नवीन समाचार, नैनीताल, 28 मार्च 2026 (Kumaun University News 28 March 2026)। कुमाऊँ विश्वविद्यालय (Kumaun University) इन दिनों अपनी शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। भारत सरकार की महत्वपूर्ण खनिज अनुसंधान समिति में विश्वविद्यालय के प्रोफेसर को स्थान मिलने से जहाँ संस्थान का गौरव बढ़ा है, वहीं परिसर में जीवन कौशल, हिमालयी मत्स्य पालन और पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों ने छात्रों में नया उत्साह भर दिया है।
1. राष्ट्रीय खनिज अनुसंधान समिति (Maha-CRM) में प्रो. संतोष कुमार नामित
भारत सरकार ने देश के महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के अनुसंधान एवं विकास के लिए एक उच्चस्तरीय तकनीकी विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस प्रतिष्ठित समिति में कुमाऊँ विश्वविद्यालय के प्रो. संतोष कुमार को सदस्य के रूप में नामित किया गया है। यह समिति ‘माहा-क्रिटिकल रॉ मटेरियल्स रिसर्च प्रोग्राम’ (Maha-CRM) के तहत लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे रणनीतिक खनिजों के खनन और प्रसंस्करण की दिशा निर्धारित करेगी। ‘विकसित भारत 2047’ के विजन हेतु इस पहल के लिए 210 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कुलपति प्रो. दीवान एस. रावत ने इसे विश्वविद्यालय के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।
बताया गया है कि यह समिति देशभर में स्थापित उत्कृष्टता केंद्रों द्वारा प्रस्तुत अनुसंधान प्रस्तावों का वैज्ञानिक एवं तकनीकी मूल्यांकन करेगी तथा खनिज क्षेत्र में अनुसंधान की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बताया गया है कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत लिथियम, कोबाल्ट, निकेल तथा दुर्लभ मृदा तत्वों जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के अनुसंधान, खनन, प्रसंस्करण एवं पुनर्चक्रण पर विशेष बल दिया जा रहा है। ‘विकसित भारत 2047’ की परिकल्पना के अनुरूप इस पहल के लिए तीन वर्षों हेतु 210 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
ऊर्जा, विद्युत वाहन, सौर प्रौद्योगिकी, अर्धचालक उद्योग एवं बैटरी भंडारण जैसे क्षेत्रों में इन खनिजों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए यह पहल रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रो. कुमार का चयन देश के चुनिंदा विशेषज्ञों में किया जाना उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों एवं शोध योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति माना जा रहा है।
2. कुमाऊँ विवि में पीएचडी (Ph.D.) प्रवेश प्रक्रिया शुरू, 6 अप्रैल तक करें आवेदन
उच्च शिक्षा की राह देख रहे शोधार्थियों के लिए बड़ी खबर है। कुमाऊँ विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए पीएचडी कार्यक्रम की प्रवेश प्रक्रिया आधिकारिक रूप से प्रारंभ कर दी है। कुलसचिव डॉ. एम.एस. मंद्रवाल के अनुसार, समर्थ पोर्टल (Samarth Portal) के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन 28 मार्च से शुरू हो चुके हैं, जिसकी अंतिम तिथि 6 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है। यूजीसी नेट और सीएसआईआर नेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के आधार पर वरीयता दी जाएगी, जबकि अन्य अभ्यर्थियों का चयन शोध अध्यादेश 2023 के मानकों के अनुरूप होगा।
3. जीवन कौशल कार्यशाला: विद्यार्थियों को मिले ‘आंतरिक शांति और खुशी’ के मंत्र
डीएसबी परिसर नैनीताल में आयोजित दो दिवसीय जीवन कौशल कार्यशाला के दूसरे दिन विद्यार्थियों को मानसिक संतुलन और भावनात्मक नियंत्रण का पाठ पढ़ाया गया। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय की मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. मधुलता नयाल ने मुख्य वक्ता के रूप में छात्रों को क्रोध प्रबंधन और सकारात्मक सोच के व्यावहारिक पहलू समझाए। उन्होंने बताया कि कैसे परिवार और बुजुर्गों की शक्ति से जुड़कर युवा अपनी आंतरिक ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं।
डॉ. मधुलता नयाल ने विद्यार्थियों को ‘आंतरिक शांति और खुशी’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र में आंतरिक शांति एवं ऊर्जा प्राप्त करने के मंत्र दिये। बताया कि बच्चे कैसे अपने परिवारजनों, बुजुर्गों और अपने चाहने वालों की शक्ति को हमेशा अपने पास महसूस कर सकते हैं और उनसे ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने मानसिक संतुलन, भावनात्मक नियंत्रण तथा आंतरिक संतुष्टि के महत्व पर भी प्रकाश डाला और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से क्रोध प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, कृतज्ञता एवं सकारात्मक सोच के व्यावहारिक पहलुओं को समझाया, तथा भूमिका निर्वहन, समूह गतिविधियों तथा संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन कौशल विकसित करने की प्रेरणा भी दी।
कुलसचिव डॉ. मंगल सिंह मंद्रवाल ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित करते हुए कहा कि जीवन में सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास सफलता की आधारशिला हैं। संचालन करते हुए डॉ. ललित तिवारी ने कहा कि विचारों की दिशा ही जीवन की दिशा निर्धारित करती है। इस अवसर पर डॉ. नवीन पांडे, डॉ. प्रभा पंत, डॉ. हेम जोशी, डॉ. संदीप मंडोली, डॉ. सीता, डॉ. उजमा सहित वंदना, दिशा, पिंकी दानी, कुंदन व अजय सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
4. हिमालयी मत्स्य पालन पर मंथन: स्नो ट्राउट के संरक्षण पर जोर
प्राणी विज्ञान विभाग द्वारा ‘रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम’ (RAS) विषय पर एक विशेष जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में हिमालयी क्षेत्र की मूल प्रजाति ‘स्नो ट्राउट’ के संरक्षण और रेनबो ट्राउट की व्यावसायिक संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। डीसीएफआरआई भीमताल के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुरेश चंद्रा ने मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीकों और महाशीर जैसी स्थानीय प्रजातियों के महत्व पर प्रकाश डाला। परिसर निदेशक प्रो. नीता बोरा शर्मा और विभागाध्यक्ष प्रो. हरीश चंद्र सिंह बिष्ट ने इस प्रकार के आयोजनों को अनुसंधान और आजीविका की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















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