खाकी पर दाग की 2 घटनाएं-सात पुलिसकर्मी लाइन हाजिर : पुलिस अभिरक्षा में पीआरडी जवान की मौत और दबिश के दौरान वृद्धा का निधन

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नवीन समाचार, देहरादून/रुद्रपुर, 30 मार्च 2026 (Tarnish-Khaki-Action on Policemen)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के देहरादून (Dehradun) और ऊधम सिंह नगर (Udham Singh Nagar) जनपदों से पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाने वाली दो पृथक दुखद घटनाएँ प्रकाश में आई हैं, जिनमें पुलिस अभिरक्षा (Police Custody) में एक प्रांतीय रक्षक दल (PRD) जवान की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु और दबिश (Raid) के दौरान धक्का-मुक्की से एक वृद्ध महिला के प्राण चले जाने का मामला सामने आया है। इन दोनों प्रकरणों की संवेदनशीलता को देखते हुए शासन और प्रशासन (Administration) में हड़कंप मच गया है, जिसके फलस्वरूप संबंधित थानों के प्रभारियों सहित कुल सात पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर (Removed from active duty) कर दिया गया है।

(Tarnish-Khaki-Action on Policemenवरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (Senior Superintendent of Police) कार्यालय और स्थानीय सूत्रों (Sources) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, देहरादून के रायपुर (Raipur) थाने में शनिवार को एक पीआरडी (PRD) जवान की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। वहीं, ऊधम सिंह नगर के नानकमत्ता (Nanakmatta) क्षेत्र के ग्राम सिद्धा (Siddha) में एक वांछित आरोपित (Accused) की तलाश में गई पुलिस टीम के साथ हुई कथित धक्का-मुक्की के बाद एक वृद्ध महिला सुखदेव कौर (Sukhdev Kaur) की मौत हो गई। दोनों ही मामलों में परिजनों ने पुलिस पर घोर लापरवाही (Negligence) और अमानवीय व्यवहार (Inhuman Behavior) के गंभीर आरोप लगाए हैं।

रायपुर थाना: हवालात में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला शव

(Tarnish-Khaki-Action on Policemen Dehradun PRD Jawan Death | Police Custody Murder Allegationsदेहरादून के लाडपुर (Ladpur) स्थित एक ईंधन केंद्र (Petrol Pump) पर विवाद के उपरांत हिरासत (Detention) में लिए गए पीआरडी जवान सुनील रतूड़ी (45) का शव थाने की हवालात (Lockup) में संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका मिला। पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) जया बलूनी के अनुसार, जवान नशे की स्थिति में था और मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) के अंतर्गत कार्यवाही के दौरान उसने थाने में हंगामा किया था, जिसके कारण उसे हवालात में बंद किया गया था। कुछ समय पश्चात वह बेसुध अवस्था में मिला और राजकीय कोरोनेशन चिकित्सालय (Coronation Hospital) ले जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित (Declared Dead) कर दिया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने इस घटना को अत्यंत गंभीर मानते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate) स्तर की जांच के आदेश दिए हैं। निष्पक्ष अन्वेषण (Investigation) सुनिश्चित करने हेतु रायपुर थाना प्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है। चिकित्सकों के पैनल (Panel of Doctors) द्वारा शव का विच्छेदन (Post-mortem) वीडियोग्राफी (Videography) के मध्य संपन्न कराया गया है, जबकि मृतक की पत्नी ने पुलिस पर मारपीट के आरोप लगाए हैं।

H4 नानकमत्ता: दबिश के दौरान वृद्ध महिला की मृत्यु पर बवाल

दूसरी ओर, ऊधम सिंह नगर जनपद के नानकमत्ता में एक नाबालिग (Minor) कन्या के अपहरण (Abduction) के आरोपित कुलदीप सिंह के गृह पर दबिश देने पहुंची पुलिस टीम विवादों के घेरे में है। परिजनों का आरोप है कि उप-निरीक्षक (Sub-Inspector) सुनील कुमार और अन्य पुलिसकर्मियों ने घर में मौजूद वृद्ध महिला सुखदेव कौर के साथ अभद्रता और धक्का-मुक्की की, जिससे वह मूर्छित होकर गिर पड़ीं। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने इसे ‘नौटंकी’ करार देते हुए सहायता उपलब्ध नहीं कराई, जिससे उपचार में विलंब हुआ और उनकी मृत्यु हो गई।

इस घटना के विरोध में आक्रोशित परिजनों ने शव को थाने के सम्मुख रखकर प्रदर्शन (Protest) किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) भूपेंद्र सिंह धोनी और एसओजी (SOG) प्रभारी को मध्यस्थता हेतु बुलाया गया। एसएसपी ने त्वरित कार्यवाही करते हुए दरोगा सुनील कुमार, मुख्य आरक्षी नवनीत कुमार, लोकेश तिवारी और बबिता रानी को लाइन हाजिर कर दिया है। इस प्रकरण की विस्तृत जांच पुलिस अधीक्षक (रुद्रपुर) को सौंपी गई है।

H4 विधिक निहितार्थ और प्रशासनिक प्रतिक्रिया

इन दोनों प्रकरणों ने पुलिस की छवि और संकट प्रबंधन (Crisis Management) की क्षमताओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या पुलिस अभिरक्षा में किसी व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए? विधि विशेषज्ञों के अनुसार, अभिरक्षा में मृत्यु (Custodial Death) के मामलों में धारा 176 (1A) के तहत अनिवार्य न्यायिक जांच का प्रावधान है। प्रशासन अब इन क्षेत्रों में पुलिस व्यवहार और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुपालन की समीक्षा कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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