सांसद अनिल बलूनी के प्रयासों से उत्तराखंड की सुविधाविहीन जनता को मिलेगी यह बड़ी सौगात

  • खुशखबरी : सेना के डॉक्टर सूबे में आम लोगों का इलाज भी करेंगे 
  • केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी सैद्धांतिक सहमति 
  • सांसद अनिल बलूनी के अनुरोध पर मिली प्रदेश को सौगात 

देहरादून, 15 सितंबर 2018 । डॉक्टरों की कमी की समस्या झेल रहे उत्तराखंड के लिए खुशखबरी है। प्रदेश के छावनी क्षेत्रों में तैनात सेना के डॉक्टर अब आम लोगों का इलाज भी करेंगे। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख और उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने उत्तराखंड की जनता के लिए स्वास्य के क्षेत्र में बड़ी सौगात दी है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 25 अगस्त 2018 को नैनी-दून जनशताब्दी एक्सप्रेस का तोहफा भी दिलाया था। इसके अलावा वे हाल में संसद में उत्तराखंड के लिए विशेष राहत पैकेज और एनडीआरएफ की स्थाई यूनिट स्थापित करने की मांग भी उठा चुके हैं।

शनिवार को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठक में उन्होंने उत्तराखंड के सामान्य नागरिकों को भी सेना के चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार देने के लिए अनुरोध किया, जिस पर रक्षा मंत्री ने सैद्धांतिक सहमति दी है। यह फैसला पर्वतीय जनता की स्वास्य सेवा के क्षेत्र में मील का पत्थर होगा। सांसद बलूनी की रक्षा मंत्री के साथ उनके साउथ ब्लॉक स्थित कार्यालय में भेंट हुई। बैठक में उत्तराखंड के उन सैन्य क्षेत्रों (छावनियों) में, जहां सेना के चिकित्सक उपलब्ध हैं, उनके द्वारा राज्य के सामान्य नागरिकों को भी चिकित्सकीय सहायता मिले, इस विषय पर रक्षा मंत्री से भेंट की तथा दुर्गम क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्य की सुविा प्रदान करने पर र्चचा हुई। सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि रक्षा मंत्री ने राज्य के पलायन की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वह स्वयं उत्तराखंड की परिस्थितियों से अवगत हैं और स्वास्य, शिक्षा तथा रोजगार के लिए निरंतर राज्य से पलायन के कारण चिंतित हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमांतवासियों के लिए स्वास्य की सुविधा प्राथमिक रूप से मिलनी चाहिए। इसके कार्यान्वयन के लिए सेना के संबंधित कमान से र्चचा करेंगी। सांसद बलूनी ने कहा कि सेना के देहरादून, रुड़की, लैंसडाउन, हर्षिल, रुद्रप्रयाग, जोशीमठ, रानीखेत, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ व धारचूला में सैन्य क्षमता के आधार पर मिलिट्री हॉस्पिटल, फील्ड हॉस्पिटल, सेक्शन हस्पिटल और जनरल हॉस्पिटल कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त जिला स्तर पर आईसीएचएस क्लीनिक कार्य कर रही हैं। रक्षा मंत्री जी से अनुरोध किया गया कि केवल प्राथमिक उपचार, औषाि और मरहम पट्टी स्तर की क्लीनिक जो आम नागरिकों के लिए कुछ घंटे दैनिक रूप से सेवा दें ताकि नागरिकों को स्वास्य के क्षेत्र में बड़ी राहत मिल सके।

अर्धसैनिक बलों के डॉक्टरों को लेकर आज केंद्रीय गृहमंत्री से मिलेंगे बलूनी

देहरादून। अर्धसैनिक बलों के चिकित्सकों से भी प्रदेश की आम जनता का इलाज मिल सके इस बाबत राज्य सभा अनिल बलूनी का रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भेंट का समय तय हुआ है। सांसद बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड प्रदेश में सेना के साथ-साथ आईटीबीपी, एसएसबी और सीआरपीएफ की बटालियनें भी हैं, इस संबंध में वह रविवाव को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलेंगे और गृहमंत्री से अपील करेंगे कि वह अर्धसैन्य बलों के चिकित्सकों के माध्यम से भी स्थानीय नागरिकों को मेडिकल सुविधा देने की कृपा करें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड से भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित

उत्तराखंड की राज्यसभा सीट से भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया विभाग के प्रभारी अनिल बलूनी निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। गुरूवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की उपस्थिति में रिटर्निंग आॅफिसर मदन सिंह कुंजवाल ने बलूनी को राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने का प्रमाण पत्र प्रदान किया। इसके बाद मुख्यमंत्री, उनके कैबिनेट मंत्रियों सहित भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायकों ने बलूनी को राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने पर पर बधाई व शुभकामनाएं दी। विदित हो कि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के नाम के भी तेजी से इस पद के लिए चर्चाओं में होने के बीच  त्रिवेंद्र रावत ने उनके नाम की घोषणा की थी। भाजपा ने बलूनी को राज्य सभा पहुंचा कर अब तक उठ रहे सवालों को शांत व सबको निरुत्तर कर दिया है। वे उत्तराखंड से ही हैं, साथ ही किसी राजनीतिक परिवार से भी नहीं हैं। वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पार्टी की  जिस तरह से प्रबल तरह से पैरवी करते हैं, उनसे उम्मींद की जा सकती है कि वे इसी तरह अपने राज्य उत्तराखंड की भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रबल तरह से पैरवी करेंगे। 

इससे पूर्व मूलतः पौड़ी के निवासी 45 वर्षीय बलूनी का नाम वर्ष 2017 के विधान सभा में भाजपा को बहुमत मिलने के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए भी चर्चा में आया था और वे चुनाव पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती देकर भी चर्चा में आये थे। बिहार व गुजरात के राज्यपाल रहे संघ के वरिष्ठ नेता सुंदर सिंह भंडारी के पसंदीदा व करीबी रहे बलूनी अब भाजपा अध्यक्ष अमित साह के विश्वासपात्रों में शामिल हैं ।

मालूम हो कि उत्तराखंड में राज्यसभा की कुल 3 सीटें हैं। इनमें से एक सीट (महेंद्र सिंह माहरा की) खाली हो रही है। यदि उनके विरुद्ध कोई दूसरा प्रत्याशी भी चुनाव में खड़ा होता तो 23 मार्च को चुनाव के दिन गैरसैंण में आयोजित होने जा रहे पहले बज़ट सत्र के दौरान ही राज्यसभा के लिए वोट डाले जाने का इतिहास भी बनना था। कम संख्या बल के मद्देनजर कांग्रेस ने इस चुनाव में पहले ही हार मानते हुए भाजपा को वाकओवर दे दिया है। 

अनिल बलूनी का परिचय

अनिल बलूनी त्रकारिता की पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में भी सक्रिय और दिल्ली में संघ परिवार के करीब रहे। इसी बीच उन्हें संघ के जाने-माने नेता सुंदर सिंह भंडारी पसंद करने लगे। सुंदर सिंह भंडारी को जब बिहार का राज्यपाल बनाया गया तो वह बलूनी को अपना ओएसडी बनाकर ले गए। बिहार के बाद बलूनी भंडारी के साथ गांधीनगर जा पहुंचे जब भंडारी को गुजरात का राज्यपाल बनाया गया। 2002 में बलूनी देहरादून लौट आए। 26 साल की उम्र में राजनीति की ओर कदम बढ़ाते हुए उत्तराखंड की कोटद्वार सीट से चुनाव में हाथ आजमाया लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। उनका नामांकन अवैध घोषित हो गया था।

यह है राज्य की राजनीतिक स्थिति :

उत्तराखंड राज्य विधानसभा में कांग्रेस के 11 विधायक हैं, जबकि दो निर्दलीय। ऐसे में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं दिखती। वजह ये कि यदि दो निर्दलीयों का समर्थन नहीं मिला और अपना कोई विधायक भी इधर-उधर हो गया तो किरकिरी हो सकती है। इस स्थिति का आंकलन कर कांग्रेस पहले ही साफ भी कर चुकी है कि वह प्रत्याशी नहीं उतारेगी।

वहीं भाजपा की बात करें तो उसके पास 1 सदस्य मगन लाल साह की मृत्यु के बाद 69 विधायकों के सदन में 56 सदस्य हैं। लिहाजा प्रचंड बहुमत होने के कारण उसकी जीत तय है। विपक्ष का कोई प्रत्याशी न उतरने पर इस सीट पर मतदान की नौबत नहीं आएगी।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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