नवीन समाचार, देहरादून, 3 नवंबर 2026 (Harak Singh Rawat 2nd Wife Controversy)। उत्तराखंड की राजनीति में अपने बेबाक अंदाज, विवादित बयानों और राजनीतिक उठापटक के लिए चर्चित पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार चर्चा उनके निजी जीवन, वैवाहिक संबंधों और संपत्ति के लेनदेन से जुड़े विवाद को लेकर है। आप यह संबंधित वीडियो भी जरूर देखना चाहेंगे :
पहले जेनी प्रकरण में फिर निशाने पर लिए जा रहे हरक एक ओर जसबीर कौर नाम की कांग्रेस नेत्री, जो अब सोनिया आनंद रावत के नाम से जानी जाती हैं, वर्ष 2023 में भारत के राजपत्र में प्रकाशित नाम परिवर्तन की घोषणा में स्वयं को हरक सिंह रावत की पत्नी बता चुकी हैं। वहीं उनकी पत्नी के रूप में लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में पहचानी जाने वाली दीप्ति रावत ने सामने आकर किसी दूसरी महिला के हरक सिंह रावत की पत्नी होने के दावे पर आपत्ति जताई है और न्यायालय जाने की चेतावनी दी है,
वहीं इस विवाद के बीच देहरादून के दिव्यांग व्यक्ति हरिओम सहगल द्वारा भवन के सौदे में 43.20 लाख रुपये का भुगतान नहीं किए जाने और भवन पर कब्जा करने के आरोपों ने पूरे प्रकरण को फिर चर्चा में ला दिया है।
2021 के भवन सौदे से फिर चर्चा में आया वैवाहिक विवाद
इस पूरे प्रकरण का ताजा सिरा देहरादून निवासी हरिओम सहगल की शिकायत से जुड़ा है। सहगल के दोनों हाथ नहीं हैं। उनका आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2021 में अपना भवन जसबीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद रावत को 56 लाख रुपये में बेचा था। सहगल का दावा है कि उस समय भवन का बाजार मूल्य दो करोड़ रुपये से अधिक और सरकारी मूल्यांकन के अनुसार भी सवा करोड़ रुपये से अधिक था।
सहगल के अनुसार, सौदे के दौरान उन्हें केवल 12 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान किया गया। शेष 43 लाख 20 हजार रुपये उन्हें नहीं दिए गए। उन्होंने चेक बाउंस होने और भवन पर कब्जा किए जाने के भी आरोप लगाए हैं। सहगल का यह भी कहना है कि भवन का सौदा करते समय सोनिया आनंद ने स्वयं को हरक सिंह रावत की पत्नी बताया था।
इस शिकायत के सार्वजनिक होने के बाद मामला केवल भवन के भुगतान और कब्जे के विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हरक सिंह रावत की वैवाहिक स्थिति को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई।
सोनिया आनंद ने पत्रकार वार्ता कर हरिओम सहगल के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि भवन की पूरी रकम का भुगतान किया जा चुका है और सहगल उन्हें ब्लैकमेल कर रहे हैं। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। हालांकि, हरक सिंह रावत की पत्नी होने के दावे को लेकर उन्होंने स्पष्ट रूप से कोई खंडन नहीं किया है।
दीप्ति रावत ने वीडियो जारी कर कहा—मैं ही हरक सिंह रावत की पत्नी हूं
संपत्ति विवाद में सोनिया आनंद को हरक सिंह रावत की पत्नी बताए जाने के बाद दीप्ति रावत भी सार्वजनिक रूप से सामने आईं। एक वीडियो के माध्यम से उन्होंने कहा कि वह हरक सिंह रावत की पत्नी हैं और उनका इस संपत्ति विवाद से कोई संबंध नहीं है।
दीप्ति रावत ने कहा कि एक व्यक्ति की ओर से यह आरोप लगाया जा रहा है कि हरक सिंह रावत की पत्नी ने उसकी जमीन हड़प ली है, जबकि उनका इस लेनदेन से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई दूसरी महिला हरक सिंह रावत की पत्नी होने का दावा कर रही है तो उसे अपने दावे के तथ्य और प्रमाण सार्वजनिक करने चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की खबरों और सोशल मीडिया पर हो रहे प्रचार से उन्हें और उनके परिवार को मानसिक पीड़ा पहुंच रही है। अपनी प्रतिष्ठा और सम्मान की रक्षा के लिए उन्होंने न्यायालय जाने की चेतावनी भी दी है।
इस बीच हरक सिंह रावत और एक महिला के साथ केक काटते हुए तथा बच्चों को गोद में लिए हुए कुछ चित्र भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं। इन चित्रों को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
विधानसभा के आधिकारिक परिचय में दीप्ति रावत का नाम
दीप्ति रावत के दावे के समर्थन में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक दस्तावेज उत्तराखंड विधानसभा के सदस्यों का आधिकारिक जीवन परिचय है। विधानसभा के रिकॉर्ड में हरक सिंह रावत का विवाह 28 नवंबर 1986 को होना दर्ज है। इसी परिचय में उनकी पत्नी के रूप में दीप्ति रावत का नाम उल्लेखित है। उनके एक पुत्र और एक पुत्री होने की जानकारी भी इसमें दी गई है।
दीप्ति रावत स्वयं भी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रही हैं। वह पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और उत्तराखंड महिला आयोग की पूर्व सदस्य रह चुकी हैं।
इस प्रकार हरक सिंह रावत की पत्नी के रूप में दीप्ति रावत का नाम केवल मीडिया रिपोर्टों में ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड विधानसभा के आधिकारिक जीवन परिचय में भी दर्ज है।
वर्ष 2023 में राजपत्र में नाम परिवर्तन की घोषणा, हरक सिंह रावत को बताया था पति
अब इस विवाद के दूसरे पक्ष यानी सोनिया आनंद रावत के नाम परिवर्तन से जुड़े दस्तावेज की बात करें तो उनका पहले का नाम जसबीर कौर रावत बताया जाता है।
वर्ष 2022 में प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट में हरक सिंह रावत के निजी जीवन से जुड़े इस विवाद का उल्लेख हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, दीप्ति रावत ने उस समय भी आपत्ति जताई थी कि एक अन्य महिला सोनिया आनंद रावत स्वयं को हरक सिंह रावत की पत्नी बता रही हैं। उस समय हरक सिंह रावत की ओर से इस संबंध में कोई सार्वजनिक जवाब सामने नहीं आया था।
इसके बाद वर्ष 2023 में भारत सरकार के राजपत्र यानी गजट ऑफ इंडिया में एक महत्वपूर्ण नाम परिवर्तन संबंधी विज्ञापन प्रकाशित हुआ। 21 अक्टूबर से 27 अक्टूबर 2023 के साप्ताहिक अंक के भाग चार के पृष्ठ संख्या 3809 में प्रकाशित इस घोषणा के अनुसार, जसबीर कौर रावत ने अपना नाम बदलकर सोनिया आनंद रावत रखने की घोषणा की थी।
इस विज्ञापन में उनका परिचय पुराने नाम जसबीर कौर रावत, पिता राजिंदर सिंह आनंद और पति के रूप में हरक सिंह रावत के नाम के साथ दिया गया था। इसके बाद उन्होंने सोनिया आनंद रावत नाम से जाने जाने की घोषणा की।
यह दस्तावेज वर्तमान विवाद का एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक आधार है। हालांकि, राजपत्र में प्रकाशित नाम परिवर्तन की घोषणा और उसमें पति के रूप में किसी व्यक्ति का नाम दर्ज होना अपने आप में विवाह प्रमाणपत्र अथवा न्यायालय द्वारा वैवाहिक संबंध की पुष्टि नहीं है। विवाह की तारीख, परिस्थितियों और वैधानिक स्थिति को स्पष्ट करने के लिए संबंधित मूल दस्तावेजों की आवश्यकता होगी।
वर्ष 2003 में भी महिला के आरोपों के बाद देना पड़ा था मंत्री पद से इस्तीफा
हरक सिंह रावत से जुड़े महिला संबंधी विवादों की पृष्ठभूमि भी पुरानी है। वर्ष 2003 में उत्तराखंड की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान वह मंत्री थे। इसी समय इंदिरा देवी उर्फ जैनी नाम की एक महिला ने उन पर गंभीर आरोप लगाए थे।
महिला का आरोप था कि उसे नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उसके साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए गए। इस प्रकरण में बच्चे के पितृत्व को लेकर भी विवाद सामने आया था। जैनी ने 15 जून 2003 को एक बच्चे को जन्म दिया था।
इस मामले को लेकर उत्तराखंड विधानसभा में भी हंगामा हुआ था। विपक्ष ने निष्पक्ष जांच की मांग की थी। विवाद बढ़ने के बाद हरक सिंह रावत को तत्कालीन मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था।
इसके बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने प्रारंभिक जांच की और 25 जुलाई 2003 को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की थी। प्राथमिकी में महिला की ओर से नौकरी का आश्वासन देकर संबंध बनाने के लिए मजबूर किए जाने के आरोपों का उल्लेख था।
हालांकि, बाद की मीडिया रिपोर्टों में सीबीआई की ओर से हरक सिंह रावत को क्लीन चिट दिए जाने की जानकारी प्रकाशित हुई थी। हरक सिंह रावत ने भी बाद में दावा किया था कि डीएनए जांच में बच्चे का पिता होने का आरोप गलत साबित हुआ था।
यह प्रकरण इसके बाद भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों में चर्चा का विषय बना रहा।
वर्ष 2014 में दिल्ली की महिला ने की थी शिकायत
फरवरी 2014 में हरक सिंह रावत एक बार फिर महिला संबंधी विवाद में घिरे। उस समय प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मेरठ की रहने वाली कानून की पढ़ाई कर चुकी एक महिला ने दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव थाने में उनके विरुद्ध शिकायत दी थी।
महिला का आरोप था कि सितंबर 2013 में वह नौकरी के संबंध में हरक सिंह रावत से मिलने उनके आवास पर गई थी। इसी दौरान उसके साथ कथित रूप से छेड़छाड़ और अभद्र व्यवहार किया गया।
इस शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया था। उस समय हरक सिंह रावत ने कहा था कि उन्हें इस घटना के संबंध में जानकारी नहीं है। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मामले की जांच कराने की बात कही थी।
हालांकि, जुलाई 2016 में प्रकाशित समाचारों में बताया गया कि संबंधित महिला ने अपनी शिकायत वापस ले ली थी।
वर्ष 2016 में असम की महिला ने लगाया था दुष्कर्म का आरोप
वर्ष 2016 में भी हरक सिंह रावत पर एक महिला ने गंभीर आरोप लगाए थे। 29 जुलाई 2016 को असम की रहने वाली 32 वर्षीय महिला ने दिल्ली के सफदरजंग थाने में उनके विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी।
महिला का आरोप था कि नौकरी दिलाने के बहाने उसे दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित हरक सिंह रावत के आवास पर बुलाया गया और उसके साथ दुष्कर्म किया गया। दिल्ली पुलिस ने शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की थी और महिला का बयान तत्कालीन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के अंतर्गत मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराया था।
इस मामले में पुलिस सूत्रों के हवाले से प्रकाशित खबरों में यह भी कहा गया था कि शिकायतकर्ता महिला ने इससे पहले वर्ष 2003 में भी हरक सिंह रावत पर आरोप लगाए थे और अपने बच्चे का पिता होने का दावा किया था।
लेकिन इस मामले में भी कुछ दिनों के भीतर घटनाक्रम बदल गया। महिला ने बाद में हरक सिंह रावत को क्लीन चिट देते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके सहयोगियों पर आरोप लगाया कि उन्हें हरक सिंह रावत के विरुद्ध शिकायत करने के लिए उकसाया गया और दबाव डाला गया।
इसके बाद मुख्यमंत्री के निजी सचिव कमल सिंह रावत की शिकायत पर अगस्त 2016 में देहरादून कोतवाली में महिला के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120बी, 193 और 385 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इनमें आपराधिक षड्यंत्र, झूठे साक्ष्य और भयादोहन से संबंधित आरोप शामिल थे।
इस प्रकरण में पुलिस पर महिला को तलाश नहीं कर पाने के आरोप भी लगे थे। महिला का मोबाइल किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत पाया गया था और उसके द्वारा दिया गया पता भी गलत बताया गया था। इस तरह वर्ष 2016 का यह प्रकरण भी राजनीतिक विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के बीच उलझा रहा।
अब किन सवालों के जवाब सामने आने बाकी हैं?
वर्तमान विवाद में अब तक सामने आए सार्वजनिक तथ्यों को एक साथ देखें तो कुछ महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट होती हैं।
- उत्तराखंड विधानसभा के आधिकारिक जीवन परिचय में हरक सिंह रावत का विवाह 28 नवंबर 1986 को दीप्ति रावत से होना दर्ज है।
- वर्ष 2023 में भारत के राजपत्र में प्रकाशित नाम परिवर्तन की घोषणा में जसबीर कौर रावत ने अपना नाम सोनिया आनंद रावत करने की जानकारी दी थी। इसी घोषणा में उन्होंने हरक सिंह रावत को अपने पति के रूप में उल्लेखित किया था।
- वर्ष 2022 से सार्वजनिक रूप से चर्चा में रहे इस वैवाहिक विवाद पर अब दीप्ति रावत ने फिर आपत्ति जताई है और न्यायालय जाने की चेतावनी दी है।
- देहरादून के हरिओम सहगल ने भवन के सौदे में 43.20 लाख रुपये का भुगतान नहीं किए जाने, चेक बाउंस होने और भवन पर कब्जा किए जाने के आरोप सोनिया आनंद पर लगाए हैं। सोनिया आनंद इन आरोपों को खारिज कर चुकी हैं।
- वर्ष 2003, 2014 और 2016 में भी हरक सिंह रावत से जुड़े महिला संबंधी विवाद सामने आए थे, जिनमें शिकायत, आरोप, शिकायत वापस लेने और जांच से जुड़े अलग-अलग घटनाक्रम रहे।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या हरक सिंह रावत और सोनिया आनंद रावत के विवाह का कोई प्रमाणित विवाह प्रमाणपत्र उपलब्ध है? यदि विवाह हुआ है तो उसकी तारीख क्या है? वर्ष 1986 में दीप्ति रावत से हुए विवाह की कानूनी स्थिति क्या है? क्या पहले विवाह के संबंध में कोई तलाक अथवा न्यायालय का आदेश मौजूद है? और क्या सोनिया आनंद रावत के दावे को प्रमाणित करने वाले अन्य वैवाहिक दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएंगे?
संपत्ति विवाद में भी हरिओम सहगल और सोनिया आनंद के परस्पर विरोधी दावों के बीच वास्तविक भुगतान, बैंक अभिलेख और भवन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल यह प्रकरण उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़े सार्वजनिक विवाद का रूप ले चुका है। एक ओर दीप्ति रावत न्यायालय जाने की बात कह रही हैं, दूसरी ओर संपत्ति विवाद की जांच और संबंधित दस्तावेजों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच, न्यायालयी कार्रवाई और संबंधित पक्षों की ओर से सामने आने वाले दस्तावेज इस पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट कर सकते हैं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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