(Nagar Palika Nainital) नगर निकाय कर्मचारी महासंघ के कार्यकारिणी के सभी 4 पदों पर निर्विरोध निर्वाचन

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Nagar Palika Nainital

नैनीताल को ‘कमजोर’ नगर बताना कितना सही ?

  डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 10 अगस्त 2022। (श्री नंदा स्मारिका 2015 में प्रकाशित पूर्व आलेख के आधार पर) भूगर्भीय नहीं भूकंपीय दृष्टिकोण से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के साथ जोन-चार में रखे गए नैनीताल नगर की भूगर्भीय व भूसतहीय कमजोरी के बात खूब बढ़-चढ़ कर कही जाती है। राष्ट्रीय चैनल नगर … Read more

‘लॉक डाउन’ से नैनी लेक हुई ‘अप’, सुधरी पारिस्थितिकी

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-15 वर्षों के सर्वाधिक स्तर पर पहुंचा नैनी झील का जल स्तर, पारदर्शिता भी बढ़ी

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 अप्रैल 2020। कोरोना की वैश्विक महामारी के दृष्टिगत देश भर में लागू लॉक डाउन मानो प्रकृति का मानव के साथ स्वयं को भी उसके मूल स्वभाव में लौटाने की कोशिश हो। इन दिनों जहां मानव ग्लोबलाइजेशन के साथ बेतहाशा बढ़ी आवश्यकताओं के बिना बेहद सीमित संसाधनों में जीने की अपनी पुरानी आदतों में लौट रहा है, वहीं प्रकृति भी मानो मानवीय हस्तक्षेप घटने से अपना आत्म शुद्धि कर रही है। प्रकृति का स्वर्ग कही जाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल की विश्व प्रसिद्ध नैनी झील भी इसकी बानगी है।

झील नियंत्रण के प्राप्त जानकारी के अनुसार नैनी झील का जल स्तर अंग्रेजों द्वारा तय पैमाने पर सोमवार को 6 फिट पांच इंच रिकार्ड किया गया, जबकि इससे पूर्व केवल वर्ष 2005 में आज के दिन झील का जल स्तर 6 फिट 6 इंच यानी अब से बेहतर था। यानी नैनी झील जल स्तर के मामले में पिछले 15 वर्षों के सर्वश्रेष्ठ स्तर पर है। यह आंकड़ा भी उल्लेखनीय है कि लॉक डाउन लागू होने के लिए 22 मार्च को झील के जल स्तर में मात्र 7 इंच की कमी आई है। यानी करीब तीन दिन में झील का पानी एक इंच गिर रहा है, जबकि पिछले वर्षों में इन दिनों आधा इंच जल स्तर रोज गिरता था। उल्लेखनीय है कि नैनी झील के पानी का ही नगर में पेयजल सहित सभी तरह से उपयोग होता है। यानी नगर में जल के उपयोग एवं वाष्पीकरण तथा जल के क्षरण आदि कारणों में पिछले एक माह में कमी आयी है। वहीं एक दौर में नैनी झील के दो तिहाई हिस्से में ऑक्सीजन की मात्रा शून्य हो जाने यानी झील के दो तिहाई हिस्से में जल-जीवन मृत हो जाने के बाद वर्ष 2007 में एयरेशन के जरिये नैनी झील को ‘डायलिसिस’ की तरह कृत्रिम ऑक्सीजन चढ़ाने वाले नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण के परियोजना प्रबंधन चंद्रमौलि साह ने बताया कि लॉक डाउन के दौरान प्राधिकरण नैनी झील की सफाई का कार्य नहीं कर पा रहा है। यहां तक कि नैनी झील के बीच में नौका ले जाकर झील की गुणवत्ता भी नहीं मापी जा रही है, फिर भी झील के किनारे किये गये ऐसे मापन के अनुसार झील में पारदर्शिता करीब पूर्व की करीब डेढ़ मीटर से बढ़कर 2.5 मीटर तक हो गयी है। वहीं झील के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा 7.5 के स्तर पर बनी हुई है। वहीं नगर के पर्यावरणविद् डा. अजय रावत ने नैनी झील की पारदर्शिता एवं सफाई में स्वतः सुधार होने की बात कही है। उन्होंने दावा किया कि झील में पारदर्शिता पहले ऊपरी सतह से सात मीटर की गहराई तक स्थित एपीलिनियन तक ही थी, जबकि अब सात से नौ मीटर की गहराई पर स्थित थर्मोलाइन तक हो गयी है, और इस गहराई तक मछलियों का आवागमन भी हो गया है, जो कि पहले केवल एपीलिनियन में था। इसके अलावा भी नैनी झील के किनारे ठंडी सड़क क्षेत्र में इन दिनो मानव की गतिविधियां घट जाने की वजह से गुलदार एवं उसके शावकों के साथ ही घुरल, काकड़, कलीज फीजेंट सहित अनेक पशु-पक्षी भी नजर आ रहे हैं। इसे भी नैनी झील एवं नगर की पारिस्थितिकी में हुए परिवर्तन का परिणाम माना जा रहा है।

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यूएन से स्वीकृत हुई नैनी झील के पानी की सतत निगरानी के लिए परियोजना
-बैथीमेट्री विश्लेषण से पहली बार तैयार हुई नैनी झील की कॉन्टूर मैपिंग, झील की अधिकतम गहराई में 2.4 मीटर की गिरावट
-आगे एनआईएच से झील के आन्तरिक जल स्रोतों का सर्वे भी कराया जायेगा
Naini Lake Reportनवीन समाचार, नैनीताल, 10 फरवरी 2020। डीएम सविन बंसल प्रयासों से नैनी झील के दीर्घकालिक संरक्षण एवं आंतरिक प्रोफाईल किये जाने हेतु आईआरएस संस्थान इसरो देहरादून के वैज्ञानिकों के द्वारा नवम्बर माह के द्वितीय सप्ताह में इसकी अर्न्तजलीय संरचना, जैव विविधिता स्थिति एवं पारिस्थिक तंत्र, पेयजल शुद्धता के नवंबर माह के द्वितीय सप्ताह में किये गए विस्तृत विश्लेषण एवं परीक्षण का परिणाम काफी सुखद रहा है। डीएम बंसल ने सोमवार को जिला कार्याालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि ने नैनी झील की पहली बार तैयार कॉन्टूर मैपिंग के अनुसार झील की गहराई न्यूनतम 4 से सात मीटर, अधिकमत 24.6 मीटर तथा औसतन 9 मीटर प्राप्त हुई तथा पानी का टीडीएस 300 से 700 मिली ग्राम प्रति लीटर प्राप्त हुआ जो पानी की अच्छी गुणवत्ता को दर्शाता है। पानी का डीओ अधिकतम 7.5 मिलीग्राम प्रति लीटर व न्यूनतम 6-7 मिली ग्राम प्रतिलीटर मिला। आगे इसरो के माध्यम से प्रतिवर्ष मानसून से पहले व मानसून के बाद वर्ष में दो बार झील के पानी का परीक्षण कराया जायेगा। उल्लेखनीय है कि नैनी झील की गहराई 27 मीटर बताई जाती रही है। इस आधार पर लगता है कि झील की गहराई 2.4 मीटर घट गई है, जोकि चिंताजनक स्थिति है। किंतु ध्यान रखना होगा कि पूर्व में झील की गहराई अन्य विधियों से मापी गई है। इस परीक्षण के बाद यूएन द्वारा नैनी झील के पानी की सतत् निगरानी हेतु परियोजना स्वीकृत कर दी गयी है।

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डीएम सविन बंसल

डीएम ने बताया कि नैनी झील में किये गए बैथीमेट्री विश्लेषण कार्य के अन्तर्गत जल की गहराई की मैपिंग-लेक बैड प्रोफाईलिंग, झील का विस्तृत जल गुणवत्ता विश्लेषण, पीएच लेवल, डीओ, टीडीएस, क्लोरीन, टर्बिडिटी, सेलेनिटी आदि परीक्षण किये गये। उन्होंने बताया कि इन परीक्षणों में इसरो वैज्ञानिकों की टीम द्वारा पहली बार नैनी झील की 78 हजार बिंदुओं की गहराई मापते हुए कॉन्टूर लेक प्रोफाईल तैयार कर रिपोर्ट दी है, और झील के पानी की गुणवत्ता के आकड़ों को पहली बार जीआईएस प्रोफाईल पर प्रदर्शित करते हुए झील के विभिन्न स्थानों पर पानी की गुणवत्ता का मानचित्रीकरण किया गया है। इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा सर्वे के उपरान्त डाटा उपलब्ध कराया गया, जिसे जिला प्रशासन के जीआईएस सेल द्वारा परिशोधन करके महत्वपूर्ण परिणाम ज्ञात किये गये।

यह होगा यूएन की स्वीकृत परियोजना में

नैनीताल। डीएम श्री बंसल ने बताया कि बैथीमेट्री स्टडी परिणामों को यूएनडीपी को उनके द्वारा प्रस्ताव बनाकर भेजा गया। फलस्वरूप यूएन द्वारा झील के पानी की सतत् निगरानी हेतु परियोजना स्वीकृत कर दी गयी है। जिसका अतिशीघ्र क्रियान्वयन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि किसी झील का साइंटिफिक एवं प्रामाणिक डाटा उपलब्ध कराये जाने पर यूएन द्वारा भारत में पहली बार किसी झील की स्टडी प्रोजेक्ट लिया गया है। यूएन द्वारा वित्तीय एवं तकनीकी कार्य निःशुल्क किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट लगभग 55 लाख रूपये का होगा, जिसका शीघ्र एमओयू भी किया जायेगा। यूएन द्वारा झील के दोनो छोर (तल्लीताल मल्लीताल) पर जहां पेयजल हेतु पम्प लगे हैं, पर पानी की गुणवत्ता की माप हेतु सेंसर लगाये जायेंगे साथ ही जनता को झील के पानी की गुणवत्ता की जानकारी देने हेतु तल्लीताल गॉधी मूर्ति के पास पानी की गुणवत्ता प्रदर्शित करने के लिए मॉनीटर-एलईडी लगाया जायेगा। जिलाधिकारी श्री बंसल ने बताया कि इसके बाद एनआईएच से झील के आन्तरिक जल स्रोतों का सर्वे भी कराया जायेगा।

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-360 डिग्री पर घूमने वाले 4 पीटीजेड तथा 9 स्थिर कैमरों ने कार्य करना किया प्रारंभ
नवीन समाचार, नैनीताल, 27 दिसंबर 2019। सरोवरनगरी में अब रात्रि में भी नालों में गंदगी डालने वालों व नियम विरुद्ध क्रियाकलापों को अंजाम देने वाले अब प्रशासन की नजरों में होंगे। सरोवर नगरी में 13 नाइट विजन मोड वाले यानी रात्रि में भी साफ देखने वाले सीसीटीवी कैमरे चलने शुरू हो गए हैं। इनमें से चार कैमरे पीटीजेड यानी यानी‘पैन टिल्ट जूम’ प्रकार के हैं जो कि 360 डिग्री पर घूम सकते हैं और इनसे प्राप्त चित्रों को किसी छोटे स्थान पर जूम भी किया जा सकता है। यह इतने ताकतवर हैं कि तल्लीताल में लगे पीटीजेड कैमरे से नैना पीक पर मौजूद सैलानियों के क्रियाकलापों को साफ देखा जा सकता है। पीडीजेड कैमरे तल्लीताल में गांधी प्रतिमा के पास, मल्लीताल गुरुद्वारा परिसर, बीडी पांडे अस्पताल के पास और चीना बाबा मंदिर के पास ऐसे स्थानों पर लगाए गए हैं, कि इनसे पूरे शहर में नजर रखी जा सकती है। जबकि नौ अन्य कैमरे बोट हाउस क्लब मल्लीताल, तल्लीताल रिक्शा स्टैंड के पीछे नाला नंबर एक, सात नंबर से आने वाले नाला नंबर 20, बीडी पांडे अस्पताल के पास, चीना बाबा के पास स्थित नाला नंबर 23 में लगाए गए हैं। इन कैमरों के वीडियो फुटेज पर आपदा कंट्रोल रूम एवं कोतवाली मल्लीताल में बड़ी स्क्रीनों से नजर रखी जा रही है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 10 नवंबर 2019। डीएम सविन बंसल के विशेष प्रयासों से इसरो के वैज्ञानिकों का एक दल बीते शनिवार से बैथीमेट्री सर्वे के तहत सोनार पद्धति से नैनी झील का तकनीकी अध्ययन कर रहा है। इस अध्ययन के तहत वैज्ञानिकों के द्वारा अत्याधुनिक यंत्रों के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर नैनी झील की गहराई नापी जा रही है। साथ ही झील की तलहटी में पड़े मलबे व अन्य पदार्थों का भी अध्ययन किया जा रहा है। इस अध्ययन में नैनी झील की चिंताजनक तस्वीर भी दिखाई दे रही है।

DM Savin Bansal

वैज्ञानिकों को अध्ययन में नैनी झील के कई हिस्सों में काफी गंदगी एवं नैनी झील की औसत गहराई पर चिंताजनक तस्वीर दिखाई दी है। डीएम बंसल ने वैज्ञानिकों के हवाले से बताया कि पाषाण देवी मंदिर के समीप से मध्य तक क्षेत्रफल में झील की गहराई सर्वाधिक है। वहीं अभी तक झील की विधिवत तकीनीकी मैपिंग न होने के कारण अभी यह जानकारी नहीं है कि झील में कितना मलवा जमा है। लेकिन इस अध्ययन के बाद यह जानकारी रहेगी किए झील में कितना मलवा समा रहा है। उसी के हिसाब से तकनीकी कार्यवाही भी की जायेगी।

नैनी झील के संरक्षण के लिए बनेगी विशेष कार्य योजना
नैनीताल। डीएम सविन बंसल ने बताया कि नैनी झील को रिचार्ज करने वाले नालों की सफाई के साथ ही जाली लगाने का काम किया जा रहा है। साथ ही सूखाताल झील के पानी से बरसात में नैनी झील रिचार्ज करने के लिए विशेष कार्य योजना बनाई गई है। आगे सूखाताल में गड्ढे बनाए जायेंगे ताकि बरसात का पानी जमा हो और नैनी झील रिचार्ज होती रहे। इसके साथ ही सूखाताल व उसके आसपास के क्षेत्रों में वृक्षारोपण भी किया जाएगा ताकि वृक्षों के माध्यम से भी वर्षा जल सूखाताल में संकलित हो सके।

डीएम ने स्वयं देखीं वैज्ञानिकों की गतिविधियां
डीएम श्री बंसल ने रविवार को वैज्ञानिकों के साथ नैनी झील में भ्रमण कर वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे तकनीकी कार्यों का मौका मुआयना किया और उनसे बात भी की। श्री बंसल ने बताया कि वैज्ञानिकों का विशेष दल पहली बार नैनी झील का इस तरह का अध्ययन कर रहा है। खास बात यह भी है कि इस महत्वपूर्ण सर्वे कार्य के लिए इसरो द्वारा किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा रहा है। अध्ययन के तहत वैज्ञानिकों ने सोनार सिस्टम के माध्यम से नैनी झील की गहराई का जीपीएस के जरिये मानचित्रण किया, साथ ही वैज्ञानिकों के द्वारा झील में मौजूद ठोस अपशिष्ट, पीएच मान आदि के साथ ही झील के पानी की गुणवत्ता, अवसादन तथा सूचकांक का भी अध्ययन वैज्ञानिकों द्वारा किया जा रहा है। श्री बंसल ने बताया कि इसरो के वैज्ञानिक अध्ययन के उपरांत प्रशासन को झील के संबंध में रिपोर्ट आख्या प्रस्तुत करेंगे जिसे शासन को भेजा जाएगा तथा झील के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु धनरशि अवमुक्त कराने के लिए अनुश्रवण भी किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक वैभव गर्ग, वैज्ञानिक पंकज, इंजीनियर नमन, अभिषेक, ईशान, एसडीएम विनोद कुमार, सीओ विजय थापा आदि मौजूद रहे।

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नैनी झील में सोनार तकनीकी पर कार्य करने वाली जीपीएस युक्त ईको बोट के जरिये बैथीमैट्री विश्लेषण का अवलोकन करते डीएम सविन बंसल।

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 नवंबर 2019। उत्तराखण्ड राज्य के 20वें स्थापना दिवस पर डीएम सविन बंसल की पहल पर राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की के वैज्ञानिकों द्वारा नैनीझील का बैथीमैट्री विश्लेषण कार्य प्रारम्भ किया गया।
इस मौके पर श्री बंसल ने कहा कि नैनी झील झील के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए बैथीमेट्री कार्य आवश्यक है। इसके लिए विशेष प्रयास कर राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की के वैज्ञानिकों के माध्यम से बैथीमैट्री विश्लेषण कार्य पहली बार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बैथीमैट्री विशलेषण के जरिये नैनी झील की प्रकृति तथा पानी की सतह के नीचे पानी की आंतरिक संरचनाओं मे हुए परिवर्तन, झील के दीर्घकालीन संरक्षण, झील की जल संग्रहण क्षमता विकास तथा ईको सिस्टम को बनाए रखने हेतु वैज्ञानिक द्वारा सघन अध्ययन किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि देश-दुनिया में विख्यात नैनी झील की प्रकृति, पानी की सतह के नीचे की संरचनाओं, लैंड टोपोग्राफी, लेक फ्लोर एवं अन्य तकनीकी विषयों को ज्ञात करने के लिए बैथीमैट्री विशलेषण अति आवश्यक है। इसके लिए जलविज्ञान संस्थान रुड़की के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. वैभव गर्ग के नेतृत्व में 5 सदस्यीय तकनीकी टीम कार्य करेगी जो झील के विश्लेषण कार्य हेतु जीपीएस युक्त ईको बोट एवं सोनार तकनीकी पर कार्य करने वाले अन्य सहवर्ती उपकरणों के साथ कार्य करेगी। कहा कि विश्लेषण रिपोर्ट के आधार पर झील के संरक्षण हेतु सभी आवश्यक कदम उठाए जायेंगे। इस अवसर पर सीडीओ विनीत कुमार, एडीएम एसएस जंगपांगी, कैलाश सिंह टोलिया, एसडीएम विनोद कुमार, एआरटीओ विमल पांडे, ईओ एके वर्मा, जिला पर्यटन विकास अधिकारी अरविंद गौड़ आदि अधिकारी उपस्थित रहे।

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-ब्रिटिशकालीन रेगुलेशन गेटों की जगह अत्याधुनिक स्कॉडा तकनीक से नये गेट व जल स्तर प्रदर्शित करने का प्रबंध लगेगा
-तल्लीताल-मल्लीताल सहित चार नालों में कूड़ा-कचरा डालने वालों पर नजर रखने के लिए लगेंगे सीसीटीवी कैमरे

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नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अक्टूबर 2019। सरोवर नगरी नैनीताल के सर्वप्रमुख आकर्षण नैनी झील के लिए अरसे बाद बड़े कार्य होने जा रहे हैं। झील में पानी के नियंत्रण के लिए अंग्रेजी दौर में बने डांठ यानी गेटों की जगह नये आधुनिक स्कॉडा तकनीक से संचालित गेटों के निर्माण हेतु डीएम सविन बंसल के प्रयासों से शासन ने 78.05 लाख की स्वीकृति प्रदान कर दी है। झील में पानी कम होने पर नये गेटों का निर्माण किया जाएगा। नये गेटों में झील का जल स्तर डिजिटल तरीके से प्रदर्शित करने का प्रबंध भी किया जाएगा। इसके साथ ही डीएम बंसल ने अपनी विवेकाधीन कोष से नैनी झील के चार प्रमुख नालों-नाला नंबर 1, 20, 21 व 23 तथा मल्लीताल नैना देवी मंदिर व बोट हाउस क्लब के समीप तथा तल्लीताल में महात्मा गांधी जी की मूर्ति के पास नालों व झील में कूड़ा डालने वालों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी लगाने के लिए 15 लाख रुपए की धनराशि जारी कर दी है।

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डीएम सविन बंसल

डीएम श्री बंसल ने बताया कि नैनी झील के लिए जिला प्रशासन ने अभिनव डिजिटल पहल की कार्य योजना तैयार की है। नैनी झील के गेटांे पर मानसून काल में झील का स्तर बढने पर पानी की निकासी ब्रिटिशकालीन शासनकाल मे स्थापित मैकैनिकल व्हील के माध्यम से काफी कठिनाई से करनी पड़ती है। इसलिए जुलाई प्रथम सप्ताह में स्कॉडा सिस्टम से लेक ब्रिज के अपस्ट्रीम मे नये गेटों के निर्माण एवं पुराने गेटों के मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार कर धनराशि उपलब्ध कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इस पर शासन से 78.05 लाख की धनराशि अवमुक्त कर दी गई है। यह महत्वपूर्ण तकनीकी कार्य सिचाई विभाग की यांत्रिकी शाखा रुडकी द्वारा कराया जा रहा है। वहीं झील में पानी लाने वाले नालों से आने वाले अपशिष्ट को रोकने के लिए सीसी कैमरो के माध्यम से निगरानी हेतु उन्होंने अपने विवेकाधीन कोष से 15 लाख रुपए स्वीकृत कर दिये हैं। यह कैमरे दिन रात ऐसे लोगो की निगरानी करेगे जो नालों मे चोरी छुपे कूड़ा-कचरा आदि गंदगी डालते हैं। इन कैमरों के ऑनलाइन अनुश्रवण हेतु कलेक्ट्रेट स्थित जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र तथा सिचाई खंड नैनीताल मे नियंत्रण कक्ष स्थापित किये जायेगेे जो कि कैमरों की रिकार्डिग की मानिटरिंग करेंगे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 29 अगस्त 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने प्रो. अजय रावत की जनहित याचिका को अंतिम रूप से निस्तारित करते हुए नैनीताल जिला प्रशासन को नैनीताल के सूखाताल, शेर का डांडा व सात नम्बर के जोन एक व दो में आने वाले क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने के तथा पर्यटकों व स्थानीय जनता की सुविधा के अनुसार यातायात नियंत्रित करने व इस कार्य में आईआईटी दिल्ली की सलाह लेने, अवैध रूप से भवन निर्माण करने वालों पर कानूनी कार्यवाही करने के निर्देश भी शासन-प्रशासन को दिए हैं। अलबत्ता, कोर्ट कमिश्नर अनिल जोशी को छूट दी है कि यदि कोर्ट के आदेशों की अवहेलना होती है तो वे कोर्ट को अवगत करा सकते हैं। साथ ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को आदेश दिया है कि इस आदेश की प्रति नैनीताल के डीएम को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजें।
कोर्ट ने प्रो. रावत की याचिका में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार की विशेषज्ञ कमेटी द्वारा नैनीताल को इको सेंसेटिव जोन घोषित करने की संस्तुति के अनुसार सरकार को निर्देश देने की अपील पर कहा कि ऐसा निर्देश वन व पर्यावरण मंत्रालय स्वयं दे सकता है। कमेटी ने यह संस्तुति मार्च मार्च 2003 में की थी। प्रो. रावत की दूसरी प्रार्थना जिसमें नैनीताल में बड़े स्तर पर हो रहे अवैध निर्माणों को रोकने व दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की गई थी, के संदर्भ में कोर्ट ने सचिव आपदा प्रबंधन उत्तराखंड को निर्देश दिया है कि वे दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करें।

सूखाताल व संवेदनशील पहाड़ियों में हो रहे अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के साथ ही यातायात को लेकर भी दिये बड़े निर्देश
हाईकोर्ट ने कुमाऊं आयुक्त, डीएम नैनीताल व प्राधिकरण सचिव को सूखाताल व संवेदनशील पहाड़ियों में हो रहे अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन सुरक्षित स्थानों में आवासीय घर बनाने की अनुमति देने हेतु कोर्ट ने छूट भी दी है। वहीं यातायात नियंत्रण के लिए कोर्ट ने डीएम व एसएसपी को कई निर्देश दिए हैं, जिसके तहत नैनीताल में 25 सीट से अधिक क्षमता का वाहन लाने की अनुमति न देने, शहर से बाहर छोटे होटल खोलने व होम स्टे योजना लागू करने, शहर से बाहर सेटेलाइट पार्किंग बनाने, माल रोड में आपातकालीन सेवा को छोड़ अन्य भारी वाहनों का प्रवेश निषिद्ध करने, अपर माल रोड में सीजन में शायं 6 से 9 बजे तक व ऑफ सीजन में 6 से 8 बजे तक यातायात बंद रखने को कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने नैनीताल के लिए नए टैक्सी परमिट जारी करने पर रोक लगा रखी है परंतु यदि वाहन पुराना या खटारा हो जाता है तो आरटीओ चाहे तो उसे नया परमिट जारी कर सकता है। इसके अलावा नैनी झील में सीवर की गंदगी जाने से रोकने, घोड़ों की लीद को झील में न जाने देने, नालों में मलवा न फेंकने, पेड़ों के अवैध कटान को गम्भीर अपराध मानने के निर्देश भी दिए हैं।

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-सभी नालों के मुहानों पर 6 फिट ऊंची जालियां एवं नगर में चार एसटीपी बनेंगे
Kumaon Commissioner Rajiv Rautelaनवीन समाचार, नैनीताल, 27 अगस्त 2019। नैनी झील में आने वाले पानी की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए दो बड़े कदम उठाए जाएंगे। पहला, सभी नालों के नैनी झील में गिरने वाले सिरों पर लगभग 6 फीट ऊंची जालियां लगायी जायेंगी, ताकि कूड़ा और मलबा उनमें आकर फंस जाए और झील में न जाने पाए। दूसरे नगर की सीवर लाइनें उफनकर उनकी गंदगी झील में न जाए, इस हेतु नगर में चार एसटीपी यानी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किये जाएंगे। मंगलवार को नगर की अंग्रेजी दौर में गठित हिल साइड सेफ्टी कमेटी की बैठक लेते हुए मंडलायुक्त राजीव रौतेला ने एसटीपी हेतु शहर के चार स्थानों- कैपिटल सिनेमा, मेट्रोपोल होटल, स्टैट बैंक के पास, रेमजे होस्पीटल के समीप एसटीपी बनाये जाने हेतु भूमि चयन प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।
इस दौरान आयुक्त श्री रौतेला ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा नैनी झील के साथ ही सूखाताल के संरक्षण एवं विकास के लिए पांच करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत एवं इसमें से डेढ़ करोड़ रुपए अवमुक्त कर दिये गये है। उन्होंने अधिशासी अभियंता सिंचाई हरीश चंद्र भारती को कार्यों को प्रारंभ करने के निर्देश दिए। बैठक में कमेटी के सदस्यों के द्वारा नैनी झील की दीवारों की मरम्मत का सुझाव भी दिया गया, जिस पर अधिशासी अभियंता ने बताया कि 41 करोड़ का प्रस्ताव शासन में भेजा गया है। बैठक में पर्यावरणविद डा. अजय रावत, राजीव लोचन शाह, सुदर्शन शाह, अनूप शाह, जीएल शाह, नीरज जोशी व कमल जगाती आदि ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिये। बैैठक में डीएम सविन बंसल, वन संरक्षक तेजस्वनी पाटिल धकाते, डीएफओ टीआर बीजु लाल, लोनिवि के एसई डीएस नबियाल, सिंचाई विभाग के पीएस पतियाल, पेयजल निगम के ईई जीएस तोमर व लोनिवि के डीएस बसनाल आदि मौजूद रहे। गौरतलब है कि नगर में एसटीपी निर्मित करने के लिए ग्रीन ट्रिब्यूनल से अल्टीमेटम मिला हुआ है। इसके बिना नगर के होटलों को बंद करने की नौबत आ सकती है। अलबत्ता, नैनी झील किनारे प्रस्तावित एसटीपी की गंदगी का कोई अंश नैनी झील में जाकर उसके पानी को दूषित न कर दे, यह देखना होगा।

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-भीमताल झील के बांध की सुरक्षा दीवारों में दरारें आने व पानी रिसने की की गई थी शिकायत

1895 Bhimtal
1895 भीमताल

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 19 अगस्त 2019। जनपद की भीमताल सरोवर की सुरक्षा दीवारों में पिछले कुछ वर्षों से आई दरारों पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस संबंध में की गयी शिकायत को उत्तराखंड के मुख्य सचिव को संदर्भित कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। इसके बाद प्रदेश के मुख्य सचिव ने सिचाई विभाग के सचिव से मामले में नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा है।
इस मामले में भीमताल के सामाजिक कार्यकर्ता पूरन ब्रजवासी ने गत 16 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। ब्रजवासी का कहना था कि 1880 में भीमताल झील के पानी को बांधने के लिए बने बांध की दीवारें 139 वर्षों से झील को रोके हुए हैं, किंतु अब ये जवाब देने लगी हैं। इन दीवारों से पानी रिसने लगा है। पिछले वर्षों में यह मामला काफी प्रमुखता से उठा किंतु झील का स्वामित्व रखने वाले सिंचाई विभाग बांध की कमजोरी को नजर अंदाज कर देता है। इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी दूसरी बार जीत की बधाई देते हुए भीमताल नगर व झील के अस्तित्व को देखते हुए झील के बांध की दीवारों का पुर्ननिर्माण करने की मांग की थी।

शिकायत के निदान की व्यवस्था में खोट

नैनीताल। सामान्यतया लोग उच्च से उच्च पदों तक अपनी शिकायत को पहुंचाते हुए यह विश्वास रखते हैं कि उनकी समस्याओं का निदान हो जाएगा। इसी विश्वास के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्यपाल व देश के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति आदि से शिकायतें की जाती हैं। लेकिन देखने में आता है कि कितने ही उच्च पद तक शिकायत किये जाने के बाद उसकी जांच अन्ततः उन्ही निचले स्तर के अधिकारियों के स्तर से की जाती है, जो निचले स्तर पर की जाने वाली शिकायतों की जांच भी करते हैं, और कई बार ऊपर की गई शिकायतों के मामलों की जांच भी पूर्व में निचले स्तर पर की गयी शिकायतों पर कर चुके होते हैं। ऐसे में जांच रिपोर्ट वही आती है, जो पहले आई थी, और शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाती है। अब देखने वाली बात होगी कि पूर्व में भीमताल झील को कोई खतरा न बताने वाला सिचाई विभाग अब प्रधानमंत्री के स्तर पर की गयी शिकायत के बाद क्या रिपोर्ट देता है।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जुलाई 2019। डीएम सविन बंसल के आदेशों की कड़ी में एसडीएम विनोद कुमार ने नगर के निकट की सरिताताल झील एवं इसके आस-पास फैली गंदगी की सफाई न किये जाने पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता के खिलाफ सीआरपीसी यानी भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 133 के तहत कार्रवाई की है। एसडीएम श्री कुमार ने बताया कि सरिताताल व इसके आसपास फैली गंदगी के बाबत तहसीलदार की जांच आख्या के आधार पर सिंचाई खंड नैनीताल के अधिशासी अभियंता विरुद्ध सीआरपीसी की धारा 133 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आवश्यक कार्यवाही की गई है। अधिशासी अभियंता सिंचाई को आदेशित किया गया है कि वह सरिताताल एवं आस-पास की तत्काल सफाई सुनिश्चित करें एवं शपथ पत्र द्वारा अवगत करायें कि वहां पूर्ण रूप से सफाई कर ली गई है अथवा 5 अगस्त को प्रातः 11 बजे उनके-परगना मजिस्ट्रेट नैनीताल के न्यायालय में स्वयं उपस्थित होकर बतायें कि क्यों न उनके विरूद्ध सीआरपीसी की धारा 133 के तहत अंतिम कार्रवाई कर दी जाए। आगे यदि न्यायालय उनके द्वारा की गयी कार्रवाई व जवाब से संतुष्ट नहीं होता तो उनके विरुद्ध सीआरपीसी की धारा 188 के तहत दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि गत 18 जुलाई को डीएम सविन बंसल ने स्वयं सरिताताल का निरीक्षण किया था, और सीआरपीसी की धारा 133 के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। इधर उन्होंने पुनः सोमवार की सुबह भी झील का निरीक्षण किया और पाया कि झील व उसके आस-पास अभी भी गंदगी फैली हुई है। यानी अधिकारियों ने डीएम के आदेश हवा में उड़ा दिये। इस पर डीएम ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए एसडीएम विनोद कुमार को 133 सीआरपीसी के अंतर्गत कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। इस पर एसडीएम ने तहसीलदार की जांच आख्या मंगाई, जिसमें बताया गया है कि ग्राम कुरपाखा स्थित सरिताताल में अत्यधिक मात्रा में कूड़ा-कचरा, काई, प्लास्टिक एवं मलवा आदि पड़ा है, तथा ताल के समीप स्थित शौचालय भी गंदगी से भरा पड़ा है। इससे झील के पानी पर निर्भर ग्राम कुरपाखा, मंगोली, गहलना, बजून एवं बेलुआखान वासियों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने और महामारी फैलने की संभावना है।

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-नैनीताल के संरक्षण एवं विकास हेतु ‘मथन’ चिया द्वारा व्याख्यान आयोजित

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डा. पुष्किन फर्त्याल स्मृति व्याख्यान माला में वक्ताओं को सम्मानित करते डीएम सविन बंसल।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 29 जुलाई 2019। चिया यानी सेन्ट्रल हिमालयन इन्वायरमेन्ट एसोसियेशन नैनीताल के तत्वावधान में संस्था के पूर्व अधिशासी निदेशक स्वर्गीय डा. पुश्किन फर्त्याल की स्मृति में कुमाऊं विश्वविद्यालय के हरमिटेज सभागार में आयोजित व्याख्यान में स्थानीय विधायक संजीव आर्य ने वर्षा जल संरक्षण को आंदोलन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया और नगर के शिक्षण संस्थानों, होटलों एवं अन्य बड़े संस्थानों से इसकी पहल करने का अपील की, ताकि नैनी झील पर निर्भरता कम की जा सके। साथ ही उन्होंने नगर में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के न होने के प्रति ध्यान आकर्षित किया। कहा कि सर्वोच्च न्यायालय व एनजीटी के आदेशों पर नगर में एसटीपी की स्थापना के लिए कुछ ही माह बचे हैं। अन्यथा नगर के होटलों व शिक्षण संस्थानों आदि के बंद होने की नौबत भी आ सकती है।
आयोजन में मूलतः प्रदेश के पर्वतीय शहरों की कैरीइंग कैपेसिटी यानी वहन क्षमता पर चर्चा की गयी। कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. केएस राणा ने कहा कि सभी समस्याओं की मूल समस्या अधिक जनसंख्या की है, और जनसंख्या को नियंत्रित किये जाने में सभी समस्याओं का समाधान निहित है। व्याख्यान के प्रथम सत्र में जीबीपीएनआईएचईएसडी के लिए वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. सुब्रत शर्मा व डा. रंजन जोशी ने पर्वतीय पर्यटन स्थल की वहन क्षमता पर उपस्थित लोगों परिचर्चा की। डीएम सविन बसंल ने कहा कि अतिक्रमण पर रोक लगाने के लिए नियमित कार्य किये जाने की जरूरत बताई। प्रो. अजय रावत ने नगर के संरक्षण के लिए पुरानी झीलों के संरक्षण के लिए बने वेटलेंड नोटिफिकेशन को लागू करने एवं नगर के विकास कार्यों में नगर की भूगर्भीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखे जाने की आवश्यकता जताई। प्रो. शेखर पाठक ने हिमालयी क्षेत्र एवं उत्तराखण्ड के परिप्रेक्ष्य में बताया कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों से सौ वर्ष पूर्व ही शुरू हो गया था। कहा कि पलायन रोके बिना सुनियोजित दिशा-नीति नही बनायी जा सकती है, जिससे वहन क्षमता को केन्द्रित करके पलायन की गति पर नियन्त्रण लग सकता है। चिया के अधिशासी निदेशक डा. पंकज तिवारी ने अतिथियों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया तथा चिया द्वारा किये जा रहे कार्यो से अवगत कराया वहीं वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं चिया के सचिव डा. सुब्रत शर्मा ने कार्यक्रम के मुख्य बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में कुमाऊं विवि के यूजीसी-एचआरडीसी के निदेशक प्रो. बीएल साह, प्रो. ललित तिवारी, प्रो. राजीव उपाध्याय, प्रो. जीएल शाह, प्रो. डीएस कार्की, डा. सुचेतन शाह, डा. हरदयाल सिंह जलाल, चिया के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एके पंत, पूर्व सचिव प्रो. सीसी पंत, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, प्रधानाचार्य, नगर पालिका के सभासद एवं स्व. डा. फर्त्याल की पुत्री महिका फर्त्याल भी उपस्थित रही। आयोजन में दीपा उपाध्याय, प्रताप नगरकोटी, कुंदन बिष्ट, डा. प्रताप ढैला, डा. अमित मित्तल, नरेन्द्र बिष्ट, धीरज जोशी, कृष्ण कुमार टम्टा, विनीता वर्मा, अनिल कनवाल राम सिंह एवं नीमा रौतेला द्वारा सहयोग किया।

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p style=”text-align: justify;”>-रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा व मुनि की रेती नगर निकायों से हुई खुले कूड़ेदान हटाने की शुरुआत
-प्रदेश के शहरी विकास सचिव शैलेश बगौली ने बताया-आगे नैनीताल सहित प्रदेश के अन्य निकायों से भी खुले कूड़े दान हटाने की है योजना

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रुद्रप्रयाग में कूड़ेदानों को हटाते नगर पालिका कर्मी।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन जोशी, नैनीताल, 21 जुलाई 2019। शहर अपने कूड़े से अधिक अपने खुले कूड़ेदानों से अधिक गंदे होते हैं। पूरे शहर को साफ कर कूड़ेदान स्वयं शहर के सबसे गंदे बन जाते हैं। लेकिन अब यह स्थिति बदलने जा रही है। राज्य सरकार की योजना शहरों को खुले कूड़े दानों से मुक्त करने की है। प्रदेश के शहरी विकास सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि योजना की शुरुआत हो गयी है। योजना के तहत प्रदेश के रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय सहित जनपद के अन्य निकाय अच्छा कार्य कर रहे हैं। आगे नैनीताल सहित प्रदेश के सभी नगर निकायों को कूड़ेदानों से मुक्त करने की है।
उन्होंने बताया कि शुक्रवार को रुद्रप्रयाग नगर पालिका से 10 एवं इसी जनपद की तिलवाड़ा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 2, 3 एवं 4 से कूड़ेदान हटा लिये गये हैं। इसी तरह टिहरी जिले की मुनि की रेती नगर निकाय ने भी बेहतर कार्य किया है। इसके बाद केवल शहरों में चुनिंदा स्थानों पर अच्छे छोटे कूड़ेदान ही रखे जाएंगे, जिनमें घूमते हुए लोग छोटी गंदगी ही डाल पाएंगे।

घर से कूड़ा एकत्रीकरण एवं पृथक्करण से आएगी खुले कूड़ेदान मुक्त होने की शुरुआत

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प्रदेश के शहरी विकास सचिव शैलेश बगौली।

नैनीताल। शहरी विकास सचिव श्री बगौली ने बताया कि शहरों को खुले कूड़ेदानों से मुक्त कराने की शुरुआत घर-घर में कूड़ा एकत्र करने और गीले व सूखे कूड़े को एकत्र करने से होगी। लोग अपने कूड़े को अपने घर पर ही गीले व सूखे कूड़े में विभक्त करके रखेंगे, तथा नगर निकाय के कर्मचारी इस विभक्त कूड़े को अलग-अलग अपने साथ ले जाएंगे। इससे कूड़े को खुले कूड़ेदानों में डालने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। बताया कि रुद्रप्रयाग के डीएम ने इस दिशा में बेहतरीन कार्य करते हुए अपने अधिकारियों की वार्डों में लोगों को जागरूक करने के लिए ड्यूटी लगाई, जिससे यह सफलता मिली है। आगे उन्होंने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों से योजना के लिए इसी तरह का सहयोग देकर शहरों को खुले कूड़ेदान व गंदगी मुक्त करने में अपना योगदान देने के निर्देश भी दिये हैं।

नैनीताल में भी हुई घर से कूड़ा एकत्रीकरण की शुरुआत

नैनीताल। प्रदेश की दूसरी सबसे पुरानी नगर पालिका नैनीताल में पूर्व में श्री बगौली के डीएम रहते ही शुरू हुई ‘मिशन बटरफ्लाई’ योजना की सफलता एवं बाद में ‘एटुजेड’ कंपनी की विफलता के बाद एक बार पुनः घर से कूड़ा एकत्रीकरण व पृथक्करण योजना की शुरुआत हो गयी है। योजना के तहत इन दिनों शहर के विभिन्न वार्डों में गीले व सूखे कूड़े के लिए अलग-अलग छोटे कूड़ेदान बांटे जा रहे हैं। अलबत्ता अभी कूड़ा घर से ले जाने का कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है।

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p style=”text-align: justify;”>-डीएम ने नैनी झील का निरीक्षण करते हुए पर सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता तथा अधिशासी अभियंता को अनुशासनात्मक तथा विभागीय कार्यवाही की चेतावनी दी
-नैनी झील के जल स्तर को मापने व नियंत्रण के लिए स्वचालित प्रणाली लगाने के भी दिये आदेश
Lake nirikshan DMनवीन समाचार, नैनीताल, 12 जुलाई 2019। डीएम सविन बंसल ने शुक्रवार सुबह नैनी झील तथा नालों का निरीक्षण करते हुए नगर के मल्लीताल स्थित सबसे बड़े नाला नंबर 23 में गंदगी पाये जाने पर सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता तथा अधिशासी अभियंता को तीन दिन के भीतर नगर के सभी नालों की सफाई दुरुस्त करने के निर्देश दिये हैं। और ऐसा न करने पर अनुशासनात्मक तथा विभागीय कार्यवाही की चेतावनी दी है। कहा कि यदि ठेकेदार द्वारा सफाई व्यवस्था में हीलाहवाली की जा रही है तो तत्काल ठेका निरस्त कर हुए ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करें। उन्होंने तल्लीताल में झील से पानी की निकासी एवं झील के स्तर की मॉनीटरिंग के लिए लेक लेवल मैनुअल गेज-पुली सिस्टम के स्थान पर ऑटो मॉनीटरिंग तथा नियंत्रण के लिए ऑटोमैटेड स्काडा सिस्टम स्थापित करने को कहा, ताकि झील के जल स्तर तथा गेट को स्वचालित तरीके से ऑपरेट किया जा सके।
इसके साथ ही उन्होंने बरसात के दौरान झील की प्रतिदिन सुबह व शाम दो बार नियमित सफाई करने, नैना देवी मंदिर के पास ठंडी सड़क क्षेत्र में झील की क्षतिग्रस्त दीवार की मरम्मत के लिए तत्काल आगणन बनाकर प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिये। उन्होंने नालों, झील एवं आस-पास के क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए जिला विकास प्राधिकरण के सचिव हरबीर सिंह तथा एसडीएम विनोद कुमार को नोडल अधिकारी नामित किया। निरीक्षण के दौरान एडीएम एसएस जंगपांगी, हरबीर सिंह, विनोद कुमार, ईई सिचाई हरीश चंद्र सिंह, डीएस बसनाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

नये सिस्टम से खुलेगी नालों की सफाई की पोल

नैनीताल। डीएम सविन बंसल ने दोहराया कि नगर के नालों की वास्तविक निगरानी के लिए ‘वाईफाई एनेबल्ड ऑल वेदर हाई रिजुलेशन सीसीटीवी कैमरे’ स्थापित किए जा रहे हैं। इनसे सिंचाई विभाग तथा नगर पालिका द्वारा की जा रही सफाई व्यवस्था की वास्तविकता सामने आएगी, लापरवाही पाए जाने पर इन विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह भी पढ़ें : नालों में कूड़ा डालने वालों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरे का हुआ सफल परीक्षण…

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 जुलाई 2019। डीएम सविन बंसल की पहल पर नैनीताल नगर में नालों पर कूड़ा-मलवा डालने वालों पर आधुनिक तरीके से नजर रखने की कड़ी में रविवार को ड्रोन कैमरे का परीक्षण किया गया। बताया जा रहा है कि नगर के मल्लीताल स्थित मस्जिद तिराहा के पास वाले नगर के सबसे बड़े नाला नंबर 23 व बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के पास के नाला नंबर 20-21 पर डीजेआई कंपनी की ओर से ड्रोन कैमरे की करीब 10 मिनट की सफल परीक्षण उड़ानें हुईं। बताया जा रहा है कि आगे इसी कंपनी के माध्यम से नगर के सभी नालों पर कूड़ा डालने वालों, अतिक्रमण करने वालों आदि पर इसी तरह ड्रोन कैमरों से नजर रखी जा सकती है।

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p style=”text-align: justify;”>-बलियानाला क्षेत्र में भूस्खलन पर नजर रखने को भी लगेंगे वाईफाई युक्त हाई रिजुलेशन ऑल वेदर सीसीटीवी कैमरे
नवीन समाचार, नैनीताल, 6 जुलाई 2019। नैनीताल की विश्व प्रसिद्ध नैनी झील के लिए सकारात्मक खबर है। नैनीताल नगर में नालों में कूड़ा, मलवा डालने वालों व अतिक्रमण करने वालों और नगर पालिका तथा सिंचाई विभाग द्वारा की जाने वाली नालों की सफाई व्यवस्था पर पैनी नजर बनाए रखने के लिए संवेदनशील स्थानों पर तीसरी ऑख के रूप में ‘वाईफाई युक्त हाई रिजुलेशन ऑल वेदर सीसीटीवी कैमरे’ लगाये जाने की कवायद शुरू कर दी गई हैं। डीएम सविन बंसल ने बताया कि इन कैमरों की प्रतिदिन मोनीटरिंग एवं पर्यवेक्षण करने के लिए जिला कन्ट्रोल रूम तथा एलडीए में कन्ट्रोल डिसप्ले लगाते हुए प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। नालों में कूड़ा डालने वालों के चालान करते हुए आपदा अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
श्री बंसल ने नैनीताल झील को नगर की जीवर रेखा एवं इसमें गिरने वाले नालों को झील की धमनियां बताते हुए नालों में कूड़ा एवं मलवा डालने तथा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि नैनीताल शहर में स्थित विभिन्न नालों के अलग-अलग स्थानों पर कूड़ा तथा भवन निर्माण सामाग्री तथा मलवा डाले जाने से वर्षा के दौरान नालियॉ अवरूद्ध होने से बहाव सड़क एवं पहाड़ियों से होते हुए परिसम्पत्तियों को नुकसान पहुंचता है, जिससे जान-माल के नुकसान की संभावना बनी रहती है। विगत वर्षो में नालों के बहाव अवरूद्ध होने के कारण आपदा जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी ,जिससे माल रोड पर भारी मलवा जमा होने से माल रोड धंस गई थी तथा जन-जीवन एवं यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ था तथा इसके पुर्नस्थापना में काफी समय एवं धन भी व्यय हुआ था। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नालों एवं झील के विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी लगाने हेतु ऐसे स्थान चुनें जहां से नालों की रियल टाईम मॉनीटरिंग एवं पर्यवेक्षण किया जा सके। उन्होंने बताया कि अतिसंवेदनशील बलियानाला के ‘स्लोप क्रोनिक डेवलपमेंट मोनीटरिंग’ एवं प्रतिकूल स्थिति पर पैनी नजर रखते हुए प्रतिकूल स्थिति में रेस्पोंस टाईम कम करने के लिए भी तीसरी ऑख के रूप में वाईफाई इनेबल्ड हाई रिजुलेशन ऑल वेदर सीसीटीवी कैमरे सहायक होंगे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जनवरी, 2019। सरोवरनगरी नैनीताल की वैश्विक पहचान बनाने वाली नैनी झील में इसके जलागम क्षेत्र की पानी की बूंद-बूंद को लाने और इसमें आई हर बूंद को बचाकर इसे संरक्षित करने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल नगर में छतों से गिरने वाले बारिश के पानी को सीवर लाइन में डालने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने जल संस्थान को नगर में चिह्नित ऐसे 215 मामलों में दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति नारायण सिंह धानिक की संयुक्त खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। नैनीताल नगर के सामाजिक कार्यकर्ता कमल त्रिपाठी ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता विपुल शर्मा ने कोर्ट में बताया कि नगर के कई भवनों के छतों का पानी सीवर से जोड़ कर रखा गया है। इसके चलते नगर में होने वाली बारिश का साफ पानी नैनी झील में जाने के बजाय नगर से बाहर चला जाता है। वहीं सीवर लाइन पर इसके दबाव के कारण माल रोड सहित कई अन्य स्थानों पर सीवर लाइन ओवर फ्लो होकर गंदा पानी नैनीझील में जाता है,जो सही नहीं है। सुनवाई के दौरान जल संस्थान की ओर से कोर्ट में बताया गया कि ऐसे भवनों का सर्वे किया गया है। जिसमें 215 मामले सामने आए हैं। इनमें निजी और सरकारी भवन शामिल हैं। इस पर कोर्ट ने सख्त नारजगी व्यक्त करते हुए जल संस्थान से सभी भवनों के सीवर से संयोजन हटाने के कहा और इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

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-बदले जाएंगे अंग्रेजों के जमाने में बने झील के डांट (गेट), तल्लीताल में लगेगा बड़ा इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड, वर्षा जल संग्रहण का पूरा प्रबंध भी होगा

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p style=”text-align: justify;”>नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जनवरी, 2019। सरोवरनगरी नैनीताल की वैश्विक पहचान बनाने वाली नैनी झील में इसके जलागम क्षेत्र की पानी की बूंद-बूंद को लाने और इसमें आई हर बूंद को बचाकर इसे संरक्षित करने के लिए सिचाई विभाग ने करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से नैनी झील को बचाने का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इस बजट से नगर के बरसाती पानी को झील में लाने, झील की सफाई करने, नालों के मुहानों की मरम्मत, झील के किनारों की मरम्मत एवं झील में पानी घोलने की पहले से चल रही एरिएशन की प्रक्रिया को और बेहतर किया जाएगा। इस बाबत विस्तृत प्रस्ताव पर शुक्रवार को देहरादून शासन की वित्त व्यय समिति की बैठक भी हो चुकी है।
सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता एमसी पांडेय ने इस बाबत विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि योजना के अंतर्गत नैनीताल नगर के नैनी झील के जगागम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पूरे क्षेत्र का वर्षा जल संग्रहण का प्रबंधन किया जाएगा। इसके तहत नैनी झील में पानी लाने वाले सभी 64 नालों का रिस्टोरेशन, इस हेतु शहर के घरों की छतों में गिरने वाले बरसाती पानी को नालों से जोड़ने, ताकि उनका पानी झील में पहुंचे उनके झील में पहुंचने वाले मुहानों का सुधार, सूखाताल में बरसात के पानी को रोक कर इसे झील के रूप में स्थापित करने के कार्य भी किये जाएंगे। वहीं शुक्रवार की देहरादून में हुई बैठक से लौटे अधीक्षण अभियंता नरेंद्र सिंह पतियाल ने कहा कि इसी माह 23 जनवरी को होने वाली अगली बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद है।

झील को जल स्तर मांपने और प्रदशित करने का सिस्टम भी बदलेगा

नैनीताल। योजना के तहत नैनी झील के जल स्तर को मापने और इसे प्रदर्शित करने की मौजूदा व्यवस्था भी पूरे एक करोड़ रुपये खर्च कर बदली जाएगी। उल्लेखनीय है कि अब तक चल रही अंग्रेजी दौर की व्यवस्था के तहत संभवतया उस दौर के सबसे निचले स्तर को शून्य स्तर माना जाता है, जबकि नैनी झील की गहराई करीब 27 मीटर मानी जाती है। ऐसे में झील का जल स्तर शून्य बताये जाने के दौरान भी झील में 20 मीटर से अधिक जल होता है और इसे शून्य कहे जाने से भ्रमपूर्ण स्थिति भी बनती है। वहीं जल स्तर को बताने के लिए भी अंग्रेजी दौर की ही अंकों को लटकाने की व्यवस्था है। इनमें से अधिकांश अंक हवा में उड़कर गायब भी हो चुके हैं। वहीं सिचाई विभाग के मुख्य अभियंता एमसी पांडे ने बताया कि नयी व्यवस्था के तहत झील के आधार से जल स्तर की माप की जाएगी और इसे तल्लीताल डांठ, फांसी गधेरा अथवा किसी अन्य ऐसे सुविधाजनक स्थान पर लगाया जाएगा जहां से नगर के आम लोग एवं सैलानी झील के स्तर, पानी की गुणवत्ता आदि के बारे में जान सकें, एक विशाल इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। इस बोर्ड में नगर के तापमान, बारिश, आर्द्रता आदि के बारे में जानकारियां प्रदर्शित की जाएंगी।

सात करोड़ में बनेता भरा सूखाताल

नैनीताल। योजना के तहत सात करोड़ रुपये में सूखाताल को झील के रूप में विकसित एवं पुर्नस्थापित किया जाएगा। इसके लिये क्षेत्र के सूखाताल के बेड की सफाई कर इसकी गहराई इसके मूल स्तर तक बढ़ाई जाएगी एवं इसके जलागम क्षेत्र के नालों को सूखाताल से जोड़ा जाएगा, ताकि बरसात में यह झील भर जाए, और आगे पूर्व की तरह लंबे समय तक नैनी झील को रिसाव के जरिये पानी पहुचाकर रिचार्ज करते रहें।

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p style=”text-align: justify;”>Plasticनैनीताल, 23 सितंबर 2018। ईश्वर प्रदत्त प्रकृति से अधिक शक्तिमान कुछ भी नहीं। मनुष्य एक-दूसरे को, शासन-प्रशासन भले जनता और न्यायालय को बेवकूफ बना लें, किंतु ईश्वर और उसके अंग प्रकृति की आंखों में धूल नहीं झोंक सकते। रविवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। नगर में हुई बारिश के बाद नैनी झील ने नगर की सफाई व्यवस्था और प्रशासन के पॉलीथीन उन्मूलन के प्रयासों की पूरी तरह से पोल-खोल कर रख दी। नैनी झील की सतह पर इतनी अधिक मात्रा में प्लास्टिक उभर कर आ गयी कि कई लोगों से देखी न जा सकी। ऐसे में कुछ नाविकों ने ही बिना (बिना अखबारनवीसों को सूचना दिये या पहले से किसी कभी लक्ष्य पूरा न किये जाने के लिये चलाये जाने वाले प्रशासनिक अभियानों की तरह कोई घोषणा किये) झील की सतह पर इकट्ठा हुई प्लास्टिक को झील से हटाया।
Plastic1उल्लेखनीय है कि नगरवासी और प्रशासनिक जिम्मेदार विभाग इस वर्ष मानवीय हरकतों-प्लास्टिक इत्यादि के कारण नालों-नालियों के चोक होने से लोवर माल रोड के नैनी झील में समाने और उधर बेरोकटोक निर्माणों की वजह से पानी के रिसाव से बलियानाला के रईस होटल क्षेत्र में हुए अब तक के सबसे बड़े भूस्खलन के बावजूद अपनी हरकतों से कोई सबक नहीं ले रहे हैं। इसकी परिणति-कीमत भविष्य में किस रूप में नगर को चुकानी पड़ सकती है, इसका किसी को अंदाजा भी नहीं है।

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पक्षी-तितली प्रेमियों का सर्वश्रेष्ठ गंतव्य है पवलगढ़ रिजर्व

उत्तराखंड का नैनीताल जनपद में रामनगर वन प्रभाग स्थित पवलगढ़ रिजर्व पक्षी प्रेमियों के लिए बेहतरीन गंतव्य है। दिल्ली से सड़क और रेल मार्ग से करीब 260 किमी तथा नजदीकी हवाई अड्डे पंतनगर से करीब 87 किमी दूर रामनगर के जिम कार्बेट नेशनल पार्क से कोसी नदी के दूसरी-पूर्वी छोर से सटा 5824 हैक्टेयर में फैला प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधिता से लबरेज पवलगढ रिजर्व, पक्षियों को देखने यानी बर्ड वाचिंग के शौकीनों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त स्थान है। यहां अब तक करीब 365 प्रजातियों के पक्षी देखे और पहचाने जा चुके हैं। साथ ही यहां मिलती करीब 83 तरह की तितलियां और 100 प्रकार के मॉथ यानी तितलियों की ही दूसरी प्रजातियां भी मिलती हैं।

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📅🌧️🏔️🕯️18 सितम्बर : नैनीताल के साथ पूरे उत्तराखंड वासियों वालों के लिए सबक लेने का दिन

(Nainital-Encroachments Over 62British-Era Drains (Nainital-Investigation of encroachment on Drains

18 सितंबर पर विशेष: आज का दिन याद कर कांपती है रूह, पर याद नहीं किये सबक-कमजोर भूगर्भीय संरचना के शहर के सुरक्षित बचे रहने में है बड़ी भूमिकाडॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 18 सितंबर 2025 (18 September 1880)। 18 की तिथि सरोवरनगरी के लिये बेहद महत्वपूर्ण है। 18 नवंबर 1841 को ही इस … Read more

अब बनाइये ऐसे बंबू हट, जिन पर गोली, आग व भूकंप का भी असर न होगा

Bamboo Huts at Maheshkhan
महेशखान में वन विभाग के बम्बू हट

Interior of Bamboo Huts at Maheshkhan
महेशखान में वन विभाग के बम्बू हट का इंटीरियर

-नैनीताल स्थित चिड़ियाघर में ऐसा ही एक बंबू हट, जो है पूरी तरह ईको फ्रेंडली तथा बारिश, सर्दी-गर्मी व बारिश के प्रभावों से भी सुरक्षित
नवीन जोशी, नैनीताल। पहाड़ों पर सीमेंट, सरिया की जगह हल्की संरचना के, पारिस्थितिकी के अनुकूल यानी ईको-फ्रेंडली घर बनाने की जरूरत तो बहुत जतायी जाती है, और इसके लिये बंबू हट यानी बांश के बनों घरों का विकल्प सुझाया भी जाता है, लेकिन बंबू हट एक सुरक्षित घरों की जरूरतों को पूरा नहीं करते। उनमें जल्द बारिश-नमी की वजह से फफूंद लग जाती है। बांश की लकड़ी को दीपक भी कुछ वर्षों के भीतर चट कर जाती है, और बांश की खपच्चियों के बीच से सर्द हवायें भीतर आकर बाहर जैसी ही ठंड कर देती हैं। वहीं ऐसे घरों में आग लगने, हल्के धक्कों में भी इसकी दीवारों को तोड़कर किसी के भी भीतर घुस जाने जैसे अन्य तमाम खतरे भी बने रहते हैं। लेकिन अब आप चाहें तो बांश से ही पूरी तरह ईको फ्रेंडली के साथ ही पूरी तरह सुरक्षित बंबू हट बनाने की अपनी ख्वाहिश आम घरों से कम कीमत में पूरी कर सकते हैं। ऐसा ही एक बंबू हट मुख्यालय स्थित नैनीताल जू में रिसेप्सन, टिकट काउंटर व सोविनियर शॉप के लिये इन दिनों निर्मित किया जा रहा है।

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