नवीन समाचार, देहरादून, 21 अगस्त 2026 (Smiley Spider with Smiling Human Face)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के हिमालयी जंगलों में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई मकड़ी की प्रजाति (New Spider Species) की पहचान की है, जिसकी पीठ पर बनी आकृति इंसानी मुस्कान और चेहरे जैसी दिखाई देती है। इसका वैज्ञानिक नाम Theridion himalayana रखा गया है और इसे ‘हिमालयन हैप्पी-फेस स्पाइडर’ (Himalayan Happy-Face Spider) नाम दिया गया है। खास बात यह है कि शोध में इस एक ही प्रजाति के 32 अलग-अलग रंग और शरीर पर बने पैटर्न (Morphs) दर्ज किए गए हैं। (देखें संबंधित शोध रिपोर्ट : ScienceDirect)
प्राप्त वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार यह मकड़ी उत्तराखंड के चमोली (Chamoli) और रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) जनपदों के हिमालयी वनों में करीब 2,000 से 2,200 मीटर की ऊंचाई पर मिली है। इसके नमूने मक्कू (Makku), ताला (Tala) और मंडल (Mandal) क्षेत्रों से लिए गए हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह प्रजाति हवाई द्वीपसमूह (Hawaiian Islands) की प्रसिद्ध ‘हैप्पी-फेस स्पाइडर’ Theridion grallator से दिखने में बेहद मिलती-जुलती है, लेकिन आनुवंशिक परीक्षण में दोनों के बीच करीब 8.5 प्रतिशत अंतर मिला है, जिससे हिमालयी मकड़ी को अलग प्रजाति और स्वतंत्र रूप से विकसित वंश (Evolutionary Lineage) माना गया है। (देखें संबंधित शोध रिपोर्ट : Biodiversity Heritage Library)
चींटियों के सर्वेक्षण के दौरान मिली मकड़ी ने खोला नई प्रजाति का रास्ता
इस खोज की खास बात यह भी है कि वैज्ञानिक मूल रूप से मकड़ियों की तलाश नहीं कर रहे थे। शोध दल हिमालयी क्षेत्र में चींटियों और अन्य जीवों का सर्वेक्षण कर रहा था। इसी दौरान वन अनुसंधान संस्थान (Forest Research Institute-FRI), देहरादून से जुड़े शोधकर्ता आशीर्वाद त्रिपाठी (Ashirwad Tripathy) ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों से मकड़ियों के चित्र वैज्ञानिक देवी प्रियदर्शिनी (Devi Priyadarshini) को भेजे। एक दिन Daphniphyllum की पत्ती की निचली सतह पर मिली मकड़ी की तस्वीर देखकर प्रियदर्शिनी ने इसकी असाधारण समानता को पहचाना। इसके बाद अलग-अलग नमूनों और उनके रंग-रूपों का अध्ययन शुरू हुआ। (देखें संबंधित शोध रिपोर्ट : Pensoft Blog)
शोध के दौरान कुल 61 नमूनों का विश्लेषण किया गया। इनमें 24 नर और 37 मादा मकड़ियां थीं, जबकि 40 किशोर अवस्था में और 21 वयस्क थीं। वैज्ञानिकों ने इनके शरीर के रंग और पीठ पर बने अलग-अलग चिह्नों का अध्ययन कर 32 अलग-अलग रूप दर्ज किए। यह विविधता इस नई प्रजाति की सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में शामिल है। (देखें संबंधित शोध रिपोर्ट : ScienceDirect)
पीठ पर बनी मुस्कान का रहस्य अभी वैज्ञानिकों के लिए अनसुलझा
मकड़ी की पीठ पर लाल, काले और सफेद रंगों के चिह्न अलग-अलग संयोजन में दिखाई देते हैं। कुछ नमूनों में ये चिह्न इंसानी चेहरे की आंखों और मुस्कान जैसे नजर आते हैं, जबकि कुछ में पैटर्न काफी अलग या हल्के हैं। वैज्ञानिक इन्हें ‘मॉर्फ’ (Morph) कहते हैं, यानी एक ही प्रजाति के भीतर दिखाई देने वाले अलग-अलग बाहरी रूप।
शोधकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन रंगों और चेहरे जैसे पैटर्न का वास्तविक जैविक लाभ क्या है। अध्ययन में संकेत दिया गया है कि ऐसे रंग और पैटर्न प्राकृतिक वातावरण में जीवित रहने में मदद कर सकते हैं, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वे शिकारियों से बचाव, छद्मावरण (Camouflage), किसी दूसरे जीव की नकल या किसी अन्य जैविक प्रक्रिया में क्या भूमिका निभाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इस विषय में आगे अध्ययन की आवश्यकता है। (देखें संबंधित शोध रिपोर्ट : ScienceDirect)
हिमालय की इस मकड़ी का हवाई प्रजाति से क्या संबंध है?
हवाई की Theridion grallator को लंबे समय से अपने विशिष्ट मुस्कुराते चेहरे जैसे पैटर्न के कारण जाना जाता है। हिमालय में मिली Theridion himalayana इससे दिखने में मिलती है, लेकिन डीएनए (DNA) विश्लेषण ने दोनों को अलग वंशों का बताया है। लगभग 8.5 प्रतिशत आनुवंशिक अंतर इस बात का महत्वपूर्ण प्रमाण है कि दोनों प्रजातियों ने अलग-अलग क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से समान प्रकार की बाहरी आकृति विकसित की। इसे स्वतंत्र या समानांतर विकास (Independent or Convergent Evolution) के अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। (देखें संबंधित शोध रिपोर्ट : Biodiversity Heritage Library)
यानी हिमालय में मिली यह मकड़ी हवाई से आई हुई कोई वही पुरानी प्रजाति नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक रूप से अलग नई प्रजाति है। उसका हवाई मकड़ी जैसा दिखना विकास की एक रोचक समानता है, जिसने वैज्ञानिकों के सामने यह सवाल खड़ा किया है कि हजारों किलोमीटर दूर रहने वाली दो अलग प्रजातियों में लगभग एक जैसा ‘मुस्कुराता’ पैटर्न कैसे विकसित हुआ।
अदरक के पौधों पर भी मिलती है यह मकड़ी
अध्ययन में इस मकड़ी के प्राकृतिक व्यवहार से जुड़ा एक और रोचक तथ्य सामने आया है। Theridion himalayana को कई स्थानों पर अदरक कुल के Hedychium पौधों पर पाया गया। वैज्ञानिकों ने ध्यान दिया कि हवाई की हैप्पी-फेस मकड़ी भी अदरक के पौधों से जुड़ी हुई पाई जाती है। दोनों क्षेत्रों में इस समानता ने शोधकर्ताओं की उत्सुकता और बढ़ा दी है, क्योंकि हवाई में अदरक स्थानीय वनस्पति नहीं है। (देखें संबंधित शोध रिपोर्ट : Pensoft Blog)
हिमालयी मकड़ी जंगल के भीतर पत्तियों की निचली सतह पर जाला बनाती है और उसमें उलटी लटककर रहने वाली प्रजातियों में शामिल है। शोध के अनुसार इसके नमूने केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य (Kedarnath Wildlife Sanctuary) के आसपास राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट स्थित वन क्षेत्र में भी मिले। वैज्ञानिकों ने 2,000 से 2,200 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इसकी उपस्थिति दर्ज की है। (देखें संबंधित शोध रिपोर्ट : ScienceDirect)
नाम में भी हिमालय को दिया गया सम्मान
वैज्ञानिकों ने इस नई प्रजाति का नाम Theridion himalayana इसलिए रखा क्योंकि इसकी पहचान हिमालयी क्षेत्र में हुई है। शोधकर्ताओं के अनुसार ‘himalayana’ नाम हिमालय की जैव विविधता को सम्मान देने का प्रयास है। अध्ययन में इसे इस क्षेत्र से दर्ज पहली बहुरूपी (Polymorphic) Theridion प्रजाति के रूप में प्रस्तुत किया गया है। (देखें संबंधित शोध रिपोर्ट : ScienceDirect)
इस खोज का महत्व केवल एक ‘मुस्कुराती मकड़ी’ मिलने तक सीमित नहीं है। हिमालय दुनिया के महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्रों में शामिल है और ऊंचाई बढ़ने के साथ वनस्पतियों, तापमान और आवास की परिस्थितियां बदलती हैं। ऐसे में ऊंचाई वाले जंगलों में छोटे जीवों की नई प्रजातियों और उनके अलग-अलग रूपों की पहचान हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को समझने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
आगे और कितने रूप सामने आएंगे?
शोधकर्ताओं का मानना है कि उत्तराखंड के ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में व्यापक सर्वेक्षण किए जाने पर इस मकड़ी के और रंग-रूप तथा संभवतः अन्य बहुरूपी प्रजातियां भी सामने आ सकती हैं। अभी वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इसके शरीर पर बने मुस्कुराते पैटर्न और रंगों की इतनी विविधता के पीछे आनुवंशिक तथा पर्यावरणीय कारण क्या हैं। (देखें संबंधित शोध रिपोर्ट : Pensoft Blog)
वैज्ञानिक अध्ययन अप्रैल 2026 में Evolutionary Systematics पत्रिका में प्रकाशित हुआ। अध्ययन के लेखक आशीर्वाद त्रिपाठी और देवी प्रियदर्शिनी हैं। यह खोज उत्तराखंड के हिमालयी वनों में छिपी जैव विविधता की एक और मिसाल सामने लाती है और यह भी बताती है कि प्रकृति के कई रहस्य अभी वैज्ञानिक खोज की प्रतीक्षा कर रहे हैं। (देखें संबंधित शोध रिपोर्ट : Zenodo)
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
