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नंदा देवी महोत्सव के मेले में नियमों की अनदेखी पर पालिका सभासद ने डीएम को लिखा कड़ा पत्र, पालिका प्रशासन पर लगाये आरोप

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नैनीताल, 9 सितंबर 2019। नंदा देवी महोत्सव के समापन के उपरांत भी सोमवार को मेला जारी रहा है। वहीं मेले में नियमों की अनदेखी को लेकर एक नगर पालिका सभासद, भाजपा नेता कैलाश रौतेला ने डीएम को लंबा पत्र लिखा है। प्रेस को जारी पत्र में सबसे पहले पॉलीथीन के उपयोग पर सवाल उठाते हुए पालिका के उच्चाधिकारियों पर मेले के ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए पालिका की मान-मर्यादा का अपमान करने तथा शहर की आम जनता की आस्था से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही छाया चित्र प्रस्तुत करते हुए निविदा की शर्त संख्या 4 के अनुसार आईएसआई मार्क की टिनों का इस्तेमाल करने तथा पॉलीथीन को वर्जित रखने की शर्त के विपरीत ठेकेदार द्वारा समस्त दुकानों की छतों में रंगबिरंगी पॉलीथीन लगाकर पूरे मैदान को ढकने एवं सामग्री के साथ पॉलीथीन के उपयोग करने एवं 650 दुकानों की अनुमति से कहीं अधिक संख्या में दुकानें लगवाने, शर्त नंबर 7 का उल्लंघन कर दुकानों को निर्धारित से अधिक दरों पर बेचे जाने, शर्त नंबर 12 का उल्लंघन कर 10 वर्ष तक के बच्चों से 20 व बड़ों से 40 रुपए से अधिक 50 रुपए तक किराया वसूले जाने के आरोप लगाते हुए मामले की जांच कराने की मांग की है।

स्वास्थ्य शिविर में 1006 का किया गया निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण

नैनीताल। माता नंदा देवी मेले के अवसर पर जिला रेडक्रास सोसायटी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय स्वास्थ्य शिविर मे कुल 1006 श्रद्धालुओं ने अपना स्वास्थ्य परीक्षण करवाया। इस दौरान रोगियों के मधुमेह व रक्तचाप की निःशुल्क जांच एवं निःशुल्क औषधियांे का वितरण किया यगा। शिविर में जिला रेडक्रास सोसायटी की मेडिकल एवं हेल्थ कमेटी की अक्ष्यक्ष-बीडी पांडे जिला चिकित्सालय की पीएमएस डा. तारा आर्या, सदस्य सचिव डा. एमएस दुग्ताल, डा. सीतांशु शर्मा व डा. वीके मिश्रा के साथ ही सोसायटी की वाइस चेयरमैन मुन्नी तिवारी, कोषाध्यक्ष बीसी तिवारी, सदस्य सचिव वीके शुक्ला, जीत सिंह आनंद, नवनीत राणा, चंचला बिष्ट, प्रेेमा अधिकारी, मनमोहन कनवाल, सुरेश गुर्रानी, हेम पाण्डे, नीरज जोशी, दीप्ती धामी, दुर्गा टम्टा, दीपक, मुस्तकीम व सपना आदि ने आदि ने योगदान दिया।

पालिकाध्यक्ष ने जताया आभार

नैनीताल। नंदा देवी महोत्सव के दौरान आयोजित मेले के आयोजक नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष सचिन नेगी ने महोत्सव के सफल आयोजन के लिए पालिका के अधिशासी अधिकारी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, अवर अभियंता, कर अधीक्षक, कर निरीक्षक, सफाई निरीक्षक, लेखाकार, कार्यालय अधीक्षक, सभी वरिष्ठ बिल लिपिकों सहित समस्त पालिका परिवार, जिला व पुलिस प्रशासन एवं नगर वासियों का आभार जताया है। साथ ही भविष्य में और बेहतर तरीके से महोत्सव आयोजित करने की कामना की है।

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-हजारों लोगों ने किए दर्शन, डोले में झलक लेने को उमडे़ श्रद्धालु

नवीन समाचार, ,नैनीताल, 8 सितंबर 2019। पांच दिन पूर्व कदली दलों के रूप में अपने मायके की तरह माता नयना की नगरी में पधारीं और बीते तीन दिनों से नगर वासियों को अपनी सुंदर प्राकृत पर्वताकार छवि में दर्शन दे रहीं माता नंदा-सुनंदा के रविवार को विदा होने की घड़ी आ गयी। इस अवसर पर नगर और दूर-दूर से पहुंचे हजारों श्रद्धालु अपनी बेटी-बहन को मायके से विदा करने के लिये आस्था और विश्वास के अतिरेक के साथ शोभायात्रा-डोले में उत्साहपूर्वक शामिल हुए। ‘जय देवी जय नंदे, जयति हिमाद्रि शैल सुतेः…’ जैसी माता नंदा की स्तुतियों व भजनों के साथ हजारों श्रद्धालु शोभायात्रा में शमिल हुए। घरों की बुर्जों और सड़क किनारे मां के दर्शन को उमड़ी महिलाएंे और श्रद्धालु माता नंदा-सुनंदा की एक झलक देखने को बेताब हो पुष्पों, अक्षतों और चढ़ावे की वर्षा कर रहे थे। शोभायात्रा में शामिल लोग जैसे स्वर्गिक आनंद में झूम रहे थे। वहीं कई लोगों की आंखें इस मौके पर बेटी-बहन को विदा करने जैसे दुःख से नम भी नजर आयीं।
माता के डोले को संस्था के अध्यक्ष मनोज साह, महासचिव राजेंद्र लाल साह, उपाध्यक्ष अनूप शाही, मनोज जोशी, डा. मोहित सनवाल, विमल चौधरी, राजेंद्र बजेठा, अनिल बिनवाल, बिमल साह, भुवन बिष्ट, गिरीश कांडपाल, गोविंद सिंह, समर साह, देंवेंद्र लाल साह, डा. मनोज बिष्ट, गिरीश जोशी, जगदीश बवाड़ी, भीम सिंह कार्की, कैलाश जोशी, डा. ललित तिवारी, डा. सरस्वती खेतवाल, ममता रावत, सुमन साह, मोहित साह, हिमांशु जोशी, तेज सिंह नेगी व हिमांशु पांडे सहित अनेक लोग कंधों पर लेकर चल रहे थे, और इसके लिये युवाओं में होड़ मची थी। शोभायात्रा परंपरागत तरीके से आर्य समाज मंदिर से मल्लीताल रिक्शा स्टेंड से माल रोड होते हुए तल्लीताल क्रांति चौक, वैष्णवदेवी मंदिर, चीना बाबा मंदिर, श्रीराम सेवक सभा आदि स्थानों पर विश्राम करते हुऐ निकली। शोभायात्रा में रामनगर से आये महादेव अखाड़े के कलाकार माता काली का रूप लेकर लाठी व तलवारों से करतब दिखा रहे थे। देर शाम सात बजे मां की मूर्तियों को पाषाण देवी मंदिर के पास से पवित्र नैनी सरोवर में विसर्जित कर दिया गया। इस दौरान पूरी शांति बनी रही, इसके साथ ही बीते छह दिनों से चल रहे नंदा महोत्सव का भी निर्विघ्न समापन हो गया। इस दौरान जगह-जगह पर भंडारे के रूप में प्रसाद भी वितरित किया जा रहा था। माता नंदा-सुनंदा के डोले में उक्रांद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल, प्रदेश प्रमुख वन संरक्षक कपिल जोशी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी शीष नवाये। इधर आयोजक संस्था के कार्यालय के रामलीला मैदान स्थित प्रांगण में पूर्व अध्यक्ष मुकेश जोशी के संयोजकत्व में विशाल भंडारा आयोजित हुआ।

मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने कराया भगवती पूजन

नैनीताल। रविवार को सुबह नौ बजे नयना देवी परिसर में विराजमान मां नंदा सुनंदा का पंडित भगवती प्रसाद जोशी ने लगातार दूसरे वर्ष राजीव लोचन साह के सपत्नीक यजमानत्व में महाभगवती के रूप में पूजन किया गया। उल्लेखनीय है कि श्री साह नयना देवी मंदिर का प्रबंधन देखने वाली अमर उदय ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं। इसके उपरांत दोपहर करीब 12 बजे माता को भोग लगाने के पश्चात डोले में सवार कर नगर भ्रमण के लिए मंदिर परिसर से बाहर लाया गया। बाहर मंदिर परिसर में भंडारा आयोजित हुआ, जिसके उपरांत शोभायात्रा शुरू हुई। जिसमें सबसे आगे परंपरागत तौर पर श्वेत-धवल एवं आखिर में लाल ध्वज चल रहे थे।

प्रशासन की चूक से आधा शोभायात्रा

नैनीता। माता नंदा-सुनंदा अपने डोले पर नगर भ्रमण पर शोभायात्रा के रूप में निकलीं। आयोजक श्रीराम सेवक सभा की अगुवाई में सभा के पदाधिकारियों एवं वर्षों से माता के डोले को कंधा दे रहे श्रद्धालुओं के कंधों पर माता दोपहर करीब 12 बजे माता नयना देवी के मंदिर से निकलीं, और आगे अपने परंपरागत मार्ग में बौद्ध धर्मावलंबियों के तिब्बती मार्केट, गुरुद्वारा गुरुसिंह सभा, मेला क्षेत्र, जामा मस्जिद, आर्य समाज मंदिर और मैथोडिस्ट चर्च आदि के साथ लोअर मॉल रोड के अपने परंपरागत मार्ग से शान से गुजरते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन दिये। इस मौके पर श्रद्धालुओं में उनके दर्शनों के लिए गजब का उत्साह दिखाई दे रहा था। खासकर महिलाएं उन्हें अक्षत, पुष्प और भेंट चढ़ा रही थीं। सड़क के दोनों और उनकी शोभायात्रा में शामिल लोगों का मेला लगा हुआ है। लोग उनकी एक झलक पाने और उनके डोले को छूने को लालायित हो उमड़ रहे थे। इस दौरान मल्लीताल रिक्शा स्टेंड के पास पहुंचने पर प्रशासन की बड़ी चूक सामने आयी। शोभायात्रा को अपने परंपरागत लोवर माल रोड से जाना था, किंतु तब तक तल्लीताल से आने वाले वाहनों को रोका नहीं गया था, जिस कारण वाहन मल्लीताल तक आ गये थे, बाद में उन्हें अपर माल रोड से वापस ले जाया गया। इस कारण वाहन चालकों को भी दुबारा से तल्लीताल जाकर राजभवन रोड से मल्लीताल आना पड़ा।

मेले में उमड़े लोग

नैनीताल। नंदा देवी महोत्सव के अवसर माता नंदा-सुनंदा को विदा कराने और उनके दर्शनों को भारी संख्या में उमड़े श्रद्धालुओं ने मेले में भी शिरकत की। इससे मेले में अत्यधिक भीड़भाड़ रही। ऐसे में मेले का फैलाव पूरे फ्लैट्स मैदान में दिखाई दिया। लोगों ने महंगा बताने के बाद भी छोटे-बड़े झूलों एवं अन्य मनोरंजक खेलों का आनंद उठाया, साथ ही जमकर खरीददारी भी की।

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-महाभंडारे में ग्रहण किया हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 सितंबर 2019। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था व श्रद्धा की प्रतीक, देवभूमि उत्तराखंड की कुलदेवी मां नंदा का आज सरोवरनगरी नैनीताल के नयना देवी मंदिर में कन्याकुमारी ‘नवदुर्गा’ के रूप में पूजन किया गया। नन्हीं नौ बच्चियों के यजमान दंपति ने पांव धो आचमन किया, चुनरियों से अभिषेक किया। प्रसाद ग्रहण करवाया एवं उपहार देकर पुण्य अर्जन किया। महाभंडारे का आयोजन भी किया गया। इसके साथ ही विश्व शांति के हवन एवं गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरित मानस के सुंदर कांड का पाठ, महाभगवती पूजन, पंच आरती, प्रसाद वितरण एवं देवी भोग के कार्यक्रम भी आयोजित किये गये
शनिवार को मां नंदा के 116वें महोत्सव अवसर पर महानवमी के दिन नयना देवी मंदिर में सुबह नौ बजे महाभगवती पूजन पं. भगवती प्रसाद जोशी ने आयोजित करवाया। इसके उपरांत साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष विमल चौधरी के सपत्नीक यजमानत्व में विश्व शांति के लिए हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। आयोजन में उमेश जोशी, लक्ष्मी नारायण लोहनी, कैलाश तिवाड़ी व प्रकाश जोशी सहित अनेक पंडितों ने वेदों की ऋचाओं का मंत्रोच्चारण किया। आगे नौ कन्याओं का कन्याकुमारी नवदुर्गा के रूप में विधिवत पूजन किया गया। इधर फ्लैट मैदान में आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के द्वारा महाभंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इस मौके पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुआंे ने देर शाम तक प्रसाद ग्रहण किया। वहीं श्री राम सेवक सभा के प्रांगण में जगदीश बवाड़ी, अनूप शाही आदि की अगुवाई में लोक गीत प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन में कमलेश ढोंढियाल, गिरीश जोशी, मुकेश जोशी, मुकुल जोशी, कैलाश जोशी, विमल चौधरी, भुवन बिष्ट सहित अनेक लोग जुटे हुए हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 7 सितंबर 2019। नंदा देवी महोत्सव के दौरान धार्मिक परंपरा के निर्वहन को 100 से अधिक बकरे मंदिर परिसर में लाये गये। बकरों को पूजा के लिए मंदिर परिसर में लाने के लिए मुख्य गेट के पास पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। यहां दोपहर 12 बजे तक ही 77 बकरों का पंजीकरण हो चुका था। बकरे लाने वालों में नगर एवं निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा यूपी के मुरादाबाद सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के श्रद्धालु भी शामिल रहे। बकरों को मंदिर में पूजा के बाद घर वापस भेज दिया गया।

बलिदान की आशंका पर शिव सेना पदाधिकारी गिरफ्तार, युवा सेना ने चढ़ाया 11 किग्रा का लड्डू

नैनीताल। नंदाष्टमी के अवसर पर मंदिर परिसर में बलिदान करने की घोषणा करने वाले शिव सेना के प्रदेश महामंत्री भूपाल कार्की को पुलिस ने शुक्रवार सुबह ऐहतियात के तौर पर हिरासत में ले लिया। पुलिस उसे कोतवाली ले आई और बाद में हिदायत देकर छोड़ दिया गया। बाद में कार्की ने मंदिर के निकट बलि दिये जाने का दावा किया परंतु नगर कोतवाल ने ऐसी किसी भी घटना से पूरी तरह से इंकार किया। बताया कि कार्की को उसके पास बकरी होने की संभावना के मद्देनजर पकड़ा था, किंतु कोई बकरी नहीं मिली। इधर शिव सेना की ही युवा इकाई-युवा सेना कार्यकर्ताओं ने कुमाऊं मंडल अध्यक्ष गौरव गुप्ता व जिलाध्यक्ष, हेमंत बेदी की अगुवाई में माता नंदा-सुनंदा को 11 किग्रा का लड्डू भेंट किया। जिलाध्यक्ष हेमंत बेदी ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए यह कार्यक्रम किया गया। इस मौके पर कुलदीप सहदेव, मनीष कुमार, देवेश कुमार, हरीश चंद्रा, विक्की व कैलाश आदि युवा सेना के कार्यकर्ता भी शामिल रहे।

खोये-पायों को पुलिस ने मिलाया

नैनीताल। नंदा देवी महोत्सव में श्रद्धालुओं की काफी भीड़-भाड़ रही। मध्य रात्रि करीब डेढ़ बजे से ही श्रद्धालुओं की लाइन लगनी प्रारंभ हो गई थी, जोकि शाम तक जारी रही। दिन में मंदिर के बाहर तक लाइनें लगी रहीं। इस दौरान खासकर बच्चे व वृद्धों का अपने परिजनों से बिछुड़ने का सिलसिला भी जारी रहा। स्काउट-गाइडों ने जहां नयना देवी मंदिर में माता नंदा-सुनंदा के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं को कतार में भेजने की व्यवस्था संभाली वहीं पुलिस खोये-पायों को मिलाने में अपना योगदान देती रही। एक महिला का सोने का मंगल सूत्र सहित कई लोगों के साथ पर्स एवं अन्य कीमती वस्तुएं खोने की शिकायतें भी आईं।

रेडक्रॉस सोसायटी व राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने लगाये स्वास्थ्य शिविर

नैनीताल। नंदा देवी महोत्सव में भारत रेडक्रॉस सोसायटी जिला इकाई एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से अलग-अलग निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाये गये। रेडक्रॉस के शिविर में बीडी पांडे जिला चिकित्सालय की पीएमएस डा. तारा आर्या व ईएमओ डा. शीतांशु शर्मा ने रोगियों की रक्तचाप, मधुमेह एवं फेफड़ों की जांचें कीं एवं उन्हें निःशुल्क औषधियों का वितरण किया। साथ ही डेंगू से बचाव के पर्चे भी वितरित किये। शिविर में सोसायी के जिला सचिव आरएन प्रजापति, वीके शुक्लाख् बीसी तिवारी आदि ने प्रमुख रूप से उल्लेखनीय योगदान दिया। वहीं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के शिविर में प्राधिकरण के सदस्य डा. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा, विशेष कार्याधिकारी मो. यूसुफ, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव मो. इमरान के साथ हंस फाउंडेशन के कुमाऊं प्रभारी पदमेंद्र बिष्ट व रमाकांत चौधरी आदि की अगुवाई में जरूरतमंदों को ह्वील चेयर, बैशाखी, छड़ी, कान सुनने की मशीन एवं आंखों की जांच कर निःशुल्क चश्मों का वितरण किया गया। साथ ही डेंगू सहित सभी तरह के वायरल बुखारों की प्रतिरोधक दवा भी पिलाई गयी।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के रक्तदान शिविर में 10 ने किया महादान

नैनीताल। नंदा देवी महोत्सव के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल की ओर से बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस मौके पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव के विशेष कार्याधिकारी मो. यूसुफ के साथ प्रवेश चौधरी, उमेश मिश्रा व चेतन सिंह सहित 10 लोगों ने रक्तदान का महादान किया। इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव मो. इमरान भी रक्तदाताओं के उत्साहवर्धन हेतु मौजूद रहे। वहीं शिविर के आयोजन में जिला चिकित्सालय की पीएमएस डा. तारा आर्या, डा. प्रियांशु श्रीवास्तव, रजनीश मिश्रा, कृष्ण पाल सिंह बिष्ट व स्नेहा फर्मियाल ने भी उल्लेखनीय भूमिका निभाई।

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-‘जै भगौति नंदा’ के जयकारों से गूंजी सरोवरनगरी
-सुबह तड़के ब्रह्म मुहूर्त से हजारों श्रद्धालुओं ने नवाऐ शीश

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 सितंबर 2019। ‘जै मां जै, जै भगौति नंदा, जै मां ऊंचा कैलाश की’ के जयकारों से सरोवरनगरी आज पूरे दिन गुंजायमान रही। सरोवरनगरी नैनीताल एवं आसपास के गांवों के हजारों श्रद्धालु आज मानो धन्य हो गए। एक वर्ष के लंबे इंतजार के बाद उनकी मनमांगी मुराद पूरी हुई। लोगों में अटूट आस्था व श्रद्धा बरसाने वाली मां नंदा-सुनंदा पवित्र कदली वृक्षों से अपने भक्तों के द्वारा परंपरागत ‘प्राकृत पर्वताकार’ स्वरूप में शुक्रवार सुबह ब्रह्ममूहूर्त में जैसे ही प्रकट हुईं, श्रद्धालुओं के जैकारे से आसमान गूंज गया। फिर तो पूरे दिन के लिए मां के सच्चे दरबार में जैसे भक्तों का रेला उमड़ आया। आगे अगले दो दिन इसका ऐसे ही रहना तय है।
माता नयना की नगरी नैनीताल में एक बेटी की तरह करीब चार दिन के लिए अपने मायके आयीं माता नंदा-सुनंदा ने शुक्रवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में दर्शन दे दिए हैं। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में माता अपने भक्तों के द्वारा ही कदली दलों से तैयार हो कर प्राकृत पर्वताकार में प्रकट हुईं। उनकी प्राण-प्रतिष्ठा की पूजा श्रीराम सेवक सभा के अध्यक्ष मनोज साह के सपत्नीक यजमानत्व में पंडित भगवती प्रसाद जोशी द्वारा सुबह ब्रह्म मुहूर्त में कराई गयी। इसके उपरांत नयना देवी मंदिर में रखे गए पंडाल से उन्होंने देर रात्रि से ही भजन- कीर्तनों में जमे सैकड़ों श्रद्धालुओं को दिव्य दर्शन दिए। सुबह तड़के ब्रह्म मूहूर्त में साढ़े तीन बजे से मां नंदा व सुनंदा की कदली वृक्ष से बनाई गई मूर्तियों को मां नयना देवी मंदिर परिसर में बनाऐ गए पारंपरिक दरबार में रखा गया, और प्राण प्रतिष्ठा की प्रक्रिया शुरू हुई। इससे पूर्व रात्रि डेढ़-दो बजे से ही श्रद्धालु मंदिर में आने शुरू हो गए दे। आखिर लगभग दो घंटे के लंबे इंतजार के बाद मां के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले गए। सैकड़ों श्रद्धालु इस अलौकिक मौके पर मां के प्रथम दर्शनों के साक्षी बने। पूरे दिन मंदिर में श्रद्धालुओं के उमड़ने का सिलसिला जारी रहा। माता का मुस्कुराता हुआ सुंदर चेहरा देख श्रद्धालु आनंदित हो रहे थे। उधर मंदिर के पास ही भंडारा भी जारी है। आयोजन में प्रवीण साह, किशन लाल साह, रमेश लाल साह, पुष्कर लाल साह, घनश्याम लाल साह, गिरीश जोशी, कैलाश जोशी, विमल चौधरी, भीम सिंह कार्की, अनिल बिनवाल, भुवन बिष्ट, विवके साह, राजेंद्र बजेठा, मनोज साह आदि जुटे रहे। वहीं भंडारे में मुकेश जोशी, प्रवीण बिष्ट, खुशाल रावत, रितेश साह, कमलेश ढोंढियाल व घनश्याम भट्ट के साथ व्यवस्थाओं में सभा के अध्यक्ष मनोज साह, अनूप शाही, राजेंद्र लाल साह, डा. मोहित सनवाल, हरीश पंत व जगदीश बवाड़ी आदि भी जुटे रहे।

श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ सज-संवर गयीं माता नंदा-सुनंदा, करें सबसे पहले दर्शन ‘नवीन समाचार’ पर

-पूरी तरह से ईको-फ्रेंडली तरीके से हुआ है मूर्तियों का निर्माण

माता नंदा-सुनंदा 2019
माता नंदा-सुनंदा 2019

नवीन समाचार, भीमताल, 5 सितंबर 2019। माता नयना की नगरी नैनीताल में एक बेटी की तरह करीब 4 दिन के लिए अपने मायके आयीं माता नंदा-सुनंदा श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ सज-संवर गई हैं। अब वे शुक्रवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत नयना देवी मंदिर स्थित पंडाल में श्रद्धालुओं को दर्शन देंगी। शुक्रवार को सेवा समिति भवन में आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के चंद्र प्रकाश साह, महासचिव राजेंद्र लाल साह, नवीन लाल साह, संतोष पाण्डेय, हीरा सिंह, गोविन्द सिंह, गोधन सिंह, हरीश पंत, कुंदन नेगी, किशन गुरुरानी, ललित मोहन साह, पुष्कर लाल साह, सागर सोनकर, पुष्कर लाल साह व कोमल आदि कार्यकर्ता सुबह 9 बजे से ही मूर्ति निर्माण के कार्य में जुटे रहे। इसके उपरांत मूर्तियों में रंग भरने का कार्य मोनिका साह, आरती संभल व श्वेता के द्वारा किया गया। मूर्तियों के निर्माण में बीते कुछ वर्षों की तरह पूरी तरह ईको-फ्रेंडली पदार्थों, कदली वृक्षों के साथ बांश की खपच्चियां, सूती कपड़े, पाती के पत्ते, रुई, धागे एवं प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग किया गया है, ताकि नैनी झील में विसर्जन के उपरांत भी इससे पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान न हो। उधर नयना देवी मंदिर परिसर में पंडाल निर्माण का कार्य सभा के महासचिव मनोज साह की अगुवाई में हुआ, जबकि मंदिर परिसर में पूर्व अध्यक्ष मुकेश जोशी की अगुवाई में भंडारा भी प्रारंभ हो गया। भंडारे व अन्य आयोजनों में प्रदीप बिष्ट, खुशाल सिंह, दिनेश जोशी, घनानंद भट्ट, कमलेश ढोंढियाल, कैलाश जोशी, जगदीश बवाड़ी व हिमांशु जोशी आदि कार्यकर्ता भी जुटे रहे।

झूले, मौत का कुआं एक दिन पहले ही चलने प्रारंभ

नैनीताल। फ्लैट्स मैदान में नगर पालिका प्रशासन की ओर से आयोजित किये जा रहे मेले में झूलों व मौत के कुंए आदि का चलना बुधवार से ही प्रारंभ हो गया है, जबकि पूर्व में मेला नंदाष्टमी के दिन से ही शुरू होता था। अलबत्ता, मेले में दुकानों के महंगी होने के आरोप भी लग रहे हैं। स्वयं नगर पालिका के लोग भी यह आरोप लगाते देखे गये। मेले में 18 हजार रुपए तक महंगी दुकानें मिलने की बात कही जा रही है।

एसडीएम की अगुवाई में प्रशासनिक अधिकारियों ने डॉग स्क्वॉड के साथ लिया मेले का जायजा

नैनीताल। एसडीएम विनोद कुमार की अगुवाई में प्रशासनिक अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को डॉग स्क्वॉड के साथ मेले का जायजा लिया। इस दौरान खास तौर पर मंदिर एवं मेला परिसर में सुरक्षा व्यवस्था एवं सफाई एवं पॉलीथीन का प्रयोग न करने के बाबत दुकानदारों को निर्देश दिये गये। वहीं नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी ने स्वास्थ्य अधिकारी को मेले में प्लास्टिक का प्रयोग व गंदगी करने वालों का चालान करने के निर्देश दिये। इस मौके पर नगर पालिका के अध्यक्ष सचिन नेगी, अधिशासी अधिकारी अशोक कुमार वर्मा, सीओ विजय थापा, नगर कोतवाल अशोक कुमार सिंह व कर अधीक्षक लता आर्या आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। महोत्सव व मेले में तैनात पुलिस बल को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये।

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-शिव सेना के प्रदेश महासचिव पर कार्रवाई के बाद टला बलिदान का कार्यक्रम
नवीन समाचार, नैनीताल, 5 सितंबर 2019। नंदा देवी महोत्सव में बलि देने की घोषणा करने वाले शिव सेना के प्रदेश महासचिव व पूर्व सभासद भूपाल कार्की को परगना मजिस्ट्रेट नैनीताल की अदालत ने पाबंद कर दिया है। उनके खिलाफ यह कार्रवाई मल्लीताल कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक की चालानी रिपोर्ट पर की गई है। उन्हें 20-20 हजार रुपए के जातीय मुचलके और इतनी ही धनराशि की एक-एक जमानत पर छःमाह के लिए पाबंद किये जाने के लिए बृहस्पतिवार को न्यायालय में तलब किया गया। इस पर कार्की ने हालांकि अपने अधिवक्ता के माध्यम से परगना मजिस्ट्रेट नैनीताल की अदालत में अपना जवाब दाखिल कर दिया है, जिसमें प्रभारी निरीक्षक की रिपोर्ट को झूठे व मनगढ़ंत तथ्यों पर आधारित बताते हुए वाद को निरस्त करने की मांग की गयी है। कहा है कि उन्हें पता है कि उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुसार मंदिर परिसर में किसी भी जानवर की बलि देना पूर्णतया प्रतिबंधित है। कुछ दिन पूर्व उनके द्वारा अपने संगठन के माध्यम से प्रभारी निरीक्षक मल्लीताल को हिंदूओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान रखते हुए नैना देवी मंदिर के निकट किसी उचित स्थान पर स्लॉटर हाउस या पर्दा व्यवस्था में पूर्व से चली आ रही परंपरा को व्यवस्थित करने संबंधी एक प्रत्यावेदन दिया गया था। आरोप लगाया गया है कि प्रभारी निरीक्षक ने इस प्रत्यावेदन का बिना अवलोकन किये, अन्य समुदाय के दबाव में आकर खारिज कर दिया और परगना मजिस्ट्रेट के समक्ष लोगों को बलि के लिए उकसाने वाली बात प्रस्तुत कर दी, जोकि गलत है। बताया जा रहा है कि इसके साथ ही शिव सेना ने गत दिनों नंदाष्टमी के दिन जानवर के बलिदान का अपना घोषित कार्यक्रम फिलहाल वापस ले लिया है।

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-सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं, महिलाओं, छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक वस्त्रों में सजकर कराया नगर भ्रमण’

माता नयना की नगरी में कदली स्वरूप में पहुंचीं मां नंदा-सुनंदा को नगर भ्रमण कराते नगरवासी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 4 सितंबर 2019। एक वर्ष के लंबे अंतराल और एक-एक दिन गिनने के बाद आखिर वह दिव्य पल आ गए जब राज्य की कुलदेवी मां नंदा और सुनंदा पवित्र कदली दलों (केले के वृक्षों) के स्वरूप में माता नयना की नगरी में लौट आईं। अब वह अगले 4 दिनों तक एक बेटी के रूप में अपने मायके में रहेंगी। उनके आगमन पर आज नगर के सभी श्रद्धालु हर्षित हो उठे। उनके नगर भ्रमण में सैकड़ों लोगों, खासकर महिलाओं की भीड़ पारंपरिक परिधानों में उमड़ी, जबकि बड़ी संख्या में नगर वासियों ने सड़क किनारे और घरों की बुर्जों से भी उनके दर्शन करते हुऐ उनका अक्षत अर्पित करते हुए स्वागत किया।
बुधवार को पवित्र कदली वृक्षों के रूप में मां नंदा-सुनंदा का पहली बार गौलापार हल्द्वानी के ग्राम देवला मल्ला से आकर सबसे पहले सूखाताल और फिर तल्लीताल स्थित मां वैष्णो देवी मंदिर में स्वागत हुआ। वैष्णवी देवी मंदिर समिति के सदस्यों के द्वारा बीते कई वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत कदली वृक्षों की पूजा अर्चना की गई, व श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया। यहां से शक्ति स्वरूपा मां नंदा-सुनंदा कदली वृक्षों के रूप में नगर भ्रमण पर निकलीं। तल्लीताल धर्मशाला और बाजार से पारंपरिक रंग्वाली लहंगे-पिछौड़े में सजीं नगर की महिलाओं और सरस्वती शिशु मंदिर, बालिका विद्या मंदिर, एशडेल, निशांत, नैनी पब्लिक स्कूल व जीजीआईसी आदि अनेक स्कूलों की छात्राएं कुमाऊं के परंपरागत घाघरा व रंग्वाली पिछौड़ा के वस्त्रों में सजकर और कई माता नंदा-सुनंदा के रूप में आत्मसात होकर कलश यात्रा में ‘जै मां नंदा सुनंदा तेरी जै जैकारा’ व ‘जै भगोती नंदा’ के गगनभेदी नारे व भजन-कीर्तनों से साथ चल रही थीं। सबसे आगे शांति का प्रतीक धवल श्वेत तो सबसे पीछे विजय के लिए क्रांति का संदेश देता लाल ध्वज पारंपरिक रूप में चल रहा था। माता अभी नगर भ्रमण करते हुऐ माल रोड से नैनी सरोवर का चक्कर लगाते हुए मल्लीताल पहुंची है, जहां से वह आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के कार्यालय प्रांगण-रामलीला मैदान में विश्राम के उपरांत आकर्षक प्राकृत पर्वताकार मूर्ति स्वरूप में परिवर्तित होने के लिए नयना देवी मंदिर के समीप सेवा समिति भवन पहुंचेगी, जहां बृहस्पतिवार को इनसे माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियों को निर्माण किया जाएगा, और शुक्रवार की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में मूर्तियों को नयना देवी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा जाएगा। शोभायात्रा में श्रीराम सेवक सभा के पदाधिकारी एवं नगर के बड़ी संख्या में श्रद्धालु व गणमान्य लोग शामिल रहे। शोभायात्रा में सभा के उपाध्यक्ष अनूप शाही, अध्यक्ष मनोज साह, महासचिव राजेंद्र लाल साह, कमलेश ढोंढियाल, कैलाश जोशी, मुकुल जोशी, भीम सिंह कार्की, राजेंद्र बजेठा सहित विक्की राठौर, भास्कर महतोलिया व भुवन बिष्ट आदि प्रमुखता से मौजूद रहे। कुछ विदेशी सैलानी भी शोभायात्रा का आनंद लेते देखे गये। इस दौरान रात्रि में हमेशा की तरह रंग-बिरंगी रोशनियों से सुंदर तरीके से सजे नयना देवी मंदिर और इस अवसर पर लगे मेले का नजारा बेहद सुंदर व दर्शनीय नजर आ रहा है।

8 को बंद रहेंगे नैनीताल के मदिरालय व बार

नैनीताल। डीएम सविन बंसल ने नगर में चल रहे माता नंदा देवी के महोत्सव के दौरान शान्ति व्यवस्था बनाए रखने के लिए शोभा यात्रा (डोला भ्रमण) की तिथि 8 सितंबर को नैनीताल शहर में देशी व विदेशी मदिरा की दुकानों, क्लब, रेस्टारेंटों व होटलों के बारों को प्रातः 10 से सायं 7 बजे तक बंद रखने के आदेश जारी किये हैं। उन्होंने कहा है कि आदेश का शत-प्रतिशत अनुपालन न करने वाले अनुज्ञापी के विरूद्ध तत्काल आबकारी अधिनियम के अन्तर्गत कठोर कार्यवाही अमल में लायी जाये।

महोत्सव में आयोजकों की ओर से अपेक्षित उत्साह की कमी

नैनीताल। नंदा देवी महोत्सव में आयोजकों की ओर से अपेक्षित उत्साह में कमी देखी जा रही है। वरिष्ठ कार्यकर्ता भी इधर-उधर नजर आ रहे हैं। उनमें जिम्मेदारियों का अभाव दिख रहा है। यहां तक कि पहली बार प्रेस के सदस्यों एवं अन्य गणमान्य लोगों को महोत्सव के लिए आमंत्रण भी नहीं भेजे गये। पहली बार महोत्सव के कार्यक्रमों की जानकारी देने के लिए प्रेस वार्ता भी आयोजित नहीं हुई। महोत्सव के शुभारंभ के कार्यक्रम में अपेक्षित सम्मान, यहां तक कि पानी भी न मिलने से डीएम और एसएसपी के भी नाराज होकर आधे कार्यक्रम से ही लौट जाने की भी खबर है। यह स्थिति तब है जबकि आयोजक संस्था अपना शताब्दी वर्ष मना रही है, और गत वर्ष शताब्दी वर्ष को भव्य तरीके से मनाने की बात कही गयी थी। संस्था पिछले वर्ष अपनी स्मारिका का विमोचन नहीं कर पाई थी, अभी भी स्मारिका के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

यह भी पढ़ें : 116वें नंदा देवी का भव्य शुभारंभ, करोड़ों के तोहफों की भी मिली जानकारी…  नवीन समाचार, नैनीताल 3 सितम्बर 2019। वैदिक मंत्रो एवं धार्मिक अनुष्ठान के बीच मंगलवार को माॅ नन्दा-सुनन्दा महोत्सव का क्षेत्रीय सांसद अजय भट्ट, विधायक संजीव आर्य, पालिकाध्यक्ष सचिन नेगी, जिलाधिकारी सविन बंसल व एसएसपी सुनील कुमार मीणा द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इसके साथ ही माॅ नन्दा-सुनन्दा के धार्मिक ध्वज प्रदान किए गए। इस अवसर पर स्कूली बच्चों द्वारा माॅ नन्दादेवी की स्तुति वन्दना कर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
कार्यक्रम में संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि सांसद अजय भट्ट ने नन्दादेवी महोत्सव की क्षेत्रवासियों को शुभकामानाऐं देते हुए सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करने व सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि नन्दा महोत्सव का 116 वर्ष पुराना इतिहास है। उन्होंने महोत्सव शुरू करने वाले पूर्वजों की प्रशंसा करते हुए इस परम्परा को संजोकर रखने व आगे बढ़ाने हेतु हम सभी को आगे आना चाहिए। उन्होंने राम सेवक सभा की सराहना करते हुए 5 लाख की धनराशि राम सेवक सभा को व 5 लाख की धनराशि निर्माणाधीन भवन को पूर्ण करने हेतु सेवा समिति को देने की घोषणा की, साथ ही उन्होंने नैनीताल नन्दा देवी महोत्सव को जो सी श्रेणी में है, उसे अगले वर्ष ए श्रेणी में किए जाने का आश्वासन देते हुए कहा कि मेले को राजकीय मेला घोषित किए जाने का प्रयास किया जाए। उन्होंने कहा कि नैनी झील, बलियानाला संरक्षण कार्य व पार्किंग हेतु संसद में बात रखी थी, आगे भी इस बात को पुख्ता तरीके से रखेंगे।
सम्बोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य ने नन्दा देवी महोत्सव की बधाई देते हुए सभी की सुख-समृद्धि व मेला सफलता की कामना की। उन्होंने राम सेवक सभा को 5 लाख रूपये देने के साथ ही नैनीताल शहर की आन्तरिक सड़को के निर्माण हेतु 1 करोड़ रुपये विधायक निधि से देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि शहर में वाहनो के बढ़ते दबाव को देखते हुए नारायण नगर में बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जिसके लिए भूमि चयनित है व शासन द्वारा 85 करोड़ रूपये की धनराशि प्रस्तावित की गयी है। उन्होंने कहा कि शहर में जनसंख्या के बढ़ते हुए दबाव को देखते हुए एडीबी के माध्यम से 65 करोड़ की धनराशि से रूसी गाॅव में एसटीपी बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसी तरह नगर वासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कोसी नदी पर बैराज एवं पम्पिंग योजना का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। उन्होंने सांसद से नन्दा देवी मेले को राजकीय मेला घोषित कराने की मांग रखी व बलियानाले का स्थायी उपचार कराने में केन्द्र सरकार से मदद दिलाने की मांग की।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मलार्थियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है, जिसके लिए मेले में पर्याप्त सुरक्षा बल के साथ ही सादी वर्दी में एलआईयू, सीसीटी कैमरे द्वारा पैनी नज़र रखी जाएगी। हेमन्त बिष्ट, नवीन पाण्डे, मीनाक्षी कीर्ति ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का सचालन किया।
इस अवसर पर राम सेवक सभा के अध्यक्ष मनोज लाल शाह, उपाध्यक्ष अनूप शाही, महासचिव राजन लाल शाह, पूर्व अध्यक्ष मुकेश जोशी मन्टू, कमलेश ढोडियाल, गोपाल रावत, शांति मेहरा, भानू पन्त, जीएल शाह, मुन्नी तिवारी, विवेश साह, प्रदीप बिष्ट, आनन्द दरम्वाल, मुकुल जोशी सहित बड़ी संख्या में सभा के सदस्य एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।

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-आयोजक संस्था द्वारा बुलाई गई नगर के बुद्धिजीवियों की बैठक में नंदा-सुनंदा की मूर्तियों के साथ सेल्फी लेने पर रोक लगाने पर हुआ विचार, संस्था ने भी कहा करेंगे विचार, आय बढ़ाने पर भी हुई चर्चा
नवीन समाचार, नैनीताल, 11 अगस्त 2019। आगामी 3 सितंबर से मुख्यालय में आयोजित होने जा रहे 118वें नंदा देवी महोत्सव में इस बार माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियों के साथ सेल्फी लेने पर रोक लगाई जा सकती है। रविवार को आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के मुख्यालय स्थित सभागार में बुलाई गई नगर के बुद्धिजीवियों की बैठक में इस बाबत कई लोगों द्वारा विचार रखे जाने की बात कही गयी है। बताया गया है कि नगर की जनहित संस्था के कुछ प्रतिनिधियों एवं कुछ अन्य लोगों के द्वारा इस बारे में विचार रखा गया। कहा गया कि मूर्तियों के साथ सेल्फी लेना परंपरा में नहीं है, और परंपरा के खिलाफ है। इस पर सभा की ओर से भी विचार करने की बात कही गयी।
इसके अलावा संस्था के समक्ष आर्थिक संकट की बात भी प्रमुखता से उठी। कई लोगों ने आय बढ़ाने के लिए आम लोगों से चंदा जुटाने की बात कही। वहीं भाजपा से जुड़े लोगों ने सरकार के स्तर पर सभा की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए प्रयास करने की बात कही। बैठक में सभा के अध्यक्ष मनोज साह, कोषाध्यक्ष अनूप शाही, महासचिव राजेद्र लाल साह, विमल चौधरी, देवेंद्र लाल साह, मुकेश जोशी, पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल व सरिता आर्या, नवीन चंद्र साह, मंजू रौतेला, जगदीश लोहनी, हेम आर्या, यशपाल रावत, प्रो. जीएल साह, अरविंद पडियार व मनोज जोशी सहित विभिन्न संगठनों के लोग मौजूद रहे।

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-माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियों के निर्माण के लिए जनपद के प्रगतिशील किसान, हल्द्वानी के गौलापार खेड़ा निवासी नरेंद्र सिंह मेहरा के घर से आगामी 4 सितंबर को लाये जाएंगे दो कदली वृक्ष
नवीन समाचार, नैनीताल, 5 अगस्त 2019। सरोवरनगरी नैनीताल में पिछले 115 वर्षों से, बीच में दो विश्व युद्धों के बावजूद लगातार आयोजित हो रहे ऐतिहासिक नंदा देवी महोत्सव हेतु पहली बार हल्द्वानी क्षेत्र के गौलापार खेड़ा क्षेत्र से कदली वृक्ष लाए जाएंगे। महोत्सव की आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के पूर्व अध्यक्ष मुकेश जोशी ने कदली दलों के चयन की पुष्टि करते हुए बताया कि इस वर्ष माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियों के परंपरागत तरीके से निर्माण के लिए दो कदली दल गौलापार खेड़ा के ग्राम देवला मल्ला निवासी प्रगतिशील किसान नरेंद्र मेहरा के घर से लाने का निर्णय लिया गया है। उल्लेखनीय है कि नरेंद्र मेहरा गत वर्ष अन्य गेहूं की किस्मों के मुकाबले दो से तीन गुना अधिक उत्पादन करने वाली ‘नरेंद्र-09’ नाम के एक ऐसे नये गेहूं की नस्ल एवं सहखेती का ‘नरेंद्र पैटर्न’ विकसित के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के कई पुरस्कार एवं सम्मान भी प्राप्त कर चुके हैं। श्री मेहरा ने कहा कि यह उनके लिए ही पूरे गौलापार क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। तीन सितंबर की रात्रि पूजा, धार्मिक आयोजन के बाद जब चार सितंबर को माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियां निर्माण के लिए दो कदली दल उनके घर से ले जाए जाएंगे, उनकी खेड़ा चौराहा तक भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाएगी, जिसमें पूरे गौलापार क्षेत्र की भागीदारी भी कराई जाएगी।

नरेंद्र मेहरा

नरेंद्र-09 प्रजाति के एक पौधे के साथ नरेंद्र मेहरा।

प्रगतिशील किसान नरेंद्र मेहरा के बारे में इस लिंक पर और जानें …

2017 की तरह नगर पालिका आयोजित करेगी मेला, राम सेवक सभा करेगी महोत्सव

नैनीताल। पिछले वर्षों में कुछ विवादों के बाद इस वर्ष नंदा देवी महोत्सव के आयोजन पर सोमवार को स्थिति पूरी तरह से साफ हो गयी है। इस वर्ष महोत्सव 2017 की तर्ज पर होगा। महोत्सव के मूल धार्मिक पक्ष से जुड़े आयोजनों को नगर की धार्मिक-सामाजिक संस्था श्री राम सेवक सभा आयोजित करेगी, जबकि बाहरी मेले, बिजली की सजावट, तोरणद्वार, साफ-सफाई के साथ ही मंडप निर्माण जैसे कार्य 2017 की तरह नगर पालिका के द्वारा आयोजित किये जाएंगे। सोतवार को नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी की अध्यक्षता में पालिका सभासदों एवं अधिकारियों की बैठक में इस बाबत कई बातें साफ हो गयीं। बताया गया कि महोत्सव के तहत लगने वाले मेले में स्टॉल 2017 की तरह चार श्रेणियों के 650 स्टॉल लगाए जाएंगे। इनमें से 50 स्टॉल स्वयं सेवी संस्थाओं को निःशुल्क लिये जाएंगे। वहीं स्टॉलों की अधिकतम दर 2017 के 20 हजार की दर से 10 फीसद की बढ़ोत्तरी के साथ अधिकतम 22 हजार होगी। मेले में चार पानी के एटीएम, मोबाइल शौचालय लगाए जाएंगे तथा दो हाईमास्ट लाइटों को एलईडी लाइटों से रोशन किया जाएगा। यह भी कहा गया कि मेले का व्यवसायीकरण नहीं किया जाएगा, बल्कि मेले में आने वाले दुकानदारों के साथ ही स्थानीय व बाहरी मेलार्थियों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। राम सेवक सभा को इससे अधिक भी कहीं मदद की जरूरत होगी तो पालिका हर तरह का सहयोग करेगी, किंतु सभा को किसी तरह का आर्थिक सहयोग नहीं देगी। सभा को मुख्य मंडप में आने वाले चढ़ावे से ही भंडारे व अन्य आयोजनों की व्यवस्था करनी होगी। आगे महोत्सव की अन्य व सभी व्यवस्थाओं के लिए 15 अगस्त के बाद प्रशासन के साथ ही एक बैठक की जाएगी।

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-नंदा देवी महोत्सव व रामलीला के लिए समितियां गठित, जिम्मेदारियां बांटीं

नंदा-सुनंदा – 2017

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 जुलाई 2019। नगर की सबसे पुरानी धार्मिक-आध्यात्मिक संस्था श्रीराम सेवक सभा के तत्वावधान में आयोजित होने वाला श्री नंदा देवी महोत्सव इस वर्ष तीन से आठ सितंबर के बीच मनाया जाएगा। तीन सितंबर पंचमी को महोत्सव का शुभारंभ होगा और सभा के कार्यकर्ताओं का दल कदली वृक्षों को लाने के लिए रवाना होगा। 4 सितंबर को कदली वृक्षों का आगमन पर नगर भ्रमण होगा। पांच को मूर्ति निर्माण के उपरांत 6 सितंबर को अष्टमी के दिन मूति स्थापना, 7 को कन्या पूजन, हवन, भंडारा व सुंदरकांड तथा आठ सितंबर को माता का डोला भ्रमण यानी शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान प्रतिदिन राम सेवक सभा परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।
इधर सभा के द्वारा मंगलवार से ही आगामी नंदा देवी महोत्सव व रामलीला के लिए तैयारी प्रारंभ कर दी गयी है। मंगलवार को सभा के अध्यक्ष मनोज साह की अध्यक्षता में हुई सभा की बैठक में नंदा देवी महोत्सव के लिए 12 विभिन्न समितियां गठित कर उन्हें जिम्मेदारियां सोंप दी गयीं, वहीं रामलीला के लिए उपाध्यक्ष अनूप शाही को संयोजक तथा कृष्ण कांत साह को निर्देशक नियुक्त किया गया। बैठक में सचिव राजेंद्र लाल साह, विमल चौधरी, देवेंद्र लाल साह, गिरीश जोशी सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

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नैनीताल, 22 सितंबर 2018। नगर में गत दिनों आयोजित हुए नंदा देवी महोत्सव के लिये डीएसए कार पार्किंग में बांस से बनाया गया मुख्य स्वागत द्वार रात्रि में ढह गया है। इसका कारण तेज बारिश और तेज हवाओं का चलना माना जा रहा है। गनीमत रही कि घटना रात्रि करीब 10 बजे हुई। अन्यथा इस स्थान पर खड़े होने वाले पार्किंग कर्मियों के साथ कोई अनहोनी हो सकती थी। बावजूद द्वार गिरने से पार्किंग में खड़े कम से कम 4 पर्यटक वाहन क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पार्क का निर्माण जिला प्रशासन के द्वारा करवाया गया था, और इसे मेला समाप्त होने के 3 दिन बाद भी नहीं हटाया गया था।

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-महोत्सव के दौरान लगे निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में दो वर्ष पहले के 2200 की जगह इस बार केवल 1032 ने ही कराई स्वास्थ्य जांच

नैनीताल। नंदा देवी महोत्सव के तहत तीन दिनों तक जिला रेडक्रॉस समिति के तत्वावधान में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया था। बताया गया है कि इस दौरान शिविर में कुल 1032 लोगों ने अपना ब्लड प्रेशर व शुगर आदि की निःशुल्क जांचें कर स्वास्थ्य परीक्षण कराया। इनमें से 122 लोगों को शुगर एवं 132 को ब्लड प्रेसर बढ़ा हुआ पाया गया। इनमें अकेले अपर निदेशक डा. तारा आर्या ने 712 लोगों की जांच की। बताया गया कि इस बार पिछले तीन वर्षों के मुकाबले जांच कराने वाले लोगों की संख्या आधे से भी कम रही। इससे पहले वर्ष 2016 में 2200 व वर्ष 2017 में 1800 लोगों ने स्वास्थ्य जांच कराई थी। इसका कारण मेले का प्रबंधन श्रीराम सेवक सभा से पहले नगर पालिका और अब जिला प्रशासन के पास जाने के बाद 2 वर्षों में मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में आयी कमी को बताया गया है। शिविर में डा. एमएस दुग्ताल, डा. पीडी गुप्ता, डा. उमा रावत, डा. मिश्रा वएवं आईके जोशी, मुस्तकीन, सपना आर्या, रूही तबस्सुम, डीके डालाकोटी आदि ने सहयोग किया। साथ ही जिला रेडक्रास समिति के चेयरमैन सीएस रावत, वाइस चेयरमैन मुन्नी तिवारी, आरएन प्रजापति, बीसी तिवारी, वीके शुक्ला, शंकर बोरा, कल्पना बोरा, चंचला बिष्ट, सुरेश गुरुरानी, डा. सरस्वती खेतवाल, पवन कुमार, नीरज जोशी, मनमोहन कनवाल आदि का भी सहयोग रहा।

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‘नवीन समाचार’ पर कीजिये माता ‘नंदा-सुनंदा’ की शोभायात्रा  के दर्शन

नैनीताल, 19 सितंबर 2018। पांच दिन पूर्व कदली दलों के रूप में अपने मायके की तरह माता नयना की नगरी में पधारीं और बीते तीन दिनों से नगर वासियों को अपनी सुंदर प्राकृत पर्वताकार छवि में दर्शन दे रहीं माता नंदा-सुनंदा के बुधवार को विदा होने की घड़ी आ गयी। इस अवसर पर माता अपने डोले पर नगर भ्रमण पर शोभायात्रा के रूप में निकल रही हैं। आयोजक श्रीराम सेवक सभा की अगुवाई में सभा के पदाधिकारियों एवं वर्षों से माता के डोले को कंधा दे रहे श्रद्धालुओं के कंधों पर माता दोपहर करीब साढ़े बजे माता नयना देवी के मंदिर से निकलीं, और आगे अपने परंपरागत मार्ग में बौद्ध धर्मावलंबियों के तिब्बती मार्केट, गुरुद्वारा गुरुसिंह सभा, मेला क्षेत्र, जामा मस्जिद, आर्य समाज मंदिर और मैथोडिस्ट चर्च आदि के साथ ही गत 18 अगस्त को ध्वस्त हुई लोअर मॉल रोड के अपने परंपरागत मार्ग से शान से गुजरते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन दे रही हैं। इस मौके पर श्रद्धालुओं में उनके दर्शनों के लिए गजब का उत्साह दिखाई दे रहा है। खासकर महिलाएं उन्हें अक्षत और भेंट चढ़ा रही हैं। सड़क के दोनों और उनकी शोभायात्रा में शामिल लोगों का मेला लगा हुआ है। लोग उनकी एक झलक पाने और उनके डोले को छूने को लालायित हो उमड़ रहे हैं। शोभायात्रा में अनेक झांकियां जहां उत्साह बढ़ा रही हैं, वहीं उत्साह भी बढ़ा रहे हैं।

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  • गत वर्षों में नंदाष्टमी को पूरे दिन का डीएम के स्तर से स्थानीय अवकाश व डोला विसर्जन के दिन नगर के साथ ही निकटवर्ती क्षेत्रों में भी रहता था आधे दिन का अवकाश 

नैनीताल, 18 सितंबर 2018। डीएम विनोद कुमार सुमन ने 19 सितंबर को माता नंदा देवी महोत्सव के तहत डोला भ्रमण के अवसर पर मुख्यालय क्षेत्र के सभी शासकीय, अर्धशासकीय व निजी विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया है। डीएम की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि नैनीताल में जिला प्रशासन के द्वारा 14 से 19 सितंबर 2018 के मध्य मां नंदा देवी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 19 को मां नंदा देवी का डोला नगर भ्रमण करते हुए शाम 7 बजे पाषाण देवी मंदिर के समीप से विसर्जित किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि गत वर्षों में नंदाष्टमी (इस वर्ष 17 सितंबर) को पूरे दिन का डीएम के स्तर से स्थानीय अवकाश रहता था। किंतु इस वर्ष इसी दिन विश्वकर्मा पूजा का अवकाश रहने के कारण यह अवकाश अलग से नहीं दिया गया। वहीं डोला विसर्जन के दिन नगर के साथ ही निकटवर्ती क्षेत्रों में भी आधे दिन का अवकाश रहता था। इस वर्ष नगर क्षेत्र में तो अवकाश आधे के बजाय पूरे दिन का रहेगा, अलबत्ता निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के मेला-महोत्सव में हर वर्ष आने वाले ग्रामीणों को इस अवकाश का लाभ नहीं मिलेगा।

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नैनीताल, 17 सितंबर 2018। माता नयना की नगरी नैनीताल में एक बेटी की तरह सप्ताह भर के लिए अपने मायके आयीं माता नंदा-सुनंदा ने सोमवार सुबह तड़के दर्शन दे दिए हैं। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में माता अपने भक्तों के द्वारा ही कदली दलों से तैयार हो कर प्राकृत पर्वताकार में प्रकट हुईं। उनकी प्राण-प्रतिष्ठा की पूजा श्रीराम सेवक सभा के महासचिव राजेन्द्र लाल साह व उनकी धर्मपत्नी आभा साह के यजमानत्व में पंडित भगवती प्रसाद जोशी व आचार्य जगदीश लोहनी द्वारा सोमवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में कराई गयी। इसके उपरांत नयना देवी मंदिर में रखे गए पंडाल से उन्होंने देर रात्रि से ही भजन- कीर्तनों में जमे सैकड़ों श्रद्धालुओं को दिव्य दर्शन दिए।

इस दौरान माहौल बेहद भक्तपूर्ण रहा।

इससे पूर्व रविवार को सेवा समिति भवन में आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के चंद्र प्रकाश साह, नवीन लाल साह, संतोष पाण्डेय, हीरा सिंह, गोविन्द सिंह, गोधन सिंह, हरीश पंत, कुंदन नेगी, किशन गुरुरानी, ललित साह, पुष्कर लाल साह, सागर, मोहित साह, दीप गुरुरानी व भोला वर्मा आदि कार्यकर्ता सुबह 9 बजे से ही मूर्ति निर्माण के कार्य में जुट गये थे। इसके उपरांत करीब 2 बजे से मूर्तियों में रंग भरने का कार्य मोनिका साह व आरती संभल आदि के द्वारा किया गया। उधर नयना देवी मंदिर परिसर में पंडाल निर्माण का कार्य भी तेजी से किया गया। मंदिर परिसर में छोलिया नर्तक भी लोक संस्कृति के रंग भरे रहे।

इधर फ्लैट्स मैदान में जिला प्रशासन की ओर से आयोजित किये जा रहे मेले में झूलों का चलना प्रारंभ हो गया है, जबकि पूर्व में मेला नंदाष्टमी के दिन से ही शुरू होता था। अलबत्ता, मेले में दुकानों के महंगी होने के आरोप लगाते हुए कई बाहरी दुकानदारों के लौटने तथा मेला ठेकेदार के भी हाथ खींचने की खबर है। मेले में स्थानीय दुकानदारों को 11 हजार रुपए में जबकि बाहरी दुकानदारों को महंगी दुकानें दिये जाने के प्राविधान किये गये थे। ऐसे में कुछ स्थानीय लोगों द्वारा सस्ती दुकानें लेकर उन्हें बाहरी लोगों को महंगे में किराये पर देने के आरोप भी लग रहे हैं।

एक वर्ष के इंतजार के बाद माता ‘नयना की नगरी’ में कदली स्वरूप में लौट आईं माता ‘नंदा-सुनंदा’

-तीन वर्ष बाद बिना वर्षा के सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं, महिलाओं, छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक वस्त्रों में सजकर कराया नगर भ्रमण

माता नयना की नगरी में कदली स्वरूप में पहुंचीं मां नंदा-सुनंदा को नगर भ्रमण कराते नगरवासी।

माता नयना की नगरी में कदली स्वरूप में पहुंचीं मां नंदा-सुनंदा को नगर भ्रमण कराते नगरवासी।

शोभायात्रा का अवलोकन करते विदेशी सैलानी।

नैनीताल, 15 सितंबर 2018। एक वर्ष के लंबे अंतराल और एक-एक दिन गिनने के बाद आखिर वह दिव्य पल आ गए जब राज्य की कुलदेवी मां नंदा और सुनंदा पवित्र कदली दलों (केले के वृक्षों) के स्वरूप में माता नयना की नगरी में लौट आईं। अब वह अगले पांच दिनों तक एक बेटी के रूप में अपने मायके में रहेंगी। उनके आगमन पर आज नगर के सभी श्रद्धालु हर्षित हो उठे। उनके नगर भ्रमण में सैकड़ों लोगों, खासकर महिलाओं की भीड़ पारंपरिक परिधानों में उमड़ी, जबकि बड़ी संख्या में नगर वासियों ने सड़क किनारे और घरों की बुर्जों से भी उनके दर्शन करते हुऐ उनका अक्षत अर्पित करते हुए स्वागत किया।
शुक्रवार को पवित्र कदली वृक्षों के रूप में मां नंदा-सुनंदा का निकटवर्ती जलालगांव से आकर सबसे पहले सूखाताल और फिर तल्लीताल स्थित मां वैष्णो देवी मंदिर में स्वागत हुआ। वैष्णवी देवी मंदिर समिति के सदस्यों के द्वारा बीते कई वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत कदली वृक्षों की पूजा अर्चना की गई, व श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया। यहां से शक्ति स्वरूपा मां नंदा-सुनंदा कदली वृक्षों के रूप में नगर भ्रमण पर निकलीं। तल्लीताल धर्मशाला और बाजार से पारंपरिक रंग्वाली लहंगे-पिछौड़े में सजीं नगर की महिलाओं और सरस्वती शिशु मंदिर, बालिका विद्या मंदिर, एशडेल, निशांत, नैनी पब्लिक स्कूल व जीजीआईसी आदि अनेक स्कूलों की छात्राएं कुमाऊं के परंपरागत घाघरा व रंग्वाली पिछौड़ा के वस्त्रों में सजकर और कई माता नंदा-सुनंदा के रूप में आत्मसात होकर कलश यात्रा में ‘जै मां नंदा सुनंदा तेरी जै जैकारा’ व ‘जै भगोती नंदा’ के गगनभेदी नारे लगाते हुए एवं महिलाएं भजन मंडलियों में भजन-कीर्तन करते हुए साथ चल रही थीं। सबसे आगे शांति का प्रतीक धवल श्वेत तो सबसे पीछे विजय के लिए क्रांति का संदेश देता लाल ध्वज पारंपरिक रूप में चल रहा था। माता नगर भ्रमण करते हुऐ माल रोड से नैनी सरोवर का चक्कर लगाते हुए मल्लीताल राम लीला मैदान और यहां से मां के आकर्षक पर्वताकार मूर्ति स्वरूप में परिवर्तित होने के लिए नयना देवी मंदिर के समीप पहुंचीं। शोभायात्रा में श्रीराम सेवक सभा के पदाधिकारी एवं नगर के बड़ी संख्या में श्रद्धालु व गणमान्य लोग शामिल रहे। शोभायात्रा में सभा के उपाध्यक्ष अनूप शाही, महासचिव राजेंद्र लाल साह, कमलेश ढोंढियाल, कैलाश जोशी, भीम सिंह कार्की, राजेंद्र बजेठा सहित विक्की राठौर, भास्कर महतोलिया व भुवन बिष्ट आदि प्रमुखता से मौजूद रहे। विदेशी सैलानी भी शोभायात्रा का आनंद लेते देखे गये। शोभायात्रा के उपरांत कदली दलों को सेवा समिति भवन में रख दिया गया है, जहां रविवार को इनसे माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियों को निर्माण किया जाएगा, और सोमवार की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में मूर्तियों को नयना देवी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा जाएगा।

यह भी पढ़ें : सरोवरनगरी में नंदा-सुनंदा का 115वां महोत्सव अपेक्षाकृत कम उत्साह के साथ प्रारंभ

-परम्पराओं के साथ प्रकृति व पर्यावरण के लिए संवेदशील होने, पेड़ पौधों का संरक्षण करने का विधायक ने किया आह्वान

श्रीनंदा देवी महोत्सव का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ करते विधायक, डीएम आदि।

नैनीताल, 14 सितंबर 2018। सरोवर नगरी नैनीताल का परम्परागत माता नंदा-सुनंदा का 115वें महोत्सव शुक्रवार को वैदिक मंत्रों एवं धार्मिक आनुष्ठानों के बीच प्रारंभ हो गया। स्थानीय विधायक संजीव आर्य तथा डीएम विनोद कुमार सुमन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर महोत्सव का औपचारिक शुभारम्भ किया। इस दौरान रंगारंग धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए तथा अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरा कर रहे आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के चुनिंदा पदाधिकारियों के दल को अतिथियों के द्वारा महोत्सव के परंपरागत लाल व सफेद रंग के ध्वज प्रदान कर कदली वृक्ष लाने हेतु विदा किया गया। साथ ही कदली वृक्षों के स्थान पर रोपने के लिए पूजा-अर्चना के साथ पौधारोपण हेतु 21 पौधे भी पिछले कुछ वर्षों से शुरू हुई पर्यावरणीय परंपरा के तहत विदा किये गये हैं। अलबत्ता, महोत्सव का मेले वाला हिस्सा प्रशासन द्वारा किये जाने के बीच महोत्सव में आयोजकों के साथ ही आम जनता में भी अपेक्षाकृत कम उत्साह देखा जा रहा है।
कार्यक्रमों की शुरुआत सभा से जुड़ी बालिकाओं के द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना से हुई, जिसके बाद छात्राओं के द्वारा माता नंदादेवी की स्तुति पर आधारित वंदना व अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए विधायक श्री आर्य ने कहा कि माता नंदा-सुनंदा सभी की मनोकामानाऐं पूरी करें तथा देश-प्रदेश व समाज में सुख, समृद्धि बनी रहे यही हमारी माता नंदा से प्रार्थना है। उन्होंने इस महोत्सव को 15 वर्ष पूर्व 1903 में शुरू करने वाले एवं इसकी परंपरा को बीच में दो विश्व युद्धों के बावजूद अनवरत जारी रखने में योगदान देने वाले आयोजक संस्था से जुड़े सहित सभी लोगों को आभार भी जताया। कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है। यहां की संस्कृति व परम्परायें समृद्ध हैं, इन्हें संरक्षित रखने की आवश्यकता है। हमें अपनी परम्पराओं का सम्वाहक बनना होगा, साथ ही प्रकृति व पर्यावरण के लिए संवेदशील होकर पेड़ पौधों का भी संरक्षण करना होगा। वहीं डीएम श्री सुमन ने कहा कि प्रदेश सरकार लोकगीत, लोकसंगीत तथा लोक संस्कृति पर आधारित कार्यक्रम विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। कहा कि आधुनिकता एंव विज्ञान को अपनाना अच्छी बात है, परंतु हमें अपनी संस्कृतियों को भी नहीं छोड़ना चाहिए। मेले को शांतिपूर्ण सम्पन्न कराने हेतु प्रशासन पूरी तरीके से कटिबद्व है। धार्मिक आयोजन आचार्य भगवती प्रसाद जोशी ने पूरे कराये। पूर्व अध्यक्ष मुकेश जोशी ने सभा की 100 वर्षों एवं आयोजन की 115 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा तथा गत वर्ष तक महोत्सव के आयोजन में शुभारंभ से लेकर मूर्ति निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाने वाले सभा के संरक्षक स्वर्गीय गंगा प्रसाद साह का भावपूर्ण स्मरण किया। इस अवसर पर आईजी पूरन सिंह रावत, एसएसपी जन्मेजय खण्डूरी, सीडीओ विनीत कुमार, मेला अधिकारी-उपजिलाधिकारी अभिषेक रूहेला, श्रीराम सेवक सभा के अध्यक्ष मनोज शाह, उपाध्यक्ष अनूप शाही, महासचिव राजेंद्र लाल साह, पूर्व अध्यक्ष गिरीश जोशी, मुकेश जोशी, पूर्व विधायक सरिता आर्या, डा. नारायण सिंह जंतवाल, पूर्व जिला जज उत्तम नबियाल, भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज जोशी, शांति मेहरा, अरविंद पडियार, डा. सरस्वती खेतवाल, मुन्नी तिवाड़ी, मंजू कोटलिया, कमलेश ढोंढियाल, जगदीश बवाड़ी के साथ ही बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। संचालन नवीन पाण्डेय ने किया।

अग्रिम पंक्ति में बैठने को लेकर रही अव्यवस्था, पीछे सीटें रहीं खाली

नैनीताल। महोत्सव के शुभारंभ के मौके पर नये आयोजक मंडल के नौसिखियेपन के कारण कुछ अव्यवस्थाएं भी देखने को मिलीं। आयोजक संस्था के लोग अतिथियों के बजाय स्वयं अग्रिम पंक्ति पर सीमित क्षमता के सोफों पर पसरे रहे। ऐसे में आईजी के कुछ देर में आने और इस दौरान अन्यत्र गये डीएम के स्थान पर बैठने के बाद डीएम को आईजी व एसएसपी के बीच सोफे की बीच की मुंडेर पर बैठना पड़ा। वहीं पीछे की सीटें कमोबेश पहली बार खाली भी रहीं, और श्रद्धालुओं में भी अपेक्षाकृत जोश की कमी देखी गयी। महोत्सव के शुभारंभ के लिए पिछली बारों की तरह पूर्व विधायकों को मंच पर आमंत्रित नहीं किया गया, इसके बाद पूर्व विधायक सरिता आर्य शुभारंभ के तत्काल बाद ही देहरादून जाने की बात कहते हुए निकल गयीं। आयोजन में कुमाऊं आयुक्त को भी आमंत्रित किया गया था, किंतु वे भी आखिरी क्षणों में हल्द्वानी जाने की बात कह कार्यक्रम में नहीं आये।

राष्ट्रीय सहारा, 12 सितंबर 2018

यह भी पढ़ें : 12 सितंबर से ही शुरू हो जाएंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम, महोत्सव में झोड़ा-चांचरी भी होंगे

नैनीताल, 12 सितंबर 2018। सरोवरनगरी में अपने 115वें वर्ष में नंदा देवी महोत्सव आयोजित करने जा रहे और स्वयं संस्था की 100वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम 12 सितंबर को वर्षगांठ के मौके से ही प्रारंभ हो जाएंगे, एवं इस दौरान संस्था अपने प्रमुख धार्मिक व सामाजिक संस्था के स्वरूप के अनुरूप अन्य धर्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही संस्था कुमाऊं की प्राचीन लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय व ग्रामीण महिलाओं के द्वारा पहली बार नयना देवी मंदिर में झोड़ा व चांचरी नृत्य करने का भी अनुरोध कर रही है।

मंगलवार को सभा के नवनिर्मित भवन में आयोजित महोत्सव की पहली पत्रकार वार्ता में संस्था के पदाधिकारियों ने यह जानकारी दी। साथ ही बताया कि 12 सितंबर 1918 को स्थापित संस्था की बुधवार को 100 वर्ष पूरे होने के मौके से ही सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रारंभ हो जाएंगे, जोकि 18 सितंबर तक चलेंगे। अलबत्ता संस्था की स्मारिका पिछले वर्ष नहीं छप पाने के बाद इस वर्ष भी महोत्सव के दौरान नहीं, अलबत्ता आगे विजयादशमी के मौके पर विमोचन किया जाएगा। इस मौके पर पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था का नवनिर्मित भवन जरूरतमंदों के शादी-विवाह जैसे कार्यों तथा एक दिवसीय संगोष्ठियों आदि के लिए भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस दौरान महोत्सव के कलेंडरों का विमोचन भी किया गया। पत्रकार वार्ता में संस्था के अध्यक्ष मनोज साह, उपाध्यक्ष अनूप शाही, महासचिव राजेंद्र लाल साह, उप सचिव डा. मोहित रौतेला सहित विमल चौधरी, मुकेश जोशी, कृष्ण कुमार साह, प्रदीप बिष्ट, गिरीश भट्ट, गोधन सिंह व दीप जोशी आदि भी मौजूद रहे।

मां ‘नयना की नगरी’ में होती है राज राजेश्वरी मां नंदा की ‘लोक जात’

नंदा-सुनंदा पर फूलों की वर्षा

-यहां राज परिवार का नहीं होता आयोजन में दखल, जनता ने ही की शुरुआत, जनता ही बढ़-चढ़ कर करती है प्रतिभाग
नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड में प्रसिद्ध कुमाऊं-गढ़वाल को एक सूत्र में पिरोने वाली आदि शक्ति राज राजेश्वरी माता नंदा की ‘राज जात’ से इतर माता नयना की नगरी नैनीताल में माता नंदा-सुनंदा की ‘लोक जात’ का आयोजन किया जाता है। अमूमन 12 वर्षों के अंतराल में आयोजित होने वाली ‘राज जात’ के इतर सरोवरनगरी में पिछले 115 वर्षों से हर वर्ष बीच में प्रथम व द्वितीय दो विश्व युद्धों की विभीषिका के बावजूद बिना किसी व्यवधान के न केवल यह महोत्सव अनवरत जारी है, वरन हर वर्ष समृद्ध भी होता जा रहा है। बिना राज परिवार के जनता द्वारा शुरू किए गए और जनता की ही सक्रिय भागेदारी से आयोजित होने वाले इस महोत्सव को मां नंदा की ‘लोक जात’ ही अधिक कहा जा सकता है।

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उल्लेखनीय है कि नैनीताल में कुमाऊं-गढ़वाल को एक सूत्र में पिरोने वाली मां नंदा के महोत्सव की सरोवरनगरी में शुरुआत राज परिवार के बजाय नगर के संस्थापकों में शुमार मोती राम शाह ने 1903 में अल्मोड़ा से लाकर की थी। तभी से नगर वासियों की इस महोत्सव और माता नंदा-सुनंदा के प्रति ऐसी अटूट आस्था है कि वह और खासकर महिलाएं वर्ष भर इस महोत्सव का इंतजार करते हैं। देश ही नहीं विदेशों में रहने वाले नगर के प्रवासी भी वर्ष में कम से कम इस मौके पर अवश्य घर लौटते हैं।
कुमाऊं में नंदा महोत्सवों के आयोजन के बारे में कहा जाता है कि पहले यह आयोजन चंद वंशीय राजाओं की अल्मोड़ा शाखा द्वारा होता था। किंतु 1938 में इस वंश के अंतिम राजा आनंद चंद के कोई पुत्र न होने के कारण तब से यह आयोजन इस वंश की काशीपुर शाखा द्वारा आयोजित किया जाता है। वर्तमान में उनका प्रतिनिधित्व नैनीताल के पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा करते हैं। कहते हैं कि नैनीताल की स्थापना के बाद वर्तमान बोट हाउस क्लब के पास नयना देवी के मूल मंदिर की स्थापना की गई थी। 1880 में यह मंदिर नगर के महाविनाशकारी भूस्खलन की चपेट में आकर दब गया। इसके बाद इसे वर्तमान स्थान पर स्थापित किया गया। यहां मूर्ति को स्थापित करने वाले मोती राम शाह ने ही 1903 में अल्मोड़ा से लाकर नैनीताल में नंदा महोत्सव की शुरुआत की। शुरुआत में यह आयोजन नयना देवी मंदिर समिति द्वारा आयोजित होता था। आगे मोती राम शाह के पुत्र अमर नाथ शाह व पौत्र उदय नाथ शाह ने भी यह आयोजन कराया, और आखिर उदय नाथ शाह ने 1926 से यह आयोजन नगर की सबसे पुरानी 1918 में स्थापित धार्मिक सामाजिक संस्था श्रीराम सेवक सभा को दे दिया, जो तभी से लगातार दो विश्व युद्धों के दौरान भी बिना रुके 115 वर्षों से सफलता से और नए आयाम स्थापित करते हुए यह आयोजन कर रही है। यहीं से प्रेरणा लेकर अब कुमाऊं के कई अन्य स्थानों पर भी नंदा महोत्सव के आयोजन होने लगे हैं। इसलिये नैनीताल को नंदा महोत्सवों का प्रणेता भी कहा जाता है। इधर विगत वर्ष 2015 से महोत्सव के तहत फ्लैट्स मैदान में होने वाली मेले की जिम्मेदारी नैनीताल नगर पालिका को दे दी गयी है।

उत्तराखंड की ‘कुलदेवी’ हैं, ‘आराध्य देवी’ हैं अथवा ‘विजय देवी’ हैं राज राजेश्वरी मां नंदा ?

एक शताब्दी से पुराना और अपने 115वें वर्ष में प्रवेश कर रहा सरोवरनगरी का नंदा महोत्सव आज अपने चरम पर है। पिछली शताब्दी और इधर तेजी से आ रहे सांस्कृतिक शून्यता की ओर जाते दौर में भी यह महोत्सव न केवल अपनी पहचान कायम रखने में सफल रहा है, वरन इसने सर्वधर्म सम्भाव की मिशाल भी पेश की है। यह पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है, और उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं व गढ़वाल अंचलों को भी एकाकार करता है। यहीं से प्रेरणा लेकर कुमाऊं के विभिन्न अंचलों में फैले मां नंदा के इस महापर्व ने देश के साथ विदेश में भी अपनी पहचान स्थापित कर ली है।

इस मौके पर माता नंदा सुनंदा के बारे में फैले भ्रम और किंवदंतियों को जान लेना आवश्यक है। विद्वानों के इस बारे में अलग अलग मत हैं, लेकिन इतना तय है कि नंदादेवी, नंदगिरि व नंदाकोट की धरती देवभूमि को एक सूत्र में पिरोने वाली शक्तिस्वरूपा मां नंदा ही हैं। यहां सवाल उठता है कि नंदा महोत्सव के दौरान कदली वृक्ष से बनने वाली एक प्रतिमा तो मां नंदा की है, लेकिन दूसरी प्रतिमा किन की है। सुनंदा, सुनयना अथवा गौरा पार्वती की ?

एक दंतकथा के अनुसार माता नंदा को त्रेता युग में नंद यशोदा की पुत्री महामाया भी बताया जाता है जिसे दुष्ट कंश ने शिला पर पटक दिया था। लेकिन वह अष्टभुजाकार रूप में प्रकट हुई थीं। यही नंद पुत्री महामाया नवदुर्गा कलियुग में चंद वंशीय राजा के घर नंदा रूप में और उनके जन्म के कुछ समय बाद ही सुनंदा भी प्रकट हुईं। राज्यद्रोही शडयंत्रकारियों ने उन्हें कुटिल नीति अपनाकर भैंसे से कुचलवाने की कोशिश की। इस पर उन्होंने कदली यानी केले के वृक्ष की ओट में छिपने का प्रयास किया लेकिन इस बीच एक बकरे ने केले के पत्ते खाकर उन्हें भैंसे के सामने कर दिया। बाद में यही कन्याएं पुर्नजन्म लेते हुए नंदा-सुनंदा के रूप में अवतरित हुईं और राज्यद्रोहियों के विनाश का कारण बनीं। इसीलिए कहा जाता है कि नंदा-सुनंदा अब भी चंदवंशीय राजपरिवार के किसी सदस्य के शरीर में प्रकट होती हैं, और वह चंद वंशीय राजाओं की ‘कुल देवियाँ’ हैं । इस प्रकार दो प्रतिमाओं में एक नंदा और दूसरी सुनंदा हैं।
लेकिन कुछ अन्य विद्वान नंदा को राज्य की कुलदेवी की बजाय शक्तिस्वरूपा आदि शक्ति माता के रूप में मानते हैं। उनका कहना है कि चंदवंशीय राजाओं की पहली राजधानी चंपावत में माता नंदा का कोई मंदिर न होना सिद्ध करता है कि नंदा उनकी कुलदेवी नहीं, वरन विजय देवी व आध्यात्मिक दृष्टि से आराध्य देवी थीं। वह चंदवंशीय राजाओं की कुलदेवी माता ‘गौरा-पार्वती’ को मानते हैं। कहते हैं कि जिस प्रकार गढ़वाल नरेशों की राजगद्दी भगवान बदरीनाथ को समर्पित थी, उसी प्रकार कुमाऊं नरेश चंदों की राजगद्दी भगवान शिव को समर्पित थी। इसलिए चंदवंशीय नरेशों को ‘गिरिराज चक्र चूढ़ामणि’ की उपाधि भी दी गई थी। इस प्रकार गौरा उनकी कुलदेवी थीं, और उन्होंने अपने मंदिरों में बाद में जीतकर लाई गई नंदा और गौरा को राजमंदिर में साथ-साथ स्थापित किया। इस प्रकार दो मूर्तियों में से एक मूर्ति हिमालय क्षेत्र की आराध्य देवी पर्वत पुत्री नंदा और दूसरी ‘गौरा-पार्वती’ की हैं। यही उनकी मूर्तियों को प्रतिमाओं को पर्वताकार में बनाने का कारण भी है।
वहीं एक अन्य किंवदंती के अनुसार आदि शक्ति माता नंदा का जन्म गढ़वाल की सीमा पर बागेश्वर जिले के ऊंचे नंदगिरि पर्वत पर हुआ था। गढ़वाल के राजा उन्हें अपनी कुलदेवी के रूप में ले आऐ थे, और अपने गढ़ में स्थापित कर लिया था। इधर कुमाऊं में उन दिनों चंदवंशीय राजाओं का राज्य था। 1563 में चंद वंश की राजधानी चंपावत से अल्मोड़ा स्थानांतरित हुई। इस दौरान 1673 में कुमाऊं के चंद नरेश बाज बहादुर चंद (1638 से 1678) ने गढ़वाल के जूनागढ़ किले पर विजय प्राप्त की और वह विजयस्वरूप माता नंदा की मूर्ति को डोले के साथ कुमाऊं ले आए। कहा जाता है कि इस बीच रास्ते में विजयी राजा का काफिला गरुड़ के पास स्थित डंगोली नाम के गांव में रात्रि विश्राम के लिए रुका। दूसरी सुबह जब राजा का काफिला अल्मोड़ा के लिए चलने लगा तो मां नंदा की मूर्ति आश्चर्यजनक रूप से दो भागों में विभक्त मिली। इस पर राजा ने मूर्ति के एक हिस्से को वहीं ‘कोट भ्रामरी” नामक स्थान पर स्थापित करवा दिया, जो अब ‘कोट की माई” के नाम से जानी जाती हैं। अल्मोड़ा लाई गई दूसरी मूर्ति को अल्मोड़ा के मल्ला महल स्थित देवालय (वर्तमान जिलाधिकारी कार्यालय) के बांऐ प्रकोष्ठ में स्थापित कर दिया गया। बाद में कुमाऊं कमिश्नर जीडब्ल्यू ट्रेल ने हिमालय यात्रा पर आंखों की रोशनी चले जाने के बाद मूर्तियों को अल्मोड़ा के वर्तमान नंदा देवी मंदिर में स्थापित कराया। बाद में यह मूर्ति चोरी चली गयी। जिसके बाद राजरानियों ने अपने आभूषणों से मौजूदा मूर्ति का निर्माण करवाया। चोरी गयी मूर्तियों के दिल्ली स्थित संग्रहालय में होने की बात भी कही जाती है। इस प्रकार विद्वानों के अनुसार माता नंदा चंद वंशीय राजाओं के साथ संपूर्ण उत्तराखंड की ‘विजय देवी’ हैं।

मजबूत कलापक्ष है पूरी तरह से ‘ईको फ्रेंडली’ और नंदा-सुनंदा की सुंदर मूर्तियों का राज

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-कभी चांदी से बनाई जाती थीं मूर्तियां, 50 के दशक में मूर्तियों के चेहरे की मुस्कुराहट आज भी की जाती है याद
-1903 से लगातार बीच में दो विश्व युद्धों के दौरान भी जारी रहते हुऐ 112 वर्षों से यहां जारी है महोत्सव
नैनीताल। नयना की नगरी नैनीताल में माता नंदा-सुनंदा की मूर्तियां पूरे प्रदेश में सबसे सुंदर तरीके से बनती हैं। इसका कारण यहां मूर्ति निर्माण में कलापक्ष पर अधिक ध्यान दिया जाना है। साथ ही यहां आयोजक संस्था हमेशा बेहतरी के लिये बदलावों को स्वीकार करने को तैयार रहती है। इसी कारण बीते कुछ वर्षों से नंदा-सुनंदा की मूर्तियां पूरी तरह ‘ईको-फ्रेडली’ यानी पर्यावरण-मित्र पदार्थों से तैयार की जाती हैं। जबकि यहां एक दौर में चांदी की मूर्तियां बनाए जाने का इतिहास भी रहा है।
नैनीताल मंे 1903 से लगातार बीच में दो विश्व युद्धों के दौरान भी जारी रहते हुऐ 115 वर्षों से महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इधर राज्य के अनेक नगरों में यह आयोजन होने लगे हैं, बावजूद नैनीताल की मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियां अल्मोड़ा सहित अन्य सभी नगरों से सुंदर होती हैं। 1950 से मूर्ति निर्माण से जुड़े गत वर्ष ही दिवंगत हुए आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के संरक्षक स्वर्गीय गंगा प्रसाद साह बताते थे कि पूर्व में यहां भी परंपरागत मूर्तियां ही बनती थीं। 1945 के दौरान से यहां मूर्ति निर्माण में बदलाव आने लगे। 1950 में शारदा संघ के संस्थापक कलाप्रेमी बाबू चंद्र लाल साह व कला मंदिर फोटो शॉप के स्वामी मूलचंद की जुगलबंदी के बाद यहां सुंदर मूर्तियां बनाई जाने लगीं। 1955-56 तक नंदा देवी की मूर्तियों का निर्माण चांदी से होता था। लेकिन बाद में वापस परंपरागत परंतु अधिक सुंदर मूर्तियां बनने लगीं। ठाकुर नवाब साह, रमेश चन्द्र चौधरी आदि ने भी मूर्ति निर्माण में योगदान दिया। वरिष्ठ कलाकार चंद्र लाल साह 1971 तक मूर्तियों का निर्माण करते रहे, और इस दौरान माता के चेहरे पर दिखने वाली मुस्कुराहट को लोग अब भी याद करते हैं। बाद में प्रसिद्ध चित्रकार विश्वम्भर नाथ साह ‘सखा दाज्यू’ जैसे स्थानीय कलाकारों ने मूर्तियों को सजीव रूप देकर व लगातार सुधार किया, जिसके परिणाम स्वरूप नैनीताल की नंदा-सुनंदा की मूर्तियां, महाराष्ट्र के गणपति बप्पा जैसी ही जीवंत व सुंदर बनती हैं। खास बात यह भी कि मूर्तियों के निर्माण में पूरी तरह कदली वृक्ष के तने, पाती, कपड़ा, रुई व प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग किया जाता है। बीते करीब एक दशक से श्री साह की स्वीकृति पर थर्मोकोल का सीमित प्रयोग भी बंद कर दिया गया है, जिसके बाद महोत्सव पूरी तरह ‘ईको फ्रेंडली” भी हो गया है। श्री साह बताते हैं-हर वर्ष मूर्तियां समान आकार की बनें इस हेतु भी खास ध्यान रखा जाता है। गत वर्षों की मूर्ति के कपड़े को देखकर भी मूर्ति बनाई जाती है। इधर बेहतर स्वरूप के लिये माता के चेहरे में कपड़े के भीतर परिवर्तन किया गया है। साथ ही माता के चेहरे को मुस्कुराहट लिए हुए बनाने की कोशिश की जाती है, इससे माता की सुंदरता देखते ही बनती है।

हर वर्ष नयी पहलों से लगातार समृद्ध होता रहा है नंदा महोत्सव

विनोद गढ़िया। कहते हैं कि प्रगति तभी सही मायनों में प्रगति होती है, जब वह सतत भी हो। कुछ इसी कसौटी पर सरोवरनगरी का ऐतिहासिक नंदा महोत्सव सांस्कृतिक विरासतों को सहेजने के साथ ही साल दर साल नए पायदानों को आत्मसात करता हुआ लगातार समृद्ध होता चला जा रहा है। माता नंदा के इस महोत्सव में हर वर्ष कुछ न कुछ नया अवश्य होता है। चाले मेले का सीसीटीवी कैमरों से सुरक्षा प्रबंधों के साथ ही महोत्सव का सीधा प्रसारण कुमाऊं अंचल के सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक किये जाने की बात हो अथवा नैनी झील को धार्मिक सरोकारों से जोड़ते हुए झील की पंचआरती करने के साथ ही नगर वासियों से अपने घरों से भी सरोवर की आरती करने जैसी अपीलें भी आयोजक संस्था द्वारा की जाती रही हैं।

मूर्तियों के निर्माण के लिए दो कदली वृक्ष काटकर प्रयोग किये जाते हैं तो इनके बदले 21 फलदार वृक्ष रोपने की परंपरा वर्ष 1998 से पर्यावरण मित्र यशपाल रावत के सुझाव पर चल रही है। वर्ष 2005 से मेले में फोल्डर स्वरूप से स्मारिका छपनी प्रारंभ हुई थी, जिसका आकार वर्ष 2014 में 400 पृष्ठों तक फैल गया है। वर्ष 2007 से तल्लीताल दर्शन घर पार्क से मां नंदा के साथ नैनी सरोवर की आरती की एक नई परंपरा भी जोड़ी गई है, जो प्रकृति से मेले के जुड़ाव का एक और आयाम है। वर्ष 2011 से मेले की अपनी वेबसाइट बनाकर देश दुनिया तक सीधी पहुंच भी बनाने का प्रयास हुआ। वर्ष 2012 में पशु बलि की परंपरा को हतोत्साहित करते हुए इसकी जगह नारियल चढ़ाने को बढ़ावा दिया जाने लगा। 2014 में आयोजक संस्था की अपनी वेबसाइट के जरिए महोत्सव का प्रचार-प्रसार करने की कोशिश शुरू हुई। साथ ही केवल मेले के लिए ही नहीं नगर के मल्लीताल क्षेत्र में करीब 2.25 लाख रुपए की लागत से 16 सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए, और सुरक्षा के मद्देनजर मेले के दुकानदारों के पहचान पत्र लेकर उनका पुलिस से सत्यापन भी कराया गया, जो आयोजक संस्था के सामाजिक सरोकारों से और अधिक गहराई से जुड़ने का भी बड़ा उदाहरण है। मेले के दौरान दूरदराज से आने वाले ग्रामीणों के लिए मंदिर परिसर के साथ ही राम सेवक सभा प्रांगण में भी हर रोज निःशुल्क भंडारे की व्यवस्था भी की जाने लगी। इसके साथ ही मेले में 40 स्टॉलों में सरकारी विभागों की विकास प्रदर्शनी व 20 स्टॉलों में स्वयं सेवी संस्थाओं के उत्पादों का प्रदर्शन भी करने का प्रबंध किया गया। फेसबुक, गूगल प्लस व ट्विटर सरीखी सोशल साइटों के जरिये भी मेला स्थानीय लोक कला के विविध आयामों, लोक गीतों, नृत्यों, संगीत की समृद्ध परंपरा का संवाहक बनने के साथ संरक्षण व विकास में भी योगदान दे रहा है। इधर वर्ष 2015 से महोत्सव के तहत फ्लैट्स मैदान में होने वाली मेले की जिम्मेदारी नैनीताल नगर पालिका को दे दी गयी है।

बागेश्वर जिले के पोथिंग गांव में भी होता है माता नंदा का प्रसिद्ध मेला

उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में भाद्रपद की नवरात्रों में हिमालय पुत्री माता नंदा की विशेष पूजा की जाती है। अल्मोड़ा एवं नैनीताल के साथ ही पूरा पहाड़ इस नवरात्र में अपनी आराध्य देवी माता नंदा भगवती की पूजा अर्चना में व्यस्त रहता है। इन्हीं में बागेश्वर जनपद स्थित पोथिंग ग्राम के मध्य माता नंदा भगवती का भव्य मंदिर है। जहां हर वर्ष भाद्रपद माह के नवरात्रों में माता नंदा की विशेष पूजा की जाती है। यह पूजा पूरे 8 दिन तक चलती है। प्रतिपदा से लेकर सप्तमी तक गांव में स्थित माता की तिबारी में रात भर जागरण होता है। रात के विभिन्न प्रहरों में माता की विशेष आरती होती हैं। लोग पारंपरिक झोड़ा-चांचरी गाकर अपना मनोरंजन करते हैं। यहां पर गढ़वाल और कुमाऊं की संस्कृति का भी संगम देखने को मिलता है। माता के जागर गाने के लिए गढ़वाल से जगरियों का दल आमंत्रित किया जाता है। सप्तमी के दिन हरेला पर्व पर कपकोट के उत्तरौड़ा गांव से लाये गए कदली वृक्ष को काटकर मुख्य मंदिर में माता के भंडारे के साथ ले जाया जाता है। ढोल-नगाड़ों, माता के निशानों, लोगों के कंधों पर बैठे देव डांगरों और सैकड़ों भक्तों की लंबी श्रृंखला दर्शनीय होती है। इस रात्रि के लिए दूर-दूर से भक्त और मेलार्थी यहां पहुंचते हैं। रात्रि की चांचरी बड़ी ही जोशीली और अपने आप में देखने लायक होती है। दर्जनों हुड़कों की थाप पर चांचरी गाते लोगों से पूरी रात गुंजायमान रहती है। रात्रि 9-10 बजे से प्रारम्भ हुई चांचरी सुबह के 4-5 बजे तक चलती है, उसके बाद मेलार्थी स्नान इत्यादि करके नंदा अष्टमी पर होने वाली पूजा के लिए मुख्य मंदिर की ओर चल पड़ते हैं।
नंदा अष्टमी के दिन पोथिंग में हजारों भक्त माता के दर्शनार्थ पहुँचते हैं। लोग मंदिर में दान-पाठ इत्यादि कर माता से मनौती मांगते हैं, और मनौती पूरी होने पर माता को घंटियां, भकोरे, झांझर, ढोल-नगाड़े व निशान इत्यादि चढ़ाते हैं। लोग दिन भर पारम्परिक लोकनृत्य गीत झोड़ा-चांचरी गाकर अपना मनोरंजन करते हैं। इस दिन यहाँ एक बड़े मेले का आयोजन भी होता है जिसे लोग ‘पोथिंग का मेला के नाम से जानते हैं। इस दौरान स्थानीय व्यापारियों के अलावा यहां दूर-दूर से भी व्यापारी आकर अपनी दुकानें सजाते हैं।

इस वर्ष होगी आठूं पूजा

पोथिंग के नंदा मंदिर में इस वर्ष आठूं पूजा 8 दिनों की पूजा है। इस दौरान प्रतिपदा से लेकर षष्टी तक गांव में स्थित माता की तिबारी में रात भर जागरण होता है। सप्तमी के दिन मंदिरमें कदली वृक्ष को काटकर लाया जाता है जिसके तनों का उपयोग माता नंदा भगवती की मूर्ति के निर्माण में किया जाता है। इस रात्रि को बड़ा जनसमुदाय उमड़ पड़ता है। यहां के मंदिर में 400 से 500 ग्राम वजनी पूड़ियों का भोग लगाने की प्रथा है, जो हजारों की संख्या में बनाई जाती हैं और यही प्रसाद स्वरूप भक्तों की प्रदान की जाती है। प्रसाद वितरण के साथ 8 दिन तक चलने वाले ‘आठूं’ पूजा का समापन होता है। पूजा का आयोजन पोथिंग ग्राम के वाशिंदों के द्वारा आपसी सहयोग से किया जाता है। इस पूजा का आयोजन सर्वप्रथम गढ़िया परिवार के पूर्वज भीम बलाव सिंह गढ़िया, हरमल सिंह गढ़िया, कल्याण सिंह एवं जैमन सिंह गढ़िया के परिवार द्वारा सैकड़ों वर्ष पूर्व किया गया। दानू और कन्याल परिवार के लोग मंदिर के धामी हैं। पूर्वजों द्वारा नियुक्त अलग-अलग परिवार के लोग आज भी निःस्वार्थ भाव से माता की सेवा कर रहे हैं। माता भगवती के मंदिर तक पहुंचने के लिए बागेश्वर जनपद मुख्यालय से कपकोट और वहां से पोथिंग गांव तक करीब 28 किमी की दूरी तय करके आना होता है।

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श्री नंदादेवी राजजात से कुमाऊं गढ़वाल दोनों के राज परिवार संतुष्ट नहीं

नवीन जोशी, नैनीताल। माता नंदा देवी उत्तराखंड राज्य के दोनों अंचलों-कुमाऊं व गढ़वाल में समान रूप से पूज्य एवं दोनों अंचलों को सांस्कृतिक एकता के सूत्र में पिरोने वाली देवी हैं, और उनकी कमोबेश हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाला और विश्व का अनूठा हिमालयी सचल महाकुंभ कही जाने वाली श्री नंदा देवी राजजात यात्रा मूलतः यहां के दोनों राजाओं की यात्रा है। अंग्रेजी शासनकाल में अंग्रेजों के साथ ही आजादी के बाद यूपी के दौर में यूपी सरकार ने कभी इसके आयोजन में हस्तक्षेप नहीं किया, और राजाओं के वंशजों को ही यात्रा कराने दी। लेकिन उत्तराखंड बनने के बाद पहली बार और पिछले वर्ष आई आपदा के कारण टलने के बाद 14 वर्षों के बाद हो रही यात्रा को प्रदेश सरकार ने अपने हाथ में लिया है। यात्रा पर सरकार करीब एक करोड़ रुपए खर्च कर रही है, लेकिन सरकार द्वारा इसके आयोजन को हाथ में लिए जाने से यात्रा राजाओं के वंशजों और उनकी प्रजा तथा पारंपरिक व धार्मिक स्वरूप की कम सरकारी स्वरूप की और सरकार द्वारा खर्ची जा रही करीब एक करोड़ रुपए को खपाने-कमाने की जुगत अधिक नजर आने लगी है। इससे दोनों राजाओं के वंशज भी संतुष्ट नहीं हैं।
उल्लेखनीय है कि माता नंदा कुमाऊं के चंदवंशीय शासकों की कुल देवी कही जाती हैं, जबकि गढ़वाल के राजा सम्वत् 745 में राजा कनकपाल के जमाने से माता नंदा की बेटी के स्वरूप में मायके से ससुराल भेजने के स्वरूप में इस यात्रा का आयोजन करते हैं, और इसीलिए इस यात्रा को नंदा राज जात यानी राजा की यात्रा और विश्व की सबसे पुरानी यात्रा कहा जाता है। 280 किलोमीटर लंबी इस यात्रा के दौरान 5333 मीटर ऊंची ज्यूंरागली चोटी को भी पार किया जाता है, लिहाजा यह कैलास मानसरोवर यात्रा की तरह दुनिया की सबसे कठिनतम यात्रा भी होती है। इस वर्ष यह यात्रा प्रदेश सरकार की अगुवाई में 18 अगस्त से 6 सितम्बर के मध्य आयोजित होने जा रही है। इधर नैनीताल में यात्रा की तैयारियों के लिए आयोजित हुई बैठक के बीच जहां कुमाऊं की राजजात समिति के अध्यक्ष शिरीष पांडे ने कहा भी कि यह यात्रा मूलतः कुमाऊं व गढ़वाल के राजाओं की यात्रा हैं, लिहाजा उन्हीं के सानिध्य में यात्रा आयोजित की जानी चाहिए। साफ था कि वह एक तरह से कुमाऊं के राजा पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा का पक्ष ही रख रहे थे। उनका कहना था कि अंग्रेजी शासनकाल में अंग्रेजों के साथ ही आजादी के बाद यूपी के दौर में सरकार ने कभी इसके आयोजन में हस्तक्षेप नहीं किया। जबकि उत्तराखंड सरकार द्वारा इसके आयोजन में आगे आने से इसके स्वरूप पर फर्क पड़ सकता है। हालांकि राजजात यात्रा की अनुश्रवण समिति समिति के अध्यक्ष विधानसभा के उपाध्यक्ष डा. अनुसूइया प्रसाद मैखुरी अपने संबोधन में कहते रहे कि यात्रा कुमाऊं व गढ़वाल दोनों राजाओं के वंशजों निर्देशन में ही हो रही है, और सरकार की भूमिका केवल सहयोग करने की है लेकिन बैठक में अधिकांश लोगों का ध्यान सरकार द्वारा खर्च किए जाने वाले एक करोड़ रुपयों से ज्यादा से ज्यादा हासिल कर लेने पर ही दिखा। अन्य लोग मान रहे थे जहां पैंसा आ जाता है, वहां धार्मिक भावना व श्रद्धा भी प्रभावित हो जाती है। पूछे जाने पर गढ़वाल के राजा एवं गढ़वाल की राजजात यात्रा समिति के अध्यक्ष कुंवर डा. राकेश सिहं ने बैठक में उपस्थित विधायकों की ओर इशारा करते हुए कहा, अब तो ये ही राजा हैं। यानी साफ था कि वे यात्रा की तैयारियों एवं राजाओं को मिली भूमिका से खुश नहीं हैं। वहीं कुमाऊं के चंद वंशीय राजाओं के वंशज पूर्व सांसद बाबा ने भी साफ तौर पर कहा, जितना हो रहा है व काफी नहीं है। सरकार से और सुविधाओं की दरकार है। ऐसे में लगता है कि प्रदेश सरकार ने यात्रा को धार्मिक व पारंपरिक स्वरूप से बाहर निकालकर इसे सरकार में शामिल व अन्य चुनिंदा लोगों के लिए अपनी ओर से ‘आर्थिक आर्शीवाद’ प्रदान करने का माध्यम बना लिया है। अब लोग यात्रा से अब तक के स्वतः स्फूर्त धार्मिक भावना व श्रद्धा के जरिए अपना ‘परलोक’ सुधारने के बजाए तात्कालिक तौर पर ‘इहलोक’ सुधारने के प्रति ही प्रेरित होते जा रहे हैं।

कुमाऊं का राजजात में प्रतिनिधित्व
नैनीताल। श्री नंदा देवी राजजात में इस वर्ष कुमाऊं मंडल का प्रतिनिधित्व कमोबेश सीमित रहा है। इससे पूर्व वर्ष 2000 की यात्रा में भी कुमाऊं की नंदा डोलियों व छंतोलियों ने नंदा देवी राजजात में प्रतिनिधित्व किया था। कुमाऊं मंडल की आयोजन समिति के अध्यक्ष शिरीष पांडे ने बताया कि कुमाऊं को 1925 के बाद लंबे समय के बाद 1987 की श्री नंदा देवी राजजात में में शामिल होने का न्यौता मिला था, लेकिन तब कुमाऊं की ओर से अपेक्षित तैयारी नीं हो पाई थी। हालांकि उन्होंने बताया कि चंद वंशीय शासक बाज बहादुर चंद (1638-78 ई.) के दौर में भी कुमाऊं से राजजात यात्रा की छंतोली (नंदा का छत्र) भेेजे जाने के प्रमाण मिलते हैं।

नवीन जोशी

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