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घर के कचरे से तैयार सजावटी उत्पादों की प्रदर्शनी ने मन मोहा

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डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 3 अक्टूबर 2021। महात्मा गांधी जी की जयंती के उपलक्ष्य में शहरी विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा ‘स्वच्छ भारत मिशन’ एवं ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अंतर्गत घरों से निकलने वाले कचरे को रिसाइकिल करके उसका सदुपयोग कर तैयार किए गए सुंदर सजावटी उत्पादों की नगर पालिका के सभागार में प्रदर्शनी लगाई गई।

बताया गया कि सूखाताल वार्ड कीसभासद गजाला कमाल के प्रेरणा से इस मुहिम में 90 से अधिक बच्चों द्वारा इधर-उधर पड़े और घर से निकले सिंगल यूज प्लास्टिक को खाली बोतलों में भरकर रखने और एक स्थान पर जमा करने की मुहिम पिछले 5 महीनों से चल रही है। इन बोतलों से ही हिलदारी टीम के सदस्यों ने प्लांट गार्ड, पेन स्टैंड, फ्लावर प्लांटर, बैठने के स्टूल आदि खूबसूरत सामान बनाए और कार्यक्रम में उपस्थित अधिशासी अधिकारी अशोक कुमार वर्मा, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ धर्मशत्तू, सफाई निरीक्षक कुलदीप कुमार, सभासद मोहन नेगी, पुष्कर बोरा व सागर आर्या को उपहार स्वरूप दिए गए।

कार्यशाला में करीब 75 बच्चों ने इंडोर खेल और भाषण प्रतियोगिता व स्वच्छता आदि विषयों पर विचार गोष्ठी में प्रतिभाग किया। साथ ही नेस्ले समर्थित हिलदारी संस्था, मोनाल स्वयं सहायता समूह व शिव शक्ति स्वयं सहायता समूह आदि के द्वारा घर के कचरे से तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी कर यह संदेश दिया गया कि कचरे से काफी उपयोगी उत्पाद बन सकते हैं। आयोजन में नगर पालिका परिषद के हरीश मेलकानी, हिलदारी के शक्ति मिश्रा, लुबना, इशरत, संजय, रूबी आदि शामिल हुए और स्कूली बच्चों और हिलदारी टीम द्वारा किए जा रहे स्वच्छता संबंधी प्रयासों को सराहा।

यह भी पढ़ें : ऋषि गंगा और तपोवन-विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजनाओं पर रोक की याचिकाएं खारिज, याचियों पर 50 हजार जुर्माना

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 14 जुलाई 2021। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने चमोली जनपद में ऋषि गंगा और तपोवन-विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजनाओं के लिए वन और पर्यावरण मंजूरी रद्द करने और चमोली जिले में चिपको आंदोलन की नेतृत्वकर्ता गौरा देवी के रैणी गांव के पुनर्वास की मांग करने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही 5 याचिकाकर्ता पर दस-दस यानी कुल 50 हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए यह धनराशि अधिवक्ता कल्याण कोष में जमा करने का आदेश पारित किया है।

रैणी गांव के संग्राम सिंह, सोहन सिंह, भवन राणा तथा जोशीमठ के अतुल सती व कमल रतूणी की जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई के दौरान एनटीपीसी के अधिवक्ता डॉ. कार्तिकेय हरि गुप्ता ने अदालत से कहा कि अत्यधिक महत्व की ऐसी परियोजनाओं को केवल शिकायतों पर नहीं रोका जा सकता है। याचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी ईमानदारी दिखाने में विफल रहे है। जिसके बाद न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाते हुए याचिका को खारिज कर दिया है। डॉ गुप्ता ने कहा कि तपोवन विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजना उत्तराखंड राज्य और एनटीपीसी के लिए अत्यधिक महत्व की है। प्रोजेक्ट हमेशा पर्यावरणीय मंजूरी के साथ काम करता है। पहाड़ियों के सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : पर्यावरण संरक्षण में हिमालय की भूमिका अहम…. ‘इको सिस्टम रेस्टोरेशन’ विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का हुआ आयोजन

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 06 जून 2021। कुमाऊँ विश्वविद्यालय नैनीताल के ‘शोध एवं प्रसार राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ, डीएसबी परिसर नैनीताल के इग्नू केंद्र, डॉ. वाईपीएस पांगती फॉउंडेशन, एमएसडीसी तथा कुमाऊं विश्विद्यालय शिक्षक संघ-कूटा द्वारा ‘इको सिस्टम रेस्टोरेशन’ विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया किया। इस अवसर पर कार्यक्रम के संरक्षक एवं कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके जोशी ने हिमालय को संरक्षित रखने को प्राथमिकता देने की आवश्यकता जताते हुए कहा कि हिमालय हमारी अनमोल धरोहर है, पर्यावरण संरक्षण में इसकी भूमिका अहम है।

मुख्य अतिथि इग्नू के पूर्व कुलपति प्रो. नागेश्वर राव ने कहा कि प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करने की बात कही। उन्होंने मौजूदा कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी को पर्यावरण के गिरते स्तर का प्रतिमान बताया और हिमालयी क्षेत्र को पर्यावरणीय दृष्टि से समृद्ध बनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के सूत्रधार प्रो. जीएस रावत ने परिस्थितिक तंत्र का अधिक अध्ययन करने तथा उससे सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता जताई। वहीं, गढवाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने आर्थिकी को जंगल से संरक्षित करने वाले नजरिए से देखने, हिमालय को बचाने के लिए सख्त सरकारी नियम बनाने व वनाग्नि को रोकने पर प्राथमिकता से कार्य करने की आवश्यकता जताई। प्यूपिल साईंस इन्सटीयूट देहरादून के निदेशक डा. रवि चोपडा, मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजस्वनी पाटिल व प्रो गोपाल रावत ने भी विचार रखे। प्रो. गिरीश रंजन तिवारी ने सभी व्याख्याताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजन में डॉ. आशीष तिवारी, डॉ. गीता तिवारी, डॉ. महेश आर्या, डॉ. विजय कुमार, डॉ. नवीन पांडे, डॉ. नंदन मेहरा, दीक्षा बोरा, गीतांजलि, डॉ. हर्षवर्धन चौहान, वसुंधरा लोधियाल आदि ने तकनीकी सहयोग दिया। वेबिनार में प्रो. अनिल जोशी, प्रो. ओमप्रकाश प्रो. चित्रा पांडे, डॉ. भावना कर्नाटक, डॉ. नीता आर्या, डॉ. श्रुति साह, डॉ. भावना तिवारी डॉशशि बाला उनियाल,प्रो पी सीतिवारी, डॉ आशा रानी, डॉ मनोज उपाध्याय, डॉ. महेंद्र राणा, डॉ. दीपाक्षी जोशी, डॉ. सुरेश पांडे, डॉ. हरीश अंडोला, रक्षिता पाठक, दिव्या उप्रेती, नेहा चोपड़ा, हिमानी वर्मा सहित 96 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

यह भी पढ़ें : दुनिया भर के प्रदूषण से सर्वाधिक प्रभावित हो रहा है हिमालय, विश्व पर्यावरण दिवस पर नैनीताल में हुए अनेक कार्यक्रम…

-एरीज में विश्व पर्यावरण दिवस पर हुआ जलवायु परिवर्तन पर व्याख्यान, अनेक अन्य कार्यक्रम भी हुए
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 05 जून 2021। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सरोवर नगरी नैनीताल में अनेक कार्यक्रम हुए। मुख्यालय स्थित एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान में इस पर मौके पर ‘हिमालय में वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन’ विषय पर एरीज के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनीष नाजा ने भारत की आजादी के 75 साल के अवसर पर आयोजित हो रहे आजादी के अमृत महोत्सव की गतिविधियों के तहत ऑनलाइन व्याख्यान दिया। बताया कि हिमालयी क्षेत्र दुनिया के प्रदूषण से सर्वाधिक प्रभावित हो रहा है। प्रदूषित हवाएं 5 से 15 दिन में पूरी दुनिया का चक्कर लगा लेती हैं, और हिमालय को सर्वाधिक प्रभावित करती हैं। इससे ग्लेशियर पिघल रहे हैं, इसका नुकसान पूरे दक्षिण एशिया में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने ओजोन लेयर को प्रदूषण से पहुंच रहे खतरों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन के कारण ही ‘एक्सट्रीम वैदर’ यानी कहीं अत्यधिक बारिश, कहीं अत्यधिक सूखा, कहीं अत्यधिक सर्दी व कहीं अत्यधिक गर्मी की स्थितियां उत्पन्न हो रही है।

प्रशासन से हिलदारी-ग्रीन आर्मी के साथ चलाया सफाई के लिए बड़ा अभियान
वहीं इस मौके पर जिला प्रशासन, हिलदारी और ग्रीन आर्मी के संयुक्त तत्वाधान में करीब 50 लोगों ने बड़ा सफाई अभियान चलाया गया। इस अभियान के अंतर्गत नगर के वार्ड संख्या 6 नारायण नगर स्थित सत्य नारायण मंदिर के परिसर में वृहत रूप से कचरा एकत्रीकरण किया गया। इस अभियान में एसडीएम प्रतीक जैन, नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी अशोक कुमार वर्मा तथा क्षेत्रीय सभासद भगवत रावत, प्रेमा अधिकारी व गजाला कमाल ने प्रतिभाग किया और स्वयं कूड़ा उठाकर शहर वासियों को जागरूक किया। इस सफाई अभियान में ने भाग लिया और लगभग 700 किलोग्राम सूखे कूड़े का निस्तारण किया। इस दौरान एसडीएम जैन ने नगर वासियों से अपने आसपास कचरा न फेंकने व दूसरों को भी न फेंकने देने की अपील की। अभियान में हिलदारी के प्रोजेक्ट लीड बृज तिवारी, शक्ति मिश्रा व सुरेंद्र, बबलू, सचिन, रोहित, ग्रीन आर्मी के जय, अजय, गोविंद, राजेन्द्र आदि शामिल रहे।

डीएसबी परिसर में एनसीसी कैडेटों-अभाविप कार्यकर्ताओं ने किया पौधरोपण
उधर, नगर के डीएसबी परिसर में 79 यूके एनसीसी बटालियन के कैडेट छात्र छात्राओं द्वारा अपने घरों के आसपास पद्म प्रजाति के देव वृक्ष पय्या एवं नीबू, आड़ू व खुमानी आदि के फलदार पौधों का रोपण किया। वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की नैनीताल इकाई द्वारा इस मौके पर भू विज्ञान विभाग के पास पानगढ़, किल्मोड़ा, बाँज व च्यूरा आदि के पौधों का रोपण किया गया और पौधरोपण को पर्यावरण के साथ ही जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। अभियान में परिषद के कुमाऊँ संयोजक अभिषेक मेहरा, छात्रसंघ अध्यक्ष विशाल वर्मा, धीरज कुमार, तुषार, गजेंद्र खारी सुनील ढाली व कविता आदि कार्यकर्ता शामिल रहे।

राजनीति विज्ञान विभाग में हुआ जागरूकता क्विज का आयोजन
वहीं कुमाऊं विवि के राजनीति विज्ञान विभाग एवं महिला अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वाधान में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो.नीता बोरा शर्मा के संयोजन में पर्यावरण जागरूकता क्विज का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 800 प्रतिभागियो ने भाग लिया। इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को ई-सार्टिफिकेट दिये गए। आयोजन में डा. हृदयेश कुमार ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया। कार्यक्रम में प्रो.मधुरेंद्र कुमार, प्रो कल्पना अग्रहरि, डा. हृदयेश शर्मा आदि ने सभी प्रतिभागियों को प्रतिभाग करने एवं सफलता प्राप्ति पर बधाई प्रदान की।

‘हिमालय: जीवन और जीविका का संपोषक’ विषय पर हुआ राष्ट्रीय वेबीनार
स्पर्श गंगा अभियान के तहत कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल तथा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर के संयुक्त तत्वावधान में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ‘हिमालय: जीवन और जीविका का संपोषक’ विषय पर राष्ट्रीय वेबनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के शिक्षा मंत्री तथा स्पर्श गंगा अभियान के प्रणेता एवं संरक्षक डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक का संदेश उनकी अस्वस्थता के कारण उनके शिक्षा सलाहकार डॉ. राजेश नैथानी द्वारा पढ़ा गया। जिसमें कहा गया कि हिमालय का संरक्षण उसके स्पर्श हिमनदों, स्पर्श गंगाओं, स्पर्श वन, स्पर्श जैव जगत, स्पर्श गाँव और शहर, स्पर्श देवी-देवता तथा स्पर्श तटों पर रहने वाली करोडो-करोड़ स्पर्श जनता के जीवन और जीविका तथा उनके स्पर्श समाज एवं स्पर्श संस्कृति के संरक्षण के बिना संभव नहीं हो सकता। संगोष्ठी में कुमाऊं विवि के कुलपति, प्रो. एनके जोशी, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित गढ़वाल विवि के कुलपति प्रो. अन्नपूर्ण नौटियाल, प्रसिद्ध इतिहासकार एवं पर्यावरणविद प्रो. अजय रावत, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के प्रो. पीआर व्यास, हिमालयीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी पचौरी, मिजोरम विश्वविद्यालय आयजोल के भूगोलवेता प्रो. वीपी सती, स्पर्श गंगा अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. अतुल जोशी, राष्ट्रीय संयोजक आरुशी निशंक व समन्वयक प्रो. प्रभाकर बडोनी आदि ने विचार रखे। संगोष्ठी में प्रो. सविता मोहन, प्रो. सुषमा मिश्र, प्रो. केसी पुरोहित, प्रो.जीसी जोशी, डॉ. सर्वेश उनियाल, प्रो. बीआर पंत, प्रो. एलएस बिष्ट, प्रो.सीएस जोशी, रीता चमोली सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं शोध छात्र शामिल रहे।

चिड़ियाघर में भी हुआ पौधरोपण व चित्रकला प्रतियोगिता
वहीं मुख्यालय स्थित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान में वन क्षेत्राधिकाारी अजय रावत की अगुवाई में पौधारोपण तथा ऑनलाइन चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। अभियान में डॉ. हिमांशु पांगती, दीपक तिवारी, धरम सिंह बोनाल, पुष्कर मेहरा, महेश बोरा, खजान मिश्रा, राजेन्द्र जोशी, आनंद सिंह, विक्रम मेहरा सहित अन्य कर्मचारी भी शामिल रहे। बताया गया कि ऑन-लाईन चित्रकला प्रतियोगिता का परिणाम आगामी 11 जून को घोषित किया जाएगा।

यह भी पढ़ें : भारत व हिमालय में है समृद्ध जैव विविधता : प्रो. तिवारी

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 मई 2021। कुमाऊं विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्राध्यापक एवं शोध निदेशक प्रो. ललित तिवारी ने अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर बताया कि यह दिवस हर वर्ष 22 मई को मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम ‘वी आर पार्ट ऑफ सोल्यूशन’ रखी गई है। 22 मई 1992 को जैव विविधता सम्मेलन में इस दिवस को मनाने का निर्णय हुआ और संयुक्त राष्ट्र ने इसे घोषित किया ताकि जैव संसाधन भविष्य के लिए संरक्षित रखे जा सके। 196 देशों ने मिलकर इस का संकल्प लिया। 2021 की विश्व में जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए कैसे आगे बढ़े ?
उन्होंने कहा कि जैव विविधता प्रकृति का अभिन्न अंग है। मानव का जीवन बगैर जैव विविधता संभव नहीं है। बताया कि हिमालय जैव विविधता का हॉटस्पॉट है। 16 फीसद भारतीय वनस्पतियां एवं जीव, 32 फीसद जंगल, 100 फीसद अल्पाइन क्षेत्र तथा 456 दुर्लभ वनस्पतियां यही होती है। पृथ्वी में ऑक्सीजन देने का कार्य ट्रॉपिकल रेनफॉरेस्ट सर्वाधिक करते हैं, वर्षा जंगल 20 फीसद ऑक्सीजन देते हैं तथा अमेजन सबसे बड़ा रेनफॉरेस्ट विश्व में है जो 2.2 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड सोखती है इन्हीं वर्षा वनों में पूरे विश्व के अधिकांश जानवर तथा पेड़ो की प्रजातियां निवास करती है। जैव विविधता शब्द की खोज ईओ विल्सन ने की। अब तक 17.5 लाख प्रजातियां ज्ञात हो चुकी है, किंतु अनुमान है कि 5 से 15 मिलियन या 100 मिलियन तक प्रजातियां हो सकती है। उत्तराखंड में 65 फीसद भाग वनाच्छादित है, जबकि भारत में 20.55 फीसद ही है। बताया कि पिथौरागढ जिले में 2316, पौड़ी में 2150 तथा चमोली जिले में 2316 पौधों की प्रजातियां मिलती है। भारतीय हिमालय क्षेत्र के औषधि पौधे 1748 में से उत्तराखंड में 701 प्रजातियां मिलती हैं। आज के कोविड-19 काल में भी अश्वगंधा, अदरक, काली मिर्च, दालचीनी, तुलसी, आंवला, नींबू, हल्दी, नीम, एलोवेरा हमारी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा रही हैं।

यह भी पढ़ें : कोटाबाग में मदहोश करने वाली खुशबू व रात्रि में खिलने वाला फूल बना कौतूहल…

-पिछले दो दिन से रात्रि नौ से 12 बजे तक खिल रहे हैं मदहोश करने वाली खुशबू बिखेरते फूल
नवीन समाचार, नैनीताल, 18 मई 2021। नैनीताल जनपद के कोटाबाग में दो महिलाओं के घरों में पिछले दो दिनों से रात्रि में खिल कर मदहोश करने वाली खुशबू बिखेर रहे फूल कौतूहल का विषय बने हुए हैं। यह फूल रात्रि 9 से 12 बजे के बीच ही खिल रहे हैं। इन फूलों की खुशबू ऐसी है कि इन्हें कमरे के भीतर रखने पर महकती खुशबू के साथ रह पाना मुश्किल है। इस आधार पर इनके ब्रह्म कमल की कम ऊंचाई के स्थानों पर भी उगने व खिलने वाली प्रजाति होने का भी दावा किया जा रहा था। लेकिन वनस्पतिशास्त्रियों ने इससे इंकार कर दिया है। कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. ललित तिवारी ने कहा कि यह फूल सौसूरिया ओबवाल्टा प्रजाति के ब्रह्मकमल के नहीं, बल्कि हिंदी में गुल बकावली व अंग्रेजी में नाइट क्वीन व गारलेंड लिली कहे जाने वाले कैक्टस इपिफाइलम ऑक्सीपेटालम कैक्टासिया के हो सकते हैं। इस बारे में और जानकारी ली जाएगी।
क्षेत्र के गांव आंवलाकोट निवासी कल्पना सनवाल ने बताया कि सिडकुल रुद्रपुर में कार्यरत उनके जेठ हिमांशु सनवाल दो वर्ष पूर्व 2019 में हल्द्वानी से इस पौधे का एक पत्ता लाए थे। जिसे उन्होंने कैक्टस की तरह गमले में रोपा। इससे ही पौधा उगा। इस पौधे में गत वर्ष जुलाई 2020 में एक फूल खिला था। जबकि इस वर्ष मई माह में ही सोमवार व मंगलवार की रात्रि लगभग नौ बजे के आसपास एक-एक और फूल खिलने लगे और रात्रि लगभग 12 बजे तक खिले रहे। इसकी उनके परिवार के द्वारा पूजा की गई। गांव की ही एक अन्य महिला लीला फुलारा के घर भी इसी दौरान यही फूल खिला है।

यह भी पढ़ें : औषधीय पौधों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई शुरू..

नवीन समाचार, नैनीताल, 06 मार्च 2021। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर नैनीताल में शनिवार को ‘स्टेटस एंड ऑपर्च्युनिटी इन मेडिकल प्लांट रिसर्च एंड नेचुरल प्रोडक्ट्स’ विषय पर शोध एवं प्रसार निदेशालय के तत्वावधान में यूकॉस्ट के सहयोग से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई। संगोष्ठी के प्रथम दिन उदघाटन सत्र में भारत रत्न गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल अल्मोड़ा के निदेशक प्रो. रणवीर सिंह रावल ने औषधीय पौधों के महत्व, हिमालयी क्षेत्र में पैदा होने वाले विभिन्न प्रजातियों के औषधीय पौधों की उपयोगिता एवं उसके व्यवसायिक एवं रोजगार के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की आर्थिकी में औषधीय पौधे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता हैं।

संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. एनके जोशी ने औषधीय पौधों के साथ अपने अनुभवों को साझा किया। राष्ट्रीय पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल अल्मोड़ा के प्रो. आईडी भट्ट ने दूसरे सत्र में औषधीय पौधों के शोध की बारीकियों से शोधार्थियों को अवगत कराया। पंतनगर विश्विविद्यालय के प्रो. ओमप्रकाश, डॉ. संतोष कुमार ने भी विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. ललित तिवारी ने किया। कार्यक्रम में संकायाध्यक्ष प्रो. एससी सती, परिसर निदेशक प्रो. एलएम जोशी, डॉ. संतोष उपाध्याय को शॉल उड़ाकर एवं धूलि अर्घ्य की चौकी प्रतीक चिन्ह के रूप में भेंट कर सम्मानित किया गया। आगे रविवार को युवा शोधार्थी संगोष्ठी में अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। संगोष्ठी में प्रो. अतुल जोशी संकायाध्यक्ष वाणिज्य, प्रो. लता पांडेय, प्रो. एलएस लोधियाल, प्रो. एचसीएस बिष्ट, प्रो. गिरीश रंजन तिवारी, डॉ. नीलू लाेिधयाल, डॉ. सुषमा टम्टा, डॉ. अनिल बिष्ट, डॉ. हर्ष चौहान, डॉ. कपिल खुल्बे, डॉ. गीता तिवारी, डॉ. पेनी जोशी, डॉ. सचेतन साह, डॉ. विजय कुमार, डॉ. महेश आर्या, डॉ. आशीष तिवारी, डॉ. दीपिका गोस्वामी, डॉ. हिमांशु लोहनी, डॉ. नवीन पांडेय, दीपक बिष्ट, शीतल कोरंगा, दिशा पांडेय, पीयूष पांडेय, गीतांजलि उपाध्याय, वसुंधरा लोधियाल, नेहा चोपड़ा डॉ. प्रभा पंत व अंजलि आदि लोग उपस्थित रहे।

यह भी पढ़ें : नैनीताल: कौतूहल बने निष्प्रयोज्य सामग्री से बने नगर में लग रहे कूड़ेदान

-’नेस्ले समर्थित हिलदारी अभियान’ के अंतर्गत नगर में की जा रही है अनूठी पहल

नगर में लगे निष्प्रयोज्य सामग्री से बने कूड़ेदान।

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 मार्च 2021। सरोवर नगरी नैनीताल को साफ और स्वच्छ बनाने हेतु चलाए जा रहे ’नेस्ले समर्थित हिलदारी अभियान’ के अन्तर्गत नगर पालिका क्षेत्र में प्रयोग की जा चुकी निष्प्रयोज्य सामग्री से बने 10 खूबसूरत कूड़ेदान लगवाने की अनूठी पहल की जा रही है। नगर की माल रोड, पुराने बस अड्डे, नगर पालिका कार्यालय, स्टेट बैंक मल्लीताल व तल्लीताल आदि स्थानों पर लगाए जा रहे यह कूड़ेदान स्थानीय नागरिकों के साथ साथ पर्यटकों के लिए भी कौतूहल का विषय बने हुए हैं।
नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी ने इस अनोखे प्रयोग पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस कूड़ेदानों का मकसद लोगों में जागरूकता फैलाना है कि जिस कूड़े को हम फेंक दिया करते हैं, उनका कितना अच्छा उपयोग हो सकता है। वहीं अधिशासी अधिकारी अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि कूड़ा प्रबंधन पर हर एक नागरिक को जागरूक होने की जरूरत है। यह पहल भारत सरकार के ‘वेस्ट टू रिसोर्स’ के नारे को साकार करने की ओर भी एक कदम है। हिलदारी अभियान नैनीताल के प्रोजेक्ट लीड बृज तिवारी ने बताया कि यह 10 कूड़ेदान प्रयोग किए गए करीब 125 किलोग्राम ‘सिंगल यूज मल्टी लेयर प्लास्टिक’ के बने हुए हैं। गौरतलब है कि पूर्व में हिलदारी अभियान के अन्तर्गत शहर में सैलानियों के लिए ऐसी ही निष्प्रयोज्य सामग्री से बनी 17 बैंचें भी लगाई गई हैं।

यह भी पढ़ें : पिरूल से ब्रिकेट बनाने की परियोजना में ग्रामीणों के योगदान को सराहा

नवीन समाचार, नैनीताल, 24 फरवरी 2021। एनएमएचएस यानी नेशनल मिशन फॉर हिमालयन स्टडीज के वैज्ञानिक डा. किरीट कुमार ने बुधवार को भवाली स्थित एक होटल में आयोजित कार्यशाला में श्यामखेत व चोपड़ा ग्रामसभाओं में पिरूल से ब्रिकेट बनाने की परियोजना की समीक्षा की। प्रदेश के अपर प्रमुख वन संरक्षक डॉ. कपिल जोशी व परियोजना समन्वयक केसी सुयाल के समन्वयन में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने ग्रामीणों की इस परियोजना में दिये जा रहे योगदान की प्रशंसा करते हुए उन्हें उपयोगी सुझाव भी दिए। साथ ही दोनों गांवों में जाकर योजना के तहत किए जा रहे कार्यों का स्थलीय निरीक्षण भी किया। इस दौरान ग्रामीणों ने उनका व पंडित गोविंद बल्लभ पंत संस्थान की दीपा वर्मा का अभिनंदन किया। इस मौके पर आईआईटी रुड़की के शोधार्थी गजेंद्र गिरि, फील्ड असिस्टेंट अक्षय पाठक, दीप चंद्र, कृष्ण चंद्र, मोहन सिंह, योजना की सहभागी भगवती सुयाल, भगवती बोरा, विमला देवी, निर्मला आर्या, रेनू आर्या, वंदना जोशी, लीला देवी, गीता जीना, आशा जीना, हेमा गिरि, उमा देवी व प्रेमा देवी आदि लोग मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : प्रो. तिवारी ने औषधीय पौधों पर दिल्ली विश्वविद्यालय में दिया व्याख्यान

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 जनवरी 2021। कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के शोध एवं प्रसार निदेशक प्रो. ललित तिवारी ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के मानव संसाधन एवं विकास केंद्र द्वारा 25 जनवरी से 8 फरवरी तक आयोजित रिफ्रेशर कोर्स में ऑनलाइन व्याख्यान दिया। इस दौरान प्रो. तिवारी ने औषधीय पौधों की जैव विविधता पर जानकारी देते हुए बताया कि विश्व में 5200 औषधीय पौधों की प्रजातियां हैं। वहीं भारतीय हिमालय क्षेत्र में 18,440 प्रजातियां जबकि पूरे भारत में 7500 औषधीय पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं। उत्तराखंड में 701 पौधों की प्रजातियां औषधियां गुण युक्त तथा 250 क्रूड ड्रग प्लांट यहां होते हैं। इस दौरान उन्होंने पहाड़ों पर पाई जाने वाली थुनेर, सतवा, वन अजवाइन, अग्नि, कुठ, हथाजरी, चंद्रवन, नैर बज्रदंती, चूक, अमलताश व हरड़ की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 2051 तक औषधीय पौधों का 5 ट्रिलियन डॉलर का कारोबार होगा, जो प्रतिवर्ष 7 प्रतिवर्ष की वृद्धि दर्शाता है। भारत में 2500 व्यापारिक औषधीय प्रजातीय में से 1587 आयुर्वेद में, सिध्चा में 1128, यूनानी में 503, सोप गिरियां में 253 तथा 192 प्रजातियां पश्चिमी औषधीय तंत्र में प्रयुक्त होती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि विश्व में 5,12,000 मीट्रिक टन हर्बल औषधियों की जरूरत है। ईसबगोल, अश्वगंधा, पीपली, तुलसी, वासा दो हजार से तीन हजार मीट्रिक टन की आवश्यकता है। यह भी बताया कि औषधीय पौधे केवल 22 प्रतिशत ही खेती से मिलते है, शेष 88 प्रतिशत जंगल से प्राप्त होते हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 30 दिसम्बर 2020। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल अल्मोड़ा तथा आईसीआईएमओडी नेपाल के तत्वाधान में चल रही पवित्र कैलाश भू-क्षेत्र संरक्षण एवं विकास पहल परियोजना के अंतर्गत बुधवार को सीमापारीय जैव-विविधता प्रबंधन पर भारत और नेपाल के बीच एक साझा मंच तैयार करने के उद्देश्य एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार की शुरूआत में संस्थान के निदेशक डॉ. आरएस रावल ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए जैव विविधता प्रबंधन पर सीमापारीय मंच को बनाने की बात को एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होने कहा कि विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाना ही एक मात्र उद्देश्य है। जिससे कि इस भू-क्षेत्र की जैव-विविधता को बचाया जा सके।
पर्यावरण संस्थान के डॉ रविन्द्र जोशी ने शुरूआत में एक प्रस्तुति के माध्यम से कैलाश भू-क्षेत्रीय परियोजना के अंतर्गत मुनस्यारी में कराई गई परामर्शी बैठक के मुख्य बिन्दुओं से अवगत करवाया, तथा उन बिंदुओं को चर्चा के लिए सभी के सामने रखा। इसके साथ ही परियोजना टीम के सदस्यों द्वारा किये गये कार्यों को विस्तारपूर्वक बताया। वेबिनार में जुड़े सभी विद्वतजनों ने अपने ज्ञान को साझा किया, तथा इस पहल को जैव-विविधता प्रबंधन के लिए एक उपयुक्त तथा अनिवार्य कदम के रूप में अपनाने पर विचार किया। वेबिनार में सम्मिलित हिमाचल प्रदेश की कोत्रु रेस्ट संस्था के डॉ राजन ने इस फोरम को एक सामुदायिक मंच बनाने की बात पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि समुदाय को जब जैव-विविधता प्रबंधन प्रक्रिया में जोड़ा जाएगा, तब ही प्रबंधन को सतत्ता की ओर जाते हुए देखा जा सकता है। उत्तराखंड जैव-विविधता बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बीएस बुरफाल ने बताया कि जैव-संसाधनों को लोगों की जीविका के साधन से जोड़ना बहुत जरूरी है। जब जैव-विविधता लोगों की आजीविका का साधन बनेगी तभी उसका संरक्षण, सतत् उपयोग तथा प्रबंधन लोगों द्वारा सुनिश्चित होगा। भारतीय वन्य जीव संस्थान के पूर्व वरिष्ठ पादप वैज्ञानिक डॉ जी एस रावत ने भी इस विषय पर अपने विचार साझा किये। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के प्रो. सीएस नेगी ने संरक्षण एवं विकास के बीच में संतुलन बनाने पर जोर दिया। आईसीआईएमओडी की परियोजना समन्वयक डा जनिता गुरूंग ने इस परियोजना के सफल संचालन एक क्रियान्वयन हेतू संस्थान को पूरी तरह से मद्द करने की बात कही। मुनस्यारी क्षेत्र से आये प्रतिभागियों ने भी अपने विचार साझा किये। वेबिनार में जुड़े पवित्र कैलाश भू-क्षेत्र नेपाल तथा आईसीआईएमओडी के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे तथा इस फोरम को एक आवश्यकता माना। इसके साथ ही भारतीय क्षेत्र से इस परियोजना की सहयोगी संस्थाओं भारतीय वन्य जीव संस्थान, यूएसएसी, सीएचईए आदि ने भी अपने अनुभव साझा किये। वेबिनार में डॉ. सीएस नेगी, डा. आईडी भट्ट, डॉ. चंद्र शेखर, डॉ. पंकज तिवारी, डॉ. विक्रम नेगी, डॉ. शशांक लिंगावाल, रवि पाठक तथा रिषव रावल भी उपस्थित रहे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 21 सितंबर 2020। मावन संसााधन विकास केन्द्र कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल द्वारा पर्यावरण विषय पर आयाजित पुर्नचया कार्यक्रम में डीएसबी परिसर के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. ललित तिवारी ने आज जैव विविधता संरक्षण विषय पर व्याख्यान दिया। प्रो. तिवारी ने बताया कि जैव विविधता जीवन का आधार है, और मानव भी जैव विविधता का एक हिस्सा है। विश्व की 11 प्रतिशत आर्थिकी और 5 से 30 प्रतिशत जीडीपी जैव विविधता द्वारा संचालित है। इसके संरक्षण का महत्वपूर्ण प्रयास 5 जून 1992 के रियो डी जेनेरियो में हुए पृथ्वी सम्मेलन में 156 देशों ने हस्ताक्षर किये। कनवेंशन ऑफ बायोलोजिकल डाइवर्सिटी मंे सतत् विकास तथा बराबर की हिस्सेदारी तथा संरक्षण पर बल दिया गया है। जैव विविधता जैनेटिक, स्पेशीज तथा पारिस्थितिकी प्रकार की होती है। अनुमान है कि पृथ्वी पर 5 से 15 मिलियन प्रजातियॉ हो सकती हैं किन्तु 17 लाख 50 हजार प्रजातियां ही ज्ञात है। भारत में विश्व के 11 प्रतिशत पौधे तथा 8 प्रतिशत जीव जन्तु निवास करते हैं। जैव विविधता से प्रतिवर्ष लगभग 26 ट्रिलियन डॉलर की आय होती है। भारत में 16 प्रकार के वन, 20.55 प्रतिशत भूभाग में वन, 25 हॉट स्पाट तथा भारत विश्व के 12 मेगा डाइवर्सिटी देशों में शामिल है। उत्तराखण्ड में पिथौरागढ़ जिले में सार्वधिक 2316 आवृतबीजी प्रजातियॉ पायी जाती हैं तथा कुल 3957 आवृतबीजी पौधे उत्तराखण्ड में पाये जाते है। उत्तराखंड के 13.79 प्रतिशत भाग जिसमें राष्ट्रीय उद्यान, वन्य जीव अभयारण्य, बायो स्फेसर रिजर्व को संरक्षण में शामिल किया गया है। प्रो. तिवारी ने कहा कि तापक्रम वृद्धि, कार्बन डाइआक्साइड का बढ़ना, आर्द्रता में परिवर्तन जलवायु परिवर्तन का कारण है। हिन्दुकुश पर्वत की 10 बड़ी नदियों की तलहटी में 3 बिलियन लोग अपनी आजीविका के साथ रहते है तथा 1.5 बिलियन लोग भोजन तथा ऊर्जा के लिए इन नदियो पर निर्भर है। उन्होने कहा है कि आज समय है जब हम सतत विकास के क्रम में इन्हें संरक्षित रखना होगा ताकि हम जलवायु परिवर्तन तथा ग्रीन हाउस जैसे संकटो से मुकाबला कर सकते है।

यह भी पढ़ें : प्रदेश में 2 करोड़, नैनीताल जिले में 16 लाख एवं दक्षिणी कुमाऊँ वृत्त में 5 लाख पौध रोपण का लक्ष्य

नवीन समाचार, नैनीताल, 05 जून 2020। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यालय में लॉक डाउन के बावजूद शारीरिक दूरी के मानकों का पालन करते हुए जगह-जगह पौधारोपण किया गया। आप आदमी पार्टी के प्रदेश अध्य्क्ष एसएस कलेर ने कोरोना लॉकडाउन के चलते अपने निवास स्थान पर बच्चों के साथ जसमेह और जसमेहेर के पौधे लगाये और प्रदेश वासियों को विश्व पर्यावरण दिवस की बधाई दी। साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ ही प्रदेश की जनता को आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा लगाकर और दो वर्ष तक पौधों की सुरक्षा कर प्रदेश में पर्यावरण को सुरक्षित करने में अपना योगदान दे। उन्होंने प्रदेश में जंगलों में अवांछित लोगों और वन माफियों द्वारा वृक्षों का अवैध पतन के लिए सरकार और प्रदेश की जनता के भी जागरूक होने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रदेश में 2 करोड़, नैनीताल जिले में 16 लाख एवं दक्षिणी कुमाऊँ वृत्त में 5 लाख पौधो के रोपण का लक्ष्य
नैनीताल। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को नगर के हनुमानगढी स्थित ईको पार्क में पौध रोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. विवेक पांडेय एवं मुख्य वन संरक्षक, दक्षिणी कुमाऊं वृत्त डॉ. तेजस्विनी अरविंद पाटिल ने पौध रोपण कर किया। डा. पांडेय ने बताया कि इस वर्ष वर्षा काल में पूरे प्रदेश में 2 करोड़ एवं नैनीताल जिले में 16 लाख एवं दक्षिणी कुमाऊँ वृत्त के विभिन्न वन प्रभागों में 5 लाख पौधो के रोपण का लक्ष्य रखा गया है। डीएफओ टीआर बीजूलाल ने बताया कि नैनीताल वन प्रभाग में इस हेतु समस्त तैयारिया कर ली गयी हैैं तथा मानसून प्रारभ होते ही पौधा रोपण का कार्य प्रारम्भ कर दिया जायेगा। नगरएवं हिमालयन बोटेनिकल गार्डन सहित विभिन्न रेंजो में भी पर्यावरण दिवस का आयोजन कर पौध्रोपण तथा सफाई अभियान चलाये गये। इस अवसर पर केसी तिवारी, ममता चन्द, प्रमोद तिवारी, दीपक तिवारी, धरम सिंह बोनाल सहित अनेक वनाधिकारी मौजूद रहे।

अयारपाटा सेवा दल-जय जननी जय भारत ने बारिश के बीच लगाये पौधे
नगर के अयारपाटा क्षेत्र में अयारपाटा सेवा दल व जय जननी जय भारत की टीम ने संयुक्त रूप से नगर में हुई बारिश के बावजूद डीएसबी परिसर के लिंक मार्ग के पास जंगल करीब 20 पौधों का रोपण किया। साथ ही पास के जंगल में सफाई अभियान भी चलाया। अभियान में 5 वर्षीय सुकीर्ति कुंवर, 11 साल की निवेदिता कुंवर, मयंक सिराला, अर्जुन कीर्ति, पवन परिहार, मनोज कुंवर, गोविंद सिराला, सभासद मनोज साह जगाती आदि लोग शामिल हुए।

सरस्वती विहार में भी लगाये गये पौधे
नगर के वीरभट्टी स्थित पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार विद्यालय में इस अवसर पर प्रधानाचार्य नरेंद्र सिंह की अगुवाई में विद्यालय परिसर में तुलसी, रूद्राक्ष, अश्वगंधा आदि औषधीय पौधों को रोपित किया गया। इस दौरान विद्यालय कें आचार्याे ने अपने घरों में पूर्णिमा का दिन होने के नाते हवन-यज्ञ के द्वारा प्रकृति के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। पौधारोण में आरएसएस नैनीताल के जिला प्रचारक मनोज एवं विद्यालय के शैक्षिक प्रभारी उमेश शर्मा, डॉ. माधव प्रसाद त्रिपाठी तथा महेन्द्र बिष्ट भी शामिल रहे।

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नवीन समाचार, बिजनौर (यूपी) 13 मई 2020। जी हां, लॉक डाउन की वजह से जहां अनेक समस्याएं महसूस की जा रही हैं, वहीँ लॉक डाउन प्रकृति के लिए पुर्नजीवन प्रदान करने वाला साबित हो रहा है। नैनीताल की झील और पहाड़ों से लेकर सुदूर मैदानों तक पर्यावरण इतना साफ हो चुका है कि 180 किमी दूर बिजनौर से नैनीताल और उससे भी कहीं दूर हिमालय के पहाड़ साफ नजर आ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि बीते वर्षों में मौजूदा मई के महीने में एक से दूसरे पहाड़ और शाम होते-होते कुछ मीटर की दूरी तक का नजारा भी वनाग्नि व मैदानी कुहासे की वजह से नजर नहीं आते थे।undefined
लेकिन अब सब कुछ बदला-बदला है। दिल्ली जैसे शहरों से आसमान और उसमें रात्रि में टिमटिमाते तारे नजर आ रहे हैं तो पिछले दिनों पंजाब के जालंधर से हिमालय की धौलधार पर्वत श्रृंखला और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से शिवालिक पर्वत श्रृंखला दिखाई देने लगी दिखाई देने से लोग विस्मय में थे। अब बिजनौर से नैनीताल की पहाड़ियां नजर आने लगी है। लॉकडाउन के बाद से हवा इतनी साफ हो गई है कि अब 200 से 250 किलोमीटर की दूरी के पहाड़ भी नजर आने लगे हैं। बिजनौर के लोगों ने बताया कि यहां से नैनीताल की सड़क से दूरी लगभग 180 किलोमीटर है। उन्होंने ऐसा नजारा इससे पहले कभी नहीं देखा। इससे वे हैरान होने के साथ ही खुश भी हैं। 30 साल के रमेश ने कहा कि उन्हें तो याद नहीं कि इससे पहले उन्हें घर से इस तरह पहाड़ नजर आए हों।undefined

वहीं वैज्ञानिकों की मानें तो लॉकडाउन में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम होने से दोपहर में धूप ज्यादा चमकीली दिख रही है तो सुबह-शाम हल्की सर्दी भी महसूस हो रही है। वातावरण साफ होने से दूर की चीजें भी साफ नजर आने लगी हैं। ऋषिकेश में लॉकडाउन से पहले 24 मार्च और लॉकडाउन के दौरान 18 अप्रैल को जो सैंपल लिए गए, उनमें साफ अंतर आया है। पहले गंगा में ऑक्सीजन की मात्रा 5.20 ग्राम प्रति लीटर थी, जो अब बढ़कर 6.50 ग्राम प्रति लीटर हो गई है। इससे गंगा में जल प्राणियों की संख्या में इजाफा होगा। पानी सिंचाई के लिए उपयुक्त होगा और फसलें रसायनमुक्त होंगी।

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NAनवीन समाचार, नैनीताल, 10 अप्रैल 2020। कोरोना विषाणु कोविद-19 की महामारी में जहां लोग संक्रमण के भय से अपने घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं, वहीं अनेक लोग अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों के घर-घर जाकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसी कठिन परिस्थितियों में साफ-सफाई एवं दवाओं के छिड़काव के कार्य में लगे भीमताल नगर पंचायत के पर्यावरण मित्रों को भीमताल विधायक राम सिंह कैड़ा ने शुक्रवार को माला पहनाकर अभिनंदन किया। पर्यावरण मित्रों को विधायक राम सिंह कैड़ा ने शुक्रवार को कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए शहर में दवाओं का छिड़काव कर सैनिटाइजेशन करने के लिए सम्मानित किया। कैड़ा ने कहा कि दिन रात अपनी जान की परवाह किए बिना सफाई कर्मी, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस कर्मी और मीडिया कर्मी लगातार फील्ड में उतरकर अपना संपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को सम्मान करने की बात कहीं।

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नवीन समाचार, टिहरी, 2 फरवरी 2020। क्या कृत्रिम टिहरी झील वहां के स्थानीय मौसम में भी अचानक बदलाव लाने लगी है ? शनिवार को टिहरी के स्थानीय वासियों ने इसे महसूस किया। लोगों के मुताबिक मौसम सूखा रहने के पूर्वानुमानों को धता बताते हुए शनिवार को टिहरी बांध के ऊपर अचानक स्थानीय विक्षोभ बन गया। इससे परियों के देश कहे जाने वाले खैट व माणिकनाथ क्षेत्र और नई टिहरी में अचानक कुछ बर्फवारी भी हुई। जबकि तापमान आठ से दस डिग्री के आस पास रहा होगा। यह सब तब हुआ जब मौसम विभाग ने पांच फरवरी तक मौसम सूखा बताया है। रानीचौरी स्थित विश्वविद्यालय की साप्ताहिक एडवाइजरी में भी स्थानीय स्तर पर मौसम सूखा ही बताया गया था।
टिहरी निवासी वरिष्ठ पत्रकार महिपाल नेगी के मुताबिक कभी भूगोल में स्थानीय विक्षोभ के बारे में पढ़ते थे। टिहरी बांध की झील के ऊपर 10-12 वर्ग किमी के दायरे में आज दोपहर बाद ये नजारा देखा। एक घंटे में मौसम अचानक बदल गया। एकदम डरावना। बूंदाबांदी और बर्फवारी। साल भर में दो-तीन बार ऐसा होता है। हालांकि प्रायः स्थानीय लोग इस तरफ ध्यान नहीं देते। उनका कहना है कि टिहरी बांध की कुछ पर्यावरणीय रिपोर्ट में भी इस तरह के विक्षोभ झील क्षेत्र में कभी कभार बनने की बात कही गई हैं। मौसम वैज्ञानिकों के लिए यह महत्वपूर्ण अध्ययन बन जाता है। हालांकि इसका पूर्वानुमान भी अक्सर नहीं हो पाता है। बता दें कि 30 दिसंबर 2013 को ‘राष्ट्रीय सहारा’ समाचार पत्र ने भी टिहरी झील से स्थानीय पर्यावरण व मौसम पर पड़ने वाले असर की आशंका को लेकर ‘बादल फटने की घटनाओं के पीछे टिहरी झील !’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था, जिसमें कहा गया था कि टिहरी झील से स्थानीय मौसम में होने वाले बदलाव का अध्ययन जरूरी है। बता दें कि बड़े जलाशयों के कारण इकट्ठा होने वाले पानी के कारण जमीन पर पड़ने वाले दबाव से स्थानीय स्तर पर भूकंप की भी संभावना जताते हैं।

यह भी पढ़ें : पंचेश्वर बांध: ‘न्यू इंडिया’ से पहले ही टूट रही है ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ की अवधारणा!

-बड़े बांधों की जगह छोटे-छोटे बांधों को बताया जा रहा सुरक्षित व उपयोगी
नवीन जोशी, नैनीताल। अंग्रेजी हुकूमत के साथ ही आजादी के बाद भी बांधों को ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहा गया था। बताया जाता है कि 1954 में जवाहर लाल नेहरू ने पंचेश्वर बांध की परिकल्पना ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ की इसी अवधारणा के तहत ही की गयी थी। लेकिन आजादी के 70 वर्षों के बाद उत्तराखंड के टिहरी में 260.5 मीटर ऊंचा बांध बनने के साथ ही इस अवधारणा पर बड़े प्रश्न उठे और अनेक लोगों की शहादत के बावजूद यह बांध बन कर रहा। अब कुमाऊं मंडल में दुनिया का सबसे ऊंचा 315 मीटर ऊंचा पंचेश्वर बांध के निर्माण की सुगबुगाहट शुरू हुई है, तो लगता है कि ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ की अवधारणा भी टूट चुकी है। क्षेत्रीय लोग आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘न्यू इंडिया’ का आह्वान किये जा रहे दौर में बड़े बांधों को विकास नहीं विनास का आधार बता रहे हैं और विकास का अर्थ केवल अपनी जरूरतों की सड़क, स्कूल, अस्पताल व बिजली आदि सुविधाओं में ही देख रहे हैं। बड़े बांधों की जगह छोटे-छोटे बांधों को सुरक्षित व उपयोगी बताया जा रहा है। बता दें नेपाल और भारत सरकार के सहयोग से बनने जा रहे पंचेश्वर बांध को उत्तराखंड़ के लिए बेहद खास बताते हुए पीएम मोदी ने अपने उत्तराखंड़ दौरे में इसका जिक्र किया था। यह बांध बनकर तैयार हो गया तो यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध होगा। अभी शंघाई स्थित थ्री जॉर्ज्स डैम दुनिया का सबसे बड़ा बांध है।

बनने से पहले ही माओवादी साजिश, बुद्धिजीवी सहयोगियों के बाबत भी हुए हैं  खुलासे  :

चोरगलिया से पकड़े गए कथित माओवादी

नैनीताल पुलिस ने माओवादियों को पकड़ने के लिए बनाई गई विशेष टास्क फ़ोर्स-एसओटीएफ की मदद से दो कथित माओवादियों-भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी-लेनिनवादी)के पूर्वी रीजनल ग्रुप केप्रमुख देवेन्द्र चम्यालऔर उसकी साथी भगवती बिष्ट को चोरगलिया क्षेत्र से गिरफ्तार करने में सफलता पायी है। बताया गया है कि उसने आईबी और इंटेलीजेंस विभाग के अधिकारीयों को पूछताछ के दौरान कई सनसनीखेज खुलासे किये हैं। जिनके अनुसार माओवादी भारत सरकार और नेपाल के सहयोग से बनने जा रहे बहुप्रतिक्षित पंचेश्वर बांध के विरोध करने की द्विस्तरीय योजना बनाई गई थी। योजना के तहत पहले चरण में बुद्धिजीवी वर्ग से आने वाले सहयोगियों को वैचारिक तौर पर बाँध के विरोध में माहौल बनाने का कार्य सौंपा गया था, जबकि दूसरे चरण में चम्याल और उसके साथियों को ‘एक्शन’ करना था। 

बताया गया है कि पुलिस पूछताछ में चम्याल ने  माओवादी विचारधारा को ज्यादा से ज्यादा फैलाने के लिए फरवरी 2017 में नैनीताल जिले के धारी क्षेत्र में तहसील, ब्लाक आदि क्षेत्रों के साथ ही भवाली तथा अल्मोडा जिले के सोमेश्वर, चनौदा, लोद, द्वाराहाट व बग्वालीपोखर आदि क्षेत्रों में माओवादी पम्पलेट, पोस्टर , झंडे और दीवारों पर पेंटिग व माओवादी नारों के पोस्टर लगाने सहित कई अन्य घटनाओं में अपनी संलिप्तता तथा माओवादी खीम सिंह बोरा और भाष्कर पांडेय से संपर्क होने की बात स्वीकार की है। डीजीपी अनिल रतूड़ी ने पुलिस टीम को 20 हजार रुपये के इनाम एवं माओवादियों की गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एसओटीएफ के कांस्टेबल को पुलिस पदक प्रदान कए जाने की घोषणा की है । साथ ही उसने झारखंड़ में चार सालों तक माओवादियों के साथ ट्रेनिंग लेने और उनके अभियान में बढचढ कर भाग लेने की बात भी स्वीकार की है।

पकड़े गये माओवादियों के विषय में जानकारी देते कुमाऊं डीआईजी पूरन सिंह रावत और एसएसपी जन्मेजय खंडूरी ने कहा कि यह माओवादी के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान में एक बहुत बड़ी सफलता है तथा इससे माओवादियों के हौसले पस्त होने के साथ साथ उनकी कमर टूट जायेगी । बताया गया है कि वह पूर्व में नैनीताल पुलिस द्वारा चोरगलिया के निकट हंसपुर खत्ता के जंगल में चल रहे माओवादी कैंप के खुलासे से पहले यहीं था, और छापे के दौरान फरार हो गया था ।

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प्रस्तावित पंचेश्वर बांध पिथौरागढ़ जिले में पंचेश्वर से ढाई किमी नीचे महाकाली नदी पर बनने जा रहा है। इसके जरिये पिथौरागढ़ जिले के बांध स्थल से 80 किमी दूर जौलजीबी के किमखोला और अल्मोड़ा जिले के पनार तक 11,600 हैक्टेयर क्षेत्र में झील बन जाएगी। बांध का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा उत्पादन बताया गया है। इससे प्राप्त होने वाली 4800 मेगावाट बिजली का आधा-आधा हिस्सा भारत एवं नेपाल को मिलेगा। जबकि इससे 25 किमी नीचे तामली के पास रूपालीगाड़ परबनने वाले 95 मीटर ऊंचे रिरेगुलेटिंग यानी सुरक्षात्मक बांध पर बनने वाले दो पावर हाउसों से 240 मेगावाट बिजली बनेगी, और दोनों देशों में बराबर बंटेगी। इस विशालकाय परियोजना के लिये उत्तराखंड के चंपावत, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिलों की 3735.8 हैक्टेयर निजी, 2422.5 हैक्टेयर वन भूमि और 2941.7 हैक्टेयर सरकारी यानी कुल 9100 हैक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इससे पिथौरागढ़ जिले के 87, चंपावत के 26 व अल्मोड़ा के 21 गांवों के 31,023 परिवार प्रभावित होंगे। बताया कि इससे बनने वाली झील में 123 गांवों के 1283 परिवारों के घर व जमीनें दोनों जलमग्न हो जाएंगी, लिहाजा वे पूरी तरह से विस्थापित हो जाएंगे, जबकि 28,153 परिवारों की जमीनों के साथ ही 94 मंदिर, 21 पंचायत भवन, 43 सरकारी स्कूल, पांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रव 44 पानी के टेंक भी डूब जाएंगे।

आगामी 28 नवंबर को 1977 के निर्णायक वनांदोलन के 40 वर्ष पूरे होने के दिन हो सकता है बड़े आंदोलन का ऐलान

नैनीताल। सरोवरनगरी में प्रदेश के दिवंगत जनकवि गिरीश तिवारी ‘गिरदा’ की सातवीं पुण्य तिथि के मौके पर कुमाऊं मंडल में प्रस्तावित ‘विश्व के दूसरे नंबर के सबसे ऊंचे’ पंचेश्वर बांध पर गंभीर विमर्श किया गया। इस दौरान प्रस्तावित बांध के डूब क्षेत्र के निवासियों की ओर से डा. अनिल कार्की एवं अन्य ने इस मौके पर वीडियो फिल्म के माध्यम से प्रस्तावित बांध से क्षेत्र में लोगों की आजीविका, खेती आदि के साथ ही पारिस्थितिकी, जैव विविधता व अन्य खतरों को रेखांकित किया। जबकि पद्मश्री पुरस्कार लौटा चुके क्षेत्र के अध्येता डा. शेखर पाठक ने अब तक इस संबंध में हुए कार्य और विरोध को बहुत हल्का बताते हुए कहा कि इस संबंध में बहुत अधिक कार्य किये जाने की जरूरत है। इस विषय पर भूवैज्ञानिकों, जल विद्यान, समाज शास्त्र एवं अन्य संबंधित विविध विषयों पर समन्वित तौर पर अध्ययन कर तर्कों को सामने लाकर बड़ा संघर्ष करने का इशारा किया। बताया कि इस मुद्दे पर आगामी 28 नवंबर को 1977 में हुए निर्णायक वनांदोलन के 40 वर्ष पूर्ण होने के मौके पर बड़े स्तर पर विमर्श और कोई ऐलान किया जा सकता है।

रेल के सपने का क्या :  उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी रैली में पीएम नरेंद्र मोदी ने पंचेश्वर बांध का जिक्र करते हुए कहा था कि इससे मिलने वाली बिजली से न सिर्फ उत्तराखंड को फायदा होगा बल्कि भारत के दूसरे इलाकों में भी अंधेरा दूर करने में मदद मिलेगी। हालांकि इस पर भी लोग चर्चा कर रहे हैं कि अगर बांध बना तो पहाड़ों में रेल आने का सपना महज सपना रह जाएगा क्योंकि दशकों से जिस टनकपुर-बागेश्वर रेलवे लाइन की मांग हो रही है और जिसका सर्वे 1922 में ही हो गया था, वह पूरा इलाका डूब क्षेत्र में आ जाएगा।
मगर बिजली पानी का फायदा : पंचेश्वर और रुपाली गाड़ बांध बन जाने से 5 हजार मेगावॉट से ज्यादा बिजली पैदा होगी। इसमें से 13 फीसदी बिजली उत्तराखंड को मुफ्त मिलेगी। सिंचाई के लिए इतना पानी मिलेगा जिससे 16 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेगी। सिंचाई का पानी यूपी को भी मिलेगा और नेपाल को भी। विदेश नीति की दृष्टि से भी यह बांध भारत को फायदा पहुंचाएगा। इसके जरिए नेपाल भारत के और करीब आएगा। कुछ वक्त पहले नेपाल में चले मधेसी आंदोलन के दौरान नेपाल में भारत के खिलाफ गुस्सा दिखा था लेकिन इस बांध के जरिए भारत-नेपाल की दोस्ती और मजबूत हो सकेगी।
पुनर्वास का प्रावधान नहीं 
बताया जा रहा है कि बांध की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में प्रभावितों के लिए पुनर्वास में जमीन या मकान देने का प्रावधान नहीं है।जबकि उत्तराखंड क्रांति दल नेता काशी सिंह ऐरी का कहना है कि प्रभावितों के लिए 6 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर जमीन का प्रावधान रखा है साथ ही प्रति मकान दो लाख रुपये का प्रावधान है। पहाड़ों में किसी के पास एक हेक्टेयर जमीन नहीं होती है। किसी के पास बहुत ज्यादा है तो भी वह आधी हेक्टेयर ही होगी। ऐसे में जमीन और मकान डूबने पर उन्हें 4-5 लाख रुपये ही मिलेंगे। इस राशि से कैसे कोई दूसरी जगह बस सकता है। जिनका सबकुछ चला जाएगा उनके पुर्नवास का ठोस इंतजाम हो।
भूस्खलन झेलेगा कुमाऊं : पर्यावरणविदों का कहना है कि जब अमेरिका जैसे देश पर्यावरणीय दुष्प्रभावों और नुकसान को देखते हुए बड़े बांधों को तोड़ रहे हैं तो यहां इतना बड़ा बांध बनाने की क्या जरूरत। माटू संगठन के विमल भाई ने कहा कि टिहरी बांध बनने के 10 साल बाद भी लोगों का पुनर्वास सही से नहीं हो पाया। टिहरी की झील लगातार फैल रही है और भूस्खलन बढ़ा है। यह हिस्सा मध्य हिमालय का वह हिस्सा है जो अभी भी बनने के दौर में है। यहां जितनी बड़ी झील बनेगी उससे कुमाऊं का मौसम चक्र बदलेगा। लोकल मॉनसून भी यहां बनेगा और साल भर बारिश होने से लोगों को साल भर भूस्खलन का दंश झेलना होगा।
जन सुनवाई की प्रक्रिया गलत : स्थानीय लोग इस बात का विरोध कर रहे हैं कि जनसुनवाई की सूचना प्रभावित इलाकों तक सही से नहीं पहुंचाई गई। ‘महाकाली की आवाज’ संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत ने कहा कि जनसुनवाई सिर्फ तीनों जिला मुख्यालय में रखी गई है। इसके लिए वक्त भी गलत चुना गया है। इस मौसम में कई गांवों का संपर्क ही कट जाता है। भूस्खलन हो रहा है और यातायत प्रभावित है। ऐसे में गांव वालों के लिए जिला मुख्यालय पहुंचना असंभव है। जिला मुख्यालय आने में गांव वालों के दो-तीन दिन बर्बाद होते हैं इसलिए जनसुनवाई ग्रामपंचायत स्तर पर होनी चाहिए।

नवीन समाचार
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