़े हैं, मेहरबानी करके इस मैसेज को तब तक फैलाइये जब तक इसके ख़ैर ख़्वाह इस 108 एम्बुलेंस को अपने घर न ले जाएँ… ख़ैर, हमारे शहर में जो दो अस्पताल (अस्पताल कहने में बाई गॉड गला भर आया है फिर भी ) हैैं, उनकी हालत तो किसी से छिपी नहीं है, इसलिए नया अस्पताल बनने की कल्पना करने में भी डर लगता है हुज़ूर!
आख़िर में, स्वास्थ्य मंत्री महोदय, उत्तराखंड, मुख्य चिकित्साधिकारी महोदया, नैनीताल तथा सम्बंधित अधिकारीगणों से इल्तेजा है कि 108 एम्बुलेंस का उपयोग रोगियों की सेवा में हो तो अच्छा लगता है लेकिन किसी सूनसान जगह पर ले जाकर लावारिस हालत में एम्बुलेंस को खड़ा कर देना ये अच्छा महसूस नहीं होता। अगर आपके संज्ञान में ये मामला नहीं था, तब भी ये चिंता का विषय है लेकिन अब मामला संज्ञान में आने के बाद कितनी जल्दी उस पर कार्रवाई होती है। ये देखने वाली बात होगी…
न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर
अंक 111 (14 फरवरी 2019) : 15 दिन में ही 1/6 रह गई नगर पालिका की टॉल फ्री नंबर सेवा
नगर पालिका टॉल फ्री नंबर सेवा हुई बाधित
एक से लेकर पांच नंबर तक कोई रिस्पॉन्स नहीं
केवल छठे नंबर पर हो रही है शिकायत दर्ज
पालिकाध्यक्ष स्वयं जवाब दे रहे हैं लोगों की शिकायतों पर
साहिबान, अभी 26 जनवरी को नगर पालिका ने लोगों की समस्या निवारण हेतु ऐतिहासिक शुरुआत की थी जिसमें सोचा ये गया था कि नगर पालिका से सम्बंधित हर समस्या से निजात दिलाने के लिये उक्त टोल फ्री नंबर काम आएगा जहाँ पर आम नागरिक अपनी शिकायत दर्ज करा सके, 15 दिन से पहले ही फ्री के नाम पर जारी एक से लेकर 6 नंबर में से केवल 6 नंबर ही काम कर रहा है, जिस पर स्वयं पालिकाध्यक्ष शिकायत सुन रहे हैं व निवारण हेतु उचित जवाब भी दे रहे हैं, अन्य नंबर क्यों नहीं उठाये जा रहे जब इस बावत पालिकाध्यक्ष से बात की गयी तो उन्होंने अन्य कर्मचारियों के अवकाश पर जाने का कारण बताया और साथ ही ये भी कहा कि जल्द ही इस समस्या को दूर किया जाएगा कि कर्मचारी के अवकाश पर जाने पर भी फोन अटेंड हो सकें, वहीँ दूसरी ओर अधिशासी अधिकारी से इस संबंध में बात की गयी तो उनका जवाब भी एक समान था। दोनों ही ज़िम्मेदार अधिकारियों ने अपनी ज़िम्मेदारी को बखूबी समझते हुये जनहित में जवाब दिये। हम आपके जज़्बे की क़द्र करते हैं और आम नागरिकों से अपील करते हैं कि टोल फ्री नंबर डायल करने के बाद एक से लेकर पांच तक जब कोई जवाब न आये तब छठे नंबर को दबाएं व सीधे पालिकाध्यक्ष से अपनी पीड़ा बताएं वो हर सम्भव उक्त समस्या निवारण हेतु आपको एक ज़िम्मेदार जवाब अवश्य देंगे…
आख़िर में, नगर पालिका अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी महोदय से हमारा एक ही सवाल है जब इतना बड़ा महत्वकांक्षी क़दम उठाना ही था तो जल्दी किस बात की थी, कुछ दिन और रुक जाते तो क्या बुराई थी, ख़ैर, हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है कि जल्द से जल्द टोल फ्री नंबर के एक से लेकर पांच तक नंबर पर भी शिकायत दर्ज व उसका समाधान हो पाएगा …
न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर…
अंक 109 (9 फरवरी 2019) : साक्षात्कार (भाग-03)
तत्कालीन ज़िला नैनीताल (वर्तमान ज़िला उधम सिंह नगर तहसील किच्छा में मौजूद गाँव रामेश्वरपुर में बैसाखी और अम्बेडकर जयंती (14 अप्रैल ) के दिन सन् 1962 में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे श्री हरबीर सिंह की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से हुई उसके बाद आपने इंटर तक की शिक्षा आदित्य नाथ झा इण्टर कॉलेज रुद्रपुर से 1980 में ग्रहण की और कुमाऊँ विश्वविद्यालय से सन् 1984 में एमए करने के उपरांत ही आपकी नैनीताल बैंक में नौकरी लग गयी। नौकरी लगने से पहले तक आपने अपने पिताजी के साथ खेती- किसानी भी की, जिसमें गन्ने की फ़सल धान लगाना व खेतों की रोपाई आदि शामिल थी। बचपन से ही अभिनय व गायन के शौक़ के चलते आपने हल्द्वानी रामलीला में दशरथ व जनक का क़िरदार बख़ूबी निभाया और अक्सर किसी भी कार्यक्रम में अपने गायन से श्रोताओं का मन मोह लेने वाले ऐसे हरफ़नमौला किसान, कलाकार, गायक और बेहतरीन व्यक्तित्व के स्वामी जो हमारे नैनीताल के अपर ज़िलाधिकारी व झील विकास प्राधिकरण के सचिव की भूमिका को भी बखूबी निभा रह हैं, विभिन्न मुद्दों को लेकर उनसे बातचीत की हमारे संवाददाता मो.ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-
सवाल 10 से आगे :-
आज़ाद (11) :- भवाली से निकलने वाली उत्तरवाहिनी शिप्रा नदी में सीवर लाइन की खुली गंदगी समाहित हो रही है साथ ही साथ नदी को गंदा नाला बना दिया गया है, उक्त नदी को दूषित होने से बचाने के लि्या क़दम उठाये जाएंगे ?
हरबीर सिंह :- अभी तक हमारे संज्ञान में मामला नहीं था, प्राधिकरण की आगामी बोर्ड बैठक में इस नदी को स्वच्छ करने सम्बन्धी निर्णय लिये जाएंगे…
आज़ाद सवाल (12) :- नैनीताल प्रारम्भ से ही रंगकर्मियों की रंगभूमि रही है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि अभी तक यहां एक रंगशाला नहीं है। प्रशासनिक अधिकारी व कलाकार होने के नाते आपके स्तर से क्या सहयोग मिल सकता है ?
हरबीर सिंह :- अभी तक तो कोई हमारे पास रंगशाला का ये मुद्दा लेकर नहीं आया, यदि ज्ञापन दिया जाता है तो हम यक़ीनन उस पर अपनी तरफ़ से पूरा सहयोग करेंगे…
आज़ाद सवाल (13) :-
सर पिछली बार के विंटर कार्निवाल से यहां के स्थानीय कलाकारों में रोष है कि उन्हें अवसर नहीं दिया गया, ऐसी चूक कैसे हो गयी ?
हरबीर सिंह :- चूक नहीं हुई, हमने प्रारम्भ से ही प्रार्थना पत्र स्वीकार करने शुरू कर दिये थे लेकिन यहां के स्थानीय कलाकार बहुत देर में प्रार्थना पत्र लेकर आये जिससे शायद कुछ लोग नाराज़ हो गए। हम अगले विंटर कार्निवाल में पूरी कोशिश करेंगे कि कोई रोष न हो …
आज़ाद सवाल (14):- आप में एक बेहद अच्छा कलाकार भी है। कलाकार से पीसीएस अधिकारी बनने तक का सफर कैसे तय किया ?
हरबीर सिंह :- शौक़िया तौर पर पुराने गीतों को गा लेता हूँ। बाक़ी हल्द्वानी की रामलीला में दशरथ और जनक के किरदारों को निभाया है। नैनीताल बैंक में नौकरी के साथ – साथ सिविल सर्विसेज़ की तैयारी भी करता रहता था। बस एक बार वाहे गुरु जी की मेहरबानी से परीक्षा उत्तीर्ण की और वहीं से प्रशासनिक अधिकारी की यात्रा प्रारम्भ हो गयी…
आज़ाद सवाल (15) :- आप अपनी सफ़लता का श्रेय किसे देना चाहेंगे ?
हरबीर सिंह :- सिविल सर्विसेज़ को अत्यधिक गंभीरता से दिलाने का पूरा श्रेय मैं अपनी पत्नी अमरजीत कौर (रानी ) को देना चाहूंगा। एक प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिये मेरी पत्नी ने सदा मुझे प्रोत्साहित किया। मैं उनका आजीवन आभारी रहूंगा और मेरी दिली ख्वाहिश है कि हर जन्म में मुझे पत्नी के रूप में रानी ही मिले…
आज़ाद सवाल (06):- झील विकास प्राधिकरण झील के विकास के लिये क्या प्रयास कर रहा है ?
हरबीर सिंह झील को साफ़ व स्वच्छ रखने के लिये हमने ग्लोबल एक्वा प्रा. लि. को वॉटर एरियेशन की ज़िम्मेदारी सौंप रखी है जिसकी रख रखाव लागत रुपये अठारह लाख ( ₹18 लाख ) प्रतिवर्ष तथा विद्युत व्यय रुपये एक लाख साठ हज़ार (₹ 1,60,000) झील विकास प्राधिकरण के द्वारा भुगतान किया जाता है…।
आज़ाद सवाल (07) :- अपर ज़िलाधिकारी की हैसियत से आपके द्वारा बलियानाला के भू-स्खलन प्रभावित क्षेत्र में रह रहे लोगों को अभी तक किसी सुरक्षित जगह विस्थापित क्यों नहीं किया गया ?
हरबीर सिंह हमारी ओर से भ-ूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। और रही बात वहां के निवासियों को अन्यत्र विस्थापित करने की तो रूसी बाईपास के पास जगह चिन्हित की गयी है, जहां उनके लिये विचार किया जा रहा है…।
आज़ाद सवाल (08) हमारे शहर में दोनों अस्पताल रेफ़रल सेंटर बन कर रह गए हैं। क्या कभी आपके द्वारा वहां की स्थितियों का जायज़ा लिया गया ?
हरबीर सिंह पिछली बार नंदा देवी महोत्सव के दौरान एक बच्ची की अचानक तबियत ख़राब हो गयी थी उसको बीडी पाण्डे के इमरजेंसी में अच्छा उपचार दिया गया था लेकिन हाँ कभी अंदर वार्ड तक नहीं जा पाया लेकिन जल्द ही औचक निरीक्षण किया जाएगा…।
आज़ाद सवाल (09) :- निजी विद्यालय शीत अवकाश के उपरांत खुलते ही अभिभावकों को लूटना प्रारम्भ कर देंगे। उक्त लूट को अपर ज़िलाधिकारी स्तर पर रोकने को क्या प्रयास किये जाएंगे ?
हरबीर सिंह सरकार द्वारा समस्त स्कूलों को आदेशित किया गया है कि किसी भी स्कूल द्वारा अभिभावकों पर यूनिफार्म, स्टेशनरी आदि के लिये दबाव नहीं बनाया जाएगा। यदि ऐसी शिकायतें प्राप्त होंगी तो सम्बंधित स्कूल प्रबंधन पर सख़्त कार्रवाई की जाएगी…।
आज़ाद सवाल (10):- सरकारी कार्यालयों में अनियमिततायें जारी हैं। उक्त अनियमितताओं को रोकने हेतु कभी आपके द्वारा औचक निरीक्षण किया जाएगा ?
हरबीर सिंह किसी भी हालत में अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।ज़िलाधिकारी स्तर से निरीक्षण किया जाता रहा है और हमने भी अपने स्तर से अपर निदेशालय, नगर पालिका, जल संस्थान आदि विभागों में औचक निरीक्षण कर कार्रवाई की है…।
साक्षात्कार जारी….
अंक 107 (6 फरवरी 2019) : साक्षात्कार (भाग-01)
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गंदा है पर धंधा है ये – भाग -02 शिक्षा कर कार्यालय ! खुल गया है बाज़ार ! लुट रहे हैं अभिभावक सरकार बनी मूक दर्शक सीबीएसइ नींद में
साहिबान, बोतल से जिन्न बाहर आ चुका है, अब जिन्न बोल दिया तो जनाब आप चिराग़ मत ढूंढ़ने लगना, दरअसल आज यहां हम बात कर रहे हैं शीतकालीन अवकाशों के बाद खुले शिक्षा कर कार्यालयों की जहाँ कार्यालय खुलते ही इमोशनल ड्रामा स्टार्ट हो गया है, देखो बच्चों हमने बड़ी मुश्किल से तुम्हें पास तो कर दिया है अब एक काम करना अपने पापा को ये लिस्ट दे देना अपने नए क्लास के नये कोर्स के लिये और हर बच्चे को एक फेहरिस्त थमा दी जा रही है कि आपको कौन सी दुकान से कौन – कौन सी किताबें आदि खरीदनी हैं, ये तो रही एक बात अब दूसरी बात जिस बुक सेलर के वहां से किताबें खरीदने का हुक्म मिला है उन साहब के पास NCERT की एक दो किताबों के अलावा बाक़ी प्राइवेट मुद्रकों की किताबें उपलब्ध हैं, अब यहां बेचारा अभिभावक एक अनचाही मुस्कराहट के साथ दुकानदार की तरफ़ देखता है और इज़्ज़त और ज़िल्लत से भी आगे स्कूल वालों के फ़रमान का मान रखते हुये वो प्राइवेट मुद्रक की गहरी से गहरी खाई में भी आंखें बंद करके कूद पड़ता है, सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने मासूम बच्चे के मुस्तक़बिल के ख़ातिर, ख़ैर, नहीं नहीं हुज़ूर, जैसा आप सोच रहे हैं ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं है, उस मज़लूम अभिभावक के जिस्म के ख़ून की रवानी के इम्तिहान अभी ख़त्म नहीं हुये, फिर शिक्षा कर कार्यालय नये कक्षा में जाने पर री-एडमिशन के नाम पर, डोनेशन के नाम पर उसका कलेजा फाड़ते हैं और अंदर झांकते हुये बोलते हैं, बस- बस अब आपका पाल्य आराम से पढ़ेगा, ये बात सुनते हुये अभिभावक फिर से अपने मासूम बच्चे का चेहरा देखकर ख़ुश हो जाता है और अपने दिल से खून के आंसू पोंछता हुआ स्कूल से बाहर आ जाता है, और अंदर छोड़ आता है शिक्षा कर कार्यालय के लोगों को उस अभागे अभिभावक के हालात पर ठहाके मारकर चाय- पकौड़े खाते हुये, उनमें से एक मैडम तरस खाते हुये बोलती हैं कि अगर पैसा ख़र्च नहीं कर सकते तो क्यों आते हैं निजी स्कूल में, जायें न, सरकारी में, “हुन्ह”, और फिर न जाने कब- कब किस- किस तरह- तरह के शुल्क वसूले जाते हैं, कभी स्पोर्ट्स डे के नाम पर, कभी टीचर्स डे और कभी एनुअल फंक्शन के नाम पर, ये सब शुल्क बिना किसी अभिभावक की सहमति के तुग़लकी फ़रमान के रूप में सुना दिये जाते हैं और हमारी आपकी तरह हर अभिभावक अपने बच्चे की ख़ुशी की ख़ातिर क्योंकि उसे डर होता है कि अगर उसने आवाज़ उठाने की पहल की तो मालूम नहीं उसके बच्चे के साथ स्कूल वाले कैसा बर्ताव करेंगे, बस यहीं से वो ख़ुद को लाचार महसूस समझता है और यही लाचारी इन शिक्षा कर कार्यालयों की ताक़त बन जाती है |
ख़ैर, नियमों की बात करें तो शिक्षा का अधिकार अधिनियम में जो बातें कही गयी हैं उनका अनुपालन मुश्किल से ही हो पाता है क्या कहता है शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 आइये जानते हैं :- शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE)- 2009 की मुख्य बातें :-
भारत देश में 6 से 14 वर्ष के हर बच्चे को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के लिए शिक्षा आधिकार अधिनियम 2009 बनाया गया है। यह पूरे देश में अप्रैल 2010 से लागू किया गया है।
इस कानून को लागू करने के लिए गुजरात राज्य के शिक्षा विभाग द्वारा फरवरी 2012 से नियम तैयार किये गये हैं।
यह कानून हर बच्चे को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अवसर और अधिकार देता है, इसके मुख्य पहलू इस प्रकार है-
1. प्रत्येक बच्चे को उसके निवास क्षेत्र के एक किलोमीटर के भीतर प्राथमिक स्कूल और तीन किलोमीटर के अन्दर-अन्दर माध्यमिक स्कूल उपलब्ध होना चाहिए। निर्धारित दूरी पर स्कूल नहीं हो तो उसके स्कूल आने के लिए छात्रावास या वाहन की व्यवस्था की जानी चाहिए।
2. बच्चे को स्कूल में दाखिला देते समय स्कूल या व्यक्ति किसी भी प्रकार का कोई अनुदान नहीं मांगेगा, इसके साथ ही, बच्चे या उसके माता-पिता या अभिभावक को साक्षात्कार देने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। अनुदान की राशि मांगने या साक्षात्कार लेने के लिए भारी दंड का प्रावधान है।
3. विकलांग बच्चे भी मुख्यधारा की नियमित स्कूल से शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।
4. किसी भी बच्चे को आवश्यक कागजों की कमी के कारण स्कूल में दाखिला लेने से नहीं रोका जा सकता है, स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी किसी भी बच्चे को प्रवेश के लिए मना नहीं किया जाएगा और किसी भी बच्चे को प्रवेश परीक्षा देने के लिए नहीं कहा जाएगा |
5. किसी भी बच्चे को किसी भी कक्षा में (फेल करके) नहीं रोका जाएगा और आठ साल तक की शिक्षा पूरी करने तक किसी भी बच्चे को स्कूल से नहीं हटाया जाएगा।
6. स्कूलों में शिक्षकों और कक्षाओं की संख्या पर्याप्त मात्रा में रहेगी (हर 30 बच्चों पर एक शिक्षक, हर शिक्षक के लिए एक कक्षा और प्रिंसिपल के लिए एक अलग कमरा उपलब्ध करवाया जाएगा।
7. कोई भी शिक्षक/शिक्षिका निजी शिक्षण निजी शिक्षण गतिविधि नहीं चलाएगा/चलाएगी।
8. स्कूलों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था की जाएगी।
9. किसी भी बच्चे को मानसिक यातना या शारीरिक दंड नहीं दिया जाएगा।
10. इस अधिनियम के तहत, शिकायत निवारण के लिए ग्राम स्तर पर पंचायत, क्लस्टर स्तर पर क्लस्टर संसाधन केन्द्र (सीआरसी), तहसील स्तर पर तहसील पंचायत, जिला स्तर पर जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी की व्यवस्था है।
ये तो रही शिक्षा अधिकार अधिनियम की ख़ास बातें आइये अब नज़र डालते हैं उन नियमों पर जिनको न मानने पर स्कूल की मान्यता रद्द हो सकती है :- CBSE स्कूलों में सिर्फ NCERT की किताबें चलेंगी, शैक्षिक सत्र 2017-18 से देश के सभी सीबीएसई स्कूलों को एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों को ही पाठ्यक्रम में चलाना होगा। यह फैसला केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर की अध्यक्षता वाली एक समीक्षा मीटिंग में लिया गया था, सरकार के इस फैसले से अभिभावकों को राहत मिलनी चाहिये थी क्योंकि सीबीएसई स्कूल उन लोगों को निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने के लिए मजबूर करते हैं, निजी प्रकाशकों की किताबों का दाम एनसीईआरटी के मुकाबले 300-600 फीसदी ज्यादा होता है। जानकारी के मुताबिक़ एनसीईआरटी को पर्याप्त संख्या में मार्च के अंत तक देश भर में पुस्तक उपलाने का निर्देश दिया गया है ताकि शैक्षिक सत्र 2019-20 के लिए अप्रैल तक की सीमा पूरी हो सके। सभी सीबीएसई स्कूलों को 22 फरवरी, 2019 तक सीबीएसई की वेबसाइट पर मांग ऑनलाइन जमा करनी होगी। एचआरडी मिनिस्ट्री का यह फैसला स्कूलों और पैरंट्स की शिकायत पर आया था। उनलोगों की शिकायत थी कि एनसीईआरटी की किताबें समय पर उपलब्ध नहीं होती हैं। कई पैरंट्स ने यह भी शिकायत की थी कि स्कूल निजी प्रकाशकों की काफी महंगी किताबें बेच रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ‘ये स्कूल निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें बेचने के अलावा पेंसिल, इरेजर्स और स्टेशनरी भी मनमाने दामों पर बेचते हैं। ये चीज अगर पैरंट्स बाहर मार्केट से खरीदें तो उनको बहुत कम खर्च पड़ेगा। हमने यह भी देखा है कि कई निजी प्रकाशक प्राइवेट स्कूलों के हेड का ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का खर्च भी उठा रहे हैं।
आख़िर में, प्रधानमंत्री महोदय, मानव संसाधन विकास मंत्री महोदय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री महोदय, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार, मुख्यमंत्री महोदय उत्तराखंड, शिक्षा मंत्री उत्तराखंड, शिक्षा विभाग उत्तराखंड सरकार, शिक्षा निदेशक उत्तराखंड, अपर शिक्षा निदेशक मुख्य शिक्षा अधिकारी नैनीताल, कुमाऊं आयुक्त महोदय, ज़िलाधिकारी महोदय नैनीताल सभी गणमान्य हस्तियों से हमारी गुज़ारिश है कि निजी स्कूल बिन लगाम के घोड़ों की तरह सड़क पर दौड़ रहे हैं और अभिभावकों को अपनी टापों के नीचे कुचल रहे हैं, बच्चे के एडमिशन से लेकर उसके पढाई पूरी करने तक अभिभावक क़र्ज़ में डूब जा रहे हैं लेकिन इन शिक्षा कर कार्यालयों पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, हमारी ये इल्तेजा है कि इन स्कूलों की मनमानी रोकने या इन पर लगाम लगाने के लिये कोई समिति / आयोग या संघ को इन स्कूलों पर निगरानी करने के लिये बनाना चाहिये जिससे एक अभिभावक को कुछ हिम्मत मिल सके और वो अपना दर्द ख़ुफ़िया तरीके से सरकार तक पहुंचा सके, हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है कि इन ज़ुल्मों -सितम के ख़िलाफ़ ज़रुर आवाज़ उठेगी और इन शिक्षा कर कार्यालयों पर नकेल कसी जाएगी |
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 100 (28 जनवरी 2019) : पुलिस को इन छोटी समस्याओं के लिए फोर्स की जरूरत, पर किसकी-एयर, नेवल या आर्मी की…?
नैनीताल में हो रही न्यायालय की अवमानना
डबल क्या सिंगल हेलमेट भी मुश्किल से पहन रहे हैं बाइक सवार
खूब उड़ रही हैं यातायात नियमों की धज्जियां
पुलिस के सामने से गुज़रते हैं वाहन
मूकदर्शक बनी पुलिस नहीं करती कार्रवाई
पूछने पर फ़ोर्स की कमी का रोना
एक चालान काटने के लिये चाहिये फ़ोर्स !
साहिबान, इस बार हमारी कवायद बेअसर हुई, हमने नवीन समाचार के स्तम्भ आज़ाद के तीर में 24 जनवरी के अंक में यातायात नियमों की नैनीताल में खूब उड़ रही है धज्जियाँ उन्वान के साथ ये बताने की कोशिश की थी कि अधिवक्ता अविदित नौलियाल द्वारा दायर जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुये उच्च न्यायालय उत्तराखंड के न्यायमूर्ति राजीव शर्मा ने सम्बंधित अधिकारियों को सख़्त आदेश दिए थे कि दोनों दो पहिया वाहन सवार दोनों सवारियों का हेलमेट होना अनिवार्य है, जिसे सख्ती से लागू किया जाना है, इसके अलावा और बहुत कुछ फैसले में सुनाया गया था, ख़ैर, बहुत कुछ की तो दूर की बात है हमारा पुलिस प्रशासन बिना हेलमेट वालों से अव्वल दर्जे की मित्रता निभा रहा है, सामने से कोई भी गुज़र जाये, उस पर कार्रवाई तो दूर मित्रवर मुंह फेरकर खड़े हो जाते हैं और मज़े की बात तो ये है कि इतना होता देख तल्लीताल डाँठ पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से पूछने की जब हमने हिमाक़त कर डाली, कि भैया बिना हेलमेट वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही ? इतना सुनकर कई तो बिना कुछ कहे इधर उधर बंट गये, लेकिन एक वीरांगना ने हमारे सवालों का डट कर मुक़ाबला किया और आख़िरकार पल्ला झाड़ते हुये एक बड़ा मज़ेदार जवाब दिया ‘कार्रवाई कैसे करें हमारे पास फ़ोर्स नहीं है ‘ क़सम से हुज़ूर, इतना सुनकर वहां रुकने की हिम्मत नहीं जुटा पाया क्योंकि हंसी इतनी आ रही थी। अपनी भावनाओं को कंट्रोल करते-करते जैसे-तैसे मल्लीताल रिक्शा स्टैंड चौकी आया वहां भी वही आलम। जैसे ही वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के पास जाता वैसे ही फ़ोर्स की कमी वाला दिलेर बयान याद आ गया, फिर तो घर निकलने में ही भलाई समझी। तो जनाब ये आँखों देखा हाल है। कभी आपको भी ऐसे ही मज़ेदार मंज़र देखने हों तो पधारियेगा म्हारे देस क्या कहा बाक़ी के अपराधों का क्या ? हुज़ूरे वाला, इतना तो आप भी समझ रहे होंगे कि जिस जगह बिना हेलमेट वालों के लिये पूरी फ़ोर्स चाहिये वहां स्मैक माफिया, शराब माफिया या और तरह की हो रही आपराधिक गतिविधियों पर कार्रवाई के लिये शायद जल, थल और वायु सेना की मदद चाहिये होगी, गुस्ताख़ी माफ़ ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे, मित्र पुलिस ज़िंदाबाद…
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 99 (27 जनवरी 2019) : नैनीताल नगरवासियों को नगर पालिका का तोहफ़ा
नहीं काटने पड़ेंगे नगर पालिका के चक्करनगर पालिका का टोल फ्री नंबर 18003139040नंबरप्रारम्भ,
नगर से सम्बंधित सफ़ाई, स्ट्रीट लाइट आदि से जुड़ी शिकायत करने के लिये टोल फ्री नंबर
प्रातः 09:30 बजे से शाम 05:30 बजे तक दर्ज करा सकते हैं शिकायत
सोमवार से शनिवार दर्ज करा सकते हैं शिकायत, नगर पालिका प्रशासन का ऐतिहासिक क़दम
साहिबान, हमारे शहर में आये दिन नगर पालिका से जुड़ी कोई न समस्या आम नागरिक को हुआ करती थी, छोटी से छोटी बात के लिये भी नगर पालिका दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते, उसमें भी कभी काम होता कभी कल या परसों पर टाल दिया जाता, लेकिन अब आम नागरिकों को परेशान होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि इस नगर पालिका बोर्ड ने इतिहास में पहली बार आम जनता को विशेष टोल फ्री नंबर की सौग़ात दी है, इस विशेष शिकायत नंबर को जनता की सेवा में प्रारम्भ करने पर अध्यक्ष महोदय, अधिशासी अधिकारी महोदय तथा एक से लेकर पंद्रह वार्ड तक के हर सभासद महोदय / महोदया का आज़ाद मंच परिवार हार्दिक आभार व्यक्त करता है तथा आशा करता है कि जनता की जो शिकायतें आपके नंबर पर ग्रहण की जाएँगी उनका समय रहते उचित निवारण भी होगा, हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वाश है कि आपके द्वारा उठाया गया उक्त क़दम सार्थक सिद्ध हो,
हम दुआ करेंगेे कि इस महत्वाकांक्षी टोल फ्री नंबर की दशा हमारी नगर पालिका पर लगी घड़ी जैसी कदापि न बने… अनेक शुभकामनाओं के साथ आज़ाद मंच नैनीताल द्वारा जनहित में प्रचारित व प्रसारित
अंक 98 (25 जनवरी 2019) : राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर नोटा के इस महत्व को भी जानिए
वोट देना एक को नोटा जैसे नेक को जागो मतदाता जागो7
साहिबान, आज राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जा रहा है, इसमें हमें ये बताया जाता है कि अगर आप बालिग़ हो गए हैं यानि आपने 18 बरस पूरे कर लिए हों तब आपका अधिकार बनता है कि आप अपने मताधिकार का इस्तेमाल करें, यानि संविधान में ये समझा गया है कि एक अठारह साल का युवा (इसमें युवतियां भी शामिल हैं ) भले बुरे में फ़र्क़ समझता है वो देश हित में फ़ैसला करने के क़ाबिल है, ख़ैर, बात करते हैं मताधिकार के इस्तेमाल की, क्या अपने मत का प्रयोग किसी भी प्रत्याशी के हित में करने को मताधिकार का प्रयोग कहा जाता है ? ज़्यादातर लोगों का जवाब हाँ होगा, क्यूंकि हमें यही बताया जाता रहा है, तो जनाब जिस तरह किसी प्रत्याशी के हित में वोट करना मताधिकार का प्रयोग कहलाता है उसी प्रकार नोटा को वोट करना भी मताधिकार का प्रयोग ही है, हालाँकि ये सत्य सार्वजानिक तौर पर बताया नहीं जाता, हमारे सामने नोटा को बहुत ही निम्न नज़रिये से देखा जाता है क्योंकि हमारे आस पास ज़्यादातर लोग किसी न किसी दल अथवा पार्टी से जुड़े होंगे, इसलिये लोग नोटा का ज़िक्र आने पर कन्नी काट जाते हैं या बात का रुख़ ही बदल देते हैं, ख़ैर, जिसको जो करना है करने दीजिए, आप अपने देश के बारे में सोचिये, सन 1947 से लेकर सन 2019 आ गया है लेकिन कभी हमने पीछे मुड़कर देखा ? नहीं, ज़रा भी सोचा ? नहीं, कि हमारे मताधिकार का प्रयोग हमने किस लिये किया, अपने देश का विकास करने या मुट्ठीभर नेताओं का विकास करने जो चुनाव में महज़ पोलिंग के दिन तक ही अच्छी नज़रों से देखता है, अगर वो जीत जाता है तब भी उसने कुछ नहीं करना है और हारने के बाद तो क्या कहने, सवाल ये है कि जब चुनाव जीतने के बाद किसी नेता ने काम ही नहीं करना है तो फिर उसे जिताना क्यों? अरे साहब, एक बार सब मिलकर नोटा तो करिये और आम नागरिक की ताक़त दिखाइये, हर पार्टी को बता दीजिए कि अब जनता जाग चुकी है, अगर आपने ईमानदारी से काम नहीं किया तो जनता हर बार नोटा करेगी, इससे होगा ये कि देश की हर पार्टी तक एक सन्देश जाएगा कि जनता जाग चुकी है, अब वो किसी भी तरह से बेवकूफ नहीं बनने वाली, साम, दाम, दण्ड, भेद या किसी भी तरह से वोट लेने वालों तक सन्देश पहुंचेगा, हर पार्टी के नीति निर्धारक बुलाये जाएंगे, साथियों, देखना एक वही दिन ऐसा होगा जिस दिन छोटी बड़ी हर पार्टी (जो हमें दिखाने को एक दूसरे की दुश्मन बनती हैं) सर जोड़कर मंथन करने बैठी होगी कि आगे क्या किया जाये, फिर कोई नीतिकर्त्ता उन्हें समझाएगा कि देश के हित में काम करना ही होगा वरना अब ये जनता नोटा ही करेगी, एक बार नोटा का रौद्र रूप इन पार्टियों ने देख लिया न, फिर कभी सरकारी स्कूल, अस्पताल, बदहाल नहीं होंगे, किसी भी विभाग में एक मुखिया होता है जिसका पूरे विभाग के कर्मचारियों को भय रहता है कि हमारी बेईमानी के कारण कहीं हमारा सुदूरवर्ती इलाक़े में ट्रांसफर न हो जाये, फिर भी सरकारी विभाग बदहाल हैं, सोचिये जब हमारे नेताओं को किसी ट्रांसफर की कोई चिंता, न वेतन, न भत्ते आदि रुकने का डर तो वो तो करेगा अपनी मर्ज़ी, फिर चाहे लाख लगाओ तुम अर्ज़ी, इसलिये जब तक हम अपनी नोटा की ताक़त दिखाकर इन्हें चुनौती नहीं देते, हम हर पांच साल में या 10 साल में अपना टेस्ट बदलते रहेंगे, और चुनाव आने तक पिछली सरकारों के कारनामे भूलकर उनको वोट देकर अपना मताधिकार का प्रयोग और उसके बाद अपनी ज़ुबान से अपशब्दों का प्रयोग करते रहेंगे, यही रीत सदा चलती रहेगी, हम जैसे लोग देश की तरक्की को लेकर फेसबुक, व्हाट्सप्प पर यूँ ही लेख लिखते रहेंगे, लेकिन न सरकार अपने प्रचार में नोटा का नाम लेगी, न हम नोटा को बह्रमास्त्र की तरह प्रयोग करेंगे,
अंक 97 (24 जनवरी 2019) : यातायात नियमों की नैनीताल में ख़ूब उड़ रही हैं धज्जियाँ! ‘कानून’ (दीपक) तले अंधेरा की स्थिति
आम नागरिक तो कर ही रहे हैं नाफ़रमानी!
ठेंगा दिखाने में पुलिसकर्मी भी पीछे नहीं!
पुलिस प्रशासन को आग सेंकने से फ़ुर्सत नहीं!
ढीली व्यवस्था से पनपते हैं सनसनीखेज़ गुनाह!
क्या किसी बड़ी वारदात का इंतज़ार कर रहा है पुलिस प्रशासन?
साहिबान,
ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न,
दरअसल ये हमारे शहर में मौजूद मा.उच्च न्यायालय उत्तराखंड के सामने की हैं, जहाँ से गुज़रने वाले लोग दो पहिया वाहनं पर सवार होकर बिना हेलमेट लगाये आराम से यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने हुए जा रहे हैं, ये तो आलम कोर्ट के सामने का है, उसी के साथ दूसरी तस्वीर में दो पुलिसकर्मी शहर की शान कही जाने वाली माल रोड से गुज़र रहे है, जिसमें डबल हेलमेट क़ानून होने के बावजूद महज़ एक ही पुलिसकर्मी ने हेलमेट लगा रखा है, अब इसे मित्र पुलिस की मित्रता कहें या रौब कुछ कहा नहीं जा सकता, ख़ैर
ये तो पतीले में पक रहे चावल के दो दाने उठाकर दिखाए गये हैं, आगे देखिए पूरे पतीले का क्या हाल है, तो हुज़ूर आपको
ये सब इसलिये बताया जा रहा है क्योंकि इससे नैनीताल पुलिस की बेहतरीन व्यवस्था और चौकस मुस्तैदी का पता चलता है, कर्तव्यनिष्ठा का पता चलता है,
क्या कहा ये तो सरासर ढील है, अरे नहीं जनाब, चलिये माना ढील ही सही और इतनी ढील हो भी क्यों न, आख़िर इतनी सर्दी जो हो रही है, ऐसे में अंगीठी सेंकते हुए, चाय पकौड़े खाने का अलग ही मज़ा है, क़ानून व्यवस्था का क्या है, जब शांत वादियों में फिर कोई नशा बेचने वाले को गोली मारेगा, तब अंगीठी छोड़कर मजबूरन जाना पड़ेगा, उससे पहले मजाल है जो कोई साहब लोगों से कुछ कहने की हिमाक़त करे,
क़ाबिलेग़ौर बात ये है कि नैनीताल में आज भी कितने इलाक़े ऐसे हैं जहाँ खुले आम शराब पी जा रही है (वैसे पिलाई भी जा रही है उसका ज़िक्र अगले अंक में ) जिसमें मस्जिद से अरोमा होटल को जाने वाली अयारपाटा रोड, डीएसबी कॉलेज से डीआईजी निवास तक आने वाला सूनसान रास्ता, रज़ा क्लब स्कूल के सामने मैदान, थोड़ा और आगे चलकर पालिका मार्केट के पास, चार्टन लॉज की पुलिया से लेकर चूना धारा तक का इलाक़ा और भी कुछ ऐसी जगह हैं जहाँ नशेबाज़ो ने अपने ठिकाने बना रखे हैं,
ये तो रही एक बात,
दूसरी बात ये है कि हमें ये सुनकर बहुत ख़ुशी होती है कि पुलिस ने नशेबाजों पर यहां शिकंजा कसा, वहां शिकंजा कसा, तो हुज़ूर
मेहरबानी करके इस बात को अख़बार में निकलवा दीजिए कि आपकी कार्रवाई से अब सब नशेबाज़ पकड़े गए हैं और हमारे ज़िले में या शहर में नशे का कारोबार नहीं हो रहा है या किसी भी क़िस्म का अवैध नशा शहर में पहुंच नहीं रहा है, हम नशा मुक्त हो चुके हैं, जिस दिन ये ख़बर आ गयी सबसे पहले आज़ाद मंच मिठाई बांटेगा,
तो हुज़ूरे वाला हमें आपकी इस ख़बर का इतंज़ार रहेगा…
आख़िर में,
मा.उच्च न्यायालय (उत्तराखंड)
न्यायाधीश महोदय,
मुख्यमंत्री महोदय (उत्तराखंड )
कुमाऊँ आयुक्त / मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) महोदय, ज़िलाधिकारी नैनीताल महोदय,
पुलिस महानिदेशक महोदय,
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, महोदय,
पुलिस अधीक्षक महोदय,
अपर ज़िलाधिकारी, नैनीताल महोदय,
ज़िले के सभी थानाध्यक्ष महोदय,
सभी चौकियों के चौकी प्रभारी महोदय,
आप सभी क़ाबिल और होनहार, ज़िम्मेदार अधिकारियों से तहे दिल से इल्तेजा है कि नैनीताल के साथ साथ हल्द्वानी में भी बहुत तेज़ी के साथ नशे का कारोबार फल फूल रहा है, जिसमें वनभूलपुरा और लाल डाँठ रोड इलाक़े में नशे का कारोबार धड़ल्ले से चलाया जा रहा है,
जल्द से जल्द उस पर भी शिकंजा कसने की कार्रवाई करने की मेहरबानी करें, जिससे हमारा इलाक़ा, हमारा शहर, हमारा ज़िला, हमारा सूबा, हमारा मुल्क़ नशा मुक्त बन जाएगा,
नशा मुक्त रहेगा हिंदोस्तान,
तभी तो बढ़ेगा हिंदोस्तान…
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 96 (23 जनवरी 2019) :नवीन समाचार व आज़ाद मंच का अब हुआ ऐसा असर कि मिट गया एक ‘पाप’
शुक्रिया: अधिशासी अभियंता जल संस्थान का
साहिबान,
21 जनवरी के अंक में हमने नवीन समाचार के स्तम्भ आज़ाद के तीर में नैनीताल में इतना बड़ा पाप किया किसने
उन्वान के साथ चिड़ियाघर मार्ग कंपाउंड में घरों से निकलने वाली सीवर हाल दिखाया गया था, जिसमें अधिशासी अभियंता जल संस्थान, नैनीताल ने मामले का संज्ञान लेकर तत्काल अधीनस्थों को निर्देशित किया व इस कृत्य के लिये स्थानीय निवासी तेजेन्द्र सिंह व गुरबचन सिंह पर चालानी कार्रवाई की गयी, साथ ही जो लाइन बंद हो चुकी थी लेकिन खुली प्रतीत होती थी, उसको नाले से हटवाया गया, जिससे किसी को अनुचित सन्देश न जाये, हमें अफ़सोस है कि न जाने कब से ये सीवर का पानी झील को दूषित कर रहा होगा और हमारे संज्ञान में अब आया, साथ ही वहां रह रहे लोगों तथा सभासद महोदय से निवेदन है कि आस पास के लोगों में नगर को लेकर जागरूकता फैलाएं, और कहीं भी कुछ अनुचित होता है तो हमें बताएं, ख़ैर, आख़िर में,
अधिशासी अभियंता महोदय,
जल संस्थान, नैनीताल
व कनिष्ठ अभियंता सुयाल जी व उनकी टीम का दिल से आभार व्यक्त करते हैं कि आपने तत्परता दिखाते हुये मामले का निस्तारण किया,
साथ ही आपसे ये भी निवेदन है कि मस्जिद के पास, सूखाताल क्षेत्र में तथा रॉयल होटल कंपाउंड क्षेत्र के साथ साथ अन्य कई क्षेत्रों में सीवर का पानी बह रहा है,
कृपया जल्द से जल्द इन स्थानों पर भी मामले का निस्तारण करने का कष्ट करें…
हमें आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वाश है कि आपका सहयोग निरंतर मिलता रहेगा…
अंक 95 (22 जनवरी 2019) : सरकारी माल ‘हीटर’ में डाल, राष्ट्रहित में विद्युत बचाते हमारे प्रिय सरकारी कार्यालय
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न, वो किसी हीटर बेचने वाली दुकान की तस्वीर नहीं है बल्कि हमारे शहर में मौजूद अलग -अलग सरकारी कार्यालयों की है, सभी लोग जानते होंगे कि ज़्यादातर कार्यालयों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस होने की वजह से एक तरफ़ कर्मचारियों को टाइम पर कार्यालय पहुंचने पर मजबूर किया गया है, वहीँ अनलिमिटेड विद्युत देकर बिजली ख़र्च करने जैसी ज़िम्मेदारी भी उनके नाज़ुक़ कन्धों पर डाली गयी है, पहले होता ये था कि कब आ रहे हैं कब जा रहे हैं, कोई पूछने वाला नहीं था, जब कोई पूछने वाला नहीं था तो कार्यालय में रुकने का सवाल ही नहीं होता था, जब कार्यालय में रुके ही नहीं तो बिजली कैसे ख़र्च होती, अब सरकार ने भी फ़ज़ीहत कर दी है, जहां एक तरफ़ उपस्थिति लगाने को सही टाइम से रोज़ (दो टाइम) ड्यूटी पर जाना पड़ रहा है, वहीँ इतनी सर्दी में हीटर भी जलाने पड़ रहे हैं, अब इसमें हम किसी सरकारी कर्मचारी को दोष क्यों दे भला, या तो उनको पूरे दिन की पूरी ड्यूटी करने मत बुलाइये या फिर बिजली ख़र्च होने की बात मत कहिये, आप भी सोच रहे होंगे कि क्या लफड़ा है, अरे हुज़ूर, लफड़ा कुछ नहीं है हम तो बस यही बताने कि कोशिश कर रहे थे कि अक्कड़ बक्कड़ करके किसी भी सरकारी कार्यालय में चले जाइये, वहां हर कुर्सी के पास एक हीटर चलता हुआ मिलेगा, दरअसल हमारी तरफ़ हीटर जलने को व्यक्ति के मौजूद होने की निशानी माना गया है, (ऋतु अनुसार हीटर, पंखा, कूलर चलता हुआ मिलेगा) हम जब किसी जगह जाते हैं तो इन सब चीज़ों को चलता हुआ देखकर सरकारी सेवक के आने की उम्मीद जगाये रखते हैं… और होता भी वही है हीटर इंतज़ार करता रहता है कि मेरे मालिक साहब सुबह से मुझे जलाकर गये हैं, न जाने कब आएंगे, हीटर पलकें बिछाये राह तकता रहता है और आख़िरकार 5 बजने से कुछ मिनट पहले साहब की एंट्री हो ही जाती है, सुबह से बेवजह तप रहा हीटर साहब को देखकर चैन की साँस लेता है, उसके बाद फिर हीटर और अन्य उपकरण बंद करके सारे कर्मचारी कर्तव्यनिष्ठा से कर्तव्य निभाने को अगले दिन आने के लिये अपने अपने अंगूठों की छाप मशीन के मुंह पर मारकर व्यवस्था को ठेंगा दिखाकर घर चले जाते हैं…
अंक 94 (21 जनवरी 2019) : नैनीताल में इतना बड़ा ‘पाप’ किया किसने ?
साहिबान,
ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न, वो हमारे शहर नैनीताल के सभ्य लोगों के घर से निकली सीवर लाइन की तस्वीर है, ये नज़ारा है होटल महाराजा ज़ू रोड के सामने नाले का जिसमें सीवर लाइन खुली छोड़ी गयी हैं, ये मंज़र देखकर हमारे पैरों से तो ज़मीन ही खिसक ली थी, वो तो बराबर वाले भाईसाब ने संभाला बाई गॉड, सन 2019 चल रहा है और वो कौन महान लोग हैं जो सन 19 जैसी हरकते कर रहे हैं पूरे 2000 साल का पिछड़ापन, अरे जनाब यहां हमारा देश स्वच्छता के कीर्तिमान स्थापित करने को प्रयासरत है और आप हैं कि अपनी घटिया हरकतों की वजह से देश के पैरों में बेड़ियाँ बांध रहे हैं, शर्म आनी चाहिए आपको और आपसे ज़्यादा शर्म उनको आनी चाहिये जो इस इलाक़े में रहते हैं और इस तरह के नज़ारे देखकर आँखें बंद कर लेते हैं, हालांकि ये हमारे घर का मामला है इसे दबा देना चाहिये ये सोचकर शायद वहां रह रहे लोगों ने मामला दबा दिया, लेकिन जनाब एक बार तो झील के बारे में सोचा होता जिसमें ये गंदगी समां रही है, चलो झील के स्तर पर सोच नहीं भी जाती तो इतना सोचा होता कि जिस पानी को हम पीते हैं ये उसी में जाकर मिलने वाला है, ख़ैर,
अभी भी मौक़ा है आपके आस पास जितनी भी सीवर खुली बह रही हैं, हमें बताइये, हम उन्हें जागरूक करेंगे कि झील संरक्षण किस चिड़िया का नाम है…
आख़िर में,
मा.उच्च न्यायालय (उत्तराखंड)
न्यायाधीश महोदय,
स्वास्थ्य मंत्रालय (केंद्र/राज्य)
स्वास्थ्य मंत्री (केंद्र/राज्य ) महोदय
कुमाऊँ आयुक्त महोदय, ज़िलाधिकारी नैनीताल महोदय,
अपर ज़िलाधिकारी, नैनीताल महोदय,
अधिशासी अधिकारी महोदय
जल संस्थान, नैनीताल,
स्वास्थ्य अधिकारी महोदय
नगर पालिका परिषद् नैनीताल
से हमारी इल्तेजा है कि हमारे समाज के ऐसे महान लोगों ख़िलाफ़ कोई ऐसी दंडात्मक कार्रवाई करें जिससे इन लोगों के साथ साथ बाक़ी लोगों को सबक़ मिल जाये और वे ज़िंदगी में दोबारा ऐसी हरकत न कर पाएं
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 93 (20 जनवरी 2019) :आज जानें आयुष्मान भारत योजना से जुड़ने की पूरी जानकारी
साहिबान, प्रधानमंत्री आयुष्मन योजना का लाभ उठाने के लिये सबसे पहले आपको अपना राशन कार्ड (सफ़ेद / पीला ) ज़िलापूर्ति कार्यालय ले जाना पड़ेगा याद रहे ज़िलापूर्ति कार्यालय जाते समय अपने साथ ये डाक्यूमेंट्स ज़रुर रखें जैसे :- जिनके नाम पर राशन कार्ड है, उनके आधार कार्ड की कॉपी , उनकी या उनके पति की पासबुक की कॉपी, प्रत्येक सदस्य की आधार कार्ड की कॉपी ले जाना अनिवार्य है, इनमें से एक भी चीज़ आपके पास नहीं हुई तो आपका राशन कार्ड पोर्टल पर अपडेट नहीं हो पाएगा और योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा, समस्त विवरण अपडेट होने के बाद आपको 12 डिज़िट वाला नया नंबर मिल जाएगा, कुछ दिन पश्चात् राशन कार्ड सीएससी वालों को आपके राशन कार्ड की डिटेल्स शो करने लगेंगी, फिर सीएससी पर जाकर प्रत्येक सदस्य को ले जाकर उनके हाथों के प्रिंट्स लगवाने होंगे, इसके लिये भी आधार कार्ड साथ रखना आवश्यक होगा… प्रत्येक कार्ड का शुल्क ₹ 30 सरकार द्वारा निर्धारित है, नैनीताल में दो जगह कार्ड बनाये जा रहे हैं तल्लीताल में हिमालय होटल के पास ममता कुमैयां सीएससी में और मल्लीताल में मो. शाह फ़ैसल सीएससी द्वारा बीडी पांडे महिला चिकित्सालय परिसर में सुबह 10 बजे से दिन में 03 बजे तक व उनके कार्यालय में सुबह 10 बजे से संभव होने तक बनाये जा रहे हैं… महोदय, इन सब कार्यों को करने के पश्चात् ही आप आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना का लाभ उठा सकेंगे.. ( नोट :- समस्त गणमान्य लोगों से अनुरोध है कृपया इस सन्देश को लेकर किसी राजनीति से प्रेरित अथवा व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने जैसी किसी ग़लतफ़हमी के शिकार न हों, रोज़ रोज़ परेशान होने वाली जनता को एक सही जानकारी देने के उद्देश्य से इसे लिखा गया है )
आज़ाद मंच नैनीताल व नवीन समाचार द्वारा जनहित में प्रचारित व प्रसारित 🙏🙏🙏🙏🙏
अंक 92 (19 जनवरी 2019) : नशे की गिरफ़्त में युवा, नींद की गिरफ़्त में पुलिस, बड़े….
साहिबान, आजकल हमारे ज़िले में आये दिन खबरें सुनने को मिल रही हैं कि कप्तान साहब के निर्देशन में वहां छापेमारी हुई, यहाँ नशे के कारोबारी पकड़े गये, तो जनाब ग़ालिब साहब का कहना था दिल को बहलाने को ख़याल अच्छा है, और हम भी उनके ख़यालातों से इत्तेफ़ाक़ रखते हैं, हमारा मकसद यहां ये कतई नहीं है कि पुलिस अच्छा काम नहीं कर रही, बेशक़ पुलिस क़ाबिले तारीफ़ काम कर रही है लेकिन हमारी नज़र में ये महज़ खानापूर्ति है, वो इसलिये क्योंकि जिन लोगों को पकड़ा जा रहा है, वो महज़ पियादे हैं, शतरंज का असली बादशाह अभी आपकी पहुंच से दूर है, अब ये दूरी क्यों है, हम ये नहीं पचा पा रहे हैं, यानि जिस दरख़्त को जड़ से काटना चाहिये, आप उसकी पत्तियां काटकर सारे शहर में तीरंदाज़ बने घूम रहे हैं, जबकि आपके ख़ुफ़िया विभाग को इसकी जानकारी अच्छी तरह होगी कि कौन पत्तियां हैं और जड़ें कौन कौन है, और ये जड़ें कहाँ कहाँ फैली हुई हैं, सिर्फ़ नैनीताल की बात करें तो आज यहां का युवा इतनी बुरी तरह से नशे की गिरफ्त में फंसा है कुछ कहा नहीं जा सकता, नशे का आदी बनना एक दिन का काम नहीं है उसके लिये लगातार कई दिनों की कड़ी नशेबाज़ी पहली शर्त है, जरूर इसमें घर के बड़ों की भी गलती है। हम पैसा कमाने में इतने मसरूफ़ हो गए कि हमारा बच्चा कहाँ जा रहा है, किससे मिल रहा है, उसके दोस्त कौन हैं, जो पॉकिट मनी उसे दी जाती है उसने कहाँ खर्च की कुछ नहीं करते, क्या माँ-बाप का इतना ही फ़र्ज़ है कि बच्चे की जेब नोटों से भर दी जाये, सही है आपने नोटों से बच्चे की जेब भर दी, ठीक है, लेकिन क्या कभी सोचा है बच्चे की नोटों से भरी जेब जेब नहीं बल्कि गोलियों से भरी बंदूक है, जिससे या तो वो दूसरे लोगों को मारेगा यानि दूसरे लोगों पर फालतू पैसा उड़ाएगा या ख़ुद को ही निशाना बना लेगा, ज़्यादातर नौजवान खुद को ही निशाना बनाते हैं। इससे पहले अभिभावकों ने भी अपनी थोड़ी ज़िम्मेदारी समझनी होगी साथ ही पुलिस ने भी नशे की सप्लाई को ही जड़ से खत्म करना होगा, जब डिमांड ही नहीं आएगी तो सप्लाई ही कहाँ से होगी और जब सप्लाई ही नहीं होगी तो सप्लायर्स कहाँ से पैदा होंगे? नैनीताल के साथ साथ हल्द्वानी का इससे ज़्यादा बुरा हाल है, ख़ुफ़िया खबरों के मुताबिक़ लाल डाँठ एरिया में नशे का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, पुलिस प्रशासन को मामले की जानकारी होने के बावजूद वहां जाने से पुलिस कतरा रही है, अब इस कतराने की, क्या वजह है ये तो हम नहीं समझ पा रहे, क्योंकि पढ़े लिखे हम होते तो ज़रुर इस बात को मिली भगत या पुलिस की शह दी जा रही है जैसी कोई बात कहते, ख़ैर,
आख़िर में
कुमाऊँ आयुक्त महोदय,
ज़िलाधिकारी महोदय,
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय
पुलिस अधीक्षक महोदय,
समस्त थानाध्यक्ष महोदय,
तथा सम्बंधित अधिकारियों से इल्तेजा है कि नशे की गिरफ़्त में आये युवाओं को इससे दूर ले जाएँ जितने भी बड़े सप्लाई करने वाले हैं उन सबके ख़िलाफ़ एक अभियान चलायें तथा दूध बेचने वाले और कबाड़ियों पर ख़ास नज़र रखें क्योंकि इनके ज़रिए भी ये कारोबार यहां फल फूल रहा है, बाक़ी अभिभावकों से भी हमारी हाथ जोड़कर गुज़ारिश है कि अपने बच्चों को अपनापन दें प्यार दें स्नेह दें लेकिन पैसा ज़रूरत के मुताबिक़ ही दें और हिसाब लेने से चूंके नहीं इससे बच्चे में डर बना रहेगा और वो ग़लत राह पर चलने से काफी हद तक बच सकता है…
अंक 91 (18 जनवरी 2019) : कट्टों में भरे हमारे शाणेपन के लड्डू…
साहिबान,
ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न वो दरअसल तस्वीर नहीं है, परिचय पत्र है, परिचय पत्र है, हमारी चालाकी का, हमारे शाणेपन का, लेकिन अगर हम ग़लतफ़हमी की ज़द से बाहर आकर देखते हैं तो, हमें ये हमारी अव्वल दर्जे की बेवकूफ़ी लगेगी,
अपने घर में कुछ काम होता है और उसका बचा हुआ मलबा हम ये सोचकर किसी ऐसी जगह रख आते हैं, कि हम पर शक़ नहीं होगा और हाथ झाड़ते हुये ख़ुशी ख़ुशी चल देते हैं अपने घर,
अरे जनाब, ऐसा क्यों करते हैं आप?
जहां आपने मलबे के कट्टे रखे हैं, वो भी तो आपका ही आंगन है, अपने आंगन को ऐसे गंदगी से पाट दिया, कुछ तो शर्म आनी चाहिये, जब इतना पैसा आपने खर्च किया ही है तो थोड़े से पैसे और सही, कम से कम हमारे चौराहों, सडकों आदि के किनारों की ख़ूबसूरती बरक़रार तो रहेगी,
किसी और के ख़ातिर न सही अपने नगर के ख़ातिर ही इन मलबे के लड्डुओं सॉरी मलबे के कट्टों को हटा लीजियेगा,
कोई देखे न देखे, लेकिन नीली छतरी वाला ज़रुर देखता है, कोई जाने, न जाने लेकिन ऊपर वाला सब जानता है कि जो मलबा सड़क पर पड़ा है वो किसका है… ख़ैर,
हम ये नहीं कहना चाह रहे कि जो कट्टे रखे गये हैं वो आपने जान बूझकर रखे होंगे, हो सकता है जल्दबाज़ी में आपने रखवा दिए हों, और भूल गए हों तो इसलिये हमारी आपसे इल्तेजा है कि जल्द से जल्द उक्त तथाकथित मलबे के कट्टों को कहीं उचित स्थान पर फेंकवा दीजियेगा, ताकी हम सबकी सरोवर नगरी अपने मन पर कोई बोझ महसूस न करे… आख़िर में,
झील विकास प्राधिकरण,
लोनिवि नैनीताल से हमारी इल्तेजा है कि नैनीताल में जगह- जगह लोग अपने घरों से निकालकर मलबे के कट्टे जहाँ – तहाँ रखकर चले जाते हैं, उन लोगों का उक्त रवैया नगर हित में नहीं होता, आपसे ये गुज़ारिश है कि ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ कोई क़ानून बनाया जाये तथा उस क़ानून का सख्ती से पालन भी करवाया जाये, तभी बनेगा हमारा साफ़ नैनीताल स्वच्छ नैनीताल
अंक 90 (17 जनवरी 2019) : फिर हुआ असर : नवीन समाचार व आज़ाद मंच का ! धन्यवाद, मलबे के मालिक़ का !!
साहिबान,
नवीन समाचार के स्तम्भ आज़ाद के तीर में हमने मलबे के ढेर पर बैठा शमशेर उन्वान के साथ ये बताने की कोशिश की थी कि नैनीताल में किस तरह से लोग अपना मलबा कूड़ा आदि सब इकठ्ठा करके रख लेते हैं और बारिश के इंतज़ार में बैठ जाते हैं फिर बारिश होते ही अपने भरे हुए कट्टों को नाले में ख़ाली कर देते हैं, ख़ैर,
हमारी इल्तेजा का असर कहीं तो हुआ जो सारे के सारे कट्टे रातों रात हटा दिये गये, उसके लिये आपका हार्दिक धन्यवाद जो इतनी जल्दी हटा दिये, लेकिन दूसरी तरफ़ हमने शासन प्रशासन का ध्यान उन चाय वालों की तरफ भी करना चाहा था जिन्होंने अपना पैसा कमाने के चक्कर में सारी सड़क घेरनी है, जो गंदगी होती है वो नालों में फेंकनी है और उसके बाद चतुरता दिखाते हुए उस कूड़े को नाले में ही जला देना है, सुनने में आया है कि नगर पालिका द्वारा उनका चालान काटा गया लेकिन उन्होंने पालिका का चालान लेने से भी इंकार कर दिया, वाह महान हैं मेरे देश वासी…
यहां हम ये साफ़ कर देना चाहते हैं कि हम किसी ग़रीब आदि के ख़िलाफ़ नहीं हैं, हमारा मक़सद नैनीताल नगर की ख़ूबसूरती को बचाना है, अनुचित साथ समझौता नहीं किया जाएगा,
फिर चाहे वो रंक हो या राजकुमार…
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 88 (14 जनवरी 2019) : एक बेज़ुबान की मौत, कोई नहीं बोलेगा, क्योंकि सब बेजुबान ही तो हैं…
ज़हरीली पॉलिथीन बनी मौत का कारण
किसी को नहीं मिलेगी सज़ा
क्यूंकि बेज़ुबान जानवर था वो, और इससे अधिक ….
साहिबान, हमारे शहर नैनीताल में एक बेज़ुबान जानवर की मौत हो गयी, चश्मदीदों ने बताया कि वो कूड़ेदान में से निकालकर कूड़ा खा रहा था, उसके मुंह में खाने से भरी पॉलिथीन आ गयी, उसने पॉलिथीन समेत खाना चबाना शुरू कर दिया, देखते ही देखते वो बेहोश होकर गिर पड़ा, उसके मुंह से झाग निकलने लगे, उस बेज़ुबान भरी भरकम बैल के ज़मीन पर गिरते ही उसे देखने लोगों का जमावड़ा लग गया, इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, बैल ने झटपटाकर आख़िरकार दम तोड़ दिया, उसके दम तोड़ते ही लोग अपने अपने कामों में दोबारा मशगूल हो गये, लेकिन हमारा काम उसके बाद शुरू होता है, हम ये पूछना चाहते हैं कि सबसे पहले तो ये बेचारे बेज़ुबान जानवरों को शहर की सड़कों में किसने छोड़ रखा है? जब तक आपके मतलब का था तब तक लाड प्यार से रखा जब किसी काम का नहीं रहा निकाल दिया घर से बेहद शर्म की बात है, दूसरा जब सड़क पर आ ही गया तो कं नहीं उसको उचित स्थान पर रखा गया जहाँ उसे खाने के लिए साफ़ सुथरा चारा मिलता, उसे कूड़ा खाने को मजबूर नहीं होना पड़ता, अफ़सोस कत है, तीसरा हमारे अंदर अभी भी पर्यावरण या जुर्माने का डर नहीं है हम अभी भी पॉलिथीन का प्रयोग कर रहे हैं, लानत है ऐसी ज़िंदगी पर जो अपनी सत के लिये पूरे आभामंडल को दांव पर लगा दे, ख़ैर, कुल मिलाकर किसी का कुछ नहीं बिगड़ा, उस बेज़ुबान की मौत पर कोई इंसान होता तो मानवता की दुहाई दे देकर न जाने कितने संगठन एक आवाज़ में सुर मिलाते, सवाल ये है कि उस बेज़ुबान के लिये कौन आगे आये, उसके परिवार वाले वो भी सब बेज़ुबान जानवर जो ठेरे, ऐसे में क्या होगा बस यूँही काम निकाल निकाल कर जानवरों को सडकों पर छोड़ते रहिये वो ज़हरीला खाना खाकर यूँही बेमौत मरते रहेंगे, कोई नहीं आएगा आपके ऊपर क्रूरता का आरोप लगाने क्योंकि सब यहां बेज़ुबान ही तो हैं…
आख़िर में,
मा.उच्च न्यायालय
न्यायाधीश महोदय,
कुमाऊँ आयुक्त महोदय, ज़िलाधिकारी महोदय,
अपर ज़िलाधिकारी महोदय, अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी महोदय
समस्त सभासद महोदय / महोदया
नगर पालिका परिषद् नैनीताल से हमारा अनुरोध है कि कृपया बेज़ुबान जानवरों को सड़क में छोड़ने पर पूरी तरह से पाबन्दी लगाएं तथा इसके बावजूद भी कोई जानवर सड़क पर आ जाता है तो उसके लिये कोई उचित व्यवस्था करें जहां उन्हें खाने के लिए साफ सुथरा चारा मिले,
ज़रा सोचिये, उन बेचारों के लिये इंसान नहीं सोचेगा तो कौन सोचेगा क्यूंकि भगवान ने इंसान को सोचने और करने में सक्षम बनाया है,
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 87 (13 जनवरी 2019) : इन्हें है बारिश का सबसे ज्यादा इंतजार, पर सबसे पहले इनका इलाज जरूरी
मलबे के ढेर पर बैठा शमशेर
साहिबान,
जनवरी का महीना आधा होने को है लेकिन न बर्फ़ गिर रही है न बारिश हो रही है, कोई कह रहा था सब ग्लोबल वार्मिंग का असर है, हुज़ूर ये सुनकर हमें तो बहुत टेंशन हो गयी, न न
आप भी ग़च्चा खा गए न,
जनाब …
हम कोई पर्यावरण प्रेमी थोड़ी न हूँ, हम तो बस अपना आवरण प्रेमी हूँ, बर्फ़ गिरे न गिरे अपनी बला से, बस एक ज़ोरदार बारिश हो जाये, बस ऊपर वाले से फिर कुछ और नहीं मांगना,
क्या कहा, ये भी तो हमारा पर्यावरण प्रेम है,
अरे नहीं हुज़ूरे वाला, ऐसा कुछ नहीं है, बारिश की हमको इसलिए याद आ रही है क्योंकि एक स्पेशल काम है उससे,
आप भी चकरा जाएंगे सुनकर,
जी हाँ, बिल्कुल पॉइंट की बात समझे हैं आप जनाब, हमारा प्यारा नाला ज़िंदाबाद
बस एक ज़ोरदार बारिश के आने का इंतज़ार है, सारे मलबे के कट्टे धड़ाधड़ नाले को सुपुर्द कर दिये जाएंगे, आजकल ये चिड़ीमार मौसम विभाग भी तो कोई ठोस ख़बर नहीं दे रहा, ऊपर से हमारा
सब्र का बांध टूटा जा रहा है,
ऐसे ही रहा न तो देख लेना झील में फेंक आएंगे, सब का सब,
न जाने कब बारिश होगी और
न जाने हमारे जैसे सेल्फिशप्रेमी लोग, जो कूड़ा या मिट्टी- मलबे के कट्टे लिये बैठे हैं, उन्हें इससे कब राहत मिलेगी, ऊपर वाला भी न हम जैसे ग़रीबों की नहीं सुनता, अगर इस बार झमाझम बारिश कर दी न, बाई गॉड,
हम खुलके दान पुण्य करूंगा….
और हम ये कहूंगा आई लाइक इट ख़ैर,
आख़िर में,
मा.उच्च न्यायालय
न्यायाधीश महोदय,
कुमाऊँ आयुक्त महोदय, ज़िलाधिकारी महोदय,
अपर ज़िलाधिकारी महोदय, अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी महोदय
सम्बंधित क्षेत्रीय सभासद महोदय
नगर पालिका परिषद् नैनीताल से हमारा अनुरोध है कि दयाल रेडियोज़ के पीछे वाली सड़क पर निहायत ही गंदगी फैल रही है,
जहां एक तरफ़ चाय वालों ने नालों को कूड़ादान बना दिया है वहीँ कुछ लोगों ने आम रास्ते में मलबे के कट्टे निकालकर किसी ख़ास मक़सद से रख रहे हैं साथ ही उस रास्ते से स्थानीय लोगों को आने जाने में बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, महोदय
नगर हित में जितना जल्दी हो सके कोई ठोस क़दम उठाने
की इनायत करें, इससे पहले मौक़ा परस्तों को सब मामला ठिकाने लगाने का वक़्त मिले, शिकंजा कसने की कवायद उससे पहले हो तो ज़माने के सामने एक नज़ीर पेश होगी…
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 86 (12 जनवरी 2019) : ऐसी वफादारी देखी नहीं कहीं…
आख़िर कब मिलेगी वफ़ादार जानवरों से निजात?
प्रशासन को कब तक रास आएगी इनकी वफ़ादारी?
आम आदमी को कब तक चुकानी पड़ेगी इस वफ़ा की क़ीमत ?
जनाब, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न, वो किसी गांव या कस्बे की नहीं है, बलि मा.उच्च न्यायालय, उत्तराखंड जिस जगह अपनी विशेष खूबसूरती बिखेर रहा है, उसी शहर नैनीताल का ये नज़ारा है, यहां की एक ख़ास बात और है कि यहां आप जब भी पहुंचेंगे आपके स्वागत के लिये 10-12 वफ़ादार आवारा कुत्ते ज़रूर तैनात होंगे, जो हर गली, मोहल्लों में अपना झुण्ड बनाये मिलेंगे, ये हमारी प्यारी नगर पालिका की तरफ से वफ़ादारी की विशेष सुविधा दी गयी है, यदि इत्तेफ़ाक़ से आपका रात 10 बजे के बाद और सुबह 7 बजे से पहले नैनीताल में प्रवेश होता है, तब तो आपको कुछ फ़िक्र करने की ज़रूरत नहीं होगी, 10-12 मेहमानवाज़ों का ख़्वाब फिर आप भूल जाइये क्योंकि उस वक्त पूरी की पूरी बारात आपके स्वागत में खड़ी होगी और निःशुल्क सेवा देते हुए आपको होटल, कमरे या घर तक छोड़ा जाएगा, हाँ उसमें रनिंग से आपकी साँस ज़रूर फूल सकती है तो घबराइयेगा नहीं बल्कि शुक्र मनाइयेगा कि आप सही सलामत अपनी मंज़िल तक पहुंच गये, क्या कहा भेदभाव, नहीं, नहीं जनाब, जानवर कहाँ भेदभाव करते हैं वो तो इंसानों का महंगा शौक़ है, और ये वफ़ादार जानवर पर्यटक हो या स्थानीय नागरिक किसी में फ़र्क महसूस नहीं करते, कुछ समय पहले की बात बताऊं, एक पर्यटक की मासूम बच्ची की मौत का कारण यही वफ़ादार जानवर बने थे, जिसमें वो बच्ची तल्लीताल स्थित लकड़ी टाल के पास गिर गयी थी, गंभीर चोटें आने के बाद उसकी मौत हो गयी थी, अफ़सोस… लेकिन प्रशासन ने उस घटना से भी सबक़ नहीं लिया क्यूँकि उनका इरादा अभी शायद कुत्तों को लेकर विश्व रिकॉर्ड बनाने का है, ख़ैर, अभी एक कुछ दिन पहले एक स्थानीय महिला को मॉर्निंग वॉक के दौरान सुबह 7 बजे के आसपास किसी आवारा लेकिन वफ़ादार कुत्ते ने वफ़ादारी निभाते हुये काट लिया था, जिनको अस्पताल में तुरंत ले जाया गया तथा हर सम्भव उपचार किया गया, साहब, बात यहीं खत्म नहीं हो जाती, उस दिन उक्त महिला को काटा था, कल तथाकथित वफ़ादार जानवर द्वारा किसको काट लिया जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता, पालिका प्रशासन ने माल रोड लाइब्रेरी के सामने कुत्तों से बचने के उपाय सम्बन्धी एक बड़ा सा होर्डिंग लगाक़र अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है, और हाथ झाड़े भी क्यों न? स्थानीय लोगों या पर्यटकों को कुत्ते काटते हैं तो काटें, उनकी बला से, उनपर कोई असर नहीं पड़ता, ख़ैर,
आख़िर में,
मा.उच्च न्यायालय
न्यायाधीश महोदय,
कुमाऊँ आयुक्त महोदय, ज़िलाधिकारी महोदय,
अपर ज़िलाधिकारी महोदय, अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी महोदय
समस्त सभासद महोदय / महोदया
नगर पालिका परिषद् नैनीताल से हमारा अनुरोध है कृपया इन वफ़ादार
आवारा कुत्तों, बंदरों और आवारा पशुओं का कुछ ठोस उपाय करें जिससे शहरी बाशिंदों के साथ- साथ बाहरी मेहमान भी नैनीताल की सरज़मीं पर बेख़ौफ़ होकर घूम सके, उनका स्वागत इंसानों के द्वारा हो न कि उन्हें शिकार बनाने की घात लगाये
बैठे वफ़ादार कुत्तों, बंदरों या आवारा सांडों द्वारा स्वागत हो
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
अंक 85 (9 जनवरी 2019) : जर्जर इमारत की दीवार ढही, प्रशासन गहरी नींद में सोया, हादसे के बाद आएगा होश ! कई परिवारों की जान को ख़तरा
साहिबान,
ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न,
वो दरअसल तस्वीर नहीं है,
ये दास्तान है उनकी
जो इस जर्जर हो चुकी इमारत
में रहने को मजबूर हैं,
ये दास्तान है उनकी जो इस गली से आने जाने को मजबूर हैं क्यूंकि उनका घर ही उस गली में है ..और सबसे बड़ी और अफ़सोसनाक दास्तान है उनकी जो बलियानाला में भू- स्खलन के बाद नींद से जागते हैं और नियम उपनियमों का मोटा रजिस्टर हाथ में लिये घूमते फ़िरते हैं, लेकिन हादसे से पहले उन्हें मीठी नींद बहुत आती है,
इसमें उनकी कोई ग़लती नहीं,
हो सकता है, साहब लोग, पिछले जनम में घोड़ों के कारोबारी रहे हों, ख़ैर
इतनी देर तस्वीर का जायज़ा लेने के बाद आप समझ ही गए होंगे कि ये कौन सी गली की बात हो रही है, जी जनाब…
तुक्का बिल्कुल निशाने पर लगा है, हाँ …ये वही मल्लीताल बैंक
ऑफ़ बड़ौदा के पीछे वाली गली का मंज़र है, इस इमारत के हाथ में ऐसा खंजर है, जो कभी भी किसी के भी लग सकता है, और अगर हादसा रात में हुआ तो परिवार वालों को बहुत नुकसान हो सकता है….वैसे तो रह रहकर इसकी दीवार इमारत का
थोड़ा -थोड़ा साथ रोज़ छोड़ रही है, लेकिन मंगलवार की रात में ज़्यादा बड़ा हिस्सा इमारत से खफ़ा होकर साथ छोड़ गया..
फ़िलहाल अभी ये महज़ इशारा है..जिसे समझना लाज़मी है, आख़िर में,
कुमाऊँ आयुक्त महोदय,
ज़िलाधिकारी महोदय,
विधायक महोदय,
अपर ज़िलाधिकारी महोदय,
अध्यक्ष / अधिशासी अधिकारी
महोदय
सम्बंधित क्षेत्रीय सभासद महोदय
नगर पालिका परिषद, नैनीताल
और जितने भी सम्बंधित आला अधिकारी हैं उन सभी से इल्तेजा है कि किसी भी अनहोनी होने से पहले उक्त इमारत को ख़ाली करवाकर उसमें रह रहे परिवार वालों को सही और महफूज़ जगह पर ले जाने की मेहरबानी करें और जर्जर इमारत का जो सही निबटारा हो सके उस पर कोई ठोस कार्रवाई करने की मेहरबानी करें…
अंक 84 (8 जनवरी 2019) : प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र : यहां हर सवाल का जवाब बस एक-‘यह दवाई तो नहीं है हमारे पास…’
साहिबान, एक दिन की बात है… अब ये मत पूछियेगा कौन से दिन की, ये उस दिन की बात है, जिस दिन हमारी तबियत ख़राब हो गयी थी, घरवालों की लाख डांट फटकार खाने के बाद थोड़ा जोश आया कि हम भी अस्पताल जा सकते हैं, अपना इलाज करा सकते हैं, हिम्मत करके शक्तिमान बने और पहुंच गये, अपने इकलौते फेवरेट बीडी पांडे अस्पताल में जहां पहुंचकर सबसे पहले पर्चा बनवाने के लिये किसी भाईसाब ने बड़ी घूर कर लाइन की तरफ़ इशारा कर दिया, लाइन में लगे- लगे जब नंबर आया तो खिड़की के अंदर से उबले हुये चावल खाकर कोई बोला “21 रूपये” कानों के परदे को चीरती हुई, उसकी आवाज़ सीधा फटी हुई जेब पर लगी, किसी बेरोज़गार के लिये, तो ये दुनिया का सबसे महंगा सरकारी पर्चा घोषित होगा, बाई गॉड, (कहां कितने का पर्चा है उसकी चर्चा चाय पर ) फ़िलहाल, 21 रूपये देकर तो बेहोश होने से इंच -इंच बचे हम, फिर जैसे- तैसे हिम्मत की डॉक्टर साहब के पास जाने की, वहां जाकर देखा गजब का हाल, ऐसा नज़ारा, जैसे शहद पर मधुमक्खियां लगी हों, चारों तरफ़ से डॉक्टर साहब को मरीज़ों ने घेर रखा था, बीच- बीच में कुछ रसूख वाले लोग आते, अपने मरीज़ को दिखाते और हम ऐसे ही बैठे रह जाते, आख़िरकार नंबर आ ही गया, डॉक्टर साहब ने बिना पूछे ही आला लगाकर, सब जान लिया कि क्या परेशानी है, बरख़ुरदार को और लिख दी तीन -चार टाइप की दवाइयां, हम ख़ुश होकर उठे और आगे बढ़े, और पहुंचे जन औषधि केंद्र पर ख़ुशी -ख़ुशी अंदर पर्चा दिया और आधी तबियत ठीक होती महसूस हुई, फिर जितनी ख़ुशी से हमने अंदर पर्चा थमाया था, उससे कहीं अधिक मेगा हर्ट्ज़ वाली ख़ुशी से वो भी गुर्राई हुई आवाज़ के साथ पर्चा बाहर आ गया नहीं भैया, ये दवाइयां नहीं है हमारे पास, आप बाज़ार से ले लेना इतना सुनकर हम ख्यालों में खो गये और सोचने लगे कि जो लोग अंदर बैठाये जाते हैं, उनको शायद इंटरव्यू के दौरान ही ये ताक़ीद कर दी जाती होगी, कि आपको काम कुछ नहीं करना है, बस जो भी पर्चा आये उसे कम से कम 5 मिनट लेकर इधर- उधर टहलना है, एक- दो डिब्बे उठाकर देखने है, उसके बाद ही फार्मासिस्ट कम अदाकार लोग मरीज़ से मना करते हैं ताकी मरीज़ को भी लगे हाँ, दवाई ख़त्म हो गयी होगी, ख़ैर, हमने जाते- जाते पूछ भी लिया कि अब ये दवाई, कहां से लें और उस भले मानस ने बता भी दिया कि फलाना की दुकान में सब मिल जाएंगी, हमने उसकी तरफ़ भी वही शातिर मुस्कराहट बिखेरी जो उसने पर्चा वापस करते वक़्त हम पर बिखेरी थी हिसाब बराबर किया और चल दिये गुलाबी नोट बिखेरने बाज़ार की दुकान की तरफ़… आख़िर में, प्रधानमंत्री महोदय, मुख्यमंत्री महोदय, ज़िलाधिकारी महोदय, स्वास्थ्य मंत्री महोदय, मुख्य चिकित्साधिकारी महोदय, और बाक़ी सब ज़िम्मेदार अफ़सरों से ये इल्तेजा है कि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र बना तो दिए हैं ये बेहद सराहनीय पहल है लेकिन ग़ुब्बारे में ख़ाली हवा भरने से ग़ुब्बारा उड़ता नहीं है उसके लिये गैस की ज़रूरत होती है ठीक उसी तरह जैसे दवाख़ाना दवाई से होता है ख़ाली नाम से नहीं, मेहरबानी करके भारत के सभी औषधि केंद्रों में दवाई भी रखें तभी बनेगा हमारा स्वस्थ भारत तंदुुरुस्त भारत…
अंक 83 (7 जनवरी 2019) : मैं ऐतिहासिक डीएसए मैदान बोल रहा हूँ
साहिबान, आपका नैनीताल में स्वागत है, आप यहां बेफ़िक्र होकर आइये, आपकी गाड़ियों को खड़ा करने के लिये मेरे पास बहुत बड़ा मैदान है, आप अगर पुलिस प्रशासन की तरफ़ से आएंगे तब तो आप अपनी गाड़ी सीधा मेरे सीने पर खड़ी कर देना, मुझे या मेरे चाहने वालों में से किसी को भी कोई तक़लीफ़ नहीं होगी, अगर कहीं कोई इमारत बन रही हो उसका बचा हुआ कूड़ा वगैरह कहीं फेंकना हो तो परेशान मत होना, मेरा दिल बहुत बड़ा है, मैं आपका सम्मान करता रहूंगा और आप सीधा सारी गंदगी मेरे मुंह पर ही फेंक जाना, मैं तब भी मुस्कुराता रहूंगा, किसीका इतिहास क्या है उससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, वर्तमान से ही उसके अतीत के अंदाज़े लगाये जाते हैं और ये बोला जाता है कि सब कर्मों का फल है, मैंने कर्म ही ऐसे किये होंगे जो आज मेरे पास यहां आने वाले लोगों के लिये न कोई ठीक ठाक शौचालय है, न बाथरूम, न ठहरने के लिये माक़ूल इंतज़ाम, तो आपकी क्या ग़लती है इसमें अगर आप मैदान के किसी किनारे पर बैठ कर या खड़े होकर गंदगी फैलाते हैं, आज जब भी मैं शाम को टहलते हुये अपने चारों ओर का चक्कर लगाता हूँ तो टूट-फूट और बड़ी बड़ी झाड़ियों, कूड़ा करकट न जाने क्या क्या देखकर मेरे होश उड़ जाते हैं, ख़ैर, अभी चलता हूँ, मेरे प्रेमियों के आने का वक़्त हो गया है… क्या कहा ? खेल… आप भी अच्छा मज़ाक़ कर लेते हैं…
अंक 82 (6 जनवरी 2019) : नवीन समाचार और आज़ाद मंच का लगातार चौथे दिन भी हुआ असर , शुक्रिया जिला प्रशासन का…
साहिबान, हमने नवीन समाचार के स्तम्भ आज़ाद के तीर में 08 दिसंबर के अंक में सर पर लटकी तलवार…. उन्वान के साथ अपनी बात रखी थी जिसमें तहसील परिसर नैनीताल में सर पर लटकी तलवार जैसी टीन की चादर के बारे में बताया गया था, जिससे कभी भी हादसा हो सकता था, जिस पर कार्रवाई करते हुए एडीएम हरबीर सिंह के निर्देशन में तहसील परिसरकर्मियों द्वारा उक्त घातक टीन को हटा दिया गया, जिससे कोई भी अप्रिय घटना होने से बचा जा सका, इस नेक क़दम और अच्छी कार्रवाई के लिये हम ज़िलाधिकारी महोदय, अपर ज़िलाधिकारी महोदय और समस्त नैनीताल कलेक्ट्रेट प्रशासन का तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं और उम्मीद करते हैं आने वाले वक़्त में भी सामाजिक हित में आपका साथ यूँ ही हमेशा मिलता रहेगा…
( नोट :- हालांकि हम ये भी जानते हैं कि सरकारी विभागों का प्रथम कर्तव्य है कि वे जन हित में कार्य करें, फिर भी अगर हमारे शुक्रिया अदा करने से समाज का कुछ भला होता है तो हमें शुक्रिया अदा करने में और ख़ुशी मिलेगी )
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है ..
अंक 81 (5 जनवरी 2019) : नवीन समाचार और आज़ाद मंच का लगातार तीसरे दिन भी असर, शुक्रिया : सिंचाई खंड नैनीताल का
साहिबान,
हमने नवीन समाचार के स्तम्भ आज़ाद के तीर में 20 दिसंबर अंक में तारीफ़ करें क्या इनकी…. उन्वान के साथ अपनी बात रखी थी जिसमें नैनीताल शहर के जितने भी नाले हैं उनमें मिट्टी, गंदगी, कूड़ा करकट, पटा पड़ा बताया गया था साथ ही नालों पर झाड़ियां उग आयी हैं जिससे किसी जंगल का अहसास होता है, ऐसे नज़ारे के बारे में बताया गया था, जिस पर कार्रवाई करते हुए श्री उनियाल अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड नैनीताल ने कनिष्ठ अभियंता नीरज तिवारी को निर्देश दिये जिनके नेतृत्व में नालों की सफ़ाई का काम शुरू कर दिया गया है,
श्री तिवारी ने बताया कि जल्द से जल्द नैनीताल के सभी नालों को साफ़ कर दिया जाएगा, बड़ी टीम के अभाव और सीमित संसाधनों के होते हुये भी एक से दो माह में पूरे नैनीताल के नाले साफ़ हो जाएंगे,
इस नेक क़दम और अच्छी कार्रवाई के लिये हम
अधिशासी अभियंता, व
कनिष्ठ अभियंता सिंचाई खंड, नैनीताल का तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं और उम्मीद करते हैं आने वाले वक़्त में भी सामाजिक हित में आपका साथ यूँ ही हमेशा मिलता रहेगा…
(हालांकि हम ये भी जानते हैं कि सरकारी विभागों का प्रथम कर्तव्य है कि वे जन हित में कार्य करें, फिर भी अगर हमारे शुक्रिया अदा करने से समाज का कुछ भला होता है तो हमें और ख़ुशी मिलेगी )
अंक 80 (4 जनवरी 2019) : शुक्रिया: नगर पालिका प्रशासन नैनीताल का
साहिबान, हमने नवीन समाचार के स्तम्भ आज़ाद के तीर में 31 दिसंबर के अंक में विंटर कार्निवाल की तैयारी एक साल पहले प्रारम्भ उन्वान के साथ अपनी बात रखी थी जिसमें 22 दिसंबर, 2018 को समाप्त हुये विंटर कार्निवाल के पोस्टर शहर भर में ख़ासकर माल रोड पर बिजली के खम्बों इत्यादि पर लगे हुये थे, जिसकी तरफ़ शासन -प्रशासन का ध्यान खींचने की कोशिश की थी, जिस पर कार्रवाई करते हुये नगर पालिका प्रशासन, नैनीताल ने हनुमान गढ़ी से लेकर माल रोड, फांसी गधेरा समेत बड़ा पत्थर तक सारे पोस्टर हटा दिए, स्वच्छता के लिये अच्छा व नेक क़दम उठाने पर हम अध्यक्ष / अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद, नैनीताल व तमाम सभासदों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं और उम्मीद करते हैं आने वाले वक़्त में भी सामाजिक हित में आपका साथ यूँ ही मिलता रहेगा।
अंक 79 (3 जनवरी 2019) : आज़ाद मंच और नवीन समाचार का फिर हुआ असर, शुक्रिया :लोक निर्माण विभाग का
साहिबान, हमने ‘नवीन समाचार’ के स्तम्भ ‘आज़ाद के तीर ‘ में 16 दिसंबर के अंक में ‘सड़कों में गड्ढे या गड्ढों में सड़क ‘ उन्वान के साथ नैनीताल की टूटी हुई सड़कों का हाल बताकर लोक निर्माण विभाग का ध्यान इस तरफ़ करना चाहा था, अगले ही दिन लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता तारा सिंह के निर्देशन में कनिष्ठ अभियंता महेंद्र पाल सिंह की टीम ने बीडी पांडे अस्पताल के पीछे वाली सड़क पर सीसी मरम्मत यानि गड्ढों को भरने का काम शुरू कर दिया था आज 31 दिसंबर आते आते लगभग सभी गड्ढे भर दिए गए हैं, ‘आज़ाद मंच’ और ‘नवीन समाचार’ की मुहीम पर ज़िम्मेदारी दिखाते हुए तत्काल प्रभाव वाली कार्यशैली के लिये आज़ाद मंच परिवार लोक निर्माण विभाग का तहेदिल से शुक्रिया अदा करता है और उम्मीद करता है कि नैनीताल की अन्य सड़कों के गड्ढों को भी भरने में यूँ ही मुस्तैदी दिखाई जाएगी आख़िर में, हम हर विभाग से अपील करना चाहते हैं कि नये साल के तोहफ़े के रूप में हमें नैनीताल का विकास दे दीजियेगा, आपकी बड़ी मेहरबानी होगी,
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है
अंक 78 (2 जनवरी 2019) : लोहे की चिड़ियों की अनोखी नेकी की दीवार !
साहिबान,
ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न,
जी हाँ, पता था आप यही कहेंगे हमने भी देखी है नेकी की दीवार ही तो है, नहीं जनाब
जो आपने कहीं किसी शहर में देखी होगी वो तो रही होगी कपड़ों वगैरह की दीवार,
हाँ आप भी अपनी जगह ठीक हैं,
क्योंकि जब यहां मतलब हमारी सरोवर नगरी में जिस नेकी की दीवार का उदघाट्न किया गया था वो वही थी, जिसमें कपड़े कुछ ज़्यादा होने पर यहां छोड़ सकते थे और जिसको ज़रूरत होती वो यहां से अपने इस्तेमाल के लिये बे- रोक टोक निःशुल्क ले सकता था, ख़ैर,
उदघाट्न हो गया सब इज़्ज़तदार लोग मिठाई खाकर हाथ पोंछकर अपने -अपने घर चले गये, लेकिन
परिवर्तन नाम की चिड़िया ने पंख फड़फड़ाये और नेकी की दीवार पर आकर बैठ गयी, जब वो चिड़िया बैठी ही थी कि हमारी नज़र भी पड़ गयी, जहां लोहे की कई चिड़िया गुटर गुं करते हुये आपस में बातें करती रहती हैं,
बोर्ड पर लिखी पंक्तियाँ पढ़कर तो हम भी ग़च्चा खा गये,
वहां लिखा था ” आपके पास अधिक है यहां छोड़ जाएँ, आपकी ज़रुरत का है यहां से ले जाएं,
अधिक तो अपने पास अपने ग़म के सिवा कुछ था नहीं, हाँ लेकिन हमें हमारी ज़रूरत की वो लोहे की चिड़िया दिख रही थी, हम निःशुल्क लिखा देखकर और खुश हो गये जिस ख़ुशी में उसके नीचे कपड़ों वाली लाइन हम नहीं देख पाये, और जा बैठे एक रंग- बिरंगी चिड़िया के पास जैसे ही हमने उस चिड़िया को पकड़ने की कोशिश की एक सय्याद दौड़ता हुआ आया और हम ग़रीब को चिड़िया की क़ीमत बताते हुये दूर तक लताड़ते हुये ले गया,
भला हो उसका,
हम तो रस्ते भर यही सोचते रहे
कि ये कैसी नेकी थी और कैसी थी दीवार?
लेकिन हम रहे कमअक़्ल हमें आज तक कोई मसीहा ऐसा नहीं मिला जो समझा पाये, कि ये ऐसी है नेकी और ये ऐसी है दीवार
हुज़ूर,
आपमें से किसी का यहां नैनीताल की माल रोड से गुज़रना हो तो एक नज़र आप भी उस दीवार पर दौड़ाइयेगा, कि वो कपड़ों की दीवार है या लोहे की चिड़ियों का आंगन? आख़िर में,
इस मआशरे के इज़्ज़तदार, ख़ुद्दार, बरख़ुरदार, समझदार, थानेदार, पहरेदार, फ़रमाबरदार,
लोगों से बेहद ही नरम,
अत्फ़ाल के जैसी मासूम
इल्तेजा है कि क़ारोबार तो चलता ही रहेगा लेकिन कभी उस ग़रीब की मजबूरी को भी समझें साहब जो नेकी की दीवार से कुछ लेना चाहता है लेकिन आप सबकी फैलाई हुई सजावट उसकी ज़रुरियात में रुकावट पैदा करती हैं, वो इतनी हिम्मत जुटा नहीं पाता कि उस मुक़ाम तक पहुंचकर अपने लिये गरम कपड़ा हासिल कर सके,
उसके लिये राह आसान बनाएं
मुश्किल नहीं और अगर ये मुमकिन नहीं तो वहां से ये दीवार हटाकर ऐसी जगह लगाएं जहां आपका क़ारोबार भी मुत्तासिर न हो और ज़रूरतमंद की पर्दादारी भी रहे|null
अंक 77 (31 दिसंबर 2018) : विंटर कार्निवाल 2019 की तैयारी प्रारम्भ, एक साल पहले से ही शुरू हुआ प्रचार, बिजली के खम्बों आदि पर लदे पड़े हैं फ़्लैक्स
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न वो विंटर कार्निवाल – 2018 की है, जो बीते दिनों 20 से 22 दिसंबर तक चला था, आज 31 तारीख़ हो गयी कल से नए साल की नई शुरुआत हो जाएगी, सब लोग नए नए वादे इरादे करेंगे लेकिन हमारे साहिबान बहुत आगे की सोचते हैं, उन्होंने अगले साल होने वाले विंटर कार्निवाल की तैयारी अभी से शुरू कर दी हैं बस 2018 की जगह व्हाइटनर लगाकर 2019 करने की देर है, फिर किसी को पता भी नहीं लगेगा कौन से सन की बात कर रहे थे और ,इसके साथ ही फ़्लैक्स की छपाई, ढुलाई, लगवाई सब बच जाएगी योजना तो बहुत अच्छी है, इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, एक साल पहले से ही पर्यटक सरोवर नगरी में एडवांस बुकिंग भी करवा लेंगे, वाह कितना शानदार मंज़र होगा अगले विंटर कार्निवाल का जिसका प्रचार और प्रसार एक साल पहले से ही शुरू कर दिया गया है, भई हमें तो अभी से एक्साइटमेंट होने लगी बाई गॉड, ख़ैर, हुज़ूरे वाला की इतनी मुस्तैदी देखकर कोई भी ये नहीं कह सकता कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा, अब इससे बढ़कर क्या होगा? पूरा एक साल एडवांस हुज़ूर के इस जज़्बे को हम सलाम करते हैं |
अंक 76 (30 दिसंबर 2018) : असर, आज़ाद मंच व नवीन समाचार का, शुक्रिया : नगर पालिका प्रशासन का
साहिबान, 09 दिसंबर के अंक में हमने नवीन समाचार के आज़ाद के तीर स्तम्भ में ‘मौत का कुआँ बना रास्ता : हैप्पी न्यू ईयर पर हो न जाये हैप्पी बड्डे’ उन्वान के साथ पुराने अशोक टॉकीज सिनेमा वर्तमान पार्किंग स्थल के किनारे से एक हाथ चौड़े रास्ते का ज़िक़्र किया था, जिसके किनारे रेलिंग डीएसए की तरफ़ से ग़ायब थी, जिससे कभी भी हादसा होने का ख़तरा बना हुआ था, फ़िलहाल नये साल के जश्न से पहले नगर पालिका की तरफ़ से टीन की चादर लगाकर अस्थाई रोक थाम की गयी, जिससे ऊपर से नीचे गिरने का ख़तरा ख़त्म तो नहीं लेकिन थोड़ा कम ज़रुर हुआ है, नगर पालिका प्रशासन ने अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए तत्परता से कार्य किया जिसके लिये आज़ाद मंच नगर पालिका परिषद, नैनीताल अध्यक्ष / अधिशासी अधिकारी तथा क्षेत्रीय सभासद का हार्दिक आभार व्यक्त करता है तथा आशा करता है कि अस्थाई को स्थाई समाधान जल्द ही मिलेगा साथ ही आपसे ये भी आशा की जाती है कि नैनीताल की बेहतरी के लिए आप हमेशा सहयोग करेंगे…
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है
अंक 75 (29 दिसंबर 2018) : सपनों में आई प्रतिबंधित पॉलिथीन की शिकायत
साहिबान,
ज़रा ग़ौर से सुनियेगा,
एक दिन मेरे सपने में मा.उच्च न्यायालय द्वारा प्रतिबंधित पॉलिथीन आयी, वो सिसक – सिसककर रो रही थी,
मैंने उससे उसके रोने की वजह पूछी, तो वो और ज़्यादा भावुक हो गयी और मेरे गले लगकर ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी,
और बोली:- आप तो अधिवक्ता हो पीड़ित का दर्द समझते हो और वो मुझे मेरा हाथ पकड़कर सबसे पहले चिप्स की फैक्टरी में, उसके बाद बिस्किट फैक्टरी, ब्रेड फैक्टरी, दूध, चाय, टॉफी और उन सभी फैक्टरी में ले गयी जहां प्लास्टिक के व्राप्पेर्स में उत्पाद पैक हो रहे थे,
वो पीड़ित प्लास्टिक बोली –
ये देखो क्या ये प्लास्टिक ईको फ्रेंडली है ???
क्या इसका इस्तेमाल होने के बाद ये काग़ज़ की तरह नष्ट हो जाती है ???
मैं चुप रहा और देखता रहा
कि उन फैक्टरी में कितने धड़ल्ले से बिना रोक टोक प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा था, फिर वो आगे बढ़ी और मुझे वहां लेकर गयी जहाँ कोल्ड ड्रिंक्स के नाम पर रसायनों में पानी मिलाकर
70 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिकने के लिए तैयार होता है
वहां मैंने देखा प्लास्टिक की बोतलों में वो रासायनिक पेय या यूँ कहें धीमा ज़हर पैक हो रहा था, पीड़ित प्लास्टिक ने फिर मेरी तऱफ उदास मन से देखा और बोली, बताइये क्या ये प्लास्टिक की बोतलें ईको फ्रेंडली हैं ???
उसने मुझे बताया कि जिस डिस्पोजल प्लास्टिक के गिलास में आप लोग बड़े मज़े से गरमा – गरम चाय पीते हो, उससे मनुष्य जाति कोई वरदान नहीं ले रही
बल्कि कैंसर को दावत दे रही है,
जानते हो, प्लास्टिक के किसी भी बर्तन में गरम चीज़ डालकर खाने से कैंसर के लक्षण पैदा हो सकते हैं, मैं ये सब सुनकर हैरान तो हो रहा था, लेकिन फिर भी चुप रहा,
तब उसने मुझे प्लास्टिक से बनने वाले हर उत्पाद के हर कारखाने , हर कंपनी, हर जगह घुमाया,
और अंत में मुझसे यही सवाल किया, कि जितनी भी जगह अभी जिस प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा है क्या वो आपके भू – मंडल के लिए हितकारी है ???
मैं फिर भी चुप रहा, मेरी लम्बी ख़ामोशी देखकर वो मुझसे चिढ़ने तो लगी थी, ग़ुस्से से फिर उसने मेरा हाथ पकड़ा और सीधे
नैनीताल की झील किनारे
ले आयी, जहाँ भीषण बारिश के बाद हमारे शहर के शरीफ़
और बाहर से आये महा -शऱीफ लोगों द्वारा किया हुआ प्लास्टिक का कचरा झील की सतह पर तैर रहा था, जो हमारी प्लास्टिक सभ्यता का प्रमाण दे रहा था,
झील उस वक़्त किसी गंदे नाले की तरह दिखाई पड़ रही थी,
फिर मैंने धीरे से, पीड़ित प्लास्टिक की तरफ़ मुस्कुराते हुए देखा और कहा, अरे,
ये तो वो हमारे वहां विंटर कार्निवाल हुआ था न, तो उसमें बाहर से लोग आते हैं न,
वो गंदगी करके चले जाते हैं,
और कुछ ऊपर चट्टानों से पता नहीं कहाँ – कहाँ से बहकर आ जाता है, इसमें हम लोगों का कोई दोष नहीं, हम तो अपने घरों का कूड़ा नालों में भी नहीं डालते, फिर न जाने सारे नाले कूड़े से लबालब क्यों हो जाते हैं?
ये सब कहकर, मैं बात संभाल ही रहा था कि उसने मेरी तरफ़ बहुत गुस्से से देखा और ये कहकर चली गयी कि आज तुम मुझपर प्रतिबन्ध लगाकर मेरी बेचारगी पर ख़ुश हो रहे हो और सोच रहे हो इससे तुम्हारा पर्यावरण स्वस्थ हो जाएगा तो कान खोलकर सुन लो ये तुम्हारी बहुत बड़ी भूल है,
मैं तो छोटी सी ज़हरीली नागिन थी, लेकिन असली ज़हरीले कोबरा सांप तो आपके पर्यावरण को डसने में लगे हैं, अगर उन पर अंकुश नहीं लगाया तो इतना पछताओगे, इतना पछताओगे
जिसकी कभी कल्पना भी नहीं
कर सकते, उसकी बातें सुनकर मुझे नींद में ऐसा लगा जैसे मुझे
प्लास्टिक रुपी कोबरा साँपों ने जकड़ लिया हो, मैं चाहकर भी उनके चंगुल से ख़ुद को छुड़ा नहीं पाया, मेरी आवाज़ बंद होने लगी थी, सांसें रुकने लगी थीं, और घबराकर फिर मेरी आँख खुल गयी, जब मैंने देखा सब कुछ ठीक है, फिर मैं ख़ुश हो गया,
और चादर तानकर सो गया,
और आप सब की तरह
मैंने भी उसकी चेतावनी को हल्के में ले लिया, क्योंकि आज का इंसान बहुत होशियार हो गया है,
बिना देखे किसी भी चीज़ पर भरोसा नहीं करता,
आप भी मत करना जनाब,
सोचना क्या जो भी होगा देखा जाएगा,
है न ???
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है
अंक 74 (28 दिसंबर 2018) : 3 डिग्री की ठंड में जलती अलाव की कहानी,पांच लकड़ियों की ज़ुबानी
मोहतरम, जनाब, हज़रात, आप सबको ये बताते हुए बेहद दुःख हो रहा है कि जहाँ एक तरफ़ सूबे के मुखिया ने सूबे के सभी ज़िलाधिकारियों को ये सख़्त हुक्म दे रखा है कि सर्दी वाले क्षेत्रों में ज़्यादा से ज़्यादा अलाव जलने चाहिये, जिससे वहां रहने वाले या बाहर से आये घूमने वालों को ठंड से राहत मिल सके, हमारे नैनीताल शहर की बात करें तो 2-3 डिग्री के तापमान में ठण्ड बहुत ज़्यादा है इसी ठण्ड ने अभी हाल ही में एक चाय वाले 50 वर्षीय राजू नाम के व्यक्ति की जान ले ली थी, ख़ैर, अभी मुद्दा दूसरा है हमारे यहां सीएम साहब के हुक्म को सर झुकाकर पूरी ईमानदारी से माना जा रहा है, पतली- पतली पांच-पांच लकड़ियों से ख़ास – ख़ास चौराहों पर अलाव जलाये जा रहे हैं, उन 5 लकड़ियों से शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक ऊँची ऊँची लपटें उठती रहती हैं, न, न, जनाब जैसा आप सोच रहे हैं, वैसा नहीं है, दरअसल, वो पांचों लकड़ियां एक दूसरे की इतनी रेस्पेक्ट करती हैं कि जलने का सम्मान देने के लिये एक दूसरे से पहले आप, पहले आप करके रह जाती हैं, और वे ये भी जानती हैं कि जो भी हैं, बस वही उनका परिवार हैं, अब कोई नहीं आने वाला उनमें इज़ाफ़ा करने वाला, लेकिन ये क्या उन पांच लकड़ियों को एक साथ जलाने की कोशिश में फ़्लैक्स का सहारा लिया जा रहा है, ओहो, पर्यावरण का तो शायद हमारे यहां जो अलाव जलाने आते हैं उनको ध्यान भी नहीं होगा कि किस टाइप की चिड़िया होती होगी इसलिए वो तो झटपट आग लगाकर सरपट हो लेते हैं (उन्हें शायद लगता है उनकी लगाई हुई आग कभी नहीं बुझती ) और पीछे छोड़ जाते हैं फ़्लैक्स से निकलने वाली विषैली गैस, जो उन मासूम लोगों के शरीर में जाती है जो बेचारे ठंड से बचने के लिये दूसरी बिमारियों को कुबूल करने को मजबूर हैं,
आख़िर में,
मुख्यमंत्री महोदय उत्तराखंड
मंडल आयुक्त (कुमाऊँ) महोदय,
ज़िलाधिकारी महोदय, नैनीताल
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय,
नैनीताल,
पुलिस अधीक्षक महोदय नैनीताल
अपर ज़िलाधिकारी महोदय, नैनीताल
विधायक महोदय, नैनीताल
से हमारी पुरख़ुलूस इल्तेजा है कि सरोवर नगरी में रात में अत्यधिक ठण्ड बढ़ जाने से बेसहारा लोगों का बुरा हाल हो जाता है, न उनको अलाव ही मिल पाता है और न ही रैन बसेरों की वर्तमान हालात बताने लायक है, क्या हैं रैन बसेरों के हाल उनके बारे में भी हमारी पड़ताल जल्द ही होगी, उससे पहले आप अलाव की खानापूर्ति को उचित आपूर्ति में बदलने के आदेश करने की कृपा करें…
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है
अंक 73 (27 दिसंबर 2018) : आज के स्कूल का वादा-पढाई कम, बिज़नेस ज़्यादा
पढ़ेगा इंडिया…तभी तो . बढ़ेगा इंडिया…
भारतीय आम नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिये इससे अच्छा नारा नहीं हो सकता…. इसका नतीजा ये हुआ कि मेरे एक मित्र के मन में देशभक्ति वाला फुल टू भाव जाग्रत हुआ , और जोश में आकर होश की दुकान बंद कर बैठा… कहने लगा… मैंने तो बच्चों को इंग्लिश मीडियम में ही पढ़ाना है, मेरे बच्चे बड़े होकर चटर- पटर इंग्लिश बोलेंगे तो मुझे उन पर नाज़ होगा… मैंने बोला… भाई वो बात तो ठीक है लेकिन आजकल के ज़माने में अंग्रेज़ी मीडियम का मतलब पता है ??? किसी ठीक ठाक स्कूल में बच्चों का एडमिशन करने जाओ तो सबसे पहला बम एडमिशन के नाम पर डोनेशन यानि दान अपने सर पर फोड़ना पड़ेगा… थूक दान, पीक दान , कूड़ा दान तो सुना था, ये स्कूल दान भी कोई बला है, ये एडमिशन टाइम पर पता चलता है,
जी… जनाब … एडमिशन फीस और डोनेशन…. (साहब…ये दोनों एक दूसरे को पहचानते तक नहीं ) इससे पैसा आपके पास से तो चला जाता है लेकिन उसका एडमिशन फीस से दूर-दूर तक कोई मतलब नहीं होता, वो अलग होती है, फिर मंथली फी, ऐकडेमिक फी, कल्चरल एक्टिविटी फी, स्पोर्ट्स फी, लाइट फी, बल्ब फी, चॉक फी, डस्टर फी, जिस गेट से अंदर आये उस गेट की फी, जिस रास्ते पर चलकर आये उसकी टाइल्स फी, जिस कैमरा ने तुम्हे कैप्चर किया उसकी सीसीटीवी फी, करीब 9999 टाइप की फी जोड़कर (जिसमें स्कूल का मनोरंजन कर नहीं जोड़ा गया है , वो समय समय पर आपको बुलाकर आपसे वसूला जाएगा) जब आपको बताया जाता है तो आपके पैरों से ज़मीन और सर से आसमान ज़रूर ग़ायब होता है, लेकिन क्या करें, सर से कफ़न भी तो बांधा हुआ है, आखिर हमारे पडोसी शर्मा जी का बेटा भी तो यहीं पढ़ता है, तो म्हारा बेटा राजकुमारों से कम है के वाली फीलिंग्स आ जाती हैं, और हम चौड़े होकर वो गोरी मैडम की बातें सुनकर यक़ीन करते चले जाते हैं, उस टाइम तो सब मोह माया लगता है, बस उस काउंसलर की बातों में सत्य के दर्शन होते हैं, तो जहाँ-जहाँ मेमसाब साइन करने को बोलती हैं, धड़ा धड़ हम करते जाते हैं (मात्र मुस्कराहट की इतनी ज़बरदस्त परफॉरमेंस को देखते हुए , छोटे -बड़े लगभग सभी स्कूलों ने फीमेल काउंसलर रखने की इस युग में ऐतिहासिक शुरुआत की थी)
तो साहब … मोटी रकम देकर हो गया एडमिशन… अब स्कूल से बाहर निकलते वक्त जब गेटकीपर ने सलाम ठोका, तब तो बाई गॉड… बिल गेट्स वाली अनुभूति हुई, घर आकर मोहल्ले में एक दिन की ब्रेकिंग न्यूज़ का हिस्सा बनने का अलग ही मज़ा है.. और फिर तो… मज़े की शुरुआत हो जाती है, स्कूल वाले आपको कभी बोर नहीं होने देते, जैसे ही आप रिलैक्स महसूस करोगे, स्कूल से कॉल आ जाती है, अगले दिन बुलाया जाता है, वहां आपके हाथ में एक लिस्ट थमा दी जाती है कि उक्त स्टेशनरी का सामान ( किताबें इत्यादि शामिल ) फलां दुकान से लाना है, यूनिफार्म फलां से, और अगर किसीने गलती से पूछ लिया … फलां से क्यों लाएं ??? कहीं और की नहीं चलेंगी तब तो पूरे मजमे में सब आपकी ही तरफ घूर कर ऐसे देखेंगे जैसे आपने देश के ख़िलाफ़ कोई टिप्पणी कर दी हो, हद तो तब हो जाती है जब पड़ोस वाले शर्मा जी की पत्नी भी गिरी हुई नज़रों से देखने लगती हैं… जैसे मन में सोच रही हों, ‘छी पुअर लोग , कहाँ से आ जाते हैं यहां , हुंह’……
ख़ैर…. स्कूल के आदेशानुसार सारी चीज़ें उनके बताये हुए अड्डे से ले ली जाती हैं, ( ऐसे में वो दिन दूर नहीं जब घर के लिये टिंडे कौन सी दुकान से खरीदने हैं स्कूल वाले बताएंगे ) जिन बच्चों के अभिभावक गाय की तरह सिर हिलाकर हाँ में जवाब देते हैं, उन्हीं बच्चों की बल्ले- बल्ले होती है स्कूल में, और जिन अभिभावकों ने थोड़ी सी भी अधिकारों, जागरूकता या नैतिकता वाली बात की, स्कूल प्रशासन अपने कोर शिक्षकों की आपात बैठक बुलाकर उस बच्चे के भविष्य पर इमर्जेन्सी लगा देता है, फिर तो उसे क्लास में पानी की मोहलत भी ऐसे दी जाती है जैसे कर्फ्यू में ढील… हैरत वाली बात है कि बच्चों को पता नहीं कहाँ से ये बातें पता लग जाती हैं और वो सब भी उस बच्चे से कन्नी काटने लगते हैं, ऐसा माहौल हो जाता है मानो स्कूल ने उसके ख़िलाफ़ राजद्रोह का मुकदमा चला दिया हो,
मतलब इतना भयंकर माहौल बना देते हैं कि बच्चा डिप्रेशन में जाने को तैयार दिखता है, चिंतित अभिभावक अपने बच्चे को बिना कोई शिकवा किये स्कूल से निकाल लेते हैं, दूसरे स्कूल में डालने की सोचते हैं, लेकिन अब कहीं एडमिशन मिलने को तैयार नहीं, अजीब-अजीब से बहाने बनाकर हर स्कूल वाले टरका देते …
काफी दिनों के संघर्ष के बाद किसी स्कूल चपरासी के मार्फ़त पता लगता है कि स्कूल स्कूल मौसेरे भाई,
जब तक आप पहले स्कूल प्रशासन से माफ़ी नहीं मांगेंगे आपके बच्चे को कोई एडमिशन नहीं देगा… तब बेचारे…. जागरूक अभिभावक को अपने बच्चे के भविष्य के ख़ातिर झुकना पड़ता है , वैसे दुनियाभर के रंग-बिरंगे अभिभावक संघ और समितियां बनी हुई होती हैं , लेकिन एन्ड टाइम पर जब साथ देने की बात आती है … सबके सब टें… बोल जाते हैं…
हाँ कहीं चाय -पकौड़ी मिलने वाली हो, सबके सब अभिभावक हित की डींगे मारते नज़र आएंगे , या किसी स्कूल में कोई बलात्कार या छेड़छाड़ की घटना हो जाये, उसके बाद बैटरी फुल चार्ज करके स्कूल प्रशासन को कोसते हैं , लेकिन कभी भी घटना से पहले स्कूल के सामने सेल्फी तक नहीं लेते…
अंत में मेरा प्रशासन (राज्य व स्कूल) से अनुरोध है कि कृपया शिक्षा को शिक्षा ही रहने दें , व्यवसाय न बनाएं , आज अपने बच्चों को महंगी शिक्षा देने की कोशिश में अधिकतर अभिभावक खुद को गिरवी रखकर स्कूल का पेट भर रहे हैं , लेकिन आजकल स्कूल का पेट इतना बड़ा हो गया है कि भरने में ही नहीं आता… माँ-बाप दोनों मिलकर लगे पड़े हैं बच्चों की फीस जमा करने के चक्कर में , कोई ज़मीन बेच रहा है, कोई ज़मीर बेच रहा है, सब मजबूर कर दिए गए हैं… इन होटल नुमा फाइव स्टार स्कूलों ने… आये दिन पैसों के लिए मुंह खोले इस बिज़नेस क्लास वर्ग पर किसी प्रकार स्पीड गवर्नर लगाकर , कृपया अभिभावकों की बेसाख्ता, बेतरतीब, असहाय व अस्त-व्यस्त होती ज़िंदगी को पुनः पटरी पर लाने का प्रयास करें…
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है ….
अंक 72 (24 दिसंबर 2018) :‘मित्रों’ को सलाह, ‘मित्र’ तुम ‘इन स्थितियों’ पर भी ख़ामोश क्यों रहते हो?
साहिबान, आज मैं आपको अपने उत्तराखंड निवासी एक मित्र की दास्ताँ सुनाता हूँ, उसका परिवार काफ़ी बड़ा है यूँ समझ लीजिये जितना बड़ा एक सूबा होता है, परिवार में सब मिलाकर वे लोग 13 भाई हैं, अब कौन बड़ा है कौन छोटा ये सवाल ज़ाया है, क्योंकि इनके बाबू जी अपने लाडलों को उनके कर्मों के इंच टेप से नापते हैं, तेरह में से बारह की बात अगर बाद में की जाये तो मेरे समझाने और आपके समझने में आसानी होगी, क़सम से इतनी आसानी होगी कि आप एक भाई की करतूतों से पूरे ख़ानदान का करिश्मा जान जाएंगे खैर, जिन जनाब से हमारी मित्रता है वो हमारे ही ज़िले में रहते हैं, या यूँ कह लीजिये यहां रहते हैं इसलिए मित्रता है, वो छोड़िये, बात का असली मुद्दा पकड़ते हैं, मुद्दा ये है हमारे मित्र को पूरे ज़िले को अमन -चैन से रखने की अहम नौकरी मिल गयी, वो सब कुछ इस तरह रहा कि हमारे मित्र के राज में सट्टेबाज़, शराब माफिया, स्मैक / चरस के सौदागर अमन और चैन से अपना धंधा चलाने लगे, पहली बात तो उन बदमाश क़िस्म के लोगों की शिकायत करने की किसी में हिम्मत नहीं होती दूसरी बात जब कोई चुटकी भर हिम्मत कोई बटोरकर कर मेरे मित्र के दफ्तर में ले जाता तो वहां मौजूद मेरे मित्र के मुंह पर जी हुज़ूरी करने वाले लोग उस चुटकी भर हिम्मत का चूरन बना हवा में उड़ा देते, अब कोई किससे जाकर अपने दिल की बात कहे जब अपना मित्र ही नहीं सुनता, तो दुश्मन से क्या खाक़ उम्मीद करें,
आख़िर में,
मंडल आयुक्त (कुमाऊँ) महोदय,
ज़िलाधिकारी महोदय, नैनीताल
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय,
नैनीताल,
पुलिस अधीक्षक महोदय नैनीताल / हल्द्वानी
अपर ज़िलाधिकारी महोदय, नैनीताल / हल्द्वानी,
विधायक महोदय, महोदया, नैनीताल / हल्द्वानी,
आप समस्त अधिकारीगणों व शक्तिशाली पदों पर आसीन समस्त महानुभावों से विनम्र अनुरोध है कि नैनीताल में कैनेडी पार्क वाली सड़क, ठण्डी सड़क, अयारपाटा की पर्दा धारा वाली और डी एस बी के नज़दीक शिव मंदिर वाली सड़क, मल्लीताल बाज़ार में रज़ा क्लब ग्राउंड, पालिका मार्केट के पास, एसबीआई की बगल वाली सड़क, चार्टन लॉज की पुलिया के आसपास, चूना धारा के आसपास नैनीताल के लगभग हर सूनसान वाले इलाक़े में जमकर नशाख़ोरी हो रही है जिसमें स्कूल और कॉलेज के युवा लड़के शामिल हैं
हल्द्वानी की बात करें तो वहां राजपुरा, बनभूलपुरा और लाल डाँठ क्षेत्र में नशे का कारोबार फल फूल रहा है,
हमारा सवाल ये है कि युवाओं तक नशा किस रास्ते से होकर आ रहा है और वे कौन सौदागर हैं जो अपनी तिजोरियां भरने के लिये हमारे देश के युवाओं को सूली पर चढ़ाने को उतावले हैं, उन पर पुलिस अपनी मित्रता क्यों दिखा रही है उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
क्या युवा मित्रों को जहन्नुम की आग में जाता देखकर भी यूँही ख़ामोश रहेगी हमारी मित्र पुलिस?
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है …
अंक 72 (24 दिसंबर 2018) : ये क्या जगह है दोस्तों ? ये कौन सी बयार है ?
साहिबान, गुस्ताख़ी माफ़ हो, मैं नैनीताल शहर के लिये बाक़ियों की तरह एक मुसाफ़िर हूँ, घर से माली हालात ठीक नहीं थे तो ज़ाहिर है जेब की हालत भी छेदों वाली होगी, नैनीताल पहुंचा, फिर तल्लीताल बस अड्डे से थोड़ा आगे बढ़ा तो मेरे जैसे दिखने वाले लोग मुझे कमरा दिखाने की बात करने लगे, भई जिसने आसमान को देखने की भी हिम्मत उधार मांगी हो वो किसी का कमरा क्या देखेगा, ये कहते हुए और आगे बढ़ा तो मुझसे बेहतर दिखने वाले लोग, मुझे मोटर साईकिल से कहीं ले जाने की बात कहने लगे, जो इंसान अपनी वहशत की वजह से अपने ख्वाबों में भी कहीं नहीं गया हो, वो भला मोटर साईकिल से कहाँ जाता ? थोड़ा सा और आगे बढ़ा फिर मेरे जैसे दिखने वाले लोग मुझे रिक्शे में चलने का इशारा करने लगे, मैं उन अपने और पराये जैसे सभी चेहरों से अपना चेहरा छिपाता हुआ, पक्की सड़क से घबराकर कच्ची सड़क पर जा पहुंचा, ये सोचकर कि कच्ची सड़क थोड़ा सुकून देगी, ये वो सड़क थी जहाँ बहुत सारी नावें खड़ी थी, उसके बगल में एक छतरीनुमा कुछ था, कुछ लोगों से उसे पानी वाला, हाँ …पम्प हाउस कहते सुना था, बस उसी के आगे से जाती हुई कच्ची सड़क जिस पर मेरे कपड़ों से ज़्यादा क़ीमती पत्थर की छोटी -छोटी पटालें रखीं थी, थोड़ा और आगे बढ़ने पर देखा झील के किनारे पैर लटकाकर कुछ युवक और युवतियां बैठे सिगरेट का धुआं उड़ा रहे थे, कोई रेलिंग न होने पर पैर लटकाना शायद उनकी मजबूरी रही होगी और सिगरेट या शराब पीना पुलिस की ठीलाई होने की दूसरी वजह रही होगी, वरना इतने खुले में कौन शरीफ़ घरों के बच्चे ऐसे शौक़ फरमाएंगे, ख़ैर, थोड़ा और आगे बढ़ा तो, उजड़े हुये गुलिस्तान की क़ब्र से मासूम फूलों की आवाज़ सुनाई दी, जो रो -रोकर मुझे अपनी जवानी के दिनों की दास्तां सुना रही थी, जिस जगह कभी शायद हरा- भरा गुलिस्तां रहा होगा वहां सिर्फ़ कूड़ा -कचरा हुड़दंग मचाता नज़र आ रहा था, कुछ क़दम चलने पर बाएं हाथ पर झील के किनारे को देखकर मैं हैरान रह गया, पीछे की तरफ तो फ़क़त रेलिंग नहीं थी, यहां तो रास्ते के नीचे ज़मीन भी ग़ायब है, बस सीमेंट के मज़बूत कन्धों पर यहां से आने जाने वालों की ज़िंदगी टिकी है,
मैंने देखा, उस सड़क पर बाहर से घूमने वाले लोग काफ़ी शौक़ से लहरा- लहरा कर फ़ोटो खिंचवा रहे थे, वो भी मेरी ही तरह इस शहर के निज़ाम से अंजान थे, उनके भोलेपन से मुझे रश्क़ आने लगा, अगर निज़ाम को फ़िक़्र नहीं ज़िंदा लोगों की तो वे सब अपनी जान को इतना सस्ता करने पर क्यों तुले थे?
आख़िर में,
मंडल आयुक्त (कुमाऊँ) महोदय,
ज़िलाधिकारी महोदय, नैनीताल
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय,
नैनीताल,
अपर ज़िलाधिकारी महोदय, नैनीताल,
सचिव महोदय,
ज़िला विकास प्राधिकरण, नैनीताल,
विधायक महोदय, नैनीताल,
अध्यक्ष महोदय /
अधिशासी अधिकारी महोदय,
क्षेत्रीय सभासद महोदय,
नगर पालिका परिषद, नैनीताल
आप समस्त अधिकारीगणों व शक्तिशाली पदों पर आसीन समस्त महानुभावों से विनम्र अनुरोध है कि केनेडी मार्ग व पार्क का जीर्णोद्धार करने व मनचलों और नशा करने वालों पर नकेल कसने की योजना बनाकर उसको जल्द से जल्द लागू किया जाये, ताकि कोई हादसा न हो
और नैनीताल में आने वाले लोग ख़ुद को मेहफ़ूज़ समझें, ख़ौफ़ज़दा नहीं |
अंक 71 (22 दिसंबर 2018) : फिर हुआ असर : आज़ाद मंच व नवीन समाचार का
शुक्रिया : अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड नैनीताल का
साहिबान,
26 अक्टूबर के अंक में हमने हिम्मत की दाद दीजिये इस बिजली के खम्भे की उन्वान के साथ बीडी पांडे अस्पताल, मल्लीताल नैनीताल के पीछे वाली सड़क पर झुके हुए खम्भे की दास्तान सुनाई थी,
जिसमें ये बताया गया था कि जिस खम्भे के ऊपर हज़ारों वाट की लाइन चल रही है, वो कभी भी आम जनता के लिये हादसे का सबब बन सकता है, जिस पर कार्रवाई करते हुए अधिशासी अभियंता सय्यद शीराज़ उस्मान ने अपने अधीनस्थों को आदेश दिये और क्षतिग्रस्त खंभे से बिजली की हैवी लाइन दूसरे खंभे पर शिफ़्ट कर दी गयी,
जिसके लिये आज़ाद मंच, परिवार आपका तहे दिल से शुक्रिया अदा करता है और उम्मीद करता है,
आने वाले वक़्त में भी आपकी इसी तरह मदद मिलती रहेगी
अंक 70 (20 दिसंबर 2018) : तारीफ करें क्या इनकी, कि इन्होंने नैनीताल के नालों को जंगल बनाया..
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न, ये आपको किसी कॉर्बेट जंगल की लग रही होगी दरअसल ऐसा है नहीं, ये किसी जंगल का मामला नहीं है बल्कि हमारे सूबे के खिंचाई विभाग के नैनीताल वाली ब्रांच का मामला है, इसमें कोई शक़ नहीं है कि खिंचाई खंड वालों के पास चाय -समोसा खाने से ही फ़ुर्सत नही है, अगर फ़ुर्सत होती तो शायद हमारे शहर के नाले कॉर्बेट पार्क के जंगल नहीं बनते, जनाब, अभी चंद महीनों पहले जब बरसात खत्म हुई थी तो हमने सोचा नालों के ऊपर जो झाड़ियां उग आयी और नालों के अंदर जो कूड़ा इकठ्ठा हुआ उन्हें शायद नगर पालिका साफ़ करेगी, लेकिन पालिका पासन से जब नालों की साफ़ – सफ़ाई आदि के बारे में सवाल किया तो वहां से जवाब आया कि कई सालों से नालों की साफ़ सफाई आदि की ज़िम्मेदारी केवल खि.खंड की है, लिहाज़ा आपका सवाल खिंचाई वालों से करें और जब खिंचाई वालों के पास मामला पहुँचता है तो वो मामले की भी खिंचाई कर डालते हैं, काश ! खिंचाई खंड खिंचाई करने की बजाय सिंचाई करता तो कितना अच्छा होता, नगर का हर नाला कूड़े से पटा पड़ा है, और उसकी गंदगी को झाड़ियों ने अपने नक़ाब में छुपा लिया है, जो एक हल्की सी बारिश में सीधा झील में आना है, आख़िर में, मंडलायुक्त कुमाऊँ, महोदय, ज़िलाधिकारी नैनीताल, महोदय, अपर ज़िलाधिकारी महोदय, विधायक नैनीताल, महोदय अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड, नैनीताल, अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी नगर पालिका, नैनीताल, आदि सम्बंधित अधिकारियों से अनुरोध है कि शहर के नालों को कॉर्बेट का जंगल या कूड़ाघर न बनने दिया जाये, आपने हर बोर्ड में तो लिखा है झील व नालों में कूड़ा आदि न डालें, क्या सिर्फ़ इतना लिख देने से नालों के ऊपर ऊगा हुआ झाड़ियों का जंगल और नालों के अंदर जमा हुआ कूड़ा अपने आप बाहर निकल आएगा ? अब चाहे सिंचाई खंड करे या नगर पालिका नैनीतालवासियों को तो सफ़ाई से मतलब है, बाक़ी आप दोनों अधिकारी समझदार हैं…
अंक 69 (19 दिसंबर 2018) : उत्तरवाहिनी शिप्रा भी तो गंगा है साहेब !
शिप्रा नदी (भवाली) को बना दिया गंदा नाला, सीवर लाइन जा रही है सीधा नदी में, नगर पालिका प्रशासन, भवाली गहरी नींद में सोया, गंदे जल में ही अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं लोग कौन है ज़िम्मेदार?
साहिबान, एक ज़माना था, जब छल-छल कल-कल करती बहती थी। शिप्रा नदी के निर्मल पावन जल से आस-पास के गिने-चुने लोग और जंगली जानवर अपनी प्यास बुझाते थे। धीरे-धीरे वक़्त बदलता गया, भवाली के इलाक़े में आबादी बढ़ने लगी, कच्ची मिट्टी के घरों की जगह कंक्रीट के जंगल में बस गये, सब सुख-सुविधाएँ भवाली वासियों को मिलने लगीं। सुबह-सवेरे जंगल जाने वाले लोग शिक्षित हुए तो उन्होंने घर में ही शौचालय बनाकर बाक़ी लोगों की तुलना में स्टेटस वाइज़ ख़ुद को ऊपर माना। इसी स्टेटस के चक्कर में मियां रफ़ीक़ अपनी रज़ाई में आग लगा बैठे थे, रज़ाई तो जल गयी फिर मियां रफ़ीक़ को अपनी रज़ाई कौन दे ?
ख़ैर, भवाली में भी कुछ ऐसा ही स्टेटस का खेल चला। तू बड़ा तो मैं तुझसे बड़ा की होड़ में एक-एक कर सबने जंगल को अलविदा कहा और बना डाला घर में शौचालय । बहुत अच्छी बात है घर मे शौचालय होना, लेकिन शौचालय बनाने से पहले उसकी निकासी के बारे में सोचने की किसी ने ज़ेहमत नहीं उठाई और एक-एक करके सब लोग भेड़ चाल में चलकर शिप्रा नदी में सीवर की निकासी करने लगे। तब कुछ महान लोगों ने सोचा जब नदी में सीवर जा सकता है तो कूड़ा कचरा क्यों नहीं ? तो उन्होंने अपने मन की भड़ास निकाली और शिप्रा में कूड़ा डालना भी शुरू क़र दिया। अब लोगों को कूड़ा और सीवर दोनों की निकासी का आसान उपाय मिल गया। इसी आसानी के चक्कर में एक नदी की ज़िंदगी मुश्किल कर दी। शिप्रा के चेहरे से कल-कल छल-छल करने से जो मुस्कान आती थी वो छीन ली। आज के हालात तो बद से बदतर हो गए हैं। शिप्रा नदी को देखकर कोई ये अंदाज़ा नहीं लगा सकता कि वो नदी है। बल्कि हर अंजान शख्स उसे गंदा नाला या सीवर लाइन ही समझेगा। ख़ैर, अब बात करते हैं शिप्रा बचाओ के जनक जगदीश नेगी की, जिसने शिप्रा को उसकी खोई हुई ख़ूबसूरती लौटाने का सपना देखा है। उसे वहां के लोग पागल, दीवाना न जाने, क्या-क्या कहते हैं। लेकिन उसका जुनून काबिले तारीफ है, जिसने अकेले ही अब तक जंग जारी रखी है, लेकिन अब हम उनके साथ हैं। जी हां, अब बात करते हैं प्रशासन के रवैये की, जिसने भवाली की साफ़ सफाई, सुंदरता, सीवर निकासी आदि के बारे में कोई ठोस क़दम नहीं उठाया। सब मोम के पुतले बनकर शिप्रा नदी की तबाही देख रहे हैं, आख़िर में, महामहिम राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद जी, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी, मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी, मंडलायुक्त कुमाऊँ श्री राजीव रौतेला जी, ज़िलाधिकारी नैनीताल श्री विनोद कुमार सुमन जी, अपर ज़िलाधिकारी श्री हरबीर सिंह जी, विधायक नैनीताल श्री संजीव आर्य, नगर पालिका अध्यक्ष भवाली संजय वर्मा, सक्षम अधिकारी जल संस्थान, भवाली से हमारा विनम्र अनुरोध है कि शिप्रा नदी को ख़ून के आंसू रोने मत दीजिए, उसका अस्तित्व खोने मत दीजिये। सिर्फ़ कागज़ों में घोषणायें लाने से कुछ नहीं होगा उन्हें नदी में उतारना होगा, सीवर की निकासी और सफाई की व्यवस्था करनी चाहिए, तभी बनेगा हमारा साफ़ भारत, स्वच्छ भारत|||
अंक 68 (18 दिसंबर 2018) : नैनीताल वाले तारों पर उगा रहे ‘पौधे’ , आप भी तो कहीं उगा नहीं रहे ?
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं वो हमारे ख़ूबसूरत शहर नैनीताल के मल्लीताल बाज़ार क्षेत्र की है, संजीवनी वस्त्र भंडार से थोड़ा पहले किसी साहब के घर के सामने तारों पर छोटे बच्चों की हगीज़ पैंट कई सालों से टंगी हुई है, साल का अंदाज़ा इसलिए लगाया जा रहा है क्यूंकि जब वो हगीज़ पैन्ट घर की खिड़की से फेंका गया होगा तब उसमें कुछ अलग टाइप का मामला रहा होगा, फिर वो ज़मीन से लगभग 20 फुट ऊपर टंग गया, कई बारिशों ने जब उसे पानी दिया तब कहीं जाकर अब उसमें एक छोटा सा पौधा विकसित हो रहा है, हालांकि अभी तक उस पौधे पर किसी की नज़र नहीं पड़ी है, लेकिन हाँ वो दिन दूर नहीं जब वो पौधा वृक्ष का रूप ले लेगा फिर हो सकता है अगर अनार का वृक्ष निकला तो जिन साहब के घर से वो हगीज़ फेंकी गयी थी वो अपना अधिकार उस अनार के वृक्ष पर प्राप्त कर लेंगे, या अगर वो बिन फल का वृक्ष निकला तो वन विभाग अपना आधिपत्य उस वृक्ष पर जमा लेगा, चाहे कुछ भी हो कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि हम किस स्तर के आलसी होते जा रहे हैं, जो अपने घर की गंदगी खिड़की से फ़ेंक दे रहे हैं चाहे फिर वो किसी के सर पर गिरे, तारों में अटके या सड़क पर, हमने तो खिड़की से हाथ निकालकर अपनी सभ्यता का परिचय दे दिया, ज़्यादा हुआ तो हम अपना कूड़ा थैले में भरकर लाये और किसी के ख़ाली प्लॉट में डाल दिया, क्या यही है हमारे शिक्षित होने की निशानी ? जनाब, हम किसी का पक्ष नहीं ले रहे हैं लेकिन गंदगी के लिये नगर पालिका प्रशासन को दोष देना सबसे आसान काम है, कभी हमने अपने अंदर झांका है? आख़िर कब तक, हम दूसरों के ख़ाली पड़े प्लॉट में अपना कूड़ा डालते रहेंगे? आख़िर कब तक हम अपनी गाड़ियों की और घरों की खिड़कियों से हाथ निकालकर सड़क पर कूड़ा फेंकते रहेंगे? एक सभ्य शहरी होने के नाते हमारी भी कोई नैतिक ज़िम्मेदारी बनती है, हमने कोशिश करनी है, जहाँ मर्ज़ी आये वहां कूड़ा न फेंके, न किसी दूसरे को फेंकने दें, अगर आप कहीं पार्टी करने जा रहे हो तो अपने साथ एक थैला ले जाओ और उसमें अपना कूड़ा भरकर ले आये और कूड़ेदान में ही डालें,
कूड़े को कूड़ा ही रहने दें, रॉकेट न बनाएं..
दूसरे के ख़ाली प्लॉट को कूड़ादान न बनाये,
खिड़की से हाथ निकालकर ही न उड़ाएं
सड़क पर कूड़ा न फेंकें,
अगर हमने कूड़े को उसकी सही जगह पर फेंका न, तो वो दिन दूर नहीं जब हमारा नैनीताल स्विट्ज़रलैंड से कम नहीं होगा,
अंक 67 (17 दिसंबर 2018) : गुमशुदा की तलाश: एक अपील, धारी की ओर देखे गए हैैं
साहिबान, तस्वीर में जो आप देख रहे हैं, उसमें एक महिला जिसका नाम नीलम पत्नी श्री थान सिंह, उम्र करीब 20-25 साल रंग गेहुआ, निवासी नीलगंज, बरेली, उत्तर प्रदेश, हैं तथा महिला के साथ उसकी पुत्री रोशनी जिसकी उम्र करीब 4-5 साल रंग उजला, और उसके साथ उसका पुत्र जिसका नाम विष्णु है उम्र करीब 3-4 साल, रंग गेहुआ, रुद्रपुर बस स्टैंड (ऊधमसिंह नगर) उत्तराखंड से लापता हो गयीं हैं, जिस किसीने भी इनको कहीं देखा हो तो कृपया करके नीचे लिखे नंबरों पर सूचित करें, सूचना देने वाले को उचित इनाम दिया जाएगा कृपया करके इस सन्देश को प्रत्येक ग्रुप में शेयर करें, ताकि किसी का परिवार एक दूसरे से बिछड़ने के दुःख की घड़ी से बाहर आ सकें,बिछड़ा परिवार फिर से एक दूसरे से मिल सके, इंसानियत के ख़ातिर संदेश को तस्वीर के साथ शेयर करें, और पता लगते ही कृपया इन नंबरों पर संपर्क करें -> 9877759422, 8077081542 नोट:- ये आख़िरी बार शायद पहाड़ में धारी की तरफ देखे गए हैं, पता बताने वाले को इनाम भी दिया जाएगा और हम आपके सदा आभारी रहेंगे निवेदक आज़ाद मंच, नैनीताल
अंक 66 (16 दिसंबर 2018) : सड़कों में गड्ढे या गड्ढों में सड़क, एक सुझाव
साहिबान, आज हम बात करेंगे पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट यानि पीडब्ल्यूडी की जिसकी बदौलत आज हम गाड़ी में बैठे -बैठे ऐसा महसूस करते हैं जैसे किसी झूले में झूल रहे हों , और जब पैदल चलते हैं तो ये गर्व महसूस होता है कि हमारे देश में कोई तो विभाग ऐसा है, जो समानता का अधिकार अधिनियम को दिल से मानता है और सिर्फ़ मानता ही नहीं करके भी दिखाता है, इस विभाग के लिए गड्ढों और सड़कों में कोई भेदभाव नहीं है , आप जब भी नैनीताल आएंगे तो सच्ची में कंफ्यूज़ा जाएंगे, सड़क में गड्ढा है या गड्ढे में सड़क, हमारे यहाँ आपको देखने मिलेगा, गड्ढों और सड़कों का अजब संगम,न न न , आज हम विभाग के अधिकारियों के मोटे वेतन , कामचोर रवैये या विभागीय भ्रष्टाचार की बात नहीं करेंगे, आज बस बात होगी तो सिर्फ़ गड्ढों की,हुज़ूर, ऐसा नहीं है … कथित विभाग जनता का भला नहीं चाहता,न न, ऐसा सोचना भी पाप होगा, बाई गॉड, विभाग जनता का इतना भला चाहता है कि वो दूरदृष्टि का इस्तेमाल करता है, अब जिस जगह गड्ढ़े ही नहीं होंगे, तो वहां वाहन तेज़ गति से चलेंगे जिससे कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है, लेकिन हमारे यहाँ सड़कों में गड्ढेनुमा स्पीड ब्रेकर जो लगे हैं, मजाल है कोई वाहन 10 किमी / घंटा से अधिक भाग ले, जिससे दुर्घटना का सवाल ही नहीं उठता साहब,हाँ, वो अलग बात है कोई गड्ढे में नियंत्रण खोकर गिर पड़े, उसके लिए पी.डब्ल्यू.डी. ज़िम्मेदार नहीं होगा ,अरे भाई, आपको गड्ढे में पैदल चलने या गाड़ी चलाने का हुनर नहीं आया तो इसमें भला हमारे प्रिय विभाग की क्या ग़लती,वैसे मेरा एक छोटा सा आईडिया अगर विभाग माने तो,उसने जगह जगह ये बोर्ड लगा देने चाहिये जिसमें लिखा हो,”ऐ भाई ज़रा देख के चलो, आगे ही नहीं , पीछे भी , जवान ही नहीं , बुड्ढा भी, सड़क ही नहीं, गड्ढा भी , ऐ भाई “ख़ैर, आख़िर में, हमारा ज़िलाधिकारी महोदय, नैनीताल, विधायक महोदय नैनीताल, अधिशासी अभियंता महोदय, लोक निर्माण विभाग, नैनीताल तथा अन्य समस्त शासन व प्रशासन से अनुरोध है कि गड्ढों में बनी सड़क को केवल सड़क बनाने के आदेश सम्बंधित अधिकारियों / कर्मचारियों को करने की कृपा करें, ताकि जनमानस के लिये आवाजाही आसान हो और सड़कें साफ़ सुधरी व अच्छी होंगी तो बाहर से आये पर्यटकों पर भी उसका बहुत सुन्दर प्रभाव पड़ेगा, जिससे वो किसी और को भी नैनीताल घूमने की सलाह देगा,सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है ….अंक 65 (15 दिसंबर 2018) : .. क्योकि गैस होम डिलीवरी आपका अधिकार है
साहिबान,
आज हमारे पास एक घरेलू मुद्दा है, जी हाँ, बिल्कुल सही पकड़ें हैं, वो है गैस होम डिलीवरी का मुद्दा
अक्सर लोगों को गैस लेने की इतनी चिंता होती है कि वो गैस सिलेंडर की गाड़ी आने से एक या दो घंटा पहले लाइन में अपने ख़ाली सिलेंडर रखकर बैठ जाते हैं और गाड़ी आने पर धक्का -मुक्की सहते हुए बड़ी जद्दोजहद के बाद गैस बांटने वाले भइया की मेहरबानी से सिलेंडर की प्राप्ति करते है, कुछ लोगों के चेहरे गैस मिलने के बाद ऐसे खिलते हैं, मानो गैस प्राप्ति न हो गयी पुत्र धन प्राप्ति हुई हो,
और हाँ, मज़े की बात ये है कि ज़्यादातर लोग अपना मज़दूर करके घर सिलेंडर ले जाते है
तब मज़दूरी मिलाकर करीब
₹ 900 में एक सिलेंडर पड़ता है,
हाँ, हाँ
अब आपका कहना होगा कि हम बहुत कहते हैं लेकिन गैस वाले भइया होम डिलीवरी के लिये कह देते हैं सब मज़दूर गए हैं, तो हम चुप-चाप आ जाते हैं,
अपना मज़दूर करके,
हम समझ सकते हैं इस
आपा- धापी वाले युग में समय की बड़ी क़ीमत है और आप सब उन लोगों से बहस करके अपना वक़्त बर्बाद नहीं कर सकते,
इसलिए हम आज आपको ऐसी तरक़ीब बताने वाले हैं, जिससे आपकी गैस की परेशानी हमेशा के लिये खत्म हो जाएगी और गैस पहुंचेगा, आपके घर तक वो भी बिना मज़दूरी दिये,
तो जनाब तरक़ीब ये है कि जब आप ऑनलाइन या फ़ोन पर बुकिंग करते हैं तब एक काम ये करना है कि 05942-235257
पर सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक अपना सिलेंडर होम डिलीवरी के लिये बुक करा दें,
आपके क्षेत्र में जब
गैस वितरण के लिये आएगा तब गैस ऑफिस से आपकी बुकिंग की पर्ची को प्राथमिकता दी जाएगी, दूसरा यदि आप ऑफिस में फ़ोन पर होम डिलीवरी के लिए नहीं कह पाते हैं तो आप अपनी बुकिंग पर्ची गैस बांटने वाले भइया के पास ले जाइये और होम डिलीवरी के लिए कहें, उस पर भी यदि वो मना करे तो आप सीधे गैस मैनेजर संतोष पंत को 8650002562 पर फ़ौरन शिकायत कर सकते हैं,
हम आपको यक़ीन दिलाते हैं, गैस वाले भइया आपको होम डिलीवरी के लिये दोबारा मना नहीं करेंगे|
ख़ैर,
आज के लिये इतना ही
आख़िर में,
नैनीताल के इज़्ज़तदार बाशिंदों से हमारी गुज़ारिश है कि गैस के लिये टेंशन न लें, बस जो नंबर ऊपर दिए गए हैं उनका इस्तेमाल करें, अरे भई जबसे फ़ोन पर बुकिंग होना शुरू हुआ है न, ऑफिस वाले कर्मचारी दिन भर बोर हो जाते हैं, कुछ काम करेंगे तो बोरियत भी दूर होगी,
आइये, प्रण लें उनको बोर नहीं होने देंगे और गैस मज़दूरी भी बचाएंगे,
अंक 64 (14 दिसंबर 2018) : पेयजल लीकेज पार्ट -2
मैं जल हूँ, मैं ही जीवन हूँ, फिर भी हो रहा बर्बाद, कौन बचाएगा मुझे ?
साहिबान, ये जो तस्वीर / वीडियो आप देख रहे हैं न, वो हमारे खूबसूरत शहर नैनीताल में बिरला रोड पर प्रिम रोज़ होटल से थोड़ा आगे की है, इस तस्वीर / वीडियो के लाल घेरे में जो चीज़ दिखाने की कोशिश की गयी है वो है, पानी की बेतहाशा बर्बादी, यहां पानी की लाइन में बहुत दिनों से भयंकर लीकेज है, जिसमें से हज़ारों लीटर पीने का पानी सड़क पर गिरकर बर्बाद हो रहा है। यही स्थिति बिड़ला रोड पर अल्बनी लॉज के पास भी करीब भी बनी हुई है। यह जानकारी कुमाऊं विश्वविद्यालय के डॉ. महेंद्र राणा जी ने दी है। इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है, वक़्त ही कहाँ है आजकल किसी के पास, जो जल संस्थान को लीकेज की खबर दे, वो तो भला हो हमारे साथी नीरज जोशी (अध्यक्ष, टूर एन्ड ट्रेवल्स ) का जिनकी नज़र उस बर्बादी पर पड़ी और उन्होंने आज फ़ौरन इस ख़बर को हमसे साझा किया, जनाब आपका वक़्त ज़्यादा न लेते हुये सीधे ख़्वाहिश ज़ाहिर करते हैं।
आख़िर में, ज़िलाधिकारी महोदय, नैनीताल, विधायक महोदय, नैनीताल, अधिशासी अभियंता महोदय, जल संस्थान, नैनीताल आपसे ख़ुसूसी इल्तेजा है कि नैनीताल में जगह-जगह हो रही लीकेज को चिन्हित करवाकर पानी की बर्बादी को रोकने के लिये ठोस क़दम उठायें साथ ही साथ जिस तक़लीफ़ को आज आपके साथ साझा किया है उसपर तत्काल प्रभाव से मरहम लगाने के लिये अपने कारिंदों को हुक्म देने की मेहरबानी करें,
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है ….
अंक 63 (13 दिसंबर 2018) : पानी की बर्बादी पार्ट -1
मैं जल हूँ, मैं ही जीवन हूँ, फिर भी हो रहा बर्बाद, कौन बचाएगा मुझे ?
साहिबान, ये जो तस्वीर / वीडियो आप देख रहे हैं न, वो हमारे खूबसूरत शहर नैनीताल के एक गंदे से नाले की है, जो चीना बाबा मंदिर के सामने से झील में जा रहा है, लेकिन अभी हम थोड़ी जल्दी में हैं (गंदगी के बारे में कोई बात नहीं करेंगे ) क्यूंकि इस तस्वीर के लाल घेरे में जो चीज़ दिखाने की कोशिश की गयी है वो है, पानी की बेतहाशा बर्बादी, चीना बाबा मंदिर के सामने, कॉरोनेशन होटल आउट हाउस से लगते हुये नाले पर पानी की लाइन में बहुत दिनों से भयंकर लीकेज है, जिसमें से हज़ारों लीटर पीने का पानी नाले में गिरकर बर्बाद हो रहा है, जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है, वक़्त ही कहाँ है आजकल किसी के पास, जो जल संस्थान को लीकेज की खबर दे, वो तो भला हो हमारे साथी अधिवक्ता शारिक ख़ान का जिनकी नज़र उस बर्बादी पर पड़ी और उन्होंने आज फ़ौरन इस ख़बर को हमसे साझा किया, आपका वक़्त ज़्यादा न लेते हुये सीधे ख़्वाहिश ज़ाहिर करते हैं,
आख़िर में, ज़िलाधिकारी महोदय, नैनीताल, विधायक महोदय, नैनीताल, अधिशासी अभियंता महोदय, जल संस्थान, नैनीताल आपसे ख़ुसूसी इल्तेजा है कि नैनीताल में जगह- जगह हो रही लीकेज को चिन्हित करवाकर पानी की बर्बादी को रोकने के लिये ठोस क़दम उठायें साथ ही साथ जिस तक़लीफ़ को आज आपके साथ साझा किया है उस पर तत्काल प्रभाव से मरहम लगाने के लिये अपने कारिंदों को हुक्म देने की मेहरबानी करें।
अंक 62 (12 दिसंबर 2018) : फिर हुआ असर’आज़ाद के तीर’ का, शुक्रिया ईओ नगर पालिका परिषद, नैनीताल
साहिबान, आज़ाद मंच ने नवीन समाचार के आज़ाद के तीर स्तंभ में सड़क पर बहता गंदा पानी बना दो विभागों की फुटबॉल उन्वान के साथ नैनीताल की ग्लैन्डन रोड पर जल संस्थान के सामने, प्राथमिक विद्यालय के पास से सटी हुई नाली की तस्वीर दिखाई थी, जिसमें गौशाला से आने वाला गंदा पानी बंद नाली होने की वजह से सड़क पर फ़ैल रहा था और झील में जा रहा था, जिसको तत्काल प्रभाव से रोकने और बंद पड़ी नाली की सफ़ाई करने के लिये हमने दोनों विभागों (जल संस्थान और नगर पालिका ) के उच्चाधिकारियों से विनम्र अपील की थी कि कार्य क्षेत्र विवाद में न उलझें बल्कि नैनीताल नगर के हित को सबसे ऊपर रखते हुए कोई ठोस क़दम उठायें, हमारा विनम्र निवेदन अधिशासी अधिकारी नगर पालिका, नैनीताल रोहिताश शर्मा ने स्वीकार किया तथा अपनी टीम को भेजकर कार्रवाई की वहीं मल्लीताल बाज़ार वार्ड सभासद मोहन सिंह नेगी ने बताया कि ईओ के निर्देशन में और उनकी मौजूदगी में नाली की सफ़ाई की गयी, बहरहाल, जो भी हुआ है उससे हमारे नैनीताल के दिल को सुकून ज़रुर मिला होगा, जिसके लिये हम आज़ाद मंच परिवार की ओर से नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा तथा सभासद मोहन सिंह नेगी का तहेदिल से शुक्रिया अदा करते हैं और उम्मीद करते हैं आने वाले वक़्त में भी नैनीताल के लिये आपका यही जज़्बा क़ायम रहेगा|
अंक 61 (11 दिसंबर 2018) : सड़क पर बहता गंदा पानी बना दो विभागों की फुटबॉल
गंदा पानी समा रहा है झील में, जल संस्थान बोलता है नगर पालिका की ज़िम्मेदारी, नगर पालिका समझती है जल संस्थान का है मामला, मझधार में फंसा आम नागरिक
साहिबान,
ये जो तस्वीर आप देख रहे है न ये ग्लैन्डन रोड, जल संस्थान वाली सड़क के नाम से भी जिसे जाना जाता है वहां प्राथमिक विद्यालय (गौशाला स्कूल) की दीवार से सटी हुई नाली से बहुत दिनों से गंदा पानी शीतल पेय पदार्थ गोदाम के पास से गुज़रता हुआ नाले में गिर रहा है जो सीधे झील में समां रहा है, पड़ताल करने पर पता चला कि उक्त गंदा पानी सीवर का नहीं है बल्कि गौशाला से आ रहा है, जो पहले नाली साफ़ होने की वजह से सड़क पर फैलता नहीं था लेकिन काफ़ी दिनों से बंद पड़ी नाली के कारण गंदा पानी सड़क तक फैलकर आने -जाने वाले लोगों के पैरों में तो लग ही रहा है, साथ -साथ झील में भी जा रहा है, अब सवाल उठता है कि क्या होना चाहिये? हमारा सुझाव है कि मामला गंभीर है, जैसे अपराध होने पर दो थाने आपसी सीमा विवाद में उलझ जाते हैं, मेहरबानी करके ऐसे न उलझें बल्कि समाधान की बात करें क्यूंकि नगर का हित है सर्व प्रथम, बाक़ी तो सब मोह माया है साहब,
आख़िर में, ज़िलाधिकारी महोदय, नैनीताल अध्यक्ष महोदय व अधिशासी अधिकारी महोदय, नगर पालिका नैनीताल, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान, नैनीताल से हमारी तहेदिल से इल्तेजा है कि नगर के हित को सबसे पहले रखते हुये झील में जाते हुये गंदे पानी को रोकने के ठोस उपाय करने की कोशिश करें, आपकी मेहरबानी होगी।
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है….
अंक 60 (10 दिसंबर 2018) : यहाँ शायद बंद पड़े सीवर प्लांट से भी मिल रही मलाई !
हरीनगर में बरसों से बॉयलर, खराब पड़ा है, फिर किस बात की ठेकेदारी चल रही है ? क्यों जल संस्थान घोड़े बेचकर सोया ?
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न वो किसी ख़ाली पड़ी लोहे से बनी टंकियों की नहीं है बल्कि हमारे प्रिय जल संस्थान की बहु चर्चित योजना सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की है, जिसे बरसों पहले इस आशा से स्थापित किया गया था कि यहां सफलतापूर्वक सीवरेज का ट्रीटमेंट हो जाया करेगा, आशा अच्छी थी सोच भी अच्छी थी, इसलिए किसी बाहरी कम्पनी को गुणवत्ता कार्य करने के लिये ठेका दे दिया गया, कुछ दिन धड़ल्ले से यहां ट्रीटमेंट का काम भी हुआ, फिर अचानक एक मनहूस दिन प्लांट का बॉयलर ख़राब हो गया, फिर जल संस्थान से लेकर ठेका कम्पनी के आला अधिकारी-कनिष्ठ कर्मचारी सभी परेशान रहे, धीरे -धीरे सारे ज़ख़्म भरने लगे और बंद पड़े प्लांट का दर्द और वहां नियुक्त स्टाफ भी कम होने लगा, एक दिन वो आया जिस दिन वहां कोई झाँकने वाला नहीं रहा, अब ख़राब बॉयलर को ठीक कराने की बात पुरज़ोर तरीक़े से कोई नहीं रखता, सुनने में आया है कि प्लांट के चले बिना ही सबको मलाई खाने को मिल रही है, तो सही कराकर क्या फ़ायदा ? वो कहते है न :- जो मिले यूं तो कोई करे क्यों ? यानी जब प्लांट के बिन चले ही मलाई मिल रही हो तो… बाकी आप खुद ही समझदार हैं। अब यही हाल सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े लोगों का है, शायद अब यही मानसिकता हो गयी होगी अगर प्लांट सही हो जाएगा तो काम भी करना पड़ेगा, और वैसे भी काम करके तो कोई भी खा लेता है लेकिन असली बाज़ीगर तो वो है, जो बंद पड़े प्लांट की रोटियां तोड़े। मलाई खाये..
आख़िर में, ज़िलाधिकारी महोदय, नैनीताल, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान, नैनीताल से हमारी तहेदिल से इल्तेजा है कि हरिनगर में मौजूद जीर्ण -क्षीर्ण पड़े सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को दोबारा ज़िंदगी देने की मेहरबानी करें, जिससे दोबारा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम सुचारु हो सके।
अंक-56 (9 दिसंबर 2018) : मौत का कुआँ बना रास्ता, ‘हैप्पी न्यू इयर’ पर कहीं हो न जाये ‘हैप्पी बड्डे’
पगडंडी जितनी बची है चौड़ाई, टूट चुकी है सुरक्षा दीवार
साहिबान, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न वो किसी मौत के कुएं की नहीं है बल्कि एक ज़माने में बहुत ही मशहूर रहे सिनेमा हॉल अशोक टॉकीज (वर्तमान में कार पार्किंग) के मैदान की है, जहाँ से आम जनता के लिए लगभग एक हाथ चौड़ा रास्ता छोड़ा हुआ है, इतने चौड़े रास्ते पर शहर के आवारा स्वान भी निकलने से हिचकिचाते हैं और पक्की सड़क से घूमते हुए माल रोड पर निकल जाते हैं लेकिन मनुष्य का जीवन बेहद ही व्यस्त हो गया है, वो दो मिनट बचाने के लिये मौत के कुएं वाली पगडंडी पर चलने को मजबूर है, यहां मौत की पगडंडी इसे इसलिए कहा जा रहा है क्यूंकि अगर यहां से गुज़रते हुये किसी का ज़रा भी बैलेंस बिगड़ा तो भले ही उसे खेल का शौक हो न हो वो शख़्स सीधा ज़िला खेल संघ के परिसर में एंट्री लेगा, इसकी वजह ये है कि बरसों पहले जिस रेलिंग पर फ़िल्मो के शौक़ीन लोग टिकट खिड़की खुलने या फ़िल्म खत्म हो जाने के इंतज़ार में बैठकर चने- मूंगफली खाया करते थे, वो रेलिंग भी अपने आका सिनेमा हॉल की फ़िल्म ख़त्म होने पर ख़ुद भी ख़त्म हो गयी, फिर उसकी जगह रह गया सिर्फ़ ख़तरा वो भी जानलेवा ख़तरा क्यूंकि ऊपर रास्ते से नीचे की गहराई लगभग इतनी है कि किसी भी अच्छे भले इंसान की वहां से गिरने के बाद कोई सूरमा उसकी हड्डी-पसलियों में फ़र्क़ पैदा नहीं कर सकता, सुनने में ये भी आया है कि कुछ दिन पहले कोई पुलिसकर्मी इस जगह से गिर भी चुका है उस पीड़ित के वर्तमान हालात अभी पता नहीं लग पाये हैं, हादसे के बावजूद कोतवाली का बाक़ी स्टाफ अभी भी मजबूरी में इस रास्ते पर से जोखिम उठाते हुये आता-जाता है। इत्तेफ़ाक़ से दूसरी तरफ़ हमारे शहर की नगर पालिका भी है जिसके कर्मचारी भी दिन भर में यहां से गुज़रते होंगे, कुल मिलाकर कहने का इतना सा मतलब है कि जनाब चाहे कर्मचारी या स्टाफ किसी का भी हो सबको सुरक्षा से जीने का अधिकार है, तो फिर क्यों न इस पगडंडी को रास्ता बनाया जाये और क्यों न आम नागरिकों की हिफाज़त के लिये एक सुरक्षा दीवार बनवाई जाये।
कुछ वर्ष पूर्व ‘हैप्पी न्यू ईयर’ पर यहां से गिरकर कुछ लोगों का ‘हैप्पी बड्डे’ भी हो चुका है। फिर ‘हैप्पी न्यू ईयर’ आ रहा है, इसलिए हमारी चिंता और बढ़ गयी है।
आख़िर में, ज़िलाधिकारी महोदय, नैनीताल अध्यक्ष महोदय और अधिशासी अधिकारी महोदय, नगर पालिका, नैनीताल आप सबसे विनम्र निवेदन है कि मामले का संज्ञान लेते हुए कृपया जनहित के इस छोटे किन्तु गंभीर मुद्दे पर शीघ्र अति शीघ्र कोई कार्रवाई करने की कृपा करें, जिससे उपरोक्त मार्ग से आने- जाने वाले जनमानस की सुरक्षा बनी रहे, आपकी अति कृपा होगी।
अंक-55 (8 दिसंबर 2018) : सर पर लटकी तलवार,कभी भी हो सकता है हादसा
साहिबान, बोलते हुए डर लगता है क्यूँकि आज जो तस्वीर आपके सामने पेश की जा रही है वो हमारे ज़िलाधिकारी कार्यालय परिसर नैनीताल की है, अब इतने उच्च कोटि के कार्यालय परिसर के बारे में कुछ कहना हिमाक़त करने जैसा काम है लेकिन अपनी ख़ता पर मिलने वाली सज़ा की परवाह न करते हुये आप सबकी जानकारी के लिये ये बताना ज़रूरी समझा जा रहा है कि आप जब कभी तहसील में कोई काम करवाने आयें, जैसे :- आय, जाति, स्थाई प्रमाण पत्र बनवाने आये तो तहसील की तरफ़ से आने वाली सीढ़ियों से न आकर डाक घर की तरफ से आएं और जन सेवा केंद्र में सावधानीपूर्वक अपना काम निबटाकर चले जायें, अब आपके ज़ेहन में यही सवाल घूम रहा होगा कि इतने छोटे से काम के लिये इतना घुमाकर क्यों बुलाया जा रहा होगा, अरे जनाब, कभी तो इशारों की ज़ुबान समझ लिया करो, किसी दिन पिटवाओगे बाय गॉड, ख़ैर, अब थोड़ा क़रीब आकर सुनिए (क्योंकि व्हाट्सप्प ग्रुप के भी कान होते हैं) मामला ये है कि जन सेवा केन्द्र के ठीक सामने वाली बिल्डिंग में छत पर एक तलवार नुमा धारदार टीन लटकी हुई है, जो कभी भी बिल्डिंग की छत को अलविदा कह सकती है और किसी भी मासूम के सर पर गिर सकती है, यहां हम जगह -जगह निकले रखे खड़ंजे के ख़ूबसूरत पत्थरों की बात नहीं करेंगे, क्या पता किस ठेकेदार का भला किया गया हो, जिसने अच्छे खासे पत्थरों को निकाला और अब क्या पता उन्हीं तिकोने टाइप पत्थरों को लगाकर कौन ठेकेदार मलाई खाने वाला हो, न न, इन सब बातों के बारे में बिल्कुल भी बात नहीं करनी है, ये अत्यंत गोपनीय मामला है, ख़ैर, ज़्यादा न कहते हुये अपने लफ़्ज़ों को आराम देते हैं,
आख़िर में, ज़िलाधिकारी महोदय, उपज़िलाधिकारी महोदय, अपर ज़िलाधिकारी महोदय, तहसीलदार महोदय, पटवारी महोदय, समस्त कर्मचारी महोदय, उनके परिवारों के समस्त सदस्यों, सदस्यों के परिचितों, परिचितों के परिचितों तथा यहां से आने-जाने वाले मासूम लोगों से निवेदन है कृपया तहसील की गली से बच के गुज़रना, क्योंकि हमें यक़ीन ही नहीं बल्कि पूरा भरोसा है कि जब तक वो धारदार तलवार टीन तेज़ हवा से ख़ुद न गिर जाये, किसी की मजाल नहीं जो उसे हटाने की ज़हमत उठाये| सब भौएं मोड़कर यही कहेंगे, इतने बिजी टाइम में ये सब देखने की किसे पड़ी है भला…हुंह्ह
अंक 54 (7 दिसंबर 2018) : फिर हुआ असर आज़ाद मंच व नवीन समाचार का : शुक्रिया उस्मान साहब
साहिबान, हमने नवीन समाचार के कॉलम आज़ाद के तीर में बुधवार के अंक में ‘खम्बों के साथ भी खम्बों के बाद भी’ उन्वान के साथ एक बीमा कम्पनी के विज्ञापन की चर्चा की थी, जिसमें नैनीताल के ठंडी सड़क व आस-पास के इलाक़ों में बिजली के खम्बों को प्रचार-प्रसार का माध्यम बना रखा था, क्यूंकि सरकारी सम्पत्ति का दुरूपयोग हो रहा था इसलिये हमने विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता से ख़ुसूसी इल्तेजा कि और इस पर अधिशासी अभियंता जनाब सय्यद शीराज़ उस्मान साहब ने फ़ौरन कार्रवाई करते हुये उक्त कम्पनी के फ़्लैक्स उतरवाने के निर्देश दे दिये फ़क़त एक दो (डिग्री कॉलेज, सड़क पर) को छोड़कर लगभग सभी फ़्लैक्स हटवा दिए गये हैं, न न, यहां छूटे हुये एक-दो फ़्लैक्स की बात करके हम आपकी कार्यशैली पर सवाल नहीं उठा रहे हैं बल्कि उन कारिंदों के बारे में आपको ये पॉइंट बता रहे हैं कि जिन्हे आप फ्री समझ रहे थे वो निहायती बिजी निकले और जल्दबाज़ी में काम करते हुये निकल गये, अब उनको कौन पकड़ कर लाये,
आख़िर में, इस तरह फ़ौरन कार्रवाई करने पर हम आपका तहेदिल से शुक्रिया अदा करते हैं और उम्मीद करते हैं की आने वाले वक़्त में भी आप इसी तरह समाज व सरकार के हित को सबसे ऊपर रखते हुये काम करते रहेंगे.
अंक 53 (5 दिसंबर 2018) : खम्बों के साथ भी, खम्बों के बाद भी : एलआईसी
सरोवर नगरी नैनीताल से एक बीमित ख़बर आ रही है कि एलआईसी ने अपने 62 साल पूरे करने की ख़ुशी में जहां एक तरफ अपनी ताबड़तोड़ योजनायें शुरू की हैं। वहीं दूसरी तरफ़ इस जश्न की खुशी में सरकारी बिजली के खम्बे भी झूम रहे हैं, न, न ऐसा बिल्कुल नहीं है कि नगर पालिका के सीमेंट वाले खम्बों पर खुशी का नशा कम हो, बिल्कुल नहीं वो भी मदमस्त होकर मस्ती में झूम रहे हैं लेकिन हो सकता है वो कारोबारी रिश्ते की वजह से झूम रहे हों लेकिन यहां तो किसी भी तरह के कारोबारी रिश्ता होने से जनाब सय्यद शीराज उस्मान साहब जो बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता हैं उन्होंने सरासर इंकार किया है, लेकिन उस पार्टी को नोटिस देने के नाम पर मसरूफियत की दुहाई देकर झट से पल्ला-पलड़ा दोनों झाड़ लिए। बाय गॉड, अब इतनी मसरूफ़ रहने वाली हस्ती को कौन फ़ुर्सत में लाये और सरकारी सम्पति के नाजायज़ इस्तेमाल पर कौन रोक लगवाने को मुत्तासिर करे। भई हमसे तो न हो पाएगा, हमने जब उनसे मामले का संज्ञान लेने को कहा तब तो उन्होंने हमारा मान रखने के लिए ‘देखते हैं’, कहकर टाल दिया फिर कुछ दिन बाद हमने फॉलो अप लेने के लिए बात करनी चाही फिर तो साहब ने हमारा नंबर देखर उठाना ही बंद कर दिया, समझ नहीं आरा क्या बिगाड़ा होगा हमने ऐसा??? आख़िर में, जनाब अधिशासी अभियंता से हमारी ग़ुज़ारिश है कि सरकारी सम्पति का दुरूपयोग क्या होता है उसकी परिभाषा सभी को बता देनी चहिये ताकि निकट भविष्य में ऐसे कामोों की पुनरावृत्ति न हो।
अंक 52 (4 दिसंबर 2018) : जानें आज एक बार फिर हुआ कहाँ हुआ आज़ाद मंच और नवीन समाचार का असर शुक्रिया : ई ओ नगर पालिका नैनीताल का
जनाब, जैसा कि आप सब अच्छी तरह जानते हैं हमने ‘नवीन समाचार’ के ‘आज़ाद के तीर’ में 2 दिसंबर के अंक में ‘नैनीताल के नाले बने कूड़ा घर’… उन्वान के साथ सनवाल स्कूल के पास वाले नाले की दुःखभरी दास्तान से ईओ, साहब को रूबरू कराया था, कल शपथ ग्रहण समारोह के चलते सभी लोग मसरूफ़ रहे लेकिन सोमवार की सुबह अपने साथ कुछ ठोस इरादे लेकर निकली और जिसका अंजाम ये हुआ कि सुबह से ही हमारे पास नाले की सफ़ाई शुरू हो गयी और सफ़ाई चल रही की तस्वीरें लगातार आने लगी, जिसे देखकर दिल खुश हो गया, आज के लिये ईओ साहब तारीफ़ के क़ाबिल हैं जिनके ज़हन में मामला आते ही तत्काल कार्रवाई को अंजाम दिया गया, तहे दिल से आपका शुक्रिया , आख़िर में, ज़िलाधिकारी महोदय, अधिशासी अधिकारी और अब अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान हो चुके सबके प्रिय सचिन नेगी से अर्ज़ है कि जैसा करिश्मा आज एक नाले की सफ़ाई करके दिखाया गया है, अंदर की बात बताऊँ तो पूरे शहर के सारे नालों का यही हाल है इसलिए अगर आपकी एक टीम पूरी तरह से नालों की ख़िदमत में लग जाये तो मुश्किल से एक महीना भी नहीं लगेगा और शहर के सारे नालों को नई ज़िंदगी मिल जाएगी, करके देखिये, अच्छा लगेगा और दुआएं मिलेंगी सो अलग…
अंक 51 (3 दिसंबर 2018) : जल्दी आना मित्र पु….., आपके इंतज़ार में आपकी-ठंडी (पड़ी) सड़क
जनाब, एक रोज़ की बात है, लगभग एक अर्सा पहले सरोवर नगरी नैनीताल ठंडी सड़क के नाम से मशहूर एक सूनसान सी सड़क के किनारों पर दो छोटे-छोटे टीन शेड बनाये गये, एक मल्लीताल के छोर पर दूसरा तल्लीताल के छोर पर, जहां तक हमें लगता है इसका मक़सद ठंडी सड़क की वीरानी दूर करने और उसको गुनहगारों की ऐश गाह बनने से रोकना रहा होगा। ख़ैर, उन चौकियों का नाम रखा गया जल पुलिस चौकी। जिसके अभिभावकों के तौर पर ज़िम्मेदारी उठाने वाले कोतवाली मल्लीताल और थाना तल्लीताल के वज़ीर बने थे। इन ख़ूबसूरत सी नयी-नयी जल चौकियों को देखने शहर के बाशिंदों के साथ -साथ दूर दराज़ से सैलानी भी आये और इस तरह की बेहतरीन पहल की सबने जमकर तारीफ़ की। जिस सड़क पर अँधेरा होते ही नशेड़ियों का क़ब्ज़ा हो जाया करता था, उन नशेड़ियों में दहशत फ़ैल गयी और उन्होंने अपना रुख़ किसी और अड्डे की तरफ़ कर लिया। जिसका असर ये हुआ कि शराबी-कवाबी, गुंडे-मवालियों के नाम से दहशतज़दा सड़क पर अँधेरा होने के बाद भी महिलायें व बच्चे आते-जाते ख़ुद को हिफाज़त में महसूस करने लगे। हालांकि नैनीताल में गुनाह का स्तर बाक़ी शहरों के सामने बौना है, फिर भी ठंडी सड़क पर जल पुलिस चौकी होने से एक तो मनचलों पर रोक लगी, वहीं दूसरी तरफ़ तालाब में छलांग लगाने वाले बाज़ीगरों को भी ऐसा करने में रिस्क लगा, क्योंकि उनकी समझ में आ गया था कि अगर जल पुलिस ने उन्हें देख लिया तो उनके अरमानों पर पानी फिर जाएगा, इसलिए ख़ुदकुशी का ग्राफ भी कम होता चला गया। सब कुछ ठीक चल रहा था, फिर अचानक क्या हुआ ? जल पुलिस चौकी पर वर्दीधारियों की गिनती कम होने लगी और एक-एक करके सारे वर्दीधारी वहां से ग़ायब होते चले गए। फिर एक दौर वो भी आया जब जल चौकी कहे जाने वाले टीन शेड आवारा कुत्तों के पसंदीदा रैन बसेरे बन गये, इसके बाद कुत्तों की ज़्यादती से आजिज़ आकर किसी जनाब ने शेड में ताला लगा दिया, जिससे सारे आवारा कुत्तों में ये ख़बर आग की तरह फैल गयी, जिससे उन सबमें मायूसी की लहर दौड़ गयी, फिर उन्होंने भी खुली छत के नीचे साँस लेने में अपनी शान और भलाई समझी। ख़ैर, अब किसने क्या समझा, ये जाँच का मामला है, जो हमारे बस की बात नहीं। हम तो आज आपके सामने सिर्फ़ इतना पेश करना चाहते हैं कि वहां अब न कोई हमारा वर्दीधारी मित्र गश्त करता दिखता है, न ही अँधेरे को ख़त्म करने की कोई रोशनी होती है। वहां गुण्डे-मवालियों, नशेड़ियों का अड्डा फिर से फल- फूल रहा है, जिसे देखने वाला शायद तब तक कोई नहीं जब तक कोई बड़ी वारदात उस इलाक़े में न हो जाये। आज हमारी ठंडी-ठंडी सड़क का हाल हर शाम के बाद बद से बदतर होता चला जाता है लेकिन शहर के शरीफ़ लोग अराजक तत्वों के मुंह लगना नहीं चाहते और वर्दीधारी मित्र वहां तक जाना नहीं चाहते। अब हमारी समझ मे ये बात नहीं आ रही कि इस मामले में क्या ऊपर से फ़रिश्ते आएंगे- हमारी मदद करने या उत्तराखंड की ज़मीन पर मौजूद हमारे मित्र आएंगे…? आख़िर में, मा. उच्च न्यायालय, उत्तराखंड और उत्तराखंड पुलिस के आला अधिकारियों से हमारी इल्तेजा है कि ऊपर जिस मामले का ज़िक्र किया गया है उसे अपनी जानकारी में लेने की मेहरबानी करें और अपने अधीनस्थों को हुक़्म देकर, उस वीरान और सूनसान पड़ी ठंडी सड़क पर पुलिस और प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त करने का अज़ीम और नेक काम करें, जिससे नैनीताल के बाशिंदों के साथ- साथ सैलानियों को भी वहां घूमने में हिफाज़त महसूस हो सके।
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है ….
अंक-50 (2 दिसंबर 2018) : नैनीताल के नाले बने कूड़ा घर, ज़रा सी बारिश के बाद झील में लेेजाने को तैयार है कूड़ा
जनाब, ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न वो सनवाल स्कूल मल्लीताल, नैनीताल के पास एक बेबस नाले और उसमें पड़े कूड़े की है जिसकी दास्तां कुछ यूँ है, तो साहब, बरसात को बीते हुए भी लगभग 2 महीने हो गए लेकिन नैनीताल शहर में अब तक ये हालत रहे कि कोई चुनाव में मसरूफ़ था, कोई पुलाव में, किसी ने भी नालों में बारिश के साथ आये कूड़े को नहीं देखा, बरसात के बाद सर्दी भी आधी उम्र को आ गयी, लेकिन कूड़ा जहां पड़ा था, आज भी वहीं पड़ा हुआ, कूड़ा दिन भर पड़ा -पड़ा ये सोच रहा है कि कोई तो ऐसा मसीहा आये, जो नाले की ज़मीन से उठाकर, उन्हें उनके जायज़ मुक़ाम तक ले जाये, लेकिन हुआ इसका कुछ उल्टा जेब से अमीर लोगों ने उस लाचार कूड़े को, उसकी गर्त से निकाला तो नहीं बल्कि अपने घर का भी कूड़ा लाकर, कूड़े के ख़ानदान में इज़ाफ़ा कर दिया, अब आलम ये है कि शहर के नालों में जितने भी कूड़ा रोकने वाले जाल लगे हैं, वे सब जाल मुंह तक लबालब भर गए हैं और जिनको देखने वाला कोई रहबर या रफ़ीक़ नहीं है, बेचारा कूड़ा तो मासूमियत से आने -जाने वाले लोगों को टक-टकी लगाये बेचारगी भरी नज़रों से देखता है लेकिन उसकी बेचारगी पर वे लोग रहम नहीं खाते क्यूंकि वे फ़ास्ट फ़ूड खाते हैं और नाले की क़िस्मत में दो थैला कूड़ा और बढ़ा देते हैं, कूड़ा बार -बार नाले से बाहर निकलने की कोशिश में हवाओं को खरी -खोटी सुनाता है, हवाएं उसकी चाल को समझ नहीं पाती और अपना पूरा ज़ोर लगाकर कूड़े की हस्ती उड़ाना चाहती हैं लेकिन 2-4 कागज़ों के अलावा कूड़े का कुछ नहीं उड़ा पाती क्यूंकि नाले की गहराई उसके सितम से ज़्यादा है, जिसकी वजह से हवा का हर वार बेकार जाता है आख़िरकार हवा भी उदास होकर अपने घर चली जाती है, फिर वो दोबारा जब शहर घूमने आती है कूड़े की छल फ़रेबी बातों में नहीं आती, ख़ैर, सबसे बड़ा सवाल ये है कि अब क्या हो सकता है ??? कूड़े ने नाले से ख़ुद निकलने की बेहद कोशिशें कीं लेकिन सब नाकाम रही, अब तो किसी इंसान ने ही कूड़े की मदद करनी पड़ेगी और उसे झील में डूबने से पहले ही बचाना पड़ेगा वरना कूड़े के ख़ानदान की बददुआएँ, हमारा पीछा नहीं छोड़ेगी और जो पानी ख़राब करने के साथ झील की ख़ूबसूरती और पर्यावरण को हर तरह से नुक़सान पहुचाएंगी, आख़िर में, ज़िलाधिकारी महोदय, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद, नैनीताल से हमारी इल्तेजा है कि शहर में जितने भी नाले मौजूद हैं उन सबके लिये सफ़ाई का महाअभियान चलाकर हमारी प्यारी झील में कूड़ा जाने से बचा दें, जिसके लिये शहर का हर बशर आपका अहसानमंद रहेगा..
अंक-49 (1 दिसंबर 2018) : कला के सर पर छत नहीं, बिन ऑडिटोरियम सब सून
कला जिसका मज़हब कला जिसका ईमान है, अदा, कला, फ़न, जिसके ज़मीनो आसमान हैं, न वो हिन्दू, न मुसलमान है वो फ़क़त इंसान है, इंसान है, इंसान है….
बरसों पुरानी बात है, नैनीताल की सरज़मीं पर एक नन्ही परी ने क़दम रखा, दूर तक पूरे इलाक़े में सूनसानी ने अपना क़ब्ज़ा जमाया हुआ था, (कहीं से लकड़ी काटने की आवाज़ बेहद धीमी आ रही थी) इतनी वीरानी और सूनसानी देखकर नन्ही परी का मन घबराया और वो ज़ोर -ज़ोर से रोने लगी, सन्नाटे को चीरती हुई उसकी आवाज़ लकड़ी काटने वाले के कानों तक जा पहुंची, बच्चे की आवाज़ सुनकर वो दौड़ा -दौड़ा चला आया उसने पास आकर देखा एक बेहद ख़ूबसूरत बच्ची जिसका चेहरा गुलाब की तरह खिल रहा था, जिसकी बड़ी-बड़ी आंखें कुछ बड़ी उम्मीदों और अंजानी खुशियों का पैग़ाम दे रही थी, जिसके खूबसूरत छोटे -छोटे पैर, बड़ी -बड़ी मंज़िलों की सम्त बता रहे थे, उसके रोने में भी कई सुर मिल रहे थे, ये सब देखकर लकड़हारा हैरान हो गया, इतनी प्यारी बच्ची को उसने वीरान जंगल में छोड़ना मुनासिब नहीं समझा, इसलिए लकड़हारा उस बच्ची को अपने सीने से लगाकर अपनी बीवी के पास ले आया, खुले आसमान के नीचे खाना बना रही लकड़हारे की बीवी ने जब उसके हाथों में मासूम बच्ची को देखा वो भी खिलखिला उठी और झट से लकड़हारे से बच्ची को छीनते हुए बोली कौन है ये प्यारी बच्ची और कहां से लाये हो इसे??? लकड़हारे ने सारी दास्तान कह सुनाई, दोनों के कोई औलाद नहीं थी, इसलिये लकड़हारे ने फैसला किया कि अब वो ही उस बच्ची को पालेंगे, दोनों ने एक दूसरे की पसंद से उस बच्ची का नाम कला रखा और दोनों मिलकर उस नन्ही कला की परवरिश करने लगे, देखते ही देखते नन्ही कला कब बालिग़ हो गयी पता ही नहीं चला, बचपन में कला अपने आंगन में ही खेलकर ख़ुश हो जाया करती थी लेकिन जब उसने जवानी की दहलीज़ पर क़दम रखा तो कला अपने आंगन में बंधकर नहीं रहना चाहती, उसने बाहर आकर नैनीताल के बाशिंदों को अपना फ़न दिखाना चाहा, इस पर उसके क़द्रदानों ने उसे चौराहे पर बैठा दिया और उसके फ़न उसके हुनर से अपना मन बहलाया, कला अकेली थी और तमाशबीन हज़ार, वो करती भी क्या, यूँ ही वक़्त बीतता गया, सियासतदानों की बेशर्मी के आगे कला बेबस ही रही, एक के बाद एक हुनरमंद कलाकार कला के ख़ानदान में पैदा हुये और चौराहों पर अपना क़िरदार पेश करके रुख़सत हो गये, लेकिन आज तक ‘कला’ का कोई भी ऐसा पुजारी या क़द्रदान सामने नहीं आया जो चौराहे पर खड़े, कलाकार को किसी ‘छत’ से नवाज़े, जिसमें वो अपने फ़न को खुलकर पेश करे, उसे भी आंधी-तूफ़ान, सर्दी, गर्मी, बारिश किसी भी मौसम की ज़्यादती से बचने का हक़ है, उसे भी महफूज़ रहकर हिफ़ाज़त से जीने का हक़ है, या ये बताइये क्या वो अपनी आने वाली पीढ़ियों को विरासत में एक बेबसी का आसमान ही देगी, जिसके नीचे खड़े होकर वो तमाशबीनों का मन बहलाये और अपने रोते हुए दिल से, चेहरे पर मुस्कुराहट लाकर, ख़ुश रहने की अदाकारी करे और अदाकारी करती जाये, करती जाये, करती जाये, लेकिन साहिबान, सबसे बड़ा सवाल है आख़िर कब तक ??? आख़िर में, देश के मुखिया, सूबे के मुखिया ज़िले के मुखिया और तमाम आला हस्तियों से तहे दिल से हमारी ये गुज़ारिश है कि नैनीताल में कला चौराहे पर खड़ी है उसके सर पर छत मुहैया करा दीजिये, एक रंगशाला रंगकर्मियों के लिये बनवा दीजिये, जिससे कला को उसका जायज़ मुक़ाम मिल सके और आने वाली नस्लें कला की तरफ मुतास्सिर हो सकें, जनाब आप जानते ही हैं बिन ऑडिटोरियम सब सून कलाकारों की नगरी नैनीताल में एक अदद रंगशाला (ऑडिटोरियम) बनवा दीजिये, आपकी बड़ी मेहरबानी होगी, ये चेतावनी नहीं अर्ज़ है हमारी।
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है ….
अंक-48 (30 नवंबर 2018) : पानी की बर्बादी करने में महान, हमारा जल संस्थान !
साहिबान, आज आपने जो तस्वीर / वीडियो देखी उसके लिये आप ये मत समझियेगा कि बहुत मेहनत करनी पड़ी होगी न न, जिसके शहर में हमारे यहां जैसा क़ाबिल और फ़ाज़िल जल संस्थान हो उसे भला कभी मेहनत करनी पड़ेगी, कभी नहीं, जी हाँ, ये नज़ारा है सैनिक स्कूल वार्ड के प्रॉस्पेक्ट लॉज कंपाउंड का जहां काफ़ी दिनों से इतनी तेज़ रफ़्तार से पानी बह रहा है, जिसमें एक घंटे में लगभग 10,000 लीटर पानी शर्तिया बर्बाद हो रहा होगा, जिसे देखने वाला कोई नहीं है। ये तो रही हमारे सैनिक स्कूल वार्ड क्षेत्र का हाल, अगर फुर्सत निकालकर पूरा शहर घूम लिया जाये तो लीकेज का खज़ाना हाथ लग जाएगा, वो किसी और दिन, ख़ैर, मज़े की बात ये है कि यहाँ पानी पीने को मयस्सर नहीं होता, लेकिन बर्बादी के लिये खूब पानी मौजूद है, इतना होने पर भी विभाग की तरफ से पानी के लिये हर तीन माह में चंदे की रसीद आ जाती है, जिसमें चेतावनी लिखी होती है, यदि समय से चंदा जमा नहीं किया तो आपका सूखा हुआ नल भी काट दिया जाएगा, अब उम्मीद पर पानी क़ायम है, क्या पता कब हमारे नल में पानी अपनी पायल छनकाते हुये आ जाये और हम बिन घुंघरू डांस करने पर मजबूर हो जायें। इसी लालच में हमारे शहर के लोग जल संस्थान को चुपचाप चंदा अदा कर देते हैं। वो कहते हैं न “शौक़ बड़ी चीज़ है” बस इसी चक्कर में थोड़ा नवाबसाब टाइप की फीलिंग्स भी आ जाती हैं, (सरकार की मदद करने में )
अंत में, ज़िलाधिकारी महोदय, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान नैनीताल से हमारा अनुरोध है कि अपने कर्मचारियों को कड़े निर्देश करते हुए शहर में जगह -जगह हो रही पानी की लीकेज चिह्नित कर बंद करवाएं, और सैनिक स्कूल के प्रॉस्पेक्ट लॉज कंपाउंड, मल्लीताल, नैनीताल में हो रही पानी की भयंकर बर्बादी को रोकने के तत्काल आदेश करें।सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है ….
अंक-47 (29 नवंबर 2018) : असर आज़ाद मंच और नवीन समाचार का, शुक्रिया : ईओ नगर पालिका नैनीताल का
आज़ाद के तीर में नवीन समाचार के ज़रिये 25 अक्तूबर के अंक में हमने झील का गुनहगार पेशाबघर उन्वान के साथ पेशाबघर की साफ़ सफ़ाई के लिये इल्तेजा की थी। निकाय चुनाव के चलते जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पायी थी, अब चुनाव के ख़त्म होने के बाद अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद, नैनीताल ने इस पेशाबघर की सफाई का हुक़्म अपने कारिंदों को दिया और अगली सुबह साफ़ सफ़ाई भी की गयी…इसके लिये आज़ाद मंच आपका तहे दिल से शुक्रिया अदा करता है। हालांकि, स्थायी लोक अदालत में लंबित मामले में भी फ़ैसला हो गया है, जिसमें अदालत ने ये फ़ैसला सुनाया है कि विवादित पेशाबघर का मरम्मत कार्य जिसमें जल संयोजन, सीवर संयोजन द्वारा निकासी, नये यूरिनल पॉट तथा फ़र्श करवाया जाएगा। इन सब कार्यों के लिये अदालत ने दो माह का समय नगर पालिका को दिया है। जनहित के इस फ़ैसले के लिए हम स्थायी लोक अदालत के न्यायाधीश श्री बृजेन्द्र सिंह जी का आज़ाद मंच परिवार की तरफ़ से बेहद शुक्रिया अदा करते हैं तथा उम्मीद करते हैं आने वाले वक़्त में भी आप यूँही तेज़ी के साथ लोकहित में न्याय करते रहेंगे।
अंक-46 (28 नवंबर 2018) : बीडी पांडे अस्पताल की सड़क की दुःख भरी कहानी
(1)नशे का अड्डा, (2)मलबे का ढेर, (3)अघोषित टैक्सी पार्किंग तीनों की सरगना बनी बीडी पांडे अस्पताल की सड़क
साहिबान, आज हम आपके सामने जो तस्वीर पेश कर रहे हैं वो नैनीताल की जानी- मानी बीडी पांडे अस्पताल के पीछे वाली सड़क की है, जहाँ पर अवैध पार्किंग का मुद्दा बेहद पुराना हो गया है, न जाने ऐसा क्या है, जो बार-बार शिकायत होने के बाद नाम मात्र की कार्रवाई होकर एक दो दिन बाद टैक्सी चालकों की पसंदीदा फ्री पार्किंग फिर से आबाद हो जाती है, सड़क के दोनों ओर टैक्सियां खड़ी रहती हैं, उल्टे पुलिस कार्रवाई के नाम पर स्थानीय लोगों को चार पहिया-दो पहिया वाहनों का भी चालान कर परेशान करती है।
टैक्सियों और तीक्ष्ण चढ़ाई वाली ‘सड़क पर गड्ढों’, याकि ‘गड्ढों पर सड़क’ की वजह से नीचे या ऊपर से नीचे आने वाले लोगों को अपनी गाड़ी बेहद सावधानी से लेकर आनी पड़ती है, और स्कूली बच्चों को आने-जाने में भी बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है, अभिभावकों को भी ये डर लगा रहता है कहीं कोई गाड़ी अचानक से न आ जाये, कोई अनहोनी न हो जाये। ये तो थी पहली परेशानी, परेशानी नंबर दो:- यहां आस-पास के जितने ज़हीन लोग हैं, वे घर से निकले मलबे व गंदगी के कट्टों को भरकर रातों-रात सड़क के किनारे रखकर चले जाते हैं, फिर न ही नगर पालिका उसकी ख़बर लेती है, न ही कोई और महकमा उसकी पकड़ करता है। सब मस्त हैं जो चल रहा है, चलने दो। आधी सड़क मलबे ने घेर दी, आधी सड़क बिन बुलाये टैक्सी ड्राइवरोंं ने। तो जिसका मन आये गाड़ी लाओ, जिसकी मर्ज़ी अपने घर का मलबा सड़क पर ही फेंक कर जाओ, कौन पूछने वाला है।
अब तीसरी और सबसे हैरान करने वाली परेशानी ये है कि सड़क की चढ़ाई शुरू होते ही जो सरकारी चिकित्सकों के आवास बने हैं न, ठीक उसके नीचे, पॉपुलर कंपाउंड को जाने वाले रास्ते के मुहाने पर, पिछले कई महीनों से एक लड़का मोमोज़ बेचता है। बेरोज़गारी से लड़ने के लिये उस लड़के ने स्वरोज़ग़ार किया, हम उसका तहे दिल से इस्तक़बाल करते हैं, शायद उस मोमोज़ बेचने वाले को भी अंदाज़ा नहीं होगा कि उसके मोमोज़ खाने जो लोग आते हैं, वे ज़्यादातर नशे में पहले से ही होते हैं या मोमोज़ लेकर वहीं किनारे बाइक पर रखकर शराब नोशी करते हैं।उसके बाद जितनी लड़कियां और महिलायें वहां से अपने घरों को जाती हैं, ज़्यादातर के साथ छेड़-छाड़ होती है या उनके सामने आपस में गाली- गलौच करते हैं। कोई भी शरीफ इंसान उन नशेबाज़ लोगों के मुंह नहीं लगना चाहता, कई महिलाओं व लड़कियों ने इस मामले की हमसे शिकायत की है। इसलिये हम ये मुद्दा उठाकर पुलिस प्रशासन को नींद से जगाना चाहते हैं, आख़िर में, ज़िलाधिकारी नैनीताल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल और नव निर्वाचित अध्यक्ष नगर पालिका परिषद नैनीताल, साहेबान को मामले की जानकारी देते हुए ये इल्तेजा करना चाहेंगे कि बच्चे / युवक नशे का शिकार हो रहे हैं, जगह-जगह अवैध पार्किंग और अघोषित कूड़ेदान बन रहे हैं, इन परेशानियों से शहरवासियों को निजात दिलाने की मेहरबानी करें..
क्योंकि सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है….
अंक-46 (27 नवंबर 2018) : आज़ाद मंच और नवीन समाचार का एक बार फिर हुआ असर, शुक्रिया, जल संस्थान नैनीताल !!
साहिबान,
ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं वो असल में नैनीताल शहर की बिरला स्कूल सड़क (स्टोनले कंपाउंड के नज़दीक ) की है, जिसके एक हिस्से में पानी के पाइप से लगातार पानी बहता हुआ दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरे हिस्से में पाइप से पानी बहना बंद हो गया है, ये सब बताकर यहां हम आपके साथ पहेलियाँ नहीं बुझा रहे हैं बल्कि आपको ये जानकारी दे रहे हैं कि उस जगह पर लगातार तीन दिन से पानी बह रहा था जिसे देखने वाला कोई नहीं था, आने-जाने वाले लोग इसे दूसरे की प्रॉब्लम समझकर आगे बढ़ जा रहे थे, हाँ इतना ज़रूर है अगर चुनाव खत्म नहीं हुये होते तो शायद कोई नेता आकर इसपर भाषण भी देता और सही होने पर अपने चेलों के साथ मिलकर सेल्फी लेता और घर घर जाकर डींगे मारता, अब चुनाव ख़त्म, मुद्दा ख़त्म, जीते या हारे किसी भी नेता ने वहां आकर नहीं देखा, वो तो भला हो आज़ाद मंच के सदस्य व अध्यक्ष प्रत्याशी रहे नीरज जोशी का जिन्होंने ऐसा होते हुए देखा और वे विचलित हो गए उन्होंने बर्बाद होते पानी की तस्वीरें खींची और आज़ाद मंच में तथा सम्बंधित अधिकारियों को भेजी, तस्वीरें आने के बाद आज़ाद मंच व नवीन समाचार के ज़रिये भी जल संस्थान से पानी की बर्बादी तुरंत रोकने की इल्तेजा की गयी, चौतरफ़ा क्रिया-प्रतिक्रिया के होने से अधिशासी अभियंता, जल संस्थान, नैनीताल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अपनी टीम को तथाकथित स्थान पर भेजा और काम शुरू करवाया, कुछ देर मशक्क़त के बाद बर्बाद होता पानी बंद हो गया, जल संस्थान की इस तरह से तत्काल कार्रवाई करने पर आज़ाद मंच परिवार तहेदिल से आपका शुक्रिया अदा करता है, और उम्मीद करता है कि आने वाले वक़्त में भी आपकी कार्य शैली यूँही बनी रहेगी..
याद रखिये, बर्बाद होता पानी नहीं, लहू है हमारा
अंक-45 (26 नवंबर 2018) : आज़ाद मंच और नवीन समाचार का असर एक बार फिर हुआ सबसे तेज़
तहेदिल से जल संस्थान आपका शुक्रिया
साहिबान, नवीन समाचार के ज़रिये हमने आज़ाद के तीर में नये पर्यटन स्थल के लिये जल संस्थान आपका शुक्रिया शीर्षक से रविवार के अंक में हमने हल्द्वानी राष्ट्रिय राजमार्ग पर ज़िला जेल गेट के ठीक सामने सीवर के खुले ढक्कन के बारे में शासन- प्रशासन को मामले की जानकारी देते हुए, अधिशासी अभियंता जल संस्थान, नैनीताल से उस मुद्दे पर हाथों हाथ कार्रवाई करने की इल्तेजा की थी, जिसका मान रखते हुये अवकाश यानि छुट्टी होने के बावजूद अधिशासी अधिकारी साहिब ने तत्काल प्रभाव से उस पर कार्रवाई की और अपनी टीम को भेजकर काम शुरू करवा दिया है, इसके लिए आज़ाद मंच परिवार आपका तहेदिल से शुक्रिया अदा करता है और इसके साथ आपकी तेज़तर्रार कार्यशैली को सलाम करता है, आज से हमारी उम्मीदें आपसे और ज़्यादा बढ़ गयी हैं, अब जब भी आपसे मुत्तल्लिक़ हमारे पास कोई भी परेशानी आएगी तो हम उस पर भी इसी तरह आपसे तत्काल कार्रवाई की आरज़ू रखेंगे, हम पुरख़ुलूस यक़ीन के साथ अब कह सकते हैं कि जल संस्थान, नैनीताल सोया नहीं है और जब -जब भी कहीं कोई मामला सामने आएगा, हमारे अज़ीज़ अधिकारी उस का निबटारा कराएंगे, हमें ये भी एहसास है कि हमारा यक़ीन अब कभी टूटेगा नहीं, आख़िर में, ज़िलाधिकारी नैनीताल और अधिशासी अभियंता, नैनीताल का दिल से शुक्रिया करने के साथ साथ हम ये साफ़ कर देना चाहते हैं कि हमारा किसी भी सरकारी या ग़ैर -सरकारी महकमों या राजनैतिक दलों या किसी व्यक्ति विशेष से या किसी से भी कोई दुश्मनी नहीं है, हमारी लड़ाई सिर्फ़ और सिर्फ़ ग़लत के साथ है, समाज या मआशरे में हमें जब भी कुछ भी ग़लत दिखेगा हम उस मुद्दे को बेख़ौफ़ उठाएंगे,
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है ….
आज़ाद मंच, नैनीताल से
अंक-44 (25 नवंबर 2018) : नये पर्यटन स्थल के लिये, जल संस्थान आपका शुक्रिया !!!
वाह, हम कितने ख़ुशनसीब हैं जो हमें जन्नत जैसी सरोवर नगरी में ज़िंदगी बसर करने का मौक़ा मिला है, यहां ख़ुदा ने हमें अपनी क़ुदरत में से बेशक़ीमती नज़ारे अता किये हैं, उसका जितना शुक्र किया जाये वो कम ही है लेकिन यहां इंसानी हरकतों में भी बेहद बरक़त है वो भी ख़ासतौर पर सरकारी दफ्तरों के इंसानों की उनमें भी जल संस्थान के नुमाइंदों की हरक़तें तो कमाल हैं, बेशक़ उनके काम करने का जज़्बा क़ाबिले तारीफ़ है क्योंकि उन्होंने शहर में जो सीवर लाइन बिछाई है उसके तो क्या कहने, सीवर को इस तरह शहर के दामन में पिरोया गया है वो कारीगरी लाजवाब है, जल संस्थान के काम की रफ़्तार की बात करें तो वो इतनी तेज़ है कि कुछ बोला ही नहीं जा सकता, जिस काम को करने में दो दिन लगेंगे वो यहां के तेज़ तर्रार साहब लोग महज़ दो साल में करवा देते हैं, आपने तल्लीताल रिक्शा स्टैंड के पास एक होटल के नीचे सड़क पर देखा होगा कि आये दिन वो लाइन लीक होती है लेकिन मजाल है हमारे कर्मठ जल संस्थानियों की जो वहां आकर देखें, जब सीवर का पानी सब झील में चला जाता है तब ख़ुद ब ख़ुद लीकेज बंद हो जाती है, फिर सबको लगता है उस पर कोई क़दम उठाया गया होगा लेकिन ये हमारी कोरी ख़ुशफ़हमी होती है,
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ख़ैर, ऐसे कारनामे तो शहर में कहीं न कहीं ज़रूर हो रहे होंगे उनकी बात फिर कभी, आज हमारे पास जो तस्वीरें हैं उनकी बात करते हैं, तो साहिबान, हल्द्वानी को जाने वाली सड़क पर ज़िला जेल, नैनीताल के ठीक सामने जल संस्थान ने एक नया *पर्यटक स्थल* कुछ महीनों से आम लोगों के लिये खोल रखा है, जिसे देखने के लिये दूर -दूर से बसें भरकर आ रही हैं, इस वजह से उस रूट पर जाम लगातार बना रहता है, अब जब बात रमणीय स्थल के दर्शन की हो तो जाम के की कौन परवाह करे, दिन में तो लोग इस स्थल का दर्शनकर दूर से ही चल देते हैं लिन दूर दराज़ से जो लोग रात के अँधेरे में नैनीताल पहुंचते हैं, वे लोग अपनी बाइक या स्कूटी के साथ इसके अंदर जाकर भ्रमण करने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं, (हाँ, अगर विभाग की मेहरबानी रही तो वो दिन दूर नहीं जब कोई शख़्स नैनीताल से घुसकर रुसी गांव में निकलने का रिकॉर्ड बनाये) इस दर्शन में उनकी हड्डी- पसलियों को थोड़ा टूटना पड़ता है, इतनी ज़बरदस्त लोकप्रियता को देखते हुए *जल संस्थान* नैनीताल को हमारी तरफ़ से सलाह है कि जिस सीवर का ढक्कन महीनों से हटा है और उसने *टूरिस्ट स्पॉट* का रूप इख़्तियार कर लिया है क्यों न उसके दर्शन के लिए एक टिकट घर बनाया जाये, जिससे कोई भी इंसान उस बेनज़ीर नज़ारे का लुत्फ़ मुफ़्त में न उठा पाए, हाँ, इससे इतना नुकसान ज़रूर होगा कि रात के मुसाफ़िर सीधे अंदर नहीं जा पाएंगे क्यूंकि उससे पहले टिकट लेने के लिए उन्हें आपका काउंटर देखकर रुकना पड़ेगा, इससे उनके राजस्व को थोड़ा नुकसान हो सकता है, आख़िर में, ज़िलाधिकारी और अधिशासी अभियंता जल संस्थान, नैनीताल से हमारी इल्तेजा है कि जेल गेट के सामने जो सीवर का ढक्कन हादसों को दवार दावत दे रहा है, मेहरबानी करके उसे तत्काल प्रभाव से बंद करवाकर शहरवासियों के साथ-साथ सैलानियों की हिफाज़त फरमायें,
जनाब, ये चित्र किसी गांव या कस्बे का नहीं है, बलि मा.उच्च न्यायालय, उत्तराखंड जिस जगह अपनी विशेष खूबसूरती बिखेर रहा है, उसी शहर नैनीताल का ये नज़ारा है, यहां की एक ख़ास बात और है कि यहां आप जब भी पहुंचेंगे आपके स्वागत के लिये 10-12 आवारा कुत्ते ज़रूर तैनात होंगे, जो हर गली, मोहल्लों में अपना झुण्ड बनाये मिलेंगे, ये हमारी प्यारी नगर पालिका की तरफ से विशेष सुविधा दी गयी है, यदि इत्तेफ़ाक़ से आपका रात 10 बजे के बाद और सुबह 7 बजे से पहले नैनीताल में प्रवेश होता है, तब तो आपको कुछ फ़िक्र करने की ज़रूरत नहीं होगी, 10-12 मेहमानवाज़ों का ख़्वाब फिर आप भूल जाइये क्योकि उस वक्त पूरी की पूरी बारात आपके स्वागत में खड़ी होगी और निःशुल्क सेवा देते हुए आपको होटल या कमरे तक छोड़ा जाएगा, हाँ उसमें रनिंग से आपकी साँस ज़रूर फूल सकती है तो घबराइयेगा नहीं बल्कि शुक्र मनाइयेगा कि आप सही सलामत अपनी मंज़िल तक पहुंच गये, क्या कहा भेदभाव, नहीं, नहीं जनाब, जानवर कहाँ भेदभाव करते हैं वो तो इंसानों का महंगा शौक़ है, और ये आवारा कुत्ते पर्यटक हो या स्थानीय नागरिक किसी में फ़र्क महसूस नहीं करते, कुछ समय पहले की बात बताऊं, एक पर्यटक की मासूम बच्ची की मौत का कारण यही आवारा कुत्ते बने थे, जिसमें वो बच्ची तल्लीताल स्थित लकड़ी टाल के पास गिर गयी थी, गंभीर चोटें आने के बाद उसकी मौत हो गयी थी, अफ़सोस… लेकिन प्रशासन ने उस घटना से भी सबक़ नहीं लिया क्यूँकि उनका इरादा अभी शायद कुत्तों को लेकर विश्व रिकॉर्ड बनाने का है, ख़ैर, अभी एक कुछ दिन पहले एक स्थानीय महिला को मॉर्निंग वॉक के दौरान सुबह 7 बजे के आसपास मॉल रोड एचडीएफसी बैंक के पास किसी आवारा कुत्ते ने काट लिया था, जिनको अस्पताल में तुरंत ले जाया गया तथा हर सम्भव उपचार किया गया, साहब, बात यहीं खत्म नहीं हो जाती, उस दिन उक्त महिला को काटा था, कल तथाकथित कुत्तों द्वारा किसको काट लिया जाए कुछ नहीं कहा जा सकता, पालिका प्रशासन ने मॉल रोड लाइब्रेरी के सामने कुत्तों से बचने के उपाय सम्बन्धी एक बड़ा सा होर्डिंग लगाक़र अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है, और हाथ झाड़े भी क्यों न? स्थानीय लोगों या पर्यटकों को कुत्ते काटते हैं तो काटें, उनकी बला से, उनपर कोई असर नहीं पड़ता, ख़ैर, अंत में, मा.उच्च न्यायालय, आयुक्त महोदय, ज़िलाधिकारी महोदय, *नवनिर्वाचित चेयरमैन* महोदय व *अधिशासी अधिकारी* नगर पालिका परिषद् नैनीताल से हमारा अनुरोध है कृपया आवारा कुत्तों तथा बंदरों का कुछ ठोस उपाय करें जिससे शहरी बाशिंदों के साथ- साथ बाहरी मेहमान भी नैनीताल की सरज़मीं पर बेख़ौफ़ होकर कभी भी घूम सके, उनका स्वागत इंसानों के द्वारा हो न कि उन्हें शिकार बनाने की घात लगाये बैठे आवारा कुत्तों के द्वारा…
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है ….
अंक-42 (23 नवंबर 2018) : थमने का नाम नहीं ले रहा काशीपुर में चुनाव प्रचार ???
साहिबान, जैसा कि शहर का बच्चा -बच्चा जानता है कि निकाय चुनाव सम्पन्न हो गए हैं, परिणाम आने के बाद मेयर साहिबा को जीत की जो मालायें पहनाई गयी वो भी पुरानी हो गयीं, लेकिन हमारे काशीपुर में ऐसे महान प्रत्याशी भी हैं जिन्हें यक़ीन ही नहीं हो रहा है कि वास्तव में चुनाव परिणाम आ चुके हैं और उनमें से कोई एक नगर प्रमुख (मेयर) बन भी गयी हैं, हमें हैरत इस बात की है कि उम्मीदवार अभी भी मतदाताओं से उम्मीद लगाये बैठे हैं शायद इसलिए उनके फ्लैक्स नगर में जगह- जगह लगे हैं ( जिनमें मुख्य बाज़ार, महाराणा प्रताप चौक, रतन रोड, बाज़पुर रोड, व रामनगर को जाने वाली सड़क प्रमुख हैं ) जहां पर बिजली के खम्बों आदि पर लगे फ्लैक्स चुनाव के पश्चात् अब तक नगर की शोभा बढ़ा रहे हैं, ख़ैर, हमारा मक़सद किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है, हम आपके जज़्बातों को समझते हैं व उनकी क़द्र करते हैं, सफ़लता और असफ़लता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, इसलिये हमें निराश होने की आवश्यकता नहीं है, आज सिक्का उल्टा पड़ा है कल सीधा भी आएगा, प्रयत्न करना किसे कहते हैं, हमें एक मकड़ी से सीख लेनी चाहिए जो बार- बार गिरकर उठती है और आख़िरकार फिसलती दीवार पर चढ़ ही जाती है, अंत में, शहर के जाने- माने व्यक्तिव व समस्त सम्मानित प्रत्याशियों से हमारा विनम्र निवेदन है कि अपने प्यारे शहर *काशीपुर* के प्रति थोड़ी सी और ज़िम्मेदारी दिखाते हुये अपने -अपने फ़्लैक्स उतरवाकर शहर को साफ़, सुंदर व स्वच्छ बनाने में अपना-अपना योगदान प्रदान करने की कृपा करें, हमें आशा है हमारे निवेदन को सकारात्मक रूप में लिया जाएगा तथा उस पर कार्रवाई भी की जाएगी, धन्यवाद……
सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है ….
आज़ाद मंच काशीपुर से
अंक-41 (22 नवंबर 2018) : एक प्रत्याशी ने उतारे अपने फ़्लैक्स, बाक़ियों का प्रचार शायद अभी थमा नहीं
साहिबान, जैसा कि शहर का बच्चा -बच्चा जानता है कि निकाय चुनाव सम्पन्न हो गए हैं, परिणाम आने के बाद नये अध्यक्ष का स्वागत समारोह भी हो गया है। लेकिन एक मात्र प्रत्याशी नीरज जोशी के अलावा बाक़ी प्रत्याशी (जिन लोगों ने लगाये ही नहीं, वे इसमें शामिल नहीं हैं) ऐसे हैं कि उन्हें यक़ीन ही नहीं हो रहा है कि वास्तव में चुनाव परिणाम आ चुके हैं, और उनमें से कोई एक नगर प्रमुख बन भी गया है, उनके फ्लैक्स नगर में जगह- जगह लगे हैं। ( जिनमें तल्लीताल डायमंड के पास तथा मल्लीताल में मुख्य डाकघर वाली सड़क प्रमुख हैं) जो चुनाव के पश्चात् अब तक नगर की शोभा बढ़ा रहे हैं। ख़ैर, हमारा मक़सद किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है। हम आपके जज़्बातों को समझते हैं व उनकी क़द्र करते हैं। सफ़लता और असफ़लता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इसलिये हमें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। आज सिक्का उल्टा पड़ा है कल सीधा भी आएगा। प्रयत्न करना किसे कहते हैं, हमें एक मकड़ी से सीख लेनी चाहिए जो बार- बार गिरकर उठती है और आख़िरकार फिसलती दीवार पर चढ़ ही जाती है। अंत में, शहर के जाने-माने व्यक्तिव व समस्त सम्मानित प्रत्याशियों से हमारा विनम्र निवेदन है कि अपनी प्यारी सरोवर नगरी के प्रति थोड़ी सी और ज़िम्मेदारी दिखाते हुये अपने-अपने फ़्लैक्स उतरवाकर नगर को साफ़, सुंदर व स्वच्छ बनाने में अपना-अपना योगदान प्रदान करने की कृपा करें। हमें आशा है हमारे निवेदन को सकारात्मक रूप में लिया जाएगा तथा उस पर कार्रवाई भी की जाएगी। धन्यवाद……
अंक-40 (21 नवंबर 2018) : न हम बैठे हैं न हम मौन हैं, काम करके बताइयेगा आप कौन हैं ? :- नैनीतालवासी
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