नेपाली, तिब्बती, पैगोडा, गौथिक व ग्वालियर शैली में बना है नैनीताल की आराध माता नयना देवी का मंदिर, जानें अनसुना इतिहास

maa naina devi 1

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 25 मार्च 2026 (Nayna Devi Temple History)। सरोवर नगरी नैनीताल को कभी विश्व भर में अंग्रेजों के घर `छोटी बिलायत´ के रूप में जाना जाता था, और अब नैनीताल के रूप में भी इस नगर की वैश्विक पहचान है। इसका श्रेय केवल नगर की अतुलनीय, नयनाभिराम, अद्भुत, अलौकिक जैसे … Read more

उत्तराखंड में भी एक रामेश्वर, रामेश्वरम की तर्ज पर भगवान राम ने की थी शिव लिंग की स्थापना, यहीं ली थी शिक्षा…

Ramlila

नवीन समाचार, आस्था डेस्क, 12 अक्टूबर 2024 (Rameshwar-Uttarakhand-Ram established Shiv Ling)। आज पूरे देश-दुनिया में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के अयोध्या में जन्म स्थान पर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुल रहे मंदिर की चर्चा है। लेकिन आज हम आपको उत्तराखंड में स्थित भगवान राम के उस पौराणिक मंदिर की जानकारी देने जा रहे हैं, जिसके बारे … Read more

भगवान ‘राम की नगरी’ के समीप माता सीता का वन ‘सीतावनी’, यहीं हुआ था लव-कुश का जन्म…

Sitavani

कुमाऊं के लोक देवी-देवता

Dharm Astha Hindu

Devi Devta

आपका कोना में आज : कितना अंधेरा है ना ‘ए खुदा’

(‘नवीन समाचार’ के इस ‘आपका कोना’ स्तंभ में हम ‘नवीन समाचार’ के पाठकों की कविताएं, लेख, विचार आदि प्रकाशित करते हैं। यदि आप भी ‘नवीन समाचार’ के माध्यम से अपने विचार, कविता-लेख आदि प्रकाशित कर हमारे अन्य पाठकों तक पहुंचना चाहते हैं तो हमें अपने विचार, कविता या लेख आदि अधिकतम 500 शब्दों में हमारे … Read more

प्रसिद्ध वैष्णो देवी शक्तिपीठ सदृश रामायण-महाभारतकालीन द्रोणगिरि वैष्णवी शक्तिपीठ दूनागिरि

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 9 अक्टूबर 2021। हिमालय की गोद में बसे आध्यात्मिक महिमा से मंडित और नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दूनागिरि शक्तिपीठ का अपार महात्म्य है। आइए आज हम आपको इस शक्तिपीठ के दर्शनों को लिए चलते हैं। दूनागिरि पहुंचने के लिए अल्मोड़ा से 65 किमी, रानीखेत से 38 किमी … Read more

भद्रकालीः जहां वैष्णो देवी की तरह त्रि-पिंडी स्वरूप में साथ विराजती हैं माता सरस्वती, लक्ष्मी और महाकाली

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।।

कहते हैं आदि-अनादि काल में सृष्टि की रचना के समय आदि शक्ति ने त्रिदेवों-ब्रह्मा, विष्णु व महेश के साथ उनकी शक्तियों-सृष्टि का पालन व ज्ञान प्रदान करने वाली ब्रह्माणी यानी माता सरस्वती, पालन करने वाली वैष्णवी यानी माता लक्ष्मी और बुरी शक्तियों का संहार करने वाली शिवा यानी माता महाकाली का भी सृजन किया। सामान्यतया अलग-अलग स्थानों पर प्रतिष्ठित रहने वाली यह तीनों देवियां कम ही स्थानों पर एक स्थान पर तीनों के एकत्व स्वरूप् में विराजती हैं। ऐसा एक स्थान है माता का सर्वोच्च स्थान बताया जाने वाला वैष्णो देवी धाम।

माता भद्रकाली के मंदिर का गर्भगृह
माता भद्रकाली के मंदिर का गर्भगृह

लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं अंचल में भी एक ऐसा ही दिव्य एवं अलौकिक विरला धाम मौजूद है, जहां माता सरस्वती, लक्ष्मी और महाकाली एक साथ एक स्थान पर वैष्णो देवी की तरह ही स्वयंभू लिंग या पिंडी स्वरूप में आदि-अनादि काल से एक साथ माता भद्रकाली के रूप में विराजती हैं, और सच्चे मन से आने वाले अपने भक्तों को साक्षात दर्शन देकर उनके कष्टों का हरती तथा जीवन पथ पर संबल प्रदान करती हैं। इस स्थान को माता के 51 शक्तिपीठों में से भी एक माना जाता है। शिव पुराण में आये माता भद्रकाली के उल्लेख के आधार पर श्रद्धालुओं का मानना है कि महादेव शिव द्वारा आकाश मार्ग से कैलाश की ओर ले जाये जाने के दौरान यहां दक्षकुमारी माता सती की मृत देह का दांया गुल्फ यानी घुटने से नीचे का हिस्सा गिरा था।

Read more