देहरादून में सेवानिवृत्त महिला प्रधानाचार्य 24 दिन रही डिजिटल अरेस्ट, इस दौरान हुई 73.60 लाख की ठगी

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नवीन समाचार, देहरादून, 8 सितंबर 2026 (Retired Female Principal Digital Arrest)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) में साइबर ठगों ने एक सेवानिवृत्त महिला प्रधानाचार्य (Retired Woman Principal) को 24 दिन तक डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) का भय दिखाकर 73.60 लाख रुपये की धनराशि ठग ली। ठगों ने स्वयं को मुंबई क्राइम ब्रांच (Mumbai Crime Branch) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-CBI) का अधिकारी बताकर महिला को मुकदमे और गिरफ्तारी का भय दिखाया। वह इतनी भयभीत हो गयीं कि घर में रहने वाले चिकित्सक पुत्र को भी इसकी जानकारी नहीं दी।

Retired Female Principal Digital Arrest FD तुड़वाकर खातों में ट्रांसफर कराए पैसे.(Photo: AI-generated)प्राप्त जानकारी के अनुसार 8 अगस्त को महिला के पास पहला फोन आया। फोन करने वाले ने कहा कि उनके पहचान पत्र (Identity Card) पर जारी सिम कार्ड (SIM Card) का उपयोग करोड़ों रुपये के घोटाले में हुआ है। इसके बाद जांच और क्लीयरेंस के नाम पर उन्हें अलग-अलग बैंक खातों में 73.60 लाख रुपये जमा करने के लिए कहा गया और विश्वास दिलाया गया कि जांच पूरी होने तक धनराशि भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) के पास सुरक्षित रहेगी। 8 से 31 अगस्त तक चले इस पूरे घटनाक्रम में महिला को घर से बाहर नहीं निकलने और किसी को जानकारी नहीं देने के निर्देश दिए गये।

फर्जी पुलिस कार्यालय दिखाकर बनाया विश्वास

ठगों ने महिला को अपने जाल में फंसाने के लिए पुलिस कार्यालय जैसा फर्जी वातावरण तैयार किया। आरोपित पुलिस की वर्दी पहनकर वॉट्सऐप (WhatsApp) पर वीडियो कॉल करते थे और स्वयं को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताते थे। लगातार निगरानी और कार्रवाई का भय दिखाये जाने से महिला मानसिक दबाव में आ गयीं और ठगों के निर्देशों का पालन करती रहीं। डिजिटल अरेस्ट नाम से किसी व्यक्ति को इस तरह घर में रखने या निगरानी करने की कोई वैधानिक गिरफ्तारी व्यवस्था नहीं है।

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महिला के पति को जब इस स्थिति पर संदेह हुआ तो उन्होंने इसे ठगी करने वाले गिरोह की गतिविधि बताते हुए पत्नी को समझाने का प्रयास किया। लेकिन फर्जी जांच और गिरफ्तारी के भय के कारण महिला ने उनकी बात पर भी विश्वास नहीं किया। इस दौरान उन्होंने अपने चिकित्सक पुत्र से बातचीत कम कर दी और अलग रहने लगीं। महिला के व्यवहार में आये इस बदलाव से पुत्र को संदेह हुआ।

बेटे ने मोबाइल जांचा तो सामने आया पूरा घटनाक्रम

पुत्र ने मां के मोबाइल की जांच की तो वॉट्सऐप पर हुई बातचीत और बैंक लेन-देन की जानकारी सामने आयी। इसके बाद उसे पूरे घटनाक्रम का पता चला और उसने तत्काल साइबर अपराध संबंधी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। सोमवार को देहरादून के साइबर अपराध थाना (Cyber Crime Police Station) में शिकायत दी गयी। प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र नबियाल (Devendra Nabiyal) ने बताया कि प्रकरण में अभियोग दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी है।

पुलिस अब उन बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें 73.60 लाख रुपये की धनराशि स्थानांतरित की गयी। इसके साथ ही वीडियो कॉल के लिए उपयोग किये गये मोबाइल नंबरों और फर्जी वॉट्सऐप खातों की भी जांच की जा रही है। पुलिस की जांच में धनराशि के आगे स्थानांतरण और आरोपितों तक पहुंचने के प्रयास किये जा रहे हैं।

साइबर ठगी में शुरुआती समय क्यों महत्वपूर्ण

साइबर ठगी के मामलों में शिकायत जितनी जल्दी दर्ज होती है, धनराशि को रोकने या संबंधित खातों पर कार्रवाई की संभावना उतनी अधिक रहती है। इसी उद्देश्य से उत्तराखंड पुलिस (Uttarakhand Police) की विशेष कार्यबल (Special Task Force-STF) की साइबर टीम ने साइबर एंड डिजिटल इन्वेस्टिगेशन पोर्टल हब (Cyber and Digital Investigation Portal Hub) तैयार किया है। cyberportalhub.org पर 41 से अधिक आवश्यक संपर्क और सरकारी पोर्टल के लिंक एक स्थान पर उपलब्ध कराये गये हैं।

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एसएसपी-एसटीएफ अजय सिंह (Ajay Singh) के अनुसार यह सरकारी और आधिकारिक पोर्टल तक पहुंचने का सुरक्षित माध्यम है। विशेषज्ञों के अनुसार साइबर ठगी में किसी जांच एजेंसी के अधिकारी के नाम पर धमकी मिलने, बैंक खाते में धनराशि जमा कराने या जांच के नाम पर व्यक्तिगत जानकारी मांगने की स्थिति में तत्काल सत्यापन और पुलिस को सूचना देना महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में भय के कारण परिवार से बात छिपाना ठगों के लिए स्थिति को और आसान बना सकता है।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हुई यह घटना साइबर अपराध के बदलते तरीकों और तकनीक के माध्यम से पैदा किये जा रहे भय को सामने लाती है। ऐसे में प्रश्न यह है कि यदि परिवार के सदस्य समय रहते व्यवहार में आये बदलाव को पहचान लें और तत्काल पुलिस को सूचना दें तो क्या इस तरह की बड़ी धनराशि की ठगी को रोका जा सकता है।

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