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लगातार दूसरे वर्ष बिना शोभायात्रा के माता नंदा-सुनंदा को दी भाव विह्वल तरीके से विदाई

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-कोविड की परिस्थितियों का हवाला देते हुए नयना मंदिर परिसर से ही किया गया विसर्जित

माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियों के विसर्जन के मौके पर उपस्थित श्रद्धालुओं का हुजूम।

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 17 सितंबर 2021। यह मां को सप्ताह भर के प्रवास के बाद विदाई देने के क्षण थे। हजारों लोगों द्वारा किए गए दर्शनों एवं कई भावविह्वल हुई नम आंखों के साथ माता नंदा-सुनंदा को उनके मायके के रूप में माता नयना की नगरी से विदाई दे दी है। अपराह्न करीब 3 बजे मूर्तियों की सजावट के अतिरिक्त मूर्तियों के निर्माण में प्रयुक्त कदली दल आदि ईको-फ्रेंडली अवयवों को लगातार दूसरे वर्ष परंपरागत शोभायात्रा की जगह नयना देवी के मंदिर से ही नैनी सरोवर में विसर्जित किया गया। इस दौरान प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अशोक की धर्मपत्नी अलकनंदा अशोक एवं संयुक्त मजिस्ट्रेट भी माता की विदाई के पलों के गवाह बने। यह लगातार दूसरे वर्ष था, जब कोविड-19 का हवाला देते हुए माता की शोभायात्रा नहीं निकली, अलबत्ता मंदिर में श्रद्धालुओं का भारी संख्या में जमावड़ा रहा। लोगों में माता के दर्शनों से अधिक फोटो खींचने की होड़ भी दिखी।

इससे पूर्व ठीक 12 बजे माता नयना देवी मंदिर में सजे मंडप से मूर्तियों को विदाई के धार्मिक अनुष्ठान के बाद मंदिर के प्रांगण में स्थापित मंच पर लाया गया। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु, खासकर महिलाएं माता के दर्शनों के लिए मंदिर परिसर में एकत्र हो गए थे। आयोजक संस्था के सदस्यों एवं महोत्सव में बरसों से जुड़े स्वयं सेवकों में भी माता के दर्शनों का अत्यधिक उत्साह था। ऐसे में मंदिर में परिसर में भारी भीड़ के बीच सभी श्रद्धालुओं को दर्शन का मौका देने के लिए मूर्तियों के विसर्जन के लिए तीन बजे तक का समय रखा गया, और तीन बजे मूर्तियों को मंच के पास से ही नैनी सरोवर में विसर्जित कर दिया गया। 

इस मौके पर पंडित भगवती प्रसाद जोशी, ने आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के अध्यक्ष मनोज साह, महासचिव जगदीश बवाड़ी, गिरीश जोशी, हिमांशु जोशी, कमलेश ढोंढियाल, देंवेंद्र लाल साह, डा. मनोज बिष्ट, चंदन जोशी, भीम सिंह कार्की, कैलाश जोशी, डा. ललित तिवारी, डा. सरस्वती खेतवाल, विकास जोशी, शैलेंद्र चौधरी के साथ नगर कोतवाल अशोक कुमार सिंह, एसएसआई कश्मीर सिंह, सोनू बाफिला सहित अनेक लोग व्यवस्थाओं में जुटे रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

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डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 17 सितंबर 2021। एक शताब्दी से पुराना और अपने ११०वें वर्ष में प्रवेश कर रहा सरोवरनगरी का नंदा महोत्सव आज अपने चरम पर है। पिछली शताब्दी और इधर तेजी से आ रहे सांस्कृतिक शून्यता की ओर जाते दौर में भी यह महोत्सव न केवल अपनी पहचान कायम रखने में सफल रहा है, वरन इसने सर्वधर्म संभाव की मिशाल भी पेश की है। पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी यह देता है, और उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं व गढ़वाल अंचलों को भी एकाकार करता है। यहीं से प्रेरणा लेकर कुमाऊं के विभिन्न अंचलों में फैले मां नंदा के इस महापर्व ने देश के साथ विदेश में भी अपनी पहचान स्थापित कर ली है।

इस मौके पर मां नंदा सुनंदा के बारे में फैले भ्रम और किंवदंतियों को जान लेना आवश्यक है। विद्वानों के इस बारे में अलग अलग मत हैं, लेकिन इतना तय है कि नंदादेवी, नंदगिरि व नंदाकोट की धरती देवभूमि को एक सूत्र में पिरोने वाली शक्तिस्वरूपा मां नंदा ही हैं। यहां सवाल उठता है कि नंदा महोत्सव के दौरान कदली वृक्ष से बनने वाली एक प्रतिमा तो मां नंदा की है, लेकिन दूसरी प्रतिमा किन की है। सुनंदा, सुनयना अथवा गौरा पार्वती की। एक दंतकथा के अनुसार मां नंदा को द्वापर युग में नंद यशोदा की पुत्री महामाया भी बताया जाता है जिसे दुष्ट कंश ने शिला पर पटक दिया था, लेकिन वह अष्टभुजाकार रूप में प्रकट हुई थीं। त्रेता युग में नवदुर्गा रूप में प्रकट हुई माता भी वह ही थी। यही नंद पुत्री महामाया नवदुर्गा कलियुग में चंद वंशीय राजा के घर नंदा रूप में प्रकट हुईं, और उनके जन्म के कुछ समय बाद ही सुनंदा प्रकट हुईं। राज्यद्रोही शडयंत्रकारियों ने उन्हें कुटिल नीति अपनाकर भैंसे से कुचलवा दिया था। उन्होंने कदली वृक्ष की ओट में छिपने का प्रयास किया था लेकिन इस बीच एक बकरे ने केले के पत्ते खाकर उन्हें भैंसे के सामने कर दिया था। बाद में यही कन्याएं पुर्नजन्म लेते हुए नंदा-सुनंदा के रूप में अवतरित हुईं और राज्यद्रोहियों के विनाश का कारण बनीं।

विभिन्न वर्षों की नंदा-सुनंदा की मूर्तियों का दर्शन यहाँ एक स्थान पर :

इसीलिए कहा जाता है कि सुनंदा अब भी चंदवंशीय राजपरिवार के किसी सदस्य के शरीर में प्रकट होती हैं। इस प्रकार दो प्रतिमाआंे में एक नंदा और दूसरी सुनंदा हैं। अन्य किंवदंती के अनुसार एक मूर्ति हिमालय क्षेत्र की आराध्य देवी पर्वत पुत्री नंदा एवं दूसरी गौरा पार्वती की हैं। इसीलिए प्रतिमाओं को पर्वताकार बनाने का प्रचलन है। माना जाता है कि नंदा का जन्म गढ़वाल की सीमा पर अल्मोड़ा जनपद के ऊंचे नंदगिरि पर्वत पर हुआ था। गढ़वाल के राजा उन्हें अपनी कुलदेवी के रूप में ले आऐ थे, और अपने गढ़ में स्थापित कर लिया था। इधर कुमाऊं में उन दिनों चंदवंशीय राजाओं का राज्य था। १५६३ में चंद वंश की राजधानी चंपावत से अल्मोड़ा स्थानांतरित की। इस दौरान १६७३ में चंद राजा कुमाऊं नरेश बाज बहादुर चंद (१६३८ से १६७८) ने गढ़वाल के जूनागढ़ किले पर विजय प्राप्त की और वह विजयस्वरूप मां नंदा की मूर्ति को डोले के साथ कुमाऊं ले आए। कहा जाता है कि इस बीच रास्ते में राजा ने गरुड़ बागेश्वर मार्ग के पास स्थित डंगोली गांव में रात्रि विश्राम के लिए रुके। दूसरी सुबह जब विजयी राजा का काफिला अल्मोड़ा के लिए चलने लगा तो मां नंदा की मूर्ति आश्चर्यजनक रूप से दो भागों में विभक्त मिली। इस पर राजा ने मूर्ति के एक हिस्से को वहीं ‘कोट भ्रामरी’ नामक स्थान पर स्थापित करवा दिया, जो अब ‘कोट की माई’ के नाम से जानी जाती हैं।

अल्मोड़ा लाई गई दूसरी मूर्ति को अल्मोड़ा के मल्ला महल स्थित देवालय (वर्तमान जिलाधिकारी कार्यालय) के बांऐ प्रकोष्ठ में स्थापित कर दिया गया। इस प्रकार विद्वानों के अनुसार मां नंदा चंद वंशीय राजाओं के साथ संपूर्ण उत्तराखंड की विजय देवी थीं। कुछ विद्वान उन्हें राज्य की कुलदेवी की बजाय शक्तिस्वरूपा मां के रूप में भी मानते हैं। उनका कहना है कि चंदवंशीय राजाओं की पहली राजधानी में मां नंदा का कोई मंदिर न होना सिद्ध करता है कि वह उनकी कुलदेवी नहीं थीं वरन विजय देवी व आध्यात्मिक दृष्टि से आराध्य देवी थीं। चंदवंशीय राजाओं की कुलदेवी मां गौरा पार्वती को माना जाता है। कहते हैं कि जिस प्रकार गढ़वाल नरेशों की राजगद्दी भगवान बदरीनाथ को समर्पित थी, उसी प्रकार कुमाऊं नरेश चंदों की राजगद्दी भगवान शिव को समर्पित थी, इसलिए चंदवंशीय नरेशों को ‘गिरिराज चक्र चूढ़ामणि’ की उपाधि भी दी गई थी। इस प्रकार गौरा उनकी कुलदेवी थीं, और उन्होंने अपने मंदिरों में बाद में जीतकर लाई गई नंदा और गौरा को राजमंदिर में साथ-साथ स्थापित किया। अपनी पुस्तक कल्चरल हिस्ट्री आफ उत्तराखंड के हवाले से प्रो. रावत ने बताया कि सातवीं शताब्दी में बद्रीनाथ के बामणी गांव से नंदा देवी महोत्सव की शुरूआत हुई, जो फूलों की घाटी के घांघरिया से होते हुए गढ़वाल पहुंची। तब गढ़वाल 52 गण पतियों (सूबों) में बंटा हुआ था। उनमें चांदपुर गढ़ी के शासक कनक पाल सबसे शक्तिशाली थे। उन्होंने ही सबसे पहले गढ़वाल में नंदा देवी महोत्सव शुरू किया। प्रो. रावत बताते हैं कि आज भी बामणी गांव में मां नंदा का महोत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

वर्तमान नंदा महोत्सवों के आयोजन के बारे में कहा जाता है कि पहले यह आयोजन चंद वंशीय राजाओं की अल्मोड़ा शाखा द्वारा होता था, किंतु १९३८ में इस वंश के अंतिम राजा आनंद चंद के कोई पुत्र न होने के कारण तब से यह आयोजन इस वंश की काशीपुर शाखा द्वारा आयोजित किया जाता है, जिसका प्रतिनिधित्व वर्तमान में नैनीताल सांसद केसी सिंह बाबा करते हैं। नैनीताल की स्थापना के बाद वर्तमान बोट हाउस क्लब के पास नंदा देवी की मूल रूप से स्थापना की गई थी, १८८० में यह मंदिर नगर के विनाशकारी भूस्खलन की चपेट में आकर दब गया, जिसे बाद में वर्तमान नयना देवी मंदिर के रूप में स्थापित किया गया। यहां मूर्ति को स्थापित करने वाले मोती राम शाह ने ही १९०३ में अल्मोड़ा से लाकर नैनीताल में नंदा महोत्सव की शुरुआत की। शुरुआत में यह आयोजन मंदिर समिति द्वारा ही आयोजित होता था। १९२६ से यह आयोजन नगर की सबसे पुरानी धार्मिक सामाजिक संस्था श्रीराम सेवक सभा को दे दिया गया, जो तभी से लगातार दो दो विश्व युद्धों के दौरान भी बिना रुके सफलता से और नए आयाम स्थापित करते हुए यह आयोजन कर रही है। यहीं से प्रेरणा लेकर अब कुमाऊं के कई अन्य स्थानों पर भी नंदा महोत्सव के आयोजन होने लगे हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

मजबूत कलापक्ष है पूरी तरह ईको फ्रेंडली सुंदर नंदा-सुनंदा का राज

-कभी चांदी से बनाई जाती थीं मूर्तियां, ५० के दशक में मूर्तियों के चेहरे की मुस्कुराहट आज भी की जाती है याद
-१९०३ से लगातार बीच में दो विश्व युद्धों के दौरान भी जारी रहते हुऐ 119 वर्षों से यहां जारी है महोत्सव
डॉ. नवीन जोशी, नैनीताल। नयना की नगरी नैनीताल में माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियां पूरे प्रदेश में सबसे सुंदर तरीके से बनती हैं। इसका कारण यहां मूर्ति निर्माण में कलापक्ष पर अधिक ध्यान दिया जाना है। साथ ही यहां आयोजक संस्था हमेशा बेहतरी के लिये बदलावों को स्वीकार करने को तैयार रहती है। इसी कारण बीते कुछ वर्षों से नंदा-सुनंदा की मूर्तियां पूरी तरह ईको-फ्रेडली यानी पर्यावरण-मित्र पदार्थों से तैयार की जाती हैं। जबकि यहां एक दौर में चांदी की मूर्तियां बनाए जाने का इतिहास भी रहा है।

उल्लेखनीय है कि नैनीताल को अल्मोड़ा के साथ ही प्रदेश के अनेक स्थानों पर आयोजित होने वाले नंदादेवी महोत्सवों का प्रणेता कहा जाता है। यहां १९०३ से लगातार बीच में दो विश्व युद्धों के दौरान भी जारी रहते हुऐ 119 वर्षों से महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इधर राज्य के अनेक नगरों में यह आयोजन होने लगे हैं, बावजूद नैनीताल की मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियां अल्मोड़ा सहित अन्य सभी नगरों से सुंदर होती हैं। पूर्व में यहां भी परंपरागत मूर्तियां ही बनती थीं। १९४५ के दौरान से यहां बदलाव आने लगे, ५० में शारदा संघ के संस्थापक कलाप्रेमी बाबू चंद्र लाल साह व कला मंदिर फोटोशॉप के स्वामी मूलचंद की जुगलबंदी के बाद यहां मूर्तियां सुंदर बनाई जाने लगीं। १९५५-५६ तक नंदा देवी की मूर्तियांे का निर्माण चांदी से होता था। लेकिन बाद में वापस परंपरागत परंतु अधिक सुंदर मूर्तियां बनने लगीं। वरिष्ठ कलाकार चंद्र लाल साह १९७१ तक मूर्तियों का निर्माण करते रहे, और इस दौरान माता के चेहरे पर दिखने वाली मुस्कुराहट को लोग अब भी याद करते हैं। बाद में स्थानीय कलाकारों ने मूर्तियों को सजीव रूप देकर व लगातार सुधार किया, जिसके परिणाम स्वरूप नैनीताल की नंदा सुनंदा की मूर्तियां, महाराष्ट्र के गणपति बप्पा जैसी ही जीवंत व सुंदर बनती हैं।

खास बात यह भी कि मूर्तियों के निर्माण में पूरी तरह कदली वृक्ष के तने, पाती, कपड़ा, रुई व प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग किया जाता है। बीते करीब एक दशक से थर्मोकोल का सीमित प्रयोग भी बंद कर दिया गया है, जिसके बाद महोत्सव पूरी तरह ‘ईको फ्रेंडली’ भी हो गया है। पूर्व में यहां भी परंपरागत मूर्तियां ही बनती थीं। १९४५ के दौरान से यहां बदलाव आने लगे, ५० में शारदा संघ के संस्थापक कलाप्रेमी बाबू चंद्र लाल साह व कला मंदिर फोटोशॉप के स्वामी मूलचंद की जुगलबंदी के बाद यहां मूर्तियां सुंदर बनाई जाने लगीं। १९५० से गंगा प्रसाद साह भी इससे जुड़े। ५५-५६ में उन्होंने चांदी की मूर्तियों का भी प्रयोग किया, लेकिन बाद में वापस परंपरागत परंतु अधिक सुंदर मूर्तियां बनने लगीं। चंद्र लाल साह १९७१ तक मूर्तियों का निर्माण करते रहे, और इस दौरान माता के चेहरे पर दिखने वाली मुस्कुराहट को लोग अब भी याद करते हैं।हर वर्ष मूर्तियां समान आकार की बनें इस हेतु भी खास ध्यान रखा जाता है। गत वर्षों की मूर्ति के कपड़े को देखकर भी मूर्ति बनाई जाती है। बेहतर स्वरूप के लिये मां के चेहरे में कपड़े के भीतर परिवर्तन किया गया है। साथ ही मां के चेहरे को मुस्कुराहट लिए हुए बनाने की कोशिश की गई है, इससे मां की सुंदरता देखते ही बन रही है। बीते वर्षों तक दिवंगत कलाकार ठाकुर दास साह पर मूर्तियों का जिम्मा होता था। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

मां नयना की नगरी में होती है मां नंदा की ‘लोक जात’

-यहां राज परिवार का नहीं होता आयोजन में दखल, जनता ने ही की शुरुआत, जनता ही बढ़चढ़ कर करती है प्रतिभाग
डॉ. नवीन जोशी, नैनीताल। प्रदेश में चल रही मां नंदा की ‘राज जात’ से इतर मां नयना की नगरी नैनीताल में माता नंदा-सुनंदा की श्लोक जातष् का आयोजन किया जाता है। अमूमन १२ वर्षों के अंतराल में आयोजित होने वाली श्राज जातष् के इतर सरोवरनगरी में 119 वर्षों से हर वर्ष अनवरत, प्रथम व द्वितीय दो विश्व युद्ध होने के बावजूद बिना किसी व्यवधान के न केवल यह महोत्सव जारी है, वरन हर वर्ष समृद्ध भी होता जा रहा है। बिना राज परिवार द्वारा शुरू किए जनता द्वारा ही शुरू किए गए और जनता की ही सक्रिय भागेदारी से आयोजित होने वाले इस महोत्सव को आयोजक भी मां नंदा की ‘लोक जात’ मानते हैं।

उल्लेखनीय है कि नैनीताल में कुमाऊं -गढ़वाल को एक सूत्र में पिरोने वाली मां नंदा का महोत्सव १९०३ से लगातार बीच में दो विश्व युद्धों के दौरान भी जारी रहते हुऐ 119 वर्षों से अनवरत जारी है। यहां के बाद ही प्रदेश के अनेक स्थानों पर नंदादेवी महोत्सवा आयोजित हुए हैं, लिहाजा नैनीताल को नंदा महोत्सवों का प्रणेता भी कहा जाता है। सरोवरनगरी में नंदा महोत्सव की शुरुआत नगर के संस्थापकों में शुमार मोती राम शाह ने १९०३ में अल्मोड़ा से लाकर की थी। शुरुआत में यह आयोजन मंदिर समिति द्वारा ही आयोजित होता था, १९२६ से इस आयोजन का दायित्व नगर की सबसे पुरानी धार्मिक सामाजिक संस्था श्रीराम सेवक सभा को मिला, जिसके साथ यह आयोजन लगातार दो विश्व युद्धों के दौरान भी बिना रुके सफलता से और नए आयाम स्थापित करते हुए यह आयोजन कर रही है।

महोत्सव में दो कदली वृक्ष काटकर प्रयोग किये जाते हैं तो इनके बदले २१ फलदार वृक्ष रोपने की परंपरा वर्ष १९९८ से पर्यावरण मित्र वाईएस रावत के सुझाव पर चल रही है। वर्ष २००७ से तल्लीताल दर्शन घर पार्क से मां नंदा के साथ नैनी सरोवर की आरती की एक नई परंपरा भी जुड़ी है, जो प्रकृति से मेले के जुड़ाव का एक और आयाम है। वर्ष २०११ से मेले की अपनी वेबसाइट के जरिऐ देश दुनिया तक सीधी पहुंच भी बन गई है। वर्ष २०१२ में पशु बलि की जगह नारियल चढ़ाने की परंपरा में भी बदलाव किया गया है। यहीं से प्रेरणा लेकर कुमाऊं के विभिन्न अंचलों में फैले मां नंदा के इस महापर्व ने देश के साथ विदेश में भी अपनी पहचान स्थापित कर ली है। शायद इसी लिए यहां का महोत्सव जहां प्रदेश के अन्य नगरों के लिए प्रेरणादायी साबित हुआ है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : ‘जय मां नंदे जग हितकारी, जयति पार्वती शैल कुमारी’

-नंदा महोत्सव पर नंदा चालीसा से हुआ राज्य की ईष्ट देवी का गुणगान
डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 16 सितंबर 2021। ‘जय नंदा जय पार्वती, जय गिरिराज कुमारि, जय महिषासुर मर्दनी, चंड मुंड असुरारि, जय मां नंदे जग हितकारी, जयति पार्वती शैल कुमारी, रूप अनेक तुम्हारे छाऐ, उन सबको हम शीष नवाऐं…’ बृजलाल शाह द्वारा रचित नंदा चालीसा के इन बोलों से बृहस्पतिवार को सरोवरनगरी गुंजायमान रही। मौका था नंदा महोत्सव के तहत नयना देवी मंदिर में आयोजित नंदा चालसा के पाठ का। इस दौरान गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीराम चरित मानस के सुंदर कांड का पाठ, महाभगवती पूजन, पंच आरती एवं देवी भोग के धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित हुऐ। महोत्सव के दौरान रोशनी की लड़ियों से सजे नयना देवी मंदिर का नजारा देखते ही बन रहा है।

सुबह कार्यक्रमों की शुरूआत महाभगवती पूजन से हुई। दोपहर बाद दो बजे से गीत एवं नाटक प्रभाग एवं आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा से जुड़े कैलाश जोशी, विमल चौधरी, भीम सिंह कार्की, मुकुल जोशी, सुमन साह, मंजू रौतेला, बबली, पार्वती बिष्ट, प्रभा चौधरी, श्रद्धा गुरुरानी, दीपा जोशी, भूपेंद्र, मोहित साह, किरन त्रिपाठी, बीना जोशी, भुवन बिष्ट, राजेंद्र बजेठा व गोपेश बिष्ट आदि की अगुवाई में नंदा चालीसा व सुंदर कांड का पाठ हुआ। इससे पूर्व सुबह तड़के से ही मंदिर में पूजा-पाठ प्रारंभ हो गए थे। इससे पूर्व श्री राम सेवक सभा के प्रबंधक राजेंद् बजेठा व अधिवक्ता पीयूष गर्ग रात्रि पूजन में शामिल हुए।

उधर महोत्सव के प्रो.ललित तिवारी, हेमंत बिष्ट, मीनाक्षी कीर्ति, डॉ.नवीन पांडे तथा डॉ.मोहित सनवाल के संचालन में आयोजित सीधे प्रसारण में पर्यावरण प्रेमी यशपाल रावत व एडीएम हरबीर सिंह, मूर्ति निर्माण के लोक पारंपरिक कलाकार चंद्र प्रकाश साह, हरीश पंत, गोधन सिंह, हीरा प्रसाद साही, सागर सोनकर व कुंदन नेगी ने मूर्तियों के निर्माण और लोक परंपरा पर, प्रो.शेखर पाठक ने उत्तराखंड की संस्कृति और उनके पर्यावरणीय संवेदनाओं पर, छायाकार हिमांशु जोशी ने नंदा राज जात यात्रा पर प्रकाश डाला। इसके अलावा रामसेवक सभा के पदाधिकारी और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता, वर्तमान में दिल्ली में रहने वाली नगर की डिंपल जोशी व डीएसबी परिसर की पूर्व छात्रा ज्योति कांडपाल भी सीधा प्रसारण में शामिल हुईं।

वहीं शाम को होने वाली पंचआरती आचार्य पंडित भगवती प्रसाद जोशी द्वारा कराई गई। इस मौके पर कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके जोशी सपरिवार व एसएसपी प्रीति प्रियदर्शिनी शामिल हुए। इधर मंदिर में मां नंदा सुनंदा की कदली वृक्षों से बनी पर्वताकार मूर्तियों के दर्शनों को श्रद्धालुओं के दर्शन करने का क्रम लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। इसके साथ ही माता को शुक्रवार को विदा करने की तैयारियां भी प्रारंभ हो गई हैं। बताया गया कि दोपहर 12 बजे डोला विसर्जन मां नैना देवी परिसर में होगा। वहीं सीधा प्रसारण के माध्यम से भजन के कार्यक्रम कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए जाएंगे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

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डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 15 सितंबर 2021। सरोवरनगरी में आयोजित हो रहे 119वें श्री नंदादेवी महोत्सव के तहत महानवमी के अवसर पर विश्व शांति हेतु हवन यज्ञ एवं कन्या पूजन के कार्यक्रम आयोजित हुई। हवन यज्ञ में पंडित भगवती प्रसाद जोशी यजमान की भूमिका में रहे तथा पूजन आचार्य दीप जोशी द्वारा किया गया। जबकि नवदुर्गा के रूप में कन्या पूजन में डॉ. सरस्वती खेतवाल एवं राजेश खेतवाल यजमान की भूमिका में रहे। वहीं सांयकालीन पंच आरती पंडित भगवती प्रसाद जोशी द्वारा मां भगवती की आराधना की गई। पंच आरती में पुलिस उपमहानिरीक्षक डॉ.नीलेश आनंद भरणे व एडीएम हरबीर सिंह भी शामिल हुए। इससे पूर्व अष्टमी की रात्रि पूजन में भीम सिंह कार्की, राजेंद्र मेहरा व करण साह शामिल हुए।

दूसरी ओर महोत्सव के सीधा प्रसारण में अन्य स्थानों के साथ पंडित केसी सुयाल, बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केएस धामी, डॉ. एमएस दुग्ताल, डॉ. एमएस रावत, डॉ. मंजू रावत, डॉ.कंचन आर्या, डॉ. देवेंद्र, एडीएम हरबीर सिंह आदि ने विविध विषयों में बात रखी। सीधा प्रसारण में प्रो.ललित तिवारी, मीनाक्षी कीर्ति, डॉ.नवीन पांडे और मुकेश जोशी मंटू शामिल रहे।

यहां मां नंदा के महोत्सव में चढ़ती हैं, और प्रसाद में मिलती हैं 500 ग्राम वजनी पूड़ियां

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 15 सितंबर 2021। आदि शक्ति स्वरूपा मां नंदा भगवती का महोत्सव प्रदेश में कई स्थानों पर मनाया जा रहा है। आज हम आपको माता नंदा भगवती के शक्तिपीठ पोथिंग लिए चलते हैं। यहां हर तीसरे वर्ष इस अवसर पर आठौं पूजा आयोजित की जाती है। बागेश्वर जनपद के कपकोट विकासखंड के पोथिंग गांव में इस मौके पर सुबह से ही माता भगवती के मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है। उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से लोग हजारों की संख्या में मां के धाम में पहुंचते हैं, और सुख-समृद्धि और कुशलता की कामना करते हैं, और माता को घंटे-घड़ियाल, भकोरे, चुनरी, निशाण, ढोल-नगाड़े अर्पित करते हैं। इस मौके पर गांव की विवाहित बेटियां भी अपने मायके की आराध्य मां नंदा के धाम में आकर पूजा-अर्चना करती हैं। शाम को डिकर सेवाने की पवित्र और भावपूर्ण रस्म अदा की जाती है। इस दौरान श्रद्धालु मां नंदा माई को नम आंखों से विदाई देते हैं। इसके बाद माता के मंदिर में बनने वाली करीब 500 ग्राम वजनी पूड़ियां माता को चढ़ाई जाती हैं, और ये ही श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप वितरित की जाती हैं। इन मोटी वजनी पूड़ियों को लेने के लिए यहां श्रद्धालुओं में सबसे खास उत्साह रहता है।

इससे पहले मंदिर में सप्तमी की पूरी रात्रि श्रद्धालु माता के मंदिर के प्रांगण में पारम्परिक लोकनृत्य गीत झोड़ा-चांचरी गाकर अपना और दर्शकों का मनोरंजन करते हैं। खासकर महिलाएं इस मौके पर पारम्परिक कुमाउनी परिधानों में बढ़-चढ़कर अपनी सहभागिता करती हैं। इस दौरान ग्रामीण मेला भी लगता है, और ग्रामीण इसमें खरीददारी करते हैं। इस वर्ष आयोजन में पूर्व विधायक शेर सिंह गड़िया, ललित फर्स्वाण, बसंती देव, गोविंद दानू, सुरेश गड़िया, सामाजिक कार्यकर्ता विनोद गड़िया, राम सिंह, हरीश जोशी, भूपेश गड़िया, प्रकाश योगाचार्य, कमलेश गड़िया, महेश बिष्ट, संतोष बिष्ट आदि ने पूजा को सम्पन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : विश्व की शांति व कल्याण तथा श्रद्धालुओं की मनाकामनाएं पूरी करने को प्रकट हुईं माता नंदा-सुनंदा

-लाखों लोगों ने प्रत्यक्ष एवं लाइव प्रसारण के माध्यम से किए माता नंदा-सुनंदा के दर्शन

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 14 सितंबर 2021। माता नयना की नगरी यानी अपने मायके में आई माता नंदा-सुनंदा मंगलवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में सुंदर प्राकृत-पर्वताकार मूर्तियों के रूप प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत भक्तों को दर्शन एवं उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए प्रकट हो गईं। सुबह से ही सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियों के दर्शन कर भाव-विभोर होते हुए माता के जयकारे लगाते रहे। मंदिर में दर्शनों का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए।

इससे पूर्व सोमवार मध्य रात्रि से पूर्व ही माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियों को वस्त्र आदि आभूषण पहनाकर नयना देवी के मंदिर में स्थापित कर दिया गया था। इसके बाद रात्रि करीब दो बजे से आचार्य भगवती प्रसाद जोशी के प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम प्रारंभ हुए। इस दौरान पुण्यावाचन, कलश स्थापन, माता का श्रृंगार एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विश्व शांति व कल्याण की कामना की गई। इस दौरान महिलाओं ने भजन-कीर्तन भी प्रारंभ कर दिए थे। सुबह करीब पौने पांच बजे माता ने प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत श्रद्धालुओं को दर्शन दिये तो लोग माता के साक्षात से दर्शन पाकर अभिभूत हो गए। इसके बाद मंदिर में दर्शनों का सिलसिला प्रारंभ हो गया।

श्रद्धालुओं द्वारा लाया गया प्रसाद माता के मंडल में छुवा कर प्रसाद स्वरूप लौटाया गया। लोगों ने नारियल चढ़ाए, जिन्हें मंदिर में काटकर श्रद्धालुओं को लौटाया गया। कुछ लोग अपनी आस्था के साथ बकरों को भी मंदिर में लेकर आए, लेकिन उन्हें बिना पूजा किए लौटा दिया गया। उधर सेवा समिति भवन से नवीन पांडे डॉ. ललित तिवारी, हेमंत बिष्ट व मीनाक्षी कीर्ति के संचालन में महोत्सव का इंटरनेट एवं स्थानीय टीवी चैनलों तथा मंदिर के बाहर, मल्लीताल श्रीराम सेवक सभा, तल्लीताल गांधी चौक व मल्लीताल रिक्शा स्टेंड आदि स्थानों पर बड़ी स्क्रीनों के माध्यम से लाइव प्रसारण किया गया।

इससे देश-दुनिया में भी लोग महोत्सव का सीधा प्रसारण एवं विशेषज्ञों से वार्ता देख व सुन पाए। सभा के अध्यक्ष मनोज साह, महासचिव जगदीश बवाड़ी, पूर्व अध्यक्ष मुकेश जोशी, विमल चौधरी, भीम सिंह कार्की, मुकुल जोशी, अनिल बिनवाल व कैलाश जोशी आदि वरिष्ठ कार्यकर्ता महोत्सव की व्यवस्थाओं में जुटे रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

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डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 13 सितंबर 2021। माता नयना की नगरी यानी अपने मायके में आई माता नंदा-सुनंदा की सुंदर प्राकृत-पर्वताकार मूर्तियां माता नयना के मंदिर में स्थापित मंडप में विराज गई हैं। अलबत्ता, मंगलवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत ही वह देवी के रूप में पूजी जाएंगी।

हम ‘नवीन समाचार’ पर सबसे पहले माता नंदा-सुनंदा के मंडप में विराजे स्वरूप के दर्शन अपने पाठकों को करा रहे हैं। यहां यह जानकारी देना भी महत्वपूर्ण है कि हमारे पाठक सुबह ब्रह्म मुहूर्त में माता नंदा-सुनंदा के दर्शन घर बैठे ‘नवीन समाचार’ पर लाइव कर सकेंगे। इसके लिए नवीन समाचर के शीर्ष पर नंदा देवी महोत्सव का लाइव प्रसारण चलता रहेगा। साथ ही इसे इस पोस्ट पर भी देखा जा सकेगा। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : कदली दलों से प्राकृत पर्वताकार छवि में सजीं माता नंदा-सुनंदा, अब दर्शनों का इंतजार

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 13 सितंबर 2021। नैनीताल में 119वें नंदा देवी महोत्सव के लिए मंगलवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में दर्शन देने के लिए सोमवार को पूरे दिन माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियों के भव्य व सुंदर प्राकृत पर्वताकार स्वरूप में निर्माण का कार्य किया गया। मूर्ति निर्माण में संयोजक चंद्र प्रकाश साह के नेतृत्व में हरीश पंत, कुंदन नेगी, गोधन सिंह, हीरा नेगी, किशन गरुुरानी, गोविंद सिंह मोनिका साह, आरती सम्मल, कल्याणी व मेघा बिष्ट आदि लोग सुबह से ही जुटे रहे।

जबकि दूसरी ओर नयना देवी मंदिर परिसर में गिरीश जोशी, घनश्याम साह, किसन नेगी व हिमांशु जोशी आदि की अगुवाई में मंडप निर्माण का कार्य पूरा हुआ। इसके अलावा आज माता के दर्शन कराने के लिए स्टूडियो से सीधा प्रसारण एवं विभिन्न विषयों पर पर्यावरण सहित धार्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर विशेषज्ञों से चर्चाएं कराने के लिए प्रबंध पूरे किए गए। पुलिस ने भी सुबह से ही मंदिर में मोर्चा संभाल लिया।

प्रशासन की ओर से गेट निर्माण, जगह-जगह सामाजिक दूरी बनाए रखने के संदेश युक्त होर्डिंग एवं माता के दर्शनों के लिए तल्लीताल, श्री राम सेवक सभा भवन मल्लीताल व मंदिर के समीप चार्ट पार्क बड़ी स्क्रीन लगाने का कार्य भी किया गया। उल्लेखनीय है कि पूर्व में स्वर्गीय रमेश चौधरी, सुंदर लाल साह, ठाकुर दास साह व गंगा प्रसाद साह द्वारा मूर्ति निर्माण में निरंतर नए प्रयोग करते हुए माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियों को आकर्षक स्वरूप देने में बड़ा योगदान रहा है।

हल्द्वानी में भी आयोजित होगा नंदा देवी महोत्सव
नैनीताल। मां नंदा सुनंदा का महोत्सव अब हल्द्वानी के रामलीला मैदान में भी आयोजित होगा। सोमवार को नंदा-सुनंदा इंटरनेशनल ट्रस्ट हल्द्वानी के अध्यक्ष समीर आर्य, पंकज जायसवाल, दीपक खत्री, लीला कांडपाल, प्रशांत नेगी, अल्का जीना, कैलाश भट्ट, दीपक जोशी व लाखन सिंह नैनीताल पहुंचे और हल्द्वानी रामलीला मैदान में पहली बार मां नंदा सुनंदा का उत्सव मनाने की इच्छा जताई। श्री राम सेवक सभा नैनीताल, मां नंदा देवी अमर उदय ट्रस्ट के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने हल्द्वानी से आए दल का स्वागत किया और सभी को चुन्निया पहनाकर उनका स्वागत किया। आचार्य भगवती प्रसाद जोशी ने पूजन संपन्न किया और उन्हें अखंड ज्योति प्रदान की। जिसे लेकर दल हल्द्वानी को रवाना हुआ। उन्होंने बताया कि कल से मां नंदा सुनंदा का महोत्सव हल्द्वानी में भी प्रथम बार होगा। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

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डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 12 सितंबर 2021। प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर आयोजित होने वाले, प्रदेश की कुलदेवी माता नंदा देवी के महोत्सव के प्रणेता नैनीताल में 119वें नंदा देवी महोत्सव के लिए माता नंदा-सुनंदा एक वर्ष के अंतराल व इंतजार के बाद कदली स्वरूप में नगर में लौट आई हैं। रविवार को ज्योलीकोट के निकटवर्ती ग्राम सड़ियाताल स्थित टपकेश्वर मंदिर शिवालय के पास से चिन्हित दो कदली दलों को पूर्व विधायक सरिता आर्या व जया बिष्ट आदि द्वारा रवाना किया गया। आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के सदस्यों का दल वाहन से माता नयना की नगरी में ले कर पहुंचा। इस दौरान धार्मिक कार्यक्रमों में शुभ मानी जाने वाली बारिश की बौछारें भी पड़ती रहीं। इसे महोत्सव के शुभ होने का संकेत माना जा रहा है। इस दौरान लोग माता नंदा-सुनंदा के जयकारे भी लगाते रहे। देखें वीडियो:

यहां पहले तल्लीताल स्थित मां वैष्णवी देवी मंदिर में मारुति नंदन साह, ममता रावत, डॉ. सरस्वती खेतवाल व सूखाताल में सावित्री साह, विक्रम साह, गोपाल रावत, विक्रम साह, रीतेश साह व गोपाल कार्की आदि ने कदली दलों की पारंपरिक पूजा-अर्चना की गई। यह महोत्सव के बीच में हुए दो विश्वयुद्धों के बावजूद 119वर्षों के ज्ञात इतिहास में दूसरा मौका है, जब कदली दलों को भव्य शोभायात्रा की जगह वाहन में नगर भ्रमण कर नयना देवी मंदिर में लाया गया है।

मां नंदा देवी परिसर में पहुंचने पर सभा के अध्यक्ष मनोज साह, महासचिव जगदीश बवाड़ी तथा अन्य सदस्यों द्वारा स्वागत एवम पूजन किया गया। यहां अब मूर्ति निर्माण समिति के संयोजक चन्द्र प्रकाश साह के नेतृत्व में कुंदन नेगी, हरीश पंत, हीरा शाही और किसन गुरुरानी आदि के द्वारा इन कदली दलों से माता नंदा-सुनंदा की प्राकृत पर्वताकार, अपनी अलग विशिष्टता लिए सुंदर मूर्तियों का निर्माण किया जाएगा। कदली दल लाने वाले दल में आचार्य पंडित भगवती प्रसाद जोशी, मुकेश जोशी, विमल चौधरी, भीम सिंह कार्की, भुवन बिष्ट, अनिल बिनवाल, भारत जोशी, कैलाश जोशी आदि लोग शामिल रहे। इधर महोत्सव के लिए नयना देवी मंदिर को रंगबिरंगी रोशनियों से, बेहद सुंदर तरीके से सजाया गया हैं।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष मंदिर में श्रद्धालु माता नंदा-सुनंदा के दर्शन कर सकेंगे। अलबत्ता महोत्सव के तहत मेला नहीं लग रहा है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : नैनीताल में 119वें नंदा देवी महोत्सव का हर्षोल्लास के साथ शुभारंभ

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 11 सितंबर 2021। प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर आयोजित होने वाले, प्रदेश की कुलदेवी माता नंदा देवी के महोत्सव के प्रणेता नैनीताल में 119वें नंदा देवी महोत्सव का शुभारंभ हो गया है। कुमाऊं परिक्षेत्र के जीआईजी, पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल व सरिता आर्य सहित अनेक गणमान्य लोगों की उपस्थिति में महोत्सव की शुरुआत रंगारंग धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुई। इस दौरान आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा का दल माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियों के निर्माण हेतु पवित्र कदली वृक्षों को लाने हेतु ज्योलीकोट के सड़ियाताल के लिए इन कदली दलों के बदले प्रत्यारोपण के लिए 21 पौधे एवं परंपरागत लाल ध्वज को आगे लेकर रवाना हुआ। अब रविवार को दल श्वेत ध्वज की अगुवाई में पवित्र कदली दलों के साथ नगर में पहुंचेंगे और उनसे मूर्तियों का निर्माण किया जाएगा।

देखें वीडियो :

छोलिया नर्तकों के साथ माता नंदा-सुनंदा की मूर्ति निर्माण के लिए कदली दल लाने के लिए दल को ध्वज प्रदान कर रवाना करते डीआईजी, पूर्व विधायक आदि।

शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पुलिस उपमहानिरीक्षक डॉ. नीलेश आनंद ने नंदा देवी महोत्सव को संस्कृति को संरक्षित करने का एक बहुत ही सुंदर प्रयास बताया। इस दौरान आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा द्वारा डीआईजी के साथ ही पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल व सरिता आर्य तथा संयुक्त मजिस्ट्रेट प्रतीक जैन को कुमाउनी टोपी एवं मां नंदा-सुनंदा की भव्य तस्वीर भेंटकर तथा तिलक लगाकर स्वागत-अभिनंदन किया।

इस अवसर पर बाल कलाकारों ने गीतकार प्रभात साहगंगोला तथा संगीतकार नरेश चमियाल ,राहुल जोशी एवं गिरिश भट्ट आदि के निर्देशन में गणेश वंदना तथा नंदा चालीसा प्रस्तुत की। कोटाबाग से आई अर्चना भट्ट ने ‘दिन रंगीली भ्या’ गीत प्रस्तुत किया, जिसका संगीत प्रकाश एवं विनोद ने दिया। कदली दलों के बदले पर्यावरण एवं संस्कृति संरक्षण हेतु रोपे जाने के लिए पर्यावरण प्रेमी यशपाल रावत की ओर से जामुन, कचनार, पीपल, बट, हरड़ व बहेड़ा आदि प्रजातियों के 21 पौधे उपलब्ध कराए गए। पूजन आचार्य पंडित भगवती प्रसाद जोशी एवं घनश्याम जोशी द्वारा इनका पूजन कर दल को उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपरा अनुसार विजय के प्रतीक लाल एवं शांति के प्रतीक सफेद झंडे के साथ अतिथियों द्वारा कदली दल लाने के लिए ज्योलीकोट के सडियाताल को रवाना किए गए। बताया गया कि आगे रविवार अपरान्ह कदली दल मां वैष्णो देवी मंदिर तल्लीताल एवं सूखाताल होते हुए मां नयना देवी मंदिर परिसर में लाये जाएंगे। तत्पश्चात लोक पारंपरिक कलाकार मूर्ति निर्माण का कार्य प्रारंभ करेंगे। कार्यक्रम में श्रीरामसेवक सभा के पदाधिकारियों एवं कार्यकारणी सदस्यों के साथ ही डॉ.सरस्वती खेतवाल, मुन्नी तिवारी, ममता रावत, हरीश राणा, केसी उपाध्याय, मनोज साह, मनोज अधिकारी, भुवन बिष्ट, शांति मेहरा आदि मौजूद रहे। संचालन प्रो. ललित तिवारी व हेमंत बिष्ट ने किया।

उधर कदली दल लाने के लिए पहुंचे दल के सदस्यों का ज्योलीकोट के सड़ियाताल में जया बिष्ट के नेतृत्व में भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। दल में आचार्य पंडित भगवती प्रसाद जोशी, मुकेश जोशी, विमल चौधरी, भीम सिंह कार्की आदि लोग शामिल हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : नंदा देवी महोत्सव के कार्यक्रम तय, ‘नवीन समाचार’ भी कराएगा घर बैठे माता नंदा-सुनंदा के दर्शन

-इस बार टपकेश्वर महादेव शिवालय से लाए जाएंगे कदली वृक्ष

श्रीनंदा देवी महोत्सव की जानकारी देते आयोजक।

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 9 सितंबर 2021। नगर में 1916 से लगातार आयोजित हो रहे माता नंदा देवी के महोत्सव के लिए इस वर्ष कदली वृक्ष टपकेश्वर मंदिर शिवालय ग्राम सड़ियाताल ज्योलीकोट से लाए जाएंगे। इस हेतु 11 सितंबर को अन्य वर्षों की तरह सार्वजनिक उद्घाटन कार्यक्रम की जगह आयोजक संस्था के सभागार से टीम बिना किसी कार्यक्रम के रवाना होगी। 12 सितंबर को कदली वृक्षों की हमेशा की तरह परंपरागत तौर पर सर्वप्रथम तल्लीताल वैष्णवी देवी मंदिर में और फिर सूखाताल में पारंपरिक पूजा अर्चना होगी और फिर कदली वृक्षों को बिना किसी शोभायात्रा के सीधे नयना देवी मंदिर ले जाया जाएगा।

बृहस्पतिवार को महोत्सव हेतु आयोजित पत्रकार वार्ता में आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के महासचिव जगदीश बवाड़ी ने बताया कि 13 सितंबर को मूति निर्माण के उपरांत 14 की सुबह ब्रह्म मुहूर्त से माता के दर्शन प्रारंभ होंगे। दर्शनार्थी श्रद्धालु एक व्यवस्था के तहत दर्शन कर सकेंगे और वापस लौटते हुए उन्हें प्रसाद स्वरूप माता का कलेंडर आयोजकों की ओर से भेंट किया जाएगा। इस दौरान मंदिर में होने वाले पंच आरती सहित समस्त कार्यक्रमों का मंदिर के बाहर चाट पार्क, रामलीला मैदान मल्लीताल व तल्लीताल दर्शन घर पार्क आदि स्थानों पर बड़ी स्क्रीनों पर सीधा प्रसारण किया जाएगा। आपकी प्रिय एवं भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ भी महोत्सव का लगातार दूसरे वर्ष लाइव प्रसारण करेगा। ‘नवीन समाचार’ की वेबसाइट पर देश ही नहीं दुनिया भर में लोग गत वर्ष की तरह माता नंदा-सुनंदा के लाइव दर्शन कर सकेंगे।

कोविड-19 की परिस्थितियों के कारण इस वर्ष महाभंडारा व 17 सितंबर को डोला भ्रमण नहीं होगा तथा मूर्ति विसर्जन मंदिर के पास ही किया जाएगा। मंदिर में इस वर्ष पुजारी भी पूजा कराने के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे। इस मौके पर सभा के अध्यक्ष मनोज जोशी, पूर्व अध्यक्ष मुकेश जोशी, गिरीश जोशी, विमल चौधरी, किशन गुरुरानी, भीम सिंह कार्की, देवेंद्र लाल साह, राजेंद्र बजेठा, डॉ. ललित तिवारी व किशन सिंह नेगी सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : खुशखबरी : इस बार सभी श्रद्धालुओं को हो सकेंगे माता नंदा-सुनंदा के दर्शन…

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 6 सितंबर 2021। इस बार नंदा देवी महोत्सव में सभी श्रद्धालु माता नंदा-सुनंदा के दर्शन कर सकेंगे। महोत्सव का सीधा प्रसारण एवं बड़ी स्क्रीनों के माध्यम से भी मंदिर में होने वाले कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया जाएगा। सोमवार को महोत्सव की प्रशासन की ओर से जिम्मेदारी संभाल रहे संयुक्त मजिस्ट्रेट प्रतीक जैन ने कहा कि सभी श्रद्धालुओं को माता नंदा-सुनंदा के दर्शन कराए जाएंगे।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष कोविड की विषम परिस्थितियों के कारण श्रद्धालु माता नंदा-सुनंदा के दर्शन नहीं कर पाए थे। सोमवार को आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के साथ संयुक्त मजिस्ट्रेट प्रतीक जैन ने बैठक करने के बाद कहा कि सभी मंदिरों एवं सभा भवन को महोत्सव के लिए बिजली की मालाआंे से सजाया जाएगा। महोत्सव में सभी धार्मिक अनुष्ष्ठान कोविड के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए पूर्ण रीति-रिवाज से होंगे। इस दौरान श्री जैन को सभा के पदाधिकारियों ने चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस मौके पर सभा के अध्यक्ष मनोज साह, महासचिव जगदीश बवाड़ी, विमल चौधरी, राजेंद्र बजेठा, देवेंद्र लाल साह, मुकेश जोशी, हिमांशु जोशी, मनोहर साह, कान्हा साह, भुवन बिष्ट व प्रो. ललित तिवारी आदि सदस्य मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : लीजिए तय हो गया, दो वर्ष बाद हो सकेंगे माता नंदा-सुनंदा के दर्शन

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 2 सितंबर 2021। इस वर्ष दो बाद श्रद्धालु नैनीताल के ऐतिहासिक नंदादेवी महोत्सव के दौरान माता नंदा-सुनंदा के प्रत्यक्ष दर्शन कर पाएंगे। साथ ही बड़ी स्क्रीन पर भी महोत्सव का सीधा प्रसारण किया जाएगा। बुधवार को डीएम धीराज गर्ब्याल के द्वारा महोत्सव की आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा एवं नंदा देवी मंदिर का प्रबंधन करने वाली अमर उदय ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में यह तय हुआ। तय हुआ कि महोत्सव कोविड के दिशा-निर्देशों के अनुसार होगा, लेकिन सभी धार्मिक कार्यक्रम परंपरा एवं रीति-रिवाज के साथ आयोजित किए जाएंगे। श्री गर्ब्याल ने इस दौरान महोत्सव स्थल श्री मां नयना देवी मंदिर का अवलोकन भी किये और आयोजकों एवं नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अशोक कुमार वर्मा व एसडीएम प्रतीक जैन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

श्री गर्ब्याल ने कहा कि कदली वृक्ष के साथ नगर भ्रमण, मेले के दौरान भंडारा एवं प्रसाद वितरण एवं नंदा देवी महोत्सव के अंतिम दिन डोले का नगर भ्रमण नहीं किया जायेगा। साथ ही जिलाधिकारी श्री गर्ब्याल ने कहा कि मंदिर में माता नंदा-सुनंदा के दर्शन के दौरान कोविड गाइड लाइन का पूर्ण अनुपालन किया जायेगा। मंदिर परिसर के अंदर सीमित संख्या में श्रद्धालुओं का प्रवेश होगा, और कोविड नियमों का पूर्ण पालन करते हुए दर्शन कराये जायेंगे। श्रद्धालुओं को मास्क पहनने व सामाजिक दूरी के नियमों का पूर्णतया पालन सुनिश्चित करना होगा।

उल्लेखनीय है कि नगर में नंदा देवी महोत्सव 1902 से बीच में दो विश्व युद्ध होने के बावजूद लगातार आयोजित किया जा रहा है। इस बीच गत वर्ष कोविड की परिस्थितियों के बीच भी महोत्सव तो आयोजित हुआ था, लेकिन श्रद्धालु माता नंदा-सुनंदा की प्राकृत पर्वताकार मूर्तियों के दर्शन नहीं कर पाए थे। महोत्सव के तहत पहली बार माता की शोभायात्रा-डोला नहीं निकल पाया था और मूर्तियों का पाषाण देवी मंदिर के पास की जगह नयना देवी मंदिर के पास से ही नैनी झील में विसर्जित कर दिया गया था। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नंदा देवी महोत्सव के आयोजन के लिए उप समितियां गठित, दी जिम्मेदारियां

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 19 अगस्त 2021। नगर में अगले माह आयोजित होने वाले ऐतिहासिक श्रीनंदा देवी महोत्सव-2021 के लिए आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा ने तैयारियों के लिए उप समितियों का गठन कर दिया है। बृहस्पतिवार को सभा के अध्यक्ष मनोज साह की अध्यक्षता व महासचिव जगदीश बवाड़ी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह भी तय किया गया कि आगामी 1 सितंबर को जिला प्रशासन के साथ होने वाली बैठक के बाद तैयारियों में तेजी लाई जाएगी।

आज कदली वृक्ष लाने की समिति का संयोजक विमल चौधरी व भीम सिंह कार्की को बनाया गया है। इसी तरह मूर्ति निर्माण के लिए चंद्रप्रकाश साह, मंडप निर्माण के लिए घनश्याम साह, हिमांशु जोशी, गिरीश जोशी व किशन सिंह नेगी, मंडप व्यवस्था के लिए विमल चौधरी व राजेंद्र बजेठा, पंच आरती के लिए भीम सिंह कार्की, देवी भोग के लिए राजेंद्र बजेठा, सुंदरकांड के लिए कैलाश जोशी व मुकुल जोशी, प्रसाद वितरण के लिए मुकेश जोशी व कमलेश ढोंढियाल, मंदिर प्रवेश समिति व मूर्ति विसर्जन के लिए पूरी आयोजक संस्था, सीधा प्रसारण के लिए डॉ. ललित तिवारी व दान पात्र समिति के लिए घनश्याम साह, अशोक साह, विमल साह व राजेंद्र लाल साह को संयोजक बनाया गया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नैनीताल के एतिहासिक नंदा देवी महोत्सव को डीएम ने दी हरी झंडी…

-सप्ताह भर के आयोजन के लिए तैयारियां करने को कहा, आयोजन पर विस्तृत चर्चा अगले माह होगी

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 10 अगस्त 2021। आगामी 11 से 17 सितम्बर तक होने वाला नंदा देवी महोसत्व शासन द्वारा जारी कोविड गाइडलाईन के अनुसार आयोजित होगा। यह बात जिलाधिकारी श्री धीराज सिंह गर्ब्याल ने नंदा देवी मेले के आयोजक श्रीराम सेवक सभा के पदाधिकारियों की बैठक लेते हुए कही। डीएम गर्ब्याल की इस बात को गत वर्ष कोविड संक्रमण की वजह से केवल प्रतीकात्मक तौर पर, बिना श्रद्धालुओं के दर्शन किए हो पाए इस आयोजन को प्रशासन की हरी झंडी माना जा रहा है। साथ ही तय हो गया है कि इस वर्ष श्रीनंदा देवी महोत्सव 11 से 17 सितंबर के बीच होगा।

श्री गर्ब्याल ने मेला आयोजन समिति से कहा कि गत वर्ष की भांति नंदा देवी महोत्सव की तैयारी करें। उन्होने कहा, अभी मेले के आयोजन में काफी समय है इसलिए मेले की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा एवं तैयारियां उस समय कोविड की परिस्थितियों एवं गाइडलाईन के अनुसार सितंबर माह के प्रथम सप्ताह में तय की जायेंगी। प्रशासन मेला आयोजन समिति के साथ है आवश्यकतानुसार सहयोग किया जायेगा। आयोजकों के अनुसार बैठक में श्रद्धालुओं को नंदा-सुनंदा के दर्शन कराने पर भी बात हुई, और उम्मीद है कि इस वर्ष श्रद्धालु माता के दर्शन कर सकेंगे।

बैठक में सीडीओ डॉ.संदीप तिवारी, एडीएम अशोक जोशी, एसपी देवेंद्र पिंचा, संयुक्त मजिस्टेªट प्रतीक जैन, ईओ नगर पालिका एके वर्मा, पर्यटन अधिकारी अरविंद गौड, मेला आयोजन कने वाली श्रीराम सेवक सभा के अध्यक्ष मनोज साह, महासचिव जगदीश बवाडी, विमल चौधरी, गिरीश जोशी, देवेंद्र लाल साह, कमलेश ढौढ़ियाल, मुकेश जोशी ‘मंटू’, हिमांशु जोशी, गोपाल रावत व हरीश राणा आदि लोग मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : बड़े मलाल के साथ माता नंदा-सुनंदा के महोत्सव का हुआ समापन

-नंदा देवी महोत्सव के दौरान नयना देवी मंदिर के कपाट बंद रहने से आम लोग नहीं कर पाये माता नयना एवं माता नंदा-सुनंदा के दर्शन
-महोत्सव के समापन अवसर पर टूटीं सामाजिक दूरी के नियम की धज्जियां

नवीन समाचार, नैनीताल, 28 अगस्त 2020। 1902 से दो विश्व युद्धों के बावजूद 118 वर्षों से अनवरत आयोजित हो रहे माता नंदा-सुनंदा के महोत्सव पर कोरोना के नाम पर बड़ा मलाल नगर के आम लोगों के मन-मस्तिष्क में रह गया। पूरे कुमाऊं मंडल में हालिया वर्षों से नैनीताल के नंदा देवी महोत्सव को देखकर महोत्सव होने लगे। वहां भी इस वर्ष महोत्सव हुए और आम लोगों की भी सामाजिक दूरी बनाते हुए उनमें भागीदारी रही, लेकिन नैनीताल के नंदा देवी महोत्सव, जिसे हालिया वर्षों में गढ़वाल मंडल में होने वाली ‘राज जात’ की तर्ज पर आम जनता की भागीदारी के कारण ‘लोक जात’ भी कहा जाने लगा था, इस वर्ष आम जनता की भागेदारी से वंचित रहा। यहां तक कि आयोजक संस्था श्री राम सेवक सभा के पदाधिकारियों के परिजन तक माता नंदा के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर पाए। जबकि केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार भी मंदिर में प्रवेश पर रोक नहीं है, लेकिन महोत्सव के दौरान यहां नयना देवी मंदिर के द्वार बंद रहे। इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर भी आम लोगों में जबर्दस्त चर्चा और नाराजगी देखी जा रही है। लोग निर्णयकर्ताओं की कमजोरी को इसके लिए जिम्मेदार बता रहे हैं।

माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियों के विसर्जन पर दर्शनों के लिए लालायित खड़े श्रद्धालु।

शुक्रवार को नंदा देवी महोत्सव के समापन अवसर पर मंदिर परिसर में सामाजिक दूरी का नियमानुसार पालन नहीं हो पाया। लोग माता नंदा में अपार श्रद्धा के वशीभूत हर वर्ष की तरह बहन-बेटी की तरह विदा करने के लिए नयना देवी मंदिर के आसपास जुटे रहे। उन्होंने वहीं खड़े-खड़े माता के जयकारे लगाए और भजन गाए। लेकिन प्रशासन इस दौरान सामाजिक दूरी बहाल नहीं रख पाया। यहां तक कि नयना देवी मंदिर के अंदर भी सामाजिक दूरी नहीं बनी रह सकी। उपस्थित पुलिस-प्रशासन की भूमिका मूकदर्शक की दिखी। वे मंदिर में लोगों को प्रवेश न करने देने के अलावा किसी तरह की रोक-टोक करते भी नहीं दिखे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या व्यवस्थाएं बेहतर नहीं हो सकती थीं। क्या व्यवस्थित तरीके से लोगों को सीमित संख्या में माता नंदा-सुनंदा के दर्शन करने का मौका नहीं दिया जा सकता था। सोचिएगा जरूर….।

पहली बार नयना देवी मंदिर से हुआ विसर्जन

माता नंदा-सुनंदा के डोले को विसर्जन के लिए पंडाल से माता नयना के दर्शनों के लिए लाते आयोजक।

नैनीताल। परंपरागत तौर पर माता नंदा-सुनंदा के महोत्सव के उपरांत मूर्तियों का विसर्जन पूरे शहर में शोभायात्रा के उपरांत पाषाण देवी मंदिर के पास देर शाम को होता था, लेकिन पहली बार नयना देवी मंदिर से ही मूर्तियों का विसर्जन दिन में 12 बजे डोला उठने के साथ ही कर दिया गया। इससे पूर्व माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियों का पूजन नयना देवी मंदिर की व्यवस्थाएं संभालने वाले अमर उदय ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी राजीव लोचन साह के सपत्नीक यजमानत्व में हुआ। धार्मिक अनुष्ठान, पूजा व आरती आदि आचार्य भगवती प्रसाद जोशी ने करवाए। इसके उपरांत ईको-फ्रेंडली तरीके से बनी मूर्तियों को माता नयना देवी मंदिर के दर्शन एवं तीन बार परिक्रमा कराने के उपरांत मंदिर परिसर से ही विसर्जन कर दिया गया। पूरे महोत्सव की अच्छी बात यह रही कि कोरोना की वैश्विक महामारी के बावजूद नंदा देवी महोत्सव का धार्मिक पक्ष आयोजक संस्था की ओर से, केवल हवन-यज्ञ को छोड़कर पूरे धार्मिक विधि-विधान से हो पाया। आयोजन में स्थानीय विधायक संजीव आर्य भी शामिल हुए। साथ ही सभा के महासचिव जगदीश बवाड़ी, पूर्व अध्यक्ष मुकेश जोशी, कमलेश ढोंढियाल, डा. मनोज बिष्ट, हिमांशु जोशी, भीम सिंह कार्की, राजेंद्र बजेठा, शैलेंद्र साह सहित अन्य अनेक सदस्य शामिल रहे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 27 अगस्त 2020। 1902 से दो विश्व युद्धों के बावजूद 118 वर्षों से अनवरत आयोजित हो रहे माता नंदा-सुनंदा के महोत्सव के तहत बृहस्पतिवार को आचार्यों के द्वारा सुंदर कांड व नंदा चालीसा का पाठ साथ ही कन्याकुमारी पूजन एवं शाम को पंचआरती आदि कार्यक्रम आयोजित किये गए। इन कार्यक्रमों में श्रीनंदा देवी महोत्सव के तहत भीम सिंह कार्की, मनोज जोशी व विमल चौधरी भी शामिल हुए। वहीं रात्रि में होने वाले देवी पूजन में सभा के सदस्य राजेंद्र बजेठा सपत्नीक यजमान की भूमिका में रहे। जबकि कन्या पूजन डीसीएस खेतवाल एवं डा. सरस्वती खेतवाल ने कन्या पूजन करवाया। इसके अलावा केबल पर प्रसारण एवं ऑनलाइन माध्यम से हजारों लोगों ने दूसरे दिन भी माता नंदा-सुनंदा के दर्शन किए। इस कार्य में शंकर दत्त जोशी, दिनेश खेतवाल, डा. सरस्वती खेतवाल, पद्मश्री अनूप शाह, डा. शेखर पाठक, वासु राय, विनोद पांडे, लतिका जलाल, मनोज चौधरी आदि ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। नरेश चनियाल व डा. गगनदीप होती ने भजन प्रस्तुत किया। प्रो. ललित तिवारी, हेमंत बिष्ट, मीनाक्षी कीर्ति, नवीन पांडे व डा. मोहित सनवाल आदि ने संचालन किया।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 26 अगस्त 2020। 1902 से दो विश्व युद्धों के बावजूद 118 वर्षों से अनवरत हुआ माता नंदा-सुनंदा का महोत्सव कोरोना की विश्वव्यापी महामारी के बावजूद पूरे विधि-विधान के साथ आयोजित हुआ। सुबह तीन बजे ब्रह्म मुहूर्त में माता नंदा सुनंदा की परंपरागत तौर पर मूलतः कदली दलों से प्राकृत पर्वताकार आकृति में बनी मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा की गई। प्राण प्रतिष्ठा आचार्य भगवती प्रसाद जोशी ने करानी, जबकि आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के वरिष्ठ सदस्य घनश्याम लाल साह ने सपत्नीक यजमान की भूमिका निभाई। ‘नवीन समाचार’ सहित अन्य माध्यमों से पहले दिन ही 57 हजार से अधिक लोगों ने माता नंदा-सुनंदा के ऑनलाइन दर्शन किए।

इस वर्ष की नंदा-सुनंदा :
वहीं दिन में नयना देवी मंदिर में बने पूजा पंडाल में माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियों के समक्ष पूरी तरह से शांति रही। किसी भी श्रद्धालु को पूजा-अर्चना के लिए आने की इजाजत नहीं मिली। यहां तक कि आयोजक संस्था के सदस्यों को भी पूरे महोत्सव में केवल एक बार मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिलने के कारण वे भी मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाए। अलबत्ता, इस पर किसी भी श्रद्धालु ने किसी तरह की निराशा घोषित व सार्वजनिक तौर पर प्रकट नहीं की।
वहीं शाम साढ़े छह बजे पंच आरती तथा रात्रि में भी देवी पूजन हुआ, जिसमें आयोजक संस्था के सदस्य भीम सिंह कार्की ने सपत्नीक यजमान की भूमिका निभाई। रात्रि 12 बजे भी परंपरानुसार देवी भोग हुआ। आयोजक संस्था के महासचिव जगदीश बवाड़ी ने बताया कि आगे बृहस्पतिवार सुबह 9 बजे देवी पूजन, दिन में संस्था के आचार्यों के द्वारा ही सुंदर कांड व नंदा चालीसा का पाठ, कन्याकुमारी भोग व शाम को पंचआरती आदि कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे।

57 हजार से अधिक लोगों ने ऑनलाइन किये माता नंदा-सुनंदा के दर्शन
नैनीताल। पहली बार नंदा-सुनंदा के महोत्सव के प्रसारण के लिए केबल टीवी के अलावा ऑनलाइन व्यवस्था भी की गई। आयोजक संस्था के महासचिव जगदीश बवाड़ी ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से करीब 57 हजार लोगों ने माता नंदा-सुनंदा के ऑनलाइन दर्शन किए। उन्होंने बताया कि लोगों में माता नंदा-सुनंदा के दर्शन न कर पाने पर कोई निराशा नहीं दिखी है, बल्कि लोग इस बात के लिए संस्था की प्रशंसा कर रहे हैं कि ऐसी महामारी के दौर में भी इस आयोजन की परंपरा-देवी पूजन को जारी रखा गया है। प्रसारण के कार्य में संस्था के डा. मोहित सनवाल, डा. ललित तिवारी, नवीन पांडे, मीनाक्षी कीर्ति व हेमंत बिष्ट के साथ ही हरीश कुमार आदि लोग जुटे रहे। इस दौरान एसडीएम विनोद कुमार, सीओ विजय थापा, मल्लीताल कोतवाल अशोक कुमार सिंह, उप निरीक्षक दिनेश जोशी सहित बड़ी संख्या में पुलिस कर्मी अपनी ड्यूटी में मुस्तैद रहे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 25 अगस्त 2020। कोरोना काल में सीमित संसाधनों एवं मानव शक्ति के साथ तैयार होने के बावजूद इस बार राज्य की कुलदेवी माता नंदा-सुनंदा सरोवरनगरी में मंगलवार सप्तमी के दिन पूर्व के वर्षों की अपेक्षा काफी जल्दी ही सज-संवर गई हैं। अब वे नंदाष्टमी के अवसर पर बुधवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में श्रद्धालुओं को ऑनलाइन एवं टेलीविजन पर दर्शन देंगी। कोरोना के संक्रमण की वजह से इस वर्ष श्रद्धालु नैना देवी मंदिर में दर्शन नहीं कर पाएंगे। हम यहां बताना चाहते हैं कि आप बुधवार सुबह पांच बजे से अपने प्रिय एवं भरोसेमंद ‘नवीन समाचार’ पर भी माता नंदा-सुनंदा की प्राण प्रतिष्ठा एवं दर्शनों के ‘लाइव दर्शन’ कर सकेंगे। इसके लिए सुबह से आप ‘नवीन समाचार’ पर जुड़ सकते हैं।


बताया गया है कि इस वर्ष बीती रात्रि ही माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियों के निर्माण के लिए दोनों कदली दलों को नैनी सरोवर में स्नान कराकर पहली बार आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के कार्यालय भवन में लाया गया, और यहां पिछले एक सप्ताह से तैयार कर ली गई बांश की खपच्चियों से मूर्ति निर्माण हेतु कपड़ा लगाने का कार्य सुबह ही कर लिया गया, जबकि पूर्व वर्षों में यह कार्य शाम तक हो पाता था। ऐसे में मूर्तियों में मोनिका साह व कल्याणी गंगोला द्वारा मूर्तियों में रंग भरने का काम भी अपराह्न में पूरा हो गया और इसके बाद मूर्तियों के श्रृंगार का कार्य भी शाम तक हो गया, जबकि पूर्व में यह कार्य मध्य रात्रि तक होता रहता था। मूर्ति निर्माण में भी इस वर्ष आयोजकों में बेहद सीमित संख्या में कार्यकर्ताओं को लगाया और यह कार्य भी गुप्त तरीके से कराया ताकि आम जन पिछले वर्षों की तरह अधिक संख्या में न जुट जाएं। मूर्ति निर्माण में चंद्र प्रकाश साह, मनोज जोशी, गोधन बिष्ट, दीप गुरुरानी, सागर सोनकर, भोला वर्मा आदि ने योगदान दिया।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 24 अगस्त 2020। एक वर्ष के लंबे इंतजार के बाद, कोविद-19 की महामारी के पिछले 6 माह से भी अधिक लंबे समय दुनिया भर में व्याप्त भय व असमंजस के बावजूद सोमवार को उत्तराखंड की कुलदेवी एवं राज्य के दोनों अंचलों-कुमाऊं व गढ़वाल को एकसूत्र में पिरोने वाली राज राजेश्वरी माता नंदा-सुनंदा कदली स्वरूप में अपने मायके की तरह माता नयना की नगरी में आ गई हैं। अब वे यहां बेहद सादगी के साथ ‘एक स्थान पर केवल पांच लोगों की मौजूदगी’ के नियम का पालन करते हुए अगले चार दिन यहां रहेंगी एवं बुधवार यानी नंदाष्टमी के दिन से प्राकृत पर्वताकार सुंदर मूर्तियों के रूप में अपने भक्तों-श्रद्धालुओं को दर्शन देंगी। इसके लिए ऑनलाइन एवं टीवी पर उनके दर्शनों की व्यवस्था की जा रही हैं
उल्लेखनीय है कि सरोवरनगरी का सुप्रसिद्ध, 1902 से बीच में दो विश्व युद्धों के बावजूद अनवरत जारी रहा 118वां श्रीनंदा देवी महोत्सव रविवार को प्रारंभ हुआ है। महोत्सव के तहत सोमवार को आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के सदस्य विमल चौधरी व भीम ंिसह कार्की तथा आचार्य भगवती प्रसाद जोशी एवं उनके सहयोगी दीप जोशी व घनश्याम जोशी निकटवर्ती खुर्पाताल के पास स्थित गांव जोग्यूड़ा से परंपरागत लाल व सफेद निशानों यानी झंडों के साथ माता नंदा-सुनंदा को कदली दलों के स्वरूप में धार्मिक विधि-विधानपूर्वक लेकर एवं पहली बार बिना शोभायात्रा के मुख्यालय स्थित नयना देवी मंदिर पहुंच गए हैं। यहां आचार्य जोशी ने कदली दलों की पूजा-अर्चना की। आगे इन कदली दलों से मूर्तियों का निर्माण चंद्र प्रकाश साह के नेतृत्व में चार चरणों में पूरन सिंह, हरीश, राजन, दलीप, रमेश, भुवन नेगी, ललित साह, गोधन सिंह, हीरा सिंह, सागर, मनोज जोशी, मोनिका साह, कल्याणी गंगोला, दीपक गुरुरानी व भोला वर्मा आदि के द्वारा किया जाएगा एवं इसके उपरांत 26 अगस्त की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में मूर्तियों को मंदिर में स्थापित किया जाएगा। आयोजन में श्रीराम सेवक सभा के महासचिव जगदीश बवाड़ी, मनोज जोशी, मनोज साह, कमलेश ढोंढियाल, हिमांशु जोशी, किसन नेगी, प्रो. ललित तिवारी व प्रदीप बिष्ट लोग भी जुटे हुए हैं।

सांसद अजय भट्ट ने प्रशासन ने आयोजक संस्था को दो लाख रुपए किए अवमुक्त
नैनीताल। सांसद अजय भट्ट ने नैनीताल के जिलाधिकारी से वर्ष 2018 में नंदा देवी मेले के व्यय से बची 43 लाख रुपए की धनराशि में से नंदा देवी महोत्सव के सफल संचालन के लिए आयोजक संस्था दो लाख रुपए देने का सोमवार को अनुरोध किया। साथ ही बताया कि उनके अनुरोध पर डीएम सविन बंसल ने दो लाख रुपए आज ही अवमुक्त कर दिये हैं। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व 10 अगस्त को भी उन्होंने इस बारे में डीएम से वार्ता की थी।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 23 अगस्त 2020। सरोवरनगरी का सुप्रसिद्ध, 1902 से बीच में दो विश्व युद्धों के बावजूद अनवरत जारी रहा 118वां श्रीनंदा देवी महोत्सव रविवार को प्रारंभ हो गया। महोत्सव का पिछले वर्षों की तरह ऑपचारिक शुभारंभ तो नहीं हुआ, परंतु आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के मंदिर कक्ष में महोत्सव की शुरुआत विधिवत धार्मिक आयोजन पूजा-पाठ के साथ शुरू हुई। आचार्य भगवती प्रसाद जोशी ने पूजा-अर्चना करवाई। इसके उपरांत श्रीराम सेवक सभा के सदस्य विमल चौधरी व भीम ंिसह कार्की तथा आचार्य भगवती प्रसाद जोशी एवं उनके सहयोगी दीप जोशी व घनश्याम जोशी नगर से कदली दल लाने के लिए परंपरागत लाल व सफेद निशानों यानी झंडों के साथ निकटवर्ती खुर्पाताल के पास स्थित गांव जोग्यूड़ा के लिए रवाना हुए। बताया गया है कि महोत्सव के हर आयोजन में प्रशासन द्वारा निर्दिष्ट केवल पांच लोगों की उपस्थिति के नियम का पालन करने का प्रयास किया जा रहा है।

निशान के साथ कदली दल लेने के लिए रवाना होते श्रीराम सेवक सभा के लोग।

श्रीराम सेवक सभा के महासचिव जगदीश बवाड़ी ने बताया कि जोग्यूड़ा में रात्रि में विधिवत पूजा-अर्चना के उपरांत कदली दलों को सोमवार अपराह्न कोरोना के संक्रमण की वजह से बिना किसी शोभायात्रा के सीधे नयना देवी मंदिर परिसर लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि महोत्सव का सीधा प्रसारण स्थानीय चैनल के अलावा फेसबुक एवं यूट्यूब के माध्यम से प्रशासन की ओर से कराने का प्रयास भी किया जा रहा है।

नंदा देवी महोत्सव के लिए ऐसे सजा है माता नयना का दरबार:

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