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झीलों के शहर में उभरे 6 नए ताल, पर सूखा ही रहा सूखाताल 

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नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अगस्त 2020। सरोवरनगरी में इस वर्ष हो रही अच्छी वर्षा से जहां नैनी झील के साथ ही वर्ष भर सूखे रहने वाले कई प्राकृतिक ताल पानी से भर गए हैं, वहीं नैनी झील की सर्वाधिक जल प्रदाता सूखाताल झील सूखी हुई है। नगर के अयारपाटा वार्ड के सभासद मनोज साह जगाती ने बताया कि उनके अयारपाटा वार्ड में अरविंद आश्रम के पीछे दो तालाब, समर फील्ड, टिफिन टॉप के पास, शेरवुड, डीआईजी आवास रोड पर शिव मंदिर के पास 6 ताल पानी से भर गए हैं। इनमें समर फील्ड का ताल तो लबालब भरा हुआ है। उन्होंने बताया कि वन्य जीव इन तालों में पानी पीने के लिए आते हैं, साथ ही इन में भरा पानी रिस-रिस कर नैनी झील में आता है। उल्लेखनीय है कि नगर की सूखाताल झील पूर्व में पानी से भर जाती थी और इसके पानी में जलागम क्षेत्र में बने घरों में भरे पानी को हटाने के लिए पंप लगाने पड़ते रहे हैं, तथा पूर्व में इस झील में नौकायन की तस्वीरें भी मिलती हैं। इस झील से नैनी झील में 70 फीसद तक जल पहुंचने के वैज्ञानिक तथ्य भी हैं। सूखाताल झील के पुनरुद्धार के लिए भी शासन-प्रशासन द्वारा बड़ी-बड़ी परियोजनाएं बनाने की बातें भी कही जाती हैं, किंतु नालों पर अतिक्रमण, ताल में स्वयं प्रशासन द्वारा ही पिछले वर्षों में मलबा भरने एवं अन्य कारणों से सूखाताल झील भर नहीं पा रही है। जबकि पूर्व में सूखाताल के जलागम क्षेत्र में स्थित आर्डवेल को आठ कुंवे यानी छोटे तालाब होने की बात भी कही जाती है, किंतु निर्माणों के कारण अब इन तालों का कोई अस्तित्व नहीं है।

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-सिंचाई विभाग व जिला विकास प्राधिकरण से आपसी समन्वय से नये सिरे से वैज्ञानिक प्रस्ताव बनाने को कहा
नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जुलाई 2020। नगर की विश्व प्रसिद्ध नैनी झील की सर्वाधिक-70 फीसद तक जल प्रदाता मानी जाने वाली सूखाताल झील के पुर्नजीवीकरण हेतु एक बार फिर प्रयास शुरू होते नजर आ रहे हैं। अलबत्ता मंडलायुक्त अरविंद सिंह ह्यांकी ने सिंचाई विभाग द्वारा सूखाताल झील के विकास हेतु प्रस्तुत की गयी तीन योजनाओं को निरस्त कर दिया है, और सिंचाई विभाग व जिला विकास प्राधिकरण से 20 अगस्त से पहले नगर के संभ्रान्त नारिकों के साथ बैठक कर आपसी समन्वय से नये सिरे से वैज्ञानिक प्रस्ताव बनाने को कहा है।
बृहस्पतिवार को यहां प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा करते हुए सिंचाई विभाग तथा जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण से प्रस्ताव तैयार करते इस बात का विशेष ध्यान रखने को भी कहा कि सूखाताल झील में पानी बना रहे तथा आवश्यकता पड़ने पर नैनी झील को सूखाताल झील से पानी उपलब्ध कराया जा सके। साथ ही पर्यटन की दृष्टि से सूखाताल झील को नए डेस्टीनेशन के रूप में भी विकसित जाये। उन्होंने निर्देश दिए कि सूखाताल झील के जीवितीकरण हेतु तैयार होने वाले प्रस्ताव में जल संग्रहण का भाग सिंचाई विभाग तथा सौन्दर्यकरण का भाग जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण आपसी तालमेल से तैयार करें। उन्होंने सड़ियाताल (सरिता ताल) झील में पानी भरे रहने तथा झील के पानी में दुर्गंध की समस्या का समाधान करने को भी कहा। बैठक में केएमवीएन के एमडी एवं जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रोहित कुमार मीणा, प्राधिकरण के सचिव पंकज उपाध्याय, एसडीएम विनोद कुमार, मुख्य अभियंता सिंचाई एनएस पतियाल, अधिशासी अभियंता सिंचाई एचसी सिंह, अधिशासी अभियंता जल संस्थान संतोष कुमार उपाध्याय आदि मौजूद रहे।

गांधी आश्रम के जीर्णोद्धार कार्य सितंबर माह तक पूरे करने के निर्देश

-डेढ़ करोड़ रुपए से हो रहे हैं जीर्णोद्धार के कार्य
नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जुलाई 2020। जिला-मंडल मुख्यालय के निकट राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नैनीताल आगमन के गवाह ताकुला गांधी ग्राम मंे इन दिनों 1.5 करोड़ रुपए की लागत से जीर्णोद्धार के कार्य किये जा रहे हैं। मंडलायुक्त अरविंद सिंह ह्यांकी ने बुधवार को गॉधीग्राम ताकुला पहुॅचकर गॉधी आश्रम में चल रहे जीर्णोद्धार कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने यहां मंद गति से चल रहे जीर्णोद्धार कार्य पर नाराजगी जताई और कार्यों के लिए कार्यदायी संस्था को अधिक मजदूरों को लगाकर कार्य में गति लाने व सितम्बर माह के अंत तक पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने गांधी आश्रम की दीवारों को आकर्षक बनाने व वहां फोटो गैलरी भी लगाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि गॉधी आश्रम में बच्चों, शोधार्थियों तथा पर्यटकों के आकर्षण हेतु जो भी चीजें की जा सकती हैं, उन पर विस्तार से रणनीति बनाकर कार्य किया जायेगा। निरीक्षण के दौरान केएमवीएन के एमडी एवं जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रोहित कुमार मीणा, एडीबी के सपोटिंग इंजीनियर एचसी शर्मा आदि उपस्थित थे।
गांधी ग्राम ताकुला का अधिकारियों के साथ निरीक्षण करते मंडलायुक्त अरविंद सिंह ह्यांकी।

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-मामले को एकलपीठ ने दूसरी पीठ को किया संदर्भित, कोर्ट ने मौखिक आदेश देते हुए प्राधिकरण को 5 मार्च को ध्वस्तीकरण अभियान रोकने को कहा

2014 में भरी सूखाताल झील (फाइल फोटो)

नवीन समाचार, नैनीताल, 4 मार्च 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की एकलपीठ ने जिला विकास प्राधिकरण नैनीताल द्वारा सूखाताल के डूब क्षेत्र में बने भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई से इंकार करते हुए मामले को अन्य बेंच को भेज दिया है। अलबत्ता कोर्ट ने मौखिक आदेश देते हुए प्राधिकरण को 5 मार्च को ध्वस्तीकरण अभियान रोकने को कहा है।  

मामले के अनुसार जिला विकास प्राधिकरण ने हाईकोर्ट द्वारा प्रो. अजय रावत बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य में 27 अगस्त 2019 को पारित आदेश में सूखाताल के जलागम क्षेत्र में बने 44 भवनों को 5 मार्च से पूर्व भवन स्वामियों से स्वयं ध्वस्त करने के आदेश दिए थे । इसके बाद 5 मार्च से प्राधिकरण द्वारा ध्वस्तीकरण अभियान चलाने के नोटिस दिए थे । इस नोटिस को सूखाताल के सुधीर सिंह व अन्य ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने सुनवाई से इंकार करते हुए मामला दूसरी पीठ को रेफर कर दिया।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 3 मार्च 2020। नैनीताल को  इको सेंसेटिव जोन बनाने  तथा  सूखाताल झील क्षेत्र जो कि नैनीताल झील को जल प्रदान करने का मुख्य स्रोत है, को रिचार्ज करने के लिए एक जनहित याचिका सन 2012 में प्रोफेसर अजय रावत द्वारा दाखिल की गई थी। इस याचिका के साथ 14 अन्य याचिकाएं भी माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निस्तारित की गई हैं लेकिन किसी भी कार्यवाही में प्रोफेसर रावत की याचिका का ही जिक्र किया जाता है, जो कि व्यक्तिगत रूप से नैनीताल के संरक्षण के लिए प्रयासों को आहत करता है। वर्तमान में जिला विकास प्राधिकरण डीडीए और नगर पालिका के द्वारा सूखाताल के क्षेत्र में कतिपय भवनों के मालिकों को ध्वस्तीकरण संबंधी नोटिस दिया गया है । जबकि झील के तल क्षेत्र अथवा महत्वपूर्ण डूब क्षेत्र में अवैध रूप से निर्माण किए गए रसूखदार लोगों के भवनों  को हटाए जाने की आवश्यकता है,इन अवैध रूप से निर्माण किए गए रसूखदार लोगों भवनों के कारण ही  झील  में बरसात में भरने वाले पानी को बाहर  निकाल दिया जाता है जिससे सूखा ताल झील में जल भर ही नहीं पाता ।यह महत्वपूर्ण है कि लेकबेड विशेषकर झील के तल क्षेत्र पर के भवनों के निर्माण किए जाने से वर्षा काल में सूखा ताल में जल नहीं भर पाता है और जिसके कारण नैनीताल झील में वर्ष पर्यंत पानी की कमी रहती है जिससे कि नगर वासियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
झील के डूब क्षेत्र में आने वाले भवनों को हटाकर ही वास्तविक रूप से सूखा ताल झील का संरक्षण किया जा सकता है इससे ना सिर्फ नैनीताल नगर को जल की अबाध आपूर्ति हो सकती है साथ ही सूखाताल क्षेत्र को एक पर्यटक क्षेत्र के में भी विकसित किया जा सकता है अभी पिछले दिनों एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, जिसमें कहा गया है कि देश के पर्वतीय पर्यटक स्थलों जैसे कि मसूरी, शिमला, दार्जिलिंग, इत्यादि में तेजी से पानी समाप्त होते जा रहा है, यदि सूखाताल क्षेत्र का संरक्षण नहीं किया गया तो नैनीताल भी जल्द ही पानी से वंचित हो जाएगा और जिसका दुष्प्रभाव यहां के पर्यटक  व्यवसाय पर  पड़ेगा। 
प्रो अजय रावत

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नवीन समाचार, नैनीताल, 1 मार्च 2020। विश्व प्रसिद्ध नैनी झील की सर्वाधिक जल प्रदाता सूखाताल झील के डूब क्षेत्र में अतिक्रमण कर भवन बनाने के मामले में एनडीडीए यानी नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण ने कार्रवाई शुरू कर दी है। एनडीडीए ने क्षेत्र के 16 कब्जेदारों को भवन खाली और ध्वस्तीकरण के नोटिस भेज दिए हैं। नोटिस मिलते ही अवैध निर्मंकर्ताओं में खलबली मच गई है।
उल्लेखनीय है कि पर्यावरणविद् प्रो. अजय रावत ने सूखाताल झील के किनारे अनधिकृत तरीके से अतिक्रमण कर किए निर्माणों के खिलाफ वर्ष 2012 में एक जनहित याचिका दायर की थी। इसे लेकर हाईकोर्ट ने झील किनारे मानकों के विपरीत बने भवनों के चिह्नीकरण के निर्देश प्राधिकरण और पालिका को दिए थे। वर्ष 2014 में तत्कालीन मंडलायुक्त डी.सेंथिल पांडियन के निर्देशों के बाद प्राधिकरण, सिंचाई, लोनिवि और पालिका की संयुक्त टीम ने सर्वे भी किया था। टीम ने सर्वे में 44 भवन चिह्नित किए थे। इससे पूर्व पालिका की ओर से एक अवैध निर्माण को आंशिक रूप से ध्वस्त किया जा चुका है, जबकि 43 मकानों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होनी है। इधर एनडीडीए के सचिव पंकज उपाध्याय ने बताया कि प्राधिकरण के द्वारा 16 तथा नगर पालिका के अंतर्गत 27 भवन पूर्व में स्वीकृत मानचित्र तथा नजूल भूमि में आवंटित निर्माण से संबंधित हैं। पालिका के ईओ अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि रविवार को कार्मिकों ने चिह्नित भवनों पर नोटिस चस्पा कर दिए हैं। पांच मार्च को सभी 43 भवनों को ध्वस्त किया जाएगा। इससे स्थानीय लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।

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-ढाई मीटर की गहराई तक खुदाई कर किया जाएगा झील का क्षेत्र विस्तार, 1978 के नक्शों के आधार पर बनेगी कार्ययोजना

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 नवंबर 2019। डीएम सविन बंसल के प्रयासों से नैनी झील की प्रमुख जल प्रदाता सूखाताल की दशा सुधरने की उम्मीद है। देश की बड़ी घड़ी निर्माता टाईटन कम्पनी अपने सीएसआर यानी नैगमिक सामाजिक उत्तरदायित्व मद से सूखाताल झील के जीर्णोद्धार के लिए हामी भर दी है। कम्पनी के सीएसआर हेड अश्वनी ने बताया कि डीएस की अध्यक्षता में बीती शाम आयोजित हुई बैठक में कम्पनी द्वारा सीएसआर मद से प्रथम फेज में सूखाताल झील की जल संचयन क्षमता बढ़ाने तथा द्वितीय व तृतीय फेज में अन्य कार्य किये जाने की बात कही।

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बैठक में श्री बंसल ने कहा कि कम्पनी को झील के सुधारीकरण एवं सौन्दर्यकरण के लिए किए जाने वाले कार्यों की वैज्ञानिक एवं सुनियोजित कार्य योजना दिखाने के उपरान्त ही जल संस्थान, सिंचाई, पालिक व लेक सेफ्टी कमेटी की सहमति के आधार पर ही कार्य करने की स्वीकृति प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि कार्य योजना में हाईकोर्ट के आदेशों का भी विशेष ध्यान रखा जाए। अलबत्ता, उन्होंने जल संस्थान, सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि कम्पनी को कार्य योजना तैयार करने में पूरी मदद करें। इस हेतु उन्होंने नैनीझील के जलागम क्षेत्र एवं नालों आदि के 1978 के नक्शों एवं एनआरएसए के मौजूदा उपग्रहीय चित्रों के आधार पर कुमाऊं विवि के भू-वैज्ञानिक, जल संस्थान, सिंचाई विभाग, पालिका व कम्पनी से संयुक्त रूप से झील व झील के रिचार्ज जोन एवं नालों का तकनीकी सर्वे करने को भी कहा। बैठक में सीडीओ विनीत कुमार, केएमवीएन के एमडी रोहित कुमार मीणा, डीडीओ रमा गोस्वामी, जल संस्थान के एसई एएस अंसारी, ईई एसके उपाध्याय, विशाल कुमार, सिंचाई विभाग के ईई हरीश चन्द सिंह के अलावा कम्पनी के प्रतिनिधि एनके भट्ट व कविता आदि मौजूद रहे।

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नैनीताल के आकर्षण में आ रहे वाहनों के लिए सूखाताल को बना दिया पार्किंग

सूखाताल झील में प्रशासन द्वारा खड़े किये गये वाहन।

नवीन समाचार, नैनीताल, 31 दिसंबर 2018। सरोवरनगरी में नये वर्ष के स्वागत एवं बीत रहे वर्ष को विदाई देने के जश्न में शामिल होने के लिए सैलानियेां के आगमन का सिलसिला दो दिन पूर्व ही शुरू हो गया था, जो कि सोमवार को भी जारी रहा। सैलानियों के निजी वाहनों से उमड़ने से नगर की मौजूदा पाकिंग सुविधाएं दिन में ही फुल हो गयीं। पिछले वर्षों की तरह डीएसए मैदान के खेल वाले हिस्से को वाहनों की पार्किंग के लिए नहीं खोला गया, वरन इसकी जगह नगर की जिस सबसे संवेदनशील, नगर की प्राण कही जाने वाली नैनी झील की वैज्ञानिक तौर पर सबसे बड़ी जल प्रदाता सूखाताल झील को वाहनों की पार्किंग में तब्दील कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि नगर में अतिक्रमण, असुरक्षित क्षेत्रों एवं अवैध निर्माणों के संबंध में डा. अजय रावत की जिस जनहित याचिका पर आदेश पारित होते रहे हैं, वह मूलतः सूखाताल को उसके मूल स्वरूप में लौटाने से संबंधित है।

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चिंताजनक: बारिश से नैनी झील लबालब पर जल प्रदाता सूखाताल झील खाली

इस बारे में डा. अजय रावत ने आशंका जताई कि आज एक दिन के लिए सूखाताल को पार्किंग बनाने की परंपरा आगे भी जारी रह सकती है, यह दीर्घकाल में नैनी झील के अस्तित्व को समाप्त करने का उपक्रम हो सकता है। पार्किंग समस्या के क्षणिक समाधान के लिए नैनी झील के अस्तित्व पर खतरा बढ़ाना ठीक नहीं है, क्योंकि जो सैलानी नगर में आ रहे हैं वह मूलतः नैनी झील के आकर्षण में ही आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सूखाताल नैनी झील की सबसे बड़ी जल प्रदाता झील है, और यह मूलतः ‘वेटलेंड’ यानी जल प्लावित क्षेत्र है। उच्च न्यायालय भी किसी भी झील के ‘बेड’ यानी आधार क्षेत्र में किसी भी तरह का अवैध निर्माण न करने के आदेश दे चुकी है।

शहर से बाहर वसूली गई लेक ब्रिज चुंगी

नैनीताल। नगर में नये वर्ष के स्वागत में उमड़ रहे वाहनों के कारण नगर के लेक ब्रिज चुंगी स्थल तल्लीताल में वाहनों का जाम लगने के मद्देनगर सोमवार को चुंगी को भवाली व हल्द्वानी रोडों पर स्थानांतरित कर दिया गया। वहीं सीओ विजय थापा ने बताया कि वाहनों को काठगोदाम, कालाढुंगी से लेकर ज्योलीकोट, रूसी बैंड, मंगोली, बारापत्थर आदि स्थानों पर रोका व उनकी पड़ताल की जा रही है कि वाहन शराब पीकर तो नहीं चलाये जा रहे हैं। साथ ही नगर के पार्किंग स्थलों के फुल हो जाने के बाद वाहनों को सूखाताल झील में खड़ा किया जा रहा है।

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Catchment Area of Sukhatal in Nainital's Survey of India Map (1936)
Catchment Area of Sukhatal in Nainital’s Survey of India Map (1936)

-सेंट जोन्स चर्च व तल्लीताल डांठ के पास नदी का मार्ग अवरुद्ध होने से बनी झीलें
नवीन जोशी, नैनीताल। कुमाऊं विवि के सेवानिवृत्त प्रोेफेसर वरिष्ठ भूगोलविद् एवं नैनी झील पर गहन शोधरत प्रो.जीएल साह ने अपने शोध के उपरांत निश्कर्ष निकाला है कि विश्व प्रसिद्ध नैनी झील का निर्माण लाखों वर्ष पूर्व एक नदी का मार्ग अवरुद्ध होने की वजह से हुआ होगा। संभवतया बलिया नाम की उस नदी का उद्गम स्थल आज की सूखाताल झील के पास रहा होगा। इस नदी में वर्तमान सेंट जोन्स चर्च के पास तथा तल्लीताल डांठ के पास भूगर्भीय हलचलों की वजह से नगर की पूर्वी व पश्चिमी ओर की पहाड़ियां शेर का डांडा और अयारपाटा में विचलन से हुए भूस्खलन की वजह से नदी का मार्ग अवरुद्ध हो गया होगा, और इस प्रकार आज की नैनी झील और सूखाताल झील का निर्माण हुआ होगा।

Pr. G.L.Sah
Pr. G.L.Sah

अपने करीब दो वर्ष पूर्व से नैनी झील पर किए जा रहे शोध के निश्कर्षों का खुलासा करते हुए प्रो. साह ने बताया कि सूखाताल झील, नैनी झील के अस्तित्व के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उल्लेखनीय है इन दिनों उत्तराखंड उच्च न्यायालय भी सूखाताल झील को पुर्नजीवित करने के लिए प्रयासरत है, जबकि अन्य पक्ष सूखाताल के भूतकाल में झील ही ना होने के तर्क दे रहे हैं। ऐसी स्थितियों में प्रो. साह के खुलासे बेहद महत्वपूर्ण हैं। प्रो. साह ने बताया कि 1872, 1893 व 1899 के अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए नक्शों में भी सूखाताल झील को प्रदर्शित किया गया है, तथा इसे वर्षाकाल में भरने वाली झील बताया गया है। वहीं 1936 के सर्वे ऑफ इंडिया के मानचित्र के आधार पर प्रो. साह ने बताया कि तब सूखाताल झील के जल आप्लावित क्षेत्र का क्षेत्रफल 3.3 हेक्टेयर और अधिकतम जल भराव की गहराई वर्तमान में सूखाताल झील में बने मां शाकुंभरी देवी मंदिर के स्थान पर 35 फीट थी। तब सूखाताल झील के पश्चिमी छोर पर ‘वांलिंटियर रायफल रेंज’ यानी चांदमारी थी, जहां लोग एवं अंग्रेज सिपाही निशाना लगाना सीखते थे। सूखाताल झील सितंबर मध्य तक बारिश के पानी से भरी रहती थी, और अगले वर्ष मार्च-अप्रैल तक इसका पानी रिस-रिस कर नैनी झील में जाता रहता था।

Sukhatal in today's era
Sukhatal in today’s era
इसलिए सूखी है सूखाताल झील
नैनीताल। सूखाताल के सूखी होने पर लोग अलग-अलग कयास लगाते हैं। इस बाबत प्रो. जीएल साह ने अनेक कारण बताए। पहला कारण इस झील का जलागम क्षेत्र नैना पीक व हांडी-भांडी की ओर से कुल मिलाकर केवल 70 हेक्टेयर क्षेत्रफल का होना है। इसमें से भी बड़ा हिस्सा नैनी झील के सबसे बड़े, नाला नंबर 23 से और दूसरी ओर स्लीपी हॉलो क्षेत्र से नैनी झील में चला जाता है। दूसरे, चूंकि यह नदी का उद्गम स्थल था, और दुनिया की हर नदी की तरह इस नदी के उद्गम स्थल पर भी कम पानी की धार ही फूटती थी। तीसरे, नैनी झील की तरह ही सूखाताल झील भी वर्षा के जल से भरने वाली यानी ‘इंटरमिटेंट’ झील है। चौथे, इसके जलागम क्षेत्र का 30 फीसद हिस्सा चट्टानों व तीक्ष्ण ढलान वाला है, इस कारण इसमें पानी बारिश के दौरान तत्काल आ जाता है, रिस-रिस कर धीरे-धीरे नहीं पहुंचता। तथा पांचवा, अंग्रेजी दौर से ही इसके जलागम में सर्वाधिक भवन थे, हालिया दौर में यहीं अत्यधिक निर्माण हुए हैं, जिस कारण भी पानी के रिस कर पहुंचने की दर बहुत कम है। तथा सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि हालिया वर्षों में सूखाताल झील को बकायदा एक निविदा प्रक्रिया के तहत मलवा डालकर भर दिया गया है। इससे झील की गहराई खत्म हो गई है। इसलिए यह जल्द भर जाती है, और जल्द खाली भी हो जाती है।
कभी आठ कुंए भी थे सूखाताल क्षेत्र में
नैनीताल। प्रो. साह क्षेत्र में आर्डवेल नाम के एक भवन को ‘आठ वेल’ यानी आठ कुंओं का अपभ्रंश मानते हुए यहां पॉलीटेक्निक व एटीआई के बीच मुल्ला पोखर सहित आठ कुंए होने का दावा करते हैं। सर्वे ऑफ इंडिया के 1932 के नक्शे में भी ऐसे अनेक कुंए दर्शाए गए हैं।

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