उत्तराखंड में न हो पाये नगर निकाय चुनाव (Nikay Chunav) पर 1 बड़ा समाचार

Nikay Chunav

(Uttarakhand Politics) आगामी लोक सभा चुनाव के लिये भाजपा की बड़ी बैठक, तय किया हर सीट 5 लाख से अधिक वोटों से जीतकर ‘हैट्रिक’ बनाने का लक्ष्य, कांग्रेस ने नियुक्त किये समन्वयक

Uttarakhand Rajniti BJp Congress

Uttarakhand Politics

(Nagar Nikay)1 निवर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष पर वित्तीय अनियमितता एवं सरकारी भूमि पर होटल बनाने के आरोप…

Nagar Nikay

स्कूली बच्चों को मुफ्त जूते व बैग, किसानों के लिए 450 करोड़ सहित बहुत कुछ है उत्तराखंड के बजट में…

नवीन समाचार, गैरसैंण, 4 मार्च 2021। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गुरुवार को विधानसभा में वर्ष 2021-22 के लिए 57400.32 करोड़ का कर मुक्त और राजस्व सरप्लस बजट पेश किया। सरकार ने विकास कार्यों, खासतौर पर सड़कों व पुलों के निर्माण और रखरखाव को बजट पोटली खोल दी है। लोक निर्माण कार्यों के लिए 2369 करोड़ बजट रखा गया है। कक्षा एक से आठवीं तक सभी विद्यार्थियों को मुफ्त जूते और स्कूल बैक देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा माध्यमिक शिक्षा में संसाधन जुटाने और शैक्षिक सुधार के लिए एडीबी के माध्यम से 39.70 करोड़ खर्च होंगे।
गुरुवार शाम चार बजे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बतौर वित्त मंत्री दूसरा बजट पेश किया। प्रदेश की भाजपा सरकार का यह पांचवां बजट है। बजट में किसानों पर विशेष फोकस करते हुए 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का संकल्प दोहराया गया है। इसके लिए परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत 87.56 करोड़ रुपये रखे गए हैं। साथ में गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए भी 245 करोड़ की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना में 20 करोड़ और एकीकृत आदर्श कृषि ग्राम योजना में 12 करोड़ का प्रविधान है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना के लिए बजट में 25 करोड़ दिए गए हैं। वहीं दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के लिए 47 करोड़ दिए गए हैं। उधर, शहरी क्षेत्र में हर घर में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। जल जीवन मिशन के तहत शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक घर को पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके लिए 30.15 करोड़ की व्यवस्था की गई है। नलकूपों, नहरों, झीलों व बांधों के रखरखाव को 118 करोड़ रुपये, नलकूपों व नहरों के निर्माण को 150 करोड़ रखे गए हैं।

यह भी पढ़ें : मोदी-2.0 का पहला, देश की पहले महिला वित्त मंत्री द्वारा पेश किए जा रहे ‘बही खाते’ (बज़ट नहीं) से रेलवे🚈 में बढ़ेगी निजी भागीदारी, राज्यों को मिलेगी सस्ती बिजली..

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 जुलाई 2019। मोदी सरकार-2 का पहला बजट आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश कर रही हैं। वित्तमंत्री पहली बार ब्रीफकेस की बजाए लाल रंग के कपड़े में बजट दस्तावेज लेकर पहुंची जिसे बजट नहीं बल्कि बही खाता बताया गया है। अपने बजट में आने वाले दशक का लक्ष्य देश के सामने रखते हुए सीतारमण ने कहा कि वर्तमान में भारत की अर्थ व्यवस्था विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था है।

अपने बजट भाषण के दौरान एक शेर भी पढ़ा। निर्मला ने कहा, ‘यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है’। ये शेर मशहूर शायर मंजूर हाशमी का है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षों में हमारी अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी। भारतीय अर्थ व्यवस्था को एक टि्रलियन लर तक बढ़ने में 55 साल लगे, पिछले पांच साल में हमने अर्थव्यवस्था में एक टि्रलियन डालर जोड़ा हैपांच साल में यह 2।7 टि्रलियन डालर पर पहुंच गईइस साल के अंत तक अर्थ व्यवस्था तीन खरब डालर होगी। सीतारमण ने कहा कि भारत आज रोजगार देने वाला देश बना है। हमारा जोर अब इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर है। भारतमाला के जरिए हम देश में सड़क हर गांव तक पहुंचा रहे हैं और नेशनल हाइवे का निर्माण कर रहे हैं। इस दौरान वित्त मंत्री ने अपनी कई योजनाओं का जिक्र किया, जिसमें मुद्रा योजना, सागरमाला, मेक इन इंडिया आदि शामिल रहे।

सरकार का केंद्र बिंदु गांव, किसान👷 और गरीब- सीतारमण🤷‍♂️

मोदी सरकार-2 का पहला बजट पेश कर रहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमारी सरकार का केंद्र बिंदु गांव, किसान और गरीब है. हमारा लक्ष्य है कि 2022 तक हर गांव में बिजली पहुंचेगी। उज्ज्वला योजना और सौभाग्य योजना के जरिए देश में काफी बदलाव आया है.

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार न्यू इंडिया पर फोकस कर रही है. पानी और गैस के लिए भी एक राष्ट्रीय ग्रिड बनेगा. सरकार की तरफ से नेशनल ट्रांसपोर्ट कार्ड का ऐलान किया गया है. जिसका इस्तेमाल रेलवे और बसों में किया जाएगा.

वित्त मंत्री ने कहा कि नेशनल ट्रांसपोर्ट कार्ड को रूपे कार्ड की मदद से चलाया जा सकेगा, जिसमें बस का टिकट, पार्किंग का खर्चा, रेल का टिकट सभी एक साथ किया जा सकेगा. इसके साथ ही सरकार ने एमआरओ का फॉर्मूला अपनाने की बात कही है. जिसमें मैन्यूफैक्चरिंग, रिपेयर और ऑपरेट का फॉर्मूला लागू किया जाएगा.

ये है प्रमुख बिन्दु-

🔹 2022 तक 1.95 करोड़ घर बनाएं जाएंगे। 114 दिनों में घर बनाकर दे रहे हैं। पहले 314 दिनों में बनते थे।

🔹 उज्जवला के जरिए सात करोड़ गैस कनेक्शन दिए गए।

🔹 20 प्रोद्योगिकी बिजनेस इंक्यूबेटर स्थापित किए जाएंगे, जिसके जरिए 20 हजार लोगों को स्किल दिया जाएगा।

🔹 देशभर में 10 हजार उत्पादक संघ बनाए जाएंगे।

🔹 जल शक्ति मंत्रालय जल संसाधनों का प्रबंधन करेगा। गांव में हर घर तक पानी पहुंचाया जाएगा।

🔹 रोजना 135 किमी सड़क बनाने का लक्ष्य है। अभी तक 30 हजार किमी सड़क बनाई गई हैं।

🔹 विमानन क्षेत्र, मीडिया, एनीमेशन AVGC और बीमा क्षेत्रों में एफडीआई खोलने के लिए सुझाव आमंत्रित करेगी।

🔹 इसरो की मदद और अभियानों को आगे बढ़ाने के लिए न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड का गठन किया जाएगा।

🔹 हर पंचायत को इंटरनेट से जोड़ेंगे। दो करोड़ से ज्यादा लोगों को डिजिटल साक्षर बनाया।

🔹 अक्टूबर 2019 तक देश खुले में शौच से मुक्त हो जाएगा।

🔹 पीएम आवासा योजना के तहत शहरों में 81 लाख घर बनाए जाएंगे।

4 साल में गंगा नदी पर कार्गो की आवाजाही शुरू होगी।

इलेक्ट्रॉनिक वाहनों को प्रोत्साहन देना है।

रेलवे ढांचे के विकास के लिए 50 हजार करोड़ की आवश्यकता है।

रेलवे के विकास के लिए पीपीपी मॉडल से निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा।

बजट 2018-19 के लिए 300 किमी. मैट्रो रेलवे को मंजूरी।

बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए बजट में वन नेशन, वन ग्रिड प्लान का एलान किया गया है। बिजली टैरिफ में बड़े सुधार की योजना।

आदर्श किराया कानून बनाया जाएगा।

एमएसएमई के लिए 350 करोड़ का आवंटन तथा ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा। छोटे उद्यमियों की कर्जमाफी के लिए 350 करोड़ का प्रावधान।

खूदरा कारोबारियों के लिए पेंशन पर भी विचार । 3 करोड़ दुकानदारों के लिए पेंशन देने का विचार।

शेयर बाजार को निवेशक फ्रेंडली बनाया जाएगा।

देश के पहले महिला वित्त मंत्री द्वारा पेश किए जा रहे ‘बही खाते’ (बज़ट नहीं) से उत्तराखंड को यह हैं उम्मीदें…

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 जुलाई 2019। मोदी-2.0 में देश की पहली महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट नहीं ‘देेेश के बही खाते से मातृसत्तात्मक बहुल समाज वाले उत्तराखंड को कुछ खास मिलने की आस है। वे शुक्रवार को बजट पेश करेंगी। हर साल की तरह से इस बार भी प्रदेश सरकार केंद्र के समक्ष अपनी प्राथमिकता रख चुकी है।

त्रिवेंद्र सरकार चाहती है कि मोदी सरकार के बजट में हरिद्वार महाकुंभ, राष्ट्रीय खेल और रेल परियोजनाओं के लिए उदार इमदाद का प्रावधान हो। वैसे, महिला वित्त मंत्री पर प्रदेश की इस वजह से भी नजर रहेगी कि उत्तराखंड महिला प्रधान प्रदेश है। खासतौर पर पहाड़ में महिलाओं को आर्थिकी की मुख्य धुरी माना जाता है, लेकिन उद्यमिता और रोजगार के अवसर यहां बहुत सीमित हैं। क्या बजट में ऐसी घोषणाएं होंगी जो उनके कार्य बोझ को कम करेगा और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने में मददगार साबित होगा। जहां तक उत्तराखंड सरकार का सवाल है तो उसने हिमालयी राज्य होने के नाते केंद्र से उदार वित्तीय सहायता का अनुरोध किया है। केंद्रीय बजट में प्रदेश सरकार कुछ ऐसा चाह रही है। साथ में प्रदेश में रेल के विकास, खासकर टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन को धन आवंटन होने की भी उम्मीद की जा रही है।

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Uttarakhand Vidhan Sabhaनवीन समाचार, देहरादून, 20 फरवरी 2019। वित्त मंत्री प्रकाश पंत द्वारा सोमवार को विधानसभा में रखे बजट से राज्य की कमजोर आर्थिक स्थिति की झलक सामने आई है। राज्य में कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशनर्स के लिए इस साल बजट में सरकार ने 20 हजार 455 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। 48 हजार 663 करोड़ के कुल बजट में वेतन-भत्तों और पेंशन आदि के लिए रखी गयी यह राशि कुल बजट के चालीस प्रतिशत के करीब है।  बजट में कर्मचारियों की वेतन-पेंशन पर गतवर्ष के मुकाबले 1338 करोड़ रुपये अधिक खर्च होने का अनुमान है। गत वर्ष वेतन-पेंशन मद में कुल 19 हजार 117 करोड़ रखे थे। इस साल सातवें वेतन के भत्तों की वजह से सरकार पर भार बढ़ गया है। राज्य कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर इस वर्ष 13340 करोड़, सहायता प्राप्त शिक्षण व अन्य संस्थानों के शिक्षकों-कर्मियों के वेतन-भत्तों पर 1173 रुपये और पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्तिक लाभों के लिए 5942 करोड़ रखे गए हैं।

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p style=”text-align: justify;”>लोन चुकाने पर खर्च होगी 17 प्रतिशत राशि 
बजट में लोन और ब्याज की अदायगी पर भी 8208 करोड़ रुपये की भारी राशि खर्च हो रही है। यह राशि कुल बजट का तकरीबन 17 प्रतिशत है। पिछले साल के बजट में ब्याज और लोन की राशि चुकाने के लिए 8088 करोड़ रखे गए थे। ऋणों की वापसी पर इस साल 2876 करोड़ जबकि ब्याज की अदायगी पर 5332 करोड़ खर्च होंगे।

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p style=”text-align: justify;”>विकास कार्यों को महज 9731 करोड़ 
राज्य के बजट का आकार भले ही 48 हजार करोड़ से अधिक हो। लेकिन इस बजट में से नई योजनाओं के लिए महज 9731 करोड़ की ही राशि है। 48633 करोड़ के बजट में से 38932 करोड़ राजस्व मद यानी सरकार की जिम्मेदारियों पर खर्च होंगी। जबकि पूंजी मद में सिर्फ 9731 करोड़ की ही यानी कारीब 20 % राशि का ही प्राविधान किया गया है।

यह भी पढ़ें : त्रिवेंद्र सरकार ने पेश किया पहला सरप्लस व कर मुक्त बजट, पिछले साल के मुकाबले 7% बड़ा बजट, 12 विभागों का बजट घटा

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, देहरादून, 18 फरवरी 2019। प्रदेश के वित्तमंत्री प्रकाश पंत ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए त्रिवेंद्र सरकार का पहला 22.79 करोड़ का राजस्व व कर मुक्त सरप्लस, पिछले साल के मुकाबले 7 फ़ीसदी बड़ा बजट 48663.90 करोड़ का बजट पेश किया। इस कर मुक्त बजट में 9798.15 करोड़ के राजकोषीय घाटे का अनुमान है। 12 विभागों का बजट घटा है। बजट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंडे, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और सुशासन तथा में खेती-किसानी के साथ स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर पर जोर दिया गया है। बजट में अन्न दाता के कल्याण का भरोसा दिलाया गया है। बजट पेश करने के दौरान तब अजीब स्थिति भी उत्पन्न हो गयी जब वित्त मंत्री प्रकाश पंत तबीयत खराब होने से भाषण पढ़ते हुए बेहोश हो गए। इस पर उन्हें सदन से बाहर ले जाना पडा।
इस साल पिछले साल के मुकाबले 7 फ़ीसदी बड़ा बजट, 12 विभागों का बजट घटाइससे पूर्व सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते हुए सदन में सबसे पहले पुलवामा हमले शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। विधायक करन महरा ने मेजर चित्रेश बिष्ट और मेजर विभूति ढौंडियाल को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन स्थगित करने की मांग की। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल व उप नेता सहित अनेकों विधायकों की आंखें नम नजर आईं। आगे 12 बजे के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर विपक्ष की बिना कारण गैर मौजूदगी में तीन संशोधन विधेयक पेश हुए और राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव भी पारित हुआ।

बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि सरकार का जोर किसान और प्राइमरी सेक्टर पर है, ताकि किसान के साथ युवाओं को रोजगार के मौके मिल सके। बजट में राजस्व घाटा नहीं है, बजट सर प्लस है, और राजकोषीय घाटा भी सीमा के अंदर है। सैनिक-अर्धसैनिक मृतक आश्रितों के लिए सेवा योजन का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प ‘सबका साथ सबका विकास’ है। सबसे ज़्यादा शिक्षा विभाग का बजट है. इसके साथ ही स्वास्थ, कृषि विभाग पर फ़ोकस किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि इस वित्त वर्ष के लिए बजट करीब 23 करोड़ सरप्लस है। कुल आय  जहां 48,679 करोड़ अनुमानित है तो व्यय 48,663 करोड़ अनुमानित है. वित्त वर्ष में राज्य कर्मचारियों के वेतन भत्तों के लिए 14,513 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है. पेंशन और अन्य खर्चों के लिए 5,942 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ब्याज के लिए 5,332 करोड़ और लोन पेमेंट के लिए 2,876 करोड़ का खर्च अनुमानित है। 12 विभागों के बजट में पिछले साल के मुकाबले कटौती की गई है. सबसे ज्यादा लोनिवि का बजट 159 करोड़ रुपये कम हुआ है।वहीं खाद्य विभाग का बजट 23 करोड़ रुपये और उद्योग विभाग का बजट पिछले साल से 20 करोड़ रुपये कम हुआ है। स्वच्छ भारत मिशन के लिए बजट में 202 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया हैै। लेकिन अनुसूचित जातियों के कल्याण का बजट 55 करोड़ रुपये कम हुआ है. ग्राम्य विकास का बजट भी पिछले साल से 7 करोड़ रुपये कम हुआ है। कैबिनेट का बजट भी पिछले साल से 32 करोड़ रुपये कम हुआ है। जबकि राजस्व और सामान्य प्रशासन का बजट 150 करोड़ रुपये और सूचना विभाग का बजट पिछले साल से 15 करोड़ रुपये कम हुआ है।

यह भी पढ़ें: जानें क्या है केंद्रीय बजट पर पर्यटन प्रदेश के पर्यटन व्यवसायियों की प्रतिक्रिया

नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 1 फरवरी 2019। शुक्रवार को आये केंद्र सरकार के बजट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। बजट में कर छूट की सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर सीधे दोगुनी करते हुए पांच लाख की गयी है। वहीं जीएसटी में पंजीकृत उद्योगों के लिए 59 मिनट में एक करोड रुपये के ऋण मात्र दो फीसद ब्याज पर देने की घोषणा हुई है। उधर उत्तराखंड की समान प्रकृति के पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए वर्ष 2018-19 के मुकाबले वर्ष 2019-20 के लिए आवंटन को 21 फीसद बढ़ाकर 58,166 करोड़ किया गया है, किंतु पूरी बजट की रिपोर्ट मंे पांच सांसद देने वाले उत्तराखंड राज्य का कहीं जिक्र भी नहीं किया गया है।
लिहाजा इन स्थितियों पर मुख्यालय के खासक पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आनी लाजिमी हैं। नगर के शेरवानी होटल के प्रबंधक कमलेश सिंह का कहना है, निम्न मध्य वर्ग के लिए अच्छा है। इससे लोगों की बचत होगी, और बचत होगी तो पर्यटन में भी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। लिहाजा बजट कर्मचारियों के लिए बहुत अच्छी खबर लेकर आया है। वहीं उत्तर भारत के होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन के पदाधिकारी प्रवीण शर्मा का कहना है कि पर्यटन उद्योग केंद्रीय बजट से खासा निराश है। बजट में आवभगत से जुड़े पर्यटन उद्योग को छुवा भी नहीं गया है। प्रति रात्रि 7000 से अधिक किराये के कमरों पर 28 फीसद जीएसटी का प्राविधान है। इसके हटने की उम्मीद थी। लेकिन इसे कम नहीं किया गया है। बजट में निवेश बढ़ाने के लिए भी कुछ नहीं है। इन्हीं कारणों से पर्यटन गिरता जा रहा है। उन्होंने कहा कि बजट से उत्तराखंड जैसे राज्यों को काफी नुकसान होने जा रहा है। इसी तरह की प्रतिक्रिया नैनीताल होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन के प्रतिनिधि दिग्विजय बिष्ट की भी आई है। उनका कहना है कि बजट में पर्यटन, पहाड़ एवं उत्तराखंड के लिए कुछ भी नहीं है, जबकि इन क्षेत्रों में कर छूट मिलनी चाहिए थी। हालांकि हाल ही में जीएसटी में पंजीकरण के लिए 10 लाख रुपये तक के कारोबार की सीमा बढ़ाकर पूर्व में ही देश के अन्य राज्यों के बराबर 20 लाख की जा चुकी है। साथ ही उन्होंने कहा कि 5 लाख से अधिक आय वालों के लिए कर छूट पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा उन्होंने जोर देकर कहा कि हिमालयी राज्यों व पर्यटन के लिए अलग से नीति बननी चाहिए थी व खास तौर इस क्षेत्र में नये कर छूट के प्राविधान होने चाहिए थे। आगे रेलवे बजट से नयी रेलों, हवाई सेवाओं व हाई-वे तथा सड़कों आदि के लिए बजट प्राविधानों की उम्मीद है।

यह भी पढ़ें : गांव किसान करदाता सबके लिए छप्पर फाड़ बजट, 5 साल की कसर पूरी

नवीन समाचार नई दिल्ली 1 फरवरी 2019। मोदी सरकार ने आज अपने कार्यकाल का आखिरी बजट पेश किया। इसे चुनावी बजट भी कहा जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस बजट में गांव, गरीब, किसानों, मजदूरों के लिए कई बड़े ऐलान किए। इसमें लंबे समय से प्रतिक्षित आयकर में छूट का ऐलान किया। इस बजट में लगभग हर तबके को कुछ न कुछ देने का ऐलान किया है।

पूरा बजट देखें इस लिंक पर →hbs

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p style=”text-align: justify;”>5 लाख तक इनकम टैक्स में छूट
पीयूष गोयल ने कहा, ‘पांच लाख रुपये तक की व्यक्तिगत आय पूरी तरह से कर मुक्त होगी और विभिन्न निवेश उपायों के साथ 6.50 लाख रुपये तक की व्यक्तिगत आय पर कोई कर नहीं देना होगा। व्यक्तिगत कर छूट का दायरा बढ़ने से तीन करोड़ करदाताओं को 18,500 करोड़ रुपये तक का कर लाभ मिलेगा। वेतनभोगी तबके के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40,000 से बढ़ाकर 50,000 रुपये किया गया।’ इस घोषणा के बाद संसद में काफी देर तक मोदी-मोदी के नारे गूंजते रहे। गोयल ने कहा, ‘हम कर दाताओं का शुक्रिया अदा करते हैं। आपके टैक्स से ही देश का विकास होता है।’

बजट से जुड़ी प्रमुख बातें:

  1. सरकार ने इनकम टैक्‍स स्‍लैब में बड़े बदलाव का ऐलान करते हुए 5 लाख तक की इनकम पर टैक्‍स छूट का प्रस्‍ताव रखा, जिसकी सीमा अब तक 2.5 लाख रुपये थी। इससे 3 करोड़ मध्‍यम वर्ग के परिवारों को फायदा मिलेगा।
  2. सरकार ने स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन को भी 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये करने की बात कही। वहीं, सरकार ने बैंकों में एफडी के ब्‍याज पर 40 हजार तक कोई टैक्‍स नहीं लगने की घोषणा की, जिसकी सीमा अब तक 10 हजार रुपये थी।
  3. वित्‍त मंत्री ने छोटे-सीमांत किसानों के लिए बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि 2 हेक्‍टेयर वाले किसानों के खाते में सालाना सीधे 6 हजार रुपये जाएंगे। यह योजना 1 दिसंबर, 2018 से लागू होगी। सरकार की इस योजना से करीब 12 करोड़ किसानों को फायदा होगा।
  4. गायों के लिए सरकार कामधेनु योजना शुरू करेगी। मछली पालन के लिए भी आयोग बनेगा। पशुपालन और मत्‍स्‍यपालन के लिए लिए जाने वाले कर्ज में 2 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
  5. सरकार ने कामकाजी लोगों के लिए अहम घोषणा करते हुए कहा कि वेतन आयोग की सिफारिशें जल्‍द लागू की जाएंगी। सरकारी कर्मचारियों के लिए नई पेंशन योजना आसान बनाई जाएगी।
  6. सरकार ने 21 हजार मासिक से कम वेतन पर काम करने वाले कामगारों को 7 हजार रुपये का बोनस देने की बात कही है। साथ ही ग्रेच्‍युटी की सीमा बढ़ाकर 20 लाख किए जाने का ऐलान किया गया।
  7. प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन योजना को मंजूरी प्रदान कर दी गई है, जिसका लाभ 15 हजार कमाने वाले कर्मचारियों को मिलेगा। कामगार की आकस्मिक मृत्‍यु की स्थिति में 6 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की गई है। सरकार ने
  8. अहम घोषणा करते हुए कहा कि जिनका ईपीएफ कटता है, उन्‍हें 6 लाख रुपये का बीमा प्रदान किया जाएगा।
  9. महिलाओं को ध्‍यान में रखते हुए सरकार ने अहम घोषणा करते हुए कहा कि सरकार 6 करोड़ महिलाओं को उज्‍जवला योजना के तहत एलपीजी कनेक्‍शन दे चुकी है। इस योजना के तहत महिलाओं को 8 करोड़ और एलपीजी कनेक्‍शन दिए जाएंगे।
  10. बजट पेश करते हुए वित्‍त मंत्री ने कहा कि देशभर में लोगों को उम्‍दा स्‍वास्‍थ्‍य सेवा मुहैया कराने के लिए दिल्‍ली के एम्‍स की तर्ज पर एम्‍स बनाए जा रहे हैं। इसी के तहत हरियाणा में देश का 22वां एम्स शुरू होने जा रहा 2 वर्षों के भीतर, कर निर्धारण इलेक्ट्रॉनिक रूप से किया जाएगा
  11. 2. आईटी सिर्फ 24 घंटे में प्रोसेसिंग कर देता है
  12. 3. केंद्रीय सरकार द्वारा राज्यों को जीएसटी का न्यूनतम 14% राजस्व।
    4. 36 कैपिटल गुड्स से कस्टम ड्यूटी खत्म कर दी गई है
    5. घर खरीदारों के लिए जीएसटी दरों को कम करने के लिए जीएसटी परिषद की सिफारिशें
    6. “सभी कटौती के बाद 5 लाख वार्षिक आय तक पूर्ण कर छूट।”
    7. स्टैंडर्ड डिडक्शन 40000 से बढ़कर 50000 हो गया है
    8. दूसरे स्व-कब्जे वाले घर पर कर की छूट
    9. टीडीएस यू / एस 194 ए की सीलिंग सीमा 10000 से 40000 हो गई है
    10. TDS u / s 194I की सीलिंग सीमा 180000 से बढ़कर 240000 हो गई है
    11. कैपिटल टैक्स बेनेफिट यू / एस 54 एक आवासीय घर में निवेश से बढ़कर दो आवासीय घरों तक पहुंच गया है।
    12. बेनिफिट यू / एस 80IB एक और वर्ष यानी 2020 तक बढ़ गया है
    13. अनसोल्ड इन्वेंट्री को दिया गया लाभ एक साल से दो साल तक बढ़ गया है।
    *अन्य क्षेत्र*
    14. राज्य का हिस्सा बढ़कर 42% हो गया है
    15. पीसीए प्रतिबंध 3 प्रमुख बैंकों से समाप्त कर दिया गया है
    16. 10% आरक्षण के लिए 2 लाख सीटें बढ़ेंगी
    17. मनरेगा के लिए 60000 करोड़
    18. सभी के लिए भोजन सुनिश्चित करने के लिए 1.7 लाख करोड़
    19. हरियाणा में 22 वां एम्स खोला जाना है
    20. पीएम किसान योजना को मंजूरी दी जानी है
    21. रुपये। 2 हेक्टेयर भूमि तक प्रत्येक किसान को 6000 प्रतिवर्ष दिया जाना है। सितंबर 2018 से लागू। राशि 3 किश्तों में स्थानांतरित की जाएगी
    22. गायों के लिए राष्ट्रीय कामधेनु अयोग। रुपये। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के लिए 750 करोड़
    23. पशुपालन करने वाले किसानों के लिए 2% ब्याज उपशमन और मत्स्य पालन के लिए अलग विभाग भी बनाना।
    २४. प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए २% ब्याज और समय पर भुगतान के लिए अतिरिक्त ३% ब्याज सबवेंशन।
    25. कर मुक्त ग्रेच्युटी सीमा 10 लाख से 20 लाख तक बढ़ जाती है
    26. 21000 मासिक कमाने वाले श्रमिकों के लिए बोनस लागू होगा
    27. प्रधान मंत्री श्रम योगी मन्धन नामक योजना, रु। की अनुमानित मासिक पेंशन प्रदान करेगी। 3,000 रुपये के योगदान के साथ। 60 वर्ष की आयु के बाद असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए 100 प्रति माह।
    28. हमारी सरकार ने उज्जवला योजना के तहत 6 करोड़ मुफ्त एलपीजी कनेक्शन वितरित किए
    29. MSME GST पंजीकृत व्यक्ति के लिए 2% ब्याज राहत
    30. महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश
    31. रक्षा के लिए 3 लाख से अधिक करोड़
    32. अगले 5 वर्षों में एक लाख डिजिटल गांव
    33. भारत फिल्म निर्माताओं की मंजूरी के लिए एकल खिड़की

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पत्रकार वार्ता करते काबीना मंत्री प्रकाश पंत।

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p style=”text-align: justify;”>–पूर्व सीएम रावत के सरकार को वित्तीय स्थिति सामने रखने की चुनौती पर राज्य के वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने दिया जवाब
-कहा सरकार राज्य की राजधानी पर किसी भी प्रस्ताव पर सदन में विचार करने को है तैयार
नैनीताल। उत्तराखंड सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने राज्य की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर राज्य का वित्तीय संतुलन बिगाड़ने और राज्य पर पांच वर्षों में 21000 करोड़ रुपए का कर्ज थोपने का आरोप भी लगाया।

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पंचायत के वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश बिष्ट, पत्नी गीता व समर्थकों संग भाजपा में शामिल…, नैनीताल में भी कई की चर्चाएं तेज…

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कांग्रेस नेता हरीश बिष्ट, पत्नी, समर्थकों संग भाजपा में शामिलनवीन समाचार, नैनीताल, 18 सितंबर 2019। कांग्रेस नेता और निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य डा. हरीश बिष्ट बुधवार को पत्नी-भीमताल की निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख गीता बिष्ट और समर्थकों संग भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट और कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने विधायक संजीव आर्य, जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट की मौजूदगी में भाजपा कुमाऊं संभाग कार्यालय में उन्हें फूल मालाएं पहनाकर पार्टी की सदस्यता दिलाई। भाजपा की सदस्यता लेने वालों में कोटाबाग ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष हेम नैनवाल, कृष्णानन्द कांडपाल, दुर्गा दत्त पलड़िया, देवेन्द्र बोरा आदि रहे। इस अवसर पर अजय भट्ट ने कहा कि भाजपा में शामिल हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि वह पार्टी की रीति और नीति को समझें। वह संगठन की मजबूती के लिए प्राथमिकता से काम करें। मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि भाजपा का कुनबा बढ़ रहा है। ऐसे में जुड़ने वाले हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि वह संगठन की मजबूती के साथ जनसेवा को तत्पर रहें। इधर, नैनीताल मुख्यालय में भी एक प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी व कम से कम दो निर्वाचित पदेन जनप्रतिनिधि सहित कुछ अन्य कांग्रेसियों के भी भाजपा की सदस्यता लेने की चर्चाएं काफी दिनों से चल रही हैं, जबकि हरीश बिष्ट के भाजपा में जाने के बाद इन चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है ।

पूर्व समाचार : आज एक बजे कांग्रेस का एक बड़ा विकेट गिराएगी भाजपा, पंचायत चुनाव में पहली जीत के लिये बनी रणनीति..

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 सितंबर 2019। अब तक भाजपा के लिए कहा जाता है कि वह ‘मोदी मैजिक’ के भरोसे केवल केंद्र एवं राज्य के बड़े चुनावों में ही जीत प्राप्त कर पाती है।त्रिस्तरीय पंचायतों में भाजपा कमजोर है। इस धारणा को बदलने के उद्देश्य से भाजपा बुधवार को एक बड़ा दांव चलने जा रही है। आज दोपहर 1:00 बजे पिछले दो दशकों से जिला पंचायत नैनीताल मैं दबदबा रखने वाले कांग्रेस के कद्दावर नेता डॉ हरीश बिष्ट भाजपा का दामन थामने वाले हैं।

हरीश बिष्ट के भाजपा का दामन थामने के निहितार्थ इस रूप में निकाले जा रहे हैं कि कि कांग्रेस निचले स्तर तक कमजोर होती चली जा रही है, व अपने सिमट चुके कुनबे को भी नहीं सवाल पा रही है। बताया जा रहा है कि हरीश प्रदेश कार्यकारिणी में स्थान न मिल पाने, खासकर उनकी जगह उनके किसी प्रतिद्वंदी को स्थान दे दिए जाने से नाराज हैं। इसके बाद वे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के माध्यम से भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर रहे हैं। उनके साथ जनपद के दूरस्थ क्षेत्रों के 2 दर्जन से अधिक ग्राम प्रधान एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य का भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। उल्लेखनीय है कि हरीश बिष्ट निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य व उनकी पत्नी गीता बिष्ट भीमताल से निवर्तमान ब्लाक प्रमुख हैं। दोनों पति-पत्नी पिछले 20 साल से पंचायत की राजनीति में सक्रिय हैं। अलबत्ता, अभी गीता बिष्ट का औपचारिक तौर पर भाजपा में जाना तय नहीं है। उल्लेखनीय है कि 2014 में भाजपा जिला पंचायत नैनीताल में अधिक सदस्य होने के बावजूद अपना जिला पंचायत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष नहीं बना पाई थी।

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Yashpal Arya Hugged Dr. Indira Hridyesh and Sumitra Prasad, just after winning Nainital Jila Panchayat President Election
हरीश बिष्ट बाईं ओर सबसे आगे (Yashpal Arya Hugged Dr. Indira Hridyesh and Sumitra Prasad, just after winning Nainital Jila Panchayat President Election)

 

तब  हेम को हराने के बाद यशपाल आर्य ने संभाला था इंदिरा और सुमित्रा को

-विजयी अध्यक्ष सुमित्रा प्रसाद व उपाध्यक्ष पुष्कर नयाल दोनों ने भाजपा के चुनाव चिह्न पर जीता था जिला पंचायत का चुनाव

नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, यकीनन नैनीताल जिला पंचायत में कांग्रेस की ओर से घोषित अध्यक्ष पद प्रत्याशी सुमित्रा प्रसाद और उपाध्यक्ष पद पर पुष्कर नयाल ने चुनाव जीता है, लेकिन दोनों विजयी सदस्य न केवल मूलतः भाजपाई रहे हैं, वरन उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए जिला पंचायत सदस्य बनने की अर्हता धुर विरोधी भारतीय जनता पार्टी के चुनाव चिह्न कमल के फूल पर चुनाव लड़ कर अर्जित की है। वरन, उपाध्यक्ष बने पुष्कर नयाल ने तो स्वयं को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का सक्रिय कार्यकर्ता भी बताया है। कांग्रेस प्रत्याशियों की विजय में योगदान देने वाले कम से कम दो सदस्य प्रताप गोरखा और कृष्णानंद कांडपाल भी मूलतः भाजपाई रहे हैं।

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यह भी पढ़ें : मुख्यमंत्री को ‘चोर-उचक्के’ कहने वाली शिक्षिका ने अब बताया ‘पिता तुल्य’, मांगी मांफी

पिछले सप्ताह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को जनता दरबार में ‘चोर-उचक्के’ तक कह जाने वाली निलंबित शिक्षिका उत्तरा पंत बहुगुणा ने अब मुख्यमंत्री को ‘पिता तुल्य’ बताया है, और उनसे माफी मांग ली है। सोशल मीडिया पर आये एक वीडियो में उत्तरा कहती सुनी जा रही हैं कि वह ट्रांसफर के लिए मुख्यमंत्री के जनता दरबार में गयी थीं। क्योंकि वह पिछले 25 वर्षों से अपने घर से बाहर हैं। इधर 2015 में उनके पति का निधन हुआ, जिसके बाद से उनके बच्चों का घर पर कोई सहारा नहीं है। इसलिए ही वह अपना स्थानांतरण चाह रही थीं। और मुख्यमंत्री के जनता दरबार में गयी थीं। वहां इतने वर्षों से अंदर भरा हुआ गुस्सा बाहर निकल गया। उन्होंने पिता तुल्य अभिभावक के समक्ष अपनी शिकायत गुस्से के रूप में की। मुझसे जो गलती हुई है, उसे वह क्षमा करें। मेरे साथ शिक्षा विभाग के कारण काफी बुरा हुआ है।

शिक्षिका उत्तरा पंत के व्यवहार में अचानक आया यह परिवर्तन सोमवार को शिक्षा निदेशक आरके कुंवर एवं मंगलवार को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे से मिलने के बाद और इस मामले में बुरी तरह से घिरी राज्य सरकार के ‘डैमेज कंट्रोल’ का परिणाम माना जा रहा है। इससे सरकार व सत्तारूढ़ भाजपा को तो जरूर राहत मिलेगी, परंतु अपने राजनीतिक हितों के लिए उसे बिन मांगे समर्थन देने जुटे और सरकार को घेर रहे विपक्ष की किरकिरी होनी भी तय है।
इधर मुख्यमंत्री के लिए अपशब्दों का प्रयोग करने के बाद राष्ट्रीय मीडिया में भी छा चुकी और गत दिवस हाईकोर्ट की शरण में भी जाने की बात कहने वाली उत्तरा पंत को मंगलवार को टीवी के ‘बिग बॉश’ शो से भी फोन आने की खबर है।

यह भी पढ़ें: तब भी कुछ यही हुआ था: त्रिवेंद्र रावत-उत्तरा, हरीश रावत-उमा प्रकरण कुछ अलग हैं क्या ?

उत्तराखंड के चौथे विधानसभा चुनावों के बाद जब त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री बने थे, तो हमने ‘नवीन समाचार’ में सुर्खी लगाई थी, ‘फिर रावत सरकार’। हमारी सुर्खी के मायने शायद तब इतने ही समझ आये हों कि इससे पूर्व उत्तराखंड में हरीश चंद्र सिंह रावत की सरकार थी और अब त्रिवेंद्र रावत की सरकार बन रही है। ‘फिर रावत सरकार’ पिछले मुख्यमंत्री हरीश रावत का चुनावी नारा भी था। लेकिन हमारा इशारा केवल जाति नाम ‘रावत’ और चुनावी नारे तक ही सीमित नहीं था, बल्कि जो आगे दिखाई दे रहा था, उसकी ओर भी था। अब रावत सरकार के करीब सवा वर्ष के कार्यकाल के बाद, खासकर शिक्षिका उत्तरा पंत बहुगुणा के सीएम त्रिवेंद्र रावत के जनता दरबार में हुए हंगामे और उनके निलंबन आदेशों के साथ यह बात सही साबित होती दिख रही है।
थोड़ा सा याददाश्त पर जोर दें, तो एक और ऐसी ही घटना याद आ जाएगी। यह संयोग ही है कि ऐसी ही वह घटना पिछली हरीश रावत सरकार के कार्यकाल में नवंबर 2016 में हल्द्वानी के एफटीआई मैदान में उनके ही पुत्र आनंद रावत द्वारा आयोजित कुमाउनी क्विज प्रतियोगिता के दौरान भी घटी थी। उत्तरा की ही ‘नाम-जाति राशि की’ बिंदूखत्ता निवासी अशासकीय विद्यालय में 13 वर्षों से मात्र 5 हजार रुपए के वेतन पर कार्यरत शिक्षिका उमा पांडे अपने स्कूल को सरकारी ग्रांट न मिलने को लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत के कदमों पर फूट-फूट कर रोई थी और मुख्यमंत्री हरीश रावत हंसते रहे थे। शिक्षिका को बमुश्किल पुलिस की मदद से कार्यक्रम स्थल से बाहर किया गया था। आज भी उत्तरा पंत बहुगुणा को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के जनता दरबार से पुलिस के द्वारा बाहर किया गया। कस्टडी में लेने के आदेश हुए, सो अलग।
इससे कुछ बातें साफ होती हैं। सरकार मुख्यमंत्री हरीश रावत की हो, अथवा त्रिवेंद्र रावत की, उसमें महिलाओं क्या किसी भी जरूरतमंद के लिए कोई संवेदनशीलता नहीं होती है। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति स्वयं को राजा मानता है। भले ही वह राजशाही की तरह पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रधानमंत्री बनने का अधिकार लेकर पैदा हुए राहुल गांधी द्वारा मुख्यमंत्री बनाये गये हरीश रावत हों, अथवा स्वयं को ‘प्रधान सेवक’ कहने वाले नरेंद्र मोदी द्वारा मुख्यमंत्री बनाये गये त्रिवेंद्र रावत।
वहीं केवल ताजा घटना की ही बात करें तो महिला-विधवा शिक्षिका उत्तरा पंत द्वारा मुख्यमंत्री के लिए सार्वजनिक तौर पर ‘चोर-उचक्के’ जैसे शब्दों के प्रयोग को कत्तई सही नहीं ठहराया जा सकता। खासकर एक महिला शिक्षिका होते, जिसका दर्जा गुरु के रूप में देवताओं से भी ऊपर तथा एक महिला और मां के रूप में समन्वित तौर पर साक्षात ‘गुर्रुब्रह्मा’ की ब्रह्माणी यानी माता सरस्वती के समान होता है, और उनसे समाज को सही शब्दों के साथ सही दिशा देने की अपेक्षा रहती है। वहीं सरकारी नौकरी कर रहे उम्रदराज सैनिक और सैन्य अधिकारी अपना घर बार छोड़ सियाचिन व लद्दाख में भी नौकरी कर रहे हैं। सो परिवार भी देखने और नौकरी भी करने की महिला शिक्षिका की चाह भी सही नहीं ठहराई जा सकती।
अलबत्ता, मुख्यमंत्री रावत ने उन्हें उनके निवेदन पर प्राथमिक शिक्षा विभाग में ‘जिला कैडर’ होने की याद दिलायी, जिसके तहत जिलों से बाहर अंर्तजिला स्थानांतरण होने पर शिक्षकों को अपनी वरिष्ठता खोनी पड़ती है। पता नहीं शिक्षिका उत्तरा पंत अपनी नौकरी के आखिरी पड़ाव में अंर्तजिला स्थानांतरण किये जाने पर अपनी 25 वर्ष की वरिष्ठता खोने को तैयार हैं अथवा नहीं। मुख्यमंत्री रावत की धर्मपत्नी सुनीता रावत ने अपनी आठ वर्ष की सेवा के बाद ही पौड़ी से देहरादून जिले को अंर्तजिला स्थानांतरण करा लिया था। शायद वरिष्ठता भी खोई हो। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने उन्हें सरकारी नौकरी शुरू करने से पहले नियमों के पालन करने के लिए स्वीकार की जाने वाली सेवा नियमावली भी याद दिलाई, यहां तक सब ठीक मान भी लिया जाये तो भी यह मानना पड़ेगा कि मुख्यमंत्री रावत ने इस घटना के साथ एक राजनीतिज्ञ के लिए अपेक्षित धैर्य खोकर स्वयं की बुद्धिमत्ता और संवेदनशीलता (या कि मूर्खता और संवेदनहीनता) का सैकड़ों कैमरों के बीच स्वयं नग्न प्रदर्शन कर दिया है। उनकी स्थिति कालीदास की तरह नजर आ रही है, जिन्हें काफी समय से विद्वान बना कर रखा गया था, लेकिन आज वे ‘उट्र-उट्र’ कर बैठे हैं।
इस संबंध में एक और घटना याद हो आती है। नैनीताल क्लब के खचाखच भरे सभागार में मुख्यमंत्री बनने के बाद पहले बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में स्थानीय विधायक संजीव आर्य एक समस्या रखते हैं। वे कहते हैं, ‘हमारी कई सड़कें स्वीकृत हैं। धन भी उपलब्ध है। लेकिन उनकी विधानसभा के साथ ही पूरे प्रदेश में सड़कों के बदले किये जाने वाले प्रतिपूरक वृक्षारोपण के लिए वन भूमि उपलब्ध नहीं है। अलबत्ता प्रदेश में सिविल सोयम की काफी भूमि निरुपयोगी पड़ी है। मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि वे वन भूमि की जगह सिविल सोयम की भूमि पर प्रतिपूरक वृक्षारोपण कराने की अनुमति प्रदान करने हेतु कुछ करें।’ उनके बाद मुख्यमंत्री का आधा भाषण 20 रुपए में बनने वाली एक ऐसी करिश्माई बोतल पर चलता है, जिसका रिस्पना नदी की सफाई में प्रयोग किया जा रहा है, और जिसे हर घर में तैयार किया जा सकता है और इससे हर कहीं गंदगी से पटे नालों को ‘खुशबूदार’ बनाया जा सकता है। यह अलग बात है कि वह करिश्माई बोतल आज तक कहीं नजर नहीं आई। अलबत्ता वे विधायक की बात पर कहते हैं, ‘मैं घोषणाएं नहीं करता हूं। लेकिन विधायक जी कह रहे हैं तो यहां-वहां से, सड़कों के निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपए देने की घोषणा करता हूं।’ यानी विधायक आर्य की वन-सिविल सोयम भूमि की बात कहीं हवा में ही उड़ गयी, अथवा उनकी समझ में ही नहीं आयी।
यह ठीक है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की छवि आमतौर पर शालीन राजनीतिज्ञ की मानी जाती है। वे हरीश रावत की तरह, केवल कुछ चुनिंदा चाटुकारों से घिरे और उन्हें छोड़कर अन्य के खिलाफ मौका ढूंढ-ढ़ूंढकर जहर उगलने वाले अधिक वाचाल व तिकड़मी राजनीतिज्ञ नहीं हैं, जो घर के भीतर उगाये जाने वाले पवित्र हरेले को कुछ सौ रुपए के ईनाम के लिए गांव के चौराहे पर सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए लाने और वह मामूली इनाम भी सबको न पहुंचा पाने जैसी योजनाएं लाते हैं। कभी रिक्शे-नाव में सफर करने तथा बाजार में पकोड़े खाने, काफल पार्टी करने के साथ ही आंखों पर दूरबीन लगाकर केदारनाथ जाने व भजन-कीर्तन करने में भी शुद्ध नौटंकी करते हैं। वहीं करीब छः महीने के कार्यकाल के बाद भी त्रिवेन्द्र रावत सरकार के काम तो धरातल पर कुछ दिखाई नहीं दे रहे हैं, अलबत्ता मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत हरीश रावत की तरह ही हमेशा ‘प्लेन’ से नहीं कभी आम आदमी की तरह ‘ट्रेन’ से भी सफर कर लेते हैं। सुबह देहरादून से हल्द्वानी आते हैं, और दिन भर काम निपटाकर शाम तक लौट जाते हैं। लेकिन राज्य और राज्य की जनता के हितों के मोर्चे पर बरती जाने वाली संवेदनशीलता के मोर्चे पर वे कहीं से भी वे अपनी सरकार के कार्यों की तरह हरीश रावत से श्रेष्ठ नहीं दीखते। (नवीन जोशी, , 28 जून 2018)

पूर्व आलेख : उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 : फिर रावत की, पर ‘डबल इंजन’ सरकार

आखिर 17 की किशोर वय और चौथी विधानसभा में ही उत्तराखंड को 9वां (बदलते हुए 10वां) मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के रूप में मिलना तय हो गया है। पिछले सीएम हरीश रावत का ‘फिर रावत सरकार’ का नारा भी एक अर्थ में ‘त्रिवेन्द्र रावत’ की सरकार आने के साथ सही साबित हुआ है। लिहाजा, प्रदेश में लगातार दूसरी बार ‘रावत सरकार’ ही होगी, अलबत्ता दुआ करनी होगी कि यह वाली रावत सरकार पिछली (हरीश रावत वाली) रावत सरकार जैसी ‘राज्य को काट-पीट कर खा जाओ’ और ‘सब कुछ अपनी जेब में भरो’ वाली नहीं होगी, बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वादे के अनुरूप ‘डबल इंजन’ वाली सरकार होगी। मालूम हो कि राज्य में भाजपा ने उत्तराखंड में करिश्माई प्रदर्शन करते हुए 70 में से 57 सीटें हासिल की हैं, जबकि पिछले बार 2012 में उससे एक सीट अधिक जीतने वाली कांग्रेस 11 सीट पर आकर सिमट गयी है।

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