नवीन समाचार, देहरादून, 4 अक्टूबर 2026 (Congress Unhappy with Harish Rawat)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कांग्रेस (Congress) के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ नेता हरीश रावत (Harish Rawat) की स्वतंत्र जनसंवाद यात्रा और कांग्रेस के आधिकारिक संगठनात्मक कार्यक्रमों के बीच समन्वय को लेकर नेतृत्व की आपत्ति की खबर सामने आई है, जबकि यात्रा शुरू हो चुकी है और उसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भागीदारी भी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी महासचिव कुमारी शैलजा (Kumari Selja) ने रावत को पत्र लिखकर उनकी प्रस्तावित/जारी जनसंवाद यात्रा को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) से समन्वय नहीं होने पर आपत्ति जताई है। सूत्रों के अनुसार पत्र में कहा गया है कि रावत द्वारा निकाली जा रही यात्रा के संबंध में प्रदेश कांग्रेस से चर्चा नहीं की गई। पार्टी नेतृत्व ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठन में एकजुटता और समन्वय को प्राथमिकता देने की बात कही है तथा प्रदेश कांग्रेस के समानांतर कोई कार्यक्रम चलाना पार्टी के हित में नहीं होने की बात कही है।
हालांकि, पत्र की स्वतंत्र प्रति सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण उसके शब्दशः विवरण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। दूसरी ओर, रावत की जनसंवाद यात्रा का आयोजन और उसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भागीदारी अलग-अलग रिपोर्टों से सामने आती है।
क्या है पूरा विवाद?
हरीश रावत ने आम जनता, व्यापारियों और किसानों से संवाद स्थापित करने तथा उनकी समस्याओं को समझने के उद्देश्य से जनसंवाद यात्रा का कार्यक्रम बनाया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 1 अक्टूबर को हरिद्वार से उनकी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ शुरू हुई, जो हरिद्वार ग्रामीण, लक्सर और खानपुर विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरी। विभिन्न स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत भी किया।
रावत की यह सक्रियता ऐसे समय में है जब उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं और कांग्रेस भी अपने संगठन को चुनावी स्तर पर सक्रिय करने में जुटी है।
शैलजा की कथित चिट्ठी में क्या कहा गया?
सूत्रों के अनुसार कुमारी शैलजा ने रावत को भेजे पत्र में कहा है कि उनकी यात्रा को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी से चर्चा नहीं की गई है।
पार्टी नेतृत्व की ओर से कथित तौर पर यह भी कहा गया है कि विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने शेष हैं और ऐसे समय में कांग्रेस के सभी नेताओं तथा संगठन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
सूत्रों के अनुसार रावत को यह संदेश भी दिया गया कि प्रदेश कांग्रेस के समानांतर कोई यात्रा अथवा राजनीतिक कार्यक्रम चलाना पार्टी के लिए हितकारी नहीं होगा। इसलिए उनसे अपनी यात्रा को आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया गया है।
कथित पत्र में रावत के कुछ हालिया बयानों का भी उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है और नेतृत्व ने विवादित बयानों से बचने की नसीहत दी है।
यह पूरा घटनाक्रम अभी सूत्रों के हवाले से सामने आया है और कांग्रेस की ओर से पत्र की आधिकारिक प्रति अथवा विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
यात्रा पहले ही बन चुकी है राजनीतिक चर्चा का विषय
हरीश रावत की सक्रियता पिछले कुछ समय से उत्तराखंड कांग्रेस की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। सितंबर में संगठनात्मक मुद्दों के बीच उन्होंने कांग्रेस के कुछ संगठनात्मक पदों से हटने की इच्छा जताई थी, लेकिन बाद में स्पष्ट किया कि उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस उनके लिए व्यक्तिगत राजनीतिक पहचान से कहीं अधिक गहरा संबंध रखती है।
इसके बाद अक्टूबर की शुरुआत में उनकी धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा ने उनकी राजनीतिक सक्रियता को फिर चर्चा में ला दिया।
1 अक्टूबर को हरिद्वार में यात्रा के दौरान रावत ने केंद्र सरकार पर कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी तीखी टिप्पणी की और कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में इतना बड़ा ‘पलटूराम’ नहीं देखा। उन्होंने सरकार के विरुद्ध ‘वोट चोरी’ सहित कई राजनीतिक मुद्दे भी उठाए।
यात्रा के दौरान उनके समर्थकों की ओर से ‘टाइगर इज बैक’ लिखे पोस्टर भी लगाए गए, जिससे रावत की राजनीतिक वापसी और सक्रियता को लेकर चर्चा और बढ़ी।
रावत के लिए यात्रा का उद्देश्य क्या बताया गया?
रावत के कार्यक्रम से जुड़े कांग्रेस नेताओं के अनुसार जनसंवाद यात्रा का उद्देश्य केवल राजनीतिक सभा करना नहीं बल्कि व्यापारियों, किसानों और आम लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनना था।
रिपोर्टों के अनुसार यात्रा में स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भागीदारी रही। हरिद्वार ग्रामीण से शुरू होकर यात्रा लक्सर और खानपुर क्षेत्र तक पहुंची।
इससे यह भी स्पष्ट है कि यात्रा को रावत के समर्थक केवल व्यक्तिगत कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं से संवाद के अवसर के रूप में देख रहे हैं।
2027 से पहले कांग्रेस के भीतर समन्वय का सवाल
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने संगठन को एकजुट रखने और वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक सक्रियता को पार्टी के आधिकारिक कार्यक्रमों के साथ समन्वित करने की चुनौती है।
हरीश रावत कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में हैं और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तथा केंद्र में मंत्री के रूप में लंबा राजनीतिक अनुभव रखते हैं। उनके राजनीतिक प्रभाव और संगठन में लंबे समय से रही भूमिका के कारण उनकी सार्वजनिक गतिविधियां स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का विषय बनती हैं।
दूसरी ओर कांग्रेस में नई प्रदेश टीम और विभिन्न स्तरों पर संगठनात्मक गतिविधियां भी चल रही हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व की प्राथमिकता यह बताई जा रही है कि चुनाव से पहले अलग-अलग नेताओं के कार्यक्रमों के बजाय संगठन की सामूहिक रणनीति के अनुरूप गतिविधियां हों।
पहले भी सामने आ चुके हैं रावत और संगठन के बीच मतभेद
हरीश रावत और कांग्रेस संगठन के बीच मतभेद का यह पहला मामला नहीं है। इस वर्ष मई में उनके ‘अर्जित अवकाश’ और संगठनात्मक फैसलों को लेकर भी कांग्रेस के भीतर चर्चाएं हुई थीं। उस समय भी प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व और संगठनात्मक संतुलन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं सामने आई थीं।
सितंबर में रावत द्वारा संगठन के कुछ पदों से हटने की बात कहे जाने के बाद भी राजनीतिक हलचल हुई थी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया था कि उन्होंने कांग्रेस नहीं छोड़ी है।
इस पृष्ठभूमि में उनकी नई यात्रा और उस पर पार्टी नेतृत्व की कथित आपत्ति को कांग्रेस के भीतर चल रहे व्यापक संगठनात्मक समन्वय के संदर्भ में देखा जा रहा है।
क्या रावत यात्रा रोकेंगे?
फिलहाल सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि कांग्रेस नेतृत्व की कथित नसीहत के बाद हरीश रावत अपनी जनसंवाद यात्रा को रोकते हैं, उसमें बदलाव करते हैं या इसे जारी रखते हैं।
उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार रावत ने यात्रा शुरू कर दी है और इसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भागीदारी भी रही है। इसलिए कथित पत्र के बाद आगे की स्थिति रावत और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया से स्पष्ट होगी।
राजनीतिक रूप से यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारी का दौर शुरू हो चुका है। ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता की स्वतंत्र राजनीतिक गतिविधि और प्रदेश संगठन के आधिकारिक कार्यक्रमों के बीच तालमेल का सवाल आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण हो सकता है।
फिलहाल उपलब्ध तथ्यों में दो बातें स्पष्ट हैं—हरीश रावत सक्रिय राजनीतिक जनसंवाद में हैं और कांग्रेस संगठन चुनाव से पहले एकजुटता तथा समन्वय पर जोर दे रहा है। दोनों के बीच कथित पत्राचार और यात्रा को लेकर अंतिम स्थिति कांग्रेस नेतृत्व तथा स्वयं रावत की सार्वजनिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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