नवीन समाचार, चमोली, 6 जुलाई 2026 (Controversy over Badrinath Offerings)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली (Chamoli) जनपद स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम (Shri Badrinath Dham) में चढ़ावे और दानराशि की कथित हेराफेरी को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। चढ़ावे की गणना प्रक्रिया पर सवालों के बीच बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (Badrinath-Kedarnath Temple Committee-BKTC) को पिछले 10 से 12 वर्षों में विभिन्न बैंकों द्वारा उपलब्ध कराए गए 20 से 25 लैपटॉप का भी स्पष्ट अभिलेख नहीं मिल रहा है। इस बीच जांच समिति की कार्यवाही, कर्मचारियों से मांगे गए स्पष्टीकरण और विपक्षी दलों व सामाजिक संगठनों के विरोध के कारण मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। आप यह संबंधित वीडियो भी जरूर देखना चाहेंगे :
मंदिर समिति और संबंधित सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार विवाद की शुरुआत 2 जुलाई को सामने आए एक कथित सीसीटीवी (CCTV) वीडियो के बाद हुई, जिसमें दान और चढ़ावे की गणना के दौरान अनियमितता के आरोप लगाए गए। इसके बाद भैरव सेना (Bhairav Sena) नामक संगठन ने मंदिर समिति को शिकायत देकर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी।
चार सदस्यीय जांच समिति गठित, लेकिन तीन दिन बाद भी नहीं पहुंची धाम
शिकायत के बाद बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी (Hemant Dwivedi) की संस्तुति पर चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। समिति में विधि अधिकारी, वित्त नियंत्रक, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (केदारनाथ) को शामिल किया गया है। समिति को सात दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि विवाद उठने के तीन दिन बाद तक जांच दल के बदरीनाथ धाम नहीं पहुंचने को लेकर भी प्रश्न उठे हैं। बताया गया है कि समिति के सदस्य अब 9 जुलाई को धाम पहुंचकर स्थलीय जांच करेंगे। इस बीच ऋषिकेश (Rishikesh) स्थित ट्रांजिट कैंप कार्यालय में जांच समिति की पहली बैठक आयोजित की गई, जिसमें जांच की रूपरेखा पर चर्चा हुई। आप यह संबंधित वीडियो भी जरूर देखना चाहेंगे :
गणना व्यवस्था और अधिकारियों की अनुपस्थिति पर सवाल
प्रकरण में यह तथ्य भी सामने आया है कि दान-चढ़ावे की गणना के लिए छह सदस्यीय टीम कार्यरत थी। इनमें प्रभारी अधिकारी और नोडल अधिकारी की भूमिका निभाने वाले दो अधिकारी 30 जून को सेवानिवृत्त हो चुके थे। आरोप है कि उनकी जगह तत्काल नई नियुक्ति नहीं की गई, जिससे निगरानी और जवाबदेही व्यवस्था प्रभावित हुई।
मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ (Sohan Singh Rangad) के अनुसार 2 जुलाई को गणना प्रक्रिया में शामिल सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया था। स्पष्टीकरण देने की समयसीमा 6 जुलाई को समाप्त हो चुकी है और अब प्राप्त उत्तरों का परीक्षण किया जा रहा है।
40 दिन की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की होगी जांच
मंदिर समिति ने स्पष्ट किया है कि जांच केवल एक दिन की घटना तक सीमित नहीं रहेगी। जांच दल लगभग 40 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग का परीक्षण करेगा। बदरीनाथ मंदिर परिसर में स्थापित 32 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपित गतिविधियां पहली बार हुईं या पूर्व में भी किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी।
इसी बीच गणना व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी प्रमोद नौटियाल (Pramod Nautiyal) को जांच प्रभावित न हो, इसके लिए देहरादून (Dehradun) स्थित कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
20 से 25 लैपटॉप का भी नहीं मिला रिकॉर्ड
विवाद के बीच एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। सूत्रों के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India-SBI), पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank-PNB), केनरा बैंक (Canara Bank) और अन्य संस्थाओं द्वारा कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (Corporate Social Responsibility-CSR) मद के अंतर्गत मंदिर समिति को पिछले वर्षों में 20 से 25 लैपटॉप उपलब्ध कराए गए थे।
बताया जा रहा है कि इन उपकरणों का पूरा विवरण समिति के स्टॉक रजिस्टर में उपलब्ध नहीं है। कुछ सूत्रों का दावा है कि वर्षों के दौरान कुछ लोग इन उपकरणों को अपने साथ ले गए, जबकि समिति का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण किया जा रहा है।
एसआईटी जांच की मांग तेज, कांग्रेस ने किया मौन व्रत
भैरव सेना ने विभागीय जांच की निष्पक्षता पर प्रश्न उठाते हुए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में विशेष जांच दल (Special Investigation Team-SIT) गठित करने की मांग की है। संगठन ने स्वीकार किया है कि उसके पास फिलहाल प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं हैं, लेकिन उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
उधर बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक लखपत सिंह बुटोला (Lakhpat Singh Butola) ने बदरीनाथ धाम पहुंचकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मौन व्रत किया। उन्होंने पूरे प्रकरण की न्यायिक अथवा एसआईटी जांच की मांग करते हुए कहा कि मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। कुछ संगठनों ने बीकेटीसी अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग भी उठाई है।
बुटोला ने पहले भगवान बदरी विशाल के दर्शन किए, इसके बाद प्रदर्शन में शामिल होकर कहा कि मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और सनातन परंपरा से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि भैरव सेना संगठन द्वारा बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कर्मचारियों और अधिकारियों पर चढ़ावे की राशि में कथित हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी को पद से हटाने, मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की।
शासन ने भी मांगा जवाब
धर्मस्व विभाग (Dharmaswa Department) ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए मंदिर समिति से विस्तृत जानकारी तलब की है। सचिव पर्यटन एवं धर्मस्व धीराज गर्ब्याल (Dheeraj Garbyal) ने चढ़ावे की गणना व्यवस्था, निगरानी तंत्र और सुरक्षा प्रबंधन से संबंधित विवरण मांगा है।
मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता से कराई जा रही है और यदि कोई भी कर्मचारी अथवा अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
