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नवीन समाचार इक्स्क्लूसिव : उत्तराखंड में भाजपा को बढ़त, लेकिन कांग्रेस मुकाबले में; धामी सबसे पसंदीदा मुख्यमंत्री, 52.5% मतदाताओं ने अभी से तय कर लिया है वोट

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नवीन समाचार, नैनीताल, 25 अगस्त 2026 (Uttarakhand Vidhan Sabha Chunav Survey)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव (Assembly Election) को लेकर आज जारी हुए पहले स्वतंत्र सर्वे, ‘वोट वाइब’ (Vote Vibe) के ताजा जनमत सर्वेक्षण (Opinion Poll) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) फिलहाल कांग्रेस (Congress) से आगे दिखाई दे रही है, लेकिन मुकाबला एकतरफा नहीं है। सर्वेक्षण में भाजपा को 40.9 प्रतिशत और कांग्रेस को 36.7 प्रतिशत वोट शेयर (Vote Share) मिलने का अनुमान है, जबकि मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) 28.2 प्रतिशत पसंद के साथ सबसे आगे हैं। आप यह संबंधित वीडियो भी जरूर देखना चाहेंगे :

मुख्यमंत्री धामी का मात्र 28.2 प्रतिशत ही जनता का पसंदीदा होना स्वयं धामी के लिये जनता के बीच छवि के लिहाज से खुश न करने वाला संकेत हो सकता है। जबकि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पसंद करने वाले लोगों का प्रतिशत 40 प्रतिशत से अधिक है। खास बात यह है कि 25.6 प्रतिशत मतदाताओं का झुकाव तो तय है, लेकिन उन्होंने अंतिम निर्णय नहीं लिया है और 14.8 प्रतिशत अभी पूरी तरह अनिर्णीत हैं, यानी चुनाव से पहले करीब चार में से एक मतदाता का रुख बदल सकने की गुंजाइश बनी हुई है।

Uttarakhand Vidhan Sabha Chunav Surveyवोट वाइब (Vote Vibe) की ओर से 25 अगस्त 2026 को जारी ‘स्टेट वाइब’ (State Vibe) विधानसभा चुनाव 2027 जनमत सर्वेक्षण (Opinion Survey) में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), उत्तराखंड (Uttarakhand) और पंजाब (Punjab) को शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार सर्वेक्षण कैटीआई (CATI) पद्धति से किया गया और तीनों राज्यों को मिलाकर नमूना आकार (Sample Size) 6,000 से अधिक रहा। रिपोर्ट में त्रुटि की संभावित सीमा (Margin of Error) प्लस/माइनस 3 प्रतिशत बताई गई है। हालांकि उत्तराखंड के लिए अलग से कितने उत्तरदाता शामिल किए गए, यह रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं किया गया है।

सरकार से संतुष्टि 39.1 प्रतिशत, विधायकों से संतुष्टि केवल 27.1 प्रतिशत

सर्वेक्षण के पहले सवाल में पिछले पांच वर्षों में उत्तराखंड सरकार के प्रदर्शन (Government Performance) को लेकर 24.3 प्रतिशत लोगों ने ‘पूर्णतः संतुष्ट’ (Fully Satisfied), 14.8 प्रतिशत ने ‘संतुष्ट’ (Satisfied), 15.2 प्रतिशत ने ‘औसत/ठीक-ठाक’ (Average) कहा। इसके विपरीत 23.9 प्रतिशत ‘असंतुष्ट’ (Dissatisfied) और 14.2 प्रतिशत ‘पूर्णतः असंतुष्ट’ (Fully Dissatisfied) रहे, जबकि 7.6 प्रतिशत ने कुछ कहने से इनकार किया या अनभिज्ञता जताई। यानी संतुष्टि का कुल स्तर 39.1 प्रतिशत और असंतुष्टि 38.1 प्रतिशत है।

वर्तमान विधायक (MLA) के कामकाज को लेकर तस्वीर सरकार से कमजोर है। केवल 15.3 प्रतिशत मतदाता पूर्णतः संतुष्ट और 11.8 प्रतिशत संतुष्ट हैं, यानी कुल संतुष्टि 27.1 प्रतिशत है। 19.3 प्रतिशत ने प्रदर्शन को औसत बताया, जबकि 36.6 प्रतिशत असंतुष्ट और 11.4 प्रतिशत पूर्णतः असंतुष्ट हैं। इस तरह विधायकों से कुल असंतुष्टि 48 प्रतिशत बैठती है। सर्वेक्षण के निष्कर्ष में इसे स्थानीय स्तर पर सत्ता-विरोधी भावना (Anti-Incumbency) का महत्वपूर्ण संकेत माना गया है।

रिपोर्ट के अनुसार उम्र भी सरकार के प्रति धारणा में महत्वपूर्ण अंतर पैदा करती है। 18 से 34 वर्ष के युवा मतदाता अपेक्षाकृत अधिक असंतुष्ट हैं, जबकि 55 वर्ष से अधिक आयु के मतदाता सरकार के प्रति अधिक संतुष्ट दिखाई देते हैं। सामान्य वर्ग (General Category) के मतदाताओं में सरकार के प्रदर्शन को लेकर ‘पूर्णतः संतुष्ट’ प्रतिक्रिया सबसे अधिक है, जबकि अनुसूचित जाति (SC) के मतदाता सबसे अधिक असंतुष्ट बताए गए हैं। मुस्लिम और अनुसूचित जनजाति (ST) मतदाताओं में विधायकों के प्रति असंतुष्टि क्रमशः 45.7 और 44.8 प्रतिशत दर्ज की गई है।

बेरोजगारी के बाद शिक्षा-स्वास्थ्य सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा

सर्वेक्षण में बेरोजगारी (Unemployment) 20.7 प्रतिशत के साथ सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं (Education & Health Services) 18.9 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इसके बाद महंगाई (Inflation) 12.9 प्रतिशत, कानून-व्यवस्था एवं महिला सुरक्षा (Law and Order & Women Safety) 10.8 प्रतिशत, भ्रष्टाचार (Corruption) 9.8 प्रतिशत, बिजली-सड़क-पानी (Electricity, Roads & Water) 9.5 प्रतिशत, सामाजिक न्याय (Social Justice) 4.1 प्रतिशत और किसानों के मुद्दे (Farmers’ Issues) 3.5 प्रतिशत हैं।

अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder Case) को 2.6 प्रतिशत मतदाताओं ने सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा माना। 7.2 प्रतिशत ने अन्य मुद्दों या ‘पता नहीं’ का विकल्प चुना। रिपोर्ट के सामाजिक विश्लेषण में कहा गया है कि अनुसूचित जनजाति (ST) मतदाता शिक्षा और स्वास्थ्य को विशेष प्राथमिकता देते हैं, जहां यह आंकड़ा 24.7 प्रतिशत है। मुस्लिम, अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामान्य वर्ग के लिए भी शिक्षा-स्वास्थ्य और बेरोजगारी प्रमुख चिंताओं में हैं।

वोट तय करने में पार्टी विचारधारा सबसे आगे

मतदान करते समय सबसे अधिक महत्व किसे दिया जाएगा, इस सवाल पर 29.6 प्रतिशत ने पार्टी की विचारधारा (Party Ideology) को प्राथमिकता दी। 19.7 प्रतिशत ने विकास और जनहित के मुद्दों (Development & Public Interest Issues) को, जबकि 18.4 प्रतिशत ने उम्मीदवार के व्यक्तित्व या छवि (Candidate Personality/Image) को निर्णायक माना।

प्रधानमंत्री का चेहरा (Prime Minister’s Face) 11.7 प्रतिशत और मुख्यमंत्री का चेहरा (Chief Minister’s Face) 4.3 प्रतिशत मतदाताओं के लिए प्रमुख निर्णायक है। जाति/धर्म (Caste/Religion) का प्रभाव 4.3 प्रतिशत बताया गया। सरकारी योजनाओं का लाभ मिला या नहीं (Benefit from Government Schemes) 3.6 प्रतिशत और राज्य सरकार का प्रदर्शन (State Government Performance) केवल 2 प्रतिशत मतदाताओं के लिए प्रमुख मतदान कारक रहा। 3.6 प्रतिशत ने अन्य और 2.8 प्रतिशत ने कुछ कहने में असमर्थता जताई।

इसका अर्थ यह निकलता है कि सर्वेक्षण में उत्तराखंड का चुनाव मुख्यतः पार्टी की विचारधारा, स्थानीय विकास और उम्मीदवार की छवि के इर्द-गिर्द घूमता दिखाई दे रहा है, जबकि केवल सरकार की योजनाओं का लाभ या सरकार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कम लोगों के लिए सीधे मतदान का निर्णायक आधार है। रिपोर्ट के अनुसार 18-24 वर्ष के मतदाताओं में उम्मीदवार का व्यक्तित्व सबसे महत्वपूर्ण है, वरिष्ठ मतदाताओं में पार्टी विचारधारा और प्रधानमंत्री का चेहरा अधिक प्रभावी है तथा मुस्लिम मतदाताओं के लिए विकास एवं जनहित और प्रधानमंत्री का चेहरा महत्वपूर्ण कारक हैं।

52.5 प्रतिशत ने वोट तय किया, 40.4 प्रतिशत अभी पूरी तरह स्थिर नहीं

वोट देने का निर्णय कितना पक्का है, इस सवाल पर 52.5 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि उन्होंने अपना वोट पूरी तरह तय कर लिया है। 25.6 प्रतिशत ने बताया कि उनका रुझान तय है, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं लिया है। 14.8 प्रतिशत ने अभी तक निर्णय नहीं लिया, जबकि 7.1 प्रतिशत ने कुछ कहने से इनकार किया।

यहां रिपोर्ट के आंकड़ों में एक उल्लेखनीय अंतर भी है। प्रश्न संख्या-5 की मूल तालिका में ‘रुझान है, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं लिया’ का आंकड़ा 25.6 प्रतिशत है, जबकि पृष्ठ 15 के निष्कर्ष में यही आंकड़ा 25.8 प्रतिशत लिखा गया है। समाचार के लिए मूल प्रश्न तालिका का 25.6 प्रतिशत आंकड़ा लिया गया है। रिपोर्ट के निष्कर्ष में 25.8 प्रतिशत को संभावित स्विंग मतदाता (Swing Voters) बताया गया है और 14.8 प्रतिशत को अनिर्णीत वर्ग कहा गया है।

रिपोर्ट के अनुसार अनुसूचित जाति (SC) मतदाताओं में अपना निर्णय पूरी तरह तय कर चुके मतदाताओं का अनुपात सबसे अधिक है। सामान्य वर्ग में अस्थिर/स्विंग मतदाताओं का हिस्सा सबसे अधिक और मुस्लिम मतदाताओं में अनिर्णीत मतदाताओं का हिस्सा सबसे अधिक बताया गया है। वरिष्ठ नागरिकों में भी 33.9 प्रतिशत तक मतदाता स्विंग कर सकने की स्थिति में बताए गए हैं, जबकि 25-34 वर्ष का वर्ग सबसे अधिक अनिर्णय वाला बताया गया है।

मुख्यमंत्री की पसंद में धामी सबसे आगे, कांग्रेस के दो नेताओं का संयुक्त आंकड़ा करीब 40 प्रतिशत

मुख्यमंत्री (Chief Minister) के रूप में पुष्कर सिंह धामी 28.2 प्रतिशत के साथ स्पष्ट रूप से सबसे आगे हैं। कांग्रेस के हरीश रावत (Harish Rawat) को 23.3 प्रतिशत और गणेश गोदियाल (Ganesh Godiyal) को 16.6 प्रतिशत मतदाताओं ने पसंद किया। भाजपा के अनिल बलूनी (Anil Baluni) 10.6 प्रतिशत और त्रिवेंद्र सिंह रावत (Trivendra Singh Rawat) 4.8 प्रतिशत पर हैं। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के सुरेंद्र सिंह कुकरेती को 1.4 प्रतिशत और 15.1 प्रतिशत मतदाता किसी नाम पर राय नहीं बना सके।

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यदि पार्टी के चेहरों को जोड़कर देखा जाए तो भाजपा के तीन नेताओं—पुष्कर सिंह धामी, अनिल बलूनी और त्रिवेंद्र सिंह रावत—का संयुक्त समर्थन 43.6 प्रतिशत बनता है। कांग्रेस के हरीश रावत और गणेश गोदियाल का संयुक्त आंकड़ा 39.9 प्रतिशत है। यानी व्यक्तिगत रूप से धामी सबसे आगे हैं और भाजपा के उपलब्ध प्रमुख चेहरों का संयुक्त समर्थन भी कांग्रेस के दो प्रमुख नामों से ऊपर है।

रिपोर्ट के अनुसार धामी और हरीश रावत को सबसे अधिक समर्थन 55 वर्ष से ऊपर के मतदाताओं से मिलता है, जबकि गणेश गोदियाल का समर्थन युवाओं, विशेषकर 18-24 वर्ष के मतदाताओं में अपेक्षाकृत अधिक है। 18-24 और 25-34 आयु वर्ग कांग्रेस की ओर अधिक झुकते हैं, जबकि मध्यम आयु और वरिष्ठ मतदाता भाजपा की ओर अधिक झुके हुए बताए गए हैं। 25-34 आयु वर्ग में उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) की पकड़ 12.5 प्रतिशत तक बताई गई है।

वोट शेयर में भाजपा चार प्रतिशत से आगे, लेकिन जीत की धारणा में अंतर घटा

वोट शेयर (Vote Share) के सवाल में भाजपा 40.9 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है। कांग्रेस 36.7 प्रतिशत पर है, यानी दोनों के बीच 4.2 प्रतिशत अंक का अंतर है। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) को 8.6 प्रतिशत, बसपा (BSP) को 1.6 प्रतिशत, आम आदमी पार्टी (AAP) को 1.3 प्रतिशत और अन्य क्षेत्रीय दलों/निर्दलीय उम्मीदवारों को 1.4 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान है। 9.6 प्रतिशत मतदाता अभी अनिर्णीत या कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं।

यहां भी महिला और पुरुष मतदाताओं में अंतर का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है। भाजपा की बढ़त महिलाओं में लगभग 5 प्रतिशत और पुरुषों में लगभग 3 प्रतिशत बताई गई है। यानी महिला मतदाताओं में भाजपा की बढ़त अपेक्षाकृत अधिक है।

लेकिन जब मतदाताओं से पूछा गया कि उनके अनुसार 2027 का चुनाव कौन जीतेगा, तो भाजपा की बढ़त और कम हो जाती है। 39.7 प्रतिशत ने भाजपा को विजेता माना, जबकि 36.3 प्रतिशत ने कांग्रेस को। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) 9.2 प्रतिशत, बसपा 0.8 प्रतिशत, आम आदमी पार्टी 0.4 प्रतिशत और अन्य क्षेत्रीय दल/निर्दलीय 0.7 प्रतिशत पर हैं। 12.9 प्रतिशत मतदाता इस सवाल पर अनिर्णीत या अनिश्चित हैं।

इस तरह सर्वेक्षण की सबसे दिलचस्प तस्वीर यह है कि भाजपा का अनुमानित वोट शेयर कांग्रेस से 4.2 प्रतिशत अंक अधिक है, लेकिन ‘कौन जीतेगा’ की धारणा में अंतर केवल 3.4 प्रतिशत अंक रह जाता है। वहीं अपने वोट को लेकर अनिश्चित मतदाता 9.6 प्रतिशत हैं, जबकि चुनाव परिणाम का अनुमान लगाने में 12.9 प्रतिशत लोग अनिर्णीत हैं। रिपोर्ट इसे इस संकेत के रूप में देखती है कि मतदाता अपने वोट को लेकर चुनाव के संभावित परिणाम से कुछ अधिक निश्चित दिखाई दे रहे हैं।

उम्र के साथ बदल रहा राजनीतिक रुझान

सर्वेक्षण के निष्कर्ष में पीढ़ीगत अंतर (Generational Divide) को महत्वपूर्ण बताया गया है। 18-24 और 25-34 आयु वर्ग कांग्रेस के प्रति अपेक्षाकृत अधिक समर्थन दिखाते हैं, जबकि मध्यम आयु और वरिष्ठ नागरिक भाजपा की ओर अधिक झुके हुए हैं। वरिष्ठ मतदाताओं में भाजपा की ओर झुकाव और मुख्यमंत्री के रूप में धामी का समर्थन अधिक है।

सामाजिक समूहों के स्तर पर भी स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। मुस्लिम मतदाताओं में कांग्रेस का समर्थन बहुत अधिक बताया गया है—79.7 प्रतिशत मतदाता कांग्रेस की ओर मतदान करने की बात कहते हैं और 96.1 प्रतिशत इसे चुनाव का विजेता मानते हैं। इसके विपरीत सिख मतदाताओं में भाजपा का समर्थन 68.7 प्रतिशत और सामान्य वर्ग में भाजपा का समर्थन 52.8 प्रतिशत बताया गया है। अनुसूचित जाति (SC) मतदाताओं में कांग्रेस को 41.2 प्रतिशत और भाजपा को 32.2 प्रतिशत समर्थन दर्ज किया गया है।

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सर्वेक्षण से निकलती बड़ी राजनीतिक तस्वीर

इन आंकड़ों को एक साथ देखने पर उत्तराखंड में फिलहाल भाजपा के पक्ष में हल्की लेकिन स्पष्ट बढ़त दिखाई देती है। सरकार की कुल संतुष्टि और भाजपा का वोट शेयर कांग्रेस से आगे है तथा मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत पसंद में पुष्कर सिंह धामी सबसे आगे हैं। लेकिन विधायकों के प्रति 48 प्रतिशत की असंतुष्टि, युवाओं का अपेक्षाकृत अधिक असंतोष, बेरोजगारी और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसे मुद्दों की प्रमुखता तथा 25.6 प्रतिशत संभावित स्विंग मतदाता भाजपा के लिए भी चुनौती का संकेत देते हैं।

कांग्रेस के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेत यह है कि उसका वोट शेयर भाजपा से केवल 4.2 प्रतिशत अंक पीछे है और मुख्यमंत्री पद के लिए हरीश रावत तथा गणेश गोदियाल का संयुक्त आंकड़ा 39.9 प्रतिशत है। युवा वर्ग का कांग्रेस की ओर झुकाव भी उसके लिए सकारात्मक संकेत है। दूसरी ओर कांग्रेस के सामने स्थानीय विधायकों के प्रदर्शन, संगठनात्मक एकजुटता और संभावित मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर मतदाताओं की अलग-अलग पसंद को एक राजनीतिक संदेश में बदलने की चुनौती रहेगी। यह अंतिम चुनाव परिणाम नहीं, बल्कि 25 अगस्त 2026 को जारी सर्वेक्षण में दर्ज मतदाता मनोदशा है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह रिपोर्ट विधानसभा सीटों की संख्या या सरकार बनने का सीट-वार अनुमान (Seat Projection) नहीं देती। इसमें वोट शेयर, मुख्यमंत्री की पसंद और मतदाताओं की ‘कौन जीतेगा’ संबंधी धारणा दर्ज की गई है। इसलिए 40.9 प्रतिशत भाजपा वोट शेयर को सीधे सीटों की संख्या में बदलना उचित नहीं होगा। सर्वेक्षण में दर्ज 52.5 प्रतिशत पूरी तरह तय मतदाता, 25.6 प्रतिशत अंतिम निर्णय से पहले वाले मतदाता और 14.8 प्रतिशत अनिर्णीत मतदाता 2027 की वास्तविक चुनावी तस्वीर बनने से पहले महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सर्वेक्षण की पद्धति के लिहाज से भी इसे उसी सीमा में पढ़ना जरूरी है। वोट वाइब ने तीन राज्यों को मिलाकर 6,000 से अधिक नमूने, कैटीआई (CATI) पद्धति और प्लस/माइनस 3 प्रतिशत की त्रुटि सीमा बताई है, लेकिन उत्तराखंड के लिए पृथक नमूना आकार रिपोर्ट में नहीं दिया गया है। इसलिए ये आंकड़े वर्तमान मतदाता रुझान की तस्वीर हैं, चुनाव परिणाम की निश्चित भविष्यवाणी नहीं।

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