सैलानियों ने किया विवाद, मलबा आने से 14 सड़कें बंद, बारिश, परीक्षा परिणाम व छात्रवृत्ति के लिये सूचना

Nainital News 6 July 2023, Nainital News 1 July 2023, Nainital News 3 July 2023, Nainital News 11 July 2023, Nainital News 12 July 2023,

सैलानियों ने किया विवाद, पुलिस ने की कार्रवाई (Nainital News Today 4 July2024 Nainital Samachar) नवीन समाचार, नैनीताल, 4 जुलाई 2024 (Nainital News Today 4 July2024 Nainital Samachar)। पर्यटन नगरी नैनीताल में अक्सर कई सैलानी समस्या खड़ी कर देते हैं। ऐसी ही एक घटना में गुरुवार को सोनीपत हरियाणा से कार संख्या एचआर11एम-7359 से आये … Read more

24 वर्षीय युवक के अपहरण की सूचना से पुलिस में मचा हड़कंप, मामला निकला प्रेम-प्रसंग का और फर्जी…

Blackmailer Demanded 20 lakh Arrested with 50000 (Hotelier Cheated 22 Lakh on Pretext of Treatment) Haldwani alleged Police Officer extorts lakhs Rs, Phone Cyber fraud online mobile dhamki

नवीन समाचार, देहरादून, 31 मार्च 2024 (Fake Info of kidnap of youth was of Love affair)। देहरादून के डालनवाला क्षेत्र के अंर्तगत एमकेपी कॉलेज के पास एक 24 वर्षीय युवक के अपहरण की सूचना से देहरादून पुलिस में हड़कंप मच गया। अलबत्ता जांच में मामला फर्जी होने के साथ प्रेम प्रसंग से जुड़ा हुआ निकला। … Read more

(Health Problems) हल्द्वानी में 3 क्लीनिक नियम विरुद्ध चलते मिले, प्रशासन ने किये सील…

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 28 जनवरी 2024 (Health Problems)। हल्द्वानी में प्रशासन ने जिलाधिकारी वंदना सिंह के निर्देशों पर रविवार को हल्द्वानी में स्वास्थ्य विभाग के साथ अवैध रूप से चल रहे क्लीनिकों में छापेमारी कर कार्यवाही की।

haldwaniसिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह के नेतृत्व में की गयी इस छापेमारी में टीम ने बनभूलपुरा लाइन नंबर 17 और इंदिरा नगर क्षेत्र में 6 क्लीनिकों के दस्तावेजों की जांच की। इनमें से 3 क्लीनिकों के दस्तावेज नियमानुसार नहीं मिले और कई कमियां पायी गयीं। इस पर संयुक्त टीम ने बंगाली मेडिकोज सहित तीन क्लीनिकों को ‘क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ के विभिन्न प्रावधानों के अंतर्गत चालान कर सील कर दिया।

कहा कि अवैध तरीके से क्लीनिक या मेडिकल स्टोर संचालित होने से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। ऐसा करने वालों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। कार्रवाई में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. रजत भट्ट, अर्बन हेल्थ ऑफिसर राघवेंद्र रावत, प्राधिकरण से अंकित, औषधि निरीक्षक मीनाक्षी बिष्ट आदि शामिल रहे।

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यह भी पढ़ें : (Health Problems) रामनगर के संयुक्त चिकित्सालय के आपातकालीन कक्ष में पार्टी ! एसडीएम ने दिये जांच के आदेश…

नवीन समाचार, रामनगर, 13 दिसंबर 2023 (Health Problems)। सरकारी व्यवस्था की व्यवस्थाओं में सुधार के लिये पीपीपी मोड में दिये जाने के बावजूद रामनगर का रामदत्त जोशी राजकीय संयुक्त चिकित्सालय लगातार गलत कारणों से चर्चाओं में आ रहा है।

(Health Problems) Momo party in Ramnagar hospitalयहां कभी गर्भवती महिला के परिजनों से पैसे मांगने का मामला सामने आता है। कभी कर्मचारी वेतन को लेकर हंगामा करते हैं। कभी बाथरूम में पानी नहीं आता। अब इस चिकित्सालय के इमरजेंसी रूम यानी आपातकालीन कक्ष में मोमो पार्टी (Momo Party in Ramnagar Hospital) किये जाने की बात सामने आई है। कक्ष में पड़ी गंदगी चिकित्सालय में कार्यरत कर्मचारियों और यहां की व्यवस्थाओं की पोल खोल रही है।

किसी व्यक्ति के द्वारा मोबाइल फोन में कैद की गयी और रामदत्त जोशी राजकीय संयुक्त चिकित्सालय के आपातकालीन कक्ष की बतायी जा रही तस्वीरों में फर्श पर पड़ी मोमो की चटनी और पत्तल दिखायी दे रहे हैं। इससे आपातकालीन कक्ष मरीजों का इलाज का कम बल्कि कर्मचारियों की मौज-मस्ती और पार्टी का स्थान अधिक नजर आ रहा है।

इससे यहां उपचार के लिए आने वाले मरीजों को फैल सकने वाले संक्रमण की संभावना भी जतायी जा रही है। इस मामले में एसडीएम राहुल शाह ने संज्ञान लेते हुए कहा कि वह गंभीर मामला है। उन्होंने इस मामले में तहसीलदार कुलदीप पांडे को निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

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यह भी पढ़ें : (Health Problems) चिकन खाने से जीभ कटी, दंत चिकित्सक ने लगा दिये जीभ में टांके, हो गयी मौत…

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 दिसंबर 2023 (Health Problems)। उत्तराखंड के सितारगंज में दांतों के चिकित्सक द्वारा एक युवक की कटी जीभ में टांके लगाने के बाद युवक की मौत होने का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार उधमसिंह नगर जनपद स्थित सितारगंज के गणेश मंदिर निवासी नितिन कुमार कुशवाहा की चिकन खाने के दौरान जीभ कट गई थी।

इस पर वह अपने पिता के साथ पास के एक दंत चिकित्सक के पास अपनी कटी जीभ दिखाने के लिए चला गया। वहां दंत चिकित्सक ने युवक की कटी जीभ को टांके लगाकर जोड़ दिया। लेकिन बताया गया कि इससे उसका खून बहने लगा। इसके बाद उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सितारगंज लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। युवक के परिजनों का आरोप है कि दंत चिकित्सक द्वारा जीभ में टांके लगाने के कारण अत्यधिक खून बहने के कारण इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सितारगंज के चिकित्सक डॉ. रविंद्र ने बताया कि एक व्यक्ति को चिकित्सालय में मृत अवस्था में में लाया गया था। इसकी सूचना सितारगंज पुलिस को दे दी गई है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए खटीमा भेज दिया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

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यह भी पढ़ें : (Health Problems) उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद के दो रोगियों में भी दिखे चीन में फैले इन्फ्लूएंजा फ्लू जैसे लक्षण

नवीन समाचार, बागेश्वर, 30 नवंबर 2023 (Health Problems)। चीन में फैले माइक्रो प्लाज्मा, निमोनिया और इन्फ्लूएंजा फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। इधर बागेश्वर जिले में दो बच्चों में इन्फ्लूएंजा फ्लू जैसे लक्षण दिखे हैं। दोनों के नमूने जांच के लिए डॉ.सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी भेजे गए हैं।

जनपद के एसीएमओ डॉ. देवेश चौहान ने बताया कि बुधवार को जिला अस्पताल में दो बच्चों को लाया गया था। उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी। इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण की आशंका को देखते हुए दोनों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट चार-पांच दिन में मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि इन्फ्लूएंजा से निपटने के लिए भी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं।

इस वायरस जनित बीमारी में पांचवीं स्टेज में ऑक्सीजन की जरूरत होती है। जिला अस्पताल के सभी 68 बेड ऑक्सीजन पाइप लाइन से जुड़े हुए हैं। जिला अस्पताल में 650 एलपीएम के दो ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापित हैं। कांडा और कपकोट सीएचसी में भी ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगे हुए हैं। जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल में अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाया जाएगा। उसके बाद ही आईसोलेशन वार्ड बनाने की कार्यवाही की जाएगी।

अल्मोड़ा में भी स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर

चीन में फैले इन्फ्लूएंजा फ्लू और न्यूमोनिया के बाद अल्मोड़ा जिले में स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट मोड पर है। स्वास्थ्य महकमे के दावा है कि इन्फ्लूएंजा फ्लू से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। जरूरत पड़ने पर अलग से आईसीयू वार्ड भी बनाया जाएगा। सीएमओ डॉ. आरसी पंत के अनुसार जिले में इन्फ्लूएंजा फ्लू का कोई मरीज अब तक नहीं आया है। इसके निपटने के लिए हमने पूरी तैयारी कर रखी है। आइसोलेशन बेड, वार्ड, ऑक्सीजन बेड, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलिंडर पर्याप्त है। यदि जरूरत पड़ी तो अलग से आईसीयू वार्ड बनाया जाएगा।

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यह भी पढ़ें : Health Problems : हृदयाघात से 48 वर्षीय विवाहिता की मृत्यु !

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 अक्टूबर 2023 (Health Problems)। हृदयाघात एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन गया है। बुधवार को उपचार हेतु बीडी पांडे जिला चिकित्सालय लायी गयी एक 48 वर्षीय विवाहिता की मृत्यु का कारण हृदयाघात बताया जा रहा है। खास बात यह भी है कि मृतका को कोई बीमारी नहीं थी। वह कोई भी दवा आदि नहीं लेती थी।

मृतका के परिजनों ने बताया कि 48 वर्षीया विनीता शर्मा पत्नी शंकर शर्मा नगर के तल्लीताल में आर्युवेदिक अस्पताल के पास रहती थी। उसकी अपनी संतान नहीं थी। अलबत्ता वह पति तथा गोद ली हुई 5 वर्षीय बच्ची के साथ रहती थी। सुबह करीब 8-8.30 बजे उसने सीने में दर्द की शिकायत बताई। इस पर परिजन उसे 10.10 बजे जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया और मृत्यु का प्रथमदृष्टया कारण हृदयाघात होना बताया।

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यह भी पढ़ें : Health Problems : छायाकार अमित साह की मृत्यु पर परिजनों-क्षेत्रीय लोगों ने किया स्वास्थ्य सचिव का घेराव, सचिव ने सीएमओ-पीएमएस को किया दून तलब, दिये जांच के आदेश

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 सितंबर 2023 (Health Problems)। जिला मुख्यालय नैनीताल में दो दिन सुप्रसिद्ध छायाकार, व्लॉगर व पर्वतारोही अमित साह की हृदयाघात से हुयी मौत के मामले में बुधवार को जिला चिकित्सालय के निरीक्षण के लिये पहुंचे प्रदेश के स्वास्थ्य सहित आर राजेश को असहज स्थिति से गुजरना पड़ा।

स्वर्गीय साह के परिजनों व क्षेत्रीय लोगों-भाजपा कार्यकर्ताओं में इस विषय पर उन्हें घेर दिया। आखिर सचिव ने इस मामले में जनपद की मुख्य चिकित्साधिकारी और चिकित्सालय की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक को देहरादून निदेशालय तलब किया, तब जाकर विरोध कर रहे लोग वापस लौटे।

Health Problems स्वास्थ्य सचिव ने किया बीडी पांडे अस्पताल का निरीक्षणइस मामले में स्वर्गीय साह के परिजनों का कहना था कि वह अमित को सीने में दर्द होने की शिकायत पर सोमवार रात्रि लगभग दो बजे जिला चिकित्सालय लेकर आये। इस दौरान आपातकालीन ड्यूटी में तैनात ईएमओ चिकित्सक ने अमित का ईसीजी कराकर इसकी रिपोर्ट चिकित्सालय के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधांशु को भेजी और डॉ. सुधांशु ने अमित को तत्काल हायर सेंटर भेजने को कहा लेकिन ईएमओ ने कथित तौर पर इसकी जगह रात्रि में या सुबह अमित को हायर सेंटर ले जाने को कहा।

इस कारण परिजन अमित को घर ले गये, लेकिन सुबह 4 बजे यानी 2 घंटे के भीतर ही अमित का असामयिक निधन हो गया। परिजनों का आरोप था कि ईएमओ के ‘अभी या सुबह’ हायर सेंटर ले जाने को कहने की वजह से ही अमित की मौत हुई। इस पर सचिव कुमार ने बताया कि उन्होंने सीएमओ डॉ. भगवती जोशी और पीएमएस डॉ. द्रोपदी गर्ब्याल को देहरादून निदेशालय में व्यक्तिगत रूप से तलब करने के साथ मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं।

उन्होंने आश्वस्त किया है कि अगर चिकित्सालय की ओर से की गयी कोई लापरवाही सामने आएगी तो सख्त कार्यवाही की जाएगी। इस पर परिजन मान गये, अलबत्ता उन्होंने सचिव को कार्रवाई के लिए तीन दिनों का समय देते हुए कार्रवाई नहीं होने पर धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी।

इस दौरान डॉ. कुमार ने जिला चिकित्सालय में महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी को देखते हुये जल्द पदों को भरने की बात कही। इस मौके पर स्वास्थ्य निदेशक-कुमाऊं डॉ. तारा आर्य, सीएमओ डॉ. भागीरथी जोशी, पीएमएस डॉ. द्रौपदी गर्ब्याल, डॉ. एमएस दुग्ताल, डॉ. संजीव खर्कवाल, डॉ. अनिरुद्ध गंगोला व मेट्रन शशिकला पांडे आदि मौजूद रहे।

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यह भी पढ़ें : Health Problems : सरकारी चिकित्सालय में 18 माह के मासूम की मौत….

नवीन समाचार, रामनगर, 17 सितंबर 2023 (Health Problems)। नैनीताल जनपद के रामनगर के सरकारी चिकित्सालय में उल्टी दस्त से बीमार 18 माह के एक बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सालय प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कोतवाली में तहरीर दी है।

Death of a child suffering from vomiting and diarrheaप्राप्त जानकारी के अनुसार नगर के खत्याड़ी मोहल्ला निवासी मो. रिजवान ने बताया कि उसके 18 माह के पुत्र अब्दुल कादिर को शुक्रवार रात से उल्टी दस्त हो रहे थे। शनिवार सुबह 10.30 बजे वह रामनगर के सरकारी अस्पताल में बेटे को भर्ती करने के लिए गए। अस्पताल प्रशासन कभी उसे आधार कार्ड लाने तो कभी आयुष्मान कार्ड लगाने के लिए इधर-उधर दौड़ाता रहा। दोपहर सवा एक बजे अस्पताल में भर्ती किया और डेढ़ बजे उसके बेटे की मौत हो गई।

उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर बेटे के उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। कहा कि यदि समय रहते उसके बेटे को उपचार मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। मृतक बालक सभासद अजमल का भतीजा था। शाम के समय सभासद गुलाम सादिक सहित परिजनों ने कोतवाली जाकर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ तहरीर दी।

इधर पीपी मोड पर संचालित चिकित्सालय के प्रबंधक डॉ. प्रतीक सिंह ने बताया कि परिजन साढ़े 12 बजे बच्चे को चिकित्सालय लेकर पहुंचे थे। यहां चिकित्सकों ने उपचार के बाद बच्चे को भर्ती करने के लिए कहा। इसके बाद परिजन बच्चे को भर्ती करने की प्रक्रिया में लग गए।

(Health Problems) इसी बीच बच्चे की मां उसे लेकर घर चली गई। उनका कहना है कि बच्चे की मौत घर पर हुई न कि चिकित्सालय में हुई थी। दूसरी ओर, चिकित्सालय की सीएमएस डॉ. चंद्रा पंत ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। गंभीर मामला है, इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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यह भी पढ़ें : नैनीताल (Health Problems): पहाड़ चढ़े डेंगू-मलेरिया, जिला चिकित्सालय में भर्ती रोगी में हुई पुष्टि

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 सितंबर 2023 (Health Problems) पर्वतीय क्षेत्रों में मच्छरों से संक्रमित होने वाले मलेरिया व डेंगू जैसे रोगों की संभावना नहीं मानी जाती है, लेकिन देश-प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में इन दिनों चिंता का कारण बने डेंगू व मलेरिया के रोगी पर्वतीय पर्यटन नगरी नैनीताल में भी सामने आये हैं।

जनपद मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला अस्पताल में भर्ती बुखार से पीड़ित एक रोगी में डेंगू होने की पुष्टि हुई है। जबकि इससे पहले मलेरिया काएक मरीज भी यहां आया था। बताया गया है कि डेंगू का रोगी बाहर से आया है। उसके लिये चिकित्सालय में अलग व्यवस्था की गई है, ताकि वह अन्य लोगों के संपर्क में न आये।

जिला चिकित्सालय की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. द्रौपदी गर्ब्याल ने बताया कि जिला चिकित्सालय में भर्ती हुए डेंगू के मरीज की ट्रेवल हिस्ट्री है। यानी वह नगर में डेंगू से संक्रमित नहीं हुआ है, बल्कि बाहर से डेंगू से संक्रमित होकर आया है। वह यहां बुखार की शिकायत पर पहुंचा था, लेकिन जांच में उसे डेंगू होने की पुष्टि हुई है। पीएमएस ने बताया कि मरीज की स्थिति अब उपचार के बाद बेहतर है।

सर्दी-जुकाम व वायरल बुखार के मरीज भी बढ़े
नैनीताल। राज्य के अन्य स्थानों की तरह जिला मुख्यालय में भी इन दिनों सर्दी-जुकाम व वायरल बुखार के काफी मामले आ रहे हैं। जिला चिकित्सालय में भी इनके मरीज काफी बढ़ गए हैं।

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यह भी पढ़ें : नैनीताल (Health Problems) : महिला पर्यटक का अचानक बिगड़ा स्वास्थ्य, और हो गयी संदिग्ध मौत…

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 सितंबर 2023 (Health Problems)। दिल्ली से नैनीताल घूमने आई एक महिला पर्यटक का अचानक स्वास्थ्य बिगड़ गया। परिजन उसे बीडी पांडे जिला चिकित्सालय ले गए। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया और प्रथमदृष्टिया मौत का कारण हृदयाघात बताया।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार हौज खास नई दिल्ली निवासी 57 वर्षीय शहनाज सफीक अपने परिवार के साथ नैनीताल घूमने आई हुई थीं। और नगर के एक होटल में परिवार सहित ठहरी थी। शनिवार को होटल में ही महिला का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ने लगा। परिजन होटल कर्मियों की मदद से उन्हें बीडी पांडे जिला चिकित्सालय ले गए। लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुकी थी।

लिहाजा चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया और प्रथमदृष्टिया मौत का कारण हृदयाघात बताया। बाद में महिला उपनिरीक्षक प्रियंका मौर्या ने शव को पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया। पर्यटक शव लेकर दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं।

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(Health Problems) अधिवक्ता न्यायालय में जिरह करते-करते अचानक गिर पड़े और हो गई मौत… हर कोई स्तब्ध

(Health Problems) crime news advocate dies after being shot in kanpur bar association  elections sht | Kanpur News: कानपुर बार एसोसिएशन के चुनाव में फायरिंग, गोली  लगने से अधिवक्ता की मौत, जांच में जुटीनवीन समाचार, हरिद्वार 21 फरवरी 2023। (Health Problems) जिला अदालत के परिवार न्यायालय कक्ष में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक पारिवारिक वाद की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता संजय यादव अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। साथी अधिवक्ता उन्हें अस्पताल ले जाते, इससे पहले ही उनकी मौत हो गयी। अधिवक्ता की इस तरह हुई मौत से अदालत परिसर में हर कोई स्तब्ध रह गया।  यह भी पढ़ें : नैनीताल में अब दो किमी के सफर के लिए 59 की जगह चुकाने होंगे 70 रुपए

प्राप्त जानकारी के अनुसार सुभाष नगर ज्वालापुर के रहने वाले अधिवक्ता संजय यादव काफी समय से हरिद्वार के जिला एवं सत्र न्यायालय में प्रैक्टिस करते थे। सोमवार को भी वे रोज की तरह अदालत पहुंचे और पूरे दिन विभिन्न न्यायालय में जिरह की। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड: पटाखा फैक्टरी में लगी आग, लगातार हुए धमाकों से 4 लोगों की मौत, कई गंभीर घायल…

वहीं अपराह्न में वह परिवार न्यायालय में चल रहे एक वाद में अपने मुवक्किल के पक्ष में तर्क रखने के लिए न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत हुए। इस दौरान ही वह अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। साथी अधिवक्ता तत्काल उन्हें गाड़ी में डाल कर नजदीक के मेट्रो अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें जांच के दौरान मृत घोषित कर दिया।

(Health Problems) माना जा रहा है कि अधिवक्ता की मौत न्यायालय में ही हृदयाघात करने से हुई है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : 7 मिनट में ही टूटा 7 फेरे लेकर 7 जन्म निभाने का वादा, दूल्हे की फेरे लेने के बाद हृदयाघात से मौत….

रानीखेत में शादी की खुशियां मातम में बदली,फेरे लेने के दौरान दूल्हे की मौत,  हल्द्वानी से आई थी‌ बरात - Prakrit Lokनवीन समाचार, रानीखेत, 11 फरवरी 2023। दूल्हे ने अपनी दुल्हन के साथ सात फेरे लेकर सात जन्मों तक साथ निभाने का वादा किया लेकिन किसे पता था कि काल के क्रूर हाथों ने उन्हें कमोबेश सात मिनट ही साथ निभाने का मौका दिया।

(Health Problems) सात फेरों के तत्काल बाद ही दूल्हे को हृदयाघात हो गया और उसकी अस्पताल ले जाते हुए मौत हो गई। इससे शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। दूल्हा मेडिकल के क्षेत्र में ही, एक चिकित्सालय में कार्यरत था। यह भी पढ़ें : शराब कारोबारियों ने यूपीसीएल के खाते से 10.13 करोड़ रुपए अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए, सीबीआई ने किया मामला दर्ज…

प्राप्त जानकारी के अनुसार मूल रूप से पिथौरागढ़ निवासी दंत चिकित्सक डॉ. समीर उपाध्याय (30) पुत्र नवीन उपाध्याय वर्तमान में हल्द्वानी के नंदपुर, कठघरिया में रहते हैं। शुक्रवार को रानीखेत के श्रीधरगंज मोहल्ले की रहने वाली युवती के साथ उनके विवाह का कार्यक्रम रानीखेत के शिव मंदिर के बारातघर में चल रहा था। शादी में जश्न का माहौल चल रहा था।

(Health Problems) पुलिअर्घ्य के बाद शादी की रस्में शुरू हुई। बताया जा रहा है कि 3  फेरे ही हुए थे कि डॉ. समीर के सीने में अचानक दर्द उठा। इस दौरान दूल्हा-दुल्हन दोनों परिवारों के लोग नाच-गाकर खुशियां मना रहे थे। यह भी पढ़ें : कुमाऊं मंडल में निकले़ बड़े पियक्कड़, नैनीताल वाले तो सबसे बड़े पियक्कड़..

तभी अचानक दूल्हा बने डॉ. समीर अचेत होकर जमीन पर गिर गये। आनन-फानन में दूल्हे को स्थानीय एसएस श्रीवास्तव हास्पिटल ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। लेकिन हायर सेंटर ले जाते वक्त रास्ते में ही दूल्हे ने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों ने मौत का कारण हृदयाघात बताया है। बताया गया है कि दूल्हा समीर उपाध्याय मैट्रिक्स हास्पिटल में कार्यरत थे।

यह भी पढ़ें : क्या कांग्रेस को भारी पड़ रही युवाओं के कंधे पर राजनीति, पूर्व सीएम बेहोश हुए तो पूर्व नेता प्रतिपक्ष को युवाओं ने दौड़ाया, साथियों को पीटा…

इस घटना के बाद शादी का माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। किसी को समझ में ही नही आया कि क्या हुआ। दुल्हन की विदाई से पहले ही दूल्हे की मौत हो गयी। इस घटना से पूरे परिवार में शोक की लहर है। आज शुक्रवार को डॉ. समीर का अंतिम संस्कार चित्रशिला घाट रानीबाग में कर दिया गया है। इस घटना को लेकर लोग स्तब्ध रह गए हैं।

(Health Problems) उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों नैनीताल में 42 व 32 वर्षीय दो युवाओं और पिथौरागढ़ में एक 18 वर्षीय युवक की मौत हो गई थी। जबकि रानीखेत में पहले भी ऐसे ही एक दूल्हे की इसी तरह विवाह समारोह के दौरान मौत हो चुकी है। हृदयाघात से ऐसी तात्कालिक मौतों से लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति भी चिंतित हो रहे हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें :18 वर्षीय युवक की मैदान में व्यायाम करते-करते हृदयाघात से मौत…

भीषण ठंड से नसों में जम रहा खून का थक्का...हार्ट और ब्रेन अटैक से एक ही शहर  में 24 घंटे के भीतर 25 मौतें - Death toll due to heart attack and

नवीन समाचार, पिथौरागढ़, 4 फरवरी 2023। जिला मुख्यालय में भारतीय सेना में जाने की तैयारी कर रहे, और घर से 4 किलोमीटर दौड़ कर आए एक 18 वर्षीय युवक की मैदान में व्यायाम करते-करते हृदयाघात होने से अचानक गिर कर दुःखद मौत हो गई। ऐसे व्यायाम कर रहे व मात्र 18 वर्षीय युवक की मौत से हर कोई स्तब्ध रह गया है। यह भी पढ़ें : कॉलेज में 6 घंटे चला हाई वोल्टेज ड्रामा, कॉलेज की छत पर चढ़ी छात्र संघ अध्यक्ष…

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय के निकटवर्ती, चार किलोमीटर दूर स्थित कासनी गांव निवासी 18 वर्षीय युवक पारस कसन्याल पुत्र मनोज कसन्याल भारतीय सेना में भर्ती की तैयारियों में जुटा हुआ था। वह हर रोज अपने गांव से दौड़ लगाकर नगर के देव सिंह मैदान में पहुंचकर व्यायाम करता था। शुक्रवार की सुबह तड़के लगभग सात बजे वह मैदान में व्यायाम कर रहा था। तभी वह अचानक गिरकर बेहोश हो गया। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में खिली धूप के बीच चार जिलों में मौसम का अलर्ट

उसके गिरते ही मैदान में व्यायाम कर रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र लुंठी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष त्रिलोक महर व शंकर खड़ायत आदि लोग उसे लेकर अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टर अमन आलम ने उसकी हृदय गति वापस लाने के लिए तमाम प्रयास किए और अंततः उसे जांच के बाद मृत घोषित कर दिया, और मृत्यु का कारण हृदयाघात बताया।

(Health Problems) इस घटना से अस्पताल में मौजूद खिलाड़ियों एवं आम लोगों की आंखें नम हो गईं। परिजन भी तब तक अस्पताल पहुंच गए। गमगीन माहौल में युवक का शव उसके गांव कासनी ले जाया गया। युवक के आकस्मिक निधन पर नगर में शोक का माहौल है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : एक विद्यालय में आधे से अधिक बच्चे अचानक बीमार होने से दहशत, एक गंभीर बच्चा दिल्ली ले जाया गया, विद्यालय तीन दिन के लिए बंद…

नवीन समाचार, अल्मोड़ा, 28 जनवरी 2023। अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे ब्लॉक के राजकीय आदर्श उच्च प्राथमिक विद्यालय वल्मरा में पढ़ने वाले आधे से अधिक बच्चों में अचानक बुखार, खांसी और जुकाम होने से हड़कंप मच गया है। इस कारण विद्यालय को अगले तीन दिन के लिए बंद कर दिया गया है। साथ ही चिकित्सकों की टीम ने बच्चों का उपचार शुरु कर दिया है।

(Health Problems) इनमें से एक बच्चे को गंभीर स्थिति के कारण उपचार के लिए दिल्ली ले जाया गया है। अचानक फैले संक्रमण से अभिभावकों में दहशत का माहौल है। यह भी पढ़ें : युवक को जंगल में दबोचकर ले गया बाघ, वन कर्मियों के पहुंचने के बावजूद तीन घंटे तक शव को नोंचता रहा, 14 राउंड फायर कर बमुश्किल छुड़ाया शव…

बताया जा रहा है कि राजकीय आदर्श उच्च प्राथमिक विद्यालय वल्मरा में पिछले चार दिन से बच्चे एक-एक कर बुखार, सर्दी और जुकाम की चपेट में आ रहे थे। बच्चों में यह संक्रमण बेहद तेजी से फैल रहा है। विद्यालय में अध्ययनरत कुल 44 में से 22 से 25 बच्चे संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। इनमें सातवीं कक्षा के सर्वाधिक 14 बच्चे शामिल हैं।

(Health Problems) इनमें से ग्राम जनरखाण निवासी एक बच्चे की तबीयत काफी खराब हो गई थी। उसे बच्चे को परिजन उपचार के लिए घाट से भिकियासैंण और फिर दिल्ली ले गए है। यह भी पढ़ें : मिठाई बनाने में प्रयोग हो रहे थे मुर्गी दाना, फिटकरी का घोल, नकली रिफाइंड, रंग और केवड़े की खुशबू ! रुद्रपुर, हल्द्वानी, सितारगंज, अल्मोड़ा की नामी दुकानों में हो रही थी आपूर्ति

विद्यालय के प्रधानाचार्य टीआर टम्टा ने बताया कि संक्रमण बढ़ने की सूचना से उप शिक्षा अधिकारी ने जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया। चिकित्सकीय टीम की सलाह पर रविवार को अवकाश के साथ ही सोमवार और मंगलवार को भी विद्यालय बंद करने का निर्णय लिया गया है। बुधवार को स्थितियां सुधरने पर विद्यालय खोला जाएगा। यह भी पढ़ें : फर्जी डिग्री से बने चार फर्जी चिकित्सक गिरफ्तार

उधर सीएचसी प्रभारी डॉ. एसके विश्वास ने बताया कि बच्चों को बुखार व खांसी के साथ ही गले, हाथ और पैर में दर्द और गले में बलगम की शिकायत है। शनिवार को डॉ रजनीश बेदी, सीएसओ पूजा और दो आशाओं ने बीमार बच्चों का उपचार किया। साथ ही उन्हें दवाएं भी वितरित कीं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में 45 वर्षीय अधेड़ की पार्टी के बाद हृदयाघात से मौत…

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 10 जनवरी 2023। सर्दियों में अचानक हृदयाघात की अनेक डराने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसी घटनाएं हृदयरोगों के प्रति सचेत करने वाली हैं। अब हल्द्वानी में 45 वर्षीय अधेड़ की पार्टी के बाद हृदयाघात से मौत हो गई है। यह भी पढ़ें : संविदा कर्मचारियों के मानदेय में अप्रैल से बढ़ोत्तरी व KMVN-GMVN के एकीकरण सहित कई प्रस्तावों को मंजूरी…

बताया गया है कि मृतक का एक पोता भी था। वह बरेली से पोते का जन्मदिन मनाने हल्द्वानी आया था। पार्टी की अगली सुबह उसकी हृदय गति रुकने से मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है। यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में दो कॉलोनियों की खरीद-फरोख्त पर रोक…

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के बरेली गजनेरा निवासी 45 वर्ष बेगराज का बेटा राजकुमार रामपुर रोड मानपुर पश्चिम में रहता है। रामकुमार के बेटे आयुष का रविवार को जन्मदिन था। पोते आयुष का जन्मदिन मनाने उसके 45 वर्षीय दादा बेगराज भी यहां पहुंचे थे। रविवार देर शाम धूमधाम से जन्मदिन की पार्टी हुई। यह भी पढ़ें : कल से नैनीताल जनपद के आंगनबाड़ी केंद्रों में भी बच्चों के लिए छुट्टी, पर कर्मियों के लिए नहीं…

लेकिन सोमवार को दादा बेगराज अचानक घर के बाहर सड़क पर गश खाकर गिर गए। परिजन उन्हें तत्काल एसटीएच ले गए, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस भी एसटीएच पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मेडिकल चौकी प्रभारी हरि राम ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। प्रथम दृष्टया हृदयाघात से मौत हुई है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : नैनीताल में रहने-पढ़़ने वाले 12 वर्षीय बच्चे की अल्मोड़ा में डायरिया से मौत

Diarrhea outbreak in Panchkula 9-year-old child dies more than 300 sick -  हरियाणा: पंचकूला में डायरिया का प्रकोप, 9 साल के बच्चे की मौत, 300 से अधिक  बीमारनवीन समाचार, अल्मोड़ा, 6 जनवरी 2023। अल्मोड़ा जनपद के एक गांव निवासी नैनीताल में निवासरत 12 वर्षीय बच्चे की डिहाइड्रेशन-डायरिया की वजह से मौत का दुःखद समाचार है। बताया गया है कि वह तीन दिन से डिहाइड्रेशन से पीड़ित था। गुरुवार को परिजन उसे उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह भी पढ़ें : 11 वर्ष की बच्ची के घर से भागने पर पुलिस के हाथ पांव फूले, वजह चिंताजनक…

प्राप्त जानकारी के अनुसार अल्मोड़ा जनपद के हवालबाग विकासखंड के ज्यूड़ निवासी 12 वर्षीय दीपक तिवारी के पिता दिनेश चंद्र तिवारी नैनीताल के एक विद्यालय में कार्यरत हैं जबकि उसकी मां शिक्षिका है। दीपक अपने पिता के साथ नैनीताल में ही रहता था और वहीं पढ़ता था। इधर शीतकालीन छुट्टियां होने पर इन दिनों वह गांव पिता के साथ गांव आया था। यह भी पढ़ें : हल्द्वानी के बनभूलपुरा मामले में आया सर्वोच्च न्यायालय का अंतरिम आदेश…

इधर, गांव आने के बाद पिछले कुछ दिनों से उसका स्वास्थ्य खराब चल रहा था। उसे तीन दिन से लगातार उल्टियां हो रही थीं। इस कारण उसकी हालत काफी खराब हो गई थी। गुरुवार को परिजन उपचार के लिए दीपक को जिला अस्पताल ला रहे थे।

(Health Problems) बताया जा रहा है कि रास्ते में भी किशोर को उल्टी हुई। इससे उसकी हालत और बिगड़ गई। परिजन जब तक उसे लेकर अस्पताल पहुंचे तो उसे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। यह भी पढ़ें : स्पा सेंटर में बड़े स्तर पर चल रहे देह व्यापार का भंडाफोड़, दो महिला संचालकों सहित 11 महिलाओं सहित कुल 13 लोगों को गिरफ्तार

दीपक की मौत से परिजन टूट गए हैं। माता और पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। बच्चे की मौत से ज्यूड़ गांव में भी शोक छा गया। दीपक की मौत से उसके साथी भी सदमे में है। जिला अस्पताल, अल्मोड़ा की प्रभारी प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुसुमलता ने बताया कि किशोर डिहाइड्रेशन से पीड़ित था।

(Health Problems) परिजनों ने बताया कि उसे उल्टी हो रही थी। लगातार उल्टी होने से उसकी हालत बिगड़ती गई। परिजन बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे लेकिन इससे पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : निजी चिकित्सालय में फिल्म गब्बर जैसी शर्मनाक हरकत, 7 माह के मृत बच्चे को गंभीर बताते हुए थमा दिया सवा दो लाख का बिल…

Besthospitalrudrapur | Krishan Hospital & Critical Care Center | Rudrapurनवीन समाचार, रुद्रपुर, 3 जनवरी 2023। शहर के एक निजी चिकित्सालय में फिल्म गब्बर जैसी शर्मनाक हरकत किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। बताया गया है कि कृष्ण हास्पिटल एंड क्रिटिकल केयर सेंटर नाम के निजी अस्पताल में 25 मई 2022 को एक सात माह के बच्चे को भर्ती किया गया।

(Health Problems) बच्चे की मौत 26 मई को हो गई, लेकिन अस्पताल के चिकित्सक डा. पारस अग्रवाल ने 27 मई की सुबह बच्चे के पिता राहुल को बच्चे की हालत गंभीर बताते हुए सवा दो लाख रुपये का बिल थमा कर रेफर कर दिया। इस पर परिजन उसे लेकर हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचे, जहां जांच कर पता चला कि बच्चे की मौत एक दिन पहले ही हो चुकी है। यह भी पढ़ें : नैनीताल : एक भगवा झंडा लगने पर शुरू हुई राजनीति, और बढ़ा आरोप-प्रत्यारोपों का दौर…

इस मामले में राहुल ने स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और मानवाधिकार आयोग को सितंबर में शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. सुनीता चुफाल रतूड़ी ने सोमवार को जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी। उन्होंने बताया कि सभी आरोप सही पाए गए हैं। यह भी पढ़ें : सुप्रीम कोर्ट पहुंचा हल्द्वानी में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण ध्वस्तीकरण का मामला, घर बचाने को हर जुगत की जाने लगी

जांच रिपोर्ट में यह भी आया है कि कृष्ण हास्पिटल एंड क्रिटिकल केयर सेंटर के चिकित्सक डा. पारस अग्रवाल एमबीबीएस हैं और आर्ची संस्थान से डीसीएच की उपाधि प्राप्त की है, जो कि भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड देहरादून की ओर से बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है।

(Health Problems) ऐसे में अत्यंत गंभीर मरीज को बिना समय गंवाए किसी उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर किया जाना चाहिए था। इससे समय पर बच्चे को उचित उपचार मिलता और उसकी जान बचाई जा सकती थी। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : आस-पड़ोस के 8 बच्चों को अचानक होने लगे उल्टी-दस्त, एसटीएच में भर्ती, जेट्रोफा का फल खाने से बिगड़ी हालत

doctors would come from sth n women hospital in haldwani - महिला अस्पताल  में एसटीएच से डॉक्टर आएंगेनवीन समाचार, लालकुआं, 27 नवंबर 2022। शनिवार को नैनीताल जनपद के लालकुआं थानांतर्गत बिंदुखत्ता के इंदिरानगर द्वितीय गांव में आठ बच्चों को उल्टी दस्त होने से हड़कंप मच गया। पता चला कि उन्होंने जैव ईंधन बनाने के लिए प्रसिद्ध जंगली फल जेट्रोफा यानी रतनजोत खा लिया था। इससे वह बीमार पड़ गए थे। उन्हें गंभीर हालत में हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती किया गया है। बताया गया है कि उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार है। यह भी पढ़ें : नैनीताल: पेड़ पर लटका मिला 34 वर्षय व्यक्ति का शव

प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार की शाम को बिंदुखत्ता गौलागेट स्थित स्कूल से इंदिरानगर द्वितीय में रहने वाले पूरन सिंह थुवाल, दिनेश थुवाल और भगत सिंह राठौर के बच्चे घर लौट रहे थे। इसी दौरान वे अनजाने में गौला नदी के किनारे झाड़ियों की तरफ चले गए और वहां लगे जेट्रोफा के फलों को खा लिया। फल खाते ही बच्चों को उल्टियां होने लगीं।

(Health Problems) किसी तरह वह अपने घर पहुंचे। बच्चों को बीमार हाल में देखकर उनके परिजनों में हड़कंप मच गया। यह भी पढ़ें : पिता ने किये रिश्ते तार-तार, 27 वर्षीय पुत्र को कुल्हाड़ी से गला काटकर मार डाला…

उन्होंने बच्चों से उनकी हाल के बारे में पूछा तो घटना का पता चला। इस पर परिजनों ने 12 वर्षीय चेतन थुवाल, 10 वर्षीय विकास कुमार, 5 वर्षीय चंदू थुवाल, 8 वर्षय नेहा थुवाल, 7 वर्षीय कमल, 6 वर्षीय सौरभ थुवाल, 6 वर्षीय हर्षित राठौर और 8 वर्षीय जानकी राठौर को हालत बिगड़ती देख तत्काल आपातकालीन एंबुलेंस 108 की मदद से हल्द्वानी के सुशीला तिवारी चिकित्सालय में भर्ती कराया। यह भी पढ़ें : रिश्तेदारी में आये 19 वर्षीय युवक की मौत…

इधर, बच्चों के जहरीले फल खाने की सूचना पर उच्चाधिकारियों ने हल्दूचौड़ चौकी प्रभारी कृपाल सिंह को मौके पर भेजा। चौकी प्रभारी ने मौके पर पहुंचकर जानकार ली। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लालकुआं के चिकित्सा अधिकारी डॉ. लव पांडे ने कहा कि जेट्रोफा में जहरीले तत्व पाए जाते हैं।

(Health Problems) छोटे बच्चे अगर इसे खा लें तो उन्हें उल्टी, पेट दर्द व दस्त लगने लगती है, अधिक सेवन प्राण घातक भी हो सकता है। ऐसे में बच्चों को तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए। इसके बारे में जानकारी फैलाना जरूरी है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : चिंताजनक (Health Problems) : 46 वर्षीय शिक्षक कक्षा में पढ़ाते-पढ़ाते गिर पड़े, हुई हृदयाघात से मौत….

Bihar high school teachers training and exam 70 percent marks are  compulsory diksha app primary teachers online training - बिहार में अब  शिक्षकों की ट्रेनिंग और इम्तिहान, इस परीक्षा में लाने हीनवीन समाचार, पिथौरागढ़, 4 नवंबर 2022 (Health Problems) । हृदयाघात बड़ी समस्या बन गई है। अब पिथौरागढ़ के राजकीय प्राथमिक विद्यालय अनरगांव में कक्षा में बच्चों को पढ़ाते समय 46 वर्षीय शिक्षक प्रताप सिंह बिष्ट की हृदय गति रुक जाने से मौत होने का दुःखद समाचार है। घटना से शिक्षक के परिजनों के साथ ही पूरे क्षेत्र में शोक है। साथ ही कम उम्र में हृदयाघात से मौत से आम लोगों में भी चिंता व्याप्त हो गई है। यह भी पढ़ें : 24 घंटे से पहले हल्द्वानी के कारोबारी पर गोली चलाने वालों के साथ पुलिस की मुठभेड़, एक बदमाश को गोली लगी

(Health Problems) प्राप्त जानकारी के अनुसार राजकीय प्राथमिक विद्यालय अनरगांव में इसी गांव के रहने वाले एकमात्र शिक्षक प्रताप सिंह पुत्र रतन सिंह बिष्ट तैनात थे। बृहस्पतिवार को वह कक्षा में बच्चों को पढ़ा रहे थे, तभी पढ़ाते-पढ़ाते समय अचानक वह जमीन पर गिर गए और अचेत हो गए। यह भी पढ़ें : गजब: पति की मौत के बाद लाचारी में बैंक खाता बंद करने पहुंची मजदूरी करने को मजबूर महिला, बैंक ने थमा दिया 2 लाख का चेक

(Health Problems) बच्चों ने अभिभावकों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद अभिभावक और ग्रामीण बेहोशी की हालत में शिक्षक को इलाज के लिए सीएचसी गंगोलीहाट ले गए जहां चिकित्सकों ने देखने के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। स्वास्थ्य विभाग ने बेरीनाग में तैनात डॉ. सिद्धार्थ पाटनी को सीएचसी गंगोलीहाट बुलाया। डॉ. पाटनी ने अध्यापक का पोस्टमार्टम किया।

(Health Problems) चिकित्सक के अनुसार अध्यापक की मृत्यु हृदय गति रुकने के कारण हुई है। यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में दिन दहाड़े बड़ी वारदात, पुलिस कर्मी की पत्नी की घर में घुसकर हत्या

(Health Problems) स्वर्गीय प्रताप सिंह अपने पीछे पत्नी, माता और तीन बच्चों को रोता बिलखता छोड़ गए हैं। बड़ा बेटा हल्द्वानी में बीएससी कर रहा है जबकि दो बेटियों में से एक अल्मोड़ा सें बीए और दूसरी बेटी गांव के पास चौरपाल इंटर कॉलेज में पढ़ रही है। यह भी पढ़ें : नैनीताल में पिछले दिनों हुई बाइक, टीवी, मंगलसूत्र, लैपटॉप आदि की चोरियों का खुलासा

(Health Problems) उल्लेखनीय है कि सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के सुगम क्षेत्रों के विद्यालयों में तो पर्याप्त शिक्षक हैं, लेकिन दुर्गम श्रेणी के दूरस्थ के विद्यालय एकल शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। जिले के 1024 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक सहित कुल 1235 विद्यालयों में से 450 विद्यालय एकल शिक्षक के सहारे चल रहे है। ऐसे विद्यालयों में एकमात्र शिक्षक के किसी भी कारण से अवकाश पर जाने की स्थिति में स्कूल में ताला लगने की नौबत आ जाती है। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नैनीताल (Health Problems) : घायल को 108 एंबुलेंस के लिए करना पड़ा करीब डेढ़ घंटे का इंतजार

उत्तराखंड में 108 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारियों का कार्यबहिष्कार, थम गए 234  गाड़ियों के पहिए - 108 ambulance service employees strike in uttarakhand  atrc - AajTakनवीन समाचार, नैनीताल, 30 अक्तूबर 2022 (Health Problems) । नगर के हिमालय दर्शन क्षेत्र में बीती रात्रि नीरज नाम का एक युवक घायल अवस्था में बीडी पांडे जिला चिकित्सालय लाया गया। यहां चिकित्सकों ने घायल का प्राथमिक उपचार करने के बाद हल्द्वानी के हायर सेंटर रेफर कर दिया। लेकिन हायर सेंटर जाने के लिए घायल को घंटों तक एंबुलेंस नहीं मिली। इस कारण घायल एवं उसके परिजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड-बड़ा समाचार : कूड़ा बीनने वाली निकली विदेशी आतंकी की पत्नी

(Health Problems) घायल के परिजनों ने बताया कि उन्होंने 108 एंबुलेंस सेवा को फोन कर एंबुलेंस बुलाई लेकिन एंबुलेंस कर्मियों ने 2 घंटे बाद आने का समय बताया। तब तक घायल अस्पताल में ही तड़पता रहा। करीब डेढ़ घंटे बाद भीमताल से 108 एंबुलेंस नैनीताल पहुंची और घायल को हल्द्वानी हायर सेंटर ले जाया गया। यह भी पढ़ें : अचानक शव मिलने से सनसनी

(Health Problems) अलबत्ता, इस मामले में जिला चिकित्सालय के ईएमओ डॉ. हाशिम अंसारी ने बताया कि युवक संभवतया नशे में करीब 10 फिट की सीढ़ियों से गिर गया था। जिला चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार के बाद उसकी स्थिति खतरे से बाहर थी।

(Health Problems) अलबत्ता, सिर में चोट लगी होने की आशंका से उसे हल्द्वानी रेफर किया गया। इस दौरान नैनीताल की एंबुलेंस एक अन्य मरीज को लेकर गई थी, इसलिए उसके लिए भीमताल से करीब डेढ़ घंटे बाद एंबुलेंस आई। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : हल्द्वानी तक पहुंचा अफ्रीकन स्वाइन फ्लू, 8 सुअरों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, हड़कंप

African Swine Fever: मिजोरम में 87 सूअरों की मौत, स्वाइन फीवर की आशंका से  फैली घबराहट - African Swine Fever 87 pigs die in Mizoram village near  Bangladesh borderनवीन समाचार, हल्द्वानी, 7 अगस्त 2022 (Health Problems) । कोरोना के साथ लगातार नई-नई संक्रामक बीमारियां मानव जीवन पर नया खतरा बनकर उभर रही हैं। पहले से ही जताई जा रही आशंकाओं के बीच अफ्रीकन स्वाइन फ्लू हल्द्वानी तक पहुंच गया है। यहां राजपुरा क्षेत्र में भी 8 सुअरों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर पशुपालन विभाग में हड़कंप मच गया है।

(Health Problems) जनपद के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीएस जंगपांगी ने बताया कि राजपुरा और जवाहर नगर क्षेत्र से सुअरों की ब्लड रिपोर्ट टेस्ट के लिए भेजा था। जिसमें इनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इन सुअरों को जिला प्रशासन की अनुमति के बाद मारने की कार्रवाई की गई है।

(Health Problems) उल्लेखनीय है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने विभागीय अधिकारियों को भी मामले को गंभीरता से लेने के आदेश दिए हैं। अग्रिम आदेशों तक सुअर का मांस प्रतिबंधित कर दिया गया है और बीमारी की रोकथाम के लिए संक्रमित इलाकों में अतिरिक्त निगरानी बढ़ा दी गई है।

(Health Problems) अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक अत्यधिक संक्रामक और खतरनाक पशु रोग है, जो घरेलू और जंगली सुअरों को संक्रमित करता है। इसके संक्रमण से सुअर एक प्रकार के तीव्र रक्तस्रावी बुखार से पीड़ित होते हैं। इस बीमारी को पहली बार 1920 के दशक में अफ्रीका में देखा गया था। इस रोग में मृत्यु दर 100 प्रतिशत के करीब होती है और इस बुखार का अभी तक कोई इलाज नहीं है।

(Health Problems) इसके संक्रमण को फैलने से रोकने का एकमात्र तरीका जानवरों को मारना है। वहीं, जो लोग इस बीमारी से ग्रसित सुअरों के मांस का सेवन करते हैं उनमें तेज बुखार, अवसाद सहित कई गंभीर समस्याएं शुरू हो जाती हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : हल्द्वानी-काठगोदाम के तीन क्षेत्रों में ‘अफ्रीकन स्वाईन फीवर’ रोग की पुष्टि, ‘निगरानी क्षेत्र’ घोषित

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 26 जुलाई 2022 (Health Problems) । शहर में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू ने दस्तक दे दी है और चिंता को बढ़ा दिया है। डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया है कि हल्द्वानी के जवाहर नगर, नई बस्ती और काठगोदाम में सूअर पशुओं में ‘अफ्रीकन स्वाईन फीवर’ रोग की पुष्टि हुई है।

(Health Problems) इस बीमारी को बढ़ने से रोकने के लिए तीनों जगहों को तीन भागों में बांटा गया है। पूरे क्षेत्र की 1 किमी की परिधि को आगामी दो माह अथवा क्षेत्र में रोग के प्रकोप की सूचना शून्य होने तक सर्विलांस जोन यानी ‘निगरानी क्षेत्र’ घोषित किया गया है। इस जोन में सूअर के मांस व सूअर के मांस की दुकानों, सूअर के आवागमन को पूर्णतया प्रतिबिन्धत कर दिया गया है।

(Health Problems) मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को संक्रमित वार्डों एवं स्थानों में प्रभावी कार्रवाई करने, दवा युक्त धंुवा छोड़ने व सूअरों को मारने व उनका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने तथा प्रत्येक 15 दिनों के अन्तराल में इन क्षेत्रों से सूअरों के प्राप्त नमूने जांच के लिए आईसीएआर निसाद प्रयोगशाला भोपाल भेजने के निर्देश दिए हैं।

(Health Problems) इस क्षेत्र में कोई भी सूअर पशु अन्य क्षेत्रों में नही भेजा जाएगा और न ही लाया जाएगा। इस क्षेत्र से बाहर के जनपद के अन्य क्षेत्रों को बीमारी मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : जिला चिकित्सालय सहित पांच चिकित्सालय जाने के बाद भी नही बची प्रसूता की जान

Maternity Life Did Not Survive Even After Going To Five Hospitals - पांच  अस्पताल जाने के बाद भी नहीं बची प्रसूता की जान - Champawat Newsनवीन समाचार, चंपावत, 31 जुलाई 2022 (Health Problems) । इसे चिकित्सालयों की लापरवाही कहें, स्वयं जनता की बुरी किस्मत या कि व्यवस्था की बड़ी खामी, मुख्यमंत्री के गृह जनपद में जिला चिकित्सालय सहित पांच चिकित्सालय जाने के बाद भी एक प्रसूता की जान चली गई। कहने को तो कहा जा रहा है कि जिला चिकित्सालय में संध्या नाम की प्रसूता का ऑपरेशन से सुरक्षित प्रसव कराया गया,

(Health Problems) और तीन दिन तक चिकित्सालय में उसकी पूरी देखभाल भी की गई। लेकिन चिकित्सालय दोबारा आने के बाद एकाएक उसकी तबीयत बिगड़ गई। इस पर उसे हायर सेंटर रेफर किया गया और उसकी मौत हो गई।

(Health Problems) प्राप्त जानकारी के अनुसार चंपावत के बाजरीकोट निवासी 24 वर्षीय संध्या पत्नी दीपक ने गत 19 जुलाई को जिला अस्पताल में ऑपरेशन से शिशु को जन्म दिया। 21 जुलाई को जच्चा-बच्चा को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

(Health Problems) संध्या के चाचा हरीश कुमार ने बताया कि उनकी भतीजी को 23 जुलाई से लगातार बुखार रहा। दवा से राहत नहीं मिलने और तबीयत बिगड़ने पर 27 जुलाई को संध्या को फिर से जिला अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन एक दिन बाद 28 जुलाई को यहां से हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर कर दिया गया।

(Health Problems) हल्द्वानी ले जाने से पहले उसे एक निजी अस्पताल में भी दिखाया। परीक्षण के बाद निजी अस्पताल ने संक्रमण फैलने की दलील देते हुए बाहर ले जाने की सलाह दी। इस पर उसे हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल और वहां से भी जवाब देने के बाद वे 29 जुलाई को बरेली के भोजीपुरा स्थित मेडिकल कॉलेज ले गए। वहां डॉक्टरों ने संक्रमण फैलने से शरीर के अधिकांश अंगों के काम नहीं करने की जानकारी दी, और इसी दिन शाम को इसी अस्पताल में संध्या ने दम तोड़ दिया।

(Health Problems) इस पर परिजनों ने जिला अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका आरोप है कि प्रसव के दौरान लापरवाही और बाद में रेफर करने में की गई देरी की वजह से संध्या की जान गई है। इस मामले की सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, डीएम और सीएमओ से शिकायत कर जांच की मांग की है। इस पर जिला चिकित्सालय के पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी ने अस्पताल की लापरवाही से पूरी तरह से इंकार किया है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : उत्तराखंड में मरीजों को बरगला रहे 41 चिकित्सकों पर कार्रवाई की तलवार

Uttarakhand Medical Council Online Registration / Renewal | www.statusin.inनवीन समाचार, देहरादून, 7 जुलाई 2022 (Health Problems) । उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल ने विज्ञापनों में झूठे दावे करने वाले उत्तराखंड के 41 डॉक्टरों को नोटिस जारी किया है। उन्हें चेताया है कि इसके बाद भी वह न माने तो उन पर कार्रवाई की जा सकती है। बताया गया है कि प्रोफेशनल कंडक्ट, एटीक्यूट एंड एथिक्स रेगुलेशन 2002 यानी पेशेवर आचरण, रवैया एवं नैतिकता नियमन अधिनियम 2002 के तहत कोई भी चिकित्सक न तो अपनी तस्वीर किसी विज्ञापन में प्रकाशित करा सकता है और न ही कोई बरगलाने वाला दावा कर सकता है।

(Health Problems) लेकिन कई चिकित्सक किसी एक विषय के ही विशेषज्ञ होने के बावजूद अपने विज्ञापन में कई-कई दावे कर रहे हैं, और कई अधिनियम का उल्लंघन करते हुए अपनी बड़ी तस्वीरों के साथ विज्ञापन प्रकाशित, प्रसारित करा रहे हैं। मेडिकल काउंसिल की अनुशासनात्मक समिति के सदस्य सचिव डॉ. डीडी चौधरी का कहना है कि वह लगातार इन विज्ञापनों की निगरानी करते हैं। सितंबर से यह प्रक्रिया चल रही है।

(Health Problems) विज्ञापन में अपनी तस्वीर प्रकाशित कर रहे, या मरीजों को गुमराह करने वाले विज्ञापन प्रकाशित कर रहे 41 चिकित्सकों को रेगुलशन के नोटिस जारी किये जा चुके है। जबकि कई अन्य भी इस जद में हैं। चिकित्सकों को नियमों के प्रति सजग रहने को भी कहा गया है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : पीएमएस हुए सेवानिवृत्त, हृदयरोग विशेषज्ञ विहीन हुआ प्रदेश, पुनेरा को कार्यभार

world heart day: take care of your heart - हृदय रोग: लक्षण, कारण, टाइप और  परहेज - Navbharat Times Photogallery

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जून 2022 (Health Problems) । मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के पीएमएस यानी प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक का पद पिछले एक माह से संभाल रहे डॉ. केबी जोशी गुरुवार को अधिवर्षता आयु पूरी कर सेवानिवृत्त हो गए। सेवानिवृत्ति पर उन्हें जिला चिकित्सालय में अन्य सेवानिवृत्त हो रहे प्रभारी फार्मेसी अधिकारी डीके जोशी के साथ विदाई दी गई।

(Health Problems) इस अवसर पर वक्ताओं ने डॉ. जोशी के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि वह प्रदेश के सरकारी चिकित्सालयों में कार्यरत एकमात्र हृदय रोग विशेषज्ञ थे। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद जिला चिकित्सालय ही नहीं पूरा प्रदेश हृदय रोग विशेषज्ञ विहीन हो गया है।

(Health Problems) उनकी सेवानिवृत्ति के उपरांत शासन ने पूर्व में महिला चिकित्सालय के एमएस यानी चिकित्सा अधीक्षक रहे व चिकित्सालय के वरिष्ठतम चिकित्सक डॉ. वीके पुनेरा को जिला चिकित्सालय का नया प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक नियुक्त किया है। वह शुक्रवार से कार्यभार ग्रहण करेंगे। बताया गया है कि डॉ. पुनेरा का करीब 3 वर्ष का कार्यकाल शेष है।

(Health Problems) सेवानिवृत्ति पर आयोजित विदाई कार्यक्रम में जनपद की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भागीरथी जोशी, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. तरुण टम्टा, सेवानिवृत्त पीएमएस डॉ. केएस धामी, डॉ. एमएस दुग्ताल, डॉ.संजीव खर्कवाल, डॉ. मोनिका कांडपाल, डॉ.वीके मिश्रा, डॉ.अनिरुद्ध गंगोला, डॉ.प्रियांशु श्रीवास्तव, डॉ.ममता पांग्ती व डॉ.पंकज वर्मा सहित बड़ी संख्या में चिकित्सा कर्मी मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

नैनीताल (Health Problems) : आगामी 30 से जिला चिकित्सालय के साथ पूरा प्रदेश हो जाएगा हृदय रोग विशेषज्ञ विहीन

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 26 जून 2022 (Health Problems) । मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केबी जोशी इस पद पर एक माह कार्यरत रहने के बाद इस 30 जून को सेवानिवृत हो रहे हैं। वह यहां मूलतः हृदय रोग विशेषज्ञ के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि वह प्रदेश के समस्त राजकीय चिकित्सालयों में कार्यरत एकमात्र हृदय रोग विशेषज्ञ थे।

(Health Problems) इस प्रकार कहा जा रहा है कि उनकी सेवानिवृत्ति से जहां हृदय रोग विशेषज्ञ के साथ प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक का पद रिक्त हो जाएगा, वहीं प्रदेश भर के सरकारी चिकित्सालयों में एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं रह जाएगा, यानी राज्य के सरकारी चिकित्सालय हृदय रोग विशेषज्ञ विहीन हो जाएंगे।

(Health Problems) बताया गया है कि पूरे प्रदेश एवं पूरे स्वास्थ्य विभाग में वर्तमान में केवल एक ही हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ केबी जोशी हैं, जिनको दो वर्ष पूर्व नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल में तैनाती दी गई थी। इधर 31 मई को तत्कालीन प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केएस धामी के सेवानिवृत्त होने पर उन्हें इस पद पर भी तैनाती दी गई थी।

(Health Problems) डॉ. केबी जोशी का कहना है कि कार्डियोलॉजिस्ट विशेषज्ञ बनने के लिए एमबीबीएस के बाद एमडी और फिर डॉक्टरेट इन मेडिशन की पढ़ाई करनी पड़ती है। लेकिन प्रदेश के मेडिकल कालेजों में एमडी की पढ़ाई की व्यवस्था नहीं है। जिस कारण मेडिकल छात्र कार्डियोलॉजी की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते हैं।

(Health Problems) वहीं उत्तराखंड की स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. शैलेजा भट्ट ने बताया कि निदेशालय स्तर पर हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती के प्रयास किये जा रहे हैं। विशेषज्ञ चिकित्सको को सेवानिवृत होने के बाद भी सेवाकाल में विस्तार करने की व्यवस्था भी शुरू की गई है। सेवाकाल विस्तार के लिए डॉ. जोशी से बात की जा रही है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : हल्द्वानी : निजी चिकित्सालय में दिखाने के बाद चार बच्चों की हालत बिगड़ी, एक की मौत

one child dead and three infected by food poisoning in kaushambi up | फूड  प्वाइजनिंग से मासूम की मौत, परिवार के ही तीन अन्य बच्चों की हालत गंभीर |  Patrika Newsनवीन समाचार, हल्द्वानी, 28 मई 2022 (Health Problems) । जनपद के लालकुआं के आसपास के क्षेत्रों में बच्चों में खांसी, सर्दी-जुकाम निमोनिया जैसी स्थिति में तीन परिवारों के चार बच्चों को हल्द्वानी के डा. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय (एसटीएच) में पिछले तीन दिनों में भर्ती कराया गया है।

(Health Problems) इनमें से दो साल के एक बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई है, जबकि एक अन्य बच्चे की हालत भी गंभीर बनी हुई है। जबकि दो बच्चों के स्वास्थ्य में उपचार के बाद सुधार आया है। बताया जा रहा है कि बच्चों को निजी अस्पताल में दिखाया गया था। वहां खांसी की दवा पीने के बाद बच्चों की हालत बिगड़ी।

(Health Problems) प्राप्त जानकारी के अनुसार बिंदुखत्ता निवासी आठ माह के आरव और दो वर्ष के लक्ष्य नैनवाल के अलावा मोटाहल्दू निवासी 11 माह के जुड़वा भाई हिमांशु व हर्ष को बेहद गंभीर स्थिति में एसटीएच में भर्ती कराया गया था। यहां लक्ष्य नैनवाल की उपचार के दौरान शनिवार को मौत हो गई।

(Health Problems) चिकित्सकों ने बताया कि जब उसे अस्पताल लाया गया तब उसकी हालत बहुत गंभीर थी। उसके दोनों फेफड़ों में संक्रमण था। शरीर का रंग नीला पड़ गया था। उसे वेंटिलेटर पर भर्ती करना पड़ा। निमोनिया इतना बिगड़ चुका था कि उसको सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी।

(Health Problems) अन्य बच्चों को भी बुखार, जुकाम, खांसी जैसी शिकायत होने के बाद किसी निजी क्लीनिक में दिखाने के बाद खांसी की दवा दिलाने की बात बताई गई है। जिसके बाद बच्चों का स्वास्थ्य अधिक बिगड़ गया। बेहोशी होने, सांस लेने में तकलीफ जैसी गंभीर लक्षण होने पर चारों बच्चों को एसटीएच के बाल रोग विभाग में वेंटिलेटर पर रखा गया था।

(Health Problems) बाल रोग विभागाध्यक्ष डा. ऋतु रखोलिया ने बताया कि बच्चे को बार-बार बेहोशी के दौरे पड़ रहे थे। उनका कहना था कि खांसी, जुकाम की दवा से बच्चे इतनी गंभीर अवस्था में नहीं जा सकते। बच्चों के परिजनों ने फिलहाल दवा का कोई पर्चा उन्हें नहीं दिखाया है।

(Health Problems) सीएमओ नैनीताल डा. भागीरथी जोशी ने कहा कि यह गंभीर मामला है। मामले की जांच कराई जाएगी ओर लापरवाही सामने आने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद कार्रवाई-सजा का ऐलान…

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 26 मार्च 2022 (Health Problems) । अब तक लगातार नकारने के बाद राजकीय मेडिकल कालेज प्रशासन ने शनिवार को मान लिया है कि रैगिंग हुई थी, और दूसरी बार एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक कर 121 सीनियर छात्रों पर सामूहिक तौर पर कार्रवाई करते हुए सभी छात्रों पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगा दिया है।

Video Of Alleged Ragging In Haldwani Medical College Goes Viral. उत्तराखंड: मेडिकल  कॉलेज में रैगिंग, 27 छात्रों के सिर मुंडवाए गए…वायरल हुआ वीडियो. Haldwani  Medical College Ragging Videos ...(Health Problems) शनिवार को राजकीय मेडिकल हल्द्वानी के प्राचार्य कार्यालय में एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक में हाई कोर्ट के आदेश पर गठित कमेटी के सभी सदस्यों ने माना कि जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग व दुर्व्यवहार हुई है। हालंाकि रैगिंग करने वालों की पहचान नहीं हो सकी।

(Health Problems) इस आधार पर कमेटी ने सामूहिक रूप से हास्टल संख्या दो में रहने वाले करीब 121 छात्रों पर पांच हजार रुपये अर्थदंड लगा दिया। यह धनराशि चार अप्रैल तक जमा करनी होगी। अर्थदंड जमा नहीं करने वाले छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित किया जाएगा, तथा कक्षाओं से भी वंचित किया जाएगा।

(Health Problems) उल्लेखनीय है कि राजकीय मेडिकल कालेज में एमबीबीएस में प्रथम वर्ष के प्रवेश के बाद चार मार्च को एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें 27 छात्र सिर मुड़वाए हुए हास्टल से कक्षा में जाते समय सिर नीचे किए हुए और हाथ पीछे बांधे हुए चल रहे थे। सात मार्च कोएंटी रैगिंग कमेटी की पहली बैठक में पता चला कि 43 छात्रों ने सिर मुड़वाए थे।

(Health Problems) लेकिन अधिकांश छात्रों ने रैगिंग की शिकायत नहीं की थी। इसके बाद हाई कोर्ट ने नौ मार्च को जनहित याचिका की सुनवाई में कमिश्नर व डीआइजी को जांच के निर्देश दिए थे। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : महिला विधायक प्रत्याशी के गांव में महिला ने सड़क पर दिया बच्चे को जन्म

नवीन समाचार, भवाली, 20 जनवरी 2022 (Health Problems) । नैनीताल से भाजपा की प्रत्याशी व पूर्व विधायक सरिता आर्य के गांव भूमियाधार में दो घंटे तक इंतजार के बावजूद 108 आपातकालीन एंबुलेंस के नहीं आने से गुरुवार को एक महिला ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। बाद में स्थानीय लोगों की मदद से महिला को भवाली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से दोनों जच्चा-बच्चा को हल्द्वानी रेफर कर दिया गया।

(Health Problems) प्राप्त जानकारी के अनुसार मल्ला भूमियाधार निवासी निर्मला आर्य पत्नी मनोज आर्य ने सुबह नौ बजे 108 एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन 10 बजे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद परिवार और स्थानीय महिलाएं प्रसूता को सड़क तक लाई और 108 एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। जब दो घंटे बाद प्रसूता को काफी पीड़ा होने लगी और उसने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दे दिया।

(Health Problems) इसके बाद दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को हल्द्वानी रेफर किया। उम्मीद करनी होगी कि आगे इन स्थितियों में सुधार आएगा। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : जवाहर नवोदय विद्यालय में सैकड़ों छात्र सर्दी-जुकाम व पांच दर्जन वायरल की चपेट में

Jawahar Navodaya Vidyalaya, Dhungir, Purola: Admission, Fee, Affiliationनवीन समाचार, पुरोला, 28 नवंबर 2021 (Health Problems) । पुरोला के जवाहर नवोदय विद्यालय धुनगिर में वायरल बुखार से स्थिति गंभीर हो गई है। यहां कक्षा छह से लेकर 12वीं तक के सैकड़ों छात्र खांसी-जुकाम की चपेट में और इनमें से करीब पांच दर्जन से अधिक बच्चे वायरल की चपेट में बताए गए हैं।

(Health Problems) रविवार को पुरोला सीएचसी में इनमें से एक दर्जन से अधिक बच्चों का रैपिड एंटीजन व आरटीपीसीआर टेस्ट किया गया। इससे पूर्व भी विद्यालय के 35 बच्चों का आरटीपीसीआर टेस्ट किया गया था, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है।

(Health Problems) रविवार को विद्यालय की जीएनएम मीनाक्षी ने 14 छात्रों का यहां सीएचसी में रैपिड व आरटीपीसीआर टेस्ट करवाया। रैपिड टेस्ट में सभी छात्रो की रिपोर्ट निगेटिव आई है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में करीब 60 छात्र वायरल से पीड़ित है, जिनका उपचार किया जा रहा है। इनके अलावा विद्यालय में खांसी से सैकड़ों छात्र पीड़ित हैं।

(Health Problems) विद्यालय के प्राचार्य प्रमोद रावत ने बताया कि पूर्व में वायरल से पीड़ित 35 बच्चों का कोरोना टेस्ट किया गया था। वर्तमान की उनको जानकारी नहीं है। वह अवकाश पर चल रहे है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : कोरोना के उपचार में 17 लाख खर्चने के बावजूद नहीं बची महिला, अस्पताल प्रबंधन सहित अनेक चिकित्सकों-चिकित्सा कर्मियों पर दर्ज हुआ मुकदमा

नवीन समाचार, देहरादून, 3 नवंबर 2021 (Health Problems) । कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज के लिए निर्धारित से अधिक फीस लेने पर राजपुर थाना पुलिस ने राजधानी के मसूरी डायवर्जन स्थित मैक्स अस्पताल, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और पांच चिकित्सकों अन्य चिकित्सालय कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

Max Hospital, Dehradun | Health/medical/pharmaceuticals | -NA-(Health Problems) प्राप्त जानकारी के अनुसार विशाल अग्रवाल निवासी एकता एवेन्यू डालनवाला ने गत सप्ताह पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार से मैक्स अस्पताल के विरुद्ध शिकायत कर कहा था कि उनकी माता सावित्री देवी को कोरोना संक्रमण होने पर 23 अप्रैल 2021 को मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

(Health Problems) यहां कुछ दिन बाद उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने उनसे इलाज के नाम पर 17 लाख रुपये वसूल लिए, जो निर्धारित शुल्क से काफी अधिक थे। उन चिकित्सकों की भी विजिटिंग फीस वसूल की गई, जिन्होंने उनकी माता का इलाज नहीं किया। विशाल का कहना है कि इसकी पुष्टि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की ओर से भी की जा चुकी है।

उनका आरोप है कि इसके बावजूद दो जून को चिकित्सकों की लापरवाही के कारण उनकी माता का निधन हो गया। हालांकि, अस्पताल ने उन्हें अतिरिक्त धनराशि नहीं लौटाई। विशाल का यह भी आरोप है कि इस मामले में उन्होंने राजपुर थाना पुलिस और एसएसपी से शिकायत की थी, लेकिन दोनों ही स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में पुलिस महानिदेशक से गुहार लगानी पड़ी।

(Health Problems) राजपुर के थानाध्यक्ष मोहन सिंह ने बताया कि पुलिस महानिदेशक के आदेश पर मैक्स अस्पताल, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक, डा. प्रीति शर्मा, डा. पुनीत त्यागी, डा. वैभव छाजर, डा. चंद्रकांत, डा. बिपेश उनियाल सहित अन्य स्टाफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उधर, मैक्स अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मुकदमे की प्रति उन्हें प्राप्त हो गई है। वह जांच में पूर्ण सहयोग करेंगे। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : अपने पैरों पर चलकर चिकित्सालय आए तीन साल के बच्चे की अनदेखी की वजह से मौत !

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 30 सितंबर 2021(Health Problems) । ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा नई बस्ती निवासी तीन साल के बच्चे की बीती रात्रि हल्द्वानी के सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में मौत हो गई। बच्चे के परिजनों ने इसके लिए चिकित्सालय के कर्मियों एवं चिकित्सकों की लापरवाही को जिम्मेदारी बताया है और इसकी शिकायत चिकित्सालय के प्राचार्य से की है।

सुशीला तिवारी अस्पताल में तीन साल के बच्चे की मौत, स्वजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप(Health Problems) मृतक बच्चे के पिता मुकेश के अनुसार उसके बेटे कपिल को पेशाब नहीं आ रही थी, ओर वह जांघ के पास दर्द की शिकायत कर रहा था। इसके इलाज के लिए वह 24 सितंबर की शाम एसटीएच आए थे। रात इमरजेंसी में दिखाने के बाद 25 सितंबर को उन्होंने बच्चे को बच्चा वार्ड में दिखाया। इस पर चिकित्सकों ने बच्चे को भर्ती कराने की सलाह दी। 26 सितंबर को उन्होंने बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया।

(Health Problems) आरोप लगाया कि चिकित्सकों ने दवाएं मंगाने के बावजूद दवाएं बच्चे को नहीं दी। इधर बुधवार यानी 29 सितंबर की रात बच्चे की परेशानी बढ़ गई। इस दौरान चिकित्सकों ने बच्चे को देखा भी नहीं। इस कारण उसकी मौत हो गई। बच्चे के परिजनों का कहना था कि बच्चा अपने पैरों पर चलकर चिकित्सालय आया पर चिकित्सकों की लापरवाही व अनदेखी की वजह से उसकी मौत हो गई। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें(Health Problems) : पर्वतीय क्षेत्र में चिकित्सालयों की स्थापना व सीईए में शिथिलीकरण की मांग को HC में याचिका दायर

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 28 जुलाई 2021 (Health Problems) । उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के लिये हाईकोर्ट में जनहित याचिका की गई है। याचिका पर उच्च न्यायालय ने सरकार को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है।

(Health Problems) अपने साथियों के साथ इंटरनेट पर ‘कोविड हेल्प सेण्टर यूके’ व अन्य ग्रुप चलाने वाले देहरादून के सामाजिक कार्यकर्ता अभिनव थापर द्वारा दायर की गई इस याचिका में आवास विभाग से पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सालय, नर्सिंग होम व स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले संस्थानों के लिए ‘वन टाइम सेटलमेंट योजना ‘ओटीएस-2021’ में कमियों व क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट-सीईए में शिथिलता की मांग की गई है, ताकि इससे राज्य के चिकित्सालयों में बेडों की वर्तमान संख्या को घटने से रोकने व उनकी संख्या बढ़ाई जा सकेगी।

(Health Problems) याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिजय नेगी ने बताया कि हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने इस याचिका के स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के विषय का संज्ञान लेते हुए सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में अपना पक्ष रखने को कहा है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें (Health Problems) : तो बायोमेट्रिक्स मशीन से कोरोना को बुलावा देकर मेडिकल कॉलेज करेगा कोरोना की तीसरी लहर का मुकाबला !

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 24 जुलाई 2021 (Health Problems) । डा. सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज प्रशासन ने आगामी 26 जुलाई से शिक्षकों, अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए अपने कार्यालयों में आने पर बायोमेट्रिक्स तरीके से उपस्थिति लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका विरोध भी शुरू हो गया है। कर्मियों का कहना है कि एक ओर कोरोना की तीसरी लहर देश में दस्तक दे रही है, ऐसे में बायोमेट्रिक्स तरीके से उपस्थिति का फरमान कालेज के कर्मियों के लिए कोरोना को आमंत्रण देने वाला साबित हो सकता है।

(Health Problems) बताया गया है कि कॉलेज प्रशासन ने बायोमेट्रिक्स तरीके से उपस्थिति का फरमान तत्कालीन प्राचार्य डा. सीपी भैंसोड़ा ने गत 9 जुलाई को प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत द्वारा नए विभाग का जिम्मा संभालते ही मेडिकल कॉलेजों की पहली समीक्षा बैठक में दिए गए आदेशों के अनुपालन में जारी किया था। उनके तबादले के बाद नए प्राचार्य डा. अरूण जोशी ने भी उसी आदेश को लागू करने का फरमान जारी कर दिया है।

(Health Problems) उल्लेखनीय है कि मेडिकल कालेज में पहले भी बायोमेट्रिक्स तरीके से उपस्थिति की व्यवस्था थी लेकिन कोरोना शुरू होने के बाद सावधानी के तौर पर बायोमेट्रिक्स मशीनों को हटा दिया गया था। महामारी की दो लहरों तक इन मशीनों को उपयोग नहीं किया गया। लेकिन अब जब देश में तीसरी लहर का अंदेशा जताया जा रहा है, फिर से इन मशीनों के उपयोग का आदेश किसी के भी गले नहीं उतर रहा है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

‘नवीन समाचार’ में स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित पूर्व में प्रकाशित समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

(Police Karrwai) शराब पिये वाहन चला रहे चालक को नैनीताल पुलिस ने किया गिरफ्तार, वाहन किया सीज, लाइसेंस निरस्त करने की भी सिफारिश…

(Half-Burnt Body of a Women Found in the Forest) Friend's brutality, Himakat, Haldwani Vigilance arrested Teacher & Headmaster,

Police Karrwai

(Govt Orders) हल्द्वानी के बाल संरक्षण गृह की नाबालिग किशोरी के आरोपों पर मंत्री रेखा आर्य ने की कार्रवाई…

Govt Orders

RTI : कहां है महंगाई, बेरोजगारी, पैसे की कमी ? ₹5,38,67,650 करोड़ तो खर्च कर दिये वीआईपी नंबरों पर…

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Enemy Property : उत्तराखंड में अब अरबों की शत्रु संपत्तियों पर कब्जे की तैयारी में सरकार, केंद्र के बाद राज्य सरकार भी गंभीर

नवीन समाचार, देहरादून, 26 अगस्त 2023 (Enemy Property)। देहरादून में मौजूद शत्रु संपत्तियों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने डीएम सोनिका को जिले की सभी शत्रु संपत्तियों को कब्जा मुक्त कराकर उन्हें सरकारी जमीन घोषित करने के निर्देश दिए हैं। बताया गया है कि इन शत्रु संपत्तियों की वर्तमान कीमत अरबों रुपये की हैं। उधर नैनीताल जिला मुख्यालय की कम से कम से तीन सहित जिले की कई शत्रु संपत्तियों को लेकर भी जिला प्रशासन सक्रिय बना हुआ है।

अलबत्ता जिला प्रशासन के सामने सबसे बड़ी मुश्किल काबुल के कुछ बड़े जमींदारों की जमीन को लेकर है। बताया गया है कि काबुल के ये जमींदार दून में दिलाराम, सर्वे चौक, कमिश्नरी कार्यालय, ईसी रोड, आईएसबीटी के पास, राजपुर रोड, मसूरी, माजरा, चकराता में आकर बस गए थे, लेकिन बंटवारे के बाद अपनी हजारों बीघा जमीन को छोड़कर पाकिस्तान चले गए। अब कुछ लोग खुद को जमींदारों का रिश्तेदार बताकर इन जमीनों पर अपना दावा ठोक रहे हैं। हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि यह सभी जमीनें शत्रु संपत्ति हैं। लेकिन, जिला प्रशासन इन पर कब्जा नहीं ले पा रहा है।

यह भी बताया गया है कि इन जमीनों पर लोगों ने अवैध कब्जे किए हुए हैं। फर्जी रजिस्ट्री और स्टांप घोटालों की जांच में जुटे प्रशासन को ऐसी जमीनों को हेराफेरी कर सरकारी दस्तावेजों में चढ़ाने की जानकारी मिली है। ऐसे में इसकी जांच की जा रही है। इससे पहले भी एक तहसीलदार की भूमिका संदिग्ध मिलने पर कमिश्नर के आदेश पर शत्रु संपत्तियों को नगर निगम के दस्तावेजों में चढ़ने से रोक लिया गया था।

इधर बताया गया है कि उत्तराखंड में शत्रु संपत्ति को लेकर केंद्र सरकार भी गंभीर है। गृह मंत्रालय ने भी शत्रु संपत्तियों पर कब्जा लेने के आदेश दे रखे हैं और मंत्रालय लगातार इसकी निगारानी भी कर रहा है। अब सीएम पुष्कर सिंह धामी ने शत्रु संपत्ति मामले में सख्त रुख अपनाकर डीएम सोनिका को इन संपत्तियों को अपने कब्जे में लेकर उनकी चारदीवारी कराने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने इन जगहों पर बोर्ड लगाकर इनका जनहित में प्रयोग करने के लिए कहा है।

मामले में डीएम सोनिका ने बताया कि शत्रु संपत्तियों को लेकर जिला प्रशासन लगातार काम कर रहा है, चिह्नित जमीनों पर कब्जे लिए जा रहे हैं, कई मामले एडीएम प्रशासन के कोर्ट में लंबित हैं, उन पर सुनवाई चल रही है, जल्द फैसला आते ही ऐसी जमीनों पर कब्जा लिया जाएगा, शेष जमीनों पर कब्जे की प्रक्रिया चल रही है।

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यह भी पढ़ें Enemy Property : शत्रु संपत्तियों पर बड़ा समाचार : केंद्र ने राज्यों को दिया करीब 1 लाख करोड़ की इन संपत्तियों के सार्वजनिक इस्तेमाल की इजाज़त

-शत्रु संपत्तियों का कुल मूल्य एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा, इन संपत्तियों और 3000 करोड़ रुपए मूल्य की शत्रु हिस्सेदारी को बेचने का प्रयास कर रही है केंद्र सरकार
नवीन समाचार,  नई दिल्ली , 12 मार्च 2019। केंद्र सरकार ने बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए या फिर 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद चीन चले गए लोगों द्वारा छोड़ी गई कुछ शत्रु संपत्तियों के सार्वजनिक इस्तेमाल की इजाजत राज्य सरकारों को दे दी है। यह कदम केंद्र सरकार के उन प्रयासों के बीच आया है जिसके तहत वह एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा मूल्य की 9,400 शत्रु संपत्तियों और 3000 करोड़ रुपए मूल्य की शत्रु हिस्सेदारी को बेचने का प्रयास कर रही है।

गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई अधिसूचना के मुताबिक शत्रु संपत्ति आदेश, 2018 के निस्तारण के लिये दिशानिर्देशों में संशोधन किया गया है जिससे राज्य सरकार द्वारा शत्रु संपत्ति का इस्तेमाल खास तौर पर सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए किया जा सके। शत्रु संपत्तियां वो संपत्तियां हैं जो उन लोगों द्वारा पीछे छोड़ी गईं जिन्होंने पाकिस्तान और चीन की नागरिकता ले ली। मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तानी नागरिकों की ऐसी 9,280 संपत्तियां हैं जबकि चीनी नागरिकों द्वारा 126 संपत्तियां यहां छोड़ी गई हैं।

पाकिस्तानी नागरिकता लेने वाले लोगों द्वारा छोड़ी गई संपत्तियों में से 4,991 उत्तर प्रदेश में स्थित हैं जो देश में सबसे ज्यादा हैं। पश्चिम बंगाल में ऐसी 2,735 संपत्तियां हैं जबकि दिल्ली में 487 संपत्तियां हैं। चीनी नागरिकों द्वारा छोड़ी गई सबसे ज्यादा संपत्तियां मेघालय में हैं जहां ऐसी 57 संपत्तियां हैं। पश्चिम बंगाल में ऐसी 29 और असम में सात संपत्तियां हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने पिछले साल राज्यसभा को बताया था कि शत्रु संपत्तियों का अनुमानित मूल्य लगभग एक लाख करोड़ रुपए है।

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Rashtriya Sahara 13 January 2016 Page-1
राष्ट्रीय सहारा, 13 जनवरी 2016, पेज-1
  • करीब 50 हजार करोड़ की सपंत्ति के मालिक थे राजा अमीर मोहम्मद खान
  • 14 मार्च 2017  को संसद में ध्वनिमत से पारित हुआ 49 वर्ष पुराने शत्रु संपत्ति कानून में संशोधन संबंधी विधेयक
  • नैनीताल में करोड़ों का होटल, यूपी व उत्तराखंड में हैं खरबों रुपये की संपत्तियां

डॉ. नवीन जोशी, नैनीताल। करीब 50 हजार करोड़ यानी करीब पांच खरब रुपये की शत्रु संपत्ति के मालिक ‘राजा महमूदाबाद’ यानी राजा अमीर मोहम्मद खान एक पल में ‘‘रंक’ जैसी स्थिति में पहुंच गये हैं। ऐसा संसद में पास हुए विधेयक के बाद हुआ है। केंद्र सरकार की ओर से 49 साल पुराने 1968 में बने सरकारी स्थान (अप्राधित अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम 1971 कानून में संशोधन संबंधी विधेयक को मंगलवार को ध्वनिमत से पारित किया गया।

इस संशोधन विधेयक के लागू हो जाने से बंटवारे के समय पाकिस्तान चले गए अथवा 1965 और 1971 के युद्ध के बाद पाकिस्तान की नागरिकता ले चुके लोग भारत में अपनी संपत्तियों (जिन्हें शत्रु संपत्ति) कहा जाता है, का हस्तांतरण नहीं कर सकेंगे।नए विधेयक से राजा महमूदाबाद को सर्वाधिक मुश्किलें होनी तय हैं, जिनकी नैनीताल में करोड़ों के 1870 में निर्मित बताये जाने वाले मेट्रोपोल होटल व अन्य भूसंपत्ति सहित करीब 50 हजार करोड़ रुपये की सहित उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में 10 सितम्बर 1965 में शत्रु संपत्ति घोषित देश की कुल 1519 में से करीब 936 संपत्तियां हैं।

ताजा विधेयक के अनुसार उनकी संपत्तियां संबंधित जिले के डीएम के अधिकार में चली जाएंगी। विधेयक की एक धारा के अनुसार इन शत्रु संपत्तियों पर काबिज लोगों को मालिकाना हक मिलने की बात भी कही जा रही है। इसलिए काबिज लोगों के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। अलबत्ता केंद्र सरकार के इस विधेयक के बावजूद यह मामला आगे भी विवादों में रह सकता है, क्योंकि आगे राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर होने और विधेयक के कानून बनने के बावजूद संबंधित पक्षों को सर्वोच्च न्यायालय जाने का समय दिया जा रहा है, तथा सर्वोच्च न्यायालय में पहले से भी कई वाद लंबित हैं।

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जानें स्त्री व पुरुषों के शरीर के दाएं और बाएं अंगों के बारे में बेहद रोचक जानकारी, जिससे बेहतर कर सकते हैं अपना जीवन…

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 अप्रैल 2023। (very interesting facts about the right and left parts of the body of men and women) अक्सर हम सुनते हैं कि कोई कार्य दांये हाथ से और कोई कार्य बांये हाथ से किए जाने चाहिए। अक्सर सुनाई देता है दायां हाथ सही है और बायां हाथ गलत है। खासकर … Read more

गौरवशाली क्षण ! गणतंत्र दिवस की परेड में उत्तराखंड की झांकी को मिला देश में प्रथम स्थान

नवीन समाचार, देहरादून, 30 जनवरी 2023। पहली बार राजपथ की जगह बदले नाम ‘कर्तव्य पथ’ पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित हुई पहली परेड में उत्तराखंड की झांकी ‘मानसखंड’ को देश में प्रथम स्थान मिला है। इसके साथ इतिहास में उत्तराखंड राज्य का नाम दर्ज हो गया। यह भी पढ़ें : दुःखद ब्रेकिंग: नैनीताल … Read more

सीएम ने कहा गुलामी के सभी प्रतीको के नाम बदलेंगे, क्या मॉल रोड से लेकर अन्य स्थानों व संस्थानों के नामों तक भी जाएगी यह मुहिम…?

I Love Nainitalनवीन समाचार, नैनीताल, 29 अक्तूबर 2022। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को एलान किया है कि राज्य में उपनिवेशवाद यानी गुलामी के सभी प्रतीकों के नाम बदले जाएंगे। उन्होंने कहा, राज्य में उपनिवेशवाद के सभी प्रतीकों का दोबारा नामकरण किया जाएगा। यह भी पढ़ें : एक बार फिर खाकी पर हमला, गश्त के दौरान किया लोहे की रॉड से हमला…

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बाद देश में उपनिवेशवाद के सभी प्रतीकों को बदला जा रहा है। उत्तराखंड में सड़कों और शहरों के नाम अंग्रेजों के जमाने के हैं जिनको बदला जाएगा। हमने निर्देश दिए हैं कि राज्य कि उपनिवेशवाद के सभी प्रतीकों का नाम बदल दिया जाए। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड-बड़ा समाचार : कूड़ा बीनने वाली निकली विदेशी आतंकी की पत्नी

गौरतलब है कि इसी कड़ी में प्रदेश में लेंसडाउन का नाम बदलने की कवायद शुरू हुई है। आगे देखने वाली बात होगी प्रदेश सरकार क्या छोटी बिलायत भी कही जाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल के मॉल रोड, स्नो व्यू, लेंड्स इंड, डॉर्थी शीट-टिफिन टॉप, कैमल्स बैक व लवर्स प्वॉइंट आदि अंग्रेजी नामों को भी बदलती है, या कि यह मुहिम नगर के सबसे पहले बताए जाने वाले घर पिलग्रिम लॉज व इससे लगे पिलग्रिम कंपाउंड से लेकर नगर के चार्टन लॉज, मेविला कंपाउंड, स्टोनले कंपाउंड व लांग व्यू आदि इलाकों से होते हुए नगर में मौजूद एशिया के सबसे पुराने मैथोडिस्ट चर्च सहित अन्य चर्चों व उसी दौर के कॉन्वेंट स्कूलों तक भी जाती है या नही….। 

नैनीताल में औपनिवेशिक पहचान वाले व विरासत महत्व के कुछ भवनों के नाम :

पिलग्रिम हाउस (1841), सेंट जॉन्स इन द विल्डरनेस चर्च (1846), मेथोडिस्ट चर्च (1858), शेरवुड कालेज (1869), सेंट मेरी कान्वेंट (1878), सेंट जोसफ कालेज (1880), गर्नी हाउस (1881), ग्रांड होटल (1892), रैमजे अस्पताल (1892), कैपिटॉल सिनेमा (1892), फेयरहैवन्स, वेल्वेडियर, क्लिफटन, ग्रासमेयर, प्रेयरी, न्यू बेरी लॉज, डडली ग्रोव, वुडस्टाक, मुलाक्लो, एवरफायल, माउंट प्लेजेंट, सेंट लू गार्ज, हटन हॉल, आर्ममोर, आर्डवेल, आर्ल्सफोर्ड, ब्रुकहिल, अर्ल्सकोर्ट, चार्लटन लॉज, कोजी विला, क्रेगलैंड, सैंट क्लाउड, डरहम हाउस, डांडा हाउस, एजहिल, एल्समेर, फर्न कॉटेज, फेयरी हॉल, ग्लेनथार्न, ग्लेनली, ग्लेनको, हेथार्न विला, हेल्वेलिन, हॉक्सडेल, ऐटन हाउस, ऐमिली कॉटेल, जुबली एस्टेट, ज्वाला काटेज, केनिलवर्थ, केंटन लॉज, किलार्नी, लेंगडेल एस्टेट, लंघम हाउस, लौगव्यू, मेनर हाउस, मेट्रोपोल, मेविला, मेलरोज, नारफोक काटेज, ओक रिज काटेज, ओक लॉज, ओल्ड लन्दन हाउस, सेवन ओक्स, प्रायरी, पैरामाउंटसी, प्रिमरोज, कैंट क्विनटिन, रॉक हाउस, रोजमाउंट, स्प्रिंगफील्ड, स्टेनली हॉल, स्टेफोर्ड हाउस, सिल्वर डेन, स्ट्रॉवरी लॉज, सफौक्र हॉल, सनी बैक, सनी डेन, टेम्पलटेन हॉल, थेनेट विला, दि हाइव, वेलहैड, वर्नन काटेज, वेभरली काटेज, फारेस्ट काटेज आदि। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : चार दिन की लगातार-भारी बारिश से नैनीताल में अस्तित्व में आए तीन नए ताल

New Lakes in Ayarpattaडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 10 अक्तूबर 2022। पहाड़ों पर पिछले चार दिनों से लगातार हो रही तेज बारिश से झीलो के शहर नैनीताल के अयारपाटा क्षेत्र में तीन पुराने ताल फिर से सक्रिय हो गये हैं। इनमें से एक ताल शेरवुड कॉलेज के पास एवं एवं दो अरविंदो आश्रम के पीछे पानी से लबालब भरे नजर आ रहे हैं।

अरविंदो आश्रम के पास दो ताल आपस में कुछ मीटर की दूरी पर हैं, और अधिक बारिश होने व भरने पर यह दोनों एक ही झील बन जाते हैं। अभी इन दोनों के बीच करीब 10 मीटर का फासला बना हुआ है। इनके अलावा नैनी झील की सर्वाधिक जल प्रदाता मानी जाने वाली सूखाताल झील भी काफी हद तक बारिश के पानी से भर गई है, जबकि नैनी झील पूरी भरने के बाद इसके गेट कल से खोल दिए गए हैं। देखें विडियो :

क्षेत्रीय सभासद मनोज साह जगाती ने बताया कि शेरवुड कॉलेज के पास के ताल को कृत्रिम बनाने का प्रस्ताव नगर पालिका की बोर्ड बैठक में आया था, इसका उन्होंने विरोध किया था। उनका मानना है कि इन तालों को बिना कुछ भी कृत्रिम तौर पर किए प्राकृतिक स्वरूप में ही रखा जाना चाहिए, जिससे इन्हें भरने वाले प्राकृतिक जलस्रोत प्रभावित न हों, और नैनी झील के जलागम क्षेत्र में होने के कारण इनका पानी रिस-रिस कर लंबे समय तक नैनी झील को रिचार्ज करता रहे।

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यह भी पढ़ें : एक बार फिर शुरू हुई ‘नैनीताल बचाने’ की मुहिम

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 6 मार्च 2022। एक बार फिर नैनीताल बचाने की मुहिम शुरू हुई है। अधिवक्ता नितिन कार्की की अगुवाई में नगर के नए गठित हो रहे ’नैनीताल बचाओ अभियान’ की बैठक में नगर में बाहरी लोगों के बढ़ते दखल एवं नशे के बढ़ते शिकंजे पर चिंता जताई गई, तथा मिलकर इन मुद्दों पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया गया।

बैठक में अनुज साह ने प्रदेश में भू-काननू लागू किए जाने पर बल दिया। जबकि रोहित जोशी ने नगर में नगर के ही मूल निवासियों को स्थानीय रोजगार उपलब्ध करवाना इस अभियान की प्राथमिकता है। अधिवक्ता कार्की ने नगर में हो रहे अतिक्रमण पर चर्चा की और उसके समाधान हेतु अपने विचार रखे। अधिवक्ता नवीन जोशी ‘कन्नू’ ने शहर में बढ़ रहे नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने एवं टैक्सी चालकों द्वारा मनमाना किराया वसूलने की समस्याएं उठाईं।

पत्रकार कमल जगाती ने इस बात पर जोर दिया कि किस प्रकार नगर के समाज को एकजुट करके शहर में बढ़ रहे आपराधिक मामलों से निजात दिलाई जाये। बैठक में भास्कर जोशी, हर्षित साह, सुरेश बिनवाल, ममता रावत, भावना रावत, भागवत मेर, रविंद्र, किशन मेहरा, चंदन जोशी व सभासद मनोज साह जगाती आदि लोग उपस्थित रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नैनीताल के विधायक ने इस्तीफा दिया तो पूर्व विधायक ने संभाला मोर्चा…

-केंद्र व राज्य सरकार को आपदा राहत की मांग पर भेजे ज्ञापन

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 28 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड क्रांति दल की ओर से गुरुवार को पूर्व विधायक डॉ नारायण सिंह जंतवाल के नेतृत्व में कुमाऊं मंडल के आयुक्त सुशील कुमार से मुलाकात की गई, और उन्हें भारत सरकार तथा राज्य सरकार को संदर्भित एक ज्ञापन सोंपा गया।

ज्ञापन में गत 17 से 20 अक्टूबर के मध्य हुई अतिवृष्टि से जनित आपदा के दृष्टिगत राज्य को विशेष आर्थिक पैकेज के साथ ही वृहद कार्ययोजना तैयार किए जाने की मांग भी की गई।

ज्ञापन में डॉ. जंतवाल की ओर से कहा गया है कि नैनीताल विधानसभा क्षेत्र वर्तमान में प्रतिनिधित्व विहीन है। ऐसे में यहां के प्रथम निर्वाचित विधायक होने के नाते वह इस क्षेत्र के लिए इस आपदा के बाद सतत विकास हेतु अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों से समग्र नीति तैयार करने का अनुरोध करते हैं।

उन्होंने इस आपदा में प्रभावितों का सही चिन्हीकरण करने एवं परिवार के एक व्यक्ति को तत्काल सरकारी नौकरी दिए जाने के साथ ही नैनीताल नगर के लिए अल्पकालीन के साथ दीर्घकालीन योजना तैयार किए जाने एवं नगर के हितधारकों को साथ लेकर नई पर्यटन नीति बनाने की मांग भी की है। प्रतिनिधिमंडल में प्रकाश पांडे, सज्जन साह, खीमराज बिष्ट, हरीश वारियाल, मदन सिंह बगडवाल व भगवत पंत आदि लोग शामिल रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : 18 सितंबर 1880 जितनी ही बारिश के बावजूद सुरक्षित रहा नैनीताल, जानें सबक और संदेश…

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 21 अक्टूबर 2021। 18 नवंबर 1841 से बसासत प्रारंभ होना माने जाने वाले नैनीताल के लिए 18 की तारीख तीसरी बार हमेशा के लिए याद रखने योग्य बन गई है। इधर 17, 18 व 19 अक्टूबर के बीच तीन दिनों में नैनीताल में 90, 445 व 60 मिलीमीटर यानी करीब 600 मिलीमीटर यानी करीब 24 इंच बारिश हुई है।

जबकि 18 सितंबर 1880 को भी यहां 16 सितंबर से तीन दिनों के बीच करीब 40 घंटों में 35 इंच यानी 889 मिलीमीटर बारिश होने का रिकॉर्ड दर्ज है। यानी करीब 180 वर्षों के बाद नगर में बारिश का इतिहास दोहराया गया। किंतु दोनों घटनाओं में नुकसान की दृष्टि से बड़ा अंतर है।

18 सितंबर 1880 को ऐसी ही बारिश से आठ सेकेंड के भीतर नैनीताल का भूगोल ही बदल गया था। तब 2500 की जनसंख्या के नैनीताल नगर में 151 लोग जिंदा दफ्न हो गए थे और तब का एशिया का सबसे बड़ा कहा जाने वाला मेयो होटल और तत्कालीन नयना देवी का मंदिर सहित बड़ा हिस्सा जमींदोज हो गया था। इसके बाद ही मलबे से डीएसए मैदान का निर्माण किया गया था। लेकिन इस बार उतनी ही बारिश होने के बावजूद नगर में एक भी जनहानि नहीं हुई है।

इसके पीछे अंग्रेजों द्वारा तब सबक लेकर बनाए गए 100 शाखाओं युक्त कुल एक लाख छह हजार 499 फिट लंबे 50 नालों की बड़ी भूमिका है जो नगर के पूरे बरसाती पानी को नैनी झील में ले जाते हैं और नगर को भूस्खलन से बचाते हैं। इसलिए हमेशा इन नालों को साफ रखने, इनके आसपास अतिक्रमण न करने व इनमें गंदगी न डालने की अपील की जाती है। इस बार नगर में दो भूस्खलन बलियानाला व बिड़ला क्षेत्र में कुमाऊं लॉज के पास हुए हैं। इसके अलावा गत दिनों से केपी छात्रावास के पास भूस्खलन हो रहा है। यह वह क्षेत्र हैं जहां अंग्रेजी दौर में बसात नां के बराबर थी। इसलिए यहां नाला सिस्टम अन्य स्थानों की तरह नहीं बन पाया था।

नगर में फिर नजर आने लग छिटपुट सैलानी
नैनीताल। आपदा के बाद नगर में फिर से छिटपुट सैलानी टहलते एवं नैनी झील में नौकायन करते नजर आने लगे हैं। गौरतलब है कि नगर में अब सभी ओर से सड़कों, बिजली, पानी व इंटरनेट आदि की आपूर्ति सुचारू हो गई है। इसलिए अब यहां आने-जाने में किसी भी तरह का भय नहीं है। केवल हल्द्वानी रोड पर बड़े वाहन अभी नहीं चल पा रहे हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नैनीताल जनपद में आपदा से सरकारी संपत्तियों को 102 करोड़ के नुकसान का प्रारंभिक अनुमान, दूसरे दिन भी दर्जन भर शवों के बरामद होने की सूचना नहीं… 

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 20 अक्टूबर 2021। नैनीताल जनपद में पिछले तीन दिनों में दैवीय आपदा से हुए नुकसान पर जिला प्रशासन बुधवार को पूरी तरह से एक्टिव मोड पर आ गया। डीएम धीराज गर्ब्याल ने बताया कि प्राथमिक तौर पर नैनीताल जनपद में आपदा से लोक निर्माण विभाग, सिचाई विभाग व लघु सिचाई आदि की राजकीय परिसंपत्तियों को 102 करोड़ की क्षति होने का अनुमान है। विस्तृत आंकलन कराया जा रहा है।

देखें वीडियो:

उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालय के धोबीघाट क्षेत्र में रह रहे 100 परिवारों को यहां नैनी झील का अत्यधिक पानी आने के कारण जीजीआईसी में शिफ्ट करने को कह दिया गया है। वहां सभी कमरे खुलवा दिए गए हैं। उधर रामनगर के वन ग्राम सुंदरखाल के 30 लोगों को एयरलिफ्ट एवं पांच लोगों को राफ्टिंग के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, तथा यहां बाढ़ राहत शिविर का संचालन कर उनके लिए लगभग 90 कुंतल राहत सामग्री पहुंचाई गई है।

देखें नैनीताल-रामनगर में बारिश के कहर सहित हल्द्वानी में गौला पुल के टूटने का लाइव वीडियो : 

इसी तरह वन ग्राम पूछड़ी नई बस्ती के 10 परिवारों के 54 लोगों को स्थानीय राजकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय में शिफ्ट किया गया है। चूकम गांव में राफ्टों के माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाई गई है। वहीं लालकुआं में लगभग 97 बाढ़ प्रभावित परिवारों को गुरुद्वारे में शिफ्ट किया गया है। तल्ला रामगढ़ में फंसे यात्रियों को राशन किट उपलब्ध कराई गई हैं।

देखें कैसे नैनीताल में नैनी झील के उफ़नते पानी से लोगों को बचाने के लिए सेना को संभालनी पड़ी कमान : 

धारी व झूतिया में बचाव कार्यों के लिए टीमें भेजी गईं, अभी शवों के बरामद होने की सूचना नहीं 
नैनीताल। डीएम श्री गर्ब्याल ने बताया कि धारी एवं झूतिया रामगढ़ में कई लोगों के मलबे में दबे होने की सूचना है। मार्ग अवरुद्ध होने के कारण यहां बचाव टीमें नहीं पहुंच पा रही थीं। इस पर धारी के लिए एनडीआरएफ के 20 सदस्यीय दल को हैलीकॉप्टर से शशबनी में उतारा गया है। वहां से 7 किलोमीटर सड़क व सात किलोमीटर पैदल चलकर यह दल घटनास्थल थलाड़ी की ओर रवाना हो गया है। जबकि रामगढ़ के झूतिया में एसडीएम के नेतृत्व में एनडीआरएफ का 12 सदस्यीय दल तथा ग्राम बोहराकोट के लिए एनडीआरएफ का 8 सदस्यीय दल चिकित्सा टीम के साथ मौके पर पहुचं गया है।

देखें आपदा में नैनीताल के हाल :

इसके अलावा उन्होंने बताया कि चौखुटा में पांच बिहारी मजदूरों के शवों को बिहार के अधिकारियों से समन्वय कर दिल्ली भेजने का प्रबंध किया जा रहा है। बताया गया है कि झूतिया के पास ही सकुना में 9 नेपाली मजदूर एक घर में दबे हुए हैं। ‘नवीन समाचार’ ने बुधवार के अंक में यहां घर के बाहर मलबे में दबे एक मजदूर का चित्र भी प्रकाशित किया था। वर्तमान में इस क्षेत्र में बिजली व मोबाइल कनेक्टिविटी न होने से किसी से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है।

कैंची व बोहराकोट में चार शव बरामद, पर सकुना में दबे 9 शवों पर अभी भी कोई जानकारी नहीं
नैनीताल। नैनीताल पुलिस व एनडीआरएफ की टीम ने बुधवार को कैंची धाम के पास घर में दबे हुए 21 वर्षीय रिचा एवं 18 वर्षीय अभिषेक तथा बोहरा कोट रामगढ़ में 70 वर्षीय शंभू दत्त डालाकोटी व 59 वर्षीय बसंत डालाकोटी के शवों को मलबे से निकाल लिया। इसके बाद शवों के पंचायतनामा की कार्रवाई की जा रही है।

तल्लीताल थाना पुलिस ने महाराष्ट्र के सैलानियों के दल को बचाया
नैनीताल। तल्लीताल थाना पुलिस ने महाराष्ट्र के बुजुर्ग सैलानियों के 27 सदस्यीय दल की आपदा के दौरान होटल में ठहराने से लेकर उन्हें भोजन उपलब्ध कराने सहित पूरी मदद की। इस पर थाना पुलिस की कार्यशैली की सैलानियों ने भी प्रशंसा की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के यह पर्यटन चार धाम यात्रा पर हरिद्वार जाते हुए नैनीताल से गुजर रहे थे, तभी यह आपदा आ गई। महाराष्ट्र सरकार की ओर से उत्तराखंड सरकार को इनके फंसने की सूचना दी गई। इस पर तल्लीताल थाना पुलिस ने इन्हें रेस्क्यू कर एक होटल में ठहराया गया, एवं शीला होटल के शैलेंद्र साह के माध्यम से भोजन उपलब्ध कराई गई। इस दौरान पुलिस को तल्लीताल से शीला होटल तक जाने के लिए डांठ एवं मॉल रोड पर भरे पानी में पुलिस की गाड़ी के भी न चल पाने के कारण रोडवेज बस की सहायता लेनी पड़ी। इस पर सैलानियों ने पुलिस के साथ ही नगर की जनता की भी हर संभव सहायता के लिए आभार जताया। इसके बाद उन्हें हल्द्वानी के लिए रवाना कर दिया गया।

कुमाऊं लॉज निवासी पांच परिवारों का सबकुछ आपदा में तबाह
नैनीताल। प्राप्त जानकारी के अनुसार 18 अक्टूबर की रात्रि करीब ढाई बजे नगर के बिड़ला विद्या मंदिर के पास कुमाऊं लॉज में पांच परिवारों के घरों के पीछे बड़ा पत्थर आकर गिरा। इस पर यहां रहने वाले इरफान पुत्र रियाज व गौरव पुत्र मदन राम के परिवार के सात-सात लोग, दीपक पुत्र आनंद राम के परिवार के 6 लोग व विवेक पुत्र ललित के परिवार के चार, हिमांशु पुत्र जमन के परिवार के पांच यानी कुल 34 लोगों ने तत्काल खाली किए। घर खाली करते ही इनके घरों में मलबा घुस गया। इस कारण इनके घर का सारा सामान तहस-नहस हो गया। बुधवार को इनकी सूचना मिलने पर तल्लीताल व्यापार मंडल अध्यक्ष मारुति नंदन साह की ओर से उनके लिए भोजन की वैकल्पिक व्यवस्था की गई। वहीं प्रशासन भी उन्हें जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है।

बचाव कार्य में योगदान देते आईजी सेल के संयोजक चोटिल
नैनीताल। आपदा के दौरान पुलिस एवं सेना के साथ कई स्थानीय युवकों ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया। इसी कार्य में लगे भारतीय जनता पार्टी के नगर मंडल के आईटी सेल के संयोजक आयुष भंडारी तल्लीताल की दुकानों में फंसे लोगों को पानी के भयानक बहाव से बचाते हुए चोटिल हो गये। उनके सिर में गंभीर चोट आ गई। इस पर उनके सिर में 3 टांके लगाने पड़े हैं। साथ ही उनके हाथ, पैर और कमर में भी चोट आई है।

सेना के 100 जवानों ने भी दिया बचाव कार्यों में योगदान
नैनीताल। डीएम धीराज गर्ब्याल ने जनपद के कैंची-खैरना क्षेत्र में आपदा से हुए भारी नुकसान को देखते हुए 14-डोगरा रेजीमेंट रानीखेत को खैरना, कैची, निगलाट व रामगढ क्षेत्र में राहत व बचाव कार्य हेतु वार्ता की। इस पर मेजर नरेंद्र व मेजर कोयाक के नेतृत्व में बटालियन की ओर से तुरंत 100 जवानों की दो रेस्क्यू टीमें प्रभावित इलाकों में पहुंचीं और खैरना में फंसे लगभग 500 लोगों को पैक किया हुआ भोजन और खाने का सामान व पानी वितरित किया। बटालियन की मेडिकल रिएक्शन टीम के प्रशिक्षित जवानों के द्वारा चिकित्सा इकाई स्थापित कर प्रभवितों की चिकित्सा जांच कर उपचार भी किया गया। भोजन तैयार करने के लिए खैरना में एक कुक हाउस भी स्थापित किया गया और त्वरित बचाव कार्य कर फंसे हुए लोगों को निकाला।

डांठ में दरार की खबरों का खंडन
नैनीताल। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता केएस चौहान ने नगर की नैनी झील के आधार तल्लीताल डांठ में आपदा से दरार आने की खबरों का खंडन किया है। श्री चौहान ने पूछे जाने पर बताया कि पुराने रोडवेज बस स्टेशन के पास जिला कलक्ट्रेट जाने वाले मार्ग की ओर डामरीकरण में कुछ दरार नजर आ रही हैं। इस पर उन्हांेने व लोक निर्माण विभाग की टीम ने निरीक्षण किया। लेकिन यह केवल डामर की ऊपरी परत पर दरार है।

ज्योलीकोट क्षेत्र में ग्रामीणों को हुआ आपदा से भारी नुकसान
नैनीताल। पिछले तीन दिनों में आई आफत की बारिश एवं इस दौरान नैनी झील से बलियानाले में गए पानी से ढाकाखेत मे दलीप सिजवाली व पूरन सिजवाली की 6 नाली से ज्यादा भूमि, गाँव का रास्ता, सरियाताल मोटरमार्ग का बड़ा हिस्सा, काजवे, नाले में बने दो पुल बह गए। साथ ही बलियानाला से सटे गोठानी, वीरभट्टी, ढाकाखेत व सरियाताल गाँवों पर खतरा बन गया। इससे लोग दहशत में है। इसके अलावा चोपड़ा में धन सिंह राठौर का आवासीय परिसर, बसगांव में चंदन सिंह कठैत व लक्ष्मण सिंह कठैत आदि की गौशाला, सुरक्षा दीवारें और तकरीबन 3 नाली भूमि, ज्योलीकोट में इम्लड़ा जॉन व अजित सुलोमन के आवास के पीछे, ज्योलीकोट में कैलाश आर्य, प्रकाश चंद्र बेलुवाखान में विजय कुमार व दयाल राम के आवास, स्यालीखेत में सचिन कुमार के आवासीय परिसर के साथ बेलुवाखान के कूँड़, सोलिया ग्रामों में ऊपरी हिस्से में भी भूस्खलन से काफी नुकसान हुआ है, और ग्रामीण दहशत में है।

शेरवानी होटल प्रबंधन ने चलाया कैनेडी पार्क में सफाई अभियान
नैनीताल। नगर के शेरवानी हिल टॉप होटल के कर्मियों ने बुधवार को आपदा के बाद नगर की मॉल रोड के करीब कैनेडी पार्क के पाथ-वे यानी पैदल रास्ते पर सफाई अभियान चलाया। अभियान में होटल के प्रबंधक गोपाल दत्त, दिनेश पालीवाल, जीवन बिष्ट, विनोद पाठक, सूरज, मदन, राजेंद्र कुमार, प्रेम सिंह, राज कुमार, प्रकाश नेगी, अर्जुन, कमल व पान सिंह आदि लोग शामिल रहे।

पुलिस-आरटीओ ने कैंची धाम में फंसे यात्रियों को निकाला
नैनीताल। नैनीताल पुलिस तथा संभागीय परिवहन के द्वारा कैची मंदिर धाम में फंसे यात्रियों व पर्यटकों को शटल सेवा के माध्यम से भवाली भेजा गया। इससे दो दिन से फंसे यात्रियों ने राहत की सांस ली।  आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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-पर्वतीय शैली में विकसित होगी मल्लीताल की खड़ी बाजार, डीएम ने स्थानीय हितधारकों के साथ की बैठक
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 1 जुलाई 2021। खड़ी बाजार मल्लीताल तथा राम सेवक सभा को पर्यावरण के अनुकूल एवं परम्परागत शैली में सौंदर्यीकरण करते हुए विकसित किया जायेगा। यह बात जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने बृहस्पतिवार को एलडीए सभागार में खड़ी बाजार के दुकानदारों एवं हितधारकों के साथ क्षेत्र के सौन्दर्यीकरण एवं विकास हेतु आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में कही।

श्री गर्ब्याल ने कहा कि सरोवर नगरी नैनीताल पर्यटकों लिए आकर्षण का केंद्र होने के कारण वर्ष भर देश-दुनिया के सैलानियों की आमद बड़ी तादाद में होती है। उन्होंने कहा कि नगर के विभिन्न क्षेत्रों का पर्यावरण के अनुकूल तरीके से पहाड़ी एवं परम्परागत शैली में विकास किया जायेगा, जिससे नैनीताल में आने वाले पर्यटक यहां की परंपरागत पहाड़ी शैली के भी दर्शन कर सकें। उन्होंने बताया कि खड़ी बाजार की दुकानों एवं रास्तों का स्थानीय शैली में विकसित करते हुए बिजली, टेलीफोन आदि के तारों की भूमिगत व्यवस्था की जायेगी। दुकानों के आगे व किनारों पर पर सागरा फटबार शैली के तथा रास्ते के निर्माण में ग्रेनाइट कोबल पत्थर का उपयोग किया जायेगा।

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नगर की मल्लीताल खड़ी बाजार का प्रस्तावित चित्र।

रामलीला ग्राउंड में पटाल आदि का उपयोग ओपन एयर थिएटरनुमा बैठने की जगह बनायी जायेगी। इस दौरान उन्होंने शहर के हाईड्रेन्ट को चेक करने तथा बंद पड़े हाईड्रेंट को सुचारू कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने रामलीला ग्राउंड के दुकानदारों को काम पूरा होने तक अन्य उचित स्थान पर दुकान एवं स्थान आवंटित करने के निर्देश अधिशासी अधिकारी नगर पालिका को दिये। बैठक में एडीएम अशोक जोशी, एसडीएम प्रतीक जैन, जिला विकास प्राधिकरण के सचिव पंकज उपाध्याय, अधिशासी अधिकारी अशोक कुमार वर्मा, अध्यक्ष राम सेवक सभा मनोज साह, जगदीश बवाड़ी सहित दीपक गुरुरानी, सर्वप्रिय कंसल, सुमित कुमार, नीरज नयाल, संजय नागपाल व अर्शी खान आदि लोग उपस्थित रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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-सौंदर्यीकरण के साथ तल्लीताल में पार्किंग व विद्युत बिल जमा कराने की व्यवस्था होगी
1945 October Tallitalनवीन समाचार, नैनीताल, 19 मार्च 2021। डीएम धीराज गर्ब्याल के सरोवरनगरी के सौन्दर्यीकरण, विरासत महत्व के भवनों एवं सड़कों के पुर्नविकास की दिशा में शुक्रवार को जिला कार्यालय सभागार में पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से शहर के विभिन्न क्षेत्रों हेतु तैयार की गयी कार्य योजना के बारे में शहर के गणमान्य व्यक्तियों को जानकारी देते हुए विस्तार से चर्चा की गई।

इस दौरान श्री गर्ब्याल ने रेमजे रोड, तल्लीताल बाजार, डांट चौराहे, मल्लीताल बाजार, पालिका बाजार, राम सेवक सभा एवं रामलीला ग्राउंड, रिक्शा स्टैंड, ओपन एयर थियेटर को विरासत के रूप में विकसित करने हेतु तैयार की गयी कार्य योजना उपस्थित लोगों के समक्ष रखी। साथ ही शहर में पार्किंग व्यवस्था हेतु किये जा रहे कार्यों के बारे में भी विस्तार से बताया। इसकी सभी उपस्थित लोगों ने तारीफ करते हुए शहर के सौंदर्यीकरण कार्य में पूर्ण सहयोग करने की बात कही।

इस दौरान तल्लीताल व्यापार मंडल अध्यक्ष मारुति नंदन साह ने सीवर लाइनों के विभिन्न स्थानों पर क्षतिग्रस्त होने की शिकायत करने पर डीएम ने बताया कि सीवर लाइनों की समस्या के समाधान हेतु एसडीएम की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है। श्री साह सहित सभी लोगों के सुझाव पर डीएम ने तल्लीताल में आरामशीन के पास खाली भूमि पर पार्किंग व्यवस्था हेतु आवश्यक कार्यवाही करने तथा बस स्टेशन पर विद्युत बिलों के जमा करने की व्यवस्था करने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए। बैठक में आलोक साह, वेद साह, भारत लाल साह, अमनदीप आनंद, प्रकाश बिष्ट, राजन लाल साह, अंचल पंत, पप्पू कर्नाटक, अधिशासी अभियंता विद्युत हारून रशीद, आर्किटैक्ट रक्षित, अधिशासी अभियंता ग्रामीण निर्माण विभाग श्री धर्मशक्तू आदि उपस्थित रहे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 02 मार्च 2021। सरोवरनगरी नैनीताल की एक पहचान है ‘छोटी बिलायत’ के रूप में। हालिया दिनों में इसे उसी रूप में स्थापित करने की कोशिश में कास्ट आयरन यानी ढलवा लोहे की बनी रेलिंग व बिजली के स्टेंड पोस्टों से पाट दिया गया है। लेकिन अब डीएम धीराज गर्ब्याल नैनीताल को कुमाऊं मंडल के मुख्यालय पर्वतीय पर्यटन नगरी के रूप में पुर्नस्थापित करने की मुहिम पर हैं। इसके लिए नगर के मल्लीताल व तल्लीताल रिक्शा स्टेंड सहित तल्लीताल व मल्लीताल बाजारों को पर्वतीय स्वरूप में बदलने की तैयारी है।

डीएम गर्ब्याल पहले ही मल्लीताल रिक्शा स्टेंड के नए प्रस्तावित स्वरूप को साझा कर चुके हैं, जबकि अब उन्होंने मल्लीताल बाजार के प्रस्तावित स्वरूप को सोशल मीडिया पर साझा किया है। साथ ही उन्होंने मंगलवार को नगर के मल्लीताल बाजार का भ्रमण करके भी अपनी भावी योजना का स्थलीय निरीक्षण किया है। इस दौरान उन्होंने यहां अपने पूर्व प्रयासों की तर्ज पर विरासत पथ बनाने का इरादा जताया है। इसके साथ ही बाजार में बिजली व केबल की लाइनों को अंडरग्राउंड करने की भी योजना है।
देखें डीएम धीराज गर्ब्याल द्वारा तैयार मल्लीताल बाजार का प्रस्तावित स्वरूप:

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नवीन समाचार, नैनीताल, 18 दिसंबर 2020। नगर वासियों और सैलानियों को विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी-सरोवर नगरी नैनीताल को पसंद करते हुए झील विकास प्राधिकरण द्वारा लगाए गए ‘आई लव नैनीताल (I love Nainital)’ लिखे बोर्ड के साथ अति उत्साह में असुरक्षित तरीके से, फोटो खिंचवाना भारी पड़ा है। लगातार समझाने के बावजूद लोगों द्वारा यहां बिना मास्क पहने व सामाजिक दूरी का पालन किए बिना, फोटो खिंचवाने से कोरोना के संक्रमण की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए जिला विकास प्राधिकरण ने अपने ‘आई लव नैनीताल’ लिखे बोर्ड को परदे से ढकना पड़ गया है। शुक्रवार को पर्दा लगा कर तल्लीताल डाँठ पर लगाये बोर्ड को ढक दिया गया। बताया गया है कि यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेशों पर बनाई गई समिति की रिपोर्ट के आधार पर कोरोना के संक्रमण का भय रहने तक के लिए की गई है।

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सरोवर नगरी नैनीताल को कभी विश्व भर में अंग्रेजों के घर ‘छोटी बिलायत’ के रूप में जाना जाता था, और अब नैनीताल के रूप में भी इस नगर की वैश्विक पहचान है। इसका श्रेय केवल नगर की अतुलनीय, नयनाभिराम, अद्भुत, अलौकिक जैसे शब्दों से भी परे यहां की प्राकृतिक सुन्दरता को दिया जाऐ तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

नैनीताल की वर्तमान रूप में खोज करने का श्रेय अंग्रेज व्यवसायी पीटर बैरन को जाता है, कहते हैं कि उनका शाहजहांपुर के रोजा नाम के स्थान में शराब का कारखाना था। कहा जाता है कि उन्होंने 18 नवम्बर 1841 को नगर की खोज की थी। बैरन के हवाले से सर्वप्रथम 1842 में आगरा अखबार में इस नगर के बारे में समाचार छपा, जिसके बाद 1850 तक यह नगर ‘छोटी बिलायत’ के रूप में देश-दुनियां में प्रसिद्ध हो गया। कुमाऊं विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय एवं भूविज्ञान विभाग के अध्यक्ष भूगर्भ वेत्ता प्रो.सीसी पंत के अनुसार बैरन ने ईस्ट इंडिया कंपनी के लोगों को दिखाने के लिये लंदन की पत्रिका National Geographic में भी नैनीताल नगर के बारे में लेख छापा था। 1843 में ही नैनीताल जिमखाना की स्थापना के साथ यहाँ खेलों की शुरुआत हो गयी थी, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने लगा। 1844 में नगर में पहले ‘सेंट जोन्स इन विल्डरनेस’ चर्च की स्थापना हुई। 1847 में यहां पुलिस व्यवस्था शुरू हुई। 1862 में यह नगर तत्कालीन नोर्थ प्रोविंस (उत्तर प्रान्त) की ग्रीष्मकालीन राजधानी व साथ ही लार्ड साहब का मुख्यालय बना साथ ही 1896 में सेना की उत्तरी कमांड का एवं 1906 से 1926 तक पश्चिमी कमांड का मुख्यालय रहा। 1872 में नैनीताल सेटलमेंट किया गया। 1880 में नगर का ड्रेनेज सिस्टम बनाया गया। 1881 में यहाँ ग्रामीणों को बेहतर शिक्षा के लिए डिस्ट्रिक्ट बोर्ड व 1892 में रेगुलर इलेक्टेड बोर्ड बनाए गए। 1892 में ही विद्युत् चालित स्वचालित पम्पों की मदद से यहाँ पेयजल आपूर्ति होने लगी। 1889 में 300 रुपये प्रतिमाह के डोनेशन से नगर में पहला भारतीय कॉल्विन क्लब राजा बलरामपुर ने शुरू किया। कुमाऊँ में कुली बेगार आन्दोलनों के दिनों में 1921 में इसे पुलिस मुख्यालय भी बनाया गया। वर्तमान में यह  कुमाऊँ मंडल का मुख्यालय है, साथ ही यहीं उत्तराखंड राज्य का उच्च न्यायालय भी है। यह भी एक रोचक तथ्य है कि अपनी स्थापना के समय सरकारी दस्तावेजों में 1842 से 1881 तक यह नगर नइनीटाल (Nynee tal) तथा इससे पूर्व 1823 में यहाँ सर्वप्रथम पहुंचे पहले कुमाऊं कमिश्नर जी डब्लू ट्रेल द्वारा 1828 में नागनी ताल (Nagni Tal) भी लिखा गया।

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बोट हाउस क्लब नैनीताल : ‘छोटी बिलायत’ में आज भी है कुछ ऐसा, जो है दुनियां में सिर्फ ‘बिलायत’ में

Boat House Club Nainital

विश्व का सबसे ऊंचाई पर स्थित याट क्लब है नैनीताल डॉ. नवीन जोशी@ नवीन समाचार, नैनीताल, 1 जनवरी 2025 (Boat House Club-Nainital Yacht Club-History)। सरोवरनगरी नैनीताल को यूं ही विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी का दर्जा नहीं मिला हुआ है। यहां ऐसी अनेक खाशियतें हैं, जो दुनिया में अन्यत्र नहीं मिलतीं। नगर की पहचान कही जाने … Read more

कुमाऊं से देहरादून-मुंबई जाने वाले रेलयात्री कृपया ध्यान दें….. ट्रेनों की आवृत्ति में हुआ बदलाव

देहरादून: काठगोदाम तक नहीं अब बुधवार और रविवार को हल्द्वानी तक चलेगी  DDN-KGM Expressनवीन समाचार, नैनीताल, 3 अगस्त 2022। काठगोदाम से देहरादून आने-जाने के लिए अब दिन नहीं देखने पड़ेंगे। अब गाड़ी संख्या 14120/14119 देहरादून-काठगोदाम-देहरादून एक्सप्रेस आगामी 8 अगस्त से देहरादून से व 9 अगस्त से काठगोदाम से सप्ताह में 5 दिन के स्थान पर हर दिन चलेगी।

पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह की ओर से यह जानकारी दी गई है। उल्लेखनीस है कि यह गाड़ी काठगोदाम से देहरादून को शाम 7 बजकर 45 मिनट पर रवाना होती है और सुबह 4.20 पर देहरादून पहुंचती है। अब तक यह रेलगाड़ी सप्ताह में मंगलवार, बुधवार गुरुवार, शनिवार, रविवार को चलती थी।

इसके अलावा विज्ञप्ति में बताया गया है कि मुंबई सेंट्रल-लालकुआं विशेष गाड़ी का संचालन आगामी 3, 10 व 17 अगस्त तथा 14, 21 व 28 सितंबर को मुंबई से 6 अतिरिक्त फेरों में किया जाएगा। इसी तरह इन तिथियों के अगले दिन यह रेलगाड़ी लालकुंआं से मुंबई के लिए चलेगी। इतना जरूर है कि यह गाड़ी काठगोदाम नहीं आएगी। इसके अलावा 14113 (सूबेदारगंज-देहरादून एक्सप्रेस) भी अब 7 अगस्त से और देहरादून’-सूबेदागंज एक्सप्रेस 10 अगस्त से से प्रतिदिन चलेगी। पहले यह ट्रेन भी सप्ताह में 5 दिन चलती थी। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : यात्रीगण कृपया ध्यान दें : नियंत्रित व निरस्त रहेगी काठगोदाम से चलने वाली कुछ रेलगाड़ियां

नवीन समाचार, बरेली, 12 मई 2022। रेलवे प्रशासन ने गुरुवार को उत्तर रेलवे के हरिद्वार-देहरादून खंड पर हरिद्वार-मोतीचूर स्टेशनों के मध्य पुल सं-28 पर गार्डर कार्य हेतु ब्लॉक दिये जाने के कारण गाड़ियों का निरस्तीकरण एवं नियंत्रण करने का कार्यक्रम जारी कर दिया है।

बताया गया है कि आगामी 17 मई को काठगोदाम से चलने वाली काठगोदाम-देहरादून एक्सप्रेस 45 मिनट नियंत्रित कर चलायी जायेगी, और 20 मई को काठगोदाम से देहरादून एवं देहरादून को चलने वाली काठगोदाम-देहरादून एक्सप्रेस दोनों ओर से निरस्त रहेगी। इसके अलावा 12 से 21 मई के बीच काठगोदाम-मुरादाबाद-काठगोदाम विशेष एक्सप्रेस भी निरस्त रहेगी। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : चुनावी दौर में टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन के फाइनल सर्वे की खबर उड़ी, ‘नवीन समाचार’ ने की पड़ताल….

नवीन समाचार, टनकपुर, 22 नवंबर 2021। एक सदी से अधिक लंबे जन संघर्ष के टनकपुर-बागेश्वर ब्रॉडगेज रेललाइन पर असमंजस बरकरार है। केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2021 में इस रेल लाइन निर्माण को मंजूरी देते हुए फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए 28.95 करोड़ रुपये का बजट भी जारी किया था। इधर हाल में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी कुमार से भी इस बारे में मुलाकात की थी।

मंगलवार को रेलवे के कुछ लोगों ने टनकपुर में रेलवे स्टेशन से आगे रेल लाइन के अंतिम छोर तक कुछ सर्वेक्षण जैसा कार्य भी किया, अलबत्ता किसी ने भी इसके बारे में जानकारी नहीं दी। वहीं रेलवे के इज्जतनगर बरेली मंडल के पीआरओ राजेंद्र सिंह से ‘नवीन समाचार’ ने बात की तो उनका कहना था कि अभी इस मामले में कुछ भी ठोस बात नहीं है।

उल्लेखनीय है कि मंगलवार को रेलवे के अधिकारियों की टनकपुर में सरगर्मी के बाद चर्चा शुरू हुई कि टनकपुर-बागेश्वर ब्रॉडगेज रेललाइन के फाइनल सर्वे का काम कार्यदायी संस्था नोएडा की इरकान इंफ्रास्ट्रक्चर एंड सर्विसेज लिमिटेड के जूलॉजिकल व एलाइंमेंटस के इंजीनियरों ने शुरू हो गया है। बताया गया कि रेलवे एवं लोक निर्माण विभाग के सहयोग से रेलवे स्टेशन परिसर की लोकेशन देखी जा रही है और रेल मार्ग के प्रस्तावित अनुरेखण (नक्शे) को चस्पा कर सर्वे की शुरुआत की जा रही है।

बताया गया कि यह रेल लाइन शारदा नदी के किनारे होते हुए बागेश्वर तक जाएगी। करीब 154.58 किमी लंबे इस रेल मार्ग का 80 प्रतिशत हिस्सा पूर्णागिरि के ठुलीगाड़ क्षेत्र से आगे सुरंगों से होकर गुजरना है। गौरतलब है कि इस रेल मार्ग के क्षेत्र में पंचेश्वर बांध भी बनना है, इसलिए रेल मार्ग को लेकर संशय अभी भी बना हुआ है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : बड़ी खुशखबरी: एक कदम और आगे बढ़ी टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन, फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए 28.95 करोड़ मंजूर

-मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री और रेल मंत्री का जताया आभार
नवीन समाचार, देहरादून, 11 अक्टूबर 2021। केंद्रीय रेल मंत्रालय ने टनकपुर-बागेश्वर के बीच नई ब्रॉडगेज रेल लाइन के फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी दे दी है। इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया है।

photo of railway on mountain near houses

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रेल लाइन बनने से क्षेत्र में विकासात्मक गतिविधियां बढे़ंगी और लोगों को काफी सुविधा मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव है। उनके कार्यकाल में उत्तराखंड में उल्लेखनीय विकास कार्य हुए हैं। विशेष तौर पर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में चारधाम सड़क परियोजना, ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना और एयर कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक काम हुए हैं या गतिमान हैं। इससे आने वाले समय में उत्तराखंड की आर्थिकी में क्रांतिकारी परिवर्तन आएंगे।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री और रेलमंत्री से नई दिल्ली में भेंट के दौरान विशेष रूप से 154.58 किलोमीटर की टनकपुर-बागेश्वर नई ब्रॉडगेज रेल लाइन के फाइनल लोकेशन सर्वे का अनुरोध किया था। इसी क्रम में इसे मंजूरी दी गई है। फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए 28.95 करोड़ रुपये की भी स्वीकृति दी गई है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : बागेश्वर रेल लाइन का प्रारंभिक सर्वे पूरा, 6967 करोड़ रुपए में बनेगी बागेश्वर तक 154 किमी रेल लाइन

-स्वर्गीय डॉ. जीएल साह ने केवल चार पुलों के साथ व बिना एक भी सुरंग के केवल 610 मीटर की चढ़ाई के साथ 137 किमी में टनकपुर से बागेश्वर पहुंचने की बात कही थी
-सर्वे में प्रस्तावित रेल लाइन में बनेंगे 276 पुल और 72 सुरंगें
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 21 जून 2021। रेलवे बोर्ड ने प्रस्तावित टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का प्रारंभिक सर्वे पूरा कर लिया है। रेलवे बोर्ड के परियोजना और निगरानी निदेशक पंकज कुमार ने 18 जून को रेल विकास निगम के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक को भेजे पत्र में 154.58 किमी लंबी इस प्रस्तावित लाइन का प्रारंभिक सर्वे पूरा होने की जानकारी दी है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस रेल लाइन के लिए 873 करोड़ रुपये की 958 हेक्टेयर जमीन चाहिए। इस परियोजना में 276 पुल और 72 सुरंगों की जरूरत होगी। रेल लाइन के निर्माण में प्रति किमी 45 करोड़ की दर से कुल 6967 करोड़ रुपये खर्च होंगे। उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से दिल्ली में मुलाकात कर प्रस्तावित रेल लाइनों की मंजूरी देने और टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का सर्वे कराने की मांग की थी। रेलवे बोर्ड के निदेशक प्रोजेक्ट के इस पत्र को रेल मंत्री के एलान के क्रम में देखा जा रहा है और परियोजना की डिटेल सर्वे तथा रेल लाइन के निर्माण की ओर बढ़ता कदम माना जा रहा है। हालांकि देखना होगा कि आगे केंद्र सरकार इस रेल लाइन की उपादेयता के लिहाज से इतना खर्च कर इस रेल लाइन का निर्माण कराने में कितनी इच्छाशक्ति दिखाता है।

गौरतलब है कि कुमाऊं विश्वविद्यालय के भूगोलशास्त्री व मानचित्रकार स्वर्गीय डॉ. जीएल साह ने अपने सर्वेक्षण में बताया था कि प्रस्तावित रेल लाइन 1909-10 में स्थापित टनकपुर स्टेशन से बागेश्वर तक शारदा (काली) व सरयू के समानान्तर उतार-चढाव एवं मोडदार पथ पर स्टेशनों एवं पुलों से आगे बढती हुयी लगभग 137 किमी की होगी। पूरे मार्ग में केवल चार पुल होंगे, जबकि एक भी सुरंग नहीं होगी, और टनकपुर से बागेश्वर के बीच रेल लाइन केवल 610 मीटर की चढ़ाई ही चढ़ेगी। डॉ. साह के अनुसार पहला स्टेशन पोथ या चूका गांव पर टनकपुर से 46 किमी पर, दूसरा मदुवा लगभग 25 किमी पर, तीसरा लगभग 16 किमी आगे पंचेश्वर में, चौथा 19 किमी आगे घाट में, पांचवा 33 किमी आगे भैंसियाछाना या सेराघाट में तथा छठा 18 किमी आगे बिलौना या बागेश्वर में होगा।

उन्होंने बताया कि 137 किमी की इस रेल लाइन में से करीब 67 किमी लाईन चीन व नेपाल की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के समानान्तर होगी। लिहाजा इससे सैनिक गतिविधि की निगरानी, सेना एवं भारी सैन्य सामग्री के लाने-ले जाने के लिए इसका उपयोग किया जा सकेगा, साथ ही निर्माणधीन पंचेश्वर बांध के निर्माण के लिए तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा, पूर्णागिरि धाम, उच्च हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों में पर्यटन व आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिये भी यह मील का पत्थर साबित होगी। प्रदेश की करीब 55 लाख जनता को भी इससे लाभ मिलेगा। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

डा. जी0एल0 साह की प्रोजेक्ट रिपोर्ट : टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन (महत्वाकांक्षी हिमालयी रेल परियोजना) 

1-पृष्ठभूमि: प्रथम विश्वयुद्ध से पूर्व 1888-89 तथा 1911-12 में क्रमशः अंग्रेजी शासकों द्वारा तिब्बत तथा नेपाल के साथ सटे इस पर्वतीय क्षेत्र के लिए आर्थिक-सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रगति के अतिरिक्त इसकी भू-राजनैतिक उपयोगिता को ध्यान में रखकर तथा प्रचुर वन सम्पदा व सैनिकों के सरल प्रवाह के निमित्त टनकपुर-बागेश्वर रेलवे लाइन की योजना का कार्यान्वयन इस क्षेत्र में सर्वेक्षणों की श्रृंखला से प्रारम्भ किया गया था। रेल लाइन के सर्वेक्षण के साक्ष्य आज भी इस क्षेत्र में यत्र-तत्र बिखरे मिलते हैं। प्रथम विश्वयुद्ध की दीर्घ अवधि जनित समस्याओं के चलते घीरे-धीरे अंग्रेजी शासकों की यह योजना ठंडे बस्ते में जाती रही और बाद के योजनाकारों द्वारा विस्मृत कर दी गयी। सन् 1960-70 के दशक में गांधीवादी पदमश्री स्व0 देवकी नन्दन पाण्डे के नेतृत्व में स्वतन्त्रता संग्राम सैनानी स्व0 राम लाल साह एवं तत्कालीन बागेश्वर विकास खण्ड प्रमुख स्व0 ईश्वरी लाल साह (लेखक के पिता) ने टनकपुर रेलवे लाईन के लिए अंग्रेजी शासकों द्वारा करायें गये सर्वेक्षणों का हवाला देते हुए इस योजना को पुर्नजीवित करेने के प्रयास किये। 1980 के दशक में श्रीमती इदिरा गॉधी के बागेश्वर आगमन पर सौपे गये ज्ञापनों में टनकपुर रेलवे लाईन की चर्चा की गयी तथापि यह प्रभावशाली अभिव्यक्ति नही बन सकी।
यह आश्चर्यजनक किन्तु सत्य है कि इस क्षेत्र से जुडे विभिन्न राजनैतिक दलों के स्तरीय नेता भी इस महत्वकांक्षी योजना के लिए उत्साहवर्द्धक पहल करने में सदैव कंजूसी ही बरतते रहे,हॉं राष्ट्रीय नेताओं के यदाकदा इस क्षेत्र में आगमन पर इन रेलवे लाईनों के सर्वेक्षण की कार्ययोजनाओं पर ध्यान आकर्षित करना स्थानीय जनता ने कभी नही छोडा। यही कारण रहा कि लगभग 60 वर्षो से ठंडे बस्ते से निकल कर 1984 में इसके सर्वेक्षण के लिए सरकार द्वारा बजट आवंटित किया गया और टनकपुर- बागेश्वर रेल लाईन के लिए सर्वेक्षण का कार्य प्रारम्भ हो गया। धीरे-धीरे फिर जनता के विश्वास की परीक्षा ली गयी और लगभग दो दशकों के अन्तराल में यह रेल-परियोजना पुनः नेपथ्य में चली गयी और अनेक सरकारों की सैद्धान्तिक सहमति के बावजूद रेल बजटों में स्थानीय जनता की आशा गुमराह होती चली गयी ।

अनेक बार की झूठी घोषणाओं,आश्वासन, अधूरे पडे सर्वेक्षण तथा सरकारों की उदासीनता से आहत क्षेत्रीय जनता के सहयोग से बागेश्वर में कुछ उत्साही एव जुझारू युवाओं ने दिसम्बर 2004 में बागेश्वर-टनकपुर रेल मार्ग निर्माण संघर्ष समिति का गठन किया गया। पर्वतीय क्षेत्र में विकास की गति को बढाने ,पर्यटन ,परिवहन, माल ठुलाई,संसाधन उपयोग,व्यापार, वााणिज्य सामरिक महत्व आदि के विचारणीय पक्षों पर ध्यान देते हुए 2005 को संघर्ष समिति ने बागेश्वर-टनकपुर रेल मार्ग के साथ ऋषिकेश -कर्णप्रयाग तथा रामनगर-चखुटिया रेल मार्गो के निर्माण के लिए भारत सरकार को ज्ञापन दिये गये तथा उक्त प्रस्तावों के सापेक्ष पद या़त्राओं के द्वारा जनमत तैयार करने व आन्दोलन को धारदार बनाने के अनेक प्रयास किये। क्षेत्रीय एवं दिल्ली के जंतर-मंतर तक ( 2008 ,2,009 एवं 2010 ) में धरना, प्रदर्शन, अनशन एवं ज्ञापनों के शान्ति प्रिय माध्यमों द्वारा दस वर्षो में लगभग सैकडों ज्ञापनों को देकर संघर्ष समिति ने उत्तराखण्ड के विकास के लिए इस सोच को जिन्दा दफन होने से बचाये से रखा।

रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद यादव ने सन 2007 के अपने उत्तराखण्ड भ्रमण पर दीर्घ समय से लम्बित रेल परिवहन की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं, टनकपुर- बागेश्वर एवं ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइनों के निर्माण के लिये त्वरित सर्वेक्षणों के आदेश देकर न केवल उत्तराखण्ड के कद्द्रावर नेताओं को ही हतप्रभ किया जो कि कभी भी इन महत्वकांक्षी योजनाओं के प्रस्ताव भी अपनी सरकार के समक्ष प्रखरता से प्रस्तुत करने का साहस कर सके वरन अपनी घोषणा से इस हिमालयी प्रदेश के विकास को एक नयी दिशा देने का यत्न किया है। रेल मंत्री की घोषणा की विश्वसनीयता की के चलते क्षेत्रीय जनता को यह उम्मीद बंधी किे दीर्घ अन्तराल के उपरान्त उत्तराखण्ड की महत्वकांक्षी रेल परियोजना निकट भविष्य में विकास के नवीन आयामों को छू लेगी। वर्ष 2012 के रेल-बजट में तत्कालीन रेल मंत्री, माननीय श्री मुकुल राय जी द्वारा इस पर्वतीय राज्य के जन आकांक्षाओं और जरूरतों के अनुरूप प्रस्तावित टनकपुर -बागेश्वर रेलवे लाइन को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा देकर देश की चार रेल राष्ट्रीय परियोजनाओं ( National Project ) में सम्मिलित किया गया था। इसके साथ ही इन प्रस्तावित रेल-लाईनों के लिए प्रारम्भिक सर्वेक्षण कराये जाने की घोषणा की गयी थी।

2-पहाड़ी नगरों में रेल सम्पर्कः अर्वाचीन इतिहास की बातें:
औपनिवेशिक शासन की अवधि में भारत में अंग्रेजों की अधिसंख्य आबादी का संकेन्द्रण, राजनैतिक आर्थिक शक्ति के चार केन्द्रों क्रमशः बम्बई, कलकत्ता, दिल्ली तथा मद्रास में रहा। फलत:शक्ति के इन्हीं केन्द्रों के समीप ऊँचाई एवं पहाडी क्षेत्रों में अंग्रेजों ने अपने लिए पर्वतीय सैरगाहों को बसाया गया । हिमालयी क्षेत्र में यूरोप के सदृश्य जलवायु पर्वतीय आकर्षण, सामाजिक-आर्थिक विविधता तथा सामरिक स्थिति ने इन केन्द्रों में सरल पहॅुच के लिए देश के प्रमुख नगरों से रेल एवं रोड संयोजन तथा अवस्थापना सुविधाओं की प्रगति प्रमुख आवश्यकता रही। इसी क्रम में सन् 1850 के दशक के बाद अंग्रजों ने उत्तरी हिमालयी प्रदेश एवं दक्षिण में निलगिरी एवं पश्चिमी घाट की पहाडियों में इन्हीं स्टेशनों के लिए छोटी रेल लाईनें बिछाने की चार महत्वकांक्षी पहाड़ी योजनाओं पर विचार किया। दक्षिण भारत की लगभग 100 वर्ष पुरानी नीलगिरी पर्वत खिलौना रेलगाड़ी तथा पश्चिमी घाट की पहाडियों में चलने वाली मथेरान लाइट रेलवे के साथ

हिमालयी क्षेत्र में दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे खिलौना ट्रेन: (सिलीगुड़ी से 80 कि0मी0 दूर हिमालय में दार्जिलिंग (2127 मी0) को जोडने वाली यह दुनिया की सबसे कम दो फिट चौडी पटरियों वाले रेल पथ पर छोटी खिलौना गाड़ी सचमुच ही भारतीय हिमालय को रेल से जोड़ने की यह प्रथम महत्वाकाक्षी योजना रही जो कि सन् 1879 में क्रियान्वित और 1881 में पूर्ण हुयी। इसको हिमालय की प्रथम रेलगाड़ी का श्रेय भी जाता है।)

कालका-शिमला खिलौना रेल- (अंग्रेजी शासन में हिमालयी नगरों को रेल सम्पर्क द्वारा आच्छादित करने की योजनाओं में सर्वाधिक महत्वाकांक्षी परियोजना कालका-शिमला के मध्य रेल सम्पर्क की थी।यद्यपि इस योजना पर विचार विमर्श 1847 से पूर्व कर लिया गया था तथापि रेल लाईन बिछाने का कार्य 1898 में प्रारम्भ हो कर 1903 में यह पूर्ण हुआ । 98 कि0मी0 लम्बा रेलवे पथ कालका (640 मी0) को शिमला (2073 मी0) तक पहुॅचने में लगभग 1433 मीटर की उॅंच्चाई को पार करना पडता है। रेलवे लाइन की प्रवणता 1ः33 है। सम्पूर्ण घुमावदार एवं सर्पिल पथ (पटरियों के मध्य की दूरी मात्र 0.75 मीटर), 102 सुरंगों से गुजरता है जिनकी कुल लम्बाई 8 कि0मी0 है। ये रेलगाड़ियॉ न केवल तत्कालीन बेमिसाल इंजिनियरिंग का एक अनूठा उदाहरण है वरन आज भी पर्यटन विकास के ने आयामों को छू रही है तथा क्षेत्र की प्रगति की आधार स्तम्भ रही है।

काठगोदाम -नैनीताल -असफल माउन्टेन ट्रेन परियोजना: दार्जिलिंग एवं शिमला के तर्ज पर उत्तराखण्ड़ हिमालय के इस नीली झील वाले पर्यटक स्थल नैनीताल के लिए भी अंग्रेज एक छोटी रेल सम्पर्क की सम्भावनाओं को तलाशने में जुटे रहे। 1882-84 के मध्य हल्द्वानी तथा काठगोदाम के लिए रेल सम्पर्क जुडने के बाद 1889 में कर्नल थामसन ने माउन्टेन ट्रेन की एक योजना रानीबाग -ज्योलीकोट-बल्दियाखान को जोडते हुए नैनीताल तक बनाई गयी । इस रेल लाईन के लिए प्रारम्भिक सर्वेक्षण में नैनीताल की कमजोर भूगर्भिक बनावट मुख्य भ्रंश की उपस्थिति तथा धरातलीय उच्चावचनों की तीव्र प्रवणताजनित अवरोधों के फलस्वरूप अन्ततोगत्वा यह योजना 1895 में काल कलवित हो गयी।
अन्य हिमालयी रेल योजनाऐं
स्वतंत्रता के उपरान्त व्यापारिक , आर्थिक एवं सैन्य अनिवार्यताओं को ध्यान में रखते हुए हिमालय के आन्तरिक भागों में रेल सम्पर्क स्थापना के अनेक प्रयास किये गये। इसमें हिमाचल प्रदेश की 164 कि0मी0 लम्बी कंागडा घाटी रेलवे, तथा कश्मीर में 53 कि0मी0 लम्बी जम्बू तवी उधमपुर रेलवे महत्वपूर्ण योजनायें है।
उत्तराउत्तराखण्ड़ में रेल आगमन एवं प्रमुख रेल-पथ

रेल-पथ आगमन वर्ष
1-बरेली- हल्द्वानी- काठगोदाम 1882- 1884
2-लालकुऑ- काशीपुर 1900
3-काशीपुर-रामनगर 1905-06
4-पीलीभीत-मझौला-टनकपुर 1909-10
5-हरिद्वार-देहरादून 1903
6-नजीमाबाद-कोटद्वार 1904
8-बनबसा-महेन्द्रनगर(नैपाल) 1915-16
7-हरिद्वार-ऋषिकश 1930
8-सहारनपुर-लक्सर-हरिद्वार- अप्राप्त
9-मुरादाबाद-लक्सर-हरिद्वार-अप्राप्त

3- प्रस्तावित टनकपुर-बागेश्वर रेल लाईन -एक सर्वेक्षण रिपोर्ट:
भौगोलिक सूचना तंत्र (जी0आई0एस0) की कम्प्यूटर आधारित विधा के अनुप्रयोग द्वारा क्षेत्रीय उपलब्ध मानचित्र, उपग्रह चित्र ,भौतिक सर्वेक्षणों तथा क्षेत्रीय जनता से प्राप्त साक्षात्कार सूचनाओं के मिले-जुले परिणामों पर आधारित लगभग 137 कि0मी0 लम्बे इस रेलवे लाईन का मोटा खाका क्षेत्रीय जनता, नेतृत्व राष्ट्रीय स्तर पर इस परियोजना से जुडे मंत्रालयों योजनाकारों के लिए लेखक द्वारा प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। टनकपुर से बागेश्वर तक यह रेल लाईन सदैव शारदा (काली) व सरयू के समानान्तर उतार-चढाव एवं मोडदार पथ पर अनेक स्टेशनों एवं पुलों से आगे बढती हुयी सारे क्षेत्रवासियों को रेल के साथ विकास के पथ से भी जोडेगी। प्रस्तावित रेल लार्इ्रन की व्यवहारिकता का मूल्यांकन, मैंदान तथा भाबर के मध्य चलने वाली उत्तराखण्ड की रेल लाईनों से भी किया गया है ताकि उच्चावच्चनों की अनेक भ्रान्तियॉ दूर हो सके तथा योजना का तथ्यपरक मूल्यांकन सम्भव हो सके।संम्भावित रेलवे स्टेशनों के मध्य परस्पर दूरी, उँचाईयों के परास, प्रस्तावित छोटे बडे पुल, जनपद तहसील एवं विकास खण्ड़ स्तर पर लाभान्वित गॉव और अनुमानित जनसंख्या, पंचेश्वर बांध, पडोसी देश नेपाल के साथ अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के फलस्वरूप सामरिक महत्व तथा उत्तराखण्ड के रेलवे लाईनों की प्रवणता से तुलनात्मक विश्लेषण द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लाभों एवं अंततोगत्वा विकास के लिए व्यवहारिकता का आकलन मुख्य लक्ष है। लेखक को आशा है कि यह नितान्त शैक्षिक एवं पक्षपात रहित प्रस्ताव इस परियोजना के अविलम्ब क्रियान्वयन को गति देगी।

चरण एक-टनकपुर से पोथः
तिमली ब्रहमदेव के नाम से वर्णित टनकपुर, आस्टिनगंज के नाम से वर्तमान स्थान पर सन् 1880 में बसाया गया। आस्टिनगंज शब्द लोक व्यवहार में नहीं रच पाने के कारण बाद में इसका टनकपुर नाम ही सर्व स्वीकार्य हुवा। शाारदा अथवा चूका नदी के किनारे पर्वतपदीय स्थिति तथा नेपाल के साथ सामाजिक,आर्थिक एवं सांस्कृतिक एवं अन्तराष्ट््रीय व्यापारिक सम्बन्धों के अतिरिक्त भोटिया व्यापारियों के मौसमी प्रवास का प्रथम विनिमय केन्द्र तथा भोटिया मंडी के रूप में विख्यात टनकपुर काली कुमाउॅ के पर्वतीय भू-भाग,सोर (पिथौरागढ) से संलग्न विशाल भोट प्रदेश का प्रवेश द्वार रहा है। समुद्र सतह से 800 फीट की उॅंचाई वाला यह स्थान अपने समीपवर्ती साल, शीशम तथा सागौन के सघन वनों से आच्छादित है। मझौला पीलीभीत जनपद से बरमदेव- (विस्तार) के नाम से मीटर गेज की रेलवे लाइन खटीमा, बनबसा होती हुयी 1909-10 में टनकपुर तक निर्मित की गयी । इस लाइन पर बनबसा से नेपाल के लिए ट््राम की एक लूप लाइन 1915-16 में बिछायी गयी जिससे बेल, जिमुवा तथा सोनाली बांधों के साथ शारदा चैनल गेट की निमाण सामग्री ढोने क अतिरिक्त इस क्षेत्र की अकूत एवं मूल्यावान वन सम्पदा का भरपूर विदोहन किया गया। इसके अवशेष आज भी बनबसा -शारदा नदी के मध्य यत्र-तत्र देखे जा सकते है।

टनकपुर-बागश्वर महत्वाकांक्षी रेलवे परियोजना के प्रथम चरण में रेल लाइन टनकपुर से पोथ(चूका) के मध्य बिछेगी जिसकी दूरी लगभग 26 कि0मी0 होगी। टनकपुर से बृह्मदेव, उॅचालीगोठ के समतल नदी घाटी के छोटे गॉवों से बढते हुए यह रेलवे पथ भाबर की ठुलीगाड में पहले छोटे रेलवे पुल से शारदा नदी की संकरी शिवालिक घाटी में प्रविष्ट होगा। यहॉ पर पुण्यागिरी मंदिर के यात्रियों के लिए एक छोेटा रेलवे हाल्ट प्रस्तावित किया जा सकता है। इसकेे उपरान्त प्रस्तावित रेल पथ पुण्यागिरी के तीव्र ढाल वाले कगार के ठीक नीचे बढते हुए एक दीर्घ मोड द्वारा खलढूंगा के नीचे पहुॅचेगी। खलढूंगा के पश्चात नदी के समानान्तर यह लाइन अंततः अपने पहले स्टेशन पोथ पहुॅचेगी जो कि लधिया नदी के पार्श्व में बडा गॉव है। समुद्र सतह से लगभग 381 मीटर की उॅचाई में लधिया तथा काली के संगम पर स्थित पोथ गॉव रेल से जुडने पर लधिया घाटी के सैकडों असेवित गॉवों को रेल यातायात की सुविधा देगा शिवालिक का यह क्षेत्र सघन वनाच्छादित है। कहीं -कहीं नदी के किनारे कृषि के समतल क्षेत्र है। एकाकी घाटी गॉवों को छोड अधिकांश गॉव दूर-दूर पहाडियों पर बसे है।

चरण दो: चूका (पोथ) से मदुवा :
पोथ के उपरान्त द्वितीय चरण में रेलवे लाइन लघु हिमालयी क्षेत्र में प्रवेश करेगी ओर मदुवा गांव जो कि लगभग 25 कि0मी0 की दूरी पर होगा । रेल लाइन का द्वितीय प्रस्तावित स्टेशन होगा । चूका के उपरान्त लधिया पर रेलवे पुल का निर्माण किया जाना होगा। तदुपरान्त रेल लाइन अनेक गॉवों क्रमशः खरा, कम्यून तथा मोस्टागांव के समीप नदी के समानान्तर 5 कि0मी0 के एक दीर्घ मोड लेकर खनापत, अमोला ,तरवत, अमानी, बिलगोरा तथा काली नदी के सहारे स्पर्श करती हुयी लोहावती नदी के संगम के बायी ओर स्थित मदुवा गॉव की निचली घाटी में आयेगी जहॉ दूसरा रेलवे स्टेशन प्रस्तावित होगा। इससे पूर्व लोहावती नदी पर रेलवे पुल का निर्माण भी प्रस्तावित होगा। पोथ एवं मदुवा के मध्य 25 कि0मी0 की रेल यात्रा सच में जंगल में मंगल जैसी होगी। काली नदी की संकरी ,सर्पिल एवं सघन वनाच्छादित घाटी में उॅचाई पर स्थित पहाड़ी गॉव जहॉ विकास की नये रुप को देख बरबस आश्चर्य चकित रहेंगे, वही नदी के पार नेपाल के डाड़ेल धुरा अंचल में सघन नयनाभिराम वनाच्छादन प्रकति के मनोहारी सौन्दर्य के साथ मानव बसाव के प्रतिकूलता को प्रदर्शित करेगा तथापि उत्तर में बैतडी अंचल की सीमा में नेपाली गांवों की बहुलता मानव भूगोल प्रभावशाली पाठ रहेगा।

चरण तीन-मदुवा से पंचेश्वरः
लेाहावती एवं शारदा के संगम पर स्थित अपेक्षाकृत बडा गॉव मदुवा लोहाघाट विकासखण्ड के अर्न्तगत सम्मिलित है। लोहावती घाटी मानवीय दृष्टिकोण से काफी सघन है। गॉव संख्या तथा जनसंख्या में अपेक्षाकृत बडे है। मदुवा से पंचेश्वर के बीच रेल पथ की लम्बाई 16 कि0मी0 होगी। यह रेलवे लाइन शारदा नदी के किनारे अपेक्षाकृत सीधी रेखा में आगे बढेगी। यह रेलवे लाइन घाटी के लगभग 18 गॉवों को स्पर्श करेगी जिसमें पासम,रौसाल, दयोकाना, चमोली, बमोटी आदि पुराने एवं महत्वपूर्ण गॉव है। इस समूचे यात्रा पथ में नेपाल की ओर जो कि बैतडी अंचल का दक्षिण पूर्वी भाग है जहां मानव बसाव का सघन संकेन्द्रण है। पंचेश्वर के ठीक सामने नेपाल के मेलसिन, धनीकोटी, सनतोेला धरमघाट आदि बडे तथा उपजाउ कृषि क्षेत्र है। इसका कारण यह है कि यह समूचा क्षेत्र सामाजिक-आर्थिक तथा सांस्कृतिक रूप से भारत पर अधिक आश्रित है। दोनों देशों के मध्य स्वतंत्र आवागमन के फलस्वरूप अधिसंख्य नेपाली जनता की आर्थिकी भारतीयता से अधिक प्रभावित है।महाकाली तथा सरयू के संगम पर पंचेश्वर का प्रस्तावित रेल सम्पर्क अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए भी अधिक उपयोगी होगा । प्रस्तावित पंचेश्वर बॉध जो कि दो देशों के सहयोग से निर्मित किया जाना हैं ,निश्चित रूप से इस रेलवे का प्रथम वरदान सिद्ध होगा।

चरण चार- पंचेश्वर से घाट:पंचेश्वर के उपरान्त रेलपथ सरयू के बायें छोर के समानान्तर 19 कि0मी0 की दूरी पार कर घाट तक पहुॅचेगा जो कि इस सम्पूर्ण मार्ग के बीच चौथा प्रस्तावित रेलवे स्टेशन होगा। घाट पिथौरागढ की सेार घाटी ,भोट प्रदेश तथा काली कुमाउॅ के बडे भू-भाग को टनकपुर तथा मैंदानी भागों से जोडने का मुख्य केन्द्र है, वहीं यह दन्या -गंगोलीहाट व बेरीनाग के आन्तरिक पर्वतीय भू-भाग को मोटर यातायात की पहुॅच देता है। पंचेश्वर के उपरान्तह,निदिल ,खैकोट ,काकडी ,सिमेला, चमरौली, वन्यूडी ,सिगदा एवं कुठेरा गॉव है जो अपनी स्थिति में अपेक्षाकृत उॅचाई वाले स्थानों पर बसेे है। यह सम्पूर्ण सरयू घाटी में सामान्य वन क्षेत्र मिलता है । घाटी की ओर ढालों में चट्टानी क्षेत्र पाया जाता है जिसमें वनस्पति आवरण अपेक्षाकृत न्यून है।

चरण पॉच -घाट से भैंसियाछाना ( सेराघाट ):
घाट के प्रस्तावित रेलवे स्टशन से सरयू नदी का प्रवाह दक्षिण पूर्वी है। अतएव द0पू0 से उत्तर पश्चिम की ओर नदी के समानान्तर 33 कि0मी0 लम्बे रेल पथ द्वारा भैंसियाछाना( सेराघाट ) प्रस्तावित रेलवे स्टेशन को परस्परजोडेगा। इस मार्ग में दो स्टेशनों के मध्य पर सर्वाधिक दूरी होगी। घाट से लगभग 4 कि0मी0 आगे रामेश्वर के समीप पनार नदी पर एक रेलवे पुल का निर्माण अपेक्षित होगा । तदुपरान्त धौलादेवी विकासखण्ड एवं भैंसियाछाना विकास खण्ड (अल्मोडा जनपद) के छोटे बडे लगभग 21 गॉवों की सीमा पार करते हुए यह लाईन सेराघाट पहुॅचेगी। सेराघाट गनाई गंगोली परगने का महत्वपूर्ण यातायात केन्द्र रहा है। जो कि सरयू तथा बागश्वर जनपद के बिलोरी के पनढाल से निकलने वाली जैगन नदी के संगम स्थल पर स्थित है।

चरण छह -भैंसियाछाना (सेराघाट) से बिलौना ( बागेश्वर ):
इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना के 18 कि0मी0 लम्बा अन्तिम चरण सेराघाट एवं बिलौना बागेश्वर के मध्य रेल सम्पर्क से पूर्ण होगा। बिलौना जो कि बागेश्वर नगरपालिका सीमा से लगभग 3 कि0मी0 दक्षिण दिशा में सरयू के किनारे एक छोटा ग्रामीण बाजार तथा अल्मोडा -बागेश्वर सडक मार्ग पर स्थित है, रेलवे स्टेशन के लिये आदर्श स्थान होगा ।

4- मूल्यांकन एवं निष्कर्ष :
137 कि0मी0 लम्बी (जिसमें 67 कि0मी0 रेल लाईन अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के समानान्तर होगी) टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना, उत्तराखण्ड के पूर्वी सीमान्त पर इस समूचे क्षेत्र के सर्वागीण विकास में मील का पत्थर साबित होगी। निम्नांकित बिन्दुओं के माध्यम से लेखक द्वारा इस सम्पूर्ण परियोजा के व्यवहारिता के पक्ष में विस्तृत,सामाजिक,आर्थिक,पर्यावरणीय एवं तकनीकि पक्षों को प्रस्तृत करने का प्रयास किया गया है।

1- उत्तराखण्ड के पूर्वी सीमान्त पिथौरागढ़ जनपद से लगी चीन की समूची सीमा के साथ-साथ पश्चिमी नेपाल सीमा पर किसी भी सैनिक गतिविधि की निगरानी, सेना एवं भारी सैन्य सामग्री के लाने -ले जाने के लिए इस रेलवे लाईन की उपादेयता सर्वोच्च होगी। पिथौरागढ़ की नैनी-सैनी हवाई पट्टी की इस रेलवे लाईन में महज 30 कि0मी0 होगी, 21 वीं शदी के युद्ध नीति में इसका बहु आयामी उपयोग किया जा सकेगा। बिट्र्शि शासन काल में इस रेलवे पथ के सर्वेक्षण का उद्देश्य आज के युग में और अधिक व्यवहारिक एवं प्रभावशाली दृष्टव्य है।

2- अपने समूचे यात्रा पथ में महाकाली के सहारे टनकपुर से पंचेश्वर तक लगभग 67 कि0मी0 की यह रेल लाईन न केवल निर्माणधीन पंचेश्वर बॉध के लिए मील का पत्थर साबित होगी वरन धौलीगंगा सरीखे बडे तथा अन्य मध्यम व छोटी जल विद्युत एवं क्षेत्रीय संसाधन आधारित विकास के लिए प्रस्तावित परियोजनाओं के स्थापना सुविधा, मशीनरी , श्रम तथा उत्पादों के सरल एवं सस्ते परिवहन में इसकी भूमिका अतुलनीय होगी। चम्पावत तथा लोहाघाट (काली कुमाऊॅॅ) के अपेक्षित क्षेत्र में रहने वाली लगभग 15 लाख जनता को सरल, सुलभ एवं सस्ते यातायात द्वारा विकास को जायेगी। यही नही नेपाल के साथ अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के सहारे गतिमान इस रेलवे द्वारा पश्चिमी नेपाल से भारत में आर्थिक एवं सांस्कृतिक से जुड़े नेपाल के नागरिकों के प्रवाह द्वारा रेलवे की आर्थिकी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकेगा।

3-सरयू एवं महाकाली के संगम से उत्तर की ओर डैªगन की सीमा से लगा समूचा ट्रान्स-हिमालयी भू-भाग उत्तराखण्ड का एक विशिष्ट सांस्कृतिक क्षेत्र है जो कि भोट के नाम से जाना जाता है। भोटिया जनजाति यहॉ तीन नदियों की घाटियों के सहारे व्यास, चौदास तथा दारमा घाटियों में निवासित है। अत्यन्त मेहनतकश और सदियों से चीन के साथ अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के पुरोधा रही इनकी आर्थिक भेड़ पालन तथा ऊन से बनी वस्तुओं का क्षेत्रीय, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का अत्यन्त महत्व रहा है। चीन तथा नेपाल के साथ बढ़ते व्यवसायिक सम्बन्धों तथा खुले सीमा द्वारों से न केवल देश का विदेशी व्यापार बढेगा वरन् रेलवे लाईन द्वारा इसकी आशातीत प्रगति होगी।

4-कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए पर्यटन छोटा कैलाश, पंचाचूली, नार्मिक ग्लेशियर के यात्रा पथ के खुलने से राष्ट्र्ीय एवं अन्तराष्ट्र्ीय पर्यटन की वृद्धि जिसका लाभ क्षेत्र को मिलेगा।व्यापार वाणिज्य की वृद्धि के साथ-साथ यह समूचा रेल पथ प्रारंभ में टनकपुर के समीप- पुन्यागिरी के लाखों स्वदेशी तीर्थ यात्रियों केलिए निर्वाध वर्ष भर प्रवेश ईश्वरीय वरदान से कम नहीं होगा। इसके साथ ही कुमाऊॅ की पूर्व राजधानी चम्पावत एवं संलग्न मायावती लोहाघाट एवं एबट माउण्ट जो कि अपने ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के लिए विलक्षण ही नही वरन् अप्रतिम महत्वपूर्ण है, के पर्यटन विकास के नये राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय क्षितिज खुलेंगे।

घाट से सेराघाट के मध्य जहॉ यह रेल पथ एक ओर पश्चिम में दन्या, चौर्गखा, बाडेछीना और बिनसर (अभ्यारण्य) ताकुला, बसौली तथा झिरौली, छाना बिलौरी के विशाल जन क्षेत्र को समेटते हुए रेल सुविधा प्रदान करेगा, वही पूर्वी सीमा पर सघन बसे गनाई-गंगोली तथा बेरीनाग, गंगोलीहाट एवं थल समेत अनेक नव सृजित पहाड़ी नगरीय क्षेत्रों को व्यापार वाणिज्य की प्रगति में सम्मिलित करेगा। तथा विनसर, काली मन्दिर,पाताल भुवनेश्वर समेत अनेक प्राकृतिक एवं विशिष्ट प्राकृतिक भूवृत, धार्मिक पर्यटन स्थलों को भी नयी पहचान मिल पायेगी।

अन्तिम चरण में सेराघाट बागेश्वर का पथ जहॉ उत्तर की ओर सैनिक बाहुल्य क्षेत्र दानपुर के अन्तिम गॉव खाती को यातायात विकास से रूबरू करेगा, वही पश्चिम की ओर सघन बसे खरही पट्टी, बरौरेो (सामेश्वर), लोद, कत्यूर कौसानी, गरूड, बैजनाथ तथा गढवाल (ग्वालदम,देवाल) की लगभग 15 लाख से अधिक जनसंख्या को सेवित करेगा। अनेकानेक पर्वतीय कस्बों जैसे सोमेश्वर ,ताकुला, कौसानी, गरूड, डंगोली ग्वालदम, देवाल, कपकोट, भराडी एवं सामा के लिए व्यापार वाणिज्य की वृद्धि के साथ-साथ यह पथ कौसानी, ग्वालदम, बेदनी बुग्याल पिन्डारी, कफनी, सुन्दर ढूंगा तथा नामिक ग्लेशियरों के लिए आने वाले राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटकों को सुलभ तीव्र यातायात सुविधा बढ़ाने में सहायक होगा।

5-यह रेल लाईन इस क्षेत्र के खनिज संसाधन यथा मैग्नेसाइट, सीसा, स्लेट,चूनापत्थर की राष्ट्रीय उपयोगिता एवं क्षेत्रीय आर्थिक उत्पादकता, तथा रत्नगर्भा भंडारों के अन्वेषण तथा देशहित में इनके युक्तियुक्त उपयोग में भी सहायक होगी।
6-इससे क्षेत्र की ऊष्ण एवं ऊपोष्ण घाटियों में अत्यधिक उत्पादित विभिन्न फलों जैसे आम,नासपाती, अखरोट एवं अमरूद, संतरा, नारंगी तथा बहुतायत से उत्पादित मौसमी सब्जियों आलू,प्याज, टमाटर आदि को भी राष्ट्रीय पहचान एवं बाजार मिलेगा।

7-इस सबके अतिरिक्त बागेश्वर जनपद की कत्यूर दानपुर ,कमस्यार, खरही, अल्मोडा जनपद की रीठागाड एवं चौगर्खा की गनाई-गंगोली, चम्पावत जनपद की गुमदेश का एक बडा भू- भाग तथा चमोली जनपद का थराली,देवाल,वाण एवं ग्वालदम के सघन बसाव क्षेत्र की लगभग 25 लाख से अधिक जनसंख्या इस सरल एवं महत्वपूर्ण परिवहन तंत्र की सुविधा से सीधे रूप से आच्छादित हो सकेगी। अनेक निर्मित एवं निर्माणाधीन तथा प्रस्तावित सडक मार्गो के निमार्ण से उत्तराखण्ड के इस सघन तथा उपेक्षित भू-क्षेत्र को मैदानी क्षेत्रों से सुगम एवं सरल सम्पर्क देकर सर्वसुलभ पहुॅच के अन्तर्गत लाया जा सकता है जिससे निःसंदेह यह समूचा क्षेत्र ,प्रदेश तथा राष्ट्रीय विकास में अपनी मानव एवं प्राकृतिक संसाधनों को सहयोजित कर सकेगा ।
8-टनकपुर -बागेश्वर रेलवे लाइन के तथ्य परक मूल्यांकन तथा इसकी उपादेयता के लिए निम्नांकित सारणी द्वारा उत्तराखण्ड की अन्य रेल लाइनों के उदाहरणों को इस उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है कि यह परियोजना का तकनीकि पक्ष जटिल नही है।

9-सामान्यतया पर्वतीय क्षेत्रों में उचॅाई के तीव्र विपर्यास रेलवे निर्माण के लिए मुख्य अवरोधक सिद्ध होते है। जबकि टनकपुर जो कि समुद्र सतह से 244 मीटर की उॅ.चाई पर स्थित है से बिलौना-854मीटर (बागेश्वर) तक 137 कि0मी0 की दूरी में केवल 610 मीटर का उतार -चढाव होगा । इसकी तुलना में कालका-शिमला के मध्य 98 कि0मी0 की दूरी को पार करने में रेल को 1433 मीटर की उॅचाई पार करनी होती है। रूद्रपुर -काठगोदाम के मध्य यह उच्चता 342 मीटर है जबकि रेल पथ की दूरी मात्र 44 कि0मी0 है। इसके साथ ही यह विचारणीय पक्ष है कि यह तकनीकि 100 वर्षो से अधिक वर्ष की है जबकि भाप से चलने वाले इंजनों द्वारा रेल को खींचा जाता था।

10- भारतीय हिमालय में स्वीकृत इसी प्रकार कांगडा घाटी रेल पथ (1291 मीटर),उ॰पू॰ की लूम्डिंग-हॉफलोंग-बदरपुर रेल लाइन (अधिकतम प्रवणता 1/37) कश्मीर में, जम्मू-बारामूला रेल पथ तथा जम्मू-पूंछ रेल मार्ग जो कि जम्मू पहा़डियों के सहारे गुजरेगा , बिलासपुर -मंड़ी-लेह रेल लाइन जो कि अपने सम्पूर्ण यात्रा पथ में महा हिमालय, जास्कर तथा लद्दाख पर्वत श्रेणियों की उॅचाइयों को पार करेगी तथा (जबकि संसार की सर्वाधिक ऊॅंची रेल लाइन होगी ), इसी प्रकार उत्तराखण्ड की 125 कि0मी0 लम्बी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाईन जो कि अपने सम्पूर्ण पथ में शिवालिक तथा लघु हिमालय पर्वत श्रेणियों को कोरते हुए जायेगी और सर्वेक्षण के निष्कर्षो के अनुसार लगभग 100 कि0मी0 सुरंगों द्वारा पहुॅचेगी, के सापेक्ष टनकपुर -बागेश्वर रेलवे लाइन अपेक्षाकृत तकनीकि स्तर पर सरल होगी। रेलवसर्म्पको के उपरोक्त उदाहरणों द्वारा इसकी व्यवहार्यता स्वयं सिद्ध है।

11- भू-गर्भिक संरचना के सम्बन्ध में एक सामान्य तथ्य कहा जा सकता है कि सरयू तथा महाकाली दोनों नदियों अपने समूचे पथ में भ्रंश घाटियों में प्रवाहित नही होती।
12- इसी प्रकार रेल मार्ग के निर्माण में किसी भी प्रकार की सामाजिक विस्थापन का प्रश्न नही है और यह भी कि कुछ छोटे व आवश्यक रेलवे पुलों को छोड पूरे निर्माण में चार रेल पुलों का निर्माण होगा यहां यह तथ्य समीचीन होगाा कि इन प्रस्तावित पुलों की चौडाई मैंदानी तथा भाबर के नदियों के विशाल चौडाई की तुलना में अत्यन्त कम होगी।

लंबा रहा है संघर्ष का इतिहास:

गौरतलब है कि वर्तमान में उत्तराखंड के कुमाऊं मण्डल के काठगोदाम, रामनगर और टनकपुर और गढ़वाल मण्डल के कोटद्वार और ऋषिकेश तक ही रेलमार्ग हैं। यह सभी स्टेशन मैदानी इलाकों के अन्तिम छोर पर हैं, अर्थात पहाड़ों में एक किलोमीटर का भी रेलमार्ग नही है। आश्चर्यजनक बात यह है कि इन स्थानों तक भी रेलमार्गों का निर्माण आज से लगभग 70-80 साल पहले ब्रिटिश शासन काल में ही हो चुका था। स्वतन्त्र भारत में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र में रेल पहुंचाने की कोशिश के अन्तर्गत एक मीटर भी रेल लाइन नहीं बिछ पाई। टनकपुर-बागेश्वर रेललाइन का सर्वे सन् 1912 में ही हो चुका था। पुनः सन् 2006 में इस मार्ग का सर्वे करवाया गया है। वर्ष 1960-70 के दशक में पद्मश्री देवकी नंदन पांडे ने पहाड़ों में रेलमार्ग बनाये जाने की मांग पहली बार उठाई थी, उसके बाद कई संघर्ष समितियां इस मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक, हर मंच पर पहाड़ की इस मांग को उठा चुकी हैं। बागेश्वर-टनकपुर रेलमार्ग संघर्ष समिति के सदस्य जन्तर-मन्तर में दो बार आमरण अनशन कर चुके हैं।

बड़ा पिछड़ा क्षेत्र होगा लाभान्वित

प्रस्तावित टनकपुर-बागेश्वर रेलवे लाईन के मार्ग में धौलीगंगा, टनकपुर और पंचेश्वर जैसी वृहद विद्युत परियोजनायें चल रही हैं। इसके अतिरिक्त इस मार्ग में पड़ने वाले अत्यन्त दुर्गम और पिछड़े इलाके जैसे-बागेश्वर के कत्यूर, दानपुर, कमस्यार, खरही अल्मोड़ा के रीठागाड़ और चौगर्खा, पिथौरागढ़ के घाट, गणाई और गंगोल और चम्पावत के गुमदेश और पंचेश्वर इलाके की लगभग 10 लाख जनता इस सुगम परिवहन से जुड़ सकेगी।

अपेक्षाकृत बहुत आसान होगा टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का निर्माण

प्रस्तावित टनकपुर-बागेश्वर रेल पथ का मानचित्र
प्रस्तावित टनकपुर-बागेश्वर रेल पथ का मानचित्र

कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के डा. जीएल साह ने टनकपुर से बागेश्वर तक तीन माह के अथक परिश्रम के बाद भूगर्भीय सर्वेक्षण करते हुए अपनी रिपोर्ट रेल मंत्रालय को भेजी थी। इस सर्वे में कंप्यूटर, उपग्रह चित्र और भौतिक सर्वेक्षणों को आधार बनाया गया था। बताया जा रहा है कि इस परियोजना के पूरा होने से बागेश्वर के साथ ही ट्रेकिंग के शौकीन सैलानियों के स्वर्ग पिंडारी, कफनी व सुंदरढूंगा ग्लेशियरों के लिए 142 किमी का फासला कम होगा। बताया गया है कि इस प्रस्तावित योजना में कुल 137 किलोमीटर लम्बी रेल लाइन बिछाई जानी है, जिसमें से 67 किमी लाइन अंतराष्ट्रीय सीमा (भारत-नेपाल) के समानान्तर बननी है। पंचेश्वर के बाद यह रेलमार्ग सरयू नदी के समानान्तर बनना है। इस रेल लाइन के बिछाने पर विस्थापन भी नहीं के बराबर होना है, क्योंकि महाकाली और सरयू दोनों नदियां घाटियों में बहती हैं। ये घाटियां भौगोलिक स्थिति से काफी मजबूत हैं। इस प्रस्तावित योजना में सिर्फ चार बड़े रेल पुलों का निर्माण करने की जरूरत पड़ेगी। पर्वतीय रेल व सड़क योजनाओं में मुख्य तकनीकी पक्ष ऊंचाई ही है, लेकिन इस लाइन को टनकपुर (समुद्र तल से ऊंचाई 244 मीटर) से बागेश्वर (854 मीटर) तक पहुंचने में 137 किमी की दूरी में मात्र 610 मीटर की ऊंचाई ही पार करनी होगी। अन्य पर्वतीय रेल योजनाओं की ऊंचाई की तुलना की जाये तो कालका से शिमला तक से 98 किमी की दूरी तय करने में 1433 मीटर और रूद्रपुर-काठगोदाम के मध्य 44 किमी में 342 मीटर की ऊंचाई पार करनी पड़ती है। वहीं उत्तराखंड की 125 किमी लम्बी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाईन अपने सम्पूर्ण पथ में शिवालिक तथा लघु हिमालय पर्वत श्रेणियों को कोरते लगभग 100 किमी सुरंगों से गुजरेगी, जबकि टनकपुर-बागेश्वर रेलवे लाइन पर एक भी सुरंग बनाने की जरूरत नहीं होगी, और पुल भी केवल चार ही बनाने पड़ेंगे, और प्रस्तावित पुलों की चौडाई भी मैदानी तथा भाबर के नदियों की तुलना में काफी कम होगी। इससे स्पष्ट है कि तकनीकी रूप से भी टनकपुर से बागेश्वर रेलमार्ग का निर्माण करना इस युग में कोई दुष्कर कार्य नहीं होगा।

बिना सुरंग केवल चार पुलों से 610 मीटर ही चढ़ कर पहुँच जाएगी बागेश्वर !

-प्रथम विश्व युद्ध से पूर्व 1888-89 में ही अंग्रेजों ने करा दिया था इस रेल मार्ग का सर्वेक्षण
-137 किमी के इस रेल पथ में केवल 610 मीटर का ही उतार-चढ़ाव होगा, लग सकते हैं टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन को पंख
नवीन जोशी, नैनीताल। गत दिवस केंद्रीय रेलमंत्री सुरेश प्रभु द्वारा गैरसेंण में टनकपुर से बागेश्वर रेल लाइन के निर्माण पर वक्तव्य देने के बाद यह प्रस्तावित रेल पथ पुन: चर्चा में आ गया है। इस बाबत पूर्व में भी अपने अध्ययन के बाद बनाये गये प्रस्ताव को दिखा चुके कुमाऊं विश्व विद्यालय के भूगोल विभाग के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डा. जीएल साह ने दावा किया है कि उनकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर ही राष्ट्रीय महत्व की परियोजना के रूप में शामिल हुई और पुन: इसकी घोषणा हुई है। उन्होंने ही बीते दिनों रेल मंत्री सुरेश प्रभु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस रेल पथ के बारे में विस्तृत प्रस्ताव भेजा दिया था, जिसके आधार पर ही श्री प्रभु ने इस मार्ग के बारे में घोषणा की है।

डा. साह ने बताया कि टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन की महत्वाकांक्षी हिमालयी रेल परियोजना के बारे में प्रथम विश्वयुद्ध से पूर्व 1888-89 तथा बाद में 1911-12 में अंग्रेजी शासकों द्वारा तिब्बत तथा नेपाल के साथ सटे इस पर्वतीय क्षेत्र के लिए आर्थिक-सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रगति के अतिरिक्त इसकी भू-राजनैतिक उपयोगिता तथा प्रचुर वन सम्पदा को ध्यान में रखकर व सैनिकों के सरल प्रवाह के निमित्त इस क्षेत्र में सर्वेक्षणों की श्रृंखला से प्रारम्भ किया था। इन सर्वेक्षणों के साक्ष्य आज भी इस क्षेत्र में मिलते हैं। हालांकि प्रथम विश्वयुद्ध के कारण उपजी समस्याओं के कारण यह योजना ठंडे बस्ते में जाती रही और बाद के योजनाकारों द्वारा विस्मृत कर दी गयी। आगे स्वतंत्र भारत में 1960-70 के दशक में गांधीवादी पद्मश्री स्व. देवकी नंदन पांडे के नेतृत्व में स्वतन्त्रता संग्राम सैनानी स्व. राम लाल साह एवं डा. साह के पिता तत्कालीन बागेश्वर विकास खंड के प्रमुख स्व. ईश्वरी लाल साह ने इस योजना को पुर्नजीवित करने के प्रयास किये। 1980 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री इदिरा गांधी के बागेश्वर आगमन पर भी इस मांग के ज्ञापन सौपे गये। जिसके बाद 1984 में इसके सर्वेक्षण के लिए सरकार द्वारा बजट आवंटित कर सर्वेक्षण का कार्य प्रारम्भ हुआ, किंतु फिर लगभग दो दशकों तक योजना नेपथ्य में चली गयी। इधर राज्य बनने के बाद दिसम्बर 2004 में बागेश्वर-टनकपुर रेल मार्ग निर्माण संघर्ष समिति ने इस मांग पर बागेश्वर से दिल्ली के जंतर-मंतर तक संघर्ष किया। आगे 2007 में कुमाऊं के निजी भ्रमण पर आये तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने पुन: इसके निर्माण के लिये त्वरित सर्वेक्षणों के आदेश दिये। आगे वर्ष 2012 के रेल-बजट में तत्कालीन रेल मंत्री मुकुल राय ने इस रेल लाइन को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा देकर इसे देश की चार राष्ट्रीय रेल परियजनाओं में सम्मिलित किया।

उल्लेखनीय है कि तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने वर्ष 2010 में लोकसभा चुनाव के पहले नैनीताल, कौसानी व बागेश्वर भ्रमण के दौरान नैनीताल में सर्वप्रथम पत्रकारों (जिसमें लेखक भी शामिल था) के यह कहते हुए औचित्य समझाने पर कि उनके प्रदेश बिहार और उत्तराखंड एक जैसी पलायन की समस्या से ग्रस्त हैं। पलायन के कारण उत्तराखंड का चीन से लगा सीमावर्ती क्षेत्र खाली होता जा रहा है। रेल लाइन बनने से लोग यहां रुकेंगे, और देश की सीमाएं मजबूत होंगी, बताने पर ही सर्वप्रथम बागेश्वर-टनकपुर रेल लाइन के बारे में पहला सकारात्मक बयान दिया था, और आगे केंद्रीय रेल बजट में 110 किलोमीटर लंबी इस रेलवे लाइन बिछाने की स्वीकृति प्रदान की थी। और आगे रेल बजट में घोषित इस रेल लाइन का अक्टूबर 2010 में सर्वे किया गया था। गौरतलब है कि इससे एक दिन पूर्व रामनगर में उन्होंने इस रेल लाइन को औचित्यहीन ठहराया था। आगे रेलमंत्री मुकुल रॉय ने वर्ष 2012 में टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन को राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित करने का ऐलान किया था। इधर बीते दिनों पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक केके अटल ने सर्वेक्षण रिपोर्ट रेल मंत्रालय को सौंपे जाने की जानकारी दी थी। मंगलवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने कहा कि रेल बजट में इस बाबत घोषणा होने और इस रेल लाइन के आगे बढ़ने में कोई संदेह नहीं है। 

डा. साह ने अपने सर्वेक्षण के आधार पर बताया कि प्रस्तावित रेल लाइन 1909-10 में स्थापित टनकपुर स्टेशन से बागेश्वर तक शारदा (काली) व सरयू के समानान्तर उतार-चढाव एवं मोडदार पथ पर स्टेशनों एवं पुलों से आगे बढती हुयी लगभग 137 किमी की होगी। पहला स्टेशन पोथ या चूका गांव पर टनकपुर से 46 किमी पर, दूसरा मदुवा लगभग २५ किमी पर, तीसरा पंचेश्वर लगभग 16 किमी आगे, चौथा घाट 19 किमी पर, पांचवा भैंसियाछाना या सेराघाट 33 किमी पर तथा छठा बिलौना या बागेश्वर स्टेशन 18 किमी पर होगा। उन्होंने बताया कि 137 किमी की इस रेल लाइन में से करीब 67 किमी लाईन चीन व नेपाल की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के समानान्तर होगी। लिहाजा इससे सैनिक गतिविधि की निगरानी, सेना एवं भारी सैन्य सामग्री के लाने-ले जाने के लिए इसका उपयोग किया जा सकेगा, साथ ही निर्माणधीन पंचेश्वर बांध के निर्माण के लिए तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा, पूर्णागिरि धाम, उच्च हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों में पर्यटन व आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिये भी यह मील का पत्थर साबित होगी। प्रदेश की करीब 55 लाख जनता को भी इससे लाभ मिलेगा।

उत्तराखंड में नई लाइनों का सर्वे शुरू

भाजपा सांसद तरुण विजय ने 2015 के रेल बजट के बाद बताया कि उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में दशकों से लंबित बहुप्रतीक्षित व महत्वाकांक्षी तथा राष्ट्रीय सुरक्षा व सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजना में शामिल टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का प्रारंभिक इंजीनियरिंग व ट्रेफिकिंग सर्वेक्षण (प्रिलिमिनरी इंजीनियरिंग एंड ट्रेफिकिंग सर्वे-पीईटीएस) का कार्य पूरा कर लिया गया है। इस सर्वेक्षण में 50 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान के साथ सामाजिक जरूरतों के लिए भी जरूरी बताई गई है। रेल मंत्री ने रामनगर से चौखुटिया और उसके गैरसैंण तक विस्तारीकरण की मांग को स्वीकार करते हुए 230 किमी लंबी रेल पटरी बिछाने का सर्वेक्षण बजट में स्वीकार कर लिया है। इसी प्रकार देहरादून-सहारनपुर 69 किमी, ऋषिकेश-देहरादून 20 किमी और देहरादून-कालसी 47 किमी रेल लाइन बिछाने के काम को हाथ में लिया गया है। उत्तराखंड में जहां 2014-15 में केवल 76 करोड़ रुपये के ऐसे रेलवे कार्य हाथ में लिए गए थे, जो लाइनों, डबलिंग व गॉज कन्वर्जन से संबंधित थे, वहीं 2015-16 में नरेंद्र मोदी सरकार में रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने 304 करोड़ की राशि उत्तराखंड के रेल कार्यों को दी है, अर्थात पिछली सरकार की तुलना में उत्तराखंड के रेल कार्यों को 300 प्रतिशत की वृद्धि मिली है। इसी प्रकार यात्रियों की सुविधा के लिए वर्ष 2014-15 में उत्तराखंड की रेल लाइनों के लिए 148.15 करोड़ रुपये आवंटित थे,जिसमें 66.6 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 2015-16 के लिए यह राशि 334.41 करोड़ रुपये कर दी गई है। मैकेनिकल प्रोजेक्ट की दृष्टि से उत्तराखंड में 2015-16 में 316.67 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए एक करोड़ रुपये दिए गए हैं।

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नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 26 मार्च 2019। देश के हिमाचल, जम्मू कश्मीर और असम समेत कई हिमालयी राज्यों में जब रेल दौड़ रही है, तब इसके विपरीत उत्तराखंड के पहाड़ों में जीवन को सरल बनाने, पर्यटन विकास और रोजगार के लिए रेल सेवा सपना बन कर रह गई है। प्रथम विश्व युद्ध से पूर्व 1888-89 में ही अंग्रेजों ने इस रेल मार्ग का सर्वेक्षण करा दिया था। तब से करीब सवा सौ साल गुजरने के बावजूद टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना पर काम कहने को हो रहा है पर धरातल पर 1 इंच भी आगे नहीं बढ़ा है। अब इस रेल सेवा की फाइल रेलवे बोर्ड में पड़ी है। चुनाव के समय सर्वे के लिए धनराशि स्वीकृत करने की सियासी चाल से यहां के लोग खिन्न हैं।

1996 में तत्कालीन केंद्रीय रेल राज्य मंत्री सतपाल महाराज ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग व टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन के लिए प्रयास किए। 2010-11 के बजट में बागेश्वर रेल लाइन के सर्वे के लिए 46.50 करोड़ रुपया स्वीकृत हुआ। 2013 -14 के बजट में टनकपुर बागेश्वर रेल परियोजना के साथ ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया। 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का भूमि पूजन करने का दावा किया। टनकपुर-बागेश्वर की फाइल रेलवे बोर्ड के पास भेजी गई। इसके बाद यह फाइल वहीं अटकी है। पिछले पांच साल में सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा ने इसके लिए प्रयास नहीं किया।  सूचना अधिकार से मिली जानकारी के अनुसार 53.44 किमी लंबी इस रेल लाइन में 276 पुल और 13 स्टेशन प्रस्तावित थे। राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी की ओर से इसका फिर से सर्वे करने के लिए धनराशि स्वीकृत करने की बात सामने आई है।आश्चर्यजनक बात है कि सर्वे पूरा हो चुका है तो दोबारा कैसा सर्वे। इस चुनाव में यही रेल लाइन बड़ा मुद्दा बनने जा रही है।

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रेलवे के हालात: 

नैनीताल। सम्मेलन में बताया गया कि रेलवे देश में सवा लाख किमी रेल पटरियों पर रोज 20 से 25 हजार गाड़ियों का संचालन करता है और रोज दो करोड़ यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती है। विभाग में 13.26 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि तकनीकि सेवाओं से संबंधित 1.8 लाख सहित दो से ढाई लाख कर्मचारियों के पद रिक्त पड़े हैं। बड़ी संख्या में लोग आउटसोर्सिग के माध्यम से कार्य कर रहे हैं। रेलों में रेल कर्मियों की गलती से होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या बीते वर्षो में 50 फीसद से घटकर 39 फीसद हो गई है, जबकि रेलवे समपारों पर होने वाली दुर्घटनाएं 33 फीसद से बढ़कर 40 फीसद हो गई हैं। 1600 विभागीय कर्मचारी भी प्रतिवर्ष ऐसे हादसों का शिकार हो रहे हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 28 फरवरी 2019। राज्यसभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने एक और बड़ा स्वप्न देख लिया है और उनके इस स्वप्न पर पहल भी हो हुई है। रेल मंत्रालय ने उत्तराखंड के लिए बृहस्पतिवार को ऐतिहासिक घोषणा की है। इस निर्णय के बाद आने वाले समय में रेल नेटवर्क गैरसैंण, चौखुटिया, और बागेश्वर पहुंच जाएगा, जिससे पूरा उत्तराखंड रेल मार्ग के नेटवर्क से जुड़ जाएगा। यह पहल सफल रही तो किसी दिवास्वप्न से कम नहीं होगी।

बता दें कि टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन के लिए स्थानीय जनता पिछले 32 वर्षो से आंदोलनरत है। वहीं रामनगर चौखुटिया रेल लाइन के लिए भी दो दशक पहले से आंदोलन हो रहा है। राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी राज्य के हितों को लेकर काफी सक्रिय हैं। 21 फरवरी को ही उन्होंने इन तमाम रेलवे लाइनों के लिए रेल मंत्री पीयूष गोयल से मांग की थी। उनकी पहल पर रेल मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को टनकपुर से बागेश्वर, बागेश्वर से चौखुटिया, चौखुटिया से गैरसैंण और गैरसैंण से कर्णप्रयाग रेल लाइन सर्वे की मंजूरी दी। उत्तर-पूर्वी रेलवे गोरखपुर के महाप्रबंधक आरके प्रेमी ने टनकपुर से बागेश्वर की बीच 155 किमी की रेल लाइन के लिए दोबारा सव्रे के लिए 23 लाख 25 हजार रुपये मंजूर किए हैं। बागेश्वर, कर्णप्रयाग वाया गैरसैंण रेल लाइन सर्वे के लिए 38,7500 रुपये मंजूर किए हैं । श्री बलूनी ने बताया कि केंद्र सरकार ने राज्य के सांस्कृतिक, राजनीतिक व सामाजिक चेतना के केंद्र गैरसैंण को बड़ा सम्मान दिया है। ऐसा करके उन्होंने राज्य आंदोलन के शहीदों, राज्य की आंदोलनकारी जनता तथा उत्तराखंड के प्रति संवेदनशील मानस के प्रति सम्मान अपना व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कार्यकाल में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर तेजी से कार्य हो रहा है। भूमि हस्तांतरण, सर्वे और प्रोजेक्ट पर तेजी से काम जारी है। यह रेल लाइन राज्य की प्रगति में नया इतिहास लिखेगी।आने वाले समय में पर्यटन के क्षेत्र में इस सीमांत प्रदेश कायाकल्प होगा।

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-एक रेक का पहला चरण पूरा, दूसरी रेक 28 फरवरी तथा तीसरी रेक 15 मार्च तक हो जाएगी यात्रियों के लिए उपलब्ध
नवीन समाचार, नैनीताल, 16 फरवरी 2019। ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को उच्च स्तर की यात्री सुविधायें उपलब्ध कराने के उद्देश्य ये पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल ने ‘प्रोजेक्ट उत्कृष्ट’ के तहत रानीखेत एक्सप्रेस का कायाकल्प कर दिया है। पूर्वोत्तर रेलवे के पीआरओ राजेंद्र सिंह ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत रानीखेत एक्सप्रेस के सभी टायलेटों के फर्श पर एपॉक्सी फ्लोरिंग की गयी है, तथा फ्रेश एअर वेंटीलेशन सिस्टम, नयी विशिष्टताओं के फ्लेशिंग वाल्व, अच्छी गुणवत्ता के लिक्विड सोप डिस्पेन्सर तथा स्टेनलेस स्टील के डस्ट बिन लगाये गये हैं, तथा गैंगवे व डोरवेज एवं प्रसाधनों की आन्तरिक दीवारों पर विनायल रैंपिंग की गयी है, जिससे यान की ऐस्थेटिक लुक में सुधार हुआ है।
इसके अलावा एसी डिब्बों में पश्चिमी स्टाइल वाले टायलेटों में बेबी सीटर तथा सभी टायलेट में डिसइंफेक्टेशन हेतु आटोजेनीटर सिस्टम लगाये गये हैं। वहीं सभी डिब्बों में प्रसाधनों के बीच की गैलरी में पॉलीग्रास मैट तथा वेस्टीबल एरिया में रबर होलोमैट बिछायी गयी है, जिससे यात्रियो ंको एक कोच से दूसरे कोच में जाने में सुगमता होगी। साथ ही सभी डिब्बों में पारंपरिक बिजली की फिटिंग के स्थान पर एलईडी लाइटों का प्रावधान भी किया गया है। जबकि प्रथम श्रेणी के एसी डिब्बों में यात्रियों हेतु काफी आरामदायक मिंक ब्लेंकेट उपलब्ध कराये गये हैं। इसके अलावा डिब्बों की सघन सफाई एवं डिस्इन्फेक्टेशन किया गया है तथा बाहरी सतह पर पेन्ट टच अप का कार्य भी किया गया है। इस तरह की रानीखेत एक्सप्रेस की एक रेक का कार्य पूर्ण करके शनिवार 15 फरवरी को निकाला गया तथा काठगोदाम से रूद्रपुर स्टेशनों के बीच यात्रियों से बातकर उनकी फीडबेक भी ली गयी, जिसमें यात्रियों ने रेलवे द्वारा किये गये सराहनीय कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की गयी। बताया कि आगे रानीखेत एक्सप्रेस की दूसरी रेक 28 फरवरी तक तथा तीसरी रेक 15 मार्च तक पूरी होकर यात्रियों के लिए उपलब्ध हो जाएगी।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जनवरी 2019। उत्तराखंड को एक और रेलगाड़ी मिल गयी है। पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल की ओर से बुधवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार सिगरौली-बरेली-सिगरौली त्रिवेणी एक्सप्रेस व शक्तिनगर-बरेली-शक्तिनगर त्रिवेणी एक्सप्रेस रेल गाड़ियों का मार्ग विस्तार टनकपुर तक किया जायेगा। यह दोनों गाड़ियां अपने विस्तारित मार्ग के तहत बरेली सिटी, इज्जतनगर, पीलीभीत तथा मझौला पकड़िया स्टेशनों पर भी रूकेगी। इन दोनों त्रिवेणी एक्सप्रेस गाड़ियों के मार्ग विस्तार टनकपुर तक हो जाने से बरेली सिटी, पीलीभीत एवं उत्तराखंड के खटीमा, बनबसा व टनकपुर के आसपास के यात्रियांें को शाहजहांपुर, हरदोई, लखनऊ, रायबरेली, इलाहाबाद, विन्ध्याचल, मिर्जापुर, सोनभद्र आदि नगरों को आने-जाने के लिये एक अतिरिक्त सीधी ट्रेन की सुविधा भी उपलब्ध हो जायेगी।

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    • टनकपुर से देहरादून, दिल्ली, अमृतसर तथा इलाहाबाद हेतु एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन शुरू करने की भी की गयी मांगें
    • काठगोदाम से शताब्दी ट्रेन शाम के समय वाया बरेली-रामपुर होेते हुए दिल्ली तक तथा सुबह दिल्ली से काठगोदाम के लिए भी चलाने की की गयी मांगें
  • अल्मोड़ा सांसद टम्टा ने टनकपुर- बागेश्वर रेल लाइन का सर्वेक्षण पूर्ण होने के बाद शीघ्र इस लाइन का निर्माण शुरू करने एवं रामनगर-चौखुटिया-गैरसैण नई रेल लाइन का सर्वेक्षण कार्य शीघ्र पूरा करने की भी मांगें कीं

नैनीताल। 11 सितम्बर, 2018। पूर्वोत्तर रेलवे, इज्जतनगर मण्डल द्वारा सेवित क्षेत्रों के संसद सदस्यों एवं प्रतिनिधियों के साथ पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबन्धक राजीव अग्रवाल के साथ बुधवार को बरेली स्थित मण्डल रेल प्रबन्धक कार्यालय के सभाकक्ष में बैठक हुई। बैठक में अध्यक्षता करते हुए बरेली के सांसद एवं केंद्र सरकार में श्रम व रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष गंगवार ने भोजीपुरा स्टेशन पर पैदल उपरिगामी पुल का निर्माण शीघ्र करने, बरेली-लालकुआं रेल मार्ग पर ग्राम बिचपुरी में बंद किये जा रहे मानव रहित समपार सं. 15/सी एवं बहेड़ी तहसील के ग्राम करनपुर के बंद समपार संख्या 17/सी एवं 18/सी पर भी आरयूबी. का निर्माण करने की जरूरत बताई। इसके अलावा उन्होंने सीबी गंज में निर्माणाधीन डैमो शेड के कार्यशील हो जाने के बाद बरेली-हल्द्वानी एवं बरेली-कासगंज रेल खंडों पर दिन में 2-3 फेरे डैमो ट्रेन के लगवाने को कहा। साथ ही काठगोदाम-मथुरा रेलपथ पर पूर्व में चल रही कुमाऊं एक्सप्रेस की तर्ज पर बडी लाइन की गाड़ी को कुमाऊं एक्सप्रेस के नाम एवं समय-सारणी से ही पुनः चलाने, काठगोदाम से शताब्दी ट्रेन शाम के समय वाया बरेली-रामपुर होेते हुए दिल्ली तक तथा सुबह दिल्ली से काठगोदाम के लिए, काठगोदाम से कन्याकुमारी-रामेश्वरम वाया बरेली-कासगंज-मथुरा-आगरा- भोपाल-नागपुर-विजयवाडा-तिरूपति-सेलम और मदुरई जंक्शन तक, एक जनशताब्दी ट्रेन काठगोदाम से नई दिल्ली आनन्द विहार वाया बरेली प्रतिदिन तथा एक सुपरफास्ट ट्रेन काठगोदाम से बंगलौर-वास्कोडिगामा तक चलाने की मांग की।
वहीं ऑवला के सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने भी इज्जतनगर मंडल की प्रतिष्ठित कुमाऊं एक्सप्रेस की तर्ज पर काठगोदाम से आगरा फोर्ट के मध्य एक एक्सप्रेस ट्रेन को पुनः चलाने की मांग की। पीलीभीत की सांसद एवं केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी के प्रतिनिधि आनन्द लाल चौधरी ने बहेड़ी स्टेशन पर प्रातः 8-9 बजे के बीच काठगोदाम-लखनऊ अथवा रामनगर-आगरा फोर्ट एक्सप्रेस का ठहराव प्रदान करने की मांग की। जबकि नैनीताल के सांसद अजय टमटा के प्रतिनिधि हेमेंद्र रावत ने टनकपुर से देहरादून, दिल्ली, अमृतसर तथा इलाहाबाद हेतु एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन शीध्र करने का सुझाव दिया। साथ ही टनकपुर- बागेश्वर रेल लाइन का सर्वेक्षण पूर्ण होने की जानकारी देते हुए इस लाइन का निर्माण कार्य शीध्र प्रारम्भ करने एवं रामनगर-चौखुटिया-गैरसैण नई रेल लाइन का सर्वेक्षण कार्य शीघ्र पूरा करने की भी मांगें कीं। इसके अलावा उन्होंने टनकपुर से बरेली व अन्य स्थानों को जाने वाली पैसेंजर गाड़ियों का पीलीभीत में एक से डेढ घंटे तक होने वाले ठहराव की अवधि को कम करके 10 से 15 मिनट तक सीमित करने की मांग भी कीं। साथ ही 15013 रानीखेत एक्सप्रेस के प्रायः विलम्ब से काठगोदाम पहँुचने का उल्लेख करते हुए इसके समय पालन में सुधार लाने, इस गाड़ी के वातानुकूलित, स्लीपर तथा सामान्य श्रेणी के कोच पुराने होने की शिकायत करते हुए इनके स्थान पर नए कोचों की व्यवस्था करने और इधर हाल में शुरू हुई काठगोदाम से चलने वाली नैनी-दून जनशताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन के समय को पर्वतीय क्षेत्र के निवासियों के लिए अनुकूल नहीं होने की बात कहते हुए इस गाडी के समय-सारणी में परिवर्तन करने की मांग की।

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नैनीताल। रेल प्रशासन ने ग्रीष्मकाल में यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुये यूपी व नैनीताल वालों को बड़ा तोहफा दिया है। उनकी सुविधा के लिए झांसी-लालकुंआ के बीच एक जोड़ी ग्रीष्मकालीन साप्ताहिक विशेष गाडी का संचालन शुरू किया जा रहा है। यह विशेष रेलगाड़ी फिलहाल 10 फेरों के लिए चलेगी। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता ने बताया कि 04187 झांसी-लालकुंआ ग्रीष्मकालीन साप्ताहिक विषेष गाड़ी 25 मई तथा 1, 8,15, 22 व 29 जून तथा 6, 13, 20 तथा 27 जुलाई यानी प्रत्येक शुक्रवार को झांसी से रात्रि 11.05 बजे चल कर लालकुंआ अगली सुबह 10.45 बजे पहुंचेगी। और वापसी में लालकुंआ से हर शनिवार दोपहर 12.10 बजे चल कर रात्रि 12.30 बजे झांसी पहुंचेगी। गाड़ी में 6 साधारण श्रेणी के, 4 शयनयान श्रेणी, 3 वातानुकूलित तृतीय श्रेणी तथा 2 एसएलआरडी श्रेणी सहित कुल 15 कोच लगाये जायेंगे।

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-टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन की विस्तृत रिपोर्ट बनाने वाले कुमाऊं विवि के पूर्व प्रोफेसर गोविन्द लाल साह ने लोहनी को भिजवाई

नवीन जोशी, नैनीताल। अपनी हर नयी जिम्मेदारी को उम्मीदों से भी बेहतर तरीके से पूरा करने के कारण ‘मिस्टर टर्न अराउंड’ कहे जाने वाले अश्विनी लोहनी के रेलवे बोर्ड का चेयरमैन बनने से एक बार फिर कुमाऊं के पहाड़ों पर आजादी के बाद रेल लाइन के आगे सरकने की उम्मीदों को पंख लग गये हैं। कुमाऊं में टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन की विस्तृत रिपोर्ट बनाने वाले कुमाऊं विवि के भूगोल विभाग के पूर्व प्रोफेसर डा. जीएल साह लोहनी अपनी रिपोर्ट को यहां अल्मोड़ा जनपद के सात गांवों के समूह सतराली के ग्राम लोहना के मूल निवासी लोहनी को भिजवाने जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि डा. साह ने अपनी यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु को भिजवाई थी, जिसके बाद ही प्रभु ने इस रेल लाइन को राष्ट्रीय महत्व की परियोजना में शामिल किया था। अलबत्ता, बाद में यह फिर से ठंडे बस्ते में डाल दी गयी है।

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खुशखबरी : सरोवरनगरी में खुला पहला ‘जॉगर्स पार्क एवं खुला जिम’, पूरी हुई सुबह-शाम की सैर करने एवं फिटनेस के शौकीनों की मुराद

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 9 जुलाई 2022। सरोवर नगरी नैनीताल में अब लोग अपने स्वास्थ्य सुधार के प्रति अधिक जागरूक हो पाएंगे तथा अपने स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दे पाएंगे। ऐसा इसलिए कि नगर में आज पहले खुले जिम की स्थापना हो गई है। समाज सेवा में अहम भूमिका निभाने वाले रोटरी … Read more

नैना देवी हिमालयन पक्षी आरक्षिति को नैनीताल चिड़ियाघर के प्रबंधन में सोंपने को विधायक से मांगा सहयोग…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अप्रैल 2022। नैनीताल की नवनिर्वाचित विधायक सरिता आर्य की अध्यक्षता में नैनीताल प्राणी उद्यान यानी नैनीताल चिड़ियाघर के सभागार में स्थानीय नागरिकों हेतु रोजगार सृजित किये जाने के सम्बन्ध में बैठक आयोजित की गई। बैठक में चिड़ियाघर के निदेशक डीएफओ टीआर बीजू लाल ने विधायक को स्थानीय … Read more

खूब पसंद किए जा रहे हल्द्वानी में बन रहे मडुवे के ‘सुगर व ग्लूटन फ्री’ बिस्किट, पिज्जा और केक

Maduve ka cake

Vocal for Local : In the era where the youth are caught up in the allure of international cuisine, Umesh Bisht, a young entrepreneur from Haldwani’s Lamachod, is making a refreshing effort to preserve his cultural heritage while embracing modernity. After studying Hotel Management and working in metropolitan cities, Umesh returned home during the COVID-19 pandemic and embarked on a unique venture. He established ‘Umesh Bisht Impression’ on Gas Godam Road, Haldwani, where he crafts biscuits, pizzas, and cakes using Maduve, a traditional mountain grain.