नवीन समाचार, नैनीताल, 5 अक्टूबर 2026 (Self Employment through Tourism)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) जनपद के मुक्तेश्वर (Mukteshwar) क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों को पर्यटन से जोड़कर स्वरोजगार खड़ा करने का एक उदाहरण सामने आया है। नथुआखान (Nathuwakhan) में संचालित ‘कुमाऊं रोडीज एडवेंचर कैंप एंड रिजॉर्ट’ (Kumaon Roadies Adventure Camp & Resort) के संचालक मनोज बिष्ट ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के माध्यम से उत्तराखंड ग्रामीण बैंक (Uttarakhand Gramin Bank) से 10 लाख रुपये का ऋण लेकर अपने पर्यटन कारोबार का विस्तार किया। उनके अनुसार सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें हर माह लगभग 60 से 70 हजार रुपये की आय हो रही है।
नथुआखान-मुक्तेश्वर क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और हिमालयी दृश्यों के लिए पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र है। इसी प्राकृतिक परिवेश को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर कुमाऊं रोडीज में पर्यटकों के ठहरने के लिए कमरे और टेंट की सुविधा के साथ विभिन्न साहसिक गतिविधियां भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
कमरे और टेंट सहित साहसिक गतिविधियों की सुविधा
कुमाऊं रोडीज में पर्यटकों के लिए ठहरने की सुविधा के साथ रॉक क्लाइम्बिंग (Rock Climbing), जिपलाइन (Zipline), तीरंदाजी, ट्रेकिंग (Trekking), जंगल भ्रमण, तारों का अवलोकन (Stargazing) और अलाव जैसी गतिविधियां उपलब्ध कराई जाती हैं।
राज्य सरकार के पर्यटन संबंधी अभिलेखों में भी कुमाऊं रोडीज एडवेंचर कैंप को नथुआखान में पर्यटन और साहसिक गतिविधियों से जुड़े प्रतिष्ठान के रूप में दर्ज किया गया है।
सरकारी ऋण से पहले से चल रहे कारोबार का विस्तार
मनोज बिष्ट के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का लाभ केवल ऋण प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहा। योजना के माध्यम से मिले 10 लाख रुपये के ऋण का उपयोग उन्होंने अपने पहले से चल रहे पर्यटन कारोबार को व्यवस्थित रूप से विकसित करने तथा कैंपिंग और साहसिक पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार में किया।
इस तरह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर व्यवसाय का दायरा बढ़ाने का प्रयास किया गया।
पहाड़ की प्राकृतिक संपदा बनी कारोबार का आधार
कुमाऊं रोडीज की कहानी का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसके लिए किसी बड़े औद्योगिक ढांचे की आवश्यकता नहीं पड़ी। क्षेत्र में मौजूद पहाड़ी वातावरण, हिमालयी दृश्य, फलदार बागान और प्राकृतिक शांति को ही पर्यटकों के अनुभव का हिस्सा बनाया गया।
उपलब्ध पर्यटक समीक्षाओं में भी परिसर के प्राकृतिक परिवेश, फलदार बागान, भोजन और अलाव जैसी सुविधाओं का उल्लेख मिलता है।
ऐसे छोटे पर्यटन उद्यमों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि पर्यटकों का खर्च केवल बड़े होटल या रिजॉर्ट तक सीमित नहीं रहता। ठहरने, भोजन, स्थानीय परिवहन, मार्गदर्शन और साहसिक गतिविधियों से जुड़े स्थानीय लोगों के लिए भी इससे आर्थिक गतिविधियों के अवसर बन सकते हैं।
‘सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर युवा उठाएं लाभ’
मनोज बिष्ट के अनुसार मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना ने उन्हें अपने व्यवसाय को स्थापित करने और आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। उनका कहना है कि स्वरोजगार से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और क्षेत्र में पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला।
उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए युवाओं से सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाने की अपील की है।
स्थानीय स्तर पर रोजगार का माध्यम बन सकता है पर्यटन
पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसर और पलायन की चुनौती लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। ऐसे में नथुआखान का यह उदाहरण बताता है कि स्थानीय परिस्थितियों, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यटकों की मांग को समझकर योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन आधारित स्वरोजगार विकसित किया जा सकता है।
सरकारी ऋण और योजनाएं ऐसे उद्यमों के लिए शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराने में सहायक हो सकती हैं, जबकि व्यवसाय की वास्तविक सफलता उद्यमी की योजना, सेवा की गुणवत्ता, पर्यटकों की मांग और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का उद्देश्य
उत्तराखंड सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का उद्देश्य राज्य के स्थानीय युवाओं को विनिर्माण, सेवा और व्यापार क्षेत्र में स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
दिसंबर 2025 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने योजना के लाभार्थियों के खातों में 33.22 करोड़ रुपये की धनराशि हस्तांतरित करते हुए कहा था कि योजना स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, पलायन रोकने और रिवर्स माइग्रेशन (Reverse Migration) को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
दिए गए विवरण के अनुसार योजना के तहत राष्ट्रीयकृत, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है तथा सेवा एवं व्यापार क्षेत्र के लिए 10 लाख रुपये तक की परियोजना लागत अनुमन्य है।
नथुआखान में ‘कुमाऊं रोडीज एडवेंचर कैंप’ का उदाहरण इसी योजना के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र में स्वरोजगार खड़ा करने की संभावनाओं को सामने रखता है। मनोज बिष्ट का उद्यम पहाड़ में स्थानीय संसाधनों और पर्यटन को जोड़कर रोजगार के अवसर तैयार करने के प्रयास का एक उदाहरण बनकर सामने आया है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
