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87% कोरोना संक्रमितों में सूंघने और स्वाद की क्षमता गायब हो जाती है, कोविड-19 के 4 नए लक्षण सीजनल फ्लू से एकदम अलग हैं

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डोनाल्ड जी मैकनील. मौसम बदल रहा है, गर्मी जा रही है और सर्दी आ रही है। ऐसे में मौसमी बुखार और फ्लू होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। नॉर्मल फ्लू और कोरोना में बहुत ज्यादा अंतर है, लेकिन समान्य लक्षण एक जैसे ही दिखते हैं। इसलिए लोग कन्फ्यूजन में हैं और दोनों में अंतर करने में गलती कर बैठ रहे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक दोनों में कुछ बारीक बातों के जरिए अंतर किया जा सकता है। वहीं, एक अध्ययन के मुताबिक बच्चों में कोरोना के लक्षण बड़ों की तुलना में अलग भी हो सकते हैं।

कोरोना और फ्लू के लक्षणों में क्या बारीक अंतर हैं?

इसे समझने के लिए आपको कोरोना के लक्षणों के साथ उसकी बारीकियों को भी ध्यान से समझना होगा, क्योंकि नॉर्मल फ्लू और कोरोना के लक्षण लगभग एक जैसे हैं। इसे 3 बातों के जरिए समझ सकते हैं।

  1. अगर आप कोरोना के चपेट में आ गए हैं तो आपको तेज बुखार आएगा, साथ ही आपके जोड़ों मे दर्द भी महसूस होगा।
  2. नॉर्मल फ्लू में सिर्फ पूरे शरीर में दर्द होता है, बुखार भी हल्का होता है।कोरोना में सूखी खांसी आती है, जबकि फ्लू में कफ के साथ खांसी आती है। लेकिन कमजोरी दोनों में महसूस होगी।
  3. कोरोना का सबसे अलग लक्षण है कि उसके चपेट में आए शख्स की सूंघने और टेस्ट करने का सेंस चला जाता है। यानी उसे न तो किसी चीज की स्मेल आएगी और न ही कुछ खाने पर टेस्ट आएगा वहीं, नॉर्मल फ्लू में सिर्फ मुंह का टेस्ट खराब होता है और सूंघने का सेंस डैमेज नहीं होता।

क्या सभी कोरोना मरीजों की स्मेल चली जाती है ?

  • ऐसा जरूरी नहीं की सभी कोरोना मरीजों की स्मेल और टेस्ट गायब हो जाए। अमेरिका में हुई एक रिसर्च में पाया गया है कि 87% कोरोना पीड़ित की सूंघने और टेस्ट करने की क्षमता गायब होती है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कोरोना संक्रमितों में कई बार ऐसे लक्षण भी आते हैं, जो एकदम से नए तरह के हैं। इनमें सीने में दर्द होना, होंठ का नीला पड़ जाना जैसी बातें शामिल हैं। इसके अलावा कई बार आप कुछ बातें भूलना शुरू कर देते हैं। जैसे- आप कोई चीज करने वाले हों और आप भूल गए या कुछ कहने वाले हों और भूल गए। सामान्य तौर पर ऐसा हमारे साथ कभी-कभी होता है, पर कोरोना में यह कई बार होता है।

बच्चों में कोरोना के लक्षण को कैसे पहचानें?

0 से 5 साल तक के बच्चे चूंकि बोल नहीं पाते हैं और न ही अपनी फीलिंग को शेयर कर सकते हैं, इसलिए वो वयस्कों जैसा नहीं बता सकते हैं कि उन्हें क्या हो रहा है। इसलिए पैरेंट्स को इस बात पर ध्यान देना होगा कि जो लक्षण उनमें दिख रहे हैं, वे फ्लू के हैं या फिर कोरोना के। बच्चों में कुछ नए तरह के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं।

  • अगर बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। उसके होंठ नीले पड़ रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं। इसके अलावा यदि बच्चे को बुखार आ रहा है और वह सोकर उठने के बाद कुछ देर तक कन्फ्यूज रह रहा है या ठीक तरीके से रिस्पॉन्स नहीं कर पा रहा है तो उसे डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।
  • कोरोना के बाद कुछ बच्चों में ‘मल्टी-सिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम’ के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, यानी बच्चों के शरीर में सूजन आ जाती है और बुखार भी आ सकता है। लेकिन ऐसा बहुत रेयर होता है। इस स्थिति में भी आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

कोरोना और फ्लू बचने के लिए क्या सावधानी रखें?

  1. दिन भर में बार-बार हाथ धोएं।
  2. एक-दूसरे से दूरी बनाकर रखें।
  3. जितना ज्यादा हो सके मास्क पहनें।

डॉक्टरों का कहना है कि लोगों को पल्स ऑक्सीमीटर और खून में ऑक्सीजन की मात्रा को जानने लिए फिंगरप्रिंट डिवाइस भी रखनी चाहीए। अगर रीडिंग 92 से कम है तो तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए। ऐसा करके हम खुद को कोरोना और सीजनल फ्लू दोनों से बचा सकते हैं।

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Four to five symptoms in corona and normal viral alike; But what are the nuances in the symptoms that separate and normal viral in the corona?

नवीन समाचार
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