नवीन समाचार, देहरादून, 24 अक्टूबर 2026 (Dhami Attack Akhilesh on Ghuspaithiya)। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में कथित घुसपैठ और मतदाता सूची से जुड़े राजनीतिक विवाद के बीच समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अध्यक्ष अखिलेश यादव की उत्तराखंड के लोगों को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उत्तर प्रदेश में सबसे बड़े घुसपैठिए उत्तराखंड के हैं और घुसपैठिए शब्द की परिभाषा तय करने की आवश्यकता है। उल्लेखनीय है कि अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल उत्तराखंड की ही हैं। आप यह संबंधित वीडियो भी जरूर देखना चाहेंगे :
उनके इस बयान पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ी आपत्ति जताई। धामी ने इसे उत्तराखंड के स्वाभिमान और राज्य निर्माण के लिए किए गए संघर्ष का अपमान बताते हुए वर्ष 1994 के रामपुर तिराहा गोलीकांड की याद दिलाई।
अखिलेश यादव ने क्या कहा था?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में घुसपैठियों को लेकर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था:
“सबसे बड़े घुसपैठिया यूपी में कौन हैं? उत्तराखंड के, तो घुसपैठिया डिफाइन करना पड़ेगा।”
इस टिप्पणी का संदर्भ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़ा माना जा रहा है, क्योंकि उनका जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र में हुआ था। अखिलेश यादव की टिप्पणी के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपत्ति जताते हुए इसे उत्तराखंड के लोगों के स्वाभिमान और राज्य आंदोलन के संघर्ष का अपमान बताया।
धामी बोले—उत्तराखंड देवभूमि भी है और वीरभूमि भी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सामाजिक माध्यम एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तराखंड की पहचान, इतिहास और राज्य आंदोलन के संघर्ष का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि भी है और वीरभूमि भी। इस धरती ने देश को संत, सैनिक और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित अनेक व्यक्तित्व दिए हैं।
धामी के अनुसार, उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहना उनके स्वाभिमान और राज्य के लिए किए गए संघर्ष का अपमान है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोग अपने संघर्ष और बलिदान को नहीं भूले हैं।
रामपुर तिराहा गोलीकांड का क्यों किया गया उल्लेख?
मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में अखिलेश यादव के पिता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब अलग उत्तराखंड राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में गोलीबारी हुई थी।
रामपुर तिराहा गोलीकांड उत्तराखंड राज्य आंदोलन के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील अध्यायों में शामिल है। दो अक्टूबर 1994 को अलग राज्य की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा पर रोका गया था। इसके बाद वहां पुलिस कार्रवाई, गोलीबारी और लाठीचार्ज की घटनाएं हुईं। इस घटना में कई आंदोलनकारियों की मृत्यु हुई और अनेक लोग घायल हुए।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान खटीमा में एक सितंबर 1994 और मसूरी में दो सितंबर 1994 को भी पुलिस गोलीबारी हुई थी। मसूरी के झूलाघर क्षेत्र में हुई गोलीबारी में छह आंदोलनकारियों की मृत्यु हुई थी। इस घटना में पुलिस उपाधीक्षक उमाकांत त्रिपाठी की भी गोली लगने से मृत्यु हुई थी। इन घटनाओं ने अलग राज्य की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को गहरा प्रभावित किया और उत्तराखंड की सामूहिक स्मृति में स्थायी स्थान बनाया।
धामी ने इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव की टिप्पणी पर सवाल उठाया। उनका तर्क था कि उत्तराखंड के लोगों की पहचान को इस तरह प्रस्तुत करना राज्य आंदोलन के संघर्ष और बलिदान की अनदेखी है।
कांग्रेस से भी मांगा जवाब
मुख्यमंत्री धामी ने इस विवाद में कांग्रेस को भी शामिल करते हुए सवाल किया कि क्या कांग्रेस अपने राजनीतिक सहयोगी अखिलेश यादव की टिप्पणी का समर्थन करती है? उन्होंने पूछा कि क्या उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहना कांग्रेस को स्वीकार है।
धामी ने कांग्रेस से उत्तराखंड की जनता के सामने अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। इस तरह मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष की टिप्पणी को केवल दो नेताओं के बीच की राजनीतिक बहस तक सीमित न रखते हुए प्रदेश के सम्मान और राज्य आंदोलन के इतिहास से जोड़ दिया।
अखिलेश यादव की टिप्पणी का संदर्भ भी महत्वपूर्ण
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, अखिलेश यादव की टिप्पणी उत्तर प्रदेश में कथित घुसपैठियों और मतदाता सूची से जुड़े राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के संदर्भ में आई। उन्होंने घुसपैठिए शब्द की परिभाषा तय करने की बात भी कही। इसलिए उनके बयान का पूरा संदर्भ समझना राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण पक्ष है।
हालांकि, इस टिप्पणी को लेकर मुख्यमंत्री धामी की आपत्ति स्पष्ट है। उन्होंने उत्तराखंड के लोगों के सम्मान और राज्य आंदोलन के इतिहास को केंद्र में रखते हुए बयान की आलोचना की है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस विवाद पर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
राज्य आंदोलन का इतिहास फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में
उत्तराखंड राज्य आंदोलन केवल पृथक राज्य की प्रशासनिक मांग नहीं था, बल्कि इसमें क्षेत्रीय पहचान, राजनीतिक अधिकारों और स्थानीय आकांक्षाओं का प्रश्न भी जुड़ा था। वर्ष 1994 की गोलीबारी की घटनाएं आज भी राज्य आंदोलनकारियों और उनके परिजनों के लिए गहरे भावनात्मक महत्व रखती हैं।
अखिलेश यादव की टिप्पणी और मुख्यमंत्री धामी की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर उत्तराखंड की पहचान, राज्य आंदोलन के इतिहास और राजनीतिक भाषा की मर्यादा को बहस के केंद्र में ला दिया है। अब इस विवाद में अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं और अखिलेश यादव की ओर से इस टिप्पणी पर आगे कोई स्पष्टीकरण आता है या नहीं, इस पर नजर रहेगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
