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हाईकोर्ट में यूसीसी और हल्द्वानी रामलीला मैदान शुद्धिकरण के मामलों में सुनवाई, सांसद के आदेश के चार दिन बाद भी केवल तीन छोटे टैंकर पहुँचने से नाराजगी और बलियानाला के पास पहाड़ी में बढ़ रहीं गहरी दरारें

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हाईकोर्ट में यूसीसी के खिलाफ दायर 11 याचिकाओं पर सुनवाई टली, 12 अक्टूबर की तारीख तय

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 सितंबर 2026 (Nainital Court-Problems News 7 Sept,)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के उच्च न्यायालय (High Court) की वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार द्वारा लागू समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) के विरुद्ध दायर 11 जनहित याचिकाओं तथा पीड़ित प्रेमी जोड़ों से संबंधित मामलों पर सोमवार को सुनवाई की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित होने वाले सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) तुषार मेहता के अदालत में पेश न हो पाने के कारण सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य सरकार के अनुरोध को अदालत ने स्वीकार कर लिया। सभी पक्षकारों की सहमति से खंडपीठ ने मामलों की अगली सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की है। अदालत ने तब तक संबंधित सभी पक्षकारों को अपने जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

रामलीला मैदान शुद्धिकरण मामले में हाईकोर्ट ने याचिका निस्तारित की, दो एफआईआर की जानकारी दी

उत्तराखंड (Uttarakhand) के उच्च न्यायालय में हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद सभा स्थल के शुद्धिकरण से जुड़े चर्चित मामले की सोमवार को सुनवाई हुई। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में दो प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई हैं। इनमें एक हल्द्वानी में जबकि दूसरी समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर के आधार पर बेंगलुरु में शून्य (Zero) एफआईआर के रूप में दर्ज हुई है।

सरकार ने अदालत को बताया कि बेंगलुरु में दर्ज शून्य एफआईआर को जांच के लिए हल्द्वानी स्थानांतरित किया जाना है। सरकार की ओर से अदालत को यह भी आश्वस्त किया गया कि पुलिस मामले की जांच करेगी तथा सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाएगा। मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने याचिका को निस्तारित कर दिया।

सांसद के आदेश के चार दिन बाद भी ज्योलीकोट पहुंचे केवल तीन छोटे टैंकर, पेयजल को लेकर नाराजगी

उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल जिले के ज्योलीकोट क्षेत्र में प्रदूषित पेयजल आपूर्ति की शिकायतों के बीच सांसद अजय भट्ट के टैंकरों से पानी उपलब्ध कराने के निर्देश के बावजूद पर्याप्त पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। बताया गया है कि सांसद ने शुक्रवार 4 सितंबर को ज्योलीकोट में टैंकरों से पानी पहुंचाने के निर्देश अधिशासी अभियंता अनीश पिल्लई को दिए थे, लेकिन चार दिन में पूरे क्षेत्र में केवल तीन छोटे टैंकर पानी पहुंच पाया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार को इन टैंकरों से दो बार पानी वितरित किया गया। प्रदूषित पेयजल आपूर्ति को लेकर क्षेत्र के लोगों में विभाग के प्रति पहले से ही नाराजगी है। ऐसे में सांसद के निर्देश के बावजूद पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने से लोगों की परेशानी बनी हुई है। सहायक अभियंता मोहन सिंह रावत ने बताया कि विभाग के पास 35,000 लीटर क्षमता का केवल एक टैंकर है और इसी टैंकर से अन्य क्षेत्रों में भी पानी भेजा जा रहा है।

सीएमओ ने प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा

उत्तराखंड (Uttarakhand) के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से ज्योलीकोट क्षेत्र में जलजनित रोगों की स्थिति को देखते हुए लगातार निगरानी और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसी क्रम में सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. रश्मि पंत ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलीकोट पहुंचकर उपचाराधीन रोगियों का हाल जाना और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।

इसके बाद उन्होंने ज्योलीकोट, वीरभट्टी, सरियाताल और छीड़ा क्षेत्र का भ्रमण कर स्थानीय लोगों से बातचीत की। उन्होंने क्षेत्र में संचालित स्वास्थ्य शिविरों, स्वास्थ्य परीक्षण और जांच की स्थिति की समीक्षा करते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। स्वास्थ्य शिविर में छीड़ा में 20 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिनमें से 14 के रक्त नमूने लिए गए। सरियाताल में 25 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। वहीं ज्योलीकोट में 95 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिनमें से छह को उपचार के लिए भर्ती किया गया।

सीएमओ डॉ. पंत ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमों की नियमित निगरानी जारी रखने तथा संदिग्ध रोगियों की तत्काल जांच एवं उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलीकोट को 24 घंटे खुले रखने के निर्देश दिए गए हैं। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 108 एंबुलेंस की तैनाती भी की गई है। आशा कार्यकर्ता लगातार घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं और लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के साथ आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तथा बचाव के उपायों के प्रति जागरूक कर रही हैं।

बलियानाला के पास पहाड़ी में बढ़ रहीं गहरी दरारें, आलूखेत भूस्खलन से हेलीपैड और भवाली रोड को खतरा

Nainital Court-Problems News 7 Sept,उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल में सिंचाई विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने बलियानाला क्षेत्र के अंतर्गत आलूखेत तथा कृष्णापुर क्षेत्रों का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कृष्णापुर क्षेत्र में पहाड़ी पर लंबी और गहरी दरारें मिलने तथा आलूखेत में हालिया भूस्खलन से आसपास के महत्वपूर्ण क्षेत्रों और आवासीय भवनों को संभावित खतरे की स्थिति सामने आई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार निरीक्षण दल में सिंचाई विभाग नैनीताल के अधिशासी अभियंता डीके सिंह, तहसीलदार नैनीताल अक्षत भट्ट, सहायक अभियंता प्रमोद कुमार पाठक सहित विभाग एवं प्रशासन के अन्य अधिकारी शामिल रहे।

कृष्णापुर में लगातार बढ़ रहीं दरारें

कृष्णापुर क्षेत्र में मोटा पानी के पास पहाड़ी में बलियानाला उपचारात्मक कार्य की सीमा से बाहर अत्यधिक लंबी एवं गहरी दरारें दिखाई दी हैं। अधिकारियों के अनुसार ये दरारें लगातार बढ़ते हुए मुख्य सड़क के समीप तक पहुंच रही हैं। निरीक्षण में यह आशंका सामने आई कि यदि समय रहते इन दरारों का भू-तकनीकी उपचार शुरू नहीं किया गया तो इससे चल रहे बलियानाला भूस्खलन उपचारात्मक प्रोजेक्ट के साथ आसपास की घनी आबादी और वीरभट्टी से कृष्णापुर को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

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आलूखेत में भूस्खलन से हेलीपैड और भवनों को खतरा

आलूखेत क्षेत्र में हालिया भूस्खलन का भी विस्तृत जायजा लिया गया। अधिकारियों के अनुसार यदि भूस्खलन क्षेत्र की तत्काल रोकथाम और स्थिरीकरण का कार्य नहीं किया गया तो इससे कैला खान स्थित हेलीपैड, भवाली रोड और आसपास बने आवासीय भवनों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने कहा कि दोनों क्षेत्रों में स्थिति को नियंत्रित करने और संभावित आपदा को रोकने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाना आवश्यक है। निरीक्षण आख्या के आधार पर उत्तराखंड भूस्खलन प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र (Uttarakhand Landslide Management and Mitigation Centre) से पत्राचार कर तत्काल आगे के तकनीकी सुरक्षा एवं उपचार कार्य कराने की कार्रवाई की जा रही है।

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