नवीन समाचार, बागेश्वर, 25 अगस्त 2026 (On Journalists Objection-FR Quashed)। उत्तराखंड (UTTARAKHAND) के बागेश्वर (BAGESHWAR) जनपद के गरुड़ (GARUR) में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) की पेयजल योजनाओं से जुड़े कथित फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र (Fake Experience Certificate), सरकारी ठेकों (Government Contracts) और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामले में गरुड़ के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate Garur) की अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है।
अदालत ने इस मामले में अभियोग दर्ज कराने वाले पत्रकार गोपाल बनवासी (Gopal Banwasi) की आपत्ति स्वीकार करते हुए विवेचक की अंतिम रिपोर्ट (Final Investigation Report) को निरस्त कर दिया और मामले में नए सिरे से अग्रेतर विवेचना (Further Investigation) कराने के आदेश दिए हैं। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों को व्यापक जांच की आवश्यकता वाला मानते हुए पहले की विवेचना को पर्याप्त न मानने के कारण मामले की जांच फिर से खोलने का रास्ता भी साफ कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम (Uttarakhand Peyjal Sansadhan Vikas Evam Nirman Nigam) बागेश्वर की निर्माण शाखा से जुड़ा है। इसमें प्रीतम कंस्ट्रक्शन (Proprietor Preetam Construction) के स्वामी प्रीतम सिंह (Preetam Singh), और तत्कालीन संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code-IPC) की धारा 420, 467, 468, 471, 120बी और 409 के तहत अभियोग दर्ज हुआ था। लेकिन पुलिस ने विवेचना में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने का आधार बताते हुए अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी, यानी अपनी ओर से आरोपितों को दोषमुक्त घोषित कर दिया था, लेकिन शिकायतकर्ता की आपत्ति पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र से जल जीवन मिशन के ठेकों तक क्या है मामला?
मामले की शुरुआत 10 नवंबर 2023 को थाना बैजनाथ (Baijnath Police Station) में दर्ज प्राथमिकी (First Information Report-FIR) से हुई थी। शिकायत के अनुसार आरोप लगाया गया था कि उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम की निर्माण शाखा बागेश्वर के एक अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) ने अपनी पदस्थापित शक्तियों का कथित दुरुपयोग करते हुए प्रीतम सिंह को जल जीवन मिशन की विभिन्न पेयजल योजनाओं के ठेके हासिल करने में मदद की।
शिकायत में गरुड़ विकासखंड की हरिनगरी (Harinagari), बलघड़ी (Balgadhi), सिरकोट (Sirkot) और मन्याखेत (Manyakhet) सहित अन्य पेयजल योजनाओं का उल्लेख किया गया था। आरोप था कि प्रीतम सिंह के पक्ष में 7 जून 2021 को अनुभव प्रमाणपत्र (Experience Certificate) जारी किया गया, जिसके आधार पर उन्हें सरकारी कार्यों के ठेके प्राप्त करने में लाभ मिला।
न्यायालय के रिकॉर्ड में संबंधित अनुभव प्रमाणपत्र का पत्रांक 2165/जी-08/277 और तारीख 7 जून 2021 दर्ज है। बाद में इसी प्रमाणपत्र से जुड़े दस्तावेज में संशोधन किए जाने और 6 मई 2023 को नया अनुभव प्रमाणपत्र जारी किए जाने का भी उल्लेख न्यायालय के आदेश में किया गया है।
शिकायतकर्ता ने न्यायालय में दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure-CrPC) की धारा 156(3) के तहत प्रार्थना पत्र और शपथपत्र सहित दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए थे। इसी प्रक्रिया के बाद बैजनाथ थाने में अभियोग दर्ज किया गया था।
मामले में हरिनगरी पेयजल योजना के संबंध में न्यायालय के रिकॉर्ड में अनुबंध लागत (Contract Cost) 17.71 लाख रुपये और वास्तविक लागत (Actual Cost) 37.79 लाख रुपये का उल्लेख है। इसके अलावा बलघड़ी, सिरकोट, मन्याखेत और अन्य योजनाओं के अनुबंध तथा वास्तविक लागत से जुड़े आंकड़े भी न्यायालय के आदेश में दर्ज हैं। शिकायत में कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से सरकारी धन को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था और कुल कथित आर्थिक क्षति 1,72,86,000 रुपये बताई गई थी।
जांच समिति ने भी दर्ज की थी अनियमितता
न्यायालय ने आदेश में मन्याखेत पेयजल योजना फेज-2 (Manyakhet Drinking Water Scheme Phase-2) से जुड़े एक महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख किया है। शिकायत के बाद जिलाधिकारी बागेश्वर (District Magistrate Bageshwar) ने मुख्य विकास अधिकारी (Chief Development Officer-CDO) की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की थी। बाद में पुनर्गठित जांच समिति ने स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की।
न्यायालय के आदेश में दर्ज है कि जांच रिपोर्ट में पाइपलाइन के लिए खुदाई और पाइपलाइन बिछाने के कार्यों में अनियमितता के कारण विभाग को 10,33,158.60 रुपये की हानि होना अंकित किया गया था और कार्रवाई की संस्तुति की गई थी।
यह बिंदु इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस की अंतिम विवेचना में इस विभागीय जांच और उससे सामने आए तथ्यों को पर्याप्त रूप से जोड़कर जांचने की आवश्यकता पर न्यायालय ने ध्यान दिया है।
न्यायालय ने किन बिंदुओं पर उठाए सवाल?
न्यायालय ने पाया कि अंतिम रिपोर्ट में विवेचक ने यह आधार लिया था कि प्रीतम सिंह को न्यूनतम बोली (Lowest Bid) लगाने के कारण ठेका मिला था और टेंडर प्रक्रिया (Tender Process) में कम से कम तीन ठेकेदारों ने भाग लिया था। लेकिन न्यायालय के अनुसार यह स्पष्ट करने वाले दस्तावेज विवेचना में प्रस्तुत नहीं किए गए कि निविदा प्रक्रिया में कौन-कौन से ठेकेदार शामिल थे, विभागीय बोली किस राशि से शुरू हुई और संबंधित विभागीय कर्मचारी कौन-कौन मौजूद थे।
न्यायालय ने यह भी दर्ज किया कि विवेचक को प्रीतम सिंह के पक्ष में 7 जून 2021 को जारी अनुभव प्रमाणपत्र और बाद में उससे संबंधित दस्तावेज में किए गए संशोधन की जानकारी थी। इसके बावजूद इन परिस्थितियों का पर्याप्त परीक्षण नहीं किया गया।
एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह था कि जिलाधिकारी के आदेश पर मामले से संबंधित पुनः जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी और वह जांच लंबित थी। इसके बावजूद विवेचक ने अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी। न्यायालय ने इस परिस्थिति को भी मामले की व्यापक जांच की आवश्यकता से जोड़कर देखा।
पत्रकार की आपत्ति पर अंतिम रिपोर्ट निरस्त
ऐसे में शिकायतकर्ता एवं पत्रकार गोपाल बनवासी (Gopal Banwasi) ने 9 जून 2025 की अंतिम रिपोर्ट के विरुद्ध आपत्ति दाखिल करते हुए कहा था कि विवेचना अधूरी और तथ्यों के विपरीत है तथा मामले में आगे की जांच आवश्यक है। इस पर न्यायालय ने रिकॉर्ड और उपलब्ध सामग्री का अवलोकन करने के बाद आपत्ति स्वीकार कर ली। अदालत ने माना कि मामले की परिस्थितियां और उपलब्ध तथ्य व्यापक अन्वेषण (Detailed Investigation) की मांग करते हैं।
इसी आधार पर दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure-CrPC) की धारा 173(8) के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए मामले में अग्रेतर विवेचना कराए जाने को न्यायोचित माना गया।
न्यायालय ने विवेचक की अंतिम रिपोर्ट संख्या 03/2025 को निरस्त करते हुए संबंधित थाने के भारसाधक अधिकारी (Officer-in-Charge) को किसी अन्य सक्षम अधिकारी से मामले में आगे की विवेचना सुनिश्चित करने और बिना अनावश्यक विलंब के जांच के परिणाम से न्यायालय को अवगत कराने का निर्देश दिया है।
अब किन बिंदुओं की होगी दोबारा जांच?
अदालत के आदेश के बाद नए विवेचक के सामने निविदा प्रक्रिया, अनुभव प्रमाणपत्र, विभागीय रिकॉर्ड, विभिन्न जल जीवन मिशन योजनाओं की अनुबंध एवं वास्तविक लागत, भुगतान संबंधी दस्तावेज और बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी।
विशेष रूप से यह भी जांच का विषय रहेगा कि 7 जून 2021 के अनुभव प्रमाणपत्र और बाद में जारी दस्तावेजों में हुए बदलाव की परिस्थितियां क्या थीं तथा उनका सरकारी ठेकों पर क्या प्रभाव पड़ा। मन्याखेत पेयजल योजना में जांच समिति द्वारा दर्ज 10,33,158.60 रुपये की विभागीय हानि के तथ्य को भी आगे की विवेचना में देखा जाना है।
हालांकि, न्यायालय के इस आदेश का अर्थ यह नहीं है कि आरोप सिद्ध हो गए हैं। न्यायालय ने केवल पहले प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट को अपर्याप्त मानते हुए आगे की विवेचना का आदेश दिया है। अब नई विवेचना में सामने आने वाले साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर ही मामले की अगली कानूनी दिशा तय होगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
