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प्रदेश में 2 करोड़, नैनीताल जिले में 16 लाख एवं दक्षिणी कुमाऊँ वृत्त में 5 लाख पौध रोपण का लक्ष्य

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नवीन समाचार, नैनीताल, 05 जून 2020। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यालय में लॉक डाउन के बावजूद शारीरिक दूरी के मानकों का पालन करते हुए जगह-जगह पौधारोपण किया गया। आप आदमी पार्टी के प्रदेश अध्य्ाक्ष एसएस कलेर ने कोरोना लॉकडाउन के चलते अपने निवास स्थान पर बच्चों के साथ जसमेह और जसमेहेर के पौधे लगाये और प्रदेश वासियों को विश्व पर्यावरण दिवस की बधाई दी। साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ ही प्रदेश की जनता को आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा लगाकर और दो वर्ष तक पौधों की सुरक्षा कर प्रदेश में पर्यावरण को सुरक्षित करने में अपना योगदान दे। उन्होंने प्रदेश में जंगलों में अवांछित लोगों और वन माफियों द्वारा वृक्षों का अवैध पतन के लिए सरकार और प्रदेश की जनता के भी जागरूक होने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रदेश में 2 करोड़, नैनीताल जिले में 16 लाख एवं दक्षिणी कुमाऊँ वृत्त में 5 लाख पौधो के रोपण का लक्ष्य
नैनीताल। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को नगर के हनुमानगढी स्थित ईको पार्क में पौध रोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. विवेक पांडेय एवं मुख्य वन संरक्षक, दक्षिणी कुमाऊं वृत्त डॉ. तेजस्विनी अरविंद पाटिल ने पौध रोपण कर किया। डा. पांडेय ने बताया कि इस वर्ष वर्षा काल में पूरे प्रदेश में 2 करोड़ एवं नैनीताल जिले में 16 लाख एवं दक्षिणी कुमाऊँ वृत्त के विभिन्न वन प्रभागों में 5 लाख पौधो के रोपण का लक्ष्य रखा गया है। डीएफओ टीआर बीजूलाल ने बताया कि नैनीताल वन प्रभाग में इस हेतु समस्त तैयारिया कर ली गयी हैैं तथा मानसून प्रारभ होते ही पौधा रोपण का कार्य प्रारम्भ कर दिया जायेगा। नगरएवं हिमालयन बोटेनिकल गार्डन सहित विभिन्न रेंजो में भी पर्यावरण दिवस का आयोजन कर पौध्रोपण तथा सफाई अभियान चलाये गये। इस अवसर पर केसी तिवारी, ममता चन्द, प्रमोद तिवारी, दीपक तिवारी, धरम सिंह बोनाल सहित अनेक वनाधिकारी मौजूद रहे।

अयारपाटा सेवा दल-जय जननी जय भारत ने बारिश के बीच लगाये पौधे
नगर के अयारपाटा क्षेत्र में अयारपाटा सेवा दल व जय जननी जय भारत की टीम ने संयुक्त रूप से नगर में हुई बारिश के बावजूद डीएसबी परिसर के लिंक मार्ग के पास जंगल करीब 20 पौधों का रोपण किया। साथ ही पास के जंगल में सफाई अभियान भी चलाया। अभियान में 5 वर्षीय सुकीर्ति कुंवर, 11 साल की निवेदिता कुंवर, मयंक सिराला, अर्जुन कीर्ति, पवन परिहार, मनोज कुंवर, गोविंद सिराला, सभासद मनोज साह जगाती आदि लोग शामिल हुए।

सरस्वती विहार में भी लगाये गये पौधे
नगर के वीरभट्टी स्थित पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार विद्यालय में इस अवसर पर प्रधानाचार्य नरेंद्र सिंह की अगुवाई में विद्यालय परिसर में तुलसी, रूद्राक्ष, अश्वगंधा आदि औषधीय पौधों को रोपित किया गया। इस दौरान विद्यालय कें आचार्याे ने अपने घरों में पूर्णिमा का दिन होने के नाते हवन-यज्ञ के द्वारा प्रकृति के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। पौधारोण में आरएसएस नैनीताल के जिला प्रचारक मनोज एवं विद्यालय के शैक्षिक प्रभारी उमेश शर्मा, डॉ. माधव प्रसाद त्रिपाठी तथा महेन्द्र बिष्ट भी शामिल रहे।

यह भी पढ़ें : अब 180 किमी दूर यूपी के शहर से नजर आने लगीं नैनीताल और हिमालय की पहाड़ियां

नवीन समाचार, बिजनौर (यूपी) 13 मई 2020। जी हां, लॉक डाउन की वजह से जहां अनेक समस्याएं महसूस की जा रही हैं, वहीँ लॉक डाउन प्रकृति के लिए पुर्नजीवन प्रदान करने वाला साबित हो रहा है। नैनीताल की झील और पहाड़ों से लेकर सुदूर मैदानों तक पर्यावरण इतना साफ हो चुका है कि 180 किमी दूर बिजनौर से नैनीताल और उससे भी कहीं दूर हिमालय के पहाड़ साफ नजर आ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि बीते वर्षों में मौजूदा मई के महीने में एक से दूसरे पहाड़ और शाम होते-होते कुछ मीटर की दूरी तक का नजारा भी वनाग्नि व मैदानी कुहासे की वजह से नजर नहीं आते थे।undefined
लेकिन अब सब कुछ बदला-बदला है। दिल्ली जैसे शहरों से आसमान और उसमें रात्रि में टिमटिमाते तारे नजर आ रहे हैं तो पिछले दिनों पंजाब के जालंधर से हिमालय की धौलधार पर्वत श्रृंखला और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से शिवालिक पर्वत श्रृंखला दिखाई देने लगी दिखाई देने से लोग विस्मय में थे। अब बिजनौर से नैनीताल की पहाड़ियां नजर आने लगी है। लॉकडाउन के बाद से हवा इतनी साफ हो गई है कि अब 200 से 250 किलोमीटर की दूरी के पहाड़ भी नजर आने लगे हैं। बिजनौर के लोगों ने बताया कि यहां से नैनीताल की सड़क से दूरी लगभग 180 किलोमीटर है। उन्होंने ऐसा नजारा इससे पहले कभी नहीं देखा। इससे वे हैरान होने के साथ ही खुश भी हैं। 30 साल के रमेश ने कहा कि उन्हें तो याद नहीं कि इससे पहले उन्हें घर से इस तरह पहाड़ नजर आए हों।undefined

वहीं वैज्ञानिकों की मानें तो लॉकडाउन में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम होने से दोपहर में धूप ज्यादा चमकीली दिख रही है तो सुबह-शाम हल्की सर्दी भी महसूस हो रही है। वातावरण साफ होने से दूर की चीजें भी साफ नजर आने लगी हैं। ऋषिकेश में लॉकडाउन से पहले 24 मार्च और लॉकडाउन के दौरान 18 अप्रैल को जो सैंपल लिए गए, उनमें साफ अंतर आया है। पहले गंगा में ऑक्सीजन की मात्रा 5.20 ग्राम प्रति लीटर थी, जो अब बढ़कर 6.50 ग्राम प्रति लीटर हो गई है। इससे गंगा में जल प्राणियों की संख्या में इजाफा होगा। पानी सिंचाई के लिए उपयुक्त होगा और फसलें रसायनमुक्त होंगी।

यह भी पढ़ें : ‘कोरोना फाइटर’ पर्यावरण मित्रों का विधायक ने माला पहनाकर किया अभिनंदन

NAनवीन समाचार, नैनीताल, 10 अप्रैल 2020। कोरोना विषाणु कोविद-19 की महामारी में जहां लोग संक्रमण के भय से अपने घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं, वहीं अनेक लोग अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों के घर-घर जाकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसी कठिन परिस्थितियों में साफ-सफाई एवं दवाओं के छिड़काव के कार्य में लगे भीमताल नगर पंचायत के पर्यावरण मित्रों को भीमताल विधायक राम सिंह कैड़ा ने शुक्रवार को माला पहनाकर अभिनंदन किया। पर्यावरण मित्रों को विधायक राम सिंह कैड़ा ने शुक्रवार को कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए शहर में दवाओं का छिड़काव कर सैनिटाइजेशन करने के लिए सम्मानित किया। कैड़ा ने कहा कि दिन रात अपनी जान की परवाह किए बिना सफाई कर्मी, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस कर्मी और मीडिया कर्मी लगातार फील्ड में उतरकर अपना संपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को सम्मान करने की बात कहीं।

यह भी पढ़ें : क्या प्रकृति से खिलवाड़ का असर ? धूप के बीच झील में उठे स्थानीय विक्षोभ से क्षेत्र में हुई बर्फबारी

नवीन समाचार, टिहरी, 2 फरवरी 2020। क्या कृत्रिम टिहरी झील वहां के स्थानीय मौसम में भी अचानक बदलाव लाने लगी है ? शनिवार को टिहरी के स्थानीय वासियों ने इसे महसूस किया। लोगों के मुताबिक मौसम सूखा रहने के पूर्वानुमानों को धता बताते हुए शनिवार को टिहरी बांध के ऊपर अचानक स्थानीय विक्षोभ बन गया। इससे परियों के देश कहे जाने वाले खैट व माणिकनाथ क्षेत्र और नई टिहरी में अचानक कुछ बर्फवारी भी हुई। जबकि तापमान आठ से दस डिग्री के आस पास रहा होगा। यह सब तब हुआ जब मौसम विभाग ने पांच फरवरी तक मौसम सूखा बताया है। रानीचौरी स्थित विश्वविद्यालय की साप्ताहिक एडवाइजरी में भी स्थानीय स्तर पर मौसम सूखा ही बताया गया था।
टिहरी निवासी वरिष्ठ पत्रकार महिपाल नेगी के मुताबिक कभी भूगोल में स्थानीय विक्षोभ के बारे में पढ़ते थे। टिहरी बांध की झील के ऊपर 10-12 वर्ग किमी के दायरे में आज दोपहर बाद ये नजारा देखा। एक घंटे में मौसम अचानक बदल गया। एकदम डरावना। बूंदाबांदी और बर्फवारी। साल भर में दो-तीन बार ऐसा होता है। हालांकि प्रायः स्थानीय लोग इस तरफ ध्यान नहीं देते। उनका कहना है कि टिहरी बांध की कुछ पर्यावरणीय रिपोर्ट में भी इस तरह के विक्षोभ झील क्षेत्र में कभी कभार बनने की बात कही गई हैं। मौसम वैज्ञानिकों के लिए यह महत्वपूर्ण अध्ययन बन जाता है। हालांकि इसका पूर्वानुमान भी अक्सर नहीं हो पाता है। बता दें कि 30 दिसंबर 2013 को ‘राष्ट्रीय सहारा’ समाचार पत्र ने भी टिहरी झील से स्थानीय पर्यावरण व मौसम पर पड़ने वाले असर की आशंका को लेकर ‘बादल फटने की घटनाओं के पीछे टिहरी झील !’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था, जिसमें कहा गया था कि टिहरी झील से स्थानीय मौसम में होने वाले बदलाव का अध्ययन जरूरी है। बता दें कि बड़े जलाशयों के कारण इकट्ठा होने वाले पानी के कारण जमीन पर पड़ने वाले दबाव से स्थानीय स्तर पर भूकंप की भी संभावना जताते हैं।

यह भी पढ़ें : पंचेश्वर बांध: ‘न्यू इंडिया’ से पहले ही टूट रही है ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ की अवधारणा!

-बड़े बांधों की जगह छोटे-छोटे बांधों को बताया जा रहा सुरक्षित व उपयोगी
नवीन जोशी, नैनीताल। अंग्रेजी हुकूमत के साथ ही आजादी के बाद भी बांधों को ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहा गया था। बताया जाता है कि 1954 में जवाहर लाल नेहरू ने पंचेश्वर बांध की परिकल्पना ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ की इसी अवधारणा के तहत ही की गयी थी। लेकिन आजादी के 70 वर्षों के बाद उत्तराखंड के टिहरी में 260.5 मीटर ऊंचा बांध बनने के साथ ही इस अवधारणा पर बड़े प्रश्न उठे और अनेक लोगों की शहादत के बावजूद यह बांध बन कर रहा। अब कुमाऊं मंडल में दुनिया का सबसे ऊंचा 315 मीटर ऊंचा पंचेश्वर बांध के निर्माण की सुगबुगाहट शुरू हुई है, तो लगता है कि ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ की अवधारणा भी टूट चुकी है। क्षेत्रीय लोग आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘न्यू इंडिया’ का आह्वान किये जा रहे दौर में बड़े बांधों को विकास नहीं विनास का आधार बता रहे हैं और विकास का अर्थ केवल अपनी जरूरतों की सड़क, स्कूल, अस्पताल व बिजली आदि सुविधाओं में ही देख रहे हैं। बड़े बांधों की जगह छोटे-छोटे बांधों को सुरक्षित व उपयोगी बताया जा रहा है। बता दें नेपाल और भारत सरकार के सहयोग से बनने जा रहे पंचेश्वर बांध को उत्तराखंड़ के लिए बेहद खास बताते हुए पीएम मोदी ने अपने उत्तराखंड़ दौरे में इसका जिक्र किया था। यह बांध बनकर तैयार हो गया तो यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध होगा। अभी शंघाई स्थित थ्री जॉर्ज्स डैम दुनिया का सबसे बड़ा बांध है।

बनने से पहले ही माओवादी साजिश, बुद्धिजीवी सहयोगियों के बाबत भी हुए हैं  खुलासे  :

चोरगलिया से पकड़े गए कथित माओवादी

नैनीताल पुलिस ने माओवादियों को पकड़ने के लिए बनाई गई विशेष टास्क फ़ोर्स-एसओटीएफ की मदद से दो कथित माओवादियों-भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी-लेनिनवादी)के पूर्वी रीजनल ग्रुप केप्रमुख देवेन्द्र चम्यालऔर उसकी साथी भगवती बिष्ट को चोरगलिया क्षेत्र से गिरफ्तार करने में सफलता पायी है। बताया गया है कि उसने आईबी और इंटेलीजेंस विभाग के अधिकारीयों को पूछताछ के दौरान कई सनसनीखेज खुलासे किये हैं। जिनके अनुसार माओवादी भारत सरकार और नेपाल के सहयोग से बनने जा रहे बहुप्रतिक्षित पंचेश्वर बांध के विरोध करने की द्विस्तरीय योजना बनाई गई थी। योजना के तहत पहले चरण में बुद्धिजीवी वर्ग से आने वाले सहयोगियों को वैचारिक तौर पर बाँध के विरोध में माहौल बनाने का कार्य सौंपा गया था, जबकि दूसरे चरण में चम्याल और उसके साथियों को ‘एक्शन’ करना था। 

बताया गया है कि पुलिस पूछताछ में चम्याल ने  माओवादी विचारधारा को ज्यादा से ज्यादा फैलाने के लिए फरवरी 2017 में नैनीताल जिले के धारी क्षेत्र में तहसील, ब्लाक आदि क्षेत्रों के साथ ही भवाली तथा अल्मोडा जिले के सोमेश्वर, चनौदा, लोद, द्वाराहाट व बग्वालीपोखर आदि क्षेत्रों में माओवादी पम्पलेट, पोस्टर , झंडे और दीवारों पर पेंटिग व माओवादी नारों के पोस्टर लगाने सहित कई अन्य घटनाओं में अपनी संलिप्तता तथा माओवादी खीम सिंह बोरा और भाष्कर पांडेय से संपर्क होने की बात स्वीकार की है। डीजीपी अनिल रतूड़ी ने पुलिस टीम को 20 हजार रुपये के इनाम एवं माओवादियों की गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एसओटीएफ के कांस्टेबल को पुलिस पदक प्रदान कए जाने की घोषणा की है । साथ ही उसने झारखंड़ में चार सालों तक माओवादियों के साथ ट्रेनिंग लेने और उनके अभियान में बढचढ कर भाग लेने की बात भी स्वीकार की है।

पकड़े गये माओवादियों के विषय में जानकारी देते कुमाऊं डीआईजी पूरन सिंह रावत और एसएसपी जन्मेजय खंडूरी ने कहा कि यह माओवादी के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान में एक बहुत बड़ी सफलता है तथा इससे माओवादियों के हौसले पस्त होने के साथ साथ उनकी कमर टूट जायेगी । बताया गया है कि वह पूर्व में नैनीताल पुलिस द्वारा चोरगलिया के निकट हंसपुर खत्ता के जंगल में चल रहे माओवादी कैंप के खुलासे से पहले यहीं था, और छापे के दौरान फरार हो गया था ।

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प्रस्तावित पंचेश्वर बांध पिथौरागढ़ जिले में पंचेश्वर से ढाई किमी नीचे महाकाली नदी पर बनने जा रहा है। इसके जरिये पिथौरागढ़ जिले के बांध स्थल से 80 किमी दूर जौलजीबी के किमखोला और अल्मोड़ा जिले के पनार तक 11,600 हैक्टेयर क्षेत्र में झील बन जाएगी। बांध का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा उत्पादन बताया गया है। इससे प्राप्त होने वाली 4800 मेगावाट बिजली का आधा-आधा हिस्सा भारत एवं नेपाल को मिलेगा। जबकि इससे 25 किमी नीचे तामली के पास रूपालीगाड़ परबनने वाले 95 मीटर ऊंचे रिरेगुलेटिंग यानी सुरक्षात्मक बांध पर बनने वाले दो पावर हाउसों से 240 मेगावाट बिजली बनेगी, और दोनों देशों में बराबर बंटेगी। इस विशालकाय परियोजना के लिये उत्तराखंड के चंपावत, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिलों की 3735.8 हैक्टेयर निजी, 2422.5 हैक्टेयर वन भूमि और 2941.7 हैक्टेयर सरकारी यानी कुल 9100 हैक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इससे पिथौरागढ़ जिले के 87, चंपावत के 26 व अल्मोड़ा के 21 गांवों के 31,023 परिवार प्रभावित होंगे। बताया कि इससे बनने वाली झील में 123 गांवों के 1283 परिवारों के घर व जमीनें दोनों जलमग्न हो जाएंगी, लिहाजा वे पूरी तरह से विस्थापित हो जाएंगे, जबकि 28,153 परिवारों की जमीनों के साथ ही 94 मंदिर, 21 पंचायत भवन, 43 सरकारी स्कूल, पांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रव 44 पानी के टेंक भी डूब जाएंगे।

आगामी 28 नवंबर को 1977 के निर्णायक वनांदोलन के 40 वर्ष पूरे होने के दिन हो सकता है बड़े आंदोलन का ऐलान

नैनीताल। सरोवरनगरी में प्रदेश के दिवंगत जनकवि गिरीश तिवारी ‘गिरदा’ की सातवीं पुण्य तिथि के मौके पर कुमाऊं मंडल में प्रस्तावित ‘विश्व के दूसरे नंबर के सबसे ऊंचे’ पंचेश्वर बांध पर गंभीर विमर्श किया गया। इस दौरान प्रस्तावित बांध के डूब क्षेत्र के निवासियों की ओर से डा. अनिल कार्की एवं अन्य ने इस मौके पर वीडियो फिल्म के माध्यम से प्रस्तावित बांध से क्षेत्र में लोगों की आजीविका, खेती आदि के साथ ही पारिस्थितिकी, जैव विविधता व अन्य खतरों को रेखांकित किया। जबकि पद्मश्री पुरस्कार लौटा चुके क्षेत्र के अध्येता डा. शेखर पाठक ने अब तक इस संबंध में हुए कार्य और विरोध को बहुत हल्का बताते हुए कहा कि इस संबंध में बहुत अधिक कार्य किये जाने की जरूरत है। इस विषय पर भूवैज्ञानिकों, जल विद्यान, समाज शास्त्र एवं अन्य संबंधित विविध विषयों पर समन्वित तौर पर अध्ययन कर तर्कों को सामने लाकर बड़ा संघर्ष करने का इशारा किया। बताया कि इस मुद्दे पर आगामी 28 नवंबर को 1977 में हुए निर्णायक वनांदोलन के 40 वर्ष पूर्ण होने के मौके पर बड़े स्तर पर विमर्श और कोई ऐलान किया जा सकता है।

रेल के सपने का क्या :  उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी रैली में पीएम नरेंद्र मोदी ने पंचेश्वर बांध का जिक्र करते हुए कहा था कि इससे मिलने वाली बिजली से न सिर्फ उत्तराखंड को फायदा होगा बल्कि भारत के दूसरे इलाकों में भी अंधेरा दूर करने में मदद मिलेगी। हालांकि इस पर भी लोग चर्चा कर रहे हैं कि अगर बांध बना तो पहाड़ों में रेल आने का सपना महज सपना रह जाएगा क्योंकि दशकों से जिस टनकपुर-बागेश्वर रेलवे लाइन की मांग हो रही है और जिसका सर्वे 1922 में ही हो गया था, वह पूरा इलाका डूब क्षेत्र में आ जाएगा।
मगर बिजली पानी का फायदा : पंचेश्वर और रुपाली गाड़ बांध बन जाने से 5 हजार मेगावॉट से ज्यादा बिजली पैदा होगी। इसमें से 13 फीसदी बिजली उत्तराखंड को मुफ्त मिलेगी। सिंचाई के लिए इतना पानी मिलेगा जिससे 16 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेगी। सिंचाई का पानी यूपी को भी मिलेगा और नेपाल को भी। विदेश नीति की दृष्टि से भी यह बांध भारत को फायदा पहुंचाएगा। इसके जरिए नेपाल भारत के और करीब आएगा। कुछ वक्त पहले नेपाल में चले मधेसी आंदोलन के दौरान नेपाल में भारत के खिलाफ गुस्सा दिखा था लेकिन इस बांध के जरिए भारत-नेपाल की दोस्ती और मजबूत हो सकेगी।
पुनर्वास का प्रावधान नहीं 
बताया जा रहा है कि बांध की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में प्रभावितों के लिए पुनर्वास में जमीन या मकान देने का प्रावधान नहीं है।जबकि उत्तराखंड क्रांति दल नेता काशी सिंह ऐरी का कहना है कि प्रभावितों के लिए 6 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर जमीन का प्रावधान रखा है साथ ही प्रति मकान दो लाख रुपये का प्रावधान है। पहाड़ों में किसी के पास एक हेक्टेयर जमीन नहीं होती है। किसी के पास बहुत ज्यादा है तो भी वह आधी हेक्टेयर ही होगी। ऐसे में जमीन और मकान डूबने पर उन्हें 4-5 लाख रुपये ही मिलेंगे। इस राशि से कैसे कोई दूसरी जगह बस सकता है। जिनका सबकुछ चला जाएगा उनके पुर्नवास का ठोस इंतजाम हो।
भूस्खलन झेलेगा कुमाऊं : पर्यावरणविदों का कहना है कि जब अमेरिका जैसे देश पर्यावरणीय दुष्प्रभावों और नुकसान को देखते हुए बड़े बांधों को तोड़ रहे हैं तो यहां इतना बड़ा बांध बनाने की क्या जरूरत। माटू संगठन के विमल भाई ने कहा कि टिहरी बांध बनने के 10 साल बाद भी लोगों का पुनर्वास सही से नहीं हो पाया। टिहरी की झील लगातार फैल रही है और भूस्खलन बढ़ा है। यह हिस्सा मध्य हिमालय का वह हिस्सा है जो अभी भी बनने के दौर में है। यहां जितनी बड़ी झील बनेगी उससे कुमाऊं का मौसम चक्र बदलेगा। लोकल मॉनसून भी यहां बनेगा और साल भर बारिश होने से लोगों को साल भर भूस्खलन का दंश झेलना होगा।
जन सुनवाई की प्रक्रिया गलत : स्थानीय लोग इस बात का विरोध कर रहे हैं कि जनसुनवाई की सूचना प्रभावित इलाकों तक सही से नहीं पहुंचाई गई। ‘महाकाली की आवाज’ संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत ने कहा कि जनसुनवाई सिर्फ तीनों जिला मुख्यालय में रखी गई है। इसके लिए वक्त भी गलत चुना गया है। इस मौसम में कई गांवों का संपर्क ही कट जाता है। भूस्खलन हो रहा है और यातायत प्रभावित है। ऐसे में गांव वालों के लिए जिला मुख्यालय पहुंचना असंभव है। जिला मुख्यालय आने में गांव वालों के दो-तीन दिन बर्बाद होते हैं इसलिए जनसुनवाई ग्रामपंचायत स्तर पर होनी चाहिए।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड
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