कार्यों को उलझाने के बजाए सुलझाने की प्रवृत्ति रखें अधिकारी: धामी

-बोले-इस बार कैंची धाम में बेहतर रही व्यवस्था, दूरस्थ क्षेत्रों में बिजली सुधार हेतु लगेंगे कैंपसीएम नवीन समाचार, नैनीताल, 17 जून, 2024 (CM Dhami took meeting of Officers in Nainital)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को नैनीताल क्लब में विभागीय अधिकारियों के साथ मानसून की तैयारियों और विभागीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि … Read more

हरीश रावत के करीबी गोपाल रावत ने कांग्रेस छोड़ थामा भाजपा का दामन, सीएम ने दिलाई सदस्यता

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 27 मार्च 2024 (Gopal Rawat close to Harish Rawat joined BJP)। कांग्रेंस पार्टी के प्रदेश सचिव और पूर्व दर्जा राज्य मंत्री, भारत रत्न पंडित बल्लभ पंत जयंती के प्रदेश संयोजक एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी रहे गोपाल रावत ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी … Read more

मुख्यमंत्री के पूर्व सचिव व साथियों पर सरकारी दवाइयों का ठेका दिलाने के नाम पर 52 लाख रुपये हड़पने का आरोप, अभियोग दर्ज

(Case Against 4 Policemen including Sub-Inspector) (Son of BJP Leader Accused of Assaulting SC Youth (Case Filed for Violating Secrecy of Ballot Paper) Nainital-Case Filled Against BJP-Congress Leader)

नवीन समाचार, देहरादून, 10 मार्च 2024 (Case Registered against CMs Former Personal Secr)। सरकारी अस्पतालों में दवा का फर्जी टेंडर दिलाने के मामले में मुख्यमंत्री के पूर्व पीएस यानी निजी सचिव सहित 6 लोगों के खिलाफ शिकायती पत्र दिया है। इस पर पुलिस ने अभियोग दर्ज कर लिया है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार … Read more

दारोगा भर्ती घोटाले (Ghotala) का जिन्न फिर आएगा बाहर: 20 दारोगाओं को गुजरना होगा विजीलेंस जांच के तहत सवाल-जवाबों से…

(Uttarakhand-Fraud-Assistant Teacher Recruitment) Ghotala Corruption Bhrashtachar

Ghotala

Safalta : सेंट जोसफ के बालकों व बाल विद्या मंदिर की बालिकाओं ने जीती पहली टीटी प्रतियोगिता…

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Safalta

सुखद समाचार Good News : आईटीआई के छात्रों के छात्रावास के लिए 1.62 करोड़ रुपए की पहली किस्त जारी, कुविवि ने परीक्षा परिणाम भी जारी…

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‘नवीन समाचार’ की खबर का असर ! उत्तराखंड सरकार कर सकती है प्रदेश में जमीन खरीदने वाले ऐसे लोगों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

नवीन समाचार, देहरादून, 3 मई 2023। गत दिवस ‘नवीन समाचार’ ने एक लाख के ईनामी बदमाश द्वारा देहरादून में होटल बनाए जाने का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके अलावा भी उत्तराखंड में बाहरी अपराधियों के शरणस्थली बनाने के समाचार प्रकाशित होते रहते हैं। ऐसी स्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के … Read more

Nainital News 15 April : CM को ज्ञापन, निर्मला ने उत्तीर्ण की नेट, निर्धन कन्याओं को विवाह के लिए उपहार, कॉलेज गेट पर प्रदर्शन का ऐलान व नगर में नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत का ऐलान…

Nainital News 6 July 2023, Nainital News 1 July 2023, Nainital News 3 July 2023, Nainital News 11 July 2023, Nainital News 12 July 2023,

नगर पालिका के बजट व कार्मिकों की संख्या में पर्यटन एवं शिक्षा के लिए आने वालों की संख्या भी हो शामिल.. नवीन समाचार, नैनीताल, 15 अप्रैल 2023। (Memorandum to CM, Nirmala passed NET, gifts to poor girls for marriage, announcement of demonstration at college gate and announcement of nine-day Shrimad Devi Bhagwat in the city) … Read more

केंद्रीय मंत्री के बाद मुख्यमंत्री से मिले कांग्रेस नेता पूर्व मंत्री, कांग्रेस नेता भी मनाने में जुटे, चर्चाओं का बाजार गर्म…

नवीन समाचार, रुद्रपुर, 15 अप्रैल 2023। (After the Union Minister, the Congress leader met the Chief Minister, the former minister, the Congress leader also engaged in persuasion, the market of discussions is hot) लोकसभा चुनाव-2024 से पहले क्या उत्तराखंड की राजनीति में कोई बड़ा उलटफेर होगा। अपनी इस अलग तरह की कार्यशैली के लिए पहचानी … Read more

एनयूजे-आई ने सीएम के समक्ष उठाईं देश के पहले पत्रकार सुरक्षा कानून, स्ट्रिंगरों को भी मान्यता, पुरस्कार एवं न्यूज पोर्टलों की विज्ञापन मान्यता सहित विभिन्न मुद्दों पर भी की बात…

NUJ I with CM

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 अप्रैल 2023। (NUJ-I raised before the CM the country’s first journalist protection law, also spoke on various issues including recognition of stringers, awards and advertisement recognition of news portals) देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन एनयूजे-आई यानी नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स-इंडिया के द्वारा सोमवार को मुख्यालय आगमन पर प्रदेश के … Read more

मुख्यमंत्री सोमवार को नैनीताल में, करेंगे दो अरब से अधिक रुपयों की 142 विकास योजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण, जानें इनमें से किसका आपको मिलेगा सीधा लाभ

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 अप्रैल 2023। (CM will lay the foundation stone and inaugurate 142 development schemes worth more than two billion rupees in Nainital on Monday, know which of these you will get direct benefit) मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार 10 अप्रैल को जनपद में आ रहे हैं। उनका यहां जिला मुख्यालय में नैनीताल … Read more

जहां कमला नेहरू का उपचार हुआ, उत्तराखंड के मुख्य सचिव ने बताई उस ऐतिहासिक भवाली सेनिटोरियम पर सरकार की योजना

-भवाली सेनिटोरियम का किसी अन्य जनहित के कार्य में सदुपयोग करेगी सरकार: मुख्य सचिव -मुख्य सचिव ने किया भवाली सेनिटोरियम का निरीक्षण नवीन समाचार, नैनीताल, 7 दिसंबर 2019। कभी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की धर्मपत्नी कमला नेहरू को टीबी यानी क्षय रोग का बेहतरीन इलाज उपलब्ध कराने वाले व आजादी से पूर्व … Read more

यह भी पढ़ें : मुख्यमंत्री को ‘चोर-उचक्के’ कहने वाली शिक्षिका ने अब बताया ‘पिता तुल्य’, मांगी मांफी

पिछले सप्ताह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को जनता दरबार में ‘चोर-उचक्के’ तक कह जाने वाली निलंबित शिक्षिका उत्तरा पंत बहुगुणा ने अब मुख्यमंत्री को ‘पिता तुल्य’ बताया है, और उनसे माफी मांग ली है। सोशल मीडिया पर आये एक वीडियो में उत्तरा कहती सुनी जा रही हैं कि वह ट्रांसफर के लिए मुख्यमंत्री के जनता दरबार में गयी थीं। क्योंकि वह पिछले 25 वर्षों से अपने घर से बाहर हैं। इधर 2015 में उनके पति का निधन हुआ, जिसके बाद से उनके बच्चों का घर पर कोई सहारा नहीं है। इसलिए ही वह अपना स्थानांतरण चाह रही थीं। और मुख्यमंत्री के जनता दरबार में गयी थीं। वहां इतने वर्षों से अंदर भरा हुआ गुस्सा बाहर निकल गया। उन्होंने पिता तुल्य अभिभावक के समक्ष अपनी शिकायत गुस्से के रूप में की। मुझसे जो गलती हुई है, उसे वह क्षमा करें। मेरे साथ शिक्षा विभाग के कारण काफी बुरा हुआ है।

शिक्षिका उत्तरा पंत के व्यवहार में अचानक आया यह परिवर्तन सोमवार को शिक्षा निदेशक आरके कुंवर एवं मंगलवार को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे से मिलने के बाद और इस मामले में बुरी तरह से घिरी राज्य सरकार के ‘डैमेज कंट्रोल’ का परिणाम माना जा रहा है। इससे सरकार व सत्तारूढ़ भाजपा को तो जरूर राहत मिलेगी, परंतु अपने राजनीतिक हितों के लिए उसे बिन मांगे समर्थन देने जुटे और सरकार को घेर रहे विपक्ष की किरकिरी होनी भी तय है।
इधर मुख्यमंत्री के लिए अपशब्दों का प्रयोग करने के बाद राष्ट्रीय मीडिया में भी छा चुकी और गत दिवस हाईकोर्ट की शरण में भी जाने की बात कहने वाली उत्तरा पंत को मंगलवार को टीवी के ‘बिग बॉश’ शो से भी फोन आने की खबर है।

यह भी पढ़ें: तब भी कुछ यही हुआ था: त्रिवेंद्र रावत-उत्तरा, हरीश रावत-उमा प्रकरण कुछ अलग हैं क्या ?

उत्तराखंड के चौथे विधानसभा चुनावों के बाद जब त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री बने थे, तो हमने ‘नवीन समाचार’ में सुर्खी लगाई थी, ‘फिर रावत सरकार’। हमारी सुर्खी के मायने शायद तब इतने ही समझ आये हों कि इससे पूर्व उत्तराखंड में हरीश चंद्र सिंह रावत की सरकार थी और अब त्रिवेंद्र रावत की सरकार बन रही है। ‘फिर रावत सरकार’ पिछले मुख्यमंत्री हरीश रावत का चुनावी नारा भी था। लेकिन हमारा इशारा केवल जाति नाम ‘रावत’ और चुनावी नारे तक ही सीमित नहीं था, बल्कि जो आगे दिखाई दे रहा था, उसकी ओर भी था। अब रावत सरकार के करीब सवा वर्ष के कार्यकाल के बाद, खासकर शिक्षिका उत्तरा पंत बहुगुणा के सीएम त्रिवेंद्र रावत के जनता दरबार में हुए हंगामे और उनके निलंबन आदेशों के साथ यह बात सही साबित होती दिख रही है।
थोड़ा सा याददाश्त पर जोर दें, तो एक और ऐसी ही घटना याद आ जाएगी। यह संयोग ही है कि ऐसी ही वह घटना पिछली हरीश रावत सरकार के कार्यकाल में नवंबर 2016 में हल्द्वानी के एफटीआई मैदान में उनके ही पुत्र आनंद रावत द्वारा आयोजित कुमाउनी क्विज प्रतियोगिता के दौरान भी घटी थी। उत्तरा की ही ‘नाम-जाति राशि की’ बिंदूखत्ता निवासी अशासकीय विद्यालय में 13 वर्षों से मात्र 5 हजार रुपए के वेतन पर कार्यरत शिक्षिका उमा पांडे अपने स्कूल को सरकारी ग्रांट न मिलने को लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत के कदमों पर फूट-फूट कर रोई थी और मुख्यमंत्री हरीश रावत हंसते रहे थे। शिक्षिका को बमुश्किल पुलिस की मदद से कार्यक्रम स्थल से बाहर किया गया था। आज भी उत्तरा पंत बहुगुणा को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के जनता दरबार से पुलिस के द्वारा बाहर किया गया। कस्टडी में लेने के आदेश हुए, सो अलग।
इससे कुछ बातें साफ होती हैं। सरकार मुख्यमंत्री हरीश रावत की हो, अथवा त्रिवेंद्र रावत की, उसमें महिलाओं क्या किसी भी जरूरतमंद के लिए कोई संवेदनशीलता नहीं होती है। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति स्वयं को राजा मानता है। भले ही वह राजशाही की तरह पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रधानमंत्री बनने का अधिकार लेकर पैदा हुए राहुल गांधी द्वारा मुख्यमंत्री बनाये गये हरीश रावत हों, अथवा स्वयं को ‘प्रधान सेवक’ कहने वाले नरेंद्र मोदी द्वारा मुख्यमंत्री बनाये गये त्रिवेंद्र रावत।
वहीं केवल ताजा घटना की ही बात करें तो महिला-विधवा शिक्षिका उत्तरा पंत द्वारा मुख्यमंत्री के लिए सार्वजनिक तौर पर ‘चोर-उचक्के’ जैसे शब्दों के प्रयोग को कत्तई सही नहीं ठहराया जा सकता। खासकर एक महिला शिक्षिका होते, जिसका दर्जा गुरु के रूप में देवताओं से भी ऊपर तथा एक महिला और मां के रूप में समन्वित तौर पर साक्षात ‘गुर्रुब्रह्मा’ की ब्रह्माणी यानी माता सरस्वती के समान होता है, और उनसे समाज को सही शब्दों के साथ सही दिशा देने की अपेक्षा रहती है। वहीं सरकारी नौकरी कर रहे उम्रदराज सैनिक और सैन्य अधिकारी अपना घर बार छोड़ सियाचिन व लद्दाख में भी नौकरी कर रहे हैं। सो परिवार भी देखने और नौकरी भी करने की महिला शिक्षिका की चाह भी सही नहीं ठहराई जा सकती।
अलबत्ता, मुख्यमंत्री रावत ने उन्हें उनके निवेदन पर प्राथमिक शिक्षा विभाग में ‘जिला कैडर’ होने की याद दिलायी, जिसके तहत जिलों से बाहर अंर्तजिला स्थानांतरण होने पर शिक्षकों को अपनी वरिष्ठता खोनी पड़ती है। पता नहीं शिक्षिका उत्तरा पंत अपनी नौकरी के आखिरी पड़ाव में अंर्तजिला स्थानांतरण किये जाने पर अपनी 25 वर्ष की वरिष्ठता खोने को तैयार हैं अथवा नहीं। मुख्यमंत्री रावत की धर्मपत्नी सुनीता रावत ने अपनी आठ वर्ष की सेवा के बाद ही पौड़ी से देहरादून जिले को अंर्तजिला स्थानांतरण करा लिया था। शायद वरिष्ठता भी खोई हो। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने उन्हें सरकारी नौकरी शुरू करने से पहले नियमों के पालन करने के लिए स्वीकार की जाने वाली सेवा नियमावली भी याद दिलाई, यहां तक सब ठीक मान भी लिया जाये तो भी यह मानना पड़ेगा कि मुख्यमंत्री रावत ने इस घटना के साथ एक राजनीतिज्ञ के लिए अपेक्षित धैर्य खोकर स्वयं की बुद्धिमत्ता और संवेदनशीलता (या कि मूर्खता और संवेदनहीनता) का सैकड़ों कैमरों के बीच स्वयं नग्न प्रदर्शन कर दिया है। उनकी स्थिति कालीदास की तरह नजर आ रही है, जिन्हें काफी समय से विद्वान बना कर रखा गया था, लेकिन आज वे ‘उट्र-उट्र’ कर बैठे हैं।
इस संबंध में एक और घटना याद हो आती है। नैनीताल क्लब के खचाखच भरे सभागार में मुख्यमंत्री बनने के बाद पहले बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में स्थानीय विधायक संजीव आर्य एक समस्या रखते हैं। वे कहते हैं, ‘हमारी कई सड़कें स्वीकृत हैं। धन भी उपलब्ध है। लेकिन उनकी विधानसभा के साथ ही पूरे प्रदेश में सड़कों के बदले किये जाने वाले प्रतिपूरक वृक्षारोपण के लिए वन भूमि उपलब्ध नहीं है। अलबत्ता प्रदेश में सिविल सोयम की काफी भूमि निरुपयोगी पड़ी है। मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि वे वन भूमि की जगह सिविल सोयम की भूमि पर प्रतिपूरक वृक्षारोपण कराने की अनुमति प्रदान करने हेतु कुछ करें।’ उनके बाद मुख्यमंत्री का आधा भाषण 20 रुपए में बनने वाली एक ऐसी करिश्माई बोतल पर चलता है, जिसका रिस्पना नदी की सफाई में प्रयोग किया जा रहा है, और जिसे हर घर में तैयार किया जा सकता है और इससे हर कहीं गंदगी से पटे नालों को ‘खुशबूदार’ बनाया जा सकता है। यह अलग बात है कि वह करिश्माई बोतल आज तक कहीं नजर नहीं आई। अलबत्ता वे विधायक की बात पर कहते हैं, ‘मैं घोषणाएं नहीं करता हूं। लेकिन विधायक जी कह रहे हैं तो यहां-वहां से, सड़कों के निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपए देने की घोषणा करता हूं।’ यानी विधायक आर्य की वन-सिविल सोयम भूमि की बात कहीं हवा में ही उड़ गयी, अथवा उनकी समझ में ही नहीं आयी।
यह ठीक है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की छवि आमतौर पर शालीन राजनीतिज्ञ की मानी जाती है। वे हरीश रावत की तरह, केवल कुछ चुनिंदा चाटुकारों से घिरे और उन्हें छोड़कर अन्य के खिलाफ मौका ढूंढ-ढ़ूंढकर जहर उगलने वाले अधिक वाचाल व तिकड़मी राजनीतिज्ञ नहीं हैं, जो घर के भीतर उगाये जाने वाले पवित्र हरेले को कुछ सौ रुपए के ईनाम के लिए गांव के चौराहे पर सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए लाने और वह मामूली इनाम भी सबको न पहुंचा पाने जैसी योजनाएं लाते हैं। कभी रिक्शे-नाव में सफर करने तथा बाजार में पकोड़े खाने, काफल पार्टी करने के साथ ही आंखों पर दूरबीन लगाकर केदारनाथ जाने व भजन-कीर्तन करने में भी शुद्ध नौटंकी करते हैं। वहीं करीब छः महीने के कार्यकाल के बाद भी त्रिवेन्द्र रावत सरकार के काम तो धरातल पर कुछ दिखाई नहीं दे रहे हैं, अलबत्ता मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत हरीश रावत की तरह ही हमेशा ‘प्लेन’ से नहीं कभी आम आदमी की तरह ‘ट्रेन’ से भी सफर कर लेते हैं। सुबह देहरादून से हल्द्वानी आते हैं, और दिन भर काम निपटाकर शाम तक लौट जाते हैं। लेकिन राज्य और राज्य की जनता के हितों के मोर्चे पर बरती जाने वाली संवेदनशीलता के मोर्चे पर वे कहीं से भी वे अपनी सरकार के कार्यों की तरह हरीश रावत से श्रेष्ठ नहीं दीखते। (नवीन जोशी, , 28 जून 2018)

पूर्व आलेख : उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 : फिर रावत की, पर ‘डबल इंजन’ सरकार

आखिर 17 की किशोर वय और चौथी विधानसभा में ही उत्तराखंड को 9वां (बदलते हुए 10वां) मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के रूप में मिलना तय हो गया है। पिछले सीएम हरीश रावत का ‘फिर रावत सरकार’ का नारा भी एक अर्थ में ‘त्रिवेन्द्र रावत’ की सरकार आने के साथ सही साबित हुआ है। लिहाजा, प्रदेश में लगातार दूसरी बार ‘रावत सरकार’ ही होगी, अलबत्ता दुआ करनी होगी कि यह वाली रावत सरकार पिछली (हरीश रावत वाली) रावत सरकार जैसी ‘राज्य को काट-पीट कर खा जाओ’ और ‘सब कुछ अपनी जेब में भरो’ वाली नहीं होगी, बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वादे के अनुरूप ‘डबल इंजन’ वाली सरकार होगी। मालूम हो कि राज्य में भाजपा ने उत्तराखंड में करिश्माई प्रदर्शन करते हुए 70 में से 57 सीटें हासिल की हैं, जबकि पिछले बार 2012 में उससे एक सीट अधिक जीतने वाली कांग्रेस 11 सीट पर आकर सिमट गयी है।

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