कैदियों-अपराधियों ने चित्त शांति के लिये किया योग, जानें कहाँ ?

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हल्द्वानी, 13 अक्तूबर 2018। कुमाऊं की सबसे बड़ी सब जेल-‘हल्द्वानी उप कारागार’ में ‘स्वामी विवेकानंद बाल विकास फाउंडेशन’ के तत्वावधान में शनिवार को ध्यान व योग संस्कारशाला का आयोजन किया गया। जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्या, फाउंडेशन के संस्थास्थापक सुबोध दीक्षित व संस्थाध्यक्ष पवन कुमार दीक्षित के नेतृत्व में संस्कारशाला आयोजित की गई। संस्थाध्यक्ष पवन दीक्षित की ओर से जेल में कैदियों को जागृत मन, चेतन मन व अवचेतन मन के सकारात्मक विचार के बारे में अवगत कराया गया। बताया गया कि जेल में रहने वाले कैदियों व अपराधियों के क्रोधित मन की शांति व जीवन की नई दिशा के लिए संस्कारशाला का आयोजन किया गया। संस्था अध्यक्ष पवन दीक्षित ने बताया कि ध्यान ही एक ऐसा सहारा है, जिससे मन के विचारों को शुद्ध किया जाता है। मन की सभी विपत्तियों को दूर करने का एक मात्र साधन दचयनध्यान व योग है। उन्होंनेे कैदियों को नियमित अपनी दिनचर्या में ध्यान को एकाग्रचित करने का संदेश दिया।

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नैनीताल। अर्न्तराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सरोवरनगरी नैनीताल स्थित पंडित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान यानी नैनीताल चिड़ियाघर में अन्य स्थानों से अलग ‘वन योग’ की थीम पर योगिक क्रियाएं की गयीं। इस मौके पर स्वयं चिड़ियाघर के निदेशक, प्रभागीय वनाधिकारी टीआर बीजू लाल ने स्वयं वन्य प्राणियों से प्रेरित यथा राष्ट्रीय पशु शेर से प्रेरित सिंहासन, राष्ट्रीय पक्षी मोर से प्रेरित मयूरासन, बाघ से प्रेरित व्याघ्रासन, टिड्डे पर आधारित शलभासन, ऊंट से प्रेरित ऊष्ट्रासन व अर्ध ऊष्ट्रासन, खरगोश से प्रेरित शशकासन, सांप से प्रेरित भुजंगासन, मगरमच्छ से प्रेरित मकरासन, चमगादड़ से प्रेरित शीर्षासन, कौए से प्रेरित काकासन व मछली से प्रेरित मत्स्यासन के साथ ही प्रकृति से ही संबंधित वृक्षासन व ताड़ासन आदि योग मुद्राओं का प्रदर्शन किया, तथा उपस्थित लोगों को भी यह अभ्यास कराये। साथ ही उन्होंने कहा कि मानव प्रकृति का एक हिस्सा है। वह जितना प्रकृति से जुड़ा रहता है, उतना ही स्वस्थ एवं निरोग रहता है। प्राचीन काल से ही महर्षि पतंजलि एवं अन्य योगाचार्यों ने प्रकृति के अन्य अंगो, वन्य जीवों पर आधारित आसनों के माध्मय से शरीर को स्वस्थ एवं निरोग बनाने के तरीके बताए थे।Yog (2)

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प्रकृति योग

प्रकृति योग

Image result for योग दिवस के साथ युग परिवर्तनबात कुछ पुराने संदर्भों से शुरू करते हैं। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि 1836 में उनके गुरु आचार्य रामकृष्ण परमहंस के जन्म के साथ ही युग परिवर्तन गया है काल प्रारंभ हो। यह वह दौर था जब देश में 700 वर्षों की मुगलों की गुलामी के बाद अंग्रेजों के अधीन था, और पहले स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल भी नहीं बजा था।
बाद में महर्षि अरविन्द ने प्रतिपादित किया कि युग परिवर्तन का काल, संधि काल कहलाता है और यह करीब 175 वर्ष का होता है …

पुनः, स्वामी विवेकानंद ने कहा था, ‘वह अपने दिव्य चक्षुओं से देख रहे हैं कि या तो संधि काल में भारत को मरना होगा, अन्यथा वह अपने पुराने गौरव को प्राप्त करेगा ….’
Yogaउन्होंने साफ किया था ‘भारत के मरने का अर्थ होगा, सम्पूर्ण दुनिया से आध्यात्मिकता का सर्वनाश! लेकिन यह ईश्वर को भी मंजूर नहीं होगा … ऐसे में एक ही संभावना बचती है कि देश अपने पुराने गौरव को प्राप्त करेगा …. और यह अवश्यम्भावी है। ‘
वह आगे बोले थे, ‘देश का पुराना गौरव विज्ञान, राज्य सत्ता अथवा धन बल से नहीं वरन आध्यात्मिक सत्ता के बल पर लौटेगा ….’
अब 1836 में युग परिवर्तन के संधि काल की अवधि 175 वर्ष को जोड़िए। उत्तर आता है 2011। अब थोड़ा पीछे मुड़कर 2011 को याद याद करें, जब देश में बाबा रामदेव योग को लेकर आगे बढ़ा रहे थे, और इसके चार वर्षों के बाद ही हमारा योग विश्व का योग बनने की राह पर चल पड़ा। 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विश्व योग दिवस का प्रस्ताव रखने के केवल 75 दिनों के अब तक के संयुक्त राष्ट्र संघ के किसी भी प्रस्ताव की स्वीकृति के रिकॉर्ड समय में 47 मुस्लिम देशों के साथ दुनिया के 177 देशों ने विश्व योग दिवस मनाने के सह प्रस्तावक बनकर इस प्रस्ताव को पारित करा दिया, और 21 जून 2015 को सूर्य के संक्रांति काल में उत्तरी गोलार्ध के वर्ष के सबसे बड़े दिन के अवसर पर भारत के योग का डंका दुनिया के 192 देशों में बज गया।
कोई आश्चर्य नहीं, ईश्वर स्वयं युग परिवर्तन की राह आसान कर रहे हों, और युगदृष्टा महर्षि अरविन्द और स्वामी विवेकानंद की बात सही साबित होने जा रही हो ….

यह भी जान लें कि आचार्य श्रीराम शर्मा सहित फ्रांस के विश्वप्रसिद्ध भविष्यवेत्ता नास्त्रेदमस सहित कई अन्य विद्वानों ने भी इस दौर में ही युग परिवर्तन होने की भविष्यवाणी की हुई है। उन्होंने तो यहाँ तक कहा था “दुनिया में तीसरे महायुद्ध की स्थिति सन् 2012 से 2025 के मध्य उत्पन्न हो सकती है। तृतीय विश्वयुद्ध में भारत शांति स्थापक की भूमिका निबाहेगा। सभी देश उसकी सहायता की आतुरता से प्रतीक्षा करेंगे।” नास्त्रेदमस ने तीसरे विश्वयुद्ध की जो भविष्यवाणी की है उसी के साथ उसने ऐसे समय में एक ऐसे महान राजनेता के जन्म की भविष्यवाणी भी की थी, जो दुनिया का मुखिया होगा और विश्व में शांति लाएगा।

क्या वह राजनेता नरेंद्र मोदी हो सकता है, जो दुनिया का मुखिया बनकर विश्व में शांति लाएगा और देश का मान भी बढ़ाएगा !
अब बात योग की। जिसका नाम ही ‘योग’ हो, वह विश्व का योग यानी विश्व को आपस में जोड़ दे तो इसमें आश्चर्य नहीं होगा। ऐसा होता भी नजर आ रहा है। दुनिया बिना किसी शुल्क दिए निरोगी बनने की भारत की राह पर आगे बढ़ रही है, और इस तरह दुनिया में ‘कल्याणकारी राज्य’ की परिकल्पना साकार होने की राह बनती नजर आ रही है। भारत की एक विधा बिना पश्चिम से लौटे न केवल देश वरन दुनिया की जीवन चर्या का अंग बनने जा रही है। अमेरिकी सांसदों और कर्मचारियों ने भारतीय दूतावास के सहयोग से ‘कांग्रेसनल योगी एसोसिएशन’ बनाकर योग को अपने जीवन का अंग बना लिया है। 21 जून से अमेरिका के 100 से अधिक शहरों में योग पर ‘योगाथॉन’ नाम का कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। यूरोपीय संघ के केंद्र ब्रसेल्स में योग पर सम्मेलन आयोजित हो चुका है । सिंगापुर में भी करीब 50 स्थानों पर योग के कार्यक्रम हो रहे हैं। भारत के धुर विरोधी चीन में भी 21 जून को वैश्विक योग सम्मेलन आयोजित हो रहा है। यह क्या युग परिवर्तन के संकेत नहीं हैं ?

सूर्य नमस्कार पर मिथ्या भ्रम

ramdevसूर्य नमस्कार-सूर्य को नमस्कार नहीं वरन सात आसनों-प्रणामासन, हस्तोथानासन, पदहस्तासन, अश्व संचालानासन, पर्वतासर, अष्टांगा नमस्कारासन व भुजंगासन का एक समुच्चय है। सूर्य नमस्कार के दौरान इन सात आसनों को पहले क्रमवार शुरू करते हुए बाद में वापसी के क्रम में लौटने का विधान है। इससे पूरे शरीर को अभ्यास मिलता है। योग गुरू बाबा रामदेव के अनुसार, सूर्य नमस्कार करने का अर्थ सूर्य के आगे झुकना नहीं, बल्कि उस आसन से अपने अंदर सूर्य जैसी शक्ति का प्रचार करना है। योग में सूर्य नमस्कार के जरिए शरीर के आठ अंगों से जमीन को छुआ जाता है।

ओम में अल्लाह भी और मुहम्मद भी

Yog4विश्व के सबसे बड़े मदरसे दारुल वलूम देवबंद ने योग को इस्लामी पद्धति के आधार पर यह कहते हुए मान्य घोषित किया है कि इसमें ओम के स्थान पर अल्लाह कह देना चाहिए या खामोश रहना चाहिए। मगर यदि हम ओम को उर्दू या अरबी वर्णमाला के आधार पर जांचें तो उनमें ओम बनता है-‘अलिफ’, ‘वाव ‘और ‘मीम’ से। ‘अलिफ’ अल्लाह का नाम है, ‘वाव’ (वा) का अर्थ होता है ‘और’ तथा ‘मीम’ से तात्पर्य है मुहम्मद ! इसका अर्थ यह हुआ कि ओम में भी इस्लाम धर्म के पैगंबर अल्लाह और मुहम्मद शामिल हैं।

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21 June

नवीन जोशी, नैनीताल। यूं माना जाता है कि जब भी सूर्य किसी लंबवत वस्तु या खड़े मनुष्य के ठीक सिर के ऊपर होते हैं, तो उस वस्तु या मनुष्य की छाया सैद्धांतिक तौर पर नहीं दिखाई देती। किंतु ऐसा होता नहीं है। सूर्य कभी भी पूरी तरह ठीक सिर के ऊपर लंबवत नहीं होते, वरन थोड़ा-बहुत इधर-उधर होते हैं, और इस कारण लंबवत खड़ी वस्तुओं की छाया भी थोड़ी-बहुत दिखाई देती है। लेकिन आगामी 21 जून को जब पूरी दुनिया भारत वर्ष के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल और संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुमोदन पर चौथा विश्व योग दिवस मना रही होगी, और खासकर उत्तराखंड अपनी राजधानी देहरादून में योग कर रहे प्रधानमंत्री मोदी के साथ योग कर रहा होगा, तब कर्क रेखा पर स्थित स्थानों पर ऐसा अनूठा पल आएगा, जबकि लंबवत खड़ी वस्तुओं की छाया स्वयं उनमें ही समाहित हो जाएगी और दिखाई नहीं देगी।

यूं यह ‘अयनंत’ कहा जाने वाला पल दिन में कर्क रेखा पर स्थित उज्जैन जैसे स्थानों पर इसका काफी हद तक अनुभव किया जा सकेगा। दुनिया भर के वैज्ञानिक ऐसे खास पलों पर ऐसे अध्ययनों में जुटेंगे। स्थानीय एरीज के वैज्ञानिकों की भी इस पर नजर रहेगी।इसका जिक्र 321-300 ईपू में चंद्रगुप्त मौर्य के सिहांसन पर बैठने के बाद लिखे गए कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी है। 2300 साल पहले ग्रीक वैज्ञानिक अराटोस्थेज ने भी 21 जून के दिन पृथ्वी पर पड़ने वाली छाया को मापने का प्रयास किया था। इस दिन शौकिया वैज्ञानिक दिल्ली में कुतुबमीनार की छाया नापने भी जाते हैं, जो कि इस दिनमात्र 0.9 मीटर की होती है। ऐसा इसलिए कि 21 जून के दिन दोपहर में सूर्य सर्वोच्च ऊंचाई पर होता है। जिस कारण हमारी छायाएं भी वर्ष की सबसे छोटी होती हैं।

धरती झुकने की वजह से हैं दिन-रात, रंग-बिरंगे मौसम

नैनीताल। कहते हैं कि फलों से लदे पेड़ या ज्ञानवान व्यक्ति में झुकने का गुण होता है, जबकि उथले ज्ञान युक्त या आधे जल से भरी गगरी छलकती जाती है। अनेकों गुणों, रस-रसायनों से भरी धरती भी झुकी हुई है, इसीलिए इतने अधिक गुणों व विभिन्नताओं युक्त है। एरीज के सौर वैज्ञानिक वहाब उद्दीन कहते हैं कि धरती अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है, इसीलिए पृथ्वी पर बड़े-छोटे दिन रात होते हैं, और मौसम बदलते रहते हैं। यदि धरती इस तरह झुकी ना होती तो वर्ष भर दिन और रात बराबर होते, तथा उत्तरी गोलार्ध में 21 जून को सबसे बड़ा दिन, 23 दिसंबर को सबसे छोटा दिन, 25 दिसंबर को दिन बढ़ना शुरू होने का ‘बड़ा दिन’ और 21 मार्च व 22 सितंबर को दिन व रात बराबर तथा दक्षिणी गोलार्ध में इसका ठीक उलटा न होता। वहीं मौसम न बदलते तो वर्ष भर एक सा मौसम होने से पृथ्वी पर जीवन नीरस होता। एरीज के ही वैज्ञानिक डा. शशिभूषण पांडे इसी विषय में आगे कहते हैं कि पृथ्वी झुकी ना होती तो अंटार्कटिक और आर्कटिक यानी दक्षिणी व उत्तरी ध्रुवों पर बर्फ की जगह संभवतया रेगिस्तान होता।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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