नवीन समाचार, कुमाउनी डेस्क (Kumauni-Hindi Dictionary)।यहां प्रस्तुत है कुमाउनी-हिंदी डिक्शनरी (Kumauni-Hindi Dictionary)। यह डिक्शनरी इंटरनेट पर उपलब्ध पहली व इकलौती कुमाउनी-हिंदी डिक्शनरी है, जिसमें एक-एक शब्द को अलग से ढूँढने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सभी शब्दों को एक साथ देखा जा सकता है। इस कुमाउनी डिक्शनरी को हम लगातार अपडेट करेंगे। पाठकों से निवेदन है कि यदि किसी शब्द में उन्हें गलती लगती है तो हमें कमेंट के माध्यम से सूचित करें। और यदि आपके पास इनके अतिरिक्त कुछ नये शब्द हैं तो उन्हें हमें उपलब्ध करायें, हम आपके योगदान को जोड़ते हुए इस डिक्शनरी को अपडेट करेंगे। हमारा उद्देश्य है कि कुमाउनी के शब्दों को पूरी दुनिया के लोग जानें। धन्यवाद। – संपादक।
1. अंट – शंट-बुरा-भला, गाली के अर्थ में, उदाहरण अंट-शंट बुलांण, उल्टा-सीधा बोलना।
2. अंठी – बच्चों की खेलने के लिये प्रयुक्त कांच की रंग-बिरंगी।
3. अंड – अंडा।
4. अंणकस – अजीब।
5. अखरंण – निथरना, आंखों में खटकना।
6. अगाश – आकाश।
7. अगिल – अघिल-आगे।
8. अग्गा – आगे।
9. अग्यांर – दूर के परम्परागत खेत।
10. अघिल – पछिल-आगे-पीछे।
11. अङाव हालंण – गले लगाना।
12. अचैंण – जो न चाहिये हो।
13. अच्छत – अक्षत।
14. अजुगुति – अनचाही।
15. अटाइंण – समाना।
16. अठन्नी – 50 पैंसे।
17. अठार – अठारह संख्या।
18. अठ्वार – एक पूजा जिसमें आठ पशुओं की बलि देने का प्राविधान बताया जाता है।
19. अड्डू – बच्चों का चपटे पत्थर से खेले जाने वाला एक खेल।
20. अड्याइ – पक्की रसोई में भोजन ग्रहण करने वाले व्यक्ति का स्थान।
21. अड्यावंण – भोजन को पकाते समय हिलाना।
22. अणकस – अजीब।
23. अणजाण – अनजाना।
24. अणहोति – अनहोनी।
25. अतर – वर्ना, अन्यथा।
26. अत्त – पत्त-अता-पता।
27. अत्तर – चरस।
28. अत्ती – अत्यधिक।
29. अदकपाइ – सिर के एक हिस्से का दर्द।
30. अध्यांण – चावल पकाने के लिये उबालने को रखा जाने वाला पानी।
31. अनमनाट – उलझन।
32. अनर्गी – हिचकी आने पर किसी का नाम लेने पर हिचकी का न रुकने की स्थिति।
33. अनाड़ – आनाड़-आंतें।
34. अन्यार – अंधेरा।
35. अन्वार – अनार-सूरत।
36. अपजस – अपयश।
37. अपजसी भाग – अपयशी भाग्य, ऐसा व्यक्ति जिसे अच्छे कार्य करने के बाद भी उसका श्रेय नहीं मिल पाता है।
38. अपुत्री – निःसंतान।
39. अभागि – भाग्यहीन।
40. अभागि – भाग्यहीन।
41. अमूंस, अमूसि – अमावास्या।
42. अमूसि, अमूंस – अमावास्या।
43. अमृतफल – नींबू प्रजाति का हल्के मीठे स्वाद व खुशबू युक्त फल।
44. अयांण – उम्र में छोटे।
45. अयांण – छोटा, विलोम-सयांण-सयाना।
46. अरड़ – ठंडा।
47. अरहर – एक दाल।
48. अरोड़ – पेट में होने वाली मनोड़ की स्थिति।
49. अलकस – अजीब।
50. अलाण – परेशान।
51. अलै – अभी, अब।
52. अल्लै – अभी, अब।
53. अशीक – प्रसाद, आशीष, मंदिर में दर्शन के बाद प्रसाद के के रूप में मिले फूल।
54. असौज – आश्विन माह।
55. असौजाक नौर्त – आश्विन माह में आने वाले नवरात्र।
56. अहा – आहा-वाह।
57. आंख – एक वचन व बहुबचन दोनों के लिये आंख हेतु प्रयुक्त शब्द।
58. आंख फरकूंण – आंख फेरना।
59. आंङ – शरीर।
60. आंङण – शरीर पर पहनने वाला वस्त्र।
61. आंङुव – अंगुली।
62. आंचुइ – अंजली से, सामान्यतया हथेली लगाकर पानी पीने के लिये प्रयुक्त।
63. आंण – पहेली, पहेलियां।
64. आंनाड़ – आंतें।
65. आंसि, आसि – दराती।
66. आइ – और, गले में टौंसिल होने पर उपचार के लिये प्रयुक्त लोहे का नुकीला उपकरण, गर्म तेल में तली जा रही पूरियां निकालने का लोहे का नुकीला उपकरण।
67. आइस-पाइस – बच्चों का एक खेल।
68. आऊँ – उंगली।
69. आग भुरभुरांण – लकड़ी में कोई रंध्र होने पर आज जलने पर उससे निकलने वाली हवा के साथ आग के जलने से निकलने वाली एक विशेष ध्वनि।
70. आङ – शरीर।
71. आङण – शरीर पर पहनने वाला वस्त्र।
72. आङुव – अंगुली।
73. आचपन – गायत्री मंत्र से पूर्व वेदों का नाम लेकर जल ग्रहण करने की प्रक्रिया।
74. आछा – आये हो।
75. आद – अदरक।
76. आदिम – आदमी।
77. आदू – आधा।
78. आन – अंडा, आना, एक रुपये का सोलहवां हिस्सा।
79. आनाड़ – आंतें।
80. आपंण – अपना।
81. आपण – अपना या अपने।
82. आफर – लोहार की धोंकनी युक्त कार्यशाला जहां लोहे के औजार बनाये जाते हैं।
83. आफी – अपने आप।
84. आब्बै आया – जल्दी आना।
85. आम – बड़बाज्यू-दादा-दादी।
86. आम – ह्स्व उच्चारण में दादी-नानी, उच्च उच्चारण में आम फल।
87. आमख्वैड़ – भविष्य के लिये सुखाकर रखे गये कच्चे खट्टे आम।
88. आरसी – चेहरा देखने के लिये प्रयुक्त शीशा।
89. आरि – आरी।
90. आरु – आड़ू।
91. आलंण – झोली, दाल आदि में आटा घोल कर डालना।
92. आल – आलू, आयेगा के रूप में भी प्रयुक्त।
93. आलक बाल – चौड़ी पत्त की बिच्छू घास।
94. आलछ्यो – पालछ्यो-यहां-वहां, यहां व पास के पड़ोस में।
95. आलस – आलस्य।
96. आलुक गुटुक – आलू के गुटके एक व्यंजन।
97. आलु बुखार – आलू बुखारा।
98. आशल – कुशल-कुशल क्षेम।
99. आसि, आंसि – दराती।
100. इंगूर – एक प्रकार का नारंगी रंग का सिंदूर।
101. इ – यह।
102. इकबटी – इकबटूंण-एकत्र करना, एकत्र होना।
103. इकलू, एकलू – अकेला।
104. इकसार – हर ओर एक समान।
105. इकौइ – दिन के दो हिस्से, उदाहरण-रात्तियैकि इकौइ-दोपहर से पहले का समय, ब्यावैकि इकौइ-दोपहर के बाद का समय।
106. इग्यार – ग्यारह।
107. इज – मां।
109. इज-बौज्यू – माता-पिता।
110. इजैकि बोजि – मामी।
111. इतर – इतना।
112. इतवार – रविवार।
113. इत्थ – यहां।
114. इथां-उथां – यहां-वहां।
115. इथकै-उथकै – यहां-वहां।
116. इथ-उथ – यहां-वहां।
117. इन्त्यान – परीक्षाएं।
118. इमामजस्त – अदरख, मसाले कूटने के लिये प्रयुक्त उपकरण।
119. इलम – नशा।
120. इसी – इस तरह से।
121. इस्कूल – स्कूल, विद्यालय।
122. उंण – बर्तन मलने का जूना।
123. उ – वह, बहुवचन-ऊं-वे।
124. कें – उसे।
126. उकैं – उसे।
127. उकाव-हुलार – चढ़ाई-उतार।
128. उखव – ऊखल।
129. उखव, उखोऊ, ओखव – ओखली।
130. उखाव – उल्टी।
131. उखेरंण – बिखेरना।
132. उखोऊ, उखव, ओखव – ओखली।
133. उगल – ऊगल नाम की एक हरी सब्जी।
134. उगैर – ढेर लगाना, जैसे चूहा खेतों में बिल बनाकर बिल के बाहर मिट्टी का ढेर लगा देता है।
135. उचैंण – ईश्वर के लिये किसी मनोकामना के लिये रखी जाने वाली भेंट-चावल इत्यादि।
136. उच्यूंण – बोझ उठाना।
137. उछिटंण – पुताई करना।
138. उज – शक्ति, ताकत।
139. उज – शक्ति।
140. उज गलंण – कमजोर होना।
141. उज्या – ओ ईजा का लघु रूप, ओ मां।
142. उज्याड़ – जानवरों द्वारा चोरी-चुपके से खाया जाने वाला फसल।
143. उज्याव – उजाला।
144. उठूंण – उठाना।
145. उड़ंण – उड़ना।
146. उड़ि बेर – उड़कर।
147. उतरैंणि – मकर संक्रांति को कुमाऊं मंडल में मनाया जानेे वाला परंपरागत उत्तरायणी त्योहार।
148. उति – वहाँ।
149. उत्थ – वहां।
150. उत्थकै – उधर, वहां को।
151. उत्थै – उधर, वहां को।
152. उत्यौव – कच्चा भुना हुआ धान।
153. उथां – वहाँ।
154. उदाव – एक प्रकार का कंद।
155. उदेख – बेचौनी।
156. उदेख, उदेखी – किसी दुःख के कारण मन न लगना, खिन्नता।
157. उदेखी, उदेख – किसी दुःख के कारण मन न लगना, खिन्नता।
158. उनूंल – उन्होंने।
159. उन – नीचे को, नीचे की ओर।
160. उनर – उनका।
161. उनीस – उन्नीस संख्या।
162. उपड़ंण – उखड़ना।
163. उपड़ि गो – उखड़ गया।
164. उपन – पिस्सू।
165. उपराऊ – पहाड़ के ऊपरी हिस्से में स्थित बारिश पर निर्भर असिंचित कृषि भूमि।
167. उपरू – पहाड़ के ऊपरी हिस्से में स्थित बारिश पर निर्भर असिंचित कृषि भूमि।
168. उपाड़ंण – उखाड़ना।
169. उफारंण – खोलना, उदाहरण-गिज उफारण-होंठ फैलाना, व्यंग्यात्मक भाव में किसी पर हंसना।
170. उब – ऊपर का, ऊपर की ओर।
171. उबखत – उस समय।
172. उभत – उस समय।
173. उम – उत्यौव-कच्चा भुना हुआ धान।
174. उमर – उम्र।
175. उमवन – उमवण-उबलता हुआ।
176. उमाव – उबाल, उबलना।
178. उसी – उस तरह से।
179. उहूं – उससे।
180. ऊं – वे, एकवचन-उ-वह।
181. ऊंण – आना, उसके लिये।
182. ऋतु रैंण – पहाड़ की एक प्रतिनिधि गीत गायन शैली।
183. एकनैसै – एक जैसा।
184. एकलू, इकलू – अकेला।
185. एकादशि – एकादशी, चंद्र माह की 11वीं तिथि।
187. एति, यति – यहां, यहां पर।
188. एत्थ – यहां।
189. एत्थ-उत्थ – यहां-वहां।
190. एसी – इस तरह से।
191. एै – आना, आया।
192. एै रौछी – आया था।
193. ऐपण – अल्पना।
194. ऐ बेर – आकर।
196. ओखव, उखव, उखोऊ – ओखली।
197. ओच्छी – ओछी हरकत करना।
198. ओछंण – बीतना, उदा. दिन ओछै गो।
199. ओछै – बीतना, उदाहरण-दिन ओछै गै छी-दिन बीत गया था।
200. ओछ्यूंण – बेवजह की अधिक, अवांछित-ओछी मजाक करना, उदाहरण- उ अत्ती ओछी रौ, वह अत्यधिक-बेवजह उछल-मटक रहा है।
201. ओड़ – सीमा का पत्थर, पत्थर की दीवार तैयार करने वाला मिस्तरी।
202. ओलटोल – जिम्मेदारी, दोष का उत्तरदायित्व।
204. ओल्गी – घी त्योहार, एक त्योहार।
205. औंव – आंवला।
206. औट्या, किन – कुत्तों व गाय-भैंस के शरीर पर लगने वाले परजीवी कीड़े।
207. औदिनी, औदिली – महिला का गर्भवती होना।
208. औदिली, औदिनी – महिला का गर्भवती होना।
209. औरनाक – औरों के, अन्य लोगों के।
210. औरी – कुछ अलग ही।
211. औरी हैरै – कुछ अलग ही हुआ है।
212. कंस – खेत के ऊपर की ओर का हिस्सा।
213. कांकड़ – एक वन्य जीव, बार्किंग डियर।
214. कांन – कांटा।
215. कांस – कांसा धातु, छोटा (कांस च्यल-छोटा बेटा, कांसि च्येलि-छोटी बेटी )।
216. कांसै थाइ – कांसा धातु की थाली, कांसक गिलास-कांसे का गिलास, कांसक ब्यल-कांसे का कटोरा।
217. कुंडि – दरवाजे को बंद करने के लिये लगाया जाने वाला प्रबंध, कुंडी।
218. कुंणि – कहने योग्य।
219. कूंण – कहना।
220. कैंज, कैंजा – मौसी।
223. कोंखई-कर्याड़ि – घर के पीछे की गली।
225. कौंणि – बहुत छोटे, गोल और हल्के पीले या भूरे रंग के दानों वाला पहाड़ का एक ग्लूटेन फ्री प्रतिनिधि अनाज, जिसकी खिचड़ी, खीर आदि बनायी जाती है।
226. कइकइ – दया, कइकइ लागंण-दया आना।
227. ककाड़ – काकड़ का बहुवचन, एक से अधिक पहाड़ी ककड़ियां औंव-आंवला।
228. कचुव – गंदला-मटमैला पानी।
229. कचूर क्यव – पहाड़ों में पायी जाने वाली केले की एक प्रजाति, जिसका छिलका गहरे रंग का होता है।
230. कच्चि – कच्चा, देशी-घर में बनने वाली शराब।
231. कच्छ – कच्छा।
232. कच्यार – कीचड़।
233. कटक – चाय को मिस्री या गुड़ के साथ पीना।
234. कटकी चहा – मिस्री या गुड़ के साथ पी जाने वाली (बिना चीनी की) चाय।
235. कटकी चहा – मिस्री वाली चाय।
236. कटड़, कटर – भैंस का नर शिशु।
237. कटड़, काट, कटर, कट्यर – भेंस का नर बच्चा।
238. कटर, कटड़ – भैंस का नर शिशु।
239. कटर, काट, कटड़, कट्यर – भेंस का नर बच्चा।
240. कटोरण – बाल बनाना।
241. कट्यर, काट, कटर, कटड़ – भेंस का नर बच्चा।
242. कड़है – कड़ाइ-कड़ाही।
243. कताड़ी, कलत्याड़ी – आपे से बाहर होना।
244. कतुक – कितने।
245. कत्थकै – किधर-कहाँ को।
246. कत्थै – किधर, कहाँ को।
247. कद्दूकस – भुजकोर-ककड़ी को कोर कर रायता बनाने में प्रयुक्त उपकरण।
248. कनज्याडि – कान के पास का हिस्सा।
249. कन्ज्योड़ि – महिलाओं द्वारा जंगल जाने पर कमर में बांधी जाने वाली रस्सी या पटका।
250. कन्हाव – कोने की जमीन।
251. कपाव – माथा।
252. कपाव – माथा।
253. कप्पाव – माथा।
254. कफू – कुक्कू प्रजाति का एक पक्षी, बुरांश का फूल।
255. कब्बै – कभी।
256. कब्भै – कभी।
257. कब्भै नैं – कभी नहीं।
258. कमर ज्योड़ि – महिलाओं द्वारा जंगल जाने पर कमर में बांधी जाने वाली रस्सी या पटका।
259. कमव – कंबल।
260. कमेट – खड़िया युक्त सफेद मिट्टी, पुराने दौर में तख्ती में लिखने व दीवारों को चूने की तरह पुताई करने के काम आता था।
261. कमेट – घरों को रंगने, बच्चों के द्वारा लिखने के लिये प्रयुक्त सफेद खड़िया मिट्टी।
262. करकल – सुखाये हुए गडेरी-पिनालू के पापड़।
263. करछी – चावल, दाल, सब्जी निकालने के लिये प्रयुक्त बड़े आकार की चम्मच नुमा उपकरण।
264. कराड़ि, कर्याड़ि – घर के पीछे घर की व सुरक्षा दीवार के बीच का स्थान।
265. करौटि – मलाई।
266. कर्याड़ि, कराड़ि – घर के पीछे घर की व सुरक्षा दीवार के बीच का स्थान।
267. कलकार – जल की शीतलता।
268. कलकुट्ट – नमक की अधिकता।
269. कलतारींण – किसी अपघात से हतचेत होना।
270. कलत्याड़ी, कताड़ी – आपे से बाहर होना।
271. कल्ज – कलेजा, दिल के लिये प्रयुक्त।
272. कल्यौ – कलेवा, नास्ता।
273. कसिनि – लोटा।
274. कस्यार – एक तरह की गगरी-घड़ा।
275. काक – लघु उच्चारण में चाचा।
276. काकड़ – ककड़ी, पहाड़ी खीरा।
277. काकि, काखि – चाची।
278. काकुनि – मक्का।
279. काखि, काकि – चाची।
280. काटंणि – आपस में बातें करते हुए दूसरों की आलोचना करना।
281. काट, कटर, कटड़, कट्यर – भेंस का नर बच्चा।
282. कातर – दुःख, रोष या व्यंग्य के संदर्भ में कपड़े के लिये प्रयुक्त शब्द।
283. कातिक – कार्तिक माह।
284. काथ – कहानी।
285. कान – दीर्घ उच्चारण पर श्रवणेंद्रिय-कान, ह्स्व उच्चारण पर कांटा व कंधा।
286. कान में, कानि में – कंधे में।
287. कानि – कंधा।
288. कानि में, कान में – कंधे में।
289. काप – कापा, पालक को पीसकर बनने वाली सब्जी।
290. कामोउ – कामव-कंबल।
291. कारंण – लोहे की दराती, चाकू व कुल्हाड़ी आदि में धार देना।
292. काव – दीर्घ उच्चारण पर राक्षस, मृत्यु, ह्स्व उच्चारण पर काला रंग।
293. कावक गास – काल का ग्रास, मृत्यु के संदर्भ में।
294. काव हरांण – मौत का चाह कर भी न आना।
295. किड़ – कीड़े।
296. किड़ि – बेटी, छोटी बच्ची।
297. किड़ैनि – ऊनी वस्त्र जलने की गंध।
298. कित – मछली के बच्चे।
299. किन – कुत्तों पर चिपककर खून चूसने वाले परजीवी कीड़े।
300. किन, औट्या – कुत्तों व गाय-भैंस के शरीर पर लगने वाले परजीवी कीड़े।
301. किरमाउ – किरमोइ-चींटी।
302. किल, दौंण – पशुओं को बांधने का स्थान, पशुओं को बांधने वाला कीला।
303. किलै – क्यों।
304. किलैकि – क्योंकि।
305. कुकरी बाग – गुलदार-तेंदुवा आदि के लिये प्रयुक्त।
306. कुकुड़ – मुर्गी।
307. कुकुर – कुत्ता, कुत्ते।
308. कुकुराक प्वाथ – कुत्ते के बच्चे।
309. कुकैल – गडेरी-पिनालू यानी पहाड़ी घुइयां की सब्जी के कच्चे होने पर आना वाला कसैला स्वाद।
310. कुकैलि – गडेरी-पिनालू खाने पर कसैला महसूस होना।
311. कुखाप बलांण – बुरा बोलना।
312. कुच – झाड़ू।
313. कुचि – चाबी।
314. कुटव – कुदाल।
315. कुट्टी – बच्चों के खेल में आपस में न बोलने के लिये प्रयुक्त शब्द, पशुओं के लिये काटा हुआ चारा।
316. कुड़बुद्धि – बुरी बुद्धि वाला।
317. कुड़, कुड़ि़ – घर।
318. कुड़ि़, कुड़ – घर।
319. कुनइ – तांबे की पराद, कुंडली, कुंडी।
320. कुन्यूंण – चट्ठा, जैसे धानक कून्यूंण।
321. कुबीजक बाल – बुरी व्यक्ति का पुत्र।
322. कुर्त – कमीज।
323. कुल्यूंण – सिचाई करना।
324. कुशल – बात-कुशल क्षेम।
325. कुस्यौल – घर से भेंट स्वरूप लाये जाने वाले पकवान।
326. कूल – गूल, पानी लाने के लिये बनायी जाने वाली एक तरह की नाली।
327. कूल गाणंण – गूल निकालना, खेत में पानी पहुंचाने के लिये नाली बनाना।
328. केकड़योल – अपनी ही बात पर अड़े रहना।
329. कैल – कैलै-किसी ने।
330. कोरंण – ककड़ी, खीरा, भुज आदि को कोरने की क्रिया।
331. कोर – मछली मारने का उपकरण।
332. कौतिक – मेला।
333. कौतिक्यार – मेले में जाने वाले व शामिल लोग।
334. कौपि – किताब-कापी-किताब, पुस्तक।
335. क्यव – केला।
336. क्याव – केले।
337. क्वाड – कोना।
338. क्वीड़ – बातें, किस्से।
339. क्वीड़ पाथंण – बातें करते जाना।
340. क्वे – कोई।
341. खांण – खाना।
342. खांण – पिंण-खाना पीना।
343. खइ – घर।
344. खटाइ, खटै – चटनी।
345. खटैन – खट्टापन।
346. खटै, खटाइ – चटनी।
347. खबर बात – कुशल क्षेम।
348. खम्म – अंप्रत्याशित तौर पर अचानक आना।
349. खल्दी – जेब।
350. खव – आंगन, पटांगण।
351. खाज – धान भूनकर व कूटकर बनने वाले गुड़, अखरोट व चीनी आदि के साथ खाये जाने वाले चावल।
352. खाप – मुंह।
353. खारि – अनाज मापने की एक इकाई, अनाज मापने का एक निश्चित परिमाप युक्त लकड़ी का बर्तन।
354. खाव – तालाब।
355. खिल्त – ढीला।
356. खुचेड़्याट – व्यर्थ के तर्क-वितर्क से बात मानने में विघ्न उत्पन्न करना।
357. खुट – पैर।
358. खुटकूंण – दोमंजिले घर में जाने की सीढ़ियां।
359. खोकड़ैनि – हृदय दुःखाने वाली व्यंग्य भरी बात करना।
360. खोल – खोला-मोहल्ला।
361. खोलि, खोली – आंगन।
362. खोली, खोलि – आंगन।
363. खौकैंनि – पुराने चावल की गंध।
364. गुंणि – लंगूर।
365. गगरि – गागर-सामान्यता तांबे या पीतल का घड़ा।
366. गङ – गंगा, सभी नदियों के लिये भी प्रयुक्त शब्द।
367. गङ ल्वाड़ या गङ लोड़ – नदी के हाथ से पकड़े जाने से बड़े आकार के पत्थर।
368. गजक – गजकूंण-दांत गड़ाना, उदाहरण कुकुरैल गजकै दे-कुत्ते ने काट दिया।
369. गज्यूंण – शोर मचाकर गूंजा देना।
370. गडेरि – जमीन के नीचे से प्राप्त होने वाली अरबी जैसी कुछ हद तक लाल रंग की नजर आने वाली एक पहाड़ी सब्जी।
371. गडेरि-पिनाउ – जमीन के नीचे से प्राप्त होने वाली अरबी जैसी गडेरी व पिनालू पहाड़ी सब्जियां।
372. गढव – बोझ, गट्ठर।
373. गढाव – गढ़वाल के निवासी लोग, बोझ-बहुवचन।
374. गदू, गद्दू – कद्दू।
375. गद्दू, गदू – कद्दू।
376. गध्यर – गध्यार-गधेरे, सामान्यतया छोटी बरसाती पहाड़ी नदियां।
377. गलदार – दुकानदार।
378. गलदारी – दुकानदारी।
379. गलाड़ – गाल।
380. गल्यूट – लकड़ी के परंपरागत चूल्हे के अगल-बगल का हिस्सा।
381. गव – गव ऊंण-गले-गले आना, आफत में पड़ना।
382. गव, गाव – गला।
383. गहत – दाल की एक प्रजाति, पथरी की समस्या में बहुत लाभप्रद।
384. गाइ – गाली, गाय।
385. गाइ होदड़ – गाली देना।
386. गागर – गगरी।
387. गाज – झाग।
388. गाज निकलंण – कोई काम करते हुए परेशान हो जाना।
389. गाड़ – नदी।
390. गाथ – गाथा।
391. गाब – गडेरी-पिनालू के कोमल मुड़े हुए नये पत्ते।
392. गाव – गला।
393. गाव – गाव ऊंण-गले-गले आना, आफत में पड़ना।
394. गाव लागंण – गले में अटकना, गले लगना।
395. गाव, गव – गला।
396. गास – ग्रास।
397. गिच, गिज – होंठ।
398. गिजूंण – गिज्यूंण-चिढ़ाना।
399. गिज उफारण – मुंह खोलना, होंठ फैलाना, व्यंग्यात्मक भाव में किसी पर हंसना।
400. गिज कताड़ण – व्यंग्य पूर्वक हंसना, बोलना।
401. गिज, गिच – होंठ।
402. गिदार – गायिकाएं, विशेषकर शुभ सांस्कारिक आयोजनों में संस्कार गीत-शकुनांखर गाने वाली महिलाएं।
403. गिन – किसी पेड़ के तने के विशेषकर आरी से किये गये टुकड़े।
404. गु – मल।
405. गुई – मीठा।
406. गुई – मीठा।
407. गुडपापेडि – गुड़ से बना मूंगफली युक्त एवं खाने की चीज।
408. गुबर – गोबर।
409. गुबरी किड़ – गोबर का कीड़ा।
410. गू – मल।
411. गूड़ – गुड़।
412. गूड़ैकि टपक – चाय के साथ गुड़ को बार-बार मुंह में लेना।
413. गे – गया, गयी।
414. गेछी, गोछी – हो गया था।
415. गोछी, गेछी – हो गया था।
416. गोठ – घर के निचले तल का कमरा, सामान्यतया पालतू पशुओं को बांधने के लिये प्रयुक्त।
417. गोठ – सामान्यतया घर के निचले तल में पालतू गौवंशीय पशुओं को बांधने का स्थान।
418. गोर – गोरु-गाय।
419. गोरु – गाय।
420. गौचर – गांव की पशुओं के चरने के लिये नियत सामूहिक जमीन।
421. गौहत – गहत, पथरी की बीमारी में लाभदायक एक पहाड़ी दाल।
422. ग्यूं – गेहूं।
423. ग्यूंक रवाट – गेहूं के आटे की रोटियां।
424. ग्वर – गौर वर्ण, अंग्रेज।
425. ग्वाव – ग्वाला, गोल, नारियल।
426. ग्वेरि फनार – लड़की की अत्यधिक सुंदरता के लिये प्रयुक्त शब्द।
427. ग्वैठ – पुराने दौर में गांव के बाहर मल त्याग का तय स्थान।
428. घंटी – लोटा, मंदिर में बजाने वाली घंटी, घंटा।
429. घंतर – पथराव में प्रयुक्त पत्थर।
430. घात – शिकायत करना।
431. घात डालंण – बद्दुवा देना, देवता के मंदिर में शिकायत करना।
432. घाम – धूप।
433. घुघ जस – बुत सा, बिना हिले-डुले बैठा व्यक्ति।
434. घुघुत, घुघुती – पहाड़ का एक कबूतर प्रजाति का प्रतिनिधि पक्षी।
435. घुघुती, घुघुत – पहाड़ का एक कबूतर प्रजाति का प्रतिनिधि पक्षी।
436. घुच्ची – सिक्कों या पत्थरों पर निशाना लगाने का एक खेल।
437. घुत्ती – अंगूठा।
438. घुरींण – गिरना।
439. घुर – घुर-घुघुती पक्षी के बोलने की आवाज।
440. घुलंण – घुलना।
441. घोल – घोंसला।
442. घोली – घुलंण-घुलना।
443. घ्यू – घी।
444. घ्वग – मक्का।
445. घ्वाग – मक्के (बहुवचन)।
446. चांओ – चावल।
447. चांण – देखना, ह्स्व उच्चारण करने पर चने।
448. चकई – चकला।
449. चकव – चौड़ा।
450. चड़क – रह-रहकर तीव्र दर्द उठना।
451. चमुची – चम्मच।
452. चरपर – चटपटा।
453. चरि पड़ंण, चरि लागंण – कटने या जलने पर होने वाला दर्द।
454. चरि लागंण, चरि पड़ंण – कटने या जलने पर होने वाला दर्द।
455. चहा – चाय।
456. चहा पत्ति – चाय की पत्ती।
457. चहा पत्ति, पत्ति – चाय की पत्ती।
458. चॉओ – चावल।
459. चाइयै रै – देखता रहा।
460. चाऊन – छलनी।
461. चाओ – देखो।
462. चाख – दूसरी मंजिल का बाहर वाला कमरा।
463. चिनंण – ईंट-पत्थरों से दीवार चिनना।
464. चिनांण – चिन्ह, निशान, पहचान चिन्ह।
465. चिमड़ – लचक युक्त मजबूत।
466. चिमाट – चुमुट-चिमटा।
467. चिमाड़ – झुर्रियां, उदाहरण गाल में चिमाड़-गाल में झुर्रियां।
468. चिमि – चुटकी भर।
469. चिर – दरार।
470. चिराड़ – दरार, बिवाइया, खुटन में चिराड़-पांवों में बिवाइयां पड़ना।
471. चिहडि – लड़़की।
472. चिहड़ी – लड़कियां।
473. चीर – कपड़े की कतरनें, होली पर पद्म वृक्ष की टहनी पर बांधी जाने वाली विभिन्न रंगों के कपड़ों की कतरनें।
474. चु – चुवा या रामदाना, दिखने में दानेदार एक तरह का अन्न।
475. चुइ – पुरुषों के सिर का मध्य भाग और सिर के मध्य भाग में रखी जाने वाली बालों की चुटिया।
476. चुड़कांणि – भट्ट को बिना भिगोये भूनकर बनने वाली परंपरागत-विशिष्ट दाल।
477. चुल – चूल्हा।
478. चुल घिसंण, चुल लिपंण, चुल घैसण – चूल्हा लीपना।
479. चुल घैसण, चुल लिपंण, चुल घिसंण – चूल्हा लीपना।
480. चुल पान – चूल्हे को लीपने का कार्य।
481. चुल लिपंण, चुल घिसंण, चुल घैसण – चूल्हा लीपना।
482. चूख – नींबू।
483. चूल – जिद, दुस्साहस, कोई कार्य करने की जबर्दस्त उत्कंठा।
484. चूव लगै बेर पांणि पिंण – पानी के धारे का पानी सीधे हाथ लगाकर पीना।
485. चेलि – बेटी।
486. चैत – चैत्र माह।
487. चैन पड़ंण – शांति मिलना, आवश्यकता होना।
488. चोइ – चोला।
489. चोइ – बदव-चोला, कपड़े या पहचान बदलना।
490. चौड़ – चौड़ाई।
491. चौद – चौदह।
492. च्युं – कुकुरमुत्ता, मशरूम।
493. च्यल – बेटा।
494. च्यूड़ – नये चावलों को भूनकर और कूटकर बनाये जाते हैं।
495. च्यूर – पहाड़ का कल्पवृक्ष कहे जाने पेड़ से प्राप्त मीठे स्वाद का फल, इससे घी, धूप सहित कई उत्पाद बनते हैं।
496. च्येलि – बेटी।
497. च्वख – शुद्ध, बिना चखा या बिना जूठा किया हुआ।
498. छंजर – शनिवार।
499. छां – छांस, मट्ठा।
500. छां फानंण, छॉं जस फानंण – मुहावरा-बुरी तरह से झकझोर देना, दही को मथ कर मट्ठा बनाना, किसी को बेइज्जत करने के अर्थ में भी प्रयुक्त, उदाहरण-तैक मैं बीच बाट में छां फानि द्यूंल।
501. छोंण – बच्चे।
502. छौंड़ – पशुओं की नन्हीं संतानें, बच्चे।
503. छाँ – छाँस, मट्ठा।
504. छाँ फानंण – छाँस, मट्ठा बनाना।
505. छजूंण – सजाना।
506. छसी – मट्ठे से बनने वाला एक व्यंजन।
507. छॉं जस फानंण, छां फानंण – मुहावरा-बुरी तरह से झकझोर देना, दही को मथ कर मट्ठा बनाना, किसी को बेइज्जत करने के अर्थ में भी प्रयुक्त, उदाहरण-तैक मैं बीच बाट में छां फानि द्यूंल।
508. छाज – खिड़की।
509. छाज – खोइ वाल घर-नक्काशीदार खिड़कियों व दरवाजों वाला घर, जो कि ऐसे घर में रहने वालों की प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था।
510. छाडंण – छानना, छोड़ना।
511. छाति में डेड़ बाव हुंण – छाती में बाल होना-मर्दांनगी की निशानी के तौर पर।
512. छापरि – छपरी, छोटी डलिया।
513. छार – राख।
514. छिलुक – छिलका, चीड़ के पेड़ की रेजिन-लीसे युक्त लकड़ी।
515. छुरि – छुरी, चाकू।
516. छै – छः।
517. छोड़ंण – छोड़ना।
518. छोपंण – छुपाना।
519. छ्योड़ि – लड़की।
520. जांण – जाना।
521. जांति – लोहे का तीन पैर वाला आग पर बर्तन रखने के लिये प्रयुक्त उपकरण।
522. जौं – एक मोटा पवित्र माना जाने वाला अनाज।
523. जगंण – किसी भारी वस्तु को ले जाना।
524. जगूंण – नींद से जगाना, उठाना।
525. जगरी – देवता को जागृत करने वाला।
526. जतकाइ, जतकाव – गर्भवती।
527. जतकाव, जतकाइ – गर्भवती।
528. जाग – जगह।
529. जागर – देवता को जागृत करना।
530. जाव – जाल, घरों-दीवारों में छोटे सामान रखने के बनाया जाने वाला छोटा का स्थान।
531. जिगर – जिक्र, किसी के बारे में या किसी विषय पर बात करना।
532. जिठांणि – जेठानी।
533. जिठबौज्यू – ताऊ।
534. जिबड़ – जीभ।
535. जु – जुवा खेल, ताश-पत्ते खेलना, हल जोतने के लिये बैलों के कंधों पर रखी जाने वाली विशेष आकार की लकड़ी।
536. जुङ – मूंछ।
537. जुनार – मक्का।
538. जुराब – मौजे।
539. जेठ – ज्येष्ठ माह, पति के बड़े भाई।
540. जेठबाज्यू – ताऊ।
541. जेड़ज – ताई।
542. जै लागंण – झपटना।
543. जौव – जौला, दही डालकर बनने वाली पेट की समस्या के दौरान खाई जाने वाली एक तरह की खिचड़ी।
544. ज्यठ – उम्र में बड़ा।
545. ज्यान – जिंदगी।
546. ज्यौड़ – रस्सी।
547. ज्वत – जूता।
548. ज्वात – जूते।
549. ज्वे, स्यैंणि – पत्नी।
550. झांकर – उल्झे, फैले, बिना कंघी किये हुए बाल।
551. झांजर, झांझर – पूड़ियां तलने के लिये प्रयुक्त छिद्रयुक्त करछी।
552. झांझर, झांजर – पूड़ियां तलने के लिये प्रयुक्त छिद्रयुक्त करछी।
553. झकरू – अस्त-व्यस्त केशधारी।
554. झन्कार – एक जंगली, स्वयं उगने वाली पत्तेदार हल्के खट्टे स्वाद वाली सब्जी।
555. झर – फर-घर में किसी शुभ आयोजन के दौरान की चहल-पहल, रौनक।
556. झलमल – मिर्च वाला भोजन।
557. झसक – फिकर-फिक्र।
558. झूम – नैराश्य, सिर घूमना।
559. झोइ – झोली, कड़ी।
560. झोप – एकान्तिकता।
561. झोलि – झोली, करी।
562. झौइ – मौइ-अधिक मिर्च वाला भोजन।
563. झौइ – मौइ-अधिक मिर्च वाला भोजन।
564. टपकी – दाल व झोली आदि के साथ कम मात्रा में प्रयुक्त सब्जी।
565. टाक – टका, पूर्व में रुपये-पैंसे के लिये प्रयुक्त शब्द।
566. टाड़ – दूर।
567. टुक – कोना, छोर।
568. टैम – समय, टाइम का अपभ्रंस।
569. ठिंठ – चीड़ के फल।
570. ठरूंण – तय या निश्चित करना।
571. ठरा – तय या निश्चित किया।
572. ठाङर, ठाङ – बेलों को चढ़ने के लिये लगाये जाने वाले पेड़ों या टहनियों के आधार।
573. ठाङ, ठाङर – बेलों को चढ़ने के लिये लगाये जाने वाले पेड़ों या टहनियों के आधार।
574. ठुल – ठुल-बड़े-बड़े।
575. ठुल – बड़ा, बड़े।
576. ठुलि – बड़ी (स्त्रीलिंग)।
577. ठुलि दिवाइ – बड़ी दीपावली, दीपावली का मुख्य पूर्णिमा का दिवस।
578. ठेकि, डौकइ – दुग्ध उत्पाद रखने के लकड़ी का बना बर्तन।
579. ठेप – सिर से सिर भिड़ाकर लड़ना, जबरन लड़ाई मोल लेना, मुकाबला करना।
580. ठौक लगूंण, ठौक – छूना।
581. ठौक, ठौक लगूंण – छूना।
582. डंड – डंडा।
583. डांस – जानवरों के साथ ही मनुष्यों को बहुत तेजी से काटने वाली बड़ी मक्खी?।
584. डांसि ढुंङ – बेहद कठोर पत्थर।
585. डकार – गले से आवाज के साथ गैस निकलना।
586. डड़ाडाड़ – लगातार रोना, कई लोगों का साथ में रोना द्य।
587. डबल – रुपये-पैंसे।
588. डाइ, डाव – बोट-पेड़-पौधे।
589. डाड़ – रोना।
590. डाड़ा – डाड़-रोना, करुंण-क्रंदन।
591. डाड़ु – दाल-सब्जी निकालने के लिये युक्त गहराई युक्त करछी।
592. डान – कान-पहाड़ की चोटी व उतार।
593. डान – दंड।
594. डान – पहाड़ की चोटी या चोटिया, एकवचन, बहुबचन दोनों के लिये प्रयुक्त।
595. डाब – ह्स्व उच्चारण पर डिब्बा।
596. डामंण – कोई संक्रमण होने पर उसे गर्म लोहे की छड़ से स्टरलाइज करने की प्रक्रिया।
597. डामंण – लोहे की गर्म वस्तु से दागना।
598. डाल – दीर्घ उच्चारण पर ओले, ह्रस्व उच्चारण पर टोकरी।
599. डाव – दीर्घ उच्चारण पर ओल, ह्रस्व उच्चारण पर पेड़ों की टहनियां।
600. डाव, डाइ – बोट-पेड़-पौधे।
601. डिकार, डिगार – हरेला व दीपावली पर मिट्टी से बनायी जाने वाली देवताओं की प्रतिमा।
602. डिगार, डिकार – हरेला व दीपावली पर मिट्टी से बनायी जाने वाली देवताओं की प्रतिमा।
603. डुन – लंगड़ा व्यक्ति।
604. डुनि – लंगड़ी-स्त्रीलिंग।
605. डुबुक – भट्ट, गहत व चने आदि दालों को काफी भिगोकर पीसकर बनने वाली एक तरह की बेहद पौष्टिक मानी जाने वाली दाल।
606. डोर – डोरी।
607. डोर – दुबड़-सातूं-आठूं कहे जाने वाले एक त्योहार विशेष पर महिलाओं द्वारा बांह और गले में पहने जाने वाले धागे।
608. डौकइ – दुग्ध उत्पाद रखने के लकड़ी का बना बर्तन, लकड़ी का बना बड़े आकार का दही को मथने के लिये प्रयुक्त बर्तन।
609. डौकइ, ठेकि – दुग्ध उत्पाद रखने के लकड़ी का बना बर्तन।
610. ढांट – बिना विवाह के उत्पन्न संतान।
611. ढकंण – ढकना।
612. ढकींण – ढकने-ओढ़ने वाला वस्त्र, लिहाफ-कंबल आदि।
613. ढिमंण – अभ्यस्त होना।
614. ढिमी जांण – अभ्यस्त हो जाना।
615. ढुट – ट्रक के अगले हिस्से की छत का हिस्सा।
616. ढेपू – टाक-रुपये-पैंसे।
617. ढेपू – रुपये।
618. ढोर – पालतू पशु।
619. ढ्यस – गुजरते हुए किसी से टकराकर निकलना।
620. तई, तौ – तवा।
621. तसल, तस्यल, तस्यार – तसला, सीमेंट-कंक्रीट के कार्य में प्रयुक्त लोहे की बड़ी परात।
622. तस्तरि – तस्तरी।
623. तस्यल, तसल, तस्यार – तसला, सीमेंट-कंक्रीट के कार्य में प्रयुक्त लोहे की बड़ी परात।
624. तस्यार, तस्यल, तसल – तसला, सीमेंट-कंक्रीट के कार्य में प्रयुक्त लोहे की बड़ी परात।
625. ताइ – ताव-ताला।
626. तात – गर्म।
627. तात पांणि – गर्म पानी, कई बार चाय के लिये भी प्रयुक्त शब्द।
628. तापण – तापना, धूप सेंकना।
629. ताम ख्वर – गंजा सिर।
630. ताव – तला, ताव लागंण-पकते हुए भोजन का बर्तन में नीचे से जलना, गले में टौंसिल होने पर उपचार के लिये प्रयुक्त लोहे की नुकीली छड़, ताला।
631. तिमुरिया कान – तिमूर के पौधे के कांटे।
632. तिलांजई – तिलांजलि, अंजली से तिल भेंट करना, श्राद्ध आदि के समय।
633. तिहति – पराया।
634. तीज – त्यार-त्योहार।
635. तेर – तेरह संख्या।
636. तै – तेल में तलना, तय करना।
637. तोप – पाथर।
638. तौलि – ब़ड़े आकार के पीतल, तांबे, लोहे व कांसे आदि के गोल ऊपर से कम व नीचे अधिक मोटाई वाले विशेष बर्तन।
639. तौली – तौलिया।
640. तौ, तई – तवा।
641. त्यार – ब्यार, त्यार-बार-त्यौहार।
642. त्वप – बूंद।
643. त्वाप – बूंदें।
644. थौंण – थन।
645. थकाइ – थकान।
646. थाइ – थाली।
647. थाकण – थकना।
648. थान – मंदिर।
649. थोरि – भैंस की मादा संतान।
650. थोव – होंठ।
651. थ्वड़ – थोड़ा।
652. थ्वर – भैंस का नर शिशु।
653. दांणि देखण – देवताओं के नाम पर चावल देखकर किसी के बारे में बताने की प्रक्रिया।
654. दांणि, दांणी – पांच पत्थरों या कभी कांच की अंठियों से खेला जाने वाला खेल, देवताओं के नाम पर रखे गये चावल जिन्हें देवता अवतरित होकर देखते हैं।
655. दांणी, दांणि – पांच पत्थरों या कभी कांच की अंठियों से खेला जाने वाला खेल, देवताओं के नाम पर रखे गये चावल जिन्हें देवता अवतरित होकर देखते हैं।
656. दिंण – देना।
657. दैंण – दाहिने, दांये।
658. दैंण हुंण, दैंण हया, दैंण होया – दयालु होना, कृपालु होना।
659. दैंण हया, दैंण हुंण, दैंण होया – दयालु होना, कृपालु होना।
660. दैंण होया, दैंण हुंण, दैंण हया – दयालु होना, कृपालु होना।
661. दोंण – गौवंशीय पशुओं को बांधने का स्थान।
662. दौंण, किल – पशुओं को बांधने का स्थान, पशुओं को बांधने वाला कीला।
663. दई – दला हुआ।
664. दई जौव, दैक जौव – दही का जौला।
665. दई, दै – दही।
666. दगड़ – साथ।
667. दगाड़ – साथ-बहुबचन।
668. दतई – बड़ियाठ-बड़ी दराती।
669. दन्याइ, दन्याव – निराई-गुड़ाई के लिये प्रयुक्त उपकरण, दनेला।
670. दन्याव, दन्याइ – निराई-गुड़ाई के लिये प्रयुक्त उपकरण, दनेला।
671. दबाव – दबावट, दबाया हुआ।
672. दम्मू – ढोल जैसा गले में रस्सी के साथ सामने डालकर बजाया जाने वाला छोटे ढोल जैसा वाद्य यंत्र।
673. दरशनदार – देखने योग्य।
674. दरि – दरी।
675. दर्ज – कक्षा।
676. दल्द – चट्टान।
677. दश्यर – दशहरा।
678. दसैं – दशमी की तिथि।
679. दस – दस का अंक।
680. द दऽ, या दा – असमर्थता, निराशा, व्यंग्य व रोष आदि के प्रसंग में प्रयुक्त अव्यय।
681. दाज्यू – बड़ा भाई।
682. दाड़ंण – दांतों से काटना।
683. दाड़ – किनारे के दांत।
684. दाड़ि – दाड़ी।
685. दाड़िम – अनार की तरह का एक पड़ाड़ी फल।
686. दातुल – आसि-दराती।
687. दातुल कारण – दराती को आफर में धार लगवाना।
688. दातुल पयौंण – दराती को पत्थर में घिस कर उसकी धार तेज करना।
689. दादी – बड़ा भाई।
690. दान – भाग्य, उदाहरण वीक भाल दान छी, उसका भाग्य अच्छा था, दूसरों को देना।
691. दार – लकड़ी।
692. दाव – दीर्घ उच्चारण में दाल, ह्स्व उच्चारण में दावा, मुकदमा।
693. दाव – भात-दाल-भात।
694. दास – ह्स्व उच्चरण में दसा भाग्य, किस्मत, दशा, स्थिति, दीर्घ उच्चारण में गुलाम, मंदिर विशेषकर किसी स्थानीय देवी-देवता के थान में नेवत लगाने वाला ढोल अथवा बजी बजाने वाला व्यक्ति।
695. दि – द्यू-दिया।
696. दि – बात, दि-बाति, दिया और बाती।
697. दिक – परेशान।
698. दिगौ – कुछ याद करते हुए वाह, अहा जैसी अनुभूति के लिये प्रयुक्त शब्द।
699. दिदि – बड़ी बहन।
700. दिरांणि – देवरानी।
701. दिवाइ – दिवाली, दीपावली।
702. दुद क्याव – केले की एक प्रजाति।
703. दुलैंच – आसन।
704. दुल्हौ – दूल्हा, पति।
705. दूद – दूध।
706. दूर्बाष्टमि – दूर्बा अष्टमी, कब होती है भी बताना है।
707. देइ – घर के लिये भी प्रयुक्त, उदाहरण-मिं वीक देइ पारि जै रौछ्यूं-मैं उसके घर गया था, दरवाजे के पास का स्थान।
708. देई – दिया हुआ।
709. देई – द्वार, दरवाजे के पास का स्थान।
710. देखींण – दिखना।
711. देखींण चांण – देखींच चांणि-देखने व चाहने युक्त, सुंदर।
712. देपात – देवता।
713. देश – मैदानी क्षेत्र या कहीं क्षेत्र के रूप में भी प्रयुक्त।
714. दै – दही।
715. दैक जौव, दई जौव – दही का जौला।
716. दैज – संकलप-दहेज देना।
717. दै, दई – दही।
718. दोण – अनाज मापने की एक।
719. दोफरि – दोपहर का समय।
720. द्यापत, द्याप्त – देवता।
721. द्याप्तोंक थान – देवताओं का मंदिर।
722. द्याप्तक – देवताओं का।
723. द्याप्तक डंगरी – देवताओं को बाजा बजाकर किसी व्यक्ति में अवतरित करने वाले।
724. द्याप्तक थान – देवता का मंदिर।
725. द्याप्तन – देवताओं को।
726. द्याप्त, द्यापत – देवता।
727. द्यार – देवदार।
728. द्यू – दिया।
729. द्यू – बात-दिया और बाती।
730. द्यो – बारिश।
731. द्यौ – द्याप्त-देवता।
732. द्वाब – पीछे लगना, उदाहरण-उ म्यार द्वाब पड़ि रौछी-वह मेरे पीछे पड़ा था।
733. द्वार – हरी घास, लहलहाती दूब।
734. द्वि – दो।
735. द्वियै – दोनों।
736. धुं – धुंवैंण-धुंवा।
737. धन्याई, धिन्याइ – घर में पालतू मवेशियों से प्राप्त दूध-दही आदि दुग्ध उत्पाद।
738. धरंण – धरि-रखना।
739. धर्ति – धर्ती।
740. धात – आवाज।
741. धात लगूंण – आवाज लगाना।
742. धिनाई – घर में मवेशियों से प्राप्त दूध।
743. धिन्याइ, धन्याई – घर में पालतू मवेशियों से प्राप्त दूध-दही आदि दुग्ध उत्पाद।
744. धुलैंणि – पत्नी।
745. धुलिअर्ध्य – विवाह के दौरान दूल्हे के मंडप में पहुंचने पर दूल्हे के स्वागत की परंपरागत प्रक्रिया।
746. धुलौ – पति।
747. धूपैंण – मंदिर में जलाई जाने वाली धूप।
748. धूल्यर्घ – धूलिअर्घ्य, बारात के दुल्हन के पहुंचने पर दूल्हे के स्वागत-पैर धोने की परंपरा।
749. धो – कठिनाई से, धो-धो कै-बहुत कठिनाई से।
750. धौ – मन भर कर (खाने के संदर्भ में)।
751. नंद – पति की बड़ी या छोटी बहन-ननद।
752. नौंणि – मक्खन।
753. नौंल, नौल – नया, नौला, पत्थर से बना बहुत छोटा कुंआनुमा पानी का परंपरागत जल स्रोत।
754. नक – बुरा।
755. नक मानंण – बुरा मानना।
756. नङ – नाखून।
757. नजिक – नजदीक।
758. नड़क – डांट।
759. नदी के किनारे की सिचाई की सुविधा युक्त चौरस भूमि, स्यर, बहुबयन स्यार – नाइ – अनाज मापने की एक इकाई, अनाज मापने का एक निश्चित परिमाप युक्त लकड़ी का बर्तन।
760. नाचंण – नाचना।
761. नाचौल – नाचेगा।
762. नान – छोटा।
763. नानि – छोटी।
764. नानि दिवाइ – छोटी दीपावली।
765. नामकन – नामकन्द-नामकरण संस्कार।
766. निक – अच्छा।
767. निमखंड़ – अत्यधिक।
768. निमू – नींबू।
769. निमू सानण – नींबू से सना हुआ नींबू, (एक तरह की नींबू की चाट) तैयार करना।
770. निल – नीला रंग।
771. निसास, निसासी – निःश्वास उदास, याद आना।
772. निसासी, निसास – निःश्वास उदास, याद आना।
773. निहुंणी – कुहणी-गलत सलत बातें।
774. नीन – नींद।
775. नौराट – लगातार दर्द से कराहना।
776. नौर्त – नवरात्र।
777. नौल, नौंल – नया, नौला, पत्थर से बना बहुत छोटा कुंआनुमा पानी का परंपरागत जल स्रोत।
778. नौलि – नयी दुल्हन।
779. न्यूड़ंण – आदत पड़ना।
780. न्यूतंण – निमंत्रण देना।
781. न्योलि – पहाड़ की एक प्रतिनिधि पक्षी, एक पारंपरिक गीतों की विधा।
782. पंचमि – पंचमी की तिथि।
783. पंछि – पक्षी, चिड़िया।
784. पंड्यो, पड़्यां – चावल परोसने का बिना गहरा चम्मचनुमा बर्तन।
785. पांख – पंख।
786. पांगर – बंदर-लंगूरों द्वारा खाया जाने वाला एक जंगली फल, इसकी कुछ किस्म मनुष्यों द्वारा भी खायी जाती हैं, अंग्रेजी-चेसनट।
787. पांणि – पानी।
788. पांणि पाड़ंण – दैज-संकलप-दहेज देना।
789. पांणि, पाणि – पानी।
790. पिंण – पीना।
791. पुंतुर, पुंन्तुरि – गठरी।
792. पुंन्तुरि, पुंतुर – गठरी।
793. पुं, पुङ – नई कोपलें।
794. पौंण – अतिथि।
795. पौंण – पाहुने, मेहमान।
796. पौंणी – पति की बड़ी या छोटी बहन-ननद।
797. पछिल – पीछे।
798. पटांण – थकना।
799. पटूंण – समझाना।
800. पटखाट – लकड़ी के तख्तों से बनी खाट।
801. पटाड़ण – आंगन।
802. पटै गाय – थक गया या थक गये।
803. पठ्यूंण – भेजना, पड़्यां, पड़ियां-चावल निकालने के प्रयुक्त बिना गहराई युक्त करछी।
804. पड़ंण – हो जाना, सो जाना।
805. पड़ि रै – पड़ा रहा, पड़ी रही, सोना, कहीं किसी वस्तु के पड़े होने, मौजूद होने के अर्थ में भी।
806. पड़्यां, पंड्यो – चावल परोसने का बिना गहरा चम्मचनुमा बर्तन।
807. पतरी – वैश्यागामी।
808. पतेल – जानवरों के नीचे डाली जाने वाली सूखी पत्तियां।
809. पतेलि – पतीली।
810. पत्ति धरंण – इज्जत रखना।
811. पत्ति, चहा पत्ति – चाय की पत्ती।
812. पनर – पंद्रह।
813. पन्याण – बर्तन मलने का स्थान।
814. पन्योल – चावल परोसने का बिना गहरा चम्मचनुमा बर्तन।
815. पयां – पद्म प्रजाति का वृक्ष, होली में चीर बांधने के लिये भी प्रयोग होता है।
816. पयौंण, पह्यूंण – चाकू, दराती, कुल्हाड़ी जैसे लोहे के उपकरणों की धार को घिसकर नुकीला बनाना।
817. परांण, परांणि – प्राण, मन, प्रेमी, उदाहरण-म्येरि परांणि धिनाइ में जै रै-मेरा मन दूध-दही के प्रति आशक्त हो रहा है, उ मेरि परंाणि छू-वह मेरा प्राण, मेरा प्रेम है।
818. परांणि, परांण – प्राण, मन, प्रेमी, उदाहरण-म्येरि परांणि धिनाइ में जै रै-मेरा मन दूध-दही के प्रति आशक्त हो रहा है, उ मेरि परंाणि छू-वह मेरा प्राण, मेरा प्रेम है।
819. परात – पराद-काफी बड़े आकार की पीतल या तांबे की थाली।
820. परात, पराद – सामान्यतया पीतल या तांबे का बड़ी थाली नुमा बर्तन।
821. पराद, परात – सामान्यतया पीतल या तांबे का बड़ी थाली नुमा बर्तन।
822. पराव – धान के पौधे का सूखा हुआ तने व पत्तियों वाला भाग।
823. परेख – कील।
824. पहुंची – सोने के बने महिलाओं के हाथों में पहने जाने वाले कड़े नुमा विशेष पर्वतीय आभूषण।
825. पह्यूंण, पयौंण – चाकू, दराती, कुल्हाड़ी जैसे लोहे के उपकरणों की धार को घिसकर नुकीला बनाना।
826. पाकी – पका हुआ, पकने या तैयार होने की स्थिति, परिपक्व हो जाना।
827. पाख – छत, पहाड़ी मकान की पत्थरों (पटलों) वाली छत, महीने का शुक्ल अथवा कृष्ण पक्ष, पखवाड़ा।
828. पाखुड़ – हाथ के कंधे से लगे भाग।
829. पाखैकि धुरि – छत के बीच का हिस्सा।
830. पाट – चक्की, पनचक्की का एक पाट, नदी का चौड़ा किनारा, लहरों के अलग-अलग परस्पर जुड़े भाग, घाघरे के मोड़।
831. पाटि – तख्ती, बीते दौर में बच्चे इसी पर लिखकर शुरुआती पढ़ाई करते थे।
832. पाठ पढ़ंण – पाठ पढूंण-मंदिर में देवी सप्तशती का पाठ कराना, देवी या पुराणिक ग्रंथों का पारायण, भंडारा या भांग के पौधों के रेशे, अध्याय, ह्स्व उच्चारण पर बकरी का मादा बच्चा।
833. पाण – घर का ऊपरी कमरा, मकान का प्रथम तल चूल्हे-रसोईघर की लिपाई।
834. पाणिक धार – प्राकृतिक स्रोत जिससे थोड़ी ऊंचाई से पानी गिरता हो।
835. पाणि, पांणि – पानी।
836. पात – पेड़-पौधों अथवा लताओं के पत्ते, ह्स्व उच्चारण में हल या दरांती आदि में उसके उपकरणों को मजबूती से जोड़ने के काम आने वाली लकड़ी के पतली खपच्चियां।
837. पातड़ – जन्म-कुंडली।
838. पातर – वैश्या।
839. पाथंण – पाथना, बेलना, उदाहरण-र्वट पाथंण-रोटी बेलना।
840. पाथा – अनाज मापने की एक इकाई।
841. पान डालंण – पानी से पहले लीपना।
842. पानि – पानी।
843. पार्थि पुज – श्रावण के माह में भगवान शिव के पार्थिव स्वरूप की की जाने वाली पूजा।
844. पाल – दीर्घ उच्चारण पर घर का पहली से ऊपर की मंजिलों का फर्श, जो कि सामान्यतया मिट्टी का होता था, ह्रस्व उच्चारण पर ओस, पाला।
845. पाषणि – बच्चे को सर्वप्रथम भोजन कराने का संस्कार।
846. पासिड़ि – अन्नप्रासन।
847. पिङल – पिङव-पिल-पीला रंग।
848. पिछौड़ – पर्वतीय सुहागन महिलाओं का ओढ़नी-चुनरी की तरह पहना जाने वाला ऐपण व विभिन्न यंत्रों के चित्र युक्त प्रतिनिधि वस्त्र, पिछौड़ा।
849. पिछ्यांणि – पीछे।
850. पिटौट – दही-दूध के लिये छोटी अलमारी।
851. पिठ्यां – रोली।
852. पिठ्यां – लाल रंग की रोली एवं इससे माथे पर लगाया जाने वाला तिलक।
853. पिड़ाई – अनाज मापने की एक इकाई।
854. पितर – पूर्वज।
855. पितर कुणि – पितरों-पूर्वजों का घर।
856. पितव – पीतल।
857. पितवै थाइ – पीतल की थाली।
858. पितिल – नाजुक, गलगला।
859. पिनाउ – जमीन के नीचे से प्राप्त होने वाली अरबी जैसी कुछ हद तक सफेद नजर आने वाली एक पहाड़ी सब्जी।
860. पिपव – पीपल का वृक्ष।
861. पिरूव – पिरूल, चीड़ वृक्ष की पत्तियां।
862. पिल – पीला रंग।
863. पिसंण – पीसना।
864. पीड़ – दर्द।
865. पु – पुवे, एक व्यंजन, घास के छोटे गट्ठे।
866. पुङ, पुं – नई कोपलें।
867. पुछ – पुछि-पूछ-पूछना।
868. पुछ्यार – देवता के रूप में समस्या का समाधान बताने वाला।
869. पुजंण – पहुंचना, पूजना, पूजा करना।
870. पुजूंण – पहुंचाना।
871. पुज – पूजा।
872. पुजाय – पहुंचाया।
873. पुज्यूं – पहुंचा।
874. पुतई – पुतली, तितली।
875. पुन्यू – पूर्णिमा।
876. पुरि – पूड़ी।
877. पुलम – एक फल।
878. पू – पुवे,एक व्यंजन,घास के छोटे गट्ठे।
879. पूछ करंण – जागर आदि में देवता से अपनी समस्या का समाधान मांगना।
880. पूस – पौष।
881. पै – तो, फिर, हां इत्यादि।
882. पैट – शुभ, गते, तिथि नाम।
883. पैन्याइ में ब्यवूंण – विनाश निकट होना।
884. पैरण – पहनना।
885. पैलि चोट – पहली बार में।
886. पोत – अंश।
887. पोथील – बच्चे।
888. पौहर्यूंण – पहरा देना, सुरक्षा करना।
889. पौहर्या – पहरा-सुरक्षा करना।
890. प्यवण – प्यवूंण-दुधारू पशु का दूध निकालना।
891. प्वाथ – बच्चे।
892. फांक – पंख।
893. फौंल – एक तरह का परंपरागत घड़ा।
894. फौंव – एक तरह का परंपरागत घड़ा।
895. फौंस – बड़े-बड़े झूठे दावे करना।
896. फटकंण – कूदना।
897. फतोड़ंण – पीटना।
898. फरकूंण – फेरना।
899. फसक – बातें, गप्पैं।
900. फागुन – फाल्गुन माह।
901. फाम – याद, कुशल क्षेम लेना।
902. फिकर – चिंता।
903. फोकंण – फेंकना।
904. फोकी गो – गिर गया।
905. फोक्यंण – गिर जाना।
906. फोड़ंण – फोड़ना, किसी सख्त वस्तु के दो या अधिक टुकड़े करना।
907. बंण – जंगल।
908. बंण – जंगल।
909. बंणकाट – कुल्हाड़ा, कुल्हाड़ी।
910. बांज – एक पहाड़ी वृक्ष, अंग्रेजी-ओक।
911. बांजाणि – बांज के पेड़ों का जंगल।
912. बांट – शिकार।
913. बांण – हल जोतना।
914. बिं – बीज।
915. बिंही – अमरूद।
916. बैंणि – बहन।
917. बौंहुल – बसूला, पतली लकड़ियां काटने व छिलने के लिये प्रयुक्त लोहे का एक औजार।
918. बकतरींण, बकतरीन – बोलते रहना, अत्यधिक बोलना।
919. बकतरीन, बकतरींण – बोलते रहना, अत्यधिक बोलना।
920. बकू – अनाप-शनाप बकने-बोलने वाला।
921. बखत – समय।
922. बग्वाइ – भैयादूज, बग्वाल, दीपावली।
923. बग्वाल – पहाड़ पर देवीधूरा सहित कई स्थानों पर होने वाला पत्थर युद्ध।
924. बट – सावित्री-महिलाओं द्वारा पति की दीर्घायु के लिये किया जाने वाला विशेष व्रत।
925. बटि – से।
926. बटुक – यज्ञोपवीत।
927. बटू – बटुवा।
928. बड़काट, रमट – कुल्हाड़ा।
929. बड़बाज्यू – दादाजी।
930. बड़ियाठ – बड़ी दराती।
931. बणंण – बनना।
932. बणकाट – कुल्हाड़ा, कुल्हाड़ी।
933. बणबाज्यू – दादाजी।
934. बणि बेर – बन कर, बणंण-बनना।
935. बतपन – उपनयन संस्कार।
936. बताई जैरौ – बताया गया है।
937. बनधार, बनधारि – घर के आगे छत से गिरने वाला बारिश का पानी।
938. बनधारि, बनधार – घर के आगे छत से गिरने वाला बारिश का पानी।
939. बनैन – ऊन की बनी हुई बनियान।
940. बन्डी – कमीज के अंदर पहना जाने वाला वस्त्र, अंग्रेजी-अंडरशर्ट।
941. बन्धार – घर के आगे के हिस्से में छत के पाखरों से गिरने वाली बारिश की बूंदें।
942. बन्धार – पाथर की छतों के आगे से बारिश के पानी का गिरना।
943. बन्ना – दूल्हा।
944. बन्नी – दुल्हन।
945. बभूत – बिभूत-भभूत, हवन की पवित्र राख, जिसे माथे पर कष्ट, प्रेत बाधा को भगाने के लिये मंत्र सहित या बिना मंत्र के भी लगाया जाता है।
946. बमकंण – इधर-उधर यूं ही घूमना।
947. बयाव – हवा।
948. बरख – बारिश, वर्षा।
949. बरतंण – शुभाशीष देना।
950. बरत्योंण – यज्ञोपवीत संस्कार करना।
951. बरमांड – ब्रह्मांड।
952. बरमांड, बरमान – ब्रह्मांड का अपभ्रंस-माथा।
953. बरमान, बरमांड – ब्रह्मांड का अपभ्रंस-माथा।
954. बरस – वर्ष।
955. बरात, बर्यात – बारात।
956. बरेती – बारात में शामिल लोग।
957. बर्ख – बारिश, वर्षा।
958. बर्त – व्रत, उपवास।
959. बर्त – व्रत, उपवास।
960. बर्यात, बरात – बारात।
961. बर्ष्योव – वर्ष में एक बार आने वाली चीजें।
962. बल – ऐसा हुआ, पहाड़ में तकिया कलाम के रूप में भी प्रयुक्त शब्द।
963. बली – सहानुभूति सूचक शब्द।
964. बल्द – बैल।
965. बल्द त्यार – बैलों का त्योहार, बूढ़ी दीपावली पर।
966. बसुल – बौंहुल-बसूला, पतली लकड़ियां काटने व छिलने के लिये प्रयुक्त लोहे का एक औजार।
967. बस्त – इस्कूलक झ्वल-विद्यालय का झोला, अंग्रेजी-बैग।
968. बहुबयन स्यार, स्यर, नदी के किनारे की सिचाई की सुविधा युक्त चौरस भूमि – बहौड़ – गाय का नर बच्चा।
969. बाकर – बकरी।
970. बाकरक पाठ – बकरी का बच्चा।
971. बाकरै पुज – ऐसी पूजा जिसमें बकरी चढ़ती हो, बकरी का बलिदान दिया जाता हो।
972. बाखइ – बाखली, पहाड़ के आपस में जुड़े हुए भवनों की लंबी श्रृंखला।
973. बाखड़ – ऐसे गाय या भैंस जिन्हें ब्याये हुए काफी समय हो गया हो।
974. बाग – बाघ, गुलदार-तेंदुवा आदि के लिये भी प्रयुक्त।
975. बाग – बाघ, सामान्यतया गुलदार-तेंदुवे के लिये भी प्रयुक्त।
976. बाछ – गाय की बछिया।
977. बाट – रास्ता।
978. बाटुइ, बाटुली – हिचकी।
979. बाटुली, बाटुइ – हिचकी।
980. बाड़ – बाड़-बड़े-बड़े।
981. बाण करंण – बुरा मानना।
982. बादव – बादल।
983. बान – सुंदर।
984. बानर – बंदर।
985. बाब – ह्स्व उच्चारण पर पिता।
986. बाबू – पिता।
987. बार – बारह संख्या, सप्ताह के दिनों के लिये भी प्रयुक्त।
988. बार्षि – मृत्यु के एक वर्ष उपरांत होने वाला आयोजन, माता या पिता की मूर्ति पर पुत्र द्वारा पूरे वर्ष के लिये किया जाने वाला एक तरह का व्रत।
989. बाव – लघु उच्चारण में बच्चे, दीर्घ उच्चारण में बाल।
990. बिगौत – गाय के ब्याने के बाद शुरू में निकलने वाला चिपचिपा दूध।
991. बिचांण – बेचा जाना, बेचा गया।
992. बिचार – बेचारा।
993. बिचारि – बेचारी।
994. बिजंण – सुबह उठना।
995. बिजूंण – नींद से उठाना।
996. बितण – बीतना।
997. बिदंण – बारिश का रुकना।
998. बिद – बरसात के मौसम में बिना बारिश का दिन।
999. बिधौ – विधवा महिला।
1000. बिमार – बीमार या अस्वस्थ।
1001. बिरखांत – वर्णन।
1002. बिराउ – बिल्ली।
1003. बिरादर – एक ही कुल से संबंधित लोग, रिश्तेदार।
1004. बिरानि, बिरानी – दूसरे की, उदाहरण-बिरानि चेलि-दूसरे की लड़की।
1005. बिरानी, बिरानि – दूसरे की, उदाहरण-बिरानि चेलि-दूसरे की लड़की।
1006. बिलांण – पिघल जाना।
1007. बिलै गे – बिलै गौ-पिघल गया, गायब होने के अर्थ में भी।
1008. बिलौज – ब्लाउज।
1009. बिसूंण – भार युक्त सामग्री कुछ देर विश्राम के लिये उतारना।
1010. बिसी – 20 की संख्या का एक परिमाप, एक बिसी क्याव-20 केले।
1011. बीन – कुल्हाड़ी दराती पकड़ने का लकड़ी का डंडा।
1012. बीपै – गुरुवार।
1013. बुजंण – बंद करना।
1014. बुड़ – बूढ़े।
1015. बुढ़ि दिवाइ – दीपावली के 15 दिन बाद मनायी जाने वाली बूढ़ी दीपावली।
1016. बुत – कार्य करना।
1017. बुतकारि – काम करने वाली।
1018. बुब – दादाजी, बुआ।
1019. बुब, बुबु – दादाजी, बुआ।
1020. बुबु, बुब – दादाजी, बुआ।
1021. बुरांठी, बुरमुठी – अंगूठा।
1022. बुरूंश – उत्तराखंड का राज्य वृक्ष बुरांश।
1023. बुरमुठी, बुरांठी – अंगूठा।
1024. बुलांण – बोलना।
1025. बुसींण – धान से चावल न निकलना, चीजों के खराब हो जाने के लिये भी प्रयुक्त, कहावत-औरनाक धान बुसीनीं-हमार चांओ लैं बुसींण, शाब्दिक अर्थ-लोगों के धान खराब हो जाते हैं-हमारे तो चावल भी बेकार निकले।
1026. बूस – धान का बाहरी छिलका, चावल में निकलने वाले धान के छिलके, धान के खाली छिलके जिनमें चावल नहीं होता।
1027. बेई – बीता हुआ कल।
1028. बेड़ु – अंजीर प्रजाति का कच्चे में हरा व पकने पर बैगनी रंग का एक पहाड़ी फल।
1029. बेड़ुक र्वट, बेणू र्वट – कचौड़ी की तरह अंदर से गीली कर पिसी हुई उड़द की दाल डालकर बनाई जाने वाली रोटी।
1030. बेड़ुकि पुरि, बेणू पुरि – कचौड़ी की तरह अंदर से गीली कर पिसी हुई उड़द की दाल डालकर बनाई जाने वाली पूड़ी।
1031. बेणू पुरि, बेड़ुकि पुरि – कचौड़ी की तरह अंदर से गीली कर पिसी हुई उड़द की दाल डालकर बनाई जाने वाली पूड़ी।
1032. बेणू र्वट, बेड़ुक र्वट – कचौड़ी की तरह अंदर से गीली कर पिसी हुई उड़द की दाल डालकर बनाई जाने वाली रोटी।
1033. बेर – समय, देरी और जल्दी दोनों अर्थों में प्रयुक्त, कर प्रत्यय के अर्थ में, उदाहरण-बेर आया-जल्दी आना, कर के लिये भी प्रयुक्त, जैसे उड़ि बेर-उड़कर, हिटि बेर-चलकर।
1034. बेर हैगे – देर हो गयी, कर के के अर्थ में भी, उदाहरण-यह करि बेर-ऐसा करके।
1035. बेली – कटोरा, बीता हुआ कल।
1036. बैकर – किसी धार्मिक आयोजन पर पंडित को दिया जाने वाला दाल, चावल, मसाले,घी-तेल आदि कच्चा अनाज।
1037. बैग – पति।
1038. बैणिआम – दादी की बहन।
1039. बैल गोरु – न ब्याने वाले गाय।
1040. बैशाख – चैत्र एवं ज्येष्ठ के बीच एक माह का नाम।
1041. बोकंण – ढोना।
1042. बोकी, बोक्की – नर बकरा।
1043. बोक्की, बोकी – नर बकरा।
1044. बोजि – भाभी।
1045. बोट – पेड़।
1046. बोतव – बोतल।
1047. बोलंण – बोलना।
1048. बौई – पागल, उदाहरण बौई रौ।
1049. बौई गो, बौई रौ – पागल हो गया है।
1050. बौई रौ, बौई गो – पागल हो गया है।
1051. बौकिल – बैल के जुवे में फंसने वाला हिस्सा।
1052. बौज्यू – पिता।
1053. बौड़ि – बहु।
1054. बौड़ी – बहुए।
1055. बौधांण द्याप्त – गाय की नयी संतति यानी बच्चा होने पर जिन देवता की पूजा की जाती है।
1056. बौधांण पुज – गाय की नयी संतति यानी बच्चा होने पर होने वाली पूजा।
1057. बौल – काम, दूसरों के खेतों में काम करना।
1058. बौल – बुत-दूसरों के खेतों में कार्य करना।
1059. बौवा – बावला, पागल।
1060. ब्यल, ब्येलि – कटोरा।
1061. ब्यवूंण – शादी कराना।
1062. ब्या – शादी, ब्या-बरात, ब्या-काज (वैवाहिक कार्य) शब्द भी प्रयुक्त।
1063. ब्याखुइ – शाम को।
1064. ब्याल – कटोरे बहुवचन।
1065. ब्याव – शाम।
1066. ब्येलि, ब्यल – कटोरा।
1067. ब्योलि – दुल्हन।
1068. ब्यौल – दूल्हा।
1069. ब्वारि – बहु।
1070. ब्वारी – बहुएं।
1071. भंगझव – भांग डालकर बनने वाली झोली-कड़ी।
1072. भंगिर – एक पहाड़ी भोज्य बीज।
1073. भांगिर खाज – भंगीरे के साथ भुने वाले चावल खाना।
1074. भिं – जमीन।
1075. भकार – भखार-अन्य रखने का स्थान, भंडार गृह।
1076. भजू – भागा हुआ।
1077. भटक जौव – भट्ट दाल का भिगोकर बनने वाला जौला।
1078. भड़ – विशाल, शक्तिशाली मनुष्य।
1079. भड़भड़ाट – द्वार-दरवाजे भड़भड़ाना।
1080. भड्डू – बड़े आयोजनों में भोजन पकाने के लिये प्रयुक्त पीतल का गगरी नुमा बड़ा बर्तन, दूध आदि गर्म करने के लिये प्रयुक्त लोहे की कढ़ाईनुमा गहरा बर्तन।
1081. भदौ – भाद्रपद माह।
1082. भनपान – बर्तन धोने का कार्य, खाना खाने के बाद बर्तन धोने का कार्य।
1083. भनभनाट – मक्खियों-मधुमक्खियों की आवाज।
1084. भरपाटि, भरपाठी – लकड़ी की रैक।
1085. भरपाठी, भरपाटि – लकड़ी की रैक।
1086. भल – अच्छा।
1087. भलिआम – प्रसिद्धि, समाज में अच्छी छवि होना।
1088. भागी – भाग्यवान, साथी, पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका के लिये भी गीतों में प्रयुक्त।
1089. भाङ – भांग एक पहाड़ी भोज्य बीज।
1090. भान – पान करंण-बर्तनों को धोना।
1091. भानपान – बर्तन धोने का कार्य, खाना खाने के बाद बर्तन धोने का कार्य।
1092. भिकान – मेंढक।
1093. भिटौइ – चैत्र माह में बहन-बेटियों को उपहार दिये जाने की परंपरा-भिटौली।
1094. भिटौइ – भिटौली, बेटी-बहन को चैत्र माह में दी जाने वाली भेंट की परंपरा।
1095. भिड़ंण – भिड़ना।
1096. भिड़ – दीवार।
1097. भितर, भितेर – अंदर।
1098. भितेर, भितर – अंदर।
1099. भिनेर – आग।
1100. भुकान – भूख से व्याकुल मनुष्य।
1101. भुक्कि लिंण – चूमना।
1102. भुजकोर – ककड़ी कोरने के लिये प्रयुक्त उपकरण।
1103. भुटंण – भूनना।
1104. भुलंण – भूलना।
1105. भुलि, भुली – छोटा भाई, छोटी बहन।
1106. भुली, भुलि – छोटा भाई, छोटी बहन।
1107. भै – भाई, हुआ, बैठना।
1108. भौजि – भाभी।
1109. भौत – भौतै-बहुत।
1110. भौती – महिलाओं का आपस में गले मिलना।
1111. भ्यार – बाहर।
1112. भ्यास – मूर्ख।
1113. भ्योव – पहाड़ी चट्टान।
1114. मंगसीर – मार्गशीर्ष माह।
1115. मांख – मक्खी।
1116. मांण – अनाज मापने की एक इकाई, अनाज मापने का एक निश्चित परिमाप युक्त लकड़ी का बर्तन।
1117. मुंणि – नीचे।
1118. मुंन्डि – गर्दन।
1119. मैंस – मनुष्य, आदमी (महिला-पुरुष दोनों के लिये प्रयुक्त) पति।
1120. मडुवा र्वट – रोटी।
1121. मडू – मडुवा-कौंदों।
1122. मणमणाट – धीमी आवाज में बोलते रहने की आदत।
1123. मणी – थोड़ा, कम।
1124. मणी – मणि-बहुत कम, थोड़ा।
1125. मतै बेर – बहला फुसला कर।
1126. मत्क्यूंण – बहलाना, फुसलाना, मति भ्रम कराना।
1127. मनसुप – मन में लगातर कोई विचार चलते जाना।
1128. मसांण – श्मशान का देवता।
1129. मसांत – अमावास्या।
1130. माङ – गांवों में परिवारों के लिये नियत चरागाह का क्षेत्र जहां से वह पशुओं के लिये घास काट सकते हैं।
1131. माङण – मांगना।
1132. माङि खांण – भीख मांग कर खाना।
1133. माया – ईश्वर की चमत्कारिक शक्ति से उत्पन्न, प्रीति, प्रेम।
1134. माव – दीर्घ उच्चारण पर मैदानी क्षेत्र, ह्स्व उच्चारण पर माला।
1135. मासाब – शिक्षक, मास्टर साहब।
1136. मिजात – फैशन।
1137. मिठ – मीठा।
1138. मिठै – मिठाई।
1139. मिहव – मेहल-पहाड का एक प्रतिनिधि फल।
1140. मुचंड़ – छूटना, पकड़ से छूटना।
1141. मुट्ठि, मुट्ठी – अनाज मापने की एक इकाई, हाथ ही पांचों अंगुलियों को बांधकर बनने वाली मुद्रा।
1142. मुट्ठी, मुट्ठि – अनाज मापने की एक इकाई, हाथ ही पांचों अंगुलियों को बांधकर बनने वाली मुद्रा।
1143. मुतंण – लघु शंका करना।
1144. मुनंण, मुनि दिंण – सम्मोहित करना।
1145. मुनइ – गर्दन।
1146. मुनाड़ – महिलाओं के कान में पहने जाने वाले मोटे आभूषण।
1147. मुनि – गर्दन।
1148. मुनि दिंण, मुनंण – सम्मोहित करना।
1149. मुया – अनाथ बालक।
1150. मुलुक – मुल्क, देश।
1151. मुलैज – गलती को नजर अंदाज करना।
1152. मुसई – मुसलमान।
1153. मुसव – मूसल।
1154. मुसि – मुसी-चुपचाप कोई करते रहना।
1155. मूत – पेशाब, लघु शंका।
1156. मैत – मायका।
1157. मैती – मायके के लोग।
1158. मोल्यूंण – खरीदना।
1159. मोव – घर।
1160. मौ – शहद।
1161. मौन – मधुमक्खी।
1162. म्यव – मेला।
1163. म्याव – मेले।
1164. म्हैंण – माह, महीना।
1165. यां, यां पन – यहां।`
`यां पन, यां – यहां।
1166. यति, एति – यहां।
1167. यस – ऐसा।
1168. यस भै – ऐसा है।
1169. यस भौ – ऐसा हुआ।
1170. या दा, द दऽ – असमर्थता, निराशा, व्यंग्य व रोष आदि के प्रसंग में प्रयुक्त अव्यय।
1171. रांख – ह्स्व उच्चारण पर मशाल।
1172. रूंण – रहना।
1173. रौंण – घर के बाहरी चाख वाले कमरे में आग-धूनी जलाने की जगह।
1174. रङ – रंग।
1175. रङिल – चङिल-रंगीन व चहकता हुआ (पुल्लिंग)।
1176. रङिल – रंगीन।
1177. रङिलि – चङिलि-रंगीन व चहकती हुई (स्त्रीलिंग)।
1178. रड़ंण – फिसलना।
1179. रत्तै – सुबह।
1180. रत्तै ब्यांण – सुबह होते ही, सुबह-सवेरे, सुबह जल्दी।
1181. रमट – बड़काट-कुल्हाड़ा।
1182. रमट, बड़काट – कुल्हाड़ा।
1183. रस्यांण, रस्यार – भोजन बनाने वाला।
1184. रस्यार, रस्यांण – भोजन बनाने वाला।
1185. रस्या, रिस्या, रस्यो – रसोईघर।
1186. रस्यो, रस्या, रिस्या – रसोईघर।
1187. राकस – राक्षस।
1188. राजड़ – खिचड़ी।
1189. रात पड़ण – एक मुहावरा, अर्थ बुरा वक्त आना।
1190. रात्तै – ब्यांण- सुबह होते ही, सुबह-सवेरे, सुबह जल्दी।
1191. रिङण – घूमना।
1192. रिङाइ – चक्कर आना।
1193. रिङै – चक्कर, रिङै ऊंण-चक्कर आना।
1194. रिसांण – नाराज होना।
1195. रिसै गो – नाराज हो गया।
1196. रिसै रौ – नाराज हुआ है।
1197. रिस्या, रस्या, रस्यो – रसोईघर।
1198. रीस – गुस्सा।
1199. रु – रुई।
1200. रुद्री – शिव जी की विशेष पूजा।
1201. रुपसी – रूपवान।
1202. रूनीं – रहते हैं।
1203. रूनूं – रहता हूं या रहती हूं।
1204. रूल – लाइन, पटरी, स्केल।
1205. रै – रहा, रही।
1206. रैत – रायता।
1207. रोवा – रोव-रुदन, दुःख के क्षणों में कई लोगों का साथ में रोना।
1208. रौक – नदी का बड़ा पत्थर।
1209. रौछी – रहा था, रही थी।
1210. रौल – बरसात में उफनकर बहने वाला नाला।
1211. रौली – छां फानने यानी दही को मथने के लिये प्रयुक्त लकड़ी का बर्तन।
1212. र्वट – रोटी।
1213. र्वाट – रोटियां।
1214. लंब – लंबाई।
1215. लूंण – नमक, लाना।
1216. लौंड – लफार-लड़के-लफाड़े, बिगड़े हुए लड़के।
1217. लौंड – लड़का, लड़के।
1218. लगूंण – लगाना।
1219. लगिल – बेल।
1220. लया – लाना।
1221. ललि – लल्ली-पति की बड़ी या छोटी बहन, ननद।
1222. लसिपसि – चिकनी एवं गाढ़ी।
1223. लागंण, लाग – लगना।
1224. लागीं – लगी।
1225. लाग, लागंण – लगना।
1226. लापसि – लापसी-भुने हुए आटे का गुड़ डालकर बना गीला हलवा, गर्म तासीर के कारण प्रसूता महिलाओं को दिया जाता है।
1227. लासण – लहसुन।
1228. लिपंण – लीपना।
1229. लिहगो – ले गया।
1230. लुकंण – छुपना।
1231. लुकूंण – छुपाना।
1232. लुकर, लुकार – दूसरों का।
1233. लुकाई – छुपाया हुआ।
1234. लुकार, लुकर – दूसरों का।
1235. लुटंण – लुटना या लूटना।
1236. लुट – घास को संरक्षित रखने के लिये शंकुनुमा प्रबंध।
1237. लुर्र – पराजित भाव से सबल की शरण में जाना।
1238. लेतमार हुंण – अपमानित होकर भी चिपके रहना।
1239. लेसू र्वट – गेहूं की रोटी से पराठे या कचौड़ी की तरह मडुवे का आटा भरकर बनने वाली रोटी।
1240. लै – भी।
1241. लोटी – लोटा, लोटी पड़ौ-गिर पड़ा, लोटी पड़ी-गिर पड़ी।
1242. लोड़, ल्वाड़ – पत्थर।
1243. लौ – रुचि।
1244. ल्यात्त – आत्मसम्मानहीन होकर हाथ पसारना।
1245. ल्वाड़, लोड़ – पत्थर।
1246. ल्वार – लोहार।
1247. ल्वाव – लोहे के बीन या पकड़ने के मुटठे युक्त एक तरह की दराती।
1248. ल्वे – खून।
1249. ल्हि – ल्हिंण-लेना।
1250. ल्हिजांण – ले जाना।
1251. वां – वहां पर।
1252. वांपन – वहां।
1253. वां पन, वां – वहां।
1254. वां, वां पन – वहां।
1255. विधौ – विधवा महिला।
1256. वीकि – उसकी।
1257. शकुनांखर, शकुन आंखर – संस्कार गीत।
1258. शकुन आंखर, शकुनांखर – संस्कार गीत।
1259. शतुर – शत्रु।
1260. शान करण – इशारा।
1261. संकलप – दहेज देना।
1262. संक्रांत – संग्रांत-संक्रांति का पर्व।
1263. सांस – संध्या का समय।
1264. सिंगल – चावल के आटे से घी-तेल में भूनकर पुवों की तरह लंबे आकार में बनने वाला एक व्यंजन।
1265. सिंगार – श्रृंगार।
1266. सेंण – समतल, उदाहरण-सैंण बाट, समतल रास्ता।
1267. सौंण – सावन माह।
1268. सौंव – सोंङ-पशुओं के लिये पेड़ों की हरी पत्तियों का चारा।
1269. सई – साइ-उत्तराखंड का चावल को पीस कर बने आटे को भूनकर बनने वाला व्यंजन।
1270. सकंण – सगंण-भारी सामान उठाना व काम खत्म करना।
1271. सकर, सगर – ज्यादा।
1272. सगर, सकर – ज्यादा।
1273. सतझड़ – सात दिनों तक लगातार पड़ने वाली बारिश।
1274. सत्र – सत्रह।
1275. सनेसि – खटमल, संडासा, सामान्यतया गर्म बर्तनों को पकड़ने के लिये प्रयुक्त उपकरण।
1276. सपणंण – सफल होना।
1277. सयांण – उम्र में बड़े, विलोम अयांण-उम्र में छोटे।
1278. सरसब्द हुंण – सफल होना।
1279. सराद – श्राद्ध।
1280. सल्ल – चीड़ का पेड़।
1281. सल्ला – बच्चों के खेल में आपस में बोलने के लिये प्रयुक्त शब्द।
1282. सवसवाट – सांप के चलने की ध्वनि।
1283. साइ – साली, पत्नी की छोटी बहन, चावल के आटे से घी-तेल में भूनकर बनने वाला एक व्यंजन।
1284. साइ, सै – चावल के आटे से घी-तेल में भूनकर बनने वाला एक व्यंजन।
1285. साग – सब्जी।
1286. सानी निमू – एक तरह की नींबू की चाट, पहाड़ का एक विशिष्ट व्यंजन।
1287. सालुक बोट – चीड़ का पेड़।
1288. सि – लाइन, उदाहरण-बिं एक सि में बोओ-बीज एक लाइन में बोओ।
1289. सिटोइ – एक पक्षी-मैना।
1290. सित – पके हुए भात में पके चावल के दाने।
1291. सितिल – सरल।
1292. सिमार – लगातार पानी की मौजूदगी वाली सामान्यतया कम धूप की भूमि।
1293. सिरांण, सिरानि – सिरहाना तकिया, तकिया, बिस्तर पर सिर की ओर का भाग।
1294. सिरूंन – बोझ उठाने के लिये कंधे या सिर पर लगाया जाने वाला कपड़ा।
1295. सिर पंचमि – बसंत पंचमी।
1296. सिराइ – अनाज मापने की एक इकाई, अनाज मापने का एक निश्चित परिमाप युक्त लकड़ी का बर्तन।
1297. सिरानि, सिरांण – सिरहाना तकिया, तकिया, बिस्तर पर सिर की ओर का भाग।
1298. सिल – ल्वाड़-सिल-बट्टा, मसाले व डुबुकों आदि के लिये दाल आदि पीसने के लिये प्रयुक्त पत्थर।
1299. सु – तोता।
1300. सुआ, सुवा – तोता, प्रेमी, प्रेमिका।
1301. सुड़ुक – पेय पदार्थ को आवाज के साथ पीना।
1302. सुणन – सुनना।
1303. सुदै – सुद्दै-बिल्कुल।
1304. सुपड़ुक – होंठोंसे चूसते हुए कोई तरल पेय पीना।
1305. सुफल हुंण – सफल होना।
1306. सुवाल पथाइ, स्वांल पथाइ – शादी, उपनयन आदि शुभ संस्कारों में धूप में सुखाने के बाद तली जाने वाली एक तरह की पूड़ियां बनाने की परंपरा।
1307. सुवाल, स्वांल – शादी, उपनयन आदि शुभ संस्कारों में धूप में सुखाने के बाद तली जाने वाली एक तरह की पूड़ियां।
1308. सुवा, सुआ – तोता, प्रेमी, प्रेमिका।
1309. सुस्तांण, सुस्तूंण – कुछ देर के लिये आराम करना।
1310. सुस्तूंण, सुस्तांण – कुछ देर के लिये आराम करना।
1311. सेक दुङ – नींव के पत्थर।
1312. सै, साइ – चावल के आटे से घी-तेल में भूनकर बनने वाला एक व्यंजन।
1313. सोतो गान – मूली।
1314. सोल – सोलह।
1315. सोल सराद – सोलह श्राद्ध।
1316. सौर – ससुर।
1317. सौरास – ससुराल।
1318. सौरासी – ससुराल के लोग, ससुराल के सदस्य।
1319. सौल – कठौल-लगातार बातें करना।
1320. सौल – साही, एक कांटेदार वन्यजीव।
1321. स्यूंत – चीड़ के बीज।
1322. स्यूंनि – सिर में बाल दो ओर बांट कर बनाना।
1323. स्यैंणि – महिला, बहुबचन-स्यैंणी।
1324. स्यैंणि, ज्वे – पत्नी।
1325. स्यर, बहुबयन स्यार, नदी के किनारे की सिचाई की सुविधा युक्त चौरस भूमि – स्याव – आकार में छोटे गडेरी व पिनालू।
1326. स्याव – सियार।
1327. स्यौदैनि – सीलन की गंध।
1328. स्वांल पथाइ, सुवाल पथाइ – शादी, उपनयन आदि शुभ संस्कारों में धूप में सुखाने के बाद तली जाने वाली एक तरह की पूड़ियां बनाने की परंपरा।
1329. स्वांल, सुवाल – शादी, उपनयन आदि शुभ संस्कारों में धूप में सुखाने के बाद तली जाने वाली एक तरह की पूड़ियां।
1330. स्वार – एक गोत्र के संबंधी पारिवारिक जन।
1331. हुंण – होना।
1332. हुंण – होना।
1333. हकनक – हवका-बक्का।
1334. हगड़ – मल त्याग करना।
1335. हगिल – अघिल शब्द की जगह कई जगह प्रयुक्त, आगे।
1336. हड़ – पेड़ का बड़ा हिस्सा।
1337. हड़ि – कुत्ते को भगाने के लिये प्रयुक्त शब्द।
1338. हन्तरैन – कपड़ा जलने की दुर्गंध।
1339. हन्तरैनि – सूती वस्त्र जलने की गंध।
1340. हरांण – खोना।
1341. हरी – हरा रंग।
1342. हरीश – आनंद।
1343. हरै गे – हरै गो-खो गया।
1344. हर्याव – हरेला त्योहार।
1345. हर्याव – हरेला।
1346. हलकंण – हिलना।
1347. हलकूंण – हिलाना।
1348. हलू – हलवा।
1349. हलू – हलवा।
1350. हल्कूंण – हिलाना।
1351. हल्कूंणाछा – हिला रहे थे।
1352. हल्ल-गुल्ल – हल्ला-गुल्ला।
1353. हव – हल।`
`हवसियाट – हवश, आसक्ति, विशेष मन का आवेग।
1354. हाड़ – हड्डी।
1355. हाड़ी – किसी के प्रति दया प्रकट करने का शब्द।
1356. हातबुत सारंण – हाथ बंटाना।
1357. हाम – प्रसिद्धि।
1358. हालंण – डालना।
1359. हालंण – डालना।
1360. हाव-बयाव – हवा।
1361. हि – दिल।
1362. हिटंण – चलना।
1363. हिट – चल।
1364. हिटू – घूमते रहने वाला।
1365. हिटो – चलो।
1366. हिमाव – हिमालय।
1367. हिलजात्रा – विशेष मुखौटों के साथ सोर अंचल में मनाया जाने वाला भगवान शिव को समर्पित एक त्योहार।
1368. हिलू – नर बकरा।
1369. हिल्वांण – नर बकरा।
1370. हिसाउ – हिसालू।
1371. हुकींण – आश्चर्य या भूय से चेतनाशून्य हो जाना।
1372. हुकाव – हुंकार।
1373. हुड़की बौल – हुड़के के साथ काम करना, विशेषकर धान की रोपाई करना।
1374. हुडुक – डमरू की तरह का पहाड़ का प्रतिनिधि वाद्य।
1375. हुड़ुक – हुड़का, डमरू की तरह दिखने वाला पहाड़ का विशेष वाद्य यंत्र।
1376. हुनुटि – हुरफुरान – सजी-संवरी।
1377. हुलार – नीचे की ओर।
1378. हूगर – हूल – ऊपरी मंजिल के कमरे से नीचे के कमरे में दरवाजा बंद करने का प्रबंध।
1379. हेरंण – खोजना।
1380. हेरंण – देखना।
1381. हैगो – हो गया।
1382. है गेछी – हो गयी थी।
1383. होइ – होली, हां, हँसुलि-महिलाओं का गले में पहनने वाला चांदी का मोटा आभूषण।
1384. होई – हाँ।
1385. होय – हाँ।
1386. हौल – कोहरा।
1387. हौ बांण – हल जोतना।
1388. ह्यूं – हिम, बर्फ।
1389. ह्यूंमुन – हिमकण।
1390. ह्याव – उपेक्षित।
1391. ह्यि – दिल।
1392. ह्योल – जागर आदि में मुख्य गायक के साथ अंतिम स्वर मिलाना।
1393. ह्योलधार – तमाशबीनों की भीड़।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
