18 किलोमीटर पैदल चलकर खुद बारात लेकर ससुराल पहुंची दुल्हन, बोलीं—धामी जी! हमारे गांव तक सड़क बनवा दीजिए

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नवीन समाचार, चकराता, 22 अक्टूबर 2026 (Bride Said-Please Make Road to Village)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के जौनसार-बावर (Jaunsar-Bawar) क्षेत्र के उदावा गांव में एक दुल्हन को अपनी बरात के साथ ससुराल पहुंचने के लिए करीब 18 किलोमीटर का पहाड़ी रास्ता पैदल तय करना पड़ा। चार घंटे तक चलने के बाद जब शर्मिला नाम की दुल्हन अपनी ससुराल पहुंचीं, तो उनकी परेशानी केवल एक शादी की कहानी नहीं रही, बल्कि गांव तक सड़क पहुंचाने की जरूरत को भी सामने ले आयी। शादी के भारी जोड़े में दुर्गम पगडंडियों से गुजरने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपने गांव तक सड़क बनवाने की अपील की है।

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बुल्हाड़ से लोखंडी तक वाहन से पहुंची बरात, आगे रास्ता बना चुनौती

Bride Said-Please Make Road to Village शादी के जोड़े में लहंगे को हाथों से उठाकर दौड़ते हुए ससुराल पहुंची दुल्हन शर्मिला। - Dainik Bhaskarजानकारी के अनुसार, चकराता विकासखंड के दुर्गम उदावा गांव निवासी अनिल चौहान का विवाह बुल्हाड़ गांव की शर्मिला से तय हुआ था। बीते मंगलवार को शर्मिला अपनी बरात लेकर ससुराल के लिए रवाना हुईं। लोखंडी तक का सफर वाहनों से पूरा हो गया, लेकिन इसके आगे उदावा गांव तक सड़क उपलब्ध नहीं होने के कारण बरात को पैदल ही चलना पड़ा।

शादी के पारंपरिक परिधान में सजी शर्मिला ने पहाड़ी पगडंडियों और पत्थरों से भरे रास्ते पर करीब 18 किलोमीटर की दूरी तय की। यह सफर लगभग चार घंटे चला। भारी लहंगे को हाथों से संभालते हुए दुर्गम रास्ते पर आगे बढ़ना आसान नहीं था, लेकिन समय पर ससुराल पहुंचने की चिंता ने उनकी चाल तेज कर दी।

गृह प्रवेश का मुहूर्त बचाने के लिए दौड़ने लगीं शर्मिला

शादी के बाद गृह प्रवेश का शुभ समय निकल जाने की आशंका ने उनकी चिंता और बढ़ा दी। बताया गया है कि इसी जल्दबाजी में शर्मिला कई स्थानों पर शादी का लहंगा संभालते हुए दौड़ती नजर आयीं। वहां मौजूद ग्रामीणों ने उनके इस सफर का वीडियो बना लिया, जो सोशल मीडिया पर चर्चा में आया।

यह दृश्य जहां एक ओर दुल्हन के उत्साह और दृढ़ता को दिखाता है, वहीं दूसरी ओर सड़क सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को होने वाली कठिनाइयों की ओर भी ध्यान खींचता है। पहाड़ी गांवों में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता पहुंचाने से भी जुड़ी होती है।

जौनसार की ‘जोझोड़े’ परंपरा में दुल्हन लेकर जाती है बरात

उदावा गांव की यह शादी जौनसार-बावर क्षेत्र की विशिष्ट परंपरा के कारण भी चर्चा में है। यहां प्रचलित ‘जोझोड़े’ अथवा ‘जाजड़ा’ परंपरा में दूल्हे के बजाय दुल्हन बरात लेकर दूल्हे के घर जाती है। इस क्षेत्र में अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं और रीति-रिवाजों का विशेष महत्व है। स्थानीय मान्यताओं में जौनसारी समुदाय का संबंध महाभारत कालीन परंपराओं से भी जोड़ा जाता है।

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शर्मिला की शादी इसी परंपरा के अनुसार हुई, लेकिन लोखंडी से आगे सड़क न होने के कारण पारंपरिक बरात की यात्रा एक कठिन पैदल सफर में बदल गयी।

मुख्यमंत्री धामी से सड़क बनवाने की अपील

लंबा रास्ता तय करने के बाद शर्मिला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उदावा गांव तक सड़क बनाने की अपील की। उन्होंने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि लोखंडी से उदावा तक बरात को पैदल जाना पड़ा। पक्का रास्ता नहीं होने से काफी थकान हुई और गृह प्रवेश का मुहूर्त बचाने के लिए उन्हें दौड़ना तक पड़ा। उन्होंने मुख्यमंत्री से गांव तक जल्द सड़क बनवाने का आग्रह किया, ताकि भविष्य में किसी अन्य बेटी और ग्रामीण को ऐसी परेशानी न उठानी पड़े।

एक दुल्हन की यात्रा ने फिर उठाया बुनियादी सुविधा का सवाल

शर्मिला का यह सफर केवल विवाह से जुड़ा एक अनोखा प्रसंग नहीं है। यह उस कठिनाई को सामने लाता है, जिसका सामना दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुविधा से वंचित गांवों के लोगों को करना पड़ सकता है। शादी जैसे पारिवारिक अवसर पर भी यदि लोगों को कई किलोमीटर पैदल चलना पड़े, तो यह गांवों तक संपर्क मार्ग पहुंचाने की आवश्यकता पर ध्यान देने का अवसर है।

अब देखना होगा कि उदावा गांव तक सड़क पहुंचाने की इस अपील पर संबंधित विभाग और शासन की ओर से क्या कदम उठाये जाते हैं। शर्मिला की मांग का उद्देश्य स्पष्ट है—पहाड़ की परंपराएं और प्राकृतिक सुंदरता बनी रहें, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों की कठिनाइयां उनकी नियति न बनें।

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